Eternal Q1 results: जोमैटो की पेरेंट कंपनी इटरनल का प्रॉफिट 92 करोड़ रुपये रहा, एनालिस्ट्स के अनुमान से काफी कम

Eternal Q1 results: जोमैटो की पेरेंट कंपनी इटरनल ने 22 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 92 करोड़ रुपये रहा। यह सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स के 335 करोड़ रुपये के अनुमान से काफी कम है। तिमाही दर तिमाही आधार पर कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 47 फीसदी घटा है। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी ने 174 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।

कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 20,211 करोड़ रुपये 

Eternal का प्रॉफिट जून तिमाही में साल दर साल आधार पर बढ़कर तीन गुना हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी ने 25 करोड़ रुपये प्रॉफिट कमाया था। जून तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 20,211 करोड़ रुपये रहा। यह सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स के 19,850 करोड़ रुपये के अनुमान से ज्यादा है। साल दर साल आधार पर कंपनी का रेवेन्यू जून तिमाही में दो गुना हो गया।

EBITDA 22  फीसदी बढ़कर 594 करोड़ रुपये

कंपनी का EBITDA जून तिमाही में तिमाही दर तिमाही आधार पर 22 फीसदी बढ़कर 594 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन में तिमाही दर तिमाही आधार पर मामूली इजाफा हुआ। यह 2.8 फीसदी से बढ़कर 2.9 फीसदी हो गया। कंपनी के फाउंडर दीपेंदर गोयल ने शेयरहोल्डर्स को भेजे लेटर में कहा है, “अगर ऐसा वक्त आता है जब हमें ग्रोथ के लिए मार्जिन से समझौता करना पड़े तो हम बिना झिझक ऐसा करेंगे।”

लंबी अवधि में बिजनेस के विस्तार पर फोकस

उन्होंने कहा, “हमने हमेशा शॉर्ट टर्म मार्जिन की जगह लॉन्ग टर्म मार्केट एक्सपैंशन को प्राथमिकता दी है। लेकिन, हमें कुछ ऐसा करने की जरूरत नहीं है।” जोमैटो लगातार यह कहती रही है कि उसे प्रतिद्वंद्वी कंपनी की कम प्राइस के फूड ऑफर करने की स्ट्रेटेजी में कोई फायदा नहीं दिखता। किफायती फूड के ग्राहकों को ध्यान में रख Swiggy ने Toing और Rapido ने Ownly लॉन्च किया है। लेकिन, जोमैटो का ऐसा करने का कोई प्लान नहीं है।

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जोमैटो के शेयर चढ़कर बंद हुए 

इटरनल का शेयर 22 जुलाई को 1.01 फीसदी चढ़कर 289.50 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, शेयर बाजारों पर बड़ा दबाव देखने को मिला। निफ्टी 0.79 फीसदी यानी 191 अंक गिरकर 23,996 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 0.92 फीसदी यानी 715 अंक की कमजोरी के साथ 76,755 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में 1.23 फीसदी की गिरावट आई।

Adani Power Q1 Results: अदाणी पावर को ₹4806 करोड़ का मुनाफा, रेवेन्यू भी रिकॉर्ड स्तर पर

Adani Power Q1 Results: अदाणी ग्रुप की बिजली कंपनी Adani Power ने जून तिमाही में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। कंपनी का मुनाफा, रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट तीनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह देश में रिकॉर्ड बिजली मांग, ज्यादा बिजली बिक्री और बेहतर टैरिफ रही। नतीजों के बाद कंपनी के शेयर में भी अच्छी तेजी देखने को मिली।

मुनाफा और रेवेन्यू में दमदार बढ़त

अप्रैल-जून तिमाही में अदाणी पावर का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 42% बढ़कर ₹4,806 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹3,385 करोड़ था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी 34% बढ़कर ₹18,902 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹14,109 करोड़ था। वहीं, EBITDA करीब 40% बढ़कर ₹7,948 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। EBITDA मार्जिन भी 40.3% से बढ़कर 42% हो गया।

भीषण गर्मी का फायदा मिला 

इस बार गर्मी ने बिजली की मांग को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया। मई महीने में देश की पीक पावर डिमांड 270.8 गीगावॉट रही। वहीं, जून तिमाही में बिजली की कुल खपत 8.4% बढ़कर 485.4 बिलियन यूनिट हो गई।

इसका सीधा फायदा Adani Power को मिला। कंपनी ने इस तिमाही में 31 बिलियन यूनिट बिजली पैदा की, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं, बिजली की बिक्री 16.9% बढ़कर 28.8 बिलियन यूनिट रही।

बिजली महंगी बिकी, कमाई बढ़ी

लॉन्ग टर्म PPA के तहत बिजली बिक्री 30% से ज्यादा बढ़कर 24.5 बिलियन यूनिट हो गई। इसके साथ ही औसत टैरिफ 8.5% बढ़कर ₹5.95 प्रति यूनिट पहुंच गया।

मर्चेंट और शॉर्ट टर्म मार्केट में भी कंपनी को बेहतर दाम मिले। यहां औसत टैरिफ 13.1% बढ़कर ₹7.04 प्रति यूनिट रहा। कंपनी ने कहा कि बुटीबोरी और मुतियारा (तूतीकोरिन) जैसे पहले बिना PPA वाले प्लांट्स को नए करार मिलने से भी बिजली बिक्री बढ़ी। इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में बिजली की कीमतें बढ़ने का फायदा भी कंपनी को मिला।

कोयला महंगा हुआ, फिर भी बढ़ा मुनाफा

ज्यादा बिजली उत्पादन और आयातित कोयले की ऊंची कीमतों की वजह से ईंधन लागत 30% बढ़कर ₹9,513 करोड़ हो गई। इसके बावजूद कंपनी का मुनाफा बढ़ा। इसकी वजह बेहतर ऑपरेटिंग एफिशिएंसी और फाइनेंस कॉस्ट पर मजबूत नियंत्रण रहा।

इस तिमाही में कंपनी ने ₹1,386 करोड़ की पिछली अवधि की आय भी दर्ज की। वहीं, अतिरिक्त कोयला लागत के बदले ₹898 करोड़ के टैरिफ मुआवजे को भी रेवेन्यू में शामिल किया गया।

विस्तार पर बड़ा दांव

अदाणी पावर के बोर्ड ने ₹15,000 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। यह रकम QIP या दूसरे रास्तों से जुटाई जाएगी। साथ ही कंपनी ने अपनी उधारी सीमा ₹75,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹1 लाख करोड़ करने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी लेनी होगी।

Adani Power ने हाल ही में दिवाला प्रक्रिया के तहत Jaiprakash Associates की कई बिजली परिसंपत्तियां भी खरीदी हैं। इनमें 180 मेगावॉट का Churk थर्मल पावर प्लांट, Jaiprakash Power Ventures में 24% हिस्सेदारी और Prayagraj Power Generation Company में 11.49% हिस्सेदारी शामिल हैं।

आगे की क्या है योजना?

अदाणी पावर के CEO एस.बी. ख्यालिया ने कहा कि रिकॉर्ड EBITDA दिखाता है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल मजबूत है। उन्होंने कहा कि Adani Power 45 गीगावॉट उत्पादन क्षमता के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। इसके साथ ही कंपनी हाइड्रो पावर में विस्तार कर रही है और भविष्य में न्यूक्लियर पावर सेक्टर के अवसरों पर भी नजर बनाए हुए है।

अदाणी पावर के शेयरों का हाल

Adani Power का शेयर बुधवार को शेयर 1.51% गिरकर ₹217.05 पर बंद हुआ। नतीजों के बाद ₹211.90 के निचले स्तर से उछलकर ₹221.70 के इंट्राडे हाई तक पहुंचा था। पिछले 1 साल में स्टॉक ने 83.77% रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

18% टूटे Medplus Health के शेयर, निवेश के दो तगड़े ऐलान के बावजूद कमजोर रिजल्ट पड़ा भारी

Medplus Health Share Price: देश की सबसे बड़ी रिटेल फार्मेसी ओमनी चैनल मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज के शेयरों को जून तिमाही के रिजल्ट से तगड़ा शॉक लगा है। इसके झटके से मेडप्लस के शेयर करीब 18% टूट गए और फिसलकर एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गए। शेयरों को निवेश के दो बड़े ऐलान से भी सपोर्ट नहीं मिल पाया। अभी की बात करें तो फिलहाल 14.95% की गिरावट के साथ मेडप्लस का शेयर ₹676.45 के भाव पर है। इंट्रा-डे में यह 17.80% टूटकर ₹653.80 तक आ गया था।

Medplus Health Services Q1 Results: खास बातें

चालू वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज के लिए किसी झटके से कम नहीं रही। जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 21.7% गिरकर ₹33.17 करोड़ पर आ गया। मुनाफे में यह गिरावट ऐसे समय में आई, जब कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू इस दौरान 21.84% बढ़कर ₹1879.60 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का ईबीआईटीडीए इस दौरान 1.9% बढ़कर ₹130.7 करोड़ पर पहुंचा लेकिन ईबीआईटीडीए मार्जिन 8.5% से फिसलकर 7.1% पर आ गया। जून तिमाही में कंपनी ने 146 नए स्टोर खोले जिसमें 131 फ्रेंचाइजी स्टोर्स थीं।

कहां निवेश कर रही मेडप्लस?

एक्सचेंज फाइलिंनग में नतीजे के साथ-साथ कंपनी ने बताया कि इसकी मुख्य सब्सिडियरी ऑप्टिवल हेल्थ सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड तेलंगाना के हैदराबाद में एक फूड पार्क बनाने की योजना बना रही है। इसमें कोल्ड प्रेस ऑयल निकालने वाली यूनिट भी शामिल होगी। इसमें करीब ₹40 करोड़ की पूंजी लगेगी। इसके अलावा कंपनी की योजना हैदराबाद में एक कॉन्सिअर्ज हेल्थ एंड वेलनेस सर्विसेज फैसिलिटी शुरू करने की भी है। इसमें करीब ₹115 करोड़ का निवेश होगा जिसमें ₹90 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

मे़डप्लस हेल्थ सर्विसेज के शेयरों ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को कुछ ही महीने में बीमार कर दिया। 21 मई 2026 को बीएसई पर यह ₹1,020.35 के भाव पर था जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से दो ही महीने में यह 35.92% फिसलकर आज 22 जुलाई 2026 को ₹653.80 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update: ईरान पर अमेरिका का 11वें दिन हमला जारी है। ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकाने को निशाना बनाने की चेतावनी दी। तेहरान ने युद्ध का दायरा बढ़ाने का एलान किया। इधर जंग बढ़ने और हूतियों के RED SEA BLOCKADE से कच्चे तेल में उछाल आया। ब्रेंट 92 डॉलर के पार निकला। इधर कच्चे तेल में उछाल से भारतीय बाजारों के सेंटिमेंट कमजोर हुआ है। गिफ्ट निफ्टी में करीब 60 प्वाइंट का दबाव दिखा रहा है। हालांकि FIIs और ग्लोबल मार्केट से पॉजिटिव संकेत मिल रहे है। जापान का बाजार निक्केई 2 परसेंट तो कोरिया मार्केट कॉस्पी 6% ऊपर है। उधर चिप शेयरों में खरीदारी के बीच US INDICES में अच्छी बढ़त दिखी। सोने-चांदी की भी चमक बढ़ी है।

Anant Raj Demerger: अनंत राज दो हिस्सों में बंटेगी, डेटा सेंटर कारोबार के लिए अलग लिस्टेड कंपनी बनेगी

Anant Raj Demerger: रियल एस्टेट कंपनी Anant Raj Ltd ने अपने कारोबार में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। कंपनी के बोर्ड ने एक कॉम्पोजिट स्कीम ऑफ अरेंजमेंट को मंजूरी दी है। इसके तहत डेटा सेंटर और क्लाउड सर्विसेज बिजनेस को रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार से अलग किया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद ग्रुप की दो अलग-अलग लिस्टेड कंपनियां होंगी।

हालांकि, इस योजना को लागू करने से पहले NCLT, SEBI, स्टॉक एक्सचेंज, शेयरधारकों और अन्य नियामकीय मंजूरियां मिलना जरूरी होगा।

किस कंपनी के पास कौन सा कारोबार रहेगा?

डिमर्जर के बाद Anant Raj Ltd रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार पर फोकस करेगी। कंपनी का ध्यान रेजिडेंशियल टाउनशिप, लग्जरी हाउसिंग, कमर्शियल प्रोजेक्ट्स और हॉस्पिटैलिटी बिजनेस पर रहेगा।

वहीं, Ashok Cloud Private Limited डेटा सेंटर, क्लाउड सर्विसेज और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का कारोबार संभालेगी। कंपनी AI वर्कलोड, को-लोकेशन सर्विस, सॉवरेन पब्लिक क्लाउड, डिजास्टर रिकवरी, क्लाउड माइग्रेशन और डेटा बैकअप जैसी सेवाएं देगी।

शेयरधारकों को क्या मिलेगा?

कंपनी ने बताया कि डिमर्जर लागू होने के बाद योग्य शेयरधारकों को Anant Raj Ltd के हर एक ₹2 फेस वैल्यू वाले शेयर के बदले Ashok Cloud Private Limited का ₹2 फेस वैल्यू वाला एक शेयर मिलेगा।

हालांकि, डिमर्जर के बाद भी Ashok Cloud, Anant Raj Ltd की सब्सिडियरी बनी रहेगी। कंपनी की मौजूदा हिस्सेदारी रद्द नहीं की जाएगी।

कंपनी ने क्यों लिया यह फैसला?

कंपनी का कहना है कि दोनों कारोबार अब अलग-अलग दिशा में बढ़ रहे हैं। दोनों की पूंजी जरूरत, बिजनेस मॉडल और ग्रोथ स्ट्रेटजी भी अलग है। ऐसे में अलग कंपनियां बनने से दोनों बिजनेस अपने-अपने क्षेत्र पर ज्यादा फोकस कर सकेंगे।

कंपनी का मानना है कि इससे डेटा सेंटर बिजनेस को अलग पहचान मिलेगी। उसकी वैल्यू बेहतर तरीके से सामने आएगी। साथ ही सेक्टर-फोकस्ड निवेशकों को आकर्षित करने, रणनीतिक साझेदारी करने और नए निवेश जुटाने में भी आसानी होगी।

Anant Raj के एमडी ने क्या कहा?

Anant Raj के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित सरीन ने कहा कि रियल एस्टेट और डेटा सेंटर कारोबार अब दो अलग प्लेटफॉर्म बन चुके हैं। दोनों की जरूरतें और ग्रोथ का रास्ता अलग है। ऐसे में डिमर्जर से दोनों कंपनियों को स्वतंत्र रणनीति बनाने और तेजी से विस्तार करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर और क्लाउड कारोबार को एक ही प्लेटफॉर्म के तहत लाने से कॉरपोरेट स्ट्रक्चर सरल होगा। इससे फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे और निवेशकों के लिए पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

यह घोषणा बाजार बंद होने के बाद हुई। Anant Raj का शेयर मंगलवार को BSE पर 1.50% की गिरावट के साथ ₹609.60 पर बंद हुआ।

Trident Q1 Results: टेक्सटाइल कंपनी का मुनाफा 13% बढ़ा, शेयरधारकों को मिला डिविडेंड

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 22 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 16 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: बुधवार 22 जुलाई को शेयर बाजार में 15 कंपनियों के शेयर फोकस में रह सकते हैं। कुछ कंपनियों ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जबकि कुछ ने कारोबार से जुड़े बड़े ऐलान किए हैं। वहीं, कई दिग्गज कंपनियां आज अपने Q1 नतीजे पेश करेंगी। ऐसे में इन शेयरों में पूरे कारोबारी सत्र के दौरान अच्छी-खासी हलचल देखने को मिल सकती है।

Aurobindo Pharma

फार्मा कंपनी Aurobindo Pharma की सहयोगी कंपनी CuraTeQ को हैदराबाद स्थित बायोसिमिलर्स मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए ब्राजील की हेल्थ रेगुलेटर ANVISA से मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी से कंपनी को ब्राजील के बाजार में कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी।

JSW Infrastructure

पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनी JSW Infrastructure का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 8.2% घटकर ₹357.6 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 18.1% बढ़कर ₹1,444.8 करोड़ हो गया। EBITDA 15.9% बढ़कर ₹673.7 करोड़ रहा। वहीं, EBITDA मार्जिन 47.5% से घटकर 46.6% पर आ गया।

Aditya Birla Capital

फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी Aditya Birla Capital ने अपनी सहयोगी कंपनी Aditya Birla Health Insurance में राइट्स इश्यू के जरिए ₹123.89 करोड़ का निवेश किया है। कंपनी ने यह निवेश कारोबार बढ़ाने और पूंजी आधार मजबूत करने के लिए किया है।

Trident Ltd

टेक्सटाइल और पेपर सेक्टर की कंपनी Trident Ltd का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 12.9% बढ़कर ₹158 करोड़ रहा। इस दौरान ऑपरेशंस से रेवेन्यू 4.7% बढ़कर ₹1,786.8 करोड़ और EBITDA 2.7% बढ़कर ₹299.6 करोड़ हो गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन पिछले साल की तरह 17% पर स्थिर रहा।

Bandhan Bank

प्राइवेट सेक्टर के Bandhan Bank का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 34.8% बढ़कर ₹501.6 करोड़ हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 6% बढ़ी। बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ। ग्रॉस NPA 3.15% और नेट NPA 0.93% पर आ गया। तिमाही के दौरान बैंक ने ₹682.5 करोड़ का प्रावधान किया।

IndiaMART InterMESH

ऑनलाइन B2B ई-कॉमर्स कंपनी IndiaMART InterMESH ने जून तिमाही में अच्छे नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 12.18% बढ़कर ₹172.20 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹153.50 करोड़ था। तिमाही आधार पर कंपनी का मुनाफा 243.03% उछला है।

TVS Holdings

ऑटो सेक्टर की कंपनी TVS Holdings का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 73.8% बढ़कर ₹1,173.5 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 34% बढ़कर ₹17,076.1 करोड़ रहा। EBITDA 38.6% बढ़ा। वहीं, EBITDA मार्जिन बढ़कर 16.3% हो गया।

Welspun Specialty

मेटल सेक्टर की कंपनी Welspun Specialty जून तिमाही में घाटे से मुनाफे में लौट आई। कंपनी ने ₹5.16 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। पिछले साल इसी अवधि में ₹0.75 करोड़ का घाटा हुआ था। हालांकि, रेवेन्यू 3.8% घटकर ₹194 करोड़ रहा। EBITDA बढ़कर ₹10.54 करोड़ और मार्जिन 5.4% पर पहुंच गया।

Cyient DLM

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Cyient DLM का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा बढ़कर ₹16.2 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹7.4 करोड़ था। रेवेन्यू 34.3% बढ़कर ₹373.8 करोड़ रहा। EBITDA 56.4% बढ़कर ₹39 करोड़ हो गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 10.5% पर पहुंच गया।

Indian Hotels

टाटा ग्रुप की हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की कंपनी Indian Hotels का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 20.8% बढ़कर ₹358 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 14.6% बढ़कर ₹2,339 करोड़ रहा। EBITDA 16.8% बढ़कर ₹672 करोड़ पहुंच गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 28.8% रहा।

MedPlus Health Services

फार्मेसी रिटेल चेन MedPlus Health Services का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 21.8% घटकर ₹33 करोड़ रह गया। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 21.8% बढ़कर ₹1,879.6 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹1,542.6 करोड़ था।

Aavas Financiers

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी Aavas Financiers की जून तिमाही में नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 16.6% बढ़कर ₹324 करोड़ हो गई। शुद्ध मुनाफा 23% बढ़कर ₹171 करोड़ रहा। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹139 करोड़ था।

Sagility India

हेल्थकेयर BPO कंपनी Sagility India का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 46% बढ़कर ₹217 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 27.6% बढ़कर ₹1,963 करोड़ रहा। EBITDA 26.6% बढ़कर ₹438 करोड़ पहुंच गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन 23% से घटकर 22.3% रह गया।

Mastek

आईटी सेक्टर की कंपनी Mastek का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 15% बढ़कर ₹106 करोड़ हो गया। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 7.7% बढ़कर ₹985.3 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹914.7 करोड़ था।

Sunteck Realty

रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी Sunteck Realty का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 26.4% बढ़कर ₹42.3 करोड़ हो गया। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 1.7% बढ़कर ₹191.6 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹181.3 करोड़ था।

Hatsun Agro

डेयरी कंपनी Hatsun Agro का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 1.1% घटकर ₹133.6 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 19.3% बढ़कर ₹3,090 करोड़ हो गया। EBITDA 5.1% घटकर ₹350.5 करोड़ रहा। वहीं, EBITDA मार्जिन घटकर 11.3% पर आ गया।

22 जुलाई को आने वाले तिमाही नतीजे

बुधवार को जून तिमाही के नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी। कई बड़ी कंपनियां अपने Q1 रिजल्ट जारी करेंगी। इनमें Adani Green Energy, Adani Power, Aye Finance, Dr. Reddy’s Laboratories, Bharat Petroleum Corporation (BPCL) और CSB Bank जैसी कंपनियां शामिल हैं। इनके नतीजों के बाद इन शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है।

SBI Funds Management Shares: ₹750 तक जा सकता है स्टॉक, Emkay ने खरीदने की सलाह दी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trident Q1 Results: टेक्सटाइल कंपनी का मुनाफा 13% बढ़ा, शेयरधारकों को मिला डिविडेंड

Trident Q1 Results: टेक्सटाइल और पेपर सेक्टर की कंपनी Trident Ltd ने जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का मुनाफा दोहरे अंक में बढ़ा है। रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, EBITDA मार्जिन पिछले साल के स्तर पर ही स्थिर रहा।

मुनाफा और रेवेन्यू दोनों बढ़े

अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 12.9% बढ़कर ₹158 करोड़ हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹140 करोड़ था। कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 4.7% बढ़कर ₹1,786.8 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹1,706.8 करोड़ था।

इस दौरान EBITDA 2.7% बढ़कर ₹299.6 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹291.7 करोड़ था। हालांकि, EBITDA मार्जिन 17% पर स्थिर रहा।

किस कारोबार का कैसा प्रदर्शन रहा?

जून तिमाही में यार्न बिजनेस कंपनी का सबसे बड़ा रेवेन्यू देने वाला कारोबार रहा। इस सेगमेंट का रेवेन्यू ₹902 करोड़ से बढ़कर ₹954.2 करोड़ हो गया। पेपर और केमिकल्स कारोबार का रेवेन्यू ₹259.8 करोड़ से बढ़कर ₹297.4 करोड़ पहुंच गया, जो सबसे तेज ग्रोथ वाला सेगमेंट रहा।

वहीं, टॉवल बिजनेस का रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा। यह ₹638.9 करोड़ से मामूली घटकर ₹638.5 करोड़ रह गया। दूसरी ओर, बेडशीट कारोबार का रेवेन्यू ₹309.4 करोड़ से घटकर ₹302.8 करोड़ हो गया।

मुनाफे में किसका सबसे ज्यादा योगदान?

यार्न कारोबार का प्री-टैक्स प्रॉफिट ₹70.1 करोड़ से बढ़कर ₹145.8 करोड़ हो गया। यानी इस सेगमेंट का मुनाफा दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा। बेडशीट बिजनेस का प्री-टैक्स प्रॉफिट ₹44.8 करोड़ से बढ़कर ₹49.3 करोड़ रहा।

हालांकि, पेपर और केमिकल्स सेगमेंट का प्री-टैक्स प्रॉफिट ₹73.3 करोड़ से घटकर ₹52.4 करोड़ रह गया। वहीं, टॉवल कारोबार का प्री-टैक्स प्रॉफिट ₹47.6 करोड़ से घटकर ₹33.7 करोड़ हो गया।

अंतरिम डिविडेंड और नई सब्सिडियरी

कंपनी ने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान ₹1 फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर ₹0.50 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड दिया।

इसके अलावा, बोर्ड ने ब्रांड की मौजूदगी मजबूत करने और सेल्स, मार्केटिंग, बिजनेस डेवलपमेंट एक्टिविटीज को बढ़ाने के लिए नई सब्सिडियरी बनाने को मंजूरी दी है। यह सब्सिडियरी विदेशी बाजारों में भी Trident के प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग का काम करेगी।

Trident के शेयरों का हाल

Trident का शेयर 21 जुलाई को NSE पर 0.28% गिरकर ₹25.24 पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 19.97% नीचे आया है। कंपनी का मार्केट कैप 12.67 हजार करोड़ रुपये है।

Indian Hotels Q1 Results: टाटा ग्रुप की होटल कंपनी का मुनाफा 21% बढ़ा, शेयरों पर रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Indian Hotels Q1 Results: टाटा ग्रुप की होटल कंपनी का मुनाफा 21% बढ़ा, शेयरों पर रहेगी नजर

Indian Hotels Q1 Results: टाटा ग्रुप की होटल कंपनी Indian Hotels Company (IHCL) ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का मुनाफा और रेवेन्यू, दोनों में दोहरे अंकों की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। ऑपरेटिंग मार्जिन में भी सुधार देखने को मिला।

मुनाफा 21% बढ़ा

अप्रैल-जून तिमाही में इंडियन होटल्स का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 20.8% बढ़कर ₹358 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹296 करोड़ था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 14.6% बढ़कर ₹2,339 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹2,041 करोड़ था।

EBITDA और मार्जिन में सुधार

जून तिमाही में EBITDA 16.8% बढ़कर ₹672 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹576 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 28.2% से बढ़कर 28.8% हो गया।

होटल इंडस्ट्री के अहम पैमाने RevPAR (Revenue Per Available Room) में भी 14% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

क्या बोले CEO?

इंडियन होटल्स के एमडी और सीईओ पुनीत छतवाल ने कहा कि कंपनी वित्त वर्ष 2027 में भी डबल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार रखे हुए है। उनका कहना है कि होटल कारोबार में मांग मजबूत बनी हुई है।

शेयर का हाल

Indian Hotels Company का शेयर नतीजों से पहले मंगलवार को 0.98% बढ़कर ₹731.75 पर बंद हुआ। हालांकि, साल 2026 में अब तक शेयर में करीब 1% की गिरावट रही है। वहीं, पिछले 6 महीने में इसने करीब 12% का रिटर्न दिया है।

क्या करती है कंपनी?

Indian Hotels Company (IHCL) टाटा ग्रुप की हॉस्पिटैलिटी कंपनी है। यह Taj, Vivanta, SeleQtions, Ginger और ama Stays & Trails जैसे होटल और हॉस्पिटैलिटी ब्रांड चलाती है। भारत के साथ-साथ कई विदेशी बाजारों में भी कंपनी की मौजूदगी है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Funds Management Shares: ₹750 तक जा सकता है स्टॉक, Emkay ने खरीदने की सलाह दी

SBI Funds Management Shares: SBI Mutual Fund चलाने वाली कंपनी SBI Funds Management की शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत हुई। कंपनी का शेयर ₹574 के IPO प्राइस के मुकाबले 6.84% प्रीमियम के साथ ₹613.30 पर NSE में लिस्ट हुआ। कारोबार के दौरान यह ₹624.95 तक पहुंचा। हालांकि दिन के अंत में शेयर ₹609.75 पर बंद हुआ, जो लिस्टिंग प्राइस से 0.58% नीचे है। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹1.24 लाख करोड़ रहा।

Emkay ने दी ‘Buy’ रेटिंग

ब्रोकरेज फर्म Emkay Global ने शेयर पर कवरेज शुरू करते हुए ‘Buy’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने ₹750 का टारगेट प्राइस रखा है। यह IPO प्राइस के मुकाबले करीब 31% और मौजूदा क्लोजिंग भाव के मुकाबले करीब 23% की संभावित तेजी दिखाता है।

Emkay के बुलिश रुख की वजह

Emkay का मानना है कि भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की लंबी अवधि की ग्रोथ का सबसे बड़ा फायदा SBI Funds Management को मिल सकता है।

ब्रोकरेज के मुताबिक, SBI का मजबूत ब्रांड और बड़ा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क कंपनी की सबसे बड़ी ताकत है। फिलहाल SBI Mutual Fund के करीब 55 लाख ग्राहक हैं, जबकि SBI के 2.1 करोड़ सैलरी अकाउंट हैं। यानी अभी भी कंपनी के पास नए ग्राहकों को जोड़ने की बड़ी गुंजाइश है, खासकर B-30 शहरों और ग्रामीण इलाकों में।

अब किस फैक्टर पर फोकस रहेगा?

Emkay को उम्मीद है कि कंपनी धीरे-धीरे इक्विटी म्यूचुअल फंड, AIF और PMS जैसे ज्यादा मार्जिन वाले प्रोडक्ट्स पर फोकस बढ़ाएगी। इससे कमाई बेहतर हो सकती है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY26 से FY29 के बीच कंपनी का EBITDA CAGR करीब 17% रह सकता है।

क्या हैं जोखिम?

Emkay ने कुछ जोखिम भी बताए हैं। SBI के नेटवर्क से नए ग्राहक कम जुड़ सकते हैं। म्यूचुअल फंड स्कीमों का प्रदर्शन कमजोर पड़ सकता है। शेयर बाजार में लंबे समय तक सुस्ती रह सकती है। रेगुलेटरी नियमों में बदलाव भी कंपनी की ग्रोथ पर असर डाल सकते हैं।

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