गोल्डमैन सैक्स ने इंडिया के ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया, कहा-क्रूड में नरमी से इकोनॉमी पर घटा है दबाव

अमेरिका-ईरान में डील का पॉजिटिव असर इंडियन इकोनॉमी पर पड़ेगा। गोल्डमैन सैक्स ने भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ के अनुमान को बढ़ा दिया है। इनफ्लेशन को लेकर भी उसकी राय बदली है, क्योंकि क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद महंगाई बढ़ने का खतरा कम हुआ है। साथ ही सरकार के इंपोर्ट बिल में कमी आई है।

क्रूड में नरमी से भारत के लिए अच्छी संभावनाएं

गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मध्यपूर्व में तनाव घटने और क्रूड ऑयल में नरमी से भारतीय इकोनॉमी के लिए संभावनाएं बेहतर हुई हैं। उसने कहा है, “इस साल की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ हमारे पहले के अनुमान से ज्यादा रह सकता है। इससे हमें ग्रोथ के अपने अनुमान को बढ़ाना पड़ा है।” अमेरिकी इनवेस्टमेंट बैंक ने इस साल यानी 2026 में भारत के ग्रोथ के अनुमान को 0.3 फीसदी बढ़ाकर 6.8 फीसदी कर दिया है।

सप्लाई बढ़ने से क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट 

अमेरिका-ईरान में डील के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल टैंकर्स और दूसरे जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है। इससे क्रूड ऑयल की सप्लाई बढ़ी है। भारत क्रूड की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है। भारत आने वाला काफी क्रूड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है। हालांकि, इस साल की दूसरी छमाही में गोल्डमैन सैक्स क्रूड की औसत कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान जताया है, जो इसकी मौजूदा कीमत से ज्यादा है।

गोल्डमैन सैक्स ने इनफ्लेशन के अनुमान को घटाया

गोल्डमैन सैक्स ने भारत में इनफ्लेशन के अपने अनुमान को भी घटाया है। उसने इसे 5.1 फीसदी से घटाकर 4.9 फीसदी कर दिया गया है। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ग्लोबल यूरिया प्राइस में बड़ा करेक्शन आया है। इससे फर्टिलाइजर सब्सिडी में कमी आएगी। साथ ही क्रूड सस्ता होने से भी सरकार पर वित्तीय दबाव घटेगा।

मानसून में कम बारिश का अनुमान एक बड़ी चुनौती

गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, पहले के मुकाबले स्थितियां पॉजिटिव होने के बावजूद भारत के लिए कुछ चुनौतियां नजर आ रही हैं। मौसम विभाग ने इस साल मानसून की बारिश कम होने का अनुमान जताया है। इस साल अल नीनो के असर का भी अनुमान जताया गया है। ऐसा होने पर ग्रामीण इलाकों में डिमांड पर असर पड़ सकता है।

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आरबीआई रेपो रेट 0.50 फीसदी बढ़ा सकता है

उसने कहा है कि आरबीआईआ इस साल रेपो रेट में 0.50 फीसदी का इजाफा कर सकता है। हालांकि, पेट्रोकेमिकल्स की कीमतों में लगातार गिरावट से इनफ्लेशन पर दबाव घटेगा, जिससे आरबीआई अपनी पॉलिसी सख्त करने में देर कर सकता है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थी। इससे भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर हुई। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया।

क्रूड की कीमतें 2 फीसदी गिरी, क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाएंगी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां?

क्रूड की कीमतें 26 जून को करीब 2 फीसदी क्रैश कर गईं। यह क्रूड में बड़ी गिरावट वाला हफ्ता है। अमेरिका-ईरान में डील के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल गया है। ऑयल टैंकर की आवाजाही शुरू होने से क्रूड की सप्लाई अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी है। इसका असर कीमतों पर पड़ा है।

ब्रेट क्रूड फ्यूचर्स 1.47 डॉलर यानी 1.47 फीसदी गिरकर 73.79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 1.44 डॉलर यानी 2 फीसदी गिरकर 70.48 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।अमेरिका और ईरान में एग्रीमेंट से ईरान को अपने ऑयल बेचने की इजाजत मिल गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ेगी। ईरान क्रूड का सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाले देशों में शामिल है।

क्रूड की कीमतों में लगातार गिरावट भारत के लिए अच्छी खबर है। इस साल 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान में लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतों में उछाल आया था। 30 अप्रैल को क्रूड का भाव 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि, बाद में कीमतें इस लेवल से नीचे आ गई थी, लेकिन ज्यादातर समय यह 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही। इससे भारत का इंपोर्ट बिल काफी बढ़ गया था।

क्रूड में उछाल के बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने भारत में कई बार पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाई थीं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अचानक क्रूड में नरमी के बावजूद छइन कंपनियों के अपनी कीमतें घटाने की उम्मीद नहीं है। इसका मतलब है कि आगे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का मुनाफा बढ़ सकता है। हालांकि, भारत में दूसरे देशों के मुकाबले पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें कम बढ़ी थीं।

भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी क्रूड इंपोर्ट से पूरा करता है। इस वजह से क्रूड की कीमतों में उछाल आने पर सरकार का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है। डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव बन जाता है। इस महीने डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था। अब रुपये में रिकवरी दिख रही है।

LPG Price Today: कमर्शियल LPG सिलेंडर पर सरकार का बड़ा अपडेट, जानिए अपने शहर के ताजा रेट

LPG Price Today: इंडस्ट्रियल और कमर्शियल LPG का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए खुशखबरी है। दरअसल, केंद्र सरकार ने 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर पिछले दो महीनों से लागू सभी पाबंदियां हटा दी हैं और सिलेंडरों की सप्लाई को फिर से सामान्य स्तर पर बहाल कर दिया गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के इस फैसले के पीछे पश्चिम एशिया में तनाव कम होना, होर्मुज (Strait of Hormuz) के फिर से सामान्य रूप से खुलना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को प्रमुख वजह माना जा रहा है। क्योंकि इन परिस्थितियों के चलते समुद्री मार्ग से LPG का आयात फिर से सामान्य हो गया है।

क्यों लगाई गई थी पाबंदियां?

पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव के चलते सरकार ने अप्रैल में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों पर 15 दिन का लॉक-इन नियम लागू किया था। इसका मकसद सिलेंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाना था। इस नियम के कारण होटल, रेस्तरां, पीजी और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान 15 दिनों के भीतर दूसरा कमर्शियल गैस सिलेंडर बुक नहीं कर सकते थे। अब हालात सामान्य होने के बाद सरकार ने यह प्रतिबंध हटा दिया है, जिससे कारोबारी जरूरत के अनुसार फिर से कमर्शियल सिलेंडर बुक करा सकेंगे।

इस बीच, आज देश भर में LPG की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 942 रुपये और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 3113.5 रुपये है। चलिए जानते हैं आपके शहर में क्या है रेट?

जानिए अपने शहर का रेट 

शहर घरेलू सिलेंडर की कीमतकमर्शियल सिलेंडर की कीमत
दिल्ली 942.0 रुपये3113.5 रुपये
मुंबई941.5 रुपये 3067.5 रुपये
कोलकाता968.0 रुपये3256.0 रुपये
चेन्नई 957.5 रुपये 3283.0 रुपये
बेंगलुरु944.5 रुपये 3198.0 रुपये
पोर्ट ब्लेयर1018.0 रुपये3544.0रुपये
नोएडा939.50 रुपये3113.50 रुपये
गाजियाबाद939.50 रुपये3113.50 रुपये
पटना1031.5 रुपये3400.5 रुपये

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Crude Oil Price: होर्मुज स्ट्रेट से शिपमेंट फिर से शुरू होने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट क्रू़ड $75 के नीचे फिसला

Crude Oil Price: शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और हफ़्ते में भारी गिरावट की ओर बढ़ रही है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से ज़्यादा फंसे हुए तेल टैंकरों के निकलने के बाद सप्लाई की चिंता कम हो गई है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.56% गिरकर $74.84 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.50% गिरकर $71.56 प्रति बैरल पर आ गया।

इस हफ़्ते ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों में लगभग 7% की गिरावट आने वाली है।

पिछले सेशन में, ओमान के पास एक कार्गो जहाज़ के किसी अनजान प्रोजेक्टाइल से टकराने के बाद दोनों बेंचमार्क कॉन्ट्रैक्ट्स में 2% से ज़्यादा की तेज़ी आई थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने कहा कि होर्मुज के तय रास्तों के बाहर से गुज़रने वाले जहाजों की सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

होर्मुज स्ट्रेट से ट्रैफिक बढ़ा

डेटा से पता चला है कि सीजफायर डील के बाद वॉटरवे को फिर से खोलने के बाद, इस हफ़्ते होर्मुज स्ट्रेट से क्रूड शिपमेंट फरवरी में US-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अपने सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गया। हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को लड़ाई शुरू होने से पहले, स्ट्रेट से रोज़ाना औसतन 125 जहाज़ गुज़रते थे, लेकिन कुल ट्रैफिक बहुत कम रहा।

इस बीच, गुरुवार को वेनेजुएला में आए भूकंप से भी सप्लाई की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि देश के बड़े तेल, गैस और रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अब तक कम नुकसान हुआ है।

इस हफ्ते की शुरुआत में, पर्शियन गल्फ का तेल युद्ध शुरू होने के बाद से सबसे तेज रफ़्तार से पानी के रास्ते से बाहर निकल रहा था। गोल्डमैन सैक्स ग्रुप इंक. ने कहा कि उसे लगता है कि गल्फ एक्सपोर्ट अब नॉर्मल लेवल के लगभग दो-तिहाई पर चल रहा है, जबकि ग्लोबल इन्वेंट्री में दिख रही गिरावट की रफ़्तार धीमी हो गई है। फ़ारस की खाड़ी के प्रोड्यूसर तेज़ी से प्रोडक्शन बढ़ा रहे हैं, लेकिन तेल बाहर ले जाने के लिए टैंकर मिलना मुश्किल हो रहा है। कमी की वजह से इराक को अपने एक खास फ़ील्ड में प्रोडक्शन रोकने का ऑर्डर देना पड़ा है। यूनाइटेड अरब अमीरात, कुवैत और क़तर सभी सप्लाई बढ़ा रहे हैं।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

ईरान बोला-NATO देशों ने जंग में अमेरिका का साथ दिया:इन्हें जवाबदेह ठहराया जाए; होर्मुज में जहाज पर हमला, पुल को नुकसान

ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हुए हमले में साथ देने वाले NATO मेंबर देशों को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर कहा कि NATO चीफ मार्क रूट ने खुद माना है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का साथ दिया था। बघेई ने कहा कि इन्हें अपने नागरिकों और पूरी दुनिया को बताना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ इस कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। होर्मुज स्ट्रेट में एक कॉमर्शियल जहाज पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल, यानी हमलावर हथियार से अटैक हुआ। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस, यानी UKMTO ने इसकी जानकारी दी है। जहाज ओमान के तट के पास था, तभी प्रोजेक्टाइल जहाज के दाहिने हिस्से से टकराया। इस हमले में जहाज के ब्रिज, जहां से जहाज को कंट्रोल किया जाता है को नुकसान पहुंचा। जहाज के कप्तान ने बताया कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान ने होर्मुज में नए रूट पर आपत्ति जताई : ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नए समुद्री रास्ते, यानी इवैक्यूएशन लेन बनाने की बात कही गई थी। 2. होर्मुज को लेकर ईरान-अमेरिका आमने-सामने: ईरान ने कहा कि बिना नियम माने गुजरने वाले जहाजों पर कार्रवाई होगी। अमेरिका ने साफ किया कि होर्मुज पर किसी एक देश का नियंत्रण स्वीकार नहीं करेगा। 3. ट्रम्प ने युद्ध खर्च के लिए ₹8.3 लाख करोड़ मांगे: ट्रम्प सरकार ने अमेरिकी संसद से 87.6 अरब डॉलर, यानी करीब ₹8.322 लाख करोड़ की अतिरिक्त फंडिंग मांगी। यह रकम युद्ध खर्च, सेना की तैयारी और हथियारों के भंडार के लिए इस्तेमाल होगी। 4. लेबनान में इजराइली हमले जारी: नाबातियेह के पास कार पर हमले में 3 लोगों की मौत हुई और 1 व्यक्ति घायल हुआ। इजराइली सेना ने हमले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। 5. ईरान ने अमेरिका विरोधी नारों पर रोक की खबर खारिज की: ईरान ने कहा कि ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे या अमेरिकी झंडा जलाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। सरकार ने सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को गलत बताया। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

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ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हुए हमले में साथ देने वाले NATO मेंबर देशों को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर कहा कि NATO चीफ मार्क रूट ने खुद माना है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का साथ दिया था। बघेई ने कहा कि इन्हें अपने नागरिकों और पूरी दुनिया को बताना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ इस कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। होर्मुज स्ट्रेट में एक कॉमर्शियल जहाज पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल, यानी हमलावर हथियार से अटैक हुआ। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस, यानी UKMTO ने इसकी जानकारी दी है। जहाज ओमान के तट के पास था, तभी प्रोजेक्टाइल जहाज के दाहिने हिस्से से टकराया। इस हमले में जहाज के ब्रिज, जहां से जहाज को कंट्रोल किया जाता है को नुकसान पहुंचा। जहाज के कप्तान ने बताया कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान ने होर्मुज में नए रूट पर आपत्ति जताई : ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नए समुद्री रास्ते, यानी इवैक्यूएशन लेन बनाने की बात कही गई थी। 2. होर्मुज को लेकर ईरान-अमेरिका आमने-सामने: ईरान ने कहा कि बिना नियम माने गुजरने वाले जहाजों पर कार्रवाई होगी। अमेरिका ने साफ किया कि होर्मुज पर किसी एक देश का नियंत्रण स्वीकार नहीं करेगा। 3. ट्रम्प ने युद्ध खर्च के लिए ₹8.3 लाख करोड़ मांगे: ट्रम्प सरकार ने अमेरिकी संसद से 87.6 अरब डॉलर, यानी करीब ₹8.322 लाख करोड़ की अतिरिक्त फंडिंग मांगी। यह रकम युद्ध खर्च, सेना की तैयारी और हथियारों के भंडार के लिए इस्तेमाल होगी। 4. लेबनान में इजराइली हमले जारी: नाबातियेह के पास कार पर हमले में 3 लोगों की मौत हुई और 1 व्यक्ति घायल हुआ। इजराइली सेना ने हमले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। 5. ईरान ने अमेरिका विरोधी नारों पर रोक की खबर खारिज की: ईरान ने कहा कि ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे या अमेरिकी झंडा जलाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। सरकार ने सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को गलत बताया। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

LPG Rule Changes: होटल-रेस्तरां और फैक्ट्रियों को बड़ी राहत, कमर्शियल एलपीजी पर लगी सभी पाबंदियां हटीं, जानें- नए नियम

LPG Rule Changes: पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर बनी सहमति के बाद केंद्र सरकार ने कमर्शियल और इंडस्ट्रियल एलपीजी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गैर-घरेलू पैक्ड एलपीजी (Commercial LPG) की आपूर्ति पर लगाई गई सभी क्षेत्रीय पाबंदियां तत्काल प्रभाव से हटा दी हैं। इसके साथ ही कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को संकट से पहले जैसे हालत पर बहाल कर दिया गया है।

सरकार ने बल्क एलपीजी की आपूर्ति भी आंशिक रूप से बहाल कर दी है। अब इंडस्ट्रियल और कमर्शियल उपभोक्ताओं को संकट से पहले खपत के 50 प्रतिशत तक बल्क एलपीजी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे होटल, रेस्तरां और अन्य उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति में सुधार देखा जा रहा है।

ईरान युद्ध समाप्त होने के बाद मिली राहत

अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से सुचारु रूप से खुलने का रास्ता साफ हुआ है। यह समुद्री रूट्स भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के कच्चे तेल और एलपीजी आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है।

सरकार ने बताया कि हाल के दिनों में घरेलू एलपीजी उत्पादन में बढ़ोतरी और आयातित एलपीजी कार्गो की बेहतर उपलब्धता के कारण आपूर्ति की स्थिति मजबूत हुई है। इसी को देखते हुए कमर्शियल एलपीजी पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया गया है।

बल्क एलपीजी की आपूर्ति भी बहाल

सरकार ने बल्क एलपीजी की आपूर्ति भी आंशिक रूप से बहाल कर दी है। पश्चिम एशिया संकट के दौरान बल्क एलपीजी की सप्लाई रोक दी गई थी। लेकिन अब इसे संकट-पूर्व खपत के 50 प्रतिशत तक अनुमति दे दी गई है। इससे होटल, रेस्तरां, कैटरिंग व्यवसाय, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलेगी, जो अपने डेली कामों के लिए एलपीजी पर निर्भर रहते हैं।

सरकार ने बल्क LPG की सप्लाई को संकट के चरम पर रोक दिया था। अब बल्क LPG की सप्लाई संकट से पहले के खपत स्तर के 50 प्रतिशत तक करने की अनुमति होगी। इससे कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलेगी। ईरान युद्ध के दौरान केंद्र ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए निर्देश दिया था कि C3-C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम का इस्तेमाल केवल LPG उत्पादन के लिए किया जाए।

क्यों कड़े किए गए थे नियम?

इस कदम से इन फीडस्टॉक को पेट्रोकेमिकल और अन्य डाउनस्ट्रीम उद्योगों से हटाकर घरेलू LPG की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई थी। सप्लाई की स्थिति में सुधार के साथ, सरकार ने अब LPG पूल के लिए C3-C4 स्ट्रीम के डायवर्जन को कम करने और पेट्रोकेमिकल तथा अन्य महत्वपूर्ण सेक्टर्स के लिए आवंटन बढ़ाने का फैसला किया है।

मंत्रालय के अनुसार, नॉन-LPG इस्तेमाल के लिए C3-C4 स्ट्रीम का बढ़ा हुआ आवंटन घरेलू LPG उपलब्धता को प्रभावित किए बिना लागू किया जाएगा। घरेलू LPG उत्पादन को कम से कम 40 हजार मीट्रिक टन (TMT) प्रति दिन बनाए रखा जाएगा। केंद्र ने सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (CHT) को निर्देश दिया है कि वह बढ़ी हुई C3-C4 स्ट्रीम का संगठन-वार आवंटन जारी करे और मंत्रालय को समय-समय पर रिपोर्ट सौंपे।

युद्ध के कारण लगी थी पाबंदियां

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान सरकार ने विशेष कदम उठाए थे। उस समय सी3-सी4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स का उपयोग केवल एलपीजी उत्पादन के लिए करने का निर्देश दिया गया था। इसके चलते पेट्रोकेमिकल और अन्य डाउनस्ट्रीम उद्योगों को मिलने वाली कच्चे माल की आपूर्ति सीमित कर दी गई थी। ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

अब हालात में सुधार के बाद सरकार ने सी3-सी4 स्ट्रीम्स का बड़ा हिस्सा फिर से पेट्रोकेमिकल और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों को आवंटित करने का फैसला किया है। मंत्रालय का कहना है कि इससे उद्योगों को आवश्यक कच्चा माल मिलेगा और उत्पादन गतिविधियों को गति मिलेगी। जबकि घरेलू एलपीजी आपूर्ति पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि ग्लोबल सप्लाई में रुकावट शुरू होने के बाद से ही घरेलू उपभोक्ताओं को बिना रुकावट LPG सप्लाई सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।

मंत्रालय ने कहा, “इस मकसद को ध्यान में रखते हुए कमर्शियल पैक्ड LPG की सप्लाई पर कुछ समय के लिए पाबंदियां लगाई गई थीं। मुश्किल ग्लोबल सप्लाई चेन के बावजूद, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की समय पर की गई पॉलिसी से जुड़ी कोशिशों और तालमेल से सप्लाई को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली।”

पेट्रोलियम मंत्रालय का फ्यूचर प्लान

पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में स्वदेशी एलपीजी उत्पादन न्यूनतम 40 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन (TMT) के लेवल पर बनाए रखा जाएगा। साथ ही सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (CHT) को विभिन्न संगठनों के लिए सी3-सी4 स्ट्रीम्स का आवंटन तय करने और समय-समय पर मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान भी घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध एलपीजी उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और सरकार के समन्वित प्रयासों के कारण चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद देश में एलपीजी की आपूर्ति स्थिर बनी रही।

सरकार ने थपथपाई पीठ

सरकार का मानना है कि ताजा फैसला ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक जरूरतों और घरेलू उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उद्योगों को राहत मिलेगी। आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और देश में स्वच्छ एवं सुरक्षित ईंधन की उपलब्धता को और मजबूत किया जा सकेगा।

मंत्रालय ने आगे कहा कि यह नया फ़ैसला सरकार के उस संतुलित नज़रिए को दिखाता है, जिसमें देश की एनर्जी सिक्योरिटी की सुरक्षा के साथ-साथ उद्योगों और व्यवसायों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना और पूरे देश में साफ और सुरक्षित ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना शामिल है।

पाबंदियों में ढील से कई तरह के कमर्शियल प्रतिष्ठानों को फीयदा होने की उम्मीद है, जिनमें होटल, रेस्टोरेंट, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और दूसरे ऐसे औद्योगिक उपभोक्ता शामिल हैं जो अपने कामकाज के लिए काफ़ी हद तक LPG पर निर्भर हैं।

स्टोरी की मुख्य बातें (All You Need To Know)

बल्क LPG सप्लाई भी बहाल: संकट के समय सरकार ने बल्क एलपीजी (Bulk LPG) की सप्लाई पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। अब इसे आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है। अब उद्योग अपनी जरूरत का 50% तक बल्क एलपीजी ले सकेंगे।

पेट्रोकेमिकल सेक्टर को फायदा: संकट के दौरान सरकार ने जरूरी वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू करके C3-C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स का पूरा इस्तेमाल सिर्फ घरेलू एलपीजी बनाने में करने का निर्देश दिया था. अब हालात सुधरने पर इस डायवर्जन को कम कर दिया गया है। इससे पेट्रोकेमिकल और अन्य संबंधित उद्योगों को फिर से पर्याप्त कच्चा माल मिल सकेगा।

घरेलू एलपीजी पर आंच नहीं: सरकार ने साफ किया है कि उद्योगों को दी जाने वाली इस ढील से घरेलू रसोई गैस (Domestic LPG) की उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। देश में घरेलू एलपीजी का उत्पादन न्यूनतम 40 हजार मीट्रिक टन (TMT) प्रतिदिन पर बरकरार रखा जाएगा।

किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?

सरकार के इस फैसले से उन सभी कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टरों को सीधा फायदा पहुंचेगा जो एलपीजी पर निर्भर हैं:-

होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री

मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स

छोटे और बड़े औद्योगिक उपभोक्ता

Gold Silver Ratio: सोने के मुकाबले और ज्यादा गिर सकती है चांदी, चार्ट दे रहा बड़े संकेत; जानिए अब क्या करें निवेशक

Gold Silver Ratio: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से चांदी की कीमत में करीब 50% की गिरावट आ चुकी है। सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि सोने के मुकाबले भी चांदी एक-तिहाई से ज्यादा कमजोर हो गई है। अब टेक्निकल चार्ट इशारा कर रहे हैं कि यह गिरावट अभी थमने वाली नहीं है। ऐसे में सोने के मुकाबले चांदी और कमजोर पड़ सकती है।

जनवरी के बाद क्यों बदला माहौल?

रॉयटर्स के मुताबिक, 30 जनवरी के बाद से सोना और चांदी दोनों में दबाव बढ़ने लगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि बाजार को लगने लगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अब ब्याज दरों में कटौती करने के मूड में नहीं है। इसके उलट, अगर महंगाई बढ़ती रही तो ब्याज दरें बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

इस बीच ईरान युद्ध के बाद महंगाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गईं। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर अपने अनुमान बदलने शुरू कर दिए और कीमती धातुओं में बिकवाली तेज हो गई।

चांदी पर ज्यादा दबाव क्यों आया?

सोने की तुलना में चांदी पर असर ज्यादा पड़ा। इसकी वजह सिर्फ निवेशकों की बिकवाली नहीं है। दरअसल, चांदी केवल एक कीमती धातु नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और कई उद्योगों में होता है।

इसलिए जब अर्थव्यवस्था या निवेशकों के जोखिम लेने के रुख को लेकर चिंता बढ़ती है तो चांदी पर दबाव भी ज्यादा आता है। एक वजह यह भी रही कि इससे पहले चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी आई थी। ऐसे में मुनाफावसूली शुरू होने पर इसमें गिरावट भी ज्यादा देखने को मिली।

टेक्निकल चार्ट क्या कह रहा है?

एनालिस्टों के मुताबिक, गोल्ड टु सिल्वर रेशियो यानी सोने और चांदी के भाव का अनुपात लगातार ऊपर जा रहा है। हाल ही में यह 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के ऊपर निकल गया है।

टेक्निकल एनालिसिस में 200-डे मूविंग एवरेज को लंबे समय के ट्रेंड का अहम पैमाना माना जाता है। किसी भी एसेट का इसके ऊपर या नीचे जाना अक्सर बाजार की दिशा का बड़ा संकेत देता है।

अब 70 के स्तर पर रहेगी नजर

अब इस अनुपात का अगला बड़ा लक्ष्य 70 माना जा रहा है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बाजार के लिए महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर भी है। ट्रेडर्स अक्सर ऐसे गोल आंकड़ों पर खास नजर रखते हैं।

अगर गोल्ड टु सिल्वर रेशियो मजबूती से 70 के ऊपर निकल जाता है, तो इसके बाद 6 फरवरी के 72.74 के स्तर तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके बाद अगला लक्ष्य 75.25 हो सकता है। यह अप्रैल 2025 के बाद सोने के मुकाबले चांदी की गिरावट के दायरे का लगभग आधा स्तर है।

अगर चांदी वापसी करती है तो क्या होगा?

हालांकि, चांदी के लिए उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अगर चांदी में फिर से खरीदारी लौटती है, तो सबसे पहले गोल्ड टु सिल्वर रेशियो को 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के नीचे आना होगा। इसके बाद यह 22 जून के 62.68 के स्तर तक फिसल सकता है।

अगर यह अनुपात 60.56 से भी नीचे चला जाता है, तो इसे चांदी के पक्ष में मजबूत संकेत माना जाएगा। ऐसे में बाजार में चांदी की तेजी को नई ताकत मिल सकती है।

निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब

अभी के संकेत बताते हैं कि निवेशकों का झुकाव चांदी की बजाय सोने की ओर ज्यादा है। जब तक गोल्ड टु सिल्वर रेशियो ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तब तक माना जाएगा कि सोना, चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

लेकिन अगर यह अनुपात नीचे आने लगता है, तो इसका मतलब होगा कि चांदी फिर से मजबूत होने लगी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उस वक्त चांदी में दोबारा खरीदारी दिख सकती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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Gold Silver rates Today: गोल्ड में गिरावट जारी, चांदी एक दिन में 5000 रुपये लुढ़की

सोने और चांदी में गिरावट का सिलसिला 25 जून को जारी रहा। दिल्ली सर्राफा बाजार में दोनों कीमती मेटल्स की कीमतों पर दबाव दिखा। सोना 2,800 रुपये गिरकर 1.45 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी में 5000 रुपये की गिरावट आई।

चांदी एक दिन में 5000 रुपये फिसली

चांदी में 24 जून को भी बड़ी गिरावट आई थी। आज यह 5000 रुपये गिराकर 2,26,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। विदेशी बाजारों में भी गोल्ड पर दबाव दिखा। लगातार तीसरे दिन गिरावट से सोना की कीमतें सात महीनों के निचले स्तर पर आ गई है।

विदेश में सोना 4000 डॉलर से नीचे आया

स्पॉट गोल्ड 0.5 फीसदी गिरकर 4000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दिखी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद और डॉलर में मजबूती की वजह से सोने में गिरावट आ रही है। अमेरिकी डॉलर 25 जून को 13 महीनों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया।

इन दो वजहों से दबाव में आया 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी और डॉलर में मजबूती दोनों ही सोने के लिए खराब खबर हैं। डॉलर में मजबूती से दुनिया की दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। उधर, इंटरेस्ट रेट घटने के माहौल में सोने की चमक बढ़ती है। इसके उलट इंटरेस्ट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक फीकी पड़ जाती है।

फेडरल की पॉलिसी के बाद बुलियन 6 फीसदी गिरे

पिछले हफ्ते अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की पॉलिसी आने के बाद से सोने और चांदी में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। सोना नवंबर 2025 के बाद पहली बार 4000 डॉलर प्रति औंस के नीचे गया है। अगर इस साल की रिकॉर्ड ऊंचाई की बात की जाए तो सोना वहां से 28 फीसदी गिर चुका है। इस साल 29 जनवरी को सोना 5,594.82 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था, जो इसका सबसे हाई प्राइस है।

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इस साल जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई से लगातर गिरा है सोना

इस साल ऊंचाई पर पहुंचने के बाद से सोने पर दबाव देखने को मिला है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी में गिरावट देखने को मिली। उम्मीद थी कि दोनों देशों में डील होने के बाद बुलियन की चमक लौटेगी। लेकिन, अभी दोनों कीमती मेटल्स पर दबाव बना हुआ है।

Share Markets Closing: आखिर ऐसा क्या हुआ कि अंतिम 75 मिनट में सेंसेक्स 500 अंक गिर गया?

इस हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बाजार में जबर्दस्त उतार-चढ़ाव रहा। ज्यादातर समय बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स में शानदार तेजी दिखी। लेकिन, कारोबार के करीब एक-सवा घंटे में सूचकांकों ने अपनी काफी बढ़त गंवा दी। अंतिम कुछ मिनटों में प्रॉफिट बुकिंग ने बाजार पर दबाव बना दिया।

75 मिनट में सेंसेक्स ने गंवाएं 500 अंक

दो दिनों के कारोबार में 1700 अंक चढ़ने वाले सेंसेक्स ने अंतिम कुछ मिनटों में घुटने टेक दिए। 1:50 बजे सेंसेक्स 77,594 अंक पर था। 3:05 में यह गिरकर 77,095 अंक पर आ गया। यह सिर्फ 75 मिनट में 500 अंक की गिरावट है। इस गिरावट ने इनवेस्टर्स को चौंकाया। खासकर लॉन्ग पोजीशन वाले इनवेस्टर्स ज्यादा परेशान दिखे।

26 जून को बीएसई-एनएसई में छुट्टी

इक्विरियस वेल्थ के एमडी और डायरेक्टर अंकुर पुंज ने रायटर्स को बताया, “चूंकि शेयर बाजार 26 जून को बंद रहेंगे, इसलिए इनवेस्टर्स ने कारोबार के अंतिम पलों में अपने पोजीशन काटे।” 26 जून को शेयर बाजारों में मुहर्रम की छुट्टी है। इसलिए बीएसई और एनएसई बंद रहेंगे। 29 जून यानी सोमवार को बीएसई और एनएसई खुलेंगे।

मानसून में कम बारिश बाजार के लिए रिस्क

बजाज फिनसर्व एएमसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “मानसून में सामान्य से कम बारिश शेयर बाजार के लिए शॉर्ट टर्म रिस्क है। लेकिन, केंद्रीय बैंक ने फॉरेन करेंसी डिपॉजिट बढ़ाने के उपाय किए हैं। सरकार ने फॉरेन इनवेस्टर्स को बॉन्ड्स में निवेश पर टैक्स में छूट दी है। इससे मार्केट में इनफ्लो बढ़ना चाहिए।”

एविएशन कंपनियों के शेयरों में तेजी

इंटरग्लोब एविएशन का शेयर अंत तक तेजी बनाए रखने में सफल रहा। यह 4.7 फीसदी चढ़कर बंद हुआ। क्रूड में नरमी का असर एविएशन कंपनियों के शेयरों पर दिखा। स्पाइसजेट के शेयरों में भी मजबूती दिखी। ऑटो और इससे संबंधित सेक्टर की कंपनियों में भी मजबूत दिखी।

ऑटो शेयरों ने भी दिखाई रफ्तार

Bajaj Auto, Maruti Suzuki, Tata Motors PV और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर 1-4 फीसदी चढ़कर बंद हुए। TVS Motor, Ashok Leyland और टाटा मोटर्स सीवी के शेयर तो 4-5 फीसदी तक उछल गए। Motherson Sumi Wiring का शेयर तो 9 फीसदी चढ़कर बंद हुआ।

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भारतीय बाजार का बुरा दौर हो रहा खत्म

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने कहा है कि भारतीय बाजार के लिए स्थितियां अनुकूल हो रही हैं। क्रूड में नरमी है। घरेलू डिमांड स्ट्रॉन्ग बनी हुई है। इससे आगे कॉर्पोरेट अर्निंग्स बढ़ने की उम्मीद है। अमेरिका-ईरान में लड़ाई खत्म होने से महंगाई बढ़ने का खतरा कम हुआ है। एआई कंपनियों में निवेश को लेकर उत्साह ठंडा पड़ रहा है। इससे बाजार का सेंटीमेंट पॉजिटिव बना रह सकता है।