Commodity Market : जानिए आगे हफ्ते कैसी रह सकती है कमोडिटीज की चाल, सोने को कहां मिलेगा सपोर्ट और कहां होगा रेजिस्टेंस

Commodity Market : 2 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। यूएस बॉन्ड की भारी बिकवाली से बाजार पर दबाव बना रहा। हालांकि अमेरिका से लगातार आने वाले कमजोर डेटा के कारण फ़ेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े अनुमानों में काफी बदलाव हुआ है। अप्रैल 2025 के बाद पहली बार डॉलर 102 के स्तर से ऊपर चला गया। इसमें सबसे ज्यादा तेजी गुरुवार को आई। ग्लोबल बॉन्ड की बड़े पैमाने पर बिकवाली के कारण US में 10 ईयर ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड 5.34 प्रतिशत (2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर) तक पहुंच गई और डॉलर भी 102.2 के हाई पर पहुंच गया।

करेंसी की चाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं

दो अलग-अलग आंकड़ों ने मार्केट सेंटीमेंट पर असर डाला,लेकिन करेंसी की चाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। बुधवार को आए कोर PCE के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। वहीं, शुक्रवार को आए सितंबर के पेरोल आंकड़े सिर्फ़ 29,000 पर रहे, जो लगभग 84,000 से 90,000 के अनुमान से काफी कम थे। साथ ही बेरोज़गारी दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई। जुलाई-अगस्त के आंकड़ों में कुल मिलाकर 60,000 नौकरियों की कमी आई।

अमेरिका में वेतन बढ़ोतरी की रफ्तार पड़ी धीमी

वेतन में बढ़ोतरी की रफ्तार भी धीमी पड़ती दिखा। सितंबर में प्रति घंटा औसत कमाई में सिर्फ़ 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई और सालाना बढ़ोतरी धीमी होकर लगभग 3 प्रतिशत रह गई,जो 2021 के बाद से सबसे कम है। इस जॉब्स रिपोर्ट के बाद ब्याज दरों में बदलाव के अनुमान बदल गए। यूएस फेड की अक्टूबर की बैठक में दरों में बढ़ोतरी की संभावना,जो एक हफ्ते पहले 60 प्रतिशत से ज़्यादा थी,घटकर 20 प्रतिशत से भी कम हो गई है।

इन आंकड़ों के बाद शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी आई, हालांकि पिछले पांच हफ्तों में ज्यादातर समय डाओ जोन्स और S&P 500 में गिरावट देखने को मिली। जबकि नैस्डक में बढ़त जारी रही।

हफ्ते के आखिर में स्पॉट गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में 3 प्रतिशत और 6 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई। डॉलर और यील्ड में बढ़ोतरी का असर ब्याज दरों के अनुमानों पर पड़ा। फेड अधिकारी ज़्यादातर सतर्क रुख अपनाते दिखे। न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट विलियम्स ने कहा कि इस साल के आखिर में एक और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है,हालांकि उन्हें इसकी कोई जल्दबाजी नहीं दिखी। जबकि उनके कई सहयोगियों ने महंगाई के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने के जोखिम की ओर इशारा किया।

डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बढ़त होने पर सोने पर बनेगा दबाव

बीते हफ्ते सोने की कीमतों में दो बार तेजी आई। कमजोर जॉब्स और महंगाई के आंकड़ों की वजह से यह कुछ समय के लिए $4,200 प्रति औंस के स्तर को पार कर गया,लेकिन यह अपनी बढ़त बनाए नहीं रख सका और $4,150 से नीचे बंद हुआ। चांदी का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। हफ्ते में दोनों बार यह $62 प्रति औंस के करीब पहुंची, लेकिन हर बार वापस $60 से नीचे आ गई। इनकी आगे की चाल काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि डॉलर और यील्ड काबू में रहते हैं या नहीं। अगर इनमें से किसी में भी दोबारा तेजी आती है,इन मेटल्स पर और दबाव पड़ने की संभावना है।

सोने के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

गोल्ड फ्यूचर्स में कमजोरी का रुख बना हुआ है और ये 20-डे EMA और सुपरट्रेंड (7,3) दोनों के नीचे ट्रेड कर रहा है। जबकि RSI (14) 50 से नीचे है,जो सुस्त मोमेंटम का संकेत है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट ₹1,45,950 प्रति 10 ग्राम पर है। अगर गोल्ड इस लेवल से नीचे बना रहता है,तो यह ₹1,44,500 के आसपास स्थित अगले सपोर्ट लेवल तक गिर सकता है।

ऊपर की तरफ इसके लिए ₹1,51,100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा हैऔर उसके बाद ₹1,53,000 पर अगला बड़ा रेजिस्टेंस है। शॉर्ट-टर्म आउटलुक में सुधार के लिए सोने के लिए लगातार ₹1,53,000 के ऊपर बने रहना जरूरी होगा। कुल मिलाकर इसका टेक्निकल ट्रेंड साइडवेज से लेकर बेयरिश बना हुआ है।

कच्चे तेल पर रहेगी नजर

ईंधन की कीमतों को लेकर वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव के जवाब में G7 देशों ने अगले चार महीनों में 10 करोड़ (100 मिलियन) बैरल तक डीजल और कच्चे तेल के भंडार को कम करने की एक मिली-जुली योजना बनाई है। इस योजना के तहत डीजल भंडार का अधिकांश हिस्सा शुरुआती तीन हफ्तों में ही कम किया जाएगा। इस योजना के दबाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें हफ्ते के आखिर में गिरकर बंद हुईं।

इसी जॉइंट स्टेटमेंट में ईरान के अपने पड़ोसियों पर हालिया हमलों की निंदा की गई और रूस पर पहले से लगे प्रतिबंधों को फिर से दोहराया गया। फिर भी,कच्चे तेल के भाव में सिर्फ 2 प्रतिशत की ही कमी आई। इसकी वजह यह है कि खाड़ी क्षेत्र में अभी भी जोखिम बना हुआ है। ऐसी खबरें भी हैं कि अमेरिका का तीसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप इस क्षेत्र में भेजा जा रहा है,जिसके नवंबर के आखिर तक पहुंचने की उम्मीद है।

उधर डोनाल्ड ट्रम्प ने उस पूर्व रिपोर्ट का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि वाशिंगटन ने ठोस परमाणु रियायतों के बदले ईरान को प्रतिबंधों में राहत की पेशकश की है। हालांकि कतर ने दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की बात कही है। हालांकि इससे अभी कोई बड़ी सफलता नहीं हासिल हुई है।

सप्लाई के नजरिए से देखें तो पिछले महीने ड्रोन हमले से हुए नुकसान के बाद सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन फिर से चालू हो गई है। यह पाइपलाइन अभी अपनी पूरी क्षमता के लगभग आधे यानी रोज़ाना 35 लाख बैरल की रफ़्तार से चल रही है। साथ ही,सितंबर में मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की कुल शिपमेंट बढ़कर रोज़ाना 1.63 करोड़ बैरल हो गई है,जो फरवरी के आखिर में शुरू हुए टकराव के बाद से सबसे तेज रफ़्तार है।

बेस मेटल्स की कीमतों में भी भारी गिरावट

बीते हफ्ते बेस मेटल्स की कीमतों में भी भारी गिरावट आई। कॉपर 2 प्रतिशत से ज़्यादा गिरकर $14,260 प्रति टन के आसपास बंद हुआ। जबकि जिंक और एल्युमीनियम में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। डॉलर के 17 महीने के हाई पर पहुंचने का असर डॉलर में ट्रेड होने वाली कमोडिटीज़ पर पड़ा,जिससे चीन के आंकड़ों में आए अच्छे सुधार का असर भी बेअसर हो गया।

चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI में जून के बाद पहली बार बढ़ोतरी

चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI में जून के बाद पहली बार बढ़ोतरी दिखी है। वहीं, सर्विस और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को कवर करने वाला नॉन-मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स बढ़कर 50.2 पर पहुंच गया है। इन दोनों आंकड़ों में नए स्टिमुलस पैकेज के बाद बढ़त आई है,जिसे 2024 के बाद का सबसे बड़ा पैकेज बताया जा रहा है और जिसका मकसद चीन में 4.5 से 5 प्रतिशत के ग्रोथ टारगेट को हासिल करना है।

हफ़्ते की शुरुआत में सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के कारण कॉपर की कीमत $14,400 से ऊपर बनी हुई थी,लेकिन बाद में दूसरी कमोडिटीज की तरह इसमें भी गिरावट आई। नेशनल डे की छुट्टियों के कारण चीन में कमजोर कारोबारी गतिविधि के कारण मेटल्स की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

FOMC की मीटिंग के मिनट्स और Fed अधिकारियों के भाषणों पर रहेगी नजर

आने वाले हफ्ते में डेटा कम ही आएगा। मुख्य रूप से बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सर्विस PMI और US के शुरुआती कंज्यूमर सेंटीमेंट और महंगाई के अनुमान ही आएंगे। इस हफ्ते के डेटा पर सेंट्रल बैंक की प्रतिक्रिया के बारे में और अंदाजा लगाने के लिए FOMC की मीटिंग के मिनट्स और Fed अधिकारियों के भाषणों पर बाजार का फोकस रहेगा।

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कॉपर को लेकर एक खास जोखिम

अगले हफ्ते कॉपर को लेकर एक खास जोखिम बना रहेगा। चिली में BHP की एस्कोन्डिडा और एंटोफ़ागास्टा की सेंटिनेला खदानों के कर्मचारियों ने नए कॉन्ट्रैक्ट ऑफ़र ठुकरा दिए हैं और वे सरकार की अनिवार्य मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल हो गए हैं। अगर बातचीत विफल रहती है तो सेंटिनेला में 13 अक्टूबर के आसपास कानूनी हड़ताल हो सकती है,जिससे तांबे की फिजिकल सप्लाई पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। पनामा की कोब्रे पनामा खदान को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव से भी ज़्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

OPEC से प्रोडक्शन कोटा में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं

उम्मीद है कि OPEC प्रोडक्शन कोटा में कोई बदलाव नहीं करेगा। वहीं, मार्केट G7 के डीजल रिलीज़ और अगर कीमतें ज्यादा बनी रहती हैं, तो रिज़र्व से और डीजल निकालने के किसी भी संकेत पर नजर रखेगा। सऊदी अरब और हूथी के बीच तनाव बढ़ने का जोखिम कच्चे तेल की कीमतों के लिए सबसे अहम फैक्टर बना हुआ है। इससे सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को सीधा खतरा है।

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भारत ने पाकिस्तान को 19 रनों से हराया

अभिषेक शर्मा (61), तिलक वर्मा (नाबाद 51) और शिवम दुबे (27 रन/ दो विकेट) के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने शनिवार को एशियाई खेल 2026 की क्रिकेट प्रतियोगिता के फाइनल में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 19 रनों से हराकर खिताब अपने नाम किया।

212 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान के लिए कप्तान साहिबजादा फरहान और माज सदाकत की सलामी जोड़ी ने पहले विकेट के लिए 33 रन जोड़े। चौथे ओवर में वॉशिंगटन सुदंर ने साहिबजादा फरहान (10) को आउट कर भारत को पहली सफलता दिलाई। अगले ही ओवर में अक्षर पटेल ने उस्मान खान (तीन) रन का शिकार कर लिया। पाकिस्तान का तीसरा विकेट सातवें ओवर में माज सदाकत (23) रन के रूप में गिरा। इसके बाद हसन नवाज और सैम अयूब की जोड़ी ने पाकिस्तान की पारी को संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट लिए 87 रन जोड़कर पाकिस्तान की मैच में वापसी कराई।

15वें ओवर में शिवम दुबे ने सैम अयूब (29) को आउट कर इस साझेदारी का अंत किया। 18वें ओवर में वॉशिंगटन सुंदर ने अब्दुल समद (नौ) रन को आउट कर पाकिस्तान को पांचवां झटका दिया। इस दौरान हसन नवाज एक छोर थामे तेजी के साथ रन बनाते रहे। शिवम दुबे ने उन्हें मैच की आखिरी गेंद पर विकेटकीपर संजू सैमसन के हाथों कैच आउट कराया। उन्होंने 51 गेंदों में पांच चौके और सात छक्कों की मदद से (96) रनों की पारी खेली। पाकिस्तान की टीम निर्धारित 20 ओवरों में छह विकेट पर 192 रन ही बना सकी और मुकाबला 19 रनों से हार गई। भारत के लिए शिवम दुबे, वॉशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल ने दो-दो विकेट लिये।

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इससे पहले आज यहां अभिषेक शर्मा (61) और तिलक वर्मा (नाबाद 51) की आतिशी अर्धशतकीय पारियों के दम पर भारत ने पाकिस्तान को जीत के लिए 212 रनों का लक्ष्य दिया था। भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम को तीसरे ओवर की पहली गेंद पर वैभव सूर्यवंशी (15) रन के रूप में पहला झटका लगा। अगले ही ओवर में संजू सैमसन (दो) रन बनाकर पवेलियन लौट गये। इसके बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने अभिषेक शर्मा के साथ पारी को संभाला। दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए 42 रनों की साझेदारी हुई। आठवें ओवर में अराफात मिन्हास ने अभिषेक शर्मा को स्टंप आउट कराकर इस साझेदारी को तोड़ा। अभिषेक ने 28 गेंदों में तीन चौके और सात छक्के उड़ाते हुए (61) रनों की पारी खेली।

13वें ओवर में इशान किशन (20) रन और अगले ओवर में श्रेयस अय्यर (21) रन बनाकर आउट हुये। शिवम दुबे ने 15 गेंदों में दो चौके और दो छक्के उड़ाते हुए (27) रनों की पारी खेली।भारत ने निर्धारित 20 ओवरों में छह विकेट पर 211 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। तिलक वर्मा ने 22 गेंदों में तीन चौके और चार छक्के उड़ाते हुए (नाबाद 51) रनों की पारी खेली। पाकिस्तान की ओर से अराफात मिन्हास और अहमद दनियाल ने दो-दो विकेट लिये। सैम अयूब और अबरार अहमद ने एक-एक बल्लेबाज को आउट किया।

Pic Credit : UNI

अमेरिका से 9000 सैनिक, तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर मिडिल ईस्ट रवाना:ईरान पर हमले की तैयारी, ट्रम्प ने चुनाव के बाद हमले की बात कही थी

अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ा रहा है। करीब 9 हजार अतिरिक्त सैनिकों के साथ अमेरिका अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर थियोडोर रूजवेल्ट भी क्षेत्र में भेज रहा है। अक्टूबर के आखिर तक मिडिल ईस्ट में तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात हो सकते हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान पर नए हमलों की चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर हमले की बात की थी। इसके पहले उन्होंने ईरान के सीजफायर प्लान को भी ठुकरा दिया था। क्षेत्र में दो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ही बचे थे अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अक्टूबर के अंत तक मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 3 एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात हो सकते हैं। फिलहाल USS जॉर्ज डब्ल्यू बुश और USS जॉर्ज वॉशिंगटन पहले से वहां मौजूद हैं। अगस्त में USS अब्राहम लिंकन की वापसी के बाद क्षेत्र में दो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर बचे थे, अब थियोडोर रूजवेल्ट के पहुंचने पर इनकी संख्या फिर तीन हो सकती है। इसके अलावा USS बॉक्सर समेत कई अन्य युद्धपोत भी क्षेत्र में तैनात हैं। नई तैनाती के बाद पश्चिम एशिया में अमेरिकी नौसेना और मरीन कर्मियों की संख्या 20 हजार से ज्यादा हो सकती है। ट्रम्प ने ईरान का सीजफायर प्रस्ताव ठुकरा दिया था टाइम मैगजीन को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने बताया कि उन्होंने ईरान के हालिया सीजफायर प्रस्ताव को ठुकरा दिया। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की पेशकश भी की थी, लेकिन ट्रम्प के मुताबिक यह प्रस्ताव अमेरिका के लिए काफी नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि 3 नवंबर के चुनाव के बाद ईरान पर बमबारी बढ़ाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। ईरान ने जंग खत्म करने को 7 दिन का प्रस्ताव रखा था ईरान ने जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात शामिल थी। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, ईरान समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए तैयार है। इसके बदले वह विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों और पैसों पर लगी रोक हटाने और अपना तेल बेचने की अनुमति चाहता है। उन्होंने कहा कि ये मांगें जून में अस्थायी सीजफायर के लिए हुए समझौता ज्ञापन (MoU) जैसी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से जवाबी हमलों के बाद वह समझौता टूट गया था। ——————— ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- फ्लाईदुबई को-पायलट का ईरान कनेक्शन हो सकता है: ऐसा हुआ तो कड़ी कार्रवाई होगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि इजराइल जा रहे फ्लाईदुबई विमान के को-पायलट का ईरान से संबंध हो सकता है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

जयशंकर बोले- आतंकवाद पर भारत की चिंता नहीं समझता अमेरिका:इसका रिश्तों पर असर पड़ता है; पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ा रहा है वॉशिंगटन

भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा है कि आतंकवाद को लेकर भारत की चिंता को अमेरिका ठीक से नहीं समझता। इसका असर रिश्तों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत दशकों से पाकिस्तान की ओर से होने वाले आतंकवाद का सामना कर रहा है। जयशंकर ने यह बयान सोमवार को न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में दिया। इसमें भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों और विदेश नीति के जानकारों ने हिस्सा लिया। जयशंकर ने यह बयान ऐसे समय दिया है, जब पिछले एक साल में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच नजदीकी बढ़ी है। वहीं, व्यापार, टैरिफ और रूस से भारत की ऊर्जा खरीद को लेकर भारत-अमेरिका के बीच मतभेद भी रहे हैं। जयशंकर बोले- अमेरिका से कई देशों संबंध मुश्किल हुए अमेरिका के पूर्व राजनयिक डेनियल रसेल ने जयशंकर से पूछा कि व्यापार और टैरिफ को लेकर पिछले एक साल में भारत-अमेरिका के रिश्तों में आई खटास को कैसे दूर किया जा सकता है। इस पर जयशंकर ने कहा कि दुनिया के कई देशों के लिए अमेरिका के साथ रिश्ते पहले के मुकाबले मुश्किल हुए हैं। उन्होंने कहा, “दुनिया के कई देशों के लिए अमेरिका के साथ संबंध पहले से ज्यादा मुश्किल हुए हैं। यह शायद हमारे लिए राहत की बात न हो, लेकिन यही हकीकत है।” विदेश मंत्री ने दुनिया के हालात पर चिंता जताई जयशंकर ने कहा कि दुनिया में युद्ध, आर्थिक संकट और नई तकनीक से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं। इनका असर सिर्फ संघर्ष वाले देशों पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात अब भी मुश्किल हैं, जबकि अफ्रीका के सूडान में संघर्ष जारी है। जयशंकर दुनिया के सामने ‘4F संकट’ यानी भोजन, ईंधन, खाद और पैसों की कमी को बड़ी चुनौती बताया।
ट्रम्प सरकार में नजदीक आए अमेरिका और पाकिस्तान ट्रम्प प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में नजदीकी बढ़ी है। जून 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी। इसके बाद सितंबर 2025 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और मुनीर ने फिर ट्रम्प से मुलाकात की। इन बैठकों को दोनों देशों के बीच बढ़ते संपर्कों के तौर पर देखा गया। जयशंकर बोले- भारत-चीन के रिश्ते सुधरे जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन के रिश्ते पिछले दो साल के मुकाबले बेहतर हुए हैं। उन्होंने बताया कि 2020 में सीमा पर विवाद के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक तनाव बना रहा। अब सीमा पर हालात सुधरने के साथ रिश्ते भी सामान्य हो रहे हैं। जयशंकर ने कहा, “सीमा पर जैसे हालात होंगे, दोनों देशों के रिश्ते भी वैसे ही रहेंगे।” उन्होंने कहा कि रिश्तों में सुधार का मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच सभी समस्याएं खत्म हो गई हैं।लजयशंकर ने कहा कि सीमा पर तनाव के कारण भारत और चीन के बीच आधिकारिक बातचीत, वीजा और सीधी उड़ानों पर असर पड़ा था। भारत लगातार चीन से कहता रहा कि सीमा पर विवाद जारी रहने से दोनों देशों को कोई फायदा नहीं है। जयशंकर ने कहा कि दुनिया में अब कई देश ताकतवर हो रहे हैं और वैश्विक फैसलों में उनकी भूमिका बढ़ रही है।

PoK के लोग बोले-हमें भारत का रास्ता दो, तारबंदी हटाओ:115 दिन से जारी ‘आजादी आंदोलन’ तेज, प्रदर्शनकारी एलओसी के पास जमा

पीओके (पाक के कब्जे वाले कश्मीर) में आजादी की आवाजें तेज हो गई हैं। एलओसी (नियंत्रण रेखा) से लगभग 7 किमी दूर मंधोल में 25 हजार लोगों का हुजूम आंदोलन पर बैठा है। पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर और पाक पीएम शहबाज शरीफ के खिलाफ नारे गूंज रहे हैं। जॉइंट अवामी लीग (जेएएल) के नेता अब आर-पार के लिए कमर कस चुके हैं। उन्होंने दो टूक ऐलान किया है कि पाक सरकार को पुंछ और मेंढर का रास्ता खोलना होगा। ये रास्ता भारत की ओर जाता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हम भारत से मिलना चाहते हैं। पाक हुकूमत ने प्रदर्शनों के कारण पीओके की सप्लाई लाइन को काट दिया है। लोगों के पास आटा और खाने का सामान नहीं है। 5 जून से पीओके में जारी आंदोलन के 115वें दिन सोमवार को मंधोल के इलाके में खासी गहमागहमी रही। पीओके के मुजफ्फराबाद से अब लोग एलओसी के पास जमा होने लगे हैं। जेएएल के नेताओं की अपील पर रोज एलओसी पर हुजूम बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि पाक हुकूमत का दमन अब उनके इरादों को डिगा नहीं पाएगा। पाकिस्तान ने बरसों तक उनके हकों को दबाया है, लेकिन अब इंतेहा हो चुकी है। फैसला होकर रहेगा। आईएसआई की ‘डाला ब्रिगेड’ की जीपें अब पीओके में फेल हो रही हैं पीओके में अब क्या हालात? खुफिया एजेंसी आईएसआई की डाला ब्रिगेड यानी वो जीपें जिनमें लोगों को गिरफ्तार कर डाला जाता था, वो अब फेल हो रही हैं। हालात ये हो गए हैं कि आईएसआई के एजेंट इन्हें लेकर जाने से घबराने लगे हैं। पीओके के प्रदर्शनकारी इन पर पथराव करते हैं। आर्मी चीफ मुनीर क्या करेंगे? पाक आर्मी चीफ मुनीर के लिए पीओके को कब्जे में रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए वे गुपचुप पीओके में अपने फौजियों को भेज रहे हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत पाक आर्मी अपने सैनिकों को पीओके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नहीं उतार सकती है। क्या पीओके खुल पाएगा? पाक आर्मी जेएएल के आंदोलन को कुचलने में विफल रही है। लेकिन पीओके के हालात ऐसे है कि वहां के लोग अब पाक हुकूमत के जुल्मों को और ज्यादा नहीं सहने वाले हैं। पीओके का खुल पाना काफी हद तक लोगों के आंदोलन की तीव्रता पर निर्भर करेगा। 1948 के कबाइली हमले के दौरान बने पीओके के दौर को बदला भी जा सकता है। पीओके सरकार क्या करेगी? पीओके में 27 जुलाई को स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद चुनाव कराए गए। पूर्व पीएम नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएलएन आर्मी के साथ सांठगांठ कर सरकार बनाने में कामयाब रही है। लेकिन हालात ये है कि यहां की कैबिनेट के लोग आंदोलनकारियों के सामने जाने से कतरा रहे हैं। विरोध के बाद भी चुनाव, नवाज शरीफ की पार्टी जीती

———————————- ये खबर भी पढ़ें…. ट्रम्प को रेयर-अर्थ मिनरल नहीं भेज पा रहा पाकिस्तान:बलूच हमलों से अमेरिकी कंपनी का काम बंद; मुनीर ने वॉशिंगटन में दिखाए थे सैंपल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ड्रीम प्रोजेक्ट अटक गया है। पाकिस्तान से रेयर अर्थ मिनरल (दुर्लभ खनिज) की अगस्त में प्रस्तावित खेप अमेरिका नहीं भेजी जा सकी। इसके बाद कराची और इस्लामाबाद में अमेरिकी कंपनी यूएस स्ट्रेटेजिक मेटल्स (USSM) के दफ्तरों में काम बंद हो गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

PoK के लोग बोले-हमें भारत का रास्ता दो, तारबंदी हटाओ:115 दिन से जारी ‘आजादी आंदोलन’ तेज, प्रदर्शनकारी एलओसी के पास जमा

पीओके (पाक के कब्जे वाले कश्मीर) में आजादी की आवाजें तेज हो गई हैं। एलओसी (नियंत्रण रेखा) से लगभग 7 किमी दूर मंधोल में 25 हजार लोगों का हुजूम आंदोलन पर बैठा है। पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर और पाक पीएम शहबाज शरीफ के खिलाफ नारे गूंज रहे हैं। जॉइंट अवामी लीग (जेएएल) के नेता अब आर-पार के लिए कमर कस चुके हैं। उन्होंने दो टूक ऐलान किया है कि पाक सरकार को पुंछ और मेंढर का रास्ता खोलना होगा। ये रास्ता भारत की ओर जाता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हम भारत से मिलना चाहते हैं। पाक हुकूमत ने प्रदर्शनों के कारण पीओके की सप्लाई लाइन को काट दिया है। लोगों के पास आटा और खाने का सामान नहीं है। 5 जून से पीओके में जारी आंदोलन के 115वें दिन सोमवार को मंधोल के इलाके में खासी गहमागहमी रही। पीओके के मुजफ्फराबाद से अब लोग एलओसी के पास जमा होने लगे हैं। जेएएल के नेताओं की अपील पर रोज एलओसी पर हुजूम बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि पाक हुकूमत का दमन अब उनके इरादों को डिगा नहीं पाएगा। पाकिस्तान ने बरसों तक उनके हकों को दबाया है, लेकिन अब इंतेहा हो चुकी है। फैसला होकर रहेगा। आईएसआई की ‘डाला ब्रिगेड’ की जीपें अब पीओके में फेल हो रही हैं पीओके में अब क्या हालात? खुफिया एजेंसी आईएसआई की डाला ब्रिगेड यानी वो जीपें जिनमें लोगों को गिरफ्तार कर डाला जाता था, वो अब फेल हो रही हैं। हालात ये हो गए हैं कि आईएसआई के एजेंट इन्हें लेकर जाने से घबराने लगे हैं। पीओके के प्रदर्शनकारी इन पर पथराव करते हैं। आर्मी चीफ मुनीर क्या करेंगे? पाक आर्मी चीफ मुनीर के लिए पीओके को कब्जे में रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए वे गुपचुप पीओके में अपने फौजियों को भेज रहे हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत पाक आर्मी अपने सैनिकों को पीओके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नहीं उतार सकती है। क्या पीओके खुल पाएगा? पाक आर्मी जेएएल के आंदोलन को कुचलने में विफल रही है। लेकिन पीओके के हालात ऐसे है कि वहां के लोग अब पाक हुकूमत के जुल्मों को और ज्यादा नहीं सहने वाले हैं। पीओके का खुल पाना काफी हद तक लोगों के आंदोलन की तीव्रता पर निर्भर करेगा। 1948 के कबाइली हमले के दौरान बने पीओके के दौर को बदला भी जा सकता है। पीओके सरकार क्या करेगी? पीओके में 27 जुलाई को स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद चुनाव कराए गए। पूर्व पीएम नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएलएन आर्मी के साथ सांठगांठ कर सरकार बनाने में कामयाब रही है। लेकिन हालात ये है कि यहां की कैबिनेट के लोग आंदोलनकारियों के सामने जाने से कतरा रहे हैं। विरोध के बाद भी चुनाव, नवाज शरीफ की पार्टी जीती

———————————- ये खबर भी पढ़ें…. ट्रम्प को रेयर-अर्थ मिनरल नहीं भेज पा रहा पाकिस्तान:बलूच हमलों से अमेरिकी कंपनी का काम बंद; मुनीर ने वॉशिंगटन में दिखाए थे सैंपल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ड्रीम प्रोजेक्ट अटक गया है। पाकिस्तान से रेयर अर्थ मिनरल (दुर्लभ खनिज) की अगस्त में प्रस्तावित खेप अमेरिका नहीं भेजी जा सकी। इसके बाद कराची और इस्लामाबाद में अमेरिकी कंपनी यूएस स्ट्रेटेजिक मेटल्स (USSM) के दफ्तरों में काम बंद हो गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

ईरान युद्ध में घायल अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 861 हुई

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने ईरान संघर्ष के लिए अपने सार्वजनिक घायलों के डेटाबेस में 37 और घायल सैन्य कर्मियों, 29 नाविकों और आठ मरीन, को शामिल किया है, जिससे कुल संख्या बढ़कर 861 हो गई है। यह जानकारी वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट से प्राप्त हुई।

पेंटागन अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं की है कि नई सूची में शामिल लोग कब या कैसे घायल हुए। 

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हताहतों की बढ़ती संख्या ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और इज़रायल का महीनों से चल रहा अभियान ईरान को घुटने टेकने पर मजबूर करने या अमेरिका द्वारा तय किए गए युद्ध के किसी भी लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह युद्ध एक ऐसे गतिरोध में बदल गया है जिसमें बहुत ज़्यादा नुकसान हो रहा है, जबकि ईरान सत्ता में बना हुआ है, अमेरिका के दबाव का विरोध कर रहा है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपना मज़बूत नियंत्रण बनाए हुए है। फिर भी, ट्रंप प्रशासन ने इस संघर्ष को खत्म करने के बजाय इसे जारी रखा है।

Pic Credit : UNI

रिपोर्ट- सऊदी ने परमाणु बम बनाने का विकल्प खुला रखा:अमेरिका परमाणु बिजली बनाने की तकनीक दे रहा, इजराइल कर चुका विरोध

सऊदी अरब ने परमाणु बम बनाने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट अमेरिकी संसद को दी गई है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि सऊदी ने अभी परमाणु बम बनाने का फैसला नहीं किया है। यह रिपोर्ट अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए नए परमाणु समझौते के बाद सामने आई है। जुलाई में हुए इस समझौते के तहत सऊदी अरब में परमाणु बिजली का ढांचा तैयार किया जाएगा। इजराइल इस समझौते का विरोध कर चुका है। परमाणु बिजली बनाने वाली तकनीक से हथियार का रास्ता खुल सकता है दरअसल परमाणु तकनीक से बिजली बनाने के लिए यूरेनियम को एक खास प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इसे यूरेनियम एनरिचमेंट कहते हैं। समझौते के तहत सऊदी अरब यूरेनियम को करीब 20% तक एनरिच कर सकेगा। यह परमाणु बम के लिए जरूरी स्तर से काफी कम है। समस्या यह है कि एक बार किसी देश के पास यूरेनियम को 20% तक एनरिच करने की क्षमता आ जाए, तो उसे हथियार बनाने लायक स्तर तक जाने में कम समय लग सकता है। इसी वजह से अमेरिकी सांसदों को डर है कि सऊदी अरब भविष्य में परमाणु हथियार बना सकता है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान कर चुके हैं हथियार बनाने की बात सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले ही कह चुके हैं कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाता है, तो सऊदी अरब भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा। अमेरिकी अधिकारी भी लंबे समय से मानते रहे हैं कि सऊदी परमाणु हथियार बनाने में दिलचस्पी रखता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सऊदी ने बम बनाने का फैसला कर लिया है। सांसदों का सवाल- सऊदी को अपने देश में एनरिचमेंट फैसेलिटि क्यों चाहिए? अमेरिकी सीनेटर एड मार्की और जेफ मर्कली समेत छह डेमोक्रेट सांसदों ने इस समझौते का विरोध किया है। उनका सवाल है कि अगर सऊदी अरब का मकसद सिर्फ परमाणु बिजली बनाना है, तो वह अपने देश में यूरेनियम एनरिच करने की सुविधा क्यों चाहता है। अमेरिका बोला- समझौता परमाणु हथियार बनाने के लिए नहीं अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि समझौते का मकसद सऊदी अरब में शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा विकसित करना है। अमेरिका के मुताबिक, इससे क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत होगी और परमाणु हथियारों को फैलने से रोकने के नियमों का पालन होगा। इस समझौते की शुरुआत जो बाइडेन के राष्ट्रपति रहते हुई थी। तब अमेरिका चाहता था कि परमाणु समझौते के बदले सऊदी अरब, इजराइल को औपचारिक मान्यता दे। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका, सऊदी अरब को सुरक्षा की गारंटी, आधुनिक हथियार और असैन्य परमाणु कार्यक्रम में सहयोग देने को तैयार था। बदले में सऊदी अरब से उम्मीद थी कि वह इजराइल के साथ दूतावास खोलेगा, राजदूत नियुक्त करेगा और आधिकारिक संबंध शुरू करेगा। हालांकि, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजराइल पर हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए युद्ध की वजह से यह प्लान फेल हो गया। बाद में ट्रम्प ने रणनीति बदली और इजराइल के साथ रिश्तों को इस समझौते से अलग कर दिया। अमेरिकी संसद के पास समझौते की समीक्षा के लिए 90 दिन हैं अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुआ यह समझौता 30 साल का है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब में परमाणु बिजली से जुड़ा ढांचा तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाएंगी। अमेरिकी संसद इस समझौते की समीक्षा कर रही है। इसके लिए संसद के पास 90 दिन का समय है। अगर इस दौरान संसद समझौते को रोकने के लिए प्रस्ताव पास नहीं करती, तो यह अपने आप लागू हो सकता है। सऊदी अरब NPT का सदस्य है सऊदी अरब न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) का सदस्य है। इस संधि के तहत सदस्य देश परमाणु हथियार नहीं बनाने और अपने परमाणु कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में रखने पर सहमत होते हैं। अगर सऊदी अरब खुलकर परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बढ़ता है, तो उसे अमेरिका और यूरोपीय देशों समेत कई देशों के दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जिससे निवेश, व्यापार और रक्षा सहयोग प्रभावित हो सकता है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… दावा- सऊदी अरब ने यमन में मिसाइल अटैक किया: बाब अल-मंदेब के पास लोकल मार्केट पर हमला यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हूतियों ने दावा किया है कि सऊदी अरब ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास एक गांव के लोकल मार्केट पर मिसाइल अटैक किया। पूरी खबर पढ़ें…

Iran-US Conflict: ट्रंप ने ठुकराया ईरान का 7 दिन का सीजफायर प्लान, चुनाव बाद फिर बमबारी के संकेत

Iran-US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिन के युद्धविराम (सीजफायर) के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर अमेरिकी बमबारी फिर से शुरू हो जाएगी।

बता दें कि तेहरान कि ओर से अमेरिका को दिए गए इस प्रस्ताव के बदले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने की बात कही गई थी। ईरान चाहता था कि अमेरिका उसके बंदरगाहों की नाकाबंदी हटा दे, ताकि जहाजों की आवाजाही हो सके। गौरतलब है कि इस नाकाबंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप को इस बात पर शक है कि तेहरान उनकी मांगें मानेगा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि तेहरान मध्यावधि चुनावों के बाद एक ऐसी डील करना चाहता है जिससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म हो जाए।

ईरान ने सात दिन का प्लान पेश किया

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पत्रकारों को बताया था कि तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और सात दिनों के भीतर परमाणु बातचीत फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दिया है।

ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा ले, तेल पर लगी पाबंदियां खत्म कर दे और लेबनान समेत युद्धविराम का पालन करे, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य (जो दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा मार्ग है) को फिर से खोल देगा और अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत दोबारा शुरू करेगा।

अरागची ने कहा, “ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए वॉशिंगटन के सामने सात दिन का एक “ठोस” प्लान पेश किया है। अगर जरूरी शर्तें पूरी हो जाती हैं, तो होर्मुज को फिर से खोला जा सकता है और सात दिनों के भीतर सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल की जा सकती है। अब फैसला अमेरिका को करना है।”

ये कदम नए नहीं हैं’

ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका से जिन कदमों की मांग की जा रही है, वे नए नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “अमेरिका को जो कदम उठाने चाहिए, वे नए नहीं हैं। ये सभी पहले से ही MOU में शामिल हैं।” उन्होंने जून में ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते (MOU) का जिक्र करते हुए यह बात कही।

ईरान का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी से देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) इस विवाद का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

हालांकि, वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ट्रंप ने सात दिन के संघर्ष-विराम (ceasefire) के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और अपने सहयोगियों से कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर अमेरिकी बमबारी फिर से शुरू हो जाएगी।

बता दें कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक गतिरोध (stalemate) की स्थिति में पहुंच गया है और इसमें किसी समाधान की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

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Global Market: बॉन्ड यील्ड में उछाल से US मार्केट में बिकवाली, एशिया में जापान ऊपर, कोरिया के बाजार हैं बंद

Asian Market Today: वॉल स्ट्रीट पर अमेरिकी इंडेक्स के खराब प्रदर्शन के बाद एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स लगभग 1.38 फीसदी की बढ़त के साथ तेजी दिखा रहा है। दक्षिण कोरिया का अहम और बहुत उतार-चढ़ाव वाला इंडेक्स, KOSPI, हार्वेस्ट फेस्टिवल ‘चूसोक’ के कारण बंद है।

ताइवान का बाजार 0.38 फीसदी गिरकर 17,684.59 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 0.36 फीसदी की गिरावट के साथ 24,744.00के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.44 फीसदी की गिरावट के साथ 3,918.46 के स्तर पर दिख रहा है।

इस बीच, भारत में GIFT निफ्टी ने 150 अंक से ज़्यादा की बड़ी ‘गैप-डाउन’ शुरुआत का संकेत दिया, जिससे पिछले दिन की सारी बढ़त खत्म हो सकती है।

वॉल स्ट्रीट को भारी नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि पेट्रोलियम की कीमतें बढ़ गईं और उम्मीद से बेहतर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने महंगाई की चिंता और ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदों को बढ़ा दिया।

जापानी येन, जो तीन हफ्तों में अपने सबसे निचले स्तर के करीब है, पर सबकी नज़र रहेगी क्योंकि जापानी वित्तीय बाजार फिर से खुल रहे हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, एशियाई कारोबार के शुरुआती दौर में न्यूजीलैंड के सरकारी बॉन्ड में गिरावट आई, जबकि ऑस्ट्रेलियाई बॉन्ड फ्यूचर्स ने संभावित गिरावट का संकेत दिया, जो ट्रेजरी बाजार में व्यापक गिरावट को दर्शाता है।

हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया के इक्विटी-इंडेक्स फ्यूचर्स ने गिरावट का संकेत दिया, जबकि बुधवार को S&P 500 में 0.8% और नैस्डैक 100 में 0.9% की गिरावट के बाद अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स काफी हद तक स्थिर रहे। दक्षिण कोरियाई बाजार बंद रहे।

एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी पेट्रोलियम की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, क्योंकि ब्रेंट क्रूड 3.9% बढ़कर $103.08 प्रति बैरल पर बंद हुआ था। बुधवार को, दस-वर्षीय ट्रेजरी सिक्योरिटीज पर यील्ड 15 बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.11% हो गई, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल 2025 में टैरिफ लागू करने से बाजार में आई उथल-पुथल के बाद से एक दिन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी।

इससे पहले, आर्थिक आंकड़ों से पता चला था कि अमेरिकी मॉर्गेज दरें दो साल से अधिक समय में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं, जबकि S&P ग्लोबल का शुरुआती अमेरिकी कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स सितंबर में जुलाई 2021 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी को दर्शाता है। पांच साल की सिक्योरिटीज़ के $70 बिलियन के कमज़ोर ट्रांज़ैक्शन के बाद बाज़ार की हालत और खराब हो गई। इससे यील्ड 2007 के बाद पहली बार 5% से ऊपर चली गई और साथ ही डॉलर की कीमत भी सभी मुख्य करेंसी के मुकाबले बढ़ गई।

दूसरी कमोडिटीज़ की बात करें तो, बॉन्ड यील्ड बढ़ने के कारण बुधवार को बुलियन (कीमती धातुएं) की कीमत में 2% तक की गिरावट आई और यह लगभग $4,275 प्रति औंस हो गई। आम तौर पर, ऊंची ब्याज दरों से कीमती धातुओं को नुकसान होता है क्योंकि उनसे कोई यील्ड नहीं मिलती।

इसके अलावा, वॉल स्ट्रीट गुरुवार को वॉशिंगटन में ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली मीटिंग और अमेरिका के बड़े बिज़नेस एग्जीक्यूटिव्स के साथ होने वाले रिसेप्शन की तैयारी कर रहा है। ट्रंप ने पिछले हफ़्ते मीडिया को बताया था कि उन्हें उम्मीद है कि इस मीटिंग के दौरान “कई अलग-अलग समझौते” होंगे।

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