Ram Mandir Donation Row: ‘भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन…’; अयोध्या में कांग्रेस नेता अजय राय हाउस अरेस्ट, पुलिस को दी चेतावनी

Ram Mandir Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के कथित गबन को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार (30 जून) को अयोध्या में राम मंदिर में पूजा-अर्चना करेगा। लेकिन, इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया है।

पार्टी की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय करेंगे। इसमें पार्टी के सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमण सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) शामिल होंगे।

प्रतिनिधिमंडल के साथ बाराबंकी के पूर्व सांसद एस.पी. गौतम, विधान परिषद के पूर्व सदस्य दीपक सिंह, महाराजगंज के पूर्व विधायक वीरेंद्र चौधरी और बाराबंकी की पूर्व विधायक मीता गौतम भी मौजूद रहेंगी। पार्टी ने प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम की जानकारी स्थानीय प्रशासन को दे दी है। इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया। पार्टी ने देर रात एक बयान में इसकी पुष्टि की है।

‘अयोध्या नहीं छोड़ेंगे’

अजय राय ने मंगलवार को दावा किया कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती तब तक अयोध्‍या नहीं छोड़ेंगे। अयोध्‍या से अजय राय ने मंगलवार को फोन पर पीटीआई से बातचीत में कहा, “मंगलवार के कार्यक्रम के लिए अयोध्या पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें तुरंत ‘हाउस अरेस्ट’ (नजरबंद) कर लिया।” हालांकि, उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती, वे अयोध्या नहीं छोड़ेंगे।

राय ने एक अतिथि गृह से पीटीआई फोन पर बातचीत में पूछा, “यह कैसी सरकार है जो हमारे राम मंदिर जाने से डरती है।” राय ने कहा कि उन्हें मंगलवार के कार्यक्रम के लिए मंदिर शहर पहुंचने के तुरंत बाद सोमवार आधी रात को एक अतिथि गृह में ले जाया गया था। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “आधी रात को मुझे मेरे होटल से आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में ले जाया गया और अभी मुझे वहीं रखा गया है।”

उनकी पत्नी ने उनके ठिकाने को लेकर चिंता जताई थी। राय यह पक्का नहीं बता पाए कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है या नजरबंद किया गया है। उन्होंने अंदेशा जताते हुए कहा, “मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे गिरफ़्तार कर लिया है, वरना वे मुझे आधी रात को इस अतिथि गृह में क्यों लाते और यहां क्यों रोककर रखते?” राय ने कहा, ‘‘मेरे दल के कई सदस्य जो आज के कार्यक्रम के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से आ रहे थे, उन्हें रोका गया, गिरफ्तार किया गया या उनके घरों में ही रोक दिया गया।’’

कौन-कौन नेता शामिल?

इस दल में शामिल अन्य कांग्रेस नेताओं में सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमन सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) के अलावा अन्य लोग भी शामिल थे। अजय राय ने इस बीच मंगलवार को भारतीय युवक कांग्रेस के X पर एक पोस्ट को साझा किया जिसमें कहा गया कि आज कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए अयोध्या जा रहा था, लेकिन भाजपा सरकार ने उप्र कांग्रेस अध्यक्ष अजय रा जी समेत प्रतिनिधिमंडल को हाउस अरेस्ट कर लिया।

पोस्‍ट में सवाल उठाया गया है कि आखिर प्रभु श्री राम के भक्तों से इतना डर क्यों? जय श्री राम। अयोध्या में राम मंदिर दान में कथित गबन का मामला आने के बाद इसके पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 18 जून को अयोध्या की यात्रा करके दर्शन पूजन किया था। अयोध्या में दान में गबन का मामला सात जून को समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उठाया और न्यायिक हस्तक्षेप पर जोर दिया था।

हालांकि, इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने एक तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

‘भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन…’

अजय राय ने कहा, “आज हम सभी भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन बीजेपी सरकार ने हमें गिरफ़्तार कर लिया है और आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में बंद कर दिया है। उन्होंने हमारे सभी साथियों को भी नजरबंद कर दिया है। हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान राम बीजेपी और आरएसएस के लोगों को सद्बुद्धि दें, जो उनके नाम का इस्तेमाल करके सत्ता में आए हैं, ताकि वे इस पवित्र शहर में हो रहे घोटालों को रोकें। हमारी सामूहिक मांग है कि पुलिस रिमांड लेकर उन निचले स्तर के कर्मचारियों से पूछताछ करे जिन्हें जेल भेजा गया है।”

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यूपी कांग्रेस प्रमुख ने आगे कहा, “इसके अलावा, इसमें शामिल हाई-प्रोफ़ाइल लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज होनी चाहिए, जिनमें निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र (जो पांच साल तक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव रहे), अनिल मिश्र (जो इस भ्रष्टाचार और चोरी में सीधे तौर पर शामिल हैं), गोपाल राय, चंपत राय, बंसल और गोविंद देव गिरी शामिल हैं। उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए और उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

AC Blast: धड़ाधड़ हो रहे हैं AC ब्लास्ट! अगर आपके घर में हो जाए ऐसा हादसा, तो क्या बीमा कंपनी देगी नुकसान का पैसा? जानें

Home Insurance Cover for AC Blast: दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में इस समय भीषण गर्मी जारी है। इसी तपती गर्मी के बीच आजकल एसी ब्लास्ट और उससे घरों में आग लगने की डरावनी घटनाएं खूब सुनने को मिल रही हैं। हाल ही में नोएडा की एक हाईराइज सोसाइटी की 21वीं मंजिल पर भी एसी ब्लास्ट के कारण भीषण आग लग गई, जिसने लोगों को गहरी चिंता में डाल दिया है।

AC ब्लास्ट की ये घटनाएं जितनी खतरनाक हैं, उतनी ही बड़ी वित्तीय चपत भी लगाती हैं। ऐसे में हर घर के मालिक के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या होम इंश्योरेंस पॉलिसी एसी फटने से होने वाले नुकसान की भरपाई करती है? आइए बताते हैं कि बीमा नियमों के हिसाब से आपको क्लेम मिलेगा या नहीं।

पहले जानिए AC में ब्लास्ट क्यों होता है?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एसी यूनिट में धमाका या आग लगने के दो मुख्य कारण होते हैं:

कंप्रेशर फेल होना: अत्यधिक दबाव और लगातार चलने से जब सबसे ज्यादा प्रेशराइज्ड पार्ट यानी कंप्रेशर ओवरलोड हो जाता है, तो बेहद दुर्लभ मामलों में वह फट सकता है।

शॉर्ट सर्किट: भीषण गर्मी में ओवरहीटिंग के कारण तारों में शॉर्ट सर्किट होता है, जिससे उठी चिंगारी तेजी से पूरी यूनिट और घर में आग फैला देती है।

पॉलिसी में क्या-क्या कवर होता है?

बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के हेड (कमर्शियल अंडरराइटिंग) गुरदीप सिंह बत्रा के मुताबिक, भारत गृह रक्षा या हाउसहोल्डर पैकेज पॉलिसी जैसी स्टैंडर्ड होम इंश्योरेंस पॉलिसियों में ‘धमाके’ को एक जोखिम माना गया है।

अगर एसी ब्लास्ट या शॉर्ट सर्किट के कारण घर में आग लगती है, तो पॉलिसी के तहत दीवारों, छत, फर्नीचर, फिटिंग्स और घर के अन्य सामान को हुए नुकसान की पूरी भरपाई की जाती है।

इंश्योरेंस टेक प्लेटफॉर्म Securenow.in के मैनेजिंग डायरेक्टर अभिषेक बोंदिया के अनुसार, भले ही कुछ नीतियां खुद AC यूनिट के नुकसान को बाहर रख दें, लेकिन आग के कारण आसपास की दीवारों, पेंट या डेकोर को जो नुकसान होगा, उसका क्लेम मिलेगा।

पेच कहां है? खुद AC का पैसा कब मिलेगा?

स्टैंडर्ड होम इंश्योरेंस आग से जले घर का पैसा तो दे देगा, लेकिन खुद फटने वाले एसी का पैसा सामान्य तौर पर नहीं देता है। अगर आप चाहते हैं कि ब्लास्ट हुए एसी या फ्रिज का पैसा भी कंपनी दे, तो आपको अपनी पैकेज पॉलिसी में ‘डोमेस्टिक अप्लाइंस ब्रेकडाउन’ या ‘मशीन ब्रेकडाउन कवर’ का ऐड-ऑन लेना होगा। यह आपके घर के घोषित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आकस्मिक मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल खराबी से सुरक्षा देता है।

क्या कवर नहीं होता?

बीमा लेते समय और क्लेम करते समय इन बातों का ध्यान रखें, क्योंकि इन स्थितियों में क्लेम रिजेक्ट हो सकता है:

घोर लापरवाही या जानबूझकर किया गया नुकसान: अगर एसी की सालों से सर्विस नहीं हुई है या उसे जानबूझकर ऐसी स्थिति में चलाया गया जिससे हादसा हो, तो कंपनी मना कर सकती है।

कीमती सामान: घर में रखा कैश, चेक, जरूरी दस्तावेज, और बिना घोषित किए रखे गए सोने-चांदी के जेवरात या कीमती पत्थर साधारण पॉलिसी में कवर नहीं होते। आग लगने के दौरान या उसके तुरंत बाद होने वाली चोरी भी इसमें शामिल नहीं होती।

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‘हम उन हाथों को काट देंगे जो…’: सिंधु जल विवाद पर पाकिस्तान ने फिर दी गीदड़भभकी

पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत के खिलाफ एक बार फिर भड़काऊ बयान दिया है। इस बार उन्होंने कहा कि जो भी पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर दावा करेगा, उसके “हाथ काट दिए जाएंगे।” बता दें कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है।

गौरतलब है कि साल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक की मौत के बाद भारत ने इस संधि को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला किया था।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मलिक ने भारत पर पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने का आरोप लगाया और कहा कि पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी में किसी भी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं करेगा।

‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मलिक ने कहा, “एक पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री एक नल को कंट्रोल कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं बहने देंगे।”

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की 40-50 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है। उन्होंने कहा, “कोई बाहरी ताकत देश की खाद्य सुरक्षा, 50% रोजगार और 25% अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रहा है।”

मंत्री ने दावा किया कि पाकिस्तान ने “पहले ही साफ कर दिया है कि जो कोई भी उसे पानी से वंचित करने की कोशिश करेगा, उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।”

उन्होंने ने कहा, ” लेकिन यह सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि न्याय का भी सवाल है। हम अपनी रक्षा करेंगे… ऐसा नहीं है कि हमने बस इसकी घोषणा की है, बल्कि हमने साबित किया है कि अगर कोई हमारे हिस्से के पानी पर हाथ भी डालेगा, तो हम वह हाथ काट देंगे।”

मलिक ने कहा कि दुनिया में दूसरी जगहों पर, बिना किसी संधि के भी पानी बहता रहता है, जो सिर्फ एक कन्वेंशन (समझौते) से नियंत्रित होता है।

उन्होंने आगे कहा, “क्या अब हर ‘अपर रिपेरियन’ (नदी के ऊपरी हिस्से वाले देश) को ‘लोअर रिपेरियन’ (नदी के निचले हिस्से वाले देश) की ओर पानी का बहाव रोकने का अधिकार है?… लेकिन हमारे पास तो संधि भी है। तो फिर यहां पानी कैसे रोका जा सकता है? यही बात हम कल रखेंगे।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि “संधि मौजूद है” और साथ ही यह भी कहा कि मंगलवार का सम्मेलन मुख्य रूप से न्याय और अधिकारों के बारे में था।

उन्होंने ने कहा, “यह तय किया जाएगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्याय क्या है। यह तय किया जाएगा कि क्या दुनिया भर में नदी के निचले इलाकों में रहने वाले बच्चों को पानी का अधिकार है।”

पाकिस्तान ने जल संधि का बचाव किया

उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में, पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भी जोर देकर कहा कि सिंधु जल संधि कानूनी रूप से बाध्यकारी है और इसे एकतरफा तौर पर निलंबित, रद्द या उसमें संशोधन नहीं किया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि “कानूनी रूप से लागू संधि” के तहत पाकिस्तान के लोगों का सिंधु जलमार्गों पर अधिकार है, जो अभी भी प्रभावी है।

‘डॉन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, “कानूनी तौर पर पाकिस्तान के रुख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिला है, क्योंकि IWT को एकतरफा तौर पर रद्द, समाप्त या उसमें संशोधन नहीं किया जा सकता है।”

मंत्री ने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और रक्षा बलों के प्रमुख तथा सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने कई बार कहा है कि “पानी हमारी जीवन रेखा के साथ-साथ हमारी ‘रेड लाइन’ (अति-महत्वपूर्ण सीमा) भी है”।

संधि

सीमापार से आए इन बयानों के कुछ हफ्तों बाद केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी.आर. पाटिल ने मीडिया को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कहा था कि भारत अगले डेढ़ से दो वर्षों के भीतर सिंधु जल में अपने हिस्से का पूरा उपयोग करने की योजना बना रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कहा था कि भारत के हिस्से का एक भी बूंद पानी पाकिस्तान की ओर नहीं जाने दिया जाएगा।

भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से संचालित सीमा पार आतंकवाद के ढांचे को खत्म करने के लिए ठोस और सत्यापन योग्य कदम नहीं उठाता, तब तक यह संधि स्थगित ही रहेगी।

बता दें की यह संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी और तब से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली और उसकी सहायक नदियों के पानी के बंटवारे और उपयोग को नियंत्रित करती आ रही है।

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WhatsApp ला रहा है Username फीचर, प्राइवेसी होगी मजबूत या बढ़ेंगे ऑनलाइन फ्रॉड? जानिए पूरी बात

WhatsApp जल्द ही अपने यूजर्स के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आने वाला है, जिसका नाम है Username फीचर। इस नए फीचर के जरिए लोग अपनी एक यूनिक डिजिटल पहचान बना सकेंगे और दूसरों से जुड़ने के लिए मोबाइल नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं होगी। यह कदम ऐप में प्राइवेसी और सेफ्टी को और मजबूत करने की दिशा में माना जा रहा है। यूजर्स अब अपने मनपसंद यूजरनेम चुन सकेंगे, जिससे चैटिंग का तरीका पहले से ज्यादा आसान और सुरक्षित हो जाएगा।

साथ ही, WhatsApp ने इस फीचर के लिए कुछ खास नियम भी तैयार किए हैं, ताकि हर यूजर का नाम अलग और वैध हो तथा किसी तरह की कॉपी या गलत पहचान से बचा जा सके। इस बदलाव को सोशल मीडिया और टेक वर्ल्ड में एक बड़े अपडेट के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में ऑनलाइन बातचीत के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है।

प्राइवेसी के साथ बढ़ेग चुनौतियां

WhatsApp का कहना है कि यह फीचर यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत करेगा, क्योंकि अब हर बातचीत के लिए फोन नंबर साझा करना जरूरी नहीं होगा। हालांकि, इस फीचर के सामने आते ही साइबर सुरक्षा और फर्जी पहचान को लेकर नई चिंताएं भी सामने आने लगी हैं।

अंकुर वारिकू ने जताई बड़ी चिंता

उद्यमी और कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू ने इस फीचर को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी चिंता जाहिर की। उनका कहना है कि अगर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो ठग ऐसे यूजरनेम बना सकते हैं जो किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलते-जुलते हों और लोगों को आसानी से धोखा दे सकते हैं।

भारत जैसे देश में यह खतरनाक साबित हो सकता है’

वारिकू ने कहा कि भारत जैसे देश में ऑनलाइन ठगी पहले से ही बड़ी समस्या है। अगर किसी ठग ने warikoo, ankur_warikoo या इससे मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों से पैसे मांगे, तो कई लोग आसानी से भ्रमित हो सकते हैं। उनके अनुसार, ऐसे मामलों को रोकने के लिए WhatsApp को मजबूत एंटी-अब्यूज सिस्टम लागू करना होगा।

पहले भी उठा चुके हैं फर्जी विज्ञापनों का मुद्दा

वारिकू ने बताया कि वह पहले भी Meta के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ चुके हैं। उनका आरोप था कि AI से बने फर्जी विज्ञापनों में उनकी तस्वीर का इस्तेमाल कर लोगों को निवेश वाले WhatsApp ग्रुप में जोड़ने की कोशिश की गई थी। उनका मानना है कि इसी तरह की ठगी नए Username फीचर के जरिए भी बढ़ सकती है।

सोशल मीडिया पर यूजर्स भी बंटे

वारिकू की पोस्ट के बाद कई लोगों ने उनकी चिंता से सहमति जताई। कुछ यूजर्स का कहना था कि अगर WhatsApp को सच में प्राइवेसी बढ़ानी थी, तो उसे ऐसे विकल्प देने चाहिए थे जिनसे केवल कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद लोग ही मैसेज या कॉल कर सकें।

4 अंकों का PIN भी होगा, फिर भी चिंता बरकरार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, WhatsApp यूजरनेम के साथ 4 अंकों का PIN भी जोड़ेगा, जिससे गलत व्यक्ति तक पहुंचना आसान नहीं होगा। इसके बावजूद कई यूजर्स का मानना है कि यह फीचर प्लेटफॉर्म की मूल पहचान को बदल सकता है और फर्जी अकाउंट्स के लिए नए रास्ते खोल सकता है।

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Monsoon Advancement in UP: यूपी में हो गई मानसून की एंट्री, 30 जून को आजमगढ़, अयोध्या, बरेली से गुजर रहा, IMD ने दिया ये अलर्ट

Monsoon Advancement in UP: उत्तर प्रदेश के निवासियों और किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में दस्तक दे दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से 30 जून को जारी ताजा आधिकारिक बयान के मुताबिक मानसून उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के कुछ और इलाकों, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के शेष हिस्सों, उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों और हिमाचल प्रदेश व लद्दाख के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया है।

यूपी के इन शहरों से गुजर रही है मानसून की सीमा

मौसम विभाग के मुताबिक, 30 जून को मानसून की उत्तरी सीमा उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से होकर गुजर रही है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, सागर, सिद्धी, आजमगढ़, अयोध्या, बरेली, देहरादून, मंडी से होकर गुजर रही है।

अगले 2-3 दिनों के लिए IMD का पूर्वानुमान और अलर्ट

मौसम विभाग (IMD) ने आगामी दिनों के लिए अनुकूल परिस्थितियों का संकेत दिया है। अगले 2 से 3 दिनों के दौरान मानसून के और आगे बढ़ने के लिए स्थितियां पूरी तरह से अनुकूल बनी हुई हैं। इस दौरान मानसून उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों के साथ-साथ उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, पूरे दमन और दीव, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के शेष हिस्सों, पूरे जम्मू-कश्मीर, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली और पंजाब के अधिकांश हिस्सों और राजस्थान के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ेगा।

सुस्त मानसून का खरीफ फसलों की बुआई पर असर

मानसून की इस एंट्री से कृषि क्षेत्र को बड़ी उम्मीदें हैं क्योंकि इस साल मानसून की धीमी गति और देरी से शुरुआत के कारण देश में धान सहित खरीफ फसलों की बुआई काफी पिछड़ गई है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जून तक देश में कुल खरीफ बुआई का रकबा 182.72 लाख हेक्टेयर रहा है।

यह पिछले साल की समान अवधि के 236.46 लाख हेक्टेयर की तुलना में 23 प्रतिशत कम है। मुख्य खरीफ फसल धान का रकबा 25.17 प्रतिशत घटकर 25.75 लाख हेक्टेयर रह गया है। ये पिछले साल 34.41 लाख हेक्टेयर था। दालों की बुआई में 30.47 प्रतिशत की गिरावट आई है (14.92 लाख हेक्टेयर बनाम 21.46 लाख हेक्टेयर)। इसमें तुअर/अरहर की बुआई पिछले साल के 8.45 लाख हेक्टेयर के मुकाबले केवल 3.56 लाख हेक्टेयर हुई है।

वहीं तिलहन का रकबा 53.33 प्रतिशत भारी गिरावट के साथ 16.99 लाख हेक्टेयर (पिछले साल 36।41 लाख हेक्टेयर) रह गया है। इसमें मूंगफली का रकबा गिरकर 8.87 लाख हेक्टेयर और सोयाबीन का रकबा घटकर 6.92 लाख हेक्टेयर पर आ गया है। मोटे अनाज का रकबा घटकर 31.84 लाख हेक्टेयर और कपास की बुआई 34.61 प्रतिशत घटकर 29.66 लाख हेक्टेयर रह गई है।

इस गिरावट के बीच गन्ने के रकबे में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है और यह 56.64 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 57.31 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। जबकि जूट और मेस्टा का रकबा भी 6.13 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 6.25 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है।

अल नीनो का खतरा और जलाशयों की वर्तमान स्थिति क्या है?

मौसम विभाग के मुताबिक 24 जून तक दक्षिण-पश्चिम मानसून देश भर में सामान्य से 42 प्रतिशत नीचे दर्ज किया गया था। इसमें सबसे ज्यादा कमी मध्य भारत (59 प्रतिशत की कमी) में देखी गई थी। इसके बाद पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 41 प्रतिशत, दक्षिण प्रायद्वीप में 28 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

इस कमी की मुख्य वजह भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मौजूद अल नीनो की स्थितियां हैं। इसके जून-सितंबर मानसून सीजन के दौरान और मजबूत होने की आशंका है। इसके अलावा केंद्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा निगरानी किए जाने वाले 166 महत्वपूर्ण जलाशयों में लाइव स्टोरेज क्षमता 25 जून तक 48.405 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) थी। ये कुल क्षमता का सिर्फ 26.37 प्रतिशत है। यह पिछले साल के भंडारण का 73.21 प्रतिशत और सामान्य स्तर का 105.67 प्रतिशत है।

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कुल 166 जलाशयों में से 55 जलाशय ऐसे हैं जहां भंडारण सामान्य क्षमता का 80 प्रतिशत या उससे कम है। इनमें से 29 जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य क्षमता के 50 प्रतिशत या उससे भी कम रह गया है। ऐसे में यूपी में मानसून के इस नए एडवांसमेंट से आने वाले दिनों में पानी की किल्लत दूर होने और खेती को गति मिलने की उम्मीद है।

विदेश नहीं स्वदेश, बाली जैसी 8 जगह भारत में जहां है समुद्र सुंदरता और सुकून!

भारत में कई ऐसी खूबसूरत जगहें हैं जो आपको बिना विदेश गए ही बाली जैसा ट्रॉपिकल एक्सपीरियंस देती हैं। यहां का नीला समुद्र, सफेद रेत और नारियल के पेड़ों से सजा माहौल मन को तुरंत आकर्षित कर लेता है। कुछ जगहें इतनी शांत और प्राकृतिक हैं कि लगता है जैसे समय वहीं थम गया हो। आइए जानते हैं भारत की ऐसी 8 जगहों के बारे में जो बिल्कुल बाली जैसी फील देती हैं:

तारकरली

beautiful debag beach island bird eye view in malvan

तारकरली महाराष्ट्र का एक अनछुआ बीच डेस्टिनेशन है, जो अपनी सफेद रेत और क्रिस्टल-क्लियर पानी के लिए जाना जाता है। यहां स्कूबा डाइविंग और स्नॉर्कलिंग का एक्सपीरियंस बहुत खास होता है। कम भीड़ और प्राकृतिक सुंदरता इसे बाली जैसा ट्रॉपिकल फील देती है। तारकरली के लिए नवंबर से फरवरी का समय बेस्ट होता है, जब समुद्र और मौसम दोनों साफ रहते हैं। यहां कंकावली रेलवे स्टेशन सबसे नज़दीक है और गोवा या मुंबई से सड़क मार्ग भी अच्छा ऑप्शन है। यहां 2–3 दिन में लगभग ₹6,000 से ₹14,000 खर्च आता है।

 

गोकर्ण

Walking through the streets of Gokarna - RTF | Rethinking The Future

गोकर्ण एक शांत और कम भीड़ वाला बीच टाउन है, जो गोवा के पास स्थित है। यहां के ओम बीच, कुडले बीच और हाफ मून बीच बहुत साफ और प्राकृतिक हैं। योग, मेडिटेशन और शांत समुद्री माहौल इसे बाली जैसी सुकून भरी जगह बनाते हैं। गोकर्ण घूमने के लिए अक्टूबर से फरवरी का समय सबसे सही है। यहां पहुंचने के लिए गोवा या हुबली एयरपोर्ट और अंकोला/कारवार रेलवे स्टेशन का उपयोग किया जाता है। 2–3 दिन की यात्रा में लगभग ₹5,000 से ₹12,000 का खर्च आता है।

 

मुनरो द्वीप

HD wallpaper: Underwater Waterfall In Le Morne Brabant Mauritius Known As The White Island Paradise Island In The Indian Ocean Near The Coast Of Madagascar 2560×1440 | WallpaperFlare

मुनरो द्वीप केरल का एक शांत बैकवॉटर इलाका है, जहां छोटी नहरें, नारियल के पेड़ और गांवों की सादगी देखने को मिलती है। यहां कयाकिंग और बोट राइड का एक्सपीरियंस बाली के उबुद जैसे राइस फील्ड और वाटरवेज जैसा महसूस होता है। मुनरो द्वीप घूमने के लिए सितंबर से मार्च का समय अच्छा माना जाता है। यहां पहुंचने के लिए तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट और कोल्लम रेलवे स्टेशन सबसे सुविधाजनक हैं। बैकवॉटर स्टे के कारण यहां 2–3 दिन में लगभग ₹5,000 से ₹10,000 का खर्च आ सकता है।

 

वर्कला

7 places in India you should experience as a solo traveller | GQ India

वर्कला केरल का एक बेहद खूबसूरत क्लिफ बीच डेस्टिनेशन है, जहां समुद्र के ऊपर ऊंची चट्टानें और नीचे नीला पानी दिखाई देता है। यहां का सनसेट व्यू, बीच कैफे और आयुर्वेदिक स्पा इसे बाली के उलुवातु जैसा फील देते हैं। यह जगह योग और रिलैक्सेशन के लिए भी काफी फेमस है। वर्कला जाने के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च होता है जब मौसम ठंडा और घूमने के लिए आरामदायक रहता है। यहां पहुंचने के लिए नज़दीकी एयरपोर्ट तिरुवनंतपुरम है और रेलवे स्टेशन वर्कला खुद है। यहां 3 दिन के ट्रिप में रहने-खाने सहित लगभग ₹6,000 से ₹15,000 तक खर्च आ सकता है।

 

लक्षद्वीप

Lakshadweep Places: लक्षद्वीप की ये जगह भी है बहुत खूबसूरत

लक्षद्वीप अरब सागर में स्थित बेहद शांत और अनछुआ द्वीप समूह है। यहां का साफ नीला पानी, नारियल के पेड़ और बहुत कम भीड़ इसे बाली से भी ज्यादा शांत और प्राकृतिक बनाते हैं। यह जगह कपल्स और नेचर लवर्स के लिए परफेक्ट है। लक्षद्वीप घूमने का सही समय अक्टूबर से मार्च है और यहां जाने के लिए कोच्चि से अगत्ती आइलैंड तक फ्लाइट मिलती है, साथ ही परमिट लेना जरूरी होता है। यहां 5 दिन की यात्रा में लगभग ₹25,000 से ₹60,000 खर्च आता है।

 

माजुली द्वीप

भारत में है दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप, तस्वीरों में देखिए यहां की खूबसूरती

माजुली दुनिया का सबसे बड़ा रिवर आइलैंड है, जो ब्रह्मपुत्र नदी के बीच है। यहां की हरियाली, असमिया संस्कृति और शांत वातावरण इसे बहुत खास बनाते हैं। यह जगह बाली के उबुद जैसे शांत और सांस्कृतिक एक्सपीरियंस देती है। माजुली द्वीप के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा होता है। यहां सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट जोरहाट है और आगे नाव से द्वीप तक पहुंचना पड़ता है। 2–3 दिन की जर्नी में लगभग ₹6,000 से ₹12,000 खर्च आता है।

 

पुडुचेरी

File:Puri Sea Beach viewed from the light house.jpg - Wikimedia Commons

पुडुचेरी फ्रेंच कॉलोनी स्टाइल, रंगीन गलियों और शांत बीच के लिए मशहूर है। यहां का प्रोमेनेड बीच, कैफे कल्चर और आर्टिस्टिक माहौल इसे बाली की वाइब देता है। यह जगह ट्रैवलर्स और फोटोग्राफी लवर्स के लिए बहुत खास है। पुडुचेरी घूमने के लिए अक्टूबर से फरवरी का समय बेस्ट है। यहां चेन्नई एयरपोर्ट सबसे नज़दीक है और सड़क मार्ग से केवल 3 घंटे में पहुंचा जा सकता है। 3–4 दिन की ट्रिप में लगभग ₹5,000 से ₹15,000 खर्च आता है।

 

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

Top 10 tourist places in Andaman and Nicobar Islands

यह भारत का सबसे खूबसूरत ट्रॉपिकल आइलैंड डेस्टिनेशन है। हैवलॉक और नील आइलैंड जैसे स्थान अपने नीले पानी, कोरल रीफ और सफेद रेत के लिए मशहूर हैं। स्कूबा डाइविंग और बीच लाइफ इसे असली बाली जैसा एक्सपीरियंस बनाते हैं। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मई होता है। यहां पोर्ट ब्लेयर के लिए दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई से फ्लाइट मिलती है। 5–6 दिन की ट्रिप में लगभग ₹18,000 से ₹45,000 तक खर्च हो सकता है।

भारत की ये बाली जैसी जगहें साबित करती हैं कि खूबसूरत ट्रॉपिकल एक्सपीरियंस के लिए विदेश जाना जरूरी नहीं है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, शांत माहौल और अनोखी वाइब हर यात्री को आकर्षित करती है। चाहे एडवेंचर हो या रिलैक्सेशन, ये जगहें हर तरह का एक्सपीरियंस देती हैं। एक बार यहां जाने के बाद इनकी यादें हमेशा दिल में बस जाती हैं।

अमेरिकी सांसद बोले- भारत-अमेरिका रिश्ते 30 साल में सबसे खराब:ट्रम्प की टैरिफ नीति और एकतरफा फैसलों ने भरोसे को नुकसान पहुंचाया

भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले 30 साल में सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं। वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में उन्होंने कहा कि ट्रम्प की टैरिफ नीति, ईरान के साथ युद्ध और सहयोगी देशों से बिना सलाह लिए फैसले करने से अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने भारत, यूरोप और कनाडा जैसे अपने सहयोगी देशों से बात किए बिना ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। इस तरह के फैसलों से अपने सहयोगी देशों का भरोसा कमजोर हुआ है। खन्ना बोले- टैरिफ से भरोसे की एक पीढ़ी खत्म हो गई रो खन्ना ने ट्रम्प की टैरिफ नीति को भी गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में चीन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक भारतीय राजदूत से हुई। खन्ना के मुताबिक, राजदूत ने उनसे कहा, “आपके राष्ट्रपति की वजह से भरोसे की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई है।” उन्होंने कहा कि अगर ट्रम्प की नीतियों से हुए नुकसान को स्वीकार नहीं किया गया तो यह सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा होगा। रो खन्ना ने ट्रम्प को ‘लेम डक’ राष्ट्रपति बताते हुए दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी अगले मिड-टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करेगी और 2028 का राष्ट्रपति चुनाव भी जीतेगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के देशों के साथ उसके रिश्ते भी दोबारा मजबूत करने होंगे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का जिक्र करते हुए कहा कि वे दुनिया के देशों के साथ मिलकर चलने में विश्वास रखते थे और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी समर्थन करते थे। अमेरिकी राजदूत बोले- भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहता है और दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को पूरी तरह स्वीकार करता है। गोर ने कहा, “हम भारत के साथ एक और बड़े समझौते को पूरा करने के बहुत करीब हैं। प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है।” गोर ने बताया कि कुछ सप्ताह पहले नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री से उनकी मुलाकात हुई थी। मंत्री ने उनसे कहा, खबरों में चाहे जो दिखे, 50 साल बाद भी भारत और अमेरिका दोस्त रहेंगे। अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है और भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र। गोर ने मोदी-ट्रम्प की दोस्ती का किस्सा भी सुनाया गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती का एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले ट्रम्प सुबह 6 बजे (भारतीय समयानुसार) ही पीएम मोदी को फोन करना चाहते थे। गोर ने बताया कि वह मियामी में एक UFC इवेंट के दौरान ट्रम्प के साथ बैकस्टेज बैठे थे। तभी ट्रम्प ने कहा, “चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं।” जब गोर ने बताया कि भारत में उस समय सुबह के 6 बजे हैं, तो ट्रम्प ने जवाब दिया, “वो उठे होंगे। वो मेरी तरह हैं, सोते नहीं।” हालांकि, ट्रम्प को कुछ देर बाद मंच पर जाना था, इसलिए दोनों नेताओं की बातचीत अगले दिन तय की गई। गोर ने कहा कि यह दिखाता है कि ट्रम्प, प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी दोस्त मानते हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई आपका दोस्त होता है तो हर बातचीत पहले से तय नहीं करनी पड़ती। आप सीधे फोन करके पूछ सकते हैं कि कैसे हैं।” उन्होंने कहा कि ट्रम्प भारत का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी को कई दूसरे विश्व नेताओं से अलग नजर से देखते हैं। गोर के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच यही भरोसा भारत-अमेरिका संबंधों को भी मजबूत करता है।

अमेरिकी सांसद बोले- भारत-अमेरिका रिश्ते 30 साल में सबसे खराब:ट्रम्प की टैरिफ नीति और एकतरफा फैसलों ने भरोसे को नुकसान पहुंचाया

भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले 30 साल में सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं। वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में उन्होंने कहा कि ट्रम्प की टैरिफ नीति, ईरान के साथ युद्ध और सहयोगी देशों से बिना सलाह लिए फैसले करने से अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने भारत, यूरोप और कनाडा जैसे अपने सहयोगी देशों से बात किए बिना ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। इस तरह के फैसलों से अपने सहयोगी देशों का भरोसा कमजोर हुआ है। खन्ना बोले- टैरिफ से भरोसे की एक पीढ़ी खत्म हो गई रो खन्ना ने ट्रम्प की टैरिफ नीति को भी गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में चीन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक भारतीय राजदूत से हुई। खन्ना के मुताबिक, राजदूत ने उनसे कहा, “आपके राष्ट्रपति की वजह से भरोसे की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई है।” उन्होंने कहा कि अगर ट्रम्प की नीतियों से हुए नुकसान को स्वीकार नहीं किया गया तो यह सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा होगा। रो खन्ना ने ट्रम्प को ‘लेम डक’ राष्ट्रपति बताते हुए दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी अगले मिड-टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करेगी और 2028 का राष्ट्रपति चुनाव भी जीतेगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के देशों के साथ उसके रिश्ते भी दोबारा मजबूत करने होंगे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का जिक्र करते हुए कहा कि वे दुनिया के देशों के साथ मिलकर चलने में विश्वास रखते थे और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी समर्थन करते थे। अमेरिकी राजदूत बोले- भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहता है और दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को पूरी तरह स्वीकार करता है। गोर ने कहा, “हम भारत के साथ एक और बड़े समझौते को पूरा करने के बहुत करीब हैं। प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है।” गोर ने बताया कि कुछ सप्ताह पहले नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री से उनकी मुलाकात हुई थी। मंत्री ने उनसे कहा, खबरों में चाहे जो दिखे, 50 साल बाद भी भारत और अमेरिका दोस्त रहेंगे। अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है और भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र। गोर ने मोदी-ट्रम्प की दोस्ती का किस्सा भी सुनाया गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती का एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले ट्रम्प सुबह 6 बजे (भारतीय समयानुसार) ही पीएम मोदी को फोन करना चाहते थे। गोर ने बताया कि वह मियामी में एक UFC इवेंट के दौरान ट्रम्प के साथ बैकस्टेज बैठे थे। तभी ट्रम्प ने कहा, “चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं।” जब गोर ने बताया कि भारत में उस समय सुबह के 6 बजे हैं, तो ट्रम्प ने जवाब दिया, “वो उठे होंगे। वो मेरी तरह हैं, सोते नहीं।” हालांकि, ट्रम्प को कुछ देर बाद मंच पर जाना था, इसलिए दोनों नेताओं की बातचीत अगले दिन तय की गई। गोर ने कहा कि यह दिखाता है कि ट्रम्प, प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी दोस्त मानते हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई आपका दोस्त होता है तो हर बातचीत पहले से तय नहीं करनी पड़ती। आप सीधे फोन करके पूछ सकते हैं कि कैसे हैं।” उन्होंने कहा कि ट्रम्प भारत का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी को कई दूसरे विश्व नेताओं से अलग नजर से देखते हैं। गोर के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच यही भरोसा भारत-अमेरिका संबंधों को भी मजबूत करता है।

पश्चिम बंगाल में OBC बिल पास! TMC के समय की रिजर्वेशन लिस्ट से 65 मुस्लिम सब-ग्रुप्स बाहर

West Bengal OBC Bills: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार (29 जून) को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़े दो संशोधन विधेयक पारित किए। इससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार के लिए पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के समय तैयार की गई OBC लिस्ट को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया है। नए प्रावधानों के तहत अब अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से बाहर की 66 समुदायों को OBC आरक्षण का लाभ मिलेगा। इनमें 54 हिंदू और 12 मुस्लिम समुदाय शामिल हैं।

नई व्यवस्था में पहले की लिस्ट की तुलना में 65 मुस्लिम सब-ग्रुप्स और 9 हिंदू सब-ग्रुप्स को लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार की ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ (OBC) की पिछली लिस्ट में 113 सब-ग्रुप्स थे। इनमें से 77 मुस्लिम और 36 गैर-मुस्लिम थे। हाई कोर्ट ने मई 2024 में इस लिस्ट को रद्द कर दिया था। OBC रिजर्वेशन को 17% से घटाकर 7% कर दिया था।

क्या बदला है?

पहले राज्य की OBC सूची में कुल 113 उप-समुदाय शामिल थे, जिनमें 77 मुस्लिम और 36 गैर-मुस्लिम समुदाय थे। मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस लिस्ट को कानूनी रूप से अस्थिर बताते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद OBC आरक्षण 17% से घटाकर 7% कर दिया गया था।

नई व्यवस्था में क्या होगा?

संशोधित कानून के तहत राज्य सरकार, पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर OBC आरक्षण का प्रतिशत तय करेगी और समय-समय पर उसमें संशोधन भी कर सकेगी। हालांकि कुल आरक्षण की सीमा 50% से अधिक नहीं होगी। सरकार को यह अधिकार भी होगा कि वह पिछड़ेपन के स्तर के आधार पर OBC समुदायों को अलग-अलग कैटेगरी में वर्गीकृत करे।

आयोग की भूमिका बढ़ी

संशोधन के तहत अब कोई भी व्यक्ति OBC सूची में शामिल किए जाने के लिए आवेदन कर सकेगा। यदि किसी समुदाय को सूची में गलत तरीके से शामिल या बाहर रखा गया है तो उस पर आपत्ति भी दर्ज कराई जा सकेगी। ऐसे मामलों में पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी होंगी।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद बदलाव

मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2010 के बाद जारी किए गए OBC प्रमाणपत्रों को रद्द करते हुए कहा था कि समुदायों को OBC लिस्ट में शामिल करने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं अपनाई गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने 66 OBC वर्गों को अधिसूचित करते हुए आरक्षण को 7% कर दिया था। राज्य सरकार का कहना है कि अब OBC सूची में किसी भी नए समुदाय को शामिल करने से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग विस्तृत जांच करेगा। उसी की सिफारिश के आधार पर फैसला लिया जाएगा।

विधानसभा में जोरदार बहस

बहस के दौरान, BJP विधायकों ने आरोप लगाया कि पिछली TMC सरकार ने अपने अल्पसंख्यक वोट बैंक को खुश करने के लिए मुस्लिम समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों को शामिल करके जानबूझकर एक पक्षपाती OBC लिस्ट तैयार की थी। पार्टी ने यह भी दावा किया कि संशोधित लिस्ट में हिंदू समुदायों की कीमत पर मुस्लिम समुदायों को अतिरिक्त लाभ दिया गया था।

फिलहाल, TMC सरकार के समय संशोधित कानून के तहत OBC आरक्षण के लिए कैटेगरी A में 65 समुदाय और कैटेगरी B में 78 समुदाय शामिल हैं। उस समय मुख्य विपक्षी पार्टी रही BJP ने TMC सरकार के समय तैयार की गई नई लिस्ट पर आपत्ति जताई थी। साथ ही दावा किया था कि उस लिस्ट में मुस्लिम पृष्ठभूमि वाले समुदायों को अतिरिक्त लाभ दिया गया, जिससे ‘हिंदू’ पृष्ठभूमि वाले समुदाय वंचित रह गए।

अब आगे क्या होगा?

इन दो बिलों के पास होने से शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली BJP सरकार के लिए पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली कैबिनेट द्वारा तैयार OBC लिस्ट को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया है। ये संशोधन पिछड़ा वर्ग आयोग को OBC लिस्ट में किसी भी समुदाय को शामिल करने या हटाने पर आपत्ति जताने का अधिकार भी देते हैं।

नए बिल में क्या है?

बिल में यह भी प्रावधान है कि राज्य सरकार, पिछड़ा वर्ग आयोग के साथ सलाह-मशविरा करके, राज्य सरकार की नौकरियों में OBC के लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करेगी। हालांकि आरक्षण कोटा समय-समय पर बदला जा सकता है। लेकिन कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

सरकार के पास आयोग की सलाह से OBC समुदायों को उनके पिछड़ेपन के स्तर के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में बांटने का अधिकार भी होगा। नया कानून, पहले की लेफ्ट फ्रंट सरकार द्वारा लाए गए आरक्षण कानून के ढांचे को फिर से लागू करता है। पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण, रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों के बाद 2010 में शुरू किया गया था।

तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट सरकार ने (जिसका नेतृत्व स्वर्गीय बुद्धदेव भट्टाचार्य कर रहे थे) तत्कालीन पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री योगेश चंद्र बर्मन द्वारा पेश किए गए एक बिल के ज़रिए यह कानून बनाया था। इसमें कैटेगरी A समुदायों के लिए 10 प्रतिशत और कैटेगरी B समुदायों के लिए 7 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था।

ममता सरकार ने किया था बदलाव

2011 में सत्ता में आने के बाद TMC सरकार ने 2012 में कानून में संशोधन किया और कैटेगरी A में 65 समुदायों तथा कैटेगरी B में 78 समुदायों को बनाए रखा। अनुसूचित जातियों से धर्म परिवर्तन करके ईसाई बने लोगों को भी कैटेगरी B में शामिल किया गया था। इन संशोधनों के तहत मूल कानून की अनुसूचियों (schedules) को भी फिर से व्यवस्थित किया गया, जिसमें पहले की अनुसूची 1 और अनुसूची 2 को क्रमशः अनुसूची 2 और अनुसूची 3 में बदल दिया गया।

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सोमवार को पारित बिलों के तहत BJP सरकार ने लेफ्ट फ्रंट के समय की मूल अनुसूची 1 को फिर से लागू कर दिया है (जो TMC कानून के तहत अनुसूची 2 के बराबर थी)। जबकि TMC के समय की अनुसूची 1 और अनुसूची 3 को खत्म कर दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा सोमवार को पारित बिलों के तहत, राज्य सरकार की नौकरियों में OBC के लिए आरक्षण का प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग के साथ सलाह-मशविरा करके तय किया जाएगा।

Eicher Motors Share Price : तेज गिरावट के बाद आयशर मोटर्स बना निफ्टी का टॉप लूजर, दिल्ली की EV पॉलिसी ने दिया जोर का झटका

Eicher Motors Share Price : आज आयशर मोटर्स में तेज गिरावट दिख रही है। निचले स्तरों से ये कुछ रिकवर हुआ है,लेकिन अभी भी यह निफ्टी का टॉप लूजर बना हुआ है। फिलहाल 12 बजे के आसपास एनएसई पर यह शेयर 290 रुपए यानी 3.91 फीसदी की गिरावट के साथ 7138 रुपए के आसपास दिख रहा था। आज का इसका दिन का हाई 7,392.50 रुपए और दिन का लो 6,942.50 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 8,230 रुपए और 52 वीक लो 5,353 रुपए है।

निफ्टी का टॉप लूजर बना शेयर

आज यह शेयर निफ्टी का टॉप लूजर बना है। इसकी वजह पर नजर डालें तो इस स्टॉक पर दिल्ली की EV पॉलिसी का निगेटिव असर संभव है। दिल्ली में 1 अप्रैल 2028 से सिर्फ EV 2-W का रजिस्ट्रेशन होगा। 1 जनवरी 2028 से दिल्ली में ICE 2W रजिस्ट्रे्शन बंद होगा। 2 व्हीकल बिक्री में दिल्ली का 3 फीसदी हिस्सा है। FY26 में कंपनी के प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने FY26 में रिकॉर्ड रेवेन्यू,EBITDA और मुनाफा दर्ज किया है।

दिल्ली की EV पॉलिसी के अनुसार,दिल्ली में सभी नए पेट्रोल और CNG टू-व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन 1 अप्रैल,2028 से हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। इस तारीख से शहर में बिकने वाला हर नया कम्यूटर टू-व्हीलर इलेक्ट्रिक होना जरूरी होगा। इसके लिए कोई एक्स्ट्रा समय (ग्रेस पीरियड)या हाइब्रिड गाड़ियों के लिए कोई छूट नहीं दी जाएगी।

आयशर मोटर्स की रॉयल एनफील्ड के लिए यह बहुत बुरी खबर है। इस ब्रांड के पास अपनी लाइन-अप में सिर्फ़ एक इलेक्ट्रिक मॉडल है और दिल्ली के EV सेगमेंट में इसकी कोई खास मौजूदगी नहीं है। बताते चलें कि दिल्ली में रॉयल एनफील्ड की स्थिति बहुत मज़बूत है। सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’के आंकड़ों के मुताबिक,दिल्ली के कुल टू-व्हीलर मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 3.3% है। मिड-साइज़ पेट्रोल मोटरसाइकिलों पर बनी कंपनी मजबूत फ्रैंचाइजी अब इलेक्ट्रिक पर स्विच करना जरूरी होने के बाद ज़्यादा काम नहीं आएगी।

बाजार जानकारों का कहना है कि इस पॉलिसी की वजह से जिन पुरानी कंपनियों के पास भरोसेमंद EV रेंज नहीं है,उन्हें या तो अपने नए प्रोडक्ट्स तेज़ी से लॉन्च करने होंगे या फिर दिल्ली के कम्यूटर सेगमेंट से पूरी तरह बाहर होना पड़ेगा। डेडलाइन में दो साल से भी कम समय बचा है,ऐसे में रॉयल एनफील्ड पर अपनी इलेक्ट्रिक रेंज बढ़ाने का दबाव काफी बढ़ गया है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कंपनी के लिए भारत के सबसे बड़े टू-व्हीलर मार्केट में से एक में अपनी पकड़ खोने का खतरा हो सकता है।

Market Insight : अच्छे शेयर और थीम्स खोजें और उनमें बने रहें, इंडेक्स में फिलहाल के लिए इंट्राडे ही रहें

दिल्ली EV पॉलिसी पर नोमूरा की राय

नोमूरा की राय है कि दिल्ली EV पॉलिसी से IGL को बड़ा झटका लगेगा। इससे लॉन्ग टर्म में CNG वॉल्यूम घटेंगे। दिल्ली में बढ़ते इलेक्ट्रिक व्हीकल्स धीरे-धीरे CNG की डिमांड कम करेंगे। हालांकि MGL पर कोई डायरेक्ट असर नहीं होगा। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट में गुजरात गैस पर सबसे कम असर होगा। घरेलू और इंडस्ट्रियल PNG अब ग्रोथ ड्राइवर बनेगा।

 

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