Claiming Will in India: वसीयत से संपत्ति कैसे करें क्लेम? नॉमिनी और प्रोबेट के ये नियम जानना है बेहद जरूरी

Inheritance and Will Rules in India: किसी रिश्तेदार या परिजन के निधन के बाद उनकी संपत्ति जैसे- बैंक में पड़े रुपए, इनवेस्टमेंट, म्यूचूअल फंड्स और प्रॉपर्टी के बंटवारे में वसीयत की भूमिका सबसे अहम होती है। हालांकि, वसीयत होने के बावजूद कई बार कानूनी जानकारी न होने के कारण वारिसों को संपत्ति अपने नाम कराने में लंबी कागजी कार्रवाई और कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ता है।

सबसे बड़ी गलतफहमी ‘नॉमिनी’ और ‘वसीयत के लाभार्थी’ को एक ही समझने से होती है। आइए आपको बताते हैं कि भारत में वसीयत के जरिए संपत्ति का दावा कैसे किया जाता है और इसके लिए किन नियमों और दस्तावेजों की जरूरत होती है।

नॉमिनी ही मालिक नहीं होता, ये है सबसे बड़ी गलतफहमी

अधिकांश लोग यह मानते हैं कि बैंक खाते, म्यूचुअल फंड या शेयर में जिसे नॉमिनी बनाया गया है, वही उस संपत्ति का असली मालिक बन जाता है। कानूनी रूप से यह धारणा बिल्कुल गलत है। कानून की नजर में नॉमिनी केवल एक ट्रस्टी या कस्टोडियन होता है। उसका काम सिर्फ संपत्ति को संभालना होता है।

संपत्ति का असली मालिकाना हक उसी व्यक्ति को मिलता है जिसका नाम वसीयत में लाभार्थी के रूप में दर्ज हो। अगर नॉमिनी और लाभार्थी अलग-अलग व्यक्ति हैं, तो नॉमिनी को वह संपत्ति वसीयत के हकदार को सौंपनी होगी।

प्रोबेट क्या है और यह कब जरूरी होता है?

प्रोबेट अदालत द्वारा जारी किया गया एक कानूनी प्रमाण पत्र है, जो वसीयत की प्रामाणिकता और वैधता की पुष्टि करता है।

कब पड़ती है जरूरत?: अगर परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद हो, वसीयत की वैधता पर कोई संदेह जताए, या बहुत बड़ी संपत्ति/अचल जायदाद शामिल हो, तो वित्तीय संस्थान और अथॉरिटी प्रोबेट की मांग करते हैं।

क्या यह हर मामले में जरूरी है?: हर मामले में प्रोबेट की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन प्रेसिडेंसी शहरों जैसे- मुंबई, कोलकाता, चेन्नई के कुछ संपत्ति मामलों या विशेष संस्थानों के नियमों के तहत प्रोबेट अनिवार्य हो सकता है।

क्लेम करने के लिए जरूरी दस्तावेज

वसीयत होने के बावजूद संपत्ति हस्तांतरण के लिए सही कागजात होना अनिवार्य है। मुख्य दस्तावेजों की सूची नीचे दी गई है:

  1. मृत्यु प्रमाण पत्र: मूल या सत्यापित प्रति।
  2. वसीयत की प्रति: मूल वसीयत या प्रोबेट (अगर लागू हो)।
  3. वारिस का पहचान व पता प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट आदि।
  4. कानूनी वारिस प्रमाण पत्र: कुछ मामलों में बैंक या संस्थाएं इसकी मांग कर सकती हैं।

बैंकों और म्यूचुअल फंड्स के अपने नियम

बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां, म्यूचुअल फंड हाउस और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन अथॉरिटीज के पास क्लेम प्रोसेस के लिए अपने अलग-अलग प्रोटोकॉल होते हैं। प्रक्रिया शुरू करने से पहले संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान के क्लेम फॉर्म और नियमों को ध्यान से पढ़ें। सभी आवश्यक दस्तावेजों को एक साथ जमा करने से क्लेम एप्लीकेशन रिजेक्ट नहीं होता है और प्रक्रिया तेजी से पूरी होती है।

शुरुआत से पहले पूरी संपत्ति का ब्योरा बनाएं

अक्सर एक वसीयत में कई तरह की संपत्तियों जैसे- बचत खाते, एफडी, डिमैट अकाउंट, प्रॉपर्टी, इंश्योरेंस पॉलिसी का जिक्र होता है। क्लेम प्रोसेस शुरू करने से पहले कानूनी वारिसों को सलाह दी जाती है कि वे मृतक की सभी संपत्तियों, खातों और निवेशों की एक व्यवस्थित सूची तैयार कर लें ताकि कोई भी संपत्ति क्लेम होने से न छूटे।

19 साल की उम्र में लिखवाई वसीयत, माता-पिता नहीं बल्कि बचपन के दोस्त को सौंप दी पूरी संपत्ति

आमतौर पर माना जाता है कि किसी व्यक्ति की संपत्ति पर सबसे पहला अधिकार उसके परिवार का होता है। यही वजह है कि अधिकतर लोग अपनी वसीयत में माता-पिता, जीवनसाथी या बच्चों को वारिस बनाते हैं। लेकिन चीन के शंघाई से सामने आया एक मामला इस सोच से बिल्कुल अलग है। यहां 19 साल के एक छात्र ने ऐसा फैसला लिया, जिसने लोगों को हैरान कर दिया। करोड़ों रुपये की संपत्ति होने के बावजूद उसने अपने परिवार के बजाय किसी और को अपना उत्तराधिकारी चुना। खास बात यह है कि उसने यह फैसला पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया, ताकि भविष्य में उसकी इच्छा को लेकर कोई विवाद न हो।

कम उम्र में वसीयत बनवाने और परिवार की जगह किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी संपत्ति सौंपने के पीछे की वजह भी काफी दिलचस्प बताई जा रही है। इस अनोखे फैसले की चर्चा सोशल मीडिया से लेकर कानूनी विशेषज्ञों के बीच भी हो रही है।

बचपन के दोस्त पर था सबसे ज्यादा भरोसा

रिपोर्ट के मुताबिक, छात्र का उपनाम ली (Li) है। उसने अपनी वसीयत में फ्लैट और बैंक में जमा करोड़ों रुपये की बचत समेत सारी संपत्ति अपने बचपन के दोस्त के नाम कर दी। ली का कहना है कि वही उसका सबसे भरोसेमंद साथी है।

परिवार से क्यों बना फासला?

ली ने बताया कि उसके माता-पिता का तलाक हो गया था और बाद में दोनों ने दूसरी शादी कर ली। उन्होंने संपत्ति तो उसके नाम कर दी, लेकिन बचपन में उसके साथ ज्यादा समय नहीं बिताया। इसी वजह से समय के साथ उसके और माता-पिता के रिश्ते कमजोर होते गए।

19 साल की उम्र में वसीयत क्यों बनाई?

ली को एडवेंचर और एक्सट्रीम स्पोर्ट्स का बहुत शौक है। वो ऐसे खेलों में हिस्सा लेता है जिनमें जोखिम ज्यादा होता है। उसे लगा कि अगर कभी उसके साथ कोई हादसा हो जाए, तो उसकी संपत्ति को लेकर कोई विवाद न हो। इसलिए उसने कम उम्र में ही कानूनी वसीयत तैयार करवा ली।

सौतेले रिश्तेदारों को नहीं देना चाहता था हिस्सा

ली ने कहा कि अगर उसने वसीयत नहीं बनाई होती, तो भविष्य में उसके माता-पिता के नए जीवनसाथियों को भी उसकी संपत्ति का फायदा मिल सकता था। वो ऐसा नहीं चाहता था। इसलिए उसने पूरी संपत्ति अपने बचपन के दोस्त के नाम कर दी।

कानून ने कैसे पूरी की उसकी इच्छा?

चीन के उत्तराधिकार कानून के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति बिना वसीयत के मरता है तो उसकी संपत्ति सबसे पहले जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता को मिलती है। ली की शादी नहीं हुई है और उसके बच्चे भी नहीं हैं, इसलिए सामान्य स्थिति में उसकी संपत्ति माता-पिता को मिलती।

लेकिन चीन का कानून यह भी अनुमति देता है कि कोई व्यक्ति वैध वसीयत बनाकर अपनी संपत्ति परिवार के बाहर किसी भी भरोसेमंद व्यक्ति के नाम कर सकता है। इसी नियम का फायदा उठाकर ली ने अपने दोस्त को अपनी पूरी संपत्ति का वारिस बनाया।

वसीयत को कानूनी रूप से कराया पक्का

ली ने शंघाई के चाइना विल रजिस्ट्रेशन सेंटर जाकर अपनी वसीयत का नोटरीकरण और रजिस्ट्रेशन कराया। अब अगर भविष्य में उसके साथ कुछ होता है, तो उसका दोस्त 60 दिनों के भीतर कानूनी रूप से संपत्ति स्वीकार कर सकता है। तय समय में ऐसा नहीं करने पर उसे संपत्ति लेने से इनकार माना जाएगा।

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परिवार नहीं दोस्त के नाम की 28 करोड़ की संपत्ति, 19 साल के छात्र ने इस फैसले की वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

अक्सर लोग अपनी संपत्ति अपने परिवार के लोगों के नाम करते हैं। लेकिन चीन के एक 19 साल के छात्र ने इससे हटकर एक अलग फैसला लिया। छात्र ने अपनी करीब 20 मिलियन युआन (लगभग Rs 28.1 करोड़) की अपनी पूरी संपत्ति परिवार को देने के बजाय कानूनी प्रक्रिया पूरी करके अपने बचपन के दोस्त के नाम कर दी। उनके इस फैसले की वजह जानकर हर कोई हैरान है। इस अनोखे फैसले की अब सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ली सरनेम वाले इस छात्र ने हाल ही में एक नोटराइज्ड वसीयत दर्ज कराई है। इस वसीयत में उसके नाम की पूरी संपत्ति शामिल है, जिसमें एक फ्लैट और लाखों युआन की बचत भी शामिल है।

क्यों तैयार की वसीयत

ली के मुताबिक, उनके माता-पिता का काफी पहले तलाक हो गया था और बाद में दोनों ने अलग-अलग शादी कर ली। उन्होंने अपनी संपत्ति उसके नाम जरूर कर दी, लेकिन बचपन में उसे माता-पिता का साथ और समय बहुत कम मिला। इसी वजह से समय के साथ उनके बीच इमोशनली दूरी बढ़ती गई। ली ने बताया कि, उनके इस फैसले के पीछे एक और बड़ी वजह भी है। उनको एडवेंचर और जोखिम भरे खेलों का काफी शौक है और वह अक्सर ऐसी एक्टिविटीज में हिस्सा लेते रहते हैं। इसी कारण उसने भविष्य को लेकर किसी तरह की अनिश्चितता न रहे, इसलिए कम उम्र में ही अपनी पूरी संपत्ति की वसीयत तैयार करने का फैसला किया।

क्यों किया अपने दोस्त के नाम

ली का कहा कि, अगर भविष्य में उसके साथ कोई अनहोनी हो जाए, तो वह नहीं चाहते कि उनकी संपत्ति ऐसे लोगों के पास जाए, जिनसे उसका कोई इमोशनल रिश्ता नहीं है। इसी वजह से उसने अपनी पूरी जायदाद अपने बचपन के उस दोस्त के नाम करने का फैसला किया, जिस पर उन्हें सबसे ज्यादा भरोसा है और जिसे वह लंबे समय से जानता है।

क्या है कानून

अगर ली ने वसीयत नहीं बनाई होती, तो उसकी संपत्ति कानून के मुताबिक उसके माता-पिता को मिलती। रिपोर्ट के अनुसार, चीन में उत्तराधिकार के नियमों के तहत सबसे पहले जीवनसाथी, बच्चे और माता-पिता को कानूनी वारिस माना जाता है। चूंकि ली की अभी शादी नहीं हुई है और उसके कोई बच्चे भी नहीं हैं, इसलिए उसकी जायदाद पर उसके माता-पिता का अधिकार होता। वहीं चीन के कानून में ये व्यवस्था भी है कि कोई व्यक्ति वैध वसीयत बनाकर अपनी संपत्ति अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति के नाम कर सकता है। इसी कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए ली ने अपनी पूरी जायदाद का एकमात्र हकदार अपने बचपन के दोस्त को बनाया।

आधिकारिक रूप से दर्ज करवा दी

भविष्य में किसी तरह का कानूनी विवाद न हो, इसके लिए ली ने शंघाई के चाइना विल रजिस्ट्रेशन सेंटर जाकर अपनी वसीयत को आधिकारिक रूप से दर्ज कराया। सेंटर के ऑफिस मैनेजर हुआंग हाइबो के मुताबिक, जिस दोस्त को यह संपत्ति दी गई है, उसे इसकी जानकारी मिलने के 60 दिनों के भीतर विरासत स्वीकार करनी होगी। तय समय में ऐसा नहीं करने पर माना जाएगा कि उसने संपत्ति लेने से इनकार कर दिया है।