Tata Sierra EV launched at Rs 18.79 lakh

tata sierra ev on stage

Tata Motors has launched the Sierra EV at a starting price of Rs 18.79 lakh. The electric SUV arrives just over seven months after the ICE-powered Sierra, and serves as a more direct rival to the Mahindra BE 6, Maruti Suzuki e Vitara, Vinfast VF6, Hyundai Creta Electric, and MG ZS EV than the Curvv EV, which was Tata’s prior contender for this segment.

Tata Sierra EV price and variants

Tata Sierra EV price list (Rs, lakh)

Trim63kWh RWD75kWh RWD75kWh AWD
Pure18.79
Pure S19.99
Adventure20.9922.19
Empowered22.7923.79
Empowered A24.7925.99

Tata Sierra EV battery and range

63kWh and 75kWh battery options

Built on the same Acti.ev+ architecture as the Tata Harrier EV, the Sierra EV borrows the larger SUV’s TiDAL E&E architecture. Battery options comprise 63kWh and 75kWh units, both of which get a single rear-mounted motor (RWD) as standard, with the larger pack additionally offering a dual-motor AWD layout as well, which makes 504Nm. With Boost Mode enabled, the Sierra EV AWD accelerates from 0-100kph in a claimed 5.8 seconds.

The Sierra EV AWD also comes with off-road-centric features like six terrain modes (Normal, Grass/Snow, Mud/Gravel, Sand, Rock Crawl, and Custom), low-speed cruise control, and a 540-degree camera (360-degree surround with underfloor view.

Coming to MIDC-certified range, the Sierra EV claims up to 665km for its 75kWh variants and 565km for the 63kWh versions. Tata also boasts a range top-up of up to 263km in 15 minutes when using a 120kW DC fast charger, with a 20-80 percent charge taking around 26 minutes. Like the rest of Tata’s EV line-up, the Sierra EV also comes with a lifetime battery warranty, which actually just refers to the 15-year period from the date of registration.

Tata Sierra EV exterior design

Mostly similar to the ICE Sierra on the outside

As is the case with Tata’s electric cars, the Sierra EV looks largely similar to its ICE counterpart, but with minor distinctions. The front end of the Sierra EV ditches the full-width blacked-out section between the light bar and headlamps that the ICE version has, and it doesn’t sport ‘SIERRA’ lettering above the Tata emblem too.

Moreover, the Sierra EV’s front bumper design is different, with much more gloss black trim. The side profile and rear end of the Sierra EV are identical to those of its ICE sibling, save for EV-specific badging and lettering. As for ground clearance, the Sierra EV is rated at 205mm.

Tata Sierra EV interior and features

Same feature-loaded and spacious interior layout as its ICE counterpart

Even on the inside, the Sierra EV is identical in layout to the ICE version, but with slight variances in colour scheme. The Sierra EV also claims the same 622-litre boot space (measured up to the roof) as that of the ICE Sierra – when measured up to the parcel shelf, the boot space is 450 litres. Total luggage space with the rear seats folded stands at 1,257 litres.

Depending on the variant, the Sierra EV offers features like a triple-screen setup, ambient lighting, a 12-speaker JBL Black sound system, dual-zone climate control, a panoramic sunroof, Boss mode, cabin air purifier, powered and ventilated front seats, a powered tailgate, Level 2 ADAS, connected car tech, auto park assist, a heads-up display, a digital key, over-the-air (OTA) updates, 6 airbags as standard, V2L and V2V functionality, and more. It even borrows the summon mode and DrivePay in-car payment feature from the Harrier EV.

All prices are ex-showroom, India.

Vande Bharat यात्रियों के लिए खुशखबरी! अब आखिरी मिनट में भी मिलेगा कन्फर्म टिकट…जान लें ये नया नियम

अब वंदे भारत एक्सप्रेस और दूसरी रिजर्व ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। भारतीय रेलवे ने नया नियम लागू किया है, जिसके तहत रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद भी ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक खाली सीटों की बुकिंग की जा सकेगी। रेलवे का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य ट्रेनों में खाली सीटों का बेहतर इस्तेमाल करना है। इससे उन यात्रियों को भी राहत मिलेगी, जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है और आखिरी समय में कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद चार्ट जारी होने के बावजूद अगर किसी ट्रेन में सीट खाली रहती है, तो यात्री ट्रेन छूटने से 15 मिनट पहले तक उसे बुक करा सकेंगे। इससे यात्रियों को आखिरी समय में भी कन्फर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

क्या बदला है?

पहले जब किसी ट्रेन का रिजर्वेशन चार्ट तैयार हो जाता था, तो उसके बाद टिकट बुक कराने की सुविधा लगभग खत्म हो जाती थी। लेकिन अब रेलवे ने नियम बदल दिया है। नए नियम के अनुसार, अगर चार्ट बनने के बाद भी ट्रेन में सीटें खाली रहती हैं, तो यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उन सीटों की बुकिंग कर सकेंगे। रेलवे को उम्मीद है कि इस बदलाव से ट्रेनों में खाली सीटों का बेहतर इस्तेमाल होगा। साथ ही, जिन लोगों का सफर अचानक तय होता है, उन्हें आखिरी समय में भी कन्फर्म टिकट मिलने में आसानी होगी।

किन यात्रियों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

रेलवे का यह नया नियम उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होगा, जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है या जिन्हें सामान्य बुकिंग के दौरान कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता। अब अगर ट्रेन में चार्ट बनने के बाद भी सीटें खाली होंगी, तो यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उन्हें बुक कर सकेंगे। इससे ज्यादा लोगों को कन्फर्म सीट मिलने का मौका मिलेगा और ट्रेनों की खाली सीटों का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। रेलवे का मानना है कि इस व्यवस्था से यात्रियों को सुविधा मिलेगी और ट्रेनों में सीटों की उपलब्धता भी बेहतर होगी।

टिकट कैसे बुक करें?

यात्री खाली सीटों की बुकिंग आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट, आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट मोबाइल ऐप या रेलवे के अधिकृत पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर के जरिए कर सकते हैं। हालांकि, यह सुविधा तभी मिलेगी जब रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद भी ट्रेन में सीटें खाली हों। ऐसी स्थिति में यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उपलब्ध सीटों की बुकिंग कर सकेंगे।

यात्रियों के लिए जरूरी बातें

जो यात्री इस नई सुविधा का फायदा उठाना चाहते हैं, उन्हें स्टेशन जाने से पहले यह जरूर देख लेना चाहिए कि ट्रेन में कोई सीट खाली है या नहीं। साथ ही, उन्हें समय से पहले स्टेशन पहुंचना चाहिए और यात्रा के दौरान अपने साथ आईडी कार्ड जरूर रखना चाहिए। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि टिकट हमेशा आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट, रेल कनेक्ट मोबाइल ऐप या अधिकृत पीआरएस (PRS) काउंटर से ही बुक करें।

नई व्यवस्था का क्या फायदा होगा?

भारतीय रेलवे का मानना है कि इस नए नियम से ट्रेनों में खाली सीटों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। साथ ही, जिन लोगों को अचानक यात्रा करनी पड़ती है, उन्हें आखिरी समय में भी कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। अब अगर रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद भी सीटें खाली रहती हैं, तो यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उन्हें बुक कर सकेंगे। इससे यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी और ट्रेनों में खाली सीटों की संख्या भी कम होगी।

सिया के प्रेमी चेतन का होगा गेट एनालिसिस, आखिर क्या होता है यह टेस्ट और इस मामले में क्यों जरूरी है?

Chetan Chaudhary Gait Analysis

Chetan Chaudhary Gait Analysis Test: लोनावला के प्रसिद्ध लोहागढ़ किले में 18 जून को हुए रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने जांच को एक नया और बेहद वैज्ञानिक मोड़ दे दिया है। पुलिस ने अब मुख्य आरोपी चेतन चौधरी का 'गेट एनालिसिस' (Gait Analysis यानी चाल विश्लेषण) टेस्ट कराने का फैसला किया है। इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे संदिग्ध और आरोपी चेतन की पहचान को कानूनी रूप से पक्का किया जाएगा। वहीं, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ा दी है।

क्या होता है गेट एनालिसिस और इस मामले में क्यों जरूरी है?

सरल शब्दों में कहें तो 'गेट एनालिसिस' किसी व्यक्ति के चलने, दौड़ने या शारीरिक गतिविधियों के तरीके का एक वैज्ञानिक और बायोमैकेनिकल अध्ययन है। जिस तरह हर व्यक्ति के फिंगरप्रिंट्स (उंगलियों के निशान) अलग होते हैं, उसी तरह हर इंसान के चलने का अंदाज (कदमों की लंबाई, रीढ़ की मुद्रा, और हाथ-पैरों की गति का तालमेल) भी विशिष्ट होता है। ALSO READ: केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया मोड़: सिया गोयल के वकील ने भाई साहिल को भेजा 10 करोड़ का मानहानि नोटिस

 

इस मामले में यह टेस्ट इसलिए सबसे बड़ा हथियार बनने जा रहा है क्योंकि वारदात वाले दिन (18 जून) लोहागढ़ किले के सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया था। भीषण गर्मी के बावजूद उस व्यक्ति ने हुडी (चेहरा छिपाने वाली कैप वाली शर्ट) पहनी हुई थी, जिससे उसका चेहरा साफ नहीं दिख रहा है। पुलिस का पूरा दावा है कि वह संदिग्ध कोई और नहीं बल्कि सिया का प्रेमी चेतन चौधरी ही था।

क्राइम सीन का होगा रिक्रिएशन

केस को अदालत में अकाट्य बनाने के लिए पुलिस अब एक अनोखा कदम उठाने जा रही है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, चेतन चौधरी को ठीक उसी तरह की हुडी पहनाकर लोहागढ़ किले के उसी रास्ते पर चलाया जाएगा, जहां का सीसीटीवी फुटेज पुलिस के पास है। इस दौरान चेतन के चलने के तरीके का एक नया वीडियो रिकॉर्ड किया जाएगा। इसके बाद फोरेंसिक एक्सपर्ट्स पुराने सीसीटीवी फुटेज और इस नए वीडियो का डिजिटल मिलान करेंगे। यदि दोनों वीडियो में चलने का पैटर्न, कदमों की दूरी और शारीरिक झुकाव मैच कर जाता है, तो यह कानूनी रूप से साबित हो जाएगा कि हुडी में छिपा चेहरा चेतन का ही था। ALSO READ: केतन से क्यों नफरत करती थी सिया? पुलिस के सामने किया बड़ा खुलासा

अदालत में वकीलों को लेकर हाई-वोल्टेज ड्रामा

मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को अदालत परिसर में उस समय नाटकीय स्थिति पैदा हो गई, जब वकीलों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आरोपी सिया गोयल के अधिकारिक वकील विपुल दुशिंग ने अदालत में दलील दी कि उनकी मुवक्किल की गिरफ्तारी पूरी तरह से गैरकानूनी है और पुलिस के पास कोई ठोस आधार नहीं है। वहीं चेतन के वकील राम शाहणे ने दावा किया कि एफआईआर में उनके मुवक्किल की भूमिका बहुत सीमित और अस्पष्ट है।

 

इसी बीच, एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने अचानक अदालत में सिया के हस्ताक्षर वाला वकालतनामा पेश करते हुए दावा किया कि वे उसका केस लड़ेंगे। हालांकि, आरोपी सिया गोयल और उसके परिवार ने तुरंत इस पर आपत्ति जताते हुए साफ कर दिया कि विपुल दुशिंग ही उनके असली कानूनी प्रतिनिधि हैं।

हादसा या सोची-समझी हत्या?

पुणे के आलीशान 'लोढ़ा बेलमोंडो' में रहने वाले केतन अग्रवाल अपनी पारिवारिक कंपनी 'सक्सेस ग्रुप' के निदेशक थे। इसी साल फरवरी में उनका विवाह सिया गोयल से तय हुआ था और नवंबर में उदयपुर में शाही शादी होने वाली थी। दोनों के परिवार एक ही व्यापारिक क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं। 18 जून को सिया के जन्मदिन के मौके पर दोनों लोनावला के पास लोहागढ़ किले में ट्रैकिंग के लिए गए थे। वहां से केतन की खाई में गिरने से मौत हो गई। पुलिस का आरोप है कि सिया और चेतन ने मिलकर केतन को रास्ते से हटाने के लिए इस पूरी खौफनाक साजिश को अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है। ALSO READ: सिया गोयल का वो खौफनाक कबूलनामा और बेकरी-ड्राई फ्रूट्स वाले इश्क की इनसाइड स्टोरी!

और किस काम आता है गेट एनालिसिस?

इस टेस्ट में डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट केवल आपको चलते हुए देखकर आपके चलने के पैटर्न, पैरों की स्थिति और बॉडी बैलेंस को नोट करते हैं। इसमें व्यक्ति के शरीर पर विशेष सेंसर या मार्कर्स लगाए जाते हैं। फिर उसे एक खास ट्रेडमिल या वॉकवे (जिसमें प्रेशर पैड लगे होते हैं) पर चलाया जाता है। आस-पास लगे हाई-स्पीड कैमरे और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर पैरों की मूवमेंट, जोड़ों के एंगल और जमीन पर पड़ने वाले दबाव का एक 3D मॉडल तैयार करते हैं। यदि किसी को बिना किसी स्पष्ट कारण के पीठ, कूल्हे, घुटने या टखने में लगातार दर्द रहता है, तो यह टेस्ट बताता है कि आपके चलने के गलत तरीके (जैसे पैर अंदर या बाहर की तरफ मोड़कर चलना) के कारण ऐसा हो रहा है।

विकास के नए कीर्तिमान रच रहा उत्तर प्रदेश, मुख्यमंत्री योगी ने यूपी को 3 महीने में दी 62 हजार करोड़ से अधिक की 5551 परियोजनाओं की सौगात

Scaling new heights of continuous development Uttar Pradesh is setting fresh milestones

– पूर्वांचल, पश्चिमांचल, बुंदेलखंड, मध्यांचल समेत प्रदेश के सभी जनपदों को विकास से जोड़ने पहुंच रहे मुख्यमंत्री योगी

– हर जिले में विकास, हर क्षेत्र में निवेश से उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को करेगा हासिल 

– लोकार्पण और शिलान्यास की नई रफ्तार से विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव रख रही योगी सरकार

– शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और पर्यटन समेत अन्य सेक्टरों को मिली नई गति, विकास की पहचान बना यूपी

Chief Minister Yogi Adityanath : बीते 9 साल से निरंतर विकास की बुलंदियों को छू रहा उत्तर प्रदेश नित नए कीर्तिमान रच रहा है। यदि वित्तीय वर्ष 2026-27 की बात करें तो पहली तिमाही में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निरंतर जनपदों के दौरे कर विकास की सौगात दे रहे हैं। वे पूर्वांचल, पश्चिमांचल, बुंदेलखंड, मध्याचंल समेत प्रदेश के सभी जनपदों को विकास से जोड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल, मई और जून के दौरान प्रदेशभर में आधारभूत ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन, खेल, शहरी विकास, ग्रामीण विकास और कनेक्टिविटी से जुड़ी 5,551 से अधिक विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।

इन परियोजनाओं पर 62,282 करोड़ से अधिक रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जो प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाती है। मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में विकास केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर तेजी से क्रियान्वित हो रहा है। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। 

 

हर क्षेत्र में विकास की समान गति

इन तीन महीनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में सड़क, पुल, मेडिकल कॉलेज, खेल अवसंरचना, औद्योगिक पार्क, नगर विकास, शिक्षा, पेयजल, पर्यटन और डिजिटल सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं की शुरुआत की गई। योगी सरकार ने केवल बड़े शहरों पर ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्र के जिलों में भी विकास कार्यों को समान प्राथमिकता दी।

 

गंगा एक्सप्रेसवे पर दौड़े विकास के पहिए, जेवर से हुई प्रगति की उड़ान

इस अवधि की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 36 हजार करोड़ रुपए से अधिक लागत वाले गंगा एक्सप्रेसवे व नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर का लोकार्पण रहा। मेरठ से प्रयागराज तक प्रदेश को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। वहीं नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर से भी प्रगति की उड़ान हुई। एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसान पहली फ्लाइट में बैठकर लखनऊ पहुंचे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संवाद भी किया। 

ALSO READ: मुरादाबाद में दिखा मुख्यमंत्री योगी का वात्सल्य, जिस बच्ची का कराया था दाखिला, उसी के हाथों कराया 'श्री राम वाटिका' का लोकार्पण

शिक्षा और तकनीक पर विशेष जोर

योगी सरकार ने नई शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक तकनीकी शिक्षा को भी प्राथमिकता दी। गोरखपुर में पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत की गई, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और थ्री-डी प्रिंटिंग जैसे भविष्य की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुजफ्फरनगर में भी सेंटर ऑफ इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड ट्रेनिंग की स्थापना के माध्यम से युवाओं को नई तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।

 

स्वास्थ्य सेवाओं का हुआ विस्तार

योगी सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए भी अनेक परियोजनाओं की शुरुआत की। ललितपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित स्वास्थ्य अवसंरचना से जुड़ी कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। विभिन्न जिलों में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

ALSO READ: योगी सरकार का बड़ा फैसला, 1.04 करोड़ रुपए से संवरेगा गोमती नदी का उद्गम स्थल, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

उद्योग और निवेश को नई ऊर्जा

ललितपुर में 1,500 एकड़ में उत्तर प्रदेश का पहला फार्मा पार्क विकसित करने की घोषणा राज्य के औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं विभिन्न जिलों में औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक सुविधाओं और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के माध्यम से निवेश के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

 

पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को मिला बढ़ावा

प्रदेश सरकार पर्यटन विकास को भी प्राथमिकता दे रही। संतकबीर नगर में तामेश्वरनाथ धाम कॉरिडोर, बाबा बैजूनाथ धाम के विकास और बखिरा झील को इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई। महोबा को एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। इसके साथ ही प्रदेशभर में इको टूरिज्म को लेकर भी बड़े स्तर पर काम चल रहा है।

 

खेल और शहरी सुविधाओं का विस्तार

गोरखपुर में लगभग 393 करोड़ रुपए की लागत से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास किया गया, जिसमें 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी। वहीं नगर निगमों में आधुनिक सदन भवन, मल्टीलेवल पार्किंग, टू-लेन ब्रिज, ईको पार्क और अन्य शहरी सुविधाओं के विकास से नागरिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया।

ALSO READ: हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए एक्शन में योगी सरकार, जल जीवन मिशन की होगी जमीनी मॉनिटरिंग

सामाजिक समरसता और जनकल्याण को भी प्राथमिकता

लखीमपुर खीरी में बांग्लादेश से विस्थापित हिंदू परिवारों, पीलीभीत में हजारों बंगाली परिवारों को नागरिकता और भूमि अधिकार पत्र वितरित किए गए। इस तरह प्रदेश में कई अवसरों पर लोगों को नियुक्ति पत्र व अन्य सुविधाओं से जुड़े पत्र भी वितरित किए गए। वहीं श्रमिक कल्याण योजनाओं, कल्याण मंडपम और अन्य जनसुविधाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया।

 

विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव

इसी तरह रामपुर, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, उन्नाव, आजमगढ़, कुशीनगर, गोंडा, बलरामपुर, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, हाथरस, फिरोजाबाद, ललितपुर और अन्य जिलों में सैकड़ों विकास परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जिस गति से हजारों विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ, उससे स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में विकास अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर तेजी से क्रियान्वित हो रहा है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, पर्यटन, खेल और शहरी विकास जैसे लगभग सभी क्षेत्रों में एक साथ हो रहे निवेश प्रदेश को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।

 

एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं लोकार्पण और शिलान्यास से जुड़ी सभी परियोजनाओं को निगरानी करते आ रहे हैं। वहीं एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर, फार्मा पार्क और औद्योगिक क्लस्टर जैसी आधारभूत परियोजनाओं के साथ निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

ALSO READ: ओबीसी युवाओं को डिजिटल ताकत दे रही योगी सरकार, ओ लेवल-सीसीसी प्रशिक्षण बना सहारा

कृषि, एमएसएमई, पर्यटन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी जा रही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने, रोजगार सृजन, कौशल विकास और बेहतर कानून-व्यवस्था के माध्यम से उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य तेज आर्थिक विकास के साथ प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना है।

 

मुख्यमंत्री योगी द्वारा अप्रैल, मई-जून में किए गए प्रमुख लोकार्पण व शिलान्यास

अप्रैल- 

5 अप्रैल: गोरखपुर-बंधु सिंह पार्क में बने मल्टीलेवल पार्किंग कॉम्प्लेक्स के साथ घंटाघर के सौंदर्यीकरण कार्य का लोकार्पण 

7 अप्रैल: आगरा में 6466.37 करोड़ रुपए की 325 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। साथ ही ग्रेटर आगरा टाउनशिप विकसित करने की घोषणा की।

11 अप्रैल: लखीमपुर खीरी की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों की 817 करोड़ की 314 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

11 अप्रैल: लखीमपुर खीरी में ही बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदु परिवारों को भूमिधरी अधिकार पत्र दिया और 417 करोड़ की 231 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

13 अप्रैल: आदर्श माध्यमिक विद्यालय, जनभवन के नए भवन का शुभारंभ किया। इसकी लागत करीब 5.17 करोड़ रुपए है। 

13 अप्रैल: मुजफ्फरनगर में 951 करोड़ रुपए की 423 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। इन योजनाओं में ‘सेंटर ऑफ इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। यहां युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और 3-डी प्रिंटिंग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

15 अप्रैल: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के साथ गोरखपुर में महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का लोकार्पण किया। यह 50 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित हुआ है। इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कांप्लेक्स में ड्रोन टेक्नोलाजी एंड 3डी प्रिंटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस टेक्नोलाजी, साइबर सिक्युरिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन टेक्नोलाजी, स्पेस टेक्नोलॉजी, थ्री डी प्रिंटिंग समेत एकीकृत पाठ्यक्रम संचालित होंगे।

23 अप्रैल: गोरखपुर में राप्ती नदी के एकला बंधा पर लिगेसी वेस्ट का निस्तारण कर बनाए गए ईको पार्क, नौसढ़-मलौनी फोरलेन सड़क सहित विकास की 1055 करोड़ रुपए की 497 विकास परियोजनाओं की सौगात दी।

29 अप्रैल: हरदोई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री योगी ने गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया। 36 हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत का यह मेगा प्रोजेक्ट मेरठ से प्रयागराज को जोड़ता है।

 

मई- 

1 मई: लखनऊ में श्रमवीर गौरव समारोह 2026 और श्रमिक कल्याण की विभिन्न योजनाओं का किया लोकार्पण-शिलान्यास किया।

5 मई: तारामंडल में वाटर बॉडी पर बने टू लेन ब्रिज का लोकार्पण किया। इसकी लागत 14 करोड़ रुपए से अधिक है।

5 मई: गोरखपुर में 612.32 करोड़ रुपए की 71 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्ग के लिए 'कल्याण मंडपम' का लोकार्पण भी शामिल है, ताकि आम जनता को कम खर्च पर मांगलिक आयोजनों के लिए भव्य जगह मिल सके।

7 मई: सहारनपुर में 2131 करोड़ रुपए की 325 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। 

15 मई: महराजगंज के नौतनवां में 208 करोड़ की 79 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। इससे सड़क, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के विकास को गति मिलेगी।

16 मई: गोरखपुर में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी संग अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इसकी लागत करीब 393 करोड़ रुपए होगी। इस विश्वस्तीय स्टेडियम में 30 हजार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था होगी।

22 मई: देवरिया में 655 करोड़ की 19 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। इसमें बिहार तक जुड़ने वाला फोर लेन मार्ग भी शामिल है। साथ ही इस परियोजनाओं के जरिए स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढ़ाचे को मजबूत किया जाना है।

26 मई: लखनऊ नगर निगम की 413 करोड़ की 342 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

26 मई: प्रयागराज में नगर निगम के नवनिर्मित सदन हॉल व विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। इनकी लागत 400 करोड़ रुपए से अधिक है।

29 मई: मऊ को 392 करोड़ की 114 परियोजनाओं की सौगात दी। इसमें सड़क, आधारभूत ढांचा, जनकल्याण और अन्य विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

30 मई: लखनऊ में नौसेना शौर्य संग्रहालय का लोकार्पण किया।

 

जून-

2 जून: कुशीनगर में 424 करोड़ रुपए की 278 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

5 जून: बलरामपुर में 294 करोड़ रुपए की 75 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

6 जून: गोंडा में 516 करोड़ रुपए की 262 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

13 जून: आजमगढ़ में 955 करोड़ रुपए की 39 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

13 जून: गोरखपुर में 295 करोड़ रुपए की 319 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

14 जून: गोरखपुर में 926 करोड़ रुपए की 226 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। 

18 जून: उन्नाव में 570 करोड़ रुपए की विकास 101 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। 

20 जून: ललितपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज समेत 1,766 करोड़ रुपए की 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। ललितपुर में 1500 एकड़ में यूपी का पहला फार्मा पार्क भी बनेगा।

21 जून: हमीरपुर में 636 करोड़ रुपए से अधिक की 75 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

21 जून: महोबा में 697 करोड़ रुपए से अधिक की 88 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिले को एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

22 जून: अलीगढ़ में 462 करोड़ रुपए की 85 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

22 जून: फिरोजाबाद में 658 करोड़ रुपए की 81 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

25 जून: संतकबीर नगर में 475 करोड़ रुपए की 139 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। यहां मुख्यमंत्री योगी ने तामेश्वरनाथ धाम को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की बात कही। बताया कि बाबा बैजूनाथ धाम सहित क्षेत्र के अन्य धार्मिक स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण पर भी कार्य प्रस्तावित है। साथ ही बखिरा झील को इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी बताई।

26 जून: देवरिया में 456.38 करोड़ रुपए की 106 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। इसमें सड़क, पुल, बाढ़ नियंत्रण, शिक्षा और नगर विकास से जुड़ी योजनाएं सम्मलित हैं।

28 जून: हाथरस में 548 करोड़ रुपए की 143 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

29 जून: मुरादाबाद में 365 करोड़ रुपए से अधिक की 63 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

29 जून: पीलीभीत में 569 करोड़ रुपए से अधिक की 66 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। साथ ही 2500 बंगाली परिवारों को नागरिकता एवं भूमि अधिकार पत्र वितरित किए।

30 जून: रामपुर में 690 करोड़ रुपए की 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

PPF, SCSS और NSC पर नहीं बढ़ा ब्याज, सरकार ने जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए जारी कीं नई दरें; देखें पूरी लिस्ट

Small Savings Schemes Interest Rates: अगर आप भी अपनी कमाई को पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं में निवेश करते हैं, तो आपके लिए एक बेहद जरूरी खबर है। सरकार ने मंगलवार, 30 जून 2026 को लगातार नौवीं तिमाही के लिए पीपीएफ, एनएससी, और केवीपी जैसी तमाम छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की दूसरी तिमाही (1 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक) के लिए ब्याज दरें बिल्कुल वैसी ही रहेंगी जैसी पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में थीं। बाजार को इस बार दरों में संशोधन की उम्मीद थी, लेकिन सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले निवेशकों को फिलहाल पुरानी दरों से ही संतोष करना होगा।

अब किस स्कीम पर कितना मिल रहा है ब्याज?

जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के लिए सभी चर्चित स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की वर्तमान ब्याज दरें इस प्रकार है:

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में आखिरी बार बड़ा बदलाव फाइनेंशियल ईयर 2023-24 की जनवरी-मार्च तिमाही में किया गया था

आखिरी बार कब बदली थीं ब्याज दरें?

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में आखिरी बार बड़ा बदलाव फाइनेंशियल ईयर 2023-24 की जनवरी-मार्च तिमाही में किया गया था। इसके बाद अप्रैल 2024 में सरकार ने केवल दो स्कीमों में बढ़ोतरी की थी 3-वर्षीय टाइम डिपॉजिट की दर 7% से बढ़ाकर 7.1% और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) की दर 8% से बढ़ाकर 8.2% की गई थी। तब से लेकर अब तक यानी लगातार 9 तिमाहियों से बाकी सभी योजनाओं की ब्याज दरें जस की तस बनी हुई हैं।

कैसे तय होती हैं इन योजनाओं की ब्याज दरें?

क्या आप जानते हैं कि सरकार इन स्कीम्स का ब्याज कैसे तय करती है? दरअसल, स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरें मार्केट यील्ड यानी बाजार के रिटर्न से जुड़ी होती हैं। वित्त मंत्रालय इसके लिए एक खास फॉर्मूले का पालन करता है, जो समान मैच्योरिटी वाले सरकारी बॉन्ड या गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (G-Secs) के रिटर्न पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए, अगर 5 साल के सरकारी बॉन्ड का रिटर्न बढ़ता या घटता है, तो उसी हिसाब से 5 साल की पोस्ट ऑफिस एफडी की दरें भी तय की जाती हैं।

वैसे भले ही इस तिमाही ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी न हुई हो, लेकिन बैंकों की आम एफडी की तुलना में आज भी सुकन्या समृद्धि (8.2%), सीनियर सिटीजन स्कीम (8.2%) और एनएससी (7.7%) जैसी सरकारी योजनाएं पूरी सुरक्षा के साथ बेहतरीन रिटर्न दे रही हैं।

Flexicap या Multicap, किस फंड में निवेश से आपको होगा ज्यादा फायदा?

क्या आप लंबी अवधि के लिए शेयरों पर दांव लगाना चाहते हैं? अगर हां तो यह समझ लेना जरूरी है कि मार्केट में किसी एक सेगमेंट का प्रदर्शन हमेशा अच्छा नहीं रहता है। कभी लार्जकैप शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो कभी मिडकैप या स्मॉलकैप का प्रदर्शन बेहतर रहता है। ऐसे में सवाल है कि आपको कैसे पता चलेगा कि आगे किस तरह के शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रहने वाला है? आपके लिए इस समस्या का समाधान फ्लेक्सी-कैप और मल्टीकैप फंड्स हैं।

फ्लेक्सी-कैप फंड लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेश करता है। खास बात यह है कि इस फंड पर इनमें से किसी एक कैटेगरी में मैक्सिमम या मिनिमम निवेश की शर्त नहीं होती है। जब तक शेयरों में फंड का कुल निवेश कम से कम 65 फीसदी तक बना रहता है तब तक फंड मैनेजर को ऐलोकेशन को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

अगर फंड मैनेजर को लगता है कि अभी समय लार्जकैप शेयरों का है तो वह इन शेयरों में निवेश बढ़ा सकता है। इसी तरह अगर बाद में उसे मिडकैप या स्मॉलकैप शेयर अट्रैक्टिव लगते हैं तो वह इनमें निवेश बढ़ा सकता है। इसका मतलब है कि बाजार की स्थितियों के मुताबिक इस फंड का ऐलोकेशन बदलता रहता है।

मल्टीकैप फंड के लिए नियम थोड़े सख्त हैं। उसे कम से कम 75 फीसदी निवेश शेयरों में करना जरूरी है। इसमें से लार्जकैप में 25 फीसदी, मिडकैप में 25 फीसदी और स्माॉल कैप में 25 फीसदी निवेश होना चाहिए। इस ऐलोकेशन का पालन हर समय करना जरूरी है। इसका मतलब है कि बाजार में चाहे जैसी भी स्थिति हो, मल्टीकैप फंड के मैनेजर को तीनों तरह के शेयरों में एकसमान निवेश बनाए रखना पड़ता है।

इस स्ट्रेटेजी का फायदा यह है कि तीनों तरह के शेयरों में इस फंड का ऐलोकेशन बना रहता है। बाकी 25 फीसदी निवेश को लेकर फंड मैनेजर को आजादी होती है। डायवर्सिफिकेशन के लिहाज से मल्टीकैप फंड सही है। इसकी वजह यह है कि इसके फंड मैनेजर को हर समय तीनों तरह के शेयरों में एक समान निवेश बनाए रखना होता है।

अगर रिटर्न की बात की जाए तो लंबी अवधि में मल्टीकैप फंड्स का रिटर्न फ्लेक्सीकैप फंड के मुकाबले ज्यादा रहता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से दोनों फंड्स सही हैं। जो इनवेस्टर्स डायवर्सिफिकेशन चाहते हैं उनके लिए मल्टीकैप फंड सही है। अगर कोई इनवेस्टर्स बाजार की स्थितियों के हिसाब से निवेश चाहता है तो उसके लिए फ्लेक्सीकैप फंड सही हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोनों फंड की फिलोसॉफी अलग-अलग है।

IND vs ENG 1st T20: शाम 7 बजे नहीं शुरू होगा भारत और इंग्लैंड का पहला मुकाबला, जानें कब और कहां देखें लाइव

आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज गंवाने के बाद भारतीय टीम अब जोरदार वापसी के इरादे से मैदान में उतरेगी। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम इंडिया पिछली हार को पीछे छोड़ते हुए बेहतर प्रदर्शन करना चाहेगी। आयरलैंड ने 2-0 से सीरीज जीतकर भारत के खिलाफ किसी भी फॉर्मेट में अपनी पहली बाइलेटरल सीरीज जीत दर्ज की है। वहीं अब पांच मैचों की टी20 सीरीज में भारतीय टीम का अगला मुकाबला इंग्लैंड से होगा। सीरीज का पहला मुकाबला 1 जुलाई को चेस्टर-ले-स्ट्रीट में खेला जाएगा।

इस सीरीज में सभी की नजर कप्तान श्रेयस अय्यर पर रहेगी, जो आयरलैंड के खिलाफ मिली हार के बाद टीम को जीत की राह पर लौटाने की कोशिश करेंगे। ये सीरीज उनके लिए कप्तानी में खुद को साबित करने का भी अच्छा मौका होगी। आइए जानते हैं कब और कितने बजे शुरू होगा मुकाबला

क्या वैभव को मिलेगा मौका

इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर सभी की नजर रहेगी। आयरलैंड के खिलाफ उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला था, लेकिन अगर इस बार टीम में जगह मिलती है तो वह भारत के लिए सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं। ऐसे में वह इस मामले में सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ देंगे। वहीं, आयरलैंड सीरीज में सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था।

कितने बजे शुरू होगा मुकाबला

भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाली पांच मैचों की टी20 सीरीज के पहले, तीसरे और चौथे मुकाबले भारतीय समयानुसार रात 10:00 बजे शुरू होंगे। सीरीज का पूरा कार्यक्रम, मैचों के आयोजन स्थल और समय पहले ही तय कर दिए गए हैं। वहीं दूसरा और पांचवां मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे से शुरु होगा।

कहां पर देखें लाइव मैच

भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाली टी20 सीरीज का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर देखा जा सकेगा। वहीं, जो दर्शक मोबाइल या ऑनलाइन मैच देखना चाहते हैं, वे इसकी लाइव स्ट्रीमिंग सोनी लिव ऐप पर देख सकेंगे।

भारत-इंग्लैंड की पूरी टीम

भारत: श्रेयस अय्यर (C), तिलक वर्मा (VC), रवि बिश्नोई, अभिषेक शर्मा, सूर्यांश शेडगे, प्रसिद्ध कृष्णा, संजू सैमसन (WK), अक्षर पटेल, हर्षित राणा, ईशान किशन (WK), वाशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, शिवम दुबे, प्रिंस यादव, वैभव सूर्यवंशी

इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (C), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, सोनी बेकर, टॉम बैंटन (WK), जैकब बेथेल, जोस बटलर (WK), जेम्स कोल्स, जॉर्डन कॉक्स (WK), सैम करन, लियाम डॉसन, विल जैक्स, साकिब महमूद, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट (WK), जोश टंग, ल्यूक वुड

Waaree Energies Share Price: सोलर कंपनी पर अमेरिकी एक्शन का असर, JM Financial ने घटाया टारगेट प्राइस

Waaree Energies Share Price: ब्रोकरेज JM Financial ने सोलर कंपनी Waaree Energies के शेयर का टारगेट प्राइस घटा दिया है। अब उसने 12 महीने का टारगेट प्राइस 3,509 रुपये से घटाकर 3,185 रुपये रखा है। इसकी वजह अमेरिका की ओर से कंपनी पर सोलर सेल आयात में टैरिफ से बचने (Tariff Evasion) का आरोप लगना है।

हालांकि, ब्रोकरेज ने शेयर पर अपनी ‘Add’ रेटिंग बरकरार रखी है। मौजूदा भाव 2,954 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 231 रुपये या 7.8% की संभावित बढ़त की गुंजाइश बनती है।

अमेरिका ने क्या कहा?

अमेरिका की Customs and Border Protection (CBP) ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट में कहा है कि Waaree Energies ने 2021 से 2026 के बीच वियतनाम और मलेशिया से आने वाले सोलर सेल्स पर लगने वाले टैरिफ से बचने की कोशिश की।

CBP का कहना है कि कंपनी ने चार साल तक सामान के मूल देश (Country of Origin) की गलत जानकारी दी। JM Financial का मानना है कि इससे कंपनी की साख पर असर पड़ सकता है।

271% तक एंटी-डंपिंग ड्यूटी

CBP के फैसले के बाद जिन आयातों को नियमों से बचने वाला माना गया है, उन पर 271.28% तक एंटी-डंपिंग ड्यूटी के लिए कैश डिपॉजिट देना होगा। यह जांच 2025 में शुरू हुई थी।

शिकायत में कहा गया था कि Waaree Energies ने चीन से सोलर सेल का आयात काफी बढ़ाया। इसके बाद भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले क्रिस्टलाइन सिलिकॉन फोटोवोल्टिक (CSPV) मॉड्यूल का निर्यात भी तेजी से बढ़ा। 2021 से 2023 के बीच भारत से अमेरिका जाने वाले CSPV मॉड्यूल के आयात में 2,250% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ऑर्डर बुक पर पड़ सकता है असर

JM Financial के मुताबिक, Waaree Energies की ऑर्डर बुक 53,000 करोड़ रुपये की है। इसका 65% से 70% हिस्सा विदेशी ग्राहकों के लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़ा है।

ब्रोकरेज का मानना है कि इस फैसले से कंपनी की साख पर असर पड़ सकता है। इसका असर भविष्य में मिलने वाले कुछ अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स पर भी पड़ सकता है।

फिर भी ‘Add’ रेटिंग क्यों बरकरार?

JM Financial का कहना है कि हालात उतने खराब नहीं हैं, जितनी आशंका जताई जा रही थी। CBP ने कंपनी के सभी आयातों को नियमों का उल्लंघन करने वाला नहीं माना है।

जांच में यह भी सामने आया कि Waaree Energies ने गैर-चीनी सोलर सेल्स से इतने मॉड्यूल तैयार किए थे, जो अमेरिका भेजे गए उसके कुल मॉड्यूल की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त थे। इसी वजह से ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी पर असर तो पड़ेगा, लेकिन सबसे खराब स्थिति बनने की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है।

मार्च तिमाही में कैसा रहा प्रदर्शन?

FY26 की चौथी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 112% बढ़कर 8,840.25 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, शुद्ध मुनाफा 74.7% बढ़कर 1,126.26 करोड़ रुपये रहा। EBITDA 80% बढ़कर 1,577 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन घटकर 18.6% रह गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 23% था।

Waaree के शेयरों का हाल

Waaree Energies का शेयर मंगलवार को 2.35% की बढ़त के साथ 2,954 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने स्टॉक तकरीबन फ्लैट है। वहीं, 1 साल के दौरान इसमें करीब 6% की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैप 84.71 हजार करोड़ रुपये है।

Apollo Tyres Share Price: ब्रोकरेज ने स्टॉक की रेटिंग की अपग्रेड, शेयर सरपट दौड़ा, जानें क्या है नया टारगेट प्राइस

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Europe heatwave : यूरोप में 43 डिग्री सेल्सियस और भारत में 43 डिग्री सेल्सियस एक जैसे क्यों नहीं लगते? जानिए गर्मी का असली विज्ञान

इन दिनों यूरोप भीषण हीटवेव (Heatwave) की चपेट में है। इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट ने नई बहस छेड़ दी। अगर यूरोप और भारत दोनों जगह तापमान 43 डिग्री सेल्सियस है, तो फिर यूरोप में इतनी चिंता क्यों? भारत में तो कई शहरों में तापमान 48 डिग्री तक पहुंच जाता है। यह पोस्ट वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने-अपने अनुभव शेयर किए। किसी ने यूरोप में एयर कंडीशनर (AC) और पंखों की कमी को वजह बताया तो किसी ने नमी (Humidity), इमारतों की बनावट और वहां की जलवायु को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।

ALSO READ: OnePlus Nord N6 5G लॉन्च, 19,999 रुपए में 8,000mAh बैटरी, 120Hz डिस्प्ले और 50MP कैमरा

 एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक सिर्फ थर्मामीटर पर दिखने वाला तापमान यह तय नहीं करता कि गर्मी कितनी महसूस होगी। इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण होते हैं।

ALSO READ: Electric Scooter खरीदने से पहले 14 जरूरी बातें जो आपके लिए जानना जरूरी

भारत और यूरोप की जलवायु में बड़ा अंतर

 

एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक भारत के कई हिस्सों में हर साल लंबे समय तक भीषण गर्मी पड़ती है। ऐसे में यहां के लोग और उनका शरीर काफी हद तक इस मौसम के अनुरूप खुद को ढाल चुका है।  इसके उलट यूरोप के अधिकांश देशों में पारंपरिक रूप से मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। वहां अचानक आने वाली तेज गर्मी लोगों और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक  हमारा शरीर पसीना निकालकर खुद को ठंडा करता है। लेकिन यदि हवा में नमी अधिक हो तो पसीना जल्दी नहीं सूखता और शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती।

 

यही वजह है कि 35 डिग्री सेल्सियस तापमान भी अधिक नमी वाले क्षेत्रों में 43 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म महसूस हो सकता है। इसी कारण मौसम विभाग अक्सर वास्तविक तापमान के साथ 'Feels Like Temperature' भी जारी करता है, जो शरीर पर पड़ने वाले वास्तविक गर्मी के असर को बेहतर तरीके से दर्शाता है। 

ALSO READ: SC On Ethanol Blending Policy : SC में BPCL एथेनॉल विवाद पर सुनवाई, केंद्र ने कहा- 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य नहीं बदलेगा

घर की बनावट का असर 

यूरोप के अधिकांश घर लंबे और ठंडे सर्द मौसम को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इनमें मोटी दीवारें, बेहतर इंसुलेशन और अपेक्षाकृत छोटे खिड़की-दरवाजे होते हैं, जिससे गर्मी आसानी से बाहर नहीं निकलती।  कई घरों में एयर कंडीशनर नहीं होते और प्राकृतिक वेंटिलेशन भी सीमित होता है। ऐसे में दिनभर की गर्मी रात तक घरों के अंदर बनी रहती है, जिससे लोगों को राहत नहीं मिलती। इसके विपरीत भारत में अधिकांश क्षेत्रों में गर्म मौसम को ध्यान में रखते हुए पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल अधिक आम है। Edited by : Sudhir Sharma

पुनरोद्धार की उम्मीदों के बीच कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों में तेजी,लेकिन एक्सपर्ट्स को इसकी सफलता को लेकर शक, जानिए क्यों

Calcutta Stock Exchange Revival : वेस्ट बंगाल सरकार ने एक सदी पुराने कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (CSE) को फिर से शुरू करने का इरादा ज़ाहिर किया है। इसके बाद अनलिस्टेड शेयर प्लेटफॉर्म्स पर कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों में ज़बरदस्त तेज़ी आई है। हालांकि,मार्केट एक्सपर्ट्स को इस एक्सचेंज के फिर से चालू होने की संभावना पर अभी भी शक है। एक्सचेंज के अनलिस्टेड शेयरों की कीमत 21 जून को लगभग 1,500 रुपये थी। 30 जून तक बढ़कर यह लगभग 1,800 रुपये पर पहुंच गई। कुछ प्लेटफॉर्म पर इस शेयर की कीमत 2,000 रुपये के करीब भी बताई जा रही है। हालांकि,इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत कम है।

एक्सचेंज की प्रति शेयर बुक वैल्यू 3,000 रुपये से ज़्यादा है। बता दें कि 22 जून को पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने राज्य के बजट में CSE को फिर से शुरू करने की घोषणा की थी।

उम्मीद है कि राज्य सरकार के प्रस्ताव के बाद,CSE के अधिकारी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI)के पास जमा किए गए एक्सचेंज के वॉलंटरी एग्जिट (स्वेच्छा से बाहर निकलने) के आवेदन को वापस ले लेंगे। एक्सचेंज ने फरवरी 2025 में वॉलंटरी एग्जिट के लिए आवेदन किया था,जिसके बाद SEBI ने एग्जिट प्रोसेस के तहत एक वैल्यूअर नियुक्त किया था। हालांकि,इस आवेदन पर अभी कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया है।

यह तेजी सरकार के रिवाइवल प्रपोजल को लेकर बनी उम्मीद दिखाती है। हालांकि,बाजार के जानकारों का कहना है कि किसी भी रिवाइवल के लिए SEBI की मंज़ूरी और बड़ी रेगुलेटरी,टेक्नोलॉजिकल और कमर्शियल दिक्कतों से पार पाने की जरूरत होगी।

क्या हैं बड़ी चुनौतियां?

बाजार जानकारों का कहना है कि आज किसी स्टॉक एक्सचेंज को फिर से शुरू करने के लिए सिर्फ़ रेगुलेटरी मंज़ूरी से कहीं ज्यादा की ज़रूरत होती है। कम से कम 100 करोड़ रुपये की नेट वर्थ की शर्त पूरी करने के अलावा,एक आधुनिक एक्सचेंज के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी प्लेटफ़ॉर्म,सर्विलांस सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी क्षमताएं,क्लियरिंग और सेटलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और खास तौर पर ट्रेंड स्टाफ़ की ज़रूरत होती है।

हालांकि कम से कम पूंजी की शर्त को पूरा करना शायद सबसे बड़ी बाधा न हो,लेकिन क्लियरिंग कॉरपोरेशन बनाना या क्लियरिंग की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार,CSE ने पहले देश के प्रमुख क्लियरिंग कॉरपोरेशन के साथ क्लियरिंग व्यवस्थाओं पर करार करने का प्रयास किया था,लेकिन वह कोशिश सफल नहीं हो पाई।

हालांकि,सबसे बड़ी बाधा लिक्विडिटी यानी अलग-अलग प्राइस लेवल पर पर्याप्त खरीदारों और विक्रेताओं की मौजूदगी है,ताकि आसानी से और कुशलता से ट्रेडिंग हो सके।

बाजार जानकारों का कहना है कि मजबूत टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर होने के बावजूद,कुछ मौजूदा एक्सचेंज भी ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर और ब्रोकर आम तौर पर ऐसे एक्सचेंज को पसंद करते हैं जहां लिक्विडिटी सबसे ज़्यादा होती है। इसके चलते किसी दोबारा शुरू किए गए एक्सचेंज के लिए बड़ी ट्रेडिंग एक्टिविटी को आकर्षित करना मुश्किल हो सकता है।

ANMI के नेशनल प्रेसिडेंट कमलेश श्रॉफ का कहना है कि भारत के कैपिटल मार्केट अब टेक्नोलॉजी और लिक्विडिटी पर आधारित इकोसिस्टम बन गए हैं। भले ही कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज की विरासत सम्मान के काबिल है,लेकिन इसे फिर से शुरू करने का आधार पुरानी शान के बजाय भविष्य की ज़रूरतें होनी चाहिए। अगर यह SME फाइनेंसिंग,रीजनल एंटरप्रेन्योरशिप,नए एसेट क्लास या मार्केट इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी खास जगह बना पाता है,तो यह भारत की विकास यात्रा में अहम योगदान दे सकता है।

CSE के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO माधव रेड्डी कहते हैं कि इस एक्सचेंज को फिर से सफल बनाने के लिए,उसे एक ऐसा आकर्षक वैल्यू प्रपोज़िशन देना होगा जो अनोखा हो,किफायती हो और मौजूदा प्लेयर्स से काफी अलग हो। अगर इसमें साफ़ तौर पर कोई अलग औक खास बात नहीं होगी,तो इसके सफल पुनरुद्धार की संभावनाएं सीमित ही रहेंगी।

इसे बंद करना भी साबित हुआ मुश्किल

अजीब बात यह है कि इस एक्सचेंज को बंद करना भी उसे फिर से शुरू करने जितना ही मुश्किल साबित हुआ है। CSE ने इस साल की शुरुआत में SEBI की एग्जिट पॉलिसी के तहत स्वेच्छा से बाहर निकलने(वॉलंटरी एग्जिट)के लिए आवेदन किया था और इसके बाद रेगुलेटर ने एक वैल्यूअर नियुक्त किया। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि SEBI की 2012 की एग्जिट पॉलिसी के तहत,जो स्टॉक एक्सचेंज स्वेच्छा से बाहर निकलना चाहता है,उसे एग्जिट प्रोसेस पूरी होने से पहले ब्रोकर्स की ओर से आए दावों और देनदारियों का निपटारा करना होगा। मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि ये देनदारियां कुछ सौ करोड़ रुपये तक हो सकती हैं।

एक्सर्ट्स आगे कहते हैं कि हालांकि SEBI कुछ रेगुलेटरी बकाया राशि माफ़ कर सकता है,लेकिन कानूनी जुर्माने सरकारी बकाया राशि के दायरे में आते हैं और उन्हें अकेले SEBI माफ़ नहीं कर सकता। इससे एग्ज़िट की प्रक्रिया और भी जटिल हो जाती है।

फिलहाल,CSE के अनलिस्टेड शेयरों में तेजी राज्य के रिवाइवल प्रपोज़ल को लेकर बनी उम्मीद दिखाती है,लेकिन जानकारों का कहना है कि एक्सचेंज का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या वह NSE और BSE के दबदबे वाले बाजार में लिक्विडिटी लाने में सक्षम एक अलग बिजनेस प्लेटफ़ॉर्म बना पाता है या नहीं।

क्यों बंद हुआ CSE?

1923 में स्थापित कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज में अप्रैल 2013 के बाद से इक्विटी ट्रेडिंग नहीं हुई है। SEBI ने मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों के लिए ज़रूरी नियमों का पालन न करने के कारण इस एक्सचेंज पर ट्रेडिंग रोक दी थी। रेगुलेटर ने इसका कारण ऑपरेशनल और रेगुलेटरी नियमों का पालन न करना बताया था। साथ ही,CSE काट्रेडिंग वॉल्यूम धीरे-धीरे NSE और BSE की ओर शिफ्ट हो गया,क्योंकि ये दोनों एक्सचेंज बेहतर टेक्नोलॉजी,देश भर में कनेक्टिविटी और काफी ज़्यादा लिक्विडिटी की सुविधा देते हैं।

जब ब्रोकर्स और इन्वेस्टर्स ने ऐसे एक्सचेंज को प्राथमिकता दी जहां बेहतर मार्केट और कीमतों का सही पता लगाने की सुविधा थी,तो CSE में ट्रेडिंग लगभग खत्म हो गई। हालांकि एक्सचेंज ने कानूनी रास्ते अपनाए और बाद में SEBI के एग्जिट फ्रेमवर्क के तहत स्वेच्छा से बाहर निकलने की कोशिश की। एक दशक से भी ज़्यादा समय से यहां कोई एक्टिव इक्विटी ट्रेडिंग नहीं हुई है।

 

 

 

Market Outlook : लाल निशान में बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 1 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल