आयोग और भाजपा पर राहुल का हमला

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ के दौरान संसद मार्ग पर रोके जाने के बाद चुनाव आयोग के साथ साथ केंद्र सरकार और भाजपा पर भी जोरदार हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी करने में भाजपा की मदद की है। राहुल ने यह भी कहा कि भाजपा, चुनाव आयोग और आरएसएस ने देश में लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। राहुल कई घंटे तक धरने पर भी बैठे रहे।

राहुल ने कहा, ‘तीन सौ लोकसभा और राज्यसभा के सांसद आए थे। हम चाहते थे ज्ञानेश कुमार और उनके दो चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे। पुलिस ने हमें रोका। चुनाव आयोग से 50 गज दूर बैठाकर रखा है हमें जाने नहीं दे रहे हैं। तीन सौ सांसद ज्ञानेश कुमार से मिलना चाहते हैं। ज्ञानेश कुमार डरे हुए हैं। अगर जनप्रतिनिधियों से चुनाव आयोग नहीं मिलेगा तो लोकतंत्र का क्या मतलब है’।

एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा, ‘मैं लोकतंत्र बचाने यहां खड़ा हूं। अमित शाह, नरेंद्र मोदी, ज्ञानेश कुमार और मोहन भागवत ने देश के लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। देश के युवा ये बात जानते हैं’। उन्होंने आगे कहा, ‘चुनाव को मोदी, शाह ने हाइजैक किया है और ज्ञानेश कुमार ने उनकी मदद की है। यहां पुलिस वाले भी यही कर रहे हैं। इनमें से कोई भी बचकर नहीं जाएगा। जो इन्होंने देश के साथ किया है, वह देशद्रोह है’।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह आंदोलन देश के युवाओं, महिलाओं, किसानों और गरीबों के अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सत्ता में बने रहने के लिए लोगों के अधिकार छीन रही है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। खड़गे ने कहा कि जिस तरह से सत्ता हासिल की गई, वह उचित नहीं था और इसे तुरंत खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर देश में नौ राज्यों की विधानसभाएं भंग की जा सकती हैं, तो यहां की अवैध व्यवस्था भी खत्म होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगी।

विपक्ष के इस प्रदर्शन में शामिल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, ‘अगर ज्ञानेश कुमार निष्पक्ष हैं तो उन्हें हमारी बात सुननी चाहिए। यह लोकतंत्र बचाने की बात है। पुलिस को बच्चों के साथ और प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए’।

तीनों भूमिहार अध्यक्षों की विदाई

थोड़े दिन पहले तक देश के तीन बड़े राज्यों में कांग्रेस ने भूमिहार अध्यक्ष बना रखे थे। इसकी तुलना 2014 से ठीक पहले की भाजपा से की जाती थी, जब तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में उसके भूमिहार अध्यक्ष थे। बिहार में सीपी ठाकुर, झारखंड में रविंद्र राय और उत्तर प्रदेश में सूर्य प्रताप शाही अध्यक्ष थे। नितिन गडकरी ने अध्यक्ष रहते तीनों को नियुक्त किया गया। उसके बाद जब 2024 में इन तीन राज्यों में कांग्रेस के भूमिहार अध्यक्ष हुए तो यह टोटका बताया जाता था कि जैसे भाजपा ने तीन भूमिहार अध्यक्ष रखा और लोकसभा का चुनाव जीता वैसे कांग्रेस भी जीत सकती है। कांग्रेस जीती तो नहीं लेकिन उसकी सीटें दोगुनी हो गईं।

उसके बाद यानी 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद एक एक करके तीनों को हटा दिया गया। पहले झारखंड के कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर की विदाई हुई। उनकी जगह पिछड़ी जाति से आने वाले केशव महतो कमलेश अध्यक्ष बनाए गए। उसके बाद बिहार में अखिलेश प्रसाद सिंह की विदाई हुई। उनकी जगह दलित समाज के राजेश राम को अध्यक्ष बनाया गया। अंत में उत्तर प्रदेश से अजय राय की विदाई हुई है। उनकी जगह ब्राह्मण समाज की आराधना मिश्रा उर्फ मोना मिश्रा को अध्यक्ष बनाया गया है। गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में अजय राय ने वाराणसी सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसीने छुड़ा दिए थे। कोई 10 राउंड तक की गिनती में वे आगे चल रहे थे। वे हारे लेकिन प्रधानमंत्री की जीत का अंतर पांच लाख से डेढ़ लाख वोट पर ले आए। आबादी के हिसाब से भूमिहारों का ज्यादा असर नहीं है लेकिन राजनीतिक असर बहुत है।

आज निर्वाचन सदन घेरेगा विपक्ष

नई दिल्ली। मंगलवार का दिन दिल्ली में एक बार फिर बड़े प्रदर्शन का दिन होगा। विपक्षी पार्टियों के सभी बड़े नेता चुनाव आयोग के मुख्यालय यानी निर्वाचन सदन की ओर मार्च करेंगे और उसका घेराव करेंगे। 30 सितंबर को हुई विपक्षी पार्टियों की बैठक में इसका फैसला किया गया था। विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक के सांसद दिल्ली में ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ निकालेंगे। वे संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक करीब दो किलोमीटर पैदल जाएंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कांग्रेस पार्टी की तीन मांगे ऐसी हैं, जिन पर कोई समझौता नहीं होगा यानी ये  नॉन नेगोशिएबल हैं। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस की पहली मांग यह है कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो। दूसरी मांग है कि एसआईआर को रद्द किया जाए और तीसरी मांग है कि बैलट पेपर से चुनाव कराया जाए। खड़गे ने कहा कि देश भर में कांग्रेस कार्यकर्ता और ‘इंडिया’ ब्लॉक के साथी दल इन तीन मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले 11 अगस्त 2025 को विपक्षी गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग के ऑफिस तक मार्च निकाला था। इसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, शरद पवार सहित 25 विपक्षी दल शामिल हुए थे। इस बार मंगलवार, छह अक्टूबर को विपक्ष की 19 पार्टियां के नेता मार्च निकालेंगे। इनके लोकसभा में 178 और राज्यसभा में 62 सांसद हैं।

ज्ञानेश है भाजपा का हथियारः उद्धव

मुंबई। शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के ‘हथियार’ के रूप में काम करने का आरोप लगाया। वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने और भविष्य के चुनाव मतपत्र से कराने की मांग की।

सीईसी और एसआईआर के खिलाफ ठाकरे बंधुओं के नेतृत्व में मुंबई में निकाले गए ‘विराट गर्जना मोर्चा’ में हजारों लोग शामिल हुए। मार्च के बाद हुई रैली में कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट और विजय वडेट्टीवार तथा शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे, जितेंद्र आव्हाड और अनिल देशमुख भी शामिल हुए।

उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि अगर एसआईआर मतदाता सूची से बांग्लादेशियों को बाहर करने के लिए कराया गया था तो सरकार बताए कि देश में अवैध रूप से रह रहे कितने बांग्लादेशियों का पता लगाया गया है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘ज्ञानेश कुमार भाजपा का हथियार हैं।’

निर्वाचन आयोग को निशाना बनाते हुए उद्धव ने दावा किया कि महाराष्ट्र में एसआईआर के दौरान दो करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह की कवायद में पश्चिम बंगाल में 30 लाख और तमिलनाडु में 70 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

उद्धव ठाकरे ने नूर्नबर्ग मुकदमों की तर्ज पर भाजपा नेताओं के खिलाफ अभियोजन की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, ‘भाजपा और इन अधिकारियों को समझ लेना चाहिए कि देश में भी ऐसा ही होगा।’

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की लड़ाई किसी एक पार्टी या नेता, धर्म या जाति के लिए नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता के लिए है। उद्धव ने दावा किया, ‘भाजपा को समझ लेना चाहिए कि लोग आज शांत हैं। अगर वे आक्रोशित हो गए तो वे उसका सिंहासन जला देंगे।’

उद्धव ने भाजपा पर न केवल वोट और विधायकों को ‘चुराने’ का आरोप लगाया, बल्कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे को भी ‘चुराने’ का आरोप लगाया।

शिवसेना (उबाठा) प्रमुख ने इस सप्ताह की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े मामले की तत्काल सुनवाई नहीं करने को लेकर उच्चतम न्यायालय की भी आलोचना की। यह मामला राज्य में उपचुनाव से एक दिन पहले तत्काल सुनवाई के लिए उठाया गया था। अदालत इस मामले पर पांच अक्टूबर को सुनवाई करेगी, जबकि राज्य की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव छह अक्टूबर को होने हैं।

उद्धव ने दावा किया, ‘यह दिखाता है कि वे सभी संस्थानों को किस तरह नियंत्रित कर रहे हैं।’ राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में एसआईआर की प्रक्रिया रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि देश में भविष्य के चुनाव मतपत्र के जरिए कराए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वे 2017-18 से ही राजनीतिक नेताओं को निर्वाचन निकाय में कथित ‘अनियमितताओं’ के बारे में बताते रहे हैं।

मनसे प्रमुख ने कहा कि उन्होंने ईवीएम और मतदाता सूची के मुद्दे पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। उन्होंने दोनों नेताओं से इन मुद्दों के स्पष्ट होने तक चुनाव का बहिष्कार करने का आग्रह भी किया था।

दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू हुआ विरोध मार्च कुछ ही दूरी तय कर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मुख्यालय पहुंचा। एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित इस मार्च में सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की गई।

मार्च में राजनीतिक दलों के झंडे ले जाने की अनुमति नहीं थी। प्रतिभागियों से केवल राष्ट्रीय तिरंगा साथ रखने को कहा गया था। प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि शहर एक बार फिर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आया है। सभी भारतीयों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए दीपके ने कहा, ‘अब या कभी नहीं।’

3 बार रहे विधायक, मिला पद्म श्री और ओलंपिक में की भारत की कप्तानी, जानिए पंजाब कांग्रेस के नए बॉस परगट सिंह की पूरी कहानी

पंजाब में कांग्रेस की कमान अब परगट सिंह के हाथ में होगी। ये वही परगट सिंह हैं जिन्होंने हॉकी के मैदान में कई बार भारत का प्रतिनिधित्व किया है। अपनी हॉकी से विरोधी टीम को धूल चटाने वाले परगट सिंह तीन बार विधायक रह चुके हैं। पूर्व ओलंपियन और भारतीय हॉकी कप्तान अब राज्य की राजनीति में सबसे आगे हैं।

पद्मश्री से सम्मानित परगट सिंह जालंधर कैंटोनमेंट सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। 61 साल के परगट सिंह को शुक्रवार को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले लुधियाना के सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग की जगह ली है। पंजाब के दोआबा इलाके के जाट सिख नेता सिंह की यह पदोन्नति राज्य इकाई के नेतृत्व को लेकर कई हफ्तों की अंदरूनी खींचतान के बाद हुई है, जिससे विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के कैंपेन को नुकसान पहुंचने का खतरा था।

विजय इंदर सिंगला थे दौड़ में सबसे आगे

पंजाब के पूर्व मंत्री और हिंदू चेहरा विजय इंदर सिंगला को पंजाब कांग्रेस प्रमुख के पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था। लेकिन पार्टी हाईकमान ने आखिरकार खिलाड़ी से नेता बने परगट सिंह को चुना क्योंकि वह 2027 के चुनावों से पहले राज्य इकाई के झगड़ते गुटों को साथ लेना चाहता है। लेकिन, सिंह का राजनीतिक करियर हॉकी के मैदान से शुरू हुए सफर का सिर्फ एक हिस्सा है।

खेल से राजनीति का सफर

मार्च 1965 में जालंधर के मीठापुर में जन्मे सिंह ने बतौर हॉकी खिलाड़ी 1992 बार्सिलोना और 1996 अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने नेशनल हॉकी टीम की कप्तानी की। देश बेहतरीन हॉकी डिफेंडर रहे सिंह के योगदान के लिए उन्हें 1989 में अर्जुन अवॉर्ड और 1998 में पद्म श्री मिला। अंतरराष्ट्रीय हॉकी से रिटायर होने के बाद, सिंह स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े, और चुनावी पॉलिटिक्स में आने से पहले उन्होंने पंजाब में डायरेक्टर ऑफ स्पोर्ट और सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के तौर पर काम किया।

शिरोमणि अकाली दल के साथ शुरू हुआ राजनीतिक सफर

परगट सिंह का राजनीतिक सफर शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ शुरू हुआ जब उन्होंने 2012 के पंजाब विधान सभा चुनाव में जालंधर कैंटोनमेंट सीट से चुनाव लड़ा। उन्होंने कांग्रेस कैंडिडेट को 6,000 से ज्यादा वोटों के मार्जिन से हराया। 2016 में, उन्हें एसएडी से सस्पेंड कर दिया गया था। 2017 के विधान सभा चुनाव में वह नवजोत सिंह सिद्धू के फ्रंट ‘आवाज-ए-पंजाब’ का हिस्सा बने। वर्तमान में कांग्रेस से जुड़े सिद्धू को जब पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया, तो सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया। उनकी चुनावी सफलता 2017 के विधानसभा चुनावों में भी जारी रही। उन्होंने अकाली दल के सरबजीत सिंह मक्कड़ को 29,000 से ज्यादा वोटों से हराया। 2022 के चुनावों में भी उन्होंने अपनी विधायकी बरकरार रखी। इस चुनाव में कांग्रेस 117 सदस्यों वाली विधानसभा में 18 सीटों पर सिमट गई थी।

राजनीति में भी कायम है मैदान की आक्रामकता

चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में, सिंह के पास शिक्षा और खेल जैसे अहम मंत्रालय थे। पंजाब से जुड़े मामलों पर अपने विचार साझा करने के लिए जाने जाने वाले सिंह, लॉ एंड ऑर्डर, स्पोर्ट्स, एजुकेशन और अपने चुनाव क्षेत्र से जुड़े मामलों सहित कई मुद्दों पर वर्तमान सरकार पर आक्रामक रहे हैं। 1 जुलाई को, सिंह को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की मैनिफेस्टो कमेटी का सह अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अभी, वह जम्मू और कश्मीर के इंचार्ज AICC सेक्रेटरी भी हैं।

क्षेत्रीय समीकरणों पर आधारित है पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष का पद

पंजाब में कांग्रेस अध्यक्ष पद पर उनकी तरक्की पार्टी के क्षेत्रीय समीकरण में भी फिट बैठती है। जाट सिख प्रताप सिंह बाजवा पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। वहीं, जालंधर के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, जो दलित चेहरा हैं, पार्टी की कैंपेन कमेटी के प्रमुख हैं। गुरदासपुर के एमपी सुखजिंदर सिंह रंधावा भी जाट सिख हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस की पंजाब यूनिट के प्रेसिडेंट के तौर पर वारिंग की जगह लेने का फैसला पार्टी के पंजाब के इंचार्ज जनरल सेक्रेटरी सचिन पायलट से मिले ऑर्गेनाइज़ेशनल फीडबैक के बाद लिया गया।

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निर्वाचन सदन को घेरेगा विपक्ष

नई दिल्ली। विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक में बुधवार को बड़ा फैसला हुआ। बैठक में शामिल पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और इस्तीफा नहीं देने पर छह अक्टूबर को चुनाव आयोग के कार्यालय यानी नई दिल्ली के अशोक रोड पर स्थित निर्वाचन सदन का घेराव करेंगी। इस बीच दो से आठ अक्टूबर के बीच ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए विपक्षी पार्टियां पूरे देश में मार्च निकालेंगी।

गौरतलब है कि बुधवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में ‘इंडिया’ ब्लॉक की पार्टियों की बैठक हुई, जिसमें 19 पार्टियों के दो दर्जन से ज्यादा नेता शामिल हुए। सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सीपीएम महासचिव एमए बेबी सहित कई बड़े नेता बैठक में शामिल हुए। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे वर्चुअल तरीके से बैठक में शामिल हुए। डीएमके और आम आदमी पार्टी ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। समाजवादी पार्टी की ओर से दो सांसद बैठक में शामिल हुए।

करीब तीन घंटे चली बैठक में तीन बातों पर सहमति बनी। विपक्षी पार्टियों ने तय किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाया जाए। चुनाव आयोग से विपक्ष ने कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही नाम हटाने से पहले वोटर को नोटिस और अपील का मौका देने की मांग भी की गई। विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि बैठक में 19 पार्टियां शामिल हुईं, जिनके लोकसभा में 178 और राज्यसभा में 62 सांसद हैं।

बैठक के बाद खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी और शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग को कठपुतली बना दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव आयोग के साथ वोट चोरी कर रही है। बैठक में ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार को चोर और डाकू कहा। उन्होंने कहा कि विपक्ष बड़ा आंदोलन करेगा और जरुरत हुई तो चांद, तारों तक जाएगा। राहुल गांधी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ साथ प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र पर हमला कर रहे हैं। राहुल ने कहा, ‘हम एक गठबंधन हैं और देश में बड़ा बदलाव लाएंगे’। तेजस्वी यादव ने फॉर्म छह में किए गए बदलाव को विपक्ष की बड़ी जीत बताया।

हाल के चुनाव अवैध है: राहुल

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कांग्रेस कार्य समिति यानी सीडब्लुसी की बैठक में कहा कि हाल के सभी चुनाव अवैध हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त सरकार से समझौता कर चुके हैं। करीब ढाई घंटे तक चली सीडब्लुसी की बैठक के बारे में सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि राहुल ने कांग्रेस नेताओं से उनके ऊपर भरोसा करने को कहा। उन्होंने एक नियुक्ति पैनल की बैठक के बाद का किस्सा सुनाते हुए कहा कि बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माना की उनके बाद राहुल ही प्रधानमंत्री बनेंगे। यह किस्सा सुना कर राहुल ने कहा कि मोदी को जैसे उनके ऊपर भरोसा है वैसे ही कांग्रेस नेताओं को भी रखना चाहिए।

बहरहाल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर हुए खुलासे पर विचार के लिए हुई कार्य समिति की बैठक में राहुल गांधी ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह समझौता कर चुके हैं और देश की चुनाव व्यवस्था ‘फिक्स’ है। हाल के सभी चुनाव अवैध हैं”। राहुल गांधी ने आगे कहा, “चाहे ईवीएम हो या मतदाता सूची, दोनों से छेड़छाड़ की गई है। दोनों का इस्तेमाल भाजपा चुनाव जीतने की रणनीति के तौर पर कर रही है”।

बैठक में पार्टी ने एक प्रस्ताव मंजूर किया, जिसमें कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तत्काल इस्तीफा दें। इसके अलावा एसआईआर को तत्काल रोकने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है। कांग्रेस ने इसमें कहा है कि हटाए गए 13 करोड़ 30 लाख नाम बहाल किए जाएं। मंगलवार को हुई बैठक में 68 सदस्यों ने हिस्सा लिया। कांग्रेस ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी वोटर लिस्ट और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के मुद्दों को संसद में उठाएगी और प्रदर्शन करेगी।

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं। उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए। मोदी सरकार ने व्यवस्थित रूप से उस मजबूत लोकतांत्रिक नींव को खोखला कर दिया है जिसे हमारे पूर्वजों ने बनाया था”। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी ने युवाओं को वोट देने से रोकने की साजिश रची है। फॉर्म 6 से जुड़े नियमों में गैरकानूनी तरीके से बदलाव किया गया”।

विपक्ष की बैठक आज

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में हुई गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों को लेकर हुए खुलासे के बाद विपक्षी पार्टियों की एक अहम बैठक बुधवार को होगी। विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की पार्टियों के नेताओं की यह बैठक दिल्ली में होगी। हालांकि बैठक से पहले विपक्ष का बिखराव भी साफ दिख गया है। कई पार्टियों के नेता इसमें नहीं शामिल हो रहे हैं।

पिछली बैठक की ही तरह इस बार भी डीएमके और आम आदमी पार्टी इस बैठक में नहीं शामिल होंगे। गौरतलब है कि इस बैठक के समन्वय का काम कांग्रेस पार्टी देख रही है और बताया जा रहा है कि उसने आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को न्योता नहीं दिया। बहरहाल, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी बैठक में नहीं शामिल होंगे। यह भी कहा जा रहा है कि उनके चाचा रामगोपाल यादव भी बैठक से दूर रहेंगे और पार्टी की ओर से कोई अन्य नेता शामिल होगा। उद्धव ठाकरे भी बैठक के लिए दिल्ली नहीं आ रहे हैं। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल होंगे।

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की पिछले तीन साल में यह आठवीं बैठक है। जून 2024 में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद यह तीसरी बैठक है। लोकसभा के चुनाव नतीजों के तुरंत बाद एक बैठक हुई थी। उसके दो साल बाद आठ जून 2026 को बैठक हुई थी। उसमें एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर चर्चा हुई। उसमें तय हुआ था कि दो महीन बाद अगस्त में हैदराबाद में बैठक होगी। लेकिन वह बैठक नहीं हुई। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खोजी रिपोर्ट के बाद ममता बनर्जी ने विपक्ष की बैठक बुलाने की पहल की।

बहरहाल, बैठक से एक दिन पहले मंगलवार को बताया गया कि अखिलेश यादव 30 सितंबर को लखनऊ में किसानों के सम्मेलन में शामिल होंगे। कहा जा रहा है कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से इस बारे में बात भी की है। हालांकि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि अखिलेश राज्यसभा चुनाव के नामांकन से जुड़ी व्यस्तता के कारण नहीं आएंगे।

बैठक में कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी शामिल होंगे। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी भी इसमें शामिल होंगे। राजद के तेजस्वी यादव, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और सीपीएम के महासचिव एमए बेबी बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार की पार्टी के भी बैठक में शामिल होने की खबर है। गौरतलब है कि पिछले दिनों एमए बेबी ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। लेकिन उन्होंने केजरीवाल को बैठक का न्योता नहीं दिया क्योंकि यह काम कांग्रेस को करना है।

ज्ञानेश के खिलाफ 10 राज्यों में प्रदर्शन

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने देश के 10 राज्यों में प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आगरा में ज्ञानेश कुमार के घर पर जाकर प्रदर्शन किया, उनके घर पर कालिख पोत दी और दीवार पर लिख दिया, ‘ज्ञानेश कुमार गद्दार, वोट चोर’। राजधानी दिल्ली में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया। इससे पहले कांग्रेस ने 25 सितंबर को देश के सभी राज्यों की राजधानियों में प्रदर्शन और विरोध मार्च किया था।

सोमवार, 28 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, गुजरात, दिल्ली और केरलम में प्रदर्शन किया। राजस्थान के जयपुर में कांग्रेस के सारे दिग्गज नेता विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी शामिल थे।

गौरतलब है कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के खुलासे के बाद कांग्रेस पार्टी दावा कर रही है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में गड़बड़ी के आरोपों की पुष्टि हो गई है। इसे लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग हो रही है। उत्तर प्रदेश में सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई जगह प्रदर्शन किए। राजधानी लखनऊ में चुनाव आयोग का कार्यालय घेरने जा रहे कार्यकर्ताओं की पुलिस से धक्का मुक्की हुई तो वाराणसी में ज्ञानेश कुमार को पोस्टर को जूतों से पीटा गया। पूर्वांचल के गोरखपुर लेकर पश्चिमी यूपी के सहारनपुर और मुरादाबाद में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पुलिस से भिड़ंत हुई।

गौरतलब है कि पिछले दिनों ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में एक खोजी रिपोर्ट छपी थी, जिसमें दावा किया गया था कि पिछले 10 महीनों में 14 बार दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर आपत्ति जताई लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनकी अदेखी की। बहरहाल, सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश में भी जोरदार विरोध किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में कार्यकर्ता मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय का घेराव करने पहुंचे हैं। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्कामुक्की हुई। कई कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर भी चढ़ गए। इसी तरह का प्रदर्शन दूसरे राज्यों में भी हुआ।

कर्नाटक में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन किया, सीईसी का इस्तीफा मांगा

कर्नाटक में कांग्रेस ने शनिवार को यहां फ्रीडम पार्क में निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के खिलाफ प्रदर्शन किया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा उनकी गिरफ्तारी की मांग की।

पार्टी नेताओं ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कुमार ने दो निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद उनकी सहमति के बिना कई फैसले लिए।

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नेताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर के चलते बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।

कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सीईसी के कथित कदमों को लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ बताते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने तख्तियां लेकर नारे लगाए और कुमार के इस्तीफे तथा उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन में मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी के हरिप्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और वीरप्पा मोइली, राज्य के मंत्री और विधायक समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कांग्रेस ने मैसूरु और राज्य के कई अन्य हिस्सों में भी प्रदर्शन किये।

Pic Credit : UNI