‘ये तो बहुत खतरनाक है’! वॉट्सएप के नए ‘यूजरनेम’ अपडेट को लेकर भारत में क्यों मचा बवाल?

वॉट्सएप बिना नंबर शेयर किए चैट के लिए ‘यूज़रनेम’ फीचर लाया है। भारत में इसे लेकर हड़कंप है। अंकुर वारिकू और ध्रुव राठी का मानना है कि इससे फेक आईडी और स्कैम्स की बाढ़ आ जाएगी, क्योंकि नंबर न दिखने से पहचान मुश्किल होगी।

पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से की बात, होर्मुज की ‘आजादी’ के साथ इन मुद्दों पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। बातचीत के दौरान राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री मोदी को क्षेत्र के ताजा हालात और आगे की संभावित स्थिति की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में बनी सहमति का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने दोहराया कि भारत का हमेशा से यही मानना रहा है कि सभी विवादों और लंबित मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही होना चाहिए।

इन मुद्दों पर हुई बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसका असर भारत समेत कई देशों के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में हाल ही में तनाव बढ़ा था। इसके बावजूद भारत, ईरान के साथ अपने मजबूत कूटनीतिक संबंध बनाए हुए है और दोनों देश उच्च स्तर पर लगातार संपर्क में हैं। साथ ही, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।

ईरान ने भेजा बुलावा 

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ईरान ने भारत को बुलावा भेजा है। इस कार्यक्रम में भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा हिस्सा लेंगे। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, सार्वजनिक समारोह 4 जुलाई को स्थानीय समयानुसार सुबह 6 बजे तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड प्रेयर ग्राउंड्स में शुरू होगा। इसी समय से आम लोगों के लिए भी कार्यक्रम स्थल खोल दिया जाएगा, ताकि वे श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारत- ईरान के मजबूत रिश्ते

ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था। इसके बावजूद भारत ने ईरान के साथ अपने कूटनीतिक संबंध लगातार मजबूत बनाए रखे। इसके लिए दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर राजनीतिक, रणनीतिक और मानवीय स्तर पर लगातार बातचीत होती रही। प्रधानमंत्री स्तर की बातचीत से लेकर मंत्रियों की मुलाकातों और ब्रिक्स (BRICS) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक, भारत ने ईरान के साथ संवाद जारी रखा और सभी स्तरों पर संपर्क बनाए रखा। संघर्ष के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से दो बार फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की जरूरत पर जोर दिया।

अमेरिका में जन्मजात नागरिकता कानून बरकरार:सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प का आदेश रद्द किया, कहा- देश में जन्मा हर बच्चा अमेरिकी नागरिक होगा

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा संवैधानिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर बच्चा जन्म से अमेरिकी नागरिक होगा, चाहे उसके माता-पिता देश में अवैध रूप से रह रहे हों या फिर अस्थायी वीजा पर आए हों। अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस कार्यकारी आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ऐसे बच्चों को जन्म से नागरिकता देने से इनकार किया गया था। यह फैसला 5-4 के बहुमत से आया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखा। अमेरिका में पिछले 158 साल से यह व्यवस्था लागू है कि वहां जन्म लेने वाला हर बच्चा अपने जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिक बन जाता है। यह अधिकार अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में दिया गया है। शपथ लेने के कुछ घंटे बाद ही जारी किया था आदेश ट्रम्प ने अपने शपथ ग्रहण वाले दिन यानी 20 जनवरी 2025 को एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन कर बर्थ राइट सिटीजनशिप पर रोक लगा दी थी। इसके कुछ ही दिन बाद कई संघीय (फेडरल) जिला अदालतों ने इस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी। यानी ट्रम्प का आदेश लागू ही नहीं हो सका। हालांकि उस समय बर्थराइट सिटिजनशिप पर रोक नहीं लगी थी, बल्कि ट्रम्प के आदेश पर रोक लगी थी। इसके बाद फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने अब अंतिम फैसला देते हुए कहा कि 14वां संशोधन जन्मजात नागरिकता की गारंटी देता है। इसलिए ट्रम्प का आदेश असंवैधानिक है और उसे रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) सामान्य कानून बनाकर जन्म से नागरिकता के अधिकार का दायरा नहीं बदल सकती। अगर इस व्यवस्था में बदलाव करना है, तो इसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा। ट्रम्प खुद भी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे 1 अप्रैल को ट्रम्प इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहे। किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति का सुप्रीम कोर्ट में इस तरह सुनवाई के दौरान मौजूद रहना बेहद दुर्लभ माना जाता है। अगर ट्रम्प का यह आदेश लागू हो जाता, तो हर साल अमेरिका में जन्म लेने वाले करीब 2.5 लाख बच्चों की कानूनी स्थिति प्रभावित होती। साथ ही परिवारों को अपने नवजात बच्चे की नागरिकता तय कराने के लिए माता-पिता की नागरिकता और इमिग्रेशन स्थिति के दस्तावेज भी देने पड़ते। यह फैसला ट्रम्प के लिए इसलिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के दौरान इसे खत्म करने का वादा किया था। अमेरिका में 157 साल पहले मिला था जन्मजात नागरिकता का अधिकार 1865 में अमेरिकी गृहयुद्ध खत्म होने के बाद, जुलाई 1868 में अमेरिकी संसद में 14वें संशोधन को मंजूरी दी गई थी। इसमें कहा गया था कि देश में पैदा हुए सभी अमेरिकी नागरिक हैं। इस संशोधन का मकसद गुलामी के शिकार अश्वेत लोगों को अमेरिकी नागरिकता देना था। हालांकि, इस संशोधन की व्याख्या इस प्रकार की गई है कि इसमें अमेरिका में जन्में सभी बच्चों को शामिल किया जाएगा, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेट्स कुछ भी हो। ट्रम्प और उनके समर्थकों का दावा है कि इस कानून का फायदा उठाकर गरीब और युद्धग्रस्त देशों से आए लोग अमेरिका आकर बच्चों को जन्म देते हैं। ये लोग पढ़ाई, रिसर्च, नौकरी के आधार पर अमेरिका में रुकते हैं। बच्चे का जन्म होते ही उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है। नागरिकता के बहाने माता-पिता को अमेरिका में रहने की कानूनी वजह भी मिल जाती है। अमेरिका में यह ट्रेंड काफी लंबे समय से जोरों पर है। आलोचक इसे बर्थ टूरिज्म कहते हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक 16 लाख भारतीय बच्चों को अमेरिका में जन्म लेने की वजह से नागरिकता मिली है। ट्रम्प के करीबियों को भी मिला था जन्मजात नागरिकता का लाभ दिलचस्प बात यह है कि ट्रम्प के कई करीबी सहयोगी भी इसी जन्मजात नागरिकता व्यवस्था का लाभ उठा चुके हैं। विदेश मंत्री मार्को रूबियो, एफबीआई निदेशक काश पटेल और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पत्नी उषा वेंस के माता-पिता दूसरे देशों से अमेरिका आए थे। इनका जन्म अमेरिका में हुआ, इसलिए इन्हें जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिकता मिल गई। कोर्ट के इस फैसले से भारतीयों को राहत क्यों मिली? H-1B वीजा धारकों के लिए गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के नियम नहीं बदलेंगे अमेरिका के इमिग्रेशन कानून या वीजा नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो H-1B वीजा या किसी अन्य वैध अस्थायी वीजा पर रह रहे लोगों को अमेरिका में गर्भधारण करने या बच्चे को जन्म देने से रोकता हो। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी ऐसे परिवारों के अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को संविधान के 14वें संशोधन के तहत जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिक माना जाएगा। क्या बच्चे की नागरिकता मिलने से माता-पिता को भी नागरिकता मिल जाएगी? जवाब है- नहीं। अगर किसी बच्चे का जन्म अमेरिका में होता है तो उसे जन्म से अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है, लेकिन इसका फायदा उसके माता-पिता को नहीं मिलता। H-1B या किसी अन्य अस्थायी वीजा पर रह रहे लोगों को अपने इमिग्रेशन स्टेटस को पहले की तरह अलग से बनाए रखना होगा। मौजूदा अमेरिकी कानून के मुताबिक, अमेरिकी नागरिक बच्चा अपने माता-पिता के लिए स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) की सिफारिश तभी कर सकता है, जब उसकी उम्र 21 वर्ष हो जाए। भारतीय मूल के बच्चों के लिए दोहरी नागरिकता का क्या नियम है? भारत पूरी तरह दोहरी नागरिकता (ड्यूल सिटिजनशिप) की अनुमति नहीं देता। अगर भारतीय माता-पिता के यहां अमेरिका में बच्चा पैदा होता है, तो उसे जन्म के साथ अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है। हालांकि, वह एक साथ पूरी भारतीय नागरिकता नहीं रख सकता। ऐसे बच्चों के लिए माता-पिता ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड बनवा सकते हैं। ओसीआई कार्ड मिलने पर उन्हें भारत आने के लिए आजीवन वीजा की जरूरत नहीं होती। साथ ही भारत में रहने से जुड़े कई अधिकार भी मिलते हैं।

IND vs ENG: वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर सस्पेंस बरकरार, प्लेइंग इलेवन को लेकर श्रेयस अय्यर ने अब तक नहीं खोले पत्ते

IND vs ENG: आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारत को 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस सीरीज में संजू सैमसन और ईशान किशन का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इसके बाद युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका देने की मांग और तेज हो गई है। वहीं आयरलैंड के बाद अब भारतीय टीम इंग्लैंड के साथ 5 मैचों की टी20 सीरीज खेलेगी। टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 1 जुलाई को खेला जाएगा। भारत और इंग्लैंड के बीच पहले टी20 मैच से पहले कप्तान श्रेयस अय्यर ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

श्रेयस अय्यर से जब पूछा गया कि क्या वैभव पहले मुकाबले में खेलेंगे, तो उन्होंने कहा कि टीम चयन से जुड़ी बातें सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। अय्यर ने कहा कि वह टीम की रणनीति या प्लेइंग इलेवन के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दे सकते।

तोड़ सकते हैं रिकॉर्ड

15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी से उम्मीद की कि उन्हें आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिलेगा। टीम में चुने जाने के बाद वह भारत के लिए सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बन सकते थे। टीम प्रबंधन ने पहले दो मैचों में वैभव को मौका नहीं दिया और संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा व ईशान किशन जैसे अनुभवी बल्लेबाजों पर भरोसा जताया।

वैभव के डेब्यू पर क्या बोले अय्यर

श्रेयस अय्यर ने मंगलवार को कहा, “देखिए, आपको कभी नहीं पता होता कि क्या होने वाला है। फिलहाल मैं इस बारे में कुछ नहीं बता सकता, क्योंकि टीम संयोजन से जुड़ी बातें पूरी तरह निजी होती हैं। हम अपनी रणनीति और प्लेइंग इलेवन के बारे में पहले से खुलासा नहीं कर सकते, क्योंकि इससे विपक्षी टीम को फायदा मिल सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “वैभव एक शानदार प्रतिभाशाली खिलाड़ी है और जब भी उसे मौका मिलेगा, मुझे पूरा भरोसा है कि वह बेहतरीन प्रदर्शन करेगा।”

अय्यर ने क्या कहा

जब उनसे बेंच पर बैठे खिलाड़ियों और विश्व कप विजेता खिलाड़ियों को लगातार मौका देने को लेकर सवाल पूछा गया, तो अय्यर ने टीम के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा, “इस टीम में हर खिलाड़ी ने अच्छा प्रदर्शन किया है, ऐसा नहीं है कि सिर्फ एक खिलाड़ी ने ही खुद को साबित किया है। हमें खिलाड़ियों का भरोसा बनाए रखना होगा और उन्हें लगातार मौके देने होंगे, ताकि उनका आत्मविश्वास बना रहे। जिन्होंने पिछला टी20 विश्व कप जीता है, उन्हें इस फॉर्मेट का अच्छा अनुभव है और वे लंबे समय से टीम के अहम खिलाड़ी रहे हैं। इसलिए उनका समर्थन करना जरूरी है।”

El Nino Impact in July: IMD के मंथली आउटलुक में जुलाई में भी मानसून वाली बारिश का हाल ठीक नहीं, अल नीनो का खतरा यहां तक पहुंचा

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए अपना मासिक आउटलुक जारी कर दिया है। मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की बारिश का हाल ठीक नहीं रहने वाला है और इसके सामान्य से कम होने की पूरी संभावना है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो को माना जा रहा है। इसका खतरा अब और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

जुलाई में सामान्य से कम रहेगी बारिश: IMD का पूर्वानुमान

IMD द्वारा मल्टी-मॉडल एनसेंबल फोरकास्टिंग सिस्टम के आधार पर अपने पूर्वानुमान जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम (<94% of Long Period Average – LPA) रहने की सबसे अधिक संभावना है।

क्या है बारिश का सामान्य आंकड़ा (LPA)?

साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने के लिए पूरे देश की दीर्घकालिक औसत वर्षा लगभग 280.4 मिमी है। IMD का पूर्वानुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में कम बारिश होगी। उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य से ऊपर या सामान्य रहने की संभावना है।

मजबूत हो रहा है अल नीनो, न्यूट्रल रहेगा आईओडी

मौसम विभाग ने मानसून की बारिश पर असर डालने वाले वजहों के बारे में भी बताया है। IMD के मुताबिक अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर कमजोर अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। लेकिन मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के ताजा संकेत बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह अल नीनो स्थितियां और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति कैसी है?

इस समय हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी की स्थिति देखी जा रही है। मॉडल के पूर्वानुमानों के अनुसार, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह न्यूट्रल आईओडी स्थिति ही बनी रहने की संभावना है। इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह के तापमान में अंतर को दर्शाने वाली जलवायु सिस्टम है। सामान्य तौर पर यदि IOD सकारात्मक रहता है तो यह भारतीय मानसून को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार IOD के तटस्थ रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि यह मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएगा और अल नीनो का प्रभाव अधिक हावी रहेगा।

जुलाई में सताएगी गर्मी, तापमान रहेगा सामान्य से अधिक

कम बारिश के अनुमान के बीच जुलाई के महीने में देशवासियों को सामान्य से अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई के दौरान, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम-मध्य भारत के कुछ छिटपुट इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। रात के समय या न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश क्षेत्रों में यह भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। सिर्फ मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ अलग-अलग हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है।

कम बारिश से बढ़ेंगी चुनौतियां, तैयारी करने की सलाह

आईएमडी ने आगाह किया है कि जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कई मोर्चों पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। बारिश की कमी के कारण कृषि, जल संसाधन, जलविद्युत उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने बताया कि वह नुकसान को कम करने के लिए विस्तारित अवधि के पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम विज्ञान सलाहकार सेवाएं और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान जारी करता रहता है। ये किसान, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और बिजली क्षेत्र के योजनाकारों के लिए मददगार हैं।

अगला पूर्वानुमान कब?

आईएमडी द्वारा मानसून सीजन के दूसरे भाग (अगस्त + सितंबर 2026) के लिए और विशेष रूप से अगस्त महीने की बारिश का पूर्वानुमान जुलाई 2026 के अंत में जारी किया जाएगा

IND vs ENG: ‘बेलफास्ट के हालात थे अलग’, इंग्लैंड सीरीज से पहले श्रेयस अय्यर का बड़ा बयान

आयरलैंड ने दो मैचों की टी20 सीरीज में भारत का 2-0 से सूपड़ा साफ कर दिया। इसके साथ ही साल 2023 के बाद पहली बार भारतीय टीम को किसी टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में हार के बाद भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर को उम्मीद है कि इंग्लैंड के खिलाफ टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी। भारतीय कप्तान के मुताबिक, इंग्लैंड में खेलने का माहौल खिलाड़ियों के लिए ज्यादा परिचित है, जबकि बेलफास्ट की परिस्थितियां अलग और चुनौतीपूर्ण थीं। ऐसे में टीम अब नई शुरुआत करते हुए सीरीज में दमदार वापसी करना चाहेगी।

कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि बेलफास्ट की परिस्थितियां टीम के लिए नई और चुनौतीपूर्ण थीं। उनका मानना है कि इंग्लैंड में होने वाले मुकाबलों की परिस्थितियां खिलाड़ियों के लिए ज्यादा परिचित होंगी, जिससे टीम बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। भारत अब पिछली हार को भूलकर दमदार वापसी करने की कोशिश करेगा।

मैदान काफी अलग था

श्रेयस अय्यर ने मंगलवार को कहा, “यह पूरी तरह अलग माहौल था। बेलफास्ट का मैदान सामान्य स्टेडियम जैसा नहीं था। आउटफील्ड में हल्की ढलान थी, मैदान कुछ जगह ऊबड़-खाबड़ था और उसका आकार भी थोड़ा अलग था। ऐसे में सिंगल और डबल रन रोकना आसान नहीं था। कप्तान के तौर पर फील्ड सेट करना भी चुनौतीपूर्ण रहा, क्योंकि हम ऐसी परिस्थितियों के आदी नहीं हैं। आईपीएल में ज्यादातर मैदान हर तरफ से बराबर होते हैं, इसलिए वहां खेलना हमारे लिए थोड़ा मुश्किल रहा।”

इंग्लैड के खिलाफ करेंगे बेहतरीन प्रदर्शन

अय्यर को उम्मीद है कि इंग्लैंड के मैदान और माहौल भारतीय खिलाड़ियों के लिए ज्यादा परिचित हैं। अय्यर ने कहा, “यहां मैदान का आकार लगभग एक जैसा है, आउटफील्ड भी समतल है और स्टेडियम का माहौल बिल्कुल अलग होता है। यहां बड़ी संख्या में दर्शक भी आएंगे। हम पहले भी ऐसी परिस्थितियों में खेल चुके हैं, इसलिए खुद को ढालना आसान रहेगा।” उन्होंने यह भी माना कि बेलफास्ट में भारतीय बल्लेबाजों को काफी दिक्कत हुई, क्योंकि आयरलैंड के तेज गेंदबाजों ने अतिरिक्त उछाल और बड़ी स्क्वायर बाउंड्री का पूरा फायदा उठाते हुए बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

कब खेला जाएगा पहला टी20

आयरलैंड के खिलाफ शुरुआती हार के बाद श्रेयस अय्यर ने कहा था कि उनकी टीम किसी भी प्रतिद्वंद्वी को हल्के में नहीं ले सकती। उन्होंने माना कि टीम नए हालात के अनुसार अपने खेल की योजना को सही तरीके से लागू नहीं कर सकी। अब भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ नई शुरुआत करने के इरादे से उतरेगी। दोनों टीमों के बीच टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 1 जुलाई को चेस्टर-ले-स्ट्रीट के रिवरसाइड ग्राउंड में खेला जाएगा। ये मुकाबला रात 10 बजे से शुरू होगा।

Stocks to Watch: 1 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 9 स्टॉक्स, दिख सकता है तगड़ा एक्शन

Stocks to Watch: बुधवार, 1 जुलाई के कारोबार में कई शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं। कहीं नए प्रोडक्ट और बड़ी डील का असर दिख सकता है, तो कहीं टैक्स विवाद और जून महीने के बिक्री आंकड़े निवेशकों की नजर में रहेंगे। ऐसे में इन शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

KPIT Technologies

टेक्नोलॉजी कंपनी KPIT Technologies ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही उम्मीद से कमजोर रह सकती है। कंपनी को रेवेन्यू में सालाना आधार पर करीब 1% की गिरावट का अनुमान है। वहीं EBITDA और नेट मार्जिन भी पिछली तिमाही के मुकाबले घट सकते हैं। हालांकि, कंपनी को दूसरी छमाही में कारोबार में सुधार और चौथी तिमाही में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।

L&T Technology Services

इंजीनियरिंग और टेक कंपनी L&T Technology Services ने AI बेस्ड प्लेटफॉर्म Ainfonix 4.0 लॉन्च किया है। इसकी मदद से इंजीनियरिंग डॉक्युमेंट्स और तकनीकी रिकॉर्ड को डिजिटल डेटा में बदला जा सकेगा।

HDFC Life Insurance

लाइफ इंश्योरेंस कंपनी HDFC Life Insurance को GST मामले में झटका लगा है। थाणे के कमिश्नर (अपील) ने ब्याज और जुर्माने समेत 132.7 करोड़ रुपये की GST डिमांड को बरकरार रखा है।

Kotak Mahindra Bank

प्राइवेट सेक्टर के Kotak Mahindra Bank ने Deutsche Bank के साथ डील की है। कोटक इसके तहत बैंक के भारत में रिटेल बैंकिंग, प्राइवेट बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार को करीब 281.7 करोड़ रुपये में खरीदेगा।

Paras Defence

डिफेंस कंपनी Paras Defence and Space Technologies ने Tandem Defense LLC के साथ Guardian-1 Interceptor तकनीक के लिए IP लाइसेंस एग्रीमेंट किया है।

Prestige Estates Projects

रियल एस्टेट कंपनी Prestige Estates Projects ने मुंबई के मुलुंड में Prestige Forest Hills प्रोजेक्ट का दूसरा चरण लॉन्च किया है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू 2,200 करोड़ रुपये है।

Auto Stocks

ऑटो सेक्टर की कंपनियां जून महीने के बिक्री आंकड़े जारी करेंगी। अनुमान है कि पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में 26% और दोपहिया वाहनों की बिक्री में 18% की सालाना बढ़ोतरी हो सकती है।

Hexaware Technologies

आईटी कंपनी Hexaware Technologies ने Tensai for Reasoning Ops नाम का नया AI प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसका मकसद एंटरप्राइज आईटी ऑपरेशंस में एजेंटिक AI का इस्तेमाल बढ़ाना है।

Zaggle Prepaid Ocean Services

फिनटेक कंपनी Zaggle Prepaid Ocean Services ने APAC Financial Services के साथ 5 साल का समझौता किया है। इसके तहत कंपनी अपने एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म की सेवाएं उपलब्ध कराएगी।

Multibagger Stocks: रामदेव अग्रवाल ने बताया अच्छे स्टॉक खरीदने का फॉर्मूला, इन 10 बातों से होगी पहचान

 

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

665KM रेंज, 5.8 सेकंड में 100kmph की रफ्तार! Tata Sierra EV हुई लॉन्च, जानें कीमत, फीचर्स और बैटरी की पूरी डिटेल

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने भारत में अपनी नई Tata Sierra EV लॉन्च कर दी है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 18.79 लाख रुपये रखी गई है। इसके साथ ही टाटा की सबसे लोकप्रिय एसयूवी में से एक सिएरा अब पूरी तरह इलेक्ट्रिक रूप में भारतीय बाजार में लौट आई है। नई Tata Sierra EV कुल पांच वेरिएंट में उपलब्ध है। इसमें दो बैटरी पैक का विकल्प मिलता है। कंपनी का दावा है कि यह एक बार चार्ज करने पर 665 किलोमीटर तक (एमआईडीसी प्रमाणित) की ड्राइविंग रेंज देती है। इसके अलावा इसमें ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) का विकल्प और बैटरी पर लाइफटाइम वारंटी भी दी गई है।

यह टाटा मोटर्स की सातवीं इलेक्ट्रिक कार है। इससे पहले कंपनी टियागो ईवी, टिगोर ईवी, पंच ईवी, नेक्सॉन ईवी, कर्व ईवी और हैरियर ईवी को बाजार में उतार चुकी है। Tata Sierra EV की बुकिंग आज से शुरू हो गई है, जबकि इसकी डिलीवरी 15 जुलाई से शुरू होगी। ग्राहक चाहें तो 49,000 रुपये अतिरिक्त देकर 7.2 किलोवॉट एसी फास्ट चार्जर का विकल्प भी ले सकते हैं।

Tata Sierra EV: कीमत और वेरिएंट

Tata Sierra EV को कंपनी ने पांच वेरिएंट में लॉन्च किया है। इनमें प्योर, प्योर एस, एडवेंचर, एम्पावर्ड और एम्पावर्ड ए शामिल हैं। इस इलेक्ट्रिक एसयूवी की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 18.79 लाख रुपये है। वहीं, इसका सबसे टॉप मॉडल एम्पावर्ड ए (QWD) 25.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) में उपलब्ध है। यह वेरिएंट सबसे ज्यादा फीचर्स और बेहतर परफॉर्मेंस के साथ आता है।

Tata Sierra EV: बैटरी, रेंज और चार्जिंग

Tata Sierra EV में दो बैटरी विकल्प दिए गए हैं। पहला 63 kWh और दूसरा 75 kWh बैटरी पैक है। कंपनी के मुताबिक, 75 kWh बैटरी एक बार फुल चार्ज होने पर 665 किलोमीटर तक (एमआईडीसी प्रमाणित) चल सकती है। वहीं, 63 kWh बैटरी की रेंज 565 किलोमीटर बताई गई है।

टाटा मोटर्स का कहना है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में 75 kWh बैटरी वाली सिएरा ईवी करीब 510 से 530 किलोमीटर तक चल सकती है। वहीं, 63 kWh बैटरी वाला मॉडल 440 से 460 किलोमीटर तक की वास्तविक ड्राइविंग रेंज देगा। इसके अलावा 75 kWh बैटरी के साथ आने वाला क्वाड-व्हील ड्राइव (QWD) मॉडल एक बार चार्ज करने पर 500 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज देने का दावा करता है।

चार्जिंग की बात करें तो इसमें 120 kW डीसी फास्ट चार्जिंग, 7.2 kW एसी चार्जिंग और 3.3 kW एसी चार्जिंग का विकल्प मिलता है। 120 kW डीसी फास्ट चार्जर की मदद से बैटरी को सिर्फ 26 मिनट में 20% से 80% तक चार्ज किया जा सकता है। वहीं, कंपनी का दावा है कि 15 मिनट की फास्ट चार्जिंग में यह इलेक्ट्रिक एसयूवी 250 किलोमीटर से ज्यादा की ड्राइविंग रेंज दे सकती है।

इसके अलावा Tata Sierra EV में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) और व्हीकल-टू-लोड (V2L) जैसी आधुनिक सुविधाएं भी दी गई हैं। इनकी मदद से जरूरत पड़ने पर कार से दूसरे इलेक्ट्रिक वाहन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी बिजली दी जा सकती है।

Tata Sierra EV: पावर और परफॉर्मेंस

Tata Sierra EV को कंपनी ने दो इलेक्ट्रिक मोटर विकल्पों के साथ पेश किया है। इसके रियर-व्हील ड्राइव (RWD) मॉडल में 175 kW की इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो 340 Nm का टॉर्क पैदा करती है। वहीं, इसके टॉप वेरिएंट में 103 kW की फ्रंट मोटर भी मिलती है। दोनों मोटरों के साथ यह एसयूवी ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) सिस्टम से लैस हो जाती है, जिससे इसकी पकड़ और प्रदर्शन बेहतर हो जाता है। टाटा मोटर्स का दावा है कि सिएरा ईवी महज 5.8 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। कंपनी के अनुसार, यह अब तक भारत में लॉन्च हुई सबसे तेज इलेक्ट्रिक एसयूवी है।

Tata Sierra EV: डिजाइन और फीचर्स

Tata Sierra EV का डिजाइन काफी हद तक सिएरा के पेट्रोल-डीजल (आईसीई) मॉडल जैसा है, लेकिन इसे इलेक्ट्रिक एसयूवी का आधुनिक लुक देने के लिए कई खास बदलाव किए गए हैं। इसमें आगे की तरफ पारंपरिक ग्रिल की जगह बंद फ्रंट पैनल दिया गया है, जो आज की ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारों की पहचान बन चुका है। इसके अलावा कार के फ्रंट बंपर को भी नया डिजाइन दिया गया है, जिससे इसका लुक और ज्यादा आकर्षक दिखाई देता है। वहीं, पीछे की तरफ कार के डिजाइन में ज्यादा बदलाव नहीं किए गए हैं। इसका रियर लुक पेट्रोल-डीजल मॉडल जैसा ही रखा गया है, जिससे सिएरा की पहचान बरकरार रहती है।

Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा सावन का महीना, इन तिथियों पर जलाभिषेक दिलाएगा भगवान शिव का आशीर्वाद

Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है। इस माह में शिव भक्त अपने आराध्य की पूजा, उपवास और जलाभिषे या रुद्राभिषेक करते हैं। माना जाता है कि इस माह में माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। इस माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ा लाते हैं अपने भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस साल सावन का महीना गुरुवार, 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है। वहीं, इस पावन माह का समापन शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के पर्व के साथ होगा।

आमतौर से जलाभिषेक सावन की शिवरात्रि को किया जाता है। लेकिन इसके अलावा इस माह में पड़ने वाली विशेष तिथियों पर जलाभिषेक विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इनमें सावन की शिवरात्रि के अलावा सावन के सभी सोमवार, दोनों प्रदोष व्रत, नाग पंचमी, हरियाली तीज और श्रावणी पूर्णिमा भी जलाभिषेक शुभ माना जाता है। आइए जानें साल 2026 में सावन (श्रावण) महीने में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:

सावन शिवरात्रि : कावड़ यात्रा और सामान्य भक्तों के लिए सावन महीने में जलाभिषेक का सबसे मुख्य दिन सावन शिवरात्रि माना जाता है। इस साल यह 11 अगस्त 2026 को होगी। इस दिन कावड़िए और भक्त भगवान शिव को जलाभिषेक करते हैं।

हरियाली तीज : सावन में शिव जी की पूजा के लिए हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 को रहेगी। इस दिन महादेव पर जल चढ़ाने वालों को सुयोग्य जीवनसाथी पाने में मदद मिलती है।

सावन पूर्णिमा : सावन पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 को है। इस दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। सावन पूर्णिमा पर जलाभिषेक कर शिव जी की साधना करने वालों को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलता है।

सावन सोमवार की तिथियां : सावन के सभी सोमवार जलाभिषेक के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि) के पंचांग के अनुसार तिथियां निम्न हैं:

पहला सोमवार: 03 अगस्त 2026

दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026

तीसरा सोमवार : तीसरा सोमवार 17 अगस्त 2026 को होगा। इस दिन नाग पंचमी भी है, जिससे इस सोमवार का महत्व और बढ़ गया है।

चौथा सोमवार : 24 अगस्त 2026

Ashadha Gupt Navratri 2026: कब से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि? आइए जानें सही तारीख, घटस्थापना का मुहूर्त और पूजा विधि

कर्नाटक का हर नया CM घर की तलाश में क्यों जुट जाता है? डीके शिवकुमार ने 160 साल पुराना जो बंगला चुना वो बेहद खास!

भारत के कुछ ही राज्य ऐसे हैं जहां मुख्यमंत्री के स्थायी निवास के लिए कोई आधिकारिक सरकारी बंगला तय नहीं है और कर्नाटक उन्हीं राज्यों में से एक है। यही वजह है कि राज्य में जब भी सत्ता परिवर्तन होता है या नया नेतृत्व आता है तो उनके लिए घर की तलाश शुरू हो जाती है। बंगलों की ये तलाश कई बार जरूरत से ज्यादा वास्तु के मापदंडों की कसौटी पर भी कसी जाने लगती है। आप एक तरह से कह सकते हैं कि बेंगलुरु में एक घर ढूंढना किसी के लिए आसान नहीं है, यहां तक कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री के लिए भी नहीं। ये मामला इस वक्त चर्चा में इसलिए है क्योंकि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने रहने और कार्यालय के लिए लगभग 160 साल पुराने कुमार कृपा (Kumara Krupa) बंगले को चुना है। लोक निर्माण विभाग (PWD) इस हेरिटेज प्रॉपर्टी को रिनोवेट करने में जुटा है। यह नौबत इसलिए आई क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कावेरी बंगले में ही रहने का फैसला किया है। यह बंगला आमतौर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों से सबसे करीब से जुड़ा रहा है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि कर्नाटक में हर नए मुख्यमंत्री के सामने आखिर आवास की यह पहेली क्यों खड़ी हो जाती है और इसके पीछे क्या सियासी व ऐतिहासिक कारण हैं।

क्या कर्नाटक में मुख्यमंत्री का कोई आधिकारिक स्थायी निवास है?

इसका जवाब ना में है। कर्नाटक में कभी भी किसी सरकारी बंगले को मुख्यमंत्री के स्थायी निवास के रूप में औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया है। पिछले कई दशकों से अलग-अलग मुख्यमंत्री अपनी सुविधा के अनुसार विभिन्न सरकारी संपत्तियों में रहते आए हैं। वैसे 1980 के दशक से कुमार कृपा रोड पर स्थित दो आस-पास के बंगले कृष्णा और कावेरी सीएम आवास से ज्यादा करीब से जुड़े माने जा सकते हैं। कृष्णा बंगले का इस्तेमाल आधिकारिक बैठकों और प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाता है जबकि कावेरी सीएम आवास के रूप में इस्तेमाल होता है।

कावेरी बंगले का इतिहास और सिद्धारमैया का जुड़ाव

पूर्व मुख्यमंत्री आर गुंडू राव 1980 में कावेरी बंगले में रहने वाले पहले मुख्यमंत्री थे। उनके बाद सिद्धारमैया, बीएस येदियुरप्पा, जगदीश शेट्टार, जेएच पटेल, एस बंगारप्पा और वीरेंद्र पाटिल जैसे कई दिग्गज मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के दौरान इस बंगले में रहे। दिलचस्प बात यह है कि कावेरी में रहने वाले मुख्यमंत्रियों में से सिद्धारमैया एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने अपना पांच साल का पूरा कार्यकाल पूरा किया है। चूंकि सिद्धारमैया इस बार भी कावेरी को छोड़ने के मूड में नहीं हैं इसलिए नए नेतृत्व के लिए नया घर ढूंढने का एक टास्क सामने आ गया।

हर नए सीएम के सामने क्यों खड़ी होती है आवास की पहेली?

इसकी सीधी सी वजह यह है कि मुख्यमंत्री पद के लिए कोई भी आवास स्थायी रूप से आरक्षित नहीं है। जब कोई नया मुख्यमंत्री पद संभालता है तो उनका पसंदीदा बंगला पहले से ही किसी पूर्व मुख्यमंत्री या किसी अन्य संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी के पास हो सकता है। कई मामलों में नए रहने वाले के आने से पहले बंगले में बड़े पैमाने पर रिनोवेशन की जरूरत होती है। इसके अलावा कुछ मुख्यमंत्री सरकारी बंगले में जाने के बजाय अपने निजी घरों में ही रहना पसंद करते हैं। परिणाम यह होता है कि हर बार इस बात को लेकर होड़ मचती है कि कौन सी संपत्ति मुख्यमंत्री का आधिकारिक निवास बनेगी।

डीके शिवकुमार ने क्यों चुना 160 साल पुराना कुमार कृपा बंगला?

चूंकि सिद्धारमैया कावेरी में ही रहेंगे, इसलिए शिवकुमार ने ‘कुमार कृपा’ को अपना आधिकारिक निवास और ‘कृष्णा’ को अपना ऑफिस चुना है। कुमार कृपा बंगला 12 कमरों का है और एक सरकारी गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल हो रहा था। अब इसका रिनोवेशन किया जा रहा है।

विपक्ष कर रहा आलोचना, जानिए इस बंगले का ऐतिहासिक महत्व

शिवकुमार के इस फैसले की जेडीएस ने कड़ी आलोचना की है। जेडीएस का तर्क है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को उसके मौजूदा स्वरूप में ही संरक्षित किया जाना चाहिए। इस बंगले का एक बड़ा ऐतिहासिक महत्व है। यह बंगला मूल रूप से 1883 से 1901 तक मैसूर के दीवान रहे के शेषाद्रि अय्यर का निवास स्थान था। साल 1927 में बेंगलुरु यात्रा के दौरान महात्मा गांधी भी इसी कुमार कृपा बंगले में रुके थे।

अनुग्रह बंगला: आखिर इसे क्यों माना जाता है अशुभ?

राजनीतिक गलियारों में अनुग्रह बंगले को जिंक्सड यानी मनहूस या अशुभ माना जाता है। कहते हैं कि जो भी मुख्यमंत्री इस बंगले में रहने गया वो अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका। इस बंगले में रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्रियों में एचडी देवेगौड़ा, धरम सिंह और डीवी सदानंद गौड़ा शामिल हैं। इन सभी का कार्यकाल समय से पहले खत्म हो गया। पूर्व सीएम एसएम कृष्णा ने भी भी अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही विधानसभा भंग कर दी थी। पिछले सालों से इस बंगले में कई बार वास्तु बदलाव भी किए गए लेकिन नेताओं के मन से इसका डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

राजनीतिक सलाहकार वेंकटेश थोगरीघट्टा बताते हैं कि यह कहना मुश्किल है कि अनुग्रह खराब वास्तु से पीड़ित है या केवल दुर्भाग्य का शिकार है। लेकिन पिछले तीन दशकों में इस बंगले को चुनने वाले कम से कम चार मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल बहुत छोटा रहा है। यह बात स्वाभाविक रूप से नए मुख्यमंत्रियों के दिमाग में घर चुनते समय असर डालती है। यही कारण है कि कई मुख्यमंत्री ताज वेस्ट एंड के पास स्थित रेस व्यू कॉटेज जैसे अन्य सरकारी आवासों को प्राथमिकता देते रहे हैं।

क्या वास्तु की मान्यताएं निर्णय को प्रभावित करती हैं?

कुछ मुख्यमंत्रियों ने अपने आवासों और कार्यालयों का चयन या उनमें बदलाव करते समय सार्वजनिक रूप से वास्तु पर विचार करने की बात स्वीकार की है। कुछ अन्य मुख्यमंत्रियों ने ऐसी चिंताओं को खारिज करते हुए प्रशासनिक सुविधा को प्राथमिकता दी है। कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक चूंकि कोई भी बंगला आधिकारिक तौर पर सीएम निवास के रूप में अधिसूचित नहीं है इसलिए मुख्यमंत्री उपलब्ध सरकारी संपत्तियों में से कोई भी चुनने के लिए स्वतंत्र हैं।

क्या कर्नाटक में एक स्थायी सीएम आवास होना चाहिए?

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली का मानना है कि राज्य में एक स्थायी मुख्यमंत्री आवास होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के लिए एक निश्चित और नामित आवास होना चाहिए। ऐसा न होने से, हर बार जब कोई नया मुख्यमंत्री आता है तो सरकार एक अलग घर तैयार करने में पैसा खर्च करती है। एक स्थायी आवास होने से बार-बार होने वाले इस रिनोवेशन के खर्च से बचा जा सकता है।