LPG price today: LPG गैस सिलेंडर के दाम में राहत! आज से लागू हुए नए रेट, जानिए दिल्ली समेत देश के प्रमुख शहरों में आज की कीमतें

LPG price today: देशभर में एलपीजी (LPG) सिलेंडर के नए रेट लागू हो गए हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने 1 अगस्त से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती की है। जबकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह ही गैस सिलेंडर मिलेगा। जबकि होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को राहत मिली है।

प्रमुख शहरों में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें

दिल्ली: ₹942

मुंबई: ₹941

कोलकाता: ₹968.50

चेन्नई: ₹958.50

वहीं, 19 किलोग्राम कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में इस महीने ₹200 से अधिक की कटौती की गई है। इसका लाभ होटल, रेस्तरां, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मिलेगा। सरकारी तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर के दामों की समीक्षा करती हैं।

कीमतों में बदलाव अंतरराष्ट्रीय एलपीजी बाजार, आयात लागत और अन्य आर्थिक कारकों के आधार पर किया जाता है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर सस्ता होने से व्यापारिक गतिविधियों की लागत पर कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

कमर्शियल सिलेंडर 200 रुपये सस्ता

होटल और रेस्तरां जैसे प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाली कमर्शियल एलपीजी की कीमत में शनिवार को बड़ी कटौती की गई। इसके तहत 19 किलोग्राम के एलपीजी के सिलेंडर के दाम में 192 रुपये की कमी की गयी है। वहीं, विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानक दरों के रुख को देखते हुए किया गया है।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों से मिली सूचना के अनुसार, दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब 2,930 रुपये के बजाय 2,738 रुपये का मिलेगा। वहीं, एटीएफ की कीमत 110 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 115 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में दो बार कटौती

यह लगातार दूसरा महीना है, जब कमर्शियल एलपीजी की कीमत में कटौती की गई है। इससे पहले एक जुलाई को 183.50 रुपये प्रति सिलेंडर की कमी की गई थी। वहीं, एटीएफ की कीमत में वृद्धि ने एक जुलाई को की गई लगभग समान कटौती का असर खत्म कर दिया।

एक जुलाई और एक अगस्त को कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में की गई कटौती से पहले पश्चिम एशिया संकट के कारण जून में इसकी कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। फरवरी के आखिर में संघर्ष शुरू होने के बाद 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत जून में बढ़कर 3,113.50 रुपये हो गई थी।

जबकि फरवरी में यह 1,740.50 रुपये थी। यानी इस दौरान इसमें कुल 1,373 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हुई थी। इसके साथ ही बाजार मूल्य वाले पांच किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत भी 808.50 रुपये से घटाकर 762 रुपये कर दी गई है।

कब जारी होता है नया रेट?

हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी की कीमतों में संशोधन किया जाता है। वैट जैसे स्थानीय करों के कारण विभिन्न राज्यों में इनकी कीमतें अलग-अलग होती हैं। फिलहाल आज यानी दो अगस्त को घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसकी कीमत 942 रुपये प्रति सिलेंडर बनी हुई है।

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घरेलू एलपीजी की कीमत में आखिरी बार सात जून को 29 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेजी के चलते मार्च में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन दोनों ईंधनों की कीमतों में आखिरी बार मई में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

Ethanol Petrol Row: ‘…तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹125 प्रति लीटर होती’; एथेनॉल विवाद पर सरकार का बड़ा दावा

Ethanol Blending E20 Petrol Row: पेट्रोलियम मंत्रालय ने एथेनॉल प्रोग्राम का बचाव करते हुए दावा किया है जब ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें $135 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, तब अगर तेल कंपनियों ने फ्यूल में एथेनॉल नहीं मिलाया होता, तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग ₹125 प्रति लीटर होती। मंत्रालय ने कहा कि लेकिन इसके बजाय ग्राहकों को ₹94.77 प्रति लीटर चुकाना पड़ा। दरअसल एथेनॉल पहले से तय कीमतों पर घरेलू स्तर पर खरीदा गया था। इसने क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के असर से रिटेल कीमतों को बचाए रखने में मदद की, जिससे संकट के चरम पर लगभग ₹30 प्रति लीटर की बचत हुई।

सरकार ने 28 फरवरी को वेस्ट एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद लगभग 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखीं। फिर मई में उन्हें 7.5 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिया। दिल्ली में स्टैंडर्ड E20 पेट्रोल (91-ऑक्टेन) की कीमत अब ₹102.12 प्रति लीटर है। जबकि 100-ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत ₹169 है। मंत्रालय ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि गरीबों के लिए अनाज का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने के लिए किया जा रहा था, या इस प्रोग्राम को सपोर्ट करने के लिए सब्सिडी वाले FCI चावल का इस्तेमाल किया जा रहा था।

एफिशिएंसी में 2-6% की कमी!

फ्यूल एफिशिएंसी के सवाल पर सड़क परिवहन मंत्रालय ने लोकसभा में ARAI, SIAM और IOC की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि E10 फ्यूल के लिए डिजाइन किए गए BS-III, BS-IV और BS-VI वाहनों में E20 पर चलने पर वाहन की कैटेगरी और उम्र के आधार पर एफिशिएंसी में 2-6% की कमी आ सकती है। मंत्रालय ने पहले 20 जुलाई को राज्यसभा को बताया था कि ऐसे वाहनों में यह कमी लगभग 3-5% तक सीमित है।

दोनों मंत्रालयों ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम को एक चरणबद्ध, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित प्रक्रिया के माध्यम से शुरू किया गया था, जिसमें प्रोडक्शन कैपेसिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ने के साथ-साथ ब्लेंडिंग का स्तर धीरे-धीरे बढ़ाया गया। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा को बताया कि E20 पर स्विच करने का फैसला फ्यूल सिस्टम, इंजन की मजबूती, गाड़ी चलाने में आसानी, मटीरियल की अनुकूलता और उत्सर्जन पर असर की जांच-परख के बाद लिया गया।

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इस प्रक्रिया में वाहन बनाने वाली कंपनियों, तेल मार्केटिंग कंपनियों और चीनी एवं अनाज उद्योगों से भी सलाह-मशविरा किया गया। सरकार ने यह भी कहा कि लैब स्टडीज और असल दुनिया के डेटा से पता चला है कि E20 फ्यूल से गाड़ियों की परफॉर्मेंस पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। साथ ही, 20 करोड़ से अधिक दो-पहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन ब्लेंड्स पर चल चुकी हैं। इनमें एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से इंजन खराब होने का कोई पक्का सबूत नहीं मिला है।

Ekta Kapoor: विद्या बालन से लेकर मौनी रॉय तक…, एकता कपूर ने इन 7 अभिनेत्रियों को दिया बड़ा ब्रेक

Ekta Kapoor: तीन दशकों से ज़्यादा समय से, इंडिया के सबसे मज़बूत प्रोड्यूसर ब्रांड एकता कपूर ने न सिर्फ़ इंडियन टेलीविज़न को बदला है, बल्कि एक्ट्रेस की एक शानदार लाइनअप भी पेश की है जो आगे चलकर इंडस्ट्री के सबसे जाने-पहचाने चेहरों में से कुछ बन गईं। चाहे आइकॉनिक डेली सोप हों या यूथ ड्रामा, बालाजी टेलीफ़िल्म्स उन टैलेंट के लिए लॉन्चपैड बन गया जिन्होंने बाद में टेलीविज़न, फ़िल्मों, OTT प्लेटफ़ॉर्म और रियलिटी शो में अपनी जगह बनाई। यहां सात एक्ट्रेस पर एक नज़र डालते हैं, जिनके करियर को एकता कपूर का साथ मिला और जिन्होंने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई।

1. विद्या बालन – हम पांच (1995)

बॉलीवुड की सबसे अच्छी एक्ट्रेस में से एक बनने से बहुत पहले, विद्या बालन ने 1995 में हम पाँच से एक्टिंग में डेब्यू किया था। हालाँकि बाद में फिल्मों में आने से पहले उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन इस सिटकॉम ने दर्शकों को उनके नेचुरल एक्टिंग टैलेंट की पहली झलक दी। विद्या ने द डर्टी पिक्चर, कहानी, तुम्हारी सुलु, मिशन मंगल और भूल भुलैया 3 जैसी फिल्मों में शानदार परफॉर्मेंस के साथ महिला प्रधान सिनेमा को फिर से परिभाषित किया, और इस दौरान कई अवॉर्ड भी जीते।

2. प्राची देसाई – कसम से (2006)

प्राची देसाई कसम से (2006) में बानी वालिया के रूप में अपना टेलीविज़न डेब्यू करने के बाद रातों-रात सेंसेशन बन गईं। शो में उनकी पॉपुलैरिटी ने बॉलीवुड के दरवाज़े खोल दिए, जहाँ उन्होंने रॉक ऑन!!, वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई, बोल बच्चन और कई वेब प्रोजेक्ट्स जैसी फिल्मों से दर्शकों को इम्प्रेस किया।

3. अनीता हसनंदानी – कभी सौतन कभी सहेली (2001)

हालांकि अनीता हसनंदानी पहले भी कुछ प्रोजेक्ट्स में दिखी थीं, लेकिन एकता कपूर की ‘कभी सौतन कभी सहेली’ (2001) ने उन्हें एक लीडिंग टेलीविज़न एक्ट्रेस के तौर पर स्थापित किया। बाद में वह काव्यांजलि, ये है मोहब्बतें और नागिन 3 में यादगार रोल के साथ बालाजी की सबसे भरोसेमंद स्टार्स में से एक बन गईं।

4. सुरवीन चावला – कहीं तो होगा (2003)

सुरवीन चावला ने 2003 में ‘कहीं तो होगा’ से टेलीविज़न की दुनिया में कदम रखा, जहाँ उन्हें जल्द ही पहचान मिली। बाद में उन्होंने पंजाबी और हिंदी फिल्मों के ज़रिए खुद को फिर से स्थापित किया, इससे पहले कि OTT पर सेक्रेड गेम्स और डिकपल्ड जैसे शो से उन्हें बहुत तारीफ़ मिली।

5. मौनी रॉय – क्योंकि सास भी कभी बहू थी (2006)

मौनी रॉय ने 2006 में ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से टेलीविज़न पर डेब्यू किया था। हालांकि नागिन ने उन्हें सालों बाद टेलीविज़न सुपरस्टार बना दिया, लेकिन उन्हें पहला ब्रेक एकता कपूर के बैनर तले मिला। आज, मौनी ने टेलीविज़न, बॉलीवुड, म्यूज़िक वीडियो और रियलिटी शो में अपनी पहचान बनाई है, जिसमें गोल्ड और ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन – शिवा जैसी मशहूर फिल्में शामिल हैं।

6. अंकिता लोखंडे – पवित्र रिश्ता (2009)

पवित्र रिश्ता (2009) में अंकिता लोखंडे जितना असरदार टेलीविज़न डेब्यू कुछ ही लोगों का हुआ है। अर्चना के उनके किरदार ने उन्हें इंडियन टेलीविज़न के सबसे बड़े स्टार्स में से एक बना दिया। बाद में उन्होंने मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ़ झांसी और बागी 3 जैसी फिल्मों में काम किया, और साथ ही रियलिटी टेलीविज़न पर एक पॉपुलर चेहरा भी बनीं।

7. निया शर्मा – काली – एक अग्निपरीक्षा (2010)

निया शर्मा ने 2010 में एकता कपूर के शो काली – एक अग्निपरीक्षा से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की। उन्हें जल्द ही एक हज़ारों में मेरी बहना है, जमाई राजा और बाद में नागिन 4 जैसे शो से ज़बरदस्त सफलता मिली। निया टेलीविज़न की सबसे ग्लैमरस पर्सनैलिटी में से एक बनकर उभरीं, उन्होंने रियलिटी शो जीते और डिजिटल दुनिया में अपनी मज़बूत पहचान बनाई।

आने वाले नेशनल अवॉर्ड विनर्स को लॉन्च करने से लेकर टेलीविज़न के सबसे बड़े सुपरस्टार बनाने तक, एकता कपूर ने हमेशा टैलेंट खोजने की अपनी नज़र दिखाई है। इन एक्ट्रेस ने भले ही बालाजी बैनर के तहत अपना करियर शुरू किया हो, लेकिन हर एक ने टेलीविज़न, फ़िल्मों और OTT पर एक शानदार करियर बनाया, जिससे यह साबित होता है कि एकता की सबसे बड़ी पहचान उनके बनाए शो से कहीं आगे तक फैली हुई है।

PM-KISAN 24th Installment: कब आएगी पीएम किसान की अगली किस्त? इन 3 जरूरी कामों के बिना अटक सकते हैं ₹2000

PM Kisan Next Installment Update: केंद्र सरकार की सबसे लोकप्रिय और महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को लेकर किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके खातों में अगली यानी 24वीं किस्त के ₹2,000 कब ट्रांसफर किए जाएंगे।

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस योजना को वर्ष 2030-31 तक विस्तार दिए जाने के बाद अब अगली किस्तों को लेकर स्थिति और भी लगभग स्पष्ट हो गई है। आइए जानते हैं कि अगली किस्त का पैसा आपके बैंक खाते में किस महीने आ सकता है और किन किसानों का पैसा अटक सकता है।

कब आ सकती है PM-KISAN की 24वीं किस्त?

पीएम किसान योजना के नियमानुसार, किसानों को हर साल ₹6,000 की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों (₹2,000-₹2,000) में दी जाती है। यह पैसा हर 4 महीने के अंतराल पर सीधे DBT के जरिए खातों में भेजा जाता है। सालाना किस्तों का चक्र:

  • पहली किस्त: अप्रैल से जुलाई के बीच
  • दूसरी किस्त: अगस्त से नवंबर के बीच
  • तीसरी किस्त: दिसंबर से मार्च के बीच

23वीं किस्त का पैसा जारी किए जाने के बाद, अब योजना के नियमित चक्र के अनुसार पीएम किसान योजना की अगली यानी 24वीं किस्त नवंबर-दिसंबर 2026 के बीच देश के करोड़ों पात्र किसानों के खातों में ट्रांसफर की जा सकती है।

इन 3 जरूरी कामों के बिना अटक सकती है अगली किस्त

अगर आप चाहते हैं कि अगली किस्त का पैसा बिना किसी रुकावट के सीधे आपके बैंक खाते में पहुंचे, तो पोर्टल पर जाकर ये 3 काम तुरंत पूरे कर लें:

ई-केवाईसी प्रक्रिया: जिन किसानों की e-KYC पूरी नहीं हुई है, उन्हें अगली किस्त का लाभ नहीं मिलेगा। इसे आप पीएम किसान पोर्टल (pmkisan.gov.in) पर जाकर आधार OTP या नजदीकी CSC सेंटर से बायोमेट्रिक के जरिए पूरा कर सकते हैं।

लैंड सीडिंग: आपकी खेती की जमीन का सरकारी पोर्टल पर डिजिटल सत्यापन होना अनिवार्य है। यदि स्टेटस में ‘Land Seeding – No’ दिख रहा है, तो अपने तहसील या कृषि अधिकारी से संपर्क करें।

डीबीटी और आधार-बैंक लिंक: आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए और उसमें DBT का ऑप्शन एक्टिव होना अनिवार्य है।

पोर्टल पर ऐसे चेक करें अपना बेनेफिशियरी स्टेटस

  • अगर आप चेक करना चाहते हैं कि आपको अगली किस्त मिलेगी या नहीं:
  • सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं।
  • होमपेज पर ‘Farmers Corner’ सेक्शन में जाएं और ‘Know Your Status’ पर क्लिक करें।
  • अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा दर्ज करके ‘Get Data’ पर क्लिक करें।
  • स्क्रीन पर आपकी ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग और बैंक आधार लिंकिंग का स्टेटस दिख जाएगा। यदि सभी के आगे ‘YES’ लिखा है, तो आपकी अगली किस्त सुरक्षित है।

PM-KISAN: पीएम किसान योजना पर मोदी सरकार का बड़ा ऐलान, ₹3.15 लाख करोड़ के भारी-भरकम बजट को भी मिली मंजूरी

PM KISAN Extension News: देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। सरकार ने अगले 5 सालों के लिए योजना के तहत ₹3.15 लाख करोड़ का कुल वित्तीय परिव्यय स्वीकृत किया है।

इस फैसले से साफ है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि निवेश में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। आइए आपको बताते हैं कि पीएम किसान योजना के इस विस्तार से देश के किसानों को क्या बड़े फायदे मिलेंगे और अब तक के आंकड़े क्या कहते हैं।

₹3.15 लाख करोड़ से किसानों को क्या मिलेगा?

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल ₹6,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है, जो ₹2,000 की तीन समान किश्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों (DBT) में ट्रांसफर होती है। 2030-31 तक योजना के विस्तार से देश के करोड़ों किसानों को समय पर खाद, बीज, सिंचाई और कृषि उपकरणों की खरीदारी के लिए सीधी वित्तीय मदद मिलती रहेगी।

योजना के तहत आधार प्रमाणीकरण, डिजिटल सत्यापन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए पूरी पारदर्शिता के साथ पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचता है।

PM-KISAN की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियां

फरवरी 2019 में शुरू हुई यह योजना देश की सबसे सफल टेक्नोलॉजी-ड्रिवन जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक बन चुकी है:

₹4.47 लाख करोड़ से अधिक ट्रांसफर: योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 23 किश्तों के जरिए देश के किसानों के बैंक खातों में ₹4.47 लाख करोड़ से ज्यादा की राशि भेजी जा चुकी है।

23वीं किश्त का फायदा: योजना की 23वीं किश्त के तहत 9.49 करोड़ से अधिक किसानों को ₹18,984 करोड़ से ज्यादा का फंड जारी किया गया।

महिला किसानों को संबल: योजना के तहत महिला किसानों को ₹1.06 लाख करोड़ से ज्यादा दिए गए हैं। योजना का हर चौथा लाभार्थी एक महिला किसान है।

महामारी में सहारा: कोविड-19 महामारी के दौरान किसानों को राहत देने के लिए योजना के तहत ₹1.71 लाख करोड़ से ज्यादा की मदद पहुंचाई गई थी।

NITI Aayog की रिपोर्ट: पीएम किसान से बदला कृषि का स्वरूप

नीति आयोग के डेवलपमेंट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिस (DMEO) द्वारा किए गए स्वतंत्र मूल्यांकन में पीएम किसान योजना के कई सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। 92% से अधिक लाभार्थियों ने माना कि उन्होंने इस पैसे का उपयोग खाद, बीज और खेती से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया। लगभग 85% किसानों ने पुष्टि की कि इस योजना से उनकी कृषि आय में सुधार हुआ है और साहूकारों के कर्ज पर उनकी निर्भरता कम हुई है। साथ ही खाद्यान्न उत्पादन में साल 2020-21 से 2025-26 के बीच बंपर बढ़त दर्ज की गई है।

  • खेती का दायरा लगभग 9.65% बढ़ा।
  • उत्पादकता में 10.53% का इजाफा हुआ।
  • कुल खाद्यान्न उत्पादन 21.18% बढ़ा।

‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का मजबूत स्तंभ

पीएम किसान योजना केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों में स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की भावना जगा रही है। आधार आधारित सत्यापन और बिना किसी बिचौलिए के सीधे पैसे ट्रांसफर होने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है और सरकार तथा किसानों के बीच भरोसा मजबूत हुआ है।

होर्मुज में ईरान का बड़ा धमाका! US सुरक्षा को चीरते हुए तेहरान ने 2 ऑयल टैंकरों पर दागीं मिसाइलें

Iran US Hormuz Conflict Update: मिडिल ईस्ट से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने अमेरिकी सैन्य ‘एयर एस्कॉर्ट’ के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों पर हमला कर उन्हें रोक दिया है।

ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल समुद्री मार्ग अभी भी पूरी तरह बंद है और बिना उसकी इजाजत के किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दिया जाएगा।

अमेरिकी सुरक्षा के बावजूद ईरान का हमला

IRGC द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों तेल टैंकर अमेरिकी सैन्य विमानों की सुरक्षा के बीच एक ‘अनाधिकृत मार्ग’ से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहे थे।

ईरान ने दावा किया कि नियमों का पालन न करने वाले इन दो टैंकरों पर निशाना साधा गया, जिससे वे वहीं रुकने पर मजबूर हो गए। इस हमले के तुरंत बाद पीछे आ रहे चार अन्य तेल टैंकरों ने अपना रास्ता बदल लिया और वापस अपनी पुरानी स्थिति में लौट गए।

होर्मुज पर ईरान का दावा और नया नियम

सीजफायर टूटने के बाद ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर दोबारा अपनी नाकेबंदी सख्त कर दी है। ईरान का कहना है कि, ‘होर्मुज से गुजरने वाले किसी भी मर्चेंट वेसल को अब ईरान से विशेष परमिट लेना होगा और ट्रांजिट टैक्स चुकाना होगा। ईरान ने जहाजों की आवाजाही को केवल अपने तटीय क्षेत्र से सटे पानी के गलियारों तक सीमित कर दिया है।

अमेरिका का रुख और नया प्रतिबंध

दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान के इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला और सुरक्षित है। अमेरिका ने भी ईरान के प्रमुख बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी बरकरार रखी है।

हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने IRGC से जुड़ी संस्थाओं पर नए कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका ने ईरान पर अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों से अवैध वसूली करने का आरोप लगाया है।

होर्मुज में डेरा डाले क्यों बैठा है ईरान?

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और हिंद महासागर के बीच एक बेहद संकरा और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस गतिरोध और नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की कीमतों में भारी उछाल और अस्थिरता देखी जा रही है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

8th Pay Commission पर 5 नए बड़े अपडेट्स! कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर पड़ेगा सीधा असर

8th Pay Commission Latest Updates: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हुए लगभग 9 महीने का समय बीत चुका है। नवंबर 2025 में पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित यह आयोग अब अपनी 18 महीने की कुल समय-सीमा के आधे सफर पर पहुंच रहा है। अगस्त 2026 के पहले हफ्ते में आयोग के 9 महीने पूरे होने के साथ ही दूसरे चरण का काम बेहद तेजी से शुरू होने जा रहा है।

देश भर के करीब 1.1 करोड़ से ज्यादा सेवारत केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर परामर्श, बैठकों और शिकायतों को लेकर लगातार कई नए नोटिफिकेशन जारी किए गए हैं। आइए जानते हैं आयोग की वेबसाइट पर आए हालिया 5 सबसे बड़े अपडेट्स के बारे में, जो आपकी सैलरी, पेंशन और भत्तों पर सीधा असर डालेंगे।

8वें वेतन आयोग की वेबसाइट पर आए 5 नए अपडेट्स

आयोग ने हितधारकों, कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों के साथ चर्चा का दायरा बढ़ाते हुए परामर्श बैठकों का नया शेड्यूल जारी किया है:

8वें वेतन आयोग की वेबसाइट पर आए 5 नए अपडेट्स

संसद में वित्त मंत्रालय की बड़ी सफाई

हाल ही में राज्यसभा में वित्त मंत्रालय से आयोग की कार्यप्रगति को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर मंत्रालय ने साफ किया कि 8वें वेतन आयोग के लिए यह अनिवार्य नहीं है कि वह सरकार को अपनी आंतरिक प्रगति या चर्चाओं की समय-समय पर रिपोर्ट दे।

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा जारी टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) के तहत आयोग को अपनी बैठकों, फीडबैक और प्रक्रिया तय करने की पूरी आजादी है। आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को सौंप सकता है।

फिटमेंट फैक्टर को लेकर क्या चल रहा है?

कर्मचारी यूनियनों जैसे- NCJCM, BPMS, AIDEF की ओर से 8वें वेतन आयोग के समक्ष फिटमेंट फैक्टर को 3.8x से 4.0x तक बढ़ाने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है।

अगर सरकार 3.83 के आसपास का फिटमेंट फैक्टर स्वीकार करती है, तो कर्मचारियों का न्यूनतम बेसिक वेतन मौजूदा ₹18,000 से बढ़कर सीधे करीब ₹68,900 – ₹69,000 प्रति माह तक पहुंच सकता है।

हालांकि, फिटमेंट फैक्टर या सैलरी में बढ़ोतरी के आधिकारिक आंकड़ों पर आयोग या सरकार ने अभी तक कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई है। बैठकों का यह दौर पूरा होने के बाद ही स्थिति साफ होगी।

कर्मचारियों को कब मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी?

भले ही आयोग अपनी रिपोर्ट 2027 के मध्य तक सौंपे और सरकार को इसे मंजूर करने में कुछ महीनों का समय लगे, लेकिन 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से ही लागू माना जाएगा। इसका मतलब है कि देरी होने पर भी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को पूरा एरियर एकमुश्त दिया जाएगा।

Investment Tips: 40 के पहले निपटा लें ये 10 काम! बुढ़ापे में नहीं होगी पैसों की तंगी, जानें वेल्थ क्रिएशन का सही फॉर्मूला

Financial Planning Before Age 40: 30 से 40 वर्ष की आयु वित्तीय सुरक्षा और वेल्थ क्रिएशन के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस उम्र में आपके पास करियर की स्थिरता, नियमित आय और रिटायरमेंट से पहले एक लंबा इनवेस्टमेंट होराइजन होता है।

हालांकि, सफल निवेशक बनने का मतलब सिर्फ मार्केट रिटर्न के पीछे भागना नहीं है, बल्कि एक अनुशासित वित्तीय रणनीति बनाना है। यदि आपकी उम्र भी 40 वर्ष से कम है, तो वित्तीय रूप से मजबूत बनने के लिए आपको ये 10 स्मार्ट इनवेस्टमेंट मूव्स जरूर अपनाने चाहिए:

1. सबसे पहले अपने फाइनेंशियल गोल्स तय करें

बिना लक्ष्य के निवेश करना बिना पते की चिट्ठी भेजने जैसा है। निवेश शुरू करने से पहले तय करें कि आप पैसा किसलिए बचा रहे हैं जैसे- बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना, या रिटायरमेंट। जब आपके लक्ष्य स्पष्ट होते हैं, तो बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराकर फैसले लेने के बजाय आप अपने प्लान पर टिके रहते हैं।

2. कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए जल्दी शुरुआत करें

निवेश में समय आपका सबसे बड़ा दोस्त होता है। जितनी जल्दी आप निवेश शुरू करेंगे, आपके पैसे को कंपाउंड (चक्रवृद्धि ब्याज के रूप में बढ़ने) होने का उतना ही अधिक समय मिलेगा। छोटी-छोटी रकम से की गई शुरुआत भी लंबी अवधि में बड़ा कॉर्पस बना सकती है।

3. निवेश से पहले इमरजेंसी फंड बनाएं

एक मजबूत वित्तीय योजना की नींव लिक्विडिटी पर टिकी होती है। किसी भी आपात स्थिति (जैसे- नौकरी छूटना या मेडिकल इमरजेंसी) से निपटने के लिए कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर राशि लिक्विड फंड या सेविंग्स अकाउंट में रखें। इससे आपको अपनी लंबी अवधि के निवेश को असमय बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

4. सिंपल और आसान निवेश विकल्पों से शुरुआत करें

निवेश को बहुत पेचीदा बनाने की जरूरत नहीं है। नए निवेशकों के लिए इंडेक्स फंड्स या डाइवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड्स में SIP के जरिए शुरुआत करना सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है। जैसे-जैसे आपका अनुभव बढ़े, आप अन्य एसेट क्लासेस में कदम रख सकते हैं।

5. SIP के जरिए नियमित और अनुशासित निवेश करें

मार्केट को टाइम करने के चक्कर में पड़ने के बजाय सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) का रास्ता चुनें। SIP के जरिए हर महीने एक तय राशि ऑटोमैटिक निवेश होती रहती है, जिससे रूपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलता है और बाजार के जोखिम से बचाव होता है।

6. डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो तैयार करें

‘अपने सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखें’ यह नियम निवेश पर पूरी तरह लागू होता है।अपने रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से पोर्टफोलियो को इक्विटी, फिक्स्ड इनकम, सोना और अन्य साधनों में बांटें। डाइवर्सिफिकेशन का मकसद सिर्फ ज्यादा रिटर्न पाना नहीं, बल्कि बाजार की मंदी में नुकसान को कम करना है।

7. बहुत ज्यादा फंड्स या स्ट्रेटेजीज के चक्कर में न पड़ें

बहुत सारे म्यूचुअल फंड्स इकट्ठा कर लेना या बार-बार अपनी इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी बदलना नुकसानदेह हो सकता है। अपने पोर्टफोलियो को सिंपल रखें। सीमित और अच्छे से रिसर्च किए गए फंड्स में लंबे समय तक बने रहना हमेशा बेहतर परिणाम देता है।

8. इनकम बढ़ते ही SIP का अमाउंट बढ़ाएं

जैसे-जैसे करियर में आपकी सैलरी या बिजनेस इनकम बढ़े, अपने निवेश की राशि को भी उसी अनुपात में बढ़ाएं। इसे स्टेप-अप SIP (Step-up SIP) कहते हैं। हर साल 10% से 15% निवेश बढ़ाने से आप अपने वित्तीय लक्ष्यों को समय से काफी पहले हासिल कर सकते हैं।

9. ग्रोथ और स्टेबिलिटी में सही संतुलन बनाएं

लंबी अवधि के वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी जरूरी है, तो पोर्टफोलियो को मजबूती देने के लिए फिक्स्ड इनकम (डेट फंड्स/पीपीएफ) और गोल्ड अनिवार्य हैं। अपनी उम्र, जोखिम सहने की क्षमता और वित्तीय जिम्मेदारियों के अनुसार सही एसेट एलोकेशन तय करें।

10. समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू करें

बदलते समय के साथ आपकी जिम्मेदारियां और आय का स्तर बदलता है। साल में कम से कम एक या दो बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूर करें। अगर कोई फंड लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा है या आपका एसेट एलोकेशन बिगड़ गया है, तो उसमें आवश्यक रीबैलेंसिंग करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

US ETFs: बच्चे की विदेश में पढ़ाई के लिए अमेरिकी ETFs क्यों हैं बेस्ट? जानिए सही करेंसी में बचत का फॉर्मूला

US ETFs for Overseas Education: बच्चों को विदेश की टॉप यूनिवर्सिटीज (US, UK या यूरोप) में पढ़ाना आज कई भारतीय माता-पिता का सपना है। इसके लिए अधिकांश पेरेंट्स सालों पहले से भारतीय म्यूचुअल फंड्स में SIP शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रुपए में की गई आपकी बचत डॉलर में बढ़ते कॉलेज फीस के खर्च के सामने कम पड़ सकती है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब आपका वित्तीय लक्ष्य डॉलर या विदेशी मुद्रा में है, तो निवेश भी उसी करेंसी में होना चाहिए। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि विदेश में पढ़ाई के लिए US ETFs में सीधा निवेश क्यों सबसे समझदारी भरा विकल्प है।

रुपए में बचत क्यों पड़ सकती है कम?

अगर आपका लक्ष्य डॉलर में है, तो सिर्फ रुपए में कंपाउंडिंग करना मुश्किल हो सकता है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

1- ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी: विदेशी यूनिवर्सिटीज की फीस हर साल 5% से 8% की दर से बढ़ती है।

2- रुपए की कमजोरी: ऐतिहासिक रूप से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले हर साल औसतन 4% से 5% टूटता है।

एक उदाहरण से समझे तो जैसे आज किसी अमेरिकी यूनिवर्सिटी की 4 साल की फीस $2,00,000 है, तो अगले 10 साल बाद रुपए के अवमूल्यन और महंगाई को मिलाकर यह बिल ₹3.5 करोड़ से भी अधिक का हो सकता है।

भारतीय इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड्स के बजाय Direct US ETFs क्यों बेहतर?

पहले पेरेंट्स भारतीय फंड हाउसेज के ‘फंड ऑफ फंड्स’ के जरिए विदेश में निवेश करते थे। लेकिन अब Direct US-listed ETFs एक बेहतर विकल्प बन गए हैं:

SEBI ओवरसीज कैप की सीमा नहीं: भारतीय म्यूचुअल फंड्स पर SEBI द्वारा लगाई गई विदेशी निवेश की लिमिट (करीब $7 बिलियन) बार-बार पूरी हो जाती है, जिससे फंड्स को अपनी SIP बार-बार रोकनी पड़ती है।

LRS के जरिए सीधा निवेश: RBI की लिब्रलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत हर भारतीय नागरिक (नाबालिग सहित) को हर साल $2,50,000 तक विदेश भेजने और सीधे US ETFs में निवेश करने की पूरी छूट मिलती है।

कम एक्सपेंस रेशियो: डायरेक्ट US ETFs (जैसे- Vanguard या iShares) का एक्सपेंस रेशियो बेहद कम (0.03% से 0.09%) होता है, जबकि घरेलू इंटरनेशनल फंड्स में यह 1.25% से 1.75% तक हो सकता है।

ऐतिहासिक रिटर्न का गणित

अगर पिछले 10 वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड देखें, तो S&P 500, Nasdaq 100 और ग्लोबल इक्विटीज के 60/20/20 पोर्टफोलियो ने डॉलर (USD) टर्म में 13% से 14% वार्षिक रिटर्न दिया है। जब इसमें रुपए की 4-5% सालाना गिरावट को जोड़ दिया जाता है, तो भारतीय निवेशकों के लिए यह सालाना रिटर्न रुपए के टर्म में 17% से 19% के करीब बैठता है। यानी डॉलर में निवेश करना फायदे वाला सौदा रहा है।

निवेश शुरू करने से पहले इन 3 बातों का रखें ध्यान

अमेरिकी ETFs में ऐप या ब्रोकरेज के जरिए निवेश करते समय इन व्यावहारिक पहलुओं को न भूलें:

Micro-SIP से बचें: हर महीने ₹1,000 या ₹2,000 जैसी छोटी SIP पर बैंक वायर चार्ज और फॉरेक्स स्प्रेड का खर्च भारी पड़ सकता है। इसलिए पैसे को रुपए में इकट्ठा करें और हर 3 या 6 महीने में एक बार में रेमिटेंस करें।

TCS के नियम: एक वित्त वर्ष में ₹10 लाख तक के रेमिटेंस पर अतिरिक्त टीसीएस नहीं लगता। ₹10 लाख से ऊपर 20% TCS कटता है, जिसे आप अपने वार्षिक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में एडजस्ट या रिफंड क्लेम कर सकते हैं।

Schedule FA रिपोर्टिंग: विदेश में शेयर या ETF खरीदते ही ITR-2 या ITR-3 भरते समय Schedule FA में उसका ब्योरा देना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर ‘ब्लैक मनी एक्ट’ के तहत भारी जुर्माना लग सकता है।

टारगेट तक पहुंचने की सही रणनीति

जैसे-जैसे आपके बच्चे के कॉलेज एडमिशन का समय करीब आए, आपको अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित मोड में शिफ्ट करना चाहिए:

Build Phase (शुरुआती 5-10 साल): इक्विटी ETFs (जैसे S&P 500 / Nasdaq) में आक्रामक तरीके से निवेश करें।

Protect Phase (3-4 साल पहले): जब एडमिशन में 3-4 साल बचें, तो धीरे-धीरे इक्विटी से पैसा निकालकर US डेट/बॉन्ड फंड्स में शिफ्ट करें।

Deploy Phase (आखिरी 1-2 साल): फीस भुगतान से 1-2 साल पहले फंड को USD कैश या लिक्विड बकेट में रखें, ताकि शेयर बाजार में किसी तात्कालिक गिरावट से आपकी फीस का बजट प्रभावित न हो।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Investment: सोने में फिर से खरीदारी शुरू करने का आ गया सही मौका! जेफरीज के क्रिस वुड ने क्यों कहा ऐसा?

Gold Price Investment Strategy: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस वुड ने सोने में निवेश को लेकर एक बड़ा और अहम सुझाव दिया है। मनीकंट्रोल को दिए एक खास इंटरव्यू में क्रिस वुड ने कहा कि हालिया गिरावट और एक सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद अब सोने में फिर से खरीदारी शुरू करने का सही समय आ गया है।

क्यों आया सोने में गिरावट का दौर?

क्रिस वुड ने सोने की हालिया चाल का विश्लेषण करते हुए बताया कि जब हाल ही में ईरान संघर्ष की शुरुआत हुई थी, तब भी सोने ने अपना नया रिकॉर्ड हाई नहीं बनाया था।

ईरान युद्ध की खबर के बावजूद सोने का नया ऑल-टाइम हाई न बनाना इस बात का साफ इशारा था कि सोने का बाजार फिलहाल अपने शिखर पर पहुंच चुका है और इसके बाद एक ठहराव या कंसोलिडेशन फेज शुरू होना तय था।

अब सोना इस ट्रेडिंग रेंज के अपने सबसे निचले स्तर के करीब आ गया है, जिससे निवेशकों के लिए इसमें नए सिरे से एंट्री करने का बेहतरीन मौका बन रहा है।

लंबी अवधि में क्यों मजबूत है सोने का आउटलुक?

क्रिस वुड लंबी अवधि के लिए सोने को लेकर बेहद तेजी का रुख रखते हैं। उन्होंने इसके पीछे का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर के अवमूल्यन को बताया। वुड ने तर्क देते हुए कहा कि, ‘दीर्घकालिक नजरिए से मुझे सोना इसलिए पसंद है क्योंकि मैं अभी भी ‘डॉलर डिबेसमेंट ट्रेड’ यानी डॉलर के मूल्य में आने वाली संभावित गिरावट की थ्योरी में पूरा विश्वास रखता हूं।’

निवेशकों के लिए क्रिस वुड की सलाह

सोने में आई हालिया करेक्शन के बाद अब यह एक आकर्षक कंसोलिडेशन जोन में है। इसलिए निवेशकों को हर गिरावट पर इसे अपने पोर्टफोलियो में जोड़ने की रणनीति अपनानी चाहिए।

वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी डॉलर के दीर्घकालिक दबाव को देखते हुए सोना पोर्टफोलियो को मजबूती और सुरक्षा प्रदान करने का सबसे असरदार माध्यम बना हुआ है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।