इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उनके परिवार को निशाना बनाया और उनके दो बेटों में से एक की हत्या की कोशिश की। उन्होंने यह बात सरकार समर्थक चैनल 14 को फोन पर दिए इंटरव्यू में कही। नेतन्याहू चुनाव से पहले अपने परिवार और दूसरे राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बात कर रहे थे। नेतन्याहू ने कहा, उन्हें दी जा रही सुरक्षा कोई ऐशोआराम नहीं है। नेतन्याहू के दो बेटे याइर और अवनर हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनके दोनों बेटों में से किसे निशाना बनाया गया था। हत्या की कोशिश कब और कैसे की गई। नेतन्याहू अगला चुनाव हारे, तब भी मिलेगी सुरक्षा दरअसल इजराइल में कई महीनों से नेतन्याहू के परिवार के सदस्यों और राजनीतिक नेताओं को दी जा रही सुरक्षा पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद इजराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने नेतन्याहू की पत्नी सारा और उनके दोनों बेटों के लिए सुरक्षा बढ़ाने को मंजूरी दी है। यह सुरक्षा उन्हें नेतन्याहू के आगामी चुनाव हारने की स्थिति में भी मिलेगी। अगला चुनाव दो महीने में है। अवनर इजराइल में रहते हैं, जबकि याइर पिछले कुछ सालों से ज्यादातर मियामी में रह रहे हैं। याइर दक्षिणपंथी विचारों वाली अपनी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कथित हत्या की साजिश की जानकारी इजराइल के सुरक्षा अधिकारियों को कई महीनों से थी। हालांकि, सैन्य सेंसर ने इसके प्रकाशन पर रोक लगा दी थी। नेतन्याहू परिवार की सुरक्षा पर विवाद क्या है इजरायल में प्रधानमंत्री और उनके परिवार को सुरक्षा मिलती है। विवाद तब बढ़ा, जब सारा नेतन्याहू और उनके दोनों वयस्क बेटों याएर व अवनर की सुरक्षा लंबे समय तक जारी रखने का फैसला हुआ। जुलाई 2026 में एक मंत्रीस्तरीय समिति ने नेतन्याहू और सारा को जीवनभर, जबकि दोनों बेटों को कम से कम 5 साल सुरक्षा देने का फैसला किया। आलोचकों का कहना है कि सुरक्षा की अवधि पहले से तय करने के बजाय वास्तविक खतरे के आधार पर समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। बड़ा विवाद याइर नेतन्याहू की विदेश में सुरक्षा को लेकर है। वह अमेरिका के मियामी में रहते हैं, फिर भी उन्हें शिन बेट के सुरक्षाकर्मी मिलते हैं। 2018-2023 के बीच याएर, अवनर और सारा की सुरक्षा पर करीब 32 मिलियन शेकेल खर्च होने की जानकारी सामने आई थी। याइर को विदेश में निजी छुट्टियों के दौरान भी सुरक्षा मिलने पर सवाल उठे। आलोचकों का कहना है कि दोनों बेटे वयस्क हैं और विदेश में रहने वाले बेटे की महंगी सुरक्षा का खर्च इजरायली करदाताओं पर पड़ रहा है। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन: कहा- जो देश बिजनेस करेंगे, उन पर भी कार्रवाई अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है। इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग के क्षेत्र शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है। पूरी खबर पढ़ें…
ग्वालियर में एक शख्स ने रील पर व्यूज पाने के लिए कार पर 3400 किस के निशान बनवा दिए। ‘किसिंग कार’ का वीडियो वायरल होने के बाद रील पर 55 लाख व्यूज मिले। हालांकि पुलिस ने रीलबाज की खुमारी उतार दी।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसे देशों को अमेरिकी डॉलर की वित्तीय व्यवस्था से बाहर करने पर विचार कर सकता है। बेसेंट के मुताबिक, अमेरिका का लक्ष्य ईरान के लिए राजस्व के सभी संभावित स्रोतों को रोकना है। उन्होंने पड़ोंसी देशों से ईरान के साथ आर्थिक संबंध खत्म करने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जाएंगे। हालांकि, चीन, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं। खबर लगातार अपडेट की जा रही है।

डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए नए H-1B वीजा आवेदन पर 1 लाख डॉलर से अधिक की फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी Department of Homeland Security (DHS) की ओर से जारी प्रस्ताव के तहत यह फीस बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर की जा सकती है। सोमवार को Federal Register में प्रकाशित नोटिस के मुताबिक, यह फीस उन सभी H-1B वीजा कैप-सब्जेक्ट आवेदनों पर लागू होगी, जिनमें एडवांस्ड डिग्री यानी उच्च शिक्षा प्राप्त उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध छूट वाली श्रेणी भी शामिल है।
H-1B फीस बढ़ाने का नया प्रस्ताव
DHS का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब H-1B वीजा फीस को लेकर अमेरिकी अदालतों में कानूनी विवाद चल रहा है। करीब एक महीने पहले एक संघीय अपीलीय अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जिला जज के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसने ट्रंप प्रशासन की 1 लाख डॉलर H-1B फीस लगाने की योजना को पलट दिया था।
सितंबर 2025 में ट्रंप ने एक व्यापक घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत H-1B वीजा पर सालाना 1 लाख डॉलर की फीस लगाने का प्रावधान किया गया था। इसी दौरान अमीर लोगों के लिए अमेरिकी नागरिकता की राह के तौर पर 10 लाख डॉलर के ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा की योजना भी पेश की गई थी।
हालांकि, बाद में एक संघीय अदालत ने 1 लाख डॉलर की H-1B फीस को रद्द कर दिया था। वहीं, ‘गोल्ड कार्ड’ कार्यक्रम एक अलग पहल है।
भारतीय प्रोफेशनल्स पर सबसे ज्यादा असर की आशंका
नई प्रस्तावित फीस का सबसे ज्यादा असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ने की आशंका है। इसकी वजह यह है कि H-1B वीजा धारकों में भारतीय नागरिकों की संख्या काफी बड़ी है। H-1B वीजा मुख्य रूप से ऐसे विशेषज्ञ पेशों (Specialty Occupations) के लिए जारी किया जाता है, जिनमें आमतौर पर कम से कम स्नातक डिग्री या उसके समकक्ष योग्यता की आवश्यकता होती है।
यह वीजा लंबे समय से अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनियों और IT सर्विसेज कंपनियों के लिए विदेशी कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करने का प्रमुख माध्यम रहा है। हालांकि, आलोचकों का आरोप है कि कुछ कंपनियां H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम लागत वाले विदेशी श्रमिकों तक पहुंच बनाने के लिए करती हैं।
H-1B वीजा के लिए होता है लॉटरी सिस्टम
परंपरागत रूप से जब H-1B वीजा के लिए आवेदन वार्षिक सीमा से अधिक हो जाते थे, तो कैप-सब्जेक्ट वीजा आवेदनों का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाता था। हालांकि, हाल के वर्षों में H-1B वीजा चयन प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं।
Amazon, Infosys और TCS समेत ये कंपनियां बड़ी नियोक्ता
H-1B कार्यक्रम के तहत Amazon लगातार सबसे बड़े नियोक्ताओं में शामिल रही है। इसके अलावा Cognizant, Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Microsoft और Google जैसी कंपनियां भी H-1B वीजा के प्रमुख नियोक्ताओं में शामिल हैं। अमेरिका का California राज्य भी H-1B मंजूरियों के मामले में प्रमुख राज्यों में बना हुआ है। इसकी बड़ी वजह राज्य में टेक्नोलॉजी कंपनियों की भारी मौजूदगी है।
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नए प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलने पर अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे विदेशी कुशल कर्मचारियों और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों की लागत में बड़ा इजाफा हो सकता है। भारतीय IT प्रोफेशनल्स और अमेरिकी टेक कंपनियां इस प्रस्ताव से सबसे ज्यादा प्रभावित पक्षों में शामिल हो सकती हैं।
El Nino Impact: भारत में इस साल करीब दो दशकों का सबसे कमजोर मानसून रह सकता है। मौसम विभाग के दो वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, इस साल मानसून सीजन खत्म होने तक बारिश लंबी अवधि के औसत से करीब 15 फीसदी कम रहने का अनुमान है। अगर ऐसा होता है तो 2009 के बाद यह सबसे कम बारिश वाला मानसून होगा।
वहीं, कमजोर मानसून का सीधा असर देश की खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फसलों की पैदावार घट सकती है, खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं और गांवों में लोगों की आमदनी पर भी दबाव पड़ सकता है। बता दें कि भारत में सालभर होने वाली कुल बारिश का करीब 70 फीसदी हिस्सा मानसून से ही मिलता है, इसलिए अच्छी बारिश खेती के लिए बेहद जरूरी है।
कपास-सोयाबीन की पैदावार पर पड़ेगा असर
अब अगर सितंबर के महत्वपूर्ण महीने में अच्छी बारिश नहीं हुई तो कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों जैसी ग्रीष्म ऋतु में बोई जाने वाली फसलों की पैदावार कम हो सकती है, साथ ही गेहूं और रेपसीड जैसी शीतकालीन ऋतु में बोई जाने वाली फसलों के लिए आवश्यक मिट्टी की नमी भी कम हो सकती है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हम मानसून की बारिश पर अल नीनो का प्रभाव देख रहे हैं। सितंबर में यह प्रभाव गंभीर होने की संभावना है और बारिश में दो अंकों की कमी देखने को मिल सकती है।”
उन्होंने कहा कि जून-सितंबर के मौसम में भारत में औसत से 15% कम, यानी सामान्य से 85% कम बारिश हो सकती है, जो 2009 के बाद सबसे कम बारिश होगी। यह मौसम विभाग के शुरुआती पूर्वानुमान में अनुमानित 8% की कमी से लगभग दोगुनी होगी।
उन्होंने आगे कहा कि कुछ पूर्वी राज्यों को छोड़कर, देश के अधिकांश हिस्सों में सितंबर में औसत से कम बारिश होने की संभावना है, जिससे मौसमी कमी और बढ़ जाएगी।
हालांकि, IMD इस महीने के अंत तक सितंबर की बारिश को लेकर अपना आधिकारिक पूर्वानुमान जारी कर सकता है।
समय से पहले लौट सकता है मानसून
मौसम विभाग के एक अन्य सूत्र ने आधिकारिक नियमों के अनुसार नाम न बताने की शर्त पर कहा कि यदि कोई नई मौसम प्रणाली विकसित नहीं होती है, तो इस साल मानसून अगले महीने देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से सामान्य से कुछ दिन पहले ही लौटना शुरू कर सकता है।
गौरतलब है कि आमतौर पर मानसून जून में दस्तक देता है और 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से वापस लौटना शुरू करता है। इसके बाद अक्टूबर के मध्य तक पूरे देश से मानसून की विदाई हो जाती है।
उन्होंने बताया कि अल नीनो मजबूत हो रहा है और सितंबर में इसके और तीव्र होने की संभावना है, जिससे भारत में वर्षा कम हो सकती है।
अल नीनो क्या है?
अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से गर्म रहता है। यह वैश्विक मौसम पैटर्न को बाधित करता है और दक्षिण-पूर्व एशिया और अन्य क्षेत्रों में शुष्क परिस्थितियां ला सकता है।
पिछले वर्षों में भारत में अल नीनो वाले ज्यादातर सालों में सामान्य से कम बारिश हुई है। कई बार स्थिति इतनी गंभीर रही कि सूखे की वजह से फसलें बर्बाद हो गईं और सरकार को कुछ अनाज के निर्यात पर रोक या प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाने पड़े।
इस साल भी मानसून की शुरुआत से अब तक भारत में सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश हुई है। 1 जून से शुरू हुए मानसून सीजन में जून में बारिश 35.4 फीसदी कम रही। इसके बाद जुलाई में बारिश सामान्य से 1 फीसदी ज्यादा हुई, जिससे थोड़ी राहत मिली। हालांकि अगस्त में मानसून एक बार फिर कमजोर पड़ गया और अब तक इस महीने में सामान्य से 15 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में शामिल हो सकते हैं। यह उनका 7 साल बाद भारत का पहला दौरा होगा। भारत 12-13 सितंबर को BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा। रॉयटर्स के मुताबिक, जिनपिंग के साथ करीब 400 अधिकारियों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल आ सकता है। जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। तब उनके साथ 200 से कम अधिकारी थे। जिनपिंग से बातचीत में सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा जिनपिंग के भारत दौरे की तैयारियों में LAC पर शांति और सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में है। दोनों देश सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर बात कर रहे हैं, जिससे किसी सैन्य घटना या तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर न पड़े। व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई भी एजेंडे में भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है भारत इस साल BRICS की कमान भारत के पास है। BRICS दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया भी शामिल हैं। भारत की अध्यक्षता में पूरे साल अलग-अलग शहरों में बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और कई स्तर की चर्चाएं हो रही हैं। भारत का फोकस ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद से निपटने और सप्लाई चेन मजबूत करने पर है। यानी BRICS को सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश और विकास के बड़े मंच के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… रूसी राष्ट्रपति पुतिन सितंबर में भारत आ सकते हैं: बोले- मोदी से मुलाकात जल्द रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में शामिल हो सकते हैं। मॉस्को में सोमवार को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जल्द मुलाकात की उम्मीद जताई। पूरी खबर पढ़ें…

देश में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। एक साल में खुदरा प्याज की कीमतों में 59 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। कीमतों पर लगाम लगाने और बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने अब महाराष्ट्र के नासिक से प्रमुख खपत वाले शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए समर्पित रेलवे रेक यानी ‘कांदा एक्सप्रेस’ (Kanda Express) की सप्लाई बढ़ा दी है। उपभोक्ता मामलों की सचिव के मुताबिक इस कदम का उद्देश्य बाजार में प्याज की आपूर्ति बढ़ाना और मौसमी तेजी के कारण बढ़ रही कीमतों को नियंत्रित करना है।
एक साल में 59% महंगा हुआ प्याज
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 24 अगस्त 2026 को 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। एक साल पहले इसी दिन यह कीमत 27.37 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यानी खुदरा कीमत में करीब 59 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, प्याज का औसत थोक भाव भी करीब 68 फीसदी बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलो हो गया है, जो एक साल पहले 21.23 रुपये प्रति किलो था।
दिल्ली समेत बड़े शहरों में क्या है प्याज का भाव?
सोमवार को प्रमुख शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें इस प्रकार रहीं:
- चेन्नई : 60 रुपये प्रति किलो, पिछले साल 33 रुपये
- दिल्ली : 55 रुपये प्रति किलो, पिछले साल 35 रुपये
- कोलकाता : 53 रुपये प्रति किलो
सरकार का कहना है कि कीमतों में तेजी को देखते हुए बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ाई जा रही है।
इन 5 शहरों में पहुंचेगा ‘कांदा एक्सप्रेस’ का प्याज
निधि खरे ने बताया कि शुरुआत में प्याज की सप्लाई पांच प्रमुख खपत केंद्रों—चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी में की जाएगी। बाजार की जरूरत के अनुसार बाद में अन्य शहरों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। नासिक में रखे गए प्याज के बफर स्टॉक को विशेष रेलवे रेक के जरिए बड़ी मात्रा में इन शहरों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके बाद इसे चुनिंदा शहरों के थोक और खुदरा बाजारों में वितरित किया जाएगा।
35 रुपये किलो में मिलेगा प्याज
सरकार के मुताबिक, NCCF और NAFED के माध्यम से खुदरा बाजारों में प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जाएगा। इससे बाजार में बढ़ी हुई कीमतों को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की जाएगी। सरकार प्याज की कीमतों पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नासिक की मंडियों में प्याज के भाव दिल्ली से ज्यादा चल रहे हैं, जबकि सामान्य स्थिति में ऐसा नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, इससे बाजार में कार्टेलाइजेशन और सट्टेबाजी की आशंका दिखाई देती है।
क्या है प्याज का बफर स्टॉक?
प्याज का बफर स्टॉक केंद्र सरकार का रणनीतिक भंडार है। इसका उद्देश्य आपूर्ति कम होने या कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के समय बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित करना है। सरकार मुख्य रूप से NAFED और NCCF जैसी एजेंसियों के माध्यम से प्याज की खरीद करती है। इसे Price Stabilisation Fund के तहत जमा किया जाता है और जरूरत के अनुसार चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारा जाता है। चालू वर्ष के लिए सरकार के पास 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक है, जो मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ते हैं प्याज के दाम?
आमतौर पर अगस्त और सितंबर में प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। इसके पीछे त्योहारी मांग में बढ़ोतरी, मौसम से जुड़ी समस्याएं, सप्लाई चेन में बदलाव और खपत के पैटर्न में परिवर्तन जैसे कई कारण होते हैं। सरकार की ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश से आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।

तमिलनाडु में मुफ्त LPG सिलेंडर को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार पर चुनावी वादे से पीछे हटने का आरोप लगाया है। BJP का कहना है कि चुनाव के दौरान सभी परिवारों को साल में 6 मुफ्त LPG सिलेंडर देने का वादा किया गया था, लेकिन अब सरकार ने 3 सिलेंडर तक सीमित योजना का ऐलान किया है। बीजेपी ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की ओर से घोषित ‘अन्नपूर्णी सुपर सिक्स LPG योजना’ को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने चुनावी वादे को कम कर दिया है।
BJP का आरोप है कि चुनाव के दौरान जिस योजना का दायरा सभी परिवारों तक रखा गया था, उसे अब आय सीमा और सिलेंडरों की संख्या के आधार पर सीमित कर दिया गया है। वहीं, सरकार की नई योजना के तहत पात्र परिवारों को सीधे बैंक खाते में आर्थिक लाभ देने की बात कही गई है।
आने वाले दिनों में LPG सिलेंडर योजना तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकती है। भाजपा ने कहा कि चुनाव के दौरान सरकार ने हर परिवार को एक साल में छह मुफ्त खाना पकाने वाले गैस सिलेंडर देने का वादा किया था। लेकिन अब नई योजना के तहत साल में केवल तीन LPG सिलेंडर का लाभ दिया जाएगा।
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उन्होंने यह भी कहा कि योजना का लाभ सभी परिवारों को नहीं मिलेगा। इसके लिए परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपए से कम होना जरूरी है। भाजपा ने सवाल उठाया कि सरकार ने चुनावी वादे की तुलना में सिलेंडरों की संख्या और लाभार्थियों की संख्या दोनों क्यों कम कर दी हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव के दौरान उनका वादा क्या था? घोषणापत्र में छह सिलेंडर प्रति वर्ष और सभी परिवारों को देने की बात थी। अब वे कह रहे हैं कि केवल तीन सिलेंडर मिलेंगे और वह भी पोंगल से। आपने तमिलनाडु की जनता को क्यों धोखा दिया?

मणिपुर के सेनापति जिले में सोमवार को दो गुटों के बीच हुई गोलीबारी और आगजनी की घटनाओं के बाद तनाव बढ़ गया। गोलीबारी में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का एक जवान घायल हो गया। इस दौरान कई घरों को भी आग के हवाले कर दिया गया। घटना के विरोध में स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया।
रात में घर में लगाई आग
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, कांगपोकपी जिले के ताफू कुकी गांव में सोमवार तड़के करीब 2.30 बजे उपद्रवियों ने एक घर में आग लगा दी। अधिकारी ने बताया कि कांगपोकपी में आगजनी की घटना के बाद सेनापति जिले के नागा ताफू इलाके में सुबह करीब 4 बजे कई घरों में आग लगा दी गई।
गोलीबारी में CRPF जवान घायल
इसके बाद सुबह करीब 9:20 बजे ताफू नगा इलाके में दो गुटों के बीच गोलीबारी हो गई। इस दौरान CRPF का एक जवान घायल हो गया। घायल जवान को इलाज के लिए सेनापति जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों के मुताबिक उसकी हालत अब खतरे से बाहर है।
सेनापति गेट पर प्रदर्शन, हाईवे पर यातायात प्रभावित
सेनापति में आगजनी की घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में लोग सेनापति गेट पर जमा हो गए और राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) पर टायर समेत अन्य सामान जलाकर सड़क जाम कर दी। इसके कारण हाईवे पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। स्थिति को देखते हुए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस और सुरक्षाबलों को तैनात कर हालात पर नजर रखी जा रही है।
2023 से जारी है मैइती-कुकी संघर्ष
मणिपुर में मैइती और कुकी-जो समुदायों के बीच मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर राज्य में शांति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
दोषियों की पहचान की मांग
ताफू कुकी ग्राम प्राधिकरण ने घटना में संपत्ति को हुए नुकसान की कड़ी निंदा की है। ग्राम प्राधिकरण ने प्रशासन से आगजनी और नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान 24 घंटे के भीतर करने की मांग की है।
Stocks to Watch: मंगलवार, 25 अगस्त के कारोबारी सत्र में कई कंपनियों के शेयर खबरों की वजह से फोकस में रह सकते हैं। इनमें डील, बड़े ऑर्डर, OFS, फंड जुटाने और मैनेजमेंट बदलाव से जुड़ी खबरें शामिल हैं। आइए जानते हैं किन 12 शेयरों पर खास नजर रहेगी।
Hindustan Copper
सरकारी कॉपर कंपनी Hindustan Copper में सरकार OFS के जरिए 6% तक हिस्सेदारी बेच सकती है। इसमें 3% की बेस हिस्सेदारी और 3% का ग्रीन-शू ऑप्शन शामिल है। OFS का फ्लोर प्राइस ₹514 प्रति शेयर रखा गया है।
TCS
टाटा ग्रुप की आईटी कंपनी TCS ने Porsche AG की 100% हिस्सेदारी वाली MHP को खरीदने की मंजूरी दी है। यह सौदा करीब 320 मिलियन यूरो का है। इसके अलावा Porsche ने TCS और MHP के साथ 5 साल का 1.25 बिलियन यूरो का समझौता किया है।
Suzlon Energy
विंड एनर्जी कंपनी Suzlon Energy आंध्र प्रदेश में 1,325 MW के नए विंड प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना बना रही है। ये प्रोजेक्ट अनंतपुर जिले के Rayadurg विधानसभा क्षेत्र में लगाए जाएंगे। इससे राज्य में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत हो सकती है।
ICICI Bank
प्राइवेट सेक्टर बैंक ICICI Bank ने अपने IFSC Banking Unit के जरिए 5 साल के $1 बिलियन के सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स की कीमत तय की है। इन डेट सिक्योरिटीज को S&P Global Ratings ने ‘BBB’ रेटिंग दी है।
Ceigall India
इंफ्रास्ट्रक्चर और रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी Ceigall India को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से करीब ₹704.70 करोड़ का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर अरुणाचल प्रदेश में Frontier Highway के निर्माण से जुड़ा है।
Lenskart
आईवियर और रिटेल कंपनी Lenskart में अगले 2-3 दिनों में करीब ₹2,800-2,900 करोड़ की ब्लॉक डील की खबर है। सूत्रों के मुताबिक Alfa अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच सकता है। Alfa के पास कंपनी में करीब 3.4% हिस्सेदारी बताई गई है।
UCO Bank
सरकारी बैंक UCO Bank के बोर्ड ने 1 बिलियन डॉलर तक रकम जुटाने की मंजूरी दी है। बैंक इस रकम का इस्तेमाल अपनी जरूरतों और कारोबार को आगे बढ़ाने में कर सकता है।
Afcons Infrastructure
इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Afcons Infrastructure को Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority से जुड़े मामले में ₹335.50 करोड़ का Arbitral Award मिला है। मध्यस्थता प्रक्रिया के बाद फैसला कंपनी के पक्ष में आया है।
Coal India
सरकारी कोयला कंपनी Coal India ने सिंगापुर में अपनी नई Wholly Owned Subsidiary बनाई है। इसका नाम CIL Global है। यह कंपनी दूसरे देशों में Critical Minerals से जुड़े कारोबारी अवसर तलाशेगी।
Great Eastern Shipping
शिपिंग कंपनी Great Eastern Shipping के बोर्ड की 27 अगस्त को बैठक होगी। इसमें कंपनी के शेयर बायबैक के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। फिलहाल यह सिर्फ प्रस्ताव पर विचार करने की जानकारी है। अंतिम फैसला बोर्ड की बैठक में होगा।
HEG
ग्रेफाइट और इलेक्ट्रिकल कार्बन प्रोडक्ट कंपनी HEG ने मैनेजमेंट में बदलाव किया है। Riju Jhunjhunwala को 1 सितंबर 2026 से CEO बनाया गया है। वहीं Neha Rajvanshi को CFO नियुक्त किया गया है। दोनों नियुक्तियों के कारण शेयर पर नजर रह सकती है।
Brigade Hotel Ventures
हॉस्पिटैलिटी कंपनी Brigade Hotel Ventures ने Vinay Gupta को नया CEO नियुक्त किया है। यह नियुक्ति शेयर बाजार बंद होने के बाद सामने आई। मैनेजमेंट में बदलाव के बाद निवेशकों की नजर कंपनी की आगे की रणनीति पर रहेगी।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।





