7 साल में ₹5 लाख से बनाया ₹1.30 करोड़ का पोर्टफोलियो! ट्रेडर की इस एक सीक्रेट ट्रिक ने बदली किस्मत, जानिए पूरा फॉर्मूला

Share Market Success Story: शेयर बाजार और ट्रेडिंग को लोग अक्सर रातों-रात अमीर बनने की ‘जैकपॉट मशीन’ समझते हैं। लेकिन बिना सोचे-समझे लगाया गया दांव आपको अमीर बनाने के बजाय कंगाल भी कर सकता है! इसी धारणा को पूरी तरह से झुठलाते हुए एक ट्रेडर ने साबित कर दिया कि बाजार में असली पैसा तुक्के से नहीं, बल्कि अनुशासन और सही सिस्टम से बनता है।

महज ₹5 लाख की शुरुआती पूंजी से सफर शुरू करने वाले इस ट्रेडर ने 7 सालों के उतार-चढ़ाव, भारी घाटे और अपनी गलतियों से सीखते हुए ₹1.30 करोड़ का विशाल पोर्टफोलियो खड़ा कर दिया। आइए आपको बताते हैं बिना किसी शॉर्टकट के शेयर बाजार में मिली इस शानदार कामयाबी की पूरी इनसाइड स्टोरी।

₹5 लाख से शुरुआत और ‘स्टॉक टिप्स’ की शुरुआती नाकामी

ट्रेडर ने अपने बाजार के सफर की शुरुआत साल 2018-19 में करीब ₹5 लाख के साथ की थी। नए निवेशकों की तरह वे भी शुरुआत में लोगों के दिए ‘स्टॉक टिप्स’ पर आंख मूंदकर भरोसा करते थे और मार्केट खुलते ही शेयर्स में शॉर्टिंग करते थे। हालांकि इस रणनीति से कुछ पैसे जरूर बने, लेकिन ब्रोकरेज और टैक्स चुकाने के बाद हाथ में कुछ खास नहीं बचा।

ऑप्शन बाइंग से सेलिंग का सफर और ₹10 लाख के कर्ज का झटका

शुरुआती दौर के बाद उन्होंने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में कदम रखा और ऑप्शन बाइंग शुरू की। यूट्यूब पर वित्तीय एक्सपर्ट्स का वीडियो देखने के बाद उनके सोचने का तरीका बदला और वे ‘ऑप्शन बायर’ से ‘ऑप्शन सेलर’ बनने की तरफ बढ़े।

ऑप्शन सेलिंग के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने अपने दोस्त से ₹10 लाख उधार लिए। दुर्भाग्य से यह रणनीति पूरी तरह से फेल हो गई और उन्हें भारी नुकसान हुआ। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, दोस्त का पूरा कर्ज चुकाया और अपनी गलतियों से सीख लेकर नए सिरे से पढ़ाई शुरू की।

‘StockMock’ पर बैकटेस्टिंग ने बदली पूरी किस्मत

उनकी ट्रेडिंग जर्नी में असली टर्निंग प्वाइंट तब आया जब उन्होंने StockMock प्लेटफॉर्म पर अपने ट्रेडिंग सिस्टम की नियमबद्ध बैकटेस्टिंग शुरू की। उन्होंने ‘टाइम-बेस्ड शॉर्ट स्ट्रैडल्स’ का टेस्टिंग किया और बिना किसी इमोशन में बहे कड़े अनुशासन से नियमों का पालन किया:

    • 2020 का रिटर्न: 86% का बंपर मुनाफा।
    • 2021 का रिटर्न: 83% का शानदार रिटर्न हासिल किया।
    • उन्होंने जेरोधा का 60-डे चैलेंज लगातार 17 विन के साथ अपने नाम किया।

‘सफल ट्रेडिंग रोमांचक नहीं, बल्कि बोरिंग होती है’

ओवरट्रेडिंग और लालच से बचने के लिए उन्होंने किताबें पढ़ना शुरू किया। जोएल ग्रीनब्लाट की मशहूर किताब ‘The Little Book That Beats the Market’ से प्रेरणा लेकर उन्होंने सिस्टमैटिक इन्वेस्टिंग का तरीका समझा।

आज वे F&O से मिलने वाले मुनाफे को इक्विटी में अपने बनाए सिस्टमैटिक फ्रेमवर्क के जरिए लंबे समय के लिए इन्वेस्ट करते हैं। पिछले 7 सालों में उनका वास्तविक CAGR लगभग 48% रहा है। उनका सबसे बड़ा गुरुमंत्र है, ‘मैंने सब कुछ किताबों, यूट्यूब, वेबिनार और आर्टिकल्स से सीखा है, सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।’

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़

X पर उनकी यह कहानी सामने आते ही लोगों की जबरदस्त प्रतिक्रियाएं आने लगीं। एक यूजर ने लिखा, ‘₹10 लाख के कर्ज में फेल होने के बाद आम तौर पर लोग ट्रेडिंग छोड़ देते हैं, लेकिन इन्होंने कर्ज चुकाया और सीखते रहे। यही असली कहानी है।’ दूसरे यूजर ने कहा, ‘ऑप्शन बाइंग के जाल से निकलकर सिस्टमैटिक ऑप्शन सेलिंग और बैकटेस्टिंग अपनाना ही सबसे समझदारी भरा कदम था।’

नए निवेशकों के लिए क्या है सीख?

ट्रेडर का यह सफर यह साबित करता है कि शेयर बाजार में टिके रहने के लिए ‘टिप्स’ नहीं, बल्कि ‘सिस्टम और अनुशासन’ काम आता है। अगर आप भी बाजार में लंबे समय के लिए टिकना चाहते हैं, तो बिना सीखे दांव लगाने के बजाय बैकटेस्टिंग, रिस्क मैनेजमेंट और सब्र को अपनी ताकत बनाएं।

Disclaimer: मनीकंट्रोल ने संबंधित व्यक्ति द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है। यह जानकारी पूरी तरह से  X पर उनके बयानों/पोस्ट पर आधारित है और केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है, इसे निवेश की सलाह न माना जाए।

Mukul Agrawal Portfolio: स्टार निवेशक का बदला मूड, पोर्टफोलियो में एक स्टॉक की एंट्री तो दूसरी ओर 3 की विदाई

Mukul Agrawal Portfolio: दिग्गज निवेशक मुकुल अग्रवाल के पोर्टफोलियो में पिछली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में बड़े बदलाव हुए। एक तरफ उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में एरिसइंफ्रा सॉल्यूशंस को शामिल किया तो दूसरी तरफ उन्होंने लक्ष्मी फाइनेंस समेत तीन स्टॉक्स का वजन और बढ़ाया। उन्होंने सिर्फ खरीदारी ही नहीं की बल्कि कुछ मुनाफा भी बुक किया। जून तिमाही में उनके पोर्टफोलियो से रेमंड लाइफस्टाइल समेत पांच स्टॉक्स का वजन हल्का हुआ तो तीन स्टॉक्स ऐसे रहे, जिनमें उनकी होल्डिंग या तो जीरो हो गई या 1% से नीचे आ गई। सेबी के नियमों के मुताबिक कंपनियों को सिर्फ 1% या इससे अधिक की होल्डिंग वाले शेयरहोल्डर्स के नाम का खुलासा करना अनिवार्य है।

इन स्टॉक्स में की और खरीदारी और एक की हुई एंट्री

मुकुल अग्रवाल के पोर्टफोलियो में जून 2026 तिमाही में एरिसइंफ्रा सॉल्यूशंस की एंट्री हुई। उन्होंने इसके 13 लाख शेयर खरीदे जो कंपनी में 1.6% होल्डिंग के बराबर है। इसके अलावा जून तिमाही में उन्होंने लक्ष्मी फाइनेंस में अपनी हिस्सेदारी 0.8 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बढ़ाकर 4.6% (24 लाख शेयर), वेलर एस्टेट में 0.1 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बढ़ाकर 1.6% (85 लाख शेयर) और लक्स इंडस्ट्रीज में 0.1 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बढ़ाकर 1.6% (4,65,246 शेयर) कर ली।

इन स्टॉक्स में की बिकवाली तो ये हुए बाहर

मुकुल अग्रवाल ने जून तिमाही में कुछ स्टॉक्स में अपनी होल्डिंग हल्की की। उन्होंने जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स में अपनी होल्डिंग 0.1 पर्सेंटेज प्वाइंट्स घटाकर 2.6% (19,30,920 शेयर), केआरएन हीट एक्सचेंजर में 0.1 पर्सेंटेज प्वाइंट्स कम कर 1.5% (10 लाख शेयर), इंटेलेक्ट डिजाइन एरेना में 0.2 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बेचकर 1.3% (17.90 लाख), विधि स्पेशल्टी फूड में 0.2 पर्सेंटेज प्वाइंट्स घटाकर (6,90,924 शेयर) और रेमंड लाइफस्टाइल में 0.2 पर्सेंटेज प्वाइंट्स घटाकर (7 लाख शेयर) कर ली। वहीं दूसरी तरफ रेडिको खेतान, सूर्या रोशनी और विक्रान इंजीनियरिंग के इतने शेयर बेचे कि उनकी होल्डिंग या तो जीरो हो गई या 1% से कम हो गई। इससे पहले मार्च 2026 तिमाही में रेडिको खेतान में उनकी होल्डिंग 1.1%, सूर्या रोशनी की 1.0% और विक्रान इंजीनियरिंग की 1.4% थी।

समरी

स्टॉक जून तिमाही के आखिरी में होल्डिंग बदलाव (पर्सेंटेज प्वाइंट) शेयरों की संख्या शेयर का मौजूदा भाव 52 हफ्ते का निचला स्तर (तारीख) 52 हफ्ते का हाई लेवल (तारीख)
Arisinfra Solutions1.6%नया13,00,000₹134.09₹82.18 (09/02/26)₹178.30 (23/10/25)
Laxmi Finance4.6%0.824,00,000₹124.38₹71.06 (30/03/26)₹180.90 (18/09/25)
Valor Estate1.6%0.185,00,000₹111.91₹83.50 (30/03/26)₹187.05 (13/08/25)
Lux Industries1.6%0.14,65,246₹1,188.10₹824.05 (30/03/26)₹1,823.35 (24/04/26)
J Kumar Infraprojects2.6%(-)0.119,30,920₹497.65₹425.00 (30/03/26)₹685.40 (18/08/25)
KRN Heat Exchanger1.5%(-)0.110,00,000₹1,468.30₹589.80 (27/01/26)₹1,468.30 (14/08/26)
Intellect Design Arena1.3% (-)0.217,90,000₹700.60₹595.20 (30/03/26)₹1,244.60 (03/11/25)
Vidhi Specialty Food1.4%(-)0.26,90,924₹309.90₹258.60 (30/03/26)₹410.00 (04/09/25)
Raymond Lifestyle1.2%(-)0.27,00,000₹741.20₹677.00 (03/08/26)₹1,350.00 (16/09/25)
Radico Khaitan1% के नीचे₹4,650.00₹2,500.00 (02/03/26)₹4,675.20 (13/09/26)
Surya Roshni1% के नीचे₹222.98₹187.35 (30/03/26)₹320.15 (13/08/26)
Vikran Engineering1% के नीचे₹62.22₹51.10 (30/03/26)₹118.40 (20/11/25)

4 नियम पड़े रिटेल इंवेस्टर्स पर भारी, SEBI ने लाया था खास वजह से और पड़ा ऐसा असर

Share Market New Rule: सिर्फ 3 दिनों के लिए शेयर दें किराए पर, बिना बेचे कमाई, खास स्टॉक्स के लिए आए रहा नया सिस्टम

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Ather Energy प्रेफरेंशियल इश्यू से जुटाएगी ₹1200 करोड़, शेयरहोल्डर्स से ग्रीन सिग्नल; चढ़ सकता है शेयर

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाने वाली एथर एनर्जी लिमिटेड प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए ₹1200 करोड़ तक का फंड जुटाना चाहती है। इस प्रपोजल पर कंपनी के शेयरहोल्डर्स की मंजूरी मिल गई है। 14 अगस्त को कंपनी की असाधारण आम बैठक थी। इसी में प्रपोजल पास हुआ। इसके पक्ष में 97.72 प्रतिशत वोट रहे। इस डेवलपमेंट के चलते सोमवार, 17 अगस्त को एथर एनर्जी के शेयर में तेजी देखने को मिल सकती है।

कंपनी ने जून महीने में कई तरीकों से ₹2,500 करोड़ तक जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। कहा गया था कि इन तरीकों में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), राइट्स इश्यू, प्रेफरेंशियल इश्यू और फॉरेन करेंसी कनवर्टिबल बॉन्ड (FCCB) जारी करना शामिल है। कंपनी हाल ही में ₹1,300 करोड़ का QIP लाई थी। इसे ₹10,000 करोड़ से ज्यादा की बोलियां मिलीं। QIP में देश और दुनिया के बड़े इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स ने हिस्सा लिया।

प्रेफरेंशियल इश्यू के तहत हीरो मोटोकॉर्प, एथर एनर्जी के को-फाउंडर तरुण मेहता और स्वप्निल जैन के साथ मिलकर, ₹1,260 प्रति वॉरंट के हिसाब से निवेश करेगी। यह कीमत ₹1,175.74 के फ्लोर प्राइस से 7.2 प्रतिशत ज्यादा है। स्ट्रैटेजिक इनवेस्टर इंडिया-जापान फंड ₹1,230 प्रति शेयर के हिसाब से इक्विटी शेयर खरीदेगा, जो फ्लोर प्राइस से 4.6% ज्यादा है। हीरो मोटोकॉर्प लगभग ₹960 करोड़ का निवेश करेगी, जबकि इंडिया-जापान फंड ₹200 करोड़ का निवेश करेगा। को-फाउंडर तरुण मेहता और स्वप्निल जैन दोनों ₹20-20 करोड़ का निवेश करेंगे।

Ather Energy का शेयर एक साल में 263 प्रतिशत चढ़ा

एथर एनर्जी के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर ₹1511.05 है। कंपनी का मार्केट कैप ₹59600 करोड़ से ज्यादा है। यह मई 2025 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 2980.76 करोड़ रुपये का था। एक साल में शेयर 263 प्रतिशत और 6 महीनों में 113 प्रतिशत चढ़ा है। 3 महीनों में कीमत 60 प्रतिशत और 2 सप्ताह में करीब 20 प्रतिशत उछली है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 39.58 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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जून तिमाही में घाटे में गिरावट

अप्रैल-जून 2026 ​तिमाही में एथर एनर्जी का शुद्ध कंसोलिडेटेड घाटा सालाना आधार पर कम होकर ₹51.09 करोड़ रह गया। एक साल पहले घाटा 178.23 करोड़ था। थोक बिक्री 81 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 83,173 यूनिट्स की रही, जबकि जून 2025 तिमाही में यह 46,078 यूनिट्स की थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

CM भूपेंद्र पटेल अमेरिका-कनाडा दौरे पर रवाना, Vibrant Gujarat Global Summit 2027 के लिए करेंगे रोड शो

CM भूपेंद्र पटेल अमेरिका-कनाडा दौरे पर रवाना, Vibrant Gujarat Global Summit 2027 के लिए करेंगे रोड शो

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल देर रात अमेरिका के लिए रवाना हुए हैं। वर्ष 2002 के बाद सरकारी कामकाज के सिलसिले में अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर जाने वाले वे गुजरात के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। आगामी Vibrant Gujarat Global Summit 2027 को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री का यह विदेश दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री के साथ राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी अमेरिका और कनाडा के दौरे पर गया है। इस प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव एम. के. दास, प्रधान सचिव संजीव कुमार, विक्रांत पांडे के साथ-साथ एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) एन. नटराजन, ममता वर्मा और राजीव कुमार सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। यह दौरा 17 से 24 अगस्त तक चलेगा।

 

Vibrant Gujarat Summit 2027 के लिए निवेशकों को आमंत्रण

 

मुख्यमंत्री के इस दौरे के दौरान अमेरिका और कनाडा में विभिन्न प्रमुख उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों तथा स्थानीय सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें की जाएंगी। इन बैठकों में गुजरात में निवेश की संभावनाओं और अवसरों पर चर्चा होगी। इसके अलावा Vibrant Gujarat Global Summit 2027 के लिए विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से रोड शो आयोजित किए जाएंगे। गुजरात में निवेश के अवसरों, राज्य की औद्योगिक नीतियों और विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स की जानकारी देकर उद्योगपतियों को समिट में शामिल होने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया जाएगा।

 

हर्ष संघवी सितंबर में जापान और यूरोप के दौरे पर जाएंगे

 

गुजरात सरकार की ओर से वैश्विक स्तर पर निवेश आकर्षित करने के लिए विदेशों में संपर्क और निवेश प्रोत्साहन अभियान को गति दी जा रही है। इसी कड़ी में राज्य के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी भी आगामी सितंबर में जापान और यूरोप के दौरे पर जाएंगे। इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य गुजरात में अधिक से अधिक विदेशी निवेश लाना और Vibrant Gujarat Global Summit 2027 को वैश्विक स्तर पर सफल बनाना है।

4 नियम पड़े रिटेल इंवेस्टर्स पर भारी, SEBI ने लाया था खास वजह से और पड़ा ऐसा असर

पिछले दो वर्षों में मार्केट रेगुलेटर सेबी देश के कैपिटल मार्केट को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और लेस स्पेक्यूलेटिव यानी कम सट्टेबाजी वाला बनाने के लिए कई नियम लागू किए हैं। इसका उद्देश्य रिटेल इंवेस्टर्स को बचाना, लेवरेज कम करना और रिस्क मैनेजमेंट को मजबूत करना है। ब्रोकरेज फर्म सैम्को सिक्योरिटीज के सीईओ और फाउंडर जिमीत मोदी के मुताबिक सेबी की यह पहल बेहतर तो है रेगुलेशन के साथ-साथ मार्केट की एफिसिएंसी, लिक्विडिटी और फेयर एक्सेस भी बनी रहनी चाहिए। यहां ऐसे ही 4 नियमों के बारे में बताया जा रहा है, जिनसे रिटेल इंवेस्टर्स काफी प्रभावित हुए और जिमीत मोदी ने रिटेलर्स पर इसके असर को लेकर जिक्र किया है।

4 नियम और उनके असर

1.F&O पर लगाम से घटी सट्टेबाजी लेकिन एक्सेस भी हुआ कम

सेबी ने सबसे बड़ा दखल इक्विटी डेरिवेटिव्स में दिया है। इसके तहत कॉन्ट्रैक्ट का साइज बढ़ाया गया, वीकली एक्सपायरी के ऑप्शन कम किए गए, एक्सपायरी-डे पर रिस्क कवर बढ़ाया गया, ऑप्शन प्रीमियम पहले से जमा करना जरूरी किया गया और पोजिशन लिमिट की इंट्रा-डे मॉनिटरिंग शुरू की गई। इसका उद्देश्य बहुत अधिक शॉर्ट-टर्म स्पेक्यूलेटिव को रोकना और रिटेल इन्वेस्टर्स को बड़े नुकसान से बचाना था।

हालांकि वित्त वर्ष 2026 में F&O में रिटेलर्स का नुकसान 18% घटकर ₹91,685 करोड़ रह गया लेकिन F&O में हिस्सेदारी भी लगभग 20% घटकर 78.6 लाख रह गई। रिटेलर्स का नुकसान कम तो हुआ लेकिन प्रति ट्रेडर औसत नुकसान ₹1.14 लाख से बढ़कर ₹1.17 लाख हो गया। इससे एक अहम सवाल उठता है कि क्या हम समस्या को हल कर रहे हैं, या हिस्सेदारी कम करके एक्सपोजर को कम कर रहे हैं?

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2.लॉट साइज में बढ़ोतरी: सुरक्षित मार्केट या हाई एंट्री बैरियर्स?

मिनिमम कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू बढ़ाने का मकसद छोटे निवेशकों को बहुत बड़ी स्पेक्यूलेटिव वाली पोजिशन लेने से रोकना था। हालांकि डेरिवेटिव्स रिस्क-मैनेजमेंट टूल का भी एक बड़ा जरिया है, खासतौर से उन निवेशकों के लिए जो अपने कैश-मार्केट एक्सपोजर को हेज करना चाहते हैं। लॉट साइज बड़ा होने से ऐसे हेज के लिए अधिक कैपिटल की जरूरत पड़ने लगी जिससे अंडरलाइंग पोजिशन के साथ हेज का तालमेल बिठाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में निवेशकों के लिए मार्केट में हिस्सा लेना मुश्किल बनाने करने की बजाय इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि वे रिस्क को कैसे मैनेज करते हैं।

3.एक्सपायरी और मार्जिन के नियम

सेबी ने एक्सपायरी के समय मिलने वाले कई मार्जिन बेनेफिट्स को हटा दिया और वीकली इंडेक्स डेरिवेटिव्स के नियमों को तार्किक बनाया। इसका उद्देश्य बहुत अधिक रिस्क वाली पोजिशन और एक्सपायरी के दिन होने वाले भारी उतार-चढ़ाव को कम करना था, लेकिन इनसे ट्रेडिंग और हेजिंग की चली आ रही स्ट्रैटेजीज भी बदल गई हैं। सेबी की साल 2025 की स्टडी से पता चला कि इससे इक्विटी डेरिवेटिव्स में यूनिक इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या सालाना आधार पर 20% गिर गई तो प्रीमियम के हिसाब से इंडिविजुअल टर्नओवर 11% घट गया। ऐसे में सेबी का नियम सिर्फ खराब तरीके ही नहीं हटा रहा, बल्कि मार्केट के तरीके को भी बदल रहा है।

4.क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS): बेहतर प्राइस डिस्कवरी लेकिन

3 अगस्त 2026 से सेबी ने F&O स्टॉक्स के लिए ‘क्लोजिंग ऑक्शन सेशन’ (CAS) शुरू किया, जिसने पहले के 30 मिनट वाले VWAP-बेस्ड क्लोजिंग सिस्टम की जगह ली। इसका उद्देश्य कीमत तय करने के तरीके को बेहतर बनाना, आखिरी मिनट के ट्रेड के असर को कम करना और भारतीय मार्केट को ग्लोबल तौर-तरीकों से जोड़ना। हालांकि शुरुआती कुछ सेशन में स्पॉट और फ्यूचर्स की कीमतों में असामान्य अंतर दिखा और शुरुआत में लोगों की भागीदारी कम रही। सेबी के मुताबिक इसमें कोई मैनिपुलेशन नहीं मिला है, और तब से भागीदारी में सुधार भी हुआ है। हालांकि इससे यह सबक मिलता है कि अच्छे ढंग से बनाए गए सुधार भी मार्केट में हिस्सा लेने वालों के लिए थोड़े समय के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।

कहां आई दिक्कत?

सेबी के नियमों से एफएंडओ एक्टिविटी कम हुई। इसकी वित्त वर्ष 2026 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स 51.5% और फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स 17.7% घट गया। इसकी वजह एसटीटी में बढ़ोतरी के साथ-साथ सेबी के नियम भी हैं। जिमीत के मुताबिक स्पेक्यूलेशन में कमी तब अच्छी है, जब इससे अच्छा रुख दिखे लेकिन अगर वॉल्यूम भी गिरे क्योंकि मार्केट में एंट्री बहुत महंगी या कठिन हो गई है तो इससे लिक्विडिटी और प्राइस डिस्कवरी पर असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि लक्ष्य सड़क को सुरक्षित बनाना होना चाहिए, सड़क को खाली करना नहीं। जिमीत के मुताबिक भारतीय मार्केट को देशी-विदेशी संस्थागत निवेशकों के मजबूत निवेश की जरूरत है। जिमीत के मुताबिक बैरियर बढ़ाने की तुलना में बेहतर डिस्क्लोजर, इंवेस्टर एडुकेशन, सूटेबिलिटी चेक्स और रिस्क-बेस्ड सेफगार्ड्स अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।

Share Market New Rule: सिर्फ 3 दिनों के लिए शेयर दें किराए पर, बिना बेचे कमाई, खास स्टॉक्स के लिए आए रहा नया सिस्टम

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Gold Price Today: सोना एक हफ्ते में ₹3490 तक महंगा, वैश्विक कीमत 0.9% बढ़ी

देश में सोने की कीमत में वीकली बेसिस पर अच्छी मजबूती दिख रही है। अलग-अलग शहरों में एक सप्ताह में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 3490 रुपये तक ​बढ़ी है। वहीं 22 कैरेट गोल्ड 3200 रुपये तक महंगा हुआ है। आज 16 अगस्त को राजधानी दिल्ली में सुबह के वक्त 24 कैरेट गोल्ड 155280 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। मुंबई में कीमत 155130 रुपये प्रति 10 ग्राम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,379.9 डॉलर प्रति औंस पर है। एक सप्ताह में सोने की वैश्विक कीमत लगभग 0.9 प्रतिशत बढ़ी है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 155280 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 142350 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 142200 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 155130 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 155130 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 142200 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 155130 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 142200 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली142350155280
मुंबई142200155130
अहमदाबाद142250155180
चेन्नई142200155130
कोलकाता142200155130
हैदराबाद142200155130
जयपुर142350155280
भोपाल142250155180
लखनऊ142350155280
चंडीगढ़142350155280

इस म्यूचुअल फंड ने ₹10 लाख के निवेश को सिर्फ 13 साल में ₹1.25 करोड़ बना दिया

चांदी की कीमत

सोने की तरह चांदी भी वीकली बेसिस पर महंगी हुई है। एक सप्ताह में भाव 5000 रुपये ​बढ़ा है। 16 अगस्त की सुबह चांदी की कीमत 250000 रुपये प्रति किलोग्राम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 64.88 डॉलर प्रति औंस पर है।

जुलाई में सोने का आयात मामूली बढ़ा, चांदी का घटा

कीमती धातुओं पर सीमा शुल्क में वृद्धि के बाद जुलाई में भारत के सोने और चांदी के आयात में नरमी आई। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में सोने का आयात केवल 4.77 प्रतिशत बढ़ा और 4.16 अरब डॉलर रहा। इससे पहले, अप्रैल में सोने के आयात में 81.69 प्रतिशत, मई में 34 प्रतिशत और जून में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। चांदी का आयात 66.1 प्रतिशत घटकर 17.16 करोड़ डॉलर रह गया। सरकार ने 13 मई से कीमती धातुओं पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। अप्रैल-जुलाई 2026 अवधि में सोने का कुल आयात 32.41 प्रतिशत बढ़कर 15.17 अरब डॉलर हो गया। चांदी का आयात 50.81 प्रतिशत घटकर 71.84 करोड़ डॉलर रहा।

Share Market New Rule: सिर्फ 3 दिनों के लिए शेयर दें किराए पर, बिना बेचे कमाई, खास स्टॉक्स के लिए आए रहा नया सिस्टम

Share Market New Rule: देश का पहला क्लियरिंग कॉरपोरेशन और एनएसई (NSE) की सब्सिडरी एनएसई क्लियरिंग लिमिटेड 17 अगस्त से सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) स्कीम के तहत कम समय वाले कॉन्ट्रैक्ट शुरू करेगा। इसके तहत महज तीन दिन के सेटलमेंट साइकिल के साथ स्टॉक-लेंडिंग ट्रांजैक्शन हो सकेगा। एनएसई क्लियरिंग ने इससे जुड़ा सर्कुलर 14 अगस्त को जारी किया जिसके मुताबिक नए कॉन्ट्रैक्ट R3 सीरीज के तहत शुरू किए जाएंगे और हर दिन उपलब्ध होंगे। ये कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ उन स्टॉक्स के लिए उपलब्ध होंगे जो इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग के लिए एलिजिबल हैं यानी कि जो F&O सेगमेंट का हिस्सा हैं।

क्या है नियम

नए स्ट्रक्चर के तहत ट्रांजैक्शन वाले दिन यानी T Day पर किए गए SLB ट्रांजैक्शन का पहला हिस्सा T+1 दिन पर यानी अगले दिन सेटल होगा, जबकि उससे जुड़ा रिवर्स हिस्सा T+3 दिन पर सेटल होगा इसमें सेटलमेंट की छुट्टियां शामिल नहीं होंगी। अभी के एसएलबी कॉन्ट्रैक्ट्स के उलट AGM (एनुअल जनरल मीटिंग) या EGM (एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग) होने पर R3 कॉन्ट्रैक्ट्स को समय से पहले बंद नहीं किया जाएगा। साथ ही कम समय वाले इन कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए रीपेमेंट, रिकॉल और रोलओवर की सुविधाएं नहीं मिलेगी। मार्केट खुले रहने के दौरान यानी मार्केट टाइमिंग्स में क्लियरिंग और सेटलमेंट, रिस्क मैनेजमेंट और कॉरपोरेट एक्शन से जुड़े बाकी सभी नियम वैसे ही रहेंगे जैसे मौजूदा एसएलबी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए हैं।

R3 सीरीज के आने से मार्केट पार्टिसिपेंट्स को सिक्योरिटीज लेंडिंग ट्रांजैक्शन के लिए कम होल्डिंग पीरियड मिलता है, जबकि SLB कॉन्ट्रैक्ट्स का समय ज्यादा होता है यानी कि अगर किसी ट्रेडर को किसी शेयर को शॉर्ट करने के लिए केवल कुछ दिनों के लिए शेयर चाहिए, तो R3 कॉन्ट्रैक्ट उसके लिए लंबी अवधि वाले SLB कॉन्ट्रैक्ट की तुलना में अधिक बेहतर हो सकता है। इससे ट्रेडर्स और निवेशकों को शॉर्ट-टर्म बॉरोइंग और लेंडिंग की जरूरतों को मैनेज करने में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी मिल सकती है। इस प्रकार R3 कम अवधि वाला नया SLBM कॉन्ट्रैक्ट है, जिसमें शेयर T+3 पर वापस होंगे।

क्या है SLBM?

सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग मैकेनिज्म (SLBM) एक ऐसा सिस्टम है जिसके तहत निवेशक अपनी सिक्योरिटीज जैसे कि शेयर को एक तय समय के लिए दूसरे मार्केट पार्टिसिपेंट्स को उधार दे सकता है। इसके बदले में उन्हें लेंडिंग फीस मिलती है। यह सिस्टम उन निवेशकों के लिए बहुत काम का है जो अपनी सिक्योरिटीज से अतिरिक्त कमाई करना चाहते हैं, और उन ट्रेडर्स के लिए भी जिन्हें शॉर्ट-सेलिंग को लेकर शेयर उधार लेने की जरूरत होती है। इसके तहत उधार लेने वाला सिक्योरिटीज का इस्तेमाल करने के बदले उधार देने वाले को लेंडिंग फीस देता है। एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ट्रांजैक्शन को मैच करने और कोलेटरल, सेटलमेंट व अन्य रिस्क को मैनेज करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर देते हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rashifal Today: आज के दिन सोच-समझकर लें कोई भी फैसला, जानें आपना राशिफल

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म की तारीख का हमारे जीवन पर खास प्रभाव माना जाता है। हर मूलांक के लिए आज आर्थिक मामलों में नए अवसर सामने आ सकते हैं। तकनीक और नए क्षेत्रों में फायदा मिलने की संभावना है। फिर भी कोई बड़ा फैसला जल्दबाजी में न लें। लंबी अवधि के निवेश और बेहतर योजना पर ध्यान दें। आइए जानते हैं कैसा होगा मूलांक 1 से 9 तक के लोगों का दिन

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन आर्थिक मामलों में सोच-समझकर आगे बढ़ने का है। आपको अपने बजट, बचत और निवेश की समीक्षा करनी चाहिए। भविष्य के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए पैसों की योजना बनाएं। आज गैर-जरूरी खर्चों से बचना आपके लिए बेहतर रहेगा। जल्दबाजी में कोई बड़ा आर्थिक फैसला लेने के बजाय भविष्य की सुरक्षा पर ध्यान दें।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक क्षेत्र में नए अवसर सामने आ सकते हैं। खासतौर पर तकनीक और नए विचारों से जुड़े क्षेत्रों में फायदा मिलने की संभावना है। हालांकि, किसी भी मौके को तुरंत स्वीकार करने से पहले उसके बारे में अच्छी तरह सोच लें। लंबी अवधि की योजना बनाकर किया गया निवेश भविष्य में बेहतर परिणाम दे सकता है।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन आर्थिक फैसले लेने के बजाय योजना बनाने का है। किसी बड़े निवेश या लेन-देन में जल्दबाजी न करें। अपने भविष्य के लक्ष्यों पर ध्यान दें और यह समझने की कोशिश करें कि आपकी मौजूदा आर्थिक योजना सही दिशा में है या नहीं। धैर्य रखना आज आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक रूप से दिन अच्छा रह सकता है। आप अपने बजट और निवेश को व्यवस्थित करने पर ध्यान दे सकते हैं। गैर-जरूरी चीजों पर पैसे खर्च करने से बचें और भविष्य के लिए बचत बढ़ाने की कोशिश करें। आर्थिक स्थिरता के लिए आज बनाई गई योजना आगे चलकर आपके काम आ सकती है।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 15 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज नए आर्थिक अवसर मिल सकते हैं। तकनीक और नए क्षेत्रों से जुड़े काम में संभावनाएं दिखाई दे सकती हैं। हालांकि, किसी भी योजना में आगे बढ़ने से पहले सभी पहलुओं की जांच करें। जल्दबाजी से बचें और ऐसे निवेश पर ध्यान दें, जिसका फायदा लंबे समय में मिल सके।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में धैर्य रखना चाहिए। बड़े फैसले लेने के बजाय अपने खर्चों और निवेश की समीक्षा करें। भविष्य के लक्ष्यों के हिसाब से नई रणनीति बनाना बेहतर रहेगा। सही योजना और समझदारी से उठाए गए कदम आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक योजना बनाने का अच्छा समय है। अपने बजट और निवेश की दोबारा जांच करें। अनावश्यक खर्चों से बचें और भविष्य की जरूरतों के लिए आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने पर ध्यान दें। आज की समझदारी आगे चलकर लाभ दे सकती है।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में नए अवसर सामने आ सकते हैं। तकनीक और नए क्षेत्रों में फायदा मिलने की संभावना है। फिर भी कोई बड़ा फैसला जल्दबाजी में न लें। लंबी अवधि के निवेश और बेहतर योजना पर ध्यान दें। सोच-समझकर उठाया गया कदम आर्थिक लाभ दिला सकता है।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक समीक्षा का दिन है। अपने खर्च, बचत और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान दें। बड़े निवेश या महत्वपूर्ण लेन-देन को फिलहाल टालना बेहतर हो सकता है। अपने आर्थिक लक्ष्यों को स्पष्ट करें और आगे की रणनीति मजबूत करें।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

अंग्रेजों ने भारत से लूटे 200 ट्रिलियन डॉलर! कभी दुनिया की 27% GDP था भारत, जानिए यहां से कितना लेकर गए

भारत और 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। देश को 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आजादी मिली थी। लेकिन आजादी मिलने के बाद देश को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था। आजादी के बाद देश की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर स्थिति में थी। अंग्रेजों ने करीब 200 साल तक भारत के संसाधनों का भरपूर इस्तेमाल अपने लिए किया। वहीं करीब 200 साल के ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के संसाधनों और संपदा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल ब्रिटेन के हितों के लिए किया गया।

न्यूज 18 के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों के पुराने आकलनों के मुताबिक, 1765 से 1938 के बीच ब्रिटिश क्राउन और ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत से करीब 45 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति बाहर ले गई। लंबे समय तक चले इस आर्थिक शोषण का असर भारत की आर्थिक स्थिति पर पड़ा और आजादी के समय देश को कई बड़ी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

नेहरू के सामने बड़ी समस्या

1947 के बाद पीएम जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालना, उद्योगों को बढ़ावा देना और देश में बुनियादी ढांचे का विकास करना था। लगभग दो शताब्दियों के औपनिवेशिक शासन के बाद भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार को लंबे समय तक बड़े स्तर पर काम करना पड़ा।

करीब 200 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति गई बाहर

पुराने अनुमानों को अगर आज की आर्थिक स्थिति के हिसाब से देखा जाए और उनमें महंगाई, निवेश पर मिलने वाले रिटर्न और मौजूदा बाजार मूल्य को शामिल किया जाए, तो भारत से बाहर गई संपत्ति की अनुमानित कीमत 2026 में करीब 200 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। ये आंकड़ा बताते हैं कि ब्रिटिश शासन में भारत की संपदा बाहर जाती रही, जिससे आजादी के समय देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई।

‘काउंसिल बिल्स’ बड़ा तरीका

भारत से पैसा बाहर ले जाने का एक बड़ा तरीका ‘काउंसिल बिल्स’ व्यवस्था थी। 1765 से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी भारत से कपड़ा, मसाले और शोरा खरीदने के लिए ब्रिटेन से लाया गया सोना-चांदी इस्तेमाल करती थी। लेकिन बंगाल में टैक्स वसूलने का अधिकार मिलने के बाद कंपनी ने तरीका बदल दिया। इसके बाद भारत से मिले टैक्स के पैसे से ही भारतीय सामान खरीदा जाने लगा और इस तरह भारत की कमाई का बड़ा हिस्सा ब्रिटेन पहुंचने लगा।

  1. टैक्स वसूली: भारतीय किसानों और व्यापारियों से सीधे टैक्स लिया जाता था।
  2. टैक्स से खरीदारी: ब्रिटिश सरकार टैक्स से जुटाए गए राजस्व का करीब एक-तिहाई हिस्सा भारतीय सामान खरीदने में इस्तेमाल करती थी, जिसे बाद में ब्रिटेन भेज दिया जाता था।
  3. बिना असली भुगतान: भारतीयों को उनके ही टैक्स के पैसे से भुगतान किया जाता था, जिससे ब्रिटेन को भारत का कीमती सामान लगभग मुफ्त में मिलता था।

GDP में आई गिरावट

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया। 1700 के आसपास भारत का वैश्विक GDP में हिस्सा करीब 27% बताया जाता है, लेकिन 1947 तक यह घटकर 3% से भी कम रह गया। ब्रिटिश नीतियों का असर भारत के कपड़ा उद्योग पर भी पड़ा। भारतीय कपड़ों पर ब्रिटेन में भारी टैक्स लगाया गया, जबकि ब्रिटिश सामान भारत में आसानी से बिकने लगा। इससे ढाका, मुर्शिदाबाद और सूरत जैसे पुराने औद्योगिक केंद्रों को बड़ा नुकसान हुआ। काम कम होने के बाद कई कारीगर और बुनकर खेती पर निर्भर हो गए और भारत धीरे-धीरे तैयार सामान के बजाय कपास, अफीम और नील जैसी कच्ची उपज के निर्यातक देश के रूप में बदल गया।

दूसरे विश्व युद्ध में हुआ नुकसान

1858 के बाद भी भारत की कमाई का बड़ा हिस्सा ब्रिटिश सरकार से जुड़े खर्चों पर ही लगाया जाता रहा। ‘होम चार्ज’ के तहत भारतीय करदाताओं के पैसों से ब्रिटिश अधिकारियों की पेंशन, रेलवे निवेश पर ब्याज और विदेशों में ब्रिटिश सेना के अभियानों का खर्च उठाया जाता था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यह आर्थिक दबाव और बढ़ गया। युद्ध के खर्च और कर्ज का असर भारत में महंगाई और खाद्य संकट के रूप में दिखाई दिया। लंबे समय तक चले इस आर्थिक बोझ के कारण 1947 में आजादी मिलने तक भारत की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी थी।

आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत

आजादी के समय भारत की नई सरकार के सामने पैसों और संसाधनों की बड़ी कमी थी। देश में गरीबी और खाद्य संकट गंभीर था, उद्योग कमजोर हो चुके थे और विभाजन के बाद बड़ी संख्या में आए शरणार्थियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी भी सरकार पर थी। सीमित सरकारी खजाने के बावजूद सड़कों, बिजली, सिंचाई और दूसरी जरूरी सुविधाओं के विकास पर काम शुरू करना पड़ा। लेकिन, आजादी के बाद के दशकों में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रगति की और आज वह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। देश अब लंबे समय के विकास लक्ष्यों पर ध्यान देते हुए अपनी आर्थिक ताकत को और बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

Lalithaa Jewellery Mart IPO: 22 एंकर इनवेस्टर्स से मिले ₹508 करोड़, 17 अगस्त को खुलेगा ₹1700 करोड़ का इश्यू

मेनबोर्ड सेगमेंट में ललिता ज्वेलरी मार्ट का ₹1,700 करोड़ का IPO 17 अगस्त को खुलने वाला है। ओपनिंग से पहले कंपनी ने 22 एंकर निवेशकों से ₹508.2 करोड़ जुटाए। एंकर बुक में गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली, ICICI प्रूडेंशियल AMC समेत कई दिग्गजों ने हिस्सा लिया। कंपनी ने एंकर निवेशकों को 2.53 करोड़ इक्विटी शेयर अलॉट किए। एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, कुल एंकर एलोकेशन में से 1.14 करोड़ शेयर 4 घरेलू म्यूचुअल फंड्स को 9 स्कीमों के जरिए अलॉट किए गए। इनमें ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी, सैमको म्यूचुअल फंड, बंधन म्यूचुअल फंड और बैंक ऑफ इंडिया म्यूचुअल फंड का नाम शामिल है।

कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस और बजाज लाइफ इंश्योरेंस ने भी 21.49 लाख शेयरों के लिए ₹43.19 करोड़ का निवेश किया। इस IPO के लिए प्राइस बैंड ₹190-₹201 प्रति शेयर और लॉट साइज 74 शेयर है। इश्यू में ₹1,200 करोड़ के 5.97 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹500 करोड़ के 2.49 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में कंपनी के प्रमोटर किरण कुमार जैन शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे। इश्यू की क्लोजिंग 19 अगस्त को होगी। इसके बाद अलॉटमेंट 20 अगस्त को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 24 अगस्त को लिस्ट हो सकते हैं।

ललिता ज्वेलरी मार्ट लिमिटेड की दक्षिण भारत में अच्छी मौजूदगी है। कंपनी ललिता ब्रांड नेम के तहत सोने, चांदी, हीरे और कीमती व सेमी-कीमती (अर्ध-कीमती) पत्थरों वाली ज्वेलरी की पेशकश करती है। यह कई तरह की ज्वेलरी स्कीम भी पेश करती है। IPO के लिए आनंद राठी एडवाइजर्स बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार MUFG Intime India Pvt.Ltd. है।

IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल

ललिता ज्वेलरी मार्ट अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल 10 नए स्टोर खोलने के लिए और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर 11.94 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

IPOs This Week: 17 अगस्त से शुरू हफ्ते में खुलेंगे 8 नए इश्यू, 12 कंपनियां होंगी लिस्ट

Lalithaa Jewellery Mart की वित्तीय सेहत

कंपनी का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 48 प्रतिशत बढ़कर ₹25,039.80 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 177 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹1,009.82 करोड़ रहा। इस बीच कंपनी पर ₹1,604.14 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025 में ललिता ज्वेलरी मार्ट का रेवेन्यू ₹16,907.88 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹364.73 करोड़ रहा था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।