STT Global Data Centres India के IPO की तैयारी शुरू, $80-$100 करोड़ रह सकता है साइज

भारत में डेटा सेंटर की बढ़ती मांग के बीच STT ग्लोबल डेटा सेंटर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (STT GDC इंडिया) अपना IPO लाना चाहती है। कंपनी इसे अगले साल लॉन्च करने की तैयारी में है। यह बात मनीकंट्रोल को सूत्रों से पता चली है। कंपनी AI-रेडी को-लोकेशन डेटा सेंटर सर्विस देने वाली एक प्रमुख कंपनी है। यह ST टेलीमीडिया ग्लोबल डेटा सेंटर्स और टाटा कम्युनिकेशंस के बीच एक जॉइंट वेंचर है। ST टेलीमीडिया ग्लोबल डेटा सेंटर्स के पास 74 प्रतिशत और टाटा कम्युनिकेशंस के पास 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

सूत्रों का कहना है कि STT ग्लोबल डेटा सेंटर्स इंडिया अपने पब्लिक इश्यू के जरिए 80 करोड़ से 1 अरब डॉलर के बीच फंड जुटाने की योजना बना रही है। अभी के लिए इनवेस्टमेंट बैंक एक्सिस कैपिटल और सिटी को एडवाइजर रखा गया है। IPO पर काम शुरू हो गया है। बाद के स्टेज में और एडवाइजर्स को भी शामिल किया जा सकता है।

कितनी वैल्यूएशन पर नजर

कंपनी 6-7 अरब डॉलर के बीच वैल्यूएशन का लक्ष्य रख रही है। हालांकि अभी प्लानिंग शुरुआती दौर में है और कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। मार्केट की स्थितियों के आधार पर इश्यू का साइज और वैल्यूएशन बदल सकती है।

2030 तक कार्बन-न्यूट्रल डेटा सेंटर ऑपरेशंस का लक्ष्य

STT GDC इंडिया 2030 तक कार्बन-न्यूट्रल डेटा सेंटर ऑपरेशंस का लक्ष्य हासिल करना चाहती है। कंपनी के पास कई फॉर्च्यून 500 कंपनियों सहित अलग-अलग तरह के कस्टमर हैं। इस साल की शुरुआत में, STT GDC इंडिया ने चेन्नई में अपने चौथे डेटा सेंटर को लॉन्च करने की घोषणा की थी। डेटा सेंटर सेगमेंट में घरेलू लिस्टिंग की तैयारी करने वाली अन्य कंपनियों में सिफी इनफिनिट स्पेस लिमिटेड और योटा डेटा सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 24100 के पार Gift Nifty, आज Sensex की एक्सपायरी को V-Mart और Airtel समेत इन पर फोकस

Stocks to Watch: वैश्विक बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच आज गिफ्ट निफ्टी से घरेलू मार्केट में मजबूत शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 142.00 प्वाइंट्स यानी 0.59% की बढ़त के साथ 24,186.00 पर है। चूंकि आज जुलाई सीरीज में सेंसेक्स की पहली वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 01 जुलाई को सेंसेक्स (Sensex) 443.97 प्वाइंट्स यानी 0.58% की बढ़त के साथ 76,922.64 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 140.10 प्वाइंट्स यानी 0.59% के उछाल के साथ 24,005.85 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: इन स्टॉक्स पर रहेगी नजर

तिमाही बिजनेस अपडेट

Punjab & Sind Bank Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर पंजाब एंड सिंध बैंक का टोटस बिजनेस 15.33% बढ़कर ₹2.67 लाख करोड़, टोटल डिपॉजिट्स 12.16% बढ़कर ₹1.47 लाख करोड़ और ग्रास एडवांसेज 19.5% बढ़कर ₹1.19 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान बैंक का सीएएसए रेश्यो भी 76.19% से सुधरकर 81.18% पर पहुंच गया।

Indian Bank Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर इंडियन बैंक का टोटस बिजनेस 13.6% बढ़कर ₹15.28 लाख करोड़, टोटल डिपॉजिट्स 13.3% बढ़कर ₹8.43 लाख करोड़ और ग्रास एडवांसेज 13.9% बढ़कर ₹6.85 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान बैंक का घरेलू सीएएसए रेश्यो भी 38.97% से सुधरकर 39.64% पर पहुंच गया।

South Indian Bank Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर साउथ इंडियन बैंक का टोटल डिपॉजिट्स 11.39% बढ़कर ₹1.25 लाख करोड़ और ग्रास एडवांसेज 17.01% बढ़कर ₹1.04 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान बैंक का सीएएसए 14.61% बढ़कर ₹41,493 करोड़ और सीएएसए रेश्यो 32.06% से सुधरकर 32.99% पर पहुंच गया।

Tamilnad Mercantile Bank Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर इंडियन बैंक का टोटस बिजनेस 23.04% बढ़कर ₹1.21 लाख करोड़, टोटल डिपॉजिट्स 19.7% बढ़कर ₹64,409 करोड़ और ग्रास एडवांसेज 27.01% बढ़कर ₹57,306 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान बैंक का सीएएसए 16.94% बढ़कर ₹16,852 करोड़ पर पहुंच गया।

Dhanlaxmi Bank Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर धनलक्ष्मी बैंक का टोटस बिजनेस 21.12% बढ़कर ₹35,188 करोड़, टोटल डिपॉजिट्स 17.1% बढ़कर ₹19,403 करोड़ और ग्रास एडवांसेज 26.5% बढ़कर ₹15,785 करोड़ पर पहुंच गया।

Ashiana Housing Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में आशियाना हाउसिंग का एरिया बुकिंग सालाना आधार पर गिरकर 5.05 लाख स्क्वेयर फीट से 3.61 लाख स्क्वेयर फीट पर आ गया तो बिके एरिया की वैल्यू भी फिसलकर ₹430.97 करोड़ से ₹357.8 करोड़ पर आ गई।

V-Mart Retail Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में वी-मार्ट रिटेल का टोटल रेवेन्यू सालाना आधार पर 23% बढ़कर ₹1,089 करोड़ और सेम-स्टोर-सेल्स ग्रोथ 1% से 9% पर पहुंच गया। कंपनी ने जून तिमाही में 15 स्टोर खोले तो 1 बंद किया।

Sai Silks Kalamandir Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में साई सिल्क्स कलामंदिर का रेवेन्यू सालाना आधार पर 1% गिरकर ₹375 करोड़ पर आ गया। कंपनी ने कर्नाटक में दो नए स्टोर के जरिए 30 हजार स्क्वेयर फीट का रिटेल स्पेस जोड़ा।

V2 Retail Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में वी2 रिटेल का स्टैंडएलोन रेवेन्यू सालाना आधार पर 58.25% बढ़कर ₹997 करोड़ और सेम-स्टोर-सेल्स ग्रोथ 5% से 7.5% पर पहुंच गया। जून 2026 तिमाही में कंपनी ने 57 नए स्टोर खोले और 1 बंद किया।

JTL Industries Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर जेटीएल इंडस्ट्रीज की सेल्स वॉल्यूम 18% बढ़कर 1.18 लाख टन पर पहुंच गई।

मंथली बिजनेस अपडेट

Force Motors (June YoY)

जून महीने में फोर्स मोटर्स की टोटल सेल्स सालाना आधार पर 23.5% बढ़कर 3,568 यूनिट्स पर पहुं गई। इसमें घरेलू सेल्स सालाना आधार पर 26.63% बढ़कर 3,547 यूनिट्स पर पहुंचा लेकिन निर्यात 76.14% गिरकर 21 यूनिट्स पर आ गया।

NMDC (June YoY)

जून महीने में सालाना आधार पर एनएमडीसी के लौह अयस्क का उत्पादन 44.3% बढ़कर 5.15 टन और इसकी सेल्स 11.2% बढ़कर 3.98 टन पर पहुंच गई।

Stocks to Watch : इन पर भी रहेगी नजर

Lupin

13-17 अप्रैल 2026 के बीच जांच के बाद अमेरिकी दवा नियामक एफडीए से अमेरिका के न्यू जर्सी के सोमरसेट में अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए लुपिन को EIR (एस्टैब्लिशमेंट इंस्पेक्शन रिपोर्ट) मिली है, जिसमें वॉलंटरी एक्शन इंडिकेटेड (VAI) क्लासिफिकेशन को संतोषजनक बताया गया है। वहीं यूरोपियन मेडिसिन्स एजेंसी (EMA) ने पीडियाट्रिक इन्वेस्टिगेशन प्लान (PIP) के आधार पर NaMuscla के मार्केटिंग ऑथराइजेशन की शर्तों में बदलाव को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी में मौजूदा 167 mg स्ट्रेंथ के अलावा दो नई डोज स्ट्रेंथ-62 एमजी और 83 एमजी कैप्सूल भी शामिल हैं।

Hero MotoCorp

हीरो मोटोकॉर्प ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति में ₹750 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ अपने दूसरे ग्लोबल पार्ट्स सेंटर (GPC) का ऐलान किया है। इसके साथ ही राज्य में उसका कुल निवेश ₹3,200 करोड़ से ज्यादा हो जाएगा।

Tata Technologies

टाटा टेक्नोलॉजीज और टेनेको एलएलसी ने मोबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन के लिए अपनी ग्लोबल पार्टनरशिप को और मजबूत किया है। टेनेको अगले पांच वर्षों में इस साझेदारी में $10.0 करोड़ से अधिक का निवेश कर सकती है।

Bharti Airtel

भारती एयरटेल की सब्सिडियरी एयरटेल मनी ने टाइप II नॉन-डिपॉजिट-टेकिंग NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) के तौर पर कमर्शियल कामकाज शुरू कर दिया है।

Syngene International

सिद्धार्थ मित्तल ने 1 जुलाई से पीटर बेन की जगह सिनजीन इंटरनेशनल के एमडी और सीईओ का पद संभाल लिया है।

Studds Accessories

भरत गोयल को 1 जुलाई से स्टड्स एक्सेसरीज का सीएफओ नियुक्त किया गया है। इसके अलावा कंपनी ने मनीष मेहता को 1 जुलाई से सीएफओ के पद से हटाकर सीनियर मैनेजमेंट कैटेगरी में वाइस प्रेसिडेंट–टैक्सेशन एंड कंप्लायंस बनाया है।

Coal India

कोल इंडिया को बुंदेलखंड सौर ऊर्जा लिमिटेड से 600 MW का सोलर प्लांट लगाने के लिए ₹2,831.11 करोड़ का लेटर ऑफ अवार्ड मिला है।

Srivasavi Adhesive Tapes

बेंगलुरु रूरल में श्रीवासवी एडहेसिव टेप्स के पॉलिमर डिवीजन (यूनिट 5) ने एक ग्लोबल मल्टीनेशनल कंपनी के साथ पर्चेजिंग एग्रीमेंट किया है। इसके तहत कंपनी PP, HDPE, फैब्रिक और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स की सप्लायर बन गई है।

Sai Parenterals

साई पैरेंटरल्स की ऑस्ट्रेलियाई सब्सिडियरी नौमेड फार्मा ने ऑस्ट्रेलिया की मल्टी-बिलियन डॉलर की फार्मेसी चेन के साथ अपने लॉन्ग टर्म एक्सक्लूसिव OTC (ओवर-द-काउंटर) दवा सप्लाई एग्रीमेंट को रिन्यू किया है। नए एग्रीमेंट में प्रोडक्ट्स की रेंज बढ़ाई गई है, समय-सीमा बढ़ाई गई है और कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू भी काफी ज्यादा है। रिन्यू हुए एग्रीमेंट की वैल्यू साढ़े सात साल की बढ़ी हुई अवधि के लिए AUD 20.2 करोड़ (लगभग ₹1,300 करोड़) यानी सालाना लगभग AUD 2.7 करोड़ है। इस एग्रीमेंट में आपसी सहमति से इसे और तीन साल के लिए बढ़ाने का विकल्प भी शामिल है।

लिस्टिंग

आज सीएसएम टेक के शेयरों की बीएसई और एनएसई पर एंट्री होगी।

एक्स-डेट

आज लॉयड्स एंटरप्राइजेज और चेमबॉन्ड मैटेरियल टेक के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे तो गुजरात एनर्जी के स्पिन ऑफ की भी आज एक्स-डेट है।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Rate Today: और चढ़ा सोना; मुंबई, कोलकाता में ₹129040 का हुआ 22 कैरेट; 10 बड़े शहरों में ये है भाव

देश में सोने की कीमत में 2 जुलाई को तेजी है। ज्यादातर शहरों में भाव चढ़ा है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 140920 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। मुंबई में भाव 140770 रुपये प्रति 10 ग्राम है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,300 रुपये गिरकर 1,44,500 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। वैश्विक बाजारों में सोने की कीमत में कमजोरी और डॉलर की मजबूती से सोने पर दबाव रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 3,986.07 डॉलर प्रति औंस पर है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 140920 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 129190 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 129040 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 140770 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 144560 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 132510 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 140770 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 129040 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली129190140920
मुंबई129040140770
अहमदाबाद129090140820
चेन्नई132510144560
कोलकाता129040140770
हैदराबाद129040140770
जयपुर129190140920
भोपाल129090140820
लखनऊ129190140920
चंडीगढ़129190140920

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चांदी की कीमत

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी में भी तेजी है। 2 जुलाई की सुबह कीमत बढ़कर 240100 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 58 डॉलर प्रति औंस पर है। देश के अंदर सोने और चांदी की कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

ईरान 6 अरब डॉलर के फ्रीज-फंड से जरूरी सामान खरीदेगा:अमेरिका पर समझौता तोड़ने का आरोप; डील का उल्लंघन न हो, इसकी निगरानी कमेटी करेगी

ईरान ने बुधवार को कहा कि अमेरिका-ईरान समझौते (MoU) के तहत जारी होने वाली 6 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों का एक हिस्सा जरूरी सामान खरीदने में इस्तेमाल किया जाएगा। इस पर कतर की राजधानी दोहा में हुई बैठक में सहमति बनी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि कतर के अधिकारियों के साथ बैठक में तय हुआ कि ईरान अपनी जरूरत के मुताबिक सामान खरीदेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने लेबनान में युद्ध रोकने समेत समझौते की कुछ शर्तों का पालन नहीं किया। बैठक में यह भी फैसला हुआ कि समझौते के उल्लंघन की निगरानी के लिए गुरुवार तक एक अलग कमेटी बनाई जाएगी, जहां किसी भी उल्लंघन की आधिकारिक शिकायत दर्ज की जा सकेगी। गरीबाबादी ने साफ किया कि दोहा में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच कोई सीधी बैठक नहीं हुई। बातचीत कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से अलग-अलग हुई। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प बोले- ईरान पर बातचीत सही दिशा में बढ़ रही: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है। 2. इजराइल का ऐलान- लेबनान, सीरिया और गाजा से सेना नहीं हटेगी: इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि लेबनान, सीरिया और गाजा में सेना की तैनाती जारी रहेगी। जब तक हिजबुल्लाह हथियार नहीं छोड़ता, सैनिक वापस नहीं बुलाए जाएंगे। 3. ईरान का दावा- खामेनेई के अंतिम संस्कार में 2 करोड़ लोग पहुंचेंगे: ईरान ने कहा कि अंतिम संस्कार में 2 करोड़ तक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। 30 देशों के प्रतिनिधि भी पहुंचेंगे और तेहरान में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। 4. होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य हुई: समुद्री निगरानी कंपनी केप्लर के मुताबिक मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट से 34 जहाज गुजरे। युद्ध के बाद इस अहम समुद्री मार्ग पर तेल और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य हो रही है। 5. अमेरिका-ईरान समझौते की 5 शर्तों पर अब भी अटकी बात
MoU पर हस्ताक्षर के दो हफ्ते बाद भी फ्रीज फंड जारी होने, तेल निर्यात में राहत, होर्मुज में सामान्य आवाजाही, लेबनान में युद्धविराम और परमाणु मुद्दे जैसे अहम मामलों पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी है। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Gold Outlook: 2026 की दूसरी छमाही में घटेंगे या बढ़ेंगे सोने के दाम? वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट ने बताए बड़े ट्रिगर

Gold Outlook: 2026 की दूसरी छमाही में सोने की चाल कई बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। इनमें सबसे अहम हैं भू-राजनीतिक तनाव, ब्याज दरें और निवेशकों का रुख। यह बात वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने अपनी Gold Mid-Year Outlook 2026 रिपोर्ट में कही है।

इस साल की पहली छमाही सोने के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाली रही। जनवरी के आखिर में सोना 5,405 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद जून में कीमत गिरकर 4,002 डॉलर प्रति औंस तक आ गई। यानी रिकॉर्ड हाई से 26% की गिरावट। इसके बावजूद पिछले एक साल में सोना सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले एसेट्स में शामिल है। इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बढ़ा है और वोलैटिलिटी 30% तक पहुंच गई है।

सबसे बड़ा असर किसका रहा?

WGC का कहना है कि पहली छमाही में अमेरिका-ईरान तनाव जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने सोने को सबसे ज्यादा सपोर्ट दिया। इसके अलावा निवेशकों की खरीद-बिक्री और मुनाफावसूली का भी असर दिखा।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की कीमतों में सबसे ज्यादा हलचल एशिया और अमेरिका के ट्रेडिंग घंटों के दौरान हुई। इससे साफ है कि अब एशियाई निवेशकों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

आगे क्या हो सकता है?

WGC का मानना है कि मौजूदा कीमतें इस उम्मीद को दिखाती हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल अक्टूबर तक कम से कम एक बार ब्याज दर बढ़ा सकता है। इसके अलावा Bank of England, Bank of Japan और European Central Bank भी सख्त मौद्रिक नीति जारी रख सकते हैं।

अगर ऐसा होता है तो साल के आखिर तक सोना करीब 4,100 डॉलर प्रति औंस के आसपास रह सकता है। इसमें करीब 5% ऊपर या नीचे का उतार-चढ़ाव संभव है।

किन वजहों से बढ़ सकती हैं कीमतें?

अगर दुनिया में तनाव बढ़ता है, अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ती है या ब्याज दरों को लेकर बाजार की सोच बदलती है, तो सोना फिर से तेजी पकड़ सकता है। हालांकि 4,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जाने के लिए दुनिया की अर्थव्यवस्था में बड़ी सुस्ती जैसी स्थिति बननी होगी।

दूसरी तरफ, अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, ब्याज दरें उम्मीद से ज्यादा बढ़ती हैं और निवेशक शेयर जैसे जोखिम वाले एसेट्स की तरफ लौटते हैं, तो सोने पर दबाव बन सकता है।

WGC का कहना है कि अगर सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे टिकता है तो बिकवाली बढ़ सकती है। लेकिन इतिहास बताता है कि बड़ी गिरावट के बाद केंद्रीय बैंक, बड़े निवेशक और आम खरीदार फिर से खरीदारी शुरू कर देते हैं। इससे कीमतों को सहारा मिल सकता है।

Gold Silver Price Today: सोना फिसला, चांदी ने लगाई 5000 रुपये की छलांग

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Market Outlook: जुलाई में शेयर बाजार में आएगी तेजी? पिछले 25 साल का रिकॉर्ड दे रहा बड़ा संकेत

Market Outlook: पिछले करीब तीन महीने से भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में घूम रहा है। कभी हल्की तेजी तो कभी हल्की गिरावट, लेकिन कोई बड़ा मूव देखने को नहीं मिला। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या जुलाई का महीना बाजार के लिए कुछ नया लेकर आएगा?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इतिहास पर नजर डालें तो जुलाई का महीना शेयर बाजार के लिए अक्सर अच्छा साबित हुआ है। वहीं, मौजूदा आर्थिक हालात भी बाजार के पक्ष में नजर आ रहे हैं।

जुलाई का रिकॉर्ड क्या कहता है?

SAMCO Securities के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट जहोल प्रजापति का कहना है कि ऐतिहासिक आंकड़े जुलाई के पक्ष में इशारा करते हैं। उन्होंने कहा, ‘साल 2001 से 2025 के बीच 25 साल में निफ्टी 50 ने जुलाई में 18 बार बढ़त दर्ज की है। यानी करीब 72% बार बाजार हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान औसत रिटर्न 2.19% रहा। दिसंबर और नवंबर के बाद जुलाई निफ्टी के लिए तीसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला महीना रहा है।’

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ पुराने ट्रेंड देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। लेकिन जुलाई में हर साल कुछ ऐसे फैक्टर देखने को मिलते हैं, जो बाजार को सपोर्ट देते हैं। इनमें सामान्य मानसून की शुरुआत, पहली तिमाही (Q1) के नतीजों से जुड़ी उम्मीदें और घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी शामिल हैं।

मौजूदा हालात भी बाजार के लिए अच्छे

जहोल प्रजापति का कहना है कि इस समय कई ऐसे फैक्टर हैं, जो बाजार के लिए राहत की खबर हो सकते हैं।

  • भू-राजनीतिक तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की उम्मीद है।
  • कच्चे तेल की कीमतें घटकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।
  • इससे कंपनियों की लागत कम हो सकती है और महंगाई पर भी दबाव घट सकता है।
  • साल की शुरुआत में कमजोर पड़ा रुपया अब संभलता दिख रहा है।
  • विदेशी निवेशकों (FPI) की बिकवाली भी पहले के मुकाबले कम हुई है, जिससे बाजार में भरोसा बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि अगर दुनिया में कोई बड़ा नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होता है, तो ये सभी बातें भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बना सकती हैं।

चार्ट क्या बता रहे हैं?

SAMCO Securities के डेरिवेटिव्स रिसर्च एनालिस्ट धूपेश धामेजा का कहना है कि 1 जुलाई को निफ्टी ने अच्छी मजबूती दिखाई और बुलिश कैंडल बनाई। इंडेक्स ने 23,850-23,900 के सपोर्ट जोन को बचाए रखा। यही इलाका हालिया ब्रेकआउट एरिया और 50-DEMA के आसपास भी है। हालांकि, 24,000 के ऊपर पहुंचने के बावजूद निफ्टी को 100-DEMA के पास मजबूत रुकावट मिल रही है। यही वजह है कि बाजार अभी भी एक छोटी रेंज में फंसा हुआ है।

उन्होंने बताया कि RSI अब धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है और फिलहाल 55.13 पर है। जब तक RSI 50 से ऊपर रहेगा, तब तक बाजार का रुख पॉजिटिव माना जाएगा। हालांकि, असली तेजी का संकेत तभी मिलेगा, जब निफ्टी मौजूदा रेजिस्टेंस के ऊपर निकल जाएगा। धामेजा ने यह भी कहा कि India VIX 2.63% गिरकर 13.24 पर आ गया है। इसका मतलब है कि बाजार में घबराहट कम हो रही है और निवेशक फिलहाल ज्यादा सहज नजर आ रहे हैं।

क्या 24,200 तक जा सकता है निफ्टी?

LKP Securities के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि 1 जुलाई को भी निफ्टी अपनी हालिया ट्रेडिंग रेंज से बाहर नहीं निकल पाया। पिछले कुछ सत्रों से इंडेक्स 24,000 के आसपास ही घूम रहा है, जिससे साफ है कि बाजार को अभी नई दिशा नहीं मिली है।

हालांकि, उनका मानना है कि शॉर्ट टर्म ट्रेंड अभी भी सकारात्मक है। जब तक निफ्टी 23,800 के ऊपर बना रहता है, तब तक तेजी की उम्मीद कायम रहेगी। उन्होंने कहा कि अगर यह सपोर्ट नहीं टूटता है, तो आने वाले दिनों में निफ्टी धीरे-धीरे 24,200 और उससे ऊपर के स्तर की ओर बढ़ सकता है। 1 जुलाई को निफ्टी 50 में 0.59% की तेजी आई और यह 24,005.85 पर बंद हुआ। वहीं, BSE Sensex 0.58% चढ़कर 76,922.64 के स्तर पर पहुंच गया।

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Gold Silver Price Today: सोना फिसला, चांदी ने लगाई 5000 रुपये की छलांग

Gold Silver Price Today: राष्ट्रीय राजधानी में 1 जुलाई को सोने में गिरावट आई। डॉलर में मजबूती और विदेशी बाजारों के ट्रेंड का असर भारत में सोने की कीमतों पर पड़ा। यह 1,300 रुपये गिरकर 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। उधर, चांदी की चमक बढ़ी। यह 5000 रुपये चढ़कर 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।

विदेश में लगातार तीसरे दिन सोना गिरा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.54 फीसदी गिरकर 3,986.07 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी 1 फीसदी गिरकर 58 डॉलर प्रति औंस पर रही। लेमन मार्केट्स डेस्क में रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग ने कहा, “बुधवार को भारत में सोने पर दबाव दिखा। इसकी वजह डॉलर में मजबूती और बढ़ती बॉन्ड यील्ड है। इसका असर कीमती मेटल की डिमांड पर पड़ा। “

डॉलर इंडेक्स में मजबूती ने सोने पर बनाया दबाव

मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज हेड प्रवीण सिंह ने कहा, “विदेशी बाजारों में सोने में लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। इसकी वजह डॉलर इंडेक्स में मजबूती है। यह 0.15 फीसदी चढ़कर 101.34 पर पहुंच गया।” डॉलर में मजबूती से विदेशी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है।

भारत में एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स में तेजी दिखी

इधर, कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स में तेजी दिखी, जबकि सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट दिखी। शाम के कारोबार में गोल्ड फ्यूचर्स 0.46 फीसदी यानी 659 रुपये चढ़कर 1,43,190 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 0.64 फीसदी यानी 1,461 रुपये की कमजोरी के साथ 2,25,582 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा था।

रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 30 फीसदी गिर चुका है सोना

इस साल गोल्ड की कीमतें जनवरी के आखिर में करीब 5600 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी। इस लेवल से गोल्ड करीब 30 फीसदी गिर चुका है। जून तिमाही में गोल्ड में करीब 14 फीसदी की गिरावट आई। सिर्फ जून में यह 11 फीसदी गिरा। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान की लड़ाई ने बुलियन पर दबाव बढ़ा दिया।

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अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद से भी गिरा सोना

एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल में गोल्ड में गिरावट की वजह डॉलर में मजबूती और अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इस साल इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। बढ़ते इंटरेस्ट रेट के माहौल में गोल्ड की चमक घट जाती है। इंटरेस्ट रेट घटने पर गोल्ड की चमक बढ़ जाती है।

ईरान युद्ध से अमेरिका का सुपर पॉवर तमगा डगमगाया

Iran US War: अहंकार की लड़ाई जब दो व्यक्तियों में हो तो दो परिवार प्रभावित या बरबाद होते हैं, लेकिन जब ये दो देशों के बीच हो तो समूचा विश्व प्रभावित होता है और टकराने वाले दोनों ही देश बरबाद हो सकते हैं। रूस-यूक्रैन में टकराव तो 2014 से ही प्रारंभ हो गया था, किंतु पूर्णकालिक युद्ध 24 फरवरी 2022 से शुरू हुआ, जिसमें सीधे दोनों ने मैदान पकड़ लिया है, जिसमें अभी तक कोई कमजोर पड़ता नहीं दिखाई देता। इसी तरह से अमेरिका-वियतनाम के बीच 1955 में शुरू हुआ युद्ध 1975 में समाप्त हो सका था, वह भी अमेरिका सेना के पीछे हट जाने से। पीछे तो उसे अफगानिस्तान से भी हटना पड़ा, लेकिन फटे में टांग अड़ाने का अब भी कोई मौका वह नहीं छोड़ता। ऐसा ही है ईरान के साथ अमेरिका व इजराइल का हालिया पंगा, जो गले की हड्‌डी बन अटका है।

 

इस समय पूरी दुनिया में एक ही चर्चा है कि मध्य पूर्व एशिया में हाल-फिलहाल शांति हो पायेगी या अमेरिका-इजराइल का ईरान के साथ युद्ध चलता रहेगा? इस लाख टके के सवाल का अभी तो एक भी सही जवाब देने का माद्दा किसी में नहीं है। इन युद्धरत देशों में भी। फिर भी अभी तक के हालात के परिप्रेक्ष्य में यह तो कहा ही जा सकता है कि ईरान ने ऐंठ दिखाकर और अमेरिका ने युद्ध छेड़कर अक्लमंदी तो नहीं की। इजराइल तो आजीवन युद्धरत रहा है तो उसकी तो दिनचर्या ही ऐसी हो चुकी है। फिर भी, वह भी तीसमारखां तो नहीं बन पाया। इतिहास इस कालखंड का जब निर्मम, बेबाक और वास्तविक तथ्यों पर आधारित विश्लेषण करेगा, तब समूची दुनिया के लिए वे ऐसे सबक होंगे, जो आगामी काल के लिए निर्णायक और विषम परिस्थितियों में सटीक फैसले लेने में सहायक होंगे।

 

कोई माने या न माने, यह अटल सत्य है कि सुपर पॉवर का तमगा लिए दुनिया के सामने इतराने वाले अमेरिका की बुरी गत हुई है। यह न तो उसके लिए न शेष विश्व के लिए अच्छा संकेत है। जिस आतंकवाद से समूची दुनिया थर्राती आई है, उसे नकेल डालने में जो भूमिका अमेरिका निभा सकता था, यह उस पर संशय खड़े करता है। हालांकि यह भी उतना ही बड़ा सच है कि विश्व में आतंकवाद को पल्लवित करने में अमेरिका का प्रमुख हाथ रहा है। भले ही वह अपनी हथियार लॉबी की ब्लैकमेलिंग या ताकत के आगे झुककर फैसले लेते रहा हो। इक्कीसवीं सदी में अब जो आगे होगा, वह अमेरिका के एकाधिकार के खात्मे का इतिहास बनेगा। इसके लिए निर्विवाद रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ही दोषी करार दिए जाएंगे। 

 

बीसवीं और इक्कीसवीं सदी में अभी तक इतना भ्रमित, विचलित, विवादास्पद, सनकी और तानाशाही के मिश्रित चरित्र वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प पर ठप्पा लगेगा कि उन्होंने अमेरिका के सुपर पॉवर की छवि वाली बंद मुट्‌ठी को अंगुलियां मरोड़कर खोल दिया। यह कोई मामूली बात नहीं है कि उनके अपने देश में 60 लाख लोग उनकी युद्ध नीति के खिलाफ सड़क पर उतर आए थे। वे भले ही कार्यकाल पूरा करें, लेकिन इतना तय जान लीजिए कि वे जितने समय व्हाइट हाउस में काबिज रहेंगे, उतना अधिक अमेरिका गर्त की ओर लुढ़केगा।

 

अब, जबकि कुछ दिन शांति के मिले हैं, तब दुनिया यह विश्लेषित करने में जुटी है कि आखिरकार इस युद्ध के भड़कने के कारण क्या थे? हम यह तो नहीं कह सकते कि ईरान निर्दोष है या ट्रम्प एकतरफा गलत हैं, लेकिन विभीषिका के इस स्वरूप की जरूरत तो बिल्कुल नहीं थी। जिन मुद्दों पर सीधे मिसाइलें दाग दी गईं, वे हलवे की तरह चट कर जाने वाले नहीं हैं। ईरान के पास परमाणु हथियारों के होने का अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिला है और न उसने किसी ऐसी वैश्विक आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली घटना को अंजाम दिया था, जो उसके खिलाफ जंग का एलान करवा दे। जो गलती अमेरिका ने अतीत में इराक के पास रासायनिक हथियार होने का कारण बताकर वहां अमेरिकी फौजें उतार कर की थी, वही उन्होंने ईरान के साथ करना चाहा। यह पासा इसलिए उलटा पड़ा कि ईरान के पास अस्त्र-शस्त्र का ऐसा विरल भंडार भरा था, जिसकी कल्पना अमेरिका समेत दुनिया में शायद ही किसी को रही होगी। यह तो अब पता चला कि उसने ऑइल मनी को चीन, रूस से हथियारों का जखीरा जमा करने के लिए उपयोग किया था। चूंकि दोनों ही देश अमेरिका के खिलाफ हैं तो स्वाभाविक रूप से ईरान से दोस्ती का हाथ बढ़ाना फायदेमंद ही रहना था। हो सकता है, होर्मुज के सामरिक व आर्थिक महत्व से भी वे परिचित रहे हों।

 

अमेरिका-ईरान के बीच पहली शांति वार्ता असफल होने के बाद दूसरी, तीसरी, चौथी होती रही, जो बेनतीजा ही कही जाएगी। ईरान-अमेरिका दोनों ही अब भी मोल-तौल करने की स्थिति में है। युद्ध विराम करने के बदले भी ईरान ने 10 सूत्री मांग पत्र थमाया था, जिस पर अमेरिका सहमत नहीं है। इसमें चार मांगें बेहद खास हैं, जिन पर ईरान अड़ा है और अमेरिका कतई तैयार नहीं है। ईरान खाड़ी देशों (सउदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन व जॉर्डन) से 25 लाख करोड़ रुपए का मुआवजा चाहता है, जिस पर अभी तो कोई सहमत नहीं।

 

दूसरा, वह होर्मुज से गुजरने वाले तेल जहाजों से प्रति बैरल एक डॉलर टोल चाहता है तो दूसरी तरफ अमेरिका होर्मुज पर खुद कब्जा चाहता है। अमेरिका ने सैन्य नाकाबंदी भी की, लेकिन चीन समेत अन्य जहाज वहां से सुरिक्षत निकल चुके हैं। तीसरा, ईरान परमाणु कार्यक्रम 5 साल तक रोकेगा, जबकि अमेरिका 20 साल तक इसे रोकना चाहता है। चौथा, युद्ध विराम में लेबनान भी शामिल रहेगा, जिस पर इजराइल को आपत्ति है। अब देखना दिलचस्प है कि बाजुओं का जोर दिखाने में किसकी रुचि है और कौन हाथ मिलाने को तैयार है।

 

इस युद्ध ने दुनिया के सामने एक और पहलू पर ध्यान दिलाया है। अब लड़ाई के लिए तोप-मिसाइलें, जल-थल-नभ सेना की मजबूती ज्यादा मायने नहीं रखती। यह दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (एआई) का है, जिससे ड्रोन संचालित होते हैं। ये युद्ध की समूची दिशा बदलने में सक्षम है, जो ईरान ने कर दिखाया। यूक्रेन भी इसी बूते रूस को पानी पिला रहा है। अमेरिका-इजराइल की सबसे बड़ी चूक यही हुई कि वे मिसाइल हमले रोकने की व्यूह रचना करते रहे और ईरान ने छोटा बम, बड़ा धमाका की तर्ज पर ड्रोन हमले कर बड़े लक्ष्य भेद डाले। खाड़ी देशों में ईरानी ड्रोन ने जो कहर बरपाया है, उस नुकसान से उबरने में इन्हें 3 से 5 साल तक लगेंगे और अरबों डॉलर का खर्च होगा, वह अलग। ड्रोन हमलों की मार यूक्रैन दिखा चुका है, जिसने महाशक्ति रूस को नाको चने चबवा रखे हैं।

 

इस युद्ध से एक और तस्वीर साफ हुई कि अब अमेरिका अकेला सब कुछ नहीं कर सकता। जिस तरह से नाटो देशों ने उसका साथ देने से स्पष्ट इनकार किया, वह दुनिया के सामने बड़ी चेतावनी है। इसका संदेश साफ है कि प्रत्येक देश अब अपने हित-अहित पहले देखेगा, फिर पंचायत में उलझेगा। ट्रम्प की खीज ने यह बताया है कि वे मुगालते में थे कि मित्र देश ईरान पर टूट पड़ेंगे। यदि वाकई ऐसा होता तो रूस-यूक्रेन (5 वर्ष हो चुके हैं) की तरह यह भी अनिश्चित काल चलता रहता और रूस व चीन को भी हस्तक्षेप का मौका मिल जाता, जो पूरी दुनिया की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक व्यवस्था को तहस-नहस करने की ओर ले जाता। इसकी विभीषिका तीसरे विश्व युद्ध के समान होती, जिसमें क्या-क्या गुल खिलते, कोई नहीं कह पाता।

 

सबसे प्रमुख बात-इसमें भारत की क्या स्थिति रही? उसने निष्पक्ष रहकर स्वयं को सुरक्षित रखा। जिसका नतीजा यह हुआ कि चलते युद्ध में गैस व तेल से भरे टैंकर आते रहे, वह ईरान से ही सात साल के लिए तेल खरीदने का समझौता कर सका और चीन के साथ उसके मालवाहक जहाज निकलते रहे। यह लड़ाई हमारी किसी भी तरह से नहीं थी, बावजूद इसके कि ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने पाकिस्तान को ड्रोन व हथियार दिए थे। इसके उलट हमारा तंत्र ईरान के समानांतर लोगों से बात करता रहा, जिसे ईरान ने सकारात्मक माना। भविष्य में इसके वास्तविक संदेश नजर आएंगे और काफी हद तक वे भारत के पक्ष में रहेंगे।

 

एक जो सबसे चिंताजनक बात उभरी है, वह यह कि ट्रम्प इसे गली-मोहल्ले के दादा-पहलवानों की तरह लड़ रहे हैं और पल-पल में उनकी बदलती रीति-नीति ने उलझनों को बढ़ाया ही है। वे कभी अपने हित साधने वाले व्यापारी हो जाते हैं तो कभी तानाशाह। कभी दुनिया को कदमों तले मानकर पेश आते हैं तो कभी जादूगर की तरह डमरू बजाकर मसले हल करने का दावा करते हैं। उनके विरोधाभासी चरित्र को यूं तो दुनिया ने टैरिफ लागू करते हुए बखूबी देख ही लिया है, लेकिन युद्ध जैसे संवेदनशील व दूरगामी मसलों में उनका रवैया बचकाना रहा, जो विश्व के लिये बड़े खतरे का आगाज है। उन्हें रोका नहीं गया तो इस दुनिया को ज्वालामुखी के लावे की तरह बहते देखना भी नसीब हो जाएगा।

Trump Crypto Income: डोनाल्ड ट्रंप ने क्रिप्टो से कितनी कमाई की? फाइलिंग के बाद सामने आया एक साल का ये आंकड़ा होश उड़ा देगा

Donald Trump Income news: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सालाना वित्तीय जानकारी सामने आई है। आंकड़े ऐसे हैं जो आपको चौंकने पर मजबूर कर सकते हैं। बतौर अमेरिकी राष्ट्रपति अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही साल में ट्रंप ने क्रिप्टो और मीमकॉइन से जुड़े बिजनेस के जरिए कम से कम $1.4 बिलियन (1.4 अरब डॉलर) की बंपर कमाई की है। ‘ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स’ के अनुसार, क्रिप्टो से हुई यह कमाई राष्ट्रपति ट्रंप की आय का अब तक का सबसे बड़ा जरिया बनकर उभरी है। इसके बाद उनकी कुल नेटवर्थ बढ़कर $7.6 बिलियन (7.6 अरब डॉलर) पर पहुंच गई है।

927 पन्नों के दस्तावेज में क्रिप्टो से बंपर कमाई का खुलासा

हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘सीएनबीसी टीवी 18’ की एक रिपोर्ट में एजेंसियों के इनपुट के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप की वित्तीय जानकारी के 927 पन्नों के आधिकारिक दस्तावेज सामने आए हैं। इससे पता चलता है कि डॉनल्ड ट्रंप की इस अरबों डॉलर की कमाई के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े क्रिप्टो सोर्स रहे हैं।

1- वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल: इस क्रिप्टो फर्म की सेल्स से ट्रंप ने $594 मिलियन (59.4 करोड़ डॉलर) से अधिक की कमाई की है। इस फर्म के को-फाउंडर्स में ट्रंप के बेटे और उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल हैं। विटकॉफ के बेटे जैक इस फर्म के सीईओ हैं।

2- मीमकॉइन बिजनेस और रॉयल्टी: ट्रंप के मीमकॉइन बिजनेस सीआईसी डिजिटल एलएलसी (CIC Digital LLC) ने $636 मिलियन (63.6 करोड़ डॉलर) की भारी इनकम की है। यह पूरी कमाई सेलिब्रेशन कॉइन्स के साथ हुए एक लाइसेंस समझौते से मिली रॉयल्टी के जरिए हुई है। सीआईसी ने डिजिटल वॉलेट में कम से कम $60 मिलियन (6 करोड़ डॉलर) मूल्य की विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी रखने का भी खुलासा किया है।

3- स्टेबलकॉइन होल्डको: इस कंपनी की हिस्सेदारी बेचने से अमेरिकी राष्ट्रपति को $197 मिलियन (19.7 करोड़ डॉलर) की मोटी रकम हासिल हुई है।

गोल्फ क्लब और मार-ए-लागो रिसॉर्ट से भी करोड़ों की आय

क्रिप्टो के अलावा डोनाल्ड ट्रंप के पारंपरिक बिजनेस और संपत्तियों से भी अच्छी खासी कमाई हुई है। ट्रंप के प्रसिद्ध ‘मार-ए-लागो’ रिसॉर्ट से उन्हें $77 मिलियन (7.7 करोड़ डॉलर) की आय हुई है। उनके नॉर्दर्न वर्जीनिया गोल्फ क्लब से $25 मिलियन (2.5 करोड़ डॉलर) की कमाई दर्ज की गई है।

एक साल में दोगुने हुए व्यक्तिगत निवेश, आलोचकों ने उठाए सवाल

वित्तीय फाइलिंग के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 के अंत तक ट्रंप द्वारा किए गए व्यक्तिगत निवेशों की संख्या बढ़कर 6181 हो गई है। साल 2024 के अंत में यह संख्या 3314 थी। यानी निवेश की संख्या करीब दोगुनी हो चुकी है। निवेशों में आए इस भारी उछाल के बाद आलोचकों और विरोधियों ने एक बार फिर चिंता जताना शुरू कर दिया है। आलोचकों का आरोप है कि ट्रंप राष्ट्रपति पद का फायदा उठाकर मुनाफा कमा रहे हैं और अपने राष्ट्रपति पद के दायित्वों तथा वित्तीय हितों को आपस में मिला रहे हैं।

ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन की सफाई: थर्ड-पार्टी संभाल रही है सारा काम

आलोचनाओं के बीच ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन की तरफ से इस पर सफाई दी गई है। कंपनी का कहना है कि ट्रंप की होल्डिंग्स और निवेश का प्रबंधन अब पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से थर्ड-पार्टी वित्तीय संस्थानों द्वारा किया जा रहा है। सभी निवेश संबंधी फैसले उन्हीं संस्थानों के पास सुरक्षित हैं। ट्रेडिंग पूरी तरह से एक ऑटोमेटेड प्रक्रिया के तहत की जा रही है। ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन ने दावा किया है कि इन लेन-देन में न तो खुद डॉनल्ड ट्रंप न उनके परिवार का कोई सदस्य और न ही उनकी कंपनी की कोई भूमिका है।

ट्रंप पर करोड़ों डॉलर का कर्ज और अदालती हर्जाना भी बकाया

इस बंपर कमाई और अरबों की नेटवर्थ के बीच ट्रंप की फाइलिंग में कई बड़े बकाए कर्ज भी सूचीबद्ध किए गए हैं। इसमें लेखिका ई जीन कैरोल द्वारा उनके खिलाफ जीते गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े दो अदालती फैसले शामिल हैं। इनका भुगतान होना बाकी है।

ट्रंप पर रियल एस्टेट से जुड़े तीन बड़े लोन भी बकाया हैं। इनमें ट्रंप टॉवर और ट्रंप नेशनल डोरल पर $50 मिलियन (5 करोड़ डॉलर) से अधिक की रकम के मॉर्टगेज शामिल हैं। ट्रंप ने साल 2025 में ऐसे तीन मॉर्टगेज लोन पूरी तरह चुका दिए हैं, जिनकी वैल्यू कभी $50 मिलियन (5 करोड़ डॉलर) से अधिक हुआ करती थी।

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Silver Rates Today: एक जुलाई को चांदी की नई कीमतें जारी! जानिए दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में क्या है रिटेल रेट

Silver Rates Today: जुलाई के पहले दिन घरेलू सर्राफा बाजार और वायदा बाजार में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कमजोर वैश्विक संकेतों और मुनाफावसूली के चलते चांदी के भाव दबाव में रहे, जिससे खरीदारों को राहत मिली। बुधवार, 1 जुलाई को भारत के रिटेल मार्केट में सोने की कीमत में भी गिरावट आई। प्रमुख शहरों में 24-कैरेट और 22-कैरेट सोने के रेट में थोड़ी कमी देखी गई। वहीं, घरेलू बुलियन मार्केट में चांदी की कीमतों में भी गिरावट आई है।

1 जुलाई को अगस्त फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड रेट 0.94% गिरकर ₹141,600 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, MCX सिल्वर फ्यूचर्स सुबह करीब 9:13 बजे 1.86% गिरकर ₹224,520 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था। मंगलवार को तेल की कीमतों में भारी गिरावट के साथ महीने का समापन हुआ। एनर्जी मार्केट के ट्रेडर्स कतर में अमेरिका और ईरान के बीच नई बातचीत की संभावना पर बारीकी से नजर रखे हुए थे।

चांदी की कीमतों में भारी गिरावट

अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (जो इंटरनेशनल बेंचमार्क है) गिरकर $72.92 प्रति बैरल पर आ गया। जून में इस कॉन्ट्रैक्ट में लगभग 21% की गिरावट आई, जो मार्च 2020 के बाद से इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी। सुबह के कारोबार में Comex पर इंटरनेशनल स्पॉट गोल्ड 1.09% गिरकर $3,994.40 प्रति औंस हो गया। जबकि चांदी 2.93% गिरकर $57.73 प्रति औंस पर आ गई।

घरेलू बाजार में अगस्त कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.84% ​​गिरकर ₹1,41,337 प्रति 10 ग्राम हो गया। वहीं, सितंबर कॉन्ट्रैक्ट के लिए सिल्वर फ्यूचर्स 1.8% गिरकर ₹2,24,268 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था। बाजार की नजर US ADP एम्प्लॉयमेंट चेंज, नॉन-फार्म पेरोल्स और बेरोजगारी के आंकड़ों पर है। इनसे बुलियन की कीमतों में अगली बड़ी हलचल आने की उम्मीद है।

LKP सिक्योरिटीज के VP रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा, “फेड की सख्त पॉलिसी के बाद, Comex गोल्ड में जून में पहले ही लगभग 12% की गिरावट आ चुकी है। यह $4,500 से गिरकर $3,950 पर आ गया है, जिससे बाजार ‘ओवरसोल्ड’ स्थिति में पहुंच गया है। $4,000 के स्तर के आसपास सोने में खरीदारी की अच्छी दिलचस्पी दिख रही है। इस स्तर से नीचे जाने पर नई मांग आ रही है।”

एमसीएक्स पर चांदी का भाव

MCX पर चांदी के जुलाई/सितंबर वायदा में सुबह कारोबार के दौरान करीब 1.86% की गिरावट देखी गई। चांदी का वायदा भाव लगभग ₹2,24,520 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया।

गिरावट की वजह क्या है?

एक्सपर्ट के अनुसार चांदी की कीमतों पर कई कारणों का असर पड़ा है:-

  • अमेरिकी डॉलर में मजबूती।
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने की उम्मीद।
  • वैश्विक बाजार में निवेशकों की सतर्कता।
  • अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग में कमी।

खरीदारों के लिए क्या मतलब है?

चांदी के दाम में आई गिरावट से आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं को राहत मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

आज के प्रमुख रेट (999 सिल्वर)

दिल्ली: लगभग ₹2,22,400 से ₹2,24,500 प्रति किलोग्राम तक रेट है।

मुंबई: लगभग ₹2,23,800 प्रति किलोग्राम।

कोलकाता: लगभग ₹2,24,000 प्रति किलोग्राम।

MCX पर भी चांदी में कमजोरी देखने को मिली। सुबह के कारोबार में सिल्वर फ्यूचर्स करीब 1.86% टूटकर ₹2,24,520 प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रहे थे। वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती, मुनाफावसूली और निवेशकों की सतर्कता के कारण चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों के आधार पर आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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