ईरान की ‘फटकार’ के बाद घुटनों पर आए शहबाज शरीफ! ‘बड़बोलेपन’ पर यू-टर्न लेकर अब ट्रंप को ही सिखा रहे पाठ

Pakistan PM Shehbaz Sharif: पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपनी ‘इंटरनेशनल बेइज्जती’ कराने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देते। इस बार उन्होंने कुछ ऐसा ही तीर हवा में चलाया, जो सीधा घूमकर उन्हीं को लग गया। हाल ही उन्होंने अपनी संसद में खड़े होकर सीना ठोकते हुए दावा कर दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के ‘बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम’ को लेकर बातचीत चल रही है।

बस फिर क्या था, ईरान को शहबाज शरीफ का यह ‘ज्ञान’ कतई रास नहीं आया। ईरान ने सरेआम पाकिस्तान को ऐसी फटकार लगाई कि शहबाज शरीफ को तुरंत ‘यू-टर्न’ लेना पड़ा। अब वह कल तक जिस मिसाइल प्रोग्राम पर अमेरिका-ईरान की पंचायत करा रहे थे, आज उसी मिसाइल प्रोग्राम के सबसे बड़े रक्षक बन गए हैं! आइए समझते हैं पाकिस्तान के इस नए कूटनीतिक ब्लंडर की पूरी कहानी।

जब ईरान के राष्ट्रपति के सामने ही खुल गई शहबाज की ‘ज्ञान की पोटली’

ये पूरा ड्रामा तब शुरू हुआ जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान खुद इस्लामाबाद के दौरे पर थे। मेहमान घर में बैठा था और शहबाज शरीफ ने पाकिस्तानी संसद में खड़े होकर अपनी कूटनीतिक समझ का ढिंढोरा पीट दिया। उन्होंने कह डाला कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच ईरान की मिसाइलों को लेकर गुपचुप चर्चा चल रही है।

ईरान का करारा जवाब

ईरान के वार्ताकारों और अधिकारियों को जैसे ही इस ‘अफवाह’ की भनक लगी, उन्होंने तुरंत शहबाज शरीफ के बयान को सरेआम खारिज कर दिया। ईरानी टीम ने दो टूक कहा, ‘पाकिस्तानी पीएम को चल रही राजनयिक प्रक्रियाओं के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है, उनका यह दावा पूरी तरह गलत है।’ ईरान ने साफ कर दिया कि उनकी मिसाइलें उनका संप्रभु रक्षा मामला हैं और यह किसी भी टेबल पर बातचीत का हिस्सा नहीं हैं।

फटकार पड़ते ही पलटे शहबाज

अंतरराष्ट्रीय मंच पर ‘नो-इंफॉर्मेशन’ का तमगा मिलने के बाद शहबाज शरीफ ने जो यू-टर्न लिया, उसे देखकर गिरगिट भी शरमा जाए। एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अचानक शहबाज शरीफ के सुर बदल गए। अब वह ईरान के मिसाइल कार्यक्रम का खुलकर बचाव करने लगे।

शहबाज शरीफ ने उलटे दुनिया से ही सवाल पूछ लिया कि आखिर सिर्फ तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल जखीरे की ही आलोचना क्यों की जा रही है? उन्होंने यह ज्ञान भी दे डाला कि इस मुद्दे को विवाद बनाना क्षेत्रीय तनाव को कम करने के प्रयासों को और उलझा सकता है।

एक तरफ ट्रंप, दूसरी तरफ ईरान; ‘सैंडविच’ बन गया पाकिस्तान!

इस पूरे वाकये ने इस्लामाबाद को सांप-छछूंदर वाली स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं, जो ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर लगातार आंखें लाल किए रहते हैं। दूसरी तरफ पड़ोसी देश ईरान है, जिससे पाकिस्तान को अपनी सीमाएं और संबंध बचाकर रखने हैं।

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शहबाज शरीफ का यह यू-टर्न अब कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि तेहरान से मिली सीधी और तीखी सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बाद शहबाज शरीफ केवल अपनी गलती को सुधारने और ईरान के गुस्से को शांत करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।

Gold price today: MCX पर सोने का भाव 1% से ज्यादा टूटा, अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

Gold price today: बुधवार, 24 जून को MCX पर सोने का रेट 1% से ज़्यादा गिर गया, जिसकी वजह मज़बूत US डॉलर था। US फ़ेडरल रिज़र्व के मॉनेटरी सख्ती की उम्मीदों से डॉलर इंडेक्स 1 साल से ज़्यादा के हाई पर पहुंच गया।

MCX गोल्ड अगस्त फ़्यूचर्स सुबह 10.40 बजे के आस-पास 1.39% गिरकर ₹1, 44,499 प्रति 10 ग्राम पर थे, जबकि MCX सिल्वर जुलाई फ़्यूचर्स 0.71% गिरकर ₹2,24,227 प्रति kg पर थे।

डॉलर इंडेक्स बढ़कर 101.52 पर पहुंच गया, जो एक साल से ज़्यादा समय में इसका सबसे ऊंचा लेवल है, जिससे विदेशी करेंसी में खरीदारों के लिए डॉलर वाला सोना महंगा हो गया। डॉलर इंडेक्स 17 जून से 100 के निशान से ऊपर है क्योंकि बाज़ार को उम्मीद है कि US फ़ेडरल रिज़र्व इस साल के आखिर तक महंगाई की वजह से रेट बढ़ाएगा।

न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, CME FedWatch Tool इस साल US Fed के रेट बढ़ने की उम्मीदें बढ़ा रहा है। ट्रेडर्स को अब इस साल तीन बार इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद दिख रही है।अब, Fed का पसंदीदा इन्फ्लेशन गेज, U.S. पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) डेटा, जो गुरुवार को आने वाला है, US Fed मॉनेटरी पॉलिसी पर आगे के संकेतों के लिए फोकस में है।

US-ईरान शांति बातचीत में प्रगति के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बीच, इन्फ्लेशन का खतरा कम होने के बावजूद मार्केट US Fed रेट बढ़ोतरी को डिस्काउंट कर रहा है।

कामा ज्वेलरी के एमडी कॉलिन शाह का कहना है कि अभी, पीली धातु एक टेंशन वाले माहौल में ट्रेड कर रही है, और लगभग पूरे H1 में आर्थिक उथल-पुथल और USD टर्म्स में ~15% के करेक्शन के बाद, सोने का परफॉर्मेंस H2 में धीरे-धीरे पटरी पर आने की उम्मीद है, बशर्ते कोई पक्का शांति समझौता हो।

पारंपरिक रूप से, अगस्त से अक्टूबर के दौरान सोने की कीमतों में बढ़त देखी जाती है, क्योंकि त्योहारों का मौसम होता है, साथ ही पश्चिम में छुट्टियों का मौसम भी होता है। हालांकि, इस उम्मीद के बीच, यह देखना और इंतज़ार करना ज़रूरी है कि स्थिति कैसे बदलती है।

भारतीय ज्वेलरी एक्सपोर्ट के सावधानी से आशावादी रहने की उम्मीद है। हालांकि इस सेक्टर पर सोने की ऊंची कीमतों का दबाव पड़ सकता है, जिससे इंटरनेशनल और घरेलू दोनों मार्केट में डिमांड में कुछ कमी आ सकती है, भारत की ताकत नए FTA के ज़रिए मार्केट के डायवर्सिफिकेशन में दिखेगी जो मेनस्ट्रीम एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन में डिमांड रिवाइवल के साथ-साथ रिकवरी मोमेंटम को सपोर्ट करेगी। ग्राहकों के कंजर्वेटिव लेकिन उत्साहित खरीदारी व्यवहार को देखते हुए, हम हल्के स्टडेड ज्वेलरी की डिमांड में बढ़ोतरी देखेंगे।

इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी ने कहा, “सोना सात महीने के निचले स्तर की ओर गिर गया क्योंकि सख्त Fed पॉलिसी की उम्मीदें अंतरिम US-ईरान शांति समझौते से मिले सपोर्ट से ज़्यादा थीं, जिससे इन्फ्लेशन की चिंताओं को कम करने में मदद मिली। US टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में भारी गिरावट के कारण भी पीली धातु पर दबाव पड़ा, जिससे इन्वेस्टर्स ने अपने पोर्टफोलियो में कहीं और हुए नुकसान की भरपाई के लिए बुलियन पोजीशन कम कर दीं।”

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन ने कहा कि आज के सेशन में सोने को $4,089 और $4,040 पर सपोर्ट है, जबकि रेजिस्टेंस $4,185 और $4,220 प्रति ट्रॉय औंस पर है, और चांदी को $60 और $58.40 पर सपोर्ट है, जबकि रेजिस्टेंस $63.60 और $65.20 प्रति ट्रॉय औंस पर है।

जैन ने कहा कि MCX पर सोने को ₹1,45,200 और ₹1,44,000 पर सपोर्ट और ₹1,47,200 और ₹1,48,100 पर रेजिस्टेंस है, जबकि चांदी को ₹2,21,000 और ₹2,16,600 पर सपोर्ट और ₹2,28,800 और ₹2,31,200 पर रेजिस्टेंस है।

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LPG Price Today: गैस सिलेंडर की नई कीमतें जारी, जानें दिल्ली, मुंबई, नोएडा समेत आपके शहर का रेट

LPG Price Today: बुधवार, 24 जून को घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें स्थिर रही, जबकि US-ईरान शांति वार्ता में प्रगति के कारण ग्लोबल ऑयल की कीमतों में कमी आई है। बता दें कि 7 जून को हुई बढ़ोतरी के बाद से रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उस समय तेल कंपनियों (OMCs) ने 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम 29 रुपये बढ़ाए थे। इससे पहले 7 मार्च को भी सिलेंडर 60 रुपये महंगा किया गया था। वहीं, 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में पिछली बार करीब 42 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसकी वजह ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते सप्लाई में आई दिक्कतें थीं।

गौरतलब है कि US-ईरान तनाव के कारण पश्चिम एशिया से एनर्जी सप्लाई प्रभावित हुई है और LPG का आयात प्रति माह 2 मिलियन टन से घटकर अप्रैल में 696,000 टन रह गया। पिछले चार महीनों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में लगभग 79% की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि इसकी कीमत सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) पर आधारित होती है, जिसे सऊदी अरामको हर महीने की शुरुआत में तय करती है।

शहर के हिसाब से घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें

शहरघरेलू LPG (14.2 किलोग्राम)कमर्शियल LPG (19 किलोग्राम)
नई दिल्ली₹942.00 (+₹29.00)₹3,113.50 (+₹42.00)
कोलकाता₹968.00 (+₹29.00)₹3,255.50 (+₹53.50)
मुंबई₹941.50 (+₹29.00)₹3,067.50 (+₹43.50)
चेन्नई₹957.50 (+₹29.00)₹3,283.00 (+₹46.00)
गुरुग्राम₹950.50 (+₹29.00)₹3,130.00 (+₹42.00)
नोएडा₹939.50 (+₹29.00)₹3,113.50 (+₹42.00)
बेंगलुरु₹944.50 (+₹29.00)₹3,198.00 (+₹46.00)
भुवनेश्वर₹968.00 (+₹29.00)₹3,290.00 (+₹52.00)
चंडीगढ़₹951.50 (+₹29.00)₹3,136.00 (+₹43.50)
हैदराबाद₹994.00 (+₹29.00)₹3,367.00 (+₹52.00)
जयपुर₹945.50 (+₹29.00)₹3,141.00 (+₹42.00)
लखनऊ₹979.50 (+₹29.00)₹3,236.00 (+₹42.00)
पटना₹1,031.50 (+₹29.00)₹3,400.00 (+₹53.50)
तिरुवनंतपुरम₹951.00 (+₹29.00)₹3,152.00 (+₹46.

US-Iran डील के बाद भारत आने वाले कितने जहाज होर्मुज से गुजरे?

पिछले हफ्ते US और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद, भारत आने वाले कुल 11 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। मंगलवार को एक मीडिया ब्रीफिग में विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “17 जून को MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर होने के बाद से, भारत आने वाले 11 जहाज होर्मुज से गुजरे हैं।”

इन जहाजों में 3 भारतीय झंडे वाले कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं, जिनमें प्रत्येक में 2.85 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल है। इसके अलावा विदेशी झंडे वाला एक LPG कैरियर, विदेशी झंडे वाला एक कच्चे तेल का टैंकर और विदेशी झंडे वाले छह बल्क कैरियर शामिल हैं, जिनमें उर्वरक (खाद) लदा था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय झंडे वाले 10 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में हैं, जबकि दो हाल ही में वहां पहुंचे हैं।

क्या भारत के लिए वेस्ट एशिया से आने वाली LPG का कोई स्थायी विकल्प है?

रॉयटर्स ने इंडस्ट्री के सूत्रों के हवाले से बताया है कि जून में अमेरिका से भारत का LPG इंपोर्ट 1 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचने वाला है, जो अब तक का सबसे ज्यादा आंकड़ा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इसी महीने संयुक्त अरब अमीरात से सप्लाई में सुधार हुआ है और यह 3,00,000 से 4,00,000 टन के आसपास पहुंच गई है। साथ ही, जून में OMCs को कुवैत से भी लगभग 45,000 टन LPG मिलेगी।

आपको बताते चलें कि अमेरिका-ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से पहले, भारत अपने LPG आयात के लिए पश्चिमी एशिया पर बहुत ज्यादा निर्भर था; इसका लगभग 90% हिस्सा इसी व्यापार मार्ग से आता था।

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अब ईरान पर हमला नहीं कर पाएंगे ट्रंप! अमेरिकी सीनेट ने दिया बड़ा झटका, इस प्रस्ताव के बाद क्या पंगु हो गए राष्ट्रपति?

US Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में कुछ दिनों से थोड़ी शांति है। हालांकि, सीजफायर समझौते के बाद कई ऐसे मौके हुए जब ऐसा लगा है कि कभी भी युद्ध भड़क सकता है। अब इस पर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया है, जिसमें राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ईरान के साथ युद्ध करने के अधिकार को चुनौती दी गई है। यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

सीनेट में यह प्रस्ताव 50-48 के मामूली अंतर से पास हुआ। इस प्रस्ताव के आने के बाद अब ईरान पर हमला करना मुश्किल हो गया है। यह प्रस्ताव ट्रंप को निर्देश देता है कि जब तक अमेरिकी संसद सैन्य कार्रवाई की स्पष्ट अनुमति नहीं देती, तब तक वे ईरान के साथ चल रहे इस युद्ध से अमेरिकी सेना को दूर रखें।

क्या है इस प्रस्ताव का मतलब?

चूंकि यह एक ‘कनकरेंट रेजोल्यूशन’ है, इसलिए इसे राष्ट्रपति ट्रंप के पास हस्ताक्षर या वीटो के लिए नहीं भेजा जाएगा। कानूनी रूप से इसकी बाध्यता को लेकर भले ही विवाद हो, लेकिन इस वोटिंग ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिकी संसद के दोनों सदन अब इस युद्ध के खिलाफ खड़े हैं।

फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद यह युद्ध शुरू हुआ था, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को हिलाकर रख दिया था। यह अमेरिकी इतिहास में साल 1973 के ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ के बाद पहला मौका है जब संसद के दोनों सदनों ने राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्देश देने वाला ऐसा प्रस्ताव पारित किया है।

शांति समझौते के बीच क्यों बढ़ी ट्रंप की टेंशन?

यह वोटिंग ऐसे समय में हुई है जब ट्रम्प प्रशासन ईरान के साथ हुए शुरुआती शांति समझौते (MoU) को 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते में बदलने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। इस समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील और होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद शामिल है।

सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शूमर ने इस वोटिंग के जरिए रिपब्लिकन सांसदों को भी घेर लिया। उन्होंने कहा, ‘रिपब्लिकन बंद दरवाजों के पीछे ट्रंप के युद्ध, उनकी गोपनीयता और ईरान के साथ उनके खराब सौदे की जितनी चाहें उतनी शिकायत कर सकते हैं, लेकिन इस युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने का एकमात्र तरीका यह है कि रिपब्लिकन खुलकर सामने आएं और कार्रवाई करें।’

नवंबर चुनाव और महंगाई का डर

अमेरिकी सांसदों के बीच इस युद्ध को लेकर बढ़ती बेचैनी की एक बड़ी वजह आगामी नवंबर में होने वाले मिडिल-टर्म इलेक्शन हैं। युद्ध के कारण वैश्विक व्यापारिक मार्ग ठप हो गए हैं, जिससे ऊर्जा और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इससे अमेरिकी जनता महंगाई से बेहाल है और चुनाव से ठीक पहले यह ट्रम्प सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक मुसीबत बन चुका है।

शांति वार्ता के बीच ईरान ने फिर दिखाए कड़े तेवर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच शुरुआती बातचीत के बाद भी कई बड़े विवाद सुलझने का नाम नहीं ले रहे हैं:

परमाणु ठिकानों की जांच से इनकार: ईरान ने साफ कर दिया है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु एजेंसी को उन ठिकानों का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिन पर पिछले साल अमेरिका और इजरायल ने बमबारी की थी। हालांकि, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि ईरान ‘सर्वोच्च स्तर’ की जांच के लिए मान गया है।

होर्मुज जलमार्ग पर पाबंदी: ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने दोटूक कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब कभी भी युद्ध से पहले वाले ‘फ्री पैसेज’ के दिनों में नहीं लौटेगा। यानी इस अहम समुद्री तेल मार्ग पर पाबंदियां बनी रहेंगी।

Gold-Silver in Jun Quarter: सोने के लिए दस साल की सबसे कमजोर तिमाही, चार वर्षों में सबसे तेज फिसल रही चांदी

Gold and Silver News: यह तिमाही खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं और सोने-चांदी की जैसी चाल है, उस हिसाब से जून 2026 तिमाही इनके लिए झटका साबित हो रहा है। यह निगेटिव जोन में एंट्री करने जा रहा है और इसके साथ ही लगातार पांच तिमाहियों से जारी बढ़त का सिलसिला टूट जाएगा। गोल्ड की हालत तो और खराब है क्योंकि यह दस साल की सबसे बड़ी तिमाही गिरावट की तरफ बढ़ रहा है, तो चांदी की चमक चार साल में सबसे अधिक फीकी होने वाली है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोने और चांदी की लगातार गिरावट अमेरिकी डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के हाई लेवल पर बने रहने और फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों को लेकर बदलते रुझान के चलते है। चूंकि सोना और चांदी पर कोई ब्याज नहीं मिलता तो लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों का माहौल इन्हें अमेरिकी ट्रेजरी जैसे निश्चित आय वाले निवेश विकल्पों की तुलना में कम आकर्षक बना देता है।

कितना फीका हुआ सोना-चांदी?

जून तिमाही में अब तक गोल्ड के भाव 12% नीचे आ चुके हैं जो दिसंबर 2016 के बाद इसकी सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है। वहीं चांदी 17.6% फिसल चुकी है, जो जून 2022 के बाद इसकी सबसे तेज गिरावट है। हालांकि अगर रिकॉर्ड हाई से तुलना करें तो स्थिति और भी गंभीर दिखाई देती है। गोल्ड प्रति औंस (28.35 ग्राम) $5,417 के रिकॉर्ड हाई से 24% नीचे आ चुका है तो 28 जनवरी को प्रति औंस $117 के रिकॉर्ड हाई से चांदी लगभग 47% गिर चुकी है।

सोने-चांदी की यह गिरावट पिछले दो साल में ताबड़तोड़ तेजी के बाद आई है। साल 2024 में 28% और साल 2025 में 65% की बढ़त के बाद, जनवरी और मार्च 2026 के बीच सोने की कीमत में 10% की तेजी आई तो दूसरी तरफ साल 2024 में 22% और साल 2025 में 148% चढ़ने के बाद जनवरी और फरवरी 2026 में चांदी की कीमत 28% बढ़ी।

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कब तक बना रहेगा दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच जंग ने सोने-चांदी पर दबाव डाला था लेकिन यह दबाव तब भी जारी रहा, जब इनके बीच शांति समझौता हो गया। पश्चिमी एशिया में युद्ध ने तेल की कीमतों में आग लगा दी थी और सख्त मौद्रिक नीतियों के आसार बढ़ा दिए। अब अमेरिकी फेड ने मौद्रिक नीतियों की हालिया बैठक के बाद नए चेयरमैन केविन वार्श ने फिलहाल ब्याज दरों में किसी बढ़ोतरी का ऐलान तो नहीं किया लेकिन इस साल एक बार दर बढ़ाने के संकेत दिए। इसने निवेशकों की चिंता बढ़ी दी और अमेरिका-ईरान के समझौते के पॉजिटिव इफेक्ट को फीका कर दिया। अमेरिकी फेड के मौद्रिक नीतियों के कमेटी की हालिया बैठक के बाद से डॉलर इंडेक्स 1% से अधिक मजबूत हो चुका है।

एक्सिस डायरेक्ट के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटीज) देवेया गागलानी (Deveya Gaglani) का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन कम होने और कच्चे तेल की फिसलन के बावजूद अमेरिकी फेड के सख्त रुख, हाई इनफ्लेशन और डॉलर इंडेक्स में तेज उछाल के कारण बुलियन यानी सोना-चांदी पर दबाव बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स हाल ही में एक साल के हाई लेवल पर पहुंच गया। देवेया के अनुसार जब तक डॉलर $100 से ऊपर बना रहेगा, तब तक सोने और चांदी पर दबाव बना रहा सकता है।

अब किस बात पर रहेगी नजर

हाल ही में शिकागो फेडरल रिजर्व बैंक के प्रेसिडेंट ऑस्टन गूल्सबी (Austan Goolsbee) ने कहा था कि उन्हें महंगाई बढ़ने की रफ्तार को लेकर चिंता है और यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता है है कि महंगाई बढ़ाने वाले सभी फैक्टर्स अस्थायी हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से लक्ष्य से कहीं अधिक मुद्रास्फीति या इनफ्लेशन की समस्या से जूझ रही है और हाल के रुझान सही दिशा में नहीं हैं। अब कारोबारियों और निवेशकों की नजर गुरुवार को जारी होने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स पर होगी, जिसके तेज होने के आसार हैं। इसका असर फेडरल रिजर्व की ब्याज दर करने वाली नीति पर दिख सकता है।

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Trump On Iran: ‘अगर ईरान ने परमाणु निरीक्षण…’, ट्रंप ने फिर तेहरान को दी धमकी, संकट में शांति समझौता; तनाव के बीच होर्मुज से निकला रिकॉर्ड तेल

मिडिल ईस्ट में जारी महीनों से तनाव को उस समय विराम लगा, जब ईरान-अमेरिका ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने कई शर्तों पर सहमति भी जताई थी। मगर एक बार फिर परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईर

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GIFT Nifty बाजार के फ्लैट खुलने के दे रहा संकेत, ग्लोबल बाजार में मिला-जुला ट्रेड, क्रूड की कीमतों में दबाव

सेंसेक्स और निफ्टी बुधवार को फ्लैट खुल सकते हैं, जिसे GIFT Nifty से पॉजिटिव संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में कमी और चल रही US-ईरान शांति बातचीत को लेकर बेहतर सेंटीमेंट से सपोर्ट मिलेगा। ग्लोबल टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में कमजोरी और US फेडरल रिजर्व के ज्यादा सख्त रुख को लेकर चिंताओं के बावजूद भारतीय बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स में बढ़त की संभावना है, जो रिस्क लेने की क्षमता पर असर डाल रही है।

GIFT Nifty सुबह करीब 8.22 बजे 23,820.00 पर ट्रेड कर रहा था, जो 1.50 पॉइंट्स या 0.01 परसेंट नीचे था, जो मंगलवार की तेज सेल-ऑफ के बाद घरेलू इक्विटी के लिए पॉजिटिव शुरुआत का संकेत है।

यह संकेत 23 जून को भारतीय बाज़ारों में लगभग दो हफ़्तों की सबसे बड़ी गिरावट के बाद आया है। सेंसेक्स 893.39 पॉइंट्स या 1.16 प्रतिशत गिरकर 76,200.68 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 278.80 पॉइंट्स या 1.16 प्रतिशत गिरकर 23,824.10 पर बंद हुआ। कमज़ोर ग्लोबल संकेतों और US-ईरान शांति बातचीत को लेकर अनिश्चितता ने सेंटिमेंट पर असर डाला, जबकि निवेशकों ने टेक्नोलॉजी शेयरों में निवेश कम करना जारी रखा।

ओपनिंग बेल से पहले ग्लोबल बाज़ार मिले-जुले रहे

टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर शेयरों में बिकवाली के एक और दौर से वॉल स्ट्रीट रात भर तेज़ी से नीचे बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 2.21 प्रतिशत गिरा, जबकि S&P 500 1.44 प्रतिशत गिरकर एक हफ़्ते से ज़्यादा के निचले स्तर पर आ गया। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज काफ़ी मज़बूत था, जो सिर्फ़ 0.09 प्रतिशत गिरा।

इन्वेस्टर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते डेट-फंडेड खर्च और इस बात की संभावना को लेकर चिंतित थे कि US फेडरल रिजर्व इस साल के आखिर में और सख्त रुख अपना सकता है। सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में बिकवाली का सबसे ज़्यादा असर पड़ा क्योंकि इन्वेस्टर्स ने महीनों की अच्छी बढ़त के बाद वैल्यूएशन का फिर से आकलन किया।

हालांकि, बुधवार को एशियाई मार्केट्स में स्थिरता के संकेत दिखे। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स थोड़ा बदला, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी मंगलवार की 10 परसेंट की तेज गिरावट के बाद 2.2 परसेंट उछला। जापान का निक्केई बढ़त और गिरावट के बीच ऊपर-नीचे होता रहा और आखिरी बार थोड़ा नीचे ट्रेड कर रहा था।

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट जारी रही, जिससे भारत जैसी तेल इंपोर्ट करने वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी पॉजिटिव बात सामने आई। ब्रेंट क्रूड $76.7 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था, जबकि US क्रूड $73 प्रति बैरल से नीचे था। दोनों बेंचमार्क अब चार महीने के सबसे निचले स्तर के करीब ट्रेड कर रहे हैं क्योंकि US-ईरान बातचीत में प्रगति और होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए टैंकर ट्रैफिक फिर से शुरू होने से सप्लाई में रुकावटों की चिंता कम हो गई है। क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज़ गिरावट भारतीय इक्विटीज़ के लिए सबसे मज़बूत सपोर्ट में से एक बनकर उभरी है।

निफ्टी के लिए 24,000 पर सबसे बड़ी रुकावट 

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, घरेलू मार्केट ग्लोबल इक्विटीज़ में कमज़ोरी के मुकाबले पॉज़िटिव जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट को बैलेंस कर रहा है। उन्होंने कहा, “US-ईरान शांति बातचीत में प्रोग्रेस से सुधर रहे सेंटिमेंट को ग्लोबल टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में कमज़ोरी और US फेडरल रिज़र्व के ज़्यादा सख्त रुख को लेकर चिंताओं से बैलेंस किया जा रहा है।” US-ईरान शांति बातचीत में लगातार प्रोग्रेस हो रही है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में संभावित रुकावटों को लेकर चिंताओं को कम करने में मदद मिल रही है। हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि जब तक कोई फॉर्मल एग्रीमेंट फाइनल और लागू नहीं हो जाता, तब तक इन्वेस्टर्स के सावधान रहने की संभावना है।

ग्लोबल डेवलपमेंट के अलावा, मार्केट पार्टिसिपेंट्स मॉनसून की प्रोग्रेस पर भी करीब से नज़र रख रहे हैं। कई इलाकों में बारिश की कमी ने एग्रीकल्चरल आउटपुट, फ़ूड इन्फ्लेशन और रूरल डिमांड को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे आने वाले हफ़्तों में मॉनसून ट्रेंड्स मार्केट के लिए एक ज़रूरी वेरिएबल बन गए हैं।

मंगलवार के तेज़ करेक्शन के बावजूद इंस्टीट्यूशनल फ्लो सपोर्टिव रहे। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) 23 जून को मार्जिनल नेट बायर्स बने, उन्होंने 17 करोड़ रुपये के इक्विटी खरीदे, जबकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने 680 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

टेक्निकल नज़रिए से, पोनमुडी ने कहा कि 24,000 के निशान से नीचे जाने के बाद निफ्टी पर दबाव बना हुआ है। अभी सबसे बड़ी रुकावट 24,000 पर है, और इस लेवल से ऊपर लगातार बढ़ने से बुलिश मोमेंटम फिर से आ सकता है और 24,100-24,200 ज़ोन की ओर रिकवरी का रास्ता खुल सकता है। नीचे की तरफ, 23,800 एक ज़रूरी सपोर्ट लेवल बना हुआ है। इस ज़ोन से नीचे एक बड़ा ब्रेक नया सेलिंग प्रेशर पैदा कर सकता है और इंडेक्स को 23,600 के लेवल पर ले जा सकता है।

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Trump On Iran: ‘अगर ईरान ने परमाणु निरीक्षण…’, ट्रंप ने फिर तेहरान को दी धमकी, संकट में शांति समझौता; तनाव के बीच होर्मुज से निकला रिकॉर्ड तेल

मिडिल ईस्ट में जारी महीनों से तनाव को उस समय विराम लगा, जब ईरान-अमेरिका ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने कई शर्तों पर सहमति भी जताई थी। मगर एक बार फिर परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईर

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होर्मुज में फंसे 11,000 नाविकों का रेस्क्यू शुरू:US-ईरान मिलकर काम कर रहे; अमेरिकी विदेश मंत्री पीस डील पर UAE को मनाने पहुंचे

संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने कहा है कि होर्मुज में फंसे करीब 11 हजार सीफेयरर्स, यानी नाविकों को सुरक्षित निकालने की योजना पर काम शुरू हो गया है। यह बड़ा अभियान अमेरिका, ईरान, खाड़ी इलाके के तटीय देशों, शिपिंग कंपनियों की मदद से चलाया जाएगा। इस दौरान यह भी सुनिश्चित कर लिया गया है कि जहाज सुरक्षित तरीके से इस रास्ते से गुजर सकें। इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो खाड़ी देशों के दौरे पर पहुंच गए हैं। उनका मकसद अमेरिका-ईरान समझौते को उन देशों के सामने रखना है, जो इस समझौते को लेकर सबसे ज्यादा संदेह में माने जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, UAE, बहरीन और कुवैत को इस समझौते की कुछ बातों पर चिंता है। उन्हें लगता है कि इससे होर्मुज में ईरान का प्रभाव बढ़ गया है। साथ ही समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर भी कोई स्पष्ट शर्त नहीं रखी गई है। इसके अलावा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित 300 अरब डॉलर, यानी 28 लाख करोड़ रुपए के फंड में खाड़ी देशों से मदद मांगे जाने की संभावना है। ऐसे में अमेरिका इन देशों को भरोसा दिलाने और समझौते के समर्थन के लिए राजी करने की कोशिश कर रहा है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरानी राष्ट्रपति पाकिस्तान पहुंचे: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान एक दिन की यात्रा पर पाकिस्तान पहुंचे। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच हुई पीस डील पर चर्चा हुई। 2. भारत से जुड़े 11 जहाजों ने होर्मुज पार किया: अमेरिका-ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के बाद अब तक 11 जहाज होर्मुज पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। 3. होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल गुजरा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि सोमवार को होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही हुई, जो अब तक का रिकॉर्ड है। 4. इजराइल अपने हथियार खुद बनाएगा: इजराइली PM ने कहा कि इजराइल को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर सैन्य निर्भरता कम करनी होगी और खुद हथियार बनाना सीखना होगा। 5. ट्रम्प ने ईरान को फिर से धमकी दी: ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान समझौते का पालन नहीं करता या सही तरीके से व्यवहार नहीं करता, तो वह फिर से कार्रवाई करने को तैयार हैं। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

‘होर्मुज से 19 मिलियन बैरल तेल निकला, ईरान हाई लेवल न्यूक्लियर इंस्पेक्शन के लिए तैयार’, ट्रंप का बड़ा दावा; तो दुनिया की टेंशन हो गई खत्म?

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