सिर्फ फिटनेस ही नहीं, गार्डनिंग में भी नंबर 1 हैं मिलिंद सोमन! घर पर खुद उगाते हैं ये सब्जियां

फिटनेस आइकन और मैराथन रनर मिलिंद सोमन अपनी फिटनेस और एक्टिव लाइफस्टाइल के लिए जाने जाते हैं। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि उन्हें गार्डनिंग का भी काफी शौक है। मिलिंद और उनकी पत्नी अंकिता ने 2020 के लॉकडाउन के दौरान घर पर सब्जियां उगाना शुरू किया था। धीरे-धीरे उनका घर का बगीचा एक छोटे से होम फार्म में बदल गया, जहां वे कई तरह की ताजी सब्जियां उगाते हैं। दोनों अक्सर सोशल मीडिया पर अपने गार्डन और उसमें उगी सब्जियों की तस्वीरें भी शेयर करते रहते हैं।

मिलिंद के घर के गार्डन में कद्दू, लौकी, टमाटर, बैंगन, मिर्च, बीन्स, पत्तागोभी, फूलगोभी, मूली, मेथी और पालक जैसी सब्जियां उगती हैं। अंकिता भी कई बार भिंडी और मूली जैसी सब्जियों की झलक दिखा चुकी हैं। एक बार मिलिंद ने अपने गार्डन से बड़ा-सा कद्दू तोड़ते हुए वीडियो शेयर किया था। साथ ही उन्होंने लोगों से कद्दू की पसंदीदा रेसिपी भी पूछी थी।

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मिलिंद की फिटनेस का राज और गार्डनिंग 

मिलिंद सोमन अपनी फिटनेस, मैराथन और एक्टिव लाइफस्टाइल के साथ-साथ उन्हें नेचर और गार्डनिंग में भी काफी दिलचस्पी है। मिलिंद और उनकी पत्नी अंकिता कोंवर ने 2020 के लॉकडाउन में घर पर सब्जियां उगाने की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे उनका यह शौक एक छोटे से किचन गार्डन में बदल गया, जहां वे अपनी जरूरत के हिसाब से कई तरह की ताजी सब्जियां उगाने लगे। दोनों अक्सर अपने गार्डन और वहां उगने वाली फसलों की झलकियां सोशल मीडिया पर शेयर करते रहे हैं।

मिलिंद के गार्डन में सिर्फ कद्दू ही नहीं, बल्कि लौकी, टमाटर, बैंगन, मिर्च, बीन्स, पत्तागोभी, फूलगोभी, मेथी, पालक और मूली जैसी कई सब्जियां उगाई जाती हैं। उनकी गार्डनिंग से पता चलता है कि यह केवल लॉकडाउन के समय शुरू हुआ शौक नहीं था, बल्कि दोनों ने इसे लगातार जारी रखा। मिलिंद ने अपने इस अंदाज को मजाकिया तरीके से “दाढ़ी वाला किसान” भी कहा है।

 

मिलिंद के साथ पत्नी अंकिता की भागीदारी

अंकिता भी गार्डनिंग में मिलिंद का साथ देती हैं और उनकी पोस्ट से साफ पता चलता है कि यह सिर्फ लॉकडाउन के समय शुरू हुआ कोई छोटा-मोटा शौक नहीं था। दोनों ने इसे लगातार आगे बढ़ाया और अपने घर में ही हरियाली से भरा एक खूबसूरत गार्डन तैयार किया। एक बार मिलिंद ने अपने गार्डन से निकला बड़ा सा कद्दू दिखाते हुए मजाक में कहा था कि अब अगले कुछ दिनों तक कद्दू ही खाना पड़ेगा। अंकिता ने भी कद्दू के साथ मूली, भिंडी और दूसरी सब्जियों की तस्वीरें शेयर की हैं।

 

घर में ऐसे बनाएं अपना DIY ग्रीन हाउस

गार्डनिंग सेटअप की सबसे खास चीजों में से एक उनका घर पर बनाया गया छोटा सा ग्रीनहाउस है। उन्होंने इसे सब्जियां उगाने के लिए एक अलग जगह के तौर पर तैयार किया था। उनके घर के केयरटेकर ने इसे प्यार से “सब्जी का घर” नाम दिया था। ग्रीनहाउस में पौधों और बेलों के बढ़ने के बाद यह जगह काफी हरी-भरी नजर आने लगी थी।

आप भी घर पर ताजी सब्जियां उगाना चाहते हैं, तो छोटा DIY ग्रीनहाउस बना सकते हैं। इसके लिए छत, बालकनी या आंगन में ऐसी जगह चुनें जहां अच्छी धूप आती हो। बांस या लकड़ी से मजबूत फ्रेम बनाकर उसे साफ ऐक्रेलिक या UV-स्टेबलाइज्ड पॉलीइथिलीन शीट से कवर करें। गमलों या ग्रो बैग में अच्छी मिट्टी और कम्पोस्ट भरकर सब्जियां लगाएं। पौधों को रेगुलर पानी दें, लेकिन ध्यान रखें कि मिट्टी में जरूरत से ज्यादा पानी जमा न हो। बहुत ज्यादा गीली मिट्टी से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और उनकी ग्रोथ भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए पानी देने से पहले मिट्टी की नमी जरूर देख लें। इसके साथ ही ग्रीनहाउस को रोजाना चेक करते रहें। पौधों की पत्तियों पर कीड़े या किसी तरह की परेशानी तो नहीं है, पत्तियां मुरझा तो नहीं रही हैं और अंदर का टेम्परेचर बहुत ज्यादा तो नहीं हो रहा, इन सभी बातों का ध्यान रखें। थोड़ी-सी देखभाल से पौधे स्वस्थ रहेंगे और अच्छी तरह बढ़ेंगे।

 

मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को नहीं मिलेगी बागवानी सब्सिडी; केंद्र सरकार ने बदले NHB के नियम, कितनी मिलती थी सब्सिडी, क्या था नियम?

Horticulture subsidy rules: केंद्र सरकार ने नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) की कमर्शियल हॉर्टिकल्चर और कोल्ड स्टोरेज स्कीम के तहत आर्थिक मदद पाने के लिए योग्यता के नियमों को और सख्त कर दिया है। अब संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के अलावा मौजूदा मंत्रियों, सांसद (MP), विधायक (MLA), मेयर और जिला पंचायत अध्यक्षों समेत कई कैटेगरी के लोग योजना के लाभ से बाहर होंगे। नई गाइडलाइंस 21 अगस्त को जारी की गईं। इसी के साथ ये तुरंत लागू हो गई हैं।

बदली हुई गाइडलाइंस के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रालयों और विभागों, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, ऑटोनॉमस बॉडीज और लोकल बॉडीज के कर्मचारियों को भी NHB से आर्थिक मदद पाने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

हालांकि, मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) और क्लास IV कर्मचारियों को इस नियम से छूट दी गई है। इसके अलावा, ₹10,000 या उससे अधिक की मासिक पेंशन पाने वाले रिटायर्ड कर्मचारी या पेंशनभोगी भी इस स्कीम के तहत योग्य नहीं होंगे।

बदली हुई गाइडलाइंस के तहत, इन कैटेगरी में आने वाले लोगों के परिवार के सदस्य स्कीम के तहत एक बार आर्थिक मदद ले सकते हैं, बशर्ते वे परिवार की नई परिभाषा के तहत योग्यता के नियमों को पूरा करते हों।

‘परिवार’ की इस परिभाषा में आवेदक के जीवनसाथी, माता-पिता, बेटे और बेटियाँ शामिल हैं। NHB स्कीम के तहत आर्थिक मदद के लिए प्रति परिवार केवल एक सदस्य ही योग्य है। गाइडलाइंस के अनुसार, परिवार के किसी भी सदस्य को दी गई आर्थिक मदद को पूरे परिवार को दी गई मदद माना जाएगा।

नियमों में क्यों करने पड़े बदलाव?

NHB ने कहा कि इन बदलावों का मकसद आर्थिक मदद को तर्कसंगत बनाना, फायदों का समान वितरण सुनिश्चित करना, सब्सिडी के दोहराव को रोकना और स्कीम को लागू करने की प्रक्रिया को ज़्यादा पारदर्शी और असरदार बनाना है। ये बदलाव कुछ हफ्ते पहले यह पता चलने के बाद किए गए हैं कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और BJP सांसद लुंबा राम ने NHB स्कीम के तहत फायदा उठाया था।

मंत्री ने सब्सिडी लौटाया

कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने 28 जुलाई को संसद को बताया था कि चौधरी ने संबंधित बैंक को सब्सिडी की रकम लौटा दी थी। बैंक को निर्देश दिया गया था कि वह फंड NHB को वापस भेज दे। ‘हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और कटाई के बाद के मैनेजमेंट के जरिए कमर्शियल हॉर्टिकल्चर का विकास’ नाम की इस स्कीम का मकसद बड़े पैमाने पर हॉर्टिकल्चर फसलों की कमर्शियल खेती (मुनाफे के लिए) को बढ़ावा देना है।

इस स्कीम में तीन तरह की सब्जियां जैसे शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर और आठ तरह के फूल जैसे गुलाब, लिली और गुलदाउदी शामिल हैं। इस स्कीम के तहत प्रोजेक्ट की लागत का 50% सब्सिडी के तौर पर दिया जाता था, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परिवार 1 करोड़ रुपये तय की गई थी।

केंद्र सरकार की बागवानी सब्सिडी स्कीम का पूरा नाम Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) है। यह केंद्र की अहम योजना है। यह फल, सब्जी, फूल, मसाले, मशरूम, नर्सरी आदि बागवानी गतिविधियों को कवर करती है। सब्सिडी काम और फसल के हिसाब से अलग होती है।

पानी की कमी के लक्षण और उसे दूर करने के 5 असरदार घरेलू तरीके, जानिए पांच मिनट में

ज्यादा पानी पीने के लिए किसी नियम की जरूरत नहीं होती। दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीना, पानी वाली चीजें खाना और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना सबसे आसान तरीका है। जाने शरीर के लिए पर्याप्त पानी पीना क्यों जरूरी है, पानी की मात्रा कैसे बढ़ाई जा सकती है और किन आसान आदतों को अपनाकर पूरे दिन हाइड्रेट रहा जा सकता है।

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कम पानी पीने के नुकसान

पानी शरीर के लगभग हर अंग के सही काम करने के लिए जरूरी है। यह शरीर का टेम्परेचर कंट्रोल रखता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाता है, पाचन में मदद करता है और किडनी के जरिए शरीर से गंदगी बाहर निकालने में सहायता करता है। पर्याप्त पानी पीने से बॉडी सेल्स भी सही तरीके से काम करती हैं। पानी की कमी होने पर थकान, सिरदर्द, ध्यान लगाने में परेशानी, कब्ज और होंठ सूखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

सही समय

एक्सपर्ट के अनुसार, पानी पीने की आदत धीरे-धीरे बनानी चाहिए। सुबह उठते ही एक गिलास पानी पिएं, हर भोजन और स्नैक के साथ पानी लें, हमेशा अपने पास पानी की बोतल रखें और जरूरत हो तो मोबाइल में रिमाइंडर लगाएं। सादा पानी पसंद न आए तो उसमें नींबू, खीरा, पुदीना या नेचुरल फ्लेवर मिलाकर पी सकते हैं। इससे पानी पीना आसान हो जाता है।

हाइड्रेटेड फूड्स

हाइड्रेशन सिर्फ पानी पीने से ही नहीं होता, बल्कि कई फूड्स भी इसमें मदद करते हैं। तरबूज, संतरा, खीरा, टमाटर, दही और सूप जैसे फूड्स में पानी की मात्रा ज्यादा होती है। इन्हें रोजाना की डाइट में शामिल करने से शरीर को अतिरिक्त तरल मिलता है और पानी की जरूरत पूरी करने में मदद मिलती है।

डिहाइड्रेशन

यदि शरीर में पानी की कमी होने लगे तो प्यास ज्यादा लगना, मुंह सूखना, गहरे पीले रंग का पेशाब, कम पेशाब आना, चक्कर आना, सिरदर्द, कमजोरी और ध्यान न लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। पेशाब का हल्का पीला रंग सामान्य हाइड्रेशन का संकेत माना जाता है, जबकि गहरा रंग इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत है।

लक्षण

कई लोग बिजी शेड्यूल, ट्रैवलिंग, बार-बार बाथरूम जाने से बचने की आदत या सादा पानी पसंद न आने की वजह से पर्याप्त पानी नहीं पीते। वहीं, बुखार, उल्टी, दस्त, ज्यादा पसीना आना, गर्म मौसम और कुछ दवाएं भी शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती हैं। इसलिए मौसम और अपनी फिजिकल एक्टिविटी के अनुसार पानी का सेवन बढ़ाना जरूरी होता है।

सुरक्षित तरीके से हाइड्रेट

एक्सपर्ट का कहना है कि एक बार में बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना बेहतर होता है। जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है। अपनी उम्र, मौसम, फिजिकल एक्टिविटी और स्वास्थ्य के अनुसार पानी पिएं।

डॉक्टर से सलाह

अगर पर्याप्त पानी पीने के बाद भी बार-बार प्यास लगे, बार-बार डिहाइड्रेशन हो, बहुत कम पेशाब आए, अचानक वजन कम होने लगे, धुंधला दिखाई दे या लगातार कमजोरी और चक्कर महसूस हों, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। ये लक्षण डायबिटीज, किडनी की बीमारी, हार्मोन संबंधी समस्या या किसी अन्य स्वास्थ्य परेशानी का संकेत हो सकते हैं।

किचन से निकला ये देसी जुगाड़ आएगा काम, घर की हरियाली को हरा-भरा बनाने में!

चावल बनाने या धोने के बाद बचा हुआ पानी हम बिना सोचे सिंक में बहा देते हैं। लेकिन इसे फेंकने के बजाय आप अपने घर के पौधों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। सादे चावल के पानी में थोड़ा स्टार्च और कुछ मिनरल्स होते हैं, जो मिट्टी के लिए काम आ सकते हैं और पौधों की अच्छी ग्रोथ में मदद कर सकते हैं।

पौधों में डालने से पहले चावल के पानी को पूरी तरह ठंडा कर लें और जरूरत हो तो इसमें थोड़ा सादा पानी मिला लें। इसमें नमक, तेल या मसाले नहीं होने चाहिए। इसे पत्तियों पर डालने के बजाय पौधे की जड़ों के आसपास की मिट्टी में डालना बेहतर है। अगर आप भी किचन की चीजों का सही इस्तेमाल करके पौधों की देखभाल करना चाहते हैं, तो आगे जानिए कौन-से पौधों में चावल का पानी इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्पाइडर प्लांट और पीस लिली

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स्पाइडर प्लांट को हल्की नमी वाली मिट्टी पसंद होती है। आप कुछ हफ्तों में एक बार इसमें सादा चावल का पानी डाल सकते हैं। इसे पत्तियों पर डालने के बजाय सीधे मिट्टी और जड़ों के पास डालें। साथ ही, जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचें।

पीस लिली को बढ़ने के समय हल्का पोषण पसंद होता है। ऐसे में कभी-कभी सादा चावल का पानी मिट्टी में डाला जा सकता है। इसे पत्तियों पर डालने के बजाय सीधे जड़ों के पास डालें। बहुत ज्यादा चावल का पानी इस्तेमाल न करें।

टमाटर के पौधे और पोथोस

टमाटर के पौधों को अच्छी ग्रोथ, फूल और फल के लिए पर्याप्त पोषण चाहिए। कभी-कभी चावल का पानी जड़ों के पास डाला जा सकता है, लेकिन यह फर्टिलाइजर का ऑप्शन नहीं है। टमाटर के लिए कम्पोस्ट और सही फर्टिलाइजर देना ज्यादा जरूरी है।

पोथोस घर के अंदर आसानी से उगने वाला पौधा है। इसमें कभी-कभी सादा चावल का पानी डाला जा सकता है। इससे मिट्टी को कुछ पोषण मिल सकता है और पौधे की ग्रोथ में मदद मिल सकती है। लेकिन मिट्टी को हमेशा गीला न रखें, क्योंकि ज्यादा पानी से जड़ों को नुकसान हो सकता है।

मनी प्लांट और फर्न

मनी प्लांट मिट्टी पानी दोनों में आसानी से बढ़ता है। मिट्टी में लगे मनी प्लांट को कभी-कभी ठंडा और सादा चावल का पानी दिया जा सकता है। इससे मिट्टी में मौजूद अच्छे माइक्रोब्स को मदद मिल सकती है। इसे नार्मल पानी की जगह नहीं, बल्कि कभी-कभी ही इस्तेमाल करें।

फर्न को हल्की नम मिट्टी पसंद होती है, इसलिए कभी-कभी इसमें सादा चावल का पानी दिया जा सकता है। लेकिन पानी बहुत ज्यादा न डालें, क्योंकि फर्न की जड़ों के पास पानी जमा होने से समस्या हो सकती है। गमले में अच्छी ड्रेनेज होना भी जरूरी है।

चावल का पानी इस्तेमाल करने टिप्स

घर के बगीचे में लगे पौधों के लिए कभी-कभी सादे चावल के पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। पौधों की बढ़त के समय थोड़ी मात्रा में चावल का पानी दिया जा सकता है, लेकिन इसे नार्मल पानी की जगह इस्तेमाल न करें। पौधों में चावल का पानी डालते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हमेशा सादा चावल का पानी इस्तेमाल करें, जिसमें नमक, तेल, मक्खन या मसाले न मिले हों। चावल का पानी पत्तियों पर डालने के बजाय सीधे जड़ों के पास मिट्टी में डालें। पानी देने के रूटीन के साथ हर 2 से 4 हफ्ते में एक बार चावल का पानी देना फायदेमंद है।

Retail Inflation : लगातार चौथे महीने महंगाई बढ़ी, रिटेल इंफ्लेशन जुलाई में 4.45% हुई; RBI के लिए बढ़ेगी मुश्किल

Retail Inflation : रिटेल महंगाई जुलाई में लगातार चौथे महीने बढ़ी है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई सालाना आधार पर बढ़कर 4.45% हो गई। जून में यह 4.38% थी। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी इसका बड़ा कारण रही।

जुलाई में महंगाई लगातार दूसरे महीने RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर रही। अप्रैल में महंगाई 3.48% थी। इसके बाद मई में 3.93%, जून में 4.38% और जुलाई में 4.45% हो गई। यानी अप्रैल से अब तक महंगाई करीब 1 प्रतिशत अंक बढ़ चुकी है।

खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाई महंगाई

जुलाई में Consumer Food Price Index (CFPI) आधारित महंगाई 5.52% रही। जून में यह 5.32% थी। ग्रामीण इलाकों में खाने-पीने की महंगाई ज्यादा रही। यहां यह 5.79% रही। शहरी इलाकों में यह 5.05% थी।

इसी वजह से आने वाले महीनों में भी महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ICRA के मुताबिक, अगस्त में रिटेल महंगाई 4.7% तक पहुंच सकती है।

गांवों में महंगाई का ज्यादा दबाव

ग्रामीण भारत में कुल रिटेल महंगाई जुलाई में 4.84% रही। जून में यह 4.74% थी। वहीं, शहरी महंगाई 3.93% से मामूली बढ़कर 3.96% हो गई। खाने-पीने की चीजों के अलावा कपड़े और जूते भी ग्रामीण इलाकों में ज्यादा महंगे हुए। ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी महंगाई 3.97% रही। शहरी क्षेत्रों में यह 2.41% थी।

कुछ सेवाओं की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई। जुलाई में रेस्टोरेंट और होटल से जुड़ी सेवाओं की महंगाई 7.72% रही। ट्रांसपोर्ट की महंगाई 4.43% और पर्सनल केयर, सोशल प्रोटेक्शन, अन्य सेवाओं की महंगाई 14.77% रही।

अदरक, लहसुन और प्याज ने रुलाया

रसोई में इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजें जुलाई में काफी महंगी हुईं। अदरक की कीमतों में सालाना आधार पर 83.62% की बढ़ोतरी हुई। जून में यह 50.41% थी। लहसुन की महंगाई भी 17.93% से बढ़कर 35.36% हो गई। प्याज की कीमतें भी तेजी से बढ़ीं। प्याज की महंगाई जून के 4.73% से बढ़कर जुलाई में 22.54% हो गई।

हालांकि, कुछ सब्जियों ने राहत दी। जुलाई में टमाटर की कीमत सालाना आधार पर 4.59% घटी। जून में टमाटर 31.92% महंगा था। आलू की कीमत 16.56% और भिंडी की कीमत 5.52% घटी।

सोना-चांदी भी महंगे

महंगाई के आंकड़ों में कीमती धातुओं की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दिखी। जुलाई में चांदी के आभूषणों की कीमत सालाना आधार पर 109.84% बढ़ी। सोने, हीरे और प्लैटिनम के आभूषण भी महंगे हुए। इनकी कीमतों में क्रमशः 32.98% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

आगे ब्याज दरों पर क्या होगा?

महंगाई बढ़ने से RBI के लिए ब्याज दरों को लेकर फैसला थोड़ा मुश्किल हो सकता है। RBI ने हाल में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा था। कोटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज के मुताबिक, बारिश, कच्चे तेल की कीमत और इनपुट लागत पर नजर रखना जरूरी होगा। उनका मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही से महंगाई 5% के ऊपर जा सकती है।

ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 में औसत CPI महंगाई करीब 5% रह सकती है। पश्चिम एशिया में तनाव और मानसून इसके लिए बड़े जोखिम हैं। अगर महंगाई का दबाव दूसरी चीजों तक भी फैलता है, तो दिसंबर 2026 की बैठक में RBI ब्याज दर बढ़ाने पर विचार कर सकता है।

तेलंगाना में सबसे ज्यादा महंगाई

राज्यों की बात करें तो जुलाई में तेलंगाना में महंगाई सबसे ज्यादा 6.32% रही। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 5.72% और तमिलनाडु में 5.44% रही। वहीं, मिजोरम में महंगाई सबसे कम 1.84% रही। मेघालय में यह 2.31% और त्रिपुरा में 2.32% रही। दिल्ली में भी महंगाई अपेक्षाकृत कम 2.68% रही।

कुल मिलाकर, जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि महंगाई का दबाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अभी इसकी बड़ी वजह खाने-पीने की चीजें और कुछ सप्लाई से जुड़ी समस्याएं हैं। अगर यह दबाव आगे भी बना रहता है, तो इसका असर RBI की ब्याज दरों की अगली रणनीति पर पड़ सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ना भिगोने की झंझट, ना चिपकने का डर! सिर्फ 15 मिनट में बनाए उपवास वाली परफेक्ट साबूदाना खिचड़ी

सावन के व्रत में साबूदाना खिचड़ी हर घर में पसंद की जाने वाली खास डिश है। लेकिन कई बार जल्दबाजी में साबूदाना भिगोना भूल जाते है। लेकिन कुकर ट्रिक से बिना लंबे समय तक भिगोए भी साबूदाना खिचड़ी को बिल्कुल खिली-खिली और स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करके आप कम समय में व्रत के लिए परफेक्ट और टेस्टी साबूदाना खिचड़ी तैयार कर सकते हैं।

 सबसे पहले साबूदाना को 2–3 बार साफ पानी से अच्छी तरह धो लें, ताकि उसका स्टार्च निकल जाए। इसके बाद पानी पूरी तरह निकालकर साबूदाना को एक स्टील के डिब्बे में रखें। इसमें थोड़ा सा देसी घी, स्वादानुसार सेंधा नमक, चुटकी भर चीनी और थोड़ा सा पानी डालकर हल्के हाथ से मिला दें। इससे स्टीम होने के बाद साबूदाना का स्वाद और टेक्सचर अच्छा बनता है।

This may contain: a bowl filled with corn and garnished with cilantro on a table

कुकर में स्टीम

अब प्रेशर कुकर में थोड़ा पानी डालें और उसके अंदर साबूदाने वाला डिब्बा रख दें। चाहें तो साथ में दो आलू भी रख सकते हैं, ताकि वे भी एक साथ उबल जाएं। कुकर का ढक्कन बंद करें और मध्यम आंच पर 3 सीटी आने तक पकाएं। इसके बाद गैस बंद कर दें और कुकर का प्रेशर अपने आप निकलने दें। इस तरीके से साबूदाना बिना भिगोए भी अच्छी तरह पक जाता है।

ठंडे पानी की ट्रिक

स्टीम होने के बाद साबूदाना थोड़ा चिपचिपा लग सकता है। इसे छलनी में निकालकर ऊपर से ठंडा पानी डालें और बहुत हल्के हाथ से धो लें। यह आसान ट्रिक साबूदाने के दानों को अलग-अलग कर देती है, जिससे खिचड़ी बनाते समय वह चिपकती नहीं और बिल्कुल खिली-खिली बनती है।

 

तड़का लगाएं

अब एक कड़ाही में देसी घी गर्म करें और उसमें जीरा डालें। इसके बाद बारीक कटी हरी मिर्च, कद्दूकस किया हुआ अदरक और व्रत में खाते हैं तो थोड़ा बारीक कटा टमाटर डालकर हल्का भून लें। फिर उबले हुए आलू के टुकड़े डालें। अब तैयार किया हुआ साबूदाना, सेंधा नमक, दरदरी काली मिर्च, चुटकी भर चीनी और भुनी हुई मूंगफली डालकर हल्के हाथ से मिलाएं, ताकि दाने टूटें नहीं। खिचड़ी तैयार होने के बाद ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया, थोड़ा नींबू का रस और चाहें तो भुना जीरा पाउडर छिड़क दें। इससे खिचड़ी का स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। ध्यान रखें कि खिचड़ी को ज्यादा देर तक न चलाएं, वरना साबूदाना टूट सकता है और चिपचिपा हो सकता है।

 

पौष्टिक आहार

साबूदाना शरीर को जल्दी एनर्जी देने वाला सोर्स है। जब इसमें मूंगफली, आलू और देसी घी मिलाया जाता है, तो यह ज्यादा पौष्टिक और पेट भरने वाला भोजन बन जाता है। इसलिए सावन, एकादशी या अन्य व्रत के दौरान यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में भी मदद करता है।

किसानों पर मेहरबान योगी सरकार, अनुपूरक बजट में खेती-किसानी की प्रगति को दी गई रफ्तार

Yogi Government Supplementary Budget: योगी सरकार ने अनुपूरक बजट 2026-27 में किसानों पर विशेष मेहरबान रही। लोककल्याण संकल्प पत्र-2022 में समृद्ध कृषि व्यवस्था के तहत 1000 करोड़ का भामाशाह भाव स्थिरता कोष बनाकर किसानों को आलू, टमाटर एवं प्याज जैसी फसलों का न्यूनतम मूल्य सुनिश्चित करने का वादा किया था। अनुपूरक बजट में इसके लिए 100 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। अन्नदाता किसान की समृद्ध के लिए संकल्पित योगी सरकार किसानों से जुड़ी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था की है।

 

विधानसभा में मंगलवार को प्रस्तुत अनुपूरक बजट में मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना, फलदार पौधों के रोपण, भामाशाह राव स्थिरता कोष, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, सरदार वल्लभ भाई पटेल एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर योजना, नंदबाबा मिशन, मैकेनिकल गन्ना कटाई यंत्र की खरीब, उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 को लेकर मांगों के अनुरूप अनुपूरक बजट में अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था की गई है। 

खाद्य व रसद विभाग के लिए 254.88 करोड़ प्रस्तावित

योगी सरकार ने खाद्य व रसद विभाग के लिए 254.88 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए हैं। इसके तहत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के लिए 181 करोड़ व खाद्यान्न आपूर्ति व वितरण व्यवस्था के लिए 32.40 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। इसके माध्यम से प्रदेश सरकार का उद्देश्य वंचित और निम्न तबके तक खाद्य आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा का वितरण सुनिश्चित करना है। 

भामाशाह भाव स्थिरता कोष के लिए 100 करोड़  

अनुपूरक बजट में उद्यान विभाग को 245.24 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गये हैं। इसमें भामाशाह भाव स्थिरता कोष की स्थापना के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। निजी शीतगृहों में भंडारित आलू के भंडारण प्रभार पर अनुदान के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में की गई है। अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र आगरा के संपर्क मार्ग के लिए भूमि क्रय व निर्माण के लिए भी 9.53 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के लिए 14 करोड़ रुपये दिए गये। मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के लिए 20 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गये। सरदार वल्लभ भाई पटेल एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन योजना के लिए 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है। 

पशुधन और दुग्धशालाओं पर विशेष जोर 

इसी तरह, गोवंश संरक्षण के लिए भी विशेष प्रावधान किए गये हैं। दुग्धशाला विकास विभाग के लिए 211.25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। नंद बाबा दुग्ध मिशन के लिए 150 करोड़, उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के लिए 25 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गये हैं। दूसरी तरफ, पशुधन विभाग के लिए 78.62 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गये हैं। गो आश्रय केंद्रों के स्वावलंबन योजना के लिए 31.25 करोड़ रुपये दिए गए। 

किसान कल्याण के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान

प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र प्रदर्शन और बीजवर्धन प्रक्षेत्र योजना के लिए 10 करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। प्रमाणित बीजों पर अनुदान योजना के तहत 20 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए। किसानों को रियायत दर पर वर्मी कम्पोस्ट/कम्पोस्ट/जैव उर्वरक को अनुदान पर उपलब्ध कराने के लिए अनुपूरक बजट में 50 करोड़ रुपये दिए गये। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए दो करोड़ रुपये जारी किए गए। केंद्र पुरोनिधानित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल (ऑयल शीड्स) योजना के लिए 19.32 लाख अतिरिक्त दिए गए। उर्वरक नियंत्रण आदेश, बीज एवं कीटनाशक अधिनियमों के अंतर्गत लिए गए नमूनों के विशेषण हेतु प्रयोगशाला की स्थापना के लिए 18.44 लाख की अतिरिक्त व्यवस्था।

 

सरदार वल्लभ भाई पटेल एग्री-इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के अन्तर्गत विपणन तथा गुणवत्ता सुविधाओं की स्थापना के लिए 50 करोड़ दिए गए। खाद्यान्न दलहन तिलहन बीज की लागत और प्रासंगिक व्यय योजना हेतु स्पये 150 करोड़, कृषि विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों/उपकरणों/साज-सज्जा के लिए भी सरकार ने बजट में धन आवंटित किया है। इसके लिए 9 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता के अनुरूप पैसा दिया गया है। मैकेनिकल गन्ना कटाई यंत्र की खरीद के लिए 10.40 करोड़ तथा उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर को पूंजी परिसंपत्तियों के सृजन के लिए सहायता हेतु 4.71 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। 

 

अमेरिका ने भारत पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया:जबरन मजदूरी से बने सामान को लेकर कार्रवाई, 60 देशों पर एक्शन

अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला शुक्रवार से लागू हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से बने सामान के आयात को लेकर 60 देशों पर कार्रवाई की है। अमेरिका ने इन देशों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। वहीं बाकी 43 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। अमेरिका ने यह कार्रवाई ट्रेड एक्ट-1974 की धारा 301 के तहत की है। भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, मेक्सिको, पाकिस्तान और श्रीलंका समेत कई देशों को 10% टैरिफ वाले समूह में रखा गया है। अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने फोर्स्ड लेबर से बने सामान पर प्रतिबंध लगाया है या ऐसा करने की दिशा में कदम उठाए हैं। सेक्शन 301 क्या है, जिसके तहत अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाया सेक्शन 301 अमेरिका के ट्रेड एक्ट-1974 का एक प्रावधान है। इसके तहत अमेरिकी सरकार को यह अधिकार मिलता है कि अगर किसी देश की व्यापारिक नीतियां अमेरिकी कारोबार या उद्योगों के लिए अनुचित, भेदभावपूर्ण या नुकसानदायक मानी जाएं, तो वह उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इस कार्रवाई में अतिरिक्त टैरिफ लगाना, आयात पर प्रतिबंध लगाना या दूसरे व्यापारिक प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं। जांच की जिम्मेदारी अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की होती है। जांच के दौरान संबंधित देश से जवाब मांगा जाता है और जरूरत पड़ने पर बातचीत भी की जाती है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति की मंजूरी से कार्रवाई लागू होती है। भारत के किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। ऐसे में अतिरिक्त 10% टैरिफ से उन सेक्टरों पर ज्यादा असर पड़ सकता है, जिनकी अमेरिकी बाजार पर निर्भरता अधिक है। इनमें टेक्सटाइल और गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर उत्पाद, कृषि एवं फूड प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स और कुछ मैन्युफैक्चरिंग आइटम शामिल हैं। अतिरिक्त टैरिफ लगने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे। इससे खरीदार दूसरे देशों के विकल्प तलाश सकते हैं या भारतीय निर्यातकों पर कीमत घटाने का दबाव बढ़ सकता है। इसका असर ऑर्डर, मुनाफे और प्रतिस्पर्धा पर पड़ने की आशंका है। फोर्स्ड लेबर क्या है, जिस पर अमेरिका सख्ती कर रहा है फोर्स्ड लेबर का मतलब ऐसी मजदूरी से है, जिसमें किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के खिलाफ काम कराया जाए। इसमें धमकी, कर्ज, हिंसा, दस्तावेज जब्त करना, वेतन रोकना या नौकरी छोड़ने की आजादी न देना जैसी परिस्थितियां शामिल होती हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानता है। अमेरिका का कहना है कि अगर किसी देश से आयात होने वाला सामान फोर्स्ड लेबर से जुड़ा पाया जाता है, तो उस पर अतिरिक्त टैरिफ या आयात प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य कंपनियों पर दबाव बनाना है कि उनकी सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी का इस्तेमाल न हो। पहले भी कई देशों और उद्योगों पर हो चुकी है कार्रवाई अमेरिका पिछले कुछ वर्षों में फोर्स्ड लेबर के मुद्दे पर कई देशों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। खासतौर पर चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले कॉटन, टमाटर, सोलर पैनल और उनसे जुड़े उत्पादों पर कड़े आयात प्रतिबंध लगाए गए थे। इसके अलावा समुद्री खाद्य, पाम ऑयल, रबर, कोको, टेक्सटाइल और खनन जैसे उद्योग भी अमेरिकी जांच के दायरे में रहे हैं। भारत को कैसे मिली राहत अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक शुरुआत में भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। हालांकि श्रम मानकों पर अमेरिका के साथ हुई बातचीत और भारत की ओर से किए गए नीति बदलाव के बाद इसे घटाकर 10% कर दिया गया। फेडरल नोट में कहा गया है कि जून में प्रस्तावित टैरिफ घोषित होने के बाद भारत ने 14 जून को अपनी विदेशी व्यापार नीति में संशोधन किया। इसके तहत फोर्स्ड लेबर से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया। इसी बदलाव को टैरिफ तय करते समय ध्यान में रखा गया।

LPG Price Today: घरेलू गैस सिलेंडर और कमर्शियल एलपीजी ग्राहकों को बड़ी राहत, जानिए देश के प्रमुख शहरों में नई कीमतें

LPG Price Today: देशभर में घरेलू और कमर्शियल रसोई गैस (LPG) उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। सरकारी तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) ने जुलाई 2026 के लिए 14.2 किलो घरेलू LPG सिलेंडर के दामों में कोई नई बढ़ोतरी नहीं की है। जून में हुई ₹29 प्रति सिलेंडर की वृद्धि के बाद कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। तेल कंपनियों ने जुलाई महीने में घरेलू 14.2 किलोग्राम गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया है।

हालांकि, इस महीने की शुरुआत में कमर्शियल 19 किलोग्राम LPG सिलेंडर की कीमत में 183.50 रुपये की कटौती की गई थी, जिससे होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिली है। कमर्शियल सिलेंडर की इन कीमतों में 1 जुलाई को ₹183.50 की कटौती शामिल है। वहीं, जून के महीने में तेल कंपनियों द्वारा की गई ₹29 की बढ़ोतरी के बाद घरेलू गैस के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं।

उपभोक्ताओं को राहत

फिलहाल घरेलू और कमर्शियल LPG उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई है क्योंकि सिलेंडर की कीमतों में कोई नई बढ़ोतरी नहीं हुई है। कमर्शियल LPG सस्ता होने से होटल, ढाबों और रेस्तरां कारोबार को लाभ मिलेगा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की स्थिति आने वाले महीनों में LPG कीमतों की दिशा तय कर सकती है।

घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें स्थिर

ताजा दरों के अनुसार, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। जून में 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद से कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिरता राहत लेकर आई है।

प्रमुख महानगरों में घरेलू LPG के दाम

शहर                                                                                          14.2 किग्रा घरेलू LPG (रुपये)

दिल्ली                                                                                          942

मुंबई                                                                                            941.50

कोलकाता                                                                                     लगभग 939

चेन्नई                                                                                            लगभग 928.50

(ये दरें 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हैं और इनमें आज तक कोई बदलाव नहीं हुआ है।)

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ सस्ता

तेल कंपनियों ने हाल ही में 19 किलोग्राम कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 183.50 रुपये की कटौती की थी। नई दरों के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 2,930 रुपये में उपलब्ध है। यह कटौती वर्ष 2026 की पहली बड़ी कमी मानी जा रही है।

प्रमुख शहरों में 19 किग्रा कमर्शियल LPG की कीमत

शहर                                                                                          कमर्शियल LPG (रुपये)

दिल्ली                                                                                         2,930

मुंबई                                                                                           2,885.50

कोलकाता                                                                                    3,072

चेन्नई                                                                                             3,100

पश्चिम एशिया संकट पर नजर

घरेलू LPG की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं। लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ऊर्जा बाजारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। भारत अपनी LPG आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका सहित वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

थाली पर भी पड़ा असर

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार टमाटर, प्याज और LPG की बढ़ी हुई लागत के कारण जून में घरेलू थाली की लागत में 5 से 6 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई। इससे साफ है कि रसोई गैस की कीमतों का सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है।

क्यों स्थिर हैं घरेलू दाम?

तेल कंपनियों ने जून में अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण घरेलू सिलेंडर महंगा किया था। फिलहाल सरकार और कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने का फैसला किया है। इसलिए जुलाई संशोधन में कोई नई बढ़ोतरी नहीं की गई।

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बरसात में कौन-सी सब्जियां खाएं और किनसे बनाएं दूरी? जानें एक्सपर्ट की सलाह

मानसून की पहली बारिश जहां तपती गर्मी से राहत देती है, वहीं ये मौसम सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। नमी बढ़ने के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनप सकते हैं, जिससे पेट की समस्या, संक्रमण और पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में खानपान में थोड़ी सावधानी रखना बेहद जरूरी हो जाता है। खासकर सब्जियों का चुनाव करते समय ध्यान देना चाहिए, क्योंकि हर सब्जी बारिश के मौसम में शरीर के लिए फायदेमंद साबित नहीं होती।

आयुर्वेद भी इस मौसम में हल्के, ताजे और आसानी से पचने वाले भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह देता है। सही सब्जियों का चयन और उन्हें अच्छी तरह साफ करके पकाना मानसून में स्वस्थ रहने का आसान तरीका हो सकता है।

पालक को दें थोड़े दिनों का ब्रेक

डॉ. नितिका कोहली के इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार बारिश के मौसम में पालक खाने से पेट से जुड़ी समस्याओं और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पालक का सूप, स्मूदी या पालक पनीर फिलहाल टालना बेहतर हो सकता है।

पत्तागोभी में छिप सकते हैं अनचाहे मेहमान

पत्तागोभी की परतों में बारिश के दौरान कीड़े या सूक्ष्म जीव छिपे होने की संभावना बढ़ जाती है। आयुर्वेद इसे भारी और ठंडी तासीर वाली सब्जी मानता है, जो पाचन शक्ति को कमजोर कर सकती है।

शिमला मिर्च भी बन सकती है परेशानी की वजह

नमी वाले मौसम में शिमला मिर्च जल्दी खराब हो सकती है और उसमें फंगस या कीट लगने का खतरा बढ़ जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक इसकी ठंडी प्रकृति कुछ लोगों में गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ा सकती है।

टमाटर हर मौसम में नहीं होता फायदेमंद

हालांकि टमाटर लगभग हर सब्जी का हिस्सा होता है, लेकिन मानसून में इसकी खट्टी तासीर एसिडिटी और पाचन संबंधी दिक्कतों को बढ़ा सकती है। आयुर्वेद इस मौसम में इसका सीमित सेवन करने की सलाह देता है।

फूलगोभी के पकौड़े खाने से पहले सोच लें

बरसात में फूलगोभी की ठंडी और अधिक पानी वाली प्रकृति पाचन अग्नि को कमजोर कर सकती है। इसलिए इसे कम मात्रा में या पूरी तरह पकाकर ही खाना बेहतर माना जाता है।

मशरूम में बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा

मशरूम नमी वाली मिट्टी में उगते हैं और बारिश के दौरान इनमें बैक्टीरिया पनपने की संभावना अधिक रहती है। सही तरीके से साफ और पकाए बिना खाने पर फूड पॉइजनिंग या पेट की समस्या हो सकती है।

बैंगन खाते समय रखें अतिरिक्त सावधानी

बारिश के मौसम में बैंगन पर कीड़ों और बैक्टीरिया का हमला ज्यादा हो सकता है। कुछ लोगों में यह खुजली, एलर्जी या त्वचा संबंधी परेशानियां भी बढ़ा सकता है।

ये सब्जियां बरसात में हो सकती हैं बेहतर विकल्प

लौकी बन सकती है आपकी हेल्दी साथी

लौकी में पानी, फाइबर और जरूरी विटामिन भरपूर होते हैं, जो पाचन को बेहतर रखने और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। हालांकि इसे खरीदते समय कड़वी या खराब लौकी से बचें और हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।

खीरा खाना है तो पहले करें सही तैयारी

बारिश में खीरे की सतह पर कीटाणु जमा हो सकते हैं। इसे खाने से पहले 10–15 मिनट गुनगुने पानी में भिगोएं, अच्छी तरह धोएं, छिलका उतारें और फिर सेवन करें।

भिंडी बनाते समय न करें जल्दबाजी

भिंडी के अंदर छोटे कीड़े छिपे हो सकते हैं, इसलिए इसे लंबाई में काटकर अच्छी तरह जांचें। साफ पानी से धोकर पूरी तरह पकाने के बाद ही खाएं, ताकि बैक्टीरिया और फंगस का खतरा कम हो सके।

मानसून में याद रखें ये नियम

आयुर्वेद के अनुसार बारिश के मौसम में हल्का, ताजा, घर का बना और अच्छी तरह पका भोजन सबसे सुरक्षित माना जाता है। सब्जियों को अच्छी तरह धोना, साफ करना और पूरी तरह पकाकर खाना इस मौसम में संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याओं से बचने का आसान तरीका है।

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