जन्माष्टमी पर वृंदावन जाने से पहले पढ़ें यह गाइड! बांके बिहारी मंगला आरती का समय, रूट डायवर्जन और पार्किंग नियम

जन्माष्टमी के मौके पर वृंदावन में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, ऐसे में शहर में जाम और भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन ने कई रास्तों पर वाहनों की एंट्री रोक दी है। 3 सितंबर की सुबह से 5 सितंबर की सुबह तक मथुरा और वृंदावन के कई प्रमुख रास्तों पर डायवर्जन और नो-एंट्री लागू रहेगी। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है। इसलिए सफर शुरू करने से पहले रूट और पार्किंग की जानकारी समझ लेना आपके लिए काफी फायदेमंद रहेगा।

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मंगला आरती का समय

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती 4 और 5 सितंबर की मध्यरात्रि रात 1:45 बजे होगी। आरती के लिए सिर्फ 600 पासधारक भक्तों को मंदिर में प्रवेश मिलेगा। इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंगला आरती का लाइव टेलीकास्ट भी किया जाएगा। इससे मंदिर में एंट्री न मिलने वाले भक्त भी घर बैठे इस खास आरती के दर्शन कर सकेंगे। भीड़ को कंट्रोल करने के साथ ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं तक आरती का दर्शन पहुंचाने के लिए यह व्यवस्था की गई है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के ये रूट बंद

जन्माष्टमी के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि और आसपास के इलाकों में भारी भीड़ को देखते हुए कई प्रमुख रास्तों पर वाहनों की आवाजाही रोकी जाएगी। भूतेश्वर तिराहा, मसानी चौराहा, डीग गेट, गोकरण तिराहा, चौक बाजार, भरतपुर गेट, कृष्णापुरी, स्टेट बैंक चौराहा और महाविद्या कॉलोनी जैसे रास्तों से वाहनों को आगे जाने की अनुमति नहीं होगी। मसानी चौराहा से जन्मभूमि और चौक बाजार की तरफ भी वाहनों की एंट्री बंद रहेगी। डीग गेट से जन्मभूमि की ओर भी वाहन नहीं जा सकेंगे। वहीं गोवर्धन चौराहा और मंडी चौराहा से भूतेश्वर की तरफ भारी वाहन, रोडवेज बस और ट्रैक्टर नहीं जा पाएंगे।

मथुरा आने वालों के लिए पार्किंग व्यवस्था

शहर में वाहन लेकर जाने की बजाय श्रद्धालुओं को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर गाड़ी खड़ी करनी होगी। यमुना एक्सप्रेसवे और वृंदावन की तरफ से आने वालों के लिए पीएमबी पॉलीटेक्निक स्कूल, जयसिंहपुरा, अनुज चौधरी के खाली प्लॉट और आरके ज्वैलर्स के सामने पार्किंग की व्यवस्था की गई है। गोकुल रेस्टोरेंट और हाईवे की तरफ से आने वाले वाहनों को आरएसएस संस्था के सामने, आईएसबीटी बस अड्डे और रामलीला मैदान में पार्क कराया जाएगा। वहीं धौलीप्याऊ की तरफ से आने वाले श्रद्धालु रेलवे ग्राउंड में वाहन खड़ा कर सकेंगे।

वृंदावन में इन रास्तों पर नो-एंट्री

जन्माष्टमी पर वृंदावन में भी ट्रैफिक रेगुलेशन काफी सख्त रहेगी। छटीकरा, रुक्मिणी विहार, पानीगांव, वृंदावन कट और सौ-शय्या जैसे रास्तों से भारी वाहनों की एंट्री पर रोक रहेगी। छटीकरा-वृंदावन रोड पर मल्टीलेवल पार्किंग से आगे वाहन नहीं जा सकेंगे। इसी तरह मथुरा-वृंदावन मार्ग पर सौ-शय्या से आगे भारी और चार पहिया वाहनों को रोक दिया जाएगा। वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आईटीआई, दारुक, मंडी, पवनहंस हेलीपैड, एमवीडीए, पशुपैठ, पैराग्लाइडिंग और शिवा ढाबा समेत कई जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

यात्रा से पहले रखें ये सावधानी

जन्माष्टमी में भीड़ बहुत ज्यादा होने की वजह से कई जगहों पर पार्किंग से मंदिर तक पैदल जाना पड़ सकता है। इसलिए बुजुर्गों और बच्चों के साथ जर्नी कर रहे हैं तो पहले से इसकी तैयारी रखें। अपना फोन, पर्स, चश्मा और जरूरी सामान सेफ रखें, क्योंकि भीड़भाड़ वाले इलाकों में सामान संभालकर रखना जरूरी है।

इससे आप जाम और रास्ता बंद होने जैसी परेशानी से काफी हद तक बच सकते हैं। इस तरह आप जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन की ट्रिप को आसान और परेशानी-फ्री बना सकते हैं।

BSE Share Price: बीएसई के सीईओ के इस बयान से रॉकेट बना शेयर, जानिए उन्होंने क्या कहा

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई के शेयर 3 सितंबर को रॉकेट बन गए। इसकी वजह एक्सचेंज के एमडी और सीईओ सुंदररमण रामामूर्ति का एक बयान है। उन्होंने कहा कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि उसके प्लेटफॉर्म पर उसके शेयर लिस्ट नहीं होंगे। इस बयान के बाद बीएसई के शेयरों में तेजी आई। 1:15 बजे शेयर 4.26 फीसदी के उछाल के साथ 3,303 रुपये पर चल रहा था। बीते एक साल में यह शेयर करीब 50 फीसदी भागा है।

एनएसई के शेयर की ट्रेडिंग एनएसई के प्लेटफॉर्म पर नहीं होगी

BSE के एमडी और सीईओ सुंदररमण ने सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में कहा कि एनएसई ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि ऑफर डॉक्युमेंट के साथ सेल्फ-ट्रेडिंग के लिए अडेन्डम (Addendum) इश्यू नहीं होगा। उन्होंने कहा कि 2017 में इजाजत लेने की कोशिशों के बावजूद बीएसई के शेयर को खुद के एक्सचेंज पर ट्रेडिंग की अनुमति नहीं मिली।

एनएसई के शेयर अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होते हैं तो बीएसई को नुकसान

पहले आई खबरों में कहा गया था कि बीएसई पर लिस्टिंग के बाद ‘permitted to trade’ कैटेगरी के जरिए एनएसई के शेयर की ट्रेडिंग उसके खुद के प्लेटफॉर्म पर हो सकती है। पीएल कैपिटल ने इस बारे में एक रिपोर्ट में कहा है कि अगर एनएसई के शेयर में उसके खुद के एक्सचेंज पर ट्रेडिंग होती है तो इसका असर FY27 में बीएसई के अर्निंग्स पर पड़ सकता है।

एक्सचेंज के शेयर को अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने की इजाजत नहीं

बीएसई के एमडी ने कहा कि नियम के तहत किसी स्टॉक एक्सचेंज के शेयर को अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने की इजाजत नहीं है। क्लोजिंग ऑक्श सेशन के बारे में उन्होंने कहा कि इसकी वजह से इंडेक्स ऑप्शन वॉल्यूम घटा है। उन्होंने कहा कि CAS सिस्टम के लिए लिक्विडिटी बहुत जरूरी है। लिक्विडिटी कम होने से पार्टिसिपेशन घटा है। इंडेक्स वॉल्यूम नीचे आ गया है।

CAS पर डीलर्स की फीडबैक ले रहा है एक्सचेंज

उन्होंने कहा, “हम CAS पर डीलर मीटिंग्स कर रहे हैं। डीलर्स का एक फीडबैक यह था कि F&O एक्सपायरी को CAS से अलग कर दिया जाए। दूसरा फीडबैक यह था कि CAS को धीरे-धीरे लागू किया जाए। एक फीडबैक यह था कि ऑर्डर मॉडिफेशन की इजाजत नहीं होनी चाहिए। हम सभी डीलर्स के फीडबैक पर विचार कर रहे हैं। फिर इसे हम रेगुलेटर्स को सब्मिट करेंगे।”

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3 अगस्त को हुई थी CAS की शुरुआत 

CAS यानी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की शुरुआत 3 अगस्त को हुई थी। इसमें कारोबार के अंत में एक संक्षिप्त ऑक्शन होता है, जिसमें बाय और सेल ऑर्डर्स मैच कराए जाते हैं। फिर, उसके आधार पर शेयर का क्लोजिंग प्राइस तय होता है। यह व्यवस्था कुछ एशियाई देशों में शामिल हैं। इनमें चीन, ताइवान, हांगकांगक और दक्षिण कोरिया शामिल हैं।

अमेरिका में $1 के सिक्के पर ट्रम्प की तस्वीर:250वीं वर्षगांठ पर जारी हुआ, बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद आउट ऑफ स्टॉक

अमेरिका ने अपनी 250वीं वर्षगांठ के मौके पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाला $1 का खास सिक्का जारी किया है। अमेरिकी मिंट ने बुधवार दोपहर 12 बजे इसकी बिक्री शुरू की। बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद ही सिक्का आउट ऑफ स्टॉक हो गया। दोपहर करीब 3 बजे अमेरिकी मिंट की वेबसाइट पर 25 सिक्कों का रोल उपलब्ध नहीं था। वहीं, 100 सिक्कों का बैग भी आउट ऑफ स्टॉक दिख रहा था। सिक्के के एक तरफ ट्रम्प की तस्वीर है। इसके साथ ‘IN GOD WE TRUST’ और ‘LIBERTY’ लिखा है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति की मुहर और अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए ‘250’ लिखा गया है। 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर और 100 सिक्कों के बैग की कीमत 154.50 डॉलर है। बिक्री शुरू होने के करीब आधे घंटे बाद ही वेबसाइट पर लोगों को वेटिंग एरिया में भेजा जाने लगा। वहां करीब 1 घंटे का वेटिंग टाइम बताया गया। गुरुवार दोपहर 2 बजे तक एक परिवार अधिकतम 2 खरीदारी कर सकता था। अमेरिकी मिंट ने बताया कि 2.5 लाख सिक्कों को खास ‘4 जुलाई’ निशान के साथ रैंडम तरीके से रोल और बैग में रखा गया है। ये सिक्के 4 जुलाई को बनाए गए थे। अमेरिका में इसी दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। 1926 के बाद पहली बार जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, इससे पहले किसी जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर 1926 में सिक्के पर दिखाई गई थी। उस समय राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज की तस्वीर अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा पर हस्ताक्षर की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर जारी आधे डॉलर के सिक्के पर लगाई गई थी। अमेरिकी कानून के तहत किसी जीवित राष्ट्रपति या जीवित पूर्व राष्ट्रपति की तस्वीर सिक्के पर लगाना प्रतिबंधित है। हालांकि, अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए कांग्रेस नेसर्कुलेटिंग कलेक्टिबल कॉइन रीडिजाइन एक्ट पास किया। इसके तहत ट्रेजरी को इस अवसर पर खास $1 के सिक्के जारी करने की अनुमति मिली। कानून में यह भी कहा गया है कि सिक्के के पीछे वाले हिस्से पर किसी जीवित व्यक्ति का पोर्ट्रेट नहीं हो सकता। ट्रम्प की तस्वीर सिक्के के आगे वाले हिस्से पर है, इसलिए इसे कानून के मुताबिक माना गया है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेच सकेंगे नीदरलैंड्स ने अमेरिका और कनाडा में रखा अपना 86 टन सोना निकालकर लंदन भेज दिया है। डच सेंट्रल बैंक (DNB) के मुताबिक, यह ट्रांसफर मार्च से अगस्त के बीच कई महीनों में किया गया। अब यह सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

TVS outsells Hero and Honda to top bike and scooter sales in August 2026

TVS outsells Hero and Honda to top bike and scooter sales in August 2026
Graphic with TVS Apache, Honda Activa, and Hero Xtreme 160 4V on a podium

August 2026 delivered strong year-on-year growth across the board as manufacturers gear up for the festive season, but the standout story was TVS Motor Company leapfrogging both Honda and Hero MotoCorp to become India’s largest two-wheeler manufacturer by monthly dispatches for the first time.

TVS Motor: 5,91,437 units

TVS recorded its highest-ever monthly two-wheeler sales this past August, with dispatches climbing 21 percent year-on-year from 4,90,788 units last August. This pushed it past both Honda and Hero for the top spot this month. Domestic two-wheeler sales grew 18 percent to 4,33,796 units, while the company’s electric two-wheeler business posted growth of 137 percent to 59,453 units. TVS also continued to lead as an exporter, shipping 1,57,641 two-wheelers overseas, up 29 percent year-on-year.

Honda: 5,79,162 units

Honda Motorcycle & Scooter India (HMSI) posted 8 percent YoY growth, with total sales rising from 5,34,861 units last August. Domestic sales grew at the same 8 percent clip to 5,17,329 units, while exports rose by a sharper 15 percent to 61,833 units.

Hero MotoCorp: 5,68,398 units

Hero two-wheeler dispatches grew a modest 2.65 percent year-on-year from 5,53,727 units. Domestic ICE dispatches stood at 5,16,747 units, while the Vida brand continued its strong run with 25,558 units dispatched – a 38 percent growth. Exports fell 24.6 percent to 26,093 units from 34,588 a year earlier.

Bajaj Auto: 4,43,748 units

Bajaj two-wheeler dispatches grew 30 percent YoY from 3,41,887 units. Domestic sales rose 10 percent to 2,01,898 units, while exports jumped 53 percent to 2,41,850 units, continuing the company’s run as one of India’s largest two-wheeler exporters.

Royal Enfield: 1,26,479 units

Royal Enfield motorcycle sales grew 11 percent YoY from 1,14,002 units. Domestic sales rose 11 percent to 1,14,204 units, while exports grew 10 percent to 12,275 units. The month saw the launch of the Classic 350 Gorkha Edition and an updated Continental GT 650, alongside continued momentum for the Flying Flea C6, which the brand says has crossed 50,000 customer-driven kilometres in its current sole market of Bengaluru.

Suzuki: 1,20,611 units

Suzuki posted 6 percent year-on-year growth from 1,13,936 units, driven largely by domestic sales, which rose 13 percent to 1,03,118 units. Exports declined to 17,493 units from 22,307 units a year earlier.

हिमालय में 7 मिनट में तबाही, चीन की तैयारी नाकाम:पिछली बार झील फटी थी, इस बार ग्लेशियर ही टूट गया

26 अगस्त को चीन-नेपाल सीमा पर हिमालय की एक घाटी में ऐसी तबाही आई, जिसमें 1200 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। हैरानी की बात ये थी कि चीन इस इलाके में ऐसी आपदा से निपटने की तैयारी पहले ही कर चुका था। 14 महीने पहले इसी इलाके में ग्लेशियर की एक झील फटने से भूस्खलन हुआ था। ट्रक, घर और एक पुल बह गए थे। इसके बाद चीन ने करीब छह महीने तक बॉर्डर पोर्ट बंद रखा और बाढ़ से बचाव का सिस्टम मजबूत किया। पानी के स्तर पर 24 घंटे नजर रखने लगी, तटबंध और बाढ़ रोधी दीवारें बनाई गईं और पानी का रास्ता बदलने के लिए नहरें तैयार की गईं। अधिकारियों और ग्रामीणों की ट्रेनिंग हुई, मॉक ड्रिल कराई गई और जुलाई में तैयारियों की समीक्षा भी हुई। यानी पिछली आपदा से सबक लेने में कोई कमी नहीं छोड़ी गई थी। फिर भी 26 अगस्त को कुछ ऐसा हुआ, जिसके लिए ये पूरा सिस्टम तैयार ही नहीं था। इस बार झील नहीं, ग्लेशियर टूटा इस बार बाढ़ किसी ग्लेशियल झील के फटने से नहीं आई। एक ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे आ गया। इसके साथ बर्फ, बड़े पत्थर और पानी इतनी तेजी से नीचे आए कि कुछ ही देर में ये सब सुनामी जैसी लहर में बदल गया। ग्यिरोंग पोर्ट कॉम्पलेक्स में पहुंचते ही इस लहर ने 27 इमारतों को तबाह कर दिया। इसके बाद ये तबाही नेपाल की ओर बढ़ गई। अधिकारियों के मुताबिक, ग्लेशियर का हिस्सा टूटने और ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुंचने के बीच सिर्फ छह-सात मिनट का समय था। इतनी कम अवधि में लोगों को चेतावनी देना और उन्हें सुरक्षित जगह पहुंचाना बेहद मुश्किल था। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ग्लेशियर का यह हिस्सा अचानक क्यों टूटा, इसकी पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं है। इसके पीछे ग्लोबल वार्मिंग के कारण पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने और चट्टानों के कमजोर होने जैसी वजहें हो सकती हैं। एक ही जगह बार-बार क्यों हो रही तबाही? इस आपदा ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। ग्यिरोंग पोर्ट जैसी बड़ी सीमा चौकी इतनी जोखिम वाली जगह पर क्यों बनाई गई? यह पोर्ट एक संकरी घाटी में उस जगह बना है, जहां ल्हेंडे खोला और त्रिशूली नदी मिलती हैं। दोनों नदियों में ग्लेशियरों का पानी आता है। इसी छोटी सी समतल जमीन पर पुल, कस्टम यार्ड, ड्राई पोर्ट और ट्रकों की पार्किंग है। यानी ऊपर पहाड़ों से पानी, बर्फ या मलबा नीचे आता है तो सबसे पहले यही इलाका उसकी चपेट में आता है। डिजास्टर मैनेजमेंट एक्सपर्ट सस्वता सन्याल के मुताबिक, 2025 में भी लोग इसी कस्टम यार्ड से बह गए थे और इस साल भी यह इलाका फिर तबाही की चपेट में आ गया। खतरनाक होने के बावजूद व्यापार के लिए जरूरी है ग्यिरोंग बार-बार प्राकृतिक आपदा झेलने के बाद भी चीन के लिए इस जगह को छोड़ना आसान नहीं है। पिछले एक दशक में ग्यिरोंग पोर्ट चीन और नेपाल के बीच मुख्य व्यापारिक रास्ता बन गया है। दोनों देशों के कुल व्यापार का करीब एक-तिहाई हिस्सा इसी रास्ते से होता है। हर साल 1.80 लाख से ज्यादा लोग भी यहां से दोनों देशों के बीच आते-जाते हैं। इससे पहले चीन-नेपाल के बीच झांगमू-कोदारी बॉर्डर रूट मुख्य रास्ता था। लेकिन 2015 के नेपाल भूकंप में यह रास्ता बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद ग्यिरोंग का महत्व बढ़ता गया। समस्या यह है कि झांगमू वाला रास्ता भी प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित नहीं है। 2016 में इसी इलाके में ग्लेशियल झील फटने से बाढ़ आई थी। यानी हिमालय में एक रास्ते से दूसरे रास्ते पर जाने से आपदा का खतरा खत्म नहीं होता। एक एक्सपर्ट ने इस स्थिति की तुलना ‘व्हैक-ए-मोल’ गेम से की है। यानी एक जगह खतरा पैदा होता है तो उससे बचने के लिए दूसरी जगह जाते हैं, लेकिन वहां कोई नया खतरा सामने आ जाता है। अब सिर्फ बाढ़ पर नजर रखना काफी नहीं इस घटना ने दिखा दिया कि हिमालय में अब किसी एक प्राकृतिक खतरे को देखकर तैयारी करना काफी नहीं है। पहले निगरानी व्यवस्था बाढ़, अचानक आने वाली बाढ़ या हिमस्खलन जैसे खतरों पर अलग-अलग नजर रखती थी। लेकिन इस बार खतरे एक के बाद एक जुड़े। पहले ग्लेशियर का हिस्सा टूटा, फिर बर्फ और चट्टानें नीचे आईं। देखते ही देखते ये मलबे और पानी की तेज धार में बदल गईं और कुछ ही मिनटों में नीचे के इलाकों में तबाही मचा दी। विशेषज्ञ इसे ‘कैस्केड ऑफ हैजर्ड्स’ यानी एक के बाद एक आने वाली आपदाओं की कड़ी कहते हैं। बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ऐसे में आपदाओं का यह सिलसिला और जटिल हो सकता है, जिसका पहले से अनुमान लगाना भी मुश्किल होगा। ICIMOD की विशेषज्ञ सस्वता सन्याल के मुताबिक, पहाड़ों में अब सिर्फ एक खतरे को ध्यान में रखकर तैयारी नहीं की जा सकती। यही इस आपदा की सबसे बड़ी विडंबना है। चीन ने पिछली बाढ़ से निपटने के लिए सेंसर और निगरानी व्यवस्था तो तैयार कर ली थी, लेकिन इस बार तबाही बाढ़ से पहले ही शुरू हो गई। ग्लेशियर का हिस्सा टूटा और उसे पकड़ने के लिए वहां कोई सिस्टम नहीं था। यानी चीन ने पिछली आपदा से सबक लिया था, लेकिन अगली आपदा ने खतरे का तरीका ही बदल दिया।

हिमालय में 7 मिनट में तबाही, चीन की तैयारी नाकाम:पिछली बार झील फटी थी, इस बार ग्लेशियर ही टूट गया

26 अगस्त को चीन-नेपाल सीमा पर हिमालय की एक घाटी में ऐसी तबाही आई, जिसमें 1200 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। हैरानी की बात ये थी कि चीन इस इलाके में ऐसी आपदा से निपटने की तैयारी पहले ही कर चुका था। 14 महीने पहले इसी इलाके में ग्लेशियर की एक झील फटने से भूस्खलन हुआ था। ट्रक, घर और एक पुल बह गए थे। इसके बाद चीन ने करीब छह महीने तक बॉर्डर पोर्ट बंद रखा और बाढ़ से बचाव का सिस्टम मजबूत किया। पानी के स्तर पर 24 घंटे नजर रखने लगी, तटबंध और बाढ़ रोधी दीवारें बनाई गईं और पानी का रास्ता बदलने के लिए नहरें तैयार की गईं। अधिकारियों और ग्रामीणों की ट्रेनिंग हुई, मॉक ड्रिल कराई गई और जुलाई में तैयारियों की समीक्षा भी हुई। यानी पिछली आपदा से सबक लेने में कोई कमी नहीं छोड़ी गई थी। फिर भी 26 अगस्त को कुछ ऐसा हुआ, जिसके लिए ये पूरा सिस्टम तैयार ही नहीं था। इस बार झील नहीं, ग्लेशियर टूटा इस बार बाढ़ किसी ग्लेशियल झील के फटने से नहीं आई। एक ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे आ गया। इसके साथ बर्फ, बड़े पत्थर और पानी इतनी तेजी से नीचे आए कि कुछ ही देर में ये सब सुनामी जैसी लहर में बदल गया। ग्यिरोंग पोर्ट कॉम्पलेक्स में पहुंचते ही इस लहर ने 27 इमारतों को तबाह कर दिया। इसके बाद ये तबाही नेपाल की ओर बढ़ गई। अधिकारियों के मुताबिक, ग्लेशियर का हिस्सा टूटने और ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुंचने के बीच सिर्फ छह-सात मिनट का समय था। इतनी कम अवधि में लोगों को चेतावनी देना और उन्हें सुरक्षित जगह पहुंचाना बेहद मुश्किल था। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ग्लेशियर का यह हिस्सा अचानक क्यों टूटा, इसकी पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं है। इसके पीछे ग्लोबल वार्मिंग के कारण पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने और चट्टानों के कमजोर होने जैसी वजहें हो सकती हैं। एक ही जगह बार-बार क्यों हो रही तबाही? इस आपदा ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। ग्यिरोंग पोर्ट जैसी बड़ी सीमा चौकी इतनी जोखिम वाली जगह पर क्यों बनाई गई? यह पोर्ट एक संकरी घाटी में उस जगह बना है, जहां ल्हेंडे खोला और त्रिशूली नदी मिलती हैं। दोनों नदियों में ग्लेशियरों का पानी आता है। इसी छोटी सी समतल जमीन पर पुल, कस्टम यार्ड, ड्राई पोर्ट और ट्रकों की पार्किंग है। यानी ऊपर पहाड़ों से पानी, बर्फ या मलबा नीचे आता है तो सबसे पहले यही इलाका उसकी चपेट में आता है। डिजास्टर मैनेजमेंट एक्सपर्ट सस्वता सन्याल के मुताबिक, 2025 में भी लोग इसी कस्टम यार्ड से बह गए थे और इस साल भी यह इलाका फिर तबाही की चपेट में आ गया। खतरनाक होने के बावजूद व्यापार के लिए जरूरी है ग्यिरोंग बार-बार प्राकृतिक आपदा झेलने के बाद भी चीन के लिए इस जगह को छोड़ना आसान नहीं है। पिछले एक दशक में ग्यिरोंग पोर्ट चीन और नेपाल के बीच मुख्य व्यापारिक रास्ता बन गया है। दोनों देशों के कुल व्यापार का करीब एक-तिहाई हिस्सा इसी रास्ते से होता है। हर साल 1.80 लाख से ज्यादा लोग भी यहां से दोनों देशों के बीच आते-जाते हैं। इससे पहले चीन-नेपाल के बीच झांगमू-कोदारी बॉर्डर रूट मुख्य रास्ता था। लेकिन 2015 के नेपाल भूकंप में यह रास्ता बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद ग्यिरोंग का महत्व बढ़ता गया। समस्या यह है कि झांगमू वाला रास्ता भी प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित नहीं है। 2016 में इसी इलाके में ग्लेशियल झील फटने से बाढ़ आई थी। यानी हिमालय में एक रास्ते से दूसरे रास्ते पर जाने से आपदा का खतरा खत्म नहीं होता। एक एक्सपर्ट ने इस स्थिति की तुलना ‘व्हैक-ए-मोल’ गेम से की है। यानी एक जगह खतरा पैदा होता है तो उससे बचने के लिए दूसरी जगह जाते हैं, लेकिन वहां कोई नया खतरा सामने आ जाता है। अब सिर्फ बाढ़ पर नजर रखना काफी नहीं इस घटना ने दिखा दिया कि हिमालय में अब किसी एक प्राकृतिक खतरे को देखकर तैयारी करना काफी नहीं है। पहले निगरानी व्यवस्था बाढ़, अचानक आने वाली बाढ़ या हिमस्खलन जैसे खतरों पर अलग-अलग नजर रखती थी। लेकिन इस बार खतरे एक के बाद एक जुड़े। पहले ग्लेशियर का हिस्सा टूटा, फिर बर्फ और चट्टानें नीचे आईं। देखते ही देखते ये मलबे और पानी की तेज धार में बदल गईं और कुछ ही मिनटों में नीचे के इलाकों में तबाही मचा दी। विशेषज्ञ इसे ‘कैस्केड ऑफ हैजर्ड्स’ यानी एक के बाद एक आने वाली आपदाओं की कड़ी कहते हैं। बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ऐसे में आपदाओं का यह सिलसिला और जटिल हो सकता है, जिसका पहले से अनुमान लगाना भी मुश्किल होगा। ICIMOD की विशेषज्ञ सस्वता सन्याल के मुताबिक, पहाड़ों में अब सिर्फ एक खतरे को ध्यान में रखकर तैयारी नहीं की जा सकती। यही इस आपदा की सबसे बड़ी विडंबना है। चीन ने पिछली बाढ़ से निपटने के लिए सेंसर और निगरानी व्यवस्था तो तैयार कर ली थी, लेकिन इस बार तबाही बाढ़ से पहले ही शुरू हो गई। ग्लेशियर का हिस्सा टूटा और उसे पकड़ने के लिए वहां कोई सिस्टम नहीं था। यानी चीन ने पिछली आपदा से सबक लिया था, लेकिन अगली आपदा ने खतरे का तरीका ही बदल दिया। —————————– नेपाल बाढ़, लोगों को 7:30 बजे खतरे का पता चला:अलर्ट डेढ़ घंटे बाद आया; आरोप- चीन ने नहीं चेताया नेपाल में 26 अगस्त की सुबह आई बाढ़ के बाद अलर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

गडकरी पूरे देश में चाहते हैं बाइक टैक्सी पर राज्यों के हाथ में चाबी! ऐसा हुआ तो 8 करोड़ लोगों को होने लगेगी टू-व्हीलर से कमाई

Bike Taxi Update: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने प्राइवेट टू-व्हीलर का इस्तेमाल सवारी ढोने यानी बाइक टैक्सी के रूप में करने की वकालत की है। उन्होंने राज्यों से अपील की है कि वे निजी मोटरसाइकिल और स्कूटर मालिकों को यात्रियों को ले जाने की अनुमति दें। गडकरी का तर्क है कि अगर ऐसा हुआ तो ग्रामीण इलाकों में करीब 8 करोड़ लोगों के लिए कमाई के नए मौके पैदा हो सकते हैं। वैसे आपको बता दें कि केंद्र सरकार भले ऐसा चाह ले लेकिन इसक बावजूद यह पूरी तरह से राज्यों पर निर्भर करता है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में बाइक टैक्सी चलाने की इजाजत देते हैं या नहीं।

राज्यों के पास क्यों है अंतिम फैसला?

महाराष्ट्र में सरकार के ‘सुरक्षा’ पायलट प्रोग्राम के शुभारंभ के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि, ‘हमने इसकी अनुमति दे दी है, लेकिन कुछ राज्य ऐसा नहीं कर रहे हैं। ट्रांसपोर्ट स्टेट सब्जेक्ट है। मैं उनसे ऐसा करने का आग्रह करूंगा क्योंकि इससे कई लोगों को आजीविका का साधन मिलेगा।’ Motor Vehicle Aggregator Guidelines, 2025 एक ऐसा फ्रेमवर्क देती है जिससे एग्रीगेटरों को पैसेंजर जर्नी के लिए नॉन-ट्रांसपोर्ट मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करने की अनुमति दे सकते हैं।

क्या आपकी अपनी बाइक बन सकती है टैक्सी?

हर जगह खुद ब खुद किसी प्राइवेट बाइक का इस्तेमाल टैक्सी के रूप में नहीं किया जा सकता है। अलग-अलग राज्यों में इसे लेकर अलग-अलग रूल हैं। इसे कर्नाटक और महाराष्ट्र के हिसाब से समझा जा सकता है। इस साल जनवरी में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा था कि मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट गाड़ियों के रूप में किया जा सकता है और अधिकारियों को पीले रंग की प्लेट रजिस्ट्रेशन और कॉन्ट्रैक्ट पैसेंजर्स कैरियर्स के रूप में काम करने के लिए परमिट मांगने वाले मालिकों के आवेदनों पर विचार करने का निर्देश दिया था। हालांकि राज्य सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा, इंश्योरेंस, महिलाओं की सेफ्टी और बाइक टैक्सियों के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क की कमी से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।

दूसरी ओर महाराष्ट्र ने 2025 में अपने बाइक-टैक्सी नियमों को नोटिफाइड कर दिया था। इसमें एग्रीगेटर्स, परमिट और ऑपरेटिंग कंडिशन को कवर करने वाले प्रावधान शामिल हैं। इस फ्रेमवर्क में ई-बाइक और स्कूटर भी शामिल हैं।

ट्रैफिक नियमों के लिए ‘नेगेटिव पॉइंट सिस्टम’ और ‘सुरक्षा’ कार्यक्रम

बाइक टैक्सी पर बात करने के साथ ही गडकरी ने भारत के सड़क सुरक्षा नियमों में एक और प्रस्तावित बदलाव की जानकारी दी है। मंत्रालय ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए एक नेगेटिव पॉइंट सिस्टम पेश करने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्तावित सिस्टम के तहत बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों के नेगेटिव पॉइंट जमा होंगे और दोबारा उल्लंघन करने वालों का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है। इस कदम का उद्देश्य जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार को बढ़ावा देना है।

आपको बता दें कि सुरक्षा नाम के पायलट कार्यक्रम का उद्देश्य राजमार्गों और खनन कार्यों में शामिल ड्राइवरों और श्रमिकों को मुफ्त चिकित्सा जांच, परामर्श देना है। यह पायलट प्रोजेक्ट एनएच 44 पर नागपुर से काम्टी तक 150 किलोमीटर के हिस्से और चंद्रपुर के खनन क्षेत्र को कवर करेगा। इसमें शुरुआती चरण में 10000 लोगों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

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भारत की जगह चीन से महंगी बिजली खरीद रहा बांग्लादेश:दोगुनी कीमत चुका रहा, फैसले के लेकर देश में विरोध

बांग्लादेश भारत से मिलने वाली सस्ती बिजली के बावजूद चीन से महंगी बिजली खरीद रहा है। ढाका के पास अमीनबाजार में लग रहे वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट से 42 MW बिजली 25 टका यानी करीब 19.25 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी। इसके लिए 25 साल का करार हुआ है। भारत से बांग्लादेश को करीब 11 टका यानी 8.50 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। चीन से मिलने वाली बिजली की कीमत भारत से दोगुने से भी ज्यादा है। 2 सितंबर को बीजिंग में हुए इस समझौते का बांग्लादेश में विरोध हो रहा है। बांग्लादेश ने भारत के 1 पैसे के चार्ज पर आपत्ति जताई थी भारत के केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने सीमा-पार बिजली लेनदेन और ग्रिड से जुड़े खर्च के लिए 1 पैसे प्रति यूनिट शुल्क प्रस्तावित किया था। बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) ने इसका विरोध किया। इसके बाद भारत ने शुल्क को घटाकर आधा पैसा प्रति यूनिट करने की बात कही। चीन के प्रोजेक्ट से कचरे की समस्या भी होगी कम अमीनबाजार का प्रोजेक्ट सिर्फ बिजली बनाने के लिए नहीं है। इसमें ढाका के कचरे का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। करीब 2.3 करोड़ आबादी वाले ढाका में रोजाना 8 हजार मीट्रिक टन कचरा निकलता है। वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से कचरे की समस्या कम करने के साथ बिजली भी पैदा होगी। बांग्लादेश इस समय बिजली की कमी और पावर कट की समस्या से जूझ रहा है। देश के सामने विदेशी मुद्रा का संकट भी है। बांग्लादेश के पावर सेक्टर में चीन का दखल बढ़ रहा चीन बांग्लादेश के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। वह तीस्ता नदी पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत बिजली से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। अमीनबाजार का वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट भी इसी बढ़ती भागीदारी का हिस्सा है। चीन की योजना बांग्लादेश के रास्ते म्यांमार तक भी ऊर्जा पहुंच बढ़ाने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक ढाका के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से म्यांमार को बिजली सप्लाई करने की तैयारी है। इस तरह अमीनबाजार प्रोजेक्ट का इस्तेमाल बांग्लादेश की बिजली जरूरत के साथ क्षेत्रीय ऊर्जा कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भी किया जाएगा। ———————– ये खबर भी पढ़ें… रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए:दुनिया में गेहूं-मक्का महंगा होने का खतरा; रूस का अनाज निर्यात 71% घटा रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। पूरी खबर पढ़ें…

Bank Holiday: कल शुक्रवार को इन जगहों पर बंद रहेंगे बैंक, जानिए RBI ने क्यों किया छुट्टियों का ऐलान, सितंबर हॉलिडे फुल लिस्ट

अगर आप 4 सितंबर यानी शुक्रवार के दिन बैंक में कोई काम कराने के बारे में सोच रहे हैं तो पहले यह जान लें कि उस दिन बैंक खुला है या बंद है। शुक्रवार को जन्माष्टमी का त्योहार है। इस मौके पर कई राज्यों में बैंकों में छुट्टी है। इस वजह से इन बैंकों की शाखाओं में कोई कामकाज नहीं होगा।

बैंकों में आरबीआई की गाइडलाइंस के हिसाब से होती है छुट्टी

बैंकों को छुट्टी के लिए आरबीआई की गाइडलाइंस का पालन करना पड़ता है। आरबीआई की गाइडलाइंस में क्षेत्र के हिसाब से छुट्टी का प्रावधान है। इसका मतलब है कि उत्तर भारत में मनाए जाने वाले त्योहार के मौके पर उत्तर भारत में बैंकों की शाखाएं बंद रहती हैं। इसी तरह दक्षिण भारत में मनाए जाने वाले त्योहार के मौके पर दक्षिण भारत में बैंकों की शाखाएं बंद रहती हैं।

इन राज्यों और शहरों में जन्माष्टमी पर बंद रहेंगे बैंक 

आरबीआई की छुट्टियों की लिस्ट के मुताबिक, 4 सितंबर यानी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में बैंक बंद रहेंगे। इसका मतलब है कि लखनऊ, कानपुर, नोएडा, देहरादून, भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में बैंकों की शाखाएं बंद रहेंगी। छोटे शहरों में ग्रामीण इलाकों में भी बैंक की शाखाएं बंद रहेंगी। जयपुर, अहमदाबाद, कोलकाता और रांची में भी जन्माष्टमी की छुट्टी बैंकों में रहेंगी। हालांकि, 5 सितंबर यानी शनिवार के बैंक की शाखाएं खुली रहेंगी। 6 सितंबर को रविवार के दिन बैंकों में छुट्टी रहेगी।

अभी बैंकों में हर रविवार और महीने में दो शनिवार छुट्टी रहती है

बैंकों में हर महीने रविवार को अवकाश रहता है। इस दिन बैंकों में कोई कामकाज नहीं होता है। हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को भी बैंक बंद रहते हैं। इसका मतलब है कि दूसरे और चौथे शनिवार को बैंकों में कोई कामकाज नहीं होता है। बैंक एंप्लॉयीज यूनियंस बैंकों में भी फाइव डे वर्किंग लागू करने की लंबे समय से मांग कर रहे हैं।

सितंबर में त्योहार और दूसरी वजह से 14 दिन बंद रहेंगे बैंक

सितंबर में बैंक करीब 14 दिन बंद रहेंगे। इसमें छह सप्ताहांत में होने वाली रेगुलर छुट्टियां हैं। बाकी 8 दिन की छुट्टी अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से त्योहारों और लोकल इवेंट्स की वजह से होगी। 14 सितंबर यानी सोमवार को गणेश चतुर्थी के मौके पर कई राज्यों और क्षेत्रों में बैंकों में छुट्टी रहेगी। इनमें बेलापुर, भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई, नागपुर, पणजी और विजयवाड़ा शामिल है।

इन राज्यों और स्थानों में सितंबर में खास दिन बंद रहेंगे बैंक 

15 सितंबर यानी मंगलवार को भी अहमदाबाद, भुवनेश्वर और पणजी में संवत्सरी, नुआखाई और गणेश चतुर्थी की छुट्टी रहेगी। 21 सितंबर को श्रीमंता शंकरदेव के जन्मोत्सव और श्री नारायण गुरु समाधि के मौके पर गुवाहाटी, कोच्चि और तिरुवनंतपुरम में छुट्टी रहेगी। 22 सितंबर को कर्मा पूजा के मौके पर रांची में बैंकों में छुट्टी रहेगी। 23 सितंबर को महाराजा हरि सिंह जी के जन्मोत्सव पर जम्मू में बैंक बंद रहेंगे। 25 सितंबर को इंद्राजात्रा के मौके पर गंगटोक में बैंकों में छुट्टी रहेगी।

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इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम सुविधाएं छुट्टियों के दौरान भी काम करेंगी

बैंकों की इंटरनेट बैंकिंग सुविधाएं छुट्टियों के दौरान भी काम करती रहेंगी। इसके अलावा बैंकों के एटीएम भी खुले रहेंगे। इससे ग्राहकों को दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। आजकल बैंकों की ज्यादातर सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध हो गई हैं।

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पुरी जगन्नाथ मंदिर के बैंक खाते में जमा है ₹1,912 करोड़, सामने आया कमाई और खर्च का पूरा ब्योरा

Shree Jagannath Temple: अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में गड़बड़ी के आरोपों के बीच, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने बुधवार को मंदिर की बैंक में जमा रकम की जानकारी सार्वजनिक की। प्रशासन के मुताबिक, मंदिर के बैंक खातों में अब तक करीब 1,912 करोड़ रुपये जमा हैं।

TOI के मुताबिक, सरकार द्वारा संचालित SJTA ने एक लिखित बयान में कहा कि मंदिर के आर्थिक मामलों का प्रबंधन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाता है, जिसमें व्यवस्थित अकाउंटिंग और नियमित ऑडिट की प्रक्रियाएं शामिल हैं। SJTA के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार पाधी ने कहा कि जवाबदेही और जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूत व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

SJTA के अनुसार, मंदिर कई स्रोतों से कमाई करता है, जैसे भक्तों का दान और चढ़ावा, मंदिर की अपनी खदानों से होने वाली कमाई, फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज, जमीन के लेन-देन से होने वाली आय और सरकारी ग्रांट।

इसके अलावा, कमाई का एक तय हिस्सा ‘कॉर्पस फंड’ के तौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जाता है, जबकि एक और हिस्सा ‘फाउंडेशन फंड’ के लिए अलग किया जाता है। बाकी पैसा मंदिर के फंड अकाउंट में रखा जाता है। मंदिर के फंड का इस्तेमाल इस प्राचीन मंदिर की पूजा-पाठ, धार्मिक सेवाओं और प्रशासनिक कामकाज के रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए किया जाता है। अगर कोई अतिरिक्त पैसा बचता है, तो उसे बाद में फिक्स्ड डिपॉजिट में बदल दिया जाता है ताकि भगवान की संपत्ति को सुरक्षित और मजबूत बनाया जा सके।

बता दें कि 31 अगस्त तक, SJTA ने लगभग 1,912 करोड़ रुपये की बैंक संपत्ति जमा कर ली है। इसमें कॉर्पस, फाउंडेशन और मंदिर की जमा राशि जैसे तीन मुख्य मदों के तहत रखे गए लगभग 1,811 करोड़, 9 लाख और 58 हजार रुपये शामिल हैं। इस आंकड़े में जून 2024 में राज्य सरकार द्वारा कॉर्पस में दिए गए 500 करोड़ रुपये का योगदान भी शामिल है।

अरबिंद कुमार पाढ़ी ने कहा, “मंदिर के पास अभी सेविंग्स, करंट और फ्लेक्सी अकाउंट्स में लगभग 100 करोड़, 70 लाख, 66 हजार और 868 रुपये हैं। लोगों का भरोसा बनाए रखने और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, मंदिर की हुंडी से इकट्ठा हुई रकम की गिनती हर दिन की जाती है। इसकी जानकारी तुरंत ऑफिशियल नोटिस बोर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाई जाती है, ताकि दुनिया भर के भक्त इसे देख सकें।”

उन्होंने यह भी बताया कि इस साल 15 जुलाई को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा डिजिटल हुंडी ‘समर्पण’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किए जाने के बाद से, भक्तों ने ऑनलाइन डोनेशन सिस्टम के जरिए 56.7 लाख रुपये का योगदान दिया है।

हालांकि, मंदिर के फंड के गलत इस्तेमाल का कोई आरोप अभी तक सामने नहीं आया है, लेकिन पुलिस सूत्रों का कहना है कि पिछले 25 सालों में मंदिर में कैश, गहनों और मूर्तियों की चोरी की कम से कम सात घटनाएं हुई हैं।

ऐसे ही एक मामले में, मंदिर के क्लर्क प्रदीप कुमार महापात्रा को 7 फरवरी, 2024 को दान की गिनती के दौरान CCTV सर्विलांस के जरिए 31,940 रुपये नकद चुराते हुए पकड़े जाने का आरोप है। इससे पहले, 15 जुलाई, 2023 को मंदिर के चपरासी सुशांत कुमार राउतराय को गिनती की प्रक्रिया के दौरान 800 रुपये चुराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

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