छात्रों को धमकी, महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़…NEET Protest के बीच इन तीन अफसरों पर क्यों हुआ एक्शन?

राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों के व्यवहार पर भी लोगों की नजर रही। दिल्ली और मुंबई में हुए प्रदर्शनों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कुछ सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई। पिछले कुछ दिनों में तीन अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है। इनमें मुंबई पुलिस के कांस्टेबल पवन सांगले, दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडिशनल डीसीपी) संदीप लांबा और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत शामिल हैं।

इन तीनों पर प्रदर्शन के दौरान हुई अलग-अलग घटनाओं को लेकर कार्रवाई की गई है। हालांकि तीनों मामले अलग-अलग हैं, लेकिन ये घटनाएं बताती हैं कि विरोध प्रदर्शनों और भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान सुरक्षा अधिकारियों के हर कदम पर जनता और संबंधित विभागों की कड़ी नजर रहती है।

पवन सांगले: वायरल वीडियो के बाद निलंबित

मुंबई पुलिस के कांस्टेबल पवन सांगले को एक वायरल वीडियो सामने आने के बाद निलंबित कर दिया गया। इस वीडियो में वह कथित तौर पर छात्र प्रदर्शनकारियों को धमकी देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में दावा किया गया है कि हिरासत में लिए गए छात्रों से पवन सांगले ने कहा कि अगर वे दोबारा प्रदर्शन करने आए, तो उनके बैग में ड्रग्स रखकर उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया जाएगा। वायरल क्लिप में वह कथित तौर पर यह कहते भी सुनाई देते हैं कि छात्रों के बैग में “50-50 ग्राम पाउडर” रखकर उन्हें पूरी जिंदगी जेल भिजवाया जा सकता है। वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ा और उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद पवन सांगले के कथित बयानों की जमकर आलोचना हुई। कई लोगों ने पुलिस की ताकत के गलत इस्तेमाल पर सवाल उठाए। मुंबई पुलिस ने बताया कि पवन सांगले मोटर ट्रांसपोर्ट यूनिट में ड्राइवर के पद पर तैनात थे और शहर की वरिष्ठ कमान का हिस्सा नहीं थे। इसके बावजूद उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया गया और मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई।

संदीप लांबा: महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल

दिल्ली में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (उत्तर-पूर्व) संदीप लांबा को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की ड्यूटी से हटा दिया गया। यह फैसला उस समय लिया गया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में वह कथित तौर पर “संसद चलो” प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के बीच एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दिए। यह घटना उस समय हुई, जब पुलिस संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश कर रही थी। वायरल वीडियो में संदीप लांबा कथित तौर पर धक्का-मुक्की के दौरान एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दिए। इस घटना की विपक्षी नेताओं और कई सामाजिक संगठनों ने कड़ी आलोचना की।

दिल्ली पुलिस ने माना कि तनावपूर्ण माहौल में वरिष्ठ अधिकारी अपना संयम खो बैठे थे। हालांकि पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी, लेकिन मामले की जांच पूरी होने तक संदीप लांबा को जंतर-मंतर की ड्यूटी से हटा दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उनका व्यवहार भीड़ को नियंत्रित करने के तय नियमों के अनुरूप नहीं था। वहीं, प्रदर्शन के आयोजकों ने संदीप लांबा पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। इसके बाद उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग और तेज हो गई।

यह विवाद उस समय सामने आया, जब आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश में सोनिया सहरावत घायल हो गई थीं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवान पत्थरबाजी और अन्य हिंसक घटनाओं के बीच प्रदर्शनकारियों का सामना करते दिखाई दिए। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान कई सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए।

तीन मामले, लेकिन सवाल एक ही

हालांकि तीनों अधिकारियों के मामले अलग-अलग हैं, लेकिन इन सभी में एक बात समान है—सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की जवाबदेही। मुंबई पुलिस के कांस्टेबल पवन सांगले पर छात्र प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर धमकाने का आरोप लगा, जिसके बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। वहीं, दिल्ली पुलिस के संदीप लांबा को एक प्रदर्शनकारी के साथ कथित हाथापाई का वीडियो वायरल होने के बाद प्रदर्शन की ड्यूटी से हटा दिया गया। दूसरी ओर, सोनिया सहरावत के मामले में यह जांच की जा रही है कि प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियां सुरक्षा बलों के अधिकारियों के तय आचार नियमों के अनुरूप थीं या नहीं। ये तीनों घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि अब पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों की जवाबदेही सिर्फ प्रदर्शन के दौरान की गई कार्रवाई तक सीमित नहीं है। उनके व्यवहार और आचरण पर प्रदर्शन से पहले, उसके दौरान और उसके बाद भी लगातार नजर रखी जा रही है।

आखिर किन 3 शर्तों पर मान गए सोनम वांगचुक? 26 दिन बाद अनशन खत्म करने की असल वजह तो अब सामने आई

CJP Protest update: NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में 26 दिनों से अनशन पर बैठे मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई की आधी रात के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है। अनशन खत्म करने के बाद वांगचुक ने अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो जारी कर उन तीन प्रमुख शर्तों और वजहों का खुलासा किया है जिनके आधार पर उन्होंने अपना 26 दिनों का उपवास तोड़ा है। अस्पताल के बेड से जारी 3 मिनट के इस वीडियो में वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई मुलाकात के बाद उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया।

किन 3 शर्तों पर खत्म हुआ 26 दिन लंबा अनशन?

सोनम वांगचुक के मुताबिक सरकार की ओर से मिली तीन मुख्य गारंटियों के बाद ही उन्होंने अपना अनशन वापस लिया है। पहला है परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही पर संसद में चर्चा। केंद्रीय मंत्रियों ने वांगचुक को आश्वासन दिया है कि सरकार और सभी राजनीतिक दलों के सांसद संसद में असफल हो रही परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करेंगे। दूसरा पीड़ित परिवारों को मुआवजा। वांगचुक के मुताबिक सरकार ने NEET परीक्षा पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। तीसरा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज न करना। सरकार ने वादा किया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और लोगों के खिलाफ कोई भी कानूनी मामला या केस दर्ज नहीं किया जाएगा।

पीएम मोदी ने रात में वीडियो जारी कर किया कड़े कानून का ऐलान

सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने और नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी और युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार देर रात एक सेल्फ-रिकॉर्डेड वीडियो संदेश जारी किया। पीएम मोदी ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ 24 जुलाई की कैबिनेट बैठक में और सख्त कार्रवाई आएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल एक ड्राफ्ट बिल लाएगा जिसमें दोषियों के लिए सख्त सजा और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रावधान होगा। इसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। दूसरी ओर विपक्ष संसद के जारी मानसून सत्र के भीतर और बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा नीट पेपर लीक मामले पर विस्तृत चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आज सरकार और CJP के बीच वार्ता

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा तटस्थ स्थल की मांग स्वीकार किए जाने के बाद शुक्रवार को दोपहर करीब 12:30 बजे दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में सरकार और CJP के बीच बातचीत तय हुई है। सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि वे सरकार द्वारा न्यूट्रल वेन्यू की मांग मानने के फैसले का स्वागत करते हैं। इससे पहले 20 जुलाई को सीजेपी प्रवक्ताओं (सौरभ दास और आशुतोष रंका) की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर मुलाकात हुई थी। इसके बाद सीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें वर्चुअल डिटेंशन में रखा गया था। इसके बाद से ही सीजेपी किसी मंत्री के घर या दफ्तर के बजाय केवल न्यूट्रल वेन्यू पर ही वार्ता करने की शर्त पर अड़ी थी। सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक जंतर-मंतर पर उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

CJP की मुख्य मांगें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।

प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी पर जवाबदेही तय करना और शिक्षा प्रणाली में सुधार।

नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा।

आंदोलन में शामिल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) और कानूनी कार्रवाई को वापस लेना।

26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, कहा- लंबी बातचीत और देशहित में लिया फैसला

Sonam Wangchuk hunger strike: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म कर दी है, क्योंकि सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनकी मांगें पूरी की जाएंगी। उन्होंने गुरुवार आधी रात के करीब मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद और सरकार का भरोसा मिलने के बाद अपना अनशन खत्म करने की घोषणा की।

वांगचुक ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अभी-अभी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में, मैंने आखिरकार 26 दिनों के बाद अपना अनशन खत्म किया।”

अपना वजन जल्द से जल्द हासिल करें- पीएम मोदी

वहीं, वांगचुक के अनशन समाप्त करने की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “मैं सोनम जी से आग्रह करता हूं कि वे डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या का पालन करें और जल्द से जल्द अपना वजन वापस हासिल करें।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि सोनम जी स्वस्थ रहें।”

जेपी नड्डा ने सुनाया सरकार का फैसला

अस्पताल में वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो और अन्य लोगों की मौजूदगी में सरकार के आश्वासनों को पढ़कर सुनाते हुए जेपी नड्डा ने कहा, “सरकार दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध करने वालों और 20 जुलाई, 2026 को संसद तक मार्च में शामिल होने वालों के खिलाफ केस दर्ज न करने को लेकर सकारात्मक है।” केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा कि सरकार पहले ही परीक्षाओं के लिए पेपर लीक और शिक्षा सुधारों पर संसद में चर्चा का आश्वासन दे चुकी है।

नड्डा ने कहा, “इसके अलावा, सरकार हाल ही में हुए NEET पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वालों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर भी सकारात्मक रूप से विचार कर रही है।”

वहीं, वांगचुक ने बताया कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के कुल 65 सांसदों ने उनसे मिलकर या पत्र लिखकर अनशन तोड़ने का आग्रह किया था।

लंबी बातचीत और देशहित में लिया गया फैसला

वांगचुक ने X पर कहा, “यह फैसला कई शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा को ध्यान में रखते हुए लिया गया। मैं जल्द ही एक अलग वीडियो में इन शर्तों के बारे में विस्तार से बताऊंगा। इस बीच, मैं आप सभी से अपील करता हूं कि आप बहुत सतर्क रहें और कहीं भी किसी भी तरह की हिंसा न होने दें।”

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शुक्रवार को कहा कि उसे “राहत और खुशी” है कि एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी है, लेकिन पार्टी ने जोर देकर कहा कि जंतर-मंतर पर उसका शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते।

X पर एक पोस्ट में, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने वांगचुक को उनके “असाधारण साहस और त्याग” के लिए धन्यवाद दिया।

दिपके ने कहा, “हमें राहत मिली है और हम शुक्रगुजार हैं कि सोनम सर ने 26 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। सर, आपकी असाधारण हिम्मत और त्याग के लिए आपका धन्यवाद। अपनी जान जोखिम में डालकर आपने पूरे देश की अंतरात्मा को जगाया। यह देश आपके जीवन को बहुत कीमती मानता है,”

उन्होंने आगे कहा, “जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।”

28 जून को आंदोलन में शामिल हुए थे वांगचुक

बता दें कि वांगचुक 28 जून को जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व वाले आंदोलन में शामिल हुए थे। उन्होंने उन छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी जो प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही, शिक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

इसके बाद के 26 दिनों में वांगचुक का करीब 11 किलोग्राम वजन कम हो गया। इस दौरान उन्होंने लगातार लोगों से अपील की कि 20 जुलाई को हुए ‘संसद चलो’ मार्च पर पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाए रखें।

वहीं, 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को विरोध स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस का कहना था कि उन्हें मेडिकल देखभाल की जरूरत थी। हालांकि, उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली हाई कोर्ट में इस कदम को चुनौती दी और कहा कि उन्हें उनकी मर्जी के बिना सरकारी अस्पताल में रखा जा रहा है। इसके बाद हाई कोर्ट ने उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भेजने की मंजूरी दी, जहां उन्होंने अपना अनशन जारी रखा।

मेदांता में रहने के दौरान, वांगचुक ने कहा कि वह अपने छात्रों और एक शिक्षक के तौर पर अपने काम पर लौटना चाहते हैं, लेकिन युवा प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा की गारंटी के बिना वह अपना अनशन खत्म नहीं कर सकते।

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CJP Protest: ‘असामाजिक तत्व फायदा उठा रहे हैं’, सोनम वांगचुक ने समर्थकों से की खास अपील

समाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अपनी भूख हड़ताल के 26वें दिन भी गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। इस बीच उन्होंने गुरुवार को अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने की अपील की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में वांगचुक ने लिखा, “शांति और केवल शांति ही मेरा रास्ता है।” उन्होंने कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह अहिंसक होना चाहिए। जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं, लेकिन कुछ समाज-विरोधी तत्व दूसरी जगहों पर हिंसा भड़काकर इस आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

सोनम वांगचुक ने की ये अपील 

सोनम वांगचुक ने कहा, “जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण हैं, लेकिन यह जानकर दुख हुआ कि कुछ समाज-विरोधी तत्व दूसरी जगहों पर इन आंदोलनों का फायदा उठाकर हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने समर्थकों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “सामने वाला चाहे जैसा भी व्यवहार करे, हमारी ओर से जवाब सिर्फ फूलों का होना चाहिए। हर हाल में शांति और अहिंसा का रास्ता अपनाएं।” वांगचुक की यह अपील ऐसे समय आई है, जब एक दिन पहले ही उन्होंने दोहराया था कि वह अपना भूख हड़ताल तभी खत्म करेंगे, जब सरकार यह भरोसा देगी कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

अब ऐसी ही उनकी तबियत

इस बीच, गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ने बताया कि सफदरजंग अस्पताल से लाए जाने के बाद सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है। अस्पताल की ओर से गुरुवार को जारी बयान में कहा गया कि डॉक्टरों की अलग-अलग विशेषज्ञताओं वाली टीम उनका इलाज कर रही है। अस्पताल के अनुसार, सोनम वांगचुक पूरी तरह होश में हैं और उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। उनके सभी जरूरी स्वास्थ्य संकेत (वाइटल्स) सामान्य स्तर पर हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।

25 दिन से जारी के भूख हड़ताल

अस्पताल ने यह भी साफ किया कि सोनम वांगचुक को दिया जा रहा हर इलाज उनकी सहमति से ही किया जा रहा है। बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने बताया कि उनका 25 दिन का अनशन पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस दौरान उनका करीब 11 किलो वजन कम हो गया है और मांसपेशियां भी कमजोर हुई हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनकी हालत ठीक है। वांगचुक ने कहा, “मैं अभी भी जीवित हूं। 25 दिनों के अनशन में मेरा 11 किलो वजन कम हुआ है, लेकिन मैं ठीक हूं।” उन्होंने 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘चलो संसद’ मार्च का भी जिक्र किया और पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण रवैये की सराहना की। वांगचुक ने कहा, “मैं उन छात्रों की तारीफ करता हूं जिन्होंने लाठीचार्ज के बावजूद शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया।” उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने और पत्थरबाजी के लिए उकसाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने संयम बनाए रखा। उन्होंने कहा, “आप सभी का धैर्य देखकर मेरा दिल भर आया।”

सोनम वांगचुक ने कहा कि कई केंद्रीय मंत्रियों और विपक्षी नेताओं ने उनसे भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि 65 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भी उन्हें मिला, जिसमें उनसे अनशन समाप्त कर देश की सेवा के अपने काम पर लौटने का अनुरोध किया गया। वांगचुक ने कहा, “मैं भी अपने काम पर लौटना चाहता हूं, क्योंकि मेरा काम भी महत्वपूर्ण है।” हालांकि, उन्होंने साफ किया कि जब तक प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिलता, तब तक वह अपना विरोध खत्म नहीं करेंगे। वांगचुक ने सरकार से अपील करते हुए कहा, “बच्चों के खिलाफ बल प्रयोग न किया जाए। मैं यह आश्वासन चाहता हूं कि प्रदर्शनकारियों पर कोई मामला या एफआईआर दर्ज नहीं होगी और उन्हें पुलिस या जेल की धमकी नहीं दी जाएगी। अगर सरकार जल्द यह भरोसा दे देती है, तो मैं आज ही अपनी भूख हड़ताल खत्म कर सकता हूं। लेकिन ऐसा आश्वासन नहीं मिलने पर मुझे अपना अनशन जारी रखना पड़ेगा।”

CJP Protest : जंतर मंतर इलाके में 8 घंटे बंद रहेगा इंटरनेट, सरकार ने दिया ये बड़ा आदेश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी ने अब 24 जुलाई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया है। वहीं छात्रों के विरोध-प्रदर्शन की वजह से राजधानी द‍िल्‍ली में जंतर-मंतर के 1.5 किलोमीटर के दायरे में आधी रात तक मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का विरोध-प्रदर्शन जारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास के बाहर भी धारा 163 लागू कर दी गई है।

बता दें क‍ि व‍िरोध-प्रदर्शन का असर राजधानी के कारोबार पर भी पड़ा है। मौजूदा हालात को देखते हुए ‘नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन’ (NDTA) की सलाह के बाद आज शाम 6.30 बजे के बाद कनॉट प्लेस की सभी दुकानें और रेस्‍टोरेंट बंद कर दिए गए।

जंतर-मंतर के आसपास बंद रहेगा मोबाइल इंटरनेट

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर के आसपास 1.5 किलोमीटर के दायरे में कुछ समय के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने का आदेश जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला जन सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है। आदेश के मुताबिक, 23 जुलाई को शाम 4 बजे से रात 12 बजे (आधी रात) तक सभी मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी। यह आदेश दूरसंचार अधिनियम, 2023 और दूरसंचार (सेवाओं का अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 के तहत जारी किया गया है।

सरकार ने दिया ये आदेश

आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय गृह सचिव ने यह तय करने के बाद कि यह कदम जन सुरक्षा बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए जरूरी है, मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की भड़काऊ या गैरकानूनी गतिविधि को रोकना है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इंटरनेट सेवा बंद करने के फैसले को केंद्रीय गृह सचिव की मंजूरी मिल चुकी है। अवर सचिव महेंद्र विक्रम सिंह के हस्ताक्षर वाले इस आदेश को लागू करने के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त को भेजा गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर विरोध कर रहे हैं।

CJP Protest: करीना कपूर ने स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट का किया समर्थन, बोलीं-‘बात सुनना कोई एहसान नहीं है’

CJP Protest: करीना कपूर और वरुण धवन ने दिल्ली में CJP की अगुवाई में चल रहे छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया है। सलमान खान, आलिया भट्ट, अनन्या पांडे और कई अन्य बड़े बॉलीवुड सितारों के बाद, करीना और वरुण ने भी छात्रों का साथ देते हुए कहा है कि युवा पीढ़ी की मांगों को सुनना कोई “शिष्टाचार” नहीं, बल्कि “ज़िम्मेदारी” है।

करीना ने इंस्टाग्राम पर स्टूडेंट्स के सपोर्ट में एक दिल को छू लेने वाला नोट शेयर किया। उन्होंने लिखा, “मैं कुछ दिनों से इस बारे में सोच रही थी, लेकिन अब और चुप नहीं रह सकती। इतने सारे युवा अपनी बात रखना चाहते हैं और उनकी आवाज को नजरअंदाज करना नामुमकिन है… और ऐसा किया भी नहीं जाना चाहिए।

हम सब जानते हैं कि एक बच्चे के लिए शिक्षा का क्या मतलब है। यह उन्हें आत्मविश्वास देती है। यह उन्हें उम्मीद देती है। यह परिवारों को भरोसा दिलाती है कि आने वाला कल आज से बेहतर हो सकता है। लेकिन शिक्षा तभी असरदार होती है जब बच्चे उस पर भरोसा करें। और जिस पल उन्हें यह शक होने लगता है कि ईमानदारी, कड़ी मेहनत और काबिलियत की असल में कोई अहमियत नहीं है, तो उनका भरोसा खत्म हो जाता है।”

करीना ने इस बात पर जोर दिया कि स्टूडेंट्स को ऐसा एजुकेशन सिस्टम मिलना चाहिए जिस पर वे भरोसा कर सकें। उन्होंने लिखा, “किसी भी बच्चे को यह सोचने की ज़रूरत नहीं पड़नी चाहिए कि क्या उनकी कोशिशें काफ़ी होंगी। वे ऐसे सिस्टम के हक़दार हैं जिस पर वे भरोसा कर सकें, जहां काबिलियत की असल अहमियत हो, कोशिशों का इनाम मिले और हर बच्चा बराबरी के मौके से शुरुआत करे।

यह कोई बहुत बड़ी मांग नहीं है। यह तो कम से कम ज़रूरी बात है। जब पूरी पीढ़ी अपने भविष्य के बारे में एक आवाजं में बात करती है, तो उनकी बात सुनना कोई एहसान नहीं है जो हम करते हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है। हमारे बच्चे हमें उतनी ही बारीकी से देखते हैं जितना हम उन्हें देखते हैं। हम अभी… बाद में नहीं, बल्कि अभी… कैसा रिएक्शन देते हैं, इससे उन्हें पता चलेगा कि निष्पक्षता और भरोसा असल में होते हैं या ये सिर्फ़ बड़ों के इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द हैं। वे आने वाले कल की तैयारी नहीं कर रहे हैं। वे ही आने वाला कल हैं।”

वरुण धवन ने भी छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया और इंस्टाग्राम पर लिखा, “छात्र हमारे देश का भविष्य हैं। जब किसी छात्र का सपना टूटता है, तो सिर्फ़ एक सपना ही नहीं टूटता, बल्कि पूरे परिवार का सपना टूट जाता है। जब उन्हें लगता है कि सिस्टम ने उन्हें निराश किया है, तो उन्हें सवाल पूछने का पूरा अधिकार है।

उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए, उनकी सुरक्षा होनी चाहिए और उनकी बातों पर ईमानदारी से ध्यान दिया जाना चाहिए। मैं अधिकारियों से अपील करता हूँ कि वे इन चिंताओं पर ध्यान दें और एक निष्पक्ष, पारदर्शी और सार्थक समाधान की दिशा में काम करें जिससे जवाबदेही तय हो सके। मुझे पूरी उम्मीद है कि यह छात्रों का विरोध प्रदर्शन ही बना रहेगा। ध्यान उन मुद्दों पर होना चाहिए जो छात्रों को प्रभावित करते हैं और उन समाधानों पर जो उनके लिए ज़रूरी हैं। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है और हर छात्र को इस अधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलनी चाहिए। जय हिंद।”

CJP Protest new advisory: कनॉट प्लेस में शाम 6:30 बजे तक बंद होंगी दुकानें, प्रोटेस्ट के बीच आई ये नई एडवाइजरी जानिए

दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस इलाके में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन और आसपास की स्थिति को देखते हुए गुरुवार को व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए नई एडवाइजरी जारी की गई है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) द्वारा जारी अडवाइजरी के तहत कनॉट प्लेस की सभी दुकानें, दफ्तर और रेस्टोरेंट आज शाम 6:30 बजे तक बंद हो जाएंगे। एनडीटीए (NDTA) द्वारा गुरुवार को जारी इस एडवाइजरी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि यह फैसला नई दिल्ली नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से टेलीफोन पर मिली सलाह के बाद लिया गया है।

एनडीएमसी नेतृत्व ने कनॉट प्लेस के सभी कमर्शियल एस्टैब्लिशमेंट्स को शाम 6:30 बजे तक दिन भर के लिए कामकाज बंद करने का निर्देश दिया था।

सुरक्षा और अनहोनी से बचाव के लिए उठाया गया कदम

व्यापारिक संगठन (NDTA) ने अपनी अडवाइजरी में इलाके के सभी दुकान मालिकों, कार्यालय संस्थानों और रेस्टोरेंट संचालकों से अनुरोध किया है कि वे इस निर्देश का सख्ती से पालन करें और सहयोग दें। सर्कुलर के मुताबिक सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के कारण कनॉट प्लेस और उसके आसपास बनी गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। प्रतिष्ठान मालिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी अप्रिय घटना, संपत्ति के नुकसान या चोट से बचने के लिए इन निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें।

अरविंद केजरीवाल ने एक्स (X) पर तीखी प्रतिक्रिया दी

इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एनडीटीए की इस एडवाइजरी को साझा करते हुए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। अपनी तीखी प्रतिक्रिया में केजरीवाल ने लिखा कि, ‘कनाट प्लेस की सभी दुकानों को आज शाम 6.30 pm बंद करने के आदेश। जबरदस्त सिक्योरिटी। ढेर सारी एम्बुलेंस। क्या मोदी सरकार आज फिर जंतर मंतर पर अपने बच्चों पर बर्बर हमला करेगी?’

भारत की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में 6 बड़ी खामियां, आखिर कब होगा जरूरी सुधार?

indian education system

cjp protest in delhi: हमारे देश में डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए युवाओं को NEET, JEE और UPSC जैसी कठिनतम प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के दौर से गुजरना पड़ता है। इसके विपरीत, देश की नीतियां और भविष्य तय करने वाले राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश के लिए किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता या मानक परीक्षा का कोई प्रावधान नहीं है। केवल किसी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़कर कोई भी व्यक्ति नीति-निर्माता बन सकता है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि जहाँ देश के निर्माण में लगे विशेषज्ञों के लिए योग्यता के कड़े पैमाने हैं, वहीं पूरे तंत्र को चलाने वाले वर्ग के लिए ऐसी कोई जवाबदेही तय नहीं है। एक अंगूठा टेक भी शिक्षा मंत्री बन सकता है।

 

1. वर्तमान शिक्षा प्रणाली की मौलिक कमियाँ

स्मृति-केंद्रित मूल्यांकन: हमारी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था बुद्धिमत्ता की जगह केवल रटने की क्षमता (Memory) की परीक्षा लेती है। यही कारण है कि अकादमिक स्तर पर गोल्ड मेडल पाने वाले विद्यार्थी भी व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों के सामने कई बार असहाय सिद्ध होते हैं।

 

प्रतिस्पर्धा और महत्वाकांक्षा का दबाव: पारंपरिक शिक्षा बच्चों में सहयोग के स्थान पर तुलना और प्रतिस्पर्धा की भावना भरती है। “प्रथम आने” की यह अंधी दौड़ अंततः मानसिक तनाव, ईर्ष्या और सामाजिक विसंगतियों को जन्म देती है।

 

जीविका बनाम जीवन का बोध: वर्तमान शिक्षा नीति का पूरा जोर केवल इस बात पर है कि “रोटी कैसे कमाई जाए”। यह विद्यार्थी को आजीविका कमाना तो सिखाती है, लेकिन शांत, संतुलित और आनंदपूर्ण जीवन जीने की कला से दूर रखती है।

 

2. स्कूल बनाम कोचिंग: शिक्षा व्यवस्था का दोहरा रवैया

भारत में शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण, ज्ञानवर्धन और प्रतिभा का विकास माना गया था। लेकिन आज की वास्तविक स्थिति यह है कि देश का शिक्षा ढांचा एक ऐसी अंधी दौड़ में बदल चुका है, जहाँ छात्र और अभिभावक दोनों मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दबाव तले पिस रहे हैं। 'स्कूल बनाम कोचिंग' की दुविधा और 'आरक्षण-आधारित व्यवस्था' से उपजी हताशा- ये दो ऐसे ज्वलंत मुद्दे हैं, जिन पर व्यापक और बेबाक चर्चा की तत्काल आवश्यकता है।

 

आज के समय में एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि यदि बच्चे को अंततः प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग ही जाना है, तो स्कूल प्रणाली का औचित्य क्या रह जाता है?

 

समय और संसाधन की बर्बादी: एक सामान्य विद्यार्थी सुबह 6 से 8 घंटे स्कूल में बिताता है और उसके तुरंत बाद कोचिंग संस्थानों का रुख करता है। इससे न तो उसे स्व-अध्ययन (Self-study) का समय मिलता है और न ही मानसिक विश्राम का।

 

'डमी स्कूल' कल्चर का पनपना: 11वीं और 12वीं कक्षा में प्रवेश लेते ही छात्र 'डमी स्कूलing' का सहारा लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं। स्कूल केवल नाममात्र के लिए रह जाते हैं और उनकी पूरी पढ़ाई का केंद्र कोचिंग सेंटर बन जाते हैं। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि हमारी मुख्यधारा की स्कूली शिक्षा NEET और JEE जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के मापदंडों को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।

 

आर्थिक व मानसिक शोषण: अभिभावक स्कूल और कोचिंग दोनों की भारी-भरकम फीस भरते हैं। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी जब किसी कारणवश बच्चे का चयन नहीं होता, तो परिवार आर्थिक रूप से टूट जाता है और बच्चा भयंकर अवसाद (Depression) या हताशा का शिकार हो जाता है।

 

3. योग्यता, आरक्षण और युवाओं की अनिश्चितता

शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में वर्तमान आरक्षण व्यवस्था ने मेधावी और मेहनती युवाओं के सामने एक अनूठा संकट खड़ा कर दिया है।

 

मेहनत और परिणाम का असंतुलन: जो छात्र दिन-रात एक करके अत्यधिक कठिन परिश्रम करते हैं, उन्हें अक्सर प्रक्रिया के अंत में यह पता चलता है कि कट-ऑफ और सीटों के आरक्षण के कारण उनके सारे प्रयास निष्फल हो गए। यह स्थिति किसी भी युवा के मनोबल को तोड़ने के लिए काफी है।

 

भविष्य के प्रति अनिश्चितता: परीक्षा और नौकरी दोनों स्तरों पर व्याप्त यह व्यवस्था उन बच्चों के लिए अत्यधिक कष्टदायी साबित हो रही है, जो केवल अपनी योग्यता के बल पर आगे बढ़ना चाहते हैं। जब पढ़ाई का पैमाना केवल अंक या ज्ञान न रहकर जातिगत या श्रेणीगत श्रेणियां बन जाता है, तो प्रतिभा पलायन (Brain Drain) और निराशा का जन्म होता है।

 

संवाद का अभाव: इस नीतिगत भेद पर कोई भी राजनीतिक दल या नीति-निर्माता खुलकर बात करने को तैयार नहीं है। सवाल यह है कि यह व्यवस्था कितनी और पीढ़ियों तक इसी रूप में चलती रहेगी और कब तक योग्यता को हाशिये पर रखा जाएगा?

 

4. भौतिकवादी दृष्टिकोण और प्रलोभन की संस्कृति

सफलता की संकीर्ण परिभाषा: बचपन से ही बच्चों के मन में यह विचार गहराई से बिठा दिया जाता है कि पद, ऊँची तनख्वाह, गाड़ी और बंगला ही सफलता के एकमात्र पैमाने हैं।

 

नैतिकता पर हावी पद-लोभ: व्यवस्था बच्चों को 'शांत व गुणी इंसान' या 'वैज्ञानिक' बनने के बजाय 'ऊँची कुर्सी' पाने का प्रलोभन देती है। इस दौड़ में सफलता पाने के साधनों की शुद्धता पीछे छूट जाती है और केवल परिणाम को ही महत्व दिया जाता है।

 

संघर्ष का भाव: यह दृष्टिकोण समाज में एक ऐसा माहौल बनाता है जहाँ हर व्यक्ति दूसरे के खिलाफ संघर्षरत दिखाई देता है, जिससे सहज मैत्री-भाव और सामाजिक सद्भाव समाप्त हो जाता है।

 

5. सामाजिक और वैचारिक विभाजन के केंद्र

संस्थागत सांप्रदायिकता: देश में शिक्षा का ढांचा धार्मिक और सांप्रदायिक आधारों पर बंटा हुआ प्रतीत होता है। विभिन्न धार्मिक व निजी शिक्षण संस्थाएं अपने-अपने एजेंडे के अनुसार पाठ्यक्रम संचालित कर रही हैं, जिससे एकीकृत राष्ट्रीय चेतना का निर्माण बाधित होता है।

 

कैंपस में वैचारिक ध्रुवीकरण: उच्च शिक्षण संस्थान अक्सर वैज्ञानिक शोध और मौलिक चिंतन के केंद्र बनने के बजाय राजनीतिक विचारधाराओं (लेफ्ट और राइट विंग) के टकराव के अड्डे बन जाते हैं। छात्र राष्ट्र निर्माण या नवाचार के बजाय आंदोलनों तक सीमित होकर रह जाते हैं।

 

6. प्राथमिकताओं का विपर्यय और भविष्य की चुनौतियाँ

सकारात्मक प्रेरणा का अभाव: हमारी सामाजिक सोच बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, कलाकार या नेता बनने का दबाव तो देती है, लेकिन उन्हें एक संवेदनशील इंसान, मौलिक साहित्यकार या वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा नहीं देती।

 

वैज्ञानिक सोच बनाम सांस्कृतिक संघर्ष: यदि हम आने वाली पीढ़ियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temperament) का विकास करने में विफल रहे, तो समाज वैचारिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संघर्षों में ही उलझा रहेगा।

 

शिक्षा में क्रांति की जरूरत:

आज़ादी के बाद से शिक्षा नीतियों में अनेक बदलाव हुए, लेकिन वे मुख्य रूप से सतही ही रहे। जब तक हमारी शिक्षा व्यवस्था केवल 'आज्ञाकारी कर्मचारी' बनाने के ढर्रे से बाहर निकलकर संशय, मौलिक सोच, वैज्ञानिक चेतना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा नहीं देती, तब तक एक सशक्त और विवेकशील समाज का निर्माण संभव नहीं है। हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली न तो विद्यार्थी को सर्वांगीण विकास दे पा रही है और न ही उसे निष्पक्ष अवसर की गारंटी दे रही है। यदि हमें देश के युवा धन को अवसाद, पलायन और आंदोलन से बचाना है, तो दो शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव करना होंगे। 

कॉकरोच वाली पोस्ट डालकर विवादों में घिरीं RAF अधिकारी सोनिया सहरावत! अब मांगा जाएगा जवाब

CJP Protest News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रोटेस्ट चल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में आरएएफ यानी रैपिड एक्शन फोर्स की एक अधिकारी विवादों में घिर गई है। रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की अधिकारी सोनिया सहरावत से उनकी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर जल्द ही जवाब मांगा जा सकता है। 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद उनकी सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट और गतिविधियां जांच के दायरे में आ गई थीं, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया। सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में उनसे जल्द स्पष्टीकरण लिया जाएगा।

न्यूज18 के रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में सोशल मीडिया से जुड़े नियमों के संभावित उल्लंघन के संकेत मिले हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अभी इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सीआरपीएफ पहले सोनिया सहरावत से उनका पक्ष जानेगी, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उच्च अधिकारी उनसे जवाब मांगेंगे और इसकी जानकारी उन्हें पहले ही दे दी गई है। इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए न्यूज18 ने सीआरपीएफ के महानिदेशक जी.पी. सिंह और सीआरपीएफ के जनसंपर्क अधिकारी से संपर्क किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला था। जवाब मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान घायल हुई थीं सोनिया सहरावत

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) में तैनात सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान झड़प में घायल हो गई थीं। इसके बाद वह सीजेपी के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा सबसे चर्चित चेहरा बन गईं। उस दिन सोनिया सहरावत कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात आरएएफ की टीम का हिस्सा थीं। झड़प के अगले दिन उनके सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर की गई एक इंस्टाग्राम स्टोरी तेजी से वायरल हो गई। इस पोस्ट की सीजेपी और कई विपक्षी नेताओं ने आलोचना की, जिसके बाद फोर्स ने इसकी जांच शुरू कर दी। बाद में यह पोस्ट हटा दी गई।

सूत्रों के मुताबिक, हिंसा के दौरान सोनिया सहरावत के कंधे में चोट लगी और उन्हें फ्रैक्चर भी हुआ। उनका इलाज किया गया, लेकिन 20 जुलाई के बाद से उन्होंने दोबारा ड्यूटी जॉइन नहीं की है। फिलहाल वह स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बुधवार को सोनिया सहरावत अन्य घायल जवानों के साथ सीआरपीएफ मुख्यालय पहुंचीं। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान सीआरपीएफ के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने भी उनसे मुलाकात की।

अब जांच के दायरे में अकाउंट

असिस्टेंट कमांडेंट  सोनिया सहरावत सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 6.28 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वह यहां अक्सर अपनी निजी जिंदगी और कभी-कभी वर्दी में ड्यूटी से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो साझा करती हैं। हालांकि, हाल ही में वायरल हुई उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी के बाद अब उनकी सोशल मीडिया गतिविधियां आधिकारिक जांच के दायरे में आ गई हैं। इस बीच, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने बुधवार को सोनिया सहरावत और प्रदर्शन के दौरान घायल हुए अन्य सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने प्रदर्शन के दौरान मुश्किल हालात में कानून-व्यवस्था संभालने के लिए जवानों की सराहना की और उनके काम की प्रशंसा की।

सीआरपीएफ की सोशल मीडिया नीति क्या कहती है?

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने अपने जवानों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करने को लेकर स्पष्ट नियम बनाए हैं। इन नियमों के अनुसार, जवानों को किसी भी पोस्ट में तथ्य और निजी राय के बीच साफ अंतर रखना चाहिए। साथ ही, सोशल मीडिया, ब्लॉग या किसी भी ऑनलाइन मंच पर साझा किए गए कंटेंट की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी। जवानों को यह भी साफ लिखने की सलाह दी गई है कि उनकी निजी राय सरकार या सीआरपीएफ का आधिकारिक रुख नहीं है। सीआरपीएफ ने अपने कर्मियों को सरकारी नीतियों की सार्वजनिक आलोचना करने और सोशल मीडिया पर राजनीतिक या धार्मिक टिप्पणी करने से भी मना किया है। बल का कहना है कि पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें अधिकारियों की सोशल मीडिया पोस्ट को संगठन के नेतृत्व ने उचित नहीं माना था।

बल की ओर से जारी सलाह में जवानों से यह भी कहा गया है कि वे अपने परिवार और दोस्तों को सोशल मीडिया के खतरों के बारे में जागरूक करें, ताकि वे अनजाने में कोई संवेदनशील जानकारी साझा न कर दें। इसके अलावा, परिवार की निजता का ध्यान रखने, जरूरत न होने पर लोकेशन और जियो-टैगिंग बंद रखने, निजी अकाउंट की सेटिंग का इस्तेमाल करने और संवेदनशील या विवादित मुद्दों पर टिप्पणी करते समय पूरी सावधानी बरतने की भी सलाह दी गई है।

राहुल गांधी का पीएम मोदी पर पलटवार, बोले- युवाओं का भविष्य आपने बर्बाद किया, धर्मेंद्र प्रधान को हटाइए

CJP Protest : rahul gandhi answer to PM Modi

छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फास्ट ट्रेक कोर्ट के एलान पर लोकसभा में विपक्ष नेता राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया और इसके जिम्मेदार व्यक्तियों को संरक्षण दिया। ALSO READ: CJP Protest : आख़िर पेपर लीक पर बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, किया फास्ट ट्रेक कोर्ट का ऐलान

 

राहुल गांधी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है। आपने न सिर्फ हमारी education system पर पूरा कब्ज़ा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया – और इसके ज़िम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें साफ़ हैं: धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं। छात्रों से माफ़ी मांगे। छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। ALSO READ: प्रीति जिंटा का छात्रों को समर्थन, सता रहा है CJP प्रोटेस्ट हाईजैक होने का डर

क्या बोले पीएम मोदी?

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच पेपर लीक पर फास्ट ट्रेक कोर्ट का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड मिलेगा। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पीएम की घोषणा के बाद भी छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।

 

पीएम मोदी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा- देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ALSO READ: CJP प्रदर्शन के कारण आज भी 16 मेट्रो स्टेशन बंद, DMRC ने जारी की सूची

 

गौरतलब है कि नीट पेपर लीक मामले में संसद से सड़क तक बवाल मचा हुआ है। सरकार संसद से जंतर मंतर तक गतिरोध तोड़ने का हरसंभव प्रयास कर रही है। सोनम वांगचुक लंबे समय से भूख हड़ताल कर रहे हैं। सीजेपी के प्रदर्शनकारी जंतर मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हुए हैं। हालांकि सरकार आंदोलनकारियों की इस मांग से सहमत नजर नहीं आ रही है। युवा प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं तो पिछले 4 दिनों से संसद विपक्ष के हंगामे की वजह से ठप है।