‘जोहो का नाम लिया और 90% कम हो गई कीमत’ Zoho के को-फाउंडर ने शेयर किया किस्सा

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस की कीमत को लेकर जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू का एक दावा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। जोहो के को-फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने दावा किया कि एक भारतीय कस्टमर को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस रिन्यूअल की कीमत में 90 परसेंट की कमी मिली, जब उसने सॉफ्टवेयर की बड़ी कंपनी को बताया कि वह जोहो के ऑफिस-सूट प्रोडक्ट्स को देख रही है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की गई अपनी पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने बताया कि, संबंधित ग्राहक पहले से जोहो के कुछ प्रोडक्ट्स इस्तेमाल कर रहा था। उनके अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने लाइसेंस रिन्यूअल साइकिल के दौरान कीमत में तेजी से बढ़ोतरी की थी। इसके बाद ग्राहक ने कंपनी को बताया कि वह जोहो के ऑफिस सॉफ्टवेयर को अपनाने पर विचार कर रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई पोस्ट

श्रीधर वेम्बू ने कस्टमर के हवाले से कहा, “माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस का एक बड़ा लाइसेंस रिन्यूअल आया और उन्होंने कीमत में भारी बढ़ोतरी कर दी। हमने उन्हें बताया कि हम जोहो ऑफिस सूट देख रहे हैं और उन्होंने कीमत में 90 परसेंट की कमी कर दी।” उन्होंने आगे कहा कि कस्टमर ने बाद में कंपनी के पैसे बचाने में मदद करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, “भले ही हमारा ऑफिस सूट खरीदा न हो।” श्रीधर वेम्बू ने अपनी पोस्ट में ग्राहक की पहचान, माइक्रोसॉफ्ट के अनुबंध का आकार या छूट किन शर्तों पर दी गई, इसकी कोई जानकारी शेयर नहीं की।

उन्होंने सुझाव दिया कि जिन संस्थानों या कंपनियों का माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस नवीनीकरण होने वाला है, वे बातचीत के दौरान जोहो को एक संभावित ऑप्शन के रूप में सामने रख सकते हैं। श्रीधर वेम्बू ने ये एग्जांपल तकनीकी क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर अपनी बात रखते हुए शेयर किया। वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए मॉडलों को लेकर चर्चा कर रहे थे और उनका कहना था कि चीन के ओपन-सोर्स एआई मॉडल्स से बढ़ते मुकाबले के कारण बड़ी टेक कंपनियों को भी अपनी रणनीति और पेशकश में अधिक आक्रामक बदलाव करने पड़ रहे हैं।

श्रीधर वेम्बू ने कहा कि, सॉफ्टवेयर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को मिलता है। उनके अनुसार, जब बाजार में कई मजबूत विकल्प मौजूद होते हैं, तो बड़ी कंपनियां मनमाने तरीके से कीमतें तय नहीं कर पातीं और ग्राहकों को बेहतर दाम व विकल्प मिलते हैं। उसी पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े एंटीट्रस्ट मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि साल 2000 में एक संघीय अदालत ने कंपनी को मोनोपॉली से जुड़े मामले में दोषी माना था।

वेम्बू के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर और क्लाउड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहना जरूरी है, क्योंकि इससे बाजार संतुलित रहता है और ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिलते हैं। श्रीधर वेम्बू ने दावा किया कि माइक्रोसॉफ्ट लंबे समय से अपने ग्राहकों से अधिक कीमत वसूलती रही है।

ईरान के सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार में नितिन नबीन और खड़गे को न्योता, भारत के कई नेताओं को भी मिला आमंत्रण

ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार से पहले भारत की सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी पार्टी कांग्रेस दोनों से संपर्क किया है। CNN-News18 के सूत्रों के अनुसार, ईरान ने भारत के सभी राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को निमंत्रण भेजा है।

सूत्रों ने बताया कि, यह निमंत्रण BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, जो वर्तमान में कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग प्रमुख हैं, को भेजा गया है।

सूत्रों के मुताबिक, खड़गे ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वे निमंत्रण स्वीकार करेंगे या नहीं। साथ ही, वे कांग्रेस के उस प्रतिनिधिमंडल के गठन पर भी फैसला लेंगे जो अंतिम संस्कार के लिए तेहरान जा सकता है।

इसके अलावा, ईरान ने BJP और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती को भी इस राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।

सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कार की तैयारी

यह निमंत्रण भारत के सभी राजनीतिक दलों तक तेहरान की पहुंच को दर्शाता है। बता दें कि ईरान अपने इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक की तैयारी कर रहा है, जो इस साल की शुरुआत में अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान के दौरान खामेनेई की मौत के बाद आयोजित किया जा रहा है।

वहीं, भारत सरकार पहले ही तय कर चुकी है कि वह तेहरान में होने वाले अंतिम संस्कार समारोह में अपना आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड) करेंगे। उम्मीद है कि वे कई दिनों तक चलने वाले राजकीय अंतिम संस्कार के दौरान भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनकी यह यात्रा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए निमंत्रण के बाद हो रही है।

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और कांग्रेस नेताओं को निमंत्रण देने के अलावा, ईरान ने शिया समुदाय के कई भारतीय सांसदों को भी अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, जिनमें रुहुल्लाह मेहदी, हाजी हनीफा, इमरान मसूद और अफजल अंसारी शामिल हैं।

बता दें कि ईरान ने इस हफ्ते के आखिर से कई अंतिम संस्कार समारोहों की योजना बनाई है। खमेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान की ग्रैंड मोसाल्ला में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा और उसके बाद दूसरे शहरों में भी समारोह आयोजित किए जाएंगे।

वहीं, ईरान के अधिकारियों का अनुमान है कि सार्वजनिक अंतिम संस्कार में 1.5 करोड़ से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जिससे यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार बन सकता है।

ईरान में अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज

फिलहाल, ईरान की राजधानी में तैयारियां तेज हो गई हैं, समारोह से पहले ग्रैंड मोसाला कॉम्प्लेक्स के आस-पास खामेनेई की बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगाई गई हैं, सड़कों को कुछ हद तक बंद कर दिया गया है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सरकारी टेलीविजन ने अंतिम संस्कार में आने से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की अपील की है और अंतिम संस्कार के दौरान तापमान बढ़ने की संभावना को देखते हुए लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है।

सार्वजनिक समारोहों के अलावा, तेहरान शुक्रवार को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के लिए एक अलग कार्यक्रम भी आयोजित कर रहा है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि इसमें लगभग 30 देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

ईरान ने नहीं दिया यूरोपीय देशों को निमंत्रण 

हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि उसने यूरोपीय देशों को आधिकारिक तौर पर कोई निमंत्रण नहीं भेजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हालिया संघर्ष के दौरान यूरोपीय सरकारों पर “इतिहास के गलत पक्ष” में खड़े होने का आरोप लगाया और अमेरिका-इजराइल सैन्य अभियान पर उनके रुख की आलोचना की।

गौरतलब है कि यह अंतिम संस्कार पहले युद्ध की वजह से टाल दिया गया था। अब यह ऐसे समय में हो रहा है, जब ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में संघर्ष रोकने के लिए एक शुरुआती समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding – MoU) पर सहमति बनी है। हालांकि, इस समझौते को लागू करने को लेकर दोनों देश अब भी एक-दूसरे को चेतावनी दे रहे हैं।

अधिकारियों ने अंतिम संस्कार के दौरान तेहरान के साथ-साथ पवित्र शहर कोम और मशहद में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। राजधानी में होने वाले कार्यक्रमों के बाद, खमेनेई के पार्थिव शरीर को इराक के पवित्र शहर नजफ और कर्बला ले जाए जाने की उम्मीद है। इसके बाद, 9 जुलाई को मशहद में स्थित इमाम रजा के मकबरे में उन्हें दफनाया जाएगा, जो उनका जन्मस्थान भी है।

फिलहाल यह अभी स्पष्ट नहीं है कि खमेनेई के बेटे और उत्तराधिकारी, मोजतबा खमेनेई, अंतिम संस्कार के दौरान सार्वजनिक रूप से सामने आएंगे या नहीं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कोई भी घोषणा ‘सर्वोच्च नेता’ के कार्यालय से की जाएगी।

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UP के मजदूरों को बड़ी राहत, अब हर दिन मिलेंगे कम से कम ₹300, 125 दिन रोजगार की भी गारंटी

उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में 1 जुलाई 2026 से बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। इस नई योजना के तहत अब प्रदेश के पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों की रोजगार गारंटी मिलेगी।

इस योजना के समुचित कार्यान्वयन के लिए योगी सरकार ने कमर कस ली है। करीब 20 वर्षों तक ग्रामीण रोजगार की रीढ़ रहे मनरेगा की जगह अब यह नया ढांचा ले रहा है। यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, रोजगार बढ़ाएगा और गांवों में स्थायी विकास कार्यों को गति देगा।

 

यूपी के ग्रामीण परिवारों को होगा फायदा

 

उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े ग्रामीण आबादी वाले राज्यों में शामिल है, जहां लाखों परिवार रोजगार के लिए मनरेगा पर निर्भर रहे हैं। नई योजना लागू होने के बाद यूपी के ग्रामीण मजदूरों को कई बड़े लाभ मिलने वाले हैं। अब प्रदेश के पात्र ग्रामीण परिवारों को सालाना 100 दिनों के बजाय 125 दिनों की रोजगार गारंटी मिलेगी। साथ ही नई व्यवस्था के तहत अब राज्य में मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं होगी। इससे राज्य के लाखों ग्रामीण मजदूरों को सीधा फायदा मिलेगा। राष्ट्रीय औसत मजदूरी 298.8 रुपये प्रतिदिन से बढ़कर 327.4 रुपये प्रतिदिन हो गई है। योगी सरकार ने बढ़ी हुई मजदूरी देने के लिए सारे प्रबंध पहले से कर रखे हैं। 

 

वैज्ञानिक तरीके से विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी 

 

मनरेगा की तुलना में सबसे बड़ा बदलाव जियोस्पेशियल प्लानिंग को लेकर देखा जा रहा है। पहले जहां स्थानीय मांग के आधार पर कार्यों को मंजूरी दी जाती थी, वहीं अब गांवों में सैटेलाइट डेटा, भूमि रिकॉर्ड और बुनियादी ढांचे की जरूरतों के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी। इन्हीं योजनाओं के अनुसार तय होगा कि सरकारी धन कहां और किस कार्य पर खर्च किया जाएगा। वहीं अब पहले की तरह केवल मांग के आधार पर रोजगार नहीं मिलेगा। प्रदेश के गांवों में पहले से तैयार विकास योजनाओं के आधार पर काम तय किए जाएंगे।

 

निगरानी जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल प्लानिंग टूल्स के जरिए होगी 

 

अब यूपी के गांवों में विकास कार्यों की योजना और निगरानी जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल प्लानिंग टूल्स के जरिए होगी। इससे काम की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया जा रहा है। वीबी-जी राम जी एक्ट के तहत उत्तर प्रदेश में ऐसे कार्यों को प्राथमिकता मिलेगी जो लंबे समय तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करें। इसमें सड़क निर्माण, सिंचाई व्यवस्था, जल संरक्षण परियोजनाएं और स्थायी सामुदायिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है। अब विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं को आपस में जोड़कर परियोजनाओं को लागू किया जा सकेगा। इससे कार्यों के दोहराव को रोका जा सकेगा, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विकास कार्यों की दक्षता में सुधार आएगा।

रूस खुद बन गया भारतीय तेल का खरीदार! यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने ऐसा क्या कर दिया वहां की रिफाइनरियों के साथ?

यूक्रेन के भीषण ड्रोन हमलों ने रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। इससे वहां की तेल रिफाइनरियों का कामकाज ठप पड़ गया है। इस संकट के कारण रूस को अपने इतिहास में पहली बार ईंधन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच खबर आ रही है कि इस कमी को दूर करने के लिए अब रूस ने समुद्र के रास्ते भारत से गैसोलीन का आयात करना शुरू कर दिया है।

11 टाइम जोन वाले रूस में ईंधन की राशनिंग, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें

यूक्रेन के हमलों के बाद रूस के सभी 11 टाइम जोन में ईंधन का संकट गहरा गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि देश में ईंधन की राशनिंग करनी पड़ रही है, पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी हैं और वहां गैसोलीन की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस संकट पर क्रेमलिन (रूस के राष्ट्रपति कार्यालय) ने बयान जारी कर कहा है कि रूस स्वीकार्य कीमतों पर ईंधन आयात करने के लिए अन्य देशों के संपर्क में है और लगातार चर्चा कर रहा है। वैसे इस मामले पर रूस के ऊर्जा मंत्रालय और भारत के तेल मंत्रालय ने तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की है।

भारत से भेजी जा चुकी है 60000 टन से अधिक गैसोलीन

उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों की मानें तो भारत से कम से कम 60000 मीट्रिक टन गैसोलीन रूस के लिए रवाना की जा चुकी है। एक अन्य सूत्र ने पुष्टि की है कि दो तेल टैंकर रूस भेजे गए हैं। इनमें से हर में 30000 से 40000 टन गैसोलीन लोड है। वैसे अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि भारत की कौन सी रिफाइनरी कंपनी रूस को इस गैसोलीन की सप्लाई कर रही है।

आपको बता दें कि रूस अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए हर महीने विभिन्न देशों से कुल 400000 टन गैसोलीन आयात करने की योजना बना रहा है। इसमें उसका पड़ोसी देश बेलारूस भी शामिल है। बेलारूस ने पहले ही रूस को ईंधन का निर्यात करना शुरू कर दिया है। रूस में गर्मियों के मौसम में ईंधन की मांग काफी बढ़ जाती है और इस दौरान वहां रोजाना कम से कम 110000 टन गैसोलीन की खपत होती है।

पुतिन ने माना – ड्रोन हमलों से रिफाइनरियों को पहुंचा नुकसान

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सरकारी मंत्रियों और अन्य अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में खुद यह स्वीकार किया है कि तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी हुई है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि रूस इस संकट से प्रभावी ढंग से निपट रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक बेलारूस ने जून के पहले पखवाड़े में मई के पहले पखवाड़े की तुलना में रूस को रेलवे के जरिए की जाने वाली गैसोलीन की आपूर्ति को लगभग तीन गुना बढ़ाकर 70000 टन से अधिक कर दिया है।

रूस की संसद ने टैक्स कोड में किया बदलाव, मिलेगी सब्सिडी

यूक्रेनी ड्रोन हमलों से पैदा हुए इस ईंधन संकट से निपटने के लिए रूसी संसद ने पिछले हफ्ते अपने टैक्स कोड में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी है। इन नए संशोधनों के तहत ईंधन आयात पर सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि इस सब्सिडी को भारतीय डिलीवरी लागत और कीमतों के आधार पर तय किया गया है।

भारत में रूसी कच्चे तेल के आयात ने तोड़ा रिकॉर्ड

एक तरफ जहां रूस भारत से तैयार ईंधन खरीद रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल का आयात जून के महीने में सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। एलएसईजी और केपलर के शिप-ट्रैकिंग आंकड़ों से ये जानकारी सामने आई है। असल में ईरान और अमेरिका-इजरायाल के बीच युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से अन्य देशों से होने वाली तेल सप्लाई पर बुरा असर पड़ा था। इस प्रभाव को कम करने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने तेजी से रूसी कच्चे तेल के बैरल खरीदे। केपलर के आंकड़ों के अनुसार, जून में भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी आधे से अधिक (50% से ज्यादा) हो गई। ये मई के महीने में 36.5% थी। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश भारत ने जून में रूस से लगभग 2.70 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चे तेल की खेप प्राप्त की है।

हैरी ब्रूक का अगला इंग्लैंड टेस्ट कप्तान बनना लगभग तय, जारी रखेंगें बैजबॉल

हैरी ब्रूक ने कहा है कि इंग्लैंड की पुरुष टेस्ट टीम का नया कप्तान बनना उनके लिए बड़े सम्मान की बात होगी। यह बयान उन्होंने उस समय दिया, जब एक दिन पहले ही संन्यास लेने वाले बेन स्टोक्स ने उन्हें यह भूमिका संभालने के लिए अपना “100 प्रतिशत समर्थन” दिया था। न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ तीसरे टेस्ट में सीरीज़ हार के दौरान स्टोक्स के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा ने इंग्लैंड क्रिकेट में एक बड़ा खालीपन पैदा कर दिया है।

पिछली एशेज़ से ही टेस्ट टीम के उपकप्तान रहे ब्रूक को स्टोक्स ने शनिवार शाम अपने फ़ैसले की जानकारी दी थी। जो रूट को भी उसी समय इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद रविवार सुबह चौथे दिन का खेल शुरू होने से पहले स्टोक्स ने ड्रेसिंग रूम में पूरी टीम को अपने निर्णय से अवगत कराया।

27 वर्षीय ब्रूक को न्यूज़ीलैंड सीरीज़ के दूसरे टेस्ट में कप्तानी का मौक़ा नहीं मिला था, जबकि स्टोक्स पहले टेस्ट के बाद एक विवादित नाइट आउट के चलते बाहर थे। उस दौरान स्टोक्स और गस एटकिंसन ने टीम का मध्यरात्रि कर्फ्यू तोड़ दिया था।उस समय इंग्लैंड के मैनेजिंग डायरेक्टर रॉब की ने कहा था कि ब्रूक का सिर्फ़ अपने क्रिकेट पर ध्यान देना बेहतर होगा। साथ ही यह भी माना गया कि कप्तानी मिलने पर उनसे असहज सवाल पूछे जा सकते थे, क्योंकि टीम में कर्फ्यू लागू करने की एक वजह पिछले एशेज़ दौरे से पहले वेलिंग्टन में एक बाउंसर के साथ ब्रूक की झड़प भी थी।

दूसरे टेस्ट में जो रूट ने अंतरिम कप्तानी की थी, लेकिन माना जा रहा है कि वे लंबे समय तक यह भूमिका निभाने के इच्छुक नहीं हैं। ऐसे में स्टोक्स द्वारा ब्रूक का समर्थन करना आंशिक रूप से रूट की अनिच्छा से भी जुड़ा हो सकता है। इंग्लैंड अंडर 19 टीम की कप्तानी कर चुके ब्रूक पिछले साल से इंग्लैंड की सीमित ओवरों की टीमों की कमान संभाल रहे हैं। भारत के खिलाफ़ टी 20 सीरीज़ की पूर्व संध्या पर उन्होंने टेस्ट कप्तानी संभालने की इच्छा भी ज़ाहिर की।

ब्रूक ने मंगलवार को कहा, “यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान होगा। टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड की कप्तानी करना हमारे खेल का सर्वोच्च स्तर है और एक विशेष उपलब्धि होगी।” ब्रूक ने कहा,”टेस्ट क्रिकेट खेलना मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। यह मेरा सपना रहा है और बचपन से मैं यही करना चाहता था। फैसला मेरे हाथ में नहीं है, लेकिन अगर यह जिम्मेदारी मुझे मिलती है तो मैं खु़शी-खु़शी इसे स्वीकार करूंगा।”

साल 2009 में एंड्रयू स्ट्रॉस आख़िरी ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने एक साथ इंग्लैंड की तीनों प्रारूपों की कप्तानी की थी। हालांकि उस समय टी 20 क्रिकेट आज के समय के जितना बड़ा नहीं था। ब्रूक ने कहा, “मुझे लगता है कि यह संभव है। मैं यह नहीं कह रहा कि यह आसान होगा, लेकिन मुझे यकीन है कि ऐसा किया जा सकता है।” पिछले साल दिल्ली कैपिटल्स के साथ अपना आईपीएल अनुबंध छोड़ने के कारण उन्हें दो साल के आईपीएल प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था, क्योंकि उन्होंने इंग्लैंड की सीमित ओवर फ़ॉर्मैट की कप्तानी संभालने को प्राथमिकता दी थी।

“मैं फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट नहीं खेलता, इसलिए कैलेंडर में ऐसे दौर होते हैं जब मैं क्रिकेट नहीं खेल रहा होता। उस समय मैं अपनी फ़िटनेस पर काम कर सकता हूं और तीनों प्रारूपों के लिए तैयारी कर सकता हूं। चाहे मैं टेस्ट कप्तान बनूं या नहीं, मेरे लिए इंग्लैंड के लिए खेलना ही सबसे बड़ी बात है।” ब्रूक ने कहा कि उन्होंने खु़द को पूरी तरह इंग्लैंड क्रिकेट के लिए समर्पित कर दिया है।

“मैंने तय किया है कि द हंड्रेड को छोड़कर कोई फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट नहीं खेलूंगा। मेरा पूरा ध्यान इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेलने पर है। मैदान के अंदर और बाहर जो भी करता हूं, उसका मकसद इंग्लैंड के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है। यही वजह है कि मैं आईपीएल, पीएसएल या अन्य फ्रेंचाइज़ी लीग में नहीं खेलता।”

WhatsApp Username फीचर पर फंसा पेंच, सरकार फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के खतरे को लेकर Meta से करेगी चर्चा

केंद्र सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) WhatsApp के आगामी Username फीचर को लेकर Meta के साथ जल्द ही बैठक कर सकता है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) ने इस फीचर के जरिए फर्जी पहचान बनाकर धोखाधड़ी और प्रतिरूपण (Impersonation) की आशंका जताई है। सूत्रों के अनुसार, दूरसंचार विभाग (DoT) और दिल्ली पुलिस ने इस फीचर को लेकर गंभीर चिंताएं सरकार के सामने रखी हैं।

 

फर्जी प्रोफाइल बनाकर हो सकती है धोखाधड़ी

 

दूरसंचार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, WhatsApp का नया Username फीचर साइबर अपराधियों को नकली प्रोफाइल बनाकर लोगों को ठगने का मौका दे सकता है। अधिकारी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे देश के नंबर या किसी प्रतिष्ठित अधिकारी की फोटो और उससे मिलता-जुलता यूजरनेम इस्तेमाल कर लोगों को धोखाधड़ी वाले कॉल या मैसेज भेज सकता है।

 

अधिकारी ने बताया कि यदि फोन नंबर सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देगा तो जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाएगा कि आरोपी भारत में है या विदेश में। पहले यदि किसी WhatsApp नंबर की शुरुआत +91 से होती थी तो जांच शुरू करना अपेक्षाकृत आसान होता था, लेकिन Username आधारित सिस्टम में यह प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।

 

जांच एजेंसियों ने डेटा मिलने में देरी पर भी जताई चिंता

 

दूरसंचार विभाग के अधिकारी ने यह भी कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने में WhatsApp कई बार पांच दिन या उससे भी अधिक समय लेता है। इससे साइबर अपराधों की जांच प्रभावित होती है और समय पर कार्रवाई करना कठिन हो जाता है।

 

दिल्ली पुलिस ने भी जताई चिंता

 

दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा कि Username फीचर लागू होने के बाद संदिग्धों की पहचान करना और मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि उपयोगकर्ता अपनी वास्तविक पहचान और फोन नंबर छिपाकर बातचीत कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि WhatsApp का यह कदम काफी हद तक Telegram और Signal की तर्ज पर है, जहां पहले से Username के जरिए बातचीत की सुविधा उपलब्ध है।

 

Meta और WhatsApp से करेगी सरकार चर्चा

 

सूत्रों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय जल्द ही Meta और WhatsApp के अधिकारियों के साथ इस फीचर पर विस्तृत चर्चा करेगा। सरकार यह आकलन करेगी कि Username फीचर का दुरुपयोग सरकारी संस्थाओं, अधिकारियों या प्रतिष्ठित संगठनों की नकली पहचान बनाकर लोगों को ठगने के लिए तो नहीं किया जा सकता।

 

सरकारी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि फीचर से सुरक्षा संबंधी जोखिम सामने आते हैं तो सरकार आवश्यक कदम उठा सकती है।

 

क्या है WhatsApp का नया Username फीचर?

 

Meta के स्वामित्व वाला WhatsApp इस साल अपने प्लेटफॉर्म पर Username फीचर लॉन्च करने जा रहा है। इस फीचर के जरिए यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से संपर्क कर सकेंगे। कंपनी ने Username रिजर्व करने की शुरुआती सुविधा शुरू कर दी है और आधिकारिक रोलआउट इस वर्ष के अंत तक किया जाएगा।

 

WhatsApp का कहना है कि इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स की गोपनीयता (Privacy) को और मजबूत बनाना है। खासकर ग्रुप चैट या नए लोगों से बातचीत के दौरान अब मोबाइल नंबर साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे व्यक्तिगत जानकारी अधिक सुरक्षित रहेगी। Edited by : Sudhir Sharma

खेत में उतरे-बोया धान, किसानों से इस अंदाज में सीएम डॉ. मोहन ने की ‘दिल की बात’

भोपाल। 'खेत में उतरे, धान बोया, हाथ में लेकर खाना खाया और किसानों से आत्मीय संवाद किया,' मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 जुलाई को सिवनी जिले में अनोखे अंदाज में नजर आए। उन्होंने जनता को एक बार फिर बताया कि वे भी आम इंसान ही हैं। वे लगातार जनकल्याण का सोचते हैं। उनकी सादगी किसानों और आम लोगों को भा गई। लोग उनसे बातचीत करके उत्साहित नजर आए।

सीएम डॉ. मोहन ने बुधवार को सिवनी के लिए खजाना खोल दिया। उन्होंने सिवनी में धान महोत्सव में शिरकत की, कोदो कुटकी बोनस का वितरण किया और विकास कार्यों की सौगात दी। सीएम डॉ. यादव ने सिवनी में 349.33 करोड़ रुपए लागत के 586 विकास कार्यों का लोकार्पण और 144.8 करोड़ के भूमि-पूजन किए। उन्होंने यहां आयोजित कार्यक्रम में प्रदर्शनी का अवलोकन और कन्या पूजन किया। इसके अलावा सीएम यादव ने बालाघाट से सिवनी फोर लेन सड़क निर्माण, सिवनी के चमारा विकासखंड में शासकीय महाविद्यालय और स्टेडियम सहित अन्य विकास कार्यों की घोषणा की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश की धान की फसल को जीआई टैग मिला है। मां लक्षमी की कृपा से रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आज प्रदेश के 3941 किसानों को 1000 रुपए मान से कोदो कुटकी बोनस के रूप में 282.99 करोड़ राशि दी गई है। राज्य सरकार श्रीअन्न उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ-साथ बोनस भी दे रही है। प्रदेश में पहली बार शासकीय स्तर पर कोदो कुटकी खरीदने के लिए अभियान शुरू हुआ है। इसके साथ ही आज मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) 2.0 योजना के अंतर्गत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से प्रदेश के 16,754 श्रमिक परिवारों को 365 करोड़ की अनुग्रह सहायता राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की है। 

 

गरीबों का ध्यान रख रही राज्य सरकार-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विपक्ष की सरकारों ने गरीब-जरूरतमंदों को कभी संबल योजना का नाम नहीं दिया। संबल योजना में सरकार दुर्घटना में मृत्यु पर 4 लाख, सामान्य मृत्यु पर 2 लाख और अपंगता आने पर 1 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान करती है। श्रमिक परिवारों को आयुष्मान भारत योजना में 5 लाख रुपए तक के फ्री इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। राज्य सरकार हर वर्गों के गरीब, वंचित और आखिरी पंक्ति में बैठे लोगों के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित रहे सभी पात्र लोगों को आवास देने के लिए सर्वे कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आज सिवनी जिले के समग्र विकास के लिए 349.33  करोड़ रुपए लागत के 586 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं 144.8 करोड़ के 43 कार्यों के भूमि-पूजन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का को गरीबों की फसल कहा जाता था। प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना शुरू कर देश-दुनिया में इसका मान बढ़ाया। श्रीअन्न में मौजूद तत्व सबसे जल्दी पचता है। राज्य सरकार ने पिछले साल से श्रीअन्न खरीदने की शुरुआत की है। इस वर्ष मानसून पर अलनीनो का प्रभाव नजर आ रहा है। अगर बारिश कम होती है तो किसानों को तैयार रहना चाहिए कि वे कोदो कुटकी सहित सभी फसलों को तैयार कर लें। 

 

किसानों को कई योजनाओं का लाभ दे रही सरकार- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज प्रदेश के 3941 किसानों को 2829 मीट्रिक टन कोदो कुटकी के लिए 1000 रुपए मान से 2 हजार 83 लाख रुपए बोनस राशि दी गई है। राज्य में कोटो कुटकी के ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए भी काम जारी हैं। डिंडोरी की सीताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगनी अरहर को जीआई टैग मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसान कल्याण वर्ष में अन्नदाता को अनेक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दे रही है। सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी भावांतर योजना के माध्यम से लाभ दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में धान की फसल के लिए भी भावांतर योजना लागू की जाएगी। राज्य सरकार धान उत्पादक किसानों को एमएसपी और बाजार मूल्य के अंतर का भुगतान करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार खेत से लेकर बाजार तक हर क्षेत्र में मूल्य संवर्धन पर काम कर रही है।

Market Outlook: जुलाई में शेयर बाजार में आएगी तेजी? पिछले 25 साल का रिकॉर्ड दे रहा बड़ा संकेत

Market Outlook: पिछले करीब तीन महीने से भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में घूम रहा है। कभी हल्की तेजी तो कभी हल्की गिरावट, लेकिन कोई बड़ा मूव देखने को नहीं मिला। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या जुलाई का महीना बाजार के लिए कुछ नया लेकर आएगा?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इतिहास पर नजर डालें तो जुलाई का महीना शेयर बाजार के लिए अक्सर अच्छा साबित हुआ है। वहीं, मौजूदा आर्थिक हालात भी बाजार के पक्ष में नजर आ रहे हैं।

जुलाई का रिकॉर्ड क्या कहता है?

SAMCO Securities के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट जहोल प्रजापति का कहना है कि ऐतिहासिक आंकड़े जुलाई के पक्ष में इशारा करते हैं। उन्होंने कहा, ‘साल 2001 से 2025 के बीच 25 साल में निफ्टी 50 ने जुलाई में 18 बार बढ़त दर्ज की है। यानी करीब 72% बार बाजार हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान औसत रिटर्न 2.19% रहा। दिसंबर और नवंबर के बाद जुलाई निफ्टी के लिए तीसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला महीना रहा है।’

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ पुराने ट्रेंड देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। लेकिन जुलाई में हर साल कुछ ऐसे फैक्टर देखने को मिलते हैं, जो बाजार को सपोर्ट देते हैं। इनमें सामान्य मानसून की शुरुआत, पहली तिमाही (Q1) के नतीजों से जुड़ी उम्मीदें और घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी शामिल हैं।

मौजूदा हालात भी बाजार के लिए अच्छे

जहोल प्रजापति का कहना है कि इस समय कई ऐसे फैक्टर हैं, जो बाजार के लिए राहत की खबर हो सकते हैं।

  • भू-राजनीतिक तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की उम्मीद है।
  • कच्चे तेल की कीमतें घटकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।
  • इससे कंपनियों की लागत कम हो सकती है और महंगाई पर भी दबाव घट सकता है।
  • साल की शुरुआत में कमजोर पड़ा रुपया अब संभलता दिख रहा है।
  • विदेशी निवेशकों (FPI) की बिकवाली भी पहले के मुकाबले कम हुई है, जिससे बाजार में भरोसा बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि अगर दुनिया में कोई बड़ा नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होता है, तो ये सभी बातें भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बना सकती हैं।

चार्ट क्या बता रहे हैं?

SAMCO Securities के डेरिवेटिव्स रिसर्च एनालिस्ट धूपेश धामेजा का कहना है कि 1 जुलाई को निफ्टी ने अच्छी मजबूती दिखाई और बुलिश कैंडल बनाई। इंडेक्स ने 23,850-23,900 के सपोर्ट जोन को बचाए रखा। यही इलाका हालिया ब्रेकआउट एरिया और 50-DEMA के आसपास भी है। हालांकि, 24,000 के ऊपर पहुंचने के बावजूद निफ्टी को 100-DEMA के पास मजबूत रुकावट मिल रही है। यही वजह है कि बाजार अभी भी एक छोटी रेंज में फंसा हुआ है।

उन्होंने बताया कि RSI अब धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है और फिलहाल 55.13 पर है। जब तक RSI 50 से ऊपर रहेगा, तब तक बाजार का रुख पॉजिटिव माना जाएगा। हालांकि, असली तेजी का संकेत तभी मिलेगा, जब निफ्टी मौजूदा रेजिस्टेंस के ऊपर निकल जाएगा। धामेजा ने यह भी कहा कि India VIX 2.63% गिरकर 13.24 पर आ गया है। इसका मतलब है कि बाजार में घबराहट कम हो रही है और निवेशक फिलहाल ज्यादा सहज नजर आ रहे हैं।

क्या 24,200 तक जा सकता है निफ्टी?

LKP Securities के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि 1 जुलाई को भी निफ्टी अपनी हालिया ट्रेडिंग रेंज से बाहर नहीं निकल पाया। पिछले कुछ सत्रों से इंडेक्स 24,000 के आसपास ही घूम रहा है, जिससे साफ है कि बाजार को अभी नई दिशा नहीं मिली है।

हालांकि, उनका मानना है कि शॉर्ट टर्म ट्रेंड अभी भी सकारात्मक है। जब तक निफ्टी 23,800 के ऊपर बना रहता है, तब तक तेजी की उम्मीद कायम रहेगी। उन्होंने कहा कि अगर यह सपोर्ट नहीं टूटता है, तो आने वाले दिनों में निफ्टी धीरे-धीरे 24,200 और उससे ऊपर के स्तर की ओर बढ़ सकता है। 1 जुलाई को निफ्टी 50 में 0.59% की तेजी आई और यह 24,005.85 पर बंद हुआ। वहीं, BSE Sensex 0.58% चढ़कर 76,922.64 के स्तर पर पहुंच गया।

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ईशान किशन बने नंबर 1 T-20I बल्लेबाज, अभिषेक शर्मा ने इस कारण खोया ताज

ईशान किशन टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के नंबर एक बल्लेबाज बन गए हैं। ईशान किशन आयरलैंड में खेले गए दोनों मैचों में सस्ते में आउट हो गए थे वहीं अभिषेक शर्मा ने पहले मैच में 49 और दूसरे मैच में 0 रन बनाए थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अभिषेक शर्मा की नंबर एक रैंक कैसे छिन गई। दरअसल बीते टी-20 विश्वकप में भी अभिषेक शर्मा अमेरिका, पाक, नीदरलैंड्स, के खिलाफ 0 पर आउट हुए थे।

उन्होंने सिर्फ जिम्बाब्वे और न्यूजीलैंड के खिलाफ अर्धशतक जड़ा था। ऐसे में वह कुल इस साल 9 बार 0 पर आउट हो चुके हैं जिसके कारण उनको अपनी नंबर 1 रैंक गंवानी पड़ी।हालांकि उनको खुश होना चाहिए क्योंकि पहली रैंक अभी भी उनके हमवतन के साथ है।किशन (876 रैंकिंग अंक) के शीर्ष पर पहुंचने में इसी साल हुए टी20 विश्व कप में उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन की अहम भूमिका रही है। विश्व कप में बाएं हाथ के इस आक्रामक बल्लेबाज ने लगभग 200 के स्ट्राइक रेट से 317 रन बनाए। उन्हें कोलंबो में पाकिस्तान के खिलाफ हुए मुकाबले में मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना गया था।


अभिषेक (869) लगभग 12 महीने तक शीर्ष पर रहे। किशन और अभिषेक से पहले भारतीय खिलाड़ियों में विराट कोहली और सूर्यकुमार यादव ने भी टी20 अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाजों की रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया है।पाकिस्तान के साहिबजादा फरहान 848 अंक के साथ इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं।नवीनतम सूची में भारत के नए उपकप्तान तिलक वर्मा (747) छठे स्थान पर बने हुए हैं जबकि पूर्व कप्तान सूर्यकुमार यादव एक स्थान नीचे आठवें स्थान पर खिसक गए हैं।

गेंदबाजों में भारत के वरुण चक्रवर्ती और जसप्रीत बुमराह एक-एक स्थान के नुकसान से क्रमशः तीसरे और छठे स्थान पर हैं। अफगानिस्तान के राशिद खान शीर्ष पर बने हुए हैं।पुरुषों की टेस्ट बल्लेबाजी रैंकिंग में ट्रेविस हेड शीर्ष पर पहुंच गए हैं जबकि जो रूट तीसरे स्थान पर खिसक गए।भारत के टेस्ट कप्तान शुभमन गिल एक स्थान के फायदे से छठे पायदान पर हैं जबकि यशस्वी जायसवाल एक स्थान नीचे खिसककर नौवें स्थान पर हैं। शीर्ष 10 से बाहर बल्लेबाजों में ऋषभ पंत 13वें स्थान के साथ सबसे अच्छी रैंकिंग वाले भारतीय खिलाड़ी हैं। गेंदबाजों में बुमराह भारत के शीर्ष खिलाड़ी हैं।

Gold Silver Price Today: सोना फिसला, चांदी ने लगाई 5000 रुपये की छलांग

Gold Silver Price Today: राष्ट्रीय राजधानी में 1 जुलाई को सोने में गिरावट आई। डॉलर में मजबूती और विदेशी बाजारों के ट्रेंड का असर भारत में सोने की कीमतों पर पड़ा। यह 1,300 रुपये गिरकर 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। उधर, चांदी की चमक बढ़ी। यह 5000 रुपये चढ़कर 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।

विदेश में लगातार तीसरे दिन सोना गिरा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.54 फीसदी गिरकर 3,986.07 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी 1 फीसदी गिरकर 58 डॉलर प्रति औंस पर रही। लेमन मार्केट्स डेस्क में रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग ने कहा, “बुधवार को भारत में सोने पर दबाव दिखा। इसकी वजह डॉलर में मजबूती और बढ़ती बॉन्ड यील्ड है। इसका असर कीमती मेटल की डिमांड पर पड़ा। “

डॉलर इंडेक्स में मजबूती ने सोने पर बनाया दबाव

मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज हेड प्रवीण सिंह ने कहा, “विदेशी बाजारों में सोने में लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। इसकी वजह डॉलर इंडेक्स में मजबूती है। यह 0.15 फीसदी चढ़कर 101.34 पर पहुंच गया।” डॉलर में मजबूती से विदेशी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है।

भारत में एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स में तेजी दिखी

इधर, कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स में तेजी दिखी, जबकि सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट दिखी। शाम के कारोबार में गोल्ड फ्यूचर्स 0.46 फीसदी यानी 659 रुपये चढ़कर 1,43,190 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 0.64 फीसदी यानी 1,461 रुपये की कमजोरी के साथ 2,25,582 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा था।

रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 30 फीसदी गिर चुका है सोना

इस साल गोल्ड की कीमतें जनवरी के आखिर में करीब 5600 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी। इस लेवल से गोल्ड करीब 30 फीसदी गिर चुका है। जून तिमाही में गोल्ड में करीब 14 फीसदी की गिरावट आई। सिर्फ जून में यह 11 फीसदी गिरा। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान की लड़ाई ने बुलियन पर दबाव बढ़ा दिया।

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अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद से भी गिरा सोना

एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल में गोल्ड में गिरावट की वजह डॉलर में मजबूती और अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इस साल इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। बढ़ते इंटरेस्ट रेट के माहौल में गोल्ड की चमक घट जाती है। इंटरेस्ट रेट घटने पर गोल्ड की चमक बढ़ जाती है।