केंद्र सरकार ने बुधवार को एक नई छह लेन वाली सड़क सुरंग (टनल) परियोजना को मंजूरी दे दी है। ये परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से तैयार की जाएगी। करीब 8.1 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर लगभग 6,970 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस सड़क परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाएगा और इसे पूरा होने में लगभग पांच साल लग सकते हैं। ये परियोजना द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगी। इसके पूरा होने के बाद वेस्ट और साउथ दिल्ली के बीच यात्रा पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
कहां से कहां तक होगी परियोजना
इस परियोजना की सबसे खास बात साउथ दिल्ली के रंगपुरी (सदर्न दिल्ली) रिज के नीचे बनने वाली करीब 3.14 किलोमीटर लंबी दोहरी सुरंग (ट्विन-ट्यूब टनल) होगी। इसे आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) टेक्नोलॉजी से तैयार किया जाएगा, ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे। सुरंग का बड़ा हिस्सा जंगल के नीचे से होकर गुजरेगा, जिससे प्राकृतिक क्षेत्र सुरक्षित रहेगा और लोगों को बेहतर यातायात सुविधा भी मिल सकेगी। ये टनल शिव मूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर वसंत कुंज के नेल्सन मंडेला मार्ग और महिपालपुर-छतरपुर रोड के चौराहे के पास जाकर खत्म होगी।
इन योजनाओं पर भी होगा काम
टनल के बाहर यातायात को सुचारु बनाने के लिए इस परियोजना में नेल्सन मंडेला मार्ग पर करीब 1.8 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड सड़क बनाई जाएगी। इसके अलावा छतरपुर से महिपालपुर जाने वाले वाहनों के लिए एक नया फ्लाईओवर और ट्रैफिक जाम कम करने के लिए एलिवेटेड यू-टर्न भी बनाया जाएगा। वहीं, एनएचएआई भविष्य में एम्स से महिपालपुर तक एक एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर भी काम कर रहा है, जो इस नई टनल को बारापुला एलिवेटेड रोड से जोड़ेगा।
WATCH | Delhi: At the Union cabinet briefing, Union Minister Ashwini Vaishnaw says, “The first project is the 2-lane Dwarka tunnel. This will prove to be a huge boon for Delhi. This 8-kms tunnel addresses a long-standing demand… As per the detailed map: starting from the Shiv… pic.twitter.com/CWtmuQ8flY
— ANI (@ANI) July 1, 2026
इस परियोजना के पूरा होने के बाद वेस्ट, साउथ और ईस्ट दिल्ली के साथ-साथ गाजियाबाद और नोएडा के बीच सफर पहले से अधिक आसान और तेज हो जाएगा। इससे पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बेहतर रोड नेटवर्क मिलेगा, जिससे लोगों का यात्रा समय भी कम होने की उम्मीद है।
एयरपोर्ट तक होगी बेहतर कनेक्टिविटी
ये नई सड़क परियोजना द्वारका एक्सप्रेसवे, अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) और वसंत कुंज के बीच तेज और बिना सिग्नल वाला संपर्क उपलब्ध कराएगी, जिससे वेस्ट और साउथ दिल्ली के बीच ट्रैवल टाइम काफी कम हो जाएगा। इसके अलावा साउथ और पूर्वी दिल्ली से गुरुग्राम, द्वारका और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंच भी पहले से अधिक आसान और तेज होगी। इस कॉरिडोर का उद्देश्य प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करना और रिहायशी, व्यावसायिक तथा एयरपोर्ट क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।
मिलेगी इतनी नौकरी
सरकार के मुताबिक, इस परियोजना के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। आधिकारिक अनुमान के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रत्येक लेन-किलोमीटर के निर्माण से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से कई लोगों को काम मिलता है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने की भी उम्मीद है। सरकारी अनुमान के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से लगभग 7.54 लाख पर्सन-डे डायरेक्ट नौकरी और 9.80 लाख पर्सन-डे इनडायरेक्ट नौकरी मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के मुताबिक, सड़क संपर्क बेहतर होने के बाद आसपास के क्षेत्रों में व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी, जिससे भविष्य में रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है।

