Blue Star के शेयर में 18% तक उछाल का दम! ब्रोकरेज ने दी खरीदने की सलाह

एसी, एयर प्योरिफायर और वॉटर कूलर बनाने वाली ब्लू स्टार लिमिटेड के शेयरों में आगे 18 प्रतिशत तक का उछाल देखने को मिल सकता है। ऐसी उम्मीद प्रभुदास लीलाधर के टारगेट प्राइस से मिली है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग के साथ कवरेज शुरू किया है। टारगेट प्राइस 1873 रुपये प्रति शेयर दिया है। यह शेयर के मौजूदा भाव से 18 प्रतिशत ज्यादा है। बीएसई पर शेयर शुक्रवार, 3 जुलाई को 1583.60 रुपये पर बंद हुआ था।

ब्रोकरेज ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में कहा कि ब्लू स्टार भारत की प्रमुख एयर कंडीशनिंग और कमर्शियल रेफ्रिजरेशन कंपनियों में से एक है। कंपनी की मौजूदगी रूम एयर कंडीशनर (RAC), कमर्शियल एयर कंडीशनर (CAC), इलेक्ट्रो-मैकेनिकल प्रोजेक्ट्स (EMP), कमर्शियल रेफ्रिजरेशन और इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस जैसे कई क्षेत्रों में है। कंपनी भारत में कूलिंग की बढ़ती मांग का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। इसके पीछे कारण हैं…

  • RAC की बढ़ती पहुंच और मार्केट शेयर में बढ़ोतरी
  • CAC और EMP में लीडरशिप
  • श्री सिटी फैसिलिटी के जरिए मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को समय पर बढ़ाना
  • डेटा सेंटर के विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से मिलने वाले नए मौके

प्रभुदास लीलाधर ने उम्मीद जताई है कि FY26-28E के दौरान ब्लू स्टार का रेवेन्यू 18.9%, EBITDA 22.9% और शुद्ध मुनाफा 24.9% CAGR (कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ेगा। इसकी वजह यूनिटरी कूलिंग प्रोडक्ट्स (UCP) और EMP दोनों कारोबारों में लगातार मांग, क्षमता का बेहतर इस्तेमाल और ऑपरेटिंग लेवरेज है। कंपनी की अच्छी कमाई की संभावना, बेहतर मुनाफे और हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग (HVAC) इंडस्ट्री में लीडरशिप को देखते हुए ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग और 1,873 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है।

Blue Star का शेयर 6 महीनों में 12 प्रतिशत कमजोर

Blue Star का मार्केट कैप 32500 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। शेयर BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर 6 महीनों में 12 प्रतिशत नीचे आया है। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 36.49 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। BSE पर शेयर का 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 2,049.95 रुपये और एडजस्टेड लो 1,450 रुपये है।

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जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 3,862.88 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 162.93 करोड़ रुपये रहा। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 11,779.23 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इस बीच शुद्ध मुनाफा 385.10 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Adani Enterprises QIP: अदाणी एंटरप्राइजेज ने लॉन्च किया QIP, 3034 रुपये का फ्लोर प्राइस तय

Adani Enterprises QIP: अदाणी एंटरप्राइजेज ने 2 जुलाई को क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) लॉन्च करने का ऐलान किया। कंपनी ने इसके लिए 3,034.68 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। यह फ्लोर प्राइस कंपनी के मौजूदा बाजार भाव 3,165 रुपये प्रति शेयर से करीब 4% कम है।

इस इश्यू के लिए SBI Capital Markets, Jefferies India, ICICI Securities और IIFL Capital Services को बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) बनाया गया है। QIP का अंतिम इश्यू प्राइस इनसे चर्चा के बाद तय होगा।

IHC करेगी $11 अरब का निवेश

इस बीच, अदाणी ग्रुप के लिए एक और बड़ी खबर आई है। अबू धाबी की International Holding Company (IHC) ओडिशा में अदाणी ग्रुप के साथ मिलकर 11.5 अरब डॉलर (करीब 98,000 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। राज्य सरकार के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।

अगर यह प्रोजेक्ट तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो यह भारत के मेटल सेक्टर का अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश हो सकता है।

50-50 की हिस्सेदारी वाला जॉइंट वेंचर

दोनों कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत IHC और अदाणी ग्रुप की 50-50% हिस्सेदारी होगी।

इस जॉइंट वेंचर के तहत एल्युमिना रिफाइनरी, एल्युमिनियम स्मेल्टर, कैप्टिव पावर प्लांट और डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनाया जाएगा। इसके साथ ओडिशा का सबसे बड़ा एल्युमिनियम कॉम्प्लेक्स भी बनेगा। इसकी उत्पादन क्षमता भी काफी ज्यादा होगी।

  • 40 लाख टन (4 MTPA) एल्युमिना
  • 20 लाख टन (2 MTPA) एल्युमिनियम
  • 10 लाख टन (1 MTPA) डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम प्रोडक्ट्स

53,500 लोगों को मिलेगा रोजगार

इस प्रोजेक्ट से बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा होंगे। राज्य सरकार के अधिकारी के मुताबिक, कुल 53,500 लोगों को रोजगार मिलेगा। इनमें 35,000 नौकरियां निर्माण के दौरान मिलेंगी। प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद 18,500 लोगों को स्थायी रोजगार मिलेगा।

अभी एल्युमिनियम कारोबार में नहीं है अदाणी ग्रुप

अदाणी ग्रुप अभी एल्युमिनियम बनाने के कारोबार में नहीं है। हालांकि, कंपनी पहले ही ओडिशा में एल्युमिना रिफाइनरी और एल्युमिनियम प्रोजेक्ट लगाने की योजना का ऐलान कर चुकी है।

वहीं, अदाणी एंटरप्राइजेज के पास गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट कॉपर स्मेल्टर है। इसे बनाने में करीब 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया गया है।

Parle Products IPO: पारले-जी बनाने वाली कंपनी का आएगा आईपीओ, ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा के वैल्यूएशन पर नजर : सूत्र

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Parle Products IPO: पारले-जी बनाने वाली कंपनी का आएगा आईपीओ, ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा के वैल्यूएशन पर नजर : सूत्र

Parle Products IPO: Parle-G, Melody और Mango Bite जैसे लोकप्रिय ब्रांड बनाने वाली Parle Products अगले साल 1 अरब डॉलर (करीब 9,530 करोड़ रुपये) से बड़ा IPO लाने की तैयारी कर रही है। मामले की जानकारी रखने वाले कई सूत्रों ने Moneycontrol को यह जानकारी दी है।

सूत्रों के मुताबिक, चूंकि ये देश प्रतिष्ठित ब्रांड है, ऐसे में प्रस्तावित IPO का साइज1 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है और अंतिम फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल कंपनी 10.5 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) से अधिक के वैल्यूएशन का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि, बाजार की स्थिति के हिसाब से IPO का साइड और वैल्यूएशन बदल सकता है।

किन बैंकों को मिल सकती है जिम्मेदारी?

सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने अप्रैल में Request for Proposal (RFP) जारी किया था। इसके बाद कई इन्वेस्टमेंट बैंकों ने अपनी प्रेजेंटेशन दी। फिलहाल कंपनी ने Kotak Mahindra Capital, Axis Capital और HSBC Securities को सलाहकार के तौर पर चुना है।

दो अन्य सूत्रों ने भी इन नामों की पुष्टि की। इनमें से एक ने बताया कि कंपनी चौथे इन्वेस्टमेंट बैंक को भी सलाहकार समूह में शामिल करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में बातचीत जारी है।

Parle Products ने क्या कहा?

Moneycontrol ने जब Parle Products से संपर्क किया तो कंपनी के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) मयंक शाह ने कहा कि कंपनी बाजार में चल रही अटकलों पर टिप्पणी नहीं करती। फिलहाल उसका पूरा फोकस कारोबार को बढ़ाने पर है। उन्होंने कहा कि हर बड़ी कंपनी की तरह Parle Products भी ग्रोथ के लिए तमाम विकल्पों का मूल्यांकन करती रहती है।

वहीं, Kotak Mahindra Capital और Axis Capital ने इस खबर पर कोई जवाब नहीं दिया। HSBC Securities ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

Parle Agro से अलग है Parle Products

विजय चौहान के अगुआई वाली Parle Products असल में जयंतीलाल चौहान, सचौना चौान नादिया चौहान के नेतृत्व वाली Parle Agro से अलग कंपनी है। Parle Agro Frooti, Appy Fizz और Bailley जैसे ब्रांड बनाती है। परिवार के बंटवारे के बाद दोनों कंपनियां स्वतंत्र रूप से कारोबार कर रही हैं।

किन कंपनियों से है मुकाबला?

भारतीय बाजार में Parle Products की प्रतिस्पर्धा Britannia, ITC (Sunfeast), Mondelez India, Perfetti, Priya Gold, Anmol Industries और Cremica जैसी कंपनियों से है।

Hurun India 500 की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, Parle Products का अनुमानित वैल्यूएशन 75,420 करोड़ रुपये था। इस वैल्यूएशन के साथ यह भारत की सातवीं सबसे मूल्यवान गैर-सूचीबद्ध (Unlisted) कंपनी थी।

पहले IPO से किया था इनकार

20 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को Melody टॉफी भेंट करने का वीडियो वायरल होने के बाद CMO मयंक शाह ने कहा था कि इससे भारतीय ब्रांड को वैश्विक पहचान मिलेगी।

उसी दौरान जब उनसे IPO की योजना के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि फिलहाल कंपनी लिस्टिंग पर विचार नहीं कर रही है। उन्होंने कहा था कि Parle Products लंबे समय से एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है और फिलहाल उसी तरह बने रहने की योजना है।

कंपनी का कारोबार कितना बड़ा है?

मुंबई के विले पार्ले में मुख्यालय वाली Parle Products की स्थापना 1929 में हुई थी। Parle-G के अलावा कंपनी के पोर्टफोलियो में KrackJack, Monaco, Hide & Seek और Poppins जैसे लोकप्रिय ब्रांड भी शामिल हैं।

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 8.5% बढ़कर 15,568.49 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, इसी दौरान उसका मुनाफा 39% घटकर 979.53 करोड़ रुपये रह गया।

बिस्किट और कन्फेक्शनरी के अलावा कंपनी केक, रस्क, आटा और ब्रेकफास्ट सीरियल जैसे सेगमेंट में भी मौजूद है। कंपनी के प्रोडक्ट अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड और मध्य-पूर्व सहित कई देशों में बिकते हैं। इसके अलावा नाइजीरिया, कैमरून, घाना, इथियोपिया, केन्या, आइवरी कोस्ट, नेपाल और मेक्सिको समेत कई देशों में इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी हैं।

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Gold Price Today: सोना ₹3000 उछला, ₹5000 महंगी हुई चांदी; कमजोर डॉलर से बढ़ी मांग

Gold Price Today: अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और वैश्विक बाजार में मजबूती के चलते गुरुवार को सोने की कीमतों में जोरदार उछाल आया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोना 3,000 रुपये बढ़कर 1,47,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे एक दिन पहले यह 1,44,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

वहीं, चांदी में भी तेजी का सिलसिला जारी रहा। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में चांदी 5,000 रुपये महंगी होकर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। पिछले सत्र में इसका भाव 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम था।

क्यों बढ़े सोने-चांदी के दाम?

कारोबारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती और अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से सोने की मांग बढ़ी है। वहीं, औद्योगिक और निवेश मांग मजबूत रहने से चांदी की कीमतों में भी तेजी बनी हुई है।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के उम्मीद से कम सख्त रुख के बाद ब्याज दरों में जल्द बढ़ोतरी की आशंकाएं कम हुईं। इससे सोने को समर्थन मिला।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल

वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड 38.75 डॉलर (करीब 1%) बढ़कर 4,070.04 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर 1.3% चढ़कर 59.89 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।

Mirae Asset Sharekhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह ने कहा कि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में नरमी आने से सोना मजबूत हुआ है। उनके मुताबिक, जापानी येन में मजबूती और बैंक ऑफ जापान के हस्तक्षेप की खबरों से डॉलर पर दबाव बना।

उन्होंने कहा कि जब डॉलर कमजोर होता है, तो दूसरी मुद्राएं रखने वाले निवेशकों के लिए सोना सस्ता हो जाता है। इससे वैश्विक मांग बढ़ती है और कीमतों को समर्थन मिलता है।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

बाजार की नजर अब अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल (Non-Farm Payrolls) आंकड़ों पर है। Motilal Oswal Financial Services के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक, यह रिपोर्ट अमेरिकी श्रम बाजार की स्थिति और फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति के संकेत दे सकती है।

एनालिस्टों का मानना है कि इन आंकड़ों के बाद सोना, चांदी और अमेरिकी डॉलर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वहीं, World Gold Council का कहना है कि साल 2026 की दूसरी छमाही सोने के लिए अहम रह सकती है। ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और भू-राजनीतिक घटनाक्रम आगे भी सोने की कीमतों की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

क्या सोना बेचकर शेयर खरीदने का समय आ गया? एक्सपर्ट रोहित श्रीवास्तव ने निफ्टी और बैंक निफ्टी पर कर दी बड़ी भविष्यवाणी

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इस विदेशी ब्रोकरेज फर्म ने प्राइवेट बैंकों में घटाया निवेश, आईटी शेयरों को पोर्टफोलियो से किया बाहर

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन का भारत के प्राइवेट बैंकों पर भरोसा घटा है। उसने अपने इंडिया मॉडल पोर्टफोलियो से निफ्टी आईटी इंडेक्स को हटा दिया है। उसने कहा है कि बाजार की रफ्तार बढ़ाने वाला कोई फैक्टर नहीं दिख रहा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन, इनफ्लेशन और मानसून से जुड़े रिस्क बाजार के लिए बड़े चैलेंज दिख रहे हैं।

शेयरों से कमाई के लिहाज से स्थितियां चुनौतीपूर्ण

Bernstein ने कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई को लेकर टेंशन कम हुआ है। क्रूड ऑयल की कीमतें भी काफी नीचे आ गई हैं। लेकिन, शेयर बाजार से कमाई के लिहाज से स्थितियां मुश्किल दिख रही हैं। कई बड़े सेक्टर बड़ी चुनौतियां का सामना कर रहे हैं। मौके मार्केट में सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों में हैं।

निफ्टी के लिए 26000 को टारगेट को बनाए रखा

बर्नस्टीन ने 1 जुलाई को जारी रिपोर्ट में ये बातें बताई हैं। उसने कहा है, “इंडिया में मार्केट के रिटर्न का आउटलुक अब भी मुश्किल दिख रहा है।” हालांकि, इस साल के अंत तक निफ्टी के 26,000 के टारगेट में उसने बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से निफ्ली करीब 8-9 फीसदी चढ़ सकता है।

पोर्टफोलियो से इन शेयरों को किया बाहर

ब्रोकरेज फर्म ने अपने पोर्टफोलियो में हाल में हुए बदलाव के तहत ICICI Bank, IndusInd Bank और निफ्टी आईटी इंडेक्स के शेयरों को बाहर कर दिया है। हालांकि, उसने Axis Bank और Zydus Life के शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि उसने फाइनेंशियल शेयरों में इस साल की शुरुआत में अपना निवेश घटाया था। इस सेक्टर को लेकर अब भी उसका एप्रोच सेलेक्टिव है।

प्राइवेट बैंकों में पहले जैसी ग्रोथ नहीं दिख रही

बड़े प्राइवेट बैंकों के बारे में बर्नस्टीन ने कहा है कि इनमें पहले की साइकिल जैसी ग्रोथ विजिबिलिटी और गवर्नेंस प्रीमियम नहीं दिख रहा। सरकारी बैंकों से प्रतियोगिता बढ़ रही है और शॉर्ट टर्म में रीरेटिंग की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। उसने कहा है कि उसने इस साल खराब प्रदर्शन की वजह से आईसीआईसीआई बैंक और इंडसइंड को पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया है।

डेटा सेंटर ईकोसिस्टम में दिख रहे मौके

शेयर बाजार के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद बर्नस्टीन के इंडिया पोर्टफोलियो ने इस साल 1.1 फीसदी रिटर्न दिया है। यह इस दौरान निफ्टी के 6.7 फीसदी के निगेटिव रिटर्न से बेहतर है। उसने कहा है कि बाजार की मौजूदा स्थितियों में सीमित मौके दिख रहे हैं। ये मौके डेटा सेंटर ईकोसिस्टम और इमर्जिंग मैन्युफैक्चरिंग थीम में दिख रहे हैं। ये मौके ज्यादातर स्मॉलकैप स्टॉक्स तक सीमित हैं, जिससे मार्केट के कुल रिटर्न पर इनका असर पड़ने की संभावना नहीं है।

Ambuja Cements Share Price: बर्नस्टीन ने इस सीमेंट स्टॉक की रेटिंग को किया अपग्रेड, जानें क्या है टारगेट प्राइस

Ambuja Cements Share Price: बर्नस्टीन ने गुरुवार, 2 जुलाई को अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड (Ambuja Cements Ltd) को उसकी पिछली रेटिंग “मार्केट परफॉर्म” से “आउटपरफॉर्म” में अपग्रेड किया। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि भारत के दो सबसे बड़े सीमेंट प्रोड्यूसर के बीच वैल्यूएशन का अंतर अब टिकाऊ नहीं रहा। अपग्रेड के बावजूद, बर्नस्टीन ने अंबुजा सीमेंट्स पर अपना प्राइस टारगेट ₹542 प्रति शेयर से घटाकर ₹486 कर दिया, जिसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से 16% की बढ़त की संभावना है।

ब्रोकरेज ने कहा कि अंबुजा, अल्ट्राटेक सीमेंट के मुकाबले भारी डिस्काउंट पर ट्रेड कर रही है, भले ही यह कैपेसिटी के हिसाब से देश की दूसरी सबसे बड़ी सीमेंट प्रोड्यूसर बन गई है।

बर्नस्टीन के अनुसार, अल्ट्राटेक की एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹3.6 लाख करोड़ है और इसकी सीमेंट कैपेसिटी 206 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है, जबकि श्री सीमेंट की एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹90,000 करोड़ है और इसकी कैपेसिटी 69 MTPA है। इसकी तुलना में, अंबुजा की एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹1.2 लाख करोड़ है, जबकि इसकी कैपेसिटी 109 MTPA है।

ब्रोकरेज ने कहा कि अंबुजा की वैल्यू अभी लगभग एक नया ग्रीनफील्ड सीमेंट प्लांट बनाने की लागत के बराबर है, जो कंपनी के स्केल या कमाई की क्षमता को नहीं दिखाता है। बर्नस्टीन को उम्मीद है कि अंबुजा की चल रही कैपेसिटी बढ़ाने और ऑपरेशनल सुधारों से आगे चलकर अल्ट्राटेक और श्री सीमेंट दोनों के साथ प्रति टन EBITDA का अंतर कम करने में मदद मिलेगी।

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि आने वाले सालों में मजबूत एग्जीक्यूशन से री-रेटिंग को बढ़ावा मिलना चाहिए क्योंकि कंपनी बड़ी कंपनियों के साथ प्रॉफिट का अंतर कम कर रही है।

अंबुजा सीमेंट्स पर 46 एनालिस्ट की कवरेज है, जिनमें से 33 ने स्टॉक पर “बाय” रेटिंग दी है, 10 ने “होल्ड” कहा है, जबकि तीन अन्य ने “सेल” रेटिंग दी है।

अंबुजा सीमेंट्स के शेयर अभी गुरुवार को 1.7% बढ़कर ₹426.5 पर ट्रेड कर रहे हैं। स्टॉक अपने 52-हफ़्ते के हाई ₹624 से 32% नीचे है। 2027 में अब तक स्टॉक 24% नीचे आ चुका है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Vedanta Oil and Gas के शेयरों में तूफानी तेजी, समूह की दूसरी कंपनियों के स्टॉक्स भी उछले

वेदांता ऑयल एंड गैस के शेयरों में 2 जुलाई को भी तेजी देखने को मिली। बाजार खुलने के कुछ ही देर बाद शेयरों को पंख लग गए। 12 बजे शेयर 8.69 फीसदी के उछाल के साथ 42 रुपये पर चल रहा था। एक हफ्ते में यह शेयर 28 फीसदी से ज्यादा उछला है। 1 जुलाई को भी इस शेयर में जबर्दस्त तेजी आई थी।

Vedanta Iron and Steel में लगा अपर सर्किट 

Vedanta ग्रुप की दूसरी कंपनियों के शेयरों में भी जबर्दस्त तेजी। वेदांता ने अपने बिजनेस का डीमर्जर किया था। इसकी चार कंपनियां 15 जून को स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हुई थी। गुरुवार को सभी कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी। सबसे ज्यादा तेजी Vedanta Iron and Steel में दिखी। 10 फीसदी चढ़ने के बाद इस शेयर में अपर सर्किट लग गया। यह शेयर एक हफ्ते में 31 फीसदी से ज्यादा उछला है।

ग्रुप की दूसरी कंपनियों के शेयरों को भी लगे पंख

2 जुलाई को 12 बजे वेदांता आयरन एंड स्टील का शेयर 10 फीसदी चढ़कर 42.65 रुपये पर चल रहा था। Vedanta Oil and Gas का शेयर 8.76 फीसदी के उछाल के साथ 42.07 रुपये पर चल रहा था। Vedanta Power का शेयर 4.95 फीसदी की तेजी के साथ 46.40 रुपये पर था। Vedanta Aluminium का शेयर 1.36 फीसदी की तेजी के साथ 458.40 रुपये पर चल रहा था।

1 जुलाई को भी इस वजह से आई थी तूफानी तेजी

1 जुलाई को भी इन चारों कंपनियों के शेयरों को पंख लग गए थे। इसकी वजह यह थी कि ये शेयर ट्रेड-टू-ट्रेड सेगमेंट से बाहर आए थे। ये चारों शेयर स्टॉक एक्सचेंजों में 15 जून को लिस्ट हुए थे। पहले 10 कारोबारी दिनों के लिए इन्हें टी2टी सेगमेंट में डाला गया था। T2T सेगमेंट में शामिल शेयरों में हर ट्रांजेक्शन पर डिलीवरी जरूरी होती है। इन शेयरों में इंट्रा-डे बाइंग और सेलिंग की इजाजत नहीं होती है। शेयर की कीमत चढ़ने या उतरने की स्थिति में 5 फीसदी पर ही सर्किट लग जाता है।

वेदांता एल्युमीनियम के शेयरों का 550 रुपये टारगेट प्राइस

बाजार के जानकारों का कहना है कि वेदांता का डीमर्जर सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इससे शेयरों में तेजी दिख रही है। डीमर्जर के बाद वेदांता की लिस्टेड कंपनियों की संख्या 5 हो गई है। वेदांता ग्रुप की कंपनियों को लेकर एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। एमके ग्लोबल ने वेदांता एल्युमीनियम के शेयरों को खरीदने की राय दी है। उसने शेयर के लिए 550 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है।

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वेदांता पावर का बड़ा फ्यूचर प्लान 

ब्रोकरेज फर्म पीएल कैपिटल ने वेदांता पावर के बारे में कहा है कि कंपनी स्थापित क्षमता के लिहाज से भारत के टॉप पांच प्राइवेट बिजली उत्पादक कंपनियों में शामिल है। कंपनी FY33 तक टॉप 3 प्राइवेट बिजली उत्पादक कंपनियों में अपनी जगह बनाना चाहती है। कंपनी कोयला आधारित अपनी क्षमता 4.2GW से बढ़ाकर इस वित्त वर्ष के अंत तक 4.8GW करना चाहती है। 2 जुलाई को शेयर बाजारों में तेजी दिखी। निफ्टी और सेंसेक्स करीब 0.50 फीसदी ऊपर चल रहे थे।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

SIP Calculator: ₹1000 की SIP से कितने समय में बनेंगे ₹10 लाख? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP Calculator: अगर आप हर महीने सिर्फ 1,000 रुपये की SIP शुरू करते हैं, तो भी लंबी अवधि में 10 लाख रुपये का फंड बना सकते हैं। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आपको औसतन कितना सालाना रिटर्न मिलता है। जितना ज्यादा रिटर्न होगा, आपका लक्ष्य उतनी जल्दी पूरा होगा।

आइए 10%, 12% और 15% के अनुमानित सालाना रिटर्न के आधार पर समझते हैं कि 10 लाख रुपये का फंड बनने में कितना समय लग सकता है।

₹10 लाख का फंड बनने में कितना समय लगेगा?

अनुमानित सालाना रिटर्न
₹10 लाख बनने में अनुमानित समय

10%करीब 22 साल 5 महीने
12%करीब 20 साल 1 महीना
15%करीब 17 साल 5 महीने

नोट: यह कैलकुलेशन हर महीने 1,000 रुपये की SIP और मंथली कंपाउंडिंग के आधार पर की गई है। म्यूचुअल फंड का रिटर्न तय नहीं होता। वास्तविक रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

रिटर्न में थोड़ा फर्क, समय में बड़ा अंतर

सिर्फ 2% या 3% ज्यादा रिटर्न भी लंबी अवधि में बड़ा असर डालता है। 10% रिटर्न पर जहां 10 लाख रुपये का फंड बनाने में करीब 22 साल 5 महीने लगते हैं, वहीं 12% रिटर्न मिलने पर यह समय करीब 20 साल रह जाता है। अगर औसतन 15% रिटर्न मिलता है, तो यही लक्ष्य करीब 17 साल 5 महीने में हासिल हो सकता है।

यही कंपाउंडिंग की ताकत है। समय के साथ आपके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी कमाई करने लगता है।

स्टेप-अप SIP से लक्ष्य जल्दी होगा पूरा

अगर आपकी सैलरी हर साल बढ़ती है, तो SIP भी हर साल बढ़ाना समझदारी हो सकती है। इसे स्टेप-अप SIP कहा जाता है।

मान लीजिए आपने 1,000 रुपये महीने से SIP शुरू की। अगले साल इसे 1,100 रुपये कर दिया। तीसरे साल 1,210 रुपये और इसी तरह हर साल 10% बढ़ाते रहे। इससे आपका निवेश हर साल बढ़ता जाएगा और कंपाउंडिंग का फायदा भी ज्यादा मिलेगा।

नतीजा यह होगा कि 10 लाख रुपये का लक्ष्य सामान्य SIP के मुकाबले कम समय में हासिल हो सकता है। साथ ही, लंबे समय में आपका कुल निवेश और अंतिम फंड दोनों काफी बड़े हो सकते हैं।

सामान्य SIP से ₹10 लाख10% स्टेप-अप SIP से ₹10 लाखसमय की बचत
अनुमानित सालाना रिटर्न

करीब 23.1 सालकरीब 17.2 सालकरीब 6 साल10.00%
करीब 20.8 सालकरीब 16.3 सालकरीब 4.5 साल12.00%
करीब 18.3 सालकरीब 15 सालकरीब 3.3 साल15.00%

निवेश करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • SIP जितनी जल्दी शुरू करेंगे, कंपाउंडिंग का फायदा उतना ज्यादा मिलेगा।
  • बाजार में गिरावट आने पर भी SIP बंद करने के बजाय जारी रखना बेहतर माना जाता है।
  • अगर आपकी कमाई बढ़ रही है, तो हर साल SIP में भी बढ़ोतरी करें।
  • निवेश हमेशा अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर करें।

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Gold Outlook: 2026 की दूसरी छमाही में घटेंगे या बढ़ेंगे सोने के दाम? वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट ने बताए बड़े ट्रिगर

Gold Outlook: 2026 की दूसरी छमाही में सोने की चाल कई बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। इनमें सबसे अहम हैं भू-राजनीतिक तनाव, ब्याज दरें और निवेशकों का रुख। यह बात वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने अपनी Gold Mid-Year Outlook 2026 रिपोर्ट में कही है।

इस साल की पहली छमाही सोने के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाली रही। जनवरी के आखिर में सोना 5,405 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद जून में कीमत गिरकर 4,002 डॉलर प्रति औंस तक आ गई। यानी रिकॉर्ड हाई से 26% की गिरावट। इसके बावजूद पिछले एक साल में सोना सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले एसेट्स में शामिल है। इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बढ़ा है और वोलैटिलिटी 30% तक पहुंच गई है।

सबसे बड़ा असर किसका रहा?

WGC का कहना है कि पहली छमाही में अमेरिका-ईरान तनाव जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने सोने को सबसे ज्यादा सपोर्ट दिया। इसके अलावा निवेशकों की खरीद-बिक्री और मुनाफावसूली का भी असर दिखा।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की कीमतों में सबसे ज्यादा हलचल एशिया और अमेरिका के ट्रेडिंग घंटों के दौरान हुई। इससे साफ है कि अब एशियाई निवेशकों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

आगे क्या हो सकता है?

WGC का मानना है कि मौजूदा कीमतें इस उम्मीद को दिखाती हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल अक्टूबर तक कम से कम एक बार ब्याज दर बढ़ा सकता है। इसके अलावा Bank of England, Bank of Japan और European Central Bank भी सख्त मौद्रिक नीति जारी रख सकते हैं।

अगर ऐसा होता है तो साल के आखिर तक सोना करीब 4,100 डॉलर प्रति औंस के आसपास रह सकता है। इसमें करीब 5% ऊपर या नीचे का उतार-चढ़ाव संभव है।

किन वजहों से बढ़ सकती हैं कीमतें?

अगर दुनिया में तनाव बढ़ता है, अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ती है या ब्याज दरों को लेकर बाजार की सोच बदलती है, तो सोना फिर से तेजी पकड़ सकता है। हालांकि 4,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जाने के लिए दुनिया की अर्थव्यवस्था में बड़ी सुस्ती जैसी स्थिति बननी होगी।

दूसरी तरफ, अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, ब्याज दरें उम्मीद से ज्यादा बढ़ती हैं और निवेशक शेयर जैसे जोखिम वाले एसेट्स की तरफ लौटते हैं, तो सोने पर दबाव बन सकता है।

WGC का कहना है कि अगर सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे टिकता है तो बिकवाली बढ़ सकती है। लेकिन इतिहास बताता है कि बड़ी गिरावट के बाद केंद्रीय बैंक, बड़े निवेशक और आम खरीदार फिर से खरीदारी शुरू कर देते हैं। इससे कीमतों को सहारा मिल सकता है।

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