अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। द यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की IRGC ने मंगलवार सुबह कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर कम से कम तीन ड्रोन से हमला किया। फिलहाल किसी नुकसान या हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उधर, यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि ओमान के तट के पास एक मालवाहक जहाज अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया। एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है और जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसके पास समझौते का आखिरी मौका है। उन्होंने दोहराया कि बातचीत नाकाम रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स.. 1. अमेरिका-ईरान वार्ता की तारीख और जगह अब तक तय नहीं: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत को लेकर अभी तक तारीख और स्थान तय नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान और कतर संभावित मेजबान देशों के तौर पर चर्चा में हैं और दोनों देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। 2. ईरान की नई रणनीति- जंग नहीं, अमेरिका पर दबाव बढ़ाना: रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अब सीधी सैन्य जीत के बजाय समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और अहम शिपिंग रूट्स पर दबाव बनाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों की लागत बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है। 3. ईरान का दावा- होर्मुज के ऊपर उड़ रहा रीपर ड्रोन मार गिराया: IRGC ने दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ रहे MQ-9 रीपर ड्रोन को एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि ड्रोन किस देश का था। 4. अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाने के नए विकल्प तलाश रहा: CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अपने सैन्य विश्लेषकों से ईरान पर दबाव बढ़ाने और उसे सजा देने के लिए नए सुझाव मांगे हैं। अधिकारियों ने इसे असामान्य कदम बताया है। 5. हूती धमकी के बाद 6 सऊदी सुपरटैंकरों ने रास्ता बदला: यमन के हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद छह सऊदी सुपरटैंकरों ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से लंबा समुद्री रास्ता अपनाया। इससे क्षेत्र में शिपिंग सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
इस्लामाबाद में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी रिजवान हनीफ ने दावा किया है कि पिछले तीन-चार साल में उनके संगठन के 30 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। उसके मुताबिक ये हमले पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलकोट और मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने किए। उसने आरोप लगाया कि ये हमलावर भारतीय एजेंट थे। इससे जुड़ा एक वीडियो सामने आया है। इसमें हनीफ कहता है, हमारे लोगों को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने आजाद कश्मीर में अमन और चेन से नहीं रहने दिया। अपने एजेंट्स के जरिए उन्होंने हमारे लोगो को शहीद किया। पाकिस्तान पहले भी भारत पर ऐसे आरोप लगा चुका पाकिस्तान इससे पहले भी अपनी सरजमीं पर आतंकियों की हत्याओं के लिए भारत पर आरोप लगाता रहा है। जनवरी 2024 में तत्कालीन विदेश सचिव मुहम्मद साइरस सज्जाद काजी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि भारतीय एजेंसियां पाकिस्तान में सीमा पार टारगेट किलिंग की घटनाओं में शामिल हैं। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। इसके कुछ महीने बाद, अप्रैल 2024 में ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 2020 के बाद पाकिस्तान में करीब 20 आतंकियों और उग्रवादियों की अज्ञात हमलावरों ने हत्या की। इनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से जुड़े कई लोगों के नाम भी शामिल बताए गए थे। रिपोर्ट में पाकिस्तानी अधिकारियों और कथित खुफिया सूत्रों के हवाले से इन घटनाओं के पीछे भारतीय एजेंसियों की भूमिका होने का दावा किया गया था। हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने द गार्डियन की रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया था। मंत्रालय ने इसे झूठा और दुर्भावनापूर्ण भारत-विरोधी प्रचार बताया था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा था कि दूसरे देशों में टारगेट किलिंग करना भारत सरकार की नीति नहीं है। 40 साल पहले हुआ लश्कर ए तैयबा का गठन लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना 1987 में पाकिस्तान में हुई थी। यह संगठन सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान बने जिहादी नेटवर्क से निकला था। ओसामा बिन लादेन के मेंटर माने जाने वाले अब्दुल्ला अज्जाम और उसके दो साथियों ने मिलकर मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद नाम के धार्मिक संगठन की स्थापना की। मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद संगठन का सशस्त्र (मिलिटेंट) विंग बाद में लश्कर-ए-तैयबा कहलाया। अरबी में इसका अर्थ है पवित्र लोगों की सेना। शुरुआती दौर में संगठन के लड़ाके अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ लड़ने के लिए भेजे जाते थे। 1989 में सोवियत सेना की वापसी के बाद संगठन का फोकस जम्मू-कश्मीर पर आ गया। इसी साल पेशावर में एक बम धमाके में अब्दुल्लाह अज्जाम की मौत हो गई। इसके बाद हाफिज सईद ने इस संगठन की कमान संभाल ली। भारत, अमेरिका और कई पश्चिमी देशों का आरोप रहा है कि लश्कर-ए-तैयबा को लंबे समय तक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन मिलता रहा। पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर इन आरोपों से इनकार करता है।

पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर अगले साल होने वाले पाकिस्तान सुपर लीग का हिस्सा होंगे लेकिन एक पाकिस्तानी के तौर पर नहीं बल्कि एक ब्रिटिश सदस्य के तौर पर। हाल ही में एक पॉडकास्ट ( विस्डन पॉड ) में उन्होंने यह पुष्टि की।गौरतलब है कि आमिर लंबे समय से ब्रिटेन के नागरिक हैं।
| PSL 2027
Mohammad Amir has confirmed on Wisden Pod that he'll qualify as an overseas player for next year's PSL.
Played this year's PSL as a local for Pindiz & is currently registered as a local for Rockets in The Hundred due to his British passport.…
— T20 Tracker (@t20tracker) August 3, 2026
आमिर ने सितंबर 2016 में एक ब्रिटिश नागरिक नरगिस मलिक से शादी की थी और वह जीवनसाथी (स्पाउज) वीजा के योग्य थेजो उन्हें 30 महीने के लिए इंग्लैंड में रहने की अनुमति देता है। अब वह स्थायी रूप से इंग्लैंड के नागरिक हैं। वह एक घर खरीदने की योजना भी बना चुके है।
उन्होंने 2020 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया था। लेकिन उन्होंने अपना मन बदल लिया और टी20 विश्व कप 2024 में खेलने के लिए वापसी की।पाकिस्तान के विवादास्पद बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर ने टी20 विश्व कप में खेलने के लिए संन्यास से बाहर आने के महीनों बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दोबारा संन्यास की घोषणा की।
आमिर को स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों में 2010 से 2015 के बीच पांच साल के लिए क्रिकेट से प्रतिबंधित कर दिया गया था।मोहम्मद आमिर किस स्तर के गेंदबाज है इसका अंदाजा इस ही बात से लगाया जा सकता है कि संन्यास के लगभग 6 महीने तक वह आईसीसी वनडे रैंकिंग में टॉप 10 गेंदबाजों में शामिल थे।
मानसिक रुप से प्रताड़ित होने पर लिया था फैसला
गौरतलब है नवंबर 2020 में आमिर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला करते हुए आरोप लगाया कि उनका राष्ट्रीय बोर्ड प्रबंधन उन्हें ‘मानसिक रूप से प्रताड़ित’ कर रहा है।
वकार ने कसा था तंज
आमिर को न्यूजीलैंड दौरे के लिए पाकिस्तान की टीम में जगह नहीं दी गई थी। गेंदबाजी कोच वकार यूनिस ने कहा था कि उन्होंने काम के बोझ के कारण टेस्ट क्रिकेट को अलविदा नहीं कहा था और इसके पीछे के कारणों के बारे में यह तेज गेंदबाज ही बेहतर बता सकता है।
आमिर ने सीमित ओवरों के क्रिकेट पर ध्यान लगाने के लिए साल 2019 में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया था क्योंकि उन्हें लगा कि उनका शरीर सभी प्रारूपों में खेलने के बोझ का सामना नहीं कर सकता। इस तेज गेंदबाज ने 2009 में पदार्पण के बाद 36 टेस्ट में 119 विकेट हासिल किए।
विवादों से रहा है पुराना नाता
स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों में आमिर को साल 2010 से 2015 तक प्रतिबंध का सामना भी करना पड़ा। कप्तान सलमान बट, आमिर और मोहम्मद आसिफ को इंग्लैंड दौर पर फिक्सिंग का दोषी पाए जाने के बाद 2011 में आईसीसी ने 5 साल के लिए निलंबित कर दिया था।
पूरा करियर खेलते तो तोड़ते कई रिकॉर्ड
आमिर पाकिस्तान की उस टीम का हिस्सा थे जिसने 2009 विश्व टी20 कप जीतने के अलावा 2017 में चैंपियन्स ट्रॉफी खिताब जीता। जिस समय वह स्पॉट फिक्सिंग विवाद में फंसे थे उस समय उनकी उम्र महज 17 साल की थी। 29 वर्षीय मोहम्मद आमिर अगर अपना पूरा क्रिकेट करियर खेल जाते तो शायद उनके नाम गेंदबाजी के बड़े बड़े रिकॉर्ड होते लेकिन ऐसा हो ना सका।
Indian Rail Border Project: बदलती रीजनल मोबिलिटी और रणनीतिक चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। ‘ब्लूमबर्ग’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत अपनी स्ट्रैटिजिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की कोशिशों के तहत चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती अपनी सीमाओं पर रेलवे नेटवर्क के विस्तार और अपग्रेडेशन के लिए लगभग ₹45000 करोड़ ($4.7 बिलियन) के निवेश की योजना बना रहा है। आने वाले 18 से 24 महीनों के भीतर लागू होने वाली यह परियोजना अगले दो वर्षों के लिए नियोजित कुल रेलवे इंफ्रा आउटले का करीब 22 फीसदी हिस्सा है।
इन सीमावर्ती राज्यों में बिछेगा रेलवे का जाल
रिपोर्ट के मुताबिक इस डेवलपमेंट से जुड़े लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस खर्च का इस्तेमाल देश के संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों में नई पटरियां बिछाने, नए प्लेटफॉर्म बनाने और नेटवर्क को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। इस योजना में पाकिस्तानी सीमा से लगते पश्चिमी राज्य पंजाब और राजस्थान, बांग्लादेश सीमा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर से सटे पश्चिम बंगाल और असम के रणनीतिक क्षेत्र, चीन सीमा के पास और सुदूर पर्वतीय क्षेत्र वाले हिमाचल और पूर्वोत्तर के राज्य शामिल हैं।
आपको बता दें कि ये नया प्लान भारत सरकार के सीमावर्ती क्षेत्रों में रेलवे नेटवर्क, पुल और सुरंगों बनाने के उस $3.4 बिलियन ($340 करोड़) के प्लान से भी बड़ा है, जिसकी जानकारी पहले सामने आई थी।
संवेदनशील सीमाओं पर बदलती रणनीतिक स्थितियां
सीमावर्ती कनेक्टिविटी पर भारत का ये फोकस तब सामने आया है जब पड़ोसी देशों के साथ संबंध नए फेज में आगे बढ़े हैं। 6 साल पहले हुई घातक झड़प के बाद चीन के साथ संबंधों में अब स्थिरता आई है। आपको बता दें कि पिछले साल पाकिस्तान के साथ एक ब्रीफ कॉन्फ्लिक्ट देखने को मिला था। इसके अलावा साल 2024 में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक उलटफेर ने भारत के पहले से स्थिर साझेदारी के संबंधों को जटिल बना दिया है।
नागरिक सुविधा के साथ सैन्य लॉजिस्टिक्स को मजबूती
इस भारी निवेश से डुअल यूजर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसका मतलब है कि ये सिविलियन रेलवे नेटवर्क होंगे जिनका इस्तेमाल आम नागरिकों की आवाजाही के लिए तो होगा ही, साथ ही आपात स्थिति में ये सैन्य लॉजिस्टिक्स को भी पूरा सहारा देंगे।
हिमालयी क्षेत्रों, सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वोत्तर के राज्यों जैसी संवेदनशील सीमाओं तक उच्च क्षमता वाले, ऑल-वेदर रेल नेटवर्क को मजबूत करके ट्रूप मोबलाइजेशन टाइम को भी स्ट्रैटिजकली कम किया जा सकता है। इसके साथ ही रिजनल प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ यह अहम सप्लाई लाइन को भी सुरक्षित करता है।
सीमावर्ती बुनियादी ढांचे पर पीएम मोदी का जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संवेदनशील क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को लगातार प्राथमिकता दी है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार ने इसे लेकर लगातार कदम उठाए हैं। पाकिस्तान सीमा के पास 1450 किलोमीटर नई सड़कें बनाई गई हैं। डोकलाम के करीब इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर है।
पिछले साल कश्मीर घाटी को बाकी भारत से जोड़ने वाले दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल का उद्घाटन किया गया। पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर भारत में लगभग 1700 किलोमीटर नई रेल लाइनें जोड़ी गई हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर और सैन्य विमानों के इस्तेमाल के लिए 1962 से निष्क्रिय पड़े एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से सक्रिय किया गया है।
चीन की ओर से भी जारी है निर्माण
रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तरफ चीन ने भी 2017 में डोकलाम में हुए सैन्य गतिरोध के बाद से अपनी ओर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण काफी तेज कर दिया है। चीन अपनी सीमा में एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है। चीन के इस विस्तार ने उपकरण और सैनिकों की तेजी से आवाजाही के जरिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को बढ़ाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अभी भारत के रेल मंत्रालय की ओर से इस निवेश योजना पर कोई आधिकारिक बयान या टिप्पणी नहीं आई है।
Pakistan Blast News: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी राज्य खैबर पख्तूनख्वा के स्वात जिले में रविवार को आतंकवाद विरोधी शांति रैली को निशाना बनाकर किए गए एक भीषण आत्मघाती हमले में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई जबकि दो दर्जन से अधिक (24 से ज्यादा) लोग घायल हो गए। मृतकों में पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। यह आत्मघाती विस्फोट स्वात घाटी के कबाल शहर में हुआ। यहां लोकल स्वात अमन जिरगा द्वारा आयोजित शांति रैली के लिए एक थाने के पास सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए थे। प्रदर्शनकारी इलाके में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच आतंकवाद विरोधी नारे लगा रहे थे और शांति की मांग कर रहे थे।
गेट पर रोके जाने के बाद हमलावर न खुद को उड़ाया
स्वात क्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) फिदा हुसैन ने AFP को बताया कि आत्मघाती हमलावर ने विरोध स्थल पर स्थित पुलिस स्टेशन में घुसने की कोशिश की थी। मुख्य द्वार पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने उसे रोक लिया जिसके बाद हमलावर ने अपनी आत्मघाती जैकेट में विस्फोट कर दिया। डिस्ट्रिक पुलिस चीफ उमर खान और प्रांतीय आपातकालीन सेवा के प्रवक्ता बिलाल फैजी ने पुष्टि की कि हमले में कम से कम 14 लोगों की जान चली गई है और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। पुलिस के मुताबिक कई घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
किसी संगठन ने नहीं ली जिम्मेदारी, राहत और बचाव कार्य जारी
विस्फोट के तुरंत बाद बचाव और आपातकालीन दल मौके पर पहुंचे और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया। पुलिस और सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। स्वात घाटी में पिछले कुछ महीनों में उग्रवादी हिंसा में बढ़ोतरी देखी गई है। इसके विरोध में लोग इस रैली में तख्तियां लेकर शांति की मांग कर रहे थे।
खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ता उग्रवाद और TTP का साया
जिस इलाके में यह हमला हुआ वहां पाकिस्तानी सुरक्षा बल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के बढ़ते उग्रवाद से जूझ रहे हैं। एएफपी के मुताबिक रविवार को ही प्रांतीय राजधानी पेशावर में एक अलग घर के बने बम विस्फोट में चार पुलिस अधिकारी घायल हो गए थे, जिसकी जिम्मेदारी TTP ने ली थी। पाकिस्तान लगातार अपने सीमावर्ती प्रांतों में होने वाले इन हमलों के लिए अफगानिस्तान में मौजूद उग्रवादियों को जिम्मेदार ठहराता है। हालांकि काबुल की तालिबान सरकार इन आरोपों को बार-बार खारिज करती रही है। पाकिस्तानी सेना के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक आतंकवादी हमलों और आतंकवाद विरोधी अभियानों में 819 सुरक्षाकर्मी और नागरिक मारे जा चुके हैं।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले में रविवार को एक पुलिस स्टेशन के बाहर आत्मघाती हमला हुआ। इसमें 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 लोग घायल हुए हैं। पाकिस्तानी मीडिया डॉन के मुताबिक, हमले के समय पास के काबल चौक पर आतंकवाद के खिलाफ शांति रैली चल रही थी। स्वात के जिला पुलिस अधिकारी उमर खान के मुताबिक, इसी दौरान एक युवक काबल पुलिस स्टेशन के गेट पर पहुंचा। पुलिस वालों ने उसे रोककर तलाशी लेने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं रुका। इससे पहले पुलिस हरकत में आती, युवक को खुद को ब्लास्ट कर दिया। धमाका जिस वक्त हुआ तब रैली में आखिरी वक्ता का भाषण हो रहा था। धमाके की आवाज सुनकर रैली में मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। घायलों को सैदू शरीफ टीचिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस हाई अलर्ट पर है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और सबूत जुटाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। घटना की तस्वीरें… खबर अपडेट हो रही है… पाकिस्तान में धमाकों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… 1. पाकिस्तान में दो बम धमाके, 7 लोगों की मौत:रिमोट कंट्रोल से गाड़ियों को निशाना बनाया, अबतक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी बन्नू जिले में शनिवार को सड़क किनारे हुए दो बम धमाकों में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। पुलिस के मुताबिक, पहला धमाका वजीर उपखंड के फांग मूसा खेल इलाके में हुआ। इसमें एक यात्री गाड़ी को निशाना बनाया गया। गाड़ी डोमेल की ओर जा रही थी, तभी रिमोट कंट्रोल से धमाका किया गया। इसमें 5 लोगों की मौत हो गई और 3 अन्य घायल हो गए। पूरी खबर पढ़ें… 2. ISIS ने इस्लामाबाद शिया मस्जिद में धमाके की जिम्मेदारी ली:PAK ने भारत को जिम्मेदार बताया, भारत बोला- पाकिस्तान खुद को धोखा दे रहा पाकिस्तान में एक्टिव आतंकी संगठन ISIS ने इस्लमाबाद की शिया मस्जिद में हुए ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली है। इस मामले में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में इस हमले का मास्टरमाइंड भी शामिल है। इस हमले में 31 लोग मारे गए थे और 169 अन्य घायल हो गए थे। आत्मघाती हमलावर ने खदीजा अल-कुबरा मस्जिद (इमामबाड़ा) में खुद को उड़ा लिया था। पूरी खबर पढ़ें…
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। जैवलिन थ्रो के फाइनल में नदीम शीर्ष आठ खिलाड़ियों में भी जगह बनाने में सफल नहीं हुए और नौवें स्थान पर रहकर प्रतियोगिता से बाहर हो गए। वहीं ओलंपिक विनर के खराब प्रदर्शन के बाद उनके खेल और तैयारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों के मुताबिक, अरशद नदीम के खराब प्रदर्शन की वजह सिर्फ उनका फॉर्म ही नहीं, बल्कि तैयारी के दौरान आई दिक्कतें भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
वहीं कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के खेल अधिकारियों ने उन्हें जरूरी सुविधाएं और पूरा सहयोग नहीं दिया, जिससे उनकी तैयारी प्रभावित हुई।
पाकिस्तान ने नहीं दी कोई मदद
रिपोर्टों के अनुसार, वह पूरी तरह फिट नहीं थे और उनकी तैयारियां भी प्रभावित रहीं। PTI की एक रिपोर्ट में, एथलीट के करीबी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि, पिछले साल लंबे समय से अरशद नदीम के कोच रहे सलमान बट को बनाए रखने को लेकर हुए विवाद के बाद पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) ने उनसे दूरी बना ली। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद फेडरेशन ने ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट को अपनी तैयारियां खुद संभालने के लिए छोड़ दिया और उनकी ट्रेनिंग से जुड़ी कई मांगों पर भी कोई जवाब नहीं दिया।
नहीं जारी किए फंड
रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड ने विदेशी कोच और ट्रेनर रखने के लिए जरूरी फंड भी जारी नहीं किए। इसके चलते अरशद नदीम को लाहौर में स्थानीय स्टाफ के साथ ही प्रैक्टिस करना पड़ा। बताया गया कि पिछले वर्षों की तरह इस बार उन्हें दक्षिण अफ्रीकी कोच टेरसियस लिबेनबर्ग के साथ काम करने का मौका नहीं मिला। इसके बजाय उन्होंने लाहौर और ग्लासगो के अलग-अलग मौसम के बावजूद अपने पुराने कोच सलमान बट की देखरेख में ही तैयारियां पूरी कीं।
अरशद नदीम के कोच सलमान बट ने भी माना कि वह कॉमनवेल्थ खेलों में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के करीब भी नहीं थे और पर्याप्त तैयारी के बिना प्रतियोगिता में उतरे। बताया गया कि खेलों से पहले उन्होंने स्विट्जरलैंड में सिर्फ एक तैयारी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था।
मलेशिया में पाकिस्तान के युवक के साथ पकड़ी गई मोगा की लड़की गायब हो गई है। पंजाब में रह रही लड़की की नानी ने दोहती को वापस लाने की गुहार लगाई है। नानी का एक वीडियो भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि इसकी मां की मौत हो चुकी है और उसने ही इसे पालकर बड़ा किया है। उन्होंने कहा कि दोहती की इच्छा विदेश जाने की थी, इसलिए उसे 3 साल पहले ही विदेश भेजा था। उसे नहीं पता है कि वह वहां किसके साथ रह रही है। उन्होंने सोचा था कि दोहती विदेश जाकर कमाएगी तो इसके बाद उसकी शादी अच्छे घर में कर देंगे। अब उन्हें लोगों से पता चला है कि उसके साथ वहां कुछ लड़कों ने पाकिस्तानी के साथ घूमने के चलते पिटाई की है। घटना वाले दिन से दोहती गायब है और उसके साथ कोई भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्हें डर है कि उसके साथ कुछ अनहोनी घटना न हुई हो। हाईवे पर घेरकर थप्पड़ मारे थे
2 दिन पहले मलेशिया के एक हाईवे पर पंजाबी युवती के साथ बीच सड़क मारपीट का VIDEO सोशल मीडिया पर सामने आया था। इसमें कुछ पंजाबी युवक युवती को घेरकर उससे बहस करते हैं, थप्पड़ मारते हैं और उसके साथ मौजूद पाकिस्तानी युवक से भी धक्का-मुक्की करते दिखाई देते हैं। वीडियो शेयर करने वाले युवकों का दावा था कि युवती पंजाब के मोगा की रहने वाली है और मलेशिया में पाकिस्तानी युवक के साथ रह रही थी। वे उसे भारत डिपोर्ट करने की मांग करते भी दिखाई देते हैं। झगड़े के बाद मलेशिया पुलिस ने पूछताछ के लिए उठाया
हाईवे पर लड़ाई-झगड़े के वीडियो के बाद मलेशिया पुलिस ने सभी लड़कों को पैसे के विवाद में पूछताछ के लिए उठा लिया है। वीडियो में लड़के पाकिस्तानी लड़के के साथ हैप्पी नामक पंजाबी लड़के से पैसे का लेन-देन बता रहे थे। अभी मलेशिया पुलिस युवकों से पूछताछ कर रही है। रूबीना की टीम ने की पुलिस को शिकायत
मलेशिया में समाजसेवी संस्था चला रही पंजाबी महिला रूबीना ने लड़की के गायब होने की शिकायत मलेशिया पुलिस को कर दी है। रूबीना ने शिकायत को लेकर वीडियो जारी कर कहा कि मोगा की रहने वाली लड़की चाहे पंजाबियों के कब्जे में है या फिर पाकिस्तानी या बंगलादेशियों के, उसे सही सलामत उनकी संस्था के हवाले कर दें ताकि उसे पंजाब पहुंचाया जा सके। रूबीना ने कहा कि लड़की का फोन भी बंद आ रहा है, इसके चलते उसके साथ कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।
Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला फिलहाल टाल दिया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान और मध्य पूर्व के कुछ अन्य देशों ने संभावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। इसके बाद उन्होंने वैश्विक हित को ध्यान में रखते हुए सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया। ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि वॉशिंगटन ने ईरान पर तय सैन्य हमला इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि तेहरान और मध्य पूर्व के दूसरे देशों ने एक प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए और समय मांगा था।
इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल होगा। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ट्रंप ने लिखा कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ ऐसी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, जिसकी ताकत और क्षमता द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखी गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि बातचीत में प्रगति होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने हमले को फिलहाल रद्द करने का निर्णय लिया।
ट्रंप के मुताबिक, ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तत्काल, पूरी तरह और बिना किसी बाधा के खोलना तथा ईरानी परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समझौता हो जाता है तो यह पूरी दुनिया और ईरान दोनों के लिए फायदेमंद होगा।
इजरायल ने अमेरिका का किया सपोर्ट
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि इजरायल ने भी वार्ता जारी रहने तक सैन्य कार्रवाई टालने के फैसले में अमेरिका का साथ दिया है। उन्होंने सभी पक्षों से जल्द से जल्द समझौता पूरा करने की अपील की। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका, इजरायल या क्षेत्र का कोई अन्य देश ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई करता है, तो तेहरान उसका निर्णायक जवाब देगा।
अराघची ने यह बात तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ अलग-अलग बातचीत के दौरान कही। तुर्किये के विदेश मंत्री ने भी पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच जारी वार्ता की ताजा स्थिति पर चर्चा हुई।
हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर ईरान या अन्य संबंधित देशों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए संभावित समझौते और हमले को टालने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत जारी रहने के दौरान सैन्य कार्रवाई में देरी करने में इजरायल भी अमेरिका के साथ शामिल हो गया है।
नेपाल के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा, जिन्हें लोग ‘निम्सदाई’ के नाम से भी जानते थे, की पाकिस्तान में स्थित दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन (बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरना) की चपेट में आने से मौत हो गई। इसकी जानकारी उनकी एडवेंचर कंपनी और अन्य लोगों ने इंस्टाग्राम पर साझा की।
शुक्रवार को ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन होने के बाद निर्मल पुर्जा और पांच अन्य पर्वतारोही लापता हो गए थे। इसके बाद लगातार उनकी तलाश की जा रही थी। इस दुखद हादसे से कुछ घंटे पहले निर्मल पुर्जा ने भारत के पत्रकार विष्णु सोम को एक वॉयस मैसेज भी भेजा था। माना जा रहा है कि यह उनका आखिरी संदेश था।
कंपनी ने पोस्ट कर दी जानकारी
निर्मल पुर्जा की एडवेंचर कंपनी एलीट एक्सपेड ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट जारी कर उनकी मौत की पुष्टि की। कंपनी ने कहा कि ब्रॉड पीक पर हुए हिमस्खलन के बाद निर्मल पुर्जा का निधन हो गया। साथ ही अभियान में शामिल अन्य सदस्य भी इस हादसे में जीवित नहीं बच सके। कंपनी ने अपने संदेश में कहा कि यह सभी के लिए बेहद दुखद क्षण है। उन्होंने केवल निर्मल पुर्जा ही नहीं, बल्कि इस हादसे में जान गंवाने वाले उनके साथी पर्वतारोहियों और गाइड पुर बहादुर गुरुंग और निमा शेरपा को भी श्रद्धांजलि दी।कंपनी ने कहा कि उनकी संवेदनाएं सभी मृतकों के परिवार, दोस्तों और करीबियों के साथ हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस कठिन समय में परिवारों की निजता का सम्मान किया जाए।
Brother, you lived every day with one purpose—To make Nepal proud and you did. I was fortunate to call you a friend and a brother. To witness the world celebrate your extraordinary achievements. Today, Nepal has lost a hero and I have lost a brother. See you on the other side, my… pic.twitter.com/18CVcmdRQN
— Nirvana Chaudhary (@BeingNirvana) August 1, 2026
ब्रॉड पीक में हुई मौत
ब्रॉड पीक काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है। यह पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान और चीन के शिनजियांग क्षेत्र की सीमा के पास स्थित है। यह चोटी के2 पर्वत के बेहद करीब है। रिपोर्ट के अनुसार, हिमस्खलन ब्रॉड पीक के सामान्य वेस्ट रिज मार्ग पर हुआ। उस समय पर्वतारोही करीब 21,600 से 21,850 फीट की ऊंचाई पर मौजूद थे, जहां अचानक बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया।
निर्मल पुर्जा की एडवेंचर कंपनी एलीट एक्सपेड ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि दुनिया ने पर्वतारोहण के सबसे महान पर्वतारोहियों में से एक को खो दिया है। कंपनी के अनुसार, निर्मल पुर्जा अपने साहस, विनम्र स्वभाव और मजबूत इरादों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने अपने काम और उपलब्धियों से दुनिया भर के लाखों लोगों को बड़े सपने देखने और खुद पर भरोसा रखने की प्रेरणा दी। कंपनी ने कहा कि निर्मल पुर्जा का मानना था कि इंसान अपनी सोच से कहीं ज्यादा बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। यही सोच उन्होंने अपने जीवन और अभियानों के जरिए लोगों तक पहुंचाई और अनगिनत लोगों को अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए प्रेरित किया।
पोस्ट में यह भी कहा गया कि एलीट एक्सपेड, निम्सदाई फाउंडेशन, स्काईडाइव निम्सदाई और निम्सदाई स्टोर जैसी संस्थाओं को आगे बढ़ाने में उनकी दूरदृष्टि, नेतृत्व और मजबूत संकल्प की सबसे बड़ी भूमिका रही। कंपनी ने कहा कि निर्मल पुर्जा की विरासत हमेशा उन लोगों के जरिए जीवित रहेगी, जिनकी जिंदगी उन्होंने बदली और जिन्हें अपने सपनों को पूरा करने का हौसला दिया।
रचा था ये इतिहास
निर्मल पुर्जा पहले ब्रिटेन की ब्रिगेड ऑफ गोरखा और रॉयल मरीन की स्पेशल बोट सर्विस (एसबीएस) में भी सेवाएं दे चुके थे। सेना से अलग होने के बाद उन्होंने पूरी तरह पर्वतारोहण को अपना करियर बनाया और दुनिया भर में कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए। साल 2019 में उन्होंने अपने ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ अभियान के तहत केवल 6 महीने और 6 दिन में 8,000 मीटर से ऊंची दुनिया की सभी 14 चोटियों पर चढ़ाई पूरी कर इतिहास रच दिया। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसके बाद साल 2021 में निर्मल पुर्जा उन 10 नेपाली पर्वतारोहियों की टीम का हिस्सा भी रहे, जिसने पहली बार सर्दियों के मौसम में दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी के2 पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी।

