Live : हरिद्वार से इंदौर जा रही बस में आग, 8 की मौत

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Latest News Today Live Updates in Hindi : राजस्थान के दौसा में दिल्ली एक्सप्रेस वे पर बस की ट्रक से भीषण टक्कर के बाद 8 लोगों की मौत हो गई। बस हरिद्वार से इंदौर जा रही थी। पल पल की जानकारी…

अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू में उमड़ी भारी भीड़। 2 जुलाई को बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जम्मू से रवाना होगा पहला जत्था।

-दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई।

-दौसा कांग्रेस सांसद मुरारी लाल मीणा ने कहा- रात को 3 बजे के आसपास बहुत दुखद दुर्घटना हुई है। अभी तक पता नहीं चल पाया है कि बस में कुल कितने लोग सवार थे। 8 शव मिले हैं, जो जल गए हैं। 11 व्यक्ति अस्पताल में भर्ती हैं। ये लोग हरिद्वार से आ रहे थे। ज्यादातर लोग मध्य प्रदेश के हैं, कुछ लोग महाराष्ट्र के हैं।

Railway Technician Vacancy 2026: रेलवे में 10वीं पास के लिए बड़ा मौका, टेक्नीशियन के बंपर पदों पर भर्ती शुरू

Railway Technician Vacancy 2026: सरकारी नौकरी करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए रेलवे में बंपर पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने टेक्नीशियन भर्ती 2026 का शॉर्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत रेलवे में ग्रेड I और टेक्नीशियन ग्रेड III के 6565 पदों पर भर्ती की जाएगी। इन पदों के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन कल जारी किया गया था और आज से आवेदन शुरू हो गए हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आरआरबी की आधिकारिक वेबसाइट पर 29 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। खास बात ये है कि इन पर आवेदन के लिए 10वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं।

इस पद के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को अंतिम समय में किसी भी तरह की समस्या से बचने के लिए समय सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए और फॉर्म भरना चाहिए। आरआरबी की टेक्नीशियन भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों का चयन तीन चरणों में किया जाएगा। सबसे पहले, कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) मोड में एक परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत ज्यादा खाली जगहों वाले प्रमुख रेलवे जोन में सेंट्रल रेलवे मुंबई, सदर्न रेलवे चेन्नई, नॉर्दर्न रेलवे नई दिल्ली और नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे शामिल हैं। देशभर के उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं क्योंकि नौकरी की जगह भारत के अलग-अलग रेलवे जोन में होगी।

आरआरबी टेक्नीशियन भर्ती 2026 में ये ले सकेंगे हिस्सा

आरआरबी टेक्नीशियन भर्ती 2026 के लिए उम्मीदवारों को 10वीं या SSLC पास होना जरूरी है। अभ्यर्थियों के पास मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित ट्रेड में आईटीआई सर्टिफिकेट भी होना चाहिए। संबंधित ट्रेड में एक्ट अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट रखने वाले उम्मीदवार भी कई पदों के लिए योग्य हैं।

उम्र सीमा

टेक्नीशियन ग्रेड III पद के लिए उम्मीदवारों की उम्र 18 से 30 साल के बीच होनी चाहिए। जबकि टेक्नीशियन ग्रेड I (सिग्नल) पद के लिए उम्र सीमा 18 से 33 साल है। आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलती है।

कैसे करें आवेदन

  • रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट rrbapply.gov.in पर जाएं।
  • आरआरबी टेक्नीशियन भर्ती के लिए अप्लाई लिंक पर क्लिक करें।
  • रजिस्ट्रेशन पूरा करें और नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल ID और आधार जैसी जानकारी भरें।
  • रजिस्ट्रेशन के दौरान मिले क्रेडेंशियल्स (लॉगिन डिटेल्स) से लॉग इन करें।
  • अपनी पर्सनल जानकारी, एजुकेशनल क्वालिफिकेशन, कैटेगरी और अन्य ज़रूरी जानकारी भरें।
  • जरूरी डॉक्यूमेंट्स को तय फॉर्मेट में अपलोड करें।
  • ऑनलाइन मोड से एप्लीकेशन फीस का भुगतान करें।
  • सभी जानकारी को दोबारा चेक करें और फॉर्म सबमिट करें।
  • भविष्य के लिए कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड कर लें।

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Operation Tiger: क्या देवेंद्र फडणवीस के साथ भी वही हो रहा है जो कभी आडवाणी, गडकरी और शिवराज सिंह चौहान के साथ हुआ था?

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operation tiger devendra fadnavis: भारतीय जनता पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने का रास्ता केवल चुनाव जिताने, विकास कार्य कराने या संगठन के प्रति निष्ठा दिखाने से नहीं बनता। कई बार सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर मौजूद शक्ति संतुलन होता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस को लेकर आज यही सवाल उठ रहा है।

 

पिछले एक दशक में फडणवीस ने लगभग वही राजनीतिक मॉडल अपनाया, जिसने कभी नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय राजनीति के शिखर तक पहुंचाया था। उन्होंने खुद को विकास पुरुष की छवि से जोड़ा, बड़े उद्योगपतियों और निवेशकों को महाराष्ट्र लाने की कोशिश की, बुनियादी ढांचे की राजनीति को आगे बढ़ाया और वैचारिक रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ‌(Rashtriya Swayamsevak Sangh) के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखा।

 

राजनीतिक विरोधी अक्सर उन पर उद्योगपति समूहों के करीब होने का आरोप लगाते रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे कभी मोदी पर लगाए जाते थे। लेकिन भारतीय राजनीति में बड़े उद्योग और बड़े विजन की राजनीति अक्सर साथ-साथ चलती है। समस्या तब शुरू होती है जब कोई क्षेत्रीय नेता अपनी राज्य सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय संभावना में बदलने लगता है।

ऑपरेशन टाइगर की असल कहानी

महाराष्ट्र में चल रहा कथित 'ऑपरेशन टाइगर' केवल उद्धव ठाकरे या उनकी पार्टी को कमजोर करने की कहानी नहीं हो सकती। इसकी एक दूसरी व्याख्या यह भी है कि राज्य में किसी एक नेता को अत्यधिक शक्तिशाली बनने से रोकने की कोशिश हो रही है।

उद्धव ठाकरे ने अपनी राजनीतिक क्षति के बावजूद कई बार संकेत दिए हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति में असली लड़ाई केवल शिवसेना की विरासत की नहीं, बल्कि भविष्य के नेतृत्व की भी है। वहीं राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि अमित शाह विभिन्न राज्यों में अलग-अलग शक्ति केंद्र तैयार कर रहे हैं ताकि भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति में समर्थन का व्यापक आधार मौजूद रहे। ये आरोप राजनीतिक हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक बहस में इनका महत्व है।

 

सवाल यह है कि क्या एकनाथ शिंदे का राजनीतिक महत्व केवल महाराष्ट्र की सत्ता तक सीमित है या उसके पीछे राष्ट्रीय रणनीति भी काम कर रही है?

 

भाजपा का इतिहास बताता है कि पार्टी में राष्ट्रीय नेतृत्व का उभार बेहद नियंत्रित और संगठित प्रक्रिया के तहत होता है। लालकृष्ण आडवाणी के पास जनाधार था, वैचारिक स्वीकार्यता थी और संगठन पर गहरी पकड़ थी, लेकिन प्रधानमंत्री पद उनसे दूर रह गया। 
 

राजनाथ सिंह पार्टी अध्यक्ष और सफल मुख्यमंत्री रहे, लेकिन राष्ट्रीय उत्तराधिकार की चर्चा में कभी निर्णायक स्थान नहीं बना सके। नितिन गडकरी को उनकी प्रशासनिक क्षमता और विकास मॉडल के बावजूद सीमित दायरे में रखा गया। शिवराज सिंह चौहान चार बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व की दौड़ में उनका नाम कभी गंभीरता से आगे नहीं बढ़ा।

क्या अब वही पैटर्न फडणवीस के सामने खड़ा है?

उनके पास प्रशासनिक अनुभव है, शहरी मतदाताओं में स्वीकार्यता है, निवेशकों का भरोसा है और संगठन में भी उनका विरोध नगण्य है। यही कारण है कि कई राजनीतिक विश्लेषक उन्हें भाजपा की अगली पीढ़ी के संभावित राष्ट्रीय चेहरों में गिनते हैं। लेकिन भारतीय राजनीति में संभावना और उत्तराधिकार दो अलग-अलग चीजें हैं।

 

भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका केंद्रीय नेतृत्व रहा है। ऐसे में पार्टी शायद ही कभी किसी राज्य नेता को इतना बड़ा होने देना चाहेगी कि वह समानांतर राष्ट्रीय केंद्र बन जाए। यही कारण है कि मजबूत क्षेत्रीय नेताओं के बीच संतुलन बनाए रखना भी संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा माना जाता है। 

 

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी और मात्र एक कयास होगा कि फडणवीस के प्रधानमंत्री बनने की राह में कोई राजनीतिक अवरोध खड़ा किया जा रहा है। लेकिन यह जरूर सच है कि महाराष्ट्र में बदलते समीकरणों को केवल राज्य की राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जा सकता।

 

क्योंकि दिल्ली की राजनीति में उत्तराधिकारी घोषित नहीं किए जाते, बल्कि समय के साथ तय होते हैं। और कई बार सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक लड़ाइयां चुनावी मंचों पर नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों में लड़ी जाती हैं।

Delhi-Mumbai Expressway Accident: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भयानक हादसा, ट्रक से टक्कर के बाद धू-धू कर जली बस, 2 की मौत और 17 घायल

Delhi-Mumbai Expressway Accident: राजस्थान के दौसा जिले में मंगलवार को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक बेहद दर्दनाक और भयानक सड़क हादसा सामने आया है। यहां एक बस और ट्रक के बीच हुई भीषण टक्कर के बाद बस में अचानक भीषण आग लग गई। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इस हादसे में कम से कम 2 यात्रियों की मौत हो गई है जबकि 17 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी होने के कारण अधिकारियों ने मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है।

अनियंत्रित होकर ट्रक से टकराई बस, बनी आग का गोला

पुलिस के मुताबिक यह यात्री बस हरिद्वार और इंदौर के बीच चल रही थी। मंगलवार को जब यह बस एक्सप्रेसवे पर दौसा जिले के कोलवा थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक रेस्ट एरिया के पास पहुंची तभी ड्राइवर ने गाड़ी पर से नियंत्रण खो दिया। अनियंत्रित होने के बाद बस वहां खड़े या जा रहे एक ट्रक से सीधे जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि इसके तुरंत बाद बस में शॉर्ट सर्किट या किसी दूसरी वजह से भीषण आग लग गई। देखते ही देखते पूरी बस धू-धू कर जल उठी और आग की ऊंची लपटों ने उसे पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया।

घायलों के लिए बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आग पर काबू पाने के लिए तुरंत दमकल की गाड़ियों को मौके पर रवाना किया गया। इसके साथ ही राहत और बचाव टीमों ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर बस से यात्रियों को निकालने का काम शुरू किया। दौसा के पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित खुद बचाव और राहत कार्यों की निगरानी के लिए दुर्घटनास्थल पर पहुंचे। इसके साथ ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेंद्र फौजदार कई थानों के पुलिस बल के साथ जिला अस्पताल में मुस्तैद रहे।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेंद्र फौजदार ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि बस इंदौर से हरिद्वार जा रही थी। ये दिल्ली हाईवे पर एक रेस्ट एरिया के पास भीषण दुर्घटना का शिकार हो गई। इस हादसे में 2 यात्रियों की मौत हो गई है और 17 अन्य घायल हुए हैं। एसपी सहित अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर मौजूद हैं।

हादसे के शिकार हुए 2 शवों और 17 घायल यात्रियों को तुरंत दौसा के जिला अस्पताल लाया गया। घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए तुरंत ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया ताकि आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था में कोई बाधा न आए और घायलों का इलाज जल्द से जल्द शुरू हो सके।

एक दिन पहले यमुना एक्सप्रेसवे पर भी हुआ था ऐसा ही भीषण हादसा

एक्सप्रेसवे पर हादसों का यह सिलसिला लगातार जारी है। इस हादसे से ठीक एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में यमुना एक्सप्रेसवे पर भी ऐसा ही एक बेहद दर्दनाक हादसा देखने को मिला था। वहां एक यात्री बस और कंटेनर ट्रक के बीच हुई भिड़ंत में 4 लोगों की मौत हो गई थी और 27 अन्य लोग घायल हो गए थे। मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने बताया कि वह हादसा तड़के करीब 4 बजे हुआ था। यह बस लखनऊ से दिल्ली जा रही थी।

कंडक्टर चला रहा था बस, गैस कटर से काटने पड़े थे हिस्से

उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच में सामने आया था कि उस बस में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे। सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि हादसे के वक्त तय ड्राइवर की जगह बस का कंडक्टर उसे चला रहा था। बस सीधे कंटेनर ट्रक में जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया था। हादसे के वक्त ज्यादातर यात्री नींद में थे। टक्कर के बाद कई लोग सीटों के बीच में ही बुरी तरह फंस गए थे। इसके बाद रेस्क्यू टीमों को बस के हिस्सों को काटने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल करना पड़ा था। करीब दो घंटे तक चले इस कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला जा सका था। उस हादसे में जान गंवाने वाले 4 लोगों की पहचान बस ड्राइवर, कंडक्टर, क्लीनर और एक यात्री के रूप में हुई थी।

 

कानपुर किडनी कांड: 90 दिनों के अंदर 1 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल, 14 आरोपी और 40 बनाए गए गवाह

कानपुर किडनी कांड में पुलिस ने करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। चार्जशीट में 14 आरोपियों को नामजद किया गया है, 40 लोगों को गवाह बनाया गया है। मामले में सामने आए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, बैंक लेनदेन और गवाहों के बयान जांच का अहम आधार बने हैं।

ईरान बोला- होर्मुज हमारी सबसे बड़ी ताकत, पीछे नहीं हटेंगे:टोल में 60 दिन की छूट अस्थायी, इस पर हमारा अधिकार रहेगा

ईरान ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट उसकी सबसे बड़ी ताकत है और इस पर उसका अधिकार बना रहेगा। ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालीबाफ ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में समुद्री सेवाओं के टोल में 60 दिनों की छूट सिर्फ अस्थायी व्यवस्था है। ईरानी सरकारी मीडिया से बातचीत में गालीबाफ ने कहा कि होर्मुज ईरान के क्षेत्रीय जल का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका यह कहकर विवाद पैदा नहीं कर सकता कि ईरान ने इस स्ट्रेट का सैन्यीकरण कर दिया है। गालीबाफ ने कहा, “ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपना अधिकार नहीं छोड़ा है। इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। हम किसी भी परिस्थिति में अपने इस रुख से पीछे नहीं हटेंगे।” उन्होंने होर्मुज को युद्ध के दौरान ईश्वर का दिया उपहार बताया। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स… 1. होर्मुज में फिर बढ़ी जहाजों की आवाजाही: समुद्री निगरानी करने वाली कंपनी केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को होर्मुज से कुल 40 जहाज गुजरे। इनमें से 16 जहाजों ने ईरान के समुद्री मार्ग का इस्तेमाल किया। 2. ईरान की शर्त- पहले फंसे 6 अरब डॉलर दो: ईरान चाहता है कि विदेशों में फंसी उसकी करीब 6 अरब डॉलर (करीब 57 हजार करोड़ रुपए) की संपत्ति पहले जारी की जाए। इसके बाद ही वह शांति समझौते के अगले चरण पर आगे बढ़ेगा। 3. पजशकियान बोले- समझौता सुप्रीम लीडर की मंजूरी से हुआ: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) ईरान के सुप्रीम लीडर की मंजूरी से हुआ है। 4. खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा इंतजाम: ईरान अपने सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए अब तक की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर रहा है। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Ashadha Amavasya 2026 Date: आषाढ़ में कब मनाई जाएगी हलहारिणी अमावस्या, जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और स्नान-दान का समय

Ashadha Amavasya 2026 Date: आषाढ़ का महीना हिंदू धर्म में बहुत अहम माना जाता है। हिंदू कैंलेंडर का यह चौथा महीना होता है और इसमें सबसे ज्यादा बारिश होती है। इसके अलावा इस माह में देवशयनी एकादशी का व्रत किया जाता है, जिसके बाद भगवान विष्णु 4 माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। आषाढ़ माह की अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, पूजा, व्रत और दान-पुण्य के साथ ही पितृ दोष से राहत पाने के लिए उपाय भी किए जाते हैं।

आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि को हलहारिणी अमावस्या भी कहते हैं। इस बार आषाढ़ अमावस्या पर एक दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह अमावस्या तिथि मंगलवार को पड़ रही है, जिससे भौमवती अमावस्या का शुभ अवसर प्राप्त होगा। इस महत्वपूर्ण तिथि, शुभ मुहूर्त और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताओं की पूरी जानकारी नीचे दी गई है:

आषाढ़ अमावस्या 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, उदया तिथि की मान्यता के कारण आषाढ़ अमावस्या का पर्व 14 जुलाई 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।

अमावस्या तिथि प्रारंभ : 13 जुलाई 2026 को शाम 06:49 बजे से

अमावस्या तिथि समाप्त : 14 जुलाई 2026 को दोपहर 03:12 बजे तक

इसे ‘हलहारिणी अमावस्या’ क्यों कहते हैं?

आषाढ़ अमावस्या का किसानों और कृषि संस्कृति से बहुत गहरा नाता है, जिसके कारण इसे हलहारिणी अमावस्या कहा जाता है। इस महीने में पूरी वर्षा की सबसे ज्यादा बारिश होती है। इसलिए यह नई फसल की बुआई के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। यह किसानों के लिए नए कृषि सत्र की शुरुआत का प्रतीक है। इस शुभ दिन पर किसान अपने खेतों में बैलों को आराम देते हैं और अपने मुख्य कृषि उपकरण ‘हल’ के साथ-साथ खेती में काम आने वाले अन्य औजारों की विधि-विधान से पूजा करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु, माता अन्नपूर्णा और धरती माता की आराधना की जाती है ताकि प्रकृति की कृपा से फसलें हरी-भरी, रोगमुक्त और समृद्ध रहें। इसी कृषि परंपरा और हल पूजन के कारण इसे ‘हलहारिणी’ नाम मिला है।

स्नान, दान और पितृ तर्पण का समय

अमावस्या तिथि पितरों की शांति और दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इस साल 14 जुलाई 2026 को सुबह सूर्योदय से लेकर दोपहर 03:12 बजे तक स्नान, तर्पण और दान का शुभ समय रहेगा। इस दिन सुबह किसी पवित्र नदी, सरोवर में स्नान करें। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद अपने दिवंगत पितरों के निमित्त तर्पण या श्राद्ध कर्म करें। स्नान के बाद जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र, काले तिल या छाता दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन नए पौधे (जैसे पीपल, बरगद या नीम) लगाना भी बेहद शुभ माना जाता है।

Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा सावन का महीना, इन तिथियों पर जलाभिषेक दिलाएगा भगवान शिव का आशीर्वाद

घूमिये जरा हटके! वायरल होने से पहले घूम आए भारत के 5 अनदेखे कोने, जहां प्रकृति करती है बातें

भारत में कुछ ऐसी शानदार जगहें भी हैं जो अभी तक सोशल मीडिया की भीड़ से दूर हैं। यहां आपको नेचुरल ब्यूटी, शांति, स्थानीय संस्कृति और अनोखे एक्सपीरियंस मिलेंगे, लेकिन टूरिस्ट की भीड़ कम मिलेगी। अगर आप ऑफबीट ट्रैवल पसंद करते हैं, तो ये 7 जगहें आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर होनी चाहिए:

1. Mechuka (अरुणाचल प्रदेश)– बादलों और पहाड़ों के बीच बसा स्वर्ग

Waterfalls, Hills & Lakes: Top Tourist Places In Yercaud Hill Station in Tamil Nadu 2024

अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में स्थित मेचुका समुद्र तल से लगभग 6,000 फीट की ऊंचाई पर बसा एक खूबसूरत घाटी क्षेत्र है। चारों ओर बर्फ से ढकी पहाड़ियां, हरे-भरे घास के मैदान और बहती सियॉम नदी इस जगह को किसी विदेशी डेस्टिनेशन जैसा बनाते हैं।

यहां की सबसे खास बात यह है कि अभी भी यह जगह बड़े पैमाने पर टूरिस्ट से अछूती है। आप यहां ट्रेकिंग, स्थानीय जनजातीय संस्कृति को जानने और शांत वातावरण का आनंद ले सकते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय घाटी का दृश्य बेहद मनमोहक दिखाई देता है। 2 दिन ट्रिप के लिए दिल्ली से Dibrugarh या Guwahati के लिए फ्लाइट लें। वहां से Aalo तक सड़क मार्ग और फिर टैक्सी से मेचुका पहुंचा जा सकता है।

2. Mawlynnong (मेघालय)– एशिया का सबसे स्वच्छ गांव

Discover Shillong – Best Attractions, Food, Stays & Things to Do

मेघालय का मावलिन्नोंग अपनी साफ-सफाई और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। इस गांव को कई बार एशिया के सबसे स्वच्छ गांवों में गिना गया है। यहां की हर सड़क, हर घर और हर बगीचा बेहद व्यवस्थित दिखाई देता है।

बांस से बने स्काई वॉक से आप आसपास के जंगलों और बांग्लादेश के मैदानों का शानदार नजारा देख सकते हैं। इसके अलावा पास के जीवित जड़ों से बने पुल (लिविंग रूट ब्रिज) प्रकृति और मानव कौशल का अद्भुत उदाहरण हैं। 1 दिन वाली इस ट्रिप के लिए दिल्ली से Shillong या Guwahati तक फ्लाइट लें। शिलॉन्ग से मावलिन्नोंग लगभग 3 घंटे की टैक्सी राइड पर है।

3. Gandikota (गंडिकोटा)- आंध्र प्रदेश का शानदार और एडवेंचरस नज़ारा

File:Gandikota Canyon.jpg - Wikimedia Commons

गंडिकोटा भारत के खूबसूरत यात्रा स्थल में से एक है जिसे “ग्रैंड कैन्यन” भी कहा जाता है। यह स्थान पेन्ना नदी के किनारे स्थित गहरी घाटियों और लाल चट्टानों के लिए जाना जाता है। यहां बना प्राचीन किला इतिहास की झलक दिखाता है और सूर्योदय-सूर्यास्त का दृश्य बेहद मनमोहक होता है। गंडिकोटा पहुंचने के लिए सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन कडप्पा है, जहां से यह लगभग 90–100 किलोमीटर दूर है और आगे टैक्सी या बस से पहुंचा जा सकता है।

4. Lakir Valley (लैकीर वैली)- लद्दाख के ट्रेकिंग रूट्स

nubra-valley-46 - Vargis Khan

यह लद्दाख की एक शांत और बेहद खूबसूरत घाटी है, जहां ऊंचे पहाड़, खुला नीला आसमान और ट्रैकिंग के शानदार रास्ते मिलते हैं। यह जगह भीड़-भाड़ से दूर होने के कारण नेचर लवर्स और एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन मानी जाती है। लैकीर वैली पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले दिल्ली से लेह जाना होगा, जो हवाई मार्ग से सबसे आसान तरीका है। लेह एयरपोर्ट पहुंचने के बाद वहां से टैक्सी या लोकल कैब लेकर लगभग 1–2 घंटे में लिकिर क्षेत्र और आसपास की घाटी तक पहुंचा जा सकता है।

5. Gokarna (कर्नाटक)– गोवा जैसा एक्सपीरियंस, लेकिन कम भीड़

1,200+ Gokarna Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock | Gokarna beach

गोकर्ण को अक्सर गोवा का शांत विकल्प कहा जाता है। यहां के समुद्र तट साफ-सुथरे, शांत और थोड़े कम भीड़ वाले हैं। ओम बीच, हाफ मून बीच और पैराडाइज बीच जैसे तट नेचुरल ब्यूटी से भरपूर हैं।

यहां आप समुद्र किनारे आराम कर सकते हैं, बीच ट्रेकिंग कर सकते हैं और लोकल कर्नाटक संस्कृति को करीब से महसूस कर सकते हैं। जो लोग भीड़भाड़ से दूर समुद्री छुट्टियां बिताना चाहते हैं, उनके लिए यह शानदार ऑप्शन है। लगभग 6–8 घंटे (फ्लाइट + रोड) ट्रिप के लिए दिल्ली से Goa या Hubballi तक फ्लाइट लें। वहां से टैक्सी या ट्रेन द्वारा गोकर्ण पहुंचा जा सकता है।

6. Mandu (मध्य प्रदेश)– इतिहास और प्रेम कहानियों का शहर

Here's why Madhya Pradesh's Mandu is an architectural marvel | TimesTravel

मध्य प्रदेश का मांडू अपने प्राचीन किलों, महलों और रोमांटिक इतिहास के लिए जाना जाता है। यह जगह Baz Bahadur और Rani Roopmati की प्रेम कहानी से भी जुड़ी हुई है।

मानसून के दौरान मांडू की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। बादलों से घिरे महल और हरियाली से ढके खंडहर इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए यह किसी खजाने से कम नहीं है। इंदौर से लगभग 100 किमी दिल्ली से Indore तक फ्लाइट या ट्रेन लें। इंदौर से मांडू लगभग 2–3 घंटे की सड़क यात्रा पर है।

7. Yercaud (तमिलनाडु)– दक्षिण भारत का शांत हिल स्टेशन

Yercaud's winding mountain road features motorcycles traversing multiple hairpin curves through green and dry terrain. Static aerial view captures the serpentine asphalt road from directly overhead.

तमिलनाडु का यरकौड नीलगिरि और ऊटी जैसे पॉपुलर हिल स्टेशनों की तुलना में कम चर्चित है, लेकिन इसकी सुंदरता किसी भी तरह कम नहीं है। कॉफी के बागान, झीलें और ठंडा मौसम इसे बेहद खास बनाते हैं।

यहां आप ट्रेकिंग, बोटिंग और प्रकृति की गोद में समय बिता सकते हैं। शांत वातावरण और कम भीड़ इसे परिवारों और कपल्स के लिए आइडियल डेस्टिनेशन बनाती है। लगभग 5–7 घंटे (फ्लाइट + रोड) ट्रिप के लिए दिल्ली से Salem या Chennai के लिए फ्लाइट लें। सलेम से यरकौड लगभग 30 किमी दूर है और टैक्सी आसानी से मिल जाती है।

क्यों हैं ये जगहें खास?

इन सभी जगहों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां आपको भीड़भाड़ वाले टूरिस्ट डेस्टिनेशन से ज्यादा शांति, स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता का एक्सपीरियंस मिलता है। ये स्थान अभी भी बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया ट्रेंड्स से दूर हैं, इसलिए यहां का माहौल ज्यादा सुकून भरा महसूस होता है।

अगर आप ऐसी जगहों की तलाश में हैं जहां नेचर, संस्कृति और शांति का अनोखा मेल मिले, तो ये 7 छिपे हुए भारतीय डेस्टिनेशन आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकते हैं। अगली बार छुट्टियों की योजना बनाते समय सिर्फ पॉपुलर डेस्टिनेशन ही नहीं, बल्कि इन अनदेखी जगहों को भी अपनी लिस्ट में शामिल करें। हो सकता है आपकी सबसे यादगार ट्रिप किसी ऐसी जगह पर हो, जिसके बारे में आपने सोशल मीडिया पर बहुत कम सुना हो।

Ducati Panigale and Streetfighter V2 S launched with yellow colour

Ducati Panigale and Streetfighter V2 S launched with yellow colour

Ducati has launched a new colour – other than red – for its middle-weight duo. Both the Streetfighter V2 S and Panigale V2 S now come with a ‘Ducati Yellow’ colour that commands a premium of over Rs 32,000 compared to the standard Ducati Red colour.

  1. The Panigale V2 S’ Yellow colour commands a premium of Rs 33,000, over the standard model
  2. Whereas, the Streetfighter V2 S commands a premium of Rs 32,000
  3. Both models remain mechanically unchanged

Ducati yellow colour launched

This new colour is only available with the top-spec ‘S’ trim

This new colour is only available with the top-spec ‘S’ trim that comes with front and rear Ohlins suspension setup with weight savings of just under 2kg compared to the standard model. 

This new colour will likely appeal to buyers that want their Ducati middleweight to stand out from the sea of ‘standard’ Red colour, that is offered with virtually every Ducati – barring the Scrambler range. 

Apart from this, both models remain mechanically unchanged and come powered by the same 890cc, V-twin, liquid-cooled engine that produces 120hp at 10,750rpm and 93.3Nm at 8,250rpm, mated to a six-speed gearbox. 

The Panigale V2 S is priced at Rs 21.86 lakh, commanding a premium of Rs 33,000 compared to the standard ‘Ducati Red’ colour. Whereas, the Streetfighter V2 S is priced at Rs 20.20 lakh, reflecting a premium of Rs 32,000 for this paint-shade. 

भारत-जापान में डॉलर के बिना व्यापार की तैयारी:रुपए-येन में लेनदेन होगा, PM मोदी-ताकाइची बैठक में हो सकता है ऐलान

भारत और जापान व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका कम करने की तैयारी कर रहे हैं। निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं, जिससे कारोबार का भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में हो सके। इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की नई दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद ऐलान किया जा सकता है। साने ताकाइची आज 3 दिन के भारत दौरे पर आ रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। दोनों नेताओं के बीच होने वाले 16वें भारत-जापान सलाना शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। डॉलर पर निर्भरता घटेगी, स्पेशल अकाउंट के जरिए सीधे पेमेंट अगर भारत और जापान के बीच भुगतान से जुड़ा ये प्रस्ताव लागू होता है तो दोनों देशों के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेकर औपचारिक व्यवस्था बनेगी। इस योजना के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपए और येन में लेनदेन कर सकेंगी। यानी लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश के बैंक की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस व्यवस्था से विदेशी मुद्रा बदलने का खर्च कम होगा, पैसे भेजने की लागत घटेगी और भुगतान पहले के मुकाबले जल्दी हो सकेगा। दोनों देशों को उम्मीद है कि इससे व्यापार करना आसान होगा और कंपनियों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। 2025 में बनी थी सहमति, अब लागू करने की तैयारी स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौता (MoC ) करने की तैयारी में है। यह प्रस्ताव पूरी तरह नया नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उसमें भी पेमेंट सिस्टम और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की बात कही गई थी। अब उसी योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। भारत भी पिछले कुछ वर्षों से रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। जुलाई 2022 में RBI ने ‘स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट’ शुरू किया था, ताकि दूसरे देशों के साथ रुपए में व्यापार हो सके। बाद में इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया गया और विदेशी बैंकों को इन खातों में जमा अतिरिक्त रकम भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की भी अनुमति दी गई। भारत पहले से बढ़ा रहा रुपए में कारोबार संसद में सरकार ने बताया था कि अब तक 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। RBI का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होगी और रुपए का वैश्विक इस्तेमाल बढ़ेगा। जापान भी एशिया के दूसरे देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। दिसंबर 2025 में उसने इंडोनेशिया के साथ भी ऐसा ही समझौता किया था, जिससे दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में सभी तरह के लेनदेन को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में बढ़ रहा जापानी निवेश भारत और जापान के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया। वहीं जापान अगले 10 वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश करने का लक्ष्य भी तय कर चुका है। फिलहाल भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें लगभग आधी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हैं। जापान मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना समेत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी निवेश कर रहा है। हाल ही में जापानी कंपनी ने यस बैंक में 20% हिस्सेदारी खरीदने के लिए 1.6 अरब डॉलर का निवेश भी किया है। दोनों नेता इस दौरे के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा क्वाड, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत-जापान व्यापार की 5 खास बातें ———————————— जापान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जापान में पहली बार महिला प्रधानमंत्री बनी:मजबूत सेना और संविधान में संशोधन की समर्थक हैं, मोदी-ट्रम्प ने दी बधाई साने ताकाइची जापान की प्रधानमंत्री चुनी गई हैं। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। ताकाइची को संसद के निचले सदन में हुए चुनाव में 149 के मुकाबले 237 वोटों से जीत मिली। पूरी खबर यहां पढ़ें…