665KM रेंज, 5.8 सेकंड में 100kmph की रफ्तार! Tata Sierra EV हुई लॉन्च, जानें कीमत, फीचर्स और बैटरी की पूरी डिटेल

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने भारत में अपनी नई Tata Sierra EV लॉन्च कर दी है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 18.79 लाख रुपये रखी गई है। इसके साथ ही टाटा की सबसे लोकप्रिय एसयूवी में से एक सिएरा अब पूरी तरह इलेक्ट्रिक रूप में भारतीय बाजार में लौट आई है। नई Tata Sierra EV कुल पांच वेरिएंट में उपलब्ध है। इसमें दो बैटरी पैक का विकल्प मिलता है। कंपनी का दावा है कि यह एक बार चार्ज करने पर 665 किलोमीटर तक (एमआईडीसी प्रमाणित) की ड्राइविंग रेंज देती है। इसके अलावा इसमें ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) का विकल्प और बैटरी पर लाइफटाइम वारंटी भी दी गई है।

यह टाटा मोटर्स की सातवीं इलेक्ट्रिक कार है। इससे पहले कंपनी टियागो ईवी, टिगोर ईवी, पंच ईवी, नेक्सॉन ईवी, कर्व ईवी और हैरियर ईवी को बाजार में उतार चुकी है। Tata Sierra EV की बुकिंग आज से शुरू हो गई है, जबकि इसकी डिलीवरी 15 जुलाई से शुरू होगी। ग्राहक चाहें तो 49,000 रुपये अतिरिक्त देकर 7.2 किलोवॉट एसी फास्ट चार्जर का विकल्प भी ले सकते हैं।

Tata Sierra EV: कीमत और वेरिएंट

Tata Sierra EV को कंपनी ने पांच वेरिएंट में लॉन्च किया है। इनमें प्योर, प्योर एस, एडवेंचर, एम्पावर्ड और एम्पावर्ड ए शामिल हैं। इस इलेक्ट्रिक एसयूवी की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 18.79 लाख रुपये है। वहीं, इसका सबसे टॉप मॉडल एम्पावर्ड ए (QWD) 25.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) में उपलब्ध है। यह वेरिएंट सबसे ज्यादा फीचर्स और बेहतर परफॉर्मेंस के साथ आता है।

Tata Sierra EV: बैटरी, रेंज और चार्जिंग

Tata Sierra EV में दो बैटरी विकल्प दिए गए हैं। पहला 63 kWh और दूसरा 75 kWh बैटरी पैक है। कंपनी के मुताबिक, 75 kWh बैटरी एक बार फुल चार्ज होने पर 665 किलोमीटर तक (एमआईडीसी प्रमाणित) चल सकती है। वहीं, 63 kWh बैटरी की रेंज 565 किलोमीटर बताई गई है।

टाटा मोटर्स का कहना है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में 75 kWh बैटरी वाली सिएरा ईवी करीब 510 से 530 किलोमीटर तक चल सकती है। वहीं, 63 kWh बैटरी वाला मॉडल 440 से 460 किलोमीटर तक की वास्तविक ड्राइविंग रेंज देगा। इसके अलावा 75 kWh बैटरी के साथ आने वाला क्वाड-व्हील ड्राइव (QWD) मॉडल एक बार चार्ज करने पर 500 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज देने का दावा करता है।

चार्जिंग की बात करें तो इसमें 120 kW डीसी फास्ट चार्जिंग, 7.2 kW एसी चार्जिंग और 3.3 kW एसी चार्जिंग का विकल्प मिलता है। 120 kW डीसी फास्ट चार्जर की मदद से बैटरी को सिर्फ 26 मिनट में 20% से 80% तक चार्ज किया जा सकता है। वहीं, कंपनी का दावा है कि 15 मिनट की फास्ट चार्जिंग में यह इलेक्ट्रिक एसयूवी 250 किलोमीटर से ज्यादा की ड्राइविंग रेंज दे सकती है।

इसके अलावा Tata Sierra EV में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) और व्हीकल-टू-लोड (V2L) जैसी आधुनिक सुविधाएं भी दी गई हैं। इनकी मदद से जरूरत पड़ने पर कार से दूसरे इलेक्ट्रिक वाहन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी बिजली दी जा सकती है।

Tata Sierra EV: पावर और परफॉर्मेंस

Tata Sierra EV को कंपनी ने दो इलेक्ट्रिक मोटर विकल्पों के साथ पेश किया है। इसके रियर-व्हील ड्राइव (RWD) मॉडल में 175 kW की इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो 340 Nm का टॉर्क पैदा करती है। वहीं, इसके टॉप वेरिएंट में 103 kW की फ्रंट मोटर भी मिलती है। दोनों मोटरों के साथ यह एसयूवी ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) सिस्टम से लैस हो जाती है, जिससे इसकी पकड़ और प्रदर्शन बेहतर हो जाता है। टाटा मोटर्स का दावा है कि सिएरा ईवी महज 5.8 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। कंपनी के अनुसार, यह अब तक भारत में लॉन्च हुई सबसे तेज इलेक्ट्रिक एसयूवी है।

Tata Sierra EV: डिजाइन और फीचर्स

Tata Sierra EV का डिजाइन काफी हद तक सिएरा के पेट्रोल-डीजल (आईसीई) मॉडल जैसा है, लेकिन इसे इलेक्ट्रिक एसयूवी का आधुनिक लुक देने के लिए कई खास बदलाव किए गए हैं। इसमें आगे की तरफ पारंपरिक ग्रिल की जगह बंद फ्रंट पैनल दिया गया है, जो आज की ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारों की पहचान बन चुका है। इसके अलावा कार के फ्रंट बंपर को भी नया डिजाइन दिया गया है, जिससे इसका लुक और ज्यादा आकर्षक दिखाई देता है। वहीं, पीछे की तरफ कार के डिजाइन में ज्यादा बदलाव नहीं किए गए हैं। इसका रियर लुक पेट्रोल-डीजल मॉडल जैसा ही रखा गया है, जिससे सिएरा की पहचान बरकरार रहती है।

योगी सरकार ने गन्ना किसानों को किया 31,682 करोड़ का भुगतान

up government sugarcane farmers payment: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के हितों की रक्षा और उनकी आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में नया कीर्तिमान बनाया है। प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना किसानों को 31,682 करोड़ रुपये का भुगतान किया। वहीं वर्ष 2017 से गन्ना किसानों को अब तक 3,23,572 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान किया है। देश का सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला उत्तर प्रदेश निरंतर प्रथम स्थान पर बना हुआ है। 

 

गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के अनुसार वर्ष 1995 से 2017 तक के 22 वर्ष में किसानों को कुल 2,13,519 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, जबकि वर्तमान सरकार ने मात्र नौ वर्ष में ही इससे 1,10,053 करोड़ रुपये अधिक भुगतान करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है। वहीं वर्ष 2007 से 2017 (10 वर्ष) में कुल 1,47,346 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, जबकि वर्ष 2017 से अब तक 3,23,572 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

मिलों ने 89.52 लाख टन चीनी का उत्पादन किया 

प्रदेश में योगी सरकार की किसान हितैषी नीतियों का असर वर्तमान पेराई सत्र 2025-26 में भी दिखाई दे रहा है। इस सत्र में अब तक किसानों को 31,682 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जो कुल देय राशि का 91.64 प्रतिशत है। गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की हैं। पेराई सत्र 2025-26 में प्रदेश की 121 संचालित चीनी मिलों ने 878.12 लाख टन गन्ने की पेराई कर 89.52 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। 

10 लाख लोगों को मिला रोजगार 

मार्च 2017 से अब तक प्रदेश में 04 नई चीनी मिलों की स्थापना की गई है, जबकि 07 बंद चीनी मिलों का पुनर्संचालन किया गया है। इसके अलावा 42 निजी क्षेत्र, 01 निगम क्षेत्र और 01 सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों में क्षमता विस्तार किया गया है। इन प्रयासों से 1,28,500 टीसीडी अतिरिक्त पेराई क्षमता का सृजन हुआ है। नई औद्योगिक इकाइयों और क्षमता विस्तार के परिणामस्वरूप लगभग 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है।

गन्ना के क्षेत्रफल में भी हुई काफी वृद्धि 

उत्तर प्रदेश में 2016-17 में प्रदेश का गन्ना क्षेत्रफल 20.54 लाख हेक्टेयर था, जो नौ वर्षों में 39.29 प्रतिशत बढ़कर 28.61 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसी अवधि में गन्ने की औसत उत्पादकता 72.38 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 83.25 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है। उन्नत गन्ना प्रजातियों, वैज्ञानिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से प्रति हेक्टेयर 10.87 टन की वृद्धि दर्ज की गई है।

गन्ना किसानों की संख्या में भी बड़ी वृद्धि 

गन्ना किसानों की संख्या भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2016-17 में प्रदेश में लगभग 33 लाख गन्ना किसान थे, जिनकी संख्या वर्तमान में बढ़कर 48 लाख हो गई है यानी नौ वर्ष में 15 लाख किसानों की वृद्धि हुई है। बढ़ते क्षेत्रफल, बेहतर उत्पादकता, रिकॉर्ड भुगतान और किसानों की संख्या में वृद्धि यह दर्शाती है कि प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण गन्ना किसानों की आय में वृद्धि हुई है। इन्हीं उपलब्धियों के बल पर उत्तर प्रदेश आज देश में गन्ना उत्पादन और गन्ना मूल्य भुगतान दोनों क्षेत्रों में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित हो चुका है।

कभी सोचा है बारिश के बाद अचानक क्यों बढ़ जाते हैं मच्छर? जानें इसके पीछे की वजह

देश के कई इलाकों में बारिश शुरू होने से गर्मी से राहत मिली है। बारिश के साथ मच्छरों की संख्या भी तेजी से बढ़ने लगती है। बरसात के मौसम में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों को पनपने का अनुकूल माहौल मिल जाता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में मच्छरों से बचाव करना बेहद जरूरी है। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि बारिश के बाद मच्छर अचानक इतने ज्यादा क्यों बढ़ जाते हैं और उनसे बचाव के लिए क्या सावधानियां अपनानी चाहिए।

घर में पानी ना जमा होने दें

बारिश के बाद बाल्टी, कूलर, गमले, पुराने टायर, नालियों और गड्ढों में पानी जमा हो जाता है। यही रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी वजह बनता है। मादा मच्छर इसमें अंडे देती हैं, जो कुछ ही दिनों में लार्वा बन जाते हैं और करीब एक सप्ताह के भीतर बड़े मच्छरों में बदल जाते हैं। यही वजह है कि तेज बारिश के कुछ दिन बाद मच्छरों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। बारिश का जमा पानी उनके लिए पनपने की सही जगह बन जाता है। इसके अलावा, बारिश के बाद हवा में नमी बढ़ने से मच्छरों को लंबे समय तक जीवित रहने और ज्यादा एक्टिव रहने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है।

बारिश में मच्छरों का खतरा बढ़ जाता है

बारिश रुकने के बाद मच्छर आमतौर पर झाड़ियों, पौधों के नीचे, दीवारों के किनारे और घर के बरामदे जैसी ठंडी व नम जगहों पर छिपे रहते हैं। ये स्थान उन्हें धूप से बचाते हैं। सुबह और शाम के समय मच्छर सबसे ज्यादा एक्टिव होते हैं, इसलिए बारिश के बाद इन घंटों में उनके काटने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। दिलचस्प बात ये है कि बारिश मच्छरों को आसानी से नुकसान नहीं पहुंचाती। बारिश की बूंदें उनसे कई गुना बड़ी और भारी होती हैं, फिर भी मच्छर अपनी हल्की बनावट और मजबूत बाहरी परत की वजह से इनसे बच जाते हैं। कई बार बारिश की बूंद उन्हें कुचलने के बजाय अपने साथ बहा ले जाती है, जिससे वे फिर भी जीवित रह सकते हैं।

कैसे करें बचत

बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन बीमारियों से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दिया जाए, क्योंकि यही मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी वजह होती है।

Tata Sierra EV interior image gallery

Tata Sierra EV interior

Tata has launched the Sierra EV at a starting price of Rs 18.79 lakh. It gets a similar interior to its ICE counterpart, but gets a black and grey theme this time. The dashboard is dominated by a triple-screen setup for the digital driver’s display, infotainment system, and a passenger display. Other features include ambient lighting, a 12-speaker JBL Black sound system, dual-zone climate control, a panoramic sunroof, manual Boss mode, a cabin air purifier, powered and ventilated front seats, a powered tailgate, Level 2 ADAS, connected car tech, auto park assist, a heads-up display, a digital key, and over-the-air (OTA) updates. Swipe to check out the Tata Sierra EV interior, along with its features, through our image gallery.

Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा सावन का महीना, इन तिथियों पर जलाभिषेक दिलाएगा भगवान शिव का आशीर्वाद

Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है। इस माह में शिव भक्त अपने आराध्य की पूजा, उपवास और जलाभिषे या रुद्राभिषेक करते हैं। माना जाता है कि इस माह में माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। इस माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ा लाते हैं अपने भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस साल सावन का महीना गुरुवार, 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है। वहीं, इस पावन माह का समापन शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के पर्व के साथ होगा।

आमतौर से जलाभिषेक सावन की शिवरात्रि को किया जाता है। लेकिन इसके अलावा इस माह में पड़ने वाली विशेष तिथियों पर जलाभिषेक विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इनमें सावन की शिवरात्रि के अलावा सावन के सभी सोमवार, दोनों प्रदोष व्रत, नाग पंचमी, हरियाली तीज और श्रावणी पूर्णिमा भी जलाभिषेक शुभ माना जाता है। आइए जानें साल 2026 में सावन (श्रावण) महीने में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:

सावन शिवरात्रि : कावड़ यात्रा और सामान्य भक्तों के लिए सावन महीने में जलाभिषेक का सबसे मुख्य दिन सावन शिवरात्रि माना जाता है। इस साल यह 11 अगस्त 2026 को होगी। इस दिन कावड़िए और भक्त भगवान शिव को जलाभिषेक करते हैं।

हरियाली तीज : सावन में शिव जी की पूजा के लिए हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 को रहेगी। इस दिन महादेव पर जल चढ़ाने वालों को सुयोग्य जीवनसाथी पाने में मदद मिलती है।

सावन पूर्णिमा : सावन पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 को है। इस दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। सावन पूर्णिमा पर जलाभिषेक कर शिव जी की साधना करने वालों को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलता है।

सावन सोमवार की तिथियां : सावन के सभी सोमवार जलाभिषेक के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि) के पंचांग के अनुसार तिथियां निम्न हैं:

पहला सोमवार: 03 अगस्त 2026

दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026

तीसरा सोमवार : तीसरा सोमवार 17 अगस्त 2026 को होगा। इस दिन नाग पंचमी भी है, जिससे इस सोमवार का महत्व और बढ़ गया है।

चौथा सोमवार : 24 अगस्त 2026

Ashadha Gupt Navratri 2026: कब से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि? आइए जानें सही तारीख, घटस्थापना का मुहूर्त और पूजा विधि

Tata Sierra EV exterior in images

Tata-Sierra-EV-front-quarter

The new Tata Sierra EV largely carries forward the same design as its ICE-powered sibling, save for some ‘.ev’ badging and some changes to the fascia. A body-coloured blanked-off grille has replaced the regular Sierra’s blacked-out, functional unit. The lighting elements remain exactly the same, but unlike the ICE Sierra, the EV lacks the ‘Sierra’ branding just below the LED light bar. Lower down, the bumper has a gloss-black finish and a faux silver skid plate on the chin. In essence, the colourways have been reversed here. Elsewhere, the Sierra’s signature curved-over rear windows, butch stance, slim LED light bands and even the alloy wheels have been carried forward unchanged. Prices for the Sierra EV range between Rs 18.79 lakh and Rs 25.99 lakh (ex-showroom). 

UPTET 2026 : मुख्यमंत्री योगी के सख्त निर्देश, 20 लाख अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था; सेवारत शिक्षकों के लिए होगी विशेष TET

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 प्रदेश के लाखों युवाओं की आकांक्षाओं से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा है। इसकी निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। परीक्षा का संचालन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के प्रति सरकार की जवाबदेही का विषय है।

प्रत्येक अभ्यर्थी को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तनावमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि परीक्षा में शामिल होने वाले किसी भी अभ्यर्थी को आवागमन, प्रवास, सुरक्षा अथवा अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

 

मुख्यमंत्री मंगलवार को आगामी 02, 03 एवं 04 जुलाई, 2026 को आयोजित होने वाली उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा-2026 की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा कर रहे थे। 

 

इस दौरान, मुख्यमंत्री ने सेवारत शिक्षकों के हितों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को देखते हुए कार्यरत शिक्षकों को अपनी पात्रता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को सेवारत शिक्षकों के लिए पृथक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें अधिक अवसर मिल सकें और केवल अवसर के अभाव में किसी शिक्षक को कठिनाई का सामना न करना पड़े।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रदेश के विभिन्न जनपदों के साथ अन्य राज्यों से भी आएंगे। ऐसे में रेलवे स्टेशन, बस अड्डों तथा प्रमुख यातायात केन्द्रों पर पर्याप्त सहायता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अभ्यर्थियों को परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। परिवहन निगम, रेलवे तथा आवश्यकतानुसार निजी स्थानीय परिवहन संचालकों के साथ समन्वय स्थापित कर अतिरिक्त परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। परीक्षा के पूर्व एवं पश्चात संभावित भीड़ को देखते हुए प्रभावी यातायात प्रबंधन किया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेष व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बड़ी संख्या में युवाओं के आवागमन के दौरान खाद्य एवं पेय पदार्थों के मूल्य अनावश्यक रूप से न बढ़ाए जाएं।

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी परीक्षा केन्द्रों पर पेयजल, स्वच्छ शौचालय, छायादार प्रतीक्षास्थल, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, अग्निशमन व्यवस्था तथा आकस्मिक चिकित्सा सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहे। वर्तमान मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह सक्रिय रखा जाए। प्रत्येक जनपद में स्थापित कंट्रोल रूम प्रभावी ढंग से कार्य करें तथा किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े सभी जिलाधिकारियों को मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परीक्षा के सफल एवं त्रुटिरहित संचालन के लिए एक दिन पूर्व सभी व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास अनिवार्य रूप से कर लिया जाए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा की शुचिता सर्वोपरि है। परीक्षा ड्यूटी में केवल स्वच्छ छवि वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ही तैनाती की जाए। गोपनीय परीक्षा सामग्री के भंडारण, परिवहन तथा परीक्षा उपरांत आयोग तक उसके सुरक्षित प्रेषण की पूरी प्रक्रिया उच्चतम सुरक्षा मानकों के अनुरूप संपन्न कराई जाए। उन्होंने सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों पर अफवाह, भ्रामक अथवा गलत सूचनाएं प्रसारित करने के प्रयासों पर कड़ी निगरानी रखने और ऐसे मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 

बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा-2026 का आयोजन प्रदेश के 60 जनपदों में स्थापित 955 परीक्षा केन्द्रों पर किया जाएगा। परीक्षा 02 से 04 जुलाई तक कुल पांच पालियों में आयोजित होगी। 02 जुलाई को दोनों पालियों में उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा होगी। 03 जुलाई को प्रथम पाली में उच्च प्राथमिक तथा द्वितीय पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा आयोजित की जाएगी। 04 जुलाई को प्रथम पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा संपन्न होगी।

 

बैठक में बताया गया कि परीक्षा में कुल 19,94,661 अभ्यर्थी सम्मिलित होंगे। इनमें 17,67,180 अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश के हैं, जबकि 2,27,481 अभ्यर्थी अन्य राज्यों से परीक्षा देने आएंगे। परीक्षा में 1,85,791 सेवारत शिक्षक तथा 18,08,870 नए अभ्यर्थी सम्मिलित होंगे। प्राथमिक स्तर के लिए 3,88,179, उच्च प्राथमिक स्तर के लिए 8,16,436 तथा दोनों स्तरों के लिए 3,95,023 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है।

 

बैठक में यह भी बताया गया कि सर्वाधिक परीक्षा केन्द्र एवं अभ्यर्थियों वाले जनपदों में वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर नगर, मेरठ, मऊ, मुरादाबाद, आगरा तथा जौनपुर प्रमुख हैं। वाराणसी में 68 परीक्षा केन्द्रों पर 1,27,239 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। प्रयागराज में 53 परीक्षा केन्द्रों पर 76,634 तथा लखनऊ में 43 परीक्षा केन्द्रों पर 76,720 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। इन जनपदों में बाहरी जिलों एवं अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आगमन को देखते हुए यातायात, सुरक्षा, चिकित्सीय सहायता तथा प्रवास संबंधी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कर्नाटक का हर नया CM घर की तलाश में क्यों जुट जाता है? डीके शिवकुमार ने 160 साल पुराना जो बंगला चुना वो बेहद खास!

भारत के कुछ ही राज्य ऐसे हैं जहां मुख्यमंत्री के स्थायी निवास के लिए कोई आधिकारिक सरकारी बंगला तय नहीं है और कर्नाटक उन्हीं राज्यों में से एक है। यही वजह है कि राज्य में जब भी सत्ता परिवर्तन होता है या नया नेतृत्व आता है तो उनके लिए घर की तलाश शुरू हो जाती है। बंगलों की ये तलाश कई बार जरूरत से ज्यादा वास्तु के मापदंडों की कसौटी पर भी कसी जाने लगती है। आप एक तरह से कह सकते हैं कि बेंगलुरु में एक घर ढूंढना किसी के लिए आसान नहीं है, यहां तक कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री के लिए भी नहीं। ये मामला इस वक्त चर्चा में इसलिए है क्योंकि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने रहने और कार्यालय के लिए लगभग 160 साल पुराने कुमार कृपा (Kumara Krupa) बंगले को चुना है। लोक निर्माण विभाग (PWD) इस हेरिटेज प्रॉपर्टी को रिनोवेट करने में जुटा है। यह नौबत इसलिए आई क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कावेरी बंगले में ही रहने का फैसला किया है। यह बंगला आमतौर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों से सबसे करीब से जुड़ा रहा है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि कर्नाटक में हर नए मुख्यमंत्री के सामने आखिर आवास की यह पहेली क्यों खड़ी हो जाती है और इसके पीछे क्या सियासी व ऐतिहासिक कारण हैं।

क्या कर्नाटक में मुख्यमंत्री का कोई आधिकारिक स्थायी निवास है?

इसका जवाब ना में है। कर्नाटक में कभी भी किसी सरकारी बंगले को मुख्यमंत्री के स्थायी निवास के रूप में औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया है। पिछले कई दशकों से अलग-अलग मुख्यमंत्री अपनी सुविधा के अनुसार विभिन्न सरकारी संपत्तियों में रहते आए हैं। वैसे 1980 के दशक से कुमार कृपा रोड पर स्थित दो आस-पास के बंगले कृष्णा और कावेरी सीएम आवास से ज्यादा करीब से जुड़े माने जा सकते हैं। कृष्णा बंगले का इस्तेमाल आधिकारिक बैठकों और प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाता है जबकि कावेरी सीएम आवास के रूप में इस्तेमाल होता है।

कावेरी बंगले का इतिहास और सिद्धारमैया का जुड़ाव

पूर्व मुख्यमंत्री आर गुंडू राव 1980 में कावेरी बंगले में रहने वाले पहले मुख्यमंत्री थे। उनके बाद सिद्धारमैया, बीएस येदियुरप्पा, जगदीश शेट्टार, जेएच पटेल, एस बंगारप्पा और वीरेंद्र पाटिल जैसे कई दिग्गज मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के दौरान इस बंगले में रहे। दिलचस्प बात यह है कि कावेरी में रहने वाले मुख्यमंत्रियों में से सिद्धारमैया एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने अपना पांच साल का पूरा कार्यकाल पूरा किया है। चूंकि सिद्धारमैया इस बार भी कावेरी को छोड़ने के मूड में नहीं हैं इसलिए नए नेतृत्व के लिए नया घर ढूंढने का एक टास्क सामने आ गया।

हर नए सीएम के सामने क्यों खड़ी होती है आवास की पहेली?

इसकी सीधी सी वजह यह है कि मुख्यमंत्री पद के लिए कोई भी आवास स्थायी रूप से आरक्षित नहीं है। जब कोई नया मुख्यमंत्री पद संभालता है तो उनका पसंदीदा बंगला पहले से ही किसी पूर्व मुख्यमंत्री या किसी अन्य संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी के पास हो सकता है। कई मामलों में नए रहने वाले के आने से पहले बंगले में बड़े पैमाने पर रिनोवेशन की जरूरत होती है। इसके अलावा कुछ मुख्यमंत्री सरकारी बंगले में जाने के बजाय अपने निजी घरों में ही रहना पसंद करते हैं। परिणाम यह होता है कि हर बार इस बात को लेकर होड़ मचती है कि कौन सी संपत्ति मुख्यमंत्री का आधिकारिक निवास बनेगी।

डीके शिवकुमार ने क्यों चुना 160 साल पुराना कुमार कृपा बंगला?

चूंकि सिद्धारमैया कावेरी में ही रहेंगे, इसलिए शिवकुमार ने ‘कुमार कृपा’ को अपना आधिकारिक निवास और ‘कृष्णा’ को अपना ऑफिस चुना है। कुमार कृपा बंगला 12 कमरों का है और एक सरकारी गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल हो रहा था। अब इसका रिनोवेशन किया जा रहा है।

विपक्ष कर रहा आलोचना, जानिए इस बंगले का ऐतिहासिक महत्व

शिवकुमार के इस फैसले की जेडीएस ने कड़ी आलोचना की है। जेडीएस का तर्क है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को उसके मौजूदा स्वरूप में ही संरक्षित किया जाना चाहिए। इस बंगले का एक बड़ा ऐतिहासिक महत्व है। यह बंगला मूल रूप से 1883 से 1901 तक मैसूर के दीवान रहे के शेषाद्रि अय्यर का निवास स्थान था। साल 1927 में बेंगलुरु यात्रा के दौरान महात्मा गांधी भी इसी कुमार कृपा बंगले में रुके थे।

अनुग्रह बंगला: आखिर इसे क्यों माना जाता है अशुभ?

राजनीतिक गलियारों में अनुग्रह बंगले को जिंक्सड यानी मनहूस या अशुभ माना जाता है। कहते हैं कि जो भी मुख्यमंत्री इस बंगले में रहने गया वो अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका। इस बंगले में रहने वाले पूर्व मुख्यमंत्रियों में एचडी देवेगौड़ा, धरम सिंह और डीवी सदानंद गौड़ा शामिल हैं। इन सभी का कार्यकाल समय से पहले खत्म हो गया। पूर्व सीएम एसएम कृष्णा ने भी भी अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही विधानसभा भंग कर दी थी। पिछले सालों से इस बंगले में कई बार वास्तु बदलाव भी किए गए लेकिन नेताओं के मन से इसका डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

राजनीतिक सलाहकार वेंकटेश थोगरीघट्टा बताते हैं कि यह कहना मुश्किल है कि अनुग्रह खराब वास्तु से पीड़ित है या केवल दुर्भाग्य का शिकार है। लेकिन पिछले तीन दशकों में इस बंगले को चुनने वाले कम से कम चार मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल बहुत छोटा रहा है। यह बात स्वाभाविक रूप से नए मुख्यमंत्रियों के दिमाग में घर चुनते समय असर डालती है। यही कारण है कि कई मुख्यमंत्री ताज वेस्ट एंड के पास स्थित रेस व्यू कॉटेज जैसे अन्य सरकारी आवासों को प्राथमिकता देते रहे हैं।

क्या वास्तु की मान्यताएं निर्णय को प्रभावित करती हैं?

कुछ मुख्यमंत्रियों ने अपने आवासों और कार्यालयों का चयन या उनमें बदलाव करते समय सार्वजनिक रूप से वास्तु पर विचार करने की बात स्वीकार की है। कुछ अन्य मुख्यमंत्रियों ने ऐसी चिंताओं को खारिज करते हुए प्रशासनिक सुविधा को प्राथमिकता दी है। कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक चूंकि कोई भी बंगला आधिकारिक तौर पर सीएम निवास के रूप में अधिसूचित नहीं है इसलिए मुख्यमंत्री उपलब्ध सरकारी संपत्तियों में से कोई भी चुनने के लिए स्वतंत्र हैं।

क्या कर्नाटक में एक स्थायी सीएम आवास होना चाहिए?

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली का मानना है कि राज्य में एक स्थायी मुख्यमंत्री आवास होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के लिए एक निश्चित और नामित आवास होना चाहिए। ऐसा न होने से, हर बार जब कोई नया मुख्यमंत्री आता है तो सरकार एक अलग घर तैयार करने में पैसा खर्च करती है। एक स्थायी आवास होने से बार-बार होने वाले इस रिनोवेशन के खर्च से बचा जा सकता है।

‘हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं’, PoK में प्रदर्शनकारियों का ऐलान, आखिरी अल्टीमेटम से उड़ी शाहबाज और मुनीर की नींद

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन मंगलवार को और तेज हो गए। प्रदर्शनकारियों ने खुलकर इस्लामाबाद के अधिकार को चुनौती देते हुए कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बयान रावलाकोट के ईदगाह ग्राउंड में आयोजित एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान दिया गया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि आवश्यक खाद्य सामग्री और राशन की आपूर्ति बाधित की गई तो वे अपने अस्तित्व के लिए 'दूसरे रास्ते' अपनाने को मजबूर होंगे। प्रदर्शनकारियों ने तानाशाही के खिलाफ‍ बिगुल फूंक दिया है। 

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नहीं बर्दाश्त करेंगे सामूहिक सजा 

रावलाकोट के ईदगाह ग्राउंड में सैकड़ों लोग खाद्य संकट, महंगाई और खराब प्रशासन के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार जानबूझकर राशन और जरूरी सामान की आपूर्ति रोककर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

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 प्रदर्शनकारियों ने लगाए सामूहिक सजा देने के आरोप

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए PoK के नेता सरदार अमन खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार आम नागरिकों को सामूहिक रूप से सजा देने के उद्देश्य से जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित कर रही है। उन्होंने कहा कि हमें आपके राशन की जरूरत नहीं, बल्कि आपको हमारी जरूरत है।

अगर खाद्य आपूर्ति बंद रही तो लोग अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए दूसरे रास्ते तलाशेंगे। यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहा है। पाकिस्तान सरकार ने इसी महीने आतंकवाद निरोधी कानूनों के तहत इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई इलाकों में प्रदर्शन लगातार जारी हैं।

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रक्षा मंत्री के बयान से बढ़ा विवाद

हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने रावलाकोट और मीरपुर के लोगों को वास्तविक कश्मीरी नहीं” बताया था। उनके इस बयान के बाद स्थानीय नेताओं और लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली, जिससे इस्लामाबाद और स्थानीय नेतृत्व के बीच तनाव और बढ़ गया।

 

आतंकवाद विरोधी कानून के तहत कार्रवाई

रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में यह आंदोलन महंगाई, खाद्य संकट और बेहतर प्रशासन की मांग को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन अब पाकिस्तान सरकार इसे सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रही है। बताया जा रहा है कि सरदार अमन खान समेत अवामी एक्शन कमेटी के कई नेताओं के खिलाफ आतंकवाद निरोधी कानून के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। इससे आंदोलन से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी और व्यापक कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

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इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित

रिपोर्ट्स के मुताबिक जून की शुरुआत से ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगा हुआ है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार आंदोलन की तस्वीरें और वीडियो दुनिया तक पहुंचने से रोकने के लिए इंटरनेट बंद कर रही है।

 

लगातार जारी प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ टकराव के कारण कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रभावित इलाकों में खाद्य सामग्री की कमी की भी खबरें हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले दो सप्ताह में हुई झड़पों में कम से कम 22 लोगों की मौत हो चुकी है। Edited by : Sudhir Sharma

CM योगी ने रामपुर और बिलासपुर को दी 700 करोड़ से ज्‍यादा लागत वाली विकास परियोजनाओं की सौगात, आस्था के अपमान पर विपक्ष पर किया कड़ा प्रहार

Chief Minister Yogi Adityanath targeted SP and Congress

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनता समझ चुकी है इन कालनेमियों का झूठ व दोहरा चरित्र

– रामभक्तों की ताकत से सपा-कांग्रेस को बनना पड़ा उनका पिछलग्गू

– तीर्थस्थलों के विकास से चिढ़ी सपा-कांग्रेस कर रहीं जनता को गुमराह

– सपा शासन में अवैध कब्जों व प्रताड़ना के काम आता था रामपुर का चाकू

– बिलासपुर की रुद्रविलास चीनी मिल का होगा पुनरुद्धार व विस्तारी

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आस्था व विरासत के अपमान पर विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग 2017 से पहले कांवड़ यात्रा रोकने, त्योहारों पर बंदिशें लगाने और 'जय श्रीराम' बोलने पर लाठी-गोली चलवाते थे, आज वे अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख आस्था की वकालत कर रहे हैं। जो कांग्रेस प्रभु श्रीराम व श्रीकृष्ण के अस्तित्व को ही नकार चुकी थी, वह भी 'राम सबके हैं' कहकर अयोध्या जाने के लिए मचल रही है। उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना 'कालनेमी' के छल-कपट से करते हुए कहा कि जनता इनके झूठ व दोहरे चरित्र को अच्छी तरह समझ चुकी है।

 

मुख्यमंत्री मंगलवार को रामपुर जनपद के मिलक व बिलासपुर विधानसभा क्षेत्रों की 700 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाली 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इंटरमीडिएट/हाईस्कूल परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के लाभार्थियों को चेक वितरित किए। साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के पात्र परिजनों को अनुदान राशि और मुख्यमंत्री सामाजिक विकास में विशेष योगदान देने वाले व्यापारियों का सम्मानित भी किया।

 

प्रभु श्रीराम जानते हैं कौन सही और कौन बुरा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देखिए रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने वाले रामभक्ति की दुहाई दे रहे हैं, वकालत कर रहे हैं। यह रामभक्तों की, आपके वोटबैंक की ताकत है कि ये पार्टियां आपकी पिछलग्गू बन रही हैं। उन्हें अपने पापों, कर्मों पर पश्चाताप भी होता होगा।

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लेकिन प्रभु श्रीराम तो जग नियंता हैं, ब्रह्मांड के स्वामी हैं। उन्हें पता है कि कौन सही है और कौन बुरा। दरअसल, सपा-कांग्रेस को चिढ़ यह है कि अयोध्याधाम, काशी-विश्वनाथ धाम, मां विंध्यवासिनी धाम, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज धाम, नैमिषारण्य, शुक्रतीर्थ इतने सुंदर कैसे हो गए। वे इसे रोकना चाहते थे, नहीं कर सके तो चिढ़ गए। कुछ नहीं मिला तो झूठ का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने लगे।

 

कांग्रेस-सपा का शासन अन्याय का प्रतीक

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस व सपा शासनकाल अन्याय व अराजकता का प्रतीक रहा है। 2017 से पहले सपा की निरंकुश सत्ता में रामपुर के गरीबों और बाल्मीकि समुदाय की जमीनों पर जबरन कब्जा किया जाता था और उनकी आवाज को दबा दिया जाता था। विकास केवल सैफई व रामपुर के दो परिवारों तक सीमित था, जबकि बाकी जनता को विकास से वंचित रखा जाता था। बिजली देने में भी 'पिक एंड चूज' की नीति अपनाई जाती थी, जिससे सैफई में बिजली आती थी लेकिन पीलीभीत व रामपुर जैसे क्षेत्र अंधेरे में रहते थे।

जनता जनार्दन ने इस अन्यायी सत्ता को पलटकर पूरे राज्य में संदेश दिया। डबल इंजन सरकार में ‘पिक एंड चूज’ नहीं होता। बिजली सभी 75 जनपदों में आएगी। जहां भी आवश्यकता थी, इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, पॉलिटेक्निक, आईटीआई दिए। अब कोई विकास नहीं रोक सकता, नौजवान के भविष्य से खिलवाड़ नहीं कर सकता, बहन-बेटी का अपमान नहीं कर सकता।

 

वसूली पर निकल पड़ती थी चाचा-भतीजा की जोड़ी

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपा शासन में भ्रष्टाचार के चलते उद्योग बंद होते गए। अन्नदाता किसान हताश होकर आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया। न तो गरीब कल्याण के लिए कोई योजना थी और न विकास कार्यों के लिए धन। युवाओं के भविष्य से जमकर खिलवाड़ किया गया।

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अराजकता का यह हाल था कि कोई सरकारी विज्ञापन निकलता था तो 'चाचा-भतीजा की जोड़ी' वसूली के लिए निकल पड़ती थी और कोर्ट को भर्तियों पर रोक लगानी पड़ती थी। सपा व कांग्रेस के इन्हीं पापों से यूपी बीमारू बना था।

 

विरासत और विकास का नया मॉडल

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामपुर की पावन धरा भगवान बामेश्वर महादेव, श्री पातलेश्वर महादेव, ओम नागेश्वर महादेव, कोसी मंदिर व मां बाला सुंदरी के दिव्य आशीर्वाद से निरंतर लाभान्वित है। सरकार इन पौराणिक व आध्यात्मिक विरासत स्थलों के पुनरुद्धार के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। 2017 से पहले जहां त्योहारों पर रोक लगाई जाती थी।

उपद्रव व दंगे होते थे, वहीं आज कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, दीपावली, रामनवमी व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे सभी पर्व पूरी भव्यता व सुरक्षा के साथ मनाए जा रहे हैं। अयोध्या नगरी ब्रॉडगेज डबल रेलवे लाइन, फोर-लेन सड़क मार्ग और महर्षि बाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़कर त्रेतायुग का स्मरण करा रही है।

आर्थिक प्रगति व इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अब 'बीमारू राज्य' नहीं रहा, बल्कि यह भारत की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर सबसे तेज गति से बढ़ने वाली इकोनॉमी बन चुका है। प्रदेश आज युवाओं को रोजगार और अन्नदाताओं को अनुदान देने में अग्रणी है। हम खाद्यान्न, दुग्ध, चीनी व एथेनॉल उत्पादन में देश में पहले या दूसरे नंबर पर गिने जाते हैं।

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'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' योजना के माध्यम से रामपुर के पैच वर्क, जरी वर्क, वायलिन निर्माण व मेंथा उत्पादन जैसे पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक पहचान और युवाओं को नए रोजगार मिले हैं। रामपुर के प्रसिद्ध चाकू का दुरुपयोग समाजवादी पार्टी जनता की जमीनों पर कब्जा करने और उन्हें प्रताड़ित करने में करती थी, लेकिन डबल इंजन सरकार में यही चाकू जनता की सुरक्षा में काम आ रहा है।

 

रामपुर में चौतरफा विकास

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोरखपुर-शामली नया इकोनॉमिक कॉरिडोर रामपुर से होकर गुजरेगा, जो गोरखपुर को सिलीगुड़ी और शामली को पानीपत से जोड़कर क्षेत्र में विकास को और मजबूत करेगा। रामपुर में ढांचागत विकास को गति देते हुए 3 मीटर चौड़ी सड़कों को 7 व 10 मीटर और फोर-लेन में परिवर्तित किया जा रहा है। बिलासपुर की रुद्रविलास चीनी मिल के पुनरुद्धार व विस्तारीकरण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सर्वे रिपोर्ट आते ही सरकार वित्तीय राशि जारी करेगी।

 

सबका साथ-सबका विकास ही मूलमंत्र

 मुख्यमंत्री ने कहा कि 'सबका साथ, सबका विकास' के मूलमंत्र के साथ डबल इंजन की सरकार तुष्टिकरण के बजाय आमजन के संतुष्टिकरण पर विश्वास करती है। प्रदेश की 96 लाख एमएसएमई यूनिट्स को राज्य सरकार द्वारा 5 लाख रुपए का सुरक्षा बीमा कवर प्रदान किया गया है। हर महीने ई-पॉस मशीनों के माध्यम से लखनऊ से सीधे मॉनिटरिंग कर गरीबों को शत-प्रतिशत राशन मिल रहा है। रसोई गैस का सिलेंडर 2017 से पहले सपना था, आज हर गरीब के पास सिलेंडर अपना है।

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गरीबों को आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य कार्ड मिला है। कार्ड न होने पर मुख्यमंत्री राहत कोष से उपचार के लिए संपूर्ण राशि दी जा रही है। प्रत्येक तहसील में फायर स्टेशन की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत बेसिक शिक्षा परिषद् के स्कूलों और 'प्रोजेक्ट अलंकार' के माध्यम से इंटर कॉलेजों को भव्य स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।

 

निवेश प्रस्तावों से मिली उद्योगों को गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत का सम्मान हो या नौजवानों को नौकरी देने का संकल्प, सरकार हर मोर्चे पर प्रतिबद्ध है। सरकारी भर्तियों के नियुक्ति पत्र वितरण में रामपुर के युवाओं का नाम देखकर संतोष मिलता है। पहले जो युवा वंचित थे, आज प्रदेश की सेवाओं में चयनित होकर विकास में भागीदार बन रहे हैं। रामपुर, मिलक, बिलासपुर, स्वार व चमरौआ विधानसभा क्षेत्रों के युवा आज सरकारी नौकरियों और उद्योगों में अवसर पा रहे हैं। निवेश प्रस्तावों से उद्योगों को गति मिली है।

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इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, कृषि राज्य मंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख, विधायक श्रीमती राजबाला सिंह, आकाश सक्सेना, शफीक अहमद अंसारी, एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त, हरी सिंह ढिल्लो, जिला पंचायत अध्यक्ष ख्यालीराम लोधी, सूर्य प्रकाश पाल, पूर्व सांसद घनश्याम लोधी, पूर्व विधायक शिव बहादुर सक्सेना, भाजपा जिला अध्यक्ष हरीश गंगवार आदि उपस्थित रहे।