Stock in Focus: सरकारी कंपनी को ₹3244 करोड़ का प्रोजेक्ट, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: सरकारी कंपनी Power Grid Corporation of India Ltd ने राजस्थान के रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट से बिजली निकालने के लिए बड़ा ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट हासिल किया है। कंपनी को राजस्थान के बाड़मेर कॉम्प्लेक्स से 6 GW सोलर पावर ट्रांसमिशन के लिए सफल बोलीदाता चुना गया है।

यह प्रोजेक्ट टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग के तहत मिला है। कंपनी ने इसके लिए ₹3,244.33 करोड़ सालाना ट्रांसमिशन चार्ज की बोली लगाई है। POWERGRID को 2 सितंबर 2026 को लेटर ऑफ इंटेंट of Intent मिला है।

1,000 किमी लंबी HVDC लाइन बनेगी

प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान के बाड़मेर-II में 6,000 MW की HVDC टर्मिनल स्थापित की जाएगी। महाराष्ट्र के साउथ कलांब में भी टर्मिनल बनेगी। दोनों जगहों पर ±800 kV HVDC सिस्टम लगाया जाएगा।

बाड़मेर-II से साउथ कलांब के बीच करीब 1,000 किमी लंबी ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी। यह राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगी।

इसके अलावा राजस्थान में 400 kV की ट्रांसमिशन लाइन, जरूरी बे और दूसरे उपकरण भी लगाए जाएंगे। बाड़मेर-II पावर स्टेशन पर दो SynCon यूनिट भी स्थापित की जाएंगी।

BOOT मॉडल पर बनेगा प्रोजेक्ट

यह प्रोजेक्ट Build, Own, Operate and Transfer यानी BOOT मॉडल पर विकसित होगा। इसके तहत कंपनी प्रोजेक्ट बनाएगी, चलाएगी और तय अवधि के बाद इसे ट्रांसफर किया जाएगा।

हाल में गुजरात का भी प्रोजेक्ट मिला

पिछले महीने भी POWERGRID को गुजरात में रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांसमिशन का बड़ा प्रोजेक्ट मिला था। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी ने ₹822.91 करोड़ सालाना ट्रांसमिशन टैरिफ की बोली लगाई थी।

बुधवार को Power Grid Corporation का शेयर NSE पर 1.23% की तेजी के साथ ₹267.80 पर बंद हुआ।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rhetan TMT ने 1 MW कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट शुरू किया, ऊर्जा लागत घटाने पर फोकस

अहमदाबाद की TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT Ltd ने गुजरात के कडी स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1 मेगावाट का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट चालू कर दिया है। कंपनी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट अब अपनी जरूरत के लिए रिन्यूएबल बिजली पैदा कर रहा है। इससे कंपनी के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूती मिलेगी।

ऊर्जा लागत घटाने की तैयारी

कंपनी के मुताबिक उसकी कुल लागत में ऊर्जा का हिस्सा करीब 20% है। ऐसे में कैप्टिव सोलर पावर से लंबे समय में ऑपरेशनल क्षमता बढ़ने और लागत घटने की उम्मीद है। इससे कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बेहतर हो सकती है।

BIS सर्टिफिकेशन से बढ़ी पहुंच

Rhetan TMT ने Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के TMT बार के लिए Bureau of Indian Standards (BIS) सर्टिफिकेशन भी हासिल किया है। इससे कंपनी अब देशभर में सरकारी और PSU इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए इन प्रीमियम ग्रेड बार की सप्लाई कर सकेगी। कंपनी का मानना है कि इससे हाई-वैल्यू मार्केट में उसकी मौजूदगी मजबूत होगी।

मैनेजमेंट ने क्या कहा

Rhetan TMT के मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि 1 मेगावाट का कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट कंपनी की ऊर्जा लागत पर बेहतर नियंत्रण देने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने कहा कि BIS सर्टिफिकेशन मिलने से कंपनी की उच्च मूल्य वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भागीदारी की क्षमता भी बढ़ी है। यह दोनों पहल कंपनी की भविष्य की ग्रोथ के लिए मजबूत आधार तैयार करेंगी।

आगे की रणनीति

कंपनी ने कहा कि वह कैप्टिव रिन्यूएबल पावर और प्रीमियम ग्रेड TMT प्रोडक्ट्स के जरिए अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रही है। साथ ही भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर की बढ़ती जरूरतों के मुताबिक अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

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मारुति सुजुकी 4 बायोगैस प्लांट बनाएगी, ₹561 करोड़ के निवेश से किसानों को भी फायदा होगा

Maruti Suzuki Biogas Plant: देश की सबसे बड़ी पैसेंजर व्हीकल कंपनी मारुति सुजुकी अब बायोगैस पर बड़ा दांव लगाने जा रही है। कंपनी 561 करोड़ रुपये के निवेश से पहले चरण में 4 बायोगैस प्लांट लगाएगी। इसका मकसद अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में स्वच्छ और रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाना है।

खारखोदा प्लांट से होगी शुरुआत

पहले चरण में हरियाणा के खारखोदा प्लांट में 10 टन प्रतिदिन (10 TPD) क्षमता का बायोगैस प्लांट लगाया जाएगा। इसके FY27 में शुरू होने की उम्मीद है। पूरी क्षमता पर पहुंचने के बाद यह प्लांट फैक्ट्री की करीब 20% गैस जरूरत पूरी करेगा।

कंपनी ने मानेसर प्लांट में भी बायोगैस क्षमता 0.2 TPD से बढ़ाकर 0.7 TPD कर दी है। यहां से हर साल करीब 3.6 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर बायोगैस बनने की उम्मीद है। इस प्लांट में खाने का बचा हुआ कचरा, नेपियर घास और धान का पुआल इस्तेमाल होता है। जरूरत पड़ने पर गोबर भी मिलाया जा सकता है।

FY31 तक बड़ा लक्ष्य

मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर. सी. भार्गव ने कहा कि पहले चरण में चार बायोगैस प्लांट लगाए जाएंगे। इसके बाद तकनीक और अनुभव के आधार पर इस क्षेत्र में और बड़ा निवेश किया जाएगा।

कंपनी का लक्ष्य FY31 तक हर दिन 20 टन से ज्यादा बायोगैस का इस्तेमाल करना है। कंपनी ने हंसलपुर प्लांट में भी प्राकृतिक गैस की जगह करीब 10% ऊर्जा जरूरत बायोगैस से पूरी करनी शुरू कर दी है।

किसानों को भी होगा फायदा

आर. सी. भार्गव का कहना है कि भारत को नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने के लिए कई तरह की तकनीकों की जरूरत होगी। बायोगैस स्थानीय संसाधनों से बनाई जा सकती है। इससे आयातित CNG पर निर्भरता कम होगी। साथ ही यह पूरी तरह स्वच्छ ईंधन है।

उन्होंने कहा कि बायोगैस बनाने के बाद बचने वाली जैविक खाद खेतों की उपज बढ़ाने में मदद करेगी। इससे मिट्टी की गुणवत्ता भी सुधरेगी। फसल जलाने की जरूरत कम होगी। प्रदूषण घटेगा। किसानों की आय बढ़ेगी। खेती में मशीनों का इस्तेमाल भी बढ़ेगा।

सरकार भी दे रही है बढ़ावा

Maruti Suzuki पिछले दो साल से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा के साथ इस क्षेत्र में काम कर रही है। कंपनी का कहना है कि शुरुआती नतीजे उत्साहजनक रहे हैं।

इसी बीच केंद्र सरकार ने 6 अगस्त को GOBARdhan योजना को मंजूरी दी है। 23,731 करोड़ रुपये की यह योजना FY27 से FY36 तक चलेगी। इसका मकसद गोबर, कृषि अवशेष, जैविक कचरे और दूसरे बायोमास से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाना है। इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण इलाकों में आय के नए अवसर भी बनेंगे।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

23731 करोड़ की गोबरधन स्कीम को मिली मंजूरी, जानिए इससे किसानों के लिए इनकम के कौन-कौन से नए रास्ते खुलेंगे

GOBARdhan Scheme Explained: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के लिए भारत की नेशनल यूनिफाइड स्कीम गोबरधन (GOBARdhan – National Circular Bioenergy Scheme) को हरी झंडी दे दी है। सरकार ने इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय योजना के लिए 23731 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में जैविक संसाधनों यानी पराली, गोबर और दूसरे कचरे को साफ-सुथरी ऊर्जा, ग्रामीण समृद्धि और आर्थिक विकास में बदलना है। इस योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक लागू किया जाएगा। योजनी के माध्यम से ग्रामीण इलाके के कचरे को ही भारत की तरक्की का ईंधन बनाने की तैयार है। सरकार की कोशिश रहेगी कि इस स्कीम से गांव क्लीन एनर्जी प्रोडकेशन के केंद्र बनेंगे और देश की ऊर्जा सुरक्षा में सीधे भागीदार बनेंगे।

किसानों की आमदनी के खुलेंगे कई नए रास्ते

गोवर्धन योजना देश के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए कमाई के नए मौके लेकर आएगी। अक्सर किसानों के लिए सिरदर्द बनने वाली पराली (फसल अवशेष) और मवेशियों का गोबर अब उनकी अतिरिक्त कमाई का जरिया बनेंगे। इस योजना के माध्यम से किसान, ग्रामीण उद्यमी और सहकारी समितियां (कोऑपरेटिव्स) कचरा और बायोमास जुटाने का काम करके अच्छी इनकम कर सकेंगे। इसके अलावा सीबीजी प्लांट में गैस बनने के बाद निकलने वाली जैविक खाद के उत्पादन और बिक्री से भी किसानों को बड़ा फायदा होगा। इससे न सिर्फ केमिकल फर्टिलाइजर्स पर उनकी निर्भरता और खेती की लागत घटेगी बल्कि जैविक खाद बेचकर कमाई का एक नया रास्ता भी खुलेगा।

सीबीजी उत्पादन में 10 गुना तक होगी बढ़ोतरी

सरकार की इस पहल का लक्ष्य देश में घरेलू स्तर पर CBG के उत्पादन को करीब 10 गुना तक बढ़ाना है। इससे भारत की आयातित फॉसिल फ्यूल (पेट्रोल-डीजल और गैस) पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा बेहद मजबूत होगी। केमिकली सीबीजी पूरी तरह से प्राकृतिक गैस जैसी होती है और इसे मौजूदा गैस पाइपलाइन नेटवर्क में आसानी से मिलाया जा सकता है। यह योजना पूरे सीबीजी सेक्टर को एक राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए तैयार की गई है।

गोवर्धन योजना के 6 मेन ग्रोथ इंजन क्या हैं?

योजना को सुचारू और सफल बनाने के लिए सरकार ने छह मेन ग्रोथ इंजन निर्धारित किए हैं-

1 – निश्चित सीबीजी खरीद की गारंटी: उत्पादकों को अपनी तैयार गैस बेचने में कोई दिक्कत न आए इसके लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के माध्यम से खरीद तय की गई है। सीएनजी और पीएनजी में सीबीजी मिलावट का लक्ष्य 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत रखा गया है।

2 – स्टेबल प्राइसिंग प्रेमवर्क: सीबीजी उत्पादकों को आर्थिक स्थिरता देने के लिए 2110 रुपये प्रति MMBTU की दर से एक स्थिर मूल्य तय किया गया है। यह कम से कम 10 साल के लिए फिक्स रहेगा। इससे उत्पादकों को लंबे समय तक बेहतर कमाई की गारंटी मिलेगी।

3 – कैपिटल असिस्टेंस: नए सीबीजी प्रोजेक्ट्स को हर दिन 1 टन क्षमता (1 TPD) पर 2 करोड़ रुपये तक की सरकारी मदद दी जाएगी। यह मदद प्लांट की मशीनों के अलावा बायोमास इकट्ठा करने और जैविक खाद बनाने से जुड़े उपकरणों के लिए भी मिलेगी।

4 – पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास: सीबीजी प्लांटों को मुख्य गैस पाइपलाइनों और सिटी गैस नेटवर्क से जोड़ने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च घटेगा और बिक्री आसान होगी।

5 – क्रेडिट गारंटी सपोर्ट: एमएसएमई, महिला उद्यमियों और नए डेवलपर्स को बैंकों से आसानी से सस्ता लोन दिलाने के लिए एक विशेष क्रेडिट गारंटी मैकेनिज्म बनाया गया है।

6- इकोसिस्टम चैलेंज फंड: जिला स्तर पर योजना को बेहतर ढंग से लागू करने, कचरा इकट्ठा करने के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और नई तकनीक को अपनाने के लिए यह फंड बनाया गया है।

पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम

पिछले कुछ सालों में सतत (SATAT) पहल और दूसरी योजनाओं के तहत देश में 200 से अधिक सीबीजी प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। अब नई यूनिफाइड ‘गोवर्धन’ योजना पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित की जाएगी। इससे फैसले जल्दी होंगे और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। यह योजना वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन करके ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करेगी। सरकार का दावा है कि कृषि अवशेषों, गोबर और नगरपालिका के जैविक कचरे का सही इस्तेमाल करके यह योजना वेस्ट-टू-वेल्थ और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी

PM Surya Ghar Yojana: रूफटॉप सोलर योजना 50 लाख घरों तक पहुंची, टाटा पावर समेत इन 3 शेयरों पर रखें नजर

PM Surya Ghar Yojana: प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत देश में अब तक 50.06 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इससे रूफटॉप सोलर लगाने, फाइनेंसिंग करने और सोलर मॉड्यूल बनाने वाली कंपनियों के लिए बड़ा बाजार तैयार हो रहा है। इस वजह से Tata Power, Waaree Energies और Premier Energies जैसे शेयर निवेशकों के रडार पर हैं।

Tata Power

टाटा ग्रुप की Tata Power सोलर वैल्यू चेन के लगभग हर हिस्से में मौजूद है। कंपनी सोलर सेल और मॉड्यूल बनाती है, रूफटॉप सोलर इंस्टॉल करती है और फाइनेंसिंग की सुविधा भी देती है। टाटा पावर को लेकर अधिकांश ब्रोकरेज हाउस भी बुलिश हैं। मोतीलाल ओसवाल, इलारा कैपिटल और एम्बिट ने टाटा पावर को खरीदने की सलाह दी है।

वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने 1.7 गीगावॉट पीक (GWp) रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की। 2.2 लाख से ज्यादा घरों तक पहुंच बनाई और कुल रेजिडेंशियल ग्राहकों की संख्या 3 लाख के पार पहुंच गई। हालांकि, रूफटॉप सोलर कंपनी के कुल कारोबार का सिर्फ एक हिस्सा है। इसलिए इसका असर पूरे बिजनेस में बंट जाता है।

Waaree Energies

सोलर मॉड्यूल निर्माता Waaree Energies सोलर सेक्टर की सबसे बड़ी खिलाड़ी है। इसने जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी की रेवेन्यू 79.2% बढ़कर 7,932 करोड़ रुपये रही। EBITDA 44.4% बढ़कर 1,440 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 15.4% बढ़कर 892 करोड़ रुपये हो गया। 28 जुलाई 2026 तक कंपनी की ऑर्डर बुक 61,500 करोड़ रुपये पर पहुंच गई थी।

Premier Energies

प्रीमियर एनर्जीज ने भी PM Surya Ghar Yojana को अपने लिए बड़ा ग्रोथ ड्राइवर बताया है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी की ऑर्डर बुक 14,010 करोड़ रुपये थी। पहली तिमाही में उसे 3,011 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले। कंपनी 6 अगस्त को जून तिमाही के नतीजे जारी करेगी।

निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

Tata Power के लिए रिन्यूएबल क्षमता में बढ़ोतरी, रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन, बैटरी स्टोरेज और मुंद्रा प्रोजेक्ट से जुड़े घटनाक्रम अहम रहेंगे। वहीं, Waaree Energies और Premier Energies जैसी कंपनियों के लिए ऑर्डर बुक, मांग, क्षमता उपयोग और प्राइसिंग आने वाले समय में सबसे बड़े ट्रिगर होंगे।

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Suzlon Q1 Results: सुजलॉन एनर्जी का मुनाफा गिरा, मार्जिन भी घटा; 7% टूटा स्टॉक

Suzlon Q1 Results: विंड एनर्जी कंपनी सुजलॉन एनर्जी के जून तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 6% घटकर ₹305 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹324 करोड़ था। हालांकि, रेवेन्यू 22% बढ़कर ₹3,829 करोड़ पहुंच गया।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन कैसा रहा?

सुजलॉन का EBITDA ₹595 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹599 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 19% से घटकर 15.5% पर आ गया। यानी कंपनी की ऑपरेटिंग कमाई पर दबाव दिखा।

किस कारोबार से कितनी कमाई

रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस कारोबार का रेवेन्यू ₹2,494 करोड़ से बढ़कर ₹3,174 करोड़ हो गया। रिन्यूएबल एनर्जी एसेट मैनेजमेंट सर्विसेज का रेवेन्यू ₹632 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹584 करोड़ था। हालांकि, फाउंड्री और फोर्जिंग कारोबार का रेवेन्यू ₹146 करोड़ से घटकर ₹126 करोड़ रह गया।

ऑर्डर बुक और डिलीवरी

जून तिमाही में सुजलॉन ने 506 मेगावाट की डिलीवरी की। यह पिछले साल से 14% ज्यादा है। वहीं, 269 मेगावाट की कमिशनिंग हुई, जो सालाना आधार पर दोगुने से भी ज्यादा है। तिमाही के अंत तक कंपनी की ऑर्डर बुक 6.1 गीगावाट (GW) रही। इसमें 84% ऑर्डर सरकारी कंपनियों और कमर्शियल एंड इंडस्ट्रियल (C&I) सेक्टर से मिले हैं।

सुजलॉन के शेयरों का हाल

कमजोर नतीजों के बाद मंगलवार को सुजलॉन एनर्जी का शेयर करीब 7% गिरकर 50 रुपये से नीचे आ गया। दोपहर 2.16 बजे तक सुजलॉन का स्टॉक 49.69 % गिरकर 49.69 रुपये पर कारोबार कर रहा था। इस गिरावट के साथ 2026 में अब तक स्टॉक का रिटर्न भी निगेटिव हो गया है। पिछले 1 साल में स्टॉक में 17.81% की गिरावट आई है।

सुजलॉन का बिजनेस क्या है

सुजलॉन एनर्जी विंड एनर्जी सेक्टर की कंपनी है। यह विंड टरबाइन बनाती है और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सप्लाई, इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस की सेवाएं देती है। कंपनी EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन), रिन्यूएबल एनर्जी एसेट मैनेजमेंट और फाउंड्री-फोर्जिंग कारोबार में भी मौजूद है। इसका कारोबार भारत के साथ कई विदेशी बाजारों में भी फैला हुआ है।

Coforge Share Price: कोफोर्ज का शेयर बना रॉकेट, जून तिमाही के नतीजों का असर

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Tata Power Q1 Results: टाटा की कंपनी को ₹1401 करोड़ मुनाफा, शेयरों में दिख सकती है हलचल

Tata Power Q1 Results: टाटा पावर ने जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 11% बढ़कर ₹1,401 करोड़ रहा। CNBC-TV18 के पोल में इसका अनुमान ₹1,185 करोड़ था। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 5.6% बढ़कर ₹19,051 करोड़ पहुंच गया। यह भी अनुमान ₹18,657 करोड़ से ज्यादा रहा।

कंपनी का EBITDA ₹4,013 करोड़ रहा। यह भी अनुमान से बेहतर है। हालांकि, ऑपरेटिंग मार्जिन पिछले साल के 23% से घटकर 21.07% रह गया।

रिन्यूएबल एनर्जी सबसे बड़ा सहारा

टाटा पावर ने कहा कि इस तिमाही में उसकी ग्रोथ का सबसे बड़ा आधार रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन और जनरेशन कारोबार रहे। तिमाही के दौरान कंपनी की कुल नई क्षमता में 86% हिस्सेदारी क्लीन एनर्जी की रही। इसी दौरान देश में बिजली की मांग भी सालाना आधार पर 8.5% बढ़ी।

कंपनी ने इस तिमाही में ₹5,375 करोड़ का पूंजीगत निवेश (Capex) किया। यह अब तक का उसका सबसे बड़ा तिमाही निवेश है।

रूफटॉप सोलर में शानदार प्रदर्शन

रूफटॉप सोलर कारोबार ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। कंपनी ने तिमाही के दौरान 371 MWp रूफटॉप सोलर इंस्टॉल किए। यह पिछले साल से 37% ज्यादा है। वहीं, सार्वजनिक और बस ईवी चार्जिंग नेटवर्क बढ़कर 7,200 से ज्यादा चार्जिंग पॉइंट तक पहुंच गया।

सोलर मैन्युफैक्चरिंग कारोबार भी दमदार रहा। कंपनी ने रिकॉर्ड 1,001 MW सोलर मॉड्यूल और 862 MW सोलर सेल का उत्पादन किया।

इस कारोबार का रेवेन्यू 53% बढ़कर ₹2,462 करोड़ पहुंच गया। EBITDA 113% उछलकर ₹626 करोड़ रहा। वहीं, PAT 287% बढ़कर ₹371 करोड़ हो गया। कंपनी ने बताया कि लागत कम होने और बिक्री के बेहतर मिश्रण से मुनाफे में तेज बढ़ोतरी हुई।

दूसरे कारोबारों से भी मिला सहारा

जनरेशन और कोल कारोबार को मुंबई प्लांट के बेहतर प्रदर्शन, मुंद्रा पावर से अतिरिक्त आय और हल्दिया प्लांट में बेहतर मार्जिन का फायदा मिला। इस क्लस्टर का मुनाफा 27% बढ़ा।

ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार में भी बेहतर रिटर्न और नई परियोजनाओं से आय बढ़ी। हालांकि, राजस्थान और गुजरात में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोडक्शन पर कुछ असर पड़ा। इसके बावजूद रूफटॉप सोलर और मैन्युफैक्चरिंग कारोबार ने इसकी भरपाई कर दी।

टाटा पावर का शेयर नतीजों से पहले सोमवार को 1.23% चढ़कर ₹379 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में इसने 8.99% का रिटर्न दिया है।

HUDCO Q1 Results: सरकारी कंपनी का मुनाफा 35% बढ़ा, डिविडेंड का भी ऐलान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: घाटे से ₹86 करोड़ के मुनाफे में लौटी सोलर कंपनी, शेयरों पर रहेगी नजर

Q1 Results: सोलर ग्लास बनाने वाली कंपनी Borosil Renewables ने जून तिमाही (Q1FY27) में शानदार वापसी की है। कंपनी का शुद्ध मुनाफा ₹86.8 करोड़ रहा। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी को ₹166.5 करोड़ का घाटा हुआ था।

रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रदर्शन मजबूत

जून तिमाही में बोरोसिल रिन्यूएबल्स का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 17.1% बढ़कर ₹405.7 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹346.6 करोड़ था। वहीं, EBITDA बढ़कर ₹127.2 करोड़ पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹63.1 करोड़ था।

कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 18.2% से बढ़कर 31.3% हो गया। इससे पता चलता है कि कंपनी की कमाई और लागत नियंत्रण दोनों में सुधार हुआ है।

आगे क्या है कंपनी का प्लान?

बोरोसिल रिन्यूएबल्स के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन प्रदीप कुमार खेरुका ने कहा है कि FY28 तक इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 60% बढ़ाने का लक्ष्य है।

उनके मुताबिक, नई क्षमता इस साल शुरू होने की उम्मीद है। FY27 में करीब 8% वॉल्यूम ग्रोथ और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के दम पर प्रदर्शन में और सुधार की उम्मीद है।

बोरोसिल का मुनाफा कैसे बढ़ा?

हाल में सरकार ने चीन और वियतनाम से आने वाले सस्ते सोलर ग्लास पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा दी है।

इससे Borosil Renewables जैसी घरेलू कंपनियों को सस्ते आयात से मुकाबले में राहत मिली है। साथ ही, बेहतर प्राइसिंग और मार्जिन का भी फायदा मिला है।

बोरोसिल के शेयरों का हाल

जून तिमाही के नतीजों से पहले 16 जुलाई को Borosil Renewables का शेयर 0.44% गिरकर ₹617.80 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में कंपनी ने 14.29% का रिटर्न दिया है। इसका मार्केट कैप 8.59 हजार करोड़ रुपये है।

बोरोसिल का बिजनेस क्या है

Borosil Renewables भारत की प्रमुख सोलर ग्लास निर्माता कंपनी है। कंपनी सोलर पैनल बनाने में इस्तेमाल होने वाला लो-आयरन टेक्सचर्ड ग्लास बनाती है। इसके उत्पाद सोलर मॉड्यूल निर्माताओं को सप्लाई किए जाते हैं। कंपनी का कारोबार भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी फैला हुआ है।

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Maruti Suzuki inaugurates 800-acre Kharkhoda plant in Haryana

Maruti Suzuki inaugurates 800-acre Kharkhoda plant in Haryana

Maruti Suzuki inaugurated its most advanced vehicle manufacturing facility at IMT Kharkhoda, Haryana, on Thursday. Spanning 800 acres, the company claims the projected total investment at the facility will be Rs 35,000 crore, creating over 21,000 jobs. The plant’s current annual production capacity of 5 lakh units will be scaled up to 10 lakh, making Suzuki one of the largest vehicle manufacturing facilities globally. Prime Minister Narendra Modi and Japanese Prime Minister Sanae Takaichi jointly inaugurated the facility through video conferencing during the India-Japan Joint Economic Forum.

Maruti Suzuki Kharkhoda plant highlights

The Kharkhoda plant has a strong focus on sustainability. It meets 100 percent of its electricity requirement through renewable energy, using a combination of solar power and green power procurement. The facility currently has an installed solar capacity of 20MWp, which will be increased to 70MWp by 2030. It’s setting up a 10 tonnes-per-day biogas plant and a 1MWh battery energy storage system as well.

The plant operates as a zero liquid discharge facility, ensuring that 100 percent of the water is recycled. Nearly two-thirds of its water requirement is met through recycled water and rainwater harvesting. To reduce congestion and fuel consumption during vehicle transportation, Maruti will also set up an in-plant railway siding. In addition, the facility uses human-aware collaborative robots (COBOTS) to support manufacturing operations.

सरकारी कंपनी को मिला ₹2831 करोड़ का प्रोजेक्ट, यूपी में बनेगा बड़ा सोलर पावर प्लांट

Coal India Update: सरकारी कोयला कंपनी Coal India को उत्तर प्रदेश में 600 मेगावाट का बड़ा सोलर पावर प्रोजेक्ट मिला है। इसके साथ ही कंपनी ने जून महीने के Single Window Mode Agnostic (SWMA) ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म के आंकड़े भी जारी किए हैं। कंपनी ने बताया कि जून में इस प्लेटफॉर्म के जरिए 108.76 लाख टन कोयले का आवंटन किया गया। इस दौरान उसे नोटिफाइड कीमत के मुकाबले औसतन 42% ज्यादा कीमत मिली।

प्रोजेक्ट पर 2,831 करोड़ रुपये खर्च होंगे

Coal India ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि उसे Bundelkhand Saur Urja Ltd. से लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) मिला है। इसके तहत उत्तर प्रदेश के जालौन सोलर पार्क में 600 मेगावाट का सोलर प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट 300-300 मेगावाट की दो यूनिट में बनेगा। इससे बनने वाली बिजली 2.73 रुपये प्रति यूनिट की दर से सप्लाई की जाएगी।

कंपनी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट पर करीब 2,831.11 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) साइन होने के बाद इसे 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

जून में ई-ऑक्शन से कितना कोयला बिका?

जून के दौरान Coal India ने SWMA ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म पर 266.23 लाख टन कोयला बिक्री के लिए ऑफर किया था। इनमें से 108.76 लाख टन कोयले का आवंटन हुआ। यानी कंपनी करीब 41% कोयला आवंटित करने में सफल रही।

इन आवंटित मात्रा पर Coal India को अधिसूचित कीमत के मुकाबले औसतन 42% प्रीमियम मिला।

किस सहायक कंपनी का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा?

Coal India की अलग-अलग सहायक कंपनियों के प्रदर्शन में काफी अंतर देखने को मिला।

  • Northern Coalfields Ltd. और North Eastern Coalfields ने ऑफर किए गए कोयले का 100% आवंटन किया।
  • South Eastern Coalfields Ltd. का आवंटन 75% रहा।
  • Western Coalfields Ltd. ने 52% कोयला आवंटित किया।
  • Central Coalfields Ltd. का आंकड़ा 42% रहा।
  • Mahanadi Coalfields Ltd. ने 30% आवंटन किया।
  • Eastern Coalfields Ltd. का आवंटन 25% रहा।
  • Bharat Coking Coal Ltd. (BCCL) सबसे पीछे रही और उसका आवंटन सिर्फ 9% रहा।

पहली तिमाही में कैसा रहा प्रदर्शन?

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में Coal India ने SWMA प्लेटफॉर्म के जरिए 829.15 लाख टन कोयला ऑफर किया। इनमें से 310.69 लाख टन का आवंटन हुआ। यानी तिमाही के दौरान आवंटन दर 37% रही।

इस दौरान कंपनी को अधिसूचित कीमत के मुकाबले औसतन 44% प्रीमियम मिला।

SWMA प्लेटफॉर्म क्या है?

SWMA एक ऑनलाइन ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए Coal India अलग-अलग सेक्टरों के खरीदारों को नॉन-लिंकेज कोयला एक ही प्लेटफॉर्म से बेचती है। पहले अलग-अलग सेक्टरों के लिए अलग ई-ऑक्शन व्यवस्था थी। SWMA आने के बाद पूरी प्रक्रिया आसान और ज्यादा पारदर्शी हो गई है।

Coal India का शेयर बुधवार को NSE पर 0.89% गिरकर 435.15 रुपये पर बंद हुआ। एक साल में स्टॉक ने 11.65% का रिटर्न दिया है।

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