GIFT Nifty indicator: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन किस ओर घूमेगा बाजार का पहिया, आखिर गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत, जानें

GIFT Nifty indicator: सोमवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty के स्थिर या थोड़ी बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT Nifty से सीमित बढ़त के संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि मजबूत एशियाई बाजार और शुक्रवार को Wall Street में आई तेज़ी से बाज़ार का मूड बेहतर हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने को लेकर बनी अनिश्चितता निवेशकों को सतर्क रख सकती है।

सुबह करीब 8 बजे GIFT Nifty 18.5 अंक या 0.08 फीसदी बढ़कर 24,660 पर ट्रेड कर रहा था। इससे शुक्रवार को 24,570.65 पर बंद हुए Nifty 50 के लिए काफी हद तक सपाट या सकारात्मक शुरुआत के संकेत मिलते हैं। पिछले सत्र में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए थे, क्योंकि ऑटो और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी शेयरों में मजबूत बढ़त के मुकाबले फाइनेंशियल शेयरों में कमजोरी हावी रही। Sensex 455.59 अंक या 0.58 प्रतिशत गिरकर 78,499.17 पर आ गया, जबकि Nifty 65.35 अंक या 0.27 प्रतिशत गिरकर 24,570.65 पर बंद हुआ।

एशियाई बाज़ार चढ़े

सोमवार को एशियाई इक्विटी में बढ़त देखी गई। शुक्रवार को Wall Street में आई तेज़ी से संकेत लेते हुए ये बाज़ार ऊपर चढ़े। कमज़ोर अमेरिकी रोज़गार डेटा के कारण फेडरल रिज़र्व द्वारा सितंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गई थीं। जापान का Nikkei 225 0.6 प्रतिशत चढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क इंडेक्स 0.5 प्रतिशत बढ़ा। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे व्यापक इंडेक्स 0.3 प्रतिशत बढ़ा।

पिछले हफ़्ते की मज़बूत बढ़त के बाद अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में सुस्ती रही।  S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 प्रतिशत गिरे और Nasdaq फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

शुक्रवार को अमेरिकी इक्विटी में बढ़त हुई, जब डेटा से पता चला कि अर्थव्यवस्था में उम्मीद के विपरीत नौकरियों में कमी आई है। इससे निवेशकों ने निकट भविष्य में उधार लेने की लागत बढ़ने की उम्मीदें कम कर दीं। S&P 500 0.62 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ, जबकि Nasdaq Composite 1.30 प्रतिशत और Dow Jones Industrial Average 0.28 प्रतिशत चढ़ा। इस हफ़्ते नैस्डैक में 5.19% की तेज़ी आई, S&P 500 में 3.58% की बढ़त हुई और डॉव 2.96% ऊपर चढ़ा। इसकी वजह कंपनियों की अच्छी कमाई और ब्याज दरों को लेकर कम होती चिंताएं थीं। अब निवेशक फ़ेडरल रिज़र्व की पॉलिसी की दिशा के बारे में और संकेत पाने के लिए इस हफ़्ते आने वाले US महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखेंगे।

होर्मुज़ को लेकर अनिश्चितता के बीच तेल की कीमतों में सुधार

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त हुई क्योंकि इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) कितनी जल्दी पूरी तरह से फिर से खुल पाएगा। ब्रेंट क्रूड फ़्यूचर्स 1.09% बढ़कर $84.46 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.78% बढ़कर $78.79 हो गया।

ईरान ने रविवार को कहा कि होर्मुज से होकर नए शिपिंग रूट तय करने के लिए ओमान के साथ समझौता अंतिम चरण में है, लेकिन उसने यह भी कहा कि जलमार्ग के फिर से खुलने से पहले अमेरिका को कुछ अन्य शर्तों को पूरा करना होगा।

इंडेक्स पर क्या बनाए रणनीति

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान समझौते की दिशा में हुई प्रगति से बाज़ार की धारणा (sentiment) को मदद मिली है, हालांकि बातचीत अभी भी शर्तों पर आधारित है। जब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो जाता, तब तक मध्य पूर्व को लेकर बनी अनिश्चितता बड़े जोखिम लेने की क्षमता को सीमित कर सकती है। पोनमुडी ने आगे कहा कि WTI क्रूड का $78-79 प्रति बैरल के आसपास बने रहना यह बताता है कि बाज़ार अभी भी कुछ जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम (भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम) को ध्यान में रख रहे हैं।

पोनमुडी ने कहा कि निफ़्टी का टेक्निकल स्ट्रक्चर सकारात्मक बना हुआ है। 24,600-24,700 का ज़ोन मुख्य रेजिस्टेंस एरिया बना हुआ है। इसके ऊपर लगातार बने रहने से तेज़ी का मोमेंटम मज़बूत हो सकता है और 24,800-25,000 के स्तर तक पहुंचने का रास्ता साफ हो सकता है। नीचे की तरफ, 24,500 तुरंत सपोर्ट का काम कर रहा है, और उसके बाद 24,400-24,300 का ज़ोन सपोर्ट के तौर पर है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Market Today: कमजोर जॉब रिपोर्ट से दौड़ा ग्लोबल बाजार, एशिया में तेजी, निक्केई, कोस्पी 1.5% ऊपर

Asian Market Today:  एशियाई शेयर बाज़ारों में तेजी देखने को मिली। वॉल स्ट्रीट में शुक्रवार के सत्र के बाद आई बढ़त को देखते हुए थी, जो उम्मीद से कमज़ोर अमेरिकी जॉब डेटा के कारण हुई थी। रिकॉर्ड ऊंचाई पर S&P बंद हुआ। नैस्डैक में भी 1 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली। निक्केई में 1.29% और कोस्पी में 1.47% की बढ़त हुई, जबकि टोपिक्स में 0.36% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.5% की तेज़ी दिखी, हालांकि S&P 500 फ्यूचर्स में 0.2% की गिरावट आई।

यह तेज़ी उस खबर के बाद आई जिसमें पता चला कि अमेरिकी नियोक्ताओं ने जुलाई में उम्मीद के उलट नौकरियों में कटौती की थी, और पिछले दो महीनों के हायरिंग के आंकड़ों को भी घटाकर संशोधित किया गया था।

वॉल स्ट्रीट

रविवार रात S&P 500 फ्यूचर्स में गिरावट आई, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच जल्द समझौते की संभावना को लेकर चिंताएं बढ़ गई।

S&P 500 से जुड़े फ्यूचर्स में लगभग 0.2% की गिरावट आई, जबकि नैस्डैक-100 फ्यूचर्स में 0.1% की बढ़त हुई। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स 99 अंक या 0.2% गिरे।

कच्चे तेल की कीमतें

सोमवार को तेल की कीमतों में बढ़त हुई क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। ईरान ने कहा कि ओमान के साथ नए शिपिंग रूट बनाने का समझौता पूरा होने वाला है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अमेरिका को अभी भी कुछ अतिरिक्त शर्तें पूरी करनी होंगी।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 91 सेंट या 1.09% बढ़कर $84.46 प्रति बैरल हो गए, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 61 सेंट या 0.78% बढ़कर $78.79 प्रति बैरल हो गए।

पिछले हफ़्ते इन दोनों बेंचमार्क में 7% से ज़्यादा की गिरावट आई थी। यह गिरावट इस उम्मीद में हुई थी कि ईरान और ओमान एक समझौते के करीब हैं, जिससे होर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने का रास्ता साफ़ हो सकता है। युद्ध से पहले दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पाँचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुज़रता था।

अमेरिका-ईरान युद्ध

ईरान ने रविवार को कहा कि ओमान के साथ समझौता “अंतिम चरण” में है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य तभी फिर से खोला जाएगा जब अमेरिका अतिरिक्त शर्तें पूरी कर लेगा। इन शर्तों में तेहरान को उन बड़े हमलों के लिए मुआवज़ा देना भी शामिल है जिनका उसे सामना करना पड़ा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच अभी कोई बातचीत नहीं हो रही है और जब तक अमेरिका जून में हुए अंतरिम समझौते का उल्लंघन करता रहेगा, ईरान बातचीत शुरू नहीं करेगा।

इस बीच, ईरान का समर्थन करने वाली हूथी सेनाओं ने रविवार को दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरामको की जाज़ान रिफाइनरी को निशाना बनाया है। यह घटना सऊदी अरब द्वारा तुर्की और पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता करने के दो दिन बाद हुई, जबकि ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल के टकराव के कारण इलाके में तनाव बढ़ रहा है।

अलग से, संयुक्त अरब अमीरात की कंपनी ADNOC ने शुक्रवार को कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरते समय उसके 15 जहाजों पर हमले हुए हैं।

आज सोने की कीमत

जनवरी के बाद से सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने के बाद सोने की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं। ट्रेडर्स ने अमेरिकी लेबर मार्केट में अप्रत्याशित गिरावट का आकलन किया, जिससे ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की चिंता कम हुई।

पिछले हफ्ते 7% से अधिक की बढ़त के बाद, एशियाई बाजार में शुरुआती घंटों में सोना लगभग $4,345 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।

हाल के हफ्तों में यह कीमती धातु काफी हद तक $4,000 प्रति औंस के अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बनी हुई है। जून में युद्ध के कारण हुई भारी बिकवाली से सोना ‘बेयर मार्केट’ (गिरावट वाले बाजार) में चला गया था, जिसके बाद अब कम कीमत पर खरीदारी (dip-buying) में तेजी आई है।

हालिया रिकवरी के बावजूद, सोना अभी भी फरवरी के आखिर में ईरान युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर से लगभग 20% नीचे है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

रिपोर्ट-होर्मुज खोलने पर ईरान से समझौता कर सकता है अमेरिका:बदले में ट्रम्प परमाणु समझौते की मांग छोड़ सकते हैं; सीजफायर की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प होर्मुज खोलने के बदलने परमाणु समझौते की मांग छोड़ सकते हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प चाहते हैं ईरान होर्मुज पूरी तरह खोल दें। इससे ईरान के साथ फिर से सीजफायर का रास्ता भी बन सकता है। ट्रम्प समझौते के बिना पीछे हटने को तैयार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रम्प प्रशासन कई हफ्तों से इसके तैयार कर रहा है। उन्होंने वरिष्ठ सहयोगियों से निजी बातचीत में कहा है कि वे ईरान के साथ नया परमाणु समझौता किए बिना भी पीछे हट सकते हैं। ईरान ने भी होर्मुज खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें अरबों डॉलर का भुगतान, अमेरिक नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना और इलाके से अमेरिकी सैनिकों की वापसी शामिल है। ईरान ने प्रतिबंध हटाने और उसकी जब्त संपत्तियां लौटाने की मांग भी की है। अमेरिका के लिए चुनौती क्यों बना हुआ है ईरान? 1. 3,000+ बैलिस्टिक मिसाइलें, भूमिगत ‘मिसाइल सिटी’ अमेरिकी खुफिया एजेंसी ODNI के मुताबिक, युद्ध से पहले ईरान के पास 3,000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, जिनकी मारक क्षमता 2,000 किमी तक है। इन मिसाइलों का बड़ा हिस्सा पहाड़ों के नीचे बने भूमिगत ठिकानों में रखा गया है। यहां मिसाइलें, लॉन्चर और कंट्रोल सेंटर सुरंगों के अंदर होते हैं, इसलिए हवाई हमलों में इन्हें पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं माना जाता। 2. दुनिया के 20% तेल का रास्ता ईरान के पास हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 20% और LNG का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसका उत्तरी तट ईरान के पास है। इसलिए यहां तनाव बढ़ने और हॉर्मुज बंद होने का असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। 3. हजारों ड्रोन का बेड़ा ईरान ने पिछले एक दशक में शाहेद जैसे हजारों ड्रोन विकसित किए हैं। इनका इस्तेमाल लंबी दूरी के हमलों और निगरानी के लिए किया जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध में भी ईरानी ड्रोन के इस्तेमाल ने इसकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर चर्चा में ला दिया। 4. पश्चिम एशिया में सहयोगी सशस्त्र नेटवर्क ईरान के समर्थन वाले समूह हिजबुल्लाह (लेबनान), हूती (यमन) और इराक के कई शिया सशस्त्र गुट पश्चिम एशिया में एक्टिव हैं। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ इन्हें ईरान की फॉरवर्ड डिफेंस स्ट्रटजी का हिस्सा मानते हैं, जिससे वह अपने सीमावर्ती क्षेत्र से बाहर भी दबाव बना सकता है। होर्मुज पर ईरान दावा क्यों करता है? हॉर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इसका उत्तरी किनारा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी किनारा ओमान के पास है। सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 21 नॉटिकल मील (करीब 39 किलोमीटर) है। शुरुआत में दोनों देशों का समुद्री क्षेत्र सिर्फ 3 नॉटिकल मील तक माना जाता था। लेकिन बाद में समुद्री कानूनों में बदलाव के बाद ईरान ने 1959 में और ओमान ने 1972 में अपने-अपने समुद्री क्षेत्र की सीमा बढ़ाकर 12-12 नॉटिकल मील (करीब 22-22 किलोमीटर) कर दी। इस फैसले के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा पूरी तरह ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्रों में आ गया। हालांकि समुद्री आवाजाही जारी रहे इसके 2-2 नॉटिकल मील का चौड़ा ट्रांजिट लेन बनाया गया। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू बोले- जब तक PM हूं फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा:गाजा से सेना हटाने से भी इनकार, ट्रम्प का प्लान खारिज किया इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि जब तक मैं प्रधानमंत्री हूं, फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा। पूरी खबर पढ़ें…

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ट्रेन टिकट बुकिंग में होने वाला है ऐतिहासिक बदलाव! अब चंद सेकंड में यात्रियों को मिलेगा टिकट, रेलवे का नया PRS सिस्टम मचाएगा तहलका

Indian Railways Reservation System: इंडियन रेलवे ट्रेन टिकट बुकिंग को आधुनिक बनाने और यात्रियों के लिए रिजर्वेशन को तेज एवं सुविधाजनक बनाने के लिए एक नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) शुरू करने जा रहा है। सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) द्वारा विकसित PRS लगभग चार दशकों से रेलवे रिजर्वेशन की रीढ़ रहा है। 1986 में शुरू किए गए इस सिस्टम ने पुराने मैनुअल रिजर्वेशन सिस्टम की जगह ली थी।

तब से यह ऑनलाइन और मोबाइल टिकट बुकिंग को सपोर्ट करने के लिए विकसित हुआ है। मई में राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने घोषणा की थी कि 40 साल पुराने PRS (Passenger Reservation System) सिस्टम को अगस्त से शुरू करके चरणों में अपग्रेड किया जाएगा।

यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

नए सिस्टम के लागू होने के बाद टिकट बुकिंग, सीट उपलब्धता, वेटिंग लिस्ट, RAC और यात्रियों की पूछताछ से जुड़ी सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। सबसे खास बात यह है कि नया PRS मौजूदा सिस्टम की तुलना में कई गुना ज्यादा टिकट बुकिंग का दबाव संभाल सकेगा। रेलवे के मुताबिक, नया सिस्टम एक मिनट में 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभालने में सक्षम होगा।

जबकि मौजूदा सिस्टम की क्षमता करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट बताई गई है। इसी सिस्टम के जरिए टिकट बुकिंग, टिकट कैंसिलेशन, सीट अलॉटमेंट, वेटिंग लिस्ट, RAC, रिजर्वेशन चार्ट और यात्रियों की पूछताछ जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाएं संचालित होती हैं। अब रेलवे इस पुराने सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से नई तकनीक वाले PRS से बदलने की तैयारी कर रहा है।

भारी ट्रैफिक को संभालने की क्षमता

तत्काल टिकट के समय IRCTC वेबसाइट पर अचानक बढ़ने वाले भारी ट्रैफिक को संभालने में नया सिस्टम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सक्षम हो सकता है। Indianexpress.com से बात करते हुए रेलवे बोर्ड के पब्लिक रिलेशंस (PR) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि नए सिस्टम में चरणबद्ध तरीके से बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि हाल ही में लॉन्च की गई IRCTC बीटा वेबसाइट इसी बदलाव का हिस्सा है।

अधिकारी ने कहा कि यह बदलाव धीरे-धीरे किया जाएगा। पुराने PRS को पूरी तरह से बदलने से पहले नए सिस्टम का अलग-अलग यूजर लोड स्तरों पर चरणों में टेस्ट किया जाएगा। अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “नए यूजर-फ्रेंडली लुक और फील को चरण-दर-चरण लागू करने में लोड-आधारित टे्ट शामिल होगा, क्योंकि हम पुराने PRS से नए PRS की ओर बढ़ रहे हैं।”

भारतीय रेलवे में अभी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम क्या है?

PRS एक कंप्यूटराइज्ड सिस्टम है जिसका उपयोग भारतीय रेलवे रिजर्व-टिकटों के मैनेज के लिए करता है। यह यात्रियों को टिकट बुक करने, बदलने और रद्द करने की सुविधा देता है। साथ ही सीट आवंटन, वेटलिस्ट, RAC स्टेटस, रिजर्वेशन चार्ट और यात्री पूछताछ को भी संभालता है। यह सिस्टम रेलवे रिजर्वेशन सेंटरों को ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ता है। इससे टिकट रिजर्वेशन की प्रक्रिया आसान और अधिक कुशल हो जाती है।

PRS ने रेलवे टिकट बुकिंग को कैसे बदला?

PRS ने मैनुअल रिजर्वेशन रजिस्टर और काउंटर-आधारित बुकिंग की जगह एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ले लिया। जैसे-जैसे रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ। यह एक राष्ट्रव्यापी रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म बन गया। इससे यात्री कंट्री-वाइड नेटवर्क फॉर कंप्यूटराइज्ड एन्हांस्ड रिजर्वेशन एंड टिकटिंग (CONCERT) के माध्यम से देश भर में अलग-अलग जगहों से ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं।

फिलहाल यात्री रेलवे रिजर्वेशन काउंटर, वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से रिजर्वेशन कर सकते हैं। ऑनलाइन बुकिंग इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के साथ-साथ RailOne ऐप के माध्यम से भी उपलब्ध है। इससे यात्री कहीं से भी टिकट बुक कर सकते हैं।

अगस्त से शुरू हुआ बदलाव, धीरे-धीरे होगा पूरा माइग्रेशन

रेलवे ने मई में घोषणा की थी कि करीब चार दशक पुराने PRS को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड किया जाएगा। इसका काम अगस्त से शुरू किया जाएगा। धर्मेंद्र तिवारी के मुताबिक, नए सिस्टम की ओर माइग्रेशन शुरू हो चुका है। रेलवे इसे एक साथ पूरी तरह बदलने के बजाय धीरे-धीरे और अलग-अलग चरणों में लागू कर रहा है।

पहले नए सिस्टम को अलग-अलग स्तर के यूजर लोड पर टेस्ट किया जाएगा। इसके बाद जैसे-जैसे सिस्टम स्थिर और सक्षम साबित होगा। फिर पुराने PRS से नए PRS की ओर माइग्रेशन बढ़ाया जाएगा। रेलवे के मुताबिक, नए सिस्टम के यूजर इंटरफेस और सुविधाओं को भी धीरे-धीरे बेहतर बनाया जा रहा है।

तत्काल टिकट वालों को मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा

ट्रेन यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता अक्सर तत्काल टिकट बुकिंग को लेकर होती है। टिकट विंडो खुलते ही लाखों लोग एक साथ बुकिंग की कोशिश करते हैं। भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट या ऐप पर दबाव बढ़ जाता है। IRCTC के अनुसार, 15 जुलाई को बीटा वेबसाइट लॉन्च होने के बाद टिकट बुकिंग की स्पीड में सुधार देखने को मिला।

महीने के पहले और दूसरे पखवाड़े की तुलना में पहले तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली तत्काल टिकट बुकिंग में 5 प्रतशित से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पांच मिनट के भीतर पूरी होने वाली बुकिंग में करीब 3 फीसदी और 30 मिनट के भीतर पूरी होने वाली बुकिंग में 2 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।

प्रति मिनट 1.5 लाख की होगी बुकिंग

रेल मंत्रालय के अनुसार, अपग्रेड किया गया PRS प्रति मिनट 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभाल सकेगा। जबकि मौजूदा सिस्टम में यह क्षमता लगभग 32,000 टिकट की है। यह प्रति मिनट 40 लाख से ज्यादा पूछताछ को भी प्रोसेस करेगा। जबकि अभी यह संख्या लगभग 4 लाख है। नए सिस्टम में टिकट बुकिंग और पूछताछ के लिए कई भाषाओं वाला और इस्तेमाल में आसान इंटरफेस होगा। इसे रेलवे रिजर्वेशन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ज्यादा स्केलेबिलिटी, फ्लेक्सिबिलिटी और भरोसेमंदता देने के लिए भी डिज़ाइन किया गया है।

नए सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी क्षमता होगी

रेल मंत्रालय के अनुसार:-

मौजूदा PRS: करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट क्षमता है।

नया PRS: 1.5 लाख से ज्यादा टिकट काटने की प्रति मिनट क्षमता होगी।

मौजूदा पूछताछ क्षमता: करीब 4 लाख प्रति मिनट होगी।

नई पूछताछ क्षमता: 40 लाख से ज्यादा प्रति मिनट होगी।

इसका मतलब है कि नया सिस्टम टिकट बुकिंग के साथ-साथ ट्रेन, सीट और रिजर्वेशन से जुड़ी बड़ी संख्या में यात्रियों की पूछताछ भी एक साथ संभाल सकेगा।

देशभर में ऑनलाइन टिकट बुकिंग का दबाव कितना बढ़ गया है?

रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि जून 2025 से जून 2026 के बीच PRS के जरिए 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए गए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी आरक्षित टिकट ऑनलाइन माध्यम से बुक किए गए। इससे साफ है कि रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था अब तेजी से डिजिटल हो चुकी है। ऐसे में पुराने सिस्टम की क्षमता बढ़ाना रेलवे के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

नई व्यवस्था में मिलेगा ज्यादा आसान और मल्टी-लैंग्वेज इंटरफेस

नए PRS में यात्रियों के लिए ज्यादा यूजर-फ्रेंडली और मल्टीलिंगुअल इंटरफेस देने की तैयारी है। यानी टिकट बुकिंग और पूछताछ को ज्यादा आसान बनाने के साथ-साथ अलग-अलग भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा। नए सिस्टम को ज्यादा स्केलेबल, फ्लेक्सिबल और भरोसेमंद बनाया जा रहा है। ताकि भविष्य में यात्रियों की संख्या और ऑनलाइन ट्रैफिक बढ़ने पर भी सिस्टम पर अचानक अत्यधिक दबाव न पड़े।

सिर्फ PRS ही नहीं, रेलवे का पूरा डिजिटल नेटवर्क हो रहा आधुनिक

CRIS ने यात्रियों की अलग-अलग जरूरतों के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इनमें UTS, NTES, IRCTC Rail Connect, RailOne, RailMadad, CoachMitra, Rail Sugam और Rail Rajbhasha शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्म के जरिए यात्रियों को टिकट बुकिंग, ट्रेन की जानकारी, शिकायत दर्ज कराने और रेलवे से जुड़ी कई अन्य रेलवे से जुड़ी सर्विस मिलती हैं। नए PRS और इन डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर टेक्नोलॉजी के तालमेल से रेलवे की ऑनलाइन सेवाओं को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

40 साल पुराने सिस्टम से Next-Generation PRS तक

भारतीय रेलवे का PRS चार दशक पहले मैनुअल रिजर्वेशन की जगह इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग व्यवस्था लेकर आया था। अब वही सिस्टम एक और बड़े तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ रहा है। अगर चरणबद्ध तरीके से हो रहा यह माइग्रेशन सफल रहता है, तो आने वाले समय में ट्रेन टिकट बुकिंग ज्यादा तेज, ज्यादा स्थिर और ज्यादा डिजिटल हो सकती है। यानी रेलवे के इस बदलाव का असली असर सिर्फ वेबसाइट की स्पीड पर नहीं, बल्कि करोड़ों यात्रियों के रोजमर्रा के टिकट बुकिंग अनुभव पर दिखाई दे सकता है।

रेलवे के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, यात्रियों ने जून 2025 और जून 2026 के बीच PRS के ज़रिए 65.08 करोड़ रिजर्व्ड टिकट बुक किए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट (यानी 89 प्रतिशत) ऑनलाइन बुक किए गए थे। IRCTC ने कहा कि 15 जुलाई को अपनी बीटा वेबसाइट लॉन्च करने के बाद टिकट बुकिंग की स्पीड में सुधार हुआ है।

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महीने के पहले और दूसरे पखवाड़े (15-15 दिन के समय) की तुलना करने पर पहले तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में 5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। पांच मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जबकि 30 मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 2 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई।

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Russia-India Rail Link: रूस अब भारत के साथ तेल कारोबार समेत अन्य व्यापार बढ़ाने के लिए समुद्री रास्तों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बेहद महत्वाकांक्षी विकल्प तलाश रहा है। रूस ने मॉस्को से भारत तक मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के रास्ते एक ओवरलैंड रेलवे कनेक्शन की संभावनाओं पर विचार शुरू करने का संकेत दिया है। अगर यह विचार जमीन पर उतरता है, तो रूस से भारत तक सामान पहुंचाने के लिए एक ऐसा वैकल्पिक रूट तैयार हो सकता है, जो कई महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट्स (संकरे समुद्री रास्तों) को दरकिनार करते हुए सीधे जमीन के रास्ते हिंद महासागर क्षेत्र तक पहुंच बनाएगा।

‘The Chenab Times’ के पास मौजूद जानकारी के अनुसार, रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने कथित तौर पर इस तरह के रेलवे कनेक्शन की संभावना की विस्तृत जांच की वकालत की है। रूसी न्यूज एजेंसी TASS के अनुसार, Marat Khusnullin ने हिंद महासागर तक पहुंच बनाने वाले रेल रूट की संभावनाओं का गंभीरता से अध्ययन करने की बात कही है। इस कदम का मकसद भारत और रूस के बीच व्यापार के रास्तों में विविधता लाना। साथ ही समुद्री चोकपॉइंट्स (संकरे समुद्री रास्तों) से जुड़े जोखिमों को कम करना है।

समुद्री रास्तों के जोखिम से परेशान रूस?

इस प्रस्ताव के पीछे सबसे बड़ा कारण दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री रूट में बढ़ती अस्थिरता और वहां पैदा होने वाले जोखिमों को माना जा रहा है। खुसनुलिन ने कथित तौर पर बोस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे रणनीतिक समुद्री रास्तों से जुड़े जोखिमों का उल्लेख किया। उनका संकेत था कि अगर भारत तक पहुंचने वाला कोई वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध हो सकता है, तो उसकी जांच की जानी चाहिए।

हाल के वर्षों में समुद्री मार्गों में युद्ध, राजनीतिक तनाव और सुरक्षा संकट के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। ऐसे में रूस के लिए जमीन के रास्ते भारत और हिंद महासागर तक पहुंच बनाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।

कहां-कहां से गुजरेगी प्रस्तावित रेल लाइन?

सबसे चौंकाने वाली बात इस संभावित रूट को लेकर है। प्रस्तावित अवधारणा के तहत रेल कॉरिडोर को मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के कई संवेदनशील देशों से होकर भारत तक लाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

संभावित रूट में ये देश शामिल हो सकते हैं:-

रूस-तुर्कमेनिस्तान-ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत…

हालांकि, अभी यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह कोई अंतिम रूप से मंजूर रेलवे प्रोजेक्ट नहीं है। रूस की तरफ से फिलहाल इसकी व्यवहार्यता और संभावित रूट की जांच की बात सामने आई है। अभी तक परियोजना की लागत, फंडिंग मॉडल, सटीक रेल रूट, निर्माण एजेंसियों या पूरा होने की समयसीमा को लेकर कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

भारत के लिए क्यों अहम है ये प्रोजेक्ट?

भारत के लिए इस प्रोजेक्ट का महत्व काफी ज्यादा है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से ऊर्जा, रक्षा और व्यापारिक संबंध हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक परिवहन मार्गों की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है। अगर रूस से भारत तक एक मजबूत ओवरलैंड रेल नेटवर्क तैयार होता है, तो दोनों देशों के बीच माल की आवाजाही के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे रूस से भारत आने वाले ऊर्जा उत्पाद, कच्चा माल, मशीनरी, औद्योगिक सामान और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति के लिए नए विकल्प पैदा हो सकते हैं।

INSTC के साथ जुड़ सकता है यह विचार

रूस लंबे समय से भारत तक पहुंच के लिए वैकल्पिक उत्तर-दक्षिण व्यापार रूट्स को बढ़ावा देने में रुचि रखता है। इसी व्यापक रणनीति में इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) जैसी परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रस्तावित रेल कनेक्शन इस तरह के उत्तर-दक्षिण संपर्क को एक नई दिशा दे सकता है। खासकर अगर मध्य एशिया, ईरान और दक्षिण एशिया के बीच रेल नेटवर्क को आपस में प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सके। इससे रूस को भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के अन्य तेजी से बढ़ते बाजारों तक भी पहुंच मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।

पाकिस्तान बना सबसे बड़ी चुनौती

योजना सुनने में जितनी बड़ी है, इसे जमीन पर उतारना उतना ही मुश्किल हो सकता है। प्रस्तावित रूट्स जिन देशों से होकर गुजरता है, उनमें से प्रत्येक के सामने अलग-अलग राजनीतिक, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां हैं। अफगानिस्तान में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता एक बड़ी चुनौती है। वहीं, पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों को देखते हुए भारत तक रेल लाइन पहुंचाने के लिए जटिल राजनयिक और सुरक्षा समझौतों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा पहाड़ी और कठिन भौगोलिक इलाकों में रेल लाइन का निर्माण अपने आप में बहुत महंगा और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ईरान क्यों बन सकता है सबसे अहम कड़ी?

इस प्रस्ताव में ईरान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। ईरान पहले से ही रूस और भारत के बीच वैकल्पिक व्यापार रूट्स की रणनीति में अहम स्थान रखता है। रूस के लिए ईरान के जरिए हिंद महासागर तक पहुंच बनाना समुद्री चोकपॉइंट्स पर निर्भरता कम करने का रास्ता हो सकता है। यही कारण है कि भारत, रूस और ईरान के बीच परिवहन संपर्क को मजबूत करने वाली परियोजनाओं को आने वाले वर्षों में रणनीतिक महत्व मिल सकता है।

रूस के निर्माण क्षेत्र में भी बड़ी क्षमता

इसी संदर्भ में खुसनुलिन ने रूस के निर्माण क्षेत्र को लेकर भी एक महत्वपूर्ण बात कही। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने संकेत दिया कि अगर कम से कम पांच साल के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो रूस का निर्माण क्षेत्र हर साल अतिरिक्त 1 ट्रिलियन रूबल तक के निवेश को absorb करने में सक्षम है। इससे संकेत मिलता है कि रूस अपने परिवहन और बुनियादी ढांचे के विस्तार को केवल विदेश नीति के नजरिए से नहीं बल्कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के साधन के तौर पर भी देख रहा है।

क्या बदल सकता है पूरा क्षेत्रीय व्यापार समीकरण?

अगर कभी यह रेल कॉरिडोर वास्तविकता बनता है, तो इसका असर सिर्फ रूस और भारत तक सीमित नहीं रहेगा। यह मध्य एशिया को दक्षिण एशिया से जोड़ सकता है, ईरान को एक बड़े ट्रांजिट हब के रूप में मजबूत कर सकता है और भारत को यूरोप तथा रूस से आने वाले माल के लिए एक अतिरिक्त जमीनी संपर्क दे सकता है। साथ ही, रूस के लिए यह अपने व्यापार को ऐसे समुद्री मार्गों से दूर diversify करने का साधन बन सकता है, जहां युद्ध, राजनीतिक तनाव या भू-राजनीतिक संकट के कारण कभी भी व्यवधान पैदा हो सकता है।

अभी सपना, लेकिन रणनीतिक संकेत बेहद बड़ा

फिलहाल, मॉस्को से भारत तक इस प्रस्तावित रेल लाइन को घोषित और मंजूर प्रोजेक्ट नहीं माना जा सकता। क्योंकि इसकी आधिकारिक घोषणा से पहले सुरक्षा, लागत, फंडिंग और संबंधित देशों की राजनीतिक सहमति जैसे कई सवाल अभी बाकी हैं। लेकिन रूस द्वारा इस विकल्प पर सार्वजनिक रूप से विचार किए जाने का संकेत अपने आप में महत्वपूर्ण है।

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मॉस्को साफ तौर पर अपने व्यापारिक रास्तों को ज्यादा सुरक्षित और एशिया केंद्रित बनाने की कोशिश कर रहा है। इस रणनीति में भारत को एक बेहद महत्वपूर्ण बाजार और रणनीतिक साझेदार के तौर पर देखा जा रहा है। अगर रूस-भारत के बीच मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के रास्ते ऐसा ओवरलैंड कॉरिडोर वास्तव में बन पाया, तो यह सिर्फ एक रेलवे लाइन नहीं होगी। बल्कि यूरेशिया के व्यापार समीकरण को बदलने वाला नया संपर्क रूट्स साबित हो सकता है।

पेट्रोल डीजल के दामों में लगी आग तो सड़कों पर उतर गए पाकिस्तानी और IMF को लगे कोसने

पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। ईंधन के महंगे होने, नई पेट्रोलियम लेवी और बढ़ती महंगाई के विरोध में माल ढोने वाले ट्रांसपोर्टरों ने देशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। शनिवार से शुरू हुई इस हड़ताल का असर देश में सामान की आवाजाही पर पड़ सकता है। पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के साथ बातचीत में अपनी मांगें पूरी नहीं होने के बाद ट्रक चालक, ट्रेलर ऑपरेटर और तेल टैंकर कंपनियां भी हड़ताल में शामिल हो गई हैं।

ट्रांसपोर्टरों के इस कदम से बाजारों तक सामान पहुंचाने में परेशानी बढ़ सकती है। इसका असर जरूरी सामान की सप्लाई पर भी पड़ने की आशंका है। यह हड़ताल ऐसे समय में शुरू हुई है, जब जमात-ए-इस्लामी ने पेट्रोलियम लेवी और बढ़ती महंगाई के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद अब ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों और कारोबार पर पड़ने को लेकर पाकिस्तान सरकार पर दबाव और बढ़ गया है।

ट्रांसपोर्टरों ने क्यों शुरू की हड़ताल?

पाकिस्तान के ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि गाड़ियों को चलाने का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में माल ढोने वाली गाड़ियां चलाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। ट्रांसपोर्टर सरकार से डीजल की कीमत कम करने, मोटरवे टोल घटाने और विदहोल्डिंग टैक्स में राहत देने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, ट्रांसपोर्टर चाहते हैं कि पूरे पाकिस्तान में एक्सल-लोड के नियम एक जैसे लागू किए जाएं। उनकी मांग है कि 10 पहियों वाले ट्रकों को 35 टन तक सामान ले जाने की अनुमति दी जाए।

ट्रांसपोर्टरों की दूसरी मांगों में कस्टम के नियमों में बदलाव और हाईवे पर जुर्माना कम करना शामिल है। वे यह भी चाहते हैं कि पंजाब हाईवे पेट्रोल से कमर्शियल गाड़ियों के चालान काटने का अधिकार वापस लिया जाए। इसके अलावा, भारी माल ढोने वाली गाड़ियों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस आसानी से जारी करने की भी मांग की गई है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इन समस्याओं का समाधान नहीं होने तक कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

सरकार और ट्रांसपोर्टरों के बीच बातचीत बेनतीजा

शुक्रवार को ट्रांसपोर्टरों के प्रतिनिधियों और पाकिस्तान के संचार मंत्री अलीम खान के बीच बातचीत हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका। ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑल पाकिस्तान गुड्स ट्रांसपोर्ट इत्तेहाद के प्रवक्ता मोहम्मद ओवैस चौधरी ने कहा कि ट्रांसपोर्टरों ने सरकार के सामने अपनी सभी समस्याएं और मांगें रख दी हैं। सरकार ने बातचीत के लिए सोमवार को एक और बैठक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा। इस हड़ताल से पाकिस्तान में माल की आवाजाही और सामान की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है।

पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें इतनी ज्यादा क्यों हैं?

पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की लागत में बढ़ोतरी बताई जा रही है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव के कारण ईंधन की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। मार्च से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका असर पाकिस्तान में भी पड़ा है और सरकार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बार-बार बदलाव करना पड़ा है। अप्रैल में पेट्रोल की कीमत बढ़कर रिकॉर्ड 459 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। वहीं, डीजल की कीमत 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी।

पाकिस्तान के लिए डीजल बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश में सड़क के जरिए होने वाले माल परिवहन का बड़ा हिस्सा डीजल से चलता है। ऐसे में डीजल की कीमत बढ़ने का सीधा असर ट्रकों और दूसरी कमर्शियल गाड़ियों के संचालन खर्च पर पड़ता है। इससे सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की लागत भी बढ़ जाती है। इसके अलावा, सरकार ने पेट्रोलियम लेवी भी लागू की है। यह लेवी ईंधन की अंतिम कीमत में जुड़ती है और इसका बोझ सीधे ग्राहकों पर पड़ता है। यही वजह है कि पाकिस्तान में बढ़ती ईंधन कीमतों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर सामान की कीमतों और आम लोगों के घरेलू बजट पर भी पड़ रहा है।

पेट्रोलियम लेवी क्या है?

पेट्रोलियम लेवी ईंधन पर सरकार की ओर से लगाया जाने वाला एक शुल्क है। इसे पेट्रोल, डीजल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों पर वसूला जाता है। इससे सरकार को राजस्व मिलता है। पाकिस्तान में यह लेवी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है, क्योंकि इसे पहले से महंगे ईंधन के ऊपर लगाया गया है। जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईम-उर-रहमान ने सरकार से पेट्रोलियम लेवी हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार की आर्थिक और वित्तीय नीतियों का बोझ सीधे आम लोगों पर डाला जा रहा है।

शुक्रवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हाफिज नईम-उर-रहमान ने कहा कि यह लेवी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनकी सरकार से इसे खत्म करने की अपील की। उन्होंने सरकार की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया है कि पेट्रोलियम लेवी कम करने से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ पाकिस्तान की प्रतिबद्धताओं पर असर पड़ सकता है।

सड़कों पर उतरे आम पाकिस्तानी

ट्रांसपोर्टरों की लंबी हड़ताल का सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है। अगर हड़ताल ज्यादा दिनों तक जारी रहती है, तो देशभर में सामान की ढुलाई महंगी हो सकती है। ट्रक और ट्रेलर शहरों के बीच खाने-पीने की चीजें, रोजमर्रा का सामान, कारखानों के लिए कच्चा माल और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाते हैं। वहीं, तेल टैंकर पेट्रोल और डीजल की सप्लाई का काम करते हैं।

अगर ट्रांसपोर्ट का बड़ा हिस्सा लंबे समय तक बंद रहता है, तो कंपनियों को सामान पहुंचाने में देरी हो सकती है। साथ ही, उन्हें ढुलाई और सामान पहुंचाने पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। इसका असर आगे चलकर सामान की कीमतों पर पड़ सकता है और कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाली हड़ताल पाकिस्तान में महंगाई का दबाव और बढ़ा सकती है। यही महंगाई पहले से लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई है और इसी के विरोध में प्रदर्शन भी हो रहे हैं।

तेल टैंकर ऑपरेटरों के हड़ताल में शामिल होने से चिंता और बढ़ गई है। अगर ईंधन की ढुलाई प्रभावित होती है, तो पेट्रोल पंपों और दूसरे ईंधन वितरण केंद्रों तक पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इससे आने वाले दिनों में ईंधन की उपलब्धता को लेकर भी परेशानी खड़ी हो सकती है।

Gold Price Today: सोने में तेजी बरकरार, 24 और 22 कैरेट दोनों का बढ़ा भाव; वैश्विक कीमत में इस हफ्ते 7% से ज्यादा उछाल

देश में सोने की कीमत और बढ़ गई है। 8 अगस्त की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड 150050 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। मुंबई और कोलकाता में भाव 149900 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। कमजोर अमेरिकी डॉलर और विदेशी बाजारों में सोने की कीमत में उछाल के कारण देश के अंदर भी सोने के भाव में तेजी है। जुलाई में U.S. नॉन-फार्म पेरोल में 23000 जॉब्स की गिरावट दर्ज की गई। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से प्रमुख ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना कम हो गई है।

बेंचमार्क ब्याज दरों में बढ़ोतरी सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए एक ​नेगेटिव फैक्टर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,336.02 डॉलर प्रति औंस पर है। सोने की वैश्विक कीमत इस सप्ताह में अब तक 7 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ऐसी उम्मीद है कि ईरान के साथ युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से पूरी तरह खुल जाएगा। इस उम्मीद ने महंगाई की चिंताओं को कम किया है। इससे भी अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से बेंचमार्क ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने को लेकर कम हुई है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 150050 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 137560 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 137410 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 149900 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 149990 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 137510 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 149900 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 137410 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली137560150050
मुंबई137410149900
अहमदाबाद137460149950
चेन्नई137490149990
कोलकाता137410149900
हैदराबाद137410149900
जयपुर137560150050
भोपाल137460149950
लखनऊ137560150050
चंडीगढ़137560150050

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चांदी की कीमत

दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में 8 अगस्त की सुबह देश के अंदर गिरावट है। चांदी अब 239900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 63.29 डॉलर प्रति औंस है।

भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास:रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर कार्रवाई; 86 सांसदों ने पक्ष में वोट किया, 11 विरोध में

अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। यह बिल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से लाया गया। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। 23 जुलाई को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके तहत रूस के अधिकारियों, शैडो टैंकर बेड़े, केंद्रीय बैंक और सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। हालांकि, अभी ये कानून नहीं बना है। अभी इसे अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा। अगर वहां भी बिल पास हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति ट्रम्प के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून बनेगा। ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा अगर यह कानून बन जाता है तो 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिल जाएगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा। व्हाइट हाउस ने पहले भी रूस पर पाबंदियां लगाने की कोशिश की थी। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान जब होर्मुज बंद हुआ, तो तेल का संकट आ गया। इस वजह से अमेरिकी प्रशासन को तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए छूट देनी पड़ी थी। भारत ने जून में आधे से ज्यादा तेल रूस से खरीदा भारत ने जून 2026 में रूस से रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो देश के कुल तेल आयात का 52.4% था। यानी पिछले महीने भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। मई के मुकाबले जून में रूस से तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… UK की व्हिस्की, कारें और ब्यूटी प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे:भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू, जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर आज से सस्ते मिलेंगे। आज से भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हो गया है। यानी अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Gift Nifty Indicator: क्रूड में उछाल और वेस्ट एशिया को लेकर बढ़ा कंफ्यूजन क्या बाजार पर दिखाएगा असर, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत

Gift Nifty Indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स के सुस्त शुरुआत करने की संभावना है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, Wall Street में रात भर हुई गिरावट और US के अहम जॉब्स डेटा से पहले एशियाई बाजारों में सावधानी के माहौल के बीच GIFT Nifty आज सुबह गिरा। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता के कारण जियोपॉलिटिकल जोखिम बने हुए हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी से कुछ सहारा मिल सकता है।

सुबह करीब 8 बजे GIFT Nifty 24,647 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले सेशन की क्लोजिंग से 101 अंक या 0.41 फीसदी नीचे था। हालांकि, यह गुरुवार को Nifty 50 की 24,636 की क्लोजिंग से थोड़ा ऊपर बना रहा, जिससे घरेलू बेंचमार्क के लिए फ्लैट से नेगेटिव शुरुआत का संकेत मिलता है।

गुरुवार को उतार-चढ़ाव भरे सेशन के बाद भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 373.76 अंक या 0.48 फीसदी बढ़कर 78,954.76 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 11.35 अंक या 0.05 फीसदी बढ़कर 24,636 पर बंद हुआ। PSU बैंकों में खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया, जबकि मेटल, मीडिया और रियल्टी शेयरों में कमजोरी ने बढ़त को सीमित कर दिया।

US जॉब्स डेटा से पहले एशियाई बाजार सर्तक

शुक्रवार को एशियाई शेयरों में सावधानी के साथ कारोबार हुआ क्योंकि निवेशक US के रोजगार डेटा का इंतजार कर रहे थे, जो अगले महीने फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के फैसले पर उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स फ्लैट रहा और इसमें साप्ताहिक आधार पर 0.4 फीसदी की गिरावट की ओर बढ़ रहा था। जापान का Nikkei 225 0.9 फीसदी गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का Kospi 0.5 फीसदी नीचे आया। हालांकि, चीन के CSI 300 में 0.2 फीसदी की बढ़त हुई।

US इक्विटी फ्यूचर्स भी सुस्त रहे। Nasdaq फ्यूचर्स फ्लैट रहे और S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 फीसदी नीचे रहे। गुरुवार को US शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए क्योंकि निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली की, साथ ही वे कॉर्पोरेट नतीजों और US-ईरान संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों से जुड़े घटनाक्रमों का आकलन कर रहे थे। डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.85 फीसदी गिरा, S&P 500 में 0.18 फीसदी की गिरावट आई और नैस्डैक कम्पोजिट 0.06 फीसदी नीचे आया।

यह गिरावट हफ्ते की मजबूत शुरुआत के बाद आई है, जिसमें डाऊ और S&P 500 रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। इसकी वजह मजबूत अर्निंग्स सीज़न और मिडिल ईस्ट में चल रहे टकराव के संभावित डिप्लोमैटिक समाधान को लेकर उम्मीद थी।

क्रूड में उछाल

शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हुई क्योंकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से शिपिंग को लेकर अनिश्चितता फिर से सामने आ गई। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.2 प्रतिशत बढ़कर $83.48 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.1 प्रतिशत बढ़कर $78.84 हो गया। यह बढ़ोतरी गुरुवार को $3 प्रति बैरल से ज़्यादा की बढ़त के बाद हुई।

नई चिंताएं तब सामने आईं जब ईरान ने ओमान के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में दुश्मन माने जाने वाले जहाज़ों पर पाबंदियां लगाने और प्रस्तावित नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाज़ों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा।

निफ्टी-बैंक निफ्टी के लिए क्या है अहम लेवल

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि मिडिल ईस्ट में संभावित डिप्लोमैटिक सफलता को लेकर उम्मीदें किसी औपचारिक समझौते के न होने से कमज़ोर पड़ गई हैं, जिससे बाज़ार जियोपॉलिटिकल खबरों के प्रति संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने एशियाई इक्विटी में कमज़ोरी की ओर भी इशारा किया, जिसमें जापान और दक्षिण कोरिया ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी, जो ग्लोबल निवेशकों के बीच लगातार सावधानी का संकेत है।

पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी का व्यापक टेक्निकल स्ट्रक्चर सकारात्मक बना हुआ है। 24,700 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है, और अगर यह स्तर लगातार टूटता है तो 24,800-25,000 की ओर मोमेंटम मज़बूत हो सकता है। नीचे की तरफ, 24,600 तत्काल सपोर्ट है, उसके बाद 24,500 है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

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