Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : GIFT Nifty में बढ़त को देखते हुए,भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स 25 जून को बढ़त के साथ शुरुआत करने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं। शुरुआती कारोबार में GIFT Nifty 24,081.50 के आसपास ट्रेड कर रहा था। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

24 जून को भारतीय इक्विटी इंडेक्स में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। IT,रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी के दम पर निफ्टी ने 24,000 का स्तर फिर से हासिल कर लिया। मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के संकेतों के बाद तेल सप्लाई में रुकावट की चिंताएं कम हुईं,जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 790.54 अंक या 1.04 प्रतिशत बढ़कर 76,991.22 पर और निफ्टी 197.55 अंक या 0.83 प्रतिशत बढ़कर 24,021.65 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07.40 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 87 अंक यानी 0.36 फीसदी की बढ़त के साथ 24,108.50 के आसपास कारोबार कर रहा था।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 3.55 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। वहीं,स्ट्रेट टाइम्स 0.15 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंगसेंग 1.43 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। ताइवान के बाजार में 1.13 फीसदी की बढ़त है। कोस्पी 4.62 फीसदी ऊपर दिख रहा है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.14 फीसदी की गिरावट नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

बुधवार को नैस्डैक और S&P 500 गिरावट के साथ बंद हुए। इसकी वजह टेक शेयरों में आई गिरावट थी। हालांकि,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एयरलाइंस और ट्रैवल से जुड़े शेयरों को फायदा हुआ और डाओ जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 182.06 अंक या 0.35% बढ़कर 51,848.90 पर पहुंच गया,जबकि S&P 500 में 7.24 अंक या 0.10% की गिरावट आई और यह 7,358.22 पर बंद हुआ। वहीं,नैस्डैक कम्पोजिट 110.40 अंक या 0.43% गिरकर 25,476.64 पर बंद हुआ।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, बढ़त पर खुल सकते है भारतीय बाजार

डॉलर इंडेक्स

गुरुवार को डॉलर तेजी से ऊपर चढ़ते हुए चार्ट रेजिस्टेंस के स्तर को पार कर गया। यह लगभग एक साल की अपनी सबसे बड़ी मासिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। ट्रेडर्स को उम्मीद है कि मज़बूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों को सहारा देगी,साथ ही वे महंगाई के अहम आंकड़ों का भी इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 101.58 के स्तर पर नजर आ रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड एक बेसिस पॉइंट बढ़कर 4.40% हो गई है। जबकि 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड मामूली रूप से बढ़कर 4.14% हो गई है।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसीज में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। इंडोनेशियाई रुपया सबसे ज्यादा कमजोर दिख रहा है। इसमें 0.52 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके बाद दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। चीनी रेनमिनबी पर भी दबाव बना हुआ है और इसमें 0.27 प्रतिशत की गिरावट आई है। जबकि ताइवान डॉलर 0.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है।

उधर मलेशियाई रिंगित 0.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे कारोबार कर रहा है। इसके बाद फिलीपीन पेसो का नंबर है, जिसमें 0.12 प्रतिशत की मजबूती आई है। थाई बाहत में 0.07 प्रतिशत की बढ़त हुई है। जबकि, जापानी येन और सिंगापुर डॉलर में 0.03 प्रतिशत और 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त है।

कच्चे तेल में नरमी

गुरुवार को तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है और यह युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुच गया है। ईरान के साथ US इज़राइल युद्ध को खत्म करने के शुरुआती समझौते के बाद,फंसे हुए टैंकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बाहर निकल गए हैं,जिससे तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंताएं कम हुईं है,इसका असर तेल कीमतों पर देखने को मिल रहा है। WTI क्रूड में 0.91 फीसदी की और ब्रेंट क्रूड में 1.03 फीसदी की गिरावट आई है।

गोल्ड

गुरुवार को सोने की कीमतों में और गिरावट आई है और ये सात महीने से ज्यादा के निचले स्तर के आस-पास ही बना हुआ है। कोमेक्स पर गोल्ड में 0.38 फीसदी की गिरावट दिख रही है। वहीं,चांदी 0.39 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है।

विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर एक नजर

24 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1,843 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बने रहे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और ₹3,637 करोड़ के शेयर खरीदे,जिससे घरेलू बाजार को सहारा मिला।

Crude Oil Price:वेस्ट एशिया युद्ध से पहले के लेवल के करीब आया कच्चे तेल का भाव, $73 के नीचे फिसला

Crude Oil Price: क्रूड की कीमतों ने वेस्ट एशिया युद्ध के दौरान हुई सारी बढ़त खत्म कर दी। ब्रेंट क्रूड अब उसी लेवल पर वापस आ गया है, जिस पर यह 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध से पहले था।

ब्रेंट क्रूड 27 फरवरी, 2026 के बाद पहली बार $73 प्रति बैरल से नीचे फिसला है। यह 30 अप्रैल को $126 प्रति बैरल के हाई लेवल पर पहुंचा था और उस लेवल से 42% नीचे है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 1.1% से ज़्यादा गिरकर लगभग $72.8 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 1.2% गिरकर लगभग $69.4 प्रति बैरल पर आ गया। ।

बढ़ती सप्लाई और ईरान शांति समझौते में प्रगति के संकेतों से तेल की कीमतों में गिरावट जारी है। मार्केट के खास हिस्सों में अचानक सप्लाई भर गई है, और खरीदार वेस्ट एशिया और अफ्रीका जैसे इलाकों से आए ऑफर्स से भर गए हैं।

युद्ध खत्म करने के लिए शुरुआती बातचीत के बाद US और ईरान दोनों ने प्रगति का संकेत दिया है, हालांकि दोनों पक्षों के दावे कई बार अलग-अलग रहे हैं और न्यूक्लियर मुद्दों और लेबनान में सीजफायर जैसे टॉपिक पर आगे की बातचीत में रुकावटें आ रही हैं। एक पक्के समझौते को लेकर शुरुआती उम्मीद के कारण टैंकरों में सैटेलाइट सिग्नल चालू करके होर्मुज स्ट्रेट को खुलेआम पार करने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

तेल की बढ़ती उपलब्धता ने अंगोला से लेकर संयुक्त अरब अमीरात तक फिजिकल बैरल की कीमत कम कर दी है। ब्रेंट का प्रॉम्प्ट स्प्रेड – मार्केट का एक बहुत ज़्यादा देखा जाने वाला मेट्रिक – युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार बुधवार को एक बेयरिश कॉन्टैंगो स्ट्रक्चर में बदल गया।

US से ईरान से पहले से लोड किए गए तेल की खरीद की इजाज़त देने के लिए एक टेम्पररी छूट से भी सप्लाई और बढ़ने वाली है। फिर भी, फाइनेंसिंग और इंश्योरेंस से जुड़ी मुश्किलें बनी हुई हैं, जिनसे बिक्री कम होने की संभावना है।

युद्ध शुरू होने के बाद तेल सप्लाई की समस्या को हल करने में मिली ज़्यादातर सफलता उन इन्वेंट्री की कीमत पर मिली है जिन्हें US सहित फिर से भरना होगा। पिछले हफ़्ते कुशिंग, ओक्लाहोमा में स्टॉकपाइल लगभग 19 मिलियन बैरल तक गिर गया, जो उस लेवल से नीचे है जिसे ऑपरेशनल ज़रूरत माना जाता है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

दावा-स्विट्जरलैंड में पाकिस्तानी आर्मी चीफ को मारने का प्लान था:पीस डील में शामिल होने गए थे, PAK की धमकी के बाद फैसला बदलना पड़ा

इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड में ईरान शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और उनके डेलिगेशन की हत्या की साजिश रची थी। यह दावा ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने एक पॉडकास्ट में किया है। पत्रकार के दावे के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने धमकी दी जिसके बाद इजराइल को अपना प्लान बदलना पड़ा। यह दावा उस समय से जुड़ा है जब पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में मौजूद थे। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ था। दावा- पाकिस्तान ने इजराइल को धमकी भरा मैसेज भेजा पॉडकास्ट के दौरान पॉलिटिकल कमेंटेटर मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में एस्कोबार ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को बेहद विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर मोसाद हमला करने की तैयारी कर रहा है। एस्कोबार ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में इजराइल को जगह नहीं मिली, इसलिए वह इस प्रक्रिया से खुश नहीं था। उनका यह भी कहना है कि लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान ने शांति समझौते की राह और मुश्किल बना दी। एस्कोबार ने आगे कहा इस साजिश की जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को चेतावनी भी भेजी थी। उनके मुताबिक यह मैसेज शायद ओमान के जरिए पहुंचाया गया था। इसमें पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि अगर पाकिस्तानी डेलिगेशन को कुछ हुआ तो इजराइल को नक्शे से मिटा दिया जाएगा। हालांकि यह दावा सामने आते ही पाकिस्तान की ओर से इसे खारिज कर दिया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने साजिश से इनकार किया एआरवाई न्यूज के चेयरमैन कमरान खान ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह आरोप पूरी तरह बकवास और निरर्थक है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असिम मुनीर का पूरा स्विट्जरलैंड दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार और बिना किसी परेशानी के पूरा हुआ। अधिकारी के मुताबिक दौरे के दौरान किसी भी समय कोई सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। न स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों ने और न ही अमेरिकी सुरक्षा टीमों ने किसी संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि लूसर्न में प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की सुरक्षा व्यवस्था पूरे समय सामान्य और पूरी तरह सक्रिय रही। किसी तरह की हत्या की साजिश या सुरक्षा खतरे की कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने इसे काल्पनिक कहानी बताया। पाकिस्तान आज भी इजराइल को देश नहीं मानता इजराइल और पाकिस्तान लंबे समय से एक-दूसरे को विरोधी मानते रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोई रणनीतिक साझेदारी नहीं है। पाकिस्तान आज भी इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्षेत्रीय युद्धविराम प्रयासों पर चर्चा के दौरान इजराइल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इजराइल को बुराई और मानवता के लिए अभिशाप बताया था। साथ ही उस पर लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया था। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न इस्लामी देश है। वहीं, इजराइल को भी परमाणु शक्ति माना जाता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इन बयानों पर इजराइली अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए सवाल उठाया था कि जब पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं, तो क्या इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म डी करंट के अनुसार, कई पत्रकारों ने इस कहानी को निराधार और तथ्यों से रहित बताया।

दावा-स्विट्जरलैंड में पाकिस्तानी आर्मी चीफ को मारने का प्लान था:पीस डील में शामिल होने गए थे, PAK की धमकी के बाद फैसला बदलना पड़ा

इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड में ईरान शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और उनके डेलिगेशन की हत्या की साजिश रची थी। यह दावा ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने एक पॉडकास्ट में किया है। पत्रकार के दावे के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने धमकी दी जिसके बाद इजराइल को अपना प्लान बदलना पड़ा। यह दावा उस समय से जुड़ा है जब पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में मौजूद थे। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ था। दावा- पाकिस्तान ने इजराइल को धमकी भरा मैसेज भेजा पॉडकास्ट के दौरान पॉलिटिकल कमेंटेटर मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में एस्कोबार ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को बेहद विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर मोसाद हमला करने की तैयारी कर रहा है। एस्कोबार ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में इजराइल को जगह नहीं मिली, इसलिए वह इस प्रक्रिया से खुश नहीं था। उनका यह भी कहना है कि लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान ने शांति समझौते की राह और मुश्किल बना दी। एस्कोबार ने आगे कहा इस साजिश की जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को चेतावनी भी भेजी थी। उनके मुताबिक यह मैसेज शायद ओमान के जरिए पहुंचाया गया था। इसमें पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि अगर पाकिस्तानी डेलिगेशन को कुछ हुआ तो इजराइल को नक्शे से मिटा दिया जाएगा। हालांकि यह दावा सामने आते ही पाकिस्तान की ओर से इसे खारिज कर दिया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने साजिश से इनकार किया एआरवाई न्यूज के चेयरमैन कमरान खान ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह आरोप पूरी तरह बकवास और निरर्थक है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असिम मुनीर का पूरा स्विट्जरलैंड दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार और बिना किसी परेशानी के पूरा हुआ। अधिकारी के मुताबिक दौरे के दौरान किसी भी समय कोई सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। न स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों ने और न ही अमेरिकी सुरक्षा टीमों ने किसी संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि लूसर्न में प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की सुरक्षा व्यवस्था पूरे समय सामान्य और पूरी तरह सक्रिय रही। किसी तरह की हत्या की साजिश या सुरक्षा खतरे की कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने इसे काल्पनिक कहानी बताया। पाकिस्तान आज भी इजराइल को देश नहीं मानता इजराइल और पाकिस्तान लंबे समय से एक-दूसरे को विरोधी मानते रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोई रणनीतिक साझेदारी नहीं है। पाकिस्तान आज भी इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्षेत्रीय युद्धविराम प्रयासों पर चर्चा के दौरान इजराइल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इजराइल को बुराई और मानवता के लिए अभिशाप बताया था। साथ ही उस पर लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया था। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न इस्लामी देश है। वहीं, इजराइल को भी परमाणु शक्ति माना जाता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इन बयानों पर इजराइली अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए सवाल उठाया था कि जब पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं, तो क्या इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म डी करंट के अनुसार, कई पत्रकारों ने इस कहानी को निराधार और तथ्यों से रहित बताया।

‘ISIS को उखाड़ फेकेंगे’, ईरान डील के बीच अमेरिका ने सीरिया को दहलाया, आसमान से बरसाए बम; मारा गया सरगना अली हुसैन अल-उलैवी

US सेंट्रल कमांड सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में जानकारी दी है कि US सेना ने पिछले हफ्ते उत्तर-पश्चिमी सीरिया में एक हवाई हमला किया, जिसमें इस्लामिक स्टेट का एक सीनियर लीडर मारा गया।X पर जारी एक बयान में कहा गया है कि शुक्रवार को किया गया यह हमला “विदेशों में या US की जमीन पर अमेरिकि

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‘ISIS को उखाड़ फेकेंगे’, ईरान डील के बीच अमेरिका ने सीरिया को दहलाया, आसमान से बरसाए बम; मारा गया सरगना अली हुसैन अल-उलैवी

US सेंट्रल कमांड सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में जानकारी दी है कि US सेना ने पिछले हफ्ते उत्तर-पश्चिमी सीरिया में एक हवाई हमला किया, जिसमें इस्लामिक स्टेट का एक सीनियर लीडर मारा गया।X पर जारी एक बयान में कहा गया है कि शुक्रवार को किया गया यह हमला “विदेशों में या US की जमीन पर अमेरिकि

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Gold Silver Rates Today: सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी भी 4000 रुपये लुढ़की

दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने और चांदी में 24 जून को गिरावट आई। सोना 1,200 रुपये गिरकर 1.48 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी 4000 रुपये फिसली। सोने में गिरावट की वजह डॉलर में मजबूती और शेयर बाजारों में बेहतर हो रहा सेंटिमेंट है। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सिल्वर में लगातार दूसरे दिन कमजोरी दिखी। यह 4000 रुपये गिरकर 2,31,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।

चांदी का भाव अप्रैल के शुरुआती लेवल पर पहुंचा

एनालिस्ट्स का कहना है कि इस गिरावट से चांदी की कीमतें अप्रैल की शुरुआत के अपने लेवल के करीब पहुंच गई हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि सोने में कमजोरी बुधवार को भी जारी रही। इसकी वजह अमेरिकी डॉलर में मजबूती है। अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी सख्त होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में बड़ी गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में नरमी देखने को मिली। यह 1.3 फीसदी यानी 52 डॉलर गिरकर 4,050 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अमेरिका में डॉलर इंडेक्स 101 लेवल के पार पहुंच गया है। डॉलर में मजबूती आने पर सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। इसकी वजह यह है कि डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। डॉलर इंडेक्स मई 2025 के बाद अपने सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया है।

सोने पर शॉर्ट टर्म में दबाव जारी रह सकता है

कमोडिटी के जानकारों का मानना है कि सोने पर अभी दबाव दिख सकता है। अगर बीच में कीमतों में तेजी आती है तो मुनाफावसूली की वजह से वह जारी नहीं रह पाएगी। हालांकि, अमेरिका-ईरान में डील की खबर से बुलियन में रिकवरी दिख सकती है। फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला था।

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फाइनेंशियल मार्केट्स में दिख रहा एडजस्टमेंट

एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा कि जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने से फाइनेंशियल मार्केट्स में लिक्विडिटी आधारित एडजस्टमेंट दिख रहा है। ग्लोबल एआई और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में मुनाफावसूली देखने को मिली है। उधर, फेडरल रिजर्व का रुख भी बदला दिख रहा है।

खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए PM मोदी को न्योता:4 जुलाई से शुरू होंगे समारोह; 2 करोड़ लोग जनाजे में शामिल हो सकते हैं

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का न्योता भेजा है। अयातुल्ला खामेनेई की 28 फरवरी को इजराइल-अमेरिका के हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद 4 मार्च को उनका अंतिम संस्कार होना था लेकिन जंग की वजह से इसे टाल दिया गया था। अब इसकी शुरुआत 4 जुलाई से होगी। उनके शव को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद 9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में दफन किया जाएगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि तेहरान, कुम और मशहद में होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। मोदी का ईरान जाने पर सस्पेंस ईरान ने अंतिम संस्कार समारोह के लिए दुनिया के कई देशों को निमंत्रण भेजा है। खास तौर पर पड़ोसी और मित्र देशों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे या नहीं। भारत सरकार ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में भारत की ओर से कौन इस समारोह में शामिल होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की मई 2024 में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद भी भारत ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा था। उस समय भारत सरकार ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया था। तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए तेहरान पहुंचे थे और अंतिम संस्कार समारोह में शामिल हुए थे। खामेनेई मशहद में क्यों दफनाए जाएंगे खामेनेई का मुख्य अंतिम संस्कार समारोह तेहरान में होगा, जो कम से कम 24 घंटे तक चलने की उम्मीद है। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक शहर कुम ले जाया जाएगा और फिर मशहद पहुंचाया जाएगा, जहां इमाम रजा के दरगाह परिसर में दफनाया जाएगा। मशहद ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यह देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है और शिया मुसलमानों का सबसे प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है। शहर की सबसे बड़ी पहचान इमाम रजा की दरगाह है। इमाम रजा शिया मुस्लिम परंपरा के आठवें इमाम थे। उनका दरगाह दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। खामेनेई को मशहद में दफनाने से उनका नाम शिया इस्लाम के सबसे सम्मानित धार्मिक नेताओं की श्रेणी में और मजबूती से जुड़ जाएगा। IRGC के पास खामेनेई के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम संस्कार में हुई देरी इस्लामी परंपरा के लिहाज से असामान्य मानी जा रही है। आमतौर पर इस्लाम में किसी व्यक्ति को मौत के एक-दो दिन के भीतर दफना दिया जाता है। हालांकि ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, भारी भीड़ की उम्मीद और युद्ध के हालात के कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई। तेहरान नगर निगम में सामाजिक और सांस्कृतिक मामलों के उपप्रमुख मोहम्मद अली तवक्कोलीजादेह ने अंतिम संस्कार की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने सरकारी टेलीविजन से कहा कि खामेनेई के लिए तीन दिन का सार्वजनिक जनाजा आयोजित किया जाएगा। अधिकारी ने यह नहीं बताया कि जनाजा कब होगा, लेकिन कहा कि यह इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की शुरुआत में हो सकता है, जो 21 जून के आसपास में पड़ता है। पूरे कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी IRGC के पास है। खोमैनी के जनाजे में 1 करोड़ लोग जुटे थे ईरान में इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के 1989 के जनाजे में करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे। यह उस समय ईरान की कुल आबादी का लगभग छठा हिस्सा था। इस कार्यक्रम को आज भी दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में गिना जाता है। इतनी भारी भीड़ उमड़ी थी कि भगदड़ मच गई थी। इसमें कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग घायल हुए थे। इस बार अधिकारी इससे भी बड़ी भीड़ को संभालने और किसी हादसे से बचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन युद्ध के प्रभाव से उबर रहे देश में इतना बड़ा आयोजन कराना बड़ी चुनौती माना जा रहा है। अमेरिका-इजराइल हमलों में खामेनेई की मौत हुई थी अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू किया था। इस दौरान तेहरान समेत कई रणनीतिक ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की गईं। हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के घर और उनके कार्यालय को भी निशाना बनाया गया था। खामेनेई बंकर में मौजूद थे, लेकिन लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में ईरानी सुरक्षा सूत्रों ने उनकी मौत की पुष्टि की। हमलों में खामेनेई के साथ ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य और सुरक्षा अधिकारी भी मारे गए थे। ———————–

अभी महंगे नहीं होंगे होम लोन और कार लोन, RBI गवर्नर ने इंटरेस्ट रेट में वृद्धि से किया इनकार

अभी कार लोन और होम लोन महंगे होने नहीं जा रहे हैं। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने खुद इस बारे में बताया है। उन्होंने 24 जून को उन अटकलों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि इंटरेस्ट रेट बढ़ने जा रहा है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति में अभी सख्ती की बात करना बहुत जल्दबाजी होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इनफ्लेशन और ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

इकोनॉमी से जुड़े डेटा के आधार पर फैसला लेगा आरबीआई

ईटी नाउ और ईटी नाउ स्वदेश से बातचीत में मल्होत्रा ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने जून की अपनी पॉलिसी में अपना रुख न्यूट्रल बनाए रखने का फैसला किया था। इसकी वजह यह है कि अभी इकोनॉमी की तस्वीर साफ नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन और इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए रिस्क के आकलन के लिए आने वाले डेटा पर निर्भर करेगा।

इंटरेस्ट रेट बढ़ाने से पहले रुख में बदलाव करेगा केंद्रीय बैंक

उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर केंद्रीय बैंक को यह लगेगा कि निकट भविष्य में इंटरेस्ट रेट बढ़ाना जरूरी है तो वह अपने रुख में बदलाव करेगा। इसे न्यूट्रल से बदलकर रिस्ट्रक्टिव करेगा। इस महीने की शुरुआत में छह सदस्यीय एमपीसी ने रेपो रेट अपरिवर्तित रखने का फैसला किया था। कमेटी का कहना था कि जियोपॉलिटिकल टेंशन, सप्लाई चेने की बाधा और मौसम से जुड़े रिस्क को देखते हुए रेपो रेट को 5.25 फीसदी बनाए रखने का फैसला लिया गया।

अप्रैल और मई में रिटेल इनफ्लेशन में तेज उछाल

इंटरेस्ट रेट बढ़ने की चर्चा रिटेल इनफ्लेशन में उछाल के बाद शुरू हुई। अप्रैल और मई के रिटेल इनफ्लेशन के डेटा से यह साफ हो गया है कि जरूरी चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इसे क्रूड की कीमतों में उछाल का नतीजा माना जा रहा है। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थी। इससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर होना पड़ा।

फ्यूल महंगा होने से महंगाई का खतरा बढ़ जाता है

पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। यही वजह है कि RBI ने इस महीने की शुरुआत में पेश अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में रिटेल इनफ्लेशन का अनुमान बढ़ा दिया। उसने इस वित्त वर्ष के ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया। माना जा रहा है कि महंगाई बढ़ने की वजह से इकोनॉमी की ग्रोथ सुस्त पड़ सकती है।

इनफ्लेशन ज्यादा बढ़ने पर बढ़ सकात है रेपो रेट

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही आरबीआई गवर्नर ने यह साफ कर दिया है कि अभी केंद्रीय बैंक का रेपो रेट बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है, लेकिन अगर महंगाई हाई लेवल पर बनी रहती है तो आगे रेपो रेट बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। रेपो रेट बढ़ने पर होम लोन, कार लोन और दूसरे लोन महंगे हो जाएंगे।

24000 के पार Nifty बंद, Sensex में 790 प्वाइंट्स का उछाल, डेढ़ लाख करोड़ रुपये बढ़ी निवेशकों की दौलत

Share Market Rally: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी सीनेट में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव से झटका लगा जिससे अब ईरान पर हमला करने उनके लिए मुश्किल हो गया तो इसने मार्केट में काफी रौनक बढ़ा दी। ट्रंप को इस करंट से घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 900 प्वाइंट्स अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी 50 भी 24100 के काफी करीब पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में अच्छी रिकवरी आई और शुरुआती गिरावट से उबरते हुए निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 ग्रीन हो गए।

सेक्टरवाइज मेटल शेयरों ने जोरदार वापसी की कोशिश की और निफ्टी मेटल करीब 1% की गिरावट से रिकवर करते हुए ग्रीन हुआ लेकिन मुनाफावसूली के चलते यह फिर 0.40% की गिरावट के साथ बंद हुआ। आईटी सेक्टर और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर ने मिलकर मार्केट में शानदार रौनक बिखेरी और इनके निफ्टी इंडेक्स करीब 2% मजबूत हुए। शुरुआती कारोबार में गिरावट के बाद पीएसयू बैंक में भी रिकवरी हुई और अब इसके निफ्टी इंडेक्स करीब आधे फीसदी की बढ़त है तो निफ्टी रियल्टी 2% से अधिक मजबूत हुआ।

ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ है। इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज सेंसेक्स (Sensex) 790.54 प्वाइंट्स यानी 1.04% के उछाल के साथ 76,991.22 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 197.55 प्वाइंट्स यानी 0.83% की बढ़त के साथ 24,021.65 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 989.69 प्वाइंट्स उछलकर 77,190.37 और निफ्टी 265.95 प्वाइंट्स चढ़कर 24,090.05 तक पहुंच गया था।

₹1.86 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 23 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,74,59,448.771 करोड़ था। आज यानी 23 जून 2026 को यह बढ़कर ₹4,76,45,817.53 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹1,86,368.759 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 23 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज 23 स्टॉक्स ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज इंडिगो, ट्रेंट और टेक महिंद्रा में रही। वहीं दूसरी तरफ आज सेंसेक्स पर सबसे अधिक गिरावट एनटीपीसी, टाटा स्टील और मारुति में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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147 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4430 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2215 शेयर आज मजबूत हुए तो 2034 में गिरावट रही जबकि 181 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 147 शेयर एक साल के हाई और 63 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए।

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