2026 की सबसे डिमांडिंग नौकरियां! अगर सीख लीं ये 3 स्किल्स, तो कंपनियां देंगी 30 लाख रुपए तक का पैकेज!

highest paying jobs 2026

highest paying jobs 2026: जून के अंत और जुलाई की शुरुआत भारत में कॉलेज ग्रेजुएट्स (Freshers) के पास आउट होने और वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए 'हाफ-इयरली' स्विच प्लान करने का समय होता है। यही कारण है कि इस समय इंटरनेट और गूगल ट्रेंड्स पर High-Paying Tech Skills की सर्च अपने चरम पर है।

 

पारंपरिक कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से हटकर अब टेक इंडस्ट्री का पूरा फोकस AI (Artificial Intelligence), Data Science और Cloud Computing पर शिफ्ट हो चुका है। आइए समझते हैं कि 2026 में इन सेक्टर्स में कितनी सैलरी मिल रही है और कौन सी स्किल्स आपको सबसे आगे रख सकती हैं।

2026 Salary Snapshot : स्किल्स और कमाई का पूरा ब्योरा

भारतीय टेक मार्केट (विशेषकर बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम जैसे हब्स) में इन तीनों डोमेन के लिए अनुभव के आधार पर मिलने वाला सालाना पैकेज (LPA) इस प्रकार है:

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Deep Dive: इन 3 स्किल्स में ऐसा क्या खास है?

1. Artificial Intelligence (AI) & ML Engineer

आज कंपनियां सिर्फ AI टूल्स का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं, बल्कि वे अपने खुद के कस्टम AI मॉडल्स और Generative AI (LLMs) ऐप्स बना रही हैं।

  • जरूरी स्किल्स : Python, TensorFlow, PyTorch, NLP (Natural Language Processing), और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग।
  • कमाई का सच : इस फील्ड में सचमुच कुशल लोगों की भारी कमी है, इसलिए अनुभवी इंजीनियर्स को ₹30 लाख से ₹45 लाख तक का पैकेज आसानी से मिल रहा है।

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2. Cloud Computing (Architect/DevOps)

अब लगभग हर छोटी-बड़ी कंपनी अपना डेटा लोकल सर्वर्स से हटाकर क्लाउड पर ले जा चुकी है। नैसकॉम (NASSCOM) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जीडीपी में क्लाउड टेक का योगदान लगातार बढ़ रहा है।

  • जरूरी स्किल्स : Amazon Web Services (AWS), Microsoft Azure, Google Cloud Platform (GCP), और Docker/Kubernetes जैसी कंटेनराइजेशन टूल्स।
  • कमाई का सच : यदि आप क्लाउड सर्टिफाइड (जैसे AWS Certified Solutions Architect) हैं, तो फ्रेशर होने पर भी आपका शुरुआती पैकेज आम डेवलपर्स से 30% तक ज्यादा होता है।

3. Data Science & Analytics

  • “Data is the new oil” – कंपनियां रोज़ाना करोड़ों गीगाबाइट डेटा जनरेट करती हैं। इस डेटा को साफ करके, समझकर बिजनेस के काम लायक फैसले लेने का काम डेटा साइंटिस्ट करते हैं।
  • जरूरी स्किल्स : SQL, Advanced Excel, Power BI या Tableau (विजुअलाइजेशन के लिए), और Python (Pandas/NumPy)।
  • कमाई का सच : यह फील्ड उन लोगों के लिए भी बेहतरीन प्रवेश द्वार है जो नॉन-कंप्यूटर साइंस (जैसे कॉमर्स या प्योर साइंस) बैकग्राउंड से आते हैं।

Expert Advice : करियर की शुरुआत कैसे करें?

सीक्रेट टिप: आज के समय में सिर्फ सर्टिफिकेट्स (Certificates) की वैल्यू नहीं है। कंपनियां आपका GitHub Portfolio और लाइव प्रोजेक्ट्स देखना चाहती हैं। अगर आप कॉलेज स्टूडेंट हैं या जॉब बदलना चाहते हैं, तो आज ही से छोटे-छोटे AI या डेटा एनालिसिस प्रोजेक्ट्स बनाकर उन्हें LinkedIn पर शेयर करना शुरू कर दें।

 

Silver Rates Today: एक जुलाई को चांदी की नई कीमतें जारी! जानिए दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में क्या है रिटेल रेट

Silver Rates Today: जुलाई के पहले दिन घरेलू सर्राफा बाजार और वायदा बाजार में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कमजोर वैश्विक संकेतों और मुनाफावसूली के चलते चांदी के भाव दबाव में रहे, जिससे खरीदारों को राहत मिली। बुधवार, 1 जुलाई को भारत के रिटेल मार्केट में सोने की कीमत में भी गिरावट आई। प्रमुख शहरों में 24-कैरेट और 22-कैरेट सोने के रेट में थोड़ी कमी देखी गई। वहीं, घरेलू बुलियन मार्केट में चांदी की कीमतों में भी गिरावट आई है।

1 जुलाई को अगस्त फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड रेट 0.94% गिरकर ₹141,600 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, MCX सिल्वर फ्यूचर्स सुबह करीब 9:13 बजे 1.86% गिरकर ₹224,520 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था। मंगलवार को तेल की कीमतों में भारी गिरावट के साथ महीने का समापन हुआ। एनर्जी मार्केट के ट्रेडर्स कतर में अमेरिका और ईरान के बीच नई बातचीत की संभावना पर बारीकी से नजर रखे हुए थे।

चांदी की कीमतों में भारी गिरावट

अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (जो इंटरनेशनल बेंचमार्क है) गिरकर $72.92 प्रति बैरल पर आ गया। जून में इस कॉन्ट्रैक्ट में लगभग 21% की गिरावट आई, जो मार्च 2020 के बाद से इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी। सुबह के कारोबार में Comex पर इंटरनेशनल स्पॉट गोल्ड 1.09% गिरकर $3,994.40 प्रति औंस हो गया। जबकि चांदी 2.93% गिरकर $57.73 प्रति औंस पर आ गई।

घरेलू बाजार में अगस्त कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.84% ​​गिरकर ₹1,41,337 प्रति 10 ग्राम हो गया। वहीं, सितंबर कॉन्ट्रैक्ट के लिए सिल्वर फ्यूचर्स 1.8% गिरकर ₹2,24,268 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था। बाजार की नजर US ADP एम्प्लॉयमेंट चेंज, नॉन-फार्म पेरोल्स और बेरोजगारी के आंकड़ों पर है। इनसे बुलियन की कीमतों में अगली बड़ी हलचल आने की उम्मीद है।

LKP सिक्योरिटीज के VP रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा, “फेड की सख्त पॉलिसी के बाद, Comex गोल्ड में जून में पहले ही लगभग 12% की गिरावट आ चुकी है। यह $4,500 से गिरकर $3,950 पर आ गया है, जिससे बाजार ‘ओवरसोल्ड’ स्थिति में पहुंच गया है। $4,000 के स्तर के आसपास सोने में खरीदारी की अच्छी दिलचस्पी दिख रही है। इस स्तर से नीचे जाने पर नई मांग आ रही है।”

एमसीएक्स पर चांदी का भाव

MCX पर चांदी के जुलाई/सितंबर वायदा में सुबह कारोबार के दौरान करीब 1.86% की गिरावट देखी गई। चांदी का वायदा भाव लगभग ₹2,24,520 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया।

गिरावट की वजह क्या है?

एक्सपर्ट के अनुसार चांदी की कीमतों पर कई कारणों का असर पड़ा है:-

  • अमेरिकी डॉलर में मजबूती।
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने की उम्मीद।
  • वैश्विक बाजार में निवेशकों की सतर्कता।
  • अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग में कमी।

खरीदारों के लिए क्या मतलब है?

चांदी के दाम में आई गिरावट से आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं को राहत मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

आज के प्रमुख रेट (999 सिल्वर)

दिल्ली: लगभग ₹2,22,400 से ₹2,24,500 प्रति किलोग्राम तक रेट है।

मुंबई: लगभग ₹2,23,800 प्रति किलोग्राम।

कोलकाता: लगभग ₹2,24,000 प्रति किलोग्राम।

MCX पर भी चांदी में कमजोरी देखने को मिली। सुबह के कारोबार में सिल्वर फ्यूचर्स करीब 1.86% टूटकर ₹2,24,520 प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रहे थे। वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती, मुनाफावसूली और निवेशकों की सतर्कता के कारण चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों के आधार पर आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों को 1.55 लाख और छात्राओं को मिलेगी 2.05 रुपए लाख की सहायता

Gujarat government's big decision regarding students preparing for UPSC

Gujarat government's big decision : गुजरात में यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) जैसी प्रतिष्ठित और कठिन सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। गांधीनगर स्थित स्पीपा (SPIPA सरदार पटेल लोक प्रशासन संस्थान) और उसके प्रशिक्षण केंद्रों में अध्ययन करने वाले होनहार उम्मीदवारों को दी जाने वाली वित्तीय प्रोत्साहन सहायता में सरकार ने भारी बढ़ोतरी की है। इस महत्वपूर्ण निर्णय का मुख्य उद्देश्य राज्य के मध्यम और सामान्य वर्ग के युवाओं को सिविल सेवा परीक्षा की ओर आकर्षित करना और राष्ट्रीय स्तर पर सिविल सर्विसेज में गुजरात का प्रतिनिधित्व मजबूत करना है।

 

इस नई व्यवस्था के तहत, यूपीएससी प्रारंभिक (प्रिलिम्स) परीक्षा की तैयारी कर रहे प्रशिक्षु उम्मीदवारों को उनकी पढ़ाई और किताबों आदि के नियमित खर्चों को पूरा करने के लिए हर महीने 4,000 रुपए तक की मासिक सहायता (स्टाइपेंड) दी जाएगी। इस नियमित स्टाइपेंड के अलावा परीक्षा के प्रत्येक कठिन चरण को सफलतापूर्वक पार करने पर छात्रों का उत्साह बढ़ाने के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन राशि भी तय की गई है। इस योजना में विशेष रूप से छात्राओं को अधिक आर्थिक सहायता देकर महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया गया है।

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योजना के ढांचे के अनुसार, जो उम्मीदवार यूपीएससी प्रिलिम्स परीक्षा पास करेंगे, उन छात्रों को 35,000 रुपए और छात्राओं को 50,000 रुपए की वित्तीय सहायता मिलेगी। इसके बाद दूसरे चरण की मुख्य परीक्षा (Mains) में सफलता प्राप्त करने वाले छात्रों को रुपए 45000 और छात्राओं को रुपए 55,000 का प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस कठिन सिविल सेवा परीक्षा को पास करने के लिए उम्मीदवार सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं, ऐसे में यह सरकारी सहायता उनके लिए बहुत बड़ा आर्थिक संबल साबित होगी।

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परीक्षा के अंतिम चरण यानी साक्षात्कार (इंटरव्यू) पूरा होने के बाद यूपीएससी में फाइनल सिलेक्शन (अंतिम चयन) प्राप्त कर देश की सेवा में शामिल होने वाले छात्रों को 75,000 रुपए जबकि छात्राओं को 1 लाख रुपए की विशेष सहायता दी जाएगी। इस प्रकार सभी चरणों के संशोधित दरों को मिलाकर कुल प्रोत्साहन सहायता छात्रों के लिए 1.55 लाख रुपए तक और छात्राओं के लिए अधिकतम 2.05 लाख रुपए तक पहुंच जाएगी। राज्य सरकार के इस सराहनीय कदम से गुजरात के अनगिनत छात्र आर्थिक चिंता के बिना सिविल सेवा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगे।

Mutual Fund SIP: सिर्फ 1 साल की देरी और ₹82 लाख का फटका! जानिए म्यूचुअल फंड SIP का ये कड़वा सच

Mutual Fund SIP: जब हम म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) शुरू करते हैं, तो कागज पर हर महीने जमा होने वाली किस्त एक जैसी ही दिखती है। जो ₹5000 आप पहले महीने में जमा करते हैं, वही ₹5000 आप 30वें साल में भी जमा कर रहे होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी पहली किस्त और आखिरी किस्त की कमाई की ताकत में जमीन-आसमान का अंतर होता है?

म्यूचुअल फंड के गणित में आपके पहले साल का निवेश, आपके आखिरी साल के निवेश से कई गुना ज्यादा कीमती होता है। अगर आप एसआईपी शुरू करने में सिर्फ एक साल की भी देरी करते हैं, तो आपको ₹82 लाख रुपये तक की भारी चपत लग सकती है। आइए फिनोवेट (Finnovate) की को-फाउंडर और सीईओ नेहल मोटा के विश्लेषण से समझते हैं कंपाउंडिंग का यह चौंकाने वाला खेल।

क्यों इतनी कीमती है पहली किस्त? समझें कंपाउंडिंग का जादू

कंपाउंडिंग का सीधा मतलब है ‘ब्याज पर ब्याज’ मिलना। आप जो पैसा पहले साल में निवेश करते हैं, उसे बढ़ने के लिए पूरे 30 साल का समय मिलता है। वह पैसा लगातार तीन दशकों तक हर साल रिटर्न के ऊपर रिटर्न बनाता जाता है। इसके उलट, जो पैसा आप आखिरी साल में जमा करते हैं, उसे बढ़ने के लिए सिर्फ कुछ महीने ही मिलते हैं। यही कारण है कि शुरुआत में की गई छोटी सी देरी भी आपके मैच्योरिटी फंड को बहुत छोटा कर देती है।

कैलकुलेशन: सिर्फ 1 साल की देरी और ₹20 लाख गायब!

आइए ₹5000 की मंथली एसआईपी के उदाहरण से इसे समझते हैं:

केस 1: अगर आप 30 साल तक हर महीने ₹5000 की एसआईपी करते हैं, तो आपका कुल निवेश ₹18 लाख होगा। 12% का सालाना अनुमानित रिटर्न मानें, तो 30 साल बाद आपका फंड ₹1.76 करोड़ बन जाएगा।

केस 2 (1 साल की देरी से शुरुआत): अब मान लेते हैं कि आपने सिर्फ 1 साल की देरी की या 1 साल स्किप कर दिया। आम तौर पर लोग सोचेंगे कि नुकसान सिर्फ ₹60000 (₹5000 × 12 महीने) का हुआ है। लेकिन 29 साल बाद आपका कुल फंड घटकर ₹1.56 करोड़ रह जाएगा।

कितना होगा नुकसान: 1 साल की देरी की वास्तविक कीमत ₹20.43 लाख (₹1.76 करोड़ – ₹1.56 करोड़) रही! यानी छूटे हुए ₹60000 ने आपके आने वाले ₹20 लाख से ज्यादा का फंड खा लिया।

SIP का अमाउंट जितना बड़ा, देरी की कीमत उतनी भारी

यह नुकसान सिर्फ ₹5000 की एसआईपी तक सीमित नहीं है। जैसे-जैसे आपका निवेश बढ़ता है, देरी की कीमत और डरावनी होती जाती है:

  1. ₹2000 की मंथली SIP: 1 साल की देरी करने पर करीब ₹8.17 लाख का नुकसान।
  2. ₹10000 की मंथली SIP: 1 साल की देरी करने पर करीब ₹40.87 लाख का नुकसान।
  3. ₹20000 की मंथली SIP: 1 साल की देरी करने पर करीब ₹82 लाख का भारी नुकसान।

आखिरी के सालों में कैसे बदलती है बाजी?

लॉन्ग-टर्म निवेश में पैसा रफ्तार कैसे पकड़ता है, इसे ₹5000 की एसआईपी के इस पैटर्न से देखें:

10 साल बाद: ₹6 लाख के कुल निवेश पर फंड बनता है करीब ₹11.62 लाख।

20 साल बाद: ₹12 लाख के कुल निवेश पर फंड पहुंचता है करीब ₹50 लाख।

30 साल बाद: कुल निवेश ₹18 लाख होता है, लेकिन फंड बढ़कर हो जाता है ₹1.76 करोड़।

ध्यान दें कि आखिरी के 10 सालों में आपने सिर्फ ₹6 लाख और जोड़े, लेकिन फंड ₹50 लाख से सीधे ₹1.76 करोड़ पर पहुंच गया। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तब तक आपका बेस बहुत बड़ा हो चुका होता है। दरअसल, एसआईपी के आखिरी 5 सालों की कमाई, शुरुआती 20 सालों की कुल कमाई से भी ज्यादा होती है।

अगर देरी हो गई है, तो सुधारने का क्या है तरीका?

अगर आप पहले ही देर कर चुके हैं, तो अच्छी खबर यह है कि इस नुकसान की भरपाई की जा सकती है। रिसर्च के मुताबिक, अगर आपने पहला साल मिस कर दिया है, तो बचे हुए 29 सालों के लिए आपको अपनी मंथली एसआईपी को ₹5000 से बढ़ाकर ₹5655 करना होगा। यानी हर महीने ₹655 का एक्स्ट्रा ‘टॉप-अप’ करके आप उस ₹20.43 लाख के गैप को पाट सकते हैं।

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एक्सपर्ट्स की सलाह ये है कि निवेश की दुनिया में सबसे सही समय ‘आज और अभी’ होता है। कल का इंतजार आपको लाखों रुपये की चपत लगा सकता है, इसलिए छोटी रकम से ही सही, पर शुरुआत जल्दी करें।

BP Control Tips: हाई ब्लडप्रेशर कम करने के घरेलू उपाय

An image showing information on controlling high blood pressure

Hypertension Remedies: हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप, Hypertension) आज की जीवनशैली से जुड़ी एक आम समस्या बन चुकी है। यदि समय रहते इसे नियंत्रित न किया जाए, तो यह हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। हालांकि डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं नियमित रूप से लेना जरूरी है, लेकिन कुछ घरेलू उपाय और स्वस्थ आदतें भी रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती हैं।ALSO READ: नशे की लत से उबरने के लिए कौनसी थेरेपी और कदम होते हैं सबसे असरदार

 

1. आहार में बदलाव (सबसे महत्वपूर्ण)

2. असरदार घरेलू नुस्खे

3. आदतें जो ब्लड प्रेशर घटाएंगी

4. क्या खाएं और किससे बचें? पढ़ें क्विक गाइड

 

यहां कुछ सबसे असरदार घरेलू उपाय दिए जा रहे हैं:

 

1. आहार में बदलाव 

नमक का सेवन तुरंत कम करें (सबसे महत्वपूर्ण): नमक (सोडियम) शरीर में पानी को रोकता है, जिससे खून का दबाव बढ़ता है। दिनभर में 1/2 छोटा चम्मच (लगभग 1500-2000 mg) से ज्यादा नमक न खाएं। ऊपर से नमक डालना बंद करें और पापड़, अचार, नमकीन व डिब्बाबंद फूड्स से दूरी बनाएं।

 

पोटैशियम से भरपूर चीजें खाएं: पोटैशियम शरीर से अतिरिक्त सोडियम को पेशाब के रास्ते बाहर निकालता है और नसों को आराम देता है। अपने आहार में केला, नारियल पानी, तरबूज, पालक, शकरकंद और संतरा शामिल करें।

 

2. असरदार घरेलू नुस्खे

लहसुन: लहसुन में (Garlic) 'एलीसिन' नाम का तत्व होता है, जो रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करता है और खून का थक्का जमने से रोकता है। सुबह खाली पेट लहसुन की 1-2 कलियों को हल्का कूटकर या पानी के साथ निगल लें।

 

अर्जुन की छाल: आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को दिल का डॉक्टर कहा गया है। 1/2 चम्मच अर्जुन की छाल के पाउडर को एक कप पानी या दूध में उबालकर काढ़ा बना लें। इसे छानकर सुबह गुनगुना पिएं।

 

आंवला और शहद: सुबह खाली पेट एक चम्मच ताजे आंवले के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है।ALSO READ: Diabetes Control Tips: बिना दवा के भी कंट्रोल हो सकती है शुगर! आजमाएं ये 10 जादुई और बेहद आसान घरेलू उपाय

 

3. आदतें जो ब्लड प्रेशर घटाएंगी

रोजाना 30 मिनट वॉक: हफ्ते में कम से कम 5 दिन 1/2 घंटे की तेज वॉक (पैदल चलना) या हल्की एक्सरसाइज करने से दिल मजबूत होता है और वह बिना ज्यादा दबाव के खून पंप कर पाता है। 

 

वजन पर नियंत्रण: यदि आपका वजन ज्यादा है, तो सिर्फ 3 से 5 किलो वजन कम करने से ही आपका ब्लड प्रेशर काफी नीचे आ सकता है।

 

गहरी सांसें लेना (Deep Breathing): तनाव होने पर शरीर में ऐसे हार्मोन्स निकलते हैं जो नसों को सिकोड़ देते हैं। रोज सुबह या शाम को 10-15 मिनट अनुलोम-विलोम प्राणायाम या गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। यह तुरंत बीपी को शांत करता है।

 

4. क्या खाएं और किससे बचें? पढ़ें क्विक गाइड

क्या खाएं:

* ओट्स, दलिया और चोकरयुक्त आटा

* हरी पत्तेदार सब्जियां, लौकी, तोरई

* * टोंड (लो-फैट) दूध और दही

अलसी के बीज और अखरोट

 

किससे बचें:

* मैदा, बेकरी प्रोडक्ट्स और सफेद ब्रेड से दूरी बनायें।

* पैकेट बंद चिप्स, एक्स्ट्रा बटर और चीज 

* ज्यादा चाय, कॉफी (कैफीन) और कोल्ड ड्रिंक्स

* धूम्रपान (Smoking) और शराब का सेवन

 

जरूरी चेतावनी: घरेलू उपाय दवा का विकल्प नहीं हैं। अगर आपका ब्लड प्रेशर 140/90 mmHg से लगातार ऊपर रहता है या डॉक्टर ने आपको पहले से कोई बीपी की दवा (जैसे टेलमिसार्टन) लिखी हुई है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के दवा कभी बंद न करें। घरेलू उपायों को आप अपनी डॉक्टरी दवा के साथ एक सपोर्ट के रूप में अपना सकते हैं।

 

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अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का क्या हाल है?

-समीरात्मज मिश्र

अयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के निर्माण के अलावा मस्जिद निर्माण के लिए भी अलग से जमीन देने का फैसला सुनाया था। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने अयोध्या के बहुचर्चित और दशकों पुराने विवाद का पटाक्षेप करते हुए करीब 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन राम लला को सौंप दी थी। इसके बदले में मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन देने के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिए थे। ALSO READ: भीषण गर्मी के चलते पेरिस के मुर्दाघरों में जगह कम पड़ी

 

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने मंदिर निर्माण की देख-रेख के लिए ट्रस्ट बनाने के साथ ही मस्जिद निर्माण के लिए भी इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन नाम से एक ट्रस्ट का गठन किया गया। लेकिन मंदिर तो बन कर तैयार भी हो गया और इस वक्त चढ़ावा चोरी को लेकर काफी विवादों में भी है लेकिन मस्जिद को मिली जमीन अभी तकनीकी दांव-पेंच में ही उलझी है। मस्जिद निर्माण तो दूर की कौड़ी दिख रही है।

 

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कुछ महीनों बाद ही साल 2020 में अयोध्या से करीब 25 किमी दूर रौनाही थाने के पीछे धन्नीपुर गांव में मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन देने की घोषणा की थी लेकिन जमीन पर निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है।

 

मस्जिद निर्माण के लिए बना इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन अभी जमीन की कागजी कार्रवाइयों में ही उलझा हुआ है। हालांकि मस्जिद निर्माण में कई और तरह की भी बाधाएं हैं। इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के चेयरमैन जुफर अहमद फारूकी उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के भी चेयरमैन रह चुके हैं। डीडब्ल्यू से बातचीत में कहते हैं कि जमीन का तकनीकी मुद्दा तो अपनी जगह है लेकिन मस्जिद के लिए जरूरी फंड तक इकट्ठा नहीं हो पा रहा है, इसलिए बनने में देरी हो रही है। ALSO READ: पिछड़े देशों में पलायन से अमीर देशों को हुआ खूब फायदा

 

किसी की दिलचस्पी नहीं, पैसा भी नहीं मिल रहा

जुफर अहमद फारूकी कहते हैं, “दरअसल, यह आस्था का विषय तो है नहीं। आम जनता की कोई दिलचस्पी नहीं है इसके निर्माण में। मुस्लिम संगठन तो पहले से ही विरोध में हैं। ये संगठन तो सरकार की ओर से जमीन लिए जाने का ही विरोध कर रहे थे। तो अब मस्जिद के निर्माण में भी कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है। चंदा कोई दे नहीं रहा है। कुल मिलाकर कहा जाए तो इसके समर्थन में कोई नहीं है। फिर भी कोशिश की जा रही है कि जैसी संरचना और कैंपस की कल्पना की गई, वैसी न भी बने तो कम से कम छोटे स्तर पर ही कुछ निर्माण हो जाए।”

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए धन्नीपुर गांव में जो पांच एकड़ जमीन दी है, वह मूल मस्जिद स्थल यानी जहां बाबरी मस्जिद थी, उससे करीब 25 किलोमीटर दूर है। हालांकि यह गांव अयोध्या जिले की सोहावल तहसील में ही आता है लेकिन अयोध्या कस्बे से भी यह बीस किमी दूर है। यही नहीं, अयोध्या में तमाम मुस्लिम लोग और मुस्लिम संगठन मस्जिद के लिए ट्रस्ट बनाने और सरकार से मस्जिद के लिए जमीन लेने का ही विरोध कर रहे थे। सरकार ने जमीन देने का जब ऐलान किया तो वो भी इतनी दूर है कि कस्बे के रहने वाले लोग 20-25 किमी दूर जाकर नमाज शायद ही पढ़ें। ऐसा इसलिए भी, क्योंकि अयोध्या कस्बे में और अयोध्या से धन्नीपुर के बीच कई मस्जिदें पहले से हैं।

 

अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन के लिए मालिकाना हक की लड़ाई लड़ चुके एक प्रमुख पक्षकार हाजी महबूब कहते हैं कि अयोध्या के मुसलमानों की तो इसमें पहले भी कोई दिलचस्पी नहीं थी। उनके मुताबिक, “इतनी दूर जमीन देने का कोई मतलब नहीं है। अयोध्या का मुसलमान वहां जाकर तो नमाज पढ़ेगा नहीं। और हम तो पहले ही कह रहे थे कि हमें जमीन नहीं चाहिए। जमीन देनी भी थी तो अयोध्या शहर में ही देनी चाहिए थी। बहरहाल, ये सुन्नी वक्फ बोर्ड और उस ट्रस्ट पर है कि वो क्या करते हैं। अयोध्या के मुसलमानों का उससे कोई बहुत लेना-देना नहीं है।” ALSO READ: फिर से भारतीय छात्रों की पसंद क्यों बनी सिविल इंजीनियरिंग?

 

शुरू से ही विरोध था

सरकार ने जब मस्जिद के लिए जमीन देने का ऐलान किया था तब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के तमाम सदस्यों ने भी इसका विरोध किया था और सुन्नी वक्फ बोर्ड पर राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार न करने का दबाव बनाया था। लेकिन चूंकि सुन्नी वक्फ बोर्ड सरकार की संस्था है, इसलिए उसका प्रस्ताव को नकारना संभव नहीं था। बोर्ड ने प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया लेकिन ज्यादातर मुस्लिम संगठन और आम मुसलमान भी राज्य सरकार से मस्जिद लेने के फैसले को मुसलमानों का फैसला नहीं मानता बल्कि इसे वो सुन्नी वक्फ बोर्ड का ही फैसला मानता है।

 

नौ नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने भी अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद का फैसला सुनाते हुए विवादित अधिग्रहित जमीन राम लला को दी थी और सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देने का सरकार को निर्देश दिया था।

 

हालांकि जमीन मिलने के बाद ट्रस्ट ने इस पांच एकड़ जमीन पर आलीशान मस्जिद के अलावा अस्पताल और कई अन्य इमारतें बनाने का दावा किया था और उसकी एक रूपरेखा तैयार की थी। यहां तक कि इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन की वेबसाइट पर भी इस परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। इस परियोजना की जानकारी फाउंडेशन ने 19 दिसंबर 2020 को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी थी।

 

बड़ी परियोजना, लेकिन सब कागज पर

आईआईसीएफ की वेबसाइट पर परियोजना के बारे में लिखा है, “आवंटित की गई 5 एकड़ जमीन के लिए, आईआईसीएफ ने एक आर्किटेक्चरल प्लान का प्रस्ताव रखा है, जिसमें मस्जिद के अलावा 200 से ज्यादा बेड वाले अस्पताल, एक आर्काइव सेंटर, जिसमें एक संग्रहालय भी होगा होगा और कुपोषित बच्चों और महिलाओं को मुफ्त खाना खिलाने के लिए एक कम्युनिटी किचन बनाने का भी प्रावधान है।”

 

लेकिन पांच साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी मस्जिद के लिए आवंटित जमीन पर सिर्फ पहले से मौजूद एक दरगाह ही है, इसके अलावा और कुछ नहीं। अयोध्या जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन आवंटित की थी लेकिन अयोध्या विकास प्राधिकरण ने मस्जिद का पहला ले आउट प्लान खारिज कर दिया था। हालांकि बाद में दूसरा ले-आउट प्लान पेश किया गया, लेकिन अभी भी कुछ प्रशासनिक अड़चनें मौजूद हैं।

SME Listing: तीन लिस्टिंग, दो ने लगाया तगड़ा करंट, एक में प्रीमियम एंट्री के बाद और बढ़ा पैसा

SME Listing: मेनबोर्ड सेगमेंट में आज दो स्टॉक्स- अद्वित ज्वेल्स (Advit Jewels) और कॉर्डेला क्रूजेज (Cordella Cruises) की पैरेंट कंपनी वाटरवेज लेजर टूरिज्म (Waterways Leisure Tourism) की एंट्री हुई तो एसएमई सेगमेंट में भी जिवियल इंडस्ट्रीज (Jivial Industries), श्रीधर स्पिनर्स (Shreedhar Spinners) और रियासत लाइफस्टाइल (Riyaasat Lifestyle) के शेयर लिस्ट हुए। इनमें से दो ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया क्योंकि इन्होंने लिस्टिंग पर मुनाफा देने की बजाय 20% पूंजी ही घटा दी। श्रीधर स्पिनर्स ने जरूर ढाई फीसदी से अधिक का लिस्टिंग गेन दिया।

स्टॉकइश्यू प्राइस लिस्टिंग प्राइस लिस्टिंग गेन/लॉसमौजूदा भावप्रॉफिट/लॉस
Jivial Industries ₹196₹156.80(-)20.00%₹151.25 (-)22.83%
Shreedhar Spinners ₹53₹54.40 2.64% ₹57.10 7.74%
Riyaasat Lifestyle ₹106₹84.80 (-)20.00% ₹80.60(-)23.96%

Jivial Industries

एल्युमीनियम रेलिंग और फिक्स्चर बनाने वाली जिवियल इंडस्ट्रीज के ₹32 करोड़ के आईपीओ को फीकी रिस्पास मिला था और 0.93 गुना ही भरा था। इसमें खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित आधा हिस्सा तो 22% ही भर पाया जबकि एनआईआई (नॉन-इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स) का हिस्सा 1.57 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इस आईपाओ के तहत ‌₹27 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं तो ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिए भी ₹10 की फेस वैल्यू वाले 2,72,400 शेयरों की बिक्री हुई है।

आईपीओ के ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत जारी पैसे शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹14.40 करोड़ मशीनरी खरीदने, ₹4.00 करोड़ मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के रिनोवेशन, और बाकी पैसे आईपीओ के खर्चों को भरने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

कंपनी के सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2023-25 के बीच इसका शुद्ध मुनाफा 59% के सीएजीआर से बढ़कर ₹2.97 करोड़ और टोटल इनकम सालाना 19% से अधिक की रफ्तार से बढ़कर ₹12.07 करोड़ पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2026 के 9 महीने में कंपनी को ₹2.95 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹12.20 करोड़ का टोटल इनकम हासिल हुआ। दिसंबर 2025 के आखिरी में कंपनी पर ₹1.23 करोड़ का कर्ज था और रिजर्व-सरप्लस में ₹8.35 करोड़ पड़े थे।

Shreedhar Spinners

कॉटन के धागे बनाने वाली श्रीधर स्पिनर्स के ₹31 करोड़ के आईपीओ को अच्छा रिस्पांस मिला था और 6.70 गुना भरा था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB (एक्स-एंकर) का हिस्सा 2.51 गुना, एनआईआई का हिस्सा 14.58 गुना और खुदरा निवेशकों का 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसके आईपाओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 57.88 लाख नए शेयर ₹53 के भाव पर जारी हुए हैं। इसके जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹21.04 करोड़ वर्किंग कैपिटल, ₹4.95 करोड़ मौजूदा मैनुफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए मशीनरी खरीदने और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

कंपनी के सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के बीच इसका शुद्ध मुनाफा 35% के सीएजीआर से बढ़कर ₹6.17 करोड़ और टोटल इनकम सालाना 7% से अधिक की रफ्तार से बढ़कर ₹146.55 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी पर ₹115.90 करोड़ का कर्ज था और रिजर्व-सरप्लस में ₹14.11 करोड़ पड़े थे।

Riyaasat Lifestyle

एथनिक वियर कंपनी रियासत लाइफस्टाइल के ₹30 करोड़ के आईपाओ को निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था। ओवरऑल यह 1.32 गुना भरा था लेकिन खुदरा निवेशकों का हिस्सा 0.44 गुना और एनआईआई का हिस्सा 0.09 गुना ही भरा जबकि QIB (एक्स-एंकर) का ही हिस्सा 20.33 गुना भरा। इसके आईपाओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 28,48,800 शेयर ₹106 के भाव पर जारी हुए हैं। इसके जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹12.47 करोड़ चार नए शोरूम बनाने, ₹9.50 करोड़ वर्किंग कैपिटल और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

कंपनी के सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2023-25 के बीच इसका शुद्ध मुनाफा 29% के सीएजीआर से बढ़कर ₹4.87 करोड़ और टोटल इनकम सालाना 9% से अधिक की रफ्तार से बढ़कर ₹25.19 करोड़ पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2026 के 10 महीने में कंपनी को ₹4.29 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹28.13 करोड़ का टोटल इनकम हासिल हुआ। जनवरी 2026 के आखिरी में कंपनी पर ₹38.97 करोड़ का कर्ज था और रिजर्व-सरप्लस में ₹9.50 करोड़ पड़े थे।

Advit Jewels IPO Listing: बढ़ गई पोर्टफोलियो की चमक, ₹138 के शेयरों से मिला करीब 37% का लिस्टिंग गेन

Waterways Leisure Tourism IPO Listing: ₹808 का शेयर ₹681 पर लिस्ट, Cordella Cruises ने दिया शॉक

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jet Fuel Price Cut: अब हवाई सफर होगा सस्ता, जेट फ्यूल की कीमतें 5 रुपये हुईं कम

Jet Fuel Price Cut: ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच बुधवार (1 जुलाई) को जेट फ्यूल यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में ATF की अब नई कीमत 115 रुपये प्रति लीटर से घटकर ₹110 प्रति लीटर हो गई है। वेस्ट एशिया में संकट के कारण ATF की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद यह पहली कटौती है। बल्क में कीमत 1.15 लाख रुपये प्रति किलोलीटर से घटाकर 1.10 लाख रुपये प्रति किलोलीटर कर दी गई है। इससे घरेलू एयरलाइंस को फ्यूल की लागत में कुछ राहत मिलेगी।

यह कटौती हाल के हफ्तों में वेस्ट एशिया में जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने और सप्लाई बेहतर होने की उम्मीदों के कारण इंटरनेशनल ऑयल की कीमतों में नरमी आने के बाद की गई है। इससे एयरलाइंस को राहत मिली है, क्योंकि उनके लिए फ्यूल का खर्च सबसे बड़ा ऑपरेटिंग खर्च होता है। इस बदलाव से घरेलू एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, इसका कितना फायदा होगा, यह एयरलाइंस की फ्यूल खरीदने और हेजिंग की रणनीतियों पर निर्भर करेगा।

ATF की कीमतों में हर महीने की पहली तारीख को इंटरनेशनल बेंचमार्क कीमतों के औसत और मौजूदा रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट के आधार पर बदलाव किया जाता है। इससे पहले बुधवार को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 जुलाई से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 183.50 रुपये की कटौती की। यह इस साल कमर्शियल LPG की कीमतों में पहली कटौती थी। घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। यह बदलाव वेस्ट एशिया में जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने के बाद ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद किया गया।

पेट्रोल-डीजल भी हुआ सस्ता

देश की सबसे बड़ी प्राइवेट फ्यूल रिटेलर कंपनी नायरा एनर्जी ने पूरे देश में पेट्रोल की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। यह कटौती वेस्ट एशिया में तनाव कम होने की वजह से इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद की गई है। दो साल में यह पहली बार है जब किसी कंपनी ने फ्यूल की रिटेल कीमतों में कमी की है।

वेस्ट एशिया में तनाव कुछ कम होने और एक अहम समुद्री रास्ते के फिर से खुलने के बाद क्रूड ऑयल और LNG की सप्लाई बहाल हो गई है। इससे सप्लाई में रुकावट की चिंताएं कम हुई हैं। इसके बाद ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आई है।

इंडस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि नई कीमतें देश भर में नायरा के 7,000 से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर लागू हो गई हैं। अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल पंपों पर कीमतें अलग-अलग होती हैं, क्योंकि हर राज्य में वैट (VAT) जैसे लोकल टैक्स अलग-अलग होते हैं।

हालांकि, सरकारी फ्यूल रिटेलर कंपनियों ने अपनी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। सरकारी कंपनियों -इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने कीमतों में किसी बदलाव का ऐलान नहीं किया है।

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KPIT Technologies Share: बाजार खुलते ही केपीआईटी टेक्नोलॉजीज का शेयर क्रैश, जेपी मॉर्गन ने घटाया टारगेट प्राइस

KPIT Technologies Share: बाजार खुलते ही 1 जुलाई को केपीआईटी टेक्नोलॉजीज का शेयर धड़ाम हो गया। 10 फीसदी गिरने के बाद शेयर में लोअर सर्किट लग गया। इसकी वजह कंपनी का बयान है। ऑटोमोटिव सॉफ्टेवेयर कंपनी ने कहा है कि जून तिमाही में उसकी प्रॉफिट ग्रोथ कमजोर रह सकती है। इसके बाद जेपी मॉर्गन ने इसके शेयर की रेटिंग घटा दी है। इसके शेयर का टारगेट प्राइस भी कम कर दिया है। इसका असर बुधवार को बाजार खुलने पर शेयरों को देखने को मिला। लोअर सर्किट के बाद दोबारा ट्रेडिंग शुरू होने पर भी शेयर में बिकवाली दबाव जारी रहा।

15 फीसदी तक फिसला शेयर

KPIT Technologies का शेयर 1 जुलाई को 10 बजे 15.83 फीसदी गिरकर 564 रुपये पर चल रहा था। इससे यह BSE Midcap Index का सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर बन गया। बीते एक साल में यह शेयर 51.5 फीसदी गिरा है। इस दौरान निफ्टी 50 में सिर्फ 6.4 फीसदी की गिरावट आई है। कंपनी ने कहा है कि इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में उसका रेवेन्यू पहली तिमाही जितनी रहने का अनुमान है। इससे यह संकेत मिलता है कि शॉर्ट टर्म में कमजोरी बनी रह सकती है।

शेयरों में 362 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील

केपीआईटी टेक्नोलॉजीज के करीब 62.61 लाख शेयरों में प्रति शेयर 375 रुपये की औसत कीमत पर ब्लॉक डील हुई। इस ट्रांजेक्शन की वैल्यू करीब 362.4 करोड़ रुपये बताई जा रही है। जेपी मॉर्गन ने केपीआईटी टेक्नोलॉजी के शेयर को डाउनग्रेड कर ‘अंडरवेट’ कर दिया है। पहले उसने इस शेयर पर ‘न्यूट्रल’ रेटिंग दी थी। उसने शेयर का टारगेट प्राइस 700 रुपये से घटाकर 550 रुपये कर दिया है।

कंपनी के गाइडेंस पूरा नहीं करने की आशंका

जेपी मॉर्गन ने कहा है कि ऐसा लगता है कि केपीआईटी टेक्नोलॉजीज पहली तिमाही के रेवेन्यू और मार्जिन के अपने गाइडेंस को पूरा नहीं कर पाएगी। साल दर साल आधार पर कंपनी का डॉलर रेवेन्यू 1 फीसदी और तिमाही दर तिमाही आधार पर 4 फीसदी (कॉन्सटेंट करेंसी में) घट सकती है। इससे यह संकेत मिलता है कि यूरोप में ऑटोमोटिव ऑरिजिनल इक्विपमेंट (OEM) कंपनियां खर्च करने में कंजूसी बरत रही हैं।

जेपी मॉर्गन ने रेवेन्यू के अनुमान को घटाया

जेपी मॉर्गन का मानना है कि इस वित्त वर्ष की पहली छमाही केपीआईटी टेक्नोलॉजीज के लिए कमजोर रह सकती है। तिमाही दर तिमाही आधार पर ग्रोथ चौथी तिमाही में दिख सकती है। उसने यह भी कहा है कि FY27 रेवेन्यू में ऑर्गेनिक गिरावट का लगातार दूसरा साल हो सकता है। इसके मद्देनजर ब्रोकरेज फर्म ने FY27-FY29 के अपने रेवेन्यू अनुमान को 5-8 फीसदी तक घटा दिया है।

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