क्या फिर महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल? हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद पलटे भारत आ रहे 2 तेल टैंकर, लाल सागर में भी बढ़ा संकट!

Houthi Warning Saudi Arabia Red Sea: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण जंग के बीच लाल सागर से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Militia) द्वारा सऊदी अरब को दी गई ‘आंख के बदले आंख’ की खुली चेतावनी के बाद भारत और चीन आ रहे तीन बड़े कच्चे तेल के टैंकरों को अपना रास्ता बदलकर यू-टर्न लेना पड़ा है।

पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ब्लॉक के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित है। ऐसे में लाल सागर के इस अहम समुद्री मार्ग पर नया संकट गहराने से दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतें फिर भड़क सकती हैं। जानिए लाल सागर में क्या हुआ और इसका क्या असर हो सकता है।

किन तेल टैंकरों ने लिया यू-टर्न?

रॉयटर्स के शिपिंग डेटा के मुताबिक, जिन तीन तेल टैंकरों ने अपना रास्ता बदला है, उनमें से दो सीधे भारत आ रहे थे:

Rodos (रोडोस): लगभग 7 लाख बैरल सऊदी कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा यह टैंकर मंगलवार को लाल सागर में यू-टर्न लेकर स्वेज नहर की तरफ मुड़ गया।

Amazon (अमेजन): भारत की ओर आ रहा यह स्वेजमैक्स टैंकर भी हुथियों की धमकी के बाद वापस स्वेज की ओर लौट गया।

Xin Long Yang (सिन लोंग यांग): चीन जा रहे इस बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) ने सऊदी अरब के यानबू पोर्ट से 20 लाख बैरल कच्चा तेल लोड किया था, लेकिन इसने भी आगे बढ़ने के बजाय स्वेज का रास्ता चुन लिया।

हूती विद्रोहियों की ‘आंख के बदले आंख’ वाली चेतावनी क्या है?

यमन के हुथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है।विद्रोहियों का दावा है कि सऊदी अरब ने यमन पर ‘अन्यायपूर्ण और दमनकारी’ घेराबंदी की है, जिसके जवाब में उन्होंने ‘आंख के बदले आंख’ के सिद्धांत के तहत सऊदी दुश्मन के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी तुरंत लागू कर दी है।

हूती समूह ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को ईमेल भेजकर चेतावनी दी है कि वे सऊदी अरब के किसी भी बंदरगाह से सामान लोड या अनलोड न करें। अगर कोई जहाज ऐसा करता है, तो उसे किसी भी स्थान पर निशाना बनाया जाएगा।

जहाजों ने ट्रांसपोंडर बंद किए, बढ़ी हलचल

हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद लाल सागर और सऊदी अरब के महत्वपूर्ण यानबू पोर्ट के आसपास नौवहन काफी जोखिम भरा हो गया है। मंगलवार से लाल सागर में तैर रहे और यानबू पोर्ट पर लोडिंग कर रहे कई तेल टैंकरों ने अपनी पहचान छिपाने और हुथी हमलों से बचने के लिए अपने ट्रांसपोंडर बंद कर दिए हैं।

वैश्विक शिपब्रोकर क्लार्कसन्स (Clarksons) के अनुसार, अगर हूती विद्रोहियों की धमकियों का असर लाल सागर के ट्रैफिक पर पड़ता है, तो कच्चे तेल के जहाजों के रास्तों में बड़ा फेरबदल होगा और यानबू से निकलने वाले तेल को यूरोप की तरफ डायवर्ट करना पड़ सकता है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट और सऊदी अरब से आता है। भारत आ रहे दो टैंकरों (Rodos और Amazon) के रास्ता बदलने से रिफाइनरियों तक क्रूड पहुंचने में देरी हो सकती है। लाल सागर में तनाव बढ़ने से समुद्री जहाजों का बीमा और माल भाड़ा काफी बढ़ सकता है, जिससे भारत के लिए कच्चा तेल आयात करना महंगा हो सकता है।

5,000 किलोमीटर की फ्लाइटों पर ईयू का उत्सर्जन शुल्क

Air India Flight

ओंकार सिंह जनौटी

अमेरिका ने यूरोपीय संघ की नई कार्बन उत्सर्जन योजना को लेकर एक बार फिर चिंता जताई है। लंबी दूरी की उड़ान पर शुल्क के इस प्रस्ताव से भारत और ब्राजील समेत कई देश नाखुश हैं। ALSO READ: कमजोर हो सकती है दुनिया की सबसे असरदार पर्यावरण नीति 'ईटीएस'

 

अमेरिकी परिवहन विभाग ने कहा है कि वह यूरोपीय संघ की उत्सर्जन व्यापार प्रणाली (ETS) के किसी भी विस्तार को लेकर “गहरी चिंता” में है। असल में यूरोपीय आयोग ने हाल में प्रस्ताव दिया है कि यूरोप से रवाना होने वाली कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर कार्बन उत्सर्जन शुल्क लागू किया जाएगा। यह यूरोप से उड़ान भरकर 5,000 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली फ्लाइटों पर लागू होगा।

 

2029 से लागू होने वाले इस कदम से जर्मनी, फ्रांस, इटली या डेनमार्क से रूस, सऊदी अरब, यूएई, तुर्की और मिस्र जाने वाली फ्लाइटें प्रभावित होंगी। हालांकि एक तरफ 5,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करने वाली उड़ानें इसके दायरे से बाहर रहेंगी। माना जा रहा है कि ईयू ने यह सीमा अमेरिका को नाराज ना करने के लिए रखी है। अमेरिका और यूरोपीय संघ के देशों के बीच हवाई दूरी 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है। इसके साथ ही भारत, जापान और चीन से यूरोप पहुंचने वाली उड़ानों पर पहले चरण में इसका असर नहीं पड़ेगा।

 

यूरोपीय संघ के जलवायु कमिश्नर होप्के वोएकस्त्रा कहते हैं, “उड्डयन ही एकमात्र ऐसा बड़ा सेक्टर है, जिसमें उत्सर्जन घटने के बजाए बढ़ रहा है।” यूरोपीय अधिकारी के मुताबिक उत्सर्जन व्यापार प्रणाली से जुड़े शुल्क में प्राइवेट जेट और चार्टर्ड उड़ानें भी आएंगी।

 

यूरोपीय संघ 2012 से सभी इंटरनेशनल फ्लाइटों को ETS के दायरे में लाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखा विरोध झेलना पड़ रहा है। यह विरोध अब भी जारी है। सोमवार को अमेरिका के परिवहन मंत्रालय के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स के सामने ETS को लेकर गहरी चिंता जताई।

 

असल में यूरोपीय आयोग ने 17 जुलाई को ETS से जुड़े प्रस्ताव प्रकाशित किए। यह प्रस्ताव यूरोप से उड़ान भरने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लेकर थे। इन प्रस्तावों के सामने आने के बाद अमेरिकी परिवहन मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हम यूरोपीय आयोग के प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं और हम अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारों को बचाने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं।” ALSO READ: दोहरे मापदंडों के चलते घिरे दिग्गज जर्मन नेता का इस्तीफा

 

क्यों ETS का विस्तार चाहता है ईयू

यूरोपीय संघ को लगता है कि जलवायु को गर्म करने वाली गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए अगर संघ में कड़े नियम लागू किए जाते हैं, तो कई कंपनियां ईयू से बाहर निकलकर, करीबी पड़ोसी देशों में जा सकती हैं। इससे उत्सर्जन भी कम नहीं होगा और कंपनियां स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी तकनीक में निवेश करने के लिए भी प्रोत्साहित नहीं होंगी।

 

हालांकि ईयू के भीतर भी चेक गणराज्य, इटली और पोलैंड जैसे देश ETS का विरोध कर रहे हैं। इन देशों का कहना है कि इससे छोटे और मध्यम श्रेणी के उद्योगों व कारोबारों पर बेहताशा बोझ पड़ेगा जिससे वे बिखर सकते हैं।

 

वहीं आयोग का कहना है कि यूरोपीय संघ में परिवहन की वजह से होने वाला उत्सर्जन अभी कुल उत्सर्जन का 14 फीसदी है। यूरोपीय संघ के कुल सीओटू उत्सर्जन में एविएशन सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 4 फीसदी है। आयोग का कहना है कि अगर ETS जैसे कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक यह उत्सर्जन बढ़कर 90 फीसदी हो सकता है और इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार लंबी दूरी की उड़ानें होंगी। ALSO READ: चैट जीपीटी के ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग कमजोर होने का डर

 

विरोध करने वालों की साफ चेतावनियां

ईयू से बाहर के देशों ने चेतावनी दी है कि ETS अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और जहाजरानी उद्योग को प्रभावित करेगा। इसका सीधा असर यूरोपीय बंदरगाहों से निकलने वाले विमानों और मालवाहक जहाजों पर पड़ेगा। अमेरिका, चीन, तुर्की और यूएई जैसे देश ETS को अंतरराष्ट्रीय परिवहन समझौतों का उल्लंघन  बता रहे हैं।

 

अमेरिका और अन्य कारोबारी साझेदार, यूरोपीय संघ को जवाबी कदमों की चेतावनी भी दे चुके हैं। ETS का विरोध कर रहे देशों का कहना है कि अगर यूरोपीय संघ कार्बन प्राइसिंग पॉलिसी पर आगे बढ़ा तो वे भी अपने उद्योगों को इसके वित्तीय बोझ से बचाएंगे।

 

ब्रिटेन के साथ साथ ETS को लेकर भारत और ब्राजील की भी आपत्तियां हैं। ब्राजील और भारत अंतरराष्ट्रीय सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेश (ICAO) के जरिए उड्डयन क्षेत्र में ETS का विरोध कर रहे हैं। दोनों देशों का आरोप है कि यूरोपीय देशों ने ऐतिहासिक रूप से ग्रीनहाउस गैसों का सबसे ज्यादा उत्सर्जन किया है और अब जब उनका एविएशन सेक्टर विकास कर रहा है तो ब्रसेल्स उस पर बंदिशें लगाने की कोशिश कर रहा है।

 

Silver Gold Price Today : सोना दो हफ्तों के हाई के आसपास, चांदी 1.7% भागी, जानिए कमोडिटी में आज कहां हो सकती है कमाई

Silver Gold Price Today : बुधवार,22 जुलाई को सोने की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ग्लोबल मार्केट में गोल्ड लगभग दो हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुच गया है। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अलावा ब्याज दरों से जुड़े नए संकेतों के लिए अगले हफ्ते होने वाली US फ़ेडरल रिज़र्व की पॉलिसी मीटिंग पर भी बाजार की नजर है। ऐसे में सोने के सपोर्ट मिल रहा है।

COMEX पर गोल्ड फ़्यूचर्स 1.17% बढ़कर 4,124 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। जबकि, इंट्राडे में इसने $4,128.40 प्रति औंस का उच्चतम स्तर छुआ था। चांदी का प्रदर्शन और भी बेहतर रहा। COMEX सिल्वर 1.70% बढ़कर 60.115 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है।

घरेलू बाजार में प्रेशियस मेटल्स की कीमतों में तेजी आने के एक दिन बाद विदेशी बाजारो में भी इनमें तेजी आई है। दिल्ली में सोने की कीमत ₹800 बढ़कर ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम हो गई है।

लोकल सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक मंगलवार, 21 जुलाई को ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेतों और फिजिकल डिमांड के कारण चांदी की कीमत ₹2.21 लाख प्रति किलोग्राम पर सपाट रही।

क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें ?

इसकी सबसे बड़ी वजह’सेफ़-हेवन'(सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोने की मांग है। पश्चिम एशिया को लेकर तब नई चिंताएं पैदा हो गईं, जब ऐसी खबरें आईं कि सऊदी अरब से एशिया जा रहे दो तेल टैंकरों को यमन के ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों की धमकियों के बाद लाल सागर में अपना रास्ता बदलना पड़ा। इस घटना से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं और निवेशकों का रुझान सोने जैसी सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की ओर बढ़ा।

हालांकि, इस तनाव को कम करने के लिए डिप्लोमैटिक कोशिशें जारी हैं और ईरान बातचीत को आसान बनाने के लिए पाकिस्तान से मदद मांग रहा है। फिर भी मार्केट आगे तनाव बढ़ने की संभावना को लेकर सतर्क हैं।

सोने को आमतौर पर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के समय में फायदा होता है क्योंकि जब ग्लोबल ग्रोथ या फाइनेंशियल मार्केट के लिए रिस्क बढ़ता है तो इसमें इन्वेस्टर्स की रुचि बढ़ जाती है।

Gold Price Today: लगातार तीसरे दिन बढ़ी गोल्ड की चमक, चेक करें दिल्ली से पटना तक 24 से 18 कैरट सोने का भाव

फेड की पॉलिसी पर नजर

भू-राजनीतिक घटनाओं के अलावा,निवेशक अगले हफ्ते होने वाली US फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले भी अपनी पोजीशन बना रहे हैं। बाजार में आम धारणा है कि फेडरल रिज़र्व ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि,ट्रेडर मॉनेटरी पॉलिसी की भविष्य की दिशा के संकेत पाने के लिए सेंट्रल बैंक की टिप्पणी और आगे के आर्थिक अनुमानों पर बारीकी से नजर रखेंगे।

सोने की कीमतों पर असर डालने वाले सबसे बड़े फैक्टर्स में से एक ब्याज दरें भी हैं। चूंकि सोने से कोई ब्याज आय नहीं होती,इसलिए ब्याज दरें बढ़ने पर फिक्स्ड-इनकम एसेट्स (जैसे बॉन्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट) से मिलने वाला रिटर्न बढ़ जाता है,जिससे सोने का आकर्षण आम तौर पर कम हो जाता है। इसके उलट,ब्याज दरें घटने की उम्मीद या नरम नीतिगत रुख से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिलता है।

फिजिकल डिमांड बढ़ने से भी मिल रहा सपोर्ट

जानकारों का कहना है कि ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक कारणों के अलावा फिजिकल गोल्ड की खरीदारी में हुई बढ़त से भी सोने की कीमतों में इजाफा हुआ है।

सोने की कीमतों में बढ़त के बावजूद इसके बड़े कंज्यूमर देशों, खासकर चीन से मज़बूत मांग बनी हुई है। साथ ही,पिछले कुछ महीनों में सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी ने बुलियन की कीमतों एडिशनल सपोर्ट दिया है।

इसके अलावा चांदी को भी इंडस्ट्रियल मेटल्स के लिए बेहतर होते सेंटीमेंट का फायदा मिला है। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स,सोलर पैनल और क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी में बड़े पैमाने पर होता है।

जानकारों की राय

LKP सिक्योरिटीज में रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) और वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी का कहना है कि सोने की कीमतों में हालिया गिरावट से बिकवाली का दबाव कम हुआ,जिससे कीमतें तेजी से वापस ऊपर आईं। अमेरिका-ईरान के बीच जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर सोने की नई खरीदारी से कीमतों में यह उछाल आया।

त्रिवेदी ने आगे कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और फेडरल रिजर्व के सतर्क रुख की उम्मीदों के बावजूद,जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता ने निवेशकों की सोने में दिलचस्पी फिर से बढ़ा दी है। टेक्निकल नज़रिए से,उन्हें उम्मीद है कि MCX गोल्ड अगले कुछ सेशन में ₹1.41 प्रति 10 ग्राम से ₹1.45 प्रति 10 ग्राम के दायरे में ट्रेड करेगा।

वहीं,HDFC सिक्योरिटीज में कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि हालिया बढ़त को मजबूत फिजिकल डिमांड और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी का भी सपोर्ट मिला है।

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल के लिए आज हमारे साथ हैं केडिया एडवाइजरी (Kedia Advisory) के अजय केडिया। इनकी आज एमसीएक्स गोल्ड में 142500 रुपए के आसपास, 141500 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ, 144000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं, एमसीएक्स सिल्वर में इनकी 223000 रुपए के आसपास, 221000 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ,228000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

 

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मोजतबा खामेनेई का मुनीर को एक ‘सीक्रेट मैसेज’, क्या टल जाएगी अमेरिका-ईरान की जंग? जानें रावलपिंडी में क्या हुआ

Iran Pakistan Backdoor Diplomacy: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का एक ‘सीक्रेट मैसेज’ लेकर ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान पहुंचे हैं। रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सैन्य मुख्यालय में उन्होंने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ करीब 50 मिनट तक वन-ऑन-वन गुप्त बैठक की।

पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच बैकडोर कूटनीति के लिए अब पाकिस्तान एक नया जरिया बनकर उभरा है। आइए आपको बताते हैं कि इस सीक्रेट मुलाकात में क्या बातें हुईं और क्या पाकिस्तान अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध रुकवा सकता है।

50 मिनट की सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?

ईरानी गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर के बीच हुई इस बैठक को मिडिल ईस्ट के युद्ध को टालने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। बैठक के दौरान ईरानी मंत्री ने सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का निजी और गोपनीय पत्र सीधे असीम मुनीर को सौंपा।

दोनों नेताओं के बीच तनाव कम करने और मध्यस्थता के एक नए खाके पर चर्चा हुई।ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व ने माना कि क्षेत्रीय तनाव को कम करने में पाकिस्तान की भूमिका बेहद अहम है और इस्लामाबाद को क्षेत्र में ‘शांति का लंगर’ करार दिया।

असीम मुनीर अब अमेरिका और सऊदी अरब तक पहुंचाएंगे संदेश

पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि फील्ड मार्शल असीम मुनीर आने वाले दिनों में ईरानी नेतृत्व के इस गुप्त संदेश को लेकर सीधे अमेरिका और सऊदी अरब के शीर्ष अधिकारियों से चर्चा करेंगे।

पाकिस्तान ने इस पूरे युद्ध में एक ‘ईमानदार मध्यस्थ’ की भूमिका निभाने की इच्छा जताई है। कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने और वाशिंगटन व तेहरान के बीच बातचीत शुरू कराने के लिए असीम मुनीर जल्द ही सऊदी अरब और अमेरिका की यात्रा पर जा सकते हैं।

‘बातचीत को तैयार, लेकिन राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं’

बैठक के दौरान ईरानी गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी ने साफ शब्दों में ईरान का रुख भी सामने रखा। ईरान ने यह स्पष्ट किया है कि वह तनाव घटाने और कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि, ईरान अपने रणनीतिक हितों और राष्ट्रीय संप्रभुता के मामलों में कोई समझौता नहीं करेगा। क्षेत्रीय कूटनीति के अलावा, दोनों देशों ने पाकिस्तान-ईरान सीमा प्रबंधन और द्विपक्षीय सुरक्षा पर भी करीबी तालमेल बनाए रखने पर सहमति जताई।

Crude Oil Price: 2 महीने के हाई पर पहुंचा कच्चा तेल, ब्रेंट क्रूड $92 के पार, जानें वो वजह जिनके कारण बढ़ रही है कीमतें

Crude Oil Price: वेस्ट एशिया में मीडिएशन बातचीत में कोई खास प्रोग्रेस नहीं होने और US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के भी इसकी उम्मीदों को कम आंकने और साथ ही और हमलों की धमकी देने के बाद, क्रूड ऑयल की कीमतों में रात भर और बुधवार, 22 जुलाई को एशिया के शुरुआती ट्रेडिंग में भी बढ़त जारी रही।

ब्रेंट क्रूड की कीमतें $92 प्रति बैरल के लेवल को पार कर गईं, जो जून की शुरुआत में देखे गए लेवल तक पहुंच गईं। US क्रूड, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI), अब $85 प्रति बैरल के लेवल के पास ट्रेड कर रहा है, जो लगातार चौथे सेशन में चढ़ रहा है।

यमन में हूतियों की इस धमकी के बाद कि अगर और हमले हुए तो वे रेड सी और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में शिपिंग को रोक देंगे, तेल की कीमतों में बढ़त जारी रही। उन्होंने सऊदी अरब पर मैरीटाइम बैन भी लगा दिया है, और शिप मालिकों को सऊदी पोर्ट्स पर न आने के लिए ईमेल भेजे हैं।

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने इन धमकियों का जवाब देते हुए कहा कि अगर यमन रेड सी में ट्रैफिक को रोकने की कोशिश करता है तो US जवाब देगा। उन्होंने जल्द ही पिकैक्स माउंटेन पर हमला करने की अपनी धमकी भी दोहराई, जिस पर US को शक है कि वह ईरान की न्यूक्लियर साइट है।

सालों में अपनी सबसे खराब तिमाही के बाद तेल की कीमतों में तेज़ी आई है, क्योंकि US और ईरान के बीच सीज़फ़ायर और होर्मुज़ स्ट्रेट में ट्रैफ़िक बढ़ाने के लिए MoU साइन करने के बाद ईरान युद्ध से हुई सारी कमाई खत्म हो गई थी। हालांकि, हाल के दिनों में कमर्शियल जहाजों पर ईरानी हमलों और US सेना की लगातार 10 रातों तक बमबारी ने रिस्क प्रीमियम को वापस ला दिया है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हूथी धमकियों के बाद मंगलवार को लाल सागर में तीन तेल टैंकरों ने यू-टर्न ले लिया। एक चीन के लिए दो मिलियन बैरल सऊदी क्रूड ले जा रहा था, दूसरा मैंगलोर के लिए 7,00,000 बैरल ले जा रहा था और फिर स्वेज़ नहर की ओर मुड़ गया, जबकि तीसरा पाकिस्तान जा रहा था और उसने भी अपनी यात्रा छोड़ दी।

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान US से मिलने के लिए बेताब है, लेकिन जब तक वे बात करने के लिए सही मायने में तैयार नहीं हो जाते, तब तक वे ऐसा करने में दिलचस्पी नहीं रखते। तेल की कीमतें और किस वजह से बढ़ रही हैं।

कीमतों में उछाल की ओर क्या है वजह

वेस्ट एशिया के अलावा, तेल की कीमतें और बढ़ने की एक और वजह यह है कि कज़ाकिस्तान को रूस के ब्लैक सी कोस्ट पर अपने मेन एक्सपोर्ट टर्मिनल पर क्रूड भेजना बंद करना पड़ रहा है, क्योंकि वहां कई हमले हुए हैं।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम टर्मिनल सप्लाई लेना बंद करने वाला था क्योंकि कंपनियां अपने जहाज इस जगह पर भेजने से कतरा रही थीं।

कज़ाकिस्तान का लगभग 80% क्रूड एक्सपोर्ट इसी टर्मिनल से होता है। यह देश यूरोप को दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर भी है। यूक्रेन ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है।

क्रूड पर गोल्डमैन सैक्स की चेतावनी

एनालिस्ट का मानना ​​है कि रेड सी के बंद होने से तेल की कीमतें फिर से $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, क्योंकि होर्मुज की गैर-मौजूदगी में यह सऊदी अरब के लिए एक ज़रूरी एक्सपोर्ट रूट बन गया था और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन इसके लिए एक ज़रूरी सोर्स के तौर पर काम करती थी।

गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि अगर ये रुकावटें जारी रहीं, तो कच्चे तेल की कीमतें साल की चौथी तिमाही तक वापस $120 प्रति बैरल पर आ सकती हैं, लेकिन उनका बेस केस अभी इसी समय के दौरान कच्चे तेल के $80 पर रहने को ही मान रहा है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

अमेरिका ने ईरान के 5 शहरों पर बम बरसाए:लगातार 11वीं रात हमला; जंग में US 3 लाख करोड़ खर्च कर चुका

अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के पांच शहरों में एक साथ एयर और मिसाइल स्ट्राइक की। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक चाबहार, कोनारक, तबरीज, बेहबहान और ओमीदियेह को निशाना बनाया गया। सीजफायर टूटने के बाद यह लगातार 11वीं रात है, जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ईरान के संदिग्ध परमाणु ठिकाने पिकएक्स माउंटेन पर ‘बहुत जल्द और बहुत भारी’ हमला कर सकता है। ट्रम्प की इस चेतावनी के जवाब में ईरान ने कहा कि यदि हमले जारी रहे तो वह क्षेत्र में युद्ध का दायरा और बढ़ा सकता है। इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया है कि अब तक इस युद्ध पर अमेरिका का खर्च 37.5 अरब डॉलर (करीब 3.2 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच गया है। अमेरिकी स्ट्राइक का वीडियो… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… भारत-चीन के टैंकरों ने रास्ता बदला: सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत और चीन जा रहे दो टैंकर हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद रेड सी में यू-टर्न लेकर स्वेज नहर की ओर लौट गए। अमेरिका ने माना- ईरानी हमलों में 100 सैनिक घायल: पेंटागन ने स्वीकार किया कि 7 जुलाई के बाद ईरानी हमलों में करीब 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए। इनमें से 96% सैनिक इलाज के बाद ड्यूटी पर लौट चुके हैं। कतर ने ईरान से मुआवजा मांगा: कतर ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को पत्र भेजकर ईरान को हालिया हमलों और उनसे हुए सभी नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया और पूरा मुआवजा देने की मांग की। ट्रम्प ने माना- जॉर्डन में एक ईरानी हमला सफल रहा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने माना कि जॉर्डन में ईरान का एक हमला सफल रहा। हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हुई थी। ईरानी गृह मंत्री पाकिस्तान पहुंचे: ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान पहुंचे और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की। बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी बातचीत की। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

अल्फांसो आम की फसल को गर्मी ने दिया झटका, फिर भी रिकॉर्ड 34 देशों तक पहुंचा भारत का हापुस

Indian Alphonso Mango Crop: बेमौसम गर्मी और जलवायु परिवर्तन की मार के बावजूद भारतीय अल्फांसो आम (हापुस) ने ग्लोबल बाजार में अपनी मिठास का परचम लहराया है। महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में भीषण गर्मी और प्रतिकूल मौसम की वजह से अल्फांसो आम की पैदावार को भारी नुकसान हुआ लेकिन इसके बावजूद भारत ने चालू वित्त वर्ष में रिकॉर्ड 34 देशों तक हापुस आम का निर्यात करने में सफलता हासिल की है। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 21 जुलाई को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान ये जानकारी दी है।

कोंकण में बेमौसम गर्मी की मार और लॉजिस्टिक्स का संकट

राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र, विशेष रूप से रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में अनियंत्रित और बेमौसम गर्मी और अनियमित जलवायु की वजह से अल्फांसो आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे न सिर्फ उत्पादन प्रभावित हुआ बल्कि एक्सपोर्ट क्वॉलिटी वाले फलों की उपलब्धता पर भी असर पड़ा है। इसके अलावा निर्यातकों को कई अंतरराष्ट्रीय और लॉजिस्टिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। वेस्ट एशिया में जारी संकट की वजह से शिपमेंट में देरी हुई और बंदरगाहों पर भीड़ बढ़ गई। निर्यातकों को उच्च फ्रेट लागत, वॉर-रिस्क सरचार्ज और कंटेनरों की भारी किल्लत से जूझना पड़ा।

इसके बाद भी 24 से बढ़कर 34 देशों तक पहुंचा भारतीय हापुस

इन तमाम वैश्विक चुनौतियों, भाड़े में बढ़ोतरी और फसल के नुकसान के बावजूद भारत ने अल्फांसो आम के अंतरराष्ट्रीय बाजार का विस्तार जारी रखा है। वित्त वर्ष 2020-21 में जहां अल्फांसो आम सिर्फ 24 देशों में निर्यात होता था वहीं चालू वित्त वर्ष में यह दायरा बढ़कर 34 देशों तक पहुंच गया है। अमेरिका, बेल्जियम, संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी, आइसलैंड, सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया और रूस सहित 15 से अधिक देशों में भारतीय आम को बढ़ावा देने के लिए प्रचार कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

जापान और नेपाल निर्यात पर सरकार का स्पष्टीकरण

निर्यात से जुड़े अन्य मुद्दों पर मंत्री ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया। नेपाल को आम के निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं है। नेपाल में जरूरी नियमों का पालन करते हुए आयात की अनुमति दी गई है। ‘नेशनल प्लांट प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन’ (NPPO) भारतीय निर्यात सुविधाओं के 2026 प्री-सीजन निरीक्षण के दौरान जापानी अधिकारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए लगातार उनके संपर्क में है।

प्रभावित निर्यातकों के लिए सरकार का राहत पैकेज

लॉजिस्टिक्स में आए व्यवधानों और माल भाड़े के बोझ से प्रभावित निर्यातकों को सहयोग देने के लिए केंद्र सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत सरकार ने RELIEF पहल शुरू की है। इसके जरिए भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम के माध्यम से बीमाकृत निर्यातकों और पात्र MSMEs को सहायता दी जा रही है। ऐसा इसलिए ताकि उनके अतिरिक्त फ्रेट और बीमा बोझ को कम किया जा सके। वाणिज्य विभाग, एपीडा (APEDA) के माध्यम से अपनी वित्तीय सहायता योजना के तहत आम निर्यातकों को सहायता दे रहा है। इसका उद्देश्य एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, गुणवत्ता अनुपालन और बाजार विकास को मजबूत करना है।

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Market Insight : आज इंडेक्स पर रखनी होगी लेवल बेस्ड रणनीति, चुनिंदा शेयरों में शानदार मौके,वहीं करें फोकस

Market Insight :आज निफ्टी की वीकली एक्सपायरी का दिन है। कल निफ्टी और बैंक निफ्टी ने अहम स्तरों को डिफेंड किया। निफ्टी पर 24,150-24,180 का जोन सबसे अहम है। वहीं, बैंक निफ्टी में 57,500 का ऑल इम्पॉर्टेंट लेवल है। ऐसे में अगर गिफ्ट निफ्टी सही हुआ तो वो लेवल्स वापस टेस्ट होंगे। हालांकि ऐसा कोई कारण नहीं दिख रहा जिससे ये टूटें। ये कहना है सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल का।

उन्होंने आगे कहा कि कच्चा तेल वहीं है जहां हम कल छोड़कर गए थे और एशियाई बाजारों में भी कोई गिरावट नहीं है। कल HDFC बैंक ने बैंक निफ्टी का सेंटीमेंट खराब किया। आज शायद IT शेयरों में थोड़ी मुनाफावसूली आ जाए। US में सेमिकंडक्टर शेयर भागे हैं। कोरिया भी ऊपर है। आज MNC पावर से जुड़े शेयर जैसे GE Vernova और Hitachi फोकस में होंगे।

बाजार: आज के संकेत

आज का सबसे बड़ा संकेत है निफ्टी की वीकली एक्सपायरी। ऑप्शन राइटर्स की बेसिक रेंज 24,050-24,350 है। आज इसी रेंज को स्मार्ट तरीके से ट्रेड करने की जरूरत है। FIIs की कल कैश और इंडेक्स फ्यूचर्स में छोटी बिकवाली रही। कच्चा तेल अभी भी $88-89 के बीच बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स 101 के आसपास बना हुआ है। कुल मिलाकर संकेत वहीं हैं जहां हम कल छोड़ कर गए थे। ऐसे में आज इंडेक्स पर लेवल बेस्ड रणनीति रखनी होगी। चुनिंदा शेयरों में शानदार मौके हैं,वहीं फोकस करें।

आज SBI फंड्स मैनेजमेंट की लिस्टिंग भी है। अगर अच्छे प्रीमियम पर लिस्ट हो तो मुनाफावसूली करें। RBI स्वाप विंडो के तहत भारत में $17.4 Bn के FCNR(B) डिपॉजिट आए हैं। डिपॉजिट उम्मीद से ज्यादा रहा है,कुल राशि $50-55 Bn से भी ज्यादा हो सकती है। डॉलर-रुपया पर नजर रखें,रिकॉर्ड निचले स्तर के हम काफी करीब हैं।

ट्रंप की टैरिफ धमकियां फिर लौटीं

ट्रंप की कनाडा को टैरिफ लगाने की चेतावनी आई है। कनाडा के कुछ सामानों पर 50% तक टैरिफ लगाने की धमकी आई है। US अल्कोहल,गाड़ियों,डेयरी प्रोडक्ट्स के साथ कनाडा के भेदभाव के जवाब में यह कदम उठाने की बात कही गई है। 50% टैरिफ की लिस्ट में दूध,क्रीम,ऑटो इक्विपमेंट और हॉकी के उपकरण शामिल हैं। एनर्जी,पोटाश,मछली और क्रिटिकल मिनरल्स लिस्ट से बाहर हैं। US-कनाडा-मेक्सिको समझौते के तहत आने वाले प्रोडक्ट्स पर छूट नहीं होगी।

1930 के टैरिफ अधिनियम की धारा 338 के तहत टैरिफ लगेंगे। धारा 338 US प्रेसिडेंट को 50% तक ड्यूटी लगाने का अधिकार देता है। इसके तहत अमेरिकी प्रोडक्ट्स के साथ भेदभाव करने वाले देशों पर टैरिफ का अधिकार है। कनाडा के ऊर्जा मंत्री के बयान में कहा गया है “कोई प्रतिक्रिया नहीं देने जा रहे हैं,हम यह सब पहले भी देख चुके हैं”।

US-ईरान युद्ध: ताजा हालात

US ने ईरान पर हमलों का एक और दिन शुरू किया। सोमवार को 4 PM ET से हमलों का 10वां दिन शुरू हुआ। अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि हर बार जब ईरान किसी US सैनिक को मारेगा,उसे उसकी कई गुना कीमत चुकानी होगी

कल दोपहर को ईरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि US के साथ युद्ध को लेकर मध्यस्थों की तरफ से प्रस्ताव मिले हैं। MoU तभी मायने रखता है जब सभी पक्ष उसके लिए प्रतिबद्ध हों। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पर ईरान के संप्रभु अधिकारों पर कोई समझौता नहीं होगा। ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मौमनी (Eskandar Momeni) सोमवार को पाकिस्तान का दौरा करेंगे। दोरे या किसी प्रस्ताव को लेकर अब तक कोई नई जानकारी नहीं मिली है।

10 दिन का सीजफायर?

रॉयटर्स के मुताबिक कतर और अन्य मध्यस्थों ने 10 दिन के सीजफायर का प्रस्ताव दिया था। एक यूएस अधिकारी ने कहा है कि ट्रंप इस समय जहाजों पर हमले के लिए ईरान को सजा देने पर फोकस कर रहे हैं। US हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक राष्ट्रपति कोई दूसरा रास्ता नहीं चुनते। युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं।

सऊदी अरब की समुद्री नाकेबंदी

ईरान समर्थित हूती ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है। ये नाकेबंदी यमन की राजधानी सना पर सऊदी हमलों के जवाब में की गई है। हूती प्रवक्ता याह्या सारी (Yahya Saree) ने कहा है कि सऊदी जहाजों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लागू है। सऊदी अरब फिलहाल अपने तेल एक्सपोर्ट के बड़े हिस्से के लिए इसी रेड सी रूट का इस्तेमाल करता है। पिछले महीने सऊदी अरब ने 4.19 Mn बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का एक्सपोर्ट किया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने Bab el-Mandeb स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने शुरू किए हैं। सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि 1982 UN Convention on Law of Sea के तहत कदम उठाएंगे।

बैंक: प्राइवेट Vs PSU बैंक

कल निफ्टी PSU बैंक ने 200 DMA से शानदार ब्रेकआउट दिया और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स कल 200 DMA के नीचे आया। निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स अपने हाई से 13% नीचे है। कल HDFC बैंक में 2800 करोड़ रुपए की डिलिवरी सेलिंग हुई है। SBI में कल करीब 900-1000 करोड़ रुपए की डिलिवरी उठी है। ICICI बैंक भी कल शानदार नंबरों पर नहीं चल पाया। ऐसे में बाजार में एक रिस्क ओपन हुआ है। बैंक निफ्टी में एक डबल टॉप का रिस्क ओपन हुआ है। अब शुक्रवार का हाई पार करना बैंक निफ्टी के लिए बहुत मुश्किल है। SBI में मजबूती है मगर इस बार के नतीजे अहम होंगे।

बाजार: क्या हो रणनीति?

एक बात साफ है बाजार अभी भी रेंज में है। शुक्रवार को लगा कि रेंज टूट गई लेकिन वो रिजेक्ट हुआ और अब एक रिस्क रहेगा वापस रेंज में फंसने का है। अगर ब्रेकआउट फेल हो तो लोअर रेंज टेस्ट होने का रिस्क होता है। अगर निफ्टी 24,150 के नीचे सेटल हुआ तो ब्रेकआउट फेल कन्फर्म होगा। ऐसे में वापस 23,800-23,850 जाने का रिस्क रहेगा। लेकिन अगर निफ्टी ने 24,350 फिर पार किया तो ये बड़ा पॉजिटिव होगा। इंडेक्स से बेहतर है इस समय स्टॉक स्पेसिफिक रहना। फार्मा अभी भी बाजार की सबसे मजबूत कड़ी है। IT काफी चल चुका है और अब इस रैली का टेस्ट है। IT में पिछली दो रैलियां इतनी रिकवरी के बाद ही फेल हुई थीं। FMCG में धीरे-धीरे Accumulation हो रहा है। ऑटो और ऑटो एंसिलरी शेयरों में भी निचले स्तरों पर खरीदारी है।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 24,100-24,150 (कल का low, 10 DEMA) पर है। इसके लिए अगला बड़ा सपोर्ट 24,000-24,050 (20 DEMA,ऑप्शंस जोन) पर है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 24,250-24,300 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24,350-24,400 पर है। खरीदारी का सबसे अच्छा जोन 24,100-24,150 है। इसके लिए स्टॉप लॉस 24,025 पर रखें। बिकवाली का सबसे अच्छा जोन 24,300-24,350 है। इसके लिए स्टॉप लॉस 24,425 पर होना चाहिए।

बैंक निफ्टी पर स्ट्रैटेजी

बैंक निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट जोन 57,750-57,850 (10 DEMA)है। वहीं, अगला बड़ा सपोर्ट 57,500-57,600 (20 DEMA, कल का low) पर है। अगर 57,500 टूटा तो बड़ी गिरावट के लिए तैयार रहें। अगर बैंक निफ्टी 57,500 होल्ड करे तो 57,400 के स्टॉपलॉस के साथ खरीदें। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 58,100-58,200 पर और बड़ा रजिस्टेंस 58,300-58,500 पर है।

 

Trading Plan : 24000 के ऊपर टिके रहने तक शॉर्ट-टर्म का रुझान पॉजिटिव, निफ्टी में जल्द ही 24500 का टारगेट मुमकिन

 

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GIFT Nifty Indicator: “बुल्स या बीयर” आज किस ओर रुख करेगा बाजार, जानें सेंसेक्स-निफ्टी के लिए गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहे संकेत

GIFT Nifty Indicator: मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव, लगातार विदेशी इंस्टीट्यूशनल सेलिंग और ग्लोबल ऑयल मार्केट में मामूली गिरावट के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों को लेकर निवेशक सतर्क नजर आ रहे है। यहीं कारण है कि निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी मंगलवार को नीचे खुल सकते हैं। GIFT Nifty गैप-डाउन शुरुआत का संकेत दे रहा है।

GIFT Nifty सुबह करीब 8:20 बजे 24,181 पर ट्रेड कर रहा था, जो 112 पॉइंट या 0.46 फीसदी नीचे था, जिससे पता चलता है कि Nifty 50 सोमवार के 24,238.50 के क्लोजिंग से काफी नीचे खुल सकता है। यह कमजोर संकेत तब मिला जब सोमवार को भारतीय इक्विटीज नीचे बंद हुए, जो जून-तिमाही की कमाई और कमजोर ग्लोबल संकेतों के बाद प्राइवेट बैंकिंग स्टॉक्स में भारी बिकवाली की वजह से नीचे आ गए। सेंसेक्स 442.93 पॉइंट्स या 0.57 परसेंट गिरकर 77,708.52 पर आ गया, जबकि निफ्टी 95.80 पॉइंट्स या 0.39 परसेंट गिरकर 24,238.50 पर आ गया।

एशिया बाजारों में तेजी

मंगलवार को एशियाई इक्विटी में बढ़त हुई क्योंकि मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए डिप्लोमैटिक कोशिशों की उम्मीदों से तेल की कीमतें एक महीने के ऊंचे लेवल से नीचे आ गईं, हालांकि इन्वेस्टर्स जियोपॉलिटिकल रिस्क और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों की लीडरशिप में कॉर्पोरेट अर्निंग्स के बिज़ी हफ़्ते पर फोकस करते रहे।

जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स लगातार तीन सेशन की गिरावट के बाद 0.25 परसेंट बढ़ा। जापान का निक्केई 1 परसेंट से ज़्यादा बढ़ा, जबकि साउथ कोरिया का KOSPI लगभग 3 परसेंट चढ़ा। US स्टॉक फ्यूचर्स बढ़े, हालांकि यूरोपियन फ्यूचर्स ने कमजोर शुरुआत का इशारा किया।

यमन के ईरान-समर्थित हूतियों के सऊदी अरब पर नेवल ब्लॉकेड की धमकी के बाद भी मार्केट वेस्ट एशिया में हो रहे डेवलपमेंट पर नज़र रखे हुए हैं, जबकि रिपोर्ट्स में बताया गया है कि US और ईरान के बीच नाजुक सीज़फ़ायर को फिर से शुरू करने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें चल रही हैं।

क्रूड में दबाव

ब्रेंट क्रूड मंगलवार को फिसल गया, जबकि पिछले सेशन में यह $91.42 पर पहुंच गया था, जो जून के बीच के बाद इसका सबसे ऊंचा लेवल है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.4 परसेंट गिरकर $88.87 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड थोड़ा बदलकर $82.47 प्रति बैरल पर आ गया। हालाँकि तेल की कीमतें हाल के हाई से कम हुई हैं, लेकिन जियोपॉलिटिकल टेंशन एनर्जी मार्केट को किनारे पर रखे हुए हैं और भारत जैसी इन्फ्लेशन-सेंसिटिव इकॉनमी के लिए एक बड़ा रिस्क बना हुआ है।

US स्टॉक्स सोमवार को गिरावट के साथ बंद हुए क्योंकि इन्वेस्टर्स बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों की कमाई का इंतज़ार कर रहे थे और मिडिल ईस्ट में हो रहे डेवलपमेंट्स पर नज़र रख रहे थे। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.59 परसेंट गिरा, S&P 500 0.19 परसेंट गिरा, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 0.05 परसेंट फिसला।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, FII की लगातार बिकवाली और रुपये में लगातार कमजोरी के बीच निवेशक सतर्क बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि जून-तिमाही के कमाई के मौसम में स्टॉक से जुड़े एक्शन की संभावना है, जबकि जियोपॉलिटिकल मोर्चे पर ज़्यादा क्लैरिटी आने तक बड़े मार्केट का सेंटिमेंट ग्लोबल डेवलपमेंट, एनर्जी की कीमतों और कैपिटल फ्लो के प्रति सेंसिटिव रहेगा।

पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी में सावधानी से कंस्ट्रक्टिव झुकाव बना हुआ है, जिसमें 24,300-24,400 तुरंत रेजिस्टेंस ज़ोन बना हुआ है। इस बैंड से ऊपर लगातार मूव 24,500-24,600 की ओर रास्ता बना सकता है। उन्होंने कहा कि नीचे की तरफ, 24,100 मुख्य सपोर्ट है, और इससे नीचे जाने पर 24,000 के लेवल पर नई बिकवाली शुरू हो सकती है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Gold Price:चढ़ गया सोने-चांदी का भाव, क्या अब भी कर रहे है सही मौके की तलाश, जानें क्या है एक्सपर्ट की राय की राय

Silver Gold Price: हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार, 21 जुलाई को सुबह के कारोबार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। दरअसल, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता से सोने-चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिला। हालांकि भले ही US में ज़्यादा ब्याज दरों की उम्मीदों ने बढ़त को सीमित रखा। COMEX सोना $4,041 प्रति औंस के इंट्राडे हाई को छूने के बाद 0.34% बढ़कर $4,029.60 प्रति औंस हो गया, जबकि COMEX चांदी 0.13% बढ़कर $57.145 प्रति औंस हो गई।

कीमती धातुओं का बाजार 2 अलग-अलग वजहों को बैलेंस कर रहा है। एक तरफ, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव से सोने जैसे सेफ़-हेवन एसेट्स की मांग को सपोर्ट मिल रहा है। दूसरी तरफ, कच्चे तेल की ज़्यादा कीमतें महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रही हैं, जिससे यह उम्मीद मज़बूत हो रही है कि US फ़ेडरल रिज़र्व इस साल के आखिर में फिर से ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

सोने के लिए तेल क्यों ज़रूरी है

US और ईरान के बीच बीच-बचाव की कोशिशों की खबरों से कुछ समय के लिए सीज़फ़ायर की उम्मीद बढ़ने के बाद मंगलवार (21 जुलाई) को तेल की कीमतों में थोड़ी कमी आई। ब्रेंट क्रूड 0.4% गिरकर $88.87 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US WTI क्रूड $82.47 के करीब ट्रेड कर रहा था।

हालांकि, यमन के ईरान-समर्थित हूतियों द्वारा सऊदी अरब पर नेवल ब्लॉकेड की धमकी देने के बाद जियोपॉलिटिकल रिस्क अभी भी बढ़े हुए हैं, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में संभावित रुकावटों की चिंता बढ़ गई है। US और ईरान के बीच नए मिलिट्री हमलों ने भी बाज़ारों को किनारे पर रखा है।

कच्चे तेल की ज़्यादा कीमतों से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। अगर महंगाई ज़्यादा बनी रहती है, तो फ़ेडरल रिज़र्व ब्याज़ दरों को ज़्यादा समय तक बनाए रख सकता है या फिर से दरें बढ़ा सकता है, यह एक ऐसी स्थिति है जिसका असर आमतौर पर सोने जैसे बिना ब्याज़ वाले एसेट्स पर पड़ता है।

फेड की उम्मीदों ने बुलियन की बढ़त को रोका

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की AVP, कायनात चैनवाला के अनुसार, स्पॉट गोल्ड $4,020 प्रति औंस के करीब है, जबकि सिल्वर $57 प्रति औंस से ऊपर रिकवर हो गया है, लेकिन बढ़त सीमित है क्योंकि मार्केट ने साल के आखिर तक कम से कम एक और फेडरल रिजर्व रेट हाइक को काफी हद तक तय कर लिया है।

उन्होंने कहा कि US पॉलिसीमेकर्स के सख्त कमेंट्स और तेल की कीमतों में हालिया तेजी ने सितंबर में रेट हाइक की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है, जिससे जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स से बीच-बीच में मिल रहे सपोर्ट के बावजूद बुलियन की अपील कम हो गई है।

आखिर कहां तक जाएगी कीमतें

LKP सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी के VP रिसर्च एनालिस्ट, जतीन त्रिवेदी ने कहा कि US में नरम महंगाई के आंकड़ों से गोल्ड में रिकवरी हुई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, मजबूत US डॉलर और फेड रेट में एक और बढ़ोतरी की उम्मीदों को लेकर चिंताएं बढ़त को रोक रही हैं। घरेलू बाज़ार में, उन्हें MCX गोल्ड के लिए तुरंत सपोर्ट के तौर पर ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम दिख रहा है, जबकि आने वाले सेशन में ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम एक अहम रेजिस्टेंस लेवल हो सकता है।

इस बीच, चांदी ने हाल के निचले स्तरों से उबरने के बाद ज़्यादा मज़बूती दिखाई है, हालांकि दोनों कीमती धातुएं ग्लोबल तेल बाज़ारों में हो रहे बदलावों, पश्चिम एशिया संघर्ष और US मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर उम्मीदों के प्रति सेंसिटिव बनी हुई हैं।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।