मानसून में बालों का झड़ना और चेहरे की चिपचिपाहट होगी गायब, बस डेली रूटीन में शामिल करें ये 5 लाइफस्टाइल टिप्स

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Health Tips: देशभर में 6 अगस्त को झमाझम बारिश के साथ मौसम का मिजाज बदल चुका है। लेकिन इस सुहावने मौसम के साथ उमस, स्किन इंफेक्शन, हेयर फॉल और प्लेटलेट्स गिरने का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। यदि आप इन समस्याओं से बचना चाहते हैं तो अपनाएं ये 5 आसान और असरदार टिप्स।

 

  • बारिश के मौसम में नमी की वजह से स्किन और बालों का नेचुरल ऑयल बैलेंस बिगड़ जाता है।
  • इम्यून सिस्टम मजबूत रखने के लिए रोजाना डाइट में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और ताजे फलों को शामिल करें।
  • डेंगू और मानसून इंफेक्शन से बचने के लिए शरीर को ढंककर रखें और बासी खाने से परहेज करें।

1. मानसून का बदलता ट्रेंड और सेहत की चुनौतियां:

  • 6 अगस्त को आईएमडी (IMD) ने देश के कई राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बारिश गर्मी से राहत जरूर दिलाती है, लेकिन इसके साथ ही हवा में नमी (Humidity) का स्तर 90% तक पहुंच जाता है।
  • इस मौसम में फंगल इंफेक्शन, चेहरे पर मुंहासे (Acne), तेजी से बाल झड़ना और डेंगू जैसे मच्छरों के काटने का जोखिम सबसे ज्यादा होता है। अगर आप इस मौसम में अपने डेली केयर रूटीन पर ध्यान नहीं देंगे, तो इंफेक्शन आपको आसानी से अपना शिकार बना सकता है।

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2. मानसून में स्किन और सेहत को फिट रखने के 5 आसान टिप्स:

सेलिसिलिक एसिड बेस्ड फेसवॉश का इस्तेमाल करें: हफ्ते में 3 से 4 बार यह वॉश चेहरे के एक्स्ट्रा ऑयल (Sebum) को हटाता है और पसीने से होने वाले मुंहासों को रोकता है।

एंटी-फंगल पाउडर का इस्तेमाल: बारिश में भीगे कपड़ों या जूतों की वजह से फंगल इंफेक्शन का खतरा रहता है। नहाने के बाद टॉवल से शरीर पूरी तरह सुखाकर पाउडर लगाएं।

हल्का और गर्म खाना खाएं: बारिश के दिनों में पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। स्ट्रीट फूड और बासी खाने से बचें; सूप, हर्बल टी और घर का ताजा खाना ही लें।

बालों को गीला न छोड़ें: बारिश के पानी में एसिडिक तत्व होते हैं। अगर बाल भीग जाएं तो तुरंत माइल्ड शैम्पू से धोकर ड्राई कर लें।

हाइड्रेशन का रखें ध्यान: ठंडक महसूस होने पर भी दिन में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी जरूर पीएं ताकि बॉडी डिटॉक्स होती रहे।

एक्सपर्ट की राय:-

“मानसून के दिनों में हवा में नमी की वजह से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं। अपने स्कैल्प को सूखा रखना, गीले कपड़े न पहनना और प्लेटलेट्स का ध्यान रखने के लिए विटामिन-C रिच डाइट लेना इस मौसम में सबसे जरूरी है।”- डॉक्टर राजेंद्र बिस्वारी (स्किन केयर विशेषज्ञ)

 

3. मानसून में भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां:

गीले बाल बांधना: गीले बालों को बांधने से स्कैल्प में फंगस और डैंड्रफ की समस्या दोगुनी तेजी से फैलती है।

भारी मॉइस्चराइजर लगाना: मानसून में जेल-बेस्ड (Gel-based) या ऑयल-फ्री मॉइस्चराइजर का ही इस्तेमाल करें; हैवी क्रीम्स पोर्स को ब्लॉक कर देती हैं।

ठहरा हुआ पानी नजरअंदाज करना: घर के आसपास 24 घंटे से ज्यादा पानी जमा न होने दें, यह डेंगू के मच्छरों का मुख्य ब्रीडिंग ग्राउंड बनता है।

सनस्क्रीन स्किप करना: बादलों के पीछे भी यूवी (UV) किरणें मौजूद रहती हैं, इसलिए बिना सनस्क्रीन लगाए बाहर न निकलें।

 

बारिश का मौसम का आनंद लेने के साथ-साथ अपनी सेहत और स्किन की सही देखभाल करना बेहद आसान है। बस अपने डेली रूटीन में ये छोटे-छोटे बदलाव करें और इस मानसून को पूरी तरह सुरक्षित और झंझट-फ्री बनाएं!क्या आपने इस मानसून में अपना नया स्किनकेयर या फिटनेस रूटीन शुरू किया है? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं!

सावधान! थाली में रखा पनीर असली है या वेजिटेबल ऑयल से बना नकली? 2 मिनट के इस टेस्ट से जानें सच्चाई

Paneer, a bottle of iodine, and a glass bowl in the picture.

क्या आप भी खा रहे हैं 'एनालॉग पनीर'? सेहत के लिए खतरनाक मिलावटी पनीर को घर पर ऐसे पहचानें। अगर आप भी बाजार से लाकर बड़े चाव से पनीर खा रहे हैं, तो रुकिए! हाल ही में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई में वनस्पति तेल और स्टार्च से बना नकली यानी 'एनालॉग पनीर' भारी मात्रा में पकड़ा गया है।

 

  • बाजार में दूध की जगह पाम ऑयल और स्टार्च से तैयार एनालॉग पनीर धड़ल्ले से बिक रहा है।
  • आयोडीन टेस्ट, गर्म पानी और मसलकर देखने से असली और नकली पनीर का फर्क तुरंत पता चल जाता है।
  • मिलावटी पनीर खाने से डाइजेशन खराब होने के साथ कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ सकता है।

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क्यों ट्रेंड में है 'एनालॉग पनीर' और क्या है यह?

गुजरात और देश के कई राज्यों में Food & Drug Control Administration (FDCA) ने नकली मिल्क प्रोडक्ट्स और एनालॉग पनीर पर कड़े कदम उठाए हैं। दरअसल, असली पनीर शुद्ध दूध से बनता है, जबकि 'एनालॉग पनीर' बनाने के लिए दूध का फैट निकालकर उसमें सस्ता पाम ऑयल, स्टार्च, डिटर्जेंट या यूरिया मिलाया जाता है। यह दिखने में बिल्कुल असली पनीर जैसा लगता है, लेकिन सेहत के लिए बेहद हानिकारक है।

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असली vs नकली पनीर: घर पर पहचान करने के 5 आसान टिप्स

अगर आपको शक है कि आपका लाया हुआ पनीर नकली है, तो इन 5 आसान घरेलू तरीकों से तुरंत टेस्ट करें:

1. आयोडीन ड्रॉप टेस्ट (Iodine Test): पनीर के टुकड़े को पानी में उबालें और ठंडा होने पर उस पर 2-3 बूंदें आयोडीन सॉल्यूशन की डालें। अगर पनीर का रंग नीला (Blue) हो जाए, तो समझ जाएं कि इसमें स्टार्च या मैदा मिलाया गया है।

 

2. हाथ से मसलकर देखें: असली पनीर को हाथ से मसलने पर वह टूटकर बिखर जाएगा लेकिन ज्यादा रबड़ी जैसा नहीं चिपकेगा। नकली पनीर में रबड़ जैसी इलास्टिसिटी होती है और वह हाथ में चिपकता है।

 

3. उबालकर देखें (Boiling Test): पनीर के छोटे टुकड़े को पानी में उबालें। अगर पानी झागदार हो जाए या पनीर गलकर फैल जाए, तो इसमें डिटर्जेंट या केमिकल की मिलावट हो सकती है।

 

4. अरहर दाल टेस्ट: पनीर को पानी में उबालकर उसमें थोड़ा सा अरहर दाल पाउडर डालें। 10 मिनट बाद अगर रंग हल्का लाल या गुलाबी होने लगे, तो इसमें यूरिया या डिटर्जेंट हो सकता है।

 

5. गंध और स्वाद (Smell & Taste): असली पनीर में दूध की सौंधी महक होती है, जबकि एनालॉग पनीर में कोई महक नहीं होती या फिर कच्चा तेल/केमिकल की गंध आती है।

 

एक्सपर्ट की राय:

“एनालॉग या मिलावटी पनीर में ट्रांस-फैट्स और सिंथेटिक केमिकल्स होते हैं। इसके लगातार सेवन से पेट में इन्फेक्शन, एसिडिटी, लिवर पर असर और बैड कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ सकता है। हमेशा सर्टिफाइड डेयरी या विश्वसनीय ब्रांड्स से ही डेयरी प्रोडक्ट्स खरीदें।”- डॉ. अनामिका शर्मा (सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट)

 

पनीर खरीदते समय ये 3 गलतियां भूलकर भी न करें

  • बहुत सस्ता पनीर खरीदना: अगर बाजार भाव से आधा रेट पर खुला पनीर मिल रहा है, तो 90% आशंका है कि वह एनालॉग पनीर ही है।
  • सख्त और चमकीले पनीर के चक्कर में पड़ना: बहुत ज्यादा सफेद और रबड़ जैसा खींचने वाला पनीर स्वाद में भले ठीक लगे, लेकिन वह सेहत बिगाड़ सकता है।
  • बिना पैकेजिंग/FSSAI मार्क का पनीर लेना: बिना एफएसएसएआई (FSSAI) रजिस्ट्रेशन वाली दुकानों से खुला पनीर खरीदने से बचें।

 

सेहतमंद रहने के लिए स्वाद के साथ-साथ शुद्धता का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। अगली बार जब भी आप बाजार से पनीर लाएं, तो ऊपर बताए गए आयोडीन या बॉइलिंग टेस्ट से उसकी गुणवत्ता जरूर जांचें। क्या आपके शहर में भी मिलावटी या नकली पनीर बिकने की शिकायतें आई हैं? हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताएं और इस जानकारी को अपने परिजनों के साथ शेयर करें!

Shiprocket IPO: 12 अगस्त को खुलेगा आईपीओ! ₹92-₹97 तय हुआ प्राइस बैंड, निवेश से पहले जानिए पूरी डिटेल

Shiprocket IPO Price Band and Date: एमएसएमई, डी2सी ब्रांड्स और बड़े रिटेलर्स को ई-कॉमर्स सॉल्यूशन मुहैया कराने वाली टेक प्लेटफॉर्म शिपरॉकेट अपना आईपीओ ला रही है। कंपनी ने अपने ₹1,617.5 करोड़ के इश्यू के लिए प्राइस बैंड ₹92 से ₹97 प्रति शेयर तय किया है। अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन ₹7,057.5 करोड़ बैठ रहा है। अगर आप भी इस टेक प्लेटफॉर्म के आईपीओ में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो आवेदन करने से पहले इश्यू से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण डिटेल्स जान लें।

Shiprocket IPO: कब से कब तक कर सकेंगे आवेदन?

  • एंकर बुक ओपनिंग: 11 अगस्त 2026
  • आईपीओ ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 12-14 अगस्त 2026
  • न्यूनतम निवेश: ₹97 के अपर प्राइस बैंड के हिसाब से रिटेल निवेशकों को 1 लॉट के लिए कम से कम ₹14,938 लगाने होंगे।
  • अलॉटमेंट की तारीख: 17 अगस्त 2026
  • शेयर लिस्टिंग डेट: 19 अगस्त 2026

इश्यू का साइज 

गुड़गांव बेस्ड इस कंपनी के कुल ₹1,617.5 करोड़ के इश्यू में फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल हैं। कंपनी ₹885.5 करोड़ मूल्य के नए शेयर जारी करेगी। साथ ही मौजूदा निवेशक और प्रमोटर्स जैसे- Lightrock, Tribe Capital, Moore Strategic Ventures, साहिल गोयल, गौतम कपूर आदि ₹732 करोड़ के शेयर बेचेंगे। कंपनी ने अपने कर्मचारियों को अंतिम इश्यू प्राइस पर ₹9 प्रति शेयर की विशेष छूट दी है, जिनके लिए ₹1 करोड़ के शेयर आरक्षित रखे गए हैं।

आईपीओ से जुटाए पैसों का क्या करेगी कंपनी?

शिपरॉकेट नेट फ्रेश इश्यू से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल इस प्रकार करेगी:

₹365.6 करोड़: अपने प्लेटफॉर्म के विकास और विस्तार में खर्च करेगी।

₹210 करोड़: मौजूदा कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। (10 जुलाई 2026 तक कंपनी पर ₹244.5 करोड़ का कुल कर्ज था)।

बकाया राशि: अधिग्रहण और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए उपयोग होगी।

कैसी है कंपनी की वित्तीय सेहत?

कंपनी का प्रदर्शन रेवेन्यू के मामले में मजबूत रहा है। वित्त वर्ष 2026 (FY26) में कंपनी का रेवेन्यू साल-दर-साल (YoY) 24% बढ़कर ₹2,024.1 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि कंपनी अभी भी घाटे में है, लेकिन FY24 के ₹595.1 करोड़ के शुद्ध घाटे के मुकाबले FY26 में घाटा काफी घटकर ₹79.2 करोड़ रह गया है। इस आईपीओ के मर्चेंट बैंकर्स एक्सिस कैपिटल, बोफा सिक्योरिटीज इंडिया, जेएम फाइनेंशियल और कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Oneindig Tech IPO Listing: लिस्ट होते ही अपर सर्किट, 25% प्रीमियम पर एंट्री के बाद और चढ़ा ₹96 का शेयर

Oneindig Tech IPO Listing: देश भर में सोलर पावर प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाली वनइंडिग टेक के शेयरों की आज BSE SME प्लेटफॉर्म पर धांसू एंट्री हुई। इसका आईपीओ ओवरऑल 1.73 गुना भरा था। इसके आईपीओ के तहत ₹96 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹120.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 25% का लिस्टिंग गेन (Oneindig Tech Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह ₹126.00 (Oneindig Tech Share Price) के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 31.25% मुनाफे में हैं।

Oneindig Tech IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

वनइंडिग टेक का ₹28 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 30 जुलाई से 3 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 1.73 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.05 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 2.40 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.84 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 28.80 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹20.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Oneindig Tech के बारे में

वनइंडिंग टेक एक रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी है जो देश भर में सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्यूरमेंट एंड कमीशनिंग) सर्विसेज मुहैया कराती है। यह रेजिडेंशियल, C&I (कमर्शियल एंड इंडस्ट्रियल) रूफटॉप, ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट्स और O&M (ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस) सर्विसेज ऑफर करती है तो PPA (पावर पर्चेज एग्रीमेंट्स) के जरिए IPP (इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर) एक्टिविटीज करती है। साथ ही यह सोलर पीवी मॉड्यूल्स, इंवर्टर्स, बैट्रीज, एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स, माउंटिंग स्ट्रक्चर्स, सोलर पम्प्स, कंट्रोलर्स और इनसे जुड़े इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स जैसे सोलर प्रोडक्ट्स की सप्लाई करती है।

कंपनी ने दिल्ली, हरियाणा,यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों में सोलर प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2026 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 47.72% बढ़कर ₹6.16 करोड़ और टोटल इनकम 24.75% उछलकर ₹57.56 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी पर ₹1,559.13 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹1,006.52 करोड़ पड़े थे।

Juniper Green Energy IPO Listing: ₹245 पर लिस्ट ₹225 का शेयर, खुदरा निवेशकों का हिस्सा नहीं भरा था पूरा

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Som Pradosh Vrat 2026 Date: वज्र योग और आर्द्रा नक्षत्र में इस दिन किया जाएगा सावन का पहला प्रदोष व्रत, पूजा के लिए मिलेगा 2 घंटे का समय

Som Pradosh Vrat 2026 Date: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत हिंदू कैलेंडर के हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। यह तिथि भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इसमें प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद के पूजा करने का विधान है। हर माह में दो बार आने वाले इस व्रत का नाम उस दिन से तय होता है, जिस दिन त्रयोदशी तिथि पड़ती है। जैसे सोमवार को त्रयोदशी तिथि पड़ने पर इस व्रत का नाम सोम प्रदोष व्रत होता है और शनिवार को त्रयोदशी तिथि पड़ने पर इसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं।

यूं तो पूरा सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है, लेकिन सावन के प्रदोष व्रत का विशेष स्थान है। सावन माह में हर दिन शिव पूजा के लिए अच्छा होता है, लेकिन सावन में प्रदोष व्रत विशेष फलदायी होता है। पंचांग के अनुसार, सावन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सोमवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। सावन के पहले प्रदोष व्रत के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त 2 घंटे तक है। इस समय में जलाभिषेक और पूजा विधि विधान से करना शुभ फलदायी होगा।

सावन प्रदोष व्रत 2026 तारीख

पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त को सुबह 08:00 बजे से शुरू होगी। इस तिथि का समापन 11 अगस्त को प्रात: 04 बजकर 54 मिनट पर होगा। ऐसे में सावन का पहला प्रदोष व्रत या सोम प्रदोष व्रत 10 अगस्त को किया जाएगा।

सोम प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त

सोम प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त दो घंटे का है, शाम को 07 बजकर 05 मिनट से है और यह रात 09 बजकर 14 मिनट तक। इस समय में पूजा करना शुभ फलदायी होता है।

ब्रह्म मुहूर्त : प्रात:काल 04:22 बजे से प्रात: 05:05 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक

राहुकाल : सुबह 07:27 बजे से सुबह 09:07 बजे तक

वज्र योग और आर्द्रा नक्षत्र में सोम प्रदोष

सावन के पहले प्रदोष व्रत यानी सोम प्रदोष व्रत के दिन वज्र योग और आर्द्रा नक्षत्र लग रहा है। प्रदोष पर वज्र योग प्रात:काल से लेकर रात 10 बजकर 27 मिनट तक रहेगा, उसके बाद से सिद्धि योग बनेगा, जो अगले दिन सुबह तक रहेगा। वहीं, उस दिन आर्द्रा नक्षत्र सुबह से लेकर दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक है, उसके बाद से पुनर्वसु नक्षत्र है।

त्रयोदशी तिथि के बाद भद्रा

त्रयोदशी तिथि के समापन के बाद यानि 11 अगस्त को प्रात: 04 बजकर 54 मिनट भद्रा का प्रारंभ होगा, जो प्रात: 05 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। इस भद्रा का वास धरती पर है, इस वजह से भद्रा में कोई शुभ काम न करें।

सोम प्रदोष व्रत का महत्व

सोम प्रदोष व्रत में शिव पूजा करने से सुख, समृद्धि, मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। कुंडली का चंद्र दोष भी दूर होता है। वैवाहिक जीवन सुखमय होता है, सेहत ठीक रहती है।

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रांची JPSC-JSSC धांधली, वांगचुक की अपील पर देवेन्द्र ने तोड़ा अनशन, जानिए कौन हैं छात्र नेता महतो

Devendra Nath Mahato Protest

Devendra Nath Mahato Protest: राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और धांधली के खिलाफ पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर हुई बातचीत और उनकी अपील के बाद देवेंद्र ने अन्न-जल ग्रहण किया। हालांकि, अनशन समाप्त होने के बावजूद छात्रों का आंदोलन जारी है। इस बीच, खबर है कि सीजेपी नेता अभिजीत दीपके भी रांची पहुंचने वाले हैं। 

 

झारखंड की राजधानी रांची में राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षा प्रणालियों में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका है। बुधवार को लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से देवेंद्र महतो से बात की। वार्ता के दौरान वांगचुक ने आंदोलन के मुद्दों पर चर्चा की और देवेंद्र की लगातार गिरती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उनसे अनशन वापस लेने का आग्रह किया। 

 

सोनम वांगचुक की अपील और छात्रों के भारी दबाव के बाद देवेंद्र महतो ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। लगातार चार दिनों के उपवास के कारण उनकी स्थिति बिगड़ रही थी। रांची सदर अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल काफी घट गया था, साथ ही वे गंभीर डिहाइड्रेशन और थकान से जूझ रहे थे। ALSO READ: CJP Protest : हिंसा करने वालों पर दिल्ली पुलिस का एक्शन, रद्द हो सकते हैं पासपोर्ट, CCTV से हो रही पहचान, सीजेपी का कल देशभर में आंदोलन का ऐलान

विवाद का पूरा घटनाक्रम

इस पूरे आंदोलन की शुरुआत बीती 2 जुलाई को जेपीएससी 14वीं की प्रारंभिक परीक्षा (PT) का परिणाम आने के बाद हुई। मुख्य परीक्षा के लिए कुल 2204 अभ्यर्थियों को योग्य घोषित किया गया था और परीक्षा की तिथि 18 से 20 जुलाई तय की गई थी। लेकिन परिणाम जारी होते ही धांधली के आरोप लगने शुरू हो गए। रिजल्ट में कैटेगरी-वाइज कट-ऑफ जारी नहीं किया गया। इसके अलावा जारी परिणाम पत्र पर जेपीएससी अध्यक्ष, सचिव या किसी सदस्य के हस्ताक्षर नहीं थे।

क्या है छात्रों की मांग? 

सोशल मीडिया पर एक अभ्यर्थी की OMR शीट वायरल हुई, जिसमें केवल 48 प्रश्न हल करने के बावजूद उसे मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था। व्यापक विरोध के बाद मुख्य परीक्षा को तो रद्द कर दिया गया, लेकिन छात्र इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं। अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि पेपर लीक किए गए और सीटें बेची गईं। छात्रों ने सीआईडी (CID) जांच को नकारते हुए पूरे मामले की जांच ईडी (ED) या सीबीआई (CBI) से कराने की मांग की है। ALSO READ: बड़ा धमाका! अब यूपी के भाजपा नेता की बेटी ने किया CJP का समर्थन, जानिए कौन हैं यशस्विनी राजे सिंह?

आंदोलन का बढ़ता दायरा, दीपके भी जाएंगे रांची

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) से जुड़े देवेंद्र महतो ने 25 जुलाई को मोराबादी मैदान में गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना शुरू किया था। शुरुआती दिनों में कम संख्या के बावजूद सोशल मीडिया के जरिए छात्रों का भारी समर्थन मिला। खबर है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके भी आंदोलनकारियों को समर्थन देने के लिए रांची जाएंगे। 

कौन हैं छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो?

झारखंड के छात्र आंदोलनों का एक प्रमुख चेहरा बन चुके देवेंद्र नाथ महतो का जीवन संघर्षों और सार्वजनिक मुद्दों से भरा रहा है। देवेंद्र रांची जिले के राहे प्रखंड स्थित कापीडीह गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता विशंभर महतो एक सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक हैं। देवेंद्र ने साल 2006 में मैट्रिक, 2008 में साइंस से इंटरमीडिएट, 2017 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक और बाद में कुरमाली भाषा में स्नातकोत्तर (PG) व B.Ed की डिग्री हासिल की। 

 

कॉलेज के दिनों से ही छात्र हित के मुद्दों पर मुखर रहे महतो ने 2015 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार की नियोजन नीति का विरोध किया। 2016 में छात्रवृत्ति में कटौती के खिलाफ सड़क पर उतरे।

 

छात्र आंदोलनों के कारण जेल में रहने के बावजूद उन्होंने रांची सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा और 1.48 लाख वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे। सिल्ली विधानसभा सीट से JLKM प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर 44 हजार वोट प्राप्त किए और पुनः तीसरे स्थान पर रहे। छात्रों की मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत रहने के कारण देवेंद्र महतो पर वर्तमान में 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

Surya Grahan 2026: साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण होगा इस दिन, जानें सूतक काल का समय और प्रभाव

Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण एक सामान्य लेकिन दिलचस्प खगोलीय घटना है। निश्चित अंतराल पर जब भी धरती, चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में आते हैं, तब सूर्य और चंद्र ग्रहण लगते हैं। ग्रहण विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों का आधार भी बनते हैं, तो तीनों खगोलीय पिंडों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने का मौका भी देते हैं। विज्ञान के साथ-साथ इसके गहरे धार्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव माने जाते हैं।

हिंदू धर्म में ग्रहण को अशुभ समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियां प्रभावी रहती हैं, इसलिए इस समय कोई शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। हर साल की तरह इस साल भी दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण लगेंगे। इनमें से पहला सूर्य और चंद्र ग्रहण फरवरी-मार्च में हो चुका है। इसके अब दूसरा और अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण अगस्त के महीने में लगेगा। इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण हरियाली अमावस्या के दिन कर्क राशि में लगेगा।

अगस्त 2026 में दूसरा सूर्य ग्रहण

साल 2026 का दूसरा और आखिरी सू्र्य ग्रहण 12 अगस्त हरियाली अमावस्या के मौके पर लगेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में इसका सूतक काल नहीं माना जाएगा। भारतीय समयानुसार, ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा।

कर्क राशि वाले रहें सतर्क

यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में लगने जा रहा है। इसलिए इस राशि पर इसका सबसे ज्यादा फर्क पड़ेगा। इस राशि के जातकों को सेहत, मानसिक तनाव और धन से जुड़ी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव कर्क राशि पर 12 अगस्त से 15 दिन पहले और 15 दिन बाद तक बना रहेगा। सभी 12 राशियों पर इसका कुछ न कुछ प्रभाव जरूर पड़ेगा।

किन-किन देशों में दिखाई देगा ग्रहण?

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर, आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी स्पेन में देखा जाएगा। साथ ही फ्रांस, ब्रिटेन, इटली सहित यूरोप के कई देशों में भी यह आंशिक रूप से नजर आने वाला है।

ग्रहण काल में अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय?

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

ग्रहण काल के बाद पूजा-पाठ और इच्छा के अनुसार दान करना चाहिए।

ग्रहण काल के बाद नहाना चाहिए और शिवलिंग पर जला अर्पित करना चाहिए।

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Crude Oil Price: क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट, अचानक प्राइस गिरने की वजह क्या है?

क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक तेज गिरावट आई। भारतीय समय के मुताबिक, 4 बजे के करीब ब्रेंट क्रूड 2.23 फीसदी गिरकर 81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड तो एक समय 3 फीसदी से ज्यादा गिर गया था। शाम करीब 6 बजे यह 2.84 फीसदी की गिरावट के साथ 78 डॉलर प्रति बैरल था।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर जल्द समझौते की उम्मीद

क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक गिरावट की वजह अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का बयान है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर बहुत जल्द यहां तक कि मंगलवार या बुधवार को समझौता हो सकता है। अगर दोनों देशों के बीच यह समझौता हो जाता है तो क्रूड की कीमतों पर इसका बड़ा असर पड़ेगा।

अमेरिका और ईरान में समझौते के लिए बातचीत जारी

सीएनबीसी से बातचीत में बेसेंट ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही जल्द शुरू हो जाने की उम्मीद जताई। यह पूछने पर कि क्या प्रस्तावित समझौते से ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का इस्तेमाल करने वाले जहाजों से टोल वसूलने का अधिकार मिल जाएगा, उन्होंने कहा कि अमेरिका का भरोसा आवाजाही की आजादी में है।

पहले भी अमेरिका और ईरान में समझौते की कोशिशें हो चुकी हैं

बेसेंट के इस बयान से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार कहा है कि दोनों देशों के बीच मामले के हल के लिए कूटनीतिक स्तर पर कोशिशें जारी हैं। हालांकि, ईरान ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका से किसी तरह की सीधी बातचीत से इनकार किया है। इससे पहले भी दोनों देशों के बीच समझौते की कई कोशिशें हो चुकी हैं। लेकिन, उनका कोई नतीजा नहीं निकला।

छह महीने मध्यपूर्व में जारी लड़ाई से क्रूड की कीमतों में उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई 28 फरवरी को हुई थी। इसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान में पहुंच गईं। हालांकि, 120 डॉलर प्रति बैरल तक जाने के बाद कीमतों में नरमी आई हैं। इसके बावजूद ये लड़ाई से पहले के अपने लेवल से काफी ऊपर हैं। क्रूड की ऊंची कीमतें भारत के लिए अच्छा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड में उछाल से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा चुकी हैं।

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहने से ऑयल की सप्लाई पर पड़ सकता है असर

भारत क्रूड की अपनी 90 फीसदी जरूरत इंपोर्ट करता है। क्रूड महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ जाता है। लंबे समय तक क्रूड के हाई लेवल पर रहने का काफी खराब असर सरकार की सेहत पर पड़ेगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मजु के रास्ते जहाजों की आवाजाही नहीं होने से भारत में क्रूड की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है।

आपके पेट डॉग के लिए 67 मिनट की वॉक और 16 बार स्निफ जरूरी! सिर्फ 10 मिनट टहलाकर लाने वाले जान लें ये बात

आज के समय में बहुत से लोग अपने घर में कुत्ता पाल रहे हैं। कई लोग अपने पेट को सिर्फ पालतू जानवर नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। लेकिन कुत्ता पालना सिर्फ खाना देने और उसकी देखभाल करने तक ही सीमित नहीं है। कुत्ते को रोज बाहर घुमाना और खेलने का समय देना भी उसकी अच्छी सेहत के लिए बहुत जरूरी है। वहीं अक्सर आपने देखा होगा टहलते समय आपका कुत्ता बार-बार रुककर आसपास की चीजों को सूंघता है, पानी में खेलने की कोशिश करता है या दूसरे कुत्तों के पास जाने लगता है। कई लोगों को यह बेवजह रुकना लग सकता है, लेकिन कुत्तों के लिए यही सैर का सबसे मजेदार हिस्सा होता है। वे सूंघकर अपने आसपास की नई-नई चीजों को पहचानते हैं और इसी तरह बाहर घूमने का आनंद लेते हैं।

अगर आप अपने कुत्ते को मात्र 10 मिनट में टहलाकर वापस ले जाते हैं तो ये खबर आपके लिए हैं। हाल ही में हुए एक सर्वे में बताया गया है कि, कुत्तों के लिए 67 मिनट की सैर बेहतर मानी जाती है। आइए जानते हैं इसके बारे में

कुत्तों के लिए कितने मिनट का सैर बेहतर

हाल ही में सामने आए एक सर्वे में पता चला कि, कुत्तों के लिए अच्छी सैर सिर्फ चलना नहीं, बल्कि नई-नई चीजों को महसूस करना भी होती है। ब्रिटेन में 1,800 डॉग ओनर्स पर किए गए इस सर्वे के मुताबिक, एक कुत्ते के लिए करीब 67 मिनट की सैर सबसे बेहतर मानी गई। इस दौरान उसे अलग-अलग जगहों को सूंघने, खुली जगह में घूमने, पानी में खेलने और रास्ते में दूसरे कुत्तों से मिलने-जुलने का भी मौका मिलना चाहिए। ये जानकारी भारत के लिए काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि देश में खासकर बड़े शहरों में पालतू कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

कुत्ते को टहलाना मेंटल एक्सरसाइज

इंसान अपने आसपास की दुनिया को समझने के लिए सबसे ज्यादा आंखों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि कुत्ते अपनी नाक के जरिए चीजों को पहचानते और समझते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, कुत्तों की सूंघने की क्षमता इंसानों से कहीं अधिक तेज होती है। इसी वजह से वे सिर्फ गंध के आधार पर दूसरे जानवरों, लोगों और अपने आसपास के माहौल के बारे में कई तरह की जानकारी हासिल कर लेते हैं। उनके लिए पेड़, घास या रास्ते में मौजूद दूसरी चीजें सिर्फ सामान नहीं, बल्कि जानकारी का एक अहम स्रोत होती हैं। इसीलिए बिहेवियरिस्ट अक्सर वॉक को सिर्फ फिजिकल एक्टिविटी के बजाय “मेंटल एक्सरसाइज़” बताते हैं।

कुत्तों को टहलाना जरुरी

आजकल शहरों में रहने वाले कई पालतू कुत्ते सिर्फ थोड़ी देर के लिए ही बाहर घूम पाते हैं। ज्यादातर लोग उन्हें अपार्टमेंट या सोसाइटी के आसपास कुछ मिनट ही टहलाते हैं। ऐसे में कुत्तों को नई जगह देखने, चीजों को सूंघने और खुलकर घूमने का मौका नहीं मिल पाता। जानकारों का कहना है कि अगर कुत्तों को लंबे समय तक ऐसा मौका न मिले, तो वे बोर हो सकते हैं, ज्यादा भौंक सकते हैं, सामान चबा सकते हैं और बेचैन रहने लगते हैं। फिली पॉज क्लॉज़ के अनुसार, जिन कुत्तों को “लगातार एक्सरसाइज़ मिलती है, उन्हें ट्रेन करना आसान होता है और वे कमांड पर ज़्यादा रिस्पॉन्सिव होते हैं।”

आजकल ट्रेंड बन गया है कुत्ता पालना

पिछले कुछ सालों में लोगों का पालतू जानवरों को देखने का नजरिया काफी बदल गया है। अब ज्यादातर लोग उन्हें परिवार का हिस्सा मानते हैं और उनकी अच्छी देखभाल करते हैं। बढ़ती कमाई, छोटे परिवार और शहरों में रहने के कारण खासकर युवा बड़ी संख्या में कुत्ते पाल रहे हैं। लेकिन कुत्ता पालना सिर्फ उसे खाना खिलाने, नहलाने और टीका लगवाने तक ही सीमित नहीं है। उसे रोज बाहर घुमाना, नई जगहों को सूंघने और अपनी मर्जी से थोड़ा घूमने का मौका देना भी उसकी अच्छी सेहत और खुशी के लिए बहुत जरूरी है।