Airfare regulation : एयर लाइंस की मनमानी पर लगेगी लगाम, त्योहारों और छुट्टियों में हवाई किराए में बढ़ोतरी पर लगेगी रोक

Airfare regulation : त्योहारों और छुट्टियों के दौरान अचानक बढ़ने वाले हवाई किराए से जल्दी राहत मिल सकती है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि नए नियम तैयार कर लिए गए हैं और जल्दी ही संसद में पेश किए जा सकते हैं। इस पर ज्यादा जानकारी देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ संवाददाता असीम मनचंदा ने कहा कि अब हवाई किराया रेगुलेट होगा। त्योहारों और छुट्टियों में हवाई किराए में बढ़ोतरी के मामले में सरकार की तरफ से बड़ी खबर आई है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी में बताया है कि हवाई किराए को रेगुलेट करने के नियम तैयार कर लिए गए हैं। ये नियम 30 दिन में संसद के दोनों सदनों के सामने रखे जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नियमों की एक कॉपी दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। सरकार से दो हफ्ते में कॉपी दाखिल करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।

कोर्ट में हवाई किराए में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने की मांग की गई है। कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र से जवाब मांगा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 के तहत बने नियम बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये नियम एविएशन सेक्टर को आधुनिक बनाने के लिए लाए गए हैं, लेकिन इनके अमल पर अब कोर्ट नजर रख रहा है।

बता दें कि एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि एयरलाइंस बिना पर्याप्त नियमन के एल्गोरिदम आधारित डायनेमिक प्राइसिंग अपनाकर यात्रियों से बहुत ज्यादा किराया वसूल रही हैं। याचिका में कहा गया है कि यह व्यवस्था आम यात्रियों के हितों के खिलाफ है और इसमें पारदर्शिता का अभाव है। याचिकाकर्ता का कहना है कि भारत में निजी एयरलाइंस बिना पर्याप्त रेग्युलेशन के डायनेमिक प्राइसिंग (Dynamic Pricing) अपनाकर यात्रियों से बहुत ज्यादा किराया वसूल रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

भारत में हवाई किराए को लेकर पैसेंजर्स की शिकायतें भी बढ़ रही हैं। कई बार त्योहारों या छुट्टियों में टिकट की कीमतें दोगुनी-तिगुनी हो जाती हैं। एयरलाइंस अतिरिक्त सामान, सीट चॉइस या खाने-पीने के लिए अलग से पैसे वसूलती हैं। यात्रियों की शिकायत होती है कि टिकट बुकिंग के समय सस्ता दिखता है, लेकिन अंत में कुल राशि बहुत ज्यादा हो जाती है। केंद्र सरकार को अब दो हफ्ते के अंदर नए नियम के बारे में बताना होगा। अगर नियम पहले ही संसद में रखे जा चुके हैं, तब भी कोर्ट उन्हें देखना चाहता है। यह फैसला आम यात्रियों के लिए राहत की उम्मीद जगाता है।

डायनेमिक प्राइसिंग क्या है ?

आसान शब्दों में कहें तो डायनेमिक प्राइसिंग कीमतों को तय करने का एक ऐसा तरीका है जिसके जरिए कंपनियां बाजार की मांग, ग्राहकों के व्यवहार और रियल टाइम डेटा के आधार पर अपने किराए में बदलाव करती रहती हैं। इसी के आधार पर हवाई जहाज कंपनियां, किसी एक उड़ान के लिए एक तय कीमत तय करने के बजाय, मांग के अनुसार हर घंटे या दिन टिकट के दाम बदलती हैं। अगर किसी खास रूट पर अचानक यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है या किसी सीट की मांग अधिक होती है, तो कीमतें बढ़ा दी जाती हैं।

 

 

Market Outlook : हल्के हरे निशान में बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 14 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

8th Pay Commission के तहत सीनियर कंसल्टेंट से यंग प्रोफेशनल बनने का मौका, 1.8 लाख तक सैलरी! फुल डिटेल जानिए

8th Pay Commission Job and Salary details: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे की समीक्षा और उसमें बदलाव की सिफारिशें करने के लिए गठित आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के साथ काम करने का एक शानदार मौका है। 8वें वेतन आयोग ने कंसल्टेंट पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मंगाए हैं। इसकी लास्ट डेट नजदीक आ रही है। आपको बता दें कि इस भर्ती के लिए इच्छुक और योग्य प्रोफेशनल्स के पास आवेदन करने के लिए 31 अगस्त तक का समय है।

हमारे सहयोगी ‘सीएनबीसी टीवी 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने सबसे पहले 10 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर तीन अलग-अलग कैटेगिरी में कांट्रैक्ट के आधार पर आवेदन मांगे थे। आयोग सैलरी स्ट्रक्चर, मुआवजा, लीगल रीसर्च, डेटा विश्लेषण और पॉलिसी से जुड़ी स्टडी जैसे काम के लिए सीनियर कंसल्टेंट, कंसल्टेंट और यंग प्रोफेशनल्स की हायरिंग कर रहा है। आइए इस भर्ती से जुड़ी वैकेंसी, योग्यता, सैलरी और काम के स्वरूप की पूरी डिटेल विस्तार से जानते हैं:-

वैकेंसी की पूरी डिटेल (उम्र सीमा और अनुभव)

रिपोर्ट के मुताबिक इन वैकेंसी के लिए एज और एक्सपीरिंस को कैलकुलेट करने के लिए कट-ऑफ डेट 1 अप्रैल 2026 तय की गई है। इस भर्ती के तहत सीनियर कंसल्टेंट के लिए अधिकतम 5 पद निकाले गए हैं। इसके लिए ऊपरी आयु सीमा 45 वर्ष और न्यूनतम रेलेवेंट एक्सपीरियंस 10 वर्ष होना चाहिए।

इसी तरह कंसल्टेंट पद के लिए भी अधिकतम 5 वैकेंसियां हैं। इसमें आवेदन करने की ऊपरी आयु सीमा 40 वर्ष और न्यूनतम प्रासंगिक अनुभव 6 वर्ष निर्धारित किया गया है। यंग प्रोफेशनल के लिए सबसे ज्यादा यानी मैक्सिमम 10 पद हैं। इसके लिए उम्मीदवारों की ऊपरी आयु सीमा 32 वर्ष और न्यूनतम प्रासंगिक अनुभव 4 वर्ष होना जरूरी है।

क्या योग्यता है जरूरी?

आवेदकों के पास नीचे दी गई योग्यताओं में से कोई एक योग्यता होनी चाहिए:-

फाइनेंस, ह्यूमन रिसोर्सेज, इंडस्ट्रियल रिलेशंस या इससे जुड़े विषयों में मास्टर्स डिग्री या MBA, या

LL।B डिग्री के साथ बार काउंसिल/बार एसोसिएशन में क्रेडेंशियल होना चाहिए और ट्रिब्यूनल या अदालतों के समक्ष लीगल रीसर्च या सर्विस मैटर में प्रासंगिक अनुभव होना चाहिए।

अनिवार्य योग्यता: सभी कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए एक्सेल, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन टूल्स का ज्ञान होना अनिवार्य है। जिन उम्मीदवारों के पास वेतन, मुआवजा या स्टैबिलिशमेंट से जुड़े मामलों का अनुभव है उन्हें चयन में वरीयता दी जाएगी।

सैलरी और कार्यकाल

ये नियुक्तियां पूरी तरह से कांट्रैक्ट बेसिस पर होंगी। ये शुरुआत में एक साल या वेतन आयोग के कार्यकाल तक (जो भी पहले हो) के लिए की जाएंगी। प्रदर्शन के आधार पर कार्यकाल को आगे बढ़ाया भी जा सकता है।

पदों के हिसाब से तय मासिक मानदेय इस प्रकार है:-

सीनियर कंसल्टेंट: फुल-टाइम के लिए ₹1.8 लाख, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹90000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹45000

कंसल्टेंट: फुल-टाइम के लिए ₹1.2 लाख, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹60000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹30000

यंग प्रोफेशनल: फुल-टाइम के लिए ₹90000, 12 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹45000 और 6 दिनों के पार्ट-टाइम के लिए ₹22500

इस सैलरी में से इनकम टैक्स और अन्य लागू कटौतियां (TDS) की जाएंगी।

चयनित कंसल्टेंट्स को क्या काम करना होगा?

ऑफिशियल गाइडलाइंस के मुताबिक चुने गए प्रोफेशनल्स को आयोग के साथ नीचे दिए गए काम करने होंगे:-

मौजूदा वेतन, भत्तों, पेंशन और उपलब्ध परिलब्धियों के ढांचे का विश्लेषण करना।

वेतन और मुआवजे के ट्रेंड्स की पहचान करने के लिए डेटा, रिपोर्ट्स और सर्वे का अध्ययन करना।

आयोग के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मामलों पर लीगल रीसर्च करना।

डेटा इकट्ठा करने के लिए केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वय करना।

मानव संसाधन, मुआवजा, ग्रेच्युटी और बोनस तंत्र पर विशेष अध्ययनों में सहायता प्रदान करना।

आयोग को प्राप्त होने वाले ज्ञापनों और प्रतिवेदनों का विश्लेषण करना।

आयोग की सिफारिशों से पड़ने वाले राजकोषीय प्रभाव का अनुमान लगाना।

रिपोर्ट्स, प्रेजेंटेशन और अन्य विश्लेषणात्मक सामग्री तैयार करना।

आवेदन कैसे करें?

इच्छुक उम्मीदवारों को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन सबमिट करना होगा। आयोग ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि किसी भी प्रकार के फिजिकल या हार्ड-कॉपी आवेदनों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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मेट्रो कॉरिडोर, एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर… 1647 करोड़ के ये 28 इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स मंजूर, अब बदल जाएगी दिल्ली की सूरत

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की रफ्तार और सूरत को बदलने के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार ने दिल्ली में अलग-अलग परियोजनाओं के लिए 1647 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दे दी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को इस बात की जानकारी दी। इस भारी-भरकम बजट से दिल्ली में मेट्रो कॉरिडोर, बारापुला एलिवेटेड रोड, नए फ्लाईओवर और ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) चार्जिंग स्टेशन समेत कई बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे किए जाएंगे। केंद्र सरकार ने पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) को बढ़ाने के लिए दिल्ली सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रोत्साहन के रूप में 756 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि को भी मंजूरी दी है। यह जानकारी दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में दी गई है।

आइए विस्तार से जानते हैं कि इस योजना के तहत दिल्ली को क्या-क्या मिलने जा रहा है:

मंजूर हुए दिल्ली सरकार के सभी 28 बड़े प्रोजेक्ट्स

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली सरकार की ओर से प्रस्तावित सभी 28 प्रमुख कैपिटल प्रोजेक्ट्स को केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है। इन परियोजनाओं को केंद्र सरकार की SASCI योजना के तहत मंजूरी मिली है। मंजूर किए गए इन 28 प्रोजेक्ट्स में मुख्य रूप से ये चीजें शामिल हैं:

  • दिल्ली मेट्रो रेल परियोजनाएं: नए मेट्रो कॉरिडोर के विकास को रफ्तार मिलेगी।
  • बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर: इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के काम को आगे बढ़ाया जाएगा।
  • करावल नगर फ्लाईओवर: इस इलाके में जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए फ्लाईओवर का निर्माण होगा।
  • डीटीसी डिपो में ईवी चार्जिंग स्टेशन: दिल्ली परिवहन निगम के डिपो में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।
  • सड़क बुनियादी ढांचा: इनके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण सड़क बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी इस मंजूरी का हिस्सा हैं।

क्या है SASCI स्कीम, इससे दिल्ली को मिला फंड?

ये सभी 28 प्रोजेक्ट्स केंद्र सरकार की स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI) योजना के तहत मंजूर किए गए हैं। यह केंद्र सरकार की एक विशेष योजना है। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए पूरी तरह से ब्याज मुक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना सिर्फ वित्तीय सहायता देने तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह राज्यों द्वारा रणनीतिक सुधारों को लागू करने और पूंजीगत निवेश को बढ़ाने को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय इंसेंटिव भी देती है। इसी के तहत दिल्ली को 756 करोड़ रुपये का अतिरिक्त इंसेंटिव मिला है।

समय पर काम पूरा करने के निर्देश

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार ने शुरुआत से ही इस योजना को प्राथमिकता दी है और दिल्ली की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को इसके तहत मंजूरी दिलाने के लिए लगातार केंद्र सरकार से आग्रह किया था। अब फंड मंजूर होने के बाद, मुख्यमंत्री ने दिल्ली सरकार के वित्त विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे इन स्वीकृत परियोजनाओं से जुड़े सभी संबंधित विभागों के साथ बेहतर तालमेल बिठाएं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की गति को तेजी से आगे बढ़ाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि दिल्ली के निवासियों को जल्द से जल्द इन परियोजनाओं का लाभ मिल सके।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के पहले सेक्शन के लॉन्चिंग की टाइमलाइन सामने आई, जानिए कब दौड़ेगी देश की पहली Bullet Train

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का पहला हिस्सा अगले साल शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सबसे पहले सूरत और बिलिमोरा के बीच बुलेट ट्रेन शुरू होगा। इसके बाद पूरे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को फेज के हिसाब से तरीके से चालू किया जाएगा। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा, “मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगले साल सूरत और बिलिमोरा के बीच इसका पहला सेक्शन शुरू किया जाएगा। इसके बाद बाकी हिस्सों को भी अलग-अलग चरणों में शुरू किया जाएगा।”

बुलेट ट्रेन के पहले सेक्शन के लॉन्चिंग की टाइमलाइन

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के बाकी हिस्सों को भी चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले वापी से सूरत, फिर वापी से अहमदाबाद, उसके बाद अहमदाबाद से ठाणे और आखिर में अहमदाबाद से मुंबई तक बुलेट ट्रेन सेवा शुरू की जाएगी। उनका कहना है कि अगले साल से परियोजना के अलग-अलग हिस्से एक-एक करके लोगों के लिए खोले जाएंगे। अश्विनी वैष्णव ने देशभर में रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्य की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक 261 रेलवे स्टेशनों का काम पूरा हो चुका है। सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर काम ट्रेन सेवाएं जारी रखते हुए किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को कम से कम परेशानी हो।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दुनिया के कई देशों में रेलवे स्टेशनों के पुनर्निर्माण के दौरान ट्रेन सेवाएं रोक दी जाती हैं, लेकिन भारत में ऐसा करना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि यहां ट्रेनों का संचालन जारी रखते हुए ही निर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशन पर सभी प्लेटफॉर्म के ऊपर एक बड़ा एयर कॉनकोर्स (ऊपरी हॉल) बनाया जा रहा है। यह काम पूरी सावधानी के साथ किया जा रहा है ताकि यात्रियों की सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता बनी रहे।

हैदराबाद को बनेगा बड़ा हब

हैदराबाद में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रस्तावित हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर हैदराबाद के विकास में बड़ी भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद के लिए तीन हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की योजना दी है। इनमें पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई और हैदराबाद-बेंगलुरु बुलेट ट्रेन कॉरिडोर शामिल हैं। रेल मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से हैदराबाद हाई-स्पीड रेल का प्रमुख केंद्र बनेगा। साथ ही पूरे क्षेत्र में विकास को बढ़ावा मिलेगा और अलग-अलग शहरों की अर्थव्यवस्थाएं आपस में बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगी।

तेलंगाना में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के विस्तार पर बात करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं का राज्य को बड़ा लाभ मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कार्यक्रम के तहत 100 से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को बढ़ावा दिया गया है, जिससे तेलंगाना को भी काफी फायदा हुआ है। अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने तेलंगाना में रेलवे परियोजनाओं के लिए 5,400 करोड़ रुपये का बजट दिया है। उनके अनुसार, इस निवेश से राज्य में रेलवे के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

PM Kisan Samman Nidhi की 24वीं किस्त कब आएगी खाते में, पूरा करें यह काम नहीं तो अटक जाएगा आपका पैसा

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) के तहत केंद्र सरकार हर वर्ष 6000 रुपए प्रति किसान को मदद करती है। इस योजना की अभी तक 23 किस्त जारी हो चुकी हैं। हालांकि पिछले महीने जारी हुई पीएम किसान की 23वीं किस्त के पैसे कुछ किसानों के बैंक अकाउंट में नहीं पहुंचे हैं। अगर आप भी किसान हैं तो आप यह गलती नहीं करें। आपकी जरा सी गलती की वजह से उनकी किस्त अटक जाती है। पीएम किसान योजना का लाभ लेने के लिए ई-केवाईसी जरूरी कर दी गई है। अगर किसानों की ई-केवाईसी पूरी नहीं है, तो उनकी किस्त अटक सकती है।

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कब आएगी 24वीं किस्त

पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त पिछले महीने जून मे जारी हुई है। ऐसे में अब अगली किस्त चार महीने बाद सितंबर-अक्टूबर में जारी हो सकती है। हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से इस किस्त को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

 

क्या है किस्त रुकने का कारण 

किस्त रुकने की सबसे कारणों में ई-केवाईसी (e-KYC) पूरी न होना, बैंक खाते की जानकारी में गलती, आधार से जुड़ी जानकारी में अंतर या भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा न होना शामिल है। 23वीं किस्त की तरह आपकी 24वीं किस्त न अटके, तो सबसे पहले आपको अपनी गलती सुधारनी होगी। इसके लिए आपको पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां पर आपको ऊपर दिए गए सभी कारणों को चेक करना होगा। अगर कोई भी जानकारी गलत दिखाई दे रही है तो आपको उसे जल्द सुधारना पड़ेगा।

ONGC का महा-प्लान: मंगलुरु में जमा होगा 17.5 लाख टन कच्चा तेल, दुनिया में संकट आने पर भी नहीं रुकेगा भारत

ONGC Strategic Petroleum Reserve: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है। समुद्री रास्तों पर ब्लॉकबेड के खतरों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बेहद बड़ा फैसला लिया है। देश की सबसे बड़ी तेल और गैस खोजकर्ता कंपनी ओएनजीसी (ONGC) दक्षिण भारत के मंगलुरु में 17.5 लाख टन क्षमता का एक नया ‘नेशनल स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (SPR) यानी रणनीतिक कच्चा तेल भंडार बनाएगी।

कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई एक रेगुलेटरी फाइलिंग में इस महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी दी है। आइए समझते हैं कि स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व क्या होता है और संकट के समय यह भारत के लिए कितना जरूरी साबित होगा।

क्यों पड़ी नए ऑयल रिजर्व की जरूरत?

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश होने के कारण भारत अपनी जरूरतों का करीब 85% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। हाल ही में ईरान पर इजरायल-अमेरिकी हमलों के बाद जब ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के समुद्री रास्ते को ब्लॉक कर दिया गया, तो भारत को कच्चे तेल की सप्लाई में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

दुनिया की कुल ऊर्जा सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज के सकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। युद्ध या किसी भी बड़ी अंतरराष्ट्रीय मुसीबत के समय जब विदेशों से तेल आना बंद हो जाए, तब देश के कामकाज को बिना रुकावट चलाने के लिए इन ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ में जमा तेल का इस्तेमाल किया जाता है।

कमर्शियल इस्तेमाल के लिए सरकार से मांगी जाएगी मंजूरी

ONGC ने अपनी फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि वह ‘राष्ट्रहित’ में बनाए जाने वाले इस विशालकाय स्टोरेज का एक हिस्सा व्यावसायिक यानी कमर्शियल इस्तेमाल के लिए उपयोग करने की खातिर केंद्र सरकार से अनुमति मांगेगी।

मौजूदा समय में केंद्र सरकार पहले से ही दक्षिण भारत के तीन स्थानों मंगलुरु, पादुर और विशाखापट्टनम में बने रणनीतिक भंडारों के एक हिस्से को व्यावसायिक उपयोग के लिए मंजूरी देती है। इन तीनों जगहों पर कुल मिलाकर 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल स्टोर करने की क्षमता है, जिसका प्रबंधन सरकारी कंपनी ‘इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड’ (ISPRL) करती है।

UAE और जापान के साथ बढ़ रहा है सहयोग

भारत एमर्जेंसी स्टॉक को मजबूत करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात और जापान जैसे मित्र देशों के साथ लगातार अपनी एनर्जी पार्टनरशिप बढ़ा रहा है। मंगलुरु में ओएनजीसी की सहायक कंपनी ‘मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड’ (MRPL) 3 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली रिफाइनरी चलाती है। यहां पहले से मौजूद 1.5 मिलियन टन के स्टोरेज का आधा हिस्सा MRPL और बाकी आधा हिस्सा यूएई की सरकारी तेल कंपनी ADNOC ने लीज पर ले रखा है।

इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे के समय, ADNOC ने भारत में अपने कच्चे तेल के स्टोरेज को बढ़ाकर 3 करोड़ बैरल करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही यूएई भारत के रणनीतिक रिजर्व के हिस्से के रूप में फुजैराह में भी तेल भंडारण की संभावनाएं तलाश रहा है।

ओडिशा और पादुर में भी बनेंगे रिजर्व

मंगलुरु में ओएनजीसी के इस नए प्रोजेक्ट के अलावा, भारत सरकार देश के अन्य हिस्सों में भी तेल भंडारण क्षमता को कई गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है:

ओडिशा (पूर्वी भारत): चंडीखोल में 4 मिलियन मीट्रिक टन की क्षमता वाला एक नया रणनीतिक तेल भंडार बनाया जाएगा।

पादुर (दक्षिण भारत): कर्नाटक के पादुर में 2.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाली एक नई अतिरिक्त फैसिलिटी तैयार की जाएगी।

कुल मिलाकर ओएनजीसी का यह कदम वैश्विक तनाव के बीच भारत की तेल आत्मनिर्भरता और संकट प्रबंधन क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाएगा, ताकि ग्लोबल मार्केट में मंदी या युद्ध होने पर भी देश के भीतर पेट्रोल-डीजल की किल्लत न हो।

PRAGATI Scheme: 8 राज्यों के 20000 ग्रामीण युवाओं को मिलेगी एग्री-बिजनेस की मुफ्त ट्रेनिंग, जानिए क्या है ये प्रगति स्कीम

ग्रामीण भारत के युवाओं को रोजगार से जोड़ने और किसानों को आधुनिक खेती से अवगत कराने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई और महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की है। सरकार ने प्रगति योजना (PRAGATI Scheme) को लॉन्च किया है। इस स्कीम में देश के आठ राज्यों के करीब 20000 ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी के रूप में मुफ्त ट्रेनिंग दी जाएगी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गांव के स्तर पर ही प्रशिक्षित पेशेवरों का एक नेटवर्क तैयार करना है। ऐसा इसलिए ताकि किसानों को तकनीकी सहायता दी जा सके, सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच में सुधार लाया जा सके और किसानों और बाजारों के बीच के संबंध को मजबूत किया जा सके। इस पहल से कृषि क्षेत्र को ज्यादा फायदेमंद और टेक्नोलॉडी ड्रिवेन बनाने में मदद मिलेगी।

क्या है प्रगति (PRAGATI) स्कीम?

प्रगति योजना को कृषि क्षेत्र में ग्रामीण युवाओं के बीच स्व-रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेश किया गया है। इस योजना के तहत युवाओं को काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। प्रशिक्षित प्रतिभागी अपने ही गांवों में कृषि-उद्यमी के रूप में काम करेंगे। ये युवा किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों, वित्तीय सहायता और विभिन्न कृषि सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद करेंगे। यह कार्यक्रम किसानों और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के बीच की दूरी को पाटने के साथ-साथ टिकाऊ और कुशल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देगा।

पहले चरण में 20000 ग्रामीण युवाओं को मिलेगी ट्रेनिंग

प्रगति योजना के पहले चरण में देश के आठ राज्यों के गांवों से करीब 20000 युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इन आठ राज्यों में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं। सरकार की योजना आने वाले चरणों में इस कार्यक्रम का विस्तार अन्य राज्यों में भी करने की है। अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ये कृषि-उद्यमी किसानों के साथ मिलकर काम करेंगे, उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन देंगे और आवश्यक कृषि संसाधनों तक उनकी पहुंच को आसान बनाएंगे।

गांवों में क्या भूमिका निभाएंगे ये कृषि-उद्यमी?

ट्रेनिंग प्राप्त युवा गांवों में रहकर किसानों को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं और सहायता प्रदान करेंगे-

  • मृदा परीक्षण: मिट्टी की जांच करने और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करने में सहायता करना।
  • आधुनिक तकनीक: आधुनिक खेती के तरीकों और तकनीकों के बारे में जानकारी देना।
  • कृषि उपकरण: किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी और उपकरण प्राप्त करने में मदद करना।
  • वित्तीय सहायता: किसानों को बैंकों, क्रेडिट सुविधाओं और वित्तीय सहायता से जोड़ना।
  • बाजार तक पहुंच: कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच का समर्थन करना ताकि फसलों की सही कीमत मिल सके।
  • योजनाओं के प्रति जागरूकता: सरकारी कृषि योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाना।

इस पूरी कवायद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को इन सभी सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े बल्कि ये सारी सुविधाएं उन्हें उनके अपने गांव के भीतर ही मिल जाएं।

इस स्कीम से किसानों को कैसे होगा फायदा?

सरकार का मानना है कि इस योजना के लागू होने से जमीनी स्तर पर कृषि सहायता सेवाएं आसानी से मिल जाएंगी। किसानों को समय पर तकनीकी सलाह, मृदा परीक्षण में सहायता और आधुनिक खेती के तरीकों की सटीक जानकारी मिलेगी। मशीनरी, वित्तीय सहायता और बाजारों तक बेहतर पहुंच होने से खेती की उत्पादन लागत में कमी आएगी। बेहतर तौर-तरीकों से फसलों की पैदावार बढ़ेगी और किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर दाम सुरक्षित करने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण भारत में रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

खेती के तरीकों में सुधार करने के साथ-साथ प्रगति योजना को विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के लिए तैयार किया गया है। युवाओं को कृषि सेवा प्रदाताओं के रूप में प्रशिक्षित करके यह कार्यक्रम ग्रामीण स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। यह पहल पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर भारतीय कृषि को अधिक इनोवेटिव, टिकाऊ और बाजार-उन्मुख बनाने के हिसाब से डिजाइन है।

सरकार का विजन: केंद्रीय कृषि मंत्री ने क्या कहा?

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक प्रगति योजना महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है। उन्होंने इसे कृषि का कायाकल्प करने के एक बड़े मिशन के रूप में बताया है। कृषि मंत्री के मुताबिक यह योजना ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर सेवाओं और मजबूत बाजार संपर्कों का लाभ उठाने में मदद करेगी। अगर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो यह योजना ग्रामीण भारत के हजारों युवाओं के लिए करियर के नए रास्ते खोलने के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर कृषि सहायता प्रणालियों को बेहद मजबूत कर सकती है।

उत्तर प्रदेश की 2600 से अधिक नर्सरियों में 57.62 करोड़ पौधे तैयार

UP Forest Department: पौधरोपण महायज्ञ (12 जुलाई-2026) को 35 करोड़ व अन्य विशिष्ट आयोजनों पर पौधरोपण के लिए वन विभाग ने सारी तैयारी पूरी कर ली है। इसके लिए प्रदेश की 2600 से अधिक नर्सरियों में 57.62 करोड़ पौधे तैयार किए गए हैं। वन विभाग की नर्सरियों में 52.46 करोड़, उद्यान में 1.55 करोड़, रेशम में 44 लाख व निजी नर्सरियों में 3.17 करोड़ पौधे तैयार हो चुके हैं। पौधरोपण के लिए वन विभाग की 1939, उद्यान की 146, रेशम विभाग की 55 पौधशाला, 499 निजी पौधशाला से सभी विभागों, जनपदों, मंडलों को पौधे दिए जा रहे हैं। 

केंद्र सरकार के विभाग भी लगाएंगे पौधे 

केंद्र व प्रदेश सरकार के विभाग मिलकर इस वर्ष 35 करोड़ पौधरोपण करेंगे। नोडल विभाग (वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन) सर्वाधिक 15 करोड़ से अधिक पौधरोपण करेगा। ग्राम्य विकास विभाग 10 करोड़, कृषि विभाग 3.25 करोड़, उद्यान विभाग 1.50 करोड़, पंचायती राज 1.22 करोड़ व राजस्व विभाग एक करोड़ पौधे रोपित करेगा। वहीं केंद्र सरकार के रेलवे की तरफ से 12 लाख, रक्षा मंत्रालय की तरफ से 7 लाख पौधरोपण किया जाएगा। 

UP Forest Department

मुख्य वन संरक्षक (प्रचार/प्रसार) अदिति शर्मा ने कहा कि पौधरोपण महायज्ञ-2026 के लिए नर्सरियों में 57.62 करोड़ पौधे तैयार हो गए हैं। 12 जुलाई को होने वाले उत्सव के लिए मंडल, जनपद व विभागवार निरंतर पौध वितरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जनसहभागिता और सभी विभागों के संयुक्त प्रयास से यह महायज्ञ अभूतपूर्व होगा।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

8th Pay Commission पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बिग अपडेट! सैलरी में 70% से ज्यादा बढ़ोतरी का प्रस्ताव, जानें HRA और DA का ये नया गणित

8th Pay Commission Salary Hike Proposals: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर एक बेहद जबरदस्त खबर आ रही है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों और यूनियनों की ओर से सौंपे गए नए प्रस्तावों के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि आठवें वेतन आयोग के लागू होने से कर्मचारियों की सैलरी में 70% से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

यह अनुमानित बढ़ोतरी सिर्फ फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर नहीं है। बल्कि, बेसिक पे में संशोधन, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) में बढ़ोतरी और डियरनेस अलाउंस (DA) के मर्जर के संयुक्त प्रभाव के कारण यह आंकड़ा 70% के पार जा रहा है। आइए समझते हैं कि इस नए प्रस्ताव का पूरा गणित क्या है और लेवल-1 के कर्मचारियों की सैलरी पर इसका क्या असर पड़ेगा।

लेवल-1 कर्मचारियों की सैलरी ₹37080 से बढ़कर हो जाएगी ₹63500

ऑल इंडिया नेशनल पब्लिक सेक्टर एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) सहित कई प्रमुख कर्मचारी यूनियनों ने सरकार को जो प्रस्ताव भेजे हैं, उनके अनुसार एक्स-कैटेगरी (X-Category) के शहरों में काम करने वाले लेवल-1 कर्मचारियों की मौजूदा सैलरी करीब ₹37080 से बढ़ाकर लगभग ₹63500 करने की सिफारिश की गई है। यह सीधे तौर पर 71% तक की कुल बढ़ोतरी को दर्शाता है।

आपको बता दें कि ये आंकड़े कर्मचारी यूनियनों द्वारा की गई सिफारिशों और प्रस्तावों पर आधारित हैं। यह सरकार या आठवें वेतन आयोग का अंतिम फैसला नहीं है। अंतिम निर्णय वेतन आयोग की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद केंद्र सरकार द्वारा ही लिया जाएगा।

70% से ज्यादा सैलरी बढ़ने की मुख्य वजहें क्या हैं?

सिर्फ बेसिक पे बढ़ने से सैलरी इतनी ज्यादा नहीं भागती, बल्कि बेसिक पे के साथ जुड़े अन्य भत्ते भी ऑटोमैटिकली बढ़ जाते हैं। यूनियनों ने ये मांगें रखी हैं:

DA का बेसिक पे में विलय: कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि नए पे-स्केल को तय करने और लागू करने से पहले महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में मर्ज किया जाए। इससे सैलरी का आधार काफी बड़ा हो जाएगा।

हायर ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA): मासिक भत्ते को सीधे बढ़ाने के लिए ऊंचे ट्रांसपोर्ट अलाउंस की सिफारिश की गई है।

HRA दरों में संशोधन: शहरों की कैटेगरी के हिसाब से हाउस रेंट अलाउंस बढ़ाने का प्रस्ताव है।

HRA में बड़े बदलाव की तैयारी: X, Y और Z शहरों का नया ढांचा

केंद्र सरकार ने रहने के खर्च और आबादी के हिसाब से शहरों को तीन श्रेणियों- X, Y और Z में बांटा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और पुणे जैसे बड़े महानगर X कैटेगरी में आते हैं, जहाँ रहने का खर्च सबसे ज्यादा है।

वर्तमान में HRA की दरें 30%, 20% और 10% हैं। यूनियनों ने आठवें वेतन आयोग के तहत इसे बढ़ाकर 36%, 24% और 12% करने का प्रस्ताव रखा है।

कितनी बढ़ सकती है सैलरी?

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

प्रोजेक्शंस और अनुमानों के अनुसार एक्सपर्ट्स का मानना है कि, ‘70% से अधिक की अनुमानित वृद्धि केवल फिटमेंट फैक्टर पर नहीं, बल्कि कई मान्यताओं के संयोजन पर आधारित है। हालांकि संशोधित बेसिक पे मुख्य ड्राइवर है, लेकिन चूंकि HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसे घटक सीधे बेसिक पे से जुड़े होते हैं, इसलिए बेस बढ़ते ही पूरी सैलरी का पैकेज काफी बड़ा दिखने लगता है।’

वैसे ये सभी बातें इस पर निर्भर करेंगी कि अंतिम फिटमेंट फैक्टर क्या रहता है और सरकार अलाउंस के इस नए स्ट्रक्चर को किस तरह स्वीकार करती है। जब तक आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंपता, इसे एक मजबूत उम्मीद या संकेतक के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

ओडिशा में यूनियनों की बैठकें समाप्त होने और पश्चिम बंगाल में नए दौर की चर्चाएं शुरू होने के साथ ही, कर्मचारियों के बीच इस 70% सैलरी हाईक के फॉर्मूले पर बहस और तेज हो गई है।

E25 Petrol: 20% एथेनॉल वाले पेट्रोल के बाद अब 25% ब्लेंडिंग पर आई ये जानकारी, कार और बाइक चलाने वालों के लिए बड़ी खबर!

E25 Petrol News: देश में 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर चल रही तीखी बहस के बीच अब 25 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग यानी E25 पेट्रोल को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक E20 फ्यूल के तेजी से हुए रोलआउट के बाद उपजी चिंताओं को देखते हुए सरकार अब 25 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की प्रस्तावित प्रक्रिया की रफ्तार को स्लो कर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार E25 पेट्रोल (जिसमें 75 प्रतिशत पेट्रोल और 25 प्रतिशत एथेनॉल होगा) की शुरुआत को कैलिब्रेटेड और ग्रेडेड तरीके से करने के पक्ष में है। इसके मुताबिक सरकार अब चाहती है कि ऑटो मेकर्स और पूरे फ्यूल कोसिस्टम को तैयारी के लिए थोड़ा और अधिक समय दिया जाना चाहिए।

सरकार की दो हालिया फैसलों से बढ़ी थीं उम्मीदें

हालांकि, सरकार की तरफ से अभी तक E25 पेट्रोल के लिए किसी भी औपचारिक समयसीमा की घोषणा नहीं की गई है। लेकिन हाल ही में लिए गए दो नीतिगत फैसलों ने उम्मीदें बढ़ा दी थीं कि सरकार अब E20 से आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार ने 22 से 30 प्रतिशत एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी से छूट दी थी। इसके अलावा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने भी इस तरह के उच्च एथेनॉल मिश्रणों के लिए अपने स्पेसिफिकेशंस को लिस्टेड कर दिया था।

पिछले हफ्ते हुई उच्च स्तरीय बैठक, माइलेज और इंजन डैमेज पर हुई चर्चा

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले हफ्ते सरकार के वरिष्ठ स्तर पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में वाहन मालिकों द्वारा माइलेज, परफॉर्मेंस और गाड़ी के पार्ट्स को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर उठाई गई चिंताओं को वैज्ञानिक तरीके से हल करने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। अधिकारियों का कहना है कि हालांकि कुछ शिकायतों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया माना गया लेकिन उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स को गाड़ी मालिकों की इन चिंताओं पर जवाब देने की जरूरत है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, ‘सरकार यह विचार कर है कि E20 से आगे बढ़ने के बदलाव को थोड़ा समय देना होगा। ऑटोमेकर्स से भी हमें यही संकेत मिले हैं। अब आइडिया ये है कि मौजूदा वाहनों के लिए कैलिब्रेटेड और ग्रेडेड तरीके से ही E25 की ओर बढ़ा जाए।’

5 साल पहले हासिल हुआ लक्ष्य तो पुरानी गाड़ियों के मालिकों ने जताई चिंता

सरकार ने मूल रूप से साल 2030 तक देश भर में E20 पेट्रोल उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी लेकिन इस लक्ष्य को पांच साल पहले ही आगे बढ़ा दिया गया। वर्तमान में देश भर में बिकने वाला मानक पेट्रोल मिश्रण E20 ही है। ऐसे कई दावे किए जा रहे हैं कि इस तेजी से हुए बदलाव की वजह से उन पुराने कार और दोपहिया वाहनों (बाइक-स्कूटर) के मालिकों की शिकायतें बढ़ गई हैं जिन्हें विशेष रूप से E10 पेट्रोल के लिए डिजाइन किया गया था। वाहन चालकों ने माइलेज घटने की रिपोर्ट की है और फ्यूल-सिस्टम के पार्ट्स के टिकाऊपन पर भी चिंता जताई है।

कार और बाइक पर कैसे असर डालता है ज्यादा एथेनॉल?

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एथेनॉल और पेट्रोल के मिश्रण से कुछ असर जरूर पड़ता है। इसके मुताबिक पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल का कैलोरीफिक मान कम होता है। इससे गाड़ी का माइलेज कम हो सकता है। इसका असर गाड़ी की लाइफ, इंजन की डिजाइन और उसके सर्टिफिकेशन के आधार पर अलग-अलग होता है। एथेनॉल हाइग्रोस्कोपिक होता है। इसका मतलब है कि यह नमी को सोखता है। ऐसे में जो पार्ट्स उच्च मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं, उनमें जंग लगने का खतरा काफी बढ़ सकता है।

ऑटोमेकर्स को करना होगा और काम, भविष्य के मॉडल्स पर चल रहा काम

अगर सरकार E25 की तरफ कदम बढ़ाती है तो वाहन निर्माताओं को इंजन कैलिब्रेशन, फ्यूल-सिस्टम ड्यूरेबिलिटी, मटेरियल कम्पैटिबिलिटी और जंग प्रतिरोधकता पर एक्सट्रा काम करना होगा। इसके अलावा सुरक्षा, एमिशन और रोडवर्थिनेस को कवर करने वाली नियामक प्रमाणन प्रक्रिया यानी होमोलोगेशन से भी वाहनों और उनके पार्ट्स को गुजरना होगा। कई ऑटोमेकर्स ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने उच्च एथेनॉल मिश्रण पर बेहतर प्रदर्शन के लिए हाई कम्प्रेशन रेशियो वाले इंजन विकसित करना शुरू कर दिया है। ये बदलाव काफी हद तक भविष्य में आने वाले नए मॉडल्स पर लागू होंगे, न कि पहले से सड़क पर चल रहे पुराने वाहनों पर।

आपको बता दें कि सरकार ने पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और परिवहन ईंधन के कार्बन कंटेंट को घटाने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा दिया है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट रखा है कि उच्च मिश्रण वाले ईंधन को पूरी टेस्टिंग और सभी स्टेकहोल्डर्स) के साथ परामर्श के बाद ही पेश किया जाएगा।

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