ईरान युद्ध से अमेरिका का सुपर पॉवर तमगा डगमगाया

Iran US War: अहंकार की लड़ाई जब दो व्यक्तियों में हो तो दो परिवार प्रभावित या बरबाद होते हैं, लेकिन जब ये दो देशों के बीच हो तो समूचा विश्व प्रभावित होता है और टकराने वाले दोनों ही देश बरबाद हो सकते हैं। रूस-यूक्रैन में टकराव तो 2014 से ही प्रारंभ हो गया था, किंतु पूर्णकालिक युद्ध 24 फरवरी 2022 से शुरू हुआ, जिसमें सीधे दोनों ने मैदान पकड़ लिया है, जिसमें अभी तक कोई कमजोर पड़ता नहीं दिखाई देता। इसी तरह से अमेरिका-वियतनाम के बीच 1955 में शुरू हुआ युद्ध 1975 में समाप्त हो सका था, वह भी अमेरिका सेना के पीछे हट जाने से। पीछे तो उसे अफगानिस्तान से भी हटना पड़ा, लेकिन फटे में टांग अड़ाने का अब भी कोई मौका वह नहीं छोड़ता। ऐसा ही है ईरान के साथ अमेरिका व इजराइल का हालिया पंगा, जो गले की हड्‌डी बन अटका है।

 

इस समय पूरी दुनिया में एक ही चर्चा है कि मध्य पूर्व एशिया में हाल-फिलहाल शांति हो पायेगी या अमेरिका-इजराइल का ईरान के साथ युद्ध चलता रहेगा? इस लाख टके के सवाल का अभी तो एक भी सही जवाब देने का माद्दा किसी में नहीं है। इन युद्धरत देशों में भी। फिर भी अभी तक के हालात के परिप्रेक्ष्य में यह तो कहा ही जा सकता है कि ईरान ने ऐंठ दिखाकर और अमेरिका ने युद्ध छेड़कर अक्लमंदी तो नहीं की। इजराइल तो आजीवन युद्धरत रहा है तो उसकी तो दिनचर्या ही ऐसी हो चुकी है। फिर भी, वह भी तीसमारखां तो नहीं बन पाया। इतिहास इस कालखंड का जब निर्मम, बेबाक और वास्तविक तथ्यों पर आधारित विश्लेषण करेगा, तब समूची दुनिया के लिए वे ऐसे सबक होंगे, जो आगामी काल के लिए निर्णायक और विषम परिस्थितियों में सटीक फैसले लेने में सहायक होंगे।

 

कोई माने या न माने, यह अटल सत्य है कि सुपर पॉवर का तमगा लिए दुनिया के सामने इतराने वाले अमेरिका की बुरी गत हुई है। यह न तो उसके लिए न शेष विश्व के लिए अच्छा संकेत है। जिस आतंकवाद से समूची दुनिया थर्राती आई है, उसे नकेल डालने में जो भूमिका अमेरिका निभा सकता था, यह उस पर संशय खड़े करता है। हालांकि यह भी उतना ही बड़ा सच है कि विश्व में आतंकवाद को पल्लवित करने में अमेरिका का प्रमुख हाथ रहा है। भले ही वह अपनी हथियार लॉबी की ब्लैकमेलिंग या ताकत के आगे झुककर फैसले लेते रहा हो। इक्कीसवीं सदी में अब जो आगे होगा, वह अमेरिका के एकाधिकार के खात्मे का इतिहास बनेगा। इसके लिए निर्विवाद रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ही दोषी करार दिए जाएंगे। 

 

बीसवीं और इक्कीसवीं सदी में अभी तक इतना भ्रमित, विचलित, विवादास्पद, सनकी और तानाशाही के मिश्रित चरित्र वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प पर ठप्पा लगेगा कि उन्होंने अमेरिका के सुपर पॉवर की छवि वाली बंद मुट्‌ठी को अंगुलियां मरोड़कर खोल दिया। यह कोई मामूली बात नहीं है कि उनके अपने देश में 60 लाख लोग उनकी युद्ध नीति के खिलाफ सड़क पर उतर आए थे। वे भले ही कार्यकाल पूरा करें, लेकिन इतना तय जान लीजिए कि वे जितने समय व्हाइट हाउस में काबिज रहेंगे, उतना अधिक अमेरिका गर्त की ओर लुढ़केगा।

 

अब, जबकि कुछ दिन शांति के मिले हैं, तब दुनिया यह विश्लेषित करने में जुटी है कि आखिरकार इस युद्ध के भड़कने के कारण क्या थे? हम यह तो नहीं कह सकते कि ईरान निर्दोष है या ट्रम्प एकतरफा गलत हैं, लेकिन विभीषिका के इस स्वरूप की जरूरत तो बिल्कुल नहीं थी। जिन मुद्दों पर सीधे मिसाइलें दाग दी गईं, वे हलवे की तरह चट कर जाने वाले नहीं हैं। ईरान के पास परमाणु हथियारों के होने का अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिला है और न उसने किसी ऐसी वैश्विक आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली घटना को अंजाम दिया था, जो उसके खिलाफ जंग का एलान करवा दे। जो गलती अमेरिका ने अतीत में इराक के पास रासायनिक हथियार होने का कारण बताकर वहां अमेरिकी फौजें उतार कर की थी, वही उन्होंने ईरान के साथ करना चाहा। यह पासा इसलिए उलटा पड़ा कि ईरान के पास अस्त्र-शस्त्र का ऐसा विरल भंडार भरा था, जिसकी कल्पना अमेरिका समेत दुनिया में शायद ही किसी को रही होगी। यह तो अब पता चला कि उसने ऑइल मनी को चीन, रूस से हथियारों का जखीरा जमा करने के लिए उपयोग किया था। चूंकि दोनों ही देश अमेरिका के खिलाफ हैं तो स्वाभाविक रूप से ईरान से दोस्ती का हाथ बढ़ाना फायदेमंद ही रहना था। हो सकता है, होर्मुज के सामरिक व आर्थिक महत्व से भी वे परिचित रहे हों।

 

अमेरिका-ईरान के बीच पहली शांति वार्ता असफल होने के बाद दूसरी, तीसरी, चौथी होती रही, जो बेनतीजा ही कही जाएगी। ईरान-अमेरिका दोनों ही अब भी मोल-तौल करने की स्थिति में है। युद्ध विराम करने के बदले भी ईरान ने 10 सूत्री मांग पत्र थमाया था, जिस पर अमेरिका सहमत नहीं है। इसमें चार मांगें बेहद खास हैं, जिन पर ईरान अड़ा है और अमेरिका कतई तैयार नहीं है। ईरान खाड़ी देशों (सउदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन व जॉर्डन) से 25 लाख करोड़ रुपए का मुआवजा चाहता है, जिस पर अभी तो कोई सहमत नहीं।

 

दूसरा, वह होर्मुज से गुजरने वाले तेल जहाजों से प्रति बैरल एक डॉलर टोल चाहता है तो दूसरी तरफ अमेरिका होर्मुज पर खुद कब्जा चाहता है। अमेरिका ने सैन्य नाकाबंदी भी की, लेकिन चीन समेत अन्य जहाज वहां से सुरिक्षत निकल चुके हैं। तीसरा, ईरान परमाणु कार्यक्रम 5 साल तक रोकेगा, जबकि अमेरिका 20 साल तक इसे रोकना चाहता है। चौथा, युद्ध विराम में लेबनान भी शामिल रहेगा, जिस पर इजराइल को आपत्ति है। अब देखना दिलचस्प है कि बाजुओं का जोर दिखाने में किसकी रुचि है और कौन हाथ मिलाने को तैयार है।

 

इस युद्ध ने दुनिया के सामने एक और पहलू पर ध्यान दिलाया है। अब लड़ाई के लिए तोप-मिसाइलें, जल-थल-नभ सेना की मजबूती ज्यादा मायने नहीं रखती। यह दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (एआई) का है, जिससे ड्रोन संचालित होते हैं। ये युद्ध की समूची दिशा बदलने में सक्षम है, जो ईरान ने कर दिखाया। यूक्रेन भी इसी बूते रूस को पानी पिला रहा है। अमेरिका-इजराइल की सबसे बड़ी चूक यही हुई कि वे मिसाइल हमले रोकने की व्यूह रचना करते रहे और ईरान ने छोटा बम, बड़ा धमाका की तर्ज पर ड्रोन हमले कर बड़े लक्ष्य भेद डाले। खाड़ी देशों में ईरानी ड्रोन ने जो कहर बरपाया है, उस नुकसान से उबरने में इन्हें 3 से 5 साल तक लगेंगे और अरबों डॉलर का खर्च होगा, वह अलग। ड्रोन हमलों की मार यूक्रैन दिखा चुका है, जिसने महाशक्ति रूस को नाको चने चबवा रखे हैं।

 

इस युद्ध से एक और तस्वीर साफ हुई कि अब अमेरिका अकेला सब कुछ नहीं कर सकता। जिस तरह से नाटो देशों ने उसका साथ देने से स्पष्ट इनकार किया, वह दुनिया के सामने बड़ी चेतावनी है। इसका संदेश साफ है कि प्रत्येक देश अब अपने हित-अहित पहले देखेगा, फिर पंचायत में उलझेगा। ट्रम्प की खीज ने यह बताया है कि वे मुगालते में थे कि मित्र देश ईरान पर टूट पड़ेंगे। यदि वाकई ऐसा होता तो रूस-यूक्रेन (5 वर्ष हो चुके हैं) की तरह यह भी अनिश्चित काल चलता रहता और रूस व चीन को भी हस्तक्षेप का मौका मिल जाता, जो पूरी दुनिया की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक व्यवस्था को तहस-नहस करने की ओर ले जाता। इसकी विभीषिका तीसरे विश्व युद्ध के समान होती, जिसमें क्या-क्या गुल खिलते, कोई नहीं कह पाता।

 

सबसे प्रमुख बात-इसमें भारत की क्या स्थिति रही? उसने निष्पक्ष रहकर स्वयं को सुरक्षित रखा। जिसका नतीजा यह हुआ कि चलते युद्ध में गैस व तेल से भरे टैंकर आते रहे, वह ईरान से ही सात साल के लिए तेल खरीदने का समझौता कर सका और चीन के साथ उसके मालवाहक जहाज निकलते रहे। यह लड़ाई हमारी किसी भी तरह से नहीं थी, बावजूद इसके कि ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने पाकिस्तान को ड्रोन व हथियार दिए थे। इसके उलट हमारा तंत्र ईरान के समानांतर लोगों से बात करता रहा, जिसे ईरान ने सकारात्मक माना। भविष्य में इसके वास्तविक संदेश नजर आएंगे और काफी हद तक वे भारत के पक्ष में रहेंगे।

 

एक जो सबसे चिंताजनक बात उभरी है, वह यह कि ट्रम्प इसे गली-मोहल्ले के दादा-पहलवानों की तरह लड़ रहे हैं और पल-पल में उनकी बदलती रीति-नीति ने उलझनों को बढ़ाया ही है। वे कभी अपने हित साधने वाले व्यापारी हो जाते हैं तो कभी तानाशाह। कभी दुनिया को कदमों तले मानकर पेश आते हैं तो कभी जादूगर की तरह डमरू बजाकर मसले हल करने का दावा करते हैं। उनके विरोधाभासी चरित्र को यूं तो दुनिया ने टैरिफ लागू करते हुए बखूबी देख ही लिया है, लेकिन युद्ध जैसे संवेदनशील व दूरगामी मसलों में उनका रवैया बचकाना रहा, जो विश्व के लिये बड़े खतरे का आगाज है। उन्हें रोका नहीं गया तो इस दुनिया को ज्वालामुखी के लावे की तरह बहते देखना भी नसीब हो जाएगा।

Vedanta Oil & Gas का शेयर 20% भागा, समूह की बाकी तीन कंपनियों के शेयरों को भी लगे पंख

वेदांता लिमिटेड के डीमर्जर के बाद बनी चारों कंपनियों के शेयर 1 जुलाई को रॉकेट बन गए। वेदांता एल्युमीनियम, वेदांता आयरन एंड स्टील, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता पावर में से सबसे ज्यादा तेजी वेदांता ऑयल एंड गैस के शेयरों में दिखी। इसकी वजह यह है कि चारों कंपनियों के शेयर बुधवार को ट्रेड-टू-ट्रेड सेगमेंट से बाहर आ गए। ये चारों शेयर स्टॉक एक्सचेंजों में 15 जून को लिस्ट हुए थे। पहले 10 कारोबारी दिनों के लिए इन्हें टी2टी सेगमेंट में डाला गया था।

टी2टी सेगमेंट के शेयरों पर लागू होती हैं ये शर्तें

T2T सेगमेंट में शामिल शेयरों में हर ट्रांजेक्शन पर डिलीवरी जरूरी होती है। इन शेयरों में इंट्रा-डे बाइंग और सेलिंग की इजाजत नहीं होती है। शेयर की कीमत चढ़ने या उतरने की स्थिति में 5 फीसदी पर ही सर्किट लग जाता है। इन चारों शेयरों के 1 जुलाई को टी2टी सेगमेंट से बाहर आने के बात ये बंदिशें खत्म हो गई हैं। इन शेयरों में इंट्रा-डे ट्रेडिंग भी हो सकेगी। इससे इनमें लिक्विडिटी बढ़ेगी। साथ ही कीमतों में उतार-चढ़ाव भी दिखेगा।

वेदांता ऑयल के शेयरों में 20 फीसदी तक उछाल

2:15 बजे Vedanta Oil & Gas का शेयर 19.98 फीसदी चढ़कर 38.68 रुपये पर चल रहा था। वेदांता पावर का शेयर 11.30 फीसदी के उछाल के 45 रुपये पर चल रहा था। वेदांता आयरन का शेयर 9.98 फीसदी की तेजी के साथ 38.78 रुपये पर था। वेदांता एल्युमीनियम का शेयर 2.60 फीसदी चढ़कर 460.10 रुपये पर चल रहा था। शेयर बाजारों में 1 जुलाई को अच्छी तेजी दिखी। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में करीब 0.70 फीसदी की मजबूती थी।

कंपनी विदेशी कंपनियों से कर रही पार्टनरशिप

ब्रोकरेज फर्म पीएल कैपिटल ने वेदांता ऑयल एंड गैस के बारे में कहा है कि कंपनी ने एंड-टू-एंड आउटसोर्सिंग एप्रोच के इस्तेमाल का प्लान बनाया है। इसके लिए वह ग्लोबल लेवल की सीजमिक, सबसर्फेस इवोल्यूशन, ड्रिलिंग और फील्ड डेवलपमेंट के लिए पार्टनरशिप कर रही है। इससे कंपनी को अपनी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे एफिशियंसी बढ़ेगी, जिसका पॉजिटिव असर वॉल्यूम ग्रोथ पर पड़ेगा।

टॉप 3 प्राइवेट कंपनियों में आने का लक्ष्य

ब्रोकरेज फर्म ने वेदांता पावर के बारे में कहा है कि कंपनी स्थापित क्षमता के लिहाज से भारत के टॉप पांच प्राइवेट बिजली उत्पादक कंपनियों में शामिल है। कंपनी FY33 तक टॉप 3 प्राइवेट बिजली उत्पादक कंपनियों में अपनी जगह बनाना चाहती है। कंपनी कोयला आधारित अपनी क्षमता 4.2GW से बढ़ाकर इस वित्त वर्ष के अंत तक 4.8GW करना चाहती है।

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वेदांता ऑयल का भी बड़ा प्लान

ब्रोकरेज फर्म यस सिक्योरिटीज ने वेदांता ऑयल एंड गैस के बारे में कहा कि मैनेजमेंट ने अपनी उत्पादन क्षमता में बड़ी वृद्धि करने के प्लान के बारे में बताया है। कंपनी के प्रमुख फोकस एरिया में राजस्थान नॉर्थ में एएसपी का डेप्लॉयमेंट, राजस्थान साऊथ में डीप गैस डेवलपमेंट और केजी बेसिन में डीपवाटर शामिल हैं। इससे पोर्टफोलियो की लंबी अवधि की ग्रोथ में मदद मिलेगी।

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PF, क्रेडिट कार्ड, पासपोर्ट फीस, Aadhaar अपडेट, LPG रेट, ITR डेडलाइन… 1 जुलाई से बदल गईं ये चीजें

Rules Changing From July 1 2026:  1 जुलाई से देश में कई जरूरी फाइनेंशियल और और नीतिगत बदलाव लागू हो गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर इनकम टैक्स, सैलरीड क्लास, पेंशन पाने वालों, बैंक कस्टमर और विदेश यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ने जा रहा है। एलपीजी सिलेंडर की कीमतों और पासपोर्ट फीस से लेकर ईपीएफओ सेवाओं, आधार नियमों और क्रेडिट कार्ड के फायदों में कई बड़े अपडेट किए गए हैं। आइए आपको इन बड़े बदलावों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं ताकि आप किसी तरह की असुविधा से बचें और बजट को बेहतर तरीके से प्लान कर पाएं।

1- कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर हुआ सस्ता, घरेलू दाम स्थिर

सरकार ने 1 जुलाई से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। इससे होटलों, रेस्तरां और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिली है। इस कटौती के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹3113.50 से घटकर ₹2930 हो गई है। हालांकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह कटौती 2026 की पहली छमाही के दौरान कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में हुई कई तेज वृद्धियों के बाद आई है।

2- FY 2025-26 के लिए ITR फाइलिंग की डेडलाइन

करदाताओं को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की समय-सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए ITR-1 और ITR-2 फॉर्म भरने वाले व्यक्तिगत करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। ऐसे करदाता जो ITR-3 और ITR-4 दाखिल करते हैं और जिन पर टैक्स ऑडिट की आवश्यकता लागू नहीं होती है, उनके पास अपना रिटर्न जमा करने के लिए 31 अगस्त 2026 तक का समय है। तय समय-सीमा चूकने पर जुर्माना लग सकता है, टैक्स रिजीम को चुनने पर रोक लग सकती है और नुकसान को आगेल कैरी फॉरवर्ड करने की सर्विस से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

3- EPFO 3.0: UPI आधारित पीएफ विड्रॉल की सुगबुगाहट

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से बहुप्रतीक्षित EPFO 3.0 प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया जा रहा है। इसके तहत ईपीएफ सब्सक्राइबर्स को यूपीआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से तुरंत पैसे निकालने की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

4- पासपोर्ट फीस में हुआ भारी इजाफा

सरकार ने पासपोर्ट नियम, 1980 में संशोधन करके पासपोर्ट आवेदन शुल्क में बदलाव किया है। ये बदलाव भी 1 जुलाई से प्रभावी हो गया है। अब 36 पन्नों के नए सामान्य पासपोर्ट की फीस 1500 से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दी गई है। इसी कैटेगरी में तत्काल शुल्क को 3500 से बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया गया है। 60 पन्नों के पासपोर्ट और खोए या कटे-फटे पासपोर्ट को बदलने की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। वरिष्ठ नागरिकों और 8 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नए आवेदनों पर 10 प्रतिशत की छूट मिलती रहेगी।

5- आधार (Aadhaar) में ईमेल अपडेट करना हुआ फ्री

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधिकारिक आधार मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकृत ईमेल पते को अपडेट करने पर लगने वाले ₹75 के शुल्क को माफ कर दिया है। यह मुफ्त सुविधा 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी।

6- मिस-सेलिंग पर RBI की सख्ती, टेलीमार्केटिंग का समय तय

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों द्वारा वित्तीय उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री को रोकने और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम पेश किए हैं। अगर किसी ग्राहक को उचित सहमति के बिना या भ्रामक तरीकों से उत्पाद बेचे जाते हैं तो वे रिफंड और मुआवजे के हकदार होंगे। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे टेलीमार्केटिंग और प्रमोशनल कॉल्स को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही सीमित रखें।

7- HDFC बैंक ने क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड और लाउंज नियमों को बदला

एचडीएफसी बैंक ने अपने रेगेलिया गोल्ड और डाइनर्स क्लब प्रिविलेज क्रेडिट कार्ड के लिए रिवॉर्ड पॉइंट स्ट्रक्चर और ट्रैवल बेनिफिट्स में बदलाव किया है। रिवॉर्ड कैलकुलेशन से जुड़े बदलाव पहले ही लागू किए जा चुके हैं जबकि एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस से जुड़ी संशोधित शर्तें 1 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। नए नियमों के मुताबिक रेगेलिया गोल्ड कार्डधारकों को कॉम्प्लीमेंट्री डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस का लाभ उठाने के लिए पिछली तिमाही में कम से कम 60000 रुपये खर्च करने होंगे।

8- SBI कार्ड ने लगाई रिवॉर्ड पॉइंट्स पर कैपिंग

एसबीआई कार्ड ने अपने दो वेरिएंट्स PhonePe SBI Card Purple और PhonePe SBI Card Select Black के नियमों में बदलाव की घोषणा की है। 1 जुलाई से प्रभावी नियमों के तहत कंपनी ग्राहकों द्वारा कमाए जाने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स पर मंथली कैप लगाएगी। इंश्योरेंस से जुड़े खर्चों और अन्य श्रेणियों के खर्चों के लिए अलग-अलग सीमाएं लागू होंगी। ऑनलाइन लेनदेन पर मिलने वाले अधिकतम रिवॉर्ड पॉइंट्स को भी कम कर दिया गया है।

BlackRock ने कहा-इस वजह से जल्द भारतीय बाजार में लौटेंगे विदेशी निवेशक

विदेशी निवेशक जल्द भारतीय बाजार में लौट सकते हैं। यह अनुमान ब्लैकरॉक इनवेस्टमेंट इंस्टीट्यूट ने जताया है। इंस्टीट्यूट के चीफ एपीएसी एंड मिडिल ईस्ट इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट बेन पॉवेल ने कहा कि एनर्जी की कीमतों में नरमी और जियोपॉलिटिकल स्थितियां बेहतर होने से ग्लोबल इनवेस्टर के ऐलोकेशन में बदलाव आ रहा है। भारत को इसका फायदा मिल सकता है।

जल्द भारत का रुख कर सकते हैं विदेशी निवेश

पॉवेल ने कहा कि आने वाले हफ्तों और महीनों में इंडिया में नया विदेशी निवेश आ सकता है। इसकी वजह यह है कि ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे AI से जुड़े शेयर बाजारों में जबर्दस्त तेजी के बाद ग्लोबल इनवेस्टर्स अपने पोर्टफोलियो की रीबैलेंसिंग कर रहे हैं। आर्टफिशियिल इंटेलिजेंस को लेकर ब्लैकरॉक अभी भी पॉजिटिव है। लेकिन, दूसरी जगह मौके तलाशने में वह वैल्यूएशंस को लेकर वह सेलेक्टिव एप्रोच अपना रही है।

भारत को तीन तरह के दबाव का सामना करना पड़ा

उन्होंने कहा, “हमें लगता है कि आने वाले हफ्तों और महीनों में इंडिया को इसका फायदा मिलेगा।” उनका मानना है कि बीते कुछ महीनों में इंडिया को तीन तरह के दबाव का सामना करना पड़ा है। इनमें पहला हाई वैल्यूएशन है। दूसरा, पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से एनर्जी की कीमतों में उछाल है। तीसरा, यह धारणा है कि इंडियन बाजार एआई में निवेश के लिहाज से प्राइमरी मार्केट नहीं है।

ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में जबर्दस्त तेजी

पॉवेल ने कहा कि एआई का सुपर बूम वास्तविक है। यह आगे बढ़ रहा है। लेकिन, हम निवेश के मामले में सेलेक्टिव और केयरफुल रहना चाहते हैं। इस वजह से हमने इमर्जिंग मार्केट के शेयरों को डाउनग्रेड कर न्यूट्रल रेटिंग दी है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम बेयरिश हैं। हमने अपने पूरे पैसे का निवेश किया है। लेकिन, हमारी स्ट्रेटेजी बदलने की वजह बीते कुछ महीनों में ताइवान और कोरिया के बाजारों में आई जबर्दस्त तेजी है।

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भारत में एआई कंपनियां नहीं होने से निवेश पर पड़ा असर

उन्होंने कहा कि हम यह देख रहे हैं कि क्या हम कुछ पैसा दूसरे बाजारों में लगा सकते हैं। इसका फायदा इंडिया को मिलेगा। अगले कुछ हफ्तों और महीनों में भारत में विदेशी निवेश आ सकता है। भारत से विदेशी निवेशकों के दूरी बनाने की एक बड़ी वजह यहां सीधे एआई से जुड़ी कंपनियों की गैर-मौजूदगी रही है। उधर, ताइवान और दक्षिण कोरिया की एआई और चिप बनाने वाली कंपनियों में निवेशकों को बड़े मौके दिखे हैं।

SBI Apprentice Admit Card 2026: एडमिट कार्ड आधिकारिक वेबसाइट से करें डाउनलोड, 7000 से ज्यादा पदों के लिए 11 जुलाई को है परीक्षा

SBI Apprentice Admit Card 2026: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में एप्रेंटिस के 7150 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित की जा रही है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत पंजीकरण कराने वाले उम्मीदवार अपने प्रवेश पत्र का इंतजार कर रहे हैं। बैंक इन उम्मीदवारों का इंतजार खत्म करते हुए आधिकारिक वेबसाइट पर हॉल टिकट जारी कर दिया है। कैंडिडेट्स अब अपने रजिस्ट्रेशन नंबर/रोल नंबर और पासवर्ड/जन्म तिथि का इस्तेमाल करके ऑफिशियल एसबीआई करियर पोर्टल से अपने हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं।

ऑफिशियल शेड्यूल के अनुसार, एसबीआई अप्रेंटिस ऑनलाइन परीक्षा 11 जुलाई, 2026 को होगी। एडमिट कार्ड में एग्जाम की तारीख, रिपोर्टिंग टाइम, शिफ्ट टाइमिंग, एग्जाम सेंटर का पता और एग्जाम के दिन के इंस्ट्रक्शन जैसी जरूरी डिटेल्स हैं। परीक्षार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे एडमिट कार्ड पर दी गई सभी डिटेल्स को पहले ही डाउनलोड करके वेरिफाई कर लें।

एसबीआई अप्रेंटिस एडमिट कार्ड 2026 कैसे डाउनलोड करें?

कैंडिडेट्स अपना एसबीआई अप्रेंटिस 2026 हॉल टिकट डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं:

  • ऑफिशियल एसबीआई करियर वेबसाइट ibpsreg.ibps.in पर जाएं।
  • एसबीआई अप्रेंटिस एडमिट कार्ड 2026 लिंक पर क्लिक करें।
  • रजिस्ट्रेशन नंबर/रोल नंबर और पासवर्ड/जन्म तिथि डालें।
  • सबमिट बटन पर क्लिक करें।
  • एडमिट कार्ड स्क्रीन पर आ जाएगा।
  • आगे के लिए डाउनलोड करें और प्रिंटआउट ले लें।

एसबीआई अप्रेंटिस एडमिट कार्ड 2026 पर दी गई जानकारी

उम्मीदवारों को एसबीआई अप्रेंटिस 2026 एडमिट कार्ड पर छपी ये जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए:

  • उम्मीदवार का नाम
  • रोल नंबर
  • रजिस्ट्रेशन नंबर
  • परीक्षा की तारीख
  • परीक्षा का समय और रिपोर्टिंग टाइम
  • परीक्षा केंद्र का नाम और पूरा पता
  • उम्मीदवार की फोटो और हस्ताक्षर

यदि एडमिट कार्ड में किसी भी प्रकार की गलती दिखाई दे, तो उम्मीदवार को तुरंत संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।

एग्जाम के दिन के लिए जरूरी निर्देश

एसबीआई अप्रेंटिस 2026 एग्जाम में शामिल होने वाले उम्मीदवार जल्द से जल्द अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लें। 11 जुलाई को होने वाली परीक्षा में सभी उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड की एक प्रिंटेड कॉपी परीक्षा केंद्र ले जाना होगा। यह एक जरूरी दस्तावेज है, जिसके बिना परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

चयन प्रक्रिया

उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन लिखित परीक्षा और स्थानीय भाषा परीक्षण के आधार पर किया जाएगा। परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रक्रिया से भी गुजरना होगा। अंतिम चयन निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा।

कितना मिलेगा स्टाइपेंड

एसबीआई अप्रेंटिस भर्ती के तहत देशभर में कुल 7150 अप्रेंटिस पदों पर भर्ती की जाएगी। चयनित उम्मीदवारों को अलग-अलग एसबीआई शाखाओं में एक वर्ष का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह भर्ती अप्रेंटिस अधिनियम 1961 के तहत आयोजित की जा रही है। साथ ही चयनित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान 15,000 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा।

Railway Technician Vacancy 2026: रेलवे में 10वीं पास के लिए बड़ा मौका, टेक्नीशियन के बंपर पदों पर भर्ती शुरू

भारत-PAK के 117 प्रमुख लोगों ने मोदी-शहबाज को पत्र लिखा:बोले- दुश्मनी खत्म करें, बातचीत और रिश्ते फिर शुरू हों

भारत और पाकिस्तान के 117 नेताओं, पूर्व अधिकारियों और सामाजिक हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को खुली चिट्ठी लिखी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चिट्ठी में दोनों देशों के रिश्ते सुधारने की अपील की गई है। भारत की ओर से फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मिर्वाइज उमर फारूक और आरजेडी सांसद मनोज झा समेत 61 लोगों ने इस चिट्ठी पर हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी समेत 56 लोगों ने इसका समर्थन किया है। चिट्ठी में दोनों प्रधानमंत्रियों से कहा गया है कि टकराव नहीं, बातचीत का रास्ता चुनिए, ताकि दक्षिण एशिया में शांति और विकास का माहौल बन सके। लगातार तनाव से दोनों देशों के आम लोगों और खासकर युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। खबर लगातार अपडेट की जा रही है…

‘क्या हाइप है वैभव सूर्यवंशी? मुझे नहीं पता’श्रेयस अय्यर के बड़े बोल (Video)

 

श्रेयस अय्यर ने सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को पदार्पण से दूर रखने के सवाल पर कहा है कि उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं है कि  वैभव सूर्यवंशी की कितनी हाइप है। इसका कारण यह है कि भारत के टी-20 अंतरराष्ट्रीय कप्तान ना ही न्यूज ना ही इंस्टाग्राम फोलो करते हैं। ऐसे में उनके इस रवैये पर सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हो रही है।

गौरतलब है कि सूर्यवंशी को आयरलैंड के खिलाफ एक भी मैच खेलने का मौका नहीं दिया गया था। इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज से पहले सबसे बड़ी चर्चा इस बात पर हो रही है कि क्या 15 साल के वैभव सूर्यवंशी अपना अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करेंगे।

हालाँकि, श्रेयस ने भारत की योजनाओं के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “आप कभी नहीं जानते कि क्या होने वाला है। हम अभी अपनी योजनाओं के बारे में खुलकर बात नहीं कर सकते क्योंकि यह बहुत निजी मामला है। यह ऐसी चीज़ है जिस पर हम टीम के अंदर चर्चा करते हैं। हम सबको यह नहीं बता सकते कि हम किस संयोजन के साथ खेलेंगे और न ही विरोधी टीम को यह बता सकते हैं कि क्या होने वाला है।”निश्चित रूप से, वह एक बेहतरीन प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। और जब भी उन्हें खेलने का मौका मिलेगा, वे निश्चित रूप से शानदार प्रदर्शन करेंगे।”


श्रेयस ने कहा कि इंग्लैंड की परिस्थितियां बिल्कुल अलग चुनौती पेश करती हैं और उन्हें भरोसा था कि इस बार भारत बेहतर ढंग से तैयार है। “यहां आना हमारे लिए पूरी तरह से एक नया अध्याय है। हममें से कुछ लोग पहले इंग्लैंड में खेल चुके हैं, और हम वहां की परिस्थितियों, आइडिया और मैदान के आकार-प्रकार को जानते हैं। इसलिए हम एक रोमांचक और चुनौतीपूर्ण सीरीज़ की उम्मीद कर रहे हैं।”

आयरलैंड में श्रेयस का बल्ला दोनों टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में खामोश रहा, लेकिन कप्तान ने ज़ोर देकर कहा कि उन्हें अपनी फ़ॉर्म की कोई चिंता नहीं है और उन्हें भरोसा है कि रन बनेंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या कप्तानी की वजह से उनकी बल्लेबाज़ी पर दबाव बढ़ा है, तो उन्होंने कहा, “बिल्कुल नहीं।” “जिस तरह से मैं नेट्स में बॉल को टाइम कर रहा हूं, पिछले मैच में भी मुझे लगा कि मैं बहुत बढ़िया टाइमिंग कर रहा था, बस कभी-कभी कोई बॉल उछलकर अंदरूनी किनारे से लग गई। इससे यह साबित नहीं होता कि मेरी बल्लेबाज़ी कैसी है या मैं कितना दबाव ले रहा हूं।”

पुण्यतिथि विशेष: स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और खास बातें

An image showing a scene of paying homage to Swami Vivekananda, accompanied by a message marking his death anniversary

Swami Vivekananda Life Story: भारत के महान आध्यात्मिक चिंतक, राष्ट्रनिर्माता और युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि केवल उन्हें श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों और विचारों को जीवन में अपनाने का भी संदेश देती है।ALSO READ: Vivekananda Quotes: दुनिया को एक नई दिशा दे सकते हैं स्वामी विवेकानंद के ये 10 अनमोल विचार

उन्होंने भारतीय संस्कृति, वेदांत और सनातन दर्शन को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई तथा अपने ओजस्वी विचारों से करोड़ों लोगों को आत्मविश्वास, सेवा और राष्ट्रभक्ति का मार्ग दिखाया। उनका मानना था कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके युवा होते हैं, इसलिए उन्होंने युवाओं को आत्मबल, चरित्र निर्माण और कर्मयोग का संदेश दिया।

 

स्वामी विवेकानंद ने अपने अल्प जीवन में जो कार्य किए, उनका प्रभाव आज भी पूरी दुनिया में महसूस किया जाता है। उन्होंने मानव सेवा को ईश्वर सेवा के समान बताया और शिक्षा, आत्मविश्वास तथा आध्यात्मिक जागरण को समाज की उन्नति का आधार माना। उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों, व्याख्यानों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाता है, जहां उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को याद किया जाता है।

 

यदि आज भी युवा स्वामी विवेकानंद के बताए मार्ग पर चलें, तो वे न केवल अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं, बल्कि समाज और देश के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि हर भारतीय के लिए आत्मचिंतन, प्रेरणा और राष्ट्रसेवा के संकल्प का विशेष अवसर मानी जाती है।

 

  • जन्म और प्रारंभिक जीवन:
  • रामकृष्ण परमहंस से मिलना:
  • शिकागो विश्व धर्म महासभा:
  • विशेषताएं और विचार:
  • स्वामी विवेकानंद के जीवन के प्रसिद्ध उद्धरण:
  • स्वामी विवेकानंद का निधन:

 

आइए, जानते हैं स्वामी विवेकानंद के जीवन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें:

 

जन्म और प्रारंभिक जीवन:

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में हुआ था। उनका असली नाम था नरेन्द्रनाथ दत्त। वे एक सम्पन्न बंगाली परिवार में पैदा हुए थे। उनके पिता, विश्वनाथ दत्त, एक प्रसिद्ध वकील थे और मां, भुवनेश्वरी देवी, धार्मिक विचारों वाली महिला थीं।

 

नरेन्द्रनाथ बचपन से ही बुद्धिमान और जिज्ञासु थे। वे वेद, शास्त्र और भारतीय संस्कृति के बारे में गहरी रुचि रखते थे। उन्हें बचपन से ही योग और ध्यान में रुचि थी, और उनका मानसिक विकास बहुत तीव्र था।

 

रामकृष्ण परमहंस से मिलना:

स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण परमहंस से 1881 में पहली बार मुलाकात की, और वे उनके शिष्य बन गए। रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें आत्म-ज्ञान, भारतीय संस्कृति, और जीवन के उद्देश्य को समझने में मार्गदर्शन किया। स्वामी विवेकानंद ने उनकी शिक्षा के आधार पर आत्मा की शक्ति, समाज सुधार और धार्मिक सहिष्णुता के विषय में गहरे विचार किए।ALSO READ: Swami Vivekananda Essay: स्वामी विवेकानंद पर बेहतरीन निबंध हिन्दी में

 

शिकागो विश्व धर्म महासभा:

स्वामी विवेकानंद की पहचान दुनियाभर में 1893 के शिकागो विश्व धर्म महासभा में उनके प्रसिद्ध भाषण से हुई। इस भाषण में उन्होंने भारतीय संस्कृति, धार्मिक सहिष्णुता और मानवता के महत्व पर जोर दिया। उनका उद्घाटन भाषण आज भी एक प्रेरणा का स्रोत है:

 

'आपका भारत, संसार को वह आध्यात्मिक दृष्टिकोण देगा, जिससे धर्म के प्रति असहिष्णुता, कट्टरवाद और अलगाव की भावना समाप्त होगी।'

यह भाषण आज भी धार्मिक और सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।

 

विशेषताएं और विचार:

 

स्वामी विवेकानंद के जीवन में कई विशेषताएँ और विचार थे जो उनके योगदान को अद्वितीय बनाते हैं:

 

1. आत्मविश्वास और स्वावलंबन: वे हमेशा आत्मविश्वास और स्वावलंबन के पक्षधर रहे। उनका मानना था कि व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनना चाहिए और अपनी ताकत को पहचानना चाहिए।

 

2. समाज सुधार: स्वामी विवेकानंद का मानना था कि समाज में व्याप्त बुराइयां जैसे जातिवाद, अंधविश्वास, और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना चाहिए। वे महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा के पक्षधर थे।

 

3. योग और ध्यान: उन्होंने योग को जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना और यह सिखाया कि योग के माध्यम से आत्मा और शरीर का संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

 

4. धार्मिक सहिष्णुता: स्वामी विवेकानंद का मानना था कि सभी धर्मों का मूल एक ही है, और हमें एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए। उनके अनुसार, हर धर्म का अपना महत्व और उद्देश्य है, लेकिन सच्चाई एक ही है।

 

5. भारत के गौरव का पुनर्निर्माण: स्वामी विवेकानंद ने भारतीय समाज को जागरूक किया कि वे अपनी सांस्कृतिक धरोहर को समझें और गर्व करें। उनका मानना था कि भारत का महान अतीत उसके भविष्य को रोशन कर सकता है।

 

स्वामी विवेकानंद के जीवन के प्रसिद्ध उद्धरण:

स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी हर आयु वर्ग के लोगों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत हैं। उनका जीवन न केवल भारत, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है।

 

महत्वपूर्ण उद्धरण:

1. 'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।'

2. 'अपने आत्मविश्वास को मजबूत बनाओ, यही सफलता की कुंजी है।'

3. 'आपका काम ही आपके व्यक्तित्व का सबसे बड़ा प्रदर्शन है।'

4. 'जो कुछ भी तुम कर सकते हो, या सोच सकते हो कि तुम कर सकते हो, उसे शुरू करो। साहस में बुद्धिमत्ता और शक्ति है।'

 

स्वामी विवेकानंद का निधन:

उनका निधन 39 वर्ष की उम्र में 4 जुलाई 1902 को पश्चिम बंगाल के बेलूर मठ में हुआ था। उनके अनुयायियों का मानना था कि स्वामी जी ने अंतिम समय में बेलूर मठ में ध्यान लगाते हुए अपनी इच्छा से महासमाधि प्राप्त कर ली थी तथा उनका अंतिम संस्कार, उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस की जगह पर यानी बेलूर में गंगा नदी के तट पर ही किया गया था। हालांकि उनका जीवन छोटा था, लेकिन उनके विचार और कार्य आज भी जीवित हैं और लोगों को प्रेरित करते हैं।

 

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E20 Ethanol Blending: पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाना कोई एक्सपेरिमेंट नहीं! सरकार ने जारी किया ये स्टेटमेंट

E20 Blending Program: केंद्र सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने का प्रोजेक्ट अभी सिर्फ एक ‘एक्सपेरिमेंट’ है। भारत के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने इस संबंध में एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है।

यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और अन्य तेल विपणन कंपनियों (OMCs) से जुड़े इथेनॉल आवंटन मामले की सुनवाई के बाद शुरू हुआ था। आइए जानते हैं कि सरकार ने अपने बयान में क्या कहा है और कोर्ट में असल में क्या दलीलें दी गई थीं।

भ्रामक मीडिया रिपोर्ट्स पर सरकार का कड़ा रुख

30 जून 2026 को कुछ मीडिया चैनलों और वेबसाइट्स पर खबरें छपी थीं कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने E20 प्रोग्राम को ‘अभी भी एक चल रहा एक्सपेरिमेंट’ बताया है, जिसका असर अगले साल साफ होगा।

महान्यायवादी कार्यालय ने साफ शब्दों में कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के समक्ष किसी भी स्तर पर यह दलील नहीं दी गई कि सरकार का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम या E20 ब्लेंडिंग प्रोग्राम एक ‘प्रयोग’ है। ऐसी रिपोर्टें पूरी तरह से गलत हैं और इनका कोर्ट की असल कार्यवाही से कोई लेना-देना नहीं है।’

सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल ने वास्तव में क्या कहा?

इथेनॉल आवंटन मामले में सुनवाई के दौरान महान्यायवादी ने कोर्ट के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट की थी। डेडिकेटेड इथेनॉल संयंत्रों को इथेनॉल सप्लाई और आवंटन से जुड़े इसी तरह के कई मामले देश के अलग-अलग राज्यों के उच्च न्यायालयों में भी चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि सरकार इन सभी मामलों को एक साथ जोड़ने और उन्हें शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने के लिए ‘ट्रांसफर पिटिशन’ दायर कर रही है।

ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि एक ही प्रकार के कॉन्ट्रैक्ट ढांचे से जुड़े कानूनी सवालों पर देश की सबसे बड़ी अदालत एक साथ विचार करे। इससे अलग-अलग अदालतों के विरोधाभासी फैसलों से बचा जा सकेगा और कानूनी विवाद का निपटारा भी तेजी से होगा।

यह एक ‘राष्ट्रीय कार्यक्रम’ है, नहीं रुकनी चाहिए सप्लाई

अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट में जोर देकर कहा कि इन मामलों का एक जगह निपटारा होना इसलिए जरूरी है ताकि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम जो कि एक बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसके तहत पूरे देश में पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने के लिए तेल कंपनियों को होने वाली रेगुलर सप्लाई चेन पर कोई भी आंच न आए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

अटॉर्नी जनरल की इन दलीलों को सुनने और समझने के बाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि, सरकार को इस मामले से जुड़ी प्रस्तावित स्थानांतरण याचिकाएं दायर करनी चाहिए। मौजूदा विवाद के संदर्भ में, वर्तमान इथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए इथेनॉल के आवंटन को लेकर ‘यथास्थिति’ बरकरार रखी जाए।

Auto Stocks का दम, Sensex में 500 अंकों का उछाल, Nifty भी तीन बड़ी वजहों से 24000 के पार

Stock Market Rally: एक कारोबारी दिन पहले की तेज गिरावट से उबरते हुए आज घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स-निफ्टी ने अच्छी बढ़त हासिल की। सेंसेक्स इंट्रा-डे में प्वाइंट्स से अधिक ऊपर चढ़ गया तो निफ्टी 50 भी 24000 के पार चला गया। ब्रोडर लेवल पर रौनक है और निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे-आधे फीसदी की बढ़त है। इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 11:25 AM पर सेंसेक्स 469.41 प्वाइंट्स यानी 0.61% की बढ़त के साथ 76,948.08 और निफ्टी 137.40 प्वाइंट्स यानी 0.58% के उछाल के साथ 24,003.15 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 541.13 प्वाइंट्स चढ़कर 77,019.80 और निफ्टी भी 161.10 प्वाइंट्स उछलकर 24,026.85 तक पहुंच गया था।

Stock Market Rally: इन वजहों से छाई रौनक

ऑटो और एफएमसीजी स्टॉक्स में जोरदार तेजी

जून महीने की बिक्री के आंकड़े पर ऑटो स्टॉक्स झूम उठे और इसका निफ्टी इंडेक्स 1% से ऊपर चढ़ गया। एफएमसीजी सेक्टर में भी अच्छी रौनक है और निफ्टी एफएमसीजी डेढ़ फीसदी से अधिक मजबूत हुआ है। निफ्टी रियल्टी में भी 1% से अधिक बढ़त है। इनकी तेजी ने आईटी, मेटल और फार्मा सेक्टर में बिकवाली के दबाव को फीका कर दिया जिनके निफ्टी इंडेक्स में आधे-आधे फीसदी की गिरावट है।

एशियाई बाजारों से मजबूत संकेत

घरेलू मार्केट को आज एशियाई बाजारों से मजबूत संकेत से सपोर्ट मिला है। ताइवान का ताइवान वेटेड डेढ़ फीसदी से अधिक, जापान का निक्केई 225 करीब 1% और चीन का शंघाई कंपोजिट करीब आधे फीसदी मजबूत हुआ है। हालांकि दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 2% से अधिक गिरावट का असर भारत में आईटी सेक्टर पर दिख रहा है।

तकनीकी वजह

मार्केट एनालिस्ट्स के मुताबिक जब तक निफ्टी 23800 के ऊपर बना हुआ है, मार्केट ऊपर चढ़ सकता है। एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पालवीया का कहना है कि 24200 के ऊपर जाकर निफ्टी टिकता है तो यह 24400 की तरफ बढ़ सकता है। हालांकि अगर यह 24000 का लेवल नहीं हासिल कर पाता है तो यह फिर 23800-23900 का लेवल छू सकता है।

कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान मानना है कि सेंसेक्स/निफ्टी के लिए 24,000/77,000 अहम ब्रेकआउट लेवल है और ऐसा हुआ तो मार्केट 24,150–24,200/77,500–77,700 की तरफ बढ़ सकता है। वहीं नीचे की तरफ तात्कालिक सपोर्ट जोन 23,900–23,800 पर है और 50-दिनों का एसएमए 23,800/76,300 के पास है। श्रीकांत के मुताबिक अगर यह लेवल टूटा तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और मार्केट 23,700–23,600/75,800–75,500 की तरफ खिसक सकता है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।