Bhaari Barish Alert: यूपी, बिहार समेत इन राज्यों के लिए अगले 48 घंटे भारी! मानसून यहां पूरा छा गया, हैवी बारिश का ये अलर्ट आया

Bhaari Barish Alert: देश भर में मानसून ने अपनी रफ्तार बेहद तेज कर दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 2 जुलाई को पूरे उत्तर प्रदेश को कवर कर लिया है। इसके साथ ही 5 दिन देर से ही सही मानसून ने दिल्ली में भी एंट्री कर ली है। यूपी में मानसून के पूरी तरह छा जाने के साथ ही मौसम विभाग ने बिहार समेत देश के कई राज्यों के लिए अगले 48 घंटे बेहद भारी बताए हैं।

IMD ने कई क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले 2 दिनों के भीतर मानसून के दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के बचे हुए हिस्सों और राजस्थान में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।

अगले 2 दिन: इन राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक, आगामी दो दिनों के दौरान तटीय और पश्चिमी भारत के हिस्सों में आफत की बारिश हो सकती है। आईएमडी ने अगले 48 घंटों के लिए नीचे दिए गए क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है:-

उत्तर प्रदेश: 2 जुलाई को मानसून के पूरे राज्य में छा जाने के बाद यहां बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

तटीय कर्नाटक

गुजरात

कोंकण और गोवा

मध्य महाराष्ट्र

अगले 3 दिन: मध्य भारत और पहाड़ी राज्यों में रहेगा ऐसा ही मौसम

आईएमडी ने अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि अगले 3 दिनों के दौरान देश के मध्य, पूर्वी और पहाड़ी राज्यों में भी मौसम का मिजाज काफी आक्रामक रहेगा। इन क्षेत्रों में भी भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज होने का अनुमान है:-

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और विदर्भ

ओडिशा

सौराष्ट्र और कच्छ

शनिवार तक बिहार और पूर्वोत्तर समेत इन राज्यों में हैवी रैन

मौसम विभाग के अनुसार, बिहार सहित देश के कई अन्य हिस्सों में शनिवार तक लगातार भारी बारिश की स्थिति बनी रहेगी। इस दायरे में आने वाले राज्य हैं:-

बिहार और झारखंड

उत्तर प्रदेश (पूरे राज्य में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा)

जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख

केरल (केरलम) और माहे

आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना

पूर्वोत्तर क्षेत्र के हिस्से

ISRO के सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा बादलों का महासागर

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के INSAT-3DS सैटेलाइट से जारी थर्मल इंफ्रारेड तस्वीरों में मानसून की एक बेहद हैरान करने वाली और नाटकीय प्रगति दर्ज की गई है। सैटेलाइट से मिली तस्वीरों में निम्नलिखित बड़ी बातें सामने आई हैं। अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों में पश्चिम बंगाल से लेकर सीधे जम्मू-कश्मीर तक फैली हुई लगभग 1,500 किलोमीटर लंबी एक लगातार सक्रिय रेन बैंड यानी बादलों की विशाल पट्टी साफ दिखाई दे रही है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ये मानसूनी बादल अलग-अलग या छितराए हुए नहीं हैं, बल्कि वे एक लंबी कतार में आपस में जुड़े हुए हैं। यह देश में एक बेहद सक्रिय मानसून परिसंचरण शुरू होने का सीधा संकेत है। ये विशालकाय बादल अपने साथ भारी मात्रा में नमी लेकर चल रहे हैं जो एक साथ देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश कराने की क्षमता रखते हैं।

दो तरफ की मानसूनी हवाओं का मिलन, उत्तर भारत में रफ्तार तेज

सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी साफ हुआ है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों ही दिशाओं से आने वाली नमी से लदी हवाएं इस समय उत्तर भारत के आसमान पर आकर आपस में मिल रही हैं। इसके कारण मानसून की ट्रफ लाइन अब अपनी सामान्य स्थिति की ओर खिसकने लगी है, जिसने मैदानी इलाकों में लगातार और भारी बारिश के लिए परिस्थितियां बेहद अनुकूल बना दी हैं।

ये भी पढ़ें- Monsoon arrived in Delhi: दिल्ली पहुंचा मानसून, जानिए सैटेलाइट तस्वीरों में क्या-क्या दिखा, IMD ने बारिश-आंधी पर ये अलर्ट दिया

देश के सबसे सूखे जून महीनों में से एक का सामना करने के बाद मानसून ने उत्तर भारत में यह जोरदार वापसी की है। इस बढ़ी हुई मानसूनी सक्रियता की वजह से ही उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पहले से ही व्यापक रूप से भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, व्यापक बारिश और आंधी-तूफान के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जुलाई को ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों और पूर्वी हरियाणा के कुछ इलाकों में प्रवेश कर चुका था, जिसके बाद अब इसने रफ्तार पकड़ ली है।

Monsoon arrived in Delhi: दिल्ली पहुंचा मानसून, जानिए सैटेलाइट तस्वीरों में क्या-क्या दिखा, IMD ने बारिश-आंधी पर ये अलर्ट दिया

Monsoon Watch 2nd July: दिल्लीवालों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। झुलसाती गर्मी और शुष्क जून के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार 2 जुलाई को देश की राजधानी दिल्ली में आधिकारिक तौर पर दस्तक दे दी है। मानसून अपने सामान्य आगमन की तारीख (27 जून) से 5 दिन की देरी से दिल्ली पहुंचा है। इसके आते ही राजधानी के कई हिस्सों में व्यापक बारिश का दौर शुरू हो गया है। इससे फिलहाल मौसम सुहावना हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक साल 2021 के बाद यह पहली बार है जब मानसून ने जुलाई के महीने में दिल्ली में प्रवेश किया है।

पिछले 5 सालों में सबसे देरी से पहुंचा मानसून

मौसम विभाग के ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले पांच वर्षों में मानसून के दिल्ली पहुंचने का पैटर्न कुछ ऐसा रहा है:-

2026: 2 जुलाई (5 दिन की देरी)

2025: 29 जून

2024: 28 जून

2023: 25 जून

2022: 30 जून

2021: 13 जुलाई

2021 में मानसून काफी देरी से 13 जुलाई को आया था। इसके बाद अब 2026 में इसने जुलाई के महीने में दस्तक दी है। मौसम विभाग ने आज दिन भर दिल्ली के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने और आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहने का पूर्वानुमान जताया है।

दिल्ली के लिए IMD का वेदर अलर्ट: तेज हवाओं के साथ होगी बौछारें

मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के लिए तात्कालिक अलर्ट जारी किया है। दिल्ली में गरज-चमक और आकाशीय बिजली के साथ बहुत हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। इस दौरान 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी दी गई है।

ISRO के सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा बादलों का महासागर

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के INSAT-3DS सैटेलाइट से बुधवार को जारी थर्मल इंफ्रारेड तस्वीरों में मानसून की एक बेहद हैरान करने वाली और नाटकीय प्रगति देखी गई है। सैटेलाइट तस्वीरों में पश्चिम बंगाल से लेकर जम्मू-कश्मीर तक फैली हुई लगभग 1500 किलोमीटर लंबी एक लगातार सक्रिय रेन बैंड यानी बादलों की विशाल पट्टी दिखाई दी है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून के बादल छितराए हुए नहीं हैं बल्कि वे एक लंबी कतार में आपस में जुड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। यह सक्रिय मानसून परिसंचरण की शुरुआत का सीधा संकेत है। ये विशाल बादल अपने साथ भारी मात्रा में नमी लेकर चल रहे हैं। ये एक साथ कई राज्यों में भारी बारिश कराने में सक्षम हैं।

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तस्वीरों से पता चलता है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों तरफ से आने वाली नमी से लदी हवाएं उत्तर भारत के ऊपर आकर आपस में मिल रही हैं। इसके साथ ही मानसून की ट्रफ लाइन अपनी सामान्य स्थिति की ओर खिसकने लगी है। इससे मैदानी इलाकों में लगातार बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं।

उत्तर भारत में मानसून की रफ्तार तेज

देश के सबसे सूखे जून महीनों में से एक के बाद मानसून ने उत्तर भारत में जोरदार वापसी की है। इस बढ़ी हुई मानसूनी सक्रियता की वजह से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पहले से ही व्यापक बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, व्यापक बारिश और आंधी-तूफान के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जुलाई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों और पूर्वी हरियाणा के कुछ इलाकों में आगे बढ़ चुका था।

इसके बाद अगले 24 घंटों के भीतर मानसून ने तेजी से उत्तर की ओर रुख किया, जिसके परिणामस्वरूप बुधवार रात से गुरुवार दोपहर के बीच दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़ और हरियाणा व पंजाब के कई और हिस्सों में मानसूनी हवाएं और शुरुआती गरज-चमक के साथ बारिश का दौर चल रहा है।

जेवर एयरपोर्ट से इन 9 नए रूट पर इंडिगो ने फ्लाइट का किया ऐलान, Noida International airport से अब टोटल 15 रूट पर हवाई सेवा

Noida Airport News: राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) से हवाई सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बेहद शानदार खबर है। देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइंस कंपनी इंडिगो (IndiGo) ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अपने नेटवर्क का बड़ा विस्तार करते हुए 9 नए शहरों के लिए उड़ानों की घोषणा की है। इस नए विस्तार के बाद नोएडा एयरपोर्ट से सीधे तौर पर जुड़ने वाले शहरों की कुल संख्या अब 15 हो जाएगी। एयरलाइन ने बुधवार 1 जुलाई को इन नई सेवाओं की शुरुआत की। इनमें जयपुर, जोधपुर, धर्मशाला, भोपाल, देहरादून, बरेली, किशनगढ़ (अजमेर), पंतनगर और जम्मू शामिल हैं।

एयरलाइन ने 15 जून से नोएडा एयरपोर्ट पर बिजनेस ऑपरेशन शुरू किया था। उद्घाटन उड़ान लखनऊ से नोएडा के बीच संचालित हुई थी। इसके बाद से एयरलाइन बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद के लिए प्रतिदिन उड़ानें चला रही है। इंडिगो का यह विस्तार केवल उड़ानों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। बल्कि इससे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर भारत के एक प्रमुख एविएशन हब के रूप में तेजी से विकसित होगा। यात्रियों, कारोबार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था सभी को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

नेटवर्क और मजबूत होगा

1 जुलाई से शुरू हुई नई सेवाओं के बाद नोएडा एयरपोर्ट से इंडिगो द्वारा जुड़े शहरों की संख्या बढ़कर 15 हो जाएगी। इसी दिन से बेंगलुरु और नवी मुंबई के लिए भी नोएडा से उड़ान सेवाएं शुरू होंगी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिगो जहां अधिकांश शहरों के लिए डेली फ्लाइट का संचालन करेगी। वहीं, बरेली के लिए सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को उड़ानें संचालित की जाएंगी। इसके अलावा किशनगढ़ (अजमेर) के लिए मंगलवार, गुरुवार और रविवार को फ्लाइट उपलब्ध रहेगी।

इन नए शहरों के लिए शुरू होंगी उड़ानें

इंडिगो द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नए जोड़े गए रूटों में देश के कई प्रमुख और पर्यटन शहर शामिल हैं:-

जयपुर, जोधपुर और देहरादून

धर्मशाला, बरेली और किशनगढ़ (अजमेर)

देहरादून, पंतनगर और चंडीगढ़

अधिकांश शहरों के लिए डेली फ्लाइट

इंडिगो अधिकांश नए शहरों के लिए रोजाना उड़ानें संचालित करेगी। हालांकि, बरेली के लिए उड़ानें सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और रविवार को चलेंगी। जबकि किशनगढ़ (अजमेर) के लिए उड़ानें मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार को उपलब्ध होंगी।

10 जुलाई से श्रीनगर के लिए डायरेक्ट फ्लाइट

इंडिगो 10 जुलाई से नोएडा-श्रीनगर के बीच सीधी उड़ान सेवा भी शुरू करेगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि फिलहाल नवी मुंबई और श्रीनगर के लिए उड़ानें चंडीगढ़ के रास्ते संचालित की जा रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की भी तैयारी

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इस वर्ष के अंत तक कस्टम और इमिग्रेशन सुविधाएं तैयार कर लेगा। इसके बाद एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शुरू किए जाने की उम्मीद है।

नई किराया कैटेगरी ‘IndiGo Lite Fare’

इसी बीच इंडिगो ने यात्रियों के लिए ‘IndiGo Lite Fare’ नाम से नई एंट्री-लेवल इकोनॉमी किराया श्रेणी शुरू की है। इसमें केवल केबिन बैगेज शामिल होगा और सीट चयन पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस किराए में फ्री चेक-इन बैगेज शामिल नहीं है। जिन यात्रियों को चेक-इन बैगेज की जरूरत होगी, उन्हें इसके लिए अलग से शुल्क देना होगा।

अकासा एयर के बाद इंडिगो की बड़ी तैयारी

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 15 जून को अकासा एयर (Akasa Air) ने अपनी कमर्शियल उड़ानें शुरू की थीं, जो वर्तमान में मुंबई और बेंगलुरु के लिए सेवाएं दे रही हैं। इसी कड़ी में अब इंडिगो ने भी लखनऊ से नोएडा के बीच अपनी उद्घाटन उड़ान के साथ परिचालन का विस्तार कर दिया है। इसके अलावा कंपनी बेंगलुरु, हैदराबाद, जम्मू और अमृतसर के लिए भी दैनिक उड़ानें चला रही है।

नवी मुंबई और श्रीनगर के लिए डायरेक्ट फ्लाइट

एनआईए (NIA) के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि 10 जुलाई से नवी मुंबई के लिए सीधी उड़ानें शुरू होने जा रही हैं। इसके साथ ही श्रीनगर के लिए भी सीधी हवाई सेवा जल्द शुरू की जाएगी। वर्तमान में एयरलाइन के पास नोएडा-जयपुर-मुंबई रूट का लेओवर (Layover) विकल्प है। जबकि नोएडा से नवी मुंबई और नोएडा से श्रीनगर की उड़ानें चंडीगढ़ होकर रूट की जाएंगी।

इंडिगो के नोएडा एयरपोर्ट से 9 नए रूट शुरू होने के प्रमुख फायदे

यात्रियों को अधिक विकल्प: नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को अब कई शहरों के लिए सीधे या बेहतर कनेक्टिविटी वाली उड़ानें मिलेंगी। इससे दिल्ली एयरपोर्ट पर निर्भरता कम होगी।

समय की बचत: नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और एनसीआर के आसपास के लोगों को दिल्ली एयरपोर्ट तक जाने की जरूरत कम पड़ेगी, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों घटेंगे।

पर्यटन को बढ़ावा: जयपुर, धर्मशाला, देहरादून, जम्मू और श्रीनगर जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन उद्योग को लाभ मिलेगा।

व्यापार और निवेश को बढ़ावा: नए हवाई संपर्क से व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और निवेशकों के लिए नोएडा तथा आसपास का क्षेत्र अधिक आकर्षक बनेगा।

रोजगार के अवसर: उड़ानों की संख्या बढ़ने से एयरपोर्ट, एयरलाइन, होटल, टैक्सी और अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

क्षेत्रीय विकास: बरेली, पंतनगर और किशनगढ़ जैसे शहरों की हवाई कनेक्टिविटी बेहतर होने से उनका आर्थिक और औद्योगिक विकास तेज होगा।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की तैयारी: कस्टम और इमिग्रेशन सुविधाएं शुरू होने के बाद नोएडा एयरपोर्ट से सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने का रास्ता साफ होगा, जिससे विदेश यात्रा भी अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।

सस्ती यात्रा का विकल्प: इंडिगो की नई IndiGo Lite Fare योजना के तहत केवल केबिन बैगेज के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को कम किराए में टिकट मिलने की संभावना रहेगी।

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El Nino को लेकर केंद्र सरकार अलर्ट, PM मोदी ने मंत्रालयों को आपात योजना बनाने के दिए निर्देश

देश के कई हिस्सों में कमजोर मानसून और बारिश की बढ़ती कमी को लेकर चिंता के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी संबंधित मंत्रालयों को ‘अल नीनो’ (El Nino) के संभावित असर से निपटने के लिए आपातकालीन योजनाओं के साथ तैयार रहने का निर्देश दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने हाल ही में भारत पर ‘अल नीनो’ के संभावित असर का आकलन करते हुए यूरोप में बढ़ते तापमान जैसी चरम मौसम की घटनाओं के प्रभावों की समीक्षा की। बता दें कि यह समीक्षा केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान ऐसे समय में की गई है, जब देश के कई इलाकों में बारिश में 40% से अधिक की कमी देखी जा रही है।

सूत्रों ने बताया कि, प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों से कहा है कि वे मानसून की बदलती स्थिति पर बारीकी से नजर रखें और खेती, जल संसाधनों, बिजली आपूर्ति और अन्य अहम क्षेत्रों पर पड़ने वाले किसी भी बुरे असर से निपटने के लिए तैयारी सुनिश्चित करें।

बारिश के पैटर्न में हो सकते हैं बदलाव

वहीं, सरकार का आकलन है कि अल नीनो के कारण बारिश के पैटर्न में बड़े बदलाव हो सकते हैं। कुछ इलाकों में बहुत कम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ अन्य इलाकों में बहुत ज्यादा बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ और पानी की कमी का खतरा एक साथ बढ़ सकता है।

फिलहाल, तैयारी को मजबूत करने के लिए, जल शक्ति, कृषि, बिजली, रेलवे और अन्य अहम विभागों सहित कई मंत्रालयों को अपने-अपने सेक्टर के हिसाब से आपातकालीन योजनाएं बनाने का निर्देश दिया गया है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी साल की शुरुआत से ही नियमित बैठकों के जरिए देश की ‘अल नीनो’ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।

इसके अलावा, बदलते हालात पर लगातार नजर रखने के लिए 10 मंत्रालयों के प्रतिनिधियों वाला एक अंतर-मंत्रालयी समूह भी बनाया गया है। गृह मंत्रालय इस समूह के लिए नोडल मंत्रालय के तौर पर काम करेगा और अलग-अलग विभागों के बीच तैयारी और उससे निपटने के उपायों में तालमेल बिठाएगा।

समीक्षा के दौरान, प्रधानमंत्री ने एक बार फिर कहा कि El Nino से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए “पूरी सरकार मिलकर काम करे” और सभी विभाग मिलकर समन्वय में काम करें।

बता दें कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि जुलाई में औसत से कम बारिश होने की संभावना है। यह अनुमान तब आया है जब जून 2026, 1901 के बाद से भारत का पांचवां सबसे सूखा जून रहा। इस दौरान देश में बारिश लंबे समय के औसत से 39% कम दर्ज की गई। इससे पहले मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि जून में मानसून की बारिश सामान्य औसत से 92% से भी कम रह सकती है।

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Monsoon Watch 1 July: पंजाब और हरियाणा में भी हुई मानसून की एंट्री पर दिल्ली में नहीं! अब IMD ने जारी किया ये नया अनुमान

Progress of SW Monsoon: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। 1 जुलाई को मानसून ने उत्तर भारत के कई नए इलाकों में धमाकेदार एंट्री मार ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून अब पंजाब और हरियाणा के भी कुछ हिस्सों में पहुंच गया है लेकिन देश की राजधानी दिल्ली को इसने अभी थोड़ा तरसाया है। वैसे दिल्लीवालों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा क्योंकि मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर में मानसून के दस्तक देने को लेकर बेहद राहत भरा नया अनुमान जारी किया है।

पंजाब-हरियाणा समेत इन राज्यों में बढ़ा मानसून, जानें कहां से गुजर रही सीमा

IMD के मुताबिक एक जुलाई को दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर अरब सागर के कुछ और हिस्सों, गुजरात, पूरे दमन और दीव, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ गया है। इसके अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बचे हुए हिस्सों सहित पूरे जम्मू-कश्मीर और हरियाणा व पंजाब के कुछ हिस्सों में मानसून ने अपनी पहुंच दर्ज करा दी है। अभी मानसून की उत्तरी सीमापोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, शाजापुर, नौगांव, मिर्जापुर, आजमगढ़, अयोध्या, बदायूं, मेरठ, करनाल, गुरदासपुर से होकर गुजर रही है।

दिल्ली में कब आएगा मानसून? IMD का नया अनुमान

भले ही 1 जुलाई की एंट्री में दिल्ली का नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं रहा लेकिन मौसम विभाग ने साफ कर दिया है कि दिल्ली के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 2 दिनों के भीतर दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों, पूरे हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, पंजाब और राजस्थान के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ने के लिए मौसम का सिस्टम पूरी तरह तैयार है। यानी अगले 48 घंटों में दिल्ली में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो जाएगी।

पूरे हिमाचल प्रदेश में मानसून सक्रिय, सामान्य से 6 दिन की देरी

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश से बड़ी खबर है कि बुधवार को मानसून ने पूरे राज्य को आधिकारिक तौर पर कवर कर लिया है। हिमाचल में मानसून का यह आगमन सामान्य तारीख से 6 दिन की देरी से हुआ है। 1 जुलाई को मानसून ने शिमला जिले (शिमला शहर सहित), सिरमौर, मंडी, कुल्लू, लाहुल-स्पीति और कांगड़ा के बचे हुए हिस्सों को कवर कर लिया।

इसके साथ ही सोलन, ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और चंबा जिलों में भी मानसून पूरी तरह फैल गया है। राज्य में इस पूरे हफ्ते व्यापक बारिश होने की उम्मीद है। 2 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिससे हिमाचल समेत पूरे क्षेत्र में बारिश की गतिविधियों में और तेजी आएगी।

जुलाई महीने के लिए पूरे देश का ओवरऑल वेदर आउटलुक

मौसम विभाग ने जुलाई 2026 के महीने के लिए देश भर में होने वाली औसत बारिश का भी एक अनुमान जारी किया है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की सबसे अधिक संभावना है।

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1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई में देश भर में वर्षा का लॉन्ग-पीरियड एवरेज (LPA) लगभग 280.4 मिमी हो सकता है। देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है लेकिन उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश देखी जा सकती है।

India Heavy Rain Alert: दिल्ली से यूपी तक भारी बारिश, IMD ने इन 20+ राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट दिया, 7 जुलाई तक ऐसा रहेगा मौसम

India Heavy Rain Alert: देश भर में मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके साथ ही कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर शुरू हो चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 जुलाई को जारी अपने ताजा बुलेटिन में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और मुंबई (कोंकण) सहित देश के 20 से अधिक राज्यों में आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, देश के अधिकांश हिस्सों में आगामी 7 जुलाई तक मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहेगा।

तेजी से आगे बढ़ा मानसून, दिल्ली-राजस्थान में अगले 2 दिन अनुकूल

IMD के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जुलाई को उत्तर अरब सागर के कुछ और हिस्सों, गुजरात, पूरे दमन और दीव, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ गया है। इसके अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख के बचे हुए हिस्सों, पूरे जम्मू-कश्मीर और हरियाणा व पंजाब के कुछ हिस्सों में भी मानसून ने दस्तक दे दी है। 1 जुलाई को मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) पोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, शाजापुर, नौगांव, मिर्जापुर, आजमगढ़, अयोध्या, बदायूं, मेरठ, करनाल और गुरदासपुर से होकर गुजर रही है। अगले 2 दिनों के दौरान मानसून के दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं।

उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली-यूपी में आंधी और भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों के लिए 1 से 7 जुलाई तक विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है।

दिल्ली, हरियाणा और पंजाब: इन राज्यों में 2 से 7 जुलाई के बीच व्यापक रूप से भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं 1 जुलाई को छिटपुट बारिश का अनुमान है। 2 से 4 जुलाई और 6 से 7 जुलाई को पंजाब में जबकि 2 से 7 जुलाई के दौरान दिल्ली, चंडीगढ़ और हरियाणा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी है। इन क्षेत्रों में 1 से 7 जुलाई के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) से तेज हवाएं और आंधी चलने की आशंका है।

उत्तर प्रदेश: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 और 2 जुलाई को व्यापक बारिश होगी जबकि 3 से 7 जुलाई तक छिटपुट से लेकर सामान्य बारिश की संभावना है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 से 5 जुलाई तक छिटपुट बारिश और 6 व 7 जुलाई को व्यापक रूप से भारी बारिश का अनुमान है। पश्चिमी यूपी में 1 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश हो सकती है जबकि दोनों क्षेत्रों में 1 से 3 जुलाई और 6-7 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। 1 और 2 जुलाई को यहां 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान आ सकता है।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: दोनों पहाड़ी राज्यों में 1 से 7 जुलाई तक व्यापक बारिश जारी रहेगी। उत्तराखंड में 1 से 3 जुलाई के दौरान और हिमाचल में 2-3 जुलाई व 5-6 जुलाई को भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख: यहां 1 से 7 जुलाई तक व्यापक बारिश के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली कड़कने की संभावना है। 1 से 3 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट है।

राजस्थान: पूर्वी राजस्थान में 5 से 7 जुलाई तक व्यापक बारिश और 3-4 जुलाई को भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान में 1 से 7 जुलाई तक छिटपुट बारिश के साथ ही 3 से 5 जुलाई के बीच धूल भरी आंधी चलने की आशंका है।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश में बिजली कड़कने और ‘थंडरस्क्वाल’ की चेतावनी

मध्य प्रदेश: पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 1 से 7 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश दर्ज की जाएगी। 1 जुलाई को पूरे मध्य प्रदेश में मध्यम से तीव्र गति से बिजली कड़कने की गतिविधि देखी जाएगी। इसके साथ ही 1 जुलाई को दोनों हिस्सों में 50-60 किमी प्रति घंटे (झोंके 70 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से थंडरस्क्वाल (भीषण आंधी) आने की चेतावनी है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 3 और 4 जुलाई को कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है।

छत्तीसगढ़ और विदर्भ: छत्तीसगढ़ में 1 से 7 जुलाई तक और विदर्भ में 1 से 5 जुलाई व 7 जुलाई को व्यापक बारिश होगी। विदर्भ में 1 से 3 जुलाई और छत्तीसगढ़ में 1-2 जुलाई के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

पश्चिम भारत: मुंबई, कोंकण और गुजरात में आफत की बारिश का अनुमान

पश्चिम भारत के तटीय और मैदानी इलाकों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट जैसा अनुमान है:

कोंकण, गोवा और गुजरात: गुजरात क्षेत्र, कोंकण व गोवा और मध्य महाराष्ट्र में 1 से 7 जुलाई तक मूसलाधार और व्यापक बारिश का अनुमान है। गुजरात क्षेत्र और कोंकण व गोवा में 1 से 5 जुलाई के दौरान जबकि मध्य महाराष्ट्र में 2 से 5 जुलाई के दौरान कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की बड़ी चेतावनी दी गई है।

सौराष्ट्र और कच्छ: यहां 4 से 6 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी, जबकि 1 से 5 जुलाई के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: ओडिशा और बिहार में कैसा रहेगा मौसम?

बिहार और झारखंड: बिहार में 1 जुलाई को व्यापक बारिश और 2 से 7 जुलाई तक छिटपुट बारिश होगी। वहीं झारखंड में 1 से 7 जुलाई तक व्यापक बारिश के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। बिहार में 1 से 4 जुलाई तक भारी बारिश का अनुमान है।

पश्चिम बंगाल और ओडिशा: गंगीय पश्चिम बंगाल में 5 से 7 जुलाई तक बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि ओडिशा में 1 से 6 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 1 जुलाई को गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड में तीव्र बिजली कड़कने की संभावना है।

पूर्वोत्तर राज्य: अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में जुलाई के शुरुआती दिनों में व्यापक बारिश होगी जो बाद के दिनों में छिटपुट हो जाएगी। असम, मेघालय और अरुणाचल में 2 से 5 जुलाई के दौरान मौसम गर्म और उमस भरा रहने की भी संभावना है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट

तटीय और आंतरिक कर्नाटक: तटीय कर्नाटक में 1 से 7 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश होगी। मौसम विभाग ने 1 व 2 जुलाई और फिर 5 से 7 जुलाई के दौरान तटीय कर्नाटक में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ ही कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 5 से 7 जुलाई तक बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

केरल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश: केरल और लक्षद्वीप में 1 से 7 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी, जहां केरल में 1 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। तेलंगाना में 1-2 जुलाई को व्यापक बारिश और 4 से 7 जुलाई के दौरान तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है।

मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी: समुद्र में न जाने की सलाह

खराब मौसम और तेज हवाओं के मद्देनजर मौसम विभाग ने मछुआरों को 1 से 6 जुलाई 2026 के बीच समुद्र में न उतरने की सख्त सलाह दी है:

अरब सागर: गुजरात, कोंकण, गोवा और कर्नाटक तटों, उससे सटे मध्य-पूर्वी व उत्तर-पूर्वी अरब सागर, सोमालिया और ओमान तटों के साथ-साथ केरल तट और लक्षद्वीप क्षेत्र में 1 से 5/6 जुलाई तक मछुआरों को न जाने के लिए कहा गया है।

बंगाल की खाड़ी: मन्नार की खाड़ी, श्रीलंका तट, ओडिशा तट, गंगीय पश्चिम बंगाल और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों के साथ-साथ पूरे अंडमान सागर में 6 जुलाई तक मछुआरों के जाने पर पाबंदी रहेगी।

El Nino Impact in July: IMD के मंथली आउटलुक में जुलाई में भी मानसून वाली बारिश का हाल ठीक नहीं, अल नीनो का खतरा यहां तक पहुंचा

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए अपना मासिक आउटलुक जारी कर दिया है। मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की बारिश का हाल ठीक नहीं रहने वाला है और इसके सामान्य से कम होने की पूरी संभावना है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो को माना जा रहा है। इसका खतरा अब और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

जुलाई में सामान्य से कम रहेगी बारिश: IMD का पूर्वानुमान

IMD द्वारा मल्टी-मॉडल एनसेंबल फोरकास्टिंग सिस्टम के आधार पर अपने पूर्वानुमान जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम (<94% of Long Period Average – LPA) रहने की सबसे अधिक संभावना है।

क्या है बारिश का सामान्य आंकड़ा (LPA)?

साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने के लिए पूरे देश की दीर्घकालिक औसत वर्षा लगभग 280.4 मिमी है। IMD का पूर्वानुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में कम बारिश होगी। उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य से ऊपर या सामान्य रहने की संभावना है।

मजबूत हो रहा है अल नीनो, न्यूट्रल रहेगा आईओडी

मौसम विभाग ने मानसून की बारिश पर असर डालने वाले वजहों के बारे में भी बताया है। IMD के मुताबिक अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर कमजोर अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। लेकिन मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के ताजा संकेत बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह अल नीनो स्थितियां और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति कैसी है?

इस समय हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी की स्थिति देखी जा रही है। मॉडल के पूर्वानुमानों के अनुसार, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह न्यूट्रल आईओडी स्थिति ही बनी रहने की संभावना है। इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह के तापमान में अंतर को दर्शाने वाली जलवायु सिस्टम है। सामान्य तौर पर यदि IOD सकारात्मक रहता है तो यह भारतीय मानसून को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार IOD के तटस्थ रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि यह मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएगा और अल नीनो का प्रभाव अधिक हावी रहेगा।

जुलाई में सताएगी गर्मी, तापमान रहेगा सामान्य से अधिक

कम बारिश के अनुमान के बीच जुलाई के महीने में देशवासियों को सामान्य से अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई के दौरान, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम-मध्य भारत के कुछ छिटपुट इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। रात के समय या न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश क्षेत्रों में यह भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। सिर्फ मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ अलग-अलग हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है।

कम बारिश से बढ़ेंगी चुनौतियां, तैयारी करने की सलाह

आईएमडी ने आगाह किया है कि जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कई मोर्चों पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। बारिश की कमी के कारण कृषि, जल संसाधन, जलविद्युत उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने बताया कि वह नुकसान को कम करने के लिए विस्तारित अवधि के पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम विज्ञान सलाहकार सेवाएं और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान जारी करता रहता है। ये किसान, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और बिजली क्षेत्र के योजनाकारों के लिए मददगार हैं।

अगला पूर्वानुमान कब?

आईएमडी द्वारा मानसून सीजन के दूसरे भाग (अगस्त + सितंबर 2026) के लिए और विशेष रूप से अगस्त महीने की बारिश का पूर्वानुमान जुलाई 2026 के अंत में जारी किया जाएगा

RBI ने कहा-भारत प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले बाहरी झटकों का बेहतर सामना कर सकता है

आरबीआई ने 30 जून को इस महीने की फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट (एफएसआर) रिलीज की। इसमें कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति इसके प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले मजबूत है। इससे भारत किसी बाहरी झटके या फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के रिस्क का सामना करने की बेहतर स्थिति में है।

अमेरिका-ईरान में डील से घटा है रिस्क

आरबीआई ने कहा है कि पश्चिम एशिया में शांति को लेकर समझौते से रिस्क कम हुआ है। इसके अलावा सरकार और आरबीआई ने हाल में पॉलिसी के लेवल पर कदम उठाए हैं। इसका मकसद देश में कैपिटल फ्लो बढ़ाना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडिया का फाइनेंशियल सिस्टम मजबूत है। इससे बैंकों और नॉन-बैंक लेंडर्स (कर्ज देने वाली कंपनियों) की मजबूत बैलेंसशीट का सपोर्ट हासिल है।

बैंकों के पास कैपिटल की कमी नहीं

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के शिड्यूल्ड कमर्शियल बैंक्स (SCBs) के पास पर्याप्त कैपिटल है। इन्हें स्ट्रॉन्ग लिक्विडिटी बफर का सपोर्ट है। बैंकों की एसेट क्वालिटी बेहतर हो रही है और मुनाफा कमाने की ताकत बढ़ रही है। मैक्रो स्ट्रेस टेस्ट के नतीजे यह दिखाते हैं कि देश का बैंकिंग सिस्टम बड़े झटकों को बर्दाश्त करने में समक्ष है। एग्रीगेट कैपिटल रेशियो रेगुलेटर के तय मानकों से ज्यादा रहने का अनुमान है।

एनबीएफसी और इंश्योरेंस सेक्टर की स्थिति भी मजबूत

एनबीएफसी के बारे में इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इनकी वित्तीय स्थिति मजबूत है। इन्हें पर्याप्त पूंजी, एसेट क्वालिटी और लगातार मुनाफे का सपोर्ट हासिल है। जहां तक इंश्योरेंस सेक्टर की बात है तो उसकी बैलेंसशीट मजबूत है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का इनसॉल्वेंसी रेशियो तय न्यूनतम मानक से ऊपर है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट भी बार-बार के झटकों के बावजूद मजबूत बना हुआ है। इन झटकों में पश्चिम एशिया में हालिया तनाव शामिल है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि सप्लाई चेन में बाधा आने से वित्तीय स्थिति पर दबाव बन सकता है। इससे महंगाई बढ़ने का भी रिस्क है।

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क्रूड की कीमतें हाई लेवल से काफी नीचे 

अमेरिका-ईरान में लड़ाई की वजह से क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थी। इससे भारत में भी पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा था। इसके बावजूद देश में इन तीनों की बड़ी किल्लत नहीं हुई। सरकारी ऑयल कंपनियों ने ईंथन की कीमतें बढ़ाई। लेकिन, यह वृद्धि कई दूसरे देशों के मुकाबले काफी कम थी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आवागमन शुरू होने से ईंधन की सप्लाई की बाधा कम हुई है। इससे क्रूड में बड़ी गिरावट आई है।

कल का मौसम 1 जुलाई: IMD ने 21 राज्यों में भारी बारिश, 17 में आंधी-तूफान का अलर्ट दिया, यूपी से बिहार तक मौसम का तांडव

Weather forecast for July 1: देश के बड़े हिस्से में मानसून की रफ्तार तेज होने के साथ ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 जुलाई के लिए देश के मौसम को लेकर एक बड़ा और विस्तृत बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार 1 जुलाई को देश के 21 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होगी। 17 से अधिक राज्यों में आंधी-तूफान, आकाशीय बिजली और तेज रफ्तार हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है।

उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक मानसून का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। आज ही मानसून मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के कई नए हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) सूरत, इंदौर, सागर, सीधी, आजमगढ़, अयोध्या, बरेली, देहरादून और मंडी से होकर गुजर रही है। इसके साथ ही अगले 2-3 दिनों में दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के शेष हिस्सों में भी मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं।

1 जुलाई को इन 11 राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, 1 जुलाई को देश के 11 राज्यों में मूसलाधार बारिश होने की आशंका है, जिससे निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति पैदा हो सकती है:-

उत्तर प्रदेश (विशेषकर पश्चिमी यूपी): पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई को भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।

बिहार और झारखंड: बिहार में मानसून पूरी तरह सक्रिय है, जिसके कारण 1 जुलाई को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बहुत भारी बारिश होगी।

उत्तराखंड: पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में 1 और 2 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

मध्य प्रदेश और विदर्भ: पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ (महाराष्ट्र) के इलाकों में मानसून के सक्रिय रहने से मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहेगा।

ओडिशा: बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम के चलते ओडिशा में व्यापक और बहुत भारी बारिश दर्ज की जाएगी।

दक्षिण और पश्चिम भारत: कोंकण और गोवा, तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल व माहे में भी 1 जुलाई को भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

इन 10 राज्यों में होगी भारी बारिश

देश के कई अन्य हिस्सों में भी 1 जुलाई को मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है:-

दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब: दिल्ली, चंडीगढ़ और हरियाणा के कई इलाकों में 1 जुलाई को भारी बारिश के साथ मानसून की गतिविधियां बढ़ेंगी।

हिमाचल प्रदेश: पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका के बीच 1 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है।

उत्तर प्रदेश (पूर्वी भाग): पूर्वी यूपी में भी कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।

गुजरात और मध्य महाराष्ट्र: गुजरात रीजन और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की जाएगी।

पश्चिम बंगाल और सिक्किम: इन राज्यों के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की उम्मीद है।

पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत: अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा के साथ-साथ दक्षिण के तेलंगाना और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में भी भारी बारिश का अलर्ट है।

17 राज्यों में आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली का तांडव

मौसम विभाग ने आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली चमकने को लेकर दो अलग-अलग श्रेणियां बनाई हैं, जिससे देश के करीब 17 राज्य प्रभावित होंगे:-

1- 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से आंधी और बिजली का अलर्ट (14 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश)

इन राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज झोंकेदार हवाएं चलेंगी:-

उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल (गांगेय क्षेत्र), पूर्वी राजस्थान, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह।

2- 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से आंधी का अलर्ट (5 राज्य)

उत्तराखंड, पश्चिमी राजस्थान, तेलंगाना, संपूर्ण कर्नाटक और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम।

3- केवल बिजली कड़कने की चेतावनी

मध्य प्रदेश, मारथवाड़ा, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में केवल मेघगर्जन और बिजली गिरने की संभावना अधिक है।

इसके अलावा, तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और रायलासीमा क्षेत्र में तेज सतही हवाएं चलने का भी अलर्ट है।

मौसम को प्रभावित करने वाले 3 बड़े सिस्टम

आईएमडी के मौसम विश्लेषण के अनुसार देश में इस समय तीन मुख्य मौसमी प्रणालियां सक्रिय हैं जो इस बदलाव के लिए जिम्मेदार हैं:-

कम दबाव का क्षेत्र: उत्तरी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे बांग्लादेश के ऊपर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। इसके प्रभाव से 3 जुलाई के आसपास उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जिससे मध्य भारत में मानसून और उग्र होगा।

ऑफ-शोर ट्रफ: महाराष्ट्र से लेकर उत्तरी केरल तट तक समुद्र तल पर एक ऑफ-शोर ट्रफ लाइन सक्रिय है, जिसके कारण कोंकण, गोवा और कर्नाटक के तटीय इलाकों में भारी बारिश हो रही है।

पश्चिमी विक्षोभ: उत्तर-पश्चिम भारत में 2 जुलाई, 2026 से एक नया पश्चिमी विक्षोभ दस्तक देने जा रही है, जिससे पहाड़ों से लेकर मैदानों तक बारिश की गतिविधियां और तेज हो जाएंगी।

उत्तर-पश्चिम भारत (जैसे दिल्ली, यूपी, पंजाब) में बारिश की वजह से 2 जुलाई तक अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आएगी। इससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, पूर्वोत्तर के राज्यों (असम, मेघालय, अरुणाचल) में 2 से 4 जुलाई के बीच उमस भरा और गर्म मौसम परेशान कर सकता है।‌

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आम आदमी को लगने वाला है बड़ा झटका! मानसून की सुस्ती से दूध, दाल और टमाटर बिगाड़ेंगे आपका बजट; समझें पूरा गणित

Monsoon Impact on Food Prices: जून का महीना बीतने को है, लेकिन देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार अभी भी सुस्त है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, इस साल जून से सितंबर के दौरान औसत से कम बारिश होने की 84 फीसदी आशंका है। मानसून की इस बेरुखी का सीधा असर अब आपकी जेब और रसोई के बजट पर पड़ने वाला है।

डेयरी इंडस्ट्री के दिग्गजों और कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर जुलाई और अगस्त में भी बारिश सामान्य से कम रही, तो दूध, दालों और हरी सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। आइए समझते हैं कि कमजोर मानसून आपके घर के राशन के बिल को कैसे बिगाड़ सकता है।

दूध की कीमतें: जुलाई-अगस्त में 4% तक और बढ़ सकते हैं दाम

मई के महीने में अमूल और मदर डेयरी जैसी बड़ी कंपनियों ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। अब जुलाई या अगस्त में आम जनता को दूध का एक और झटका लग सकता है।

पराग मिल्क फूड्स के चेयरमैन देवेंद्र शाह के मुताबिक, दूध की कीमतें पहले ही 2-3 फीसदी बढ़ चुकी हैं। अगर मुख्य दूध उत्पादक राज्यों में बारिश कम होती है, तो हरे चारे और पशु आहार की भारी कमी हो जाएगी।

चारे की कमी से डेयरी किसानों की लागत बढ़ेगी, जिससे कंपनियां दूध के दाम 3 से 4 फीसदी तक और बढ़ा सकती हैं। इसका सीधा असर दही, पनीर, छाछ, मक्खन और घी की कीमतों पर भी पड़ेगा।

दालें और सब्जियां: थाली से गायब हो सकता है स्वाद

कमजोर मानसून का सबसे बड़ा झटका खरीफ फसलों की बुआई को लगा है। 25 जून 2026 तक देश में फसलों की बुआई पिछले साल के मुकाबले करीब 23 फीसदी कम हुई है।

अरहर (तुअर) और उड़द जैसी दालें पूरी तरह से मानसून की बारिश पर निर्भर करती हैं। बारिश में देरी के कारण बुआई पिछड़ गई है, जिससे आने वाले दिनों में दालों की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

टमाटर, प्याज और अन्य हरी सब्जियों की सप्लाई चेन थोड़ी सी भी कम बारिश से प्रभावित हो जाती है। खेतों में पानी की कमी से उत्पादन घटेगा और मंडियों में आवक कम होने से खुदरा दाम बढ़ेंगे।

सोयाबीन और मक्का जैसी तिलहन फसलों की बुआई भी सुस्त है, जिससे आने वाले समय में खाने के तेल की कीमतों पर भी दबाव दिख सकता है।

कैसा है महंगाई का मौजूदा हाल

सरकारी आंकड़ों (MoSPI) के अनुसार, मई के महीने में खुदरा महंगाई दर भले ही 3.93 फीसदी रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई दर 4.78 फीसदी के उच्च स्तर पर थी। पीडब्ल्यूसी इंडिया के एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अल नीनो (El Niño) का असर सर्दियों तक खिंचा, तो खरीफ के साथ-साथ गेहूं जैसी रबी की फसलों पर भी इसका असर दिख सकता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा।

यानी कुल मिलाकर, आपकी रसोई का बजट अब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि जुलाई और अगस्त के बचे हुए दो महीनों में मानसून देश को कितना भिगोता है।

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