मध्यप्रदेश में दिग्विजय–जीतू पटवारी विवाद में अरुण यादव की एंट्री, राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग, कांग्रेस महासचिव ने लगाया पुत्र मोह का आरोप

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच चल रही बयानबाजी और तल्खी अब नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गई है। इस विवाद में अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता अरुण यादव की भी एंट्री हो गई है। इसके साथ कांग्रेस के सीनियर नेता सत्यवत चतुर्वेदी की बेटी और पार्टी की महासचिव निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा है।
 
पूर्व मंत्री अरुण यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सीधे हस्तक्षेप करने और प्रदेश संगठन में एकता कायम करने की अपील की है। सोशल मीडिया पर अरुण यादव ने लिखा कि माननीय राहुल गांधी जी, मध्यप्रदेश में आंतरिक संघर्ष और असफलताओं सहित अन्य समस्याओं से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकार से जब इस दौर में भी पार्टी संगठन का वास्तविक निष्ठावान कार्यकर्ता वैचारिक और सतही तौर पर संघर्ष कर रहा है उस दौर में कतिपय लोग एक मिलीजुली साजिश के तहत उन कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की नाकाम कोशिश कर रहे है, इस बात में भी कोई संदेह नहीं है कि युवाओं का जोश और पार्टी के अनुभवी नेताओं का होश मिलजुल कर ही फासीवादी विचारधारा का सामना कर पाएगा ऐसी स्थिति में जवाबदार लोग ही अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और वैमनस्यता पार्टी के कार्यकर्ताओं की कीमत पर भुनाने की कोशिश करेंगे तो वह समयोचित नहीं होगी । कृपा कर केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप से संघर्षशील कार्यकर्ताओं के मनोबल को टूटने से बचाएं तथा संगठनात्मक एकता को सुदृढ़ करवाने की कृपा करें।
 
पुत्र मोह में फंसे दिग्विजय सिंह-वहीं प्रदेश कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने कांग्रेस हाईकमान से दिग्विजय सिंह के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर 'दिग्विजय का नागपाश, कांग्रेस पर प्रहार' नाम से एक लेख लिखा है। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि “अपनों के ही इस घातक बाण से कब मुक्त होगी मध्य प्रदेश कांग्रेस? उज्जैन के भूमि विवाद और वीर भारत न्यास के मामले में सच क्या है और झूठ क्या, कौन सही है और कौन गलत, यह जांच का विषय हो सकता है। आज हर सच्चे कांग्रेसी का सिर शर्म से झुक गया है। दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ जिस प्रकार मोर्चा खोला वह निंदनीय है।
 
इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि अगर जीतू पटवारी कहीं गलत भी थे, तो वरिष्ठ और मार्गदर्शक होने के नाते दिग्विजय सिंह उन्हें आमने-सामने बैठकर या फ़ोन करके बता सकते थे। उनके पास दिल्ली से लेकर भोपाल तक पार्टी के तमाम आंतरिक मंच उपलब्ध हैं, जहां वे अपनी बात रख सकते थे. लेकिन इन सब मर्यादाओं को दरकिनार कर हाथ में फ़ाइल लेकर उज्जैन जाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस बात को उछालने का क्या औचित्य है? इस तरह सरेआम मीडिया के सामने प्रदेश अध्यक्ष के बयान को खारिज करना और उनके लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना, जायज़ नहीं ठहराया जा सकता. आखिर यह सारी कवायद क्यों की गई।
 
निधि चतुर्वेदी का कहना है “दिग्विजय सिंह की यह छटपटाहट, यह गुस्सा और यह अमर्यादित आचरण और कुछ नहीं, बल्कि 'पुत्र-मोह' में उठाया गया बेहद अशोभनीय, पीड़ादायक और निंदनीय कदम है। अपने बेटे जयवर्धन सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाने की महत्वाकांक्षा में वे भूल चुके हैं कि पार्टी का अनुशासन क्या होता है। जब देशभर में राहुल गांधी भाजपा और संघ की जनविरोधी विचारधारा के खिलाफ सड़कों पर लाठियां खा रहे हैं, तब पार्टी के एक शीर्ष नेता द्वारा इस तरह की बयानबाज़ी करना कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर करारा तमाचा है।

दिल्ली में 6 लेन टनल परियोजना को मिली हरी झंडी, वेस्ट और साउथ दिल्ली के बीच होगी बेहतर कनेक्टिविटी

केंद्र सरकार ने बुधवार को एक नई छह लेन वाली सड़क सुरंग (टनल) परियोजना को मंजूरी दे दी है। ये परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से तैयार की जाएगी। करीब 8.1 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर लगभग 6,970 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस सड़क परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाएगा और इसे पूरा होने में लगभग पांच साल लग सकते हैं। ये परियोजना द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगी। इसके पूरा होने के बाद वेस्ट और साउथ दिल्ली के बीच यात्रा पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

कहां से कहां तक होगी परियोजना

इस परियोजना की सबसे खास बात साउथ दिल्ली के रंगपुरी (सदर्न दिल्ली) रिज के नीचे बनने वाली करीब 3.14 किलोमीटर लंबी दोहरी सुरंग (ट्विन-ट्यूब टनल) होगी। इसे आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) टेक्नोलॉजी से तैयार किया जाएगा, ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे। सुरंग का बड़ा हिस्सा जंगल के नीचे से होकर गुजरेगा, जिससे प्राकृतिक क्षेत्र सुरक्षित रहेगा और लोगों को बेहतर यातायात सुविधा भी मिल सकेगी। ये टनल शिव मूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर वसंत कुंज के नेल्सन मंडेला मार्ग और महिपालपुर-छतरपुर रोड के चौराहे के पास जाकर खत्म होगी।

इन योजनाओं पर भी होगा काम

टनल के बाहर यातायात को सुचारु बनाने के लिए इस परियोजना में नेल्सन मंडेला मार्ग पर करीब 1.8 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड सड़क बनाई जाएगी। इसके अलावा छतरपुर से महिपालपुर जाने वाले वाहनों के लिए एक नया फ्लाईओवर और ट्रैफिक जाम कम करने के लिए एलिवेटेड यू-टर्न भी बनाया जाएगा। वहीं, एनएचएआई भविष्य में एम्स से महिपालपुर तक एक एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर भी काम कर रहा है, जो इस नई टनल को बारापुला एलिवेटेड रोड से जोड़ेगा।

इस परियोजना के पूरा होने के बाद वेस्ट, साउथ और ईस्ट दिल्ली के साथ-साथ गाजियाबाद और नोएडा के बीच सफर पहले से अधिक आसान और तेज हो जाएगा। इससे पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बेहतर रोड नेटवर्क मिलेगा, जिससे लोगों का यात्रा समय भी कम होने की उम्मीद है।

एयरपोर्ट तक होगी बेहतर कनेक्टिविटी

ये नई सड़क परियोजना द्वारका एक्सप्रेसवे, अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) और वसंत कुंज के बीच तेज और बिना सिग्नल वाला संपर्क उपलब्ध कराएगी, जिससे वेस्ट और साउथ दिल्ली के बीच ट्रैवल टाइम काफी कम हो जाएगा। इसके अलावा साउथ और पूर्वी दिल्ली से गुरुग्राम, द्वारका और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंच भी पहले से अधिक आसान और तेज होगी। इस कॉरिडोर का उद्देश्य प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करना और रिहायशी, व्यावसायिक तथा एयरपोर्ट क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।

मिलेगी इतनी नौकरी

सरकार के मुताबिक, इस परियोजना के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। आधिकारिक अनुमान के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रत्येक लेन-किलोमीटर के निर्माण से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से कई लोगों को काम मिलता है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने की भी उम्मीद है। सरकारी अनुमान के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से लगभग 7.54 लाख पर्सन-डे डायरेक्ट नौकरी और 9.80 लाख पर्सन-डे इनडायरेक्ट नौकरी मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के मुताबिक, सड़क संपर्क बेहतर होने के बाद आसपास के क्षेत्रों में व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी, जिससे भविष्य में रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है।

‘भारत फोन ले जा सकते हैं, लेकिन चीन नहीं’, अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेन्स ने इंडिया को बताया बेहद भरोसेमंद साथी

अमेरिका के सीनेटर स्टिव डेन्स ने भारत और चीन के बीच बड़ा फर्क बताया है। उन्होंने कहा कि वे भारत जाते समय अपना मोबाइल फोन साथ ले जाते हैं, लेकिन चीन जाते समय फोन को वाशिंगटन में ही छोड़ देते हैं।अमेरिकी सीनेटर ने भारत और चीन के बीच विश्वास के स्तर में स्पष्ट अंतर को उजागर करते हुए

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तीखा सामाजिक-आर्थिक व्यंग्य: दो जून की रोटी

An image featuring sharp satire on the country's economy and rising inflation

साहब! दो जून की रोटी मिल जाए, बस और क्या चाहिए? यह वाक्य सुनने में जितना सरल लगता है, उतना ही भयावह है। दरअसल यह कोई संतोष का वाक्य नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का मृत्युलेख है जिसने करोड़ों लोगों की पूरी जिंदगी को सिर्फ रोटी तक सीमित कर दिया। जिस देश ने चंद्रयान भेज दिया, डिजिटल क्रांति कर दी, जीडीपी के ग्राफ आसमान तक पहुँचा दिए, उसी देश का एक बहुत बड़ा वर्ग आज भी सुबह उठकर यह तय नहीं कर पाता कि शाम को चूल्हा जलेगा भी या नहीं।

 

एक तरफ कांच की ऊंची इमारतों में बैठे लोग वर्क फ्रॉम होम करते हुए एवोकाडो टोस्ट और ग्रीन टी के साथ हेल्दी लाइफस्टाइल पर वेबिनार कर रहे हैं, दूसरी तरफ शहर के किसी नाले किनारे बैठा रिक्शेवाला अपनी पत्नी से पूछ रहा है आज आटा बचेगा या फिर बच्चों को कहानी सुनाकर सुला दें?

 

यह वही देश है जहां भूख अब आं तों से कम और भाषणों में अधिक पाई जाती है। यहां रोटी पेट से ज्यादा राजनीति में फूलती है। चुनाव आते ही हर दल गरीब की थाली में उतर आता है। कोई कहता है मुफ्त राशन देंगे, कोई कहता है पोषण देंगे, कोई कहता है सब्सिडी देंगे, लेकिन कोई यह नहीं कहता कि ऐसी व्यवस्था देंगे जहां आदमी खुद अपनी रोटी सम्मान से कमा सके। क्योंकि आत्मनिर्भर गरीब राजनीति के लिए उतना उपयोगी नहीं होता जितना राशन कार्ड वाला गरीब।

 

अब रोटी भी वर्ग देखकर परोसी जाती है। अमीर आदमी की थाली में मल्टीग्रेन, लो कार्ब, ग्लूटन फ्री, ऑर्गेनिक रोटियां हैं। गरीब की थाली में रोटी नहीं, समझौता रखा होता है। आधी जली हुई दो बासी रोटियाँ, नमक-मिर्च और बच्चों को यह समझाने की कोशिश कि आज भूख कम लग रही होगी। अमीर के यहां डाइट प्लान बनते हैं, गरीब के यहां रोटी प्लान। वहां लोग वजन घटाने के लिए खाना छोड़ते हैं, यहां लोग पैसे बचाने के लिए।

 

देश की अर्थव्यवस्था बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है। हर महीने कोई नया आंकड़ा आता है जो बताता है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने वाला है। मगर अजीब बात है कि यह अर्थव्यवस्था हमेशा गरीब की थाली के ऊपर से छलांग लगाकर निकल जाती है। स्टॉक मार्केट ऊपर जाता है तो मजदूर की कमर और झुक जाती है। सेंसेक्स को देखकर कॉर्पोरेट जगत मुस्कुराता है, लेकिन दिहाड़ी मजदूर रोज सुबह इस डर से उठता है कि आज काम मिला तो रोटी मिलेगी, नहीं मिला तो लोकतंत्र का भाषण पीकर सोना पड़ेगा।

 

बिहार का मजदूर राजस्थान में ईंट ढो रहा है। उड़ीसा का युवक पंजाब की मंडियों में धूप सेंक रहा है। बुंदेलखंड का किसान दिल्ली में निर्माणाधीन इमारतों पर सीमेंट मल रहा है। और इन सबका सपना क्या है? कोई बंगला नहीं, कोई कार नहीं बस इतना कि घर में चूल्हा जलता रहे। ये लोग इस देश की अर्थव्यवस्था के अनौपचारिक देवता हैं, लेकिन व्यवस्था इन्हें अनस्किल्ड लेबर कहती है, जैसे भूख मिटाने के लिए डिग्री जरूरी हो।

 

महंगाई अब आर्थिक समस्या नहीं रही, वह एक संगठित साजिश जैसी लगती है। प्याज अब सब्जी कम, भावनात्मक हथियार अधिक हो गया है। टमाटर कभी आम आदमी की पहुंच से बाहर जाकर अचानक वीआईपी व्यवहार करने लगता है। गैस सिलेंडर की कीमत सुनकर गृहिणी रोटी बेलने से पहले बजट बेलती है। अब रसोई में मसाले कम और गणित अधिक पकता है। महीने के अंतिम सप्ताह में घर की महिलाएँ वैज्ञानिकों की तरह प्रयोग करती हैं कि बची हुई दाल से कितने दिन और लोकतंत्र चलाया जा सकता है।

 

सरकारें कहती हैं डिजिटल इंडिया बन रहा है। बिल्कुल बन रहा है। अब भूख भी डिजिटल हो गई है। राशन चाहिए तो आधार लिंक कराइए। अंगूठा लगाइए। ओटीपी डालिए। सर्वर डाउन हो तो भूखे रहिए। गरीब आदमी अब रोटी से पहले नेटवर्क खोजता है। सरकारी पोर्टल कहता है भोजन की गारंटी। गांव वाला कहता है साहब, यहां तो नेटवर्क ही नहीं आता। ऐसा लगता है मानो अब पेट भी ऐप डाउनलोड करके ही भरेगा।

 

शिक्षा और भूख का रिश्ता भी बड़ा विचित्र है। गांव के स्कूलों में बच्चे ज्ञान लेने कम, मध्यान्ह भोजन लेने अधिक आते हैं। शिक्षक उपस्थिति दर्ज करते समय जानते हैं कि बच्चे गणित से पहले खिचड़ी गिनना सीख रहे हैं। ऑनलाइन शिक्षा का सपना उन घरों में भेजा गया जहां मोबाइल से ज्यादा जरूरी आटा था। जिन बच्चों के घर में बिजली नहीं, उनसे कहा गया- डिजिटल बनो। यानी इस देश में गरीब से कहा जा रहा है कि वह भूखे पेट आधुनिक हो जाए।

 

राजनीति भूख की सबसे पुरानी व्यापारी रही है। हर चुनाव में गरीब की थाली कैमरे के सामने परोसी जाती है। नेता रोटी खाते हुए फोटो खिंचवाते हैं, फिर पांच साल तक गरीब लाइन में खड़ा होकर वही रोटी मांगता रहता है। पिछली सरकार कहती है हमने राशन दिया। वर्तमान सरकार कहती है हमने मुफ्त अनाज बढ़ाया। अगली सरकार शायद कहे हमने गरीब को खाने के लिए प्रेरित किया। लेकिन कोई यह नहीं पूछता कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी करोड़ों लोग मुफ्त राशन पर निर्भर क्यों हैं।

 

सबसे भयावह दृश्य सोशल मीडिया पर दिखाई देता है। किसी भूखे बच्चे की वीडियो वायरल होती है। लोग दुखी इमोजी भेजते हैं, मानवता पर लंबी पोस्ट लिखते हैं, फिर अगले ही क्षण किसी सेलिब्रिटी की शादी या क्रिकेट मैच में व्यस्त हो जाते हैं। भूख अब ट्रेंडिंग कंटेंट है। गरीब की पीड़ा अब एल्गोरिद्म के भरोसे चलती है।

 

और इस पूरी व्यवस्था का सबसे क्रूर पक्ष यह है कि अब रोटी भी इज्जत मांगती है। भूखा होना अपराध नहीं माना जाता, लेकिन रोटी मांगना अपमान बना दिया गया है। लोग दान तो करते हैं, पर इस अंदाज़ में कि सामने वाले को उसकी गरीबी का पूरा अहसास हो जाए। अब रोटी पेट नहीं भरती, आत्मसम्मान भी तोड़ती है।

 

सवाल यह नहीं कि देश में अनाज की कमी है। गोदाम भरे पड़े हैं। सवाल यह है कि व्यवस्था की संवेदना खाली क्यों है। एक तरफ शादी-ब्याह में टनों खाना कूड़ेदान में फेंका जाता है, दूसरी तरफ कोई मां अपने बच्चे को पानी पिलाकर सुला देती है ताकि उसे भूख कम लगे। यह केवल आर्थिक असमानता नहीं, सभ्यता की असफलता है।

 

आज दो जून की रोटी कोई साधारण आवश्यकता नहीं रही। यह एक युद्ध है महंगाई और मजदूरी के बीच, भूख और व्यवस्था के बीच, इंसान और उपभोक्ता के बीच। आदमी अब रोटी नहीं खा रहा, वह अपनी जिंदगी किस्तों में चुका रहा है।

 

और शायद इस समय का सबसे बड़ा व्यंग्य यही है कि जिस लोकतंत्र में रोटी सबसे बड़ा मुद्दा हो, वहां भूखा आदमी आंकड़ा कहलाता है और भरी थाली वाला राष्ट्रवाद समझाता है।

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Gold Silver Outlook: सात महीने के निचले स्तर पर आए सोने-चांदी के दाम, जानें आगे कैसी रहेगी चाल

Gold Silver Price Analysis: भारतीय घरेलू वायदा बाजार में बुधवार, 1 जुलाई को सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई कमजोरी, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और ब्याज दरों के ऊंचे स्तर पर बने रहने की आशंकाओं के चलते घरेलू सर्राफा बाजार में बिकवाली का तगड़ा दबाव देखा गया। आइए समझते हैं सोने-चांदी में आई इस बड़ी गिरावट की प्रमुख वजहें।

MCX पर कितना गिरे सोने और चांदी के दाम?

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखी गई:

सोना: अगस्त डिलीवरी वाला सोना ₹1701 (1.19%) की भारी गिरावट के साथ ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

चांदी: सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में और भी बड़ी गिरावट रही। यह ₹5380 (2.35%) टूटकर ₹2.23 लाख प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) की बात करें तो वहां भी सोना करीब सात महीने के निचले स्तर पर $3993 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था, जबकि चांदी करीब 3% लुढ़ककर $57.73 प्रति औंस पर आ गई।

गिरावट की 3 सबसे बड़ी वजहें

1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और बढ़ती ब्याज दरें

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी सेंट्रल बैंक की नीतियां हैं। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों से संकेत मिले हैं कि अगर महंगाई काबू में नहीं आती है, तो इस साल के अंत में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की जा सकती है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो लोग सोने-चांदी जैसे बिना ब्याज वाले एसेट्स से पैसा निकालकर अन्य वित्तीय विकल्पों में लगाने लगते हैं, जिससे सोने के दाम गिरते हैं।

2. मिडिल ईस्ट का तनाव और कच्चे तेल की आंच

मिडिल ईस्ट में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। क्षेत्रीय विवादों के दोबारा बढ़ने के बाद ईरान ने अमेरिकी दूतों के साथ तत्काल बातचीत करने से इनकार कर दिया है, जिससे अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिसने वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंता को और बढ़ा दिया है।

3. अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकी नजरें

निवेशक और ट्रेडर्स इस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इनमें जून का ADP एम्प्लॉयमेंट डेटा और आगामी नॉन-फार्म पेरोल आंकड़े शामिल हैं। इन आंकड़ों से साफ होगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाने वाला है।

आगे क्या होगी सोने-चांदी की चाल?

रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक, सोना और चांदी दोनों सात महीने के निचले स्तर के करीब आ जाने से दबाव में बने हुए हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4000 प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बना रहता है, तो तकनीकी रूप से यह नीचे $3600 प्रति औंस के सपोर्ट जोन तक जा सकता है।

वहीं चांदी का $60 प्रति औंस से नीचे जाना यह इशारा करता है कि इसमें $50 प्रति औंस के स्तर तक और कमजोरी आ सकती है। हालांकि, बाजार के ओवरसोल्ड जोन में होने के कारण शॉर्ट-टर्म में एक रिकवरी रैली भी देखने को मिल सकती है।

PF, क्रेडिट कार्ड, पासपोर्ट फीस, Aadhaar अपडेट, LPG रेट, ITR डेडलाइन… 1 जुलाई से बदल गईं ये चीजें

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

हार्दिक पांड्या से मिलने के लिए साइकिल पर किया 12 घंटा का सफर, फैन को दिए 1.5 लाख

 

हार्दिक पांड्या के फैन ने ओडिशा से बैंगलूरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तक का सफर अपने गृह राज्य से 12 दिनों तक साइकल पर पूरा किया। जब फैन के बारे में हार्दिक पांड्या को जानकारी मिली तो उन्होंने नखरा दिखाने के बजाए ना केवल उसे मिले  बल्कि उसके आने जाने का खर्चा दिया और विराट कोहली के वनएट जूते दिए साथ ही 1.5 लाख रुपए देकर वापस रवाना किया।

गौरतलब है कि हार्दिक पांड्या ने बैंगलूरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस रिहैबिलिटेशन से गुजर रहे। पंड्या मूल रूप से गुजरात के बड़ौदा के रहने वाले हैं लेकिन उन्होंने पिछले दशक में अधिकतर समय मुंबई में बिताया है और मुख्य रूप से अपनी आईपीएल टीम मुंबई इंडियन्स की घंसोली स्थित सुविधा में ट्रेनिंग की है। हालांकि अब बैंगलूरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस रिहैबिलिटेशन को अपना स्थायी ट्रेनिंग केंद्र बनाने के मकसद से बेंगलुरु में रहने का फैसला किया है।

पंड्या का यह कदम इसलिए सभी का ध्यान खींच रहा है क्योंकि भारत के केंद्रीय अनुंधित खिलाड़ी आम तौर पर चोट से उबरने (रिहैबिलिटेशन), फिटनेस परीक्षण या राष्ट्रीय शिविर के लिए ही सीओई जाते हैं।अभी जांघ की चोट से उबर रहे 32 वर्षीय पंड्या ब्रिटेन के सीमित ओवरों के मौजूदा दौरे से बाहर हो गए थे। उन्होंने पिछले छह महीने में सीओई में काफी समय बिताया है।

बीसीसीआई के एक सूत्र ने ने कहा, ‘‘हार्दिक मुंबई से बाहर जाना चाहते थे क्योंकि ट्रेनिंग के लिए रोजाना अपने लोअर परेल स्थित घर से आना-जाना एक समस्या बन गई थी। केंद्रीय अनुबंध वाले क्रिकेटर के तौर पर उन्हें सीओई में चोट के इलाज से लेकर कौशल ट्रेनिंग तक सभी सुविधाएं मिलेंगी।’’उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए जब भी वह आईपीएल, राज्य या राष्ट्रीय टीम के साथ नहीं हों तो उन्होंने सीओई को अपना स्थायी आधार बनाने का फैसला किया है।’’

माना जा रहा है कि हार्दिक के पास अपने फिजियोथेरेपिस्ट और निजी स्ट्रेंथ एवं अनुकूलन कोच भी होंगे जो सीओई के बाहर ट्रेनिंग में उनकी मदद करेंगे।सूत्र ने कहा, ‘‘यह जब तक वह भारत के लिए सीमित ओवरों का क्रिकेट खेलते हैं तब तक बेंगलुरु में बसने जैसा है और उनका इरादा कम से कम अगले पांच से छह साल तक खेलने का है।’’

Monsoon Watch 1 July: पंजाब और हरियाणा में भी हुई मानसून की एंट्री पर दिल्ली में नहीं! अब IMD ने जारी किया ये नया अनुमान

Progress of SW Monsoon: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। 1 जुलाई को मानसून ने उत्तर भारत के कई नए इलाकों में धमाकेदार एंट्री मार ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून अब पंजाब और हरियाणा के भी कुछ हिस्सों में पहुंच गया है लेकिन देश की राजधानी दिल्ली को इसने अभी थोड़ा तरसाया है। वैसे दिल्लीवालों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा क्योंकि मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर में मानसून के दस्तक देने को लेकर बेहद राहत भरा नया अनुमान जारी किया है।

पंजाब-हरियाणा समेत इन राज्यों में बढ़ा मानसून, जानें कहां से गुजर रही सीमा

IMD के मुताबिक एक जुलाई को दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर अरब सागर के कुछ और हिस्सों, गुजरात, पूरे दमन और दीव, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ गया है। इसके अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बचे हुए हिस्सों सहित पूरे जम्मू-कश्मीर और हरियाणा व पंजाब के कुछ हिस्सों में मानसून ने अपनी पहुंच दर्ज करा दी है। अभी मानसून की उत्तरी सीमापोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, शाजापुर, नौगांव, मिर्जापुर, आजमगढ़, अयोध्या, बदायूं, मेरठ, करनाल, गुरदासपुर से होकर गुजर रही है।

दिल्ली में कब आएगा मानसून? IMD का नया अनुमान

भले ही 1 जुलाई की एंट्री में दिल्ली का नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं रहा लेकिन मौसम विभाग ने साफ कर दिया है कि दिल्ली के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 2 दिनों के भीतर दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों, पूरे हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, पंजाब और राजस्थान के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ने के लिए मौसम का सिस्टम पूरी तरह तैयार है। यानी अगले 48 घंटों में दिल्ली में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो जाएगी।

पूरे हिमाचल प्रदेश में मानसून सक्रिय, सामान्य से 6 दिन की देरी

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश से बड़ी खबर है कि बुधवार को मानसून ने पूरे राज्य को आधिकारिक तौर पर कवर कर लिया है। हिमाचल में मानसून का यह आगमन सामान्य तारीख से 6 दिन की देरी से हुआ है। 1 जुलाई को मानसून ने शिमला जिले (शिमला शहर सहित), सिरमौर, मंडी, कुल्लू, लाहुल-स्पीति और कांगड़ा के बचे हुए हिस्सों को कवर कर लिया।

इसके साथ ही सोलन, ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और चंबा जिलों में भी मानसून पूरी तरह फैल गया है। राज्य में इस पूरे हफ्ते व्यापक बारिश होने की उम्मीद है। 2 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिससे हिमाचल समेत पूरे क्षेत्र में बारिश की गतिविधियों में और तेजी आएगी।

जुलाई महीने के लिए पूरे देश का ओवरऑल वेदर आउटलुक

मौसम विभाग ने जुलाई 2026 के महीने के लिए देश भर में होने वाली औसत बारिश का भी एक अनुमान जारी किया है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की सबसे अधिक संभावना है।

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1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई में देश भर में वर्षा का लॉन्ग-पीरियड एवरेज (LPA) लगभग 280.4 मिमी हो सकता है। देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है लेकिन उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश देखी जा सकती है।

Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

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Monsoon Special Recipes: रिमझिम बारिश की बूंदें, ठंडी हवा और खिड़की से आती मिट्टी की सोंधी खुशबू… मानसून का मजा तब तक अधूरा है, जब तक किचन से गरमा-गरम और चटपटी चीजों की महक न आए। मानसून का मौसम केवल ठंडी हवाओं और सुहाने मौसम का ही नहीं, बल्कि परिवार और दोस्तों के साथ स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेने का भी होता है। इस सुहाने मौसम का लुत्फ दोगुना करने के लिए यहां मानसून की 5 सबसे बेहतरीन और सदाबहार रेसिपीज दी गई हैं, जिन्हें देखते ही आपके मुंह में पानी आ जाएगा:

 

1. कड़क चाय के साथ 'चीज़ी ब्रेड पकौड़ा'

ब्रेड पकौड़ा तो आपने कई बार खाया होगा, लेकिन इस बार बारिश में इसे एक ट्विस्ट दें। आलू के चटपटे मसाले के साथ ब्रेड के बीच में मोज़ेरेला या स्लाइस चीज़/Cheese रखें। इसे बेसन के गाढ़े घोल में डुबोकर सुनहरा होने तक डीप फ्राई करें। जब आप इसे बीच से काटेंगे, तो पिघलता हुआ चीज़ और आलू का तीखापन मानसून का मजा बढ़ा देगा।

 

2. गरमा-गरम 'कॉर्न भजिया'

बारिश के मौसम में भुट्टा (स्वीट कॉर्न) हर गली-नुक्कड़ पर मिलता है। इस बार भुट्टे को उबालकर खाने के बजाय इसके क्रिस्पी भजिए बनाएं। ताजे मक्के के दानों को दरदरा पीस लें, फिर इसमें थोड़ा बेसन, चावल का आटा (क्रिस्पी बनाने के लिए), हरी मिर्च, बारीक कटा प्याज और हरा धनिया मिलाएं। तैयार गरमा-गरम मक्के के भजिए हरी चटनी के साथ लाजवाब लगते हैं।

 

3. मुंबई स्टाइल 'कांदा भजी' (चटपटी प्याज के पकौड़े)

अगर कुछ बेहद क्रिस्पी और झटपट खाने का मन है, तो लच्छेदार प्याज के पकौड़े (कांदा भजी) से बेहतर कुछ नहीं। प्याज को लंबा और पतला काटें, उसमें नमक डालकर 5 मिनट छोड़ दें ताकि प्याज पानी छोड़ दे। अब उसी पानी में बेसन, अजवाईन, कुटी हुई लाल मिर्च और थोड़ा सा गरम तेल डालकर बिना पानी के गूंथ लें और कुरकुरा होने तक तलें। तली हुई हरी मिर्च के साथ इसका स्वाद लाजवाब आता है।

 

4. सूजी का हलवा या 'गुलगुले' (मीठे पकौड़े)

चटपटे के बाद कुछ मीठा हो जाए! उत्तर भारत में बारिश के दिनों में 'गुलगुले', जो कि गेहूं के आटे और गुड़ से बने मीठे पकौड़े बनाने की पुरानी परंपरा है। अगर वो न बनाना चाहें, तो देसी घी में भुना हुआ गरमा-गरम सूजी का शीरा या हलवा बनाएं। इलायची की खुशबू और ड्राई फ्रूट्स से सजा यह हलवा बारिश के मौसम में आत्मा को तृप्त कर देता है।

 

5. चटपटा वेज सूप

बारिश में जब थोड़ी ठंडक बढ़ने लगती है, तो कुछ गरमा-गरम और हेल्दी पीने का मन करता है। ऐसे में स्पाइसी 'हॉट एंड सॉर सूप' या 'क्लियर सूप' एक बेहतरीन विकल्प है। ढेर सारी सब्जियां- जैसे गाजर, पत्तागोभी, शिमला मिर्च और अदरक-लहसुन के तड़के के साथ बना यह सूप न सिर्फ आपके मुंह का स्वाद बदलेगा, बल्कि मानसून की बीमारियों से भी बचाएगा।

 

मानसून स्पेशल टिप: इन सभी रेसिपीज के साथ अदरक, इलायची और लौंग वाली कड़क मसाला चाय बनाना बिल्कुल न भूलें, क्योंकि इसके बिना हर मानसून रेसिपी अधूरी है!

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पहले T-20I में जोफ्रा आर्चर को नहीं मिला मौका, इंग्लैंड ने घोषित की अंतिम ग्यारह

Jofra Archer

न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों में शामिल जोफ्रा आर्चर को भारत के खिलाफ पहले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच से आराम दिया गया है। उनको शायद दूसरे टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में भी मौका नहीं मिलेगा और अंतिम तीन टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में ही वह इंग्लैंड का हिस्सा बनेंगे। उनको कार्यभार प्रबंधन के तहत बैंच पर बैठाया गया है।

इंग्लैंड ने टेस्ट मैचों की तरह ही T-20I अंतरराष्ट्रीय मैच से 24 घंटे पहले अपनी अंतिम ग्याहर घोषित कर दी। इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने विस्फोटक बल्लेबाजों को जगह दी है।इंग्लैंड के बल्लेबाजी क्रम में कप्तान हैरी ब्रूक, जोस बटलर, जोर्डन कॉक्स, जैकब बेथेल, विल जैक्स, फिल सॉल्ट और टॉम बैंटन जैसे दमदार खिलाड़ी हैं।

भले ही इंग्लैंड के पास जोफ्रा आर्चर की सेवाएं नहीं है लेकिन, ल्यूक वुड साकिब महमूद जैसे बहुत तेज गति वाले गेंदबाज हैं और आदिल रशीद तथा रेहान अहमद जैसे चतुर स्पिन गेंदबाज भी हैं।

इसके अलावा काफी नजरें सैम करन पर भी होगी जो चोट के कारण आईपीएल नहीं खेल पाए थे। लेकिन उन्होंने टी-20 विश्वकप में कुछ अहम मौकों पर बेहतर प्रदर्शन किया था।

रिवरसाइड ग्राउंड पर औसत T20I अंतरराष्ट्रीय स्कोर 138 और उच्चतम स्कोर 195 है जो यहां खेले गए पिछले आठ मैच में गेंदबाजों के दबदबे की ओर इशारा करता है। इसलिए अगर बल्लेबाज विरोधी टीम की गेंदबाजी और यहां की पिचों के हिसाब से ढलने में अधिक समय लेते हैं तो इंग्लैंड बहुत तेजी से पांच मैच की सीरीज जीत सकता है।

इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम कुरन, लियाम डॉसन, विल जैक्स, साकिब महमूद, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, और ल्यूक वुड।