BLA का दावा- हमले में 30 पाकिस्तानी जवान मारे:कैंप में विस्फोटकों से भरी गाड़ी से ब्लास्ट किया; पाकिस्तान सरकार ने पुष्टि नहीं की

बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले के जिवानी इलाके में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स के कैंप पर हमला किया है। BLA के मुताबिक, 3 जुलाई की शाम करीब 6:32 बजे उसके मजीद ब्रिगेड के एक हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को कैंप में घुसाकर विस्फोट कर दिया। संगठन का दावा है कि इस हमले में 30 से ज्यादा गार्ड्स मारे गए और दर्जनों घायल हुए हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार या सेना ने अब तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कई सुरक्षाकर्मी मलबे में दबे हो सकते हैं BLA ने दावा किया कि विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स का कैंप पूरी तरह तबाह हो गया। संगठन के मुताबिक, धमाके के तुरंत बाद उसके फतेह स्क्वाड के लड़ाकों ने कैंप पर हमला किया और बच गए सुरक्षाकर्मियों को नजदीक से निशाना बनाया। BLA ने कहा कि मलबे में कई सुरक्षाकर्मी दबे हो सकते हैं, इसलिए मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। BLA के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। हमलावर की पहचान अत्ताउल्लाह बलोच के रूप में हुई BLA ने अपने बयान में दावा किया कि हमलावर की पहचान अत्ताउल्लाह बलोच उर्फ अजमल के रूप में हुई है, जिसे संगठन ने अपने मजीद ब्रिगेड का सदस्य बताया। BLA का कहना है कि वह इस ऑपरेशन से जुड़ी अधिक जानकारी और वीडियो अपने आधिकारिक चैनलों के जरिए जारी करेगा। BLA बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहा बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक संगठन है जो पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहा है। इसकी स्थापना 2000 के दशक की शुरुआत में हुई और इसे कई देशों द्वारा आतंकी संगठन भी घोषित किया गया है। BLA का दावा है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण हो रहा है और बलूच लोगों के अधिकार छीन लिए गए हैं। यह संगठन पाकिस्तानी सेना, सरकार और चीनी प्रोजेक्ट्स जैसे CPEC को निशाना बनाता रहा है। BLA अपनी गुरिल्ला शैली के लिए जाना जाता है। यानी पहाड़ी इलाकों में छिपकर सेना पर हमला करना और तुरंत वापस लौट जाना। CPEC का अहम केंद्र है ग्वादर ग्वादर जिला पाकिस्तान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डीप-सी पोर्ट का केंद्र है और हाल के सालों में उग्रवादी गतिविधियों का प्रमुख निशाना रहा है। यह इलाका चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का अहम हिस्सा है। अरबों डॉलर की इस बुनियादी ढांचा परियोजना को बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी संगठनों की ओर से लगातार सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। —————– ये खबर भी पढ़ें… PoK में प्रदर्शन, लोग बोले- हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं:₹1 करोड़ का इनामी शौकत नवाज गिरफ्तार; JAAC के 600 से ज्यादा नेता-कार्यकर्ता हिरासत में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं। रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में हजारों लोग जुटे। उन्हेंने कहा कि PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) की अगुआई में चल रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

World Bank Update: कंगाली से उबरकर श्रीलंका बना अपर-मिडिल इनकम देश, वर्ल्ड बैंक ने भारत को किस कैटिगरी में रखा?

वर्ल्ड बैंक ने श्रीलंका को एक बार फिर अपर मिडिल इनकम वाले देशों की कैटेगरी में शामिल कर दिया है। यह 2022 में आए गंभीर आर्थिक संकट से उबरने की दिशा में श्रीलंका के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। वहीं, वियतनाम और फिलीपींस को भी बेहतर आय वर्ग में जगह मिली है, जो उनकी लगातार मजबूत होती अर्थव्यवस्था को दिखाता है।

भारत की नहीं बदली कटैगरी

दूसरी ओर, भारत अब भी लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की कैटेगरी में बना हुआ है। भारत को यह दर्जा साल 2007 में मिला था और अभी तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, यह वर्गीकरण केवल देश की कुल अर्थव्यवस्था पर नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय और लोगों के बीच आय के डिस्ट्रीब्यूशन पर भी आधारित होता है। वर्ल्ड बैंक ने अपनी नई रिपोर्ट में श्रीलंका की वापसी को आर्थिक सुधार की बड़ी सफलता बताया है।

श्रीलंका ने तीन साल में की अच्छी वापसी 

वर्ल्ड बैंक ने कहा कि 2022 के गंभीर आर्थिक संकट के बाद श्रीलंका ने सिर्फ तीन साल में अच्छी वापसी की है। साल 2025 में देश की अर्थव्यवस्था में 5 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई। इसके पीछे उद्योगों में सुधार, पर्यटन क्षेत्र की तेज़ रफ्तार और वित्तीय सेवाओं का बेहतर प्रदर्शन मुख्य वजह रहे। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, श्रीलंका का दोबारा अपर मिडिल इनकम वाले देशों की कटैगरी में पहुंचना उसकी आर्थिक मजबूती का संकेत है। हालांकि, यह तय सीमा को बहुत कम अंतर से पार कर सका है।

श्रीलंका पहली बार साल 2019 में ऊपरी-मध्यम आय वाले देशों की सूची में शामिल हुआ था। लेकिन इसके बाद आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ गई और देश गंभीर वित्तीय संकट में फंस गया। हालात इतने बिगड़ गए कि 2022 में श्रीलंका अपने सरकारी कर्ज का भुगतान भी नहीं कर सका। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सहयोग से कई आर्थिक सुधार किए गए। सरकार ने खर्च पर नियंत्रण रखा, कर्ज का दोबारा प्रबंधन किया, पर्यटन को बढ़ावा दिया और विदेशों में रहने वाले श्रीलंकाई लोगों से आने वाली रकम भी बढ़ी। इन कदमों की मदद से देश की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे फिर से पटरी पर लौटने लगी।

वियतनाम और फिलीपींस ने भी लगातार कई सालों तक मजबूत आर्थिक विकास के दम पर वर्ल्ड बैंक की अपर मिडिल इनकम वाले देशों की श्रेणी में जगह बना ली है। वियतनाम का निर्यात आधारित मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र लगातार विदेशी निवेश को आकर्षित कर रहा है। वहीं, फिलीपींस में भी कई क्षेत्रों में तेज आर्थिक विकास देखने को मिला है। इन दोनों देशों के शामिल होने के बाद अब दक्षिण-पूर्व एशिया की पांचों प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं—सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और फिलीपींस—या तो अपर मिडिल इनकम वाले देशों की कटैगरी में हैं या उससे भी ऊपर के आय वर्ग में पहुंच चुकी हैं।

भारत का दर्जा क्यों नहीं बदला?

भारत अभी भी वर्ल्ड बैंक की लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की कटैगरी में है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि देश की अर्थव्यवस्था कमजोर है। दरअसल, वर्ल्ड बैंकदेशों को उनकी प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI Per Capita) के आधार पर अलग-अलग कटैगरी में रखता है। यानी यह देखा जाता है कि देश के हर व्यक्ति की एवरेज इनकम कितनी है, न कि केवल देश की कुल अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है। भारत की आबादी बहुत ज्यादा है, इसलिए आय का औसत बढ़ाने के लिए देश की कुल कमाई में भी काफी बड़ी बढ़ोतरी की जरूरत होती है।

वर्ल्ड बैंकके नए नियमों के अनुसार, जिन देशों की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) 1,136 डॉलर से 4,495 डॉलर के बीच होती है, उन्हें लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की श्रेणी में रखा जाता है। वहीं, जिन देशों की प्रति व्यक्ति आय 4,496 डॉलर से 13,935 डॉलर के बीच होती है, वे ऊपरी-मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में आते हैं। भारत की प्रति व्यक्ति GNI फिलहाल करीब 2,500 से 2,700 डॉलर के बीच है। यही वजह है कि दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के बावजूद भारत अभी भी लोअर मिडिल इनकम वाले देशों की श्रेणी में बना हुआ है।

वर्ल्ड बैंक ने देशों का इनकम कटैगरी तय करने के लिए GDP नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय (GNI) को आधार मानता है। GDP से पता चलता है कि किसी देश में एक साल के दौरान कितना उत्पादन और सेवाएं हुई हैं, जबकि GNI यह बताती है कि उस देश के लोगों और कंपनियों ने कुल कितनी आय कमाई, चाहे वह देश के भीतर से हो या विदेश से। भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में केवल GDP बढ़ने से हर व्यक्ति की औसत आय तेजी से नहीं बढ़ती। इसकी वजह यह है कि देश की कुल आय बहुत बड़ी आबादी में बंट जाती है। इसलिए अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ने के बावजूद प्रति व्यक्ति आय बढ़ने में ज्यादा समय लगता है।

Silver Price Today: आज क्या है चांदी का लेटेस्ट रेट? चेक करें अपने शहर के दाम

Silver Price Today: अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में चांदी की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव के बीच दिल्ली में आज चांदी की कीमत बढ़कर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समेत) पहुंच गई है। वहीं, बाजार खुलने से पहले मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव 0.4% बढ़कर यानी 89 रुपये की तेजी के साथ 2,37,499 रुपये प्रति किलो पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,37,410 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ था। दूसरी ओर, बुलियन्स के अनुसार चांदी की कीमत 2,37,660 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, शुक्रवार को बाजार बंद होने तक चांदी की कीमत 2,33,858 रुपये प्रति पहुंच गई। चूंकी शनिवार और रविवार को बाजार बंद है, इसलिए दोनों दिन यही भाव मान्य रहेगा।

गुडरिटर्न्स के अनुसार चांदी की कीमत बढ़कर 2,50,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। ऐसे में अगर आप चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो अपने शहर के ताजा रेट पर नजर रखना बेहद जरूरी हो जाता है।

भारत के शहरों में चांदी के ताजा भाव

शहर10 ग्राम चांदी100 ग्राम चांदी1 किलो चांदी
दिल्ली₹2,500₹25,000₹2,50,000
मुंबई₹2,500₹25,000₹2,50,000
कोलकाता₹2,500₹25,000₹2,50,000
पटना₹2,500₹25,000₹2,50,000
लखनऊ₹2,500₹25,000₹2,50,000
मेरठ₹2,500₹25,000₹2,50,000
अयोध्या₹2,500₹25,000₹2,50,000
कानपुर₹2,500₹25,000₹2,50,000
गाजियाबाद₹2,500₹25,000₹2,50,000
नोएडा₹2,500₹25,000₹2,50,000

पिछले दिन क्या रही चांदी की कीमत

गुरुवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी के भाव में 5,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई, जिससे यह बढ़कर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समेत) पर पहुंच गई। इससे पिछले सत्र में चांदी का भाव 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी करीब 1.3 प्रतिशत की बढ़त के साथ बढ़कर 59.89 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

एनालिस्ट का कहना है कि इन आंकड़ों से कीमती धातुओं और अमेरिकी डॉलर, दोनों में उतार-चढ़ाव आ सकता है।

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Gold Outlook: इस हफ्ते गोल्ड में तेजी से निवेशकों ने लीं राहत की सांस, जेपी मॉर्गन ने दिया 4500 डॉलर का टारगेट

Gold Outlook: इस हफ्ते गोल्ड के निवेशकों ने राहत की सांस ली है। गोल्ड में तेजी का यह मई के बाद पहला हफ्ता है। अंततरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4200 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। इस हफ्ते गोल्ड में 2.2 फीसदी की तेजी आई। हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को भी देश और विदेश में गोल्ड में तेजी दिखी। चांदी भी गोल्ड के पीछे चलती नजर आई।

इन वजहों से गोल्ड में आई तेजी

गोल्ड़ की कीमतों में तेजी की कई वजहें हैं। अमेरिका में इंटरेस्ट बढ़ने की उम्मीद घटी है। रोजगार के नए मौकों के जून के डेटा आने के बाद माना जा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट जल्द बढ़ाने नहीं जा रहा है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में गोल्ड की चमक घट जाती है। उधर, डॉलर में कमजोरी दिखी है। काफी समय बाद डॉलर इंडेक्स में नरमी है। तीसरा, WGC ने कहा है कि केंद्रीय बैंकों ने मई में गोल्ड की खरीदारी बढ़ाई है।

4200 डॉलर के करीब पहुंचा गोल्ड

टीडी सिक्योरिटीज में कमोडिटीज स्ट्रेटेजी के ग्लोबल हेड बार्ट मेलेक ने कहा कि गोल्ड के 4,280 डॉलर प्रति औंस के रेसिस्टेंस लेवल की तरफ बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इनफ्लेशनरी प्रेशर की वजह से इसके अगले साल से पहले 5,300 डॉलर के टारगेट तक पहुंचने की उम्मीद कम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3 जुलाई को स्पॉट गोल्ड 1.3 फीसदी चढ़कर 4,176.94 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। सिल्वर 2 फीसदी के उछाल के साथ 62.42 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

भारत में भी गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स में उछाल

इधर, भारत में गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में 3 जुलाई को तेजी दिखी। कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स 1.10 फीसदी यानी 1,607 रुपये चढ़कर 1,47,365 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। सिल्वर फ्यूचर 2.11 फीसदी यानी 4,845 रुपये के उछाल के साथ 2,34,081 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ। देश और विदेश में गोल्ड में तेजी इस बात का संकेत है कि गोल्ड रिकवरी के रास्ते पर है। इसमें जियोपॉलिटिकल टेंशन में कमी का भी हाथ है।

जेपी मॉर्गन ने दिया 4500 डॉलर का टारगेट 

दिग्गज अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन ने चौथी तिमाही में गोल्ड के 4,500 डॉलर पर पहुंच जाने की उम्मीद जताई है। उसने तीसरी तिमाही में गोल्ड की कीमतें 4,300 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, उसने कहा है कि गोल्ड की डिमांड उतनी स्ट्रॉन्ग नहीं है, जितनी उसने उम्मीद की थी। 9 जून को उसने गोल्ड की कीमतें इस साल के अंत तक 6000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच जाने का अनुमान जताया था।

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केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से तेजी जारी रहने का अनुमान

जेपी मॉर्गन का कहना है कि गोल्ड का लॉन्ग टर्म आउटलुक पॉजिटिव है। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से 2027 में तेजी जारी रहेगी। उसने चांदी की औसत कीमतें भी 60-65 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है। इस साल की शुरुआत में गोल्ड और सिल्वर की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। फिर, उनमें तेज गिरावट देखने को मिली। 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद गोल्ड और सिल्वर पर दबाव दिखा था।

Gold Price Today: सोना हुआ और महंगा, 24 और 22 कैरेट दोनों का चढ़ा भाव

देश में सोने की कीमत और बढ़ गई है। 4 जुलाई की सुबह ज्यादातर शहरों में 24 और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत में इजाफा हुआ है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 147160 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 3,000 रुपये बढ़कर 1,47,500 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमत में मजबूती और डॉलर के कमजोर होने के कारण सोने की मांग में तेजी आई।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने बाजार के अनुमानों के मुकाबले कम सख्त रुख की बात कही है, जिससे ब्याज दरों में जल्द बढ़ोतरी की चिंताएं कम हुई हैं। इसके अलावा अमेरिका में नौकरियों का डेटा उम्मीद से कमजोर रहना भी ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें कम होने का एक कारण है। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स का कहना है कि जून में नॉन-फार्म पेरोल में 57,000 नौकरियां बढ़ीं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 147160 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 134910 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 134760 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 147010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 149570 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 137010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 147010 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 134760 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली134910147160
मुंबई134760147010
अहमदाबाद134810147060
चेन्नई137010149570
कोलकाता134760147010
हैदराबाद134760147010
जयपुर134910147160
भोपाल134810147060
लखनऊ134910147160
चंडीगढ़134910147160

 

Petrol Diesel Price Today: आज 4 जुलाई को क्या हैं पेट्रोल-डीजल के नए रेट? यहां देखें पूरी लिस्ट

Petrol Diesel Price Today:  हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 04 जुलाई 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट —

नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 83.09 रुपये प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल 111.18 रुपये और डीजल 86 रुपये प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल 113.47 रुपये और डीजल 93.50 रुपये प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 91.50 रुपये प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल 102.77 रुपये और डीजल 91.70 रुपये प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 91.70 रुपये प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल 110.93 रुपये और डीजल 90 रुपये प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल 109.92 रुपये प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल 98.10 रुपये प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 97 रुपये प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये और डीजल 90.91 रुपये प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये और डीजल 95.75 रुपये प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल 113.35 रुपये प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल 115.49 रुपये प्रति लीटर।

अहमदाबाद: डीजल 82.25 रुपये प्रति लीटर।

पुणे: डीजल 92.50 रुपये प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

अमेरिका 408 किलो का टाइम कैप्सूल जमीन में दफन करेगा:इसमें व्हेल की हड्डी से AI की भविष्यवाणी तक; 250 साल बाद खोला जाएगा

4 जुलाई को अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर 408 किलो का एक टाइम कैप्सूल जमीन में दफनाया जाएगा। इसे फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में दफनाया जाएगा और 250 साल बाद यानी 2276 में खोला जाएगा। इसकी जानकारी नेशनल पार्क सर्विस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज की गई है, ताकि 250 साल बाद आने वाली पीढ़ियां इसे ढूंढ़ सकें और इसके बारे में जान सकें। इस कैप्सूल में 50 राज्यों और आम लोगों की ओर से चुनी गई यादगार चीजें रखी गई हैं, जिसमें व्हेल की हड्डी, दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत, राइट बंधुओं के विमान का कपड़ा, AI की भविष्यवाणी और कई ऐतिहासिक दस्तावेज शामिल हैं। टाइम कैप्सूल बंद पेटी या कंटेनर होता है, जिसमें किसी दौर की चीजें सुरक्षित रखी जाती हैं, ताकि भविष्य की पीढ़ियां उस समय के समाज, तकनीक, संस्कृति और जीवन को समझ सकें। कैप्सुल सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई खास तकनीकें टाइम कैप्सूल बनाना जितना मुश्किल नहीं था, उससे बड़ी चुनौती उसे 250 साल तक सुरक्षित रखना था। वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि जमीन के नीचे रखी चीजें ढाई सौ साल बाद भी सुरक्षित कैसे मिले। इस वजह से प्रोजेक्ट से जुड़े कई विशेषज्ञों को इसमें शामिल किया गया। कई साल की रिसर्च के बाद ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जो पानी, नमी, जंग और मौसम के असर से कैप्सूल को बचा सके। यह कैप्सूल चौकोर नहीं, बल्कि बेलन (सिलेंडर) के आकार का है। वैज्ञानिकों के अनुसार चौकोर डिब्बों के कोने समय के साथ कमजोर पड़ जाते हैं और वहीं से पानी अंदर जाने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। टाइम कैप्सूल को कैसे सील किया गया? कैप्सूल को कार्यक्रम के दिन सील नहीं किया जाएगा। इसे पहले ही पूरी तरह सील किया जा चुका है। 4 जुलाई को इसे सिर्फ फिलाडेल्फिया में जमीन के नीचे स्थापित किया जाएगा। कैप्सूल को सील करने के लिए खास धातु इंडियम का इस्तेमाल किया गया है। यह नरम धातु ढक्कन बंद करते समय छोटी-से-छोटी दरार भर देती है। इससे कैप्सूल पूरी तरह सील रहता है और अंदर रखा सामान लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। अगर कैप्सूल में बहुत ज्यादा नमी होती तो कागज और दूसरी वस्तुएं खराब हो सकती थीं। वहीं नमी पूरी तरह खत्म करने पर कुछ चीजें सूखकर टूट सकती थीं। इसलिए वैज्ञानिकों ने कैप्सूल के अंदर 35% नमी रखी है। कैप्सूल को करीब 10 फीट नीचे दफनाया जाएगा। इस गहराई पर तापमान में उतार-चढ़ाव कम होता है। तेज गर्मी, कड़ाके की ठंड और सतह पर आने वाले तूफानों का असर भी बहुत कम पड़ता है। 250 साल तक न पानी पहुंचेगा, न जंग लगेगी वैज्ञानिकों के मुताबिक, जमीन के नीचे रखे जाने वाले किसी भी टाइम कैप्सूल का सबसे बड़ा दुश्मन पानी होता है। इसीलिए कैप्सूल के ऊपर एक और स्टील का सिलेंडर लगाया जाएगा। दोनों के बीच हवा की एक परत रहेगी, जो बाहर से आने वाले पानी को रोकने में मदद करेगी। यह ठीक उसी सिद्धांत पर काम करेगा, जैसे पानी में उल्टी बाल्टी डुबोने पर उसके अंदर हवा फंसी रहती है। अगर भविष्य में भूजल का स्तर बढ़ जाए या बाढ़ आ जाए, तब भी बेल जार के भीतर मौजूद हवा पानी को कैप्सूल तक पहुंचने से रोकेगी। इसे बनाने वाली टीम के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल बेरिला ने कहा, अगर इस टाइम कैप्सूल में पानी पहुंचा, तो इसका मतलब होगा कि फिलाडेल्फिया शहर करीब 6 फीट पानी में डूब चुका है। और अगर ऐसा हुआ तो टाइम कैप्सूल नहीं, बल्कि पूरी दुनिया एक बड़े प्राकृतिक संकट से जूझ रही होगी। दुनिया के सबसे चर्चित टाइम कैप्सूल ————————————- ट्रम्प ने जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में UFC फाइट कराई:अब तक का सबसे महंगा शो, ₹567 करोड़ खर्च; जीत के बाद विजेता राष्ट्रपति से मिला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 14 जून को व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप यानी UFC मुकाबलों के साथ अपना 80वां जन्मदिन मनाया। UFC ने इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर (567 करोड़ रुपए) खर्च किए। ये अब तक का सबसे महंगा UFC आयोजन है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Vaibhav Sooryavanshi: इंग्लैंड सीरीज में नहीं होगा वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू? BCCI ने दिया ये बड़ा संकेत

वैभव सूर्यवंशी टीम इंडिया के लिए पहला मैच कब खेलेंगे? भारतीय क्रिकेट फैंस के बीच ये मिलियन डॉलर का सवाल बना हुआ है। अब भारत और इंग्लैंड का दूसरा टी20 मैच 4 जुलाई को मैंचेस्टर में खेला जाएगा। इन सबके बीच BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने टीम मैनेजमेंट के उस फैसले का समर्थन किया है, जिसमें वैभव सूर्यवंशी को अभी तक इंटरनेशनस क्रिकेट में पदार्पण का मौका नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि जब सही समय आएगा, तब वैभव को जरूर मौका मिलेगा।

भारतीय क्रिकेट टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने प्रेस कांफ्रेंस की और मीडिया के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने भी साफतौर पर इस बात का संकेत दे दिया है कि अभी भी वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका शायद नहीं मिलेगा और टीम इंडिया संजू सैमसन को बैक करेगी।

वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर BCCI ने तोड़ी चुप्पी

15 साल के वैभव सूर्यवंशी को आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद पहली बार भारतीय टीम में जगह मिली थी। उन्होंने पूरे सीजन में 237.30 के स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था। हालांकि, टीम में चुने जाने के बावजूद उन्हें अब तक अंतिम एकादश में खेलने का मौका नहीं मिला है। आयरलैंड के खिलाफ सीरीज और इंग्लैंड के खिलाफ बारिश से प्रभावित पहले टी20 मैच में भी वह बाहर बैठे रहे। टीम प्रबंधन फिलहाल टॉप ऑर्डर में संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन की मौजूदा जोड़ी पर ही भरोसा जता रहा है।

भारतीय टीम प्रबंधन का कहना है कि वह उस टीम संयोजन में कोई बदलाव नहीं करना चाहता, जिसने भारत को 2026 का टी20 विश्व कप जिताया था। इसी वजह से युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को अभी इंतजार करने के लिए कहा गया है। हालांकि, कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर के इस फैसले की कई लोग आलोचना भी कर रहे हैं। इस मामले पर भारतीय क्रिकेट बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि वैभव बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और उन्होंने आईपीएल में अपने प्रदर्शन से यह साबित भी किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने टीम प्रबंधन और कोच के खिलाफ कई टिप्पणियां देखी हैं, लेकिन अंतिम फैसला कप्तान और कोच ही लेते हैं। राजीव शुक्ला ने कहा कि टीम मैनेजमेंट लगातार हालात पर नजर रखे हुए है। जैसे ही सही मौका मिलेगा, वैभव सूर्यवंशी को भारतीय टीम की ओर से खेलने का अवसर जरूर दिया जाएगा।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि टीम चयन को लेकर टीम मैनेजमेंट की आलोचना करना सही नहीं है। उनका कहना है कि युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को कब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौका देना है, इसका फैसला ड्रेसिंग रूम में मौजूद कप्तान, कोच और टीम प्रबंधन पर ही छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा, “ऐसे फैसले टीम प्रबंधन बेहतर तरीके से ले सकता है। इसलिए इस मुद्दे पर बेवजह की चर्चा और आलोचना करने की कोई जरूरत नहीं है।”

त्योहार-शादी के सीजन में देश में हो सकती है चांदी की कमी, भाव 100 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है

अगर इंपोर्ट पर पाबंदी जारी रहती है तो देश में त्योहारों और शादी के सीजन में चांदी की कमी हो सकती है। आगे चांदी की डिमांड बढ़ने की संभावना है। मेटल्स फोकस में सीनियर कंसल्टेंट (साऊथ एशिया एंड मिडिल ईस्ट) हर्षल बरोट ने यह अनुमान जताया।

ज्यादातर तरह के सिल्वर के लिए लाइसेंस जरूरी

ज्यादातर एचएस कोड्स के तहत अभी सिल्वर के इंपोर्ट के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) से लाइसेंस जरूरी है। इसके चलते सिल्वर की नई सप्लाई हासिल करना मुश्किल हो गया है। इस वजह घरेलू बाजार की निर्भरता मौजूदा इनवेंट्रीज पर रिसाइक्ल्ड सिल्वर पर बढ़ गई है। एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में भी बिकवाली बढ़ी है। इससे प्रीमियम करीब 10 फीसदी रह गया है।

चांदी के पुराने स्टॉक से फिलहाल चल रहा काम

बारोट ने सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में कहा, “मार्केट में सप्लाई कम है। नया मेटल उपलब्ध नहीं है। इसलिए मार्केट पहले से मौजूद स्टॉक से काम चला रहा है। कुछ रिसाइकल्ड सिल्वर बाजार में आ रहा है। लेकिन, नया इंपोर्ट अभी बहुत कम हो रहा है।” फिलहाल इसका ज्यादा असर नहीं दिख रहा, क्योंकि यह कमजोर डिमांड वाला सीजन है। लेकिन, अगस्त से हालात बदल सकते हैं। इसकी वजह यह है कि आम तौर पर त्योहार और शादी के सीजन से पहले खरीदारी शुरू हो जाती है।

अगस्त-सितंबर के बाद बढ़ने लगेगी चांदी की डिमांड

उन्होंने कहा, “हमें अगस्त-सितंबर के बाद डिमांड शुरू हो जाने की उम्मीद है। आम तौर पर तब भारत में त्योहारों और शादी का सीजन शुरू हो जाता है।” उन्होंने कहा कि अगर तब तक इंपोर्ट शुरू नहीं होता है तो मार्केट में असाधारण स्थिति बन सकती है। तब डिमांड ज्यादा होगी, लेकिन सप्लाई कम होगी। उन्होंने बताया कि ट्रेडर्स इंपोर्ट के वैकल्पिक रास्तों के बारे में सोच रहे हैं। इनमें सिल्वर डोर की सोर्सिंग शामिल है। अगर इंपोर्ट शुरू हो जाता है तो घरेलू प्रीमियम घट सकता है।

अगले साल 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है सिल्वर

अभी चांदी की घरेलू मांग कम है, लेकिन कीमतों में तेजी के बावजूद इंडस्ट्रियल मांग स्ट्रॉन्ग है। बारोट ने कहा कि इनवेस्टर्स सिल्वर को लेकर बुलिश हैं। ईटीएफ में कुछ बिकवाली के बावजूद चांदी में बड़ी बिकवाली देखने को नहीं मिली है। मेटल फोकस का मानना है कि अगले साल सिल्वर की कीमतों में तेजी दिखेगी। अगले 12 महीनों में सिल्वर की कीमतें 80-85 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि अगर पिछले साल की तरह डिमांड मजबूत रहती है तो चांदी 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।

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सरकार जल्द नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का कर सकती है ऐलान, जानिए क्या है पूरा प्लान

सरकार नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का ऐलान कर सकती है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने यह बताया। इस बारे में आधिकारिक घोषणा दो हफ्ते के अंदर हो सकती है। सूत्रों ने बताया कि इस स्कीम के तहत 1,000 टन से ज्यादा सोना आने की उम्मीद है।

नई स्कीम में ज्वेलर्स होंगे कलेक्शन पार्टनर्स

देशभर के ज्वेलर्स को नई स्कीम में बतौर ‘कलेक्शन पार्टनर्स’ शामिल किया जा सकता है। उन्हें परिवारों से गोल्ड डिपॉजिट लेने की इजाजत होगी। पहले सिर्फ बैंकों को इसकी इजाजत थी। ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने कहा, “प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बतौर कलेक्शन पार्टनर्स शामिल किया जा सकता है।”

गोल्ड के इंपोर्ट में कमी लाने में मिल सकती है मदद

देश में ज्वेलर्स से जुड़ी संस्थाओं ने सरकार से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बदलाव करने की गुजारिश की है। गोल्ड का इंपोर्ट घटाने के लिए उनका जोर ऐसे सॉल्यूशंस पर है, जिसका खराब असर इस सेक्टर से जुड़े लोगों की रोजीरोटी पर नहीं पड़े। अगर देश में परिवारों में रखा 5 फीसदी सोना भी मॉनेटाइज होता है तो इससे 90 अरब डॉलर की लिक्विडिटी मुमकिन हो सकती है।

पीएम मोदी ने की थी सोना नहीं खरीदने की अपील

हाल में प्रधानमंत्री ने देश के लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। इंडिया दुनिया में सोने की सबसे ज्यादा खपत वाले देशों में शामिल है। भारत में ज्वेलरी के साथ ही सुरक्षित निवेश के लिए लोग सोना खरीदते हैं। ज्वेलरी के खरीदने से सोने का ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो पाता है। इसलिए गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के जरिए काफी सोना आ सकता है।

2015 में हुई थी गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम की शुरुआत

सरकार ने 2015 में गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (GMS) की शुरुआत की थी। इसका मकसद सोने के इंपोर्ट में कमी लाकर करेंट अकाउंट डेफिसिट को घटाना था। इनवेस्टर्स को फिजिकल गोल्ड खरीदने की जगह गोल्ड स्कीम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। इनवेस्टर्स अपना सोना बैंक लॉकर्स में डिपॉजिट कर 2.25 से 2.5 फीसदी इंटरेस्ट कमा सकते हैं। विड्रॉल के समय इनवेस्टर्स के पास फिजिकल गोल्ड या उसके बराबर पैसा वापस लेने की इजाजत थी।

पुरानी स्कीम में 10 सालों में सिर्फ 38 टन सोना आया

स्कीम की शुरुआत के 10 साल बाद तक सिर्फ 38 टन सोना ही आ सका। यह इंडिया में परिवारों के पास रखे कुल सोना का बहुत कम हिस्सा है। इंडिया में परिवारों के पास 25,000 टन सोना होने का अनुमान है। सरकार ने स्कीम में मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म डिपॉजिट रोक दी थी। इस स्कीम में इनवेस्टर्स को इंटरेस्ट का पेमेंट सरकार करती है। इस वजह से यह स्कीम सरकार के लिए नुकसानदेह रही।

पुरानी स्कीम में सरकार को उठाना पड़ा लॉस

ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के भाविक पटेल ने कहा, “आखिर में सरकार को इस स्कीम में लॉस उठाना पड़ा। सरकार को सोने की कीमतों में आए तेजी का बोझ उठाना पड़ता था। साथ ही उसे इनवेस्टर्स को सालाना 2 फीसदी इंटरेस्ट चुकाना पड़ता था।” यह स्कीम हेज्ड (Hedged) नहीं थी, जिससे विड्रॉल के समय सरकार को सोने की कीमतों में हुई वृद्धि का बोझ उठाना पड़ता था।

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इन वजहों से असफल रही पुरानी स्कीम

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि स्ट्रक्चरल वजहों से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम विफल रही। AIJGF ने कहा कि इस स्कीम में दिलचस्पी दिखाने के लिए बैंकों को किसी तरह के इनसेंटिव की व्यवस्था नहीं थी। नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम से गोल्ड के इंपोर्ट पर निर्भरता में कमी आ सकीत है। साथ ही घरों में बेकार पड़े सोने का इस्तेमाल इकोनॉमी के हित में हो सकेगा।