लंदन से 120 किमी दूर पीटरबरो में 40 साल पुराने मंदिर और कम्युनिटी सेंटर की बिक्री को पर विवाद हो गया है। पीटरबरो सिटी काउंसिल ने न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स को नीलामी के बाद एक मुस्लिम संस्था, यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन, को बेचने का फैसला किया है। इसी परिसर में भारत हिंदू समाज का मंदिर चलता है, जो शहर और आसपास रहने वाले हजारों हिंदुओं का प्रमुख पूजा और सांस्कृतिक केंद्र है। फैसले से नाराज भारत हिंदू समाज ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बिक्री प्रक्रिया को चुनौती दी है। भारत हिंदू समाज संगठन का आरोप है कि काउंसिल ने मंदिर की करीब 40 साल पुरानी धार्मिक और सामुदायिक भूमिका को नजरअंदाज किया। नीलामी के मूल्यांकन में भी गंभीर खामियां रहीं। बता दें कि फरवरी 2026 में हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए काउंसिल को बिक्री पूरी करने जैसे किसी भी कदम से रोक दिया था। अब न्यायिक समीक्षा में यह जांच हो रही है कि फैसला लेने की प्रक्रिया कानून के मुताबिक थी या नहीं। मंदिर प्रबंधन ने साफ किया है कि उसका विरोध मुस्लिम संस्था से नहीं, बल्कि काउंसिल के फैसले और प्रक्रिया से है। अब कोर्ट जांच करेगा कि संपत्ति बेचने का फैसला कानून और समानता के नियमों के मुताबिक लिया गया था या नहीं। मंदिर बंद होने से 56 किमी दूर जाने को मजबूर होंगे हिंदू भारत हिंदू समाज का कहना है कि पीटरबरो का यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इलाके के 4,000 हिंदुओं का एकमात्र सामाजिक-सांस्कृतिक केंद्र भी है। यदि यह परिसर बंद होता है, तो हिंदुओं को पूजा-अर्चना व त्योहारों के लिए निकटतम मंदिर (कैंब्रिज-56 किमी) या (लेस्टर-64 किमी) का रुख करना पड़ेगा। घाटे के चलते बेचने पड़ रहे हैं परिसर, स्पोर्ट्स सेंटर व क्लब पीटरबरो का विवाद ब्रिटेन में अकेला नहीं है। यहां की काउंसिलें बढ़ते खर्च व कम सरकारी मदद के कारण सामाजिक परिसर, स्पोर्ट्स सेंटर व कम्युनिटी भवन बेचकर बजट संभाल रही हैं। 2025 के ‘की सिटीज’ सर्वे में 60% काउंसिलों ने संपत्ति बिक्री को घाटा भरने का रास्ता बताया। बर्मिंघम को 24-25 का बजट संतुलित करने के लिए 2,883 करोड़ रु. की संपत्तियां बेचने का लक्ष्य रखना पड़ा। नॉटिंघम का 2025-26 घाटा 267 करोड़ और चार वर्षों का कुल अनुमानित अंतर 689 करोड़ रु. था। नीलामी में खामियां, समीक्षा बिना मंजूरी दी गई भारत हिंदू समाज का आरोप है कि बिक्री के दौरान दोनों पक्षों की बोलियों का ठीक मूल्यांकन नहीं हुआ। अदालत में संगठन ने कहा कि काउंसिल ने जांच और स्कोरिंग में गलतियां कीं। इसके बाद काउंसिल सदस्यों ने उन्हीं सिफारिशों को पड़ताल के बिना स्वीकार कर लिया। संगठन का कहना है कि मामला केवल ऊंची बोली का नहीं, बल्कि धार्मिक स्थल का भी है। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें…
लंदन से 120 किमी दूर पीटरबरो में 40 साल पुराने मंदिर और कम्युनिटी सेंटर की बिक्री को पर विवाद हो गया है। पीटरबरो सिटी काउंसिल ने न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स को नीलामी के बाद एक मुस्लिम संस्था, यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन, को बेचने का फैसला किया है। इसी परिसर में भारत हिंदू समाज का मंदिर चलता है, जो शहर और आसपास रहने वाले हजारों हिंदुओं का प्रमुख पूजा और सांस्कृतिक केंद्र है। फैसले से नाराज भारत हिंदू समाज ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बिक्री प्रक्रिया को चुनौती दी है। भारत हिंदू समाज संगठन का आरोप है कि काउंसिल ने मंदिर की करीब 40 साल पुरानी धार्मिक और सामुदायिक भूमिका को नजरअंदाज किया। नीलामी के मूल्यांकन में भी गंभीर खामियां रहीं। बता दें कि फरवरी 2026 में हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए काउंसिल को बिक्री पूरी करने जैसे किसी भी कदम से रोक दिया था। अब न्यायिक समीक्षा में यह जांच हो रही है कि फैसला लेने की प्रक्रिया कानून के मुताबिक थी या नहीं। मंदिर प्रबंधन ने साफ किया है कि उसका विरोध मुस्लिम संस्था से नहीं, बल्कि काउंसिल के फैसले और प्रक्रिया से है। अब कोर्ट जांच करेगा कि संपत्ति बेचने का फैसला कानून और समानता के नियमों के मुताबिक लिया गया था या नहीं। मंदिर बंद होने से 56 किमी दूर जाने को मजबूर होंगे हिंदू भारत हिंदू समाज का कहना है कि पीटरबरो का यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इलाके के 4,000 हिंदुओं का एकमात्र सामाजिक-सांस्कृतिक केंद्र भी है। यदि यह परिसर बंद होता है, तो हिंदुओं को पूजा-अर्चना व त्योहारों के लिए निकटतम मंदिर (कैंब्रिज-56 किमी) या (लेस्टर-64 किमी) का रुख करना पड़ेगा। घाटे के चलते बेचने पड़ रहे हैं परिसर, स्पोर्ट्स सेंटर व क्लब पीटरबरो का विवाद ब्रिटेन में अकेला नहीं है। यहां की काउंसिलें बढ़ते खर्च व कम सरकारी मदद के कारण सामाजिक परिसर, स्पोर्ट्स सेंटर व कम्युनिटी भवन बेचकर बजट संभाल रही हैं। 2025 के ‘की सिटीज’ सर्वे में 60% काउंसिलों ने संपत्ति बिक्री को घाटा भरने का रास्ता बताया। बर्मिंघम को 24-25 का बजट संतुलित करने के लिए 2,883 करोड़ रु. की संपत्तियां बेचने का लक्ष्य रखना पड़ा। नॉटिंघम का 2025-26 घाटा 267 करोड़ और चार वर्षों का कुल अनुमानित अंतर 689 करोड़ रु. था। नीलामी में खामियां, समीक्षा बिना मंजूरी दी गई भारत हिंदू समाज का आरोप है कि बिक्री के दौरान दोनों पक्षों की बोलियों का ठीक मूल्यांकन नहीं हुआ। अदालत में संगठन ने कहा कि काउंसिल ने जांच और स्कोरिंग में गलतियां कीं। इसके बाद काउंसिल सदस्यों ने उन्हीं सिफारिशों को पड़ताल के बिना स्वीकार कर लिया। संगठन का कहना है कि मामला केवल ऊंची बोली का नहीं, बल्कि धार्मिक स्थल का भी है। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें…
Income Tax Return 2026: हर साल जब इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने का सीजन शुरू होता है तो टैक्स पेयर्स के सामने सबसे पहला और बड़ा सवाल यही होता है कि ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनें या न्यू टैक्स रिजीम के साथ जाएं। हर कोई अपने हिसाब से टैक्स की देनदारी को कैलकुलेट कर रहा हैं। लेकिन कुछ थंब रूल ऐसे सामने आए हैं जो टैक्स की देनदारी का मामला काफी हद तक साफ कर दे रहे हैं। पर इंडिविजुअल टैक्स पेयर्स को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सैलरी पर्सन टू पर्सन वैरी करती है और कोई एक रूल आपकी टैक्स देनदारी का पूरा असल खाका नहीं खींच सकता।
इसके लिए आपको एक्सपर्ट अडवाइस की हमेशा जरूरत पड़ती है। एक बात और ध्यान देने वाली है कि अब न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट विकल्प है। यानी अगर आप आईटीआर फाइल करते समय कोई विकल्प नहीं चुनते हैं तो आपका रिटर्न अपने आप न्यू टैक्स रिजीम के तहत प्रोसेस किया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक्टिव रूप से ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनना अब भी फायदेमंद है? इसके पीछे के गणित को समझने की कोशिश करते हैं।
क्या कहता है टैक्स का गणित?
ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए की गई एक तुलनात्मक गणना के मुताबिक न्यू टैक्स रिजीम कई सैलरी स्लैब में भारी बचत दे रही है। इस कैलकुलेशन में 60 वर्ष से कम उम्र के एक ऐसे सैलरडी पर्सन को आधार बनाया गया है जो ओल्ड रिजीम के तहत कुल 4.25 लाख रुपये के डिडक्शन (छूट) का दावा करता है। इसमें नीचे दिए गए डिडक्शन शामिल हैं:-
धारा 80C के तहत: 150000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80C / 2025 के अधिनियम की धारा 123)
धारा 80D के तहत: 25000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80D / 2025 के अधिनियम की धारा 126)
HRA (हाउस रेंट अलाउंस): 200000 रुपये
स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction): 50000 रुपये
इसके मुकाबले न्यू टैक्स रिजीम में केवल 75000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन शामिल किया गया है। इस गणना में लागू सरचार्ज और 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस को भी जोड़ा गया है।
विभिन्न सैलरी लेवल पर टैक्स लायबिलिटी
25 लाख रुपये की सैलरी पर: ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत 452400 रुपये का टैक्स बनता है जबकि न्यू टैक्स रिजीम में यह बिल सिर्फ 319800 रुपये आता है। यानी न्यू टैक्स रिजीम चुनने पर सीधे 132600 रुपये की बचत होती है।
50 लाख रुपये की सैलरी पर: यहां भी दोनों रिजीम के टैक्स का अंतर 132600 रुपये ही रहता है और न्यू टैक्स रिजीम जीतती है।
75 लाख और 1 करोड़ रुपये की सैलरी पर: इस लेवल पर 10 फीसदी का सरचार्ज भी लागू हो जाता है। इसके बावजूद न्यू टैक्स रिजीम में टैक्सपेयर्स को करीब 1.46 लाख रुपये की सीधी बचत मिलती है।
तो क्या ओल्ड टैक्स रिजीम पूरी तरह खत्म हो चुकी है?
ऐसा सभी टैक्स पेयर्स के केस में नहीं कहा जा सकता। ओल्ड टैक्स रिजीम न्यू टैक्स रिजीम को केवल तभी टक्कर दे पाती है जब आपके डिडक्शंस (कटौतियां) इस सामान्य बास्केट से काफी ज्यादा हों। अगर आपके पास बड़े डिडक्शंस हैं जैसे:-
- धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की छूट।
- मेट्रो शहरों में रहने के कारण मिलने वाला ज्यादा HRA
- धारा 80CCD(1B) के तहत NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में योगदान।
- सीनियर सिटीजन माता-पिता के लिए चुकाया गया बड़ा 80D हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम।
अदर आप इन सभी को मिला देते हैं और आपका कुल डिडक्शन ब्रेक-ईवन थ्रेशोल्ड को पार कर जाता है तो ओल्ड रिजीम बेहतर हो सकती है। मौजूदा स्लैब के तहत अधिकांश इनकम लेवल के लिए यह ब्रेक-ईवन पॉइंट करीब 8 लाख रुपये के कुल डिडक्शन पर बैठता है। यानी भारी होम लोन और फुल HRA क्लेम करने वाला व्यक्ति इस लिमिट तक पहुंच सकता है लेकिन जो व्यक्ति सिर्फ 80C और एक सामान्य हेल्थ पॉलिसी के भरोसे है वह न्यू रिजीम का मुकाबला नहीं कर पाएगा।

ग्रांट थॉर्नटन भारत की टैक्स पार्टनर ऋचा साहनी का कहना है कि पुराने और नए टैक्स रिजीम के बीच चयन कोई ऐसा फैसला नहीं है जो हर किसी पर फिट बैठे। हालांकि न्यू रिजीम कम टैक्स रेट्स और अधिक सरलता की पेशकश करती है लेकिन ओल्ड रिजीम उन खास कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए बेहतर परिणाम दे सकती है जो बड़े पैमाने पर डिडक्शंस और एग्जेंप्शन (छूट) का लाभ उठाते हैं। इसलिए टैक्सपेयर्स को केवल हेडलाइन टैक्स रेट्स पर भरोसा करने के बजाय अपना फैसला लेने से पहले एक पर्सनलाइज्ड टैक्स कैलकुलेशन जरूर करनी चाहिए।
सालाना रिजीम बदलने की फ्लेक्सिबिलिटी
सैलरीड करदाताओं के लिए एक अच्छी बात यह है कि वे किसी एक रिजीम में लॉक नहीं होते हैं। ऋचा साहनी के मुताबिक, सैलरीड टैक्सपेयर्स के पास हर साल दोनों रिजीम के बीच चयन करने की फ्लेक्सिबिलिटी होती है। वे अपनी इनकम प्रोफाइल, डिडक्शंस और एग्जेंप्शंस के आधार पर सालाना अपनी स्थिति का मूल्यांकन कर सकते हैं और जो अधिक फायदेमंद हो, उसे चुन सकते हैं।
इस सालाना बदलाव का व्यावहारिक महत्व भी है। आपके एम्प्लॉयर (कंपनी) ने TDS काटने के लिए किस रिजीम का इस्तेमाल किया था उससे आपका आईटीआर बाउंड नहीं होता है। अगर कंपनी ने न्यू टैक्स रिजीम के हिसाब से टीडीएस काटा है लेकिन कैलकुलेशन के बाद आपके लिए ओल्ड रिजीम ज्यादा फायदेमंद निकलती है तो आप आईटीआर फाइल करते समय ओल्ड रिजीम चुन सकते हैं और बची हुई रकम को रिफंड के रूप में क्लेम कर सकते हैं।
बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम वाले टैक्सपेयर्स को ओल्ड रिजीम में वापस जाने का केवल एक ही मौका (Form 10-IEA के जरिए) मिलता है, इसलिए उन्हें अपना विकल्प चुनते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
फाइल करने से पहले क्या करें?
रिटर्न दाखिल करने से पहले इनकम टैक्स पोर्टल पर मौजूद कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें, जिसमें मुश्किल से 10 मिनट का समय लगता है। थंब रूल यह है कि अगर आपके डिडक्शंस कम हैं तो बिना किसी उलझन के न्यू टैक्स रिजीम चुनें और यदि डिडक्शंस ज्यादा हैं तो दोनों रिजीम में टैक्स कैलकुलेट करके तुलना कर लें। चूंकि ये दोनों रिजीम आने वाले भविष्य में एक साथ रहेंगी, इसलिए यह कोई वन-टाइम फैसला नहीं है बल्कि इसे अपनी सालाना आदत बना लें।
Mutual Fund SIP SWP Calculator: रिटायरमेंट के बाद ठाठ से जिंदगी जीना और हर महीने लाखों की पेंशन पाना कोई मुश्किल काम नहीं है, बस आपको निवेश का सही और स्मार्ट तरीका पता होना चाहिए। आम निवेशक एक तय रकम की एसआईपी (SIP) शुरू करके उसे सालों-साल चलाते हैं, जिससे वे एक अच्छा फंड तो बना लेते हैं, लेकिन ‘स्मार्ट निवेशक’ अपनी बढ़ती आमदनी के साथ हर साल अपने निवेश को भी बढ़ाते हैं।
अगर आप 30 साल की उम्र में रोजाना महज ₹200 बचाकर ₹6000 की मंथली म्यूचुअल फंड एसआईपी शुरू करते हैं, तो रिटायरमेंट के समय आपके पास ₹9 करोड़ से ज्यादा का भारी-भरकम फंड हो सकता है। इसके बाद एक खास ट्रिक के जरिए आप इसी फंड से ताउम्र ₹6 लाख महीना की पेंशन भी पा सकते हैं। आइए आसानी से समझते हैं इस ‘SIP + SWP’ कैलकुलेटर का पूरा गणित।
स्टेप-अप एसआईपी का जादू: ऐसे बनेगा ₹9 करोड़ का फंड
इस जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए आपको ‘स्टेप-अप एसआईपी’ का इस्तेमाल करना होगा। इसका मतलब है कि आपको हर साल अपनी एसआईपी की रकम में अपनी इनकम के हिसाब से थोड़ी बढ़ोतरी करनी होगी। एसबीआई सिक्योरिटीज के म्यूचुअल फंड कैलकुलेटर के मुताबिक इसका गणित इस प्रकार है:
- शुरुआती मंथली निवेश: ₹6000 प्रति माह
- सालाना स्टेप-अप: 10%, यानी हर साल आपको एसआईपी की रकम में 10% की बढ़ोतरी करनी है। जैसे पहले साल ₹6000, तो दूसरे साल ₹6600 मंथली।
- निवेश की अवधि: 30 वर्ष, मान लेते हैं आपकी उम्र 30 साल है और आप 60 की उम्र तक निवेश करते हैं।
- अनुमानित सालाना रिटर्न: 15%, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लंबी अवधि में इतना रिटर्न मिलना मुमकिन है।
- 30 साल बाद कुल मैच्योरिटी फंड: करीब ₹9.01 करोड़
वहीं अगर आप बिना स्टेप-अप के सीधे ₹6000 की सिंपल एसआईपी 30 साल तक चलाते, तो 15% रिटर्न के हिसाब से केवल ₹4.20 करोड़ ही जमा हो पाते। यानी सिर्फ 10% सालाना निवेश बढ़ाकर आपने अपने फंड को दोगुने से भी ज्यादा कर लिया।
पेंशन के लिए अपनाएं SWP फॉर्मूला: हर महीने मिलेंगे ₹6 लाख
जब आप 60 वर्ष की उम्र में ₹9 करोड़ का फंड जमा कर लेते हैं, तो अब आपको म्यूचुअल फंड से पैसे निकालने के लिए सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) का सहारा लेना होगा। सीनियर सिटीजंस और रिटायर्ड लोगों के लिए SWP रेगुलर इनकम का सबसे बेहतरीन जरिया है।
SWP कैलकुलेटर का गणित
- एसडब्ल्यूपी में कुल निवेश: ₹9 करोड़
- पेंशन की अवधि: 25 वर्ष, 60 साल से लेकर 85 साल की उम्र तक
- SWP पर अनुमानित रिटर्न: 7% (सुरक्षित या कंजर्वेटिव फंड्स के लिहाज से)
- मंथली फिक्स्ड पेंशन: ₹6 लाख प्रति माह
बचा हुआ इमरजेंसी फंड: हर महीने ₹6 लाख की पेंशन निकालने के बाद भी 25 साल पूरे होने पर आपके पास ₹2.64 करोड़ का फंड अलग से बच जाएगा। इस रकम का इस्तेमाल बुढ़ापे में किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी के लिए किया जा सकता है।
30 साल बाद आखिर ₹6 लाख की पेंशन क्यों है जरूरी?
कई लोगों को लग सकता है कि ₹6 लाख महीने की पेंशन बहुत ज्यादा है, लेकिन इसके पीछे महंगाई का बड़ा रोल है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ‘आज के समय में एक लोअर-मिडिल क्लास सीनियर सिटीजन के लिए ₹50000 का मंथली खर्च काफी होता है।
अगर हम स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सहित सालाना 8% की महंगाई दर को जोड़ें, तो आज के ₹50000 की वैल्यू 30 साल बाद बढ़कर करीब ₹5 लाख प्रति माह हो जाएगी। इसमें बुढ़ापे के अन्य मेडिकल खर्चों और फुटकर खर्चों को जोड़ दें, तो 30 साल बाद एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए ₹6 लाख की मंथली पेंशन बिल्कुल सही और आदर्श मानी जाएगी।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
पीबी फिनटेक का शेयर 3 जुलाई को बाजार खुलते ही क्रैश कर गया। कंपनी के शेयरों में एक बड़ी ब्लॉक डील हुई। कंपनी के 2.3 फीसदी शेयरों की बिक्री करीब 1,741 करोड़ रुपये में हुई। इसके बाद शेयरों पर बड़ा दबाव दिखा। 10 बजे शेयर 7.31 फीसदी गिरकर 1,563.50 रुपये पर चल रहा था। पहले खबर आई थी कि सिंगापुर की सॉवरेन इनवेस्टमेंट फर्म टेमासेक होल्डिंग्स पीबी फिनटेक में अपनी हिस्सेदारी घटाना चाहती है।
इस साल अब तक 14 फीसदी गिर चुका है शेयर
PB Fintech का शेयर इस साल अब तक करीब 14 फीसदी गिर चुका है। इस दौरान निफ्टी में 7 फीसदी गिरावट आई है। पीबी फिनटेक का मार्केट कैपिटलाइजेशन 72,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, ब्लॉक डील में 1.08 शेयरों का ट्रांजेक्शन प्रति शेयर 1,601 रुपये के रेट पर हुआ है। यह 2 जुलाई को शेयर के 1,682.10 रुपये के क्लोजिंग प्राइस से करीब 4.8 रुपये का डिस्काउंट है।
अभी खरीदार और बेचने वाले की जानकारी उपलब्ध नहीं
स्टॉक एक्सचेंजों पर अभी शेयर खरीदने वाले और बेचने वाले की जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह ट्रांजेक्शन 2 जुलाई को आई खबरों के मुताबिक है। खबरों में कहा गया है था कि टेमासेक होल्डिंग्स अपनी एक सब्सिडियरी के जरिए पीबी फिनेटक के 1.19 करोड़ शेयर बेचना चाहती है। यह पीबी फिनेटक में 2.6 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है। खबरों में प्रति शेयर करीब 1,909 रुपये की कीमत पर ब्लॉक डील होने का अनुमान जताया गया था।
बीते कुछ महीनों में कई बड़े शेयरहोल्डर्स ने बेची हिस्सेदारी
इस ट्रांजेक्शन से पहले टेमासेक होल्डिंग्स की सब्सिडियरी MacRitchie Investments की PB Fintech में 6.47 फीसदी हिस्सेदारी थी। सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया को इस डील का एकलौता प्लेसमेंट एजेंट बताया गया था। बताया गया था कि इस डील के बाद टेमासेक पर अपनी बाकी हिस्सेदारी बेचने के लिए 60 दिन का लॉक-अप लागू होगा। बीते कुछ महीनों में पीबी फिनटेक में कई बड़े शेयरहोल्डर्स ने हिस्सेदारी बेची है।
मई में दहिया और बंसल ने भी बेचे थे कंपनी के शेयर
इस साल मई में पीबी फिनेटक के को-फाउंडर्स यशीश दहिया और आलोक बंसल ने करीब 38 लाख शेयर बेचे थे। यह कंपनी में करीब 0.8 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर था। यह ट्रांजेक्शन 654 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील के जरिए हुआ था। मई में ही चीन की टेक्नलोजी कंपनी Tencent ने पीबी फिनटेक में अपनी बाकी 1.05 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी थी।
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लगातार तीसरे दिन शेयर बाजारों में तेजी
3 जुलाई को शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दिखी। 10:20 बजे निफ्टी 0.68 फीसदी यानी 165 अंक चढ़कर 24,342 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.65 फीसदी यानी 506 अंक के उछाल के साथ 78,000 पर था। बैंक निफ्टी में भी 0.23 फीसदी की तेजी दिखी। आज बाजार में अच्छी तेजी का लगातार तीसरा दिन है।
1. IRCTC Tour Package क्या होता है?


इस रूट में उत्तराखंड के चार पवित्र धाम—यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन कराए जाते हैं। यात्रा आमतौर पर हरिद्वार/दिल्ली से शुरू होती है और ट्रेन + बस + पहाड़ी रोड ट्रांसफर के जरिए पूरी होती है। यह पैकेज सीनियर सिटीजन के लिए बहुत सुविधाजनक होता है क्योंकि इसमें गाइड, होटल और भोजन सब शामिल रहता है। मानसून और गर्मियों में इस रूट की मांग सबसे ज्यादा रहती है क्योंकि धार्मिक आस्था और पहाड़ी प्राकृतिक दृश्य दोनों साथ मिलते हैं।
7 ज्योतिर्लिंग यात्रा रूट-

इस यात्रा में भगवान शिव के 7 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कराए जाते हैं जैसे महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, सोमनाथ, त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर, घृष्णेश्वर और नागेश्वर। यह रूट कई राज्यों को कवर करता है और लगभग 10–12 दिन का होता है। यात्रियों को हर जगह ट्रेन से बस ट्रांसफर और गाइड के साथ मंदिर दर्शन कराया जाता है। यह पैकेज सबसे लोकप्रिय धार्मिक टूर में से एक है क्योंकि इसमें पूरे भारत के महत्वपूर्ण शिव मंदिर शामिल होते हैं।
काशी–अयोध्या–प्रयागराज टूर रूट-
इस रूट में उत्तर भारत के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल शामिल होते हैं। वाराणसी (काशी), अयोध्या और प्रयागराज जैसे शहरों में गंगा आरती, राम मंदिर दर्शन और संगम स्नान का अनुभव दिया जाता है। यह यात्रा धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इसमें सनातन धर्म के प्रमुख केंद्र एक साथ कवर होते हैं। ट्रेन से लेकर लोकल बस ट्रांसफर और होटल स्टे सब पहले से फिक्स होता है।
दक्षिण भारत तीर्थ यात्रा रूट-


IRCTC टूर पैकेज का किराया फिक्स होता है और यह यात्रा की क्लास और सुविधाओं पर निर्भर करता है। आमतौर पर स्लीपर क्लास में ₹15,000 से ₹30,000, 3AC में ₹25,000 से ₹45,000 और 2AC में ₹35,000 से ₹60,000 या उससे अधिक तक का खर्च आता है। इस किराए में ट्रेन यात्रा, होटल, खाना और साइटसीइंग सब शामिल होता है, जिससे यात्रियों को अलग से कोई अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता और पूरी यात्रा एक बजट में पूरी हो जाती है।
4. खाने-पीने की सुविधा


7. सीनियर सिटीजन के लिए खास फायदे


9. बुकिंग और जरूरी टिप्स


1 July New Financial Rules 2026: नया महीना अपने साथ कई बड़े वित्तीय और नीतिगत बदलाव लेकर आया है। 1 जुलाई 2026 से देश में बैंकिंग, पासपोर्ट और पर्सनल फाइनेंस से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम बदल गए हैं। अगर आप इन बदलावों से अनजान हैं, तो आपको बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। ALSO READ: 25,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन होंगे सस्ते, GSTघटाकर 5% करने की सिफारिश
अगर आपके पास HDFC या SBI का क्रेडिट कार्ड है, या आप नया पासपोर्ट बनवाने जा रहे हैं, तो रुकिए! 1 जुलाई से आपकी जेब ढीली होने वाली है। आइए जानते हैं RBI, UIDAI और प्रमुख बैंकों द्वारा जारी किए गए उन 6 बड़े बदलावों के बारे में, जो सीधे आपके बजट को प्रभावित करेंगे।
1. पासपोर्ट बनवाना हुआ महंगा: फीस में बढ़ोतरी
विदेश यात्रा का सपना देखने वालों के लिए पहला झटका पासपोर्ट ऑफिस से आया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के नए सर्कुलर के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से नया पासपोर्ट बनवाने या रिन्यू कराने की फीस में बढ़ोतरी कर दी गई है:
- नॉर्मल कैटेगरी : इसकी फीस 1,500 रुपए से बढ़ाकर अब 1,800 रुपए कर दी गई है।
- तत्काल पासपोर्ट: इसके लिए अब आपको 3,500 रुपए की जगह 4,000 रुपए खर्च करने होंगे।
2. Aadhaar Card: ईमेल आईडी अपडेट कराना हुआ बिल्कुल फ्री
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए UIDAI ने घोषणा की है कि 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 तक आधार कार्ड में ईमेल आईडी लिंक या अपडेट कराना पूरी तरह से मुफ्त होगा।
नोट: इससे पहले इस सर्विस के लिए 50 रुपए का शुल्क लिया जाता था, लेकिन अब इसमें 50 रुपए की सीधी छूट मिलेगी। हालांकि, मोबाइल नंबर या बायोमेट्रिक अपडेट के लिए निर्धारित शुल्क लागू रहेगा।
3. Credit Card Lounge Access: अब खर्च करने होंगे ज़्यादा पैसे
अगर आप क्रेडिट कार्ड के जरिए एयरपोर्ट लाउंज (Airport Lounge) का मुफ्त फायदा उठाते थे, तो अब जेब ज्यादा ढीली करनी होगी। SBI Card और HDFC बैंक समेत कई बड़े दिग्गजों ने अपने नियम कड़े कर दिए हैं:
- नया नियम: अब अगली तिमाही (Quarter) में मुफ्त लाउंज एक्सेस पाने के लिए चालू तिमाही में कम से कम 60,000 रुपए की स्पेंडिंग (खर्च) करना अनिवार्य होगा।
- पहले यह लिमिट 35,000 रुपए से 50,000 रुपए के बीच हुआ करती थी।
4. RBI का 'मिस-सेलिंग' पर नया डंडा: लोन और इंश्योरेंस के नियम सख्त
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों को बैंकों की मनमानी से बचाने के लिए 'मिस-सेलिंग' (Mis-selling) पर नए कड़े नियम लागू कर दिए हैं।
- अब कोई भी बैंक या एजेंट आपको लोन देते समय जबरन कोई इंश्योरेंस पॉलिसी या अनचाहा कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट नहीं बेच सकता।
- अगर कोई बैंक ऐसा करता है, तो ग्राहक सीधे RBI लोकपाल (Ombudsman) से शिकायत कर सकते हैं, और बैंक पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

5. स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स (Small Savings Schemes) की ब्याज दरें
वित्त मंत्रालय ने जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा की है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) की दरों को इस बार स्थिर रखा गया है। हालांकि, कुछ चुनिंदा फिक्स्ड डिपॉजिट्स (FD) की दरों में 0.10% का मामूली बदलाव किया गया है, जिसकी पूरी लिस्ट आप पोस्ट ऑफिस की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
6. NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य
पेंशन फंड नियामक PFRDA ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत ट्रांजैक्शन को और सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम जारी किए हैं। 1 जुलाई से सभी NPS खातों में लॉगिन करने के लिए आधार-आधारित टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) पूरी तरह अनिवार्य हो गया है। इसके बिना यूजर्स अपने अकाउंट को एक्सेस नहीं कर पाएंगे।
टेकअवे (Takeaway)
जुलाई के इस महीने में किसी भी वित्तीय नुकसान से बचने के लिए अपने क्रेडिट कार्ड के खर्चों को ट्रैक करें और अगर आधार में ईमेल अपडेट पेंडिंग है, तो तुरंत UIDAI के पोर्टल पर जाकर इस मुफ्त सेवा का लाभ उठाएं।
Disclaimer: यह जानकारी संबंधित विभागों (RBI, UIDAI, MEA) के आधिकारिक सर्कुलर और नोटिफिकेशन के आधार पर दी गई है। किसी भी सेवा का लाभ लेने से पहले उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर नियमों की जांच जरूर कर लें।
Gold Rate Today In India: अमेरिका और ईरान के सुलह की तेज कोशिशों ने जियोपॉलिटिल टेंशन में नरमी के संकेत दिए तो सोने की चमक बढ़ी लेकिन दूसरी तरफ इंडस्ट्रियल डिमांड की सुस्ती ने चांदी पर दबाव बनाया हुआ है। पहले गोल्ड की बात करें तो एक दिन की गिरावट के बाद लगातार दूसरे दिन आज यह महंगा हुआ है। 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड दो दिनों में ₹120 और 22 कैरट वाला ₹110 महंगा हुआ है। इससे पहले 29 जून को 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹2020 और 22 कैरट वाला ₹1850 सस्ता हुआ था। आज की बात करें तो फिलहाल 24 और 22 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹10 नीचे आया है।
चांदी की बात करें तो इंडस्ट्रीज की तरफ से डिमांड में सुस्ती ने इस पर दबाव डाला है और चमक फीकी की है। लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज लगातार दूसरे दिन इसके भाव नीचे आए हैं और इन दो दिनों में एक किलो चांदी ₹5100 सस्ती हुई है।
सिटीवाइज गोल्ड के भाव
देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…
| शहर | 24 कैरट | 22 कैरट | 18 कैरट |
| दिल्ली | ₹1,42,200 | ₹1,30,360 | ₹1,06,690 |
| मुंबई | ₹1,42,050 | ₹1,30,210 | ₹1,06,540 |
| कोलकाता | ₹1,42,050 | ₹1,30,210 | ₹1,06,540 |
| चेन्नई | ₹1,43,990 | ₹1,31,990 | ₹1,10,490 |
| बेंगलुरू | ₹1,42,050 | ₹1,30,210 | ₹1,06,540 |
| हैदराबाद | ₹1,42,050 | ₹1,30,210 | ₹1,06,540 |
| लखनऊ | ₹1,42,200 | ₹1,30,360 | ₹1,06,690 |
| पटना | ₹1,42,100 | ₹1,30,260 | ₹1,06,590 |
| जयपुर | ₹1,42,200 | ₹1,30,360 | ₹1,06,690 |
| अहमदाबाद | ₹1,42,100 | ₹1,30,260 | ₹1,06,590 |
तीन दिनों की स्थिरता के बाद लगातार दूसरे दिन फिसली चांदी
चांदी की बात करें तो तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज लगातार दूसरे दिन इसके भाव नीचे आए हैं। इससे पहले लगातार तीन दिनों की स्थिरता से पहले 26 जून को एक किलो चांदी ₹5 हजार महंगी हुई थी और 25 जून को ₹10 हजार सस्ती हुई थी। अब आज की बात करें तो दिल्ली में यह प्रति किग्रा ₹100 ऊपर सस्ती होकर ₹2,34,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई और कोलकाता में भी यह इसी भाव पर बिक रही है। हालांकि चेन्नई में एक किलो चांदी का भाव ₹2,44,900 है यानी चारों महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में ही है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा संवैधानिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर बच्चा जन्म से अमेरिकी नागरिक होगा, चाहे उसके माता-पिता देश में अवैध रूप से रह रहे हों या फिर अस्थायी वीजा पर आए हों। अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस कार्यकारी आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ऐसे बच्चों को जन्म से नागरिकता देने से इनकार किया गया था। यह फैसला 5-4 के बहुमत से आया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखा। अमेरिका में पिछले 158 साल से यह व्यवस्था लागू है कि वहां जन्म लेने वाला हर बच्चा अपने जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिक बन जाता है। यह अधिकार अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में दिया गया है। शपथ लेने के कुछ घंटे बाद ही जारी किया था आदेश ट्रम्प ने अपने शपथ ग्रहण वाले दिन यानी 20 जनवरी 2025 को एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन कर बर्थ राइट सिटीजनशिप पर रोक लगा दी थी। इसके कुछ ही दिन बाद कई संघीय (फेडरल) जिला अदालतों ने इस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी। यानी ट्रम्प का आदेश लागू ही नहीं हो सका। हालांकि उस समय बर्थराइट सिटिजनशिप पर रोक नहीं लगी थी, बल्कि ट्रम्प के आदेश पर रोक लगी थी। इसके बाद फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने अब अंतिम फैसला देते हुए कहा कि 14वां संशोधन जन्मजात नागरिकता की गारंटी देता है। इसलिए ट्रम्प का आदेश असंवैधानिक है और उसे रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) सामान्य कानून बनाकर जन्म से नागरिकता के अधिकार का दायरा नहीं बदल सकती। अगर इस व्यवस्था में बदलाव करना है, तो इसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा। ट्रम्प खुद भी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे 1 अप्रैल को ट्रम्प इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहे। किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति का सुप्रीम कोर्ट में इस तरह सुनवाई के दौरान मौजूद रहना बेहद दुर्लभ माना जाता है। अगर ट्रम्प का यह आदेश लागू हो जाता, तो हर साल अमेरिका में जन्म लेने वाले करीब 2.5 लाख बच्चों की कानूनी स्थिति प्रभावित होती। साथ ही परिवारों को अपने नवजात बच्चे की नागरिकता तय कराने के लिए माता-पिता की नागरिकता और इमिग्रेशन स्थिति के दस्तावेज भी देने पड़ते। यह फैसला ट्रम्प के लिए इसलिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के दौरान इसे खत्म करने का वादा किया था। अमेरिका में 157 साल पहले मिला था जन्मजात नागरिकता का अधिकार 1865 में अमेरिकी गृहयुद्ध खत्म होने के बाद, जुलाई 1868 में अमेरिकी संसद में 14वें संशोधन को मंजूरी दी गई थी। इसमें कहा गया था कि देश में पैदा हुए सभी अमेरिकी नागरिक हैं। इस संशोधन का मकसद गुलामी के शिकार अश्वेत लोगों को अमेरिकी नागरिकता देना था। हालांकि, इस संशोधन की व्याख्या इस प्रकार की गई है कि इसमें अमेरिका में जन्में सभी बच्चों को शामिल किया जाएगा, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेट्स कुछ भी हो। ट्रम्प और उनके समर्थकों का दावा है कि इस कानून का फायदा उठाकर गरीब और युद्धग्रस्त देशों से आए लोग अमेरिका आकर बच्चों को जन्म देते हैं। ये लोग पढ़ाई, रिसर्च, नौकरी के आधार पर अमेरिका में रुकते हैं। बच्चे का जन्म होते ही उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है। नागरिकता के बहाने माता-पिता को अमेरिका में रहने की कानूनी वजह भी मिल जाती है। अमेरिका में यह ट्रेंड काफी लंबे समय से जोरों पर है। आलोचक इसे बर्थ टूरिज्म कहते हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक 16 लाख भारतीय बच्चों को अमेरिका में जन्म लेने की वजह से नागरिकता मिली है। ट्रम्प के करीबियों को भी मिला था जन्मजात नागरिकता का लाभ दिलचस्प बात यह है कि ट्रम्प के कई करीबी सहयोगी भी इसी जन्मजात नागरिकता व्यवस्था का लाभ उठा चुके हैं। विदेश मंत्री मार्को रूबियो, एफबीआई निदेशक काश पटेल और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पत्नी उषा वेंस के माता-पिता दूसरे देशों से अमेरिका आए थे। इनका जन्म अमेरिका में हुआ, इसलिए इन्हें जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिकता मिल गई। कोर्ट के इस फैसले से भारतीयों को राहत क्यों मिली? H-1B वीजा धारकों के लिए गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के नियम नहीं बदलेंगे अमेरिका के इमिग्रेशन कानून या वीजा नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो H-1B वीजा या किसी अन्य वैध अस्थायी वीजा पर रह रहे लोगों को अमेरिका में गर्भधारण करने या बच्चे को जन्म देने से रोकता हो। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी ऐसे परिवारों के अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को संविधान के 14वें संशोधन के तहत जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिक माना जाएगा। क्या बच्चे की नागरिकता मिलने से माता-पिता को भी नागरिकता मिल जाएगी? जवाब है- नहीं। अगर किसी बच्चे का जन्म अमेरिका में होता है तो उसे जन्म से अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है, लेकिन इसका फायदा उसके माता-पिता को नहीं मिलता। H-1B या किसी अन्य अस्थायी वीजा पर रह रहे लोगों को अपने इमिग्रेशन स्टेटस को पहले की तरह अलग से बनाए रखना होगा। मौजूदा अमेरिकी कानून के मुताबिक, अमेरिकी नागरिक बच्चा अपने माता-पिता के लिए स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) की सिफारिश तभी कर सकता है, जब उसकी उम्र 21 वर्ष हो जाए। भारतीय मूल के बच्चों के लिए दोहरी नागरिकता का क्या नियम है? भारत पूरी तरह दोहरी नागरिकता (ड्यूल सिटिजनशिप) की अनुमति नहीं देता। अगर भारतीय माता-पिता के यहां अमेरिका में बच्चा पैदा होता है, तो उसे जन्म के साथ अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है। हालांकि, वह एक साथ पूरी भारतीय नागरिकता नहीं रख सकता। ऐसे बच्चों के लिए माता-पिता ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड बनवा सकते हैं। ओसीआई कार्ड मिलने पर उन्हें भारत आने के लिए आजीवन वीजा की जरूरत नहीं होती। साथ ही भारत में रहने से जुड़े कई अधिकार भी मिलते हैं।
Small Savings Schemes Interest Rates: अगर आप भी अपनी कमाई को पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं में निवेश करते हैं, तो आपके लिए एक बेहद जरूरी खबर है। सरकार ने मंगलवार, 30 जून 2026 को लगातार नौवीं तिमाही के लिए पीपीएफ, एनएससी, और केवीपी जैसी तमाम छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की दूसरी तिमाही (1 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक) के लिए ब्याज दरें बिल्कुल वैसी ही रहेंगी जैसी पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में थीं। बाजार को इस बार दरों में संशोधन की उम्मीद थी, लेकिन सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले निवेशकों को फिलहाल पुरानी दरों से ही संतोष करना होगा।
अब किस स्कीम पर कितना मिल रहा है ब्याज?
जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के लिए सभी चर्चित स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की वर्तमान ब्याज दरें इस प्रकार है:

आखिरी बार कब बदली थीं ब्याज दरें?
छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में आखिरी बार बड़ा बदलाव फाइनेंशियल ईयर 2023-24 की जनवरी-मार्च तिमाही में किया गया था। इसके बाद अप्रैल 2024 में सरकार ने केवल दो स्कीमों में बढ़ोतरी की थी 3-वर्षीय टाइम डिपॉजिट की दर 7% से बढ़ाकर 7.1% और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) की दर 8% से बढ़ाकर 8.2% की गई थी। तब से लेकर अब तक यानी लगातार 9 तिमाहियों से बाकी सभी योजनाओं की ब्याज दरें जस की तस बनी हुई हैं।
कैसे तय होती हैं इन योजनाओं की ब्याज दरें?
क्या आप जानते हैं कि सरकार इन स्कीम्स का ब्याज कैसे तय करती है? दरअसल, स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरें मार्केट यील्ड यानी बाजार के रिटर्न से जुड़ी होती हैं। वित्त मंत्रालय इसके लिए एक खास फॉर्मूले का पालन करता है, जो समान मैच्योरिटी वाले सरकारी बॉन्ड या गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (G-Secs) के रिटर्न पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए, अगर 5 साल के सरकारी बॉन्ड का रिटर्न बढ़ता या घटता है, तो उसी हिसाब से 5 साल की पोस्ट ऑफिस एफडी की दरें भी तय की जाती हैं।
वैसे भले ही इस तिमाही ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी न हुई हो, लेकिन बैंकों की आम एफडी की तुलना में आज भी सुकन्या समृद्धि (8.2%), सीनियर सिटीजन स्कीम (8.2%) और एनएससी (7.7%) जैसी सरकारी योजनाएं पूरी सुरक्षा के साथ बेहतरीन रिटर्न दे रही हैं।

