अमेरिका ने लगातार 10वीं रात ईरान पर बमबारी की:तेहरान का कुवैत में US बेस पर अटैक; हूती विद्रोहियों की सऊदी के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी

अमेरिका ने मंगलवार को लगातार 10वीं रात ईरान के दक्षिणी हिस्सों में हवाई हमले किए। ईरानी मीडिया के मुताबिक, सीरिक, बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप, चाबहार और कोनारक समेत कई इलाकों में विस्फोट हुए। दूसरी ओर, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने हाल के घंटों में कुवैत के कैंप अरिफजान में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर तैनात HIMARS मिसाइल सिस्टम को निशाना बनाया। हालांकि, इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है। उधर, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है। हूतियों ने कहा कि बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को सऊदी जहाजों के लिए बंद किया जाएगा और उनके सारे जहाज हमारे निशाने पर रहेंगे। यह जलमार्ग लाल सागर का एंट्री गेट है, जहां से दुनिया का करीब 10% वैश्विक व्यापार गुजरता है। ईरान जंग से जुड़े सभी अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Commodity News : वित्त वर्ष 2026 में भारत का इलायची निर्यात तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 43.6 करोड़ डॉलर पर रहा

Commodity News : कॉमर्स मिनिस्ट्री के ताजे आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में भारत से साबुत इलायची का एक्सपोर्ट 43.68 करोड़ डॉलर पर रहा है। यह आंकड़ा 2023-24 में 13.19 करोड़ डॉलर पर रहा था। इसका मतलब है कि 2023-24 के मुकाबले 2025-26 में भारत से साबुत इलायची का एक्सपोर्ट तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ा है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि 2025-26 में साबुत इलायची का निर्यात में 43.68 करोड़ डॉलर रहा। जबकि 2024-25 में यह 20.12 करोड़ डॉलर और 2023-24 में 13.19 करोड़ डॉलर रहा था।

खुशबू,क्वालिटी और शुद्धता की वजह से बढ़ी मांग

मात्रा के हिसाब से देखें तो 2025-26 में साबुत इलायची का एक्सपोर्ट बढ़कर 16,399 टन हो गया। जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह 7,674 टन और 2023-24 में 7,083 टन रहा था। कॉमर्स मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा कि एक्सपोर्ट में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी से प्रीमियम मसालों की बढ़ती ग्लोबल मांग,बेहतर क्वालिटी का प्रोडक्शन और विदेशी खरीदारों के बीच भारतीय इलायची की बढ़ती पसंद का पता चलता है। इसकी खुशबू,क्वालिटी और शुद्धता की वजह से है दुनिया भर में मांग बढ़ी है।

इन देशों को होता है सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट

भारत से साबुत इलायची का एक्सपोर्ट मुख्यत: UAE ($135.22 मिलियन),सऊदी अरब ($125.16 मिलियन),बांग्लादेश ($47.71 मिलियन),कुवैत ($20 मिलियन),इराक ($13.71 मिलियन)और मलेशिया ($8.48 मिलियन) को होता है। नीदरलैंड,ऑस्ट्रेलिया,बहरीन,कनाडा,चीन,मिस्र और ईरान जैसे देश भी भारत से यह मसाला इम्पोर्ट करते हैं।

भारत में दो तरह की इलायची का होता है उत्पादन

भारत में इलायची की खेती मुख्य रूप से दो किस्मों में बंटी हुई है। छोटी इलायची,जो दक्षिणी पश्चिमी घाट में उगाई जाती है और बड़ी इलायची जिसकी खेती हिमालय के निचले उत्तर-पूर्वी इलाके में की जाती है।

इलायची के कुल उत्पादन में केरल की 56-58% हिस्सेदारी

केरल देश में छोटी इलायची का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है,जो कुल उत्पादन का 56-58% से ज्यादा हिस्सा प्रोड्यूस करता है। केरल के मुख्य इलायची उत्पादक जिलों में इडुक्की,वायनाड और पलक्कड़ शामिल हैं।

इसके बाद कर्नाटक का नंबर आता है,जहां इसकी खेती कूर्ग,हासन और चिकमगलूर में होती है। तमिलनाडु इसके उत्पादन में तीसरे नंबर पर आता है। जहां इसकी खेती मुख्य रूप से नीलगिरि,पलानी और पुलनी की पहाड़ियों में की जाती है।

 ज्यादा ऊंचाई वाले पूर्वोत्तर राज्यों में उगाई जाती है बड़ी इलायची

बड़ी इलायची,जिसका इस्तेमाल अक्सर आयुर्वेदिक दवाओं और मजेदार मसालों के मिश्रण में किया जाता है,मुख्य रूप से सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे ज्यादा ऊंचाई वाले पूर्वोत्तर राज्यों में उगाई जाती है।

भारत में इलायची की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इसे एक नगदी फसल के तौर पर भी उगाया जाता है। इसकी खेती के जरिए देश के किसान बंपर कमाई कर रहे हैं। इलायची की मांग देश के अलावा विदेश में भी है। इलायची का इस्तेमाल भोजन,कन्फेक्शनरी,पेय पदार्थों को बनाने के दौरान किया जाता है। इसके अलावा इसका उपयोग मिठाई में खुशबू के लिए भी किया जाता है।

 

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US-Iran War Update: ईरान ने होर्मुज को बताया ‘अटूट रेड लाइन’, अमेरिका को दी खुली चेतावनी! दुनिया की तेल सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा

US-Iran War Update: पश्चिम एशिया में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट्स में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अपनी ‘अटूट रेड लाइन’ (unbreakable red line) घोषित करते हुए अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि यदि अमेरिका ने इस रणनीतिक जलमार्ग में किसी भी तरह का हस्तक्षेप किया तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका लगातार पांचवीं रात ईरान पर हवाई हमले कर चुका है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान युद्ध छोड़ बातचीत की मेज पर नहीं लौटता तो उसके बिजली प्लांटों और प्रमुख पुलों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

क्या है ईरान की ‘रेड लाइन’?

एक वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी दखल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि यह ईरान की ‘अटूट रेड लाइन’ है। इसे पार करने की कोशिश गंभीर परिणाम ला सकती है। ईरान पहले भी कह चुका है कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई नहीं रोकता, तब तक होर्मुज को बंद रखने का विकल्प उसके पास मौजूद है।

दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी (Liquefied Natural Gas) का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

दुनिया का लगभग 20% पेट्रोलियम (करीब 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन) और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का एक बड़ा हिस्सा रोजाना इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हालांकि, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने इस रास्ते से बचने के लिए जमीनी पाइपलाइनें बनाई हैं। लेकिन वे कुल तेल का केवल एक छोटा हिस्सा ही ले जा सकती हैं। खाड़ी देशों के अधिकांश तेल निर्यात के पास इस जलमार्ग के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

अमेरिका ने तेज किए हमले

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास समेत कई स्थानों पर ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है जिससे वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इससे पहले ग्रेटर तुंब द्वीप पर तटीय रक्षा ठिकानों और क्रूज मिसाइल साइटों पर भी हमले किए गए थे।

ईरान में कई जगह धमाके

ईरानी मीडिया के मुताबिक, हालिया हमलों का दायरा पहले की तुलना में कहीं ज्यादा व्यापक रहा। उत्तरी ईरान के सेमनान एयरपोर्ट के पास एक प्रोजेक्टाइल गिरा। जबकि लोरेस्तान प्रांत में भी विस्फोटों की खबरें सामने आईं। राजधानी तेहरान के आसपास एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। वहीं, खुजेस्तान प्रांत के अहवाज क्षेत्र में एक बच्चों के कैंसर अस्पताल के पास भी हमले की सूचना मिली, जिसकी ईरान ने कड़ी निंदा की है।

35 लोगों की मौत, 300 से ज्यादा घायल

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालिया अमेरिकी हमलों में कम से कम 35 लोगों की मौत हुई है। जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। स्थानीय लोगों ने लगातार हो रहे धमाकों से दहशत का माहौल बताया है।

ईरान की पलटवार की धमकी

अमेरिका की कार्रवाई के जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे तो केवल होर्मुज जलडमरूमध्य ही नहीं। बल्कि पूरे क्षेत्र में अमेरिकी हितों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। ईरानी सेना ने कहा कि अगर अमेरिका आगे बढ़ता है तो क्षेत्र का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर ईरानी सशस्त्र बलों के जवाबी हमलों की जद में आ सकता है।

खाड़ी देशों पर भी बढ़ा खतरा

ईरान की सेना रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। वहीं, जॉर्डन ने कई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। कुवैत ने ड्रोन गिराने की जानकारी दी। जबकि बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए। इराक के एरबिल क्षेत्र में भी विस्फोटक ड्रोन को रोके जाने की खबर सामने आई है।

कूटनीतिक रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं

हालांकि, दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। लेकिन कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से बातचीत फिर शुरू करने की अपील की है। वहीं, ईरान ने संकेत दिया है कि यदि उसे किसी समझौते का लाभ नहीं मिलता तो वह उस पर कायम रहने का कोई कारण नहीं देखता। उधर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया कि यदि ईरान जल्द बातचीत के लिए तैयार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

दुनिया पर क्या होगा असर?

यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है या वहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, पेट्रोल-डीजल की कीमतों, समुद्री व्यापार और पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव केवल क्षेत्रीय नहीं। बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी चिंता बनता जा रहा है।

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Crude Oil News: फिर $100 के पार जाएगा कच्चा तेल? इन बातों से तय होगी चाल

Crude Oil News: कच्चे तेल में एक बार फिर उबाल आ रहा है। एमएसटी मार्की (MST Marquee) के एनर्जी रिसर्च हेड सॉल कावोनिक (Saul Kavonic) का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नई दिक्कतों ने वैश्विक ऑयल मार्केट की तस्वीर बदल दी और सप्लाई से जुड़ा रिस्क फिर से बढ़ने के चलते इसकी कीमतें हाई लेवल पर बनी रह सकती है। सॉल का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग जारी रहती है या इसकी आंच ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंचती है तो कच्चे तेल के भाव एक बार फिर से प्रति बैरल $100 से ऊपर जा सकती है और मार्च-अप्रैल के लेवल पर फिर पहुंच सकती है।

इन बातों से तय होगी कच्चे तेल की चाल

सॉल का कहना है कि नियर टर्म में तेल की कीमतें किस तरफ बढ़ेगी, यह इस पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और ईरान के बीच की लड़ाई किस तरह आगे बढ़ती है। अगर तनाव हल्का होता है, तो हाल में कच्चे तेल की कीमतों में आई करीब 10% की बढ़ोतरी घट सकती है लेकिन अगर लड़ाई लंबी खिंचती है या एनर्जी इंफ्रा पर हमले होते हैं, तो कीमतें तेजी से बढ़ सकती है। पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई एक बार शुरू होने पर ब्रेंट क्रूड उबल पड़ा और प्रति बैरल $85 के करीब पहुंच गया। इससे पहले सीजफायर की उम्मीदों और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की संभावना के चलते तेल की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद की जा रही थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही फिर से सामान्य होने की उम्मीद पर माना जा रहा था कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई होगी तो सप्लाई सरप्लस हो जाएगी लेकिन पश्चिमी एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ा तो माहौल बदल गया। इस रास्ते से गुजरने वाला तेल अब युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में सिर्फ 15% ही रह गया है। मार्केट में सप्लाई की कमी बनी हुई है और मांग पूरी करने के लिए इन्वेंट्री पर निर्भरता बनी हुई है। सॉल का कहना है कि तेल की कीमतों में तब तक कोई खास कमी आने की संभावना नहीं है, जब तक कि होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग युद्ध से पहले के लेवल से लगभग 30-50% तक वापस नहीं आ जाता जिससे ज़्यादा कच्चा तेल इंटरनेशनल मार्केट तक पहुँच सके।

Iran-US War से कितनी बदल पाएगी स्ट्रैटेजी?

सॉल का अनुमान है कि अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई खाड़ी देशों में एनर्जी सिक्योरिटीज से जुड़ी रणनीतियों को हमेशा के लिए बदल देगा। उन्होंने कहा कि तेल निकालने वाले देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए एक्सपोर्ट के वैकल्पिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा सकते हैं। हालांकि यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों ने पहले ही ऐसी पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने की योजना का ऐलान किया जो होर्मुज से होकर नहीं गुजरती लेकिन सॉल के मुताबिक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में कई साल लगेंगे। इराक और कुवैत जैसे देशों के लिए एक्सपोर्ट रूट के मामले में बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत होगी, यानी कि आने वाले समय में भी होर्मुज स्ट्रेट के एक अहम ग्लोबल एनर्जी चोकपॉइंट बने रहने की उम्मीद है।

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Lionel Messi: 13 साल की उम्र में बदली किस्मत, आज हैं 9,400 करोड़ के मालिक… जानिए मेसी की पूरी कहानी

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अब सेमीफाइनल के मुकाबले खेले जाएंगे। क्वार्टर फाइनल के रोमांचक मुकाबलों के बाद फ्रांस, स्पेन, इंग्लैंड और मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना ने सेमीफाइनल में जगह बना ली है। फीफा वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी फीफा वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। टूर्नामेंट में अब तक वह 8 गोल कर चुके हैं और गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे बने हुए हैं। डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना इस समय शानदार फॉर्म में नजर आ रही है। फैंस को उम्मीद है कि अर्जेंटीना एक बार फिर खिताब उठा सकती है।

हाल ही में मिस्र के खिलाफ खेले गए मुकाबले में मेसी ने टीम की जीत में अहम योगदान दिया। अर्जेंटीना एक समय 0-2 से पीछे था, लेकिन आखिरी मिनटों में शानदार वापसी करते हुए 3-2 से मैच जीतकर क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। इस वापसी के साथ मेसी की दीवानगी और बढ़ गई।

कैसे होती है मेसी की कमाई

फुटबॉल की दुनिया में अपने शानदार खेल से पहचान बनाने वाले लियोनेल मेसी सिर्फ मैदान के ही नहीं, बल्कि कारोबार और निवेश की दुनिया के भी बड़े नाम हैं। खेल से होने वाली कमाई के अलावा उन्होंने कई सफल बिजनेस और निवेश के जरिए अरबों रुपये की संपत्ति बनाई है। आइए जानते हैं कि कैसे एक साधारण शुरुआत करने वाले मेसी आज दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ियों में शामिल हो गए। जानें कितनी है फुटबॉल के दिग्गज मेसी की नेटवर्थ

आसान नहीं था मेसी का सफर

आज लियोनेल मेसी का नाम दुनिया के महानतम फुटबॉल खिलाड़ियों में लिया जाता है, लेकिन उनकी शुरुआत बेहद साधारण माहौल से हुई थी। अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में पले-बढ़े मेसी के पिता एक फैक्ट्री में काम करते थे, जबकि उनकी मां परिवार की मदद के लिए छोटी-मोटी नौकरी करती थीं। बचपन में उन्हें ग्रोथ हार्मोन की समस्या का सामना करना पड़ा, जिसका इलाज कराना परिवार के लिए आसान नहीं था। ऐसे मुश्किल समय में उनके टैलेंट ने उन्हें स्पेन के क्लब एफसी बार्सिलोना तक पहुंचाया। महज 13 साल की उम्र में बार्सिलोना ने उन्हें अपनी अकादमी में शामिल किया और उनके इलाज की जिम्मेदारी भी उठाई। यहीं से मेसी के करियर ने नई उड़ान भरी और।

कितनी है मेसी की कुल संपत्ति

फोर्ब्स के मुताबिक, जून 2026 तक लियोनेल मेसी की अनुमानित कुल संपत्ति करीब 1.1 बिलियन डॉलर (लगभग 9,400 करोड़ रुपये) आंकी गई है। फुटबॉल क्लबों के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट्स से उन्होंने करीब 1.2 बिलियन डॉलर की कमाई की है। इसके अलावा विज्ञापनों, ब्रांड एंडोर्समेंट, लाइसेंसिंग और अन्य व्यावसायिक निवेशों से भी उनकी आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इससे उनकी कमाई कमाई करीब 1.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाती है। एडिडास के साथ उनकी आजीवन साझेदारी के अलावा मास्टरकार्ड, लेज और मिशेलॉब अल्ट्रा जैसे कई बड़े वैश्विक ब्रांड भी उनकी कमाई का अहम हिस्सा हैं।

कारोबार में भी लगाए पैसे

लियोनेल मेसी ने अपनी कमाई को अलग-अलग कारोबार में भी लगाया। उन्होंने रियल एस्टेट, होटल और खेल से जुड़े बिजनेस में निवेश कर अपनी संपत्ति को लगातार बढ़ाया। उनकी प्रमुख कारोबारी कंपनियों में एडिफिसियो रोस्टावर सोसिमी भी शामिल है, जो स्पेन की एक सूचीबद्ध रियल एस्टेट कंपनी है। इस कंपनी के पास होटल, ऑफिस, कमर्शियल बिल्डिंग और कई अन्य प्रॉपर्टियां हैं। हाल ही में कंपनी ने बार्सिलोना में करीब 11.5 मिलियन यूरो की कीमत वाली एक बड़ी कॉर्पोरेट बिल्डिंग भी खरीदी है।

इंटर मियामी क्लब में भी हिस्सेदारी

रियल एस्टेट के अलावा लियोनेल मेसी ने हॉस्पिटैलिटी, फूड और स्पोर्ट्स सेक्टर में भी बड़ा निवेश किया है। वह एमआईएम होटल्स समूह में हिस्सेदार हैं और अर्जेंटीना की एल क्लब डे ला मिलानेसा रेस्टोरेंट चेन में भी उनकी हिस्सेदारी (इक्विटी) है। इसके साथ ही उन्होंने उरुग्वे के डेपोर्टिवो एलएसएम और स्पेन के यूई कॉर्नेला फुटबॉल क्लबों में भी निवेश किया है। साल 2023 में मेसी ने कथित तौर पर सऊदी अरब के बेहद बड़े प्रस्ताव को ठुकराकर अमेरिका के इंटर मियामी क्लब का दामन थामा। इस समझौते में उन्हें भविष्य में क्लब में हिस्सेदारी लेने का ऑप्शन भी मिला।

मेसी के क्लब से जुड़ने के बाद इंटर मियामी की लोकप्रियता और बाजार मूल्य में तेज बढ़ोतरी देखी गई, जिससे यह फैसला उनके सबसे सफल निवेशों में गिना जाने लगा।

Asian Market Today: एशिया बाजारों में गिरावट, नैस्डैक 1.55% फिसला, यूएस बॉन्ड यील्ड बढ़ी

Asian Market Today: US-ईरान युद्ध के बीच तेल की बढ़ती कीमतों से सेंटिमेंट पर असर पड़ने से मंगलवार को एशियाई बाज़ारों में गिरावट के साथ कारोबार हुआ। नैस्डैक 1.5 फीसदी से ज्यादा फिसला, डाओ और S&P में भी दबाव दिखा। जापान का निक्केई 225 0.58% गिरा, जबकि टॉपिक्स 0.30% बढ़ा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.46% और हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स 1.11 फीसदी की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया। ताइवान का बाजार 2.24 फीसदी  गिरकर 44,338.19 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि  शंघाई कम्पोजिट 0.07 फीसदी की बढ़त के साथ फ्लैट कामकाज कर रहा है।

गिफ्ट निफ्टी 24,050 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 168 पॉइंट्स का डिस्काउंट था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए नेगेटिव शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट सोमवार को नीचे बंद हुआ क्योंकि मिडिल ईस्ट युद्ध के हालिया बढ़ने से तेल की कीमतें बढ़ गईं और रिस्क लेने की क्षमता कम हो गई।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 138.31 पॉइंट्स या 0.26% गिरकर 52,498.70 पर आ गया, जबकि S&P 500 59.92 पॉइंट्स या 0.79% गिरकर 7,515.47 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 408.43 पॉइंट्स या 1.55% गिरकर 25,873.18 पर बंद हुआ।

एनवीडिया के शेयर की कीमत 3.52% गिरी, AMD के शेयर 4.21% गिरे, ब्रॉडकॉम के शेयर 3.98% गिरे, इंटेल के शेयर 6.12% फिसले, माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर 4.32% गिरे, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.53% बढ़े, मेटा के शेयर 1.86% गिरे, अल्फाबेट के शेयर 1.23% गिरे, टेस्ला के शेयर 3.19% टूटे, और स्पेसएक्स के शेयर 4.24% फिसले।

US-ईरान युद्ध

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ऑफिशियली सांसदों को बताया है कि देश एक बार फिर ईरान के साथ युद्ध में है, और अपने एडमिनिस्ट्रेशन को कांग्रेस की मंज़ूरी के बिना इस इलाके में मिलिट्री इस्तेमाल करने के लिए 60 दिन का समय दिया है। इस बीच, यमन में ईरान सपोर्टेड हूथियों ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के आभा एयरपोर्ट को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

बॉन्ड यील्ड

US ट्रेजरी यील्ड रातों-रात तेज़ी से बढ़ी क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों ने US-ईरान के बीच नए तनाव के बाद इन्फ्लेशन की आशंका बढ़ा दी। बेंचमार्क US 10-साल के ट्रेजरी नोट पर यील्ड 4.9 bps बढ़कर 4.618% हो गई, जबकि 30-साल के बॉन्ड पर यील्ड 3.3 bps बढ़कर 5.104% हो गई। दो-साल के US ट्रेजरी यील्ड 6.5 bps बढ़कर 4.273% हो गई।

बेंचमार्क जापानी सरकारी बॉन्ड (JGB) की यील्ड दूसरे दिन भी बढ़ी। 10-साल के JGB की यील्ड 1 bp बढ़कर 2.795% हो गई। दो-साल की यील्ड और पांच-साल की यील्ड दोनों स्थिर रहीं।

कच्चे तेल की कीमतें

US-ईरान युद्ध में नए सिरे से बढ़ोतरी के बाद होर्मुज स्ट्रेट से एनर्जी फ्लो को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतें 2% बढ़कर चार हफ्तों में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2% बढ़कर $84.98 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 2.1% बढ़कर $79.79 प्रति बैरल हो गया। पिछले सेशन में ब्रेंट क्रूड 9.6% बढ़ा, जो मई 2020 के बाद से इसकी सबसे बड़ी डेली बढ़त है।

आज सोने का रेट

महंगाई को कंट्रोल करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ने की बढ़ती संभावना के कारण सोने की कीमतों में गिरावट जारी रही। स्पॉट गोल्ड की कीमतें 0.1% गिरकर $3,996.63 प्रति औंस हो गईं, जबकि चांदी की कीमत 0.3% गिरकर $57.50 प्रति औंस हो गई।

डॉलर

US महंगाई के डेटा से पहले डॉलर स्थिर हुआ। डॉलर इंडेक्स, जो येन और यूरो सहित कई करेंसी के मुकाबले डॉलर को मापता है, 101.27 पर फ्लैट था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यूरो डॉलर के मुकाबले $1.1383 पर और स्टर्लिंग $1.3347 पर ट्रेड कर रहा था। जापानी येन डॉलर के मुकाबले लगभग फ्लैट 162.40 प्रति डॉलर पर था।

Crude Oil Price Surge: ट्रंप के बयान ने फिर लगाई क्रूड में आग, कल के निचले स्तर से 10% उछला भाव, $85 के करीब पहुंचा

Global Market Today: वेस्ट एशिया तनाव से बिगड़ा ग्लोबल बाजार का मूड़, एशिया में दबाव, कोस्पी 5% से ज्यादा टूटा, निक्केई भी 2% नीचे

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

‘घुटने टेको, गलती मानो और खाली करो होर्मुज का समुद्री रास्ता’, अमेरिका का ईरान को 24 घंटे का अल्टीमेटम

US Iran Ultimatum Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में जारी महायुद्ध के बीच एक बाद अपडेट सामने आया है। अमेरिका ने ईरान को 24 घंटे की सख्त डेडलाइन दी है। US ने ईरान को सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करने को कहा है कि वह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के समुद्री रास्ते को खुला रखेगा और कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकेगा।

‘एक्सियोस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन ने ईरान को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर वह इस अल्टीमेटम को नहीं मानता है, तो उसे इसके ‘गंभीर परिणाम’ भुगतने होंगे और अमेरिकी सेना किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। आइए जानते हैं अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े इस नए विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है।

‘कल का दिन उनके लिए अच्छा नहीं होगा’

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान तक यह कड़ा संदेश सीधे तौर पर और क्षेत्र के मध्यस्थ देशों के जरिए पहुंचा दिया गया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर कल तक ईरान अपना रुख साफ नहीं करता है, तो कल का दिन उनके लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं रहने वाला है।’ अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि ईरान दुनिया के सामने सार्वजनिक रूप से यह ऐलान करे कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला व्यापार पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि वे सार्वजनिक रूप से कहें कि वे जहाजों पर गोलीबारी बंद करेंगे और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से यह स्वीकार करेंगे कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है।’ इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान यह भी घोषित करे कि इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले सभी जहाजों के लिए यह चैनल पूरी तरह ‘टोल-फ्री’ रहेगा।

समझौते के उल्लंघन का आरोप: पहले भी हो चुकी है एयरस्ट्राइक

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान ने पिछले महीने हुए आपसी सहमति पत्र का खुलेआम उल्लंघन किया है। ईरान द्वारा लगातार कमर्शियल और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद ही अमेरिका दो बार ईरान पर जवाबी हवाई हमले कर चुका है। अमेरिका का कहना है कि डिप्लोमेसी फेल होने की सूरत में उसके पास प्लान-बी तैयार है।

ओमान में आज होने वाली बैठक पर टिकी दुनिया की नजरें

इस भयंकर तनाव के बीच शनिवार, 11 जुलाई को ओमान की राजधानी मस्कट में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शनिवार को ओमान की यात्रा पर पहुंच रहे हैं। ओमान और ईरान के अधिकारियों के बीच होने वाली इस बातचीत का मुख्य फोकस होर्मुज जलमार्ग और वहां जहाजों की सुरक्षा ही है।

अमेरिका को उम्मीद है कि इस बैठक के दौरान ओमान के दबाव में आकर तेहरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के जरिए फ्री नेविगेशन को फिर से बहाल करने पर सहमत हो जाएगा। ईरानी सरकारी मीडिया ने भी इस दौरे की पुष्टि करते हुए इसे पिछले दो महीनों से ओमान के साथ चल रही बातचीत का ही हिस्सा बताया है।

क्यों पूरी दुनिया के लिए आफत है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना?

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ कहा जाता है।दुनिया के कुल तेल और गैस सप्लाई का लगभग 20% इसी पतले समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक जैसे देश इसी रास्ते से दुनिया को कच्चा तेल भेजते हैं।

24 घंटे में तीन टैंकरों पर अटैक…होर्मुज में फिर टेंशन, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आई बड़ी खबर

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव का माहौल गहराता जा रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तीसरे कॉमर्शियल जहाज पर हमला किया गया है। इस घटना के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखने और सीजफायर पर सहमति बनी हुई है।

बीते 24 घंटे में तीसरे जहाज पर हमला 

ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ के मुताबिक, ताजा घटना में एक तेल टैंकर पर किसी अज्ञात वस्तु से हमला किया गया। राहत की बात यह है कि इस हमले में किसी के घायल होने या जहाज को बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है। फिर भी इस घटना ने इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले मंगलवार को भी दो अलग-अलग हमले हुए थे। इनमें कतर के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) ले जाने वाले जहाज पर हमला और सऊदी अरब के झंडे वाले कच्चा तेल ले जा रहे टैंकर को नुकसान पहुंचने की घटना शामिल है।

होर्मुज में तीसरे टैंकर पर हमला

ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक और तेल टैंकर पर हमला हुआ है। एजेंसी के अनुसार, किसी अज्ञात वस्तु के टकराने से जहाज को नुकसान पहुंचा है। यूकेएमटीओ ने बताया कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक टैंकर की संरचना को नुकसान हुआ है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है और न ही फिलहाल तेल रिसाव या समुद्री प्रदूषण के कोई संकेत मिले हैं। एजेंसी ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। साथ ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की सलाह दी गई है।

बता दें कि, इससे पहले होर्मुज की ताजा घटना से कुछ घंटे पहले कतर ने ईरान पर अपने एलएनजी ले जा रहे जहाज अल रेकय्यात पर हमला करने का आरोप लगाया था। यह जहाज रात के समय होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, जहाज की ओर से बताया गया कि उस पर ड्रोन से हमला किया गया, जिससे इंजन वाले हिस्से में आग लग गई। हालांकि सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित रहे और उन्हें बाहर निकालने का काम तुरंत शुरू कर दिया गया।

LPG Cylinder Price Today: क्या आज सस्ता हुआ घरेलू LPG सिलेंडर? चेक करें अपने शहर का रेट

LPG Cylinder Price Today: आज भी देशभर में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम स्थिर बने हुए हैं। जबकि 1 जुलाई को 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम 183.50 रुपये घटाए गए थे। बता दें कि इससे पहले पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इसकी कीमत बढ़कर 3100 रुपये के पार पहुंच गई थी। वहीं, रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बार बदलाव जून महीने में हुआ था, जब इसके दाम में 29 रुपये तक की कमी की गई थी। फिलहाल दिल्ली में 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 942 रुपये और 19- किलो वाले सिलेंडर की कीमत 2930 रुपये है।

चेक करें अपने शहर का रेट

शहर घरेलू सिलेंडर की कीमतकमर्शियल सिलेंडर की कीमत
दिल्ली942.0 रुपये2930.0 रुपये
मुंबई941.5 रुपये2885.5 रुपये
कोलकाता968.0 रुपये3082.0 रुपये
चेन्नई957.5 रुपये3106.0 रुपये
नोएडा939.50 रुपये2917.0 रुपये
देहरादून961.0 रुपये2983.5 रुपये
हैदराबाद934.0 रुपये2052.5 रुपये
गोवा पणजी956.0 रुपये3006.5 रुपये
तिरुवनंतपुरम 951.0 रुपये2970.5 रुपये

सऊदी अरब ने कर दिया बड़ा ऐलान

सऊदी अरब ने एशियाई देशों में अपने खरीदारों को कम कीमत पर कच्चा तेल बेचना शुरू कर दिया है। इसकी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालात सामान्य होना और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ना है। जिस वजह से तेल बेचने वाली कंपनियों के बीच कंपटीशन भी तेज हो गया है।

सोमवार को जारी प्राइस लिस्ट के हवाले से ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में बताया, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको अगले महीने के लिए अपने प्रमुख ग्रेड ‘अरब लाइट’ कच्चे तेल की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कटौती करने जा रही है। नई कीमत क्षेत्रीय बेंचमार्क से करीब 1.50 डॉलर प्रति बैरल कम होगी। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2000 के बाद यह पहली बार है जब किसी एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में इतनी बड़ी कटौती की गई है। इससे एशियाई खरीदारों को सस्ते दाम पर तेल मिलने की उम्मीद है।

क्या अब कम हो जाएगी LPG की कीमत?

अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बाद भारत में पेट्रोल, डीजल और LPG के दाम तुरंत कम नहीं होंगे। जानकारों के मुताबिक, अगर कच्चा तेल इसी स्तर पर लंबे समय तक बना रहता है, तो जुलाई के अंत या अगस्त में घरेलू कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।

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