NEET Protest: प्रदर्शनकारी छात्रों की कानूनी लड़ाई के लिए आगे आए कपिल सिब्बल, CJP लीगल फंड में दिए ₹1 करोड़

Kapil Sibal: राज्यसभा सांसद और सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने सोमवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के लीगल एड फंड में 1 करोड़ रुपये का योगदान देने की घोषणा की। यह फंड NEET से जुड़े हालिया विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस केस का सामना कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए बनाया गया है।

सिब्बल ने कहा कि यह फंड अलग-अलग राज्यों में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों पर नजर रखने और वकीलों के नेटवर्क के जरिए कानूनी मदद मुहैया कराने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि बिहार, असम, बंगाल और महाराष्ट्र जैसी जगहों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए और उनके खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग की।

वहीं, दूसरी तरफ CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केंद्र के आश्वासन के बावजूद, देश भर में छात्रों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने बताया कि CJP सुप्रीम कोर्ट के वकील के संपर्क में है ताकि पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए गए छात्रों के लिए कानूनी मदद ली जा सके।

कपिल सिब्बल ने दी आर्थिक मदद

दास के साथ बैठे कपिल सिब्बल ने CJP को आर्थिक मदद के अपने फैसले पर सहमति जताई।

उन्होंने कहा, “मैंने कहा है कि भारत में जहां भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए हैं – चाहे वह बिहार, असम, बंगाल या महाराष्ट्र हो – और जहां छात्रों या प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया गया है, वहां सरकारों द्वारा दर्ज किए गए कानूनी मामलों पर नजर रखने के लिए हमने एक सिस्टम बनाने का फैसला किया है, ताकि हमारे वकील कानूनी मदद दे सकें। हमने मांग की है कि कोई FIR दर्ज नहीं होनी चाहिए, और अगर दर्ज की गई हैं, तो उन्हें वापस लिया जाना चाहिए।”

सिब्बल ने कहा कि CJP एक वेबसाइट बनाएगी जिसमें FIR का सामना कर रहे छात्रों की जानकारी होगी और जो वकील मुफ्त (प्रो बोनो) या अन्य कानूनी मदद देने के इच्छुक हैं, वे इस पहल से जुड़ सकेंगे।

उन्होंने आगे कहा, “मैंने अपनी तरफ से 1 करोड़ रुपये का योगदान दिया है, और मैं पूरे भारत के वकीलों से अपील करता हूं कि वे इस फंड में योगदान देकर मदद करें ताकि हम प्रभावित लोगों की मदद कर सकें। हमारे वकील उन लोगों के साथ खड़े हैं, जो कानून के दुरुपयोग से प्रभावित हुए हैं।”

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Delhi protest: NEET आंदोलन से फिर करीब आए राहुल-अखिलेश? यूपी चुनाव से पहले युवाओं के मुद्दों पर BJP को घेरने की तैयारी

NEET protest: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब लगभग छह महीने का समय बचा है। ऐसे में NEET परीक्षा विवाद ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ एक नया और मजबूत राजनीतिक मुद्दा दे दिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब एक बड़े विपक्षी अभियान का रूप ले चुका है। इसमें पेपर लीक, बेरोजगारी और सरकारी भर्तियों में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।

दोनों दलों का मानना है कि ये ऐसे मुद्दे हैं, जिनका असर उत्तर प्रदेश के करोड़ों युवा मतदाताओं पर पड़ सकता है। आगामी चुनाव में यह बड़ा चुनावी हथियार साबित हो सकता है।

राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच फिर दिखा तालमेल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच बढ़ता तालमेल ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश की राजनीति निर्णायक दौर में एंट्री  कर रही है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों का चर्चित ‘दो लड़के’ अभियान मतदाताओं को प्रभावित करने में विफल रहा था। गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा था।

लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। कांग्रेस-सपा गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बड़ा झटका दिया। इससे दोनों दलों का आत्मविश्वास बढ़ा और गठबंधन को नई राजनीतिक ऊर्जा मिली।

डिंपल यादव ने आंदोलन में निभाई सक्रिय भूमिका

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद समाजवादी पार्टी की सांसद और अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव जंतर-मंतर पहुंचीं। अपनी पहचान बन चुकी गुलाबी साड़ी में पहुंचीं डिंपल कई घंटों तक घायल छात्रों के बीच रहीं। उन्होंने घायल छात्रों का हौसला बढ़ाया। बेहोश हुए एक छात्र की मदद की की। योगत्यता उपलब्ध कराने में सहयोग किया और प्रदर्शनकारियों के साथ लगातार मौजूद रहीं।

सोशल मीडिया पर उनके पुलिस बैरिकेड पर चढ़ने, घायल छात्रों की मदद करने और प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े रहने के वीडियो तेजी से वायरल हुए। सरकार के रवैये को असंवेदनशील बताते हुए उन्होंने कहा, “यह NEET नहीं, CHEAT है।” उनकी लगातार मौजूदगी ने समाजवादी पार्टी को युवाओं और छात्रों के प्रति संवेदनशील दल के रूप में पेश करने में मदद की।

युवाओं के जरिए बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने पिछले कुछ वर्षों में कल्याणकारी योजनाओं, रोजगार पहलों और राष्ट्रवादी राजनीति के जरिए पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के बीच मजबूत आधार बनाया है। विपक्ष का मानना है कि NEET विवाद बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के आरोप और बढ़ती बेरोजगारी युवाओं में असंतोष पैदा कर रहे हैं। कांग्रेस और सपा इसी नाराजगी को राजनीतिक समर्थन में बदलना चाहती हैं। दोनों दल खुद को छात्रों और युवाओं की आवाज के रूप में स्थापित कर इस आंदोलन को चुनावी मुद्दे में बदलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ जॉइंट आंदोलन

NEET आंदोलन का असर उत्तर प्रदेश में भी तेजी से दिखाई दिया। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने लखनऊ सहित कई जिला मुख्यालयों पर संयुक्त प्रदर्शन किए। दोनों दलों के छात्र संगठनों ने आंदोलन का नेतृत्व किया। कई जगह पुलिस के साथ झड़पें हुईं। विपक्षी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी भी हुई, जिससे यह आंदोलन लगातार सुर्खियों में बना रहा। अब दोनों दलों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भी संयुक्त विरोध प्रदर्शन जारी रखने की योजना बनाई है।

सिर्फ NEET नहीं, कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

दोनों दलों के सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अब अपने अभियान को केवल NEET तक सीमित नहीं रखेंगी।

गठबंधन की योजना में शामिल प्रमुख मुद्दे हैं:-

कथित पेपर लीक

बेरोजगारी

सरकारी भर्तियों में देरी

राम मंदिर दान चोरी विवाद

किसानों के लिए खाद की कमी

नकली दवाओं का मुद्दा

बढ़ते बिजली बिल और बिजली दरें

विपक्ष की रणनीति है कि चुनाव तक जनता का ध्यान इन मुद्दों पर केंद्रित रखा जाए, ताकि बीजेपी पहचान की राजनीति और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए चुनावी एजेंडा तय न कर सके।

फिलहाल सीट बंटवारे का विवाद भी पड़ा ठंडा

कुछ समय पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बराबर सीटों की हिस्सेदारी चाहेगी। गौतम ने कांग्रेस को गठबंधन का ‘बड़ा भाई’ तक बताया था।

इन बयानों से दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए थे। हालांकि, छात्र आंदोलन के बाद फिलहाल बातचीत का केंद्र सीटों की बजाय संयुक्त राजनीतिक अभियान बन गया है। इससे दोनों दल एकजुटता का संदेश देने में सफल रहे हैं।

युवा वोट बना सबसे बड़ा चुनावी रणक्षेत्र

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में युवा मतदाताओं को सबसे बड़ा चुनावी मैदान मान रही हैं। सपा का पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक अभी भी उसके साथ माना जाता है। जबकि कांग्रेस ऊंची जातियों, दलितों, शहरी मतदाताओं और पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दे जाति और धर्म से ऊपर उठकर लगभग हर वर्ग के छात्रों को प्रभावित करते हैं। इसलिए इन्हें राजनीतिक रूप से बेहद प्रभावी माना जा रहा है।

बीजेपी भी करेगी कड़ा मुकाबला

हालांकि बीजेपी इस चुनौती को आसानी से स्वीकार करने वाली नहीं है। 2024 लोकसभा चुनाव में झटका लगने के बावजूद भगवा पार्टी ने बाद के विधानसभा उपचुनावों में अपनी संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन किया है। बीजेपी आगामी चुनाव में अपनी कल्याणकारी योजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी भर्ती अभियानों और सुशासन के रिकॉर्ड को प्रमुखता से जनता के सामने रखेगी। पार्टी को भरोसा है कि उत्तर प्रदेश में उसका बूथ स्तर तक फैला मजबूत संगठन विपक्ष पर बढ़त बनाए रखेगा।

क्या NEET आंदोलन बनेगा चुनावी गेम चेंजर?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या NEET आंदोलन 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की दिशा बदल पाएगा। यदि राहुल गांधी और अखिलेश यादव युवाओं के गुस्से को चुनाव तक बनाए रखने और पेपर लीक, बेरोजगारी तथा छात्रों की आकांक्षाओं को चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनाने में सफल रहते हैं, तो कांग्रेस-सपा गठबंधन 2024 के बाद बीजेपी के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।

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वहीं यदि बीजेपी बहस का केंद्र फिर से विकास, सुशासन, कल्याणकारी योजनाओं और नेतृत्व पर ले जाने में सफल हो जाती है, तो जंतर-मंतर से उठी यह भावनात्मक लहर चुनाव तक पहुंचने से पहले कमजोर भी पड़ सकती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य के करोड़ों युवा मतदाता आखिर किस राजनीतिक दल पर सबसे अधिक भरोसा जताते हैं।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?

mahesh jethmalani, tavleen singh and saurabh dass on CJP party viral video

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें सीजेपी से जुड़े कई लोग एक होटल में पार्टी करते दिखाई दे रहे हैं। इससे अलावा प्रदर्शनस्थल पर सीजेपी कार्यकर्ताओं के जश्न मनाते वीडियो भी जमकर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो पर मचे बवाल के बाद सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रख्यात लेखिका तवलीन सिंह के जवाब भी चर्चा में है। ALSO READ: धर्मेंद्र प्रधान पर पोस्ट से BJP में बवाल! अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता राहर घिरीं, पार्टी नेताओं ने जताई नाराजगी

 

महेश जेठमलानी ने उठाए फंडिंग पर सवाल?

इस वीडियो को सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया है। वायरल वीडियो में CJP के कुछ लोग एक होटल में पार्टी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहां जश्न का माहौल है और नाच-गाना भी चल रहा है।

महेश जेठमलानी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'क्या सच में ऐसा हो रहा है? CJP की लीडरशिप दिल्ली के एक होटल में पार्टी दे रही है। राजधानी दिल्ली में कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुए। ऐसे में सवाल यह है कि इनके ट्रैवल, खाने और रहने का खर्च किसने उठाया? इनकी फंडिंग किसने की? ALSO READ: 'बेटी के बयान से दुखी हूं, लेकिन पिता को दोष नहीं दे सकते'— केशव महंता के बचाव में बोले हिमंत बिस्वा सरमा

तवलीन सिंह ने दिया जवाब

तवलीन सिंह ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, भाजपा अब कॉकरोच को एक 'फाइव-स्टार होटल' में पार्टी करते हुए दिखाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है। क्या हम यह पूछ सकते हैं कि इतने सारे भाजपा मंत्रियों और उनकी संतानों के पास डिजाइनर कपड़े और कार्टियर के चश्मे खरीदने के लिए पैसे कहाँ से आते हैं? ALSO READ: प्रधान के बाद अब गडकरी निशाने पर! 100% शुद्ध पेट्रोल के लिए 'E20 जनता पार्टी' मैदान में

 

क्या बोले सौरव दास?

कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद सीजेपी के कार्यकर्ताओं साथ पार्टी और डांस करने के वायरल वीडियो पर की जा रही टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है। सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'इससे एक बार फिर साफ़ हो जाता है कि सरकार और गोदी एंकर, जेन-ज़ी और नई पीढ़ी की सोच और भाषा को समझ ही नहीं पा रहे हैं।'

 

उन्होंने कहा कि हम जितने दिन जरूरत होगी, उतने दिन सड़क पर बैठ सकते हैं। हम नाचते-गाते हुए भी प्रदर्शन कर सकते हैं। हम हाथ में कोल्ड कॉफी लेकर भी आंदोलन को संगठित कर सकते हैं। बदलाव के लिए लड़ने के लिए हमारा वैसा दिखना जरूरी नहीं है, जैसा पिछली पीढ़ियां किसी आंदोलन से उम्मीद करती हैं।

सौरव दास ने कहा कि यही इस पीढ़ी की पहचान है-आत्मविश्वासी, रचनात्मक, जुझारू और ऐसी, जिसे किसी एक तयशुदा छवि में बांधा नहीं जा सकता। अंकल-आंटी चाहे जितनी शिकायत करते रहें, उन्हें हमारी इस पीढ़ी के साथ जीना और हमें स्वीकार करना ही होगा।

Vande Bharat चलाने वाले पायलट की सैलरी जानकर रह जाएंगे हैरान, इतनी होती है महीने की कमाई!

वंदे भारत एक्सप्रेस सिर्फ अपनी रफ्तार और आधुनिक सुविधाओं के लिए ही नहीं, बल्कि इसे चलाने वाले लोको पायलटों की जिम्मेदारी और कौशल के लिए भी चर्चा में रहती है। देश की इस प्रीमियम ट्रेन को सुरक्षित तरीके से चलाने के लिए रेलवे अनुभवी और प्रशिक्षित लोको पायलटों का चयन करता है। यात्रियों को समय पर और सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने के पीछे इन पायलटों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि जिस ट्रेन को देश की सबसे खास ट्रेनों में गिना जाता है, उसे चलाने वाले लोको पायलट की कमाई कितनी होती है।

उनकी सैलरी सिर्फ बेसिक वेतन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई तरह के भत्तों और सुविधाओं के साथ उनकी मासिक आय काफी बढ़ जाती है। आइए जानते हैं वंदे भारत लोको पायलट की सैलरी और मिलने वाली सुविधाओं के बारे में।

वंदे भारत लोको पायलट की सैलरी कितनी होती है?

भारतीय रेलवे में वंदे भारत लोको पायलट के लिए अलग से कोई विशेष पे-स्केल तय नहीं है। आमतौर पर इस ट्रेन को चलाने वाले लोको पायलट 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-6 के अनुभवी कर्मचारी होते हैं। इनका बेसिक पे करीब ₹35,400 से शुरू होता है, लेकिन भत्तों और अन्य सुविधाओं को जोड़ने के बाद उनकी कुल आय काफी बढ़ जाती है। अनुभव और पोस्टिंग के आधार पर उनकी बेसिक सैलरी लगभग ₹56,000 से ₹60,000 तक पहुंच सकती है।

भत्तों से बढ़ जाती है लाखों तक कमाई

लोको पायलट की कमाई सिर्फ मूल वेतन तक सीमित नहीं होती। उन्हें कई तरह के सरकारी भत्ते मिलते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • महंगाई भत्ता (DA)
  • मकान किराया भत्ता (HRA)
  • रनिंग अलाउंस
  • नाइट ड्यूटी अलाउंस
  • ट्रांसपोर्ट अलाउंस
  • मेडिकल सुविधाएं और अन्य सरकारी लाभ

इन सभी को मिलाकर वंदे भारत के अनुभवी लोको पायलट की मासिक आय करीब ₹90,000 से ₹1.30 लाख या इससे ज्यादा तक पहुंच सकती है।

वंदे भारत चलाने वालों को ज्यादा सुविधाएं क्यों मिलती हैं?

वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेन चलाना बेहद जिम्मेदारी वाला काम है। लोको पायलट को तेज रफ्तार के दौरान सिग्नल, ट्रैक की स्थिति, मौसम और सुरक्षा नियमों पर लगातार नजर रखनी पड़ती है। छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसी जिम्मेदारी को देखते हुए उन्हें रनिंग अलाउंस समेत कई अतिरिक्त लाभ दिए जाते हैं।

कैसे बनते हैं वंदे भारत के लोको पायलट?

कोई भी व्यक्ति सीधे वंदे भारत ट्रेन का ड्राइवर नहीं बन सकता। इसके लिए सबसे पहले रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) के जरिए असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के पद पर चयन होता है। इसके बाद वर्षों का अनुभव, विभागीय प्रमोशन, मेडिकल फिटनेस और विशेष तकनीकी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ही किसी लोको पायलट को वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेन चलाने का मौका मिलता है।

कितनी मुश्किल होती है लोको पायलट की नौकरी?

वंदे भारत के लोको पायलट का काम सिर्फ ट्रेन चलाना नहीं होता। उन्हें लंबे समय तक सतर्क रहकर ड्यूटी करनी पड़ती है। मौसम चाहे गर्मी का हो, सर्दी का या बारिश का, यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हमेशा उनके कंधों पर रहती है। यही कारण है कि रेलवे इस जिम्मेदारी भरे पद के लिए अनुभवी और कुशल कर्मचारियों को ही चुनता है।

सैलरी के साथ मिलता है सम्मान भी

वंदे भारत ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट की कमाई अनुभव, ड्यूटी घंटे, पोस्टिंग और मिलने वाले भत्तों के आधार पर बदलती रहती है। अच्छी सैलरी के साथ यह भारतीय रेलवे की सबसे जिम्मेदार और प्रतिष्ठित नौकरियों में से एक मानी जाती है।

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550 साल पुराने इस मंदिर में पानी नहीं, इस्तेमाल हुआ था 40 हजार किलो घी! वजह कर देगी हैरान

राजस्थान के बीकानेर में मौजूद भांडासर जैन मंदिर अपनी अनोखी कहानी और शानदार स्थापत्य कला के लिए मशहूर है। करीब 550 साल पुराने इस मंदिर से जुड़ी कई ऐसी मान्यताएं हैं, जो इसे देश की अन्य धरोहरों से अलग बनाती हैं। कहा जाता है कि इसके निर्माण में पानी की जगह हजारों किलो घी का इस्तेमाल किया गया था। यही वजह है कि यह मंदिर इतिहास, आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम माना जाता है। इसकी खूबसूरत नक्काशी, रंगीन चित्रकारी और प्राचीन वास्तुकला देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

हालांकि घी से निर्माण की कहानी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन यही लोककथा इस मंदिर को और भी खास बना देती है। सदियों बाद भी यह मंदिर अपनी अनोखी पहचान और आकर्षक विरासत के कारण लोगों को हैरान करता है।

पानी की कमी ने बदली निर्माण की कहानी

मंदिर का निर्माण वर्ष 1468 में जैन व्यापारी भांडासा ओसवाल के संरक्षण में शुरू हुआ था। उस समय बीकानेर क्षेत्र में पानी की भारी कमी थी। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, इसी समस्या के कारण मंदिर के गारे (मोर्टार) में पानी की जगह घी का उपयोग किया गया, जिसने इस मंदिर को बाकी धरोहरों से अलग पहचान दिलाई।

एक बूंद घी से शुरू हुई अनोखी दास्तान

लोककथा के मुताबिक, एक बार एक वास्तुकार ने भांडासा ओसवाल को गिरे हुए घी की एक बूंद बचाने को लेकर ताना मारा। इस बात से प्रेरित होकर व्यापारी ने ऐसा मंदिर बनाने का संकल्प लिया, जिसमें घी का इस्तेमाल ही इसकी खास पहचान बन जाए। यही कहानी आगे चलकर इस मंदिर की सबसे प्रसिद्ध किंवदंती बन गई।

कई दशकों में पूरा हुआ भव्य निर्माण

भांडासा ओसवाल का निधन 1514 में हो गया, लेकिन मंदिर का निर्माण कार्य रुका नहीं। कई कारीगरों और पीढ़ियों के प्रयासों के बाद यह भव्य जैन मंदिर लगभग 1554 में बनकर तैयार हुआ।

सोने की चमक और कलाकारी का अद्भुत नमूना

यह मंदिर जैन धर्म के पांचवें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ को समर्पित है। इसकी दीवारों और छतों पर शानदार राजस्थानी कला देखने को मिलती है। यहां की बारीक भित्तिचित्र कला, शीशे का काम और सोने की पेंटिंग्स 24 तीर्थंकरों की कहानियों को जीवंत रूप देती हैं।

क्या आज भी निकलता है घी? रहस्य बरकरार

मंदिर से जुड़ी एक और लोकप्रिय मान्यता है कि गर्मियों के दिनों में इसके कुछ हिस्सों से घी या मक्खन जैसी चीजें रिसती हुई दिखाई देती हैं। हालांकि इसे लोकविश्वास माना जाता है, लेकिन यह दावा आज भी पर्यटकों की जिज्ञासा बढ़ाता है।

इतिहास और आस्था का अनोखा संगम

आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस ऐतिहासिक मंदिर की देखरेख करता है। चाहे इसे वास्तुकला का चमत्कार मानें या लोककथा का हिस्सा, भांडासर जैन मंदिर राजस्थान की उन धरोहरों में शामिल है, जिनकी कहानी सदियों बाद भी लोगों को आकर्षित करती है।

NEET Protest में छाई ये ‘देसी मां’, पोस्टर पर लिखी एक लाइन पढ़कर इंटरनेट हुआ दीवाना

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दिल्ली में NEET परीक्षा को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन इन दिनों पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं और प्रदर्शन से जुड़ी कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इसी बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने आंदोलन के गंभीर माहौल में भी लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी। तस्वीर में दिखा एक अनोखा संदेश लोगों के दिलों को इस तरह छू गया कि देखते ही देखते वह इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X से लेकर अन्य मंचों तक लोग इसे जमकर शेयर कर रहे हैं और अपने-अपने अंदाज में प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

कई यूजर्स इसे भारतीय माताओं के स्नेह, सख्ती और सुरक्षा की भावना का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे विरोध प्रदर्शन की सबसे यादगार और दिल छू लेने वाली तस्वीर कह रहे हैं। यही वजह है कि यह फोटो अब सिर्फ एक वायरल पोस्ट नहीं, बल्कि लोगों के बीच चर्चा का खास विषय बन चुकी है।

एक तख्ती, जिसने जीत लिया इंटरनेट का दिल

इस तस्वीर को X (पहले ट्विटर) पर शेयर करते हुए कैप्शन लिखा गया, “Bro, whose mom is this?

CJP का आंदोलन खत्म, साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोचों का ऐलान, सभी प्रदर्शनकारी घर जाएं

CJP protest ended: स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‍डा और केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) ने शनिवार को प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान कर दिया है। सीजेपी के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा सरकार ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं। 

 

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं। मंगलवार तक हमें लिखित गारंटी देगी सरकार। सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी केस वापस लेगी। साथ पीड़ित परिवारों को मुआवजा भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी तुरंत अपने घर चले जाएं।

 

केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्‍डा ने भी इस दौरान कहा कि सीजेपी की मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई है। सरकार ने केस रद्द करने की मांग मान ली है साथ ही पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की बात भी सरकार ने मांग ली है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी। 

धरना स्थल पर जश्न का माहौल

नीट प्रश्न पत्र लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को जंतर-मंतर स्थित विरोध प्रदर्शन स्थल पर जश्न का माहौल देखने को मिला। प्रदर्शनकारी नाचते-गाते, तिरंगा लहराते और ‘वंदे मातरम’ का उद्घोष करते नजर आए। 

‘दोस्तों, धन्यवाद’: NEET पोस्ट पर मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद PM मोदी ने 24 घंटे में शेयर की दूसरी रील

PM Modi Instagram Reel: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 24 घंटे के अंदर अपनी दूसरी इंस्टाग्राम रील शेयर की। इसमें उन्होंने NEET पेपर लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी के खिलाफ सरकार की प्रस्तावित सख्त कार्रवाई पर अपनी पिछली सोशल मीडिया पोस्ट को मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के लिए लोगों का शुक्रिया अदा किया।

इस छोटे से वीडियो में, PM मोदी ने गुरुवार रात सोशल मीडिया पर वायरल हुए अपने सेल्फी-स्टाइल वीडियो के बाद लोगों से मिले समर्थन, फीडबैक और सुझावों के लिए उनका आभार जताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “दोस्तों, आपका धन्यवाद। कल रात मुझे आपसे जुड़ने का मौका मिला। मैंने जो वीडियो पोस्ट किया था, उस पर आपकी प्रतिक्रिया और आपके सकारात्मक सुझावों के लिए धन्यवाद। सभी का शुक्रिया। मुझे उम्मीद है कि आपका प्यार और समर्थन बना रहेगा और हमारा रिश्ता और भी मजबूत और सक्रिय होगा। धन्यवाद। दोस्तों, धन्यवाद।”

यह संदेश प्रधानमंत्री मोदी द्वारा NEET पेपर लीक को लेकर चिंता जताने वाले वीडियो जारी करने के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया था कि सरकार परीक्षा में धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। वीडियो में उन्होंने पेपर लीक को लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए गहरी चिंता का विषय बताया था और घोषणा की थी कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के माध्यम से कड़े कदम उठाए जाएंगे।

बता दें की यह मैसेज उसी दिन आया, जब NEET पेपर लीक पर PM मोदी के पहले इंस्टाग्राम वीडियो को 300 मिलियन से ज्यादा बार देखा गया। इस वीडियो का शीर्षक “कल कैबिनेट में पेपर लीक के खिलाफ और सख्त कदम उठाए जाएंगे!” था। इस वीडियो की वजह से प्रधानमंत्री को 24 घंटे से भी कम समय में इंस्टाग्राम पर दस लाख (1 मिलियन) फॉलोअर्स भी मिले।

यह घटनाक्रम कैबिनेट की एक अहम बैठक के दौरान हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्रीय मंत्रियों से सोशल मीडिया पर सरकार की मौजूदगी मजबूत करने और इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाने को कहा।

जानकारी के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय में हुई जब NEET पेपर लीक पर उनके वीडियो को 300 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका था और उन्हें एक दिन से भी कम समय में लगभग दस लाख इंस्टाग्राम फॉलोअर्स मिले थे।

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Delhi Weather Today: दिल्ली में फिर बरसेंगे बादल! बारिश और ठंडी हवाओं से मिलेगी उमस से राहत, जानें IMD का अपडेट

Delhi Weather Today: दिल्ली में शनिवार (25 जुलाई) को आसमान में बादल छाए रहने के साथ-साथ हल्की से बहुत हल्की बारिश होने की संभावना है, जिस वजह से राजधानी में मौसम सुहावना बना रहेगा। बता दें कि इससे एक दिन पहले यानी शुक्रवार को बारिश और बूंदाबांदी से उमस भरे मौसम से राहत मिली थी, और शनिवार को भी बारिश के चलते तापमान के नियंत्रण में रहने की उम्मीद है।

शुक्रवार को दिल्ली में दिनभर आमतौर पर बादल छाए रहे और कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। इस दौरान सफदरजंग में अधिकतम तापमान 34.6°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से थोड़ा कम रहा। दिल्ली-एनसीआर के अन्य मौसम केंद्रों पर भी दिन का तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया। पालम में अधिकतम तापमान 32.9°C, लोधी रोड और रिज में 33.3°C, जबकि आयानगर में भी 33.3°C रिकॉर्ड किया गया।

दिन भर हल्की बारिश के आसार

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, 25 जुलाई को आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। सुबह से लेकर दोपहर से पहले तक बहुत हल्की से हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। इसके बाद दोपहर और शाम के समय भी हल्की बारिश होने की संभावना है। इस दौरान कई जगहों पर 20-30 किमी/घंटा की रफ्तार से सतही हवाएं चलने और इनके झोंके 40 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है, जिससे पूरे दिन मौसम सुहावना बना रहेगा।

इन सभी मौसमी घटनाओं के चलते शनिवार को अधिकतम तापमान 33°C से 35°C के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 24°C से 26°C के बीच रह सकता है।

IMD के मुताबिक, दिल्ली में पिछले 24 घंटों के दौरान हल्की बारिश दर्ज की गई, जिससे दिन का तापमान सामान्य से नीचे बना रहा। वहीं, शुक्रवार सुबह 8.30 बजे तक के 24 घंटों में सफदरजंग में 0.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि पालम में 0.6 मिमी, लोधी रोड में 0.8 मिमी और रिज में 3.6 मिमी बारिश हुई।

इसके बाद सुबह 8.30 बजे से शाम 5.30 बजे के बीच कई जगहों पर बारिश जारी रही। इस दौरान पालम में 3.3 मिमी, सफदरजंग में 0.6 मिमी, लोधी रोड में 0.5 मिमी और अयानगर में 0.3 मिमी बारिश दर्ज की गई।

दिल्ली में शुक्रवार को AQI

एयर क्वालिटी की बात करें तो, शुक्रवार को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ श्रेणी में बनी रही। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के अनुसार, शाम को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 70 था, जो मानसून के हालात के बावजूद हवा के काफी साफ होने का संकेत देता है।

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कॉकरोच जनता पार्टी की इन दो शर्तों पर सरकार की सहमति! सामने आई ये बड़ी बात

Cockroach Janta Party Protest: राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी का NEET पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन जारी है। वहीं शुक्रवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में सीजेपी के डेलिगेशन सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और CJP प्रवक्ता सौरभ दास, आशुतोष रांका शामिल हुए।बैठक के बाद सीजेपी ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उनकी दो मांगों पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई है और बातचीत का दौर अभी जारी है।

रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार ने नीट पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और इस मामले को लेकर हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्र कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों को वापस लेने के मुद्दे पर सकारात्मक रुख दिखाया है। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार ने उनकी कुछ मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि सरकार जल्द ही प्रतिनिधिमंडल के साथ एक और बैठक करेगी, ताकि बाकी मुद्दों पर भी बातचीत आगे बढ़ाई जा सके।

जेपी नड्डा से बैठक में CJP ने रखीं चार मांगें

सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक में संगठन ने सरकार के सामने अपनी चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें नीट परीक्षा विवाद के कारण कथित तौर पर अपने बच्चों को खोने वाले परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग शामिल थी।

करीब दो घंटे चली इस बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखीं। इसके अलावा, देश की परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए पांच सुझाव भी दिए गए। जेपी नड्डा ने कहा, “बैठक करीब दो घंटे तक चली। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी तीन प्रमुख मांगें और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए पांच सुझाव हमारे सामने रखे। हमने उनसे कहा है कि कल दोपहर फिर बैठक होगी। तब तक सरकार इन मुद्दों पर चर्चा करेगी और उन्हें अपना जवाब देगी।”

CJP ने  गारंटी की भी मांग की

सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि सरकार ने उनकी कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। उनके अनुसार, केंद्र ने नीट परीक्षा विवाद से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई है। सौरव दास ने यह भी मांग की कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ आगे कोई नई एफआईआर दर्ज न की जाए। साथ ही, सरकार लिखित रूप में यह भरोसा दे कि भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी को निशाना नहीं बनाया जाएगा।

वहीं, सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने भी कहा कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों में से दो पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि 1 करोड़ रुपये के मुआवजे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों को वापस लेने की मांग पर केंद्र ने सैद्धांतिक सहमति जताई है। आशुतोष रंका ने कहा कि उनकी मांग सिर्फ पहले से दर्ज एफआईआर वापस लेने तक सीमित नहीं है। संगठन चाहता है कि सरकार लिखित गारंटी दे कि भविष्य में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई एफआईआर या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।