Railway Technician Vacancy 2026: रेलवे में 10वीं पास के लिए बड़ा मौका, टेक्नीशियन के बंपर पदों पर भर्ती शुरू

Railway Technician Vacancy 2026: सरकारी नौकरी करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए रेलवे में बंपर पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने टेक्नीशियन भर्ती 2026 का शॉर्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत रेलवे में ग्रेड I और टेक्नीशियन ग्रेड III के 6565 पदों पर भर्ती की जाएगी। इन पदों के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन कल जारी किया गया था और आज से आवेदन शुरू हो गए हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आरआरबी की आधिकारिक वेबसाइट पर 29 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। खास बात ये है कि इन पर आवेदन के लिए 10वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं।

इस पद के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को अंतिम समय में किसी भी तरह की समस्या से बचने के लिए समय सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए और फॉर्म भरना चाहिए। आरआरबी की टेक्नीशियन भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों का चयन तीन चरणों में किया जाएगा। सबसे पहले, कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) मोड में एक परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत ज्यादा खाली जगहों वाले प्रमुख रेलवे जोन में सेंट्रल रेलवे मुंबई, सदर्न रेलवे चेन्नई, नॉर्दर्न रेलवे नई दिल्ली और नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे शामिल हैं। देशभर के उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं क्योंकि नौकरी की जगह भारत के अलग-अलग रेलवे जोन में होगी।

आरआरबी टेक्नीशियन भर्ती 2026 में ये ले सकेंगे हिस्सा

आरआरबी टेक्नीशियन भर्ती 2026 के लिए उम्मीदवारों को 10वीं या SSLC पास होना जरूरी है। अभ्यर्थियों के पास मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित ट्रेड में आईटीआई सर्टिफिकेट भी होना चाहिए। संबंधित ट्रेड में एक्ट अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट रखने वाले उम्मीदवार भी कई पदों के लिए योग्य हैं।

उम्र सीमा

टेक्नीशियन ग्रेड III पद के लिए उम्मीदवारों की उम्र 18 से 30 साल के बीच होनी चाहिए। जबकि टेक्नीशियन ग्रेड I (सिग्नल) पद के लिए उम्र सीमा 18 से 33 साल है। आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलती है।

कैसे करें आवेदन

  • रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट rrbapply.gov.in पर जाएं।
  • आरआरबी टेक्नीशियन भर्ती के लिए अप्लाई लिंक पर क्लिक करें।
  • रजिस्ट्रेशन पूरा करें और नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल ID और आधार जैसी जानकारी भरें।
  • रजिस्ट्रेशन के दौरान मिले क्रेडेंशियल्स (लॉगिन डिटेल्स) से लॉग इन करें।
  • अपनी पर्सनल जानकारी, एजुकेशनल क्वालिफिकेशन, कैटेगरी और अन्य ज़रूरी जानकारी भरें।
  • जरूरी डॉक्यूमेंट्स को तय फॉर्मेट में अपलोड करें।
  • ऑनलाइन मोड से एप्लीकेशन फीस का भुगतान करें।
  • सभी जानकारी को दोबारा चेक करें और फॉर्म सबमिट करें।
  • भविष्य के लिए कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड कर लें।

AIIMS CRE-5 recruitment 2026: एम्स में ग्रुप बी और ग्रुप सी के पदों पर बंपर भर्ती, 12वीं पास कर सकते हैं आवेदन

घूमिये जरा हटके! वायरल होने से पहले घूम आए भारत के 5 अनदेखे कोने, जहां प्रकृति करती है बातें

भारत में कुछ ऐसी शानदार जगहें भी हैं जो अभी तक सोशल मीडिया की भीड़ से दूर हैं। यहां आपको नेचुरल ब्यूटी, शांति, स्थानीय संस्कृति और अनोखे एक्सपीरियंस मिलेंगे, लेकिन टूरिस्ट की भीड़ कम मिलेगी। अगर आप ऑफबीट ट्रैवल पसंद करते हैं, तो ये 7 जगहें आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर होनी चाहिए:

1. Mechuka (अरुणाचल प्रदेश)– बादलों और पहाड़ों के बीच बसा स्वर्ग

Waterfalls, Hills & Lakes: Top Tourist Places In Yercaud Hill Station in Tamil Nadu 2024

अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में स्थित मेचुका समुद्र तल से लगभग 6,000 फीट की ऊंचाई पर बसा एक खूबसूरत घाटी क्षेत्र है। चारों ओर बर्फ से ढकी पहाड़ियां, हरे-भरे घास के मैदान और बहती सियॉम नदी इस जगह को किसी विदेशी डेस्टिनेशन जैसा बनाते हैं।

यहां की सबसे खास बात यह है कि अभी भी यह जगह बड़े पैमाने पर टूरिस्ट से अछूती है। आप यहां ट्रेकिंग, स्थानीय जनजातीय संस्कृति को जानने और शांत वातावरण का आनंद ले सकते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय घाटी का दृश्य बेहद मनमोहक दिखाई देता है। 2 दिन ट्रिप के लिए दिल्ली से Dibrugarh या Guwahati के लिए फ्लाइट लें। वहां से Aalo तक सड़क मार्ग और फिर टैक्सी से मेचुका पहुंचा जा सकता है।

2. Mawlynnong (मेघालय)– एशिया का सबसे स्वच्छ गांव

Discover Shillong – Best Attractions, Food, Stays & Things to Do

मेघालय का मावलिन्नोंग अपनी साफ-सफाई और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। इस गांव को कई बार एशिया के सबसे स्वच्छ गांवों में गिना गया है। यहां की हर सड़क, हर घर और हर बगीचा बेहद व्यवस्थित दिखाई देता है।

बांस से बने स्काई वॉक से आप आसपास के जंगलों और बांग्लादेश के मैदानों का शानदार नजारा देख सकते हैं। इसके अलावा पास के जीवित जड़ों से बने पुल (लिविंग रूट ब्रिज) प्रकृति और मानव कौशल का अद्भुत उदाहरण हैं। 1 दिन वाली इस ट्रिप के लिए दिल्ली से Shillong या Guwahati तक फ्लाइट लें। शिलॉन्ग से मावलिन्नोंग लगभग 3 घंटे की टैक्सी राइड पर है।

3. Gandikota (गंडिकोटा)- आंध्र प्रदेश का शानदार और एडवेंचरस नज़ारा

File:Gandikota Canyon.jpg - Wikimedia Commons

गंडिकोटा भारत के खूबसूरत यात्रा स्थल में से एक है जिसे “ग्रैंड कैन्यन” भी कहा जाता है। यह स्थान पेन्ना नदी के किनारे स्थित गहरी घाटियों और लाल चट्टानों के लिए जाना जाता है। यहां बना प्राचीन किला इतिहास की झलक दिखाता है और सूर्योदय-सूर्यास्त का दृश्य बेहद मनमोहक होता है। गंडिकोटा पहुंचने के लिए सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन कडप्पा है, जहां से यह लगभग 90–100 किलोमीटर दूर है और आगे टैक्सी या बस से पहुंचा जा सकता है।

4. Lakir Valley (लैकीर वैली)- लद्दाख के ट्रेकिंग रूट्स

nubra-valley-46 - Vargis Khan

यह लद्दाख की एक शांत और बेहद खूबसूरत घाटी है, जहां ऊंचे पहाड़, खुला नीला आसमान और ट्रैकिंग के शानदार रास्ते मिलते हैं। यह जगह भीड़-भाड़ से दूर होने के कारण नेचर लवर्स और एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन मानी जाती है। लैकीर वैली पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले दिल्ली से लेह जाना होगा, जो हवाई मार्ग से सबसे आसान तरीका है। लेह एयरपोर्ट पहुंचने के बाद वहां से टैक्सी या लोकल कैब लेकर लगभग 1–2 घंटे में लिकिर क्षेत्र और आसपास की घाटी तक पहुंचा जा सकता है।

5. Gokarna (कर्नाटक)– गोवा जैसा एक्सपीरियंस, लेकिन कम भीड़

1,200+ Gokarna Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock | Gokarna beach

गोकर्ण को अक्सर गोवा का शांत विकल्प कहा जाता है। यहां के समुद्र तट साफ-सुथरे, शांत और थोड़े कम भीड़ वाले हैं। ओम बीच, हाफ मून बीच और पैराडाइज बीच जैसे तट नेचुरल ब्यूटी से भरपूर हैं।

यहां आप समुद्र किनारे आराम कर सकते हैं, बीच ट्रेकिंग कर सकते हैं और लोकल कर्नाटक संस्कृति को करीब से महसूस कर सकते हैं। जो लोग भीड़भाड़ से दूर समुद्री छुट्टियां बिताना चाहते हैं, उनके लिए यह शानदार ऑप्शन है। लगभग 6–8 घंटे (फ्लाइट + रोड) ट्रिप के लिए दिल्ली से Goa या Hubballi तक फ्लाइट लें। वहां से टैक्सी या ट्रेन द्वारा गोकर्ण पहुंचा जा सकता है।

6. Mandu (मध्य प्रदेश)– इतिहास और प्रेम कहानियों का शहर

Here's why Madhya Pradesh's Mandu is an architectural marvel | TimesTravel

मध्य प्रदेश का मांडू अपने प्राचीन किलों, महलों और रोमांटिक इतिहास के लिए जाना जाता है। यह जगह Baz Bahadur और Rani Roopmati की प्रेम कहानी से भी जुड़ी हुई है।

मानसून के दौरान मांडू की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। बादलों से घिरे महल और हरियाली से ढके खंडहर इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए यह किसी खजाने से कम नहीं है। इंदौर से लगभग 100 किमी दिल्ली से Indore तक फ्लाइट या ट्रेन लें। इंदौर से मांडू लगभग 2–3 घंटे की सड़क यात्रा पर है।

7. Yercaud (तमिलनाडु)– दक्षिण भारत का शांत हिल स्टेशन

Yercaud's winding mountain road features motorcycles traversing multiple hairpin curves through green and dry terrain. Static aerial view captures the serpentine asphalt road from directly overhead.

तमिलनाडु का यरकौड नीलगिरि और ऊटी जैसे पॉपुलर हिल स्टेशनों की तुलना में कम चर्चित है, लेकिन इसकी सुंदरता किसी भी तरह कम नहीं है। कॉफी के बागान, झीलें और ठंडा मौसम इसे बेहद खास बनाते हैं।

यहां आप ट्रेकिंग, बोटिंग और प्रकृति की गोद में समय बिता सकते हैं। शांत वातावरण और कम भीड़ इसे परिवारों और कपल्स के लिए आइडियल डेस्टिनेशन बनाती है। लगभग 5–7 घंटे (फ्लाइट + रोड) ट्रिप के लिए दिल्ली से Salem या Chennai के लिए फ्लाइट लें। सलेम से यरकौड लगभग 30 किमी दूर है और टैक्सी आसानी से मिल जाती है।

क्यों हैं ये जगहें खास?

इन सभी जगहों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां आपको भीड़भाड़ वाले टूरिस्ट डेस्टिनेशन से ज्यादा शांति, स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता का एक्सपीरियंस मिलता है। ये स्थान अभी भी बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया ट्रेंड्स से दूर हैं, इसलिए यहां का माहौल ज्यादा सुकून भरा महसूस होता है।

अगर आप ऐसी जगहों की तलाश में हैं जहां नेचर, संस्कृति और शांति का अनोखा मेल मिले, तो ये 7 छिपे हुए भारतीय डेस्टिनेशन आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकते हैं। अगली बार छुट्टियों की योजना बनाते समय सिर्फ पॉपुलर डेस्टिनेशन ही नहीं, बल्कि इन अनदेखी जगहों को भी अपनी लिस्ट में शामिल करें। हो सकता है आपकी सबसे यादगार ट्रिप किसी ऐसी जगह पर हो, जिसके बारे में आपने सोशल मीडिया पर बहुत कम सुना हो।

भारत-जापान में डॉलर के बिना व्यापार की तैयारी:रुपए-येन में लेनदेन होगा, PM मोदी-ताकाइची बैठक में हो सकता है ऐलान

भारत और जापान व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका कम करने की तैयारी कर रहे हैं। निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं, जिससे कारोबार का भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में हो सके। इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की नई दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद ऐलान किया जा सकता है। साने ताकाइची आज 3 दिन के भारत दौरे पर आ रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। दोनों नेताओं के बीच होने वाले 16वें भारत-जापान सलाना शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। डॉलर पर निर्भरता घटेगी, स्पेशल अकाउंट के जरिए सीधे पेमेंट अगर भारत और जापान के बीच भुगतान से जुड़ा ये प्रस्ताव लागू होता है तो दोनों देशों के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेकर औपचारिक व्यवस्था बनेगी। इस योजना के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपए और येन में लेनदेन कर सकेंगी। यानी लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश के बैंक की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस व्यवस्था से विदेशी मुद्रा बदलने का खर्च कम होगा, पैसे भेजने की लागत घटेगी और भुगतान पहले के मुकाबले जल्दी हो सकेगा। दोनों देशों को उम्मीद है कि इससे व्यापार करना आसान होगा और कंपनियों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। 2025 में बनी थी सहमति, अब लागू करने की तैयारी स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौता (MoC ) करने की तैयारी में है। यह प्रस्ताव पूरी तरह नया नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उसमें भी पेमेंट सिस्टम और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की बात कही गई थी। अब उसी योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। भारत भी पिछले कुछ वर्षों से रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। जुलाई 2022 में RBI ने ‘स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट’ शुरू किया था, ताकि दूसरे देशों के साथ रुपए में व्यापार हो सके। बाद में इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया गया और विदेशी बैंकों को इन खातों में जमा अतिरिक्त रकम भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की भी अनुमति दी गई। भारत पहले से बढ़ा रहा रुपए में कारोबार संसद में सरकार ने बताया था कि अब तक 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। RBI का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होगी और रुपए का वैश्विक इस्तेमाल बढ़ेगा। जापान भी एशिया के दूसरे देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। दिसंबर 2025 में उसने इंडोनेशिया के साथ भी ऐसा ही समझौता किया था, जिससे दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में सभी तरह के लेनदेन को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में बढ़ रहा जापानी निवेश भारत और जापान के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया। वहीं जापान अगले 10 वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश करने का लक्ष्य भी तय कर चुका है। फिलहाल भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें लगभग आधी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हैं। जापान मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना समेत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी निवेश कर रहा है। हाल ही में जापानी कंपनी ने यस बैंक में 20% हिस्सेदारी खरीदने के लिए 1.6 अरब डॉलर का निवेश भी किया है। दोनों नेता इस दौरे के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा क्वाड, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत-जापान व्यापार की 5 खास बातें ———————————— जापान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जापान में पहली बार महिला प्रधानमंत्री बनी:मजबूत सेना और संविधान में संशोधन की समर्थक हैं, मोदी-ट्रम्प ने दी बधाई साने ताकाइची जापान की प्रधानमंत्री चुनी गई हैं। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। ताकाइची को संसद के निचले सदन में हुए चुनाव में 149 के मुकाबले 237 वोटों से जीत मिली। पूरी खबर यहां पढ़ें…

भारत-जापान में डॉलर के बिना व्यापार की तैयारी:रुपए-येन में लेनदेन होगा, PM मोदी-ताकाइची बैठक में हो सकता है ऐलान

भारत और जापान व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका कम करने की तैयारी कर रहे हैं। निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं, जिससे कारोबार का भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में हो सके। इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की नई दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद ऐलान किया जा सकता है। साने ताकाइची आज 3 दिन के भारत दौरे पर आ रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। दोनों नेताओं के बीच होने वाले 16वें भारत-जापान सलाना शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। डॉलर पर निर्भरता घटेगी, स्पेशल अकाउंट के जरिए सीधे पेमेंट अगर भारत और जापान के बीच भुगतान से जुड़ा ये प्रस्ताव लागू होता है तो दोनों देशों के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेकर औपचारिक व्यवस्था बनेगी। इस योजना के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपए और येन में लेनदेन कर सकेंगी। यानी लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश के बैंक की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस व्यवस्था से विदेशी मुद्रा बदलने का खर्च कम होगा, पैसे भेजने की लागत घटेगी और भुगतान पहले के मुकाबले जल्दी हो सकेगा। दोनों देशों को उम्मीद है कि इससे व्यापार करना आसान होगा और कंपनियों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। 2025 में बनी थी सहमति, अब लागू करने की तैयारी स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौता (MoC ) करने की तैयारी में है। यह प्रस्ताव पूरी तरह नया नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उसमें भी पेमेंट सिस्टम और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की बात कही गई थी। अब उसी योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। भारत भी पिछले कुछ वर्षों से रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। जुलाई 2022 में RBI ने ‘स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट’ शुरू किया था, ताकि दूसरे देशों के साथ रुपए में व्यापार हो सके। बाद में इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया गया और विदेशी बैंकों को इन खातों में जमा अतिरिक्त रकम भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की भी अनुमति दी गई। भारत पहले से बढ़ा रहा रुपए में कारोबार संसद में सरकार ने बताया था कि अब तक 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। RBI का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होगी और रुपए का वैश्विक इस्तेमाल बढ़ेगा। जापान भी एशिया के दूसरे देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। दिसंबर 2025 में उसने इंडोनेशिया के साथ भी ऐसा ही समझौता किया था, जिससे दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में सभी तरह के लेनदेन को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में बढ़ रहा जापानी निवेश भारत और जापान के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया। वहीं जापान अगले 10 वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश करने का लक्ष्य भी तय कर चुका है। फिलहाल भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें लगभग आधी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हैं। जापान मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना समेत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी निवेश कर रहा है। हाल ही में जापानी कंपनी ने यस बैंक में 20% हिस्सेदारी खरीदने के लिए 1.6 अरब डॉलर का निवेश भी किया है। दोनों नेता इस दौरे के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा क्वाड, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत-जापान व्यापार की 5 खास बातें ———————————— जापान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जापान में पहली बार महिला प्रधानमंत्री बनी:मजबूत सेना और संविधान में संशोधन की समर्थक हैं, मोदी-ट्रम्प ने दी बधाई साने ताकाइची जापान की प्रधानमंत्री चुनी गई हैं। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। ताकाइची को संसद के निचले सदन में हुए चुनाव में 149 के मुकाबले 237 वोटों से जीत मिली। पूरी खबर यहां पढ़ें…

IND vs ENG: जीत के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया, क्या बारिश बिगाड़ेगी मुकाबले में खलल?

IND vs ENG: भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला बुधवार को चेस्टर-ले-स्ट्रीट में खेला जाएगा। आयरलैंड के खिलाफ सीरीज हारने के बाद भारतीय टीम जीत के साथ वापसी करना चाहेगी। वहीं इंग्लैंड की टीम भी हालिया खराब प्रदर्शन को भुलाकर अपने घरेलू मैदान पर शानदार शुरुआत करने के इरादे से उतरेगी। ऐसे में दोनों टीमें पहले मुकाबले में जीत के साथ सीरीज का आगाज करना चाहेंगी। इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारतीय बल्लेबाजी पर सभी की नजर रहेगी। फिलहाल युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।

वहीं अभिषेक शर्मा से एक बार फिर तेज शुरुआत की उम्मीद होगी, जबकि संजू सैमसन भी अपनी लय हासिल करना चाहेंगे। कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने भी टीम को संभालने और अगले टी20 विश्व कप की तैयारियों के बीच मजबूत प्रदर्शन करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। आइए जानते हैं कैसी होगी दोनों टीमों की प्लेइंग 11 और पिच रिपोर्ट

भारत-इंग्लैंड की संभावित प्लेइंग 11

भारत की संभावित प्लेइंग 11: अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेट कीपर), ईशान किशन, श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, सूर्यांश शेज, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती।

इंग्लैंड की संभावित प्लेइंग 11: फिल सॉल्ट, जोस बटलर (विकेट कीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, विल जैक्स, सैम करन, लियाम डॉसन, ल्यूक वुड, साकिब महमूद, आदिल राशिद।

दोनों टीमों की हेड-टू-हेड

भारत और इंग्लैंड के बीच अब तक टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 30 मुकाबले खेले जा चुके हैं। इन मुकाबलों में भारतीय टीम का रिकॉर्ड बेहतर रहा है। भारत ने 18 मैचों में जीत दर्ज की है, जबकि इंग्लैंड ने 12 मुकाबलों में बाजी मारी है। ऐसे में हेड-टू-हेड रिकॉर्ड में टीम इंडिया का पलड़ा फिलहाल भारी नजर आता है।

कैसा होगा स्टेडियम की पिच

डरहम के रिवरसाइड ग्राउंड की पिच आमतौर पर तेज गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। नई गेंद से गेंदबाजों को अच्छी स्विंग और उछाल मिलने की उम्मीद रहती है। वहीं शुरुआती ओवर संभालने के बाद बल्लेबाज खुलकर रन बना सकते हैं। ऐसे में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम अगर 175 से 185 रन के बीच स्कोर बना लेती है, तो उसे चुनौतीपूर्ण लक्ष्य माना जा सकता है।

कैसा होगा स्टेडियम की मौसम

पहले टी20 मैच के दौरान मौसम नॉर्मल रहने की संभावना है। आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं और तापमान करीब 18 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। हल्की बारिश की आशंका जरूर है, लेकिन पूरे मैच के होने की उम्मीद है। मौसम की वजह से शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को स्विंग और अतिरिक्त मदद मिल सकती है।

‘ये तो बहुत खतरनाक है’! वॉट्सएप के नए ‘यूजरनेम’ अपडेट को लेकर भारत में क्यों मचा बवाल?

वॉट्सएप बिना नंबर शेयर किए चैट के लिए ‘यूज़रनेम’ फीचर लाया है। भारत में इसे लेकर हड़कंप है। अंकुर वारिकू और ध्रुव राठी का मानना है कि इससे फेक आईडी और स्कैम्स की बाढ़ आ जाएगी, क्योंकि नंबर न दिखने से पहचान मुश्किल होगी।

पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से की बात, होर्मुज की ‘आजादी’ के साथ इन मुद्दों पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। बातचीत के दौरान राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री मोदी को क्षेत्र के ताजा हालात और आगे की संभावित स्थिति की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में बनी सहमति का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने दोहराया कि भारत का हमेशा से यही मानना रहा है कि सभी विवादों और लंबित मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही होना चाहिए।

इन मुद्दों पर हुई बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसका असर भारत समेत कई देशों के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में हाल ही में तनाव बढ़ा था। इसके बावजूद भारत, ईरान के साथ अपने मजबूत कूटनीतिक संबंध बनाए हुए है और दोनों देश उच्च स्तर पर लगातार संपर्क में हैं। साथ ही, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।

ईरान ने भेजा बुलावा 

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ईरान ने भारत को बुलावा भेजा है। इस कार्यक्रम में भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा हिस्सा लेंगे। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, सार्वजनिक समारोह 4 जुलाई को स्थानीय समयानुसार सुबह 6 बजे तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड प्रेयर ग्राउंड्स में शुरू होगा। इसी समय से आम लोगों के लिए भी कार्यक्रम स्थल खोल दिया जाएगा, ताकि वे श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारत- ईरान के मजबूत रिश्ते

ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था। इसके बावजूद भारत ने ईरान के साथ अपने कूटनीतिक संबंध लगातार मजबूत बनाए रखे। इसके लिए दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर राजनीतिक, रणनीतिक और मानवीय स्तर पर लगातार बातचीत होती रही। प्रधानमंत्री स्तर की बातचीत से लेकर मंत्रियों की मुलाकातों और ब्रिक्स (BRICS) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक, भारत ने ईरान के साथ संवाद जारी रखा और सभी स्तरों पर संपर्क बनाए रखा। संघर्ष के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से दो बार फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की जरूरत पर जोर दिया।

अमेरिका में जन्मजात नागरिकता कानून बरकरार:सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प का आदेश रद्द किया, कहा- देश में जन्मा हर बच्चा अमेरिकी नागरिक होगा

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा संवैधानिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर बच्चा जन्म से अमेरिकी नागरिक होगा, चाहे उसके माता-पिता देश में अवैध रूप से रह रहे हों या फिर अस्थायी वीजा पर आए हों। अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस कार्यकारी आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ऐसे बच्चों को जन्म से नागरिकता देने से इनकार किया गया था। यह फैसला 5-4 के बहुमत से आया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखा। अमेरिका में पिछले 158 साल से यह व्यवस्था लागू है कि वहां जन्म लेने वाला हर बच्चा अपने जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिक बन जाता है। यह अधिकार अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में दिया गया है। शपथ लेने के कुछ घंटे बाद ही जारी किया था आदेश ट्रम्प ने अपने शपथ ग्रहण वाले दिन यानी 20 जनवरी 2025 को एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन कर बर्थ राइट सिटीजनशिप पर रोक लगा दी थी। इसके कुछ ही दिन बाद कई संघीय (फेडरल) जिला अदालतों ने इस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी। यानी ट्रम्प का आदेश लागू ही नहीं हो सका। हालांकि उस समय बर्थराइट सिटिजनशिप पर रोक नहीं लगी थी, बल्कि ट्रम्प के आदेश पर रोक लगी थी। इसके बाद फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने अब अंतिम फैसला देते हुए कहा कि 14वां संशोधन जन्मजात नागरिकता की गारंटी देता है। इसलिए ट्रम्प का आदेश असंवैधानिक है और उसे रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) सामान्य कानून बनाकर जन्म से नागरिकता के अधिकार का दायरा नहीं बदल सकती। अगर इस व्यवस्था में बदलाव करना है, तो इसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा। ट्रम्प खुद भी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे 1 अप्रैल को ट्रम्प इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहे। किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति का सुप्रीम कोर्ट में इस तरह सुनवाई के दौरान मौजूद रहना बेहद दुर्लभ माना जाता है। अगर ट्रम्प का यह आदेश लागू हो जाता, तो हर साल अमेरिका में जन्म लेने वाले करीब 2.5 लाख बच्चों की कानूनी स्थिति प्रभावित होती। साथ ही परिवारों को अपने नवजात बच्चे की नागरिकता तय कराने के लिए माता-पिता की नागरिकता और इमिग्रेशन स्थिति के दस्तावेज भी देने पड़ते। यह फैसला ट्रम्प के लिए इसलिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के दौरान इसे खत्म करने का वादा किया था। अमेरिका में 157 साल पहले मिला था जन्मजात नागरिकता का अधिकार 1865 में अमेरिकी गृहयुद्ध खत्म होने के बाद, जुलाई 1868 में अमेरिकी संसद में 14वें संशोधन को मंजूरी दी गई थी। इसमें कहा गया था कि देश में पैदा हुए सभी अमेरिकी नागरिक हैं। इस संशोधन का मकसद गुलामी के शिकार अश्वेत लोगों को अमेरिकी नागरिकता देना था। हालांकि, इस संशोधन की व्याख्या इस प्रकार की गई है कि इसमें अमेरिका में जन्में सभी बच्चों को शामिल किया जाएगा, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेट्स कुछ भी हो। ट्रम्प और उनके समर्थकों का दावा है कि इस कानून का फायदा उठाकर गरीब और युद्धग्रस्त देशों से आए लोग अमेरिका आकर बच्चों को जन्म देते हैं। ये लोग पढ़ाई, रिसर्च, नौकरी के आधार पर अमेरिका में रुकते हैं। बच्चे का जन्म होते ही उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है। नागरिकता के बहाने माता-पिता को अमेरिका में रहने की कानूनी वजह भी मिल जाती है। अमेरिका में यह ट्रेंड काफी लंबे समय से जोरों पर है। आलोचक इसे बर्थ टूरिज्म कहते हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक 16 लाख भारतीय बच्चों को अमेरिका में जन्म लेने की वजह से नागरिकता मिली है। ट्रम्प के करीबियों को भी मिला था जन्मजात नागरिकता का लाभ दिलचस्प बात यह है कि ट्रम्प के कई करीबी सहयोगी भी इसी जन्मजात नागरिकता व्यवस्था का लाभ उठा चुके हैं। विदेश मंत्री मार्को रूबियो, एफबीआई निदेशक काश पटेल और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पत्नी उषा वेंस के माता-पिता दूसरे देशों से अमेरिका आए थे। इनका जन्म अमेरिका में हुआ, इसलिए इन्हें जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिकता मिल गई। कोर्ट के इस फैसले से भारतीयों को राहत क्यों मिली? H-1B वीजा धारकों के लिए गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के नियम नहीं बदलेंगे अमेरिका के इमिग्रेशन कानून या वीजा नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो H-1B वीजा या किसी अन्य वैध अस्थायी वीजा पर रह रहे लोगों को अमेरिका में गर्भधारण करने या बच्चे को जन्म देने से रोकता हो। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी ऐसे परिवारों के अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को संविधान के 14वें संशोधन के तहत जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिक माना जाएगा। क्या बच्चे की नागरिकता मिलने से माता-पिता को भी नागरिकता मिल जाएगी? जवाब है- नहीं। अगर किसी बच्चे का जन्म अमेरिका में होता है तो उसे जन्म से अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है, लेकिन इसका फायदा उसके माता-पिता को नहीं मिलता। H-1B या किसी अन्य अस्थायी वीजा पर रह रहे लोगों को अपने इमिग्रेशन स्टेटस को पहले की तरह अलग से बनाए रखना होगा। मौजूदा अमेरिकी कानून के मुताबिक, अमेरिकी नागरिक बच्चा अपने माता-पिता के लिए स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) की सिफारिश तभी कर सकता है, जब उसकी उम्र 21 वर्ष हो जाए। भारतीय मूल के बच्चों के लिए दोहरी नागरिकता का क्या नियम है? भारत पूरी तरह दोहरी नागरिकता (ड्यूल सिटिजनशिप) की अनुमति नहीं देता। अगर भारतीय माता-पिता के यहां अमेरिका में बच्चा पैदा होता है, तो उसे जन्म के साथ अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है। हालांकि, वह एक साथ पूरी भारतीय नागरिकता नहीं रख सकता। ऐसे बच्चों के लिए माता-पिता ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड बनवा सकते हैं। ओसीआई कार्ड मिलने पर उन्हें भारत आने के लिए आजीवन वीजा की जरूरत नहीं होती। साथ ही भारत में रहने से जुड़े कई अधिकार भी मिलते हैं।

IND vs ENG: वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर सस्पेंस बरकरार, प्लेइंग इलेवन को लेकर श्रेयस अय्यर ने अब तक नहीं खोले पत्ते

IND vs ENG: आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारत को 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस सीरीज में संजू सैमसन और ईशान किशन का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इसके बाद युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका देने की मांग और तेज हो गई है। वहीं आयरलैंड के बाद अब भारतीय टीम इंग्लैंड के साथ 5 मैचों की टी20 सीरीज खेलेगी। टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 1 जुलाई को खेला जाएगा। भारत और इंग्लैंड के बीच पहले टी20 मैच से पहले कप्तान श्रेयस अय्यर ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

श्रेयस अय्यर से जब पूछा गया कि क्या वैभव पहले मुकाबले में खेलेंगे, तो उन्होंने कहा कि टीम चयन से जुड़ी बातें सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। अय्यर ने कहा कि वह टीम की रणनीति या प्लेइंग इलेवन के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दे सकते।

तोड़ सकते हैं रिकॉर्ड

15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी से उम्मीद की कि उन्हें आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिलेगा। टीम में चुने जाने के बाद वह भारत के लिए सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बन सकते थे। टीम प्रबंधन ने पहले दो मैचों में वैभव को मौका नहीं दिया और संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा व ईशान किशन जैसे अनुभवी बल्लेबाजों पर भरोसा जताया।

वैभव के डेब्यू पर क्या बोले अय्यर

श्रेयस अय्यर ने मंगलवार को कहा, “देखिए, आपको कभी नहीं पता होता कि क्या होने वाला है। फिलहाल मैं इस बारे में कुछ नहीं बता सकता, क्योंकि टीम संयोजन से जुड़ी बातें पूरी तरह निजी होती हैं। हम अपनी रणनीति और प्लेइंग इलेवन के बारे में पहले से खुलासा नहीं कर सकते, क्योंकि इससे विपक्षी टीम को फायदा मिल सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “वैभव एक शानदार प्रतिभाशाली खिलाड़ी है और जब भी उसे मौका मिलेगा, मुझे पूरा भरोसा है कि वह बेहतरीन प्रदर्शन करेगा।”

अय्यर ने क्या कहा

जब उनसे बेंच पर बैठे खिलाड़ियों और विश्व कप विजेता खिलाड़ियों को लगातार मौका देने को लेकर सवाल पूछा गया, तो अय्यर ने टीम के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा, “इस टीम में हर खिलाड़ी ने अच्छा प्रदर्शन किया है, ऐसा नहीं है कि सिर्फ एक खिलाड़ी ने ही खुद को साबित किया है। हमें खिलाड़ियों का भरोसा बनाए रखना होगा और उन्हें लगातार मौके देने होंगे, ताकि उनका आत्मविश्वास बना रहे। जिन्होंने पिछला टी20 विश्व कप जीता है, उन्हें इस फॉर्मेट का अच्छा अनुभव है और वे लंबे समय से टीम के अहम खिलाड़ी रहे हैं। इसलिए उनका समर्थन करना जरूरी है।”

El Nino Impact in July: IMD के मंथली आउटलुक में जुलाई में भी मानसून वाली बारिश का हाल ठीक नहीं, अल नीनो का खतरा यहां तक पहुंचा

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए अपना मासिक आउटलुक जारी कर दिया है। मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की बारिश का हाल ठीक नहीं रहने वाला है और इसके सामान्य से कम होने की पूरी संभावना है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो को माना जा रहा है। इसका खतरा अब और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

जुलाई में सामान्य से कम रहेगी बारिश: IMD का पूर्वानुमान

IMD द्वारा मल्टी-मॉडल एनसेंबल फोरकास्टिंग सिस्टम के आधार पर अपने पूर्वानुमान जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम (<94% of Long Period Average – LPA) रहने की सबसे अधिक संभावना है।

क्या है बारिश का सामान्य आंकड़ा (LPA)?

साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने के लिए पूरे देश की दीर्घकालिक औसत वर्षा लगभग 280.4 मिमी है। IMD का पूर्वानुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में कम बारिश होगी। उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य से ऊपर या सामान्य रहने की संभावना है।

मजबूत हो रहा है अल नीनो, न्यूट्रल रहेगा आईओडी

मौसम विभाग ने मानसून की बारिश पर असर डालने वाले वजहों के बारे में भी बताया है। IMD के मुताबिक अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर कमजोर अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। लेकिन मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के ताजा संकेत बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह अल नीनो स्थितियां और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति कैसी है?

इस समय हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी की स्थिति देखी जा रही है। मॉडल के पूर्वानुमानों के अनुसार, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह न्यूट्रल आईओडी स्थिति ही बनी रहने की संभावना है। इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह के तापमान में अंतर को दर्शाने वाली जलवायु सिस्टम है। सामान्य तौर पर यदि IOD सकारात्मक रहता है तो यह भारतीय मानसून को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार IOD के तटस्थ रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि यह मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएगा और अल नीनो का प्रभाव अधिक हावी रहेगा।

जुलाई में सताएगी गर्मी, तापमान रहेगा सामान्य से अधिक

कम बारिश के अनुमान के बीच जुलाई के महीने में देशवासियों को सामान्य से अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई के दौरान, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम-मध्य भारत के कुछ छिटपुट इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। रात के समय या न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश क्षेत्रों में यह भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। सिर्फ मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ अलग-अलग हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है।

कम बारिश से बढ़ेंगी चुनौतियां, तैयारी करने की सलाह

आईएमडी ने आगाह किया है कि जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कई मोर्चों पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। बारिश की कमी के कारण कृषि, जल संसाधन, जलविद्युत उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने बताया कि वह नुकसान को कम करने के लिए विस्तारित अवधि के पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम विज्ञान सलाहकार सेवाएं और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान जारी करता रहता है। ये किसान, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और बिजली क्षेत्र के योजनाकारों के लिए मददगार हैं।

अगला पूर्वानुमान कब?

आईएमडी द्वारा मानसून सीजन के दूसरे भाग (अगस्त + सितंबर 2026) के लिए और विशेष रूप से अगस्त महीने की बारिश का पूर्वानुमान जुलाई 2026 के अंत में जारी किया जाएगा