SBI Lakhpati Scheme: रोजाना महज ₹20 बचाकर बनेंगे लखपति! जानिए एसबीआई की इस खास आरडी स्कीम का पूरा गणित

SBI Har Ghar Lakhpati Scheme Details: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने छोटे और मध्यम आय वर्ग के बचतकर्ताओं के लिए एक शानदार योजना शुरू की है, जिसका नाम ‘हर घर लखपति’ (Har Ghar Lakhpati Scheme) है। यह बेसिकली एसबीआई की रिकरिंग डिपॉजिट (RD) का एक कस्टमाइज्ड गोल-बेस्ड वेरिएंट है।

इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य देश के हर परिवार को छोटी-छोटी मासिक बचत के जरिए ₹1 लाख या उससे अधिक का गारंटीड फंड तैयार करने में मदद करना है। अगर आप भी जोखिम रहित और सुरक्षित तरीके से ₹1 लाख की बचत करना चाहते हैं, तो यह स्कीम आपके लिए मुफीद साबित हो सकती है।

क्या है एसबीआई की ‘हर घर लखपति’ योजना?

‘हर घर लखपति’ एसबीआई की एक विशेष आवर्ती जमा (RD) योजना है। इसमें ग्राहक को हर महीने एक निश्चित समय अवधि के लिए एक तय राशि जमा करनी होती है। इस स्कीम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि मैच्योरिटी पूरी होने पर निवेशक को सीधे ₹1 लाख या इसके मल्टीपल जैसे ₹2 लाख, ₹3 लाख का एकमुश्त कॉर्पस मिलता है। चूंकि यह भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक की योजना है, इसलिए इसमें जमा आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और ब्याज दरें तय रहती हैं।

हर महीने कितना करना होगा निवेश?

आप अपनी सहूलियत और बजट के हिसाब से 3 साल से लेकर 10 साल तक का कार्यकाल चुन सकते हैं। चुने गए साल के हिसाब से आपकी महीने की किस्त तय होती है:

हर महीने कितना करना होगा निवेश?

 

नोट: ब्याज दरों में समय-समय पर होने वाले बदलाव के अनुसार मासिक किस्त की राशि में थोड़ा-बहुत अंतर आ सकता है।

ब्याज दरें और सीनियर सिटीजन्स को एक्स्ट्रा फायदा

एसबीआई इस स्कीम पर अपनी सामान्य आरडी के बराबर ब्याज दरें देता है, जिसमें ब्याज की गणना तिमाही आधार पर कंपाउंड की जाती है।

सामान्य नागरिकों के लिए: अवधि के अनुसार ब्याज दर 6.50% से 6.75% प्रति वर्ष तक मिलती है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए: बुजुर्गों को सामान्य नागरिकों की तुलना में 0.50% (50 बीपीएस) अधिक ब्याज मिलता है। यानी वरिष्ठ नागरिक हर महीने थोड़ा कम प्रीमियम जमा करके भी ₹1 लाख का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।

खाता कैसे खोलें और किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?

‘हर घर लखपति’ खाता खोलना बेहद आसान है। इसके लिए आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं:

SBI YONO App / Net Banking: अगर आप एसबीआई के मौजूदा ग्राहक हैं, तो आप YONO ऐप में जाकर ‘Deposits’ > ‘e-RD’ सेक्शन में जाकर ‘Har Ghar Lakhpati’ विकल्प चुनकर घर बैठे खाता खोल सकते हैं।

शाखा में जाकर: अपने नजदीकी एसबीआई ब्रांच में जाकर आवेदन फॉर्म भरें।

आवश्यक दस्तावेज: पैन कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और एसबीआई का सेविंग्स अकाउंट।

लोन सुविधा और पेनाल्टी के नियम

लोन सुविधा: जरूरत पड़ने पर निवेशक जमा राशि के 90% तक का लोन या ओवरड्राफ्ट (OD) भी ले सकते हैं।

किस्त चूकने पर जुर्माना: अगर आप किसी महीने की किस्त समय पर नहीं भर पाते हैं, तो एसबीआई नियमानुसार मामूली पेनाल्टी वसूलता है। लगातार किस्तें मिस होने पर अकाउंट बंद भी हो सकता है।

टैक्स नियम (TDS): एक वित्त वर्ष में मिलने वाला कुल ब्याज अगर ₹40,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) से अधिक होता है, तो टीडीएस लागू होगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ITR Filing Deadline: क्या 31 जुलाई के बाद बढ़ेगी आईटीआर की डेडलाइन? जानिए क्या है इनकम टैक्स विभाग का अपडेट

Income Tax Return Deadline Extension: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना किसी लेट फीस के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आज 31 जुलाई 2026 आखिरी तारीख है। हर साल की तरह इस बार भी सोशल मीडिया और करदाताओं के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या सरकार या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस डेडलाइन को आगे बढ़ाएगा?

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के आधिकारिक रुझानों के मुताबिक, इस बार ITR फाइल करने की आखिरी तारीख बढ़ने की संभावना बेहद कम है। करदाताओं को किसी भी तरह की राहत या तारीख बढ़ाए जाने का इंतजार किए बिना आज ही अपना आईटीआर दाखिल कर देना चाहिए।

क्या बढ़ेगी ITR फाइल करने की आखिरी तारीख?

इनकम टैक्स विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकार की तरफ से 31 जुलाई की डेडलाइन बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई विचार नहीं किया जा रहा है। इसके पीछे की वजह ये है कि, इस बार इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल (e-Filing Portal) काफी सुचारू रूप से काम कर रहा है और भारी ट्रैफिक के बावजूद कोई बड़ी तकनीकी खराबी नहीं देखी गई है।

अब तक पांच करोड़ से ज्यादा टैक्सपेयर्स अपना आईटीआर फाइल कर चुके हैं। विभाग का मानना है कि करदाताओं को पर्याप्त समय दिया गया था, इसलिए डेडलाइन बढ़ाने का कोई ठोस कारण नहीं है।

अगर आज 31 जुलाई तक ITR फाइल नहीं किया तो क्या होगा?

अगर आप 31 जुलाई 2026 की मध्यरात्रि तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने में चूक जाते हैं, तो आपको ये नुकसान और पेनाल्टी झेलनी पड़ेगी:

लेट फीस (Section 234F): अगर आपकी कुल सालाना कमाई ₹5 लाख से अधिक है, तो आपको ₹5,000 की लेट फीस देनी होगी। वहीं अगर आपकी कुल कमाई ₹5 लाख तक है, तो लेट फीस ₹1,000 होगी।

ब्याज का बोझ (Section 234A): अगर आपका कोई टैक्स बकाया निकलता है, तो 1 अगस्त से आपको बकाया टैक्स पर 1% प्रति माह की दर से साधारण ब्याज देना होगा।

घाटे को कैरी फॉरवर्ड न कर पाना: अगर आप शेयर बाजार, F&O या प्रॉपर्टी से हुए नुकसान को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड करना चाहते हैं, तो 31 जुलाई के बाद बिलेटेड रिटर्न में यह सुविधा नहीं मिलेगी।

बिलेटेड रिटर्न फाइल करने का मौका

जो लोग 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाएंगे, वे 31 दिसंबर 2026 तक अपना बिलेटेड आईटीआर (Belated ITR) जमा कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें पेनल्टी और ब्याज चुकाना पड़ेगा।

टैक्सपेयर्स के लिए काम की सलाह

इनकम टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर चल रही डेडलाइन एक्सटेंशन की अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। आखिरी समय के रश और सर्वर पर दबाव से बचने के लिए आज ही तुरंत अपना ITR-1 या संबंधित फॉर्म भरकर प्रोसेस पूरा करें और रिटर्न को e-Verify करना न भूलें।

बैंक में जमा किए गए रुपये को लेकर RBI ने दिया बड़ा फैसला, 1 अक्टूबर से लागू हो जाएगा ये नया नियम

RBI New Rules on Bank Deposit Rates: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के सभी कमर्शियल बैंकों के लिए जमा पर मिलने वाले ब्याज से जुड़ा एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। रिजर्व बैंक ने बैंकों से साफ कह दिया है कि वे अपनी सभी शाखाओं में एक ही दिन जमा की जाने वाली समान राशि पर ग्राहकों को एक जैसी ही ब्याज दरें प्रदान करें। किसी भी ब्रांच में ब्याज दरों को लेकर भेदभाव या अंतर करने की इजाजत नहीं होगी।

आरबीआई का यह नया आदेश ‘भारतीय रिजर्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक- जमाओं पर ब्याज दर) दूसरा संशोधन निर्देश, 2026’ के तहत जारी किया गया है, जो 1 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगा।

एक दिन, एक रकम तो ब्याज भी होगा बिल्कुल एकसमान

केंद्रीय बैंक के संशोधित दिशानिर्देशों के मुताबिक, बैंकों को अपने जमा पर वही ब्याज देना होगा जो उनकी ऑफिशियल वेबसाइट पर पहले से तय और घोषित है। अगर कोई ग्राहक देश की किसी भी शहर या ब्रांच में एक ही दिन समान रकम जमा करता है, तो बैंक उसे अलग-अलग ब्याज दर नहीं दे सकते।

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि एक ही दिन स्वीकार किए गए समान अमाउंट के डिपॉजिट पर अलग-अलग दरें देना पूरी तरह से अस्वीकार्य और नियमों के खिलाफ होगा।

रोज सुबह 10:10 बजे तक अपडेट करनी होंगी थोक जमा दरें

पारदर्शिता को और बढ़ावा देने के लिए रिजर्व बैंक ने बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरों को सार्वजनिक करने का समय भी तय कर दिया है:

समय सीमा: सभी बैंकों को हर कारोबारी दिन सुबह 10:00 बजे तक अपनी वेबसाइट पर थोक जमा की नई ब्याज दरें पब्लिश करनी होंगी।

10 मिनट की छूट: आरबीआई ने इसमें अधिकतम 10 मिनट की रियायत दी है, यानी बैंकों को हर हाल में सुबह 10:10 बजे तक अपनी ब्याज दरें वेबसाइट पर अपडेट कर देनी होंगी।

LCR फ्रेमवर्क के तहत सीमित छूट की शर्त

आरबीआई ने बैंकों को लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) ढांचे के तहत थोक जमा पर ब्याज दरों में मामूली या सीमित अंतर रखने की छूट दी है। लेकिन यह छूट तभी मान्य होगी जब इसका आधार कोई ठोस और वैध वित्तीय मानक होगा, न कि बैंक की मनमर्जी।

1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे नए नियम

आरबीआई के अनुसार, यह नया ड्राफ्ट जून में जारी किए गए ड्राफ्ट गाइडलाइंस पर बैंकिंग स्टेकहोल्डर्स और आम जनता से मिली प्रतिक्रियाओं का गहराई से अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है। 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले इस नियम से बैंक ग्राहकों को अपनी जमा राशि पर पारदर्शी और सही रिटर्न मिलेगा।

बाबा रामदेव अब बेचेंगे इंश्योरेंस! ₹4,500 करोड़ की पतंजलि-मैग्मा डील को मिली IRDAI की मंजूरी

Patanjali Magma General Insurance Deal: आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स के जरिए FMCG सेक्टर में तहलका मचाने के बाद अब बाबा रामदेव की ‘पतंजलि’ फाइनेंशियल सर्विसेज में धमाकेदार एंट्री करने जा रही है। बीमा नियामक IRDAI ने पतंजलि द्वारा ‘मैग्मा जनरल इंश्योरेंस’ के अधिग्रहण को अपनी मंजूरी दे दी है। यह पूरा सौदा करीब ₹4,500 करोड़ में तय हुआ है।

इस डील की खास बात यह है कि नया लाइसेंस लेने के लंबे पचड़े में फंसने के बजाय पतंजलि एक स्थापित इंश्योरेंस कंपनी को खरीदकर सीधे बाजार में कब्जा जमाने की रणनीति पर काम कर रही है।

पतंजलि और DS ग्रुप की हुई साझेदारी

यह अधिग्रहण अकेला पतंजलि नहीं, बल्कि ‘रजनीगंधा’ और ‘कैच’ स्पाइसेज बनाने वाले DS ग्रुप (Dharampal Satyapal Group) के साथ मिलकर किया जा रहा है।

पतंजलि आयुर्वेद की हिस्सेदारी: 73.56%

DS ग्रुप की हिस्सेदारी: 24.5%

कुल हिस्सेदारी: दोनों कंपनियां मिलकर मैग्मा जनरल इंश्योरेंस की 98% हिस्सेदारी खरीद रही हैं।

विक्रेता: यह हिस्सेदारी अदार पूनावाला ग्रुप की कंपनी सा नोटी प्रॉपर्टीज एलएलपी और अन्य शेयरधारकों से खरीदी जा रही है।

समय सीमा: IRDAI की मंजूरी 3 महीने के लिए वैध है, जिसके भीतर इस सौदे को औपचारिक रूप से पूरा करना होगा।

FMCG से फाइनेंशियल सेक्टर की तरफ बड़ा कदम

अब तक पतंजलि की पहचान आयुर्वेदिक दवाओं, घी, सरसों तेल, बिस्किट और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स तक सीमित थी। यह अधिग्रहण पतंजलि का फाइनेंशियल सर्विसेज के क्षेत्र में पहला और सबसे बड़ा विविधीकरण है। मैग्मा जनरल इंश्योरेंस को खरीदने से पतंजलि को तुरंत एक चालू बिजनेस, बना-बनाया कस्टमर बेस, प्रोडक्ट्स और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मिल जाएगा।

कैसी है मैग्मा जनरल इंश्योरेंस की वित्तीय सेहत?

मैग्मा जनरल इंश्योरेंस नॉन-लाइफ इंश्योरेंस क्षेत्र की जानी-मानी कंपनी है। कंपनी मोटर इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस, प्रॉपर्टी और कमर्शियल इंश्योरेंस बेचती है। वित्त वर्ष 2026 (FY26) में कंपनी का ग्रॉस रिटन प्रीमियम बढ़कर ₹3,615.48 करोड़ हो गया, जो वित्त वर्ष 2025 (FY25) में ₹3,334.4 करोड़ था। कंपनी के पास देशभर में हजारों एजेंट्स, कॉरपोरेट क्लाइंट्स, बैंक पार्टनर्स और ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स का मजबूत नेटवर्क है।

गांवों और छोटे शहरों में पॉलिसी बेचने की तैयारी

भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में आज भी इंश्योरेंस की पहुंच काफी कम है। पतंजलि का रिटेल नेटवर्क देश के कोने-कोने और ग्रामीण इलाकों तक फैला हुआ है। साथ ही बाबा रामदेव के नाम पर देश के छोटे कस्बों में जो भरोसा है, उसका इस्तेमाल कंपनी अब हेल्थ और ऑटो इंश्योरेंस की पॉलिसियां बेचने में करेगी।

इस डील के पूरा होते ही पतंजलि भी टाटा, रिलायंस और बिड़ला जैसे देश के उन बड़े कॉरपोरेट घरानों की फेहरिस्त में शामिल हो जाएगी, जिनका अपना जनरल इंश्योरेंस बिजनेस है।

Claiming Will in India: वसीयत से संपत्ति कैसे करें क्लेम? नॉमिनी और प्रोबेट के ये नियम जानना है बेहद जरूरी

Inheritance and Will Rules in India: किसी रिश्तेदार या परिजन के निधन के बाद उनकी संपत्ति जैसे- बैंक में पड़े रुपए, इनवेस्टमेंट, म्यूचूअल फंड्स और प्रॉपर्टी के बंटवारे में वसीयत की भूमिका सबसे अहम होती है। हालांकि, वसीयत होने के बावजूद कई बार कानूनी जानकारी न होने के कारण वारिसों को संपत्ति अपने नाम कराने में लंबी कागजी कार्रवाई और कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ता है।

सबसे बड़ी गलतफहमी ‘नॉमिनी’ और ‘वसीयत के लाभार्थी’ को एक ही समझने से होती है। आइए आपको बताते हैं कि भारत में वसीयत के जरिए संपत्ति का दावा कैसे किया जाता है और इसके लिए किन नियमों और दस्तावेजों की जरूरत होती है।

नॉमिनी ही मालिक नहीं होता, ये है सबसे बड़ी गलतफहमी

अधिकांश लोग यह मानते हैं कि बैंक खाते, म्यूचुअल फंड या शेयर में जिसे नॉमिनी बनाया गया है, वही उस संपत्ति का असली मालिक बन जाता है। कानूनी रूप से यह धारणा बिल्कुल गलत है। कानून की नजर में नॉमिनी केवल एक ट्रस्टी या कस्टोडियन होता है। उसका काम सिर्फ संपत्ति को संभालना होता है।

संपत्ति का असली मालिकाना हक उसी व्यक्ति को मिलता है जिसका नाम वसीयत में लाभार्थी के रूप में दर्ज हो। अगर नॉमिनी और लाभार्थी अलग-अलग व्यक्ति हैं, तो नॉमिनी को वह संपत्ति वसीयत के हकदार को सौंपनी होगी।

प्रोबेट क्या है और यह कब जरूरी होता है?

प्रोबेट अदालत द्वारा जारी किया गया एक कानूनी प्रमाण पत्र है, जो वसीयत की प्रामाणिकता और वैधता की पुष्टि करता है।

कब पड़ती है जरूरत?: अगर परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद हो, वसीयत की वैधता पर कोई संदेह जताए, या बहुत बड़ी संपत्ति/अचल जायदाद शामिल हो, तो वित्तीय संस्थान और अथॉरिटी प्रोबेट की मांग करते हैं।

क्या यह हर मामले में जरूरी है?: हर मामले में प्रोबेट की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन प्रेसिडेंसी शहरों जैसे- मुंबई, कोलकाता, चेन्नई के कुछ संपत्ति मामलों या विशेष संस्थानों के नियमों के तहत प्रोबेट अनिवार्य हो सकता है।

क्लेम करने के लिए जरूरी दस्तावेज

वसीयत होने के बावजूद संपत्ति हस्तांतरण के लिए सही कागजात होना अनिवार्य है। मुख्य दस्तावेजों की सूची नीचे दी गई है:

  1. मृत्यु प्रमाण पत्र: मूल या सत्यापित प्रति।
  2. वसीयत की प्रति: मूल वसीयत या प्रोबेट (अगर लागू हो)।
  3. वारिस का पहचान व पता प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट आदि।
  4. कानूनी वारिस प्रमाण पत्र: कुछ मामलों में बैंक या संस्थाएं इसकी मांग कर सकती हैं।

बैंकों और म्यूचुअल फंड्स के अपने नियम

बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां, म्यूचुअल फंड हाउस और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन अथॉरिटीज के पास क्लेम प्रोसेस के लिए अपने अलग-अलग प्रोटोकॉल होते हैं। प्रक्रिया शुरू करने से पहले संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान के क्लेम फॉर्म और नियमों को ध्यान से पढ़ें। सभी आवश्यक दस्तावेजों को एक साथ जमा करने से क्लेम एप्लीकेशन रिजेक्ट नहीं होता है और प्रक्रिया तेजी से पूरी होती है।

शुरुआत से पहले पूरी संपत्ति का ब्योरा बनाएं

अक्सर एक वसीयत में कई तरह की संपत्तियों जैसे- बचत खाते, एफडी, डिमैट अकाउंट, प्रॉपर्टी, इंश्योरेंस पॉलिसी का जिक्र होता है। क्लेम प्रोसेस शुरू करने से पहले कानूनी वारिसों को सलाह दी जाती है कि वे मृतक की सभी संपत्तियों, खातों और निवेशों की एक व्यवस्थित सूची तैयार कर लें ताकि कोई भी संपत्ति क्लेम होने से न छूटे।

ईरान से जंग में कूदा सऊदी अरब! इराक में US संग मिलकर तबाह किए कई ठिकाने, कुरान की आयत का दिया हवाला

US Saudi Joint Airstrikes in Iraq: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बहुत बड़ा भू-राजनीतिक मोड़ आया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से अब तक दूरी बनाकर रख रहा सऊदी अरब अब इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल हो गया है। बुधवार को सऊदी ने अमेरिकी वायुसेना के साथ मिलकर पूर्वी इराक में सक्रिय ईरान-समर्थित उग्रवादी गुटों के ठिकानों पर भीषण एयरस्ट्राइक की।

सऊदी रक्षा मंत्रालय ने इसे ‘आत्मरक्षा’ में की गई सैन्य कार्रवाई बताया है, लेकिन अपनी इस कार्रवाई को सही ठहराने के लिए पवित्र कुरान की एक आयत का हवाला देकर यह साफ कर दिया है कि अगर उसकी संप्रभुता और तेल सुविधाओं पर हमला हुआ, तो वह खामोश नहीं रहेगा।

कुरान की आयत और UN चार्टर का दिया हवाला

हमलों के तुरंत बाद सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बेहद कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने लिखा कि सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने रियाद और पूर्वी प्रांत में स्थित तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने आ रहे कई ईरानी ड्रोनों को मार गिराया। ये ड्रोन इराक की सरजमीं से दागे गए थे।

सऊदी अरब ने अपनी कार्रवाई को धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों आधारों पर सही ठहराया। सऊदी मंत्रालय ने कुरान का संदर्भ देते हुए लिखा, ‘अगर कोई आप पर हमला/आक्रमण करे, तो उस पर उसी तरह हमला करो जैसे उसने आप पर हमला किया है।’ इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए सऊदी ने कहा कि हर देश को अपनी रक्षा और आत्मरक्षा का वैध अधिकार है।

अमेरिका और सऊदी का संयुक्त हमला: CENTCOM

अमेरिकी सेंट्रल कमान ने पुष्टि की कि अमेरिकी और सऊदी फाइटर जेट्स ने पूर्वी इराक में ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) द्वारा संचालित उग्रवादी अड्डों, हथियारों के गोदामों और लॉजिस्टिक्स हब को निशाना बनाया।

CENTCOM के अनुसार, यह कार्रवाई पिछले 72 घंटों में IRGC के इशारे पर सऊदी अरब और अमेरिकी ठिकानों पर किए गए 30 से अधिक हवाई ड्रोन हमलों के जवाब में की गई है। फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में यह पहली बार है जब सऊदी अरब ने इराक के भीतर किसी उग्रवादी समूह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने की बात खुलकर सार्वजनिक रूप से स्वीकार की है।

‘मजबूरी में लिया युद्ध में कूदने का फैसला’

न्यू यॉर्क टाइम्स से बातचीत में गल्फ इंटरनेशनल फोरम के सीनियर फेलो अब्दुलअजीज अल घशियान ने बताया कि सऊदी अरब अब तक संयम बरत रहा था, लेकिन ईरान और उसके समर्थक गुटों ने सऊदी के इस संयम को उसकी ‘कमजोरी या चुप्पी’ समझ लिया।

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस एयरस्ट्राइक के जरिए सऊदी अरब अपने चारों तरफ मौजूद दुश्मनों को यह कड़ा संदेश देना चाहता है कि सऊदी इंफ्रास्ट्रक्चर या तेल सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

मध्य पूर्व से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट हसन अलहसन का कहना है कि हालांकि सऊदी इस युद्ध को और बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन यह हमला तेहरान के लिए एक सख्त चेतावनी है कि अगर उकसावे की कार्रवाई जारी रही, तो सऊदी को मजबूरी में अमेरिका के साथ मिलकर पूर्ण सैन्य मोर्चा खोलना पड़ेगा।

PM मोदी की फेसबुक पोस्ट हटने के विवाद पर Meta का बड़ा कदम, अब VIP अकाउंट्स के लिए लागू किए नए सुरक्षा प्रोटोकॉल

PM Modi post row: दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने भारत सरकार को एक पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य प्रमुख हस्तियों द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए लागू किए गए कड़े और एडवांस्ड सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी दी है। प्रधानमंत्री मोदी की फेसबुक पोस्ट कुछ समय के लिए हटाए जाने के विवाद के बाद Meta ने प्रमुख VIP अकाउंट्स की सुरक्षा के लिए नए प्रोटोकॉल लागू किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने गुरुवार (30 जुलाई) को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि कंपनी ने सरकार को इस बारे में जानकारी दी है।

उन्होंने बताया कि अगले 7 से 10 दिनों के भीतर इस मुद्दे पर एक विस्तृत बैठक भी होगी। पत्रकारों से बातचीत में एस. कृष्णन ने कहा कि Meta ने सरकार को बताया है कि 28 जुलाई की घटना के बाद नए सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से कुछ समय के लिए हट गया था, जिसे बाद में बहाल कर दिया गया था। बता दें कि मेटा, फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाती है।

मेटा ने लेटर में क्या कहा?

सूत्रों ने बताया कि मेटा ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्रालय को सूचित किया है कि प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख हस्तियों द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट की अतिरिक्त निगरानी की जाएगी। साथ ही कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कई स्तरों पर इसकी समीक्षा की जाएगी। सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि मेटा की टीम इस सप्ताह के अंत में या अगले सप्ताह की शुरुआत में सरकारी अधिकारियों से उस घटना के संबंध में मिल सकती है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटा दिया गया था।

सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाए जाने के मुद्दे पर मंगलवार को मेटा के ग्लोबल हेड ऑफ पब्लिक पॉलिसी को तलब किया था। 23 जुलाई की पोस्ट में प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित किया था। उन्हें पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। अमेरिका स्थित सोशल मीडिया कंपनी ने इस घटना के लिए तकनीकी खराबी को जिम्मेदार ठहराते हुए माफी मांगी थी। हालांकि, IT मंत्रालय ने इस स्पष्टीकरण को अपर्याप्त माना था।

प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो संदेश शुरू में 23 जुलाई को इंस्टाग्राम पर साझा किया गया था। बाद में फेसबुक पर पोस्ट किया गया था। लेकिन मेटा ने इसे अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया था। सूत्रों के अनुसार, मेटा ने इस स्थिति के लिए अपने ऑटोमेटेड AI कंटेंट फिल्टर में तकनीकी खराबी को जिम्मेदार ठहराया। कंपनी ने कहा कि जो कंटेंट गलती से हटा दिया गया था, उसे बाद में बहाल कर दिया गया।

मेटा के अधिकारियों से इन पहलुओं पर होगी चर्चा

MeitY सचिव ने बताया कि प्रस्तावित बैठक में इस पूरे मामले के नीतिगत (Policy) और तकनीकी (Technical) दोनों पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही यह भी समीक्षा की जाएगी कि Meta ने सरकार की चिंताओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि Meta ने सरकार को एक लेटर लिखकर इस घटना पर खेद (Regret) भी जताया है। साथ ही यह बताया है कि किन कारणों से पोस्ट हटाई गई थी।

Meta के जवाब की जांच जारी

एस. कृष्णन ने कहा कि केंद्र सरकार अभी Meta द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण का अध्ययन कर रही है। इसके अलावा, यूजरनेम से जुड़े मुद्दे पर विभिन्न मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स द्वारा दिए गए सुझावों और प्रस्तुतियों की भी जांच की जा रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने प्रधानमंत्री की फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों को तलब किया था।

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सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार Meta के इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है कि पोस्ट ऑटोमेटेड सिस्टम की तकनीकी गलती (Automated Error) के कारण हटाई गई थी। सरकार और Meta के बीच इस मुद्दे पर बातचीत आगे भी जारी रहेगी।

रेस्टोरेंट में ₹30 की इडली, ऑनलाइन ₹90 क्यों? फूड डिलीवरी ऐप्स के बिलिंग गेम की ये कहानी सामने आई

Billing Game News: अगर आप अक्सर स्विगी और जोमैटो जैसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स से खाना मंगवाते हैं तो आपने भी ये गौर किया किया होगा कि रेस्टोरेंट में मिलने वाले फूड और ऐप पर दिखने वाले की कीमतों में बहुत बड़ा अंतर होता है। अब इस पूरे मसले पर बेंगलुरु के रेस्टोरेंट मालिकों ने मोर्चा खोल दिया है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां के होटेलियर्स ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के अनफेयर और अपारदर्शी कमीशन स्ट्रक्चर पर कड़ा एतराज जताया है।

रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने उनके बिजनेस को बढ़ाने में मदद की है। लेकिन इनका मौजूदा मॉडल उनके मुनाफे को पूरी तरह से खत्म कर रहा है। वहीं दूसरी ओर ग्राहकों को चीजें महंगी मिल रही हैं।

30 रुपये की इडली ऑनलाइन 90 रुपये की क्यों?

By2 Coffee चेन के संस्थापक राघवेंद्र पादुकोण ने रेस्टोरेंट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के बीच की कीमतों के भारी अंतर पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जो इडली रेस्टोरेंट में 30 से 35 रुपये में मिलती है, वही ऑनलाइन ऑर्डर करने पर 80 से 90 रुपये की क्यों हो जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रेस्टोरेंट की वास्तविक कीमत और ऑनलाइन कीमत बिल्कुल एक समान होनी चाहिए जिसमें सिर्फ डिलीवरी चार्ज का अंतर होना चाहिए। राघवेंद्र पादुकोण ने कहा कि रेस्टोरेंट मालिक फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ नहीं हैं बल्कि वे इस बात का विरोध कर रहे हैं कि यह मौजूदा मॉडल किस तरीके से काम कर रहा है।

कमाई का आधा हिस्सा भी नहीं बचता, जानें कहां-कहां कटता है पैसा

रिपोर्ट के मुताबिक रेस्टोरेंट मालिकों ने उन तमाम कटौतियों की डिटेल में जानकारी दी है जो उनके पेआउट को काफी कम कर देती हैं। इनमें हर ऑर्डर पर लिया जाने वाला कमीशन, ग्राहकों द्वारा दिया जाने वाला प्लेटफॉर्म शुल्क, कलेक्शन चार्ज, पेमेंट गेटवे शुल्क, सर्विस चार्ज पर लगने वाला जीएसटी, कैंसिलेशन चार्ज, लंबी दूरी का शुल्क और प्रमोशनल खर्च शामिल हैं। रेस्टोरेंट मालिकों के मुताबि, इन सभी कटौतियों को एक साथ मिलाने पर उन्हें अपनी वास्तविक बिक्री का आधा हिस्सा भी नहीं मिल पाता है। इससे उनका प्रॉफिट मार्जिन बुरी तरह प्रभावित होता है।

बिना अनुमति के डिस्काउंट और विज्ञापन का बोझ

कर्नाटक स्टेट होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष जीके शेट्टी का कहना है कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स रेस्टोरेंट पार्टनर्स की अनुमति के बिना भारी कटौती कर रहे हैं। होटेलियर्स ने इस बात पर सबसे ज्यादा आपत्ति जताई कि प्लेटफॉर्म्स अपनी मर्जी से विज्ञापन, डिस्काउंट और प्रमोशनल कैंपेन शुरू करते हैं और उनका पूरा खर्च रेस्टोरेंट मालिकों से वसूल लेते हैं। रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि सिर्फ एक ईमेल नोटिफिकेशन भेज देने को उनकी सहमति नहीं माना जा सकता।

बैंगलोर होटल्स एसोसिएशन के मानद अध्यक्ष पीसी राव ने कहा कि अगर 20 प्रतिशत कमीशन तय हुआ है तो सिर्फ उतना ही पैसा कटना चाहिए। मालिकों को उम्मीद होती है कि कटौती के बाद उन्हें कम से कम 70 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा लेकिन अंत में उनके हाथ में सिर्फ 30 से 40 फीसदी रकम ही बचती है। उनका मानना है कि समझौते के बाद कोई भी हिडन चार्ज नहीं थोपा जाना चाहिए।

रेस्टोरेंट मालिकों की प्रमुख मांगें

इस स्थिति से निपटने के लिए होटेलियर्स ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। उन्होंने कुल सर्विस चार्ज और सभी कटौतियों को मिलाकर अधिकतम 20 प्रतिशत से नीचे सीमित करने की मांग की है। इसके अलावा तय कमीशन के अलावा कोई भी छिपा हुआ खर्च न वसूलने और डिस्काउंट या विज्ञापन कैंपेन चलाने से पहले रेस्टोरेंट से ओटीपी या सीधे तौर पर स्पष्ट अनुमति लेने की बात कही है।

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रेस्टोरेंट मालिकों ने पारदर्शी सेटलमेंट स्टेटमेंट देने की मांग की है ताकि सभी कटौतियों का स्पष्ट हिसाब मिल सके। साथ ही शिकायतों के निपटारे के लिए एक उचित एस्केलेशन सिस्टम बनाने, सर्विस चार्ज पर जीएसटी की समीक्षा करने और डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ सर्विस प्रोवाइडर के रूप में सीमित रखने वाले निष्पक्ष मॉडल को बनाए रखने की मांग की गई है।

Juniper Green Energy IPO: दिग्गज एंकर निवेशकों ने लगाए ₹539 करोड़! आज से खुला इश्यू, निवेश करें या नहीं? जानें

Juniper Green Energy IPO Opening: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी जुपिटर ग्रीन एनर्जी का ₹1,800 करोड़ का इश्यू आज, 30 जुलाई को आम निवेशकों के लिए खुल गया है। निवेशक इस इश्यू में 3 अगस्त तक बोली लगा सकते हैं। अगर आप भी रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के इस आईपीओ में दांव लगाने की सोच रहे हैं, तो कंपनी के प्राइस बैंड, एंकर बुक, वित्तीय स्थिति और ब्रोकरेज रिपोर्ट से जुड़ी हर अहम बातें जान लें।

Juniper Green Energy IPO: मुख्य तारीखें और प्राइस बैंड

आईपीओ खुलने-बंद होने की तारीख: 30 जुलाई-3 अगस्त 2026

प्राइस बैंड: ₹214 से ₹225 प्रति शेयर

कुल इश्यू साइज: ₹1,800 करोड़ (पूरी तरह से फ्रेश इश्यू )

लिस्टिंग की संभावित तारीख: 6 अगस्त 2026 (BSE और NSE पर)

मर्चेंट बैंकर: आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एचएसबीसी सिक्योरिटीज, जेएम फाइनेंशियल और कोटक महिंद्रा कैपिटल।

एंकर निवेशकों से जुटाए ₹539.4 करोड़

आईपीओ खुलने से ठीक एक दिन पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹539.4 करोड़ का फंड जुटाया है। बीएसई सर्कुलर के अनुसार, कंपनी ने ₹225 के अपर प्राइस बैंड पर 31 फंड्स को 2.4 करोड़ इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। कुल एंकर पोर्शन का 74.79% (₹403.43 करोड़) हिस्सा देश के 9 बड़े म्यूचुअल फंड हाउस को मिला। इनमें SBI Mutual Fund, ICICI Prudential, WhiteOak Capital, Nippon India, HSBC और Edelweiss शामिल हैं।

दिग्गज ग्लोबल और इंश्योरेंस इन्वेस्टर फर्म अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी ने करीब ₹80 करोड़ का निवेश किया। इसके अलावा HDFC Life, Bajaj Life और Tata AIG जैसी इंश्योरेंस कंपनियों ने भी एंकर बुक में हिस्सा लिया।

आईपीओ से मिले पैसों का क्या करेगी कंपनी?

कंपनी आईपीओ के जरिए जुटाए गए ₹1,800 करोड़ में से बड़ा हिस्सा अपना कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करेगी। कंपनी पर कुल ₹13,266 करोड़ का कर्ज है। इसमें से ₹683.24 करोड़ सीधे कंपनी के कर्ज को चुकाने/कम करने में इस्तेमाल होंगे, जबकि ₹728.69 करोड़ इसकी सहायक कंपनियों के बकाए लोन को चुकाने के लिए दिए जाएंगे। बची हुई राशि सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होगी।

कंपनी का बिजनेस और वित्तीय स्थिति

गुरुग्राम बेस्ड जुपिटर ग्रीन एनर्जी भारत की टॉप 10 सबसे बड़ी रिन्यूएबल इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स (IPP) में शामिल है। यह सोलर, विंड, हाइब्रिड और बैटरी एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स डेवलप और ऑपरेट करती है।

जून 2026 तक कंपनी का कुल प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो 7,910.20 MW तक पहुंच गया है। वर्तमान में इसकी चालू क्षमता 1,795 MW है, जबकि 6,115 MW क्षमता के प्रोजेक्ट्स निर्माण के अधीन हैं। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में कंपनी का शुद्ध लाभ 10.9% बढ़कर ₹40.5 करोड़ रहा, जो FY25 में ₹36.5 करोड़ था। इसी अवधि में कंपनी की आय 41.3% उछलकर ₹718.9 करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹508.7 करोड़ थी।

ब्रोकरेज की क्या है सलाह?

एसबीआई सिक्योरिटीज ने लंबी अवधि के नजरिए से इस आईपीओ को ‘Subscribe’ करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी की विंड-सोलर हाइब्रिड( WSH) और FDRE एसेट्स में मजबूत पकड़ है। इसके अलावा, कंपनी की चालू क्षमता 1,795 MW है और 6,115 MW के प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन हैं, जो आने वाले समय में प्रोजेक्ट्स के चालू होने पर कंपनी को लंबे समय तक मजबूत ग्रोथ विजिबिलिटी प्रदान करेंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा से पहले दिल्ली में सख्ती! इन रूट पर मीट की दुकानों को बंद करने के आदेश, MCD ने सभी 12 जोन को दिए निर्देश

Kanwar Yatra 2026: श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही आज यानी गुरुवार (30 जुलाई) से विश्व की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल कांवड़ यात्रा शुरू हो चुकी है। इस दौरान विभिन्न राज्यों से करोड़ों शिवभक्त गंगाजल लेने के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचेंगे। इस बीच, कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले दिल्ली नगर निगम (MCD) ने बड़ा फैसला लेते हुए सभी 12 जोनों को कांवड़ यात्रा रूट्स और कांवड़ शिविरों के आसपास संचालित अवैध मीट की दुकानों को बंद कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही लाइसेंस वाले मीट की दुकानों की भी जांच की जाएगी। लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में 30 जुलाई से 11 अगस्त तक 308 कांवड़ शिविर लगाए जाएंगे। इसे देखते हुए एमसीडी ने सभी नागरिक सुविधाओं की तैयारियां यात्रा शुरू होने से पहले पूरी करने के निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि MCD ने अधिकारियों से यात्रा से पहले सभी सिविक इंतजाम पूरे करने को भी कहा है, जिसके दौरान 30 जुलाई से 11 अगस्त तक पूरे देश में 308 कांवड़ कैंप चलने वाले हैं।

कांवड़ कैंप साइट्स से अतिक्रमण हटाने के आदेश

एक ऑफिस मेमोरेंडम में सभी जोनल डिप्टी कमिश्नरों को यह पक्का करने का आदेश दिया गया है कि तीर्थयात्रा शुरू होने से पहले पहचाने गए कांवड़ कैंप साइट्स से अतिक्रमण हटा दिया जाए। मेमोरेंडम में कहा गया है कि MCD को यात्रा से काफी पहले कैंप साइट्स से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जोनल अधिकारियों को पहले ही पहचानी गई जगहों की जानकारी दे दी गई है। जबकि जरूरत पड़ने पर और कैंप लगाने की भी इजाजत दी जा सकती है।

सिविक बॉडी ने अधिकारियों को यह पक्का करने का निर्देश दिया है कि यात्रा के रास्तों पर या कांवड़ कैंप के आस-पास कोई भी बिना इजाजत या बिना लाइसेंस वाली मीट की दुकान न चले। यह भी कहा गया है कि अगर लाइसेंस वाली मीट की दुकानें अपने लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करती पाई जाती हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

साफ-सफाई के आदेश

सख्ती बरतने के अलावा, MCD ने सभी जोन से कैंप साइट और आस-पास के इलाकों में बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाने को कहा है। इनमें गहरी सफाई, उगी हुई घास-फूस को हटाना और रेगुलर कचरा इकट्ठा करना शामिल है। अधिकारियों ने कहा कि यात्रा के दौरान चौबीसों घंटे सफाई बनाए रखने के लिए सफाई कर्मचारी और मशीनरी तीन शिफ्ट में तैनात रहेंगी। हर साल आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा में शिवभक्त सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर हरिद्वार पहुंचते हैं। यहां से गंगाजल लेकर अपने गांव या शहर के शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

चार करोड़ से अधिक कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने की उम्मीद

अखाड़ा परिषद और मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने बताया कि भगवान शिव को जल अत्यंत प्रिय है। इसी कारण शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल ले जाकर अपने-अपने शिवालयों में उनका जलाभिषेक करते हैं। अधिकारियों के अनुसार, लगभग पखवाड़े भर चलने वाली इस यात्रा के दौरान चार करोड़ से अधिक कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने का अनुमान है। इसे देखते हुए प्रशासन ने उनकी सुरक्षा और सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।

कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वरिष्ठ अधिकारी कई बैठकें कर चुके हैं। यात्रा के शांतिपूर्ण और सुचारु संचालन के लिए पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों के साथ भी समन्वय स्थापित किया गया है। हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नवनीत सिंह ने बताया कि कांवड़ मेले को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और पुलिस पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अन्य जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

एसएसपी ने बताया कि कांवड़ मेले के दौरान पहली बार सोशल मीडिया पर निगरानी के लिए साइबर कमांडो तैनात किए जाएंगे। ये भ्रामक, फर्जी और AI से तैयार किए गए वीडियो पर तत्काल कार्रवाई करेंगे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सामान्य भ्रामक वीडियो को 36 घंटे के भीतर, जबकि एआई से तैयार फर्जी वीडियो को लगभग तीन घंटे के भीतर हटाने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सोशल मीडिया मंचों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। एसएसपी ने बताया कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को कांवड़ यात्रा के ट्रैफिक से अलग रखा जाएगा।

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हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि कांवड़ मेला शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में शिवभक्त हरिद्वार पहुंचने लगे हैं। दीक्षित ने बताया कि कांवड़ मेले को लेकर सभी विभागों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग को मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई से 11 अगस्त तक स्कूलों में अवकाश रहेगा। इस दौरान स्टूडेंट्स के लिए ऑनलाइन क्लासेस चलाने के निर्देश जारी किए गए हैं।