Gold Silver Prices Today: सोने में लगातार चौथे सत्र गिरावट, चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं

दिल्ली सर्राफा बाजार में 31 अगस्त को सोने में लगातार चौथे सत्र गिरावट देखने को मिली। यह 1,500 रुपये गिरकर 1,60,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में गिरावट का असर घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर पड़ा। चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ।

बीते हफ्तों में अच्छी तेजी के बाद मुनाफावसूली

ट्रेडर्स ने बताया कि बीते कुछ हफ्तों में सोने की कीमतों में अच्छी तेजी दिखी थी। अब लगातार मुनाफावसूली हो रही है, जिसका असर कीमतों पर पड़ रहा है। ट्रेडर्स सोने में इस लिए भी पोजीशन घटा रहे हैं, क्योंकि सोने में तेजी का ट्रेंड लंबे समय तक जारी रहने में नाकाम रहा। चांदी की कीमतें 31 अगस्त को 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर अपरिवर्तित रही।

केविन वॉर्श की स्पीच के बाद सोने पर दबाव

लेमन मार्केट डेस्क में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा, “फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच के बाद सोने की कीमतों पर दबाव दिख रहा है। उन्होंने 28 अगस्त को जैक्सन होल में अपनी स्पीच में सख्त मॉनेटरी पॉलिसी के संकेत दिए। इससे सितंबर में फेडरल रिजर्व की अगली बैठक में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है।”

बॉन्ड यील्ड में उछाल और डॉलर इंडेक्स में मजबूती का भी असर

उन्होंने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और डॉलर इंडेक्स में मजबूती का भी निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ा। डॉलर में मजबूती का सोने की कीमतों पर खराब असर पड़ता है, क्योंकि इससे दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में कमजोरी 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में कमजोरी दिखी। यह 0.35 फीसदी गिरकर 4,436 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, चांदी हल्की मजबूती के साथ 66.97 डॉलर प्रति औंस पर चल रही थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बुलियन मार्केट्स पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का भी असर पड़ा, क्योंकि इससे क्रूड की कीमतें एक बार फिर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रही हैं।

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क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंची बने रहने पर बढ़ सकती है महंगाई

ब्रेंट क्रूड का भाव अगर 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है तो इससे अमेरिकी सहित दुनियाभर में महंगाई बढ़ेगी। महंगाई को काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंकों पर इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का दबाव बढ़ जाएगा। फेडरल रिजर्व सितंबर में इंटरेस्ट रेट बढ़ाकर इसकी शुरुआत कर सकता है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने वाले माहौल में सोने की चमक फीकी पड़ जाती है।

GDP Growth: जून तिमाही में 7.8% रही भारत की जीडीपी ग्रोथ, सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ सबसे ज्यादा

GDP Growth: इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन अच्छा रहा है। जून तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ 7.8 फीसदी रही। यह एनालिस्ट्स और इकोनॉमिस्ट्स के अनुमान से ज्यादा है। खास बात यह है कि जून तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ तब 7.8 फीसदी रही, जब वैश्विक स्थितियां काफी चैलेंजिंग थीं।

मार्च तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.6 फीसदी

इस साल मार्च तिमाही में भारत में जीडीपी ग्रोथ 8.6 फीसदी थी। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन (MoSPI) ने 31 अगस्त को जून तिमाही के जीडीपी के डेटा जारी किए। जीडीपी की ग्रोथ अनुमान से ज्यादा रही। मनीकंट्रोल के पोल में इकोनॉमिस्ट्स ने जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।

जून तिमाही में जीवीए 8.2 फीसदी रहा

जून तिमाही में ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) 8.2 फीसदी रहा। मार्च तिमाही में यह 8.7 फीसदी था। जीवीए का मतलब इकोनॉमी में उत्पादित गुड्स और सर्विसेज की कुल वैल्यू से है। इसमें नेट इनडायरेक्ट टैक्स शामिल नहीं होता है। जून तिमाही में अर्थव्यवस्था के शानदार प्रदर्शन में सर्विसेज और इनवेस्टमेंट का बड़ा हाथ है।

पहली तिमाही में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ सबसे ज्यादा

जून तिमाही में सर्विसेज का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। इसकी ग्रोथ 10 फीसदी रही। एक साल पहले की समान अवधि में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ 8 फीसदी थी। मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ 9.2 फीसदी रही। कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ 7.7 फीसदी रही। ट्रेड, होटल्स, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग से संबंधित सर्विसेज सेगमेंट की ग्रोथ 8.5 फीसदी रही।

पहली तीमाही में मध्यपूर्व में लड़ाई का असर इकोनॉमी पर

जून तिमाही का मतलब अप्रैल, मई और जून के महीनों से है। अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को लड़ाई शुरू हुई थी। जून तिमाही में ज्यादातर समय ईरान को अमेरिकी हमले का सामना करना पड़ा। ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए।

क्रूड ऑयल  की कीमतें काफी समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहीं

इस दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से क्रूड ऑयल सहित दूसरी कमोडिटीज की सप्लाई पर काफी ज्यादा असर पड़ा। क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गईं। लेकिन, सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर जारी रखने से आर्थिक गतिविधियों को काफी सपोर्ट मिला।

प्राइवेट फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर 7.1 फीसदी बढ़ा 

जून तिमाही में प्राइवेट फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर 7.1 फीसदी बढ़ा। इससे परिवारों में होने वाली खपत का पता चलता है। ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन 11.9 फीसदी बढ़ा, जबकि सरकार का फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर 4.3 फीसदी बढ़ा। जून तिमाही के जीडीपी ग्रोथ के डेटा ऐसे वक्त आए हैं, जब इनफ्लशन से जुड़े रिस्क बढ़ रहा है।

FY27 में 5 फीसदी रह सकता है रिटेल इनफ्लेशन 

पिछले हफ्ते मनीकंट्रोल के पोल में शामिल इकोनॉमिस्ट्स का यह मानना था कि FY27 में रिटेल इनफ्लेशन 5 फीसदी रह सकता है। इसकी रेंज 4.7 से 5.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया। इसकी कई वजहें हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से ऑयल की कीमतें हाई लेवल पर बनी हुई हैं। देश में मानसून की बारिश एक समान नहीं रही है। इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा।

US-Iran War: अमेरिका का ईरान पर फिर बड़ा हमला, होर्मुज स्ट्रेट में की जमकर बमबारी, तेहरान ने जॉर्डन के अमेरिकी ठिकानों पर दागी मिसाइलें

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने एक बार फिर से होर्मुज स्ट्रेट में ईरान पर जमकर बमबारी की है। अमेरिका ने ईरान के लारक द्वीप (Larak Island) पर हमला कर वहां मौजूद दो मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाया है। इसके बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया है। यह करीब एक महीने में अमेरिका की ईरान के खिलाफ पहली मिलिट्री एक्शन है।

इस हमले से फरवरी से रुक-रुक कर चल रही लड़ाई में आई शांति टूट गई है। ईरान ने इसे जानलेवा हमला बताते हुए बदला लेने की घोषणा की है। इससे एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी हमले को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, यह जुलाई के अंत के बाद ईरान पर अमेरिका का पहला बड़ा हमला है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कमांडर टिम हॉकिन्स ने CBS News को बताया कि IRGC की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। BBC के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने देखा था कि ईरानी बल होर्मुज जलडमरूमध्य में रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगें (Sea Mines) लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे।

लारक द्वीप पर क्यों हुआ हमला?

लारक द्वीप ईरान के महत्वपूर्ण बंदरगाह बंदर अब्बास के बिल्कुल करीब स्थित है। यह रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य के बीचों-बीच आता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान फिलहाल इस इलाके से गुजरने वाले टैंकरों को लारक द्वीप के पास से होकर जाने और जांच कराने के लिए मजबूर कर रहा है।

कुछ जहाजों से कथित तौर पर 20 लाख डॉलर तक का शुल्क लिए जाने की बात भी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान की ओर से समुद्री सुरंगें बिछाने की तैयारी को देखते हुए लारक द्वीप पर मौजूद लॉन्चरों को निशाना बनाया गया।

ईरान ने दी बदले की धमकी

ईरानी सेना IRGC ने अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की है। इसे ट्रंप प्रशासन की बड़ी रणनीतिक और घातक गलती बताया। IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने कहा कि इस गलत आकलन की कीमत अमेरिका को आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर चुकानी पड़ेगी। ईरान की IRGC से जुड़े तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, लारक द्वीप पर हमला ड्रोन के जरिए किया गया। एजेंसी ने दावा किया कि हमले में दो लोगों की मौत हुई है। जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया।

जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमला

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों किंग हुसैन और अल-अजराक को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। IRGC का दावा है कि इन हमलों में अमेरिकी ठिकानों के तकनीकी ढांचे, रखरखाव सुविधाओं और लड़ाकू विमानों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहां भारी नुकसान हुआ है।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने देश के हवाई क्षेत्र में घुसी आठ मिसाइलों को रोक लिया है। जॉर्डन की सरकारी न्यूज एजेंसी पेट्रा के अनुसार, सेना के प्रवक्ता ने बताया कि ये मिसाइलें सोमवार तड़के देश के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई थीं।

ट्रंप ने दी थी समुद्री सुरंगों पर चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई सभी समुद्री बारूदी सुरंगों को या तो नष्ट कर दिया गया है या हटा दिया गया है। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने दोबारा किसी जहाज या नाव के जरिए नई सुरंगें बिछाने की कोशिश की तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा। हालांकि, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ट्रंप के इस दावे को ‘प्रचार और भ्रम फैलाने वाली बात’ बताया है।

ईरान पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। अमेरिका ने 24 अगस्त को ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों का ऐलान किया था। इनका उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अलग-थलग करना तथा उसके सहयोगी देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंधों का दबाव बढ़ाना है। ईरानी अधिकारियों और सरकारी मीडिया ने इन प्रतिबंधों को पहले से जारी अमेरिकी आर्थिक दबाव का ही विस्तार बताया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका सैन्य संघर्ष में असफल रहने के बाद आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल इस्तेमाल होने वाले तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता था। इसलिए इस इलाके में किसी भी तरह का सैन्य टकराव या समुद्री ट्रैफिक में रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि वैश्विक तेल कीमतों, शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

छह महीने से जारी है ईरान युद्ध

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों को निशाना बनाया था। इस संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री ट्रैफिक लगभग बंद हो गया था।

अब लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले और उसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी जवाबी कार्रवाई ने इस लंबे संघर्ष को एक बार फिर गंभीर मोड़ पर ला दिया है। सबसे बड़ी टेंशन यह है कि होर्मुज में फिर से सैन्य टकराव बढ़ा तो इसका सीधा असर दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर पड़ सकता है।

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LPG New Connection: LPG के नए कनेक्शन पर लगी रोक कब हटेगी? पेट्रोलियम मंत्रालय ने दिया बड़ा अपडेट

LPG New Connection: अगर आप नया LPG गैस कनेक्शन लेने की तैयारी कर रहे हैं तो फिलहाल आपको थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका-ईरन के बीच चल रहे विवाद के बीच देशभर में नए घरेलू LPG कनेक्शन जारी करने पर अस्थायी रोक लगी हुई है। तेल कंपनियां फिलहाल नए कनेक्शन की बुकिंग नहीं कर रही हैं। मौजूदा ग्राहकों को गैस सिलेंडर की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।

तेल कंपनियों के मुताबिक, मार्च 2026 से 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर के नए कनेक्शन जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में नए कनेक्शन के लिए आवेदन करने वाले लोगों को फिलहाल इंतजार करना पड़ रहा है।

सरकार ने नए कनेक्शन पर रोक की वजह बताई

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया के जरिए स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए नए LPG कनेक्शन जारी करना अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। मंत्रालय के मुताबिक, इस समय LPG वितरकों का मुख्य फोकस मौजूदा ग्राहकों को समय पर रिफिल उपलब्ध कराने पर है, ताकि पहले से कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना न करना पड़े।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए कनेक्शन पर लगी रोक स्थायी नहीं है। पश्चिम एशिया की स्थिति सामान्य होने और LPG आपूर्ति स्थिर रहने के बाद नए कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जा सकती है।

अभी सिर्फ मौजूदा ग्राहकों को मिल रही गैस

फिलहाल, तेल कंपनियां नए उपभोक्ताओं के बजाय पुराने ग्राहकों की जरूरत पूरी करने पर जोर दे रही हैं। जिन लोगों के कनेक्शन पहले से मौजूद हैं, उन्हें रिफिल उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, निष्क्रिय या बंद पड़े कनेक्शनों को दोबारा सक्रिय करने की प्रक्रिया जारी है।

इसके साथ ही उपभोक्ताओं से KYC पूरा कराने पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य फर्जी और डुप्लीकेट LPG कनेक्शनों को हटाना और वास्तविक उपभोक्ताओं तक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

LPG की सप्लाई फिलहाल स्थिर, लेकिन आगे का अनुमान मुश्किल

‘द हिंदू’ अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, FLDI के महासचिव पवन सोनी ने कहा कि फिलहाल LPG की आपूर्ति की स्थिति स्थिर है। लेकिन यह स्थिरता कितने समय तक बनी रहेगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में लगातार बने हुए तनाव के कारण यह निश्चित नहीं है कि तेल कंपनियां LPG लेकर कितने जहाज भारत तक ला पाएंगी। यही वजह है कि सरकार और कंपनियां मौजूदा स्टॉक और सप्लाई को लेकर सतर्कता बरत रही हैं।

नया कनेक्शन नहीं मिल रहा तो क्या विकल्प है?

जिन लोगों को फिलहाल 14.2 किलो का नया घरेलू LPG कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है, उनके लिए कुछ डिस्ट्रीब्यूटर 5 किलो या 10 किलो के सिलेंडर का विकल्प बता रहे हैं। खास तौर पर बड़े शहरों में 10 किलो का FTL (Free Trade LPG) सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसे बुक कराया जा सकता है और जरूरत के मुताबिक डिलीवरी भी ली जा सकती है। हालांकि, उपलब्धता और नियम क्षेत्र तथा वितरक के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

होर्मुज संकट का LPG सप्लाई पर क्यों पड़ा असर?

पश्चिम एशिया में तनाव का भारत की LPG सप्लाई पर सीधा असर इसलिए पड़ता है क्योंकि देश अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। पहले भारत के LPG आयात का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से आता था। करीब 90 फीसदी आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते पहुंचता था।

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री रूट्स से आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी। इसके बाद भारत ने LPG की उपलब्धता बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अमेरिका से LPG और LNG की खरीद भी बढ़ाई है। अमेरिका से आने वाली LPG को भारत तक पहुंचने में लंबा समुद्री रास्ता तय करना पड़ता है। पश्चिम एशिया से आने वाली आपूर्ति की तुलना में इसकी लागत भी अधिक हो सकती है।

कब से शुरू होगी नए कनेक्शन की बुकिंग?

सबसे अहम सवाल यही है कि नया LPG कनेक्शन कब से मिलना शुरू होगा? फिलहाल सरकार ने कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, यह रोक अस्थायी है। स्थिति सामान्य होने पर नए कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया बहाल की जाएगी। यानी अभी उपभोक्ताओं को निश्चित तारीख का इंतजार करना होगा।

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फिलहाल सरकार की प्राथमिकता मौजूदा LPG ग्राहकों को नियमित रिफिल उपलब्ध कराना है। पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई और देश में LPG की उपलब्धता पर नजर रखी जा रही है। जैसे ही आपूर्ति व्यवस्था पर्याप्त रूप से स्थिर होगी, नए कनेक्शन की बुकिंग दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना ₹4300 चढ़ा, चांदी एक दिन में ₹10000 उछली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 20 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों को पंख लग गए। सोना 4,300 के उछाल के साथ 1,62,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने का तीन महीने का सबसे ज्यादा प्राइस है। चांदी में भी जोरदार तेजी दिखी। इसकी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमजोरी बताई जा रही है।

चांदी 10,000 रुपये के उछाल से 7 हफ्ते की उंचाई पर

20 अगस्त को चांदी में 10,000 रुपये की जोरदार तेजी आई। इससे इसका भाव 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। यह बीते सात हफ्तों में चांदी का सबसे ज्यादा भाव है। इससे पहले 3 जुलाई को चांदी की कीमतें इस लेवल पर थीं। लंबे समय बाद सोने और चांदी में अच्छी तेजी दिखी है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर से नरमी बुलियन को सपोर्ट 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “सोना गुरुवार को बीते दो महीनों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया। इसकी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमजोरी है।” उन्होंने कहा कि डॉलर इंडेक्स तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया है। डॉलर में कमजोरी से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में नरमी दिखी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में नरमी देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 0.95 फीसदी गिरकर 4,475 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर हल्की तेजी के साथ 67 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया।

बेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल के पार 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाया है। उधर, ईरान का कहना है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इस तनातनी की वजह से क्रूड की कीमतों में तेजी जारी है।

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क्रूड में तेजी जारी रहने से महंगाई बढ़ने का डर

अगर लंबे समय तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रहती हैं तो इससे महंगाई बढ़ने का खतरा होगा। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सहित दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इसका सोने की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ेगा।

मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने से ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर के पार, भारत के इंपोर्ट बिल में आ सकता है बड़ा उछाल

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने का असर 20 अगस्त को क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिखा। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 94 डॉलर को पार कर गई। डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव भी 87 डॉलर के पार हो गया। क्रूड में उछाल का असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिला।

ट्रंप के आक्रामक रुख से मध्यपूर्व में संकट गहराया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ईरान के खिलाफ ऐसे सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जो अब तक किसी देश के खिलाफ नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने ईरान की आर्थिक रूप से मदद करने वाले देशों को भी चेताया है। इधर, ईरान पर ट्रंप के रुख का कोई असर नहीं पड़ा है। इससे मध्यपूर्व में स्थिति गंभीर हो गई है।

लगातार चौथे दिन क्रूड ऑयल की कीमतो में उछाल

ट्रंप के ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाने से लगातार चौथे दिन क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी रही। भारतीय समय के मुताबिक, शाम 5 बजे ब्रेंट क्रूड का भाव 2.63 फीसदी के उछाल के साथ 94.02 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 3 फीसदी उछाल के साथ 86.92 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

सीजफायर के बाद क्रूड ऑयल में आई थी नरमी

इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुई थी। इसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया था। एक समय ब्रेंट क्रूड का भाव उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। जून में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के ऐलान से क्रूड में गिरावट आई थी। लेकिन, युद्धविराम की अवधि बीत जाने के बाद फिर से क्रूड में तेजी दिख रही है।

भारत 85 फीसदी क्रूड की जरूरत इंपोर्ट से पूरा करता है

क्रूड की कीमतों में उछाल भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। भारत अपनी जरूरत के करीब 85 फीसदी क्रूड का इंपोर्ट करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है। इसका सीधा असर भारत के व्यापार घाटा पर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले तेज गिराव के बाद रुपये में स्थिरता दिख रही है। लेकिन, अगर क्रूड की कीमतें लंबे समय तक हाई लेवल पर बनी रहती हैं तो फिर से रुपये पर दबाव दिख सकता है।

अप्रैल-जुलाई के बीच इंपोर्ट बिल में 56 फीसदी उछाल

अप्रैल-जुलाई के बीच भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल 56.5 फीसदी बढ़कर 63.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि, वॉल्यूम में ज्यादा बदलाव नहीं आया। इसका मतलब है कि क्रूड की कीमतों में उछाल इंपोर्ट बिल बढ़ने का मुख्य कारण है। इस साल अप्रैल-जुलाई में भारत ने 8.19 करोड़ टुन क्रूड का आयात किया। एक साल पहले की समान अवधि में 8.15 करोड़ टन क्रूड का आयात हुआ था।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियां 4 बार बढ़ा चुकी हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

भारत सालाना 1.8-2 अरब बैरल क्रूड ऑयल का इंपोर्ट करता है। क्रूड की कीमतों में प्रति बैरल 1 डॉलर के इजाफा से देश का इंपोर्ट बिल एक साल में 2 अरब डॉलर तक बढ़ जाता है। जून में अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर से पहले क्रूड की कीमतों में उछाल की वजह से भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार बार बढ़ाई थीं। इसका सीधा असर लोगों के बजट पर पड़ा। इसके अलावा खाने-पीने की चीजों सहित दूसरी चीजें भी महंगी हुईं।

Gold Silver Rates Today: दिल्ली में सोने में तेजी पर लगा ब्रेक, चांदी एक दिन में ₹5700 फिसली

Gold Silver Rates Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 19 अगस्त को सोने में तेजी पर ब्रेक लग गया। सोना 800 रुपये गिरकर 1,58,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी में भी गिरावट दिखी। इसकी वजह मध्यपूर्व में जारी तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी है। क्रूड की कीमतें लगातार 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। इसका असर निवेशकों के सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।

चांदी एक दिन में 5700 रुपये फिसली

19 अगस्त को चांदी में भी बड़ी गिरावट आई। इसकी वजह भारी बिकवाली है। इससे चांदी 5,730 रुपये गिरकर 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। सोने और चांदी की कीमतें ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के डेटा पर आधारित हैं। 18 अगस्त को सोने और चांदी में तेजी दिखी थी।

मध्यपूर्व में अनिश्चितता का असर बुलियन पर

एलकेपी सिक्योरिटीज में रिसर्च एनालिस्ट और वीपी जतिन त्रिवेदी ने कहा कि अमेरिका और ईरान में युद्धविराम की अवधि खत्म हो जाने के बाद मध्यपूर्व की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका सीधा असर बुलियन खासकर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। इससे निवेशक भी सावधानी बरत रहे हैं।

ब्रेंट क्रूड लगातार 90 डॉलर के ऊपर चल रहा है

बीते कई दिनों से ब्रेंट क्रूड का भाव 90 डॉलर से ऊपर बना हुआ है। अगर कीमतें जल्द नीचे नहीं आती हैं तो दुनियाभर में महंगाई बढ़ सकती हैं। इसका असर इकोनॉमी की ग्रोथ पर भी पड़ेगा। महंगाई को काबू में करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक सहित दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर गोल्ड की चमक घट जाती है।

फेड की मीटिंग के मिनट्स पर इनवेस्टर्स की नजरें

लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि इनवेस्टर्स फेडरल रिजर्व की मीटिंग के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। इससे भविष्य में इंटरेस्ट रेट की दिशा के बारे में संकेत मिलेगा। इसका दबाव बुलियन की कीमतों पर भी दिख रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में घरेलू बाजार से अलग का ट्रेंड दिखा।

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में जोरदार तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में अच्छी तेजी दिखी। सोना 3.22 फीसदी चढ़कर 4,473 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। कई सत्रों के बाद सोना 4400 के पार गया है। चांदी में भी जोरदार तेजी दिखी। इसका भाव 3.26 फीसदी के उछाल के साथ 65.35 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल बुलियन की कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना ₹2000 चढ़ा, चांदी में भी तेजी

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 18 अगस्त को सोने और चांदी में तेजी दिखी। सोना 2,000 रुपये चढ़कर 1,58,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। सोने में लगातार दूसरे दिन तेजी रही। इसकी वजह रिटेलर्स और स्टॉकिस्ट्स की अच्छी मांग बताई जा रही है। लगातार दो सत्रों में अपरिवर्तित रहने के बाद चांदी में भी तेजी रही।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट 

चांदी का भाव 730 रुपये चढ़कर 2,40,730 रुपये प्रति किलो ग्राम पर पहुंच गया। उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में नरमी दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.51 फीसदी गिरकर 4,393 डॉलर प्रति औंस था। चांदी 1.41 फीसदी गिरकर 64.82 डॉलर प्रति औंस थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट की वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल है।

क्रूड ऑयल में उछाल का असर सोने पर पड़ा है

मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज के हेचड प्रवीण सिंह ने कहा कि पश्चिम एशिया में टेंशन बढ़ने से क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है, जिसका असर सोने की कीमतों पर पड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों का युद्धविराम 17 अगस्त को खत्म हो गया। इसके बाद क्रूड में तेजी आई है। 18 अगस्त को एक समय ब्रेंट क्रूड का भाव 91 डॉलर प्रति बैरल पार कर गया था।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल का भी बुलियन पर असर

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की एवीबी कायनात चेनवाला ने कहा कि स्पॉट सिल्वर 65 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया है। इसकी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल है। उन्होंने कहा कि चांदी में मुनाफावसूली का भी कुछ असर इसकी कीमतों पर पड़ा है। इससे पहले बुलियन में अच्छी तेजी दिखी थी।

बुलियन के लिए फिलहाल स्थितियां अनुकूल 

चेनवाला ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में नरमी के बावजूद बुलियन के लिए स्थितियां अनुकूल दिख रही हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की उम्मीद कम हुई है। चीन सहित दुनिया के दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीद रहे हैं। साथ ही इनवेस्टर्स की डिमांड भी स्ट्रॉन्ग बनी हुई है।

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क्रूड में तेजी जारी रहने पर बढ़ सकता है इंटरेस्ट रेट 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका और ईरान में से कोई झुकने को तैयार नहीं है। मध्यपूर्व में तनाव घटने की जगह बढ़ता दिखता रहा है। इसका असर क्रूड ऑयल की सप्लाई पर पड़ रहा है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द नहीं खुलता है तो सप्लाई कम होने से क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ेगी, जिसे काबू में करने के लिए फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाने को मजबूर होगा। इसका निगेटिव असर सोने पर पड़ेगा।

Iran-US War Update: ईरान ने अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़ने पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया, महिलाओं को देगा दोगुनी रकम

Iran-US War News Update: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने एक बड़ा और बेहद चौंकाने वाला ऐलान किया है। ईरान ने अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़कर ईरानी सेना को सौंपने वाले व्यक्ति को 30 हजार अमेरिकी डॉलर (करीब 25 लाख रुपये) का इनाम देने की घोषणा की है। खास बात यह है कि अगर यह कार्रवाई किसी ईरानी महिला द्वारा की जाती है, तो उसे इनाम की रकम दोगुनी दी जाएगी।

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरानी सेना के प्रमुख अमीर हातमी ने इस इनाम की घोषणा की है। हातमी ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों ने इस तरह की कार्रवाई में शामिल होने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने की कार्रवाई कहां और कब की जानी है।

अमेरिकी सैनिक को पकड़ने पर भी मिलेगा इनाम

हातमी ने कहा कि जो भी व्यक्ति किसी आक्रमणकारी अमेरिकी सैन्यकर्मी को मारता है या पकड़कर ईरानी सेना को सौंपता है, उसे 30 हजार डॉलर या 5 अरब तोमान का इनाम दिया जाएगा। ईरान में तोमान एक अनौपचारिक करेंसी है, जिसका इस्तेमाल आम तौर पर रियाल के साथ किया जाता है। ईरानी सेना प्रमुख ने इसके साथ ही महिलाओं के लिए अलग घोषणा करते हुए कहा कि यदि कोई बहादुर ईरानी महिला ऐसी कार्रवाई करती है, तो उसे दोगुना इनाम दिया जाएगा।

अमेरिका को क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी

इनाम की घोषणा के साथ ही हातमी ने अमेरिका को क्षेत्र से अपनी सेना हटाने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेनाओं को अब फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एंट्री करने की अनुमति नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य एवं राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। हालांकि, संघर्ष के दौरान ईरान के भीतर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की किसी बड़ी तैनाती की जानकारी सामने नहीं आई है।

ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिकों की तैनाती नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में एक बड़े बचाव अभियान के दौरान करीब 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी और 170 से अधिक विमान शामिल हुए थे। इस अभियान का उद्देश्य हादसे का शिकार हुए F-15 के वेपन सिस्टम ऑफिसर को सुरक्षित निकालना था। इसके अलावा ईरान के अंदर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की किसी बड़ी तैनाती की जानकारी नहीं है। ऐसे में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए इनाम की घोषणा का ऐलान खास तौर पर तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

कैसे शुरू हुआ अमेरिका-ईरान संघर्ष?

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिकी और इजरायली सेना ने ईरान के खिलाफ हमले किए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लड़ाई जारी रही। बाद में अप्रैल में संघर्ष विराम हुआ। इसके बाद जून में शांति वार्ता के लिए एक संभावित ढांचा तैयार करने की कोशिश की गई। लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी और प्रयास विफल हो गया।

इसके बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच छिटपुट सैन्य हमले जारी रहे हैं। खासकर दक्षिणी ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव देखने को मिला है। हालांकि मध्यस्थों के जरिए दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क जारी रहने की बात कही गई है, लेकिन अब तक कोई बड़ा कूटनीतिक समाधान सामने नहीं आया है।

संघर्ष में 17 अमेरिकी जवानों की मौत

US मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 17 अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे जा चुके हैं। इनमें सबसे हालिया मौतों की जानकारी जुलाई में सामने आई थी। बड़ी बात यह है कि इन सभी अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत ईरान के बाहर हुई। इनमें जॉर्डन और इराक में मारे गए अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं।

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ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों को मारने या पकड़ने पर इनाम की घोषणा ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ राजनयिक स्तर पर भी गतिरोध बना हुआ है। ऐसे में इस ऐलान से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, ईरान के इस घोषणा पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पलटवार का इंतजार है।

Iran-US War Update: ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ी डील, अब पूरी तरह खुलने के लिए अमेरिका की क्या होगी भूमिका?

Iran-US War News Update: ईरान और ओमान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल रूट में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अहम समझौता किया है। इस डील के तहत होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले जहाजों के लिए निर्धारित एंट्री-एग्जिट रूट तय किए गए हैं। इसे लंबे समय से चले आ रहे समुद्री तनाव और अव्यवस्था के बीच एक बड़ी कूटनीतिक प्रगति के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी इस समझौते पर तकनीकी स्तर की बातचीत जारी है। दोनों देशों की ओर से जॉइंट आधिकारिक बयान आना बाकी है। इसके बावजूद, ईरान और ओमान ने सुरक्षित वाणिज्यिक आवाजाही के लिए अलग-अलग समुद्री कॉरिडोर तैयार करने पर सहमति बना ली है।

क्या है समझौते का पूरा प्लान?

समझौते के मुताबिक, ईरान आने वाले यानी इनबाउंड कमर्शियल जहाजों की निगरानी करेगा। जबकि ओमान बाहर जाने वाले जहाजों यानी आउटबाउंड ट्रैफिक को संभालेगा। इसके लिए अलग-अलग निर्धारित शिपिंग लेन बनाई गई हैं। इनका उद्देश्य जहाजों के बीच टक्कर, सुरक्षा संबंधी घटनाओं और समुद्री तनाव को कम करना है। यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच स्वतंत्र बातचीत के बाद तैयार हुई है।

इसका मकसद समुद्री ट्रैफिक को व्यवस्थित करना है। लेकिन साथ ही ईरान और ओमान की क्षेत्रीय संप्रभुता से समझौता न करना भी है। फिलहाल दोनों देशों की तकनीकी टीमें ऑपरेशनल प्रोटोकॉल, संचार व्यवस्था और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े नियमों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद संयुक्त औपचारिक घोषणा किए जाने की उम्मीद है।

सिर्फ रास्ते तय होने से नहीं खुलेगा होर्मुज

यह समझौता महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि पूर्ण रूप से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बहाल करने का फैसला व्यापक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

तेहरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जैसी कार्रवाइयों का अंत, सैन्य धमकियों को रोकना और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत शामिल है। जब तक इन बाहरी परिस्थितियों पर सहमति नहीं बनती, तब तक नए निर्धारित समुद्री कॉरिडोर कड़ी निगरानी के तहत संचालित किए जाएंगे।

दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम एनर्जी चोकपॉइंट्स में से एक है। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत पेट्रोलियम आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस भी इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है।

यही वजह है कि इस जलडमरूमध्य में तनाव या जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। पिछले महीनों में बढ़े तनाव और समुद्री ट्रैफिक में आई बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी। कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा और जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा (War-Risk Insurance) की लागत भी काफी बढ़ गई।

क्या वैश्विक तेल बाजार को मिलेगी राहत?

ईरान और ओमान के बीच हुआ यह समझौता वैश्विक बाजारों के लिए अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि होर्मुज संकट का कूटनीतिक समाधान संभव है। हालांकि, अभी इसे पूरी तरह संकट का अंत नहीं माना जा सकता। समुद्री मार्ग की पूर्ण और सामान्य आवाजाही इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान, अमेरिका और अन्य संबंधित पक्षों के बीच व्यापक भू-राजनीतिक मुद्दों पर किस तरह की सहमति बनती है। इसलिए फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उम्मीद जरूर जगी है। लेकिन पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटने में अभी कई अड़चनें बाकी हैं।

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