आज का मौसम: रक्षाबंधन पर 28 अगस्त को यूपी-बिहार, ओडिशा में भारी बारिश का अलर्ट, इन 14 राज्यों के लिए IMD ने जारी की चेतावनी

IMD Weather Update on Raksha Bandhan: आज 28 अगस्त को देश भर में रक्षाबंधन का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। भाई-बहन के इस पवित्र पर्व के बीच मौसम का मिजाज कई राज्यों में रंग में भंग डाल सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज के लिए मौसम की विस्तृत रिपोर्ट जारी करते हुए उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और ओडिशा सहित देश के 14 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी है। मौसम विभाग ने ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं कई इलाकों में अंधड़, आंधी-तूफान और वज्रपात की आशंका जताई गई है। त्योहार पर यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट, पूर्वोत्तर और मध्य भारत में बरसेगी आफत

मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक आज ओडिशा के अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार और भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही पूर्वी भारत से लेकर मध्य भारत और पूर्वोत्तर राज्यों तक बारिश की गतिविधियां बेहद तीव्र रहने वाली हैं। आईएमडी के मुताबिक, आज 28 अगस्त को उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों, पूर्वी मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने के आसार हैं। पूर्वोत्तर भारत के राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी कई जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन राज्यों में बारिश की वजह से निचले इलाकों में जलभराव और त्योहार की आवाजाही पर असर पड़ सकता है।

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अंधड़ और तेज हवाओं की चेतावनी, अंडमान में तूफानी हवा का अलर्ट

आज देश के कई राज्यों में बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं और अंधड़ लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मौसम सबसे ज्यादा तूफानी रहेगा। यहां पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है।

दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली कड़कने की संभावना है। इसके अलावा बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल व सिक्किम, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और अंधड़ आ सकता है। आंध्र प्रदेश और आंतरिक कर्नाटक के इलाकों में दिन भर तेज सतह हवाएं चलने का अनुमान है।

आकाशीय बिजली का खतरा, उत्तर और मध्य भारत के इन इलाकों में सतर्कता बरतने की सलाह

मौसम विभाग ने पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में आकाशीय बिजली चमकने और गिरने को लेकर चेतावनी जारी की है। उत्तर भारत में उत्तराखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अलग अलग जगहों पर बिजली गिरने की संभावना है। इसी तरह मध्य भारत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में आज गर्जना के साथ बिजली चमकने का अलर्ट रहेगा। पूर्वोत्तर के सभी सातों राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा) में भी आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम बना रहेगा। खराब मौसम और आकाशीय बिजली की स्थिति में IMD ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लेने की अपील की है।

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तूफानी समुद्री हवाएं, मछुआरों के लिए अलर्ट

समुद्र तटीय क्षेत्रों में तूफानी मौसम को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए चेतावनी जारी की है। अरब सागर में सोमालिया और ओमान के तटीय इलाकों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाएं दर्ज की जा सकती हैं, जिनकी स्पीड बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

वहीं बंगाल की खाड़ी में भी दक्षिण तमिलनाडु के तटीय इलाकों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान है, जो 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। इन प्रतिकूल समुद्री परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मछुआरों को समुद्र में न जाने और तटों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।

नेपाल में फिर बाढ़ की संभावना, बिहार में आएगी तबाही?:गंगा और गंडक उफन रहीं, अबकी ग्लेशियर टूटा तो नियंत्रण में नहीं रहेंगे हालात

‘हालात काबू में हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।’ नेपाल में तबाही के बाद CM सम्राट चौधरी के इस बयान ने बिहार के 21 जिलों के लोगों को फौरी तौर पर राहत तो दी है। लेकिन साथ ही आगे की चुनौती के लिए भी आगाह कर दिया है। नेपाल में क्या फिर तबाही आने वाली है, अगर आई तो बिहार का क्या होगा, गंगा-गंडक-कोसी में क्या चल रहा, समझेंगे; बूझे की नाही में…। क्या नेपाल में फिर से बाढ़ आने की संभावना है? वैज्ञानिकों ने आगे के खतरे से इनकार नहीं किया है। एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि घाटी की अस्थिर ढलानें और आंशिक रूप से ढहा हुआ ग्लेशियर आने वाले दिनों में मलबे के नए बहाव से दूसरी बाढ़ की स्थिति पैदा कर सकता है। नेपाल के गृह मंत्री सूडान गुरुंग ने कहा कि ल्हेन्डे नदी अभी पूरी तरह से साफ नहीं हुई है। ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) ने कहा कि बादलों के ढके होने के कारण क्षेत्र की उपग्रह से निगरानी करने में भी दिक्कत आई है। वहीं, काठमांडू यूनिवर्सिटी के जलवायु शोधकर्ता और प्रोफेसर रिजन भक्त कायस्थ ने कहा, ‘शुरुआत में चिंता थी कि ऊपर की ओर एक और बड़ी झील बन सकती है, लेकिन अभी तक ऐसी झील के अस्तित्व की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।’ कायस्थ ने कहा, ‘जोखिम अभी भी बना हुआ है। बढ़ता तापमान ग्लेशियरों के पिघलने, बर्फ और चट्टानों के टूटने तथा हिमालय में हिमस्खलन की संभावना को बढ़ाता है। लेकिन हम सटीक रूप से यह नहीं कह सकते कि अगली घटना कहां होगी।’ नेपाल में ग्लेशियर टूटेगा तो बिहार को खतरा क्यों बिहार से करीब 400 फीट की ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित नेपाल की सभी नदियों का पानी घूम फिर कर बिहार ही आता है। इससे नदियों के 3 रूट से ऐसे समझिए… रूट-1ः नेपाल की नारायणी से चंपारण, सारण तबाह रूट-2ः नेपाल की सप्तकोशी से सहरसा-सुपौल का एरिया प्रभावित रूट-3ः UP के रास्ते भी बिहार में आता है नेपाल का पानी मतलब यह कि नेपाल के उत्तर में हादसा हो या पश्चिम में सारा पानी बिहार ही पहुंचेगा। ऐसे में नेपाल की नदियों की हलचल का बिहार पर ज्यादा असर पड़ता है। अब नीचे के मैप से समझिए…नदियों का रूट …दूसरा ग्लेशियर टूटा तो क्या बिहार में बिगड़ेंगे हालात? बिल्कुल। अभी ताजा हालात है कि नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को आई बाढ़ के बाद बिहार के गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। वाल्मीकिनगर बैराज से हर घंटे औसतन डेढ़ लाख से ज्यादा क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, गंडक में 3 मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं, फ्लैश फ्लड आने की भी आशंका है। अब 2 कारणों से समझिए, कैसे बिगड़ सकते हैं हालात… 1. गंगा-गंडक उफान पर, पानी का बढ़ रहा दबाव बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के मुताबिक, 27 अगस्त की शाम 4 बजे तक गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक, पटना में गंगा, खगड़िया में बुढ़ी गंडक, सीवान के दरौली में घाघरा, कटिहार के कुरसेला में कोसी नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। नेपाल के पानी के कारण गंडक और गंगा में पानी का फ्लो बढ़ रहा है। खगड़िया में गंगा और बूढ़ी गंडक में पानी के कारण 20 पंचायतों में 50 हजार से ज्यादा घर पानी में डूब गए हैं। अगर नेपाल में दूसरा ग्लेशियर टूटा तो बिहार में हालात खराब हो जाएंगे। क्योंकि अभी ही नदियों में पानी काफी बढ़ गया है। आगे पानी आने पर तबाही ही मचेगी। CM सम्राट चौधरी ने 27 अगस्त को निरीक्षण करने के बाद कहा, ‘खतरा अभी टला नहीं है। भगवान की कृपा रही तो सब ठीक होगा।’ 2. अगले 5 दिन तक बिहार और नेपाल में बारिश का अलर्ट नेपाल और बिहार में अगले 5 दिन तक यानी 2 सितंबर तक बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज यानी 28 अगस्त को बिहार में तेज बारिश का अलर्ट है। वहीं, नेपाल में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। हालांकि, 29 अगस्त से 2 सितंबर तक नेपाल और बिहार में रुक-रुक कर धीमी बारिश की चेतावनी दी गई है। अगर मौसम विभाग का अनुमान सही साबित हुआ तो यह बिहार के गंडक, कोसी, गंगा के किनारे रहने वाले लोगों को खासा दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। …लेकिन राहत की 2 बातें पहली- बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के मुताबिक, नेपाल की सभी 22 नदियों का जलस्तर 27 अगस्त की शाम 5 बजे तक खतरे के निशान से नीचे हैं। खास बात है कि त्रिशूली यानी नारायणी और भोटेकोशी यानी सप्तकोशी नदी खतरे के निशान से क्रमशः 4 और 3 फीट नीचे बह रही है। मतलब अभी वहां नदियों में ज्यादा पानी नहीं है। अगर थोड़ी बारिश हुई भी तो नदियां उफान नहीं मारेंगी, बशर्ते ग्लेशियर या बादल न फट जाए। दूसरी- जल संसाधन विभाग के मुताबिक, गंडक बैराज का अपस्ट्रीम 353.770 फीट और डाउनस्ट्रीम 350.930 फीट है। जो तय मानक 362 फीट से करीब 8 फीट कम है। इसका मतलब हुआ कि अभी बैराज पर 8 फीट ज्यादा तक पानी स्टोर किया जा सकता है। अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम के पानी के स्तर में मामूली अंतर (2.84 फीट) बता रहा है कि बांध के गेट खुले हुए हैं और बांध पर ज्यादा दबाव नहीं है। मतलब पानी की गति सामान्य व नियंत्रित है।

कल का मौसम: 28 अगस्त को यूपी, बिहार, एमपी संग इन 14 राज्यों में IMD का मूसलाधार बारिश का अलर्ट, अंधड़ और आंधी-तूफान का खतरा

IMD Heavy Rain Alert: देश के बड़े हिस्से में मानसूनी बारिश का दौर लगातार जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 28 अगस्त के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी करते हुए कई राज्यों में मूसलाधार बारिश, अंधड़ और गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर के राज्यों समेत कुल 14 राज्यों में मूसलाधार बारिश को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। देश के अलग अलग इलाकों में 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने की चेतावनी भी दी गई है।

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ओडिशा में अति भारी बारिश की चेतावनी, बंगाल और झारखंड में भी बिगड़ेगा मौसम

पूर्वी भारत के राज्यों में 28 अगस्त को मौसम का मिजाज सबसे ज्यादा प्रभावित रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक ओडिशा में अलग अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही ओडिशा में आकाशीय बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है।

बिहार, झारखंड और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश होने के आसार हैं। इन क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता बनी रहेगी। बिहार, झारखंड और गांगेय पश्चिम बंगाल व सिक्किम में बिजली चमकने के साथ-साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से अंधड़ और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान दिया गया है। बिहार और झारखंड के नागरिकों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों में न जाने की सलाह दी गई है।

उत्तर भारत का हाल: पूर्वी यूपी में मूसलाधार बारिश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में आंधी-बिजली का अलर्ट

उत्तर भारत में मानसूनी हवाओं का प्रभाव बना हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक 28 अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही पूरे पूर्वी यूपी में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के इलाकों में बिजली कड़कने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है।

मध्य और पूर्वोत्तर भारत: एमपी, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के सातों राज्यों में बरसेगी आफत

मध्य भारत में भी बारिश का प्रकोप जारी रहेगा। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में 28 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पूरे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली चमकने और गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी गतिविधियां बेहद तेज रहने वाली हैं। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है। पूर्वोत्तर के इन सभी सातों राज्यों में बारिश के साथ तेज गर्जना और बिजली चमकने की चेतावनी भी दी गई है।

दक्षिण भारत: तेज हवाओं का प्रकोप, अंडमान में तूफानी अंधड़ की चेतावनी

दक्षिण भारत के राज्यों में मूसलाधार बारिश से ज्यादा तेज हवाओं और आंधी का असर देखने को मिलेगा। आंध्र प्रदेश, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, अंधड़ आने और बिजली चमकने का अलर्ट है। इसके अलावा दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं। आंध्र प्रदेश और आंतरिक कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों में तेज सतह हवाएं चलने का भी पूर्वानुमान है।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मौसम बेहद तूफानी रहने वाला है। यहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है।

अरब सागर में खतरनाक हवाएं, मछुआरों के लिए चेतावनी

समुद्री स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने अरब सागर के तटीय और खुले इलाकों के लिए अलर्ट जारी किया है। सोमालिया और ओमान के तटों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य अरब सागर के कई हिस्सों, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ इलाकों और उत्तरी और पूर्व-मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इनकी स्पीड बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक पहुंच सकती हैं। मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।

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Weather Update: अगले 5 दिन संभलकर रहें! एमपी, यूपी समेत इन राज्यों में मंडराया भारी बारिश का खतरा, IMD ने जारी किया अलर्ट

IMD Heavy Rain Alert: देश भर में मानसूनी प्रणालियां एक बार फिर बेहद सक्रिय हो गई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताजा बुलेटिन में अगले 5 दिनों के लिए कई राज्यों में मूसलाधार बारिश, आंधी-तूफान और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश और उसके आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र के असर से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत देश के बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। मौसम विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने की हिदायत देते हुए पहाड़ी और निचले इलाकों में विशेष सावधानी बरतने को कहा है।

बीते 24 घंटों के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश में बेहद भारी बारिश (21 सेमी या उससे अधिक) दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में बहुत भारी बारिश (12 से 20 सेमी) हुई जबकि पंजाब, उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश (7 से 11 सेमी) दर्ज की गई है।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में गरज-चमक के साथ भारी बारिश का अलर्ट

मध्य भारत में चक्रवाती प्रणालियों का असर साफ देखने को मिल रहा है। 27 अगस्त को पश्चिमी मध्य प्रदेश में व्यापक बारिश और मध्य प्रदेश में अलग अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 27 से 29 अगस्त और 1 से 2 सितंबर तक व्यापक बारिश का दौर जारी रहेगा। 28-29 अगस्त और 1-2 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश होगी।

छत्तीसगढ़ में 27 अगस्त से 2 सितंबर तक लगातार भारी बारिश की संभावना है। विदर्भ में 28 अगस्त और 2 सितंबर को बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 27 से 31 अगस्त के दौरान गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी और उत्तराखंड में 27 अगस्त को बहुत भारी बारिश फिर 2 सितंबर तक का दौर

उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में 27 अगस्त को मूसलाधार बारिश देखने को मिलेगी। पश्चिम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 27 अगस्त को अलग-अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 27 अगस्त को भारी बारिश होगी जबकि 28 अगस्त और 31 अगस्त से 2 सितंबर के दौरान दोबारा भारी बारिश का दौर लौटेगा। 2 सितंबर को पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक बारिश का अनुमान है।

उत्तराखंड में 27 अगस्त से 2 सितंबर तक लगातार व्यापक बारिश और आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट रहेगा। हिमाचल प्रदेश में 30 अगस्त से 2 सितंबर तक व्यापक बारिश होगी जिसमें 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच भारी बारिश की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 31 अगस्त से 1 सितंबर के दौरान व्यापक बारिश होगी।

पूर्वी भारत: ओडिशा में 31 अगस्त तक बहुत भारी बारिश, बिहार और झारखंड में भी अलर्ट

पूर्वी भारत में 29 अगस्त को बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र के कारण बारिश की गतिविधियां और तेज होंगी। ओडिशा में 27 से 31 अगस्त के दौरान अलग-अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना है जबकि 1 और 2 सितंबर को भी भारी बारिश जारी रहेगी।

गांगेय पश्चिम बंगाल और झारखंड में 27 से 31 अगस्त के दौरान भारी बारिश और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। 27 अगस्त को झारखंड में मध्यम से गंभीर बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। बिहार में 28 और 29 अगस्त को व्यापक बारिश होगी और 27 से 30 अगस्त तक भारी बारिश का अलर्ट रहेगा। 28 और 29 अगस्त को बिहार में आकाशीय बिजलीॉ गिरने की आशंका जताई गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 27 और 28 अगस्त को 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी।

पूर्वोत्तर भारत: असम और अरुणाचल में 30 अगस्त को बहुत भारी बारिश का अनुमान

पूर्वोत्तर के राज्यों में मानसून पूरी तरह मेहरबान रहेगा। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 27 अगस्त से 2 सितंबर तक व्यापक वर्षा होगी। अरुणाचल प्रदेश और असम व मेघालय में 27 से 29 अगस्त और 31 अगस्त से 2 सितंबर तक भारी बारिश दर्ज की जाएगी जबकि 30 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 27 से 31 अगस्त और 2 सितंबर को भारी बारिश होगी। पूर्वोत्तर के इन सभी राज्यों में 31 अगस्त तक गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

पश्चिम और दक्षिण भारत: कोंकण-गोवा में व्यापक बारिश, प्रायद्वीपीय भारत में सुस्ती कायम

पश्चिम भारत की बात करें तो कोंकण और गोवा में 27 अगस्त से 2 सितंबर तक लगातार व्यापक बारिश का दौर बना रहेगा। गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र व कच्छ में छिटपुट से हल्की बारिश ही होने का अनुमान है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह के दौरान बारिश की गतिविधियों में सुस्ती जारी रहने की संभावना है।

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तटीय कर्नाटक में 27 अगस्त से 2 सितंबर तक और केरल व माहे और लक्षद्वीप में 27 से 30 अगस्त के बीच व्यापक बारिश होगी। 27 अगस्त को केरल और माहे में भारी बारिश हो सकती है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और कर्नाटक के विभिन्न इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया गया है।

Aaj ka Mausam: आज तूफानी मौसम: आज यूपी-बिहार संग इन 15 राज्यों में IMD ने दिया भारी बारिश का अलर्ट, 40 kmph की रफ्तार से आएगा अंधड़

IMD Weather Update: देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून का उग्र रूप देखने को मिल रहा है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज यानी 27 अगस्त के लिए मौसम का बुलेटिन जारी करते हुए देश के 13 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में तेज आंधी, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने की चेतावनी जारी की गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है। इसे लेकर स्थानीय प्रशासन और आम जनता को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

उत्तर भारत का मौसम: यूपी में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, उत्तराखंड और राजस्थान में बिजली कड़कने की चेतावनी

उत्तर भारत के राज्यों में आज मानसून काफी सक्रिय रहने वाला है। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अलग अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश होने की पूरी संभावना है। यूपी के कई जिलों में बारिश के चलते जलभराव और नदियों के जलस्तर पर असर पड़ सकता है। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड और पश्चिमी भारत के पूर्वी राजस्थान में आज अलग-अलग स्थानों पर गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने और गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में लोगों को खराब मौसम के दौरान पेड़ों या खुले स्थानों के नीचे जाने से बचने की सलाह दी है।

पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड, बंगाल और ओडिशा में भारी बारिश और 40 kmph की रफ्तार से चलेगा अंधड़

पूर्वी भारत के मैदानी इलाकों के लिए आज का दिन मौसम के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जा रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक आज बिहार, झारखंड, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है।

बारिश के साथ-साथ इन पूर्वी राज्यों में मौसम का मिजाज काफी बिगड़ा रहेगा। बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने, अंधड़ आने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है।

पूर्वोत्तर और मध्य भारत: असम, मेघालय, एमपी और छत्तीसगढ़ में बरसेगी आफत

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मूसलाधार बारिश का दौर लगातार जारी है। आईएमडी के अलर्ट के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में आज अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।

इन सभी सातों पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश के दौरान गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं दर्ज की जा सकती हैं। मध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आज भारी बारिश होने के आसार हैं। इसके अलावा इन दोनों ही राज्यों में आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी भी दी गई है।

दक्षिण भारत का हाल: केरल में भारी बारिश, आंध्र और तमिलनाडु में तेज हवाओं का प्रकोप

दक्षिण भारत में भी मानसूनी गतिविधियां जोर पकड़ रही हैं। केरल और माहे के अलग-अलग हिस्सों में आज भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। दक्षिण के अन्य राज्यों में तेज हवाओं का असर देखने को मिलेगा। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली चमकने का अलर्ट है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में अलग-अलग जगहों पर तेज सतही हवाएं चलने का भी पूर्वानुमान है।

अंडमान में तूफानी हवाएं, समुद्र में मछुआरों के लिए रेड अलर्ट जारी

द्वीपीय इलाकों की बात करें तो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आज 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। समुद्री क्षेत्रों में उथल-पुथल को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। अरब सागर में सोमालिया व ओमान तटों के साथ-साथ उत्तर, पूर्व-मध्य और पश्चिम-मध्य अरब सागर के कई हिस्सों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।

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बंगाल की खाड़ी में दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में भी 45 से 55 किमी प्रति घंटे से लेकर 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का अनुमान है। आईएमडी ने मछुआरों को इन खतरनाक समुद्री क्षेत्रों में न जाने की सख्त सलाह दी है।

नेपाल में तबाही, पानी बिहार क्यों पहुंचेगा:36 फाटक खोले, त्रिशूली-भोटेकोशी का पानी किन जिलों तक पहुंचेगा, समझिए पूरा कनेक्शन

बिहार से करीब 300 किलोमीटर दूर नेपाल में तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के पानी ने रसुवा, टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके को तहस-नहस कर दिया है। गांव के गांव बह गए, बाजार तबाह हो गए, पुल टूट गए और सड़कें कट गईं। नेपाल में आई तबाही पर बिहार सरकार अलर्ट है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गृह मंत्री अमित शाह ने बात की है और NDRF की टीम को सीमावर्ती जिलों में तैनात कर दिया है। नेपाल में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों, क्या यहां भी तबाही मचेगी, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1: नेपाल के रसुवा में बाढ़ और तबाही कैसे आई है? जवाबः 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिले में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बहुत तेज पानी आया। पानी तिब्बत की तरफ से आया और कुछ ही समय में घर, सड़क, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बहा ले गया। उस समय रसुवा में ऐसी भारी स्थानीय बारिश की सूचना नहीं थी, इसलिए सामान्य बारिश से आई बाढ़ की संभावना कम मानी जा रही है। कैसे हुआ? कितना नुकसान? नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 95 लोगों के मौत की खबर है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 500 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं। सवाल-2: भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों? जवाबः नेपाल में आई तबाही से बिहार के खतरों को समझने के लिए भोट कोशी और त्रिशूली नदियों के तंत्रों को समझना होगा… त्रिशूली नदी के पानी से 5 जिलों को खतरा रसुवा नेपाल का उत्तरी, हिमालयी जिला है और चीन के तिब्बत से लगा है। टिमुरे/रसुवागढ़ी और स्याब्रुबेसी इसी क्षेत्र में हैं। यहां की नदियां ऊंचे हिमालय से निकलकर बहुत तेज ढाल वाले एरिया में नीचे उतरती हैं। इसी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का डिस्चार्ज अचानक बढ़ता है तो पानी तेजी से नीचे आता है। भोटेकोशी से कोसी इलाके में खतरा भोटेकोशी नेपाल के उत्तरी हिस्से में चीन-तिब्बत सीमा से निकलने वाली हिमालयी नदी है। यह सिंधुपालचोक क्षेत्र से होकर बहती है। हालांकि, अबकी बार 2008 वाले हालात नहीं सवाल-3: कितना नुकसान हो सकता है, बिहार सरकार क्या कर रही है? जवाबः अभी नुकसान का आकलन करना जल्दीबाजी होगी। गंडक और कोसी बेसिन की नदियों में पानी बढ़ना चालू है। लेकिन गति सामान्य है। CM सम्राट चौधरी ने मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। डिप्टी CM और जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि लोग सतर्क रहें, घबराएं नहीं। अगले 24 घंटे अलर्ट रहने की जरूरत है। समस्या पहले से बड़ी है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। गंडक नदी पर दबाव बढ़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से बाढ़ राहत के लिए अतिरिक्त टीमों की तैनाती की गई है। राहत एवं बचाव के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। सरकार अलर्ट, बोली-डरे नहीं सवाल-4ः नेपाल की नदियों से बिहार में क्यों आती है बाढ़? जवाबः नेपाल बिहार से करीब 400 फीट ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित है। नेपाल में भारी बारिश होती है तो पानी ऊपर से नीचे की तरफ नेचुरल ग्रेविटी के कारण आता है। नेपाल में कोई बड़ा डैम नहीं है। जिससे पानी को कंट्रोल किया जा सके। नेपाल हिमालय पर बसा है। इसका करीब 75% हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, महानंदा और अधवारा नदियों का समूह यहां से निकलता है। नेपाल में बारिश होने पर पानी इन्हीं नदियों के रास्ते गंगा नदी तक पहुंचता है। 129 साल से चल रही हाई डैम बनाने की बात उत्तर बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने के लिए 1897 से ही भारत और नेपाल की सरकारों के बीच सप्तकोशी नदी पर बांध की बात चल रही है। इसे लेकर आजादी से पहले और बाद में दोनों देशों की सरकारों के बीच कई बार वार्ताएं हुईं। आखिरकार 1991 में दोनों देशों के बीच इसे लेकर एक समझौता भी हुआ। 2004 में इस प्रस्तावित बांध की संभावनाओं को तलाशने के लिए नेपाल के धरान में एक संयुक्त परियोजना कार्यालय भी बना है। मगर 129 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद आज तक नेपाल के बराह क्षेत्र से 1.6 किमी उत्तर की दिशा में प्रस्तावित इस बांध के निर्माण को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। 21 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। इसके बाद वित्त मंत्री ने कोसी-मेची परियोजना के पहले चरण की राशि जारी करने और दूसरे चरण की तकनीकी मंजूरी देने का निर्देश जल शक्ति मंत्रालय को दिया है। CM सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए कोसी नदी पर उच्च बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जल्द बनेगी। JDU नेता संजय झा ने बताया, ‘नेपाल में हाई डैम का निर्माण एकमात्र समाधान है, जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) 2028 तक बन जाएगी।’

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बाढ़ से 160 मौतें, 844 लापता:33 शव 150km दूर मिले; भूकंप नहीं, पहाड़ खिसकने से आया 5.2 तीव्रता जैसा झटका

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ में 160 लोगों की मौत हो गई। नेपाल में 157 और तिब्बत में 3 लोगों की जान गई, जबकि 844 लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ में 19 पुल, करीब 40 किलोमीटर सड़कें और 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह हो गए। बाढ़ का पानी करीब 30 फीट तक ऊपर आ गया था। तेज बहाव में घर, गाड़ियां और सरकारी ढांचे बह गए। शुरुआत में माना जा रहा था कि बाढ़ से पहले भूकंप आया था, लेकिन अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक चीन की तरफ ल्हेंदे नदी में पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसककर गिरा था। इसी लैंडस्लाइड से 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ। इसके बाद ल्हेंदे नदी से पानी और मलबे का सैलाब भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पहुंचा, जिससे बाढ़ आई। बहाव इतना तेज था कि लोगों और मलबे को करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक बहा ले गया, जहां अब तक 33 शव बरामद किए गए हैं। राहतकर्मी खराब मौसम और टूटे रास्तों के बीच मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई श्रद्धालु भी बाढ़ की चपेट में आ गए। नेपाल में लापता लोगों में 466 विदेशी और 113 नेपाली शामिल हैं, जिनमें 133 भारतीय और 37 NRI भी हैं। भास्कर नॉलेजः कैसे आई बाढ़, कितना असर और भारत पर इम्पैक्ट बाढ़ की वजह को लेकर 3 आशंकाएं 1. लैंडस्लाइड से नदी का रास्ता रुका: यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की जांच में पता चला कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर चीन की ल्हेंदे नदी में पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसककर गिरा। इससे नदी का बहाव रुका और पानी-मलबा जमा होने के बाद अचानक तेज बहाव आया। इस घटना से 5.2 तीव्रता के भूकंप जितनी ऊर्जा पैदा हुई थी। ल्हेंदे का पानी भोटेकोशी नदी में पहुंच गया, जिससे बाढ़ आ गई। 2. भूकंप से ग्लेशियल फटने की आशंका: नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में बताया कि सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया और करीब तीन मिनट बाद फ्लैश फ्लड की सूचना मिली। इससे आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियल आउटबर्स्ट हुआ होगा। 3. ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट: एक संभावना यह भी है कि बर्फ और मलबे से नदी का रास्ता रुकने के बाद अस्थायी झील बनी और उसका पानी अचानक बाहर निकला। विशेषज्ञ अभी यह जांच रहे हैं कि क्या इस घटना में ग्लेशियल झील भी फूटी थी। बारिश को फिलहाल वजह नहीं माना जा रहा है, क्योंकि नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विभाग के मुताबिक बाढ़ से पहले रसुवा में भारी बारिश नहीं हुई थी। नदी किनारे रहने वालों को खतरा बरकरार नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन ने चेतावनी दी है कि भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के इलाकों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। चीन की ओर नदी के रास्ते में बनी झील अभी पूरी तरह खाली नहीं हुई है। लोगों से नदी के आसपास जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है। नेपाल में पिछले साल भी भोटेकोशी नदी में विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी। नेपाल-चीन को जोड़ने वाला मितेरी पुल भी बह गया था। भारत में कहां-कितना असर होगा भारत में इसका असर मुख्य रूप से बिहार की गंडक नदी और उससे जुड़ी छोटी-बड़ी नदियों में दिखने की आशंका है। नेपाल से करीब 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव आने का अलर्ट है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में खास सतर्कता बरती जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर है। नेपाल का पानी त्रिशूली नदी से होते हुए गंडक तक पहुंचेगा। इसके बाद बिहार के निचले इलाकों में पानी बढ़ सकता है। यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर में भी अलर्ट जारी किया गया है। खबर से जुड़े पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

नेपाल में तबाही के बाद यूपी अलर्ट पर! सीमावर्ती जिलों में बढ़ाई गई निगरानी, राकेश टिकैत भी बाढ़ में फंसे

Nepal Flood: बुधवार को उत्तर प्रदेश प्रशासन ने महाराजगंज और कुशीनगर जैसे सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ा दी है। साथ ही, नेपाल में आई भयानक अचानक बाढ़ के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि नेपाल में आई बाढ़ से इन दोनों जिलों में गंडक और नारायणी नदियों का जलस्तर बढ़ने की संभावना है।

वहीं, राहत आयुक्त कार्यालय ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि अगर राज्य का कोई व्यक्ति नेपाल में फंसा है या उसे किसी मदद की जरूरत है, तो उनके रिश्तेदार तुरंत राज्य के हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क करें।

माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के कई लोग पड़ोसी देश में फंसे हुए हैं। किसान नेता राकेश टिकैत, जो अपने साथियों के साथ सड़क मार्ग से नेपाल गए थे, पोखरा में फंस गए।

बता दें कि बाढ़ ने चितवा, रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में कई सड़कों और पुलों को बहा दिया है।

भाकियू के नेता जारी किया वीडियो संदेश

भारतीय किसान यूनियन के नेता ने एक वीडियो संदेश में कहा, “हालात को देखते हुए हम कल फ्लाइट से काठमांडू पहुंचेंगे और वहां से फ्लाइट से दिल्ली जाएंगे। हम अपनी गाड़ियां वहीं छोड़ देंगे क्योंकि सड़क मार्ग से यात्रा करना संभव नहीं होगा।”

उन्होंने कहा कि यूपी के किसान संगठनों के सदस्य नेपाल में हैं और उनसे कहा गया है कि वे वहां फंसे भारतीयों और स्थानीय लोगों की मदद करें।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ से हुए नुकसान को गंभीर चिंता का विषय बताया और प्रभावित सभी लोगों की सुरक्षा और भलाई के लिए भगवान पशुपतिनाथ से प्रार्थना की। साथ ही स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया कि वे नदी के जलस्तर पर कड़ी नजर रखें और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क रहें।

महराजगंज में अलर्ट, गंडक नदी की 24 घंटे निगरानी

वहीं, महाराजगंज में जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और गंडक नदी की चौबीसों घंटे निगरानी के आदेश दिए हैं, क्योंकि पानी का बढ़ा हुआ बहाव भोटेकोशी-त्रिशूली नदी प्रणाली के जरिए निचले इलाकों को प्रभावित कर सकता है।

जिला मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल ने राजस्व विभाग, पुलिस, SDRF और अन्य एजेंसियों को अलर्ट पर रहने और जरूरत पड़ने पर निचले और नदी के किनारे बसे जोखिम वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित, ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।

प्रशासन ने निवासियों से अपील की है कि वे नदियों, नालों और पानी से भरे इलाकों के पास न जाएं और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें, साथ ही बच्चों, बुज़ुर्गों और मवेशियों को जोखिम वाले इलाकों से दूर रखें।

कुशीनगर में गांवों को खाली कराने का आदेश, प्रशासन अलर्ट

कुशीनगर में जिला प्रशासन ने मर्चहवा, शिवपुर समेत कई गांवों को खाली कराने का आदेश दिया है। साथ ही लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह देने के लिए लगातार लाउडस्पीकर से ऐलान भी किया जा रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, नारायणी नदी का जलस्तर अगले दो घंटे में और बढ़ सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने को कहा है।

जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि नेपाल में हुई भारी बारिश से पैदा हुई स्थिति को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि खड्डा तहसील में नारायणी नदी के किनारे बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को खास तौर पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

गांव वालों से कहा गया है कि वे सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें, क्योंकि नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है।

खड्डा तहसील के दियारा इलाके में शिवपुर, हरिहरपुर, नारायणपुर, मरचहवा और बसंतपुर गांवों में खास निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि नेपाल में बारिश से नारायणी नदी का जलस्तर प्रभावित हो सकता है।

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भारत में नेपाल जैसी तबाही को उफन रहीं 88 झीलें:खतरे में 6 प्रदेश, ग्लेशियल लेक अचानक कैसे फट जाती हैं

26 अगस्त की सुबह 9 बजे। तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में अचानक तेज बाढ़ आ गई। कुछ ही मिनटों में सड़कें, इमारतें, गांव बह गए। सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें भारत-अमेरिका समेत 26 देशों के नागरिक शामिल हैं। रात 9 बजे तक 95 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, तबाही की वजह ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ यानी GLOF है। करीब एक साल पहले, जुलाई 2025 में भी इसी इलाके में तिब्बत की एक ग्लेशियर झील तापमान बढ़ने से फट गई थी, जिसमें 9 लोगों की जान गई थी। ये एक पैटर्न-सा बनता जा रहा है। GLOF की जद में भारत के भी कई इलाके हैं। 5 गुना बढ़ गईं ग्लेशियर झीलें, खतरे में भारत के 6 प्रदेश IIT रोपड़ और सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक साझा स्टडी की। इसी महीने जारी रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 1990 में सिर्फ 107 ग्लेशियर झीलें थीं। 2024 तक यह संख्या बढ़कर 669 हो गई, यानी 525% की बढ़ोत्तरी। 669 में से 88 झीलों पर नेपाल जैसी ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ का खतरा मंडरा रहा है। 9 झीलों को ‘बेहद ज्यादा खतरनाक’, 18 को ‘ज्यादा खतरनाक’ और 26 को ‘मध्यम खतरनाक’ श्रेणी में रखा गया है। रिसर्चर्स ने दो झीलों पर खास मॉडलिंग की- ब्यास बेसिन की हिमसू झील और सतलुज बेसिन की एक बेनाम झील। अगर ब्यास झील का नेचुरल डैम टूट जाए, तो 1,385 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड की बाढ़ आएगी। यानी हर सेकेंड करीब 14 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे हर सेकेंड ओलंपिक साइज के 6 स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं। इसी तरह सतलुज झील से 3,507 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पानी का सैलाब आएगा। यानी हर सेकेंड करीब 35 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे डैम और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत 588 इमारतों को खतरा है। हिमालय का बढ़ता तामपान इस खतरे को और बढ़ा रहा है। जुलाई 2026 में आई IIT खड़गपुर की एक स्टडी बताती है कि ऊंचाई वाले इलाकों का तापमान पिछले 20 सालों में करीब 1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि इससे ग्लेशियर पिघलने और नदियों के बहाव में बड़ा बदलाव आ सकता है। ग्लेशियर झीलें अचानक कैसे फट जाती हैं? पहाड़ों पर ऊंचाई पर मौजूद ग्लेशियर जब पिघलते हैं, तो उनका पानी आसपास के निचले इलाके या किसी चट्टानी दीवार के सहारे इकट्ठा होने लगता है। ये धीरे-धीरे एक झील का रूप ले लेता है, जिसे ‘ग्लेशियल लेक’ कहते हैं। ये झील ग्लेशियर के सामने या उसकी निचली सतह पर भी बन सकती है। इन झीलों को बर्फ, पहाड़ का मलबा या चट्टान की एक नैचुरल दीवार यानी ‘डैम’ रोककर रखती है। जब ये दीवार किसी वजह से अचानक टूट जाती है, तो झील में जमा लाखों-करोड़ों क्यूबिक मीटर पानी बहुत तेज रफ्तार से बेकाबू होकर नीचे की तरफ बहता है। इसी को ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, GLOF या ग्लेशियर की झील फटना कहते हैं। GLOF में पानी के बहाव की रफ्तार आम बारिश से आई बाढ़ के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है, जिससे यह रास्ते में आने वाली हर चीज को बहुत तेजी से काटती-छांटती और बहाती चली जाती है। ग्लेशियर झील 3 वजहों से फट सकती हैं… 1. ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियर का तेजी से पिघलना 2. बर्फ या चट्टान का झील में गिरना 3. भारी बारिश से झील का ओवरफ्लो होना GLOF की तबाही कैसे रोकी जा सकती है? नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, NDMA और नेशनल GLOF रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम के मुताबिक, क्या नेपाल की बाढ़ से भारत में फौरन कोई खतरा? इसलिए भोटेकोशी में अधिक पानी आने पर उसका पानी सुनकोशी और फिर कोसी नदी तंत्र में शामिल हो सकता है। इससे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और खगड़िया जिले काफी प्रभावित हो सकते हैं। 2008 में नेपाल के कुसहा में कोसी नदी का तटबंध टूट गया था। इसके बाद कोसी नदी अपने नए/प्राकृतिक रास्ते को छोड़कर सैकड़ों साल पुराने पूर्व की ओर वाले रास्ते पर बहने लगी। इससे अचानक नदी का रुख घनी आबादी और नए इलाकों की तरफ मुड़ गया, जिससे बिहार के 34 लाख से अधिक लोग बिना किसी पूर्व चेतावनी के भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए। हालांकि, इस बार रसुवा में लैंडस्लाइड, भूस्खलन या हिम झील टूटने से अचानक नदी में भारी मात्रा में पानी आ गया है। लेकिन नदी ने अपना रास्ता नहीं बदला है। वह अपने तय रास्ते पर बह रही है। इस कारण एक्सपर्ट तटबंध टूटने की संभावना व्यक्त नहीं कर रहे हैं। पानी के भारी दबाव और संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। बिहार के 8 जिलों में हाईअलर्ट जारी किया गया है। ये जिले पश्चिमी चंपारण (बगहा), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर हैं। ———— ये खबरें भी पढ़ें- नेपाल में बाढ़ से तबाही, सैकड़ों लापता, 95 मौतें:पावर प्लांट-पुल बहे; 133 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे नेपाल की बाढ़ से गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ा:बैराज के 36 गेट खोले गए, मोतिहारी-गोपालगंज समेत बिहार के 8 जिलों में हाई अलर्ट

नेपाल में कुदरत के कहर के बीच पीएम मोदी ने बालेन शाह से बात कर दिया मदद का भरोसा

नेपाल में कुदरत के कहर के बीच पीएम मोदी ने बालेन शाह से बात कर दिया मदद का भरोसा

Modi Balen Shah Telephonic Conversation

Modi Balen Shah Telephonic Conversation on Flood Tragedy: नेपाल में कुदरत का भयानक कहर जारी है। भीषण बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। संकट की इस कठिन घड़ी में भारत अपने पड़ोसी मित्र देश नेपाल की ओर पूरी मजबूती से मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से टेलीफोन पर बात कर स्थिति का जायजा लिया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

नेपाल में भीषण बारिश और बाढ़ के कारण मची तबाही के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर एकजुटता व्यक्त की है। पीएम मोदी ने इस प्राकृतिक आपदा में लोगों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और नेपाल को संकट की इस घड़ी में हरसंभव सहायता प्रदान करने का भरोसा दिया। उल्लेखनीय है कि नेपाल में भीषण बाढ़ के चलते 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि 400 पर्यटक लापता हैं। इनमें 133 भारतीय भी शामिल हैं।


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नेपाल के साथ खड़ा है भारत : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बातचीत में इस बात को रेखांकित किया कि भारत और नेपाल के बीच सिर्फ सीमाएं नहीं, बल्कि गहरी सांस्कृतिक और भाईचारे की भावना जुड़ी हुई है। पीएम मोदी ने कहा कि इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को आश्वस्त किया कि भारत सरकार संकट के इस समय में नेपाल को राहत सामग्री, बचाव कार्य और किसी भी प्रकार की आपातकालीन सहायता के लिए पूरी तरह तैयार है।


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राहत और बचाव में मदद का आश्वासन

नेपाल के कई हिस्से भारी बारिश और उफनती नदियों के कारण पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जिससे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत नेपाल की जरूरतों के आधार पर तुरंत मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजने के लिए तत्पर है। गौरतलब है कि जब भी पड़ोसी देशों पर ऐसी प्राकृतिक आपदा आती है, तो भारत 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) की नीति के तहत सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाता है।