ईरान ने रविवार को दावा किया कि उसने कुवैत और बहरीन में अमेरिका के 8 सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया है। रिवोल्यूशनरी फोर्स ने कहा कि यह हमला ईरान के ठिकानों पर अमेरिका की दूसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई के जवाब में किया गया है। वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि दोनों देशों के नेताओं ने हालिया हमलों को लेकर जिस तरह बयान दिए हैं और उन पर गर्व जताया है, वह अपने आप में अपराध स्वीकार करने जैसा है। उन्होंने कहा कि ईरान पर हुए हर हमले, हर मौत और हर नुकसान के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय अदालतों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स… ईरान-अमेरिकी पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
Fuel Crisis News: फरवरी 2026 में जब अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया, तो पूरी दुनिया पेट्रोल-डीजल और LPG को लेकर हड़कंप मच गया। होर्मुज वह रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। भारत के लिए यह स्थिति किसी बड़ी आपदा से कम नहीं थी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है।
भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल और 60% एलपीजी (LPG) आयात करता है। ईंधन संकट की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि भारत का 50% तेल और 90% एलपीजी इसी रास्ते से आता था, जो अगले चार महीनों के लिए पूरी तरह ठप हो गया।
संकट के बीच भारत ने दिखाया दम
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े संघर्ष के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके बावजूद भारत ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए संभावित ईंधन संकट को टाल दिया। सरकार का दावा है कि करीब चार महीने तक आपूर्ति बाधित रहने के बावजूद देश में कहीं भी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राशनिंग लागू नहीं करनी पड़ी। इस दौरान ईंधन की उपलब्धता सामान्य बनी रही।
जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है भारत
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत और एलपीजी का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 90 प्रतिशत एलपीजी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इस मार्ग के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पहुंच गई। जबकि ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक चला गया। एलपीजी के आयात में भी करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सरकार ने कई मोर्चों पर बनाई रणनीति
ईंधन संकट के शुरुआती दिनों में ही केंद्र सरकार ने नियंत्रण संबंधी आदेश जारी किए। घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वैकल्पिक देशों से तेल और गैस की खरीद तेज कर दी। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिया गया कि वे बढ़ी हुई लागत का अधिकांश बोझ खुद वहन करें ताकि आम उपभोक्ताओं पर इसका असर कम से कम पड़े।
सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती भी की। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिली। इस फैसले से केंद्र सरकार को लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू का त्याग करना पड़ा।
बीते एक दशक में मजबूत हुई ऊर्जा सुरक्षा
सरकार का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किए गए निवेश का लाभ इस संकट के दौरान मिला। वर्ष 2014 में जहां देश में 11 एलपीजी आयात टर्मिनल थे। वहीं, अब उनकी संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इसी अवधि में एलपीजी आयात क्षमता 12 मिलियन टन प्रतिवर्ष से बढ़कर 32.3 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई।
इसके अलावा भारत अब 27 की बजाय 41 देशों से कच्चे तेल का आयात कर रहा है। लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देशों को भी सप्लाई चेन में शामिल किया गया है। रूस और अमेरिका से भी आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार ने वैकल्पिक समुद्री रूट्स का भी इस्तेमाल बढ़ाया, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता पहले की तुलना में कम हुई।
एथेनॉल मिश्रण से भी मिली राहत
सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से भी कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिली। सरकार का कहना है कि इससे हर साल बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की बचत हो रही है।
तेल कंपनियों पर पड़ा भारी वित्तीय बोझ
सरकार के अनुसार, सार्वजनिक तेल कंपनियों ने दो महीने से अधिक समय तक खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की। बाद में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई। इसके बावजूद कंपनियां एक समय प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये के अंडर रिकवरी का सामना कर रही थीं। यह बाद में घटकर करीब 650 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गई। अनुमान है कि चालू तिमाही में तेल कंपनियों को 1 से 1.2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
आसमान छूती कीमतें और सरकार पर बढ़ता दबाव
होर्मुज होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गईं। भारत जो तेल $70 प्रति बैरल में खरीद रहा था, उसकी कीमत महज चार हफ्तों में $120 के पार पहुंच गई। वहीं ब्रेंट क्रूड $126 प्रति बैरल के अपने उच्चतम स्तर पर जा पहुंच गया। दूसरी ओर, एलपीजी की कीमतों में 46% की भारी बढ़ोतरी हुई। इससे एक 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की आयात लागत बढ़कर 1,600 रुपये से अधिक हो गई। जहाजों का युद्ध-जोखिम बीमा (War-risk insurance) भी कई गुना बढ़ चुका था।
संकट के चक्रव्यूह को भारत ने कैसे तोड़ा?
इस अभूतपूर्व संकट के बीच भारत सरकार, तेल कंपनियों और कूटनीतिज्ञों ने मिलकर एक बहुआयामी रणनीति तैयार की, ताकि आम जनता पर इसका सीधा असर न पड़े:-
1. 10 साल की तैयारी आई काम (इन्फ्रास्ट्रक्चर का अपग्रेड)
भारत पिछले 10 वसालों से अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) पर लगातार निवेश कर रहा था। साल 2014 में जहाँ देश में केवल 11 एलपीजी आयात टर्मिनल थे। वहीं, 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 22 हो गई। इस वजह से एलपीजी आयात क्षमता 12 मिलियन टन (2014) से बढ़कर 2026 में 32.3 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई। इसने संकट के समय एक बड़े सुरक्षा कवच का काम किया.
2. नए देशों से दोस्ती और नए रास्ते की खोज
भारत ने केवल होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते पर निर्भर रहने के बजाय आक्रामक आपूर्ति की नीति अपनाई। साल 2014 में भारत जहां 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 41 देश हो गई। भारत ने लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देशों से तेल मंगाना शुरू किया। साथ ही अमेरिका और रूस से तेल के आयात को और गहरा किया। नए समुद्री रास्तों की खोज की गई, जिससे होर्मुज स्ट्रेट पर भारत की निर्भरता पहले के मुकाबले काफी कम हो गई।
3. घरेलू मोर्चे पर राहत और सरकारी खजाने पर बोझ
सरकार ने तुरंत डिमांड मैनेजमेंट (Demand-management) लागू किया और घरेलू स्तर पर तेल उत्पादन को तेजी से बढ़ाया। इसके अलावा, पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) के ऊंचे स्तर ने एक बड़ा सहारा दिया। इससे हर साल भारी मात्रा में कच्चे तेल के आयात की बचत होती है।
सबसे बड़ा फैसला यह था कि सरकार ने कीमतों का बोझ सीधे आम जनता पर नहीं डाला। सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने दो महीने से अधिक समय तक खुदरा कीमतों को स्थिर रखा। बाद में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में केवल 7 रुपये प्रति लीटर की मामूली बढ़ोतरी की। इस वजह से तेल कंपनियों को प्रति दिन करीब 650 करोड़ रुपये से लेकर 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा। इस तिमाही में उन्हें कुल 1 लाख करोड़ से 1.2 लाख करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान है।
अर्थव्यवस्था पर सीमित रहा असर
सरकार का दावा है कि पूरे संकट के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार 728 अरब डॉलर से अधिक के स्तर पर बना रहा। चालू खाते का घाटा नियंत्रण में रहा। साथ ही खुदरा महंगाई भी भारतीय रिजर्व बैंक की तय सीमा के भीतर रही। जीडीपी वृद्धि दर करीब 7 प्रतिशत के आसपास बनी रही।
दूसरे देशों से अलग रही भारत की रणनीति
रिपोर्ट के अनुसार, जहां कई देशों को पेट्रोल-डीजल की राशनिंग लागू करनी पड़ी। वहीं भारत ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। श्रीलंका, पाकिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश और इथियोपिया जैसे देशों ने ईंधन संकट से निपटने के लिए अलग-अलग प्रतिबंध लगाए। जबकि जापान, दक्षिण कोरिया और कई यूरोपीय देशों ने अपने रणनीतिक भंडार का उपयोग किया। साथ ही उपभोक्ताओं को सब्सिडी दी।
भारत में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए न तो ईंधन की राशनिंग लागू की गई और न ही स्कूल बंद करने या वर्किंग डे घटाने जैसे कदम उठाए गए। केवल कमर्शियल एवं थोक एलपीजी तथा डीजल और एविएशन फ्यूल के निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।
अब सामान्य हो रही स्थिति
सरकार के अनुसार, होर्मुज फिर से खुलने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटकर लगभग 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं। भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी का लगभग दो महीने का भंडार उपलब्ध है। साथ ही रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (ISPRL) की क्षमता बढ़ाने का काम भी जारी है। इससे भविष्य में किसी भी वैश्विक आपूर्ति संकट से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। हालांकि, खबर है कि अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ने की आशंका है।
अमर सिंह
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश के तौर पर,भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा तेल आयात करता है। इसलिए,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से उसे फायदा होता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में प्रति बैरल $1 की गिरावट से देश के सालाना आयात बिल में आम तौर पर लगभग 10,000 से 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।
इसके साथ ही जियोपॉलिटिकल जोखिम कम हो रहे हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव का घटना,ईरान-इजरायल युद्ध का समाधान,होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही का शुरू होना भी भारत के लिए फायदेमंद है। इससे देश को महंगाई कम होने,करंट अकाउंट घाटा घटने,रुपये को सहारा मिलने और RBI व सरकार के लिए पॉलिसी बनाने की बेहतर गुंजाइश मिलने जैसे फायदे होंगे।
इतिहास गवाह है कि तेल की कीमतों में भारी गिरावट (जैसे 2014-16 के दौरान) ने कुछ खास सेक्टर को काफी फायदा पहुंचाया है,भले ही ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार धीमी रही हो। मौजूदा हालात से फायदे में रहने वाले सेक्टर एक जैसे नहीं हैं। ये फायदे उन इंडस्ट्रीज़ तक सीमित हैं जहां फ्यूल या कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की लागत का हिस्सा बहुत ज्यादा होता है,या जहां कम महंगाई और ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम से बिक्री की मात्रा(वॉल्यूम)सीधे तौर पर बढ़ती है।
कच्चे तेल के भाव कम होने से एविएशन सेक्टर को सीधा और बड़ा फायदा मिलता है। भारतीय एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF)का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत होता है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से ATF की कीमतें तुरंत कम हो जाती हैं,जिससे इंडिगो,एयर इंडिया और स्पाइसजेट के ऑपरेटिंग मार्जिन में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होती है।
तेल के भाव घटने से एयरलाइंस या तो अपने मार्जिन को सुरक्षित रख सकती हैं या कम किराए के जरिए डिमांड बढ़ा सकती हैं। ये दोनों ही बातें इस सेक्टर के लिए अच्छी हैं। कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होने से हेजिंग की लागत भी कम हो जाती है। पहले के दौर में,तेल की कीमतों में बदलाव पर एयरलाइन शेयरों ने अच्छी तेजी दिखाई है। घरेलू हवाई ट्रैफिक में अभी भी मजबूत बढ़त बनी हुई है,इसलिए ईंधन की कम लागत इनके मुनाफे और क्षमता बढ़ाने में आने वाली एक बड़ी रुकावट को दूर कर सकती है।
इसके बाद डाउनस्ट्रीम ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs)और कच्चे तेल से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का नंबर आता है। इंडियन ऑयल,BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने की कम लागत का फायदा मिलता है। जब रिटेल फ्यूल की कीमतों में बदलाव में देरी होती है या टैक्स की वजह से कीमतों में आई गिरावट का कुछ हिस्सा एडजस्ट हो जाता है। ऐसे में इनका मार्केटिंग मार्जिन बढ़ जाता है। इनको इन्वेंट्री से होने वाला फायदा भी मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में कमी से पेंट सेक्टर को फायदा होता है। इनके कच्चे माल की लागत (जैसे सॉल्वैंट्स,रेजिन और कुछ एडिटिव्स)का 35-50 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल से जुड़ा होता है। ऐसे में कच्चे तेल में नरमी से एशियन पेंट्स,बर्जर पेंट्स और ऐसी दूसरी कंपनियों को अच्छे मार्जिन या कीमतें तय करने में लचीलेपन का फायदा मिलता है।
टायर बनाने वाली कंपनियों (अपोलो टायर्स,MRF,सिएट,JK टायर)को सिंथेटिक रबर और कार्बन ब्लैक की लागत में कमी से राहत मिल रही है। लुब्रिकेंट्स और कुछ खास केमिकल सेगमेंट को भी इसका फायदा हो रहा है। जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो इन कंपनियों के लिए लागत कम,मार्जिन ज्यादा वाली क्लासिक स्थितियां बनती हैं।
तेल की कीमतों में कमी से ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को लागत और मांग,दोनों ही फ्रंट पर फायदा होता है। टू-व्हीलर और पैसेंजर गाड़ियों के मामले में,पेट्रोल और डीजल की कम कीमतें गाड़ियों की कुल ओनरशिप लागत (टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप)को बेहतर बनाती हैं। कीमत को लेकर संवेदनशील बाजार में यह खरीदारी का एक अहम कारण होता है। पहले भी देखा गया है कि जब ईंधन की कीमतें कम रही हैं,तब एंट्री-लेवल और मास-मार्केट सेगमेंट में रिटेल बिक्री में तेजी आई है।
इसके अलावा क्रूड की कीमतों में कमी से कमर्शियल गाड़ियों और बड़े लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम (ट्रकिंग,लास्ट-माइल डिलीवरी)को डीजल खर्च पर सीधे बचत होती है,जो वेरिएबल कॉस्ट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों की ऑपरेटिंग लेवरेज बेहतर होती है और ज्यादा ब्याज दरों वाले माहौल में वॉल्यूम रिकवरी में मदद मिल सकती है। भारत में सामान की ढुलाई के लिए सड़क परिवहन ही मुख्य जरिया (70%) है,इसलिए सप्लाई चेन पर इसका मल्टीप्लायर असर काफी अहम है।
कच्चे तेल में नरमी से कंज्यूमर-फेसिंग सेक्टर और फाइनेंशियल सेक्टर को मैक्रो-लेवल पर दूसरे दौर के फायदे मिलते हैं। फ्यूल और ट्रांसपोर्ट की लागत कम होने से महंगाई कम होती है। इससे RBI को पॉलिसी रेट्स को मैनेज करने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिलती है। इससे क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी में सुधार होता है। जिन बैंकों और NBFCs का रिटेल और SME पोर्टफोलियो मज़बूत है,उन्हें कम महंगाई,स्थिर या कम रेट्स और बेहतर होते कॉर्पोरेट कैश फ्लो के अच्छे चक्र से फायदा होता है।
इसके अलावा ईंधन और ट्रांसपोर्ट पर खर्च कम होने से’कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी’और कुछ खास FMCG कैटेगरी में खर्च करने लायक आय(डिस्पोजेबल इनकम)में थोड़ी लेकिन वास्तविक बढ़ोतरी देखने को मिलती है। अगर कम महंगाई और बेहतर फिस्कल हेडरूम (ईंधन सब्सिडी का दबाव कम होने से)से बेहतर कैपेक्स(पूंजीगत व्यय)माहौल बनता है या ब्याज दरों पर निर्भर मांग में सुधार होता है,तो रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो सकता है।
भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से इन प्रभावों का असर सिर्फ तेल के गणित से कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। ग्लोबलअनिश्चितता कम होने से इक्विटी रिस्क प्रीमियम घटता है,FII निवेश को बढ़ावा मिलता है और कुल मिलाकर जोखिम लेने की क्षमता बेहतर होती है। ग्लोबल ट्रेड और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़े सेक्टर जैसे कुछ कैपिटल गुड्स,चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज़्म/हॉस्पिटैलिटी शेयरों के लिए अनुकूल माहौल बनता है। सप्लाई-चेन में स्थिरता से आयात पर निर्भर असेंबली इंडस्ट्रीज को भी मदद मिलता है।
सस्ती एनर्जी और शांत भू-राजनीतिक स्थिति का मेल वोलैटिलिटी के उन मुख्य कारणों में से एक को घटाता है,जिन्होंने समय-समय पर भारत की विकास गाथा में बाधा डाली है।
एक बार होने वाले इन्वेंट्री या मार्जिन से मिलने वाले फायदे और लगातार होने वाली कमाई में बढ़ोतरी के बीच फ़र्क करना जरूरी है। ग्राहकों को कितना फायदा होगा और कंपनियां कितना फायदा अपने पास रखेंगी,यह टैक्स पॉलिसी,कॉम्पिटिशन की तीव्रता और प्राइसिंग डिसिप्लिन पर निर्भर करेगा। फायदा पाने वाले सेक्टर की हर कंपनी को एक जैसा फायदा नहीं होगा। बैलेंस-शीट की मजबूती,प्राइसिंग पावर और ऑपरेशनल क्षमता के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां ज्यादा बेहतर स्थिति में रहेंगी।
बुनियादी नज़रिए से देखें तो,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कम होते जियोपॉलिटिकल तनाव का मेल भारत के लिए एक अच्छा संकेत है। इससे बाहरी फैक्टर का दबाव कम होता है,महंगाई पर लगाम लगती है और ज्यादा कर्ज वाले सेक्टर में कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है। जब तेल की कीमतें गिरती हैं और तो बाजार अक्सर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है।
इस स्थिति में निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जिनका ऑपरेटिंग लेवरेज ज़्यादा हो (खासकर ईंधन या कच्चे तेल से जुड़े इनपुट के मामले में),जिनकी बैलेंस शीट मज़बूत हो (ताकि वे किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकें) और जिनकी वॉल्यूम ग्रोथ भरोसेमंद हो। ऐसे माहौल में, एविएशन,OMCs,पेंट,टायर,ऑटोमोबाइल,लॉजिस्टिक्स और ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले फाइनेंशियल सेक्टर में चुनिंदा निवेश करना,भारत की जारी स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी में शामिल होने का एक भरोसेमंद तरीका है।
अमर सिंह एंजेल वन में रिसर्च के सीनियर VP हैं.
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Ketan Agarwal Murder Case: पुलिस ने पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की कथित हत्या की आरोपी एवं उनकी मंगेतर सिया गोयल को रविवार 28 जून को लोहागढ़ किले ले जाकर अपराध स्थल पर घटनाक्रम दोहराया। पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य 18 जून के सटीक घटनाक्रम का पता लगाना है। आरोप है कि 20 वर्षीय सिया और उसके प्रेमी चेतन चौधरी (22) ने अग्रवाल को किले से धक्का देकर उनकी हत्या कर दी थी। दोनों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों से पूछताछ में हर रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं।
पुलिस आरोपी सिया गोयल को क्राइम सीन को फिर से रीक्रिएट करने के लिए लोहागढ़ किले में ले गई। पुणे ग्रामीण पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सिया को लोहागढ़ किले में उस स्थान पर ले जाया गया, जहां से उसने चेतन चौधरी के साथ मिलकर अग्रवाल को कथित रूप से धक्का दिया था। चेतन को अलग से किले में ले जाया जाएगा।”
उन्होंने बताया कि घटनाक्रम दोहराए जाने के दौरान इस संबंध में आरोपी के दावों की पुष्टि की जाएगी कि अग्रवाल को किस तरह और किस स्थान से धक्का दिया गया था। गोयल और चौधरी को अग्रवाल की हत्या की साजिश रचने और उन्हें पुणे जिले के लोहागढ़ किले से धक्का देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
सिया ने पुलिस को क्या बताया
सिया ने पुलिस को कथित तौर पर बताया कि वह अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी। उसे लगा कि शादी तोड़ने से परिवार की बदनामी होगी इसलिए उसने चौधरी के साथ मिलकर अग्रवाल की हत्या की साजिश रची।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ता मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रहे हैं। इनमें कथित अपराध की साजिश, घटना से पहले और बाद में आरोपियों की गतिविधियां, उनके डिजिटल रिकॉर्ड और हत्या का मकसद शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, सिया गोयल (20) और चेतन चौधरी (22) के खिलाफ केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। इन दोनों के आपस में प्रेम संबंध थे। आरोप है कि 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले में अग्रवाल को एक चट्टान से धक्का देकर उसकी हत्या कर दी गई।
‘चेतन ने ही सिया को मंगेतर की हत्या के लिए उकसाया था’
केतन अग्रवाल की कथित हत्या मामले की जांच में सामने आया है कि सह-आरोपी चेतन चौधरी ने ही अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल को उसकी हत्या के लिए उकसाया था। पुलिस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह दावा किया।
इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने अग्रवाल परिवार की उस मांग को मान लिया है जिसमें मशहूर वकील उज्ज्वल निकम को विशेष अभियोजक नियुक्त करके फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने की बात कही गई थी।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, “दोनों आरोपियों से पूछताछ में यह सामने आया कि चौधरी ने ही गोयल को लोहागढ़ किले पर अग्रवाल की हत्या करने के लिए उकसाया था।” उन्होंने बताया कि मामले में गोयल के भाई से भी पूछताछ की गई है।
केतन के पिता ने क्या कहा?
केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने पत्रकारों को बताया कि यह सच है कि केतन विग का एक छोटा सा पैच लगाता था। सगाई से पहले ही सिया और उनके परिवार को इस बारे में बता दिया गया था। उन्होंने कहा, “…अगर उसे (सिया) कोई दिक्कत थी, तो उसे मना कर देना चाहिए था। मेरे बेटे की जान लेने की क्या जरूरत थी?”
जांच से जुड़े पुणे देहात पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि चट्टान वाले स्थान पर पहुंचने के बाद पहले से तय संकेत सिया ने चेतन चौधरी को दिया, जिसके बाद चौधरी ने अग्रवाल को पीछे से धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस बीच, सिया गोयल की मां ने दावा किया कि उनकी बेटी 18 जून को लोहागढ़ किले जाने के लिए तैयार नहीं थी। लेकिन केतन अग्रवाल और उनकी मां ने उसे वहां जाने के लिए मना लिया।
उन्होंने कहा, “17 जून की शाम सिया और केतन के बीच वीडियो कॉल पर बातचीत हुई थी। इस दौरान केतन ने सिया से लोहागढ़ चलने का आग्रह किया। कॉल के दौरान केतन की मां ने भी सिया से बात की और उसके साथ जाने के लिए कहा। सिया ने उन्हें बताया था कि अगले दिन एक पारिवारिक कार्यक्रम है, इसलिए वह ट्रैकिंग पर नहीं जाना चाहती और आराम करना चाहती है।”
वहीं, सिया गोयल के पिता ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि शादी के लिए उदयपुर में एक महल बुक किया गया था। साथ ही मेहमानों के लिए चार्टर्ड विमान की व्यवस्था की गई थी।
केतन के पिता से मिले सीएम फडणवीस
इस बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को पुणे में केतन अग्रवाल के पिता विशाल अग्रवाल से मुलाकात की। इस दौरान सीएम ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनके बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए सरकार हरसंभव कदम उठाएगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, फडणवीस ने परिवार की इस मांग को भी स्वीकार कर लिया कि मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालत में कराई जाए और वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को इस मामले में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया जाए।
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पत्रकारों से बातचीत में फडणवीस ने कहा कि यह घटना समाज में उभर रही एक बेहद चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाती है, जिस पर गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें इस बात पर विचार करना होगा कि अच्छे परिवारों के शिक्षित युवा-युवतियों के मन में आखिर ऐसी आपराधिक मानसिकता या बदले की भावना क्यों पैदा हो रही है। यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है। बल्कि इसका एक सामाजिक पक्ष भी है।
VIDEO | Maharashtra: In Ketan Agarwal murder case, police brings accused Siya Goyal to Lohadgad fort to recreate the crime scene.
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/oZY8iED78E
— Press Trust of India (@PTI_News) June 28, 2026
India Weather Today: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon 2026) तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज बिहार, झारखंड, केरल और असम समेत देश के करीब 21 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून की उत्तरी सीमा इस समय सूरत, इंदौर, मांडला, डालटनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है।
अगले 2-3 दिनों के भीतर इसके गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के शेष हिस्सों और यूपी-उत्तराखंड में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। एक तरफ जहां कई राज्यों में मूसलाधार बारिश आफत बनकर बरसने वाली है। वहीं दिल्ली, यूपी और बिहार के कुछ हिस्सों में आज भी भीषण गर्मी और लू का कहर देखने को मिलेगा।
बेहद भारी बारिश का रेड अलर्ट: असम, मेघालय और बंगाल के लिए चेतावनी
मौसम विभाग ने देश के कुछ हिस्सों में मूसलाधार और रिकॉर्ड तोड़ बारिश का अनुमान जताया है। असम और मेघालय में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने और कुछ अलग-अलग हिस्सों में बेहद भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत भारी बारिश होने का रेड अलर्ट जारी किया गया है।
इन राज्यों में होगी बहुत भारी बारिश
आईएमडी के मुताबिक, कुछ राज्यों में आज मानसून की सक्रियता बहुत अधिक रहेगी, जिससे वहां भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जाएगी। अरुणाचल प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना है। दक्षिण भारत के केरल और माहे में भी मौसम विभाग ने बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान लगाया है।
बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
टदेश के कई हिस्सों में आज भारी बारिश होने की संभावना है। मुख्य रूप से प्रभावित होने वाले राज्य निम्नलिखित हैं:-
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: बिहार, ओड़िशा, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के अलग-अलग पॉकेट्स में भारी बारिश हो सकती है। मध्य और पश्चिमी भारत: छत्तीसगढ़, विदर्भ, कोंकण और गोवा में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
दक्षिण भारत: तटीय कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और लक्षद्वीप के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश होने का अनुमान है।
केंद्र शासित प्रदेश: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।
दिल्ली से यूपी तक आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली की चेतावनी
मौसम विभाग ने बारिश के साथ-साथ तेज हवाओं और गरज-चमक को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। अंडमान और निकोबार में अलग-अलग स्थानों पर 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ थंडरस्कॉल आने की आशंका है।
40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी: दिल्ली, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, महाराष्ट्र, ओड़िशा, कोंकण व गोवा, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल, केरल, माहे और लक्षद्वीप में अलग-अलग स्थानों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली चमकने का अनुमान है।
30-40 किमी/घंटे की हवाएं: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम राजस्थान, तेलंगाना, तटीय कर्नाटक, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा पंजाब और छत्तीसगढ़ में भी बिजली चमकने के साथ आंधी आ सकती है।
दिल्ली, यूपी और बिहार में लू का प्रकोप
बारिश के इस मौसम के बीच उत्तर भारत के कुछ राज्य अभी भी भीषण गर्मी की चपेट में रहेंगे। यूपी में आज मौसम का सबसे कड़ा रूप दिखेगा। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लू से लेकर भीषण लू चलने की आशंका जताई गई है। पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ पॉकेट्स में गंभीर लू की स्थिति बनी रहेगी। दिल्ली (हरियाणा, चंडीगढ़ एवं दिल्ली) और बिहार के अलग-अलग इलाकों में आज लू चलने की संभावना है, जिससे लोगों को तीखी गर्मी का सामना करना पड़ेगा।
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Ketan Agarwal murder case: पुणे के युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की जारी जांच के बीच सोशल मीडिया पर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी का एक क्रिकेट मैच देखते हुए चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। वायरल क्लिप में सिया और चेतन दर्शकों के स्टैंड में बैठकर मैच देखते और बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वायरल वीडियो में चेतन चौधरी के कंधे पर सर रखकर सिया मैच देख रही है। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह वीडियो अहम है क्योंकि इससे इस दावे को बल मिल सकता है कि सिया और चेतन केतन अग्रवाल से सगाई और शादी से पहले रिलेशनशिप में थे।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि सिया के परिवार को इस रिश्ते के बारे में तब पता चला जब दोनों को एक क्रिकेट मैच में साथ देखा गया था। रिश्ते के बारे में पता होने के बावजूद, सिया के परिवार ने अग्रवाल परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए केतन के साथ उसकी शादी करवा दी। जांच के तहत, पुणे पुलिस ने सिया के माता-पिता और भाई से पूछताछ की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्हें इस रिश्ते और अरेंज मैरिज से जुड़े हालात के बारे में क्या जानकारी थी।
दोस्ती की शुरुआत क्रिकेट से हुई
सिया गोयल और चेतन चौधरी पर सिया के मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप है। बताया जा रहा है कि उनकी दोस्ती की शुरुआत क्रिकेट से हुई थी। वे सिया के भाई साहिल के एक क्रिकेट मैच के दौरान मिले थे। बाद में उनके बीच नजदीकियां बढ़ गईं। खेल के प्रति उनका जुनून एक बिना तारीख वाले वीडियो में साफ दिखता है। सिया और चेतन एक मैच के दौरान दर्शकों की गैलरी में बैठे और बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
दोनों के बीच लगातार हो रही थी बात
यह क्लिप ऐसे समय में सामने आया है जब जांचकर्ता कथित हत्या की साजिश की जांच कर रहे हैं। पुलिस ने उनके फोन रिकॉर्ड की जांच की तो पाया कि जनवरी से अब तक उन्होंने आपस में 2,004 बार बात की थी। इससे उनके कथित रिश्ते का पता चलता है। इन कॉल्स की कुल अवधि 238 घंटे थी। सिया और केतन की सगाई फरवरी में हुई थी। जबकि उनकी शादी इस नवंबर में होने वाली थी।
सिया गोयल के माता-पिता और भाई से पूछताछ की
महाराष्ट्र पुलिस ने पुणे के 25 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में आरोपी सिया गोयल के माता-पिता और भाई से पूछताछ की है। केतन की मंगेतर सिया गोयल (20) और उसके प्रेमी चेतन चौधरी (22) को 18 जून को पुणे जिले के मावल तालुका स्थित लोहागढ़ किले की एक चट्टान से केतन को खाई में धक्का देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि सिया के माता-पिता प्रवीण और पूजा गोयल और भाई साहिल पूर्वाह्न करीब 11 बजे अपने बयान दर्ज कराने के लिए लोनावला ग्रामीण पुलिस थाने पहुंचे और लगभग 12 घंटे बाद वहां से निकले। इससे पहले शुक्रवार को पुलिस ने साहिल से 10 घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की थी।
शादी नहीं करना चाहती थी सिया
सिया ने कथित तौर पर पुलिस को बताया है कि वह अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी। इसलिए उसने चौधरी के साथ मिलकर उसकी हत्या की साजिश रची, क्योंकि उसे लगा कि शादी तोड़ने से परिवार की बदनामी होगी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ता मामले के कई पहलुओं की जांच कर रहे हैं, जिनमें कथित अपराध की योजना, घटना से पहले और बाद में आरोपियों की गतिविधियां, उनके ‘डिजिटल फुटप्रिंट’ और हत्या के पीछे का मकसद शामिल है।
पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपियों ने सबूत मिटाने की कोशिश में 18 जून से पहले और घटना के बाद अपने मोबाइल फोन से चैट रिकॉर्ड हटा दिया। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि जांच अभी जारी है। पूछताछ के दौरान दिए गए बयानों की पुष्टि के लिए और सबूत जुटाए जा रहे हैं।
Ketan Agarwal was too innocent to find out Siya Goyal’s relationship with Chetan Choudhary.
-See the way both of them are casually watching cricket match in a stadium. pic.twitter.com/4AiOIWXnGo
— Gagan Choudhary (@trigguuuu) June 27, 2026
इस बीच, केतन को न्याय दिलाने की मांग को लेकर उस हाउसिंग सोसाइटी में कैंडल मार्च निकाला गया, जहां अग्रवाल परिवार रहता है। केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने कहा कि परिवार को न्याय के अलावा और कुछ नहीं चाहिए। उन्होंने बताया कि घटना के दिन लोहागढ़ किले पर कई लोग मौजूद थे।उनसे अपील की कि वे आगे आएं और पुलिस को जानकारी दें।
Chetan and Siya were watching a match that was being broadcast on national television.
Wouldn’t Siya’s parents or some relative have seem them?Siya’s parents knew everything, yet they kept this fact hidden from Ketan. pic.twitter.com/B1dhLLf8AH
— Krisha (@KrishaAsiagh) June 27, 2026
Iran-US War Update: ईरान और अमेरिका के बीच फिर से युद्ध शुरू हो गया है। अमेरिकी हमले के बाद अब ईरान ने अमेरिका पर जोरदार पलटवार किया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की है कि उसकी नौसेना और एयरोस्पेस बलों ने ईरानी क्षेत्र पर ताजा अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत और बहरीन में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए एक संयुक्त मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन शुरू किया है। इस हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है।
IRGC ने कहा है कि उसने खाड़ी देशों में मौजूद 8 अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे पहले अमेरिका ने दूसरे दिन लगातार रविवार तड़के ईरान पर बड़ा हमला किया है। ईरान के मिसाइल और ड्रोन फैसिलिटी पर हमले के बाद ट्रंप ने ईरान पर सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगाया। साथ ही ईरान को नक्शे से मिटाने की धमकी दी है।
IRGC ने क्या कहा?
IRGC की नेवल और एयरोस्पेस यूनिट्स ने मिलकर यह ऑपरेशन किया है। इसे ईरान के अंदर हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों का बदला बताया गया। गार्ड्स ने एक बयान में कहा, “कुवैत में अली अल-सलेम बेस और बहरीन के पोर्ट सलमान में फिफ्थ फ्लीट नेवल बेस पर आठ ज़रूरी अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों को तबाह कर दिया।”
गार्ड्स ने कहा, “दुश्मन की किसी भी आक्रामकता का चाहे उसका बहाना कुछ भी हो, और चाहे वह मामूली लक्ष्यों के ख़िलाफ़ ही क्यों न हो…करारा जवाब दिया जाएगा।” IRGC के अनुसार, यह हमला शनिवार को अमेरिकी सेना की उस कार्रवाई के जवाब में किया गया है जिसमें ईरान के मिसाइल और ड्रोन डिपो के साथ-साथ तटीय रडार सुविधाओं को निशाना बनाया गया था।
ईरान के सरकारी मीडिया ने यह भी आरोप लगाया कि वाशिंगटन ने ईरान के पांच तटीय ठिकानों पर हमला किया था। साथ ही, उसने आरोप लगाया कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज से जुड़ी घटना का इस्तेमाल इस सैन्य अभियान को सही ठहराने के लिए किया।
कुवैत ने मिसाइलों और ड्रोनों को रोका
कुवैत की सेना ने कहा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली दुश्मन मिसाइलों और ड्रोनों को रोका। पूरे देश में हवाई हमले के सायरन बजाए गए। जबकि बहरीन ने भी एहतियात के तौर पर चेतावनी वाले सायरन बजाए। अमेरिकी अधिकारियों की ओर से इस बारे में कोई तत्काल बयान नहीं आया कि क्या निशाना बनाए गए सैन्य ठिकानों को कोई नुकसान पहुंचा है या कोई हताहत हुआ है।
होर्मुज स्टेट में सिंगापुर के कमर्शियल जहाज द्वारा ईरान के निर्देश ना मानने पर उस पर ड्रोन हमला किया गया है। अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए। जबाब में ईरान ने भी खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे है।
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इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को ईरानी और ओमान के समुद्री इलाकों से निकालने के लिए दो नए रास्तों की घोषणा की है। ईरान ने इस योजना को खारिज कर दिया और कहा कि इसकी घोषणा बिना किसी बातचीत के की गई थी। ताइवान द्वारा संचालित ‘एवर लवली’ जहाज पर ओमान के तट के पास एक संदिग्ध ईरानी ड्रोन से हमला हुआ, जिससे जहाज को कुछ नुकसान तो हुआ। लेकिन चालक दल के किसी सदस्य को चोट नहीं आई।
Iran-US War: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से युद्ध शुरू हो गया है। अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर हमले किए हैं। इन हमलों की वजह एक कमर्शियल जहाज पर हुआ हमला बताया गया है। शनिवार 27 जून को हुए ये नए हमले इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के तहत लागू हुआ सीजफायर (युद्धविराम) अब टूटने की कगार पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान ने पनामा के तेल टैंकर पर ड्रोन हमला कर सीजफायर को तोड़ा है।
अमेरिकी सेना ने सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान समझौते को नहीं मानता तो उसकी अस्तिव ही नहीं रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार तड़के कहा कि अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर नए सैन्य हमले किए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा युद्धविराम समझौते का फिर से उल्लंघन करने के बाद की गई।
‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, “अमेरिकी विमानों ने युद्धविराम समझौते का ‘फिर से’ उल्लंघन करने के कारण ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों तथा तटीय रडार साइटों पर हमला किया है!” उन्होंने आगे कहा, “बहुत मुमकिन है कि वे कभी न सीखें! एक समय ऐसा आ सकता है जब हम समझदारी से काम न ले पाएं और हमें उस काम को मिलिट्री के ज़रिए पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े, जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था।”
ट्रंप ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी
ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “अगर ऐसा हुआ, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा!” अमेरिकी सेना के अनुसार, ये हमले ट्रंप के निर्देश पर किए गए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि शनिवार को एक कमर्शियल जहाज पर हमले के बाद अमेरिकी सैन्य विमानों ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया।
ईरान में कहां किया हमला?
CENTCOM ने बताया कि इस ऑपरेशन में ईरान के मिलिट्री सर्विलांस इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटीज और माइन-लेयरिंग क्षमताओं को निशाना बनाया गया। बाद में यह साफ किया गया कि इन हमलों में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और उसके आसपास कई जगहों पर ईरान के 10 मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाया गया।
सेना ने कहा कि ईरान के पास सीजफायर समझौते का सम्मान करने का मौका था। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय, उसकी सेनाओं ने कथित तौर पर ‘किकू’ (Kiku) नाम के ऑयल टैंकर पर वन-वे ड्रोन से हमला किया।
अमेरिका ने हमलों को ऑयल टैंकर पर हुए हमले से जोड़ा
CENTCOM के अनुसार, जब ‘किकू’ होर्मुज स्ट्रैट से गुज़र रहा था, तब उस पर हमला हुआ। उस समय उसमें 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) लदा हुआ था। यह टैंकर पिछले हफ्ते की शुरुआत में कतर के एक ऑयल फील्ड से निकला था और ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) में स्थित संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक बंदरगाह की ओर जा रहा था।
न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की शिप-ट्रैकिंग जानकारी के अनुसार, ऐसा लग रहा था कि यह जहाज ओमान के तट के पास वाले रास्ते का इस्तेमाल कर रहा था। यह रूट ईरान द्वारा अपने जलक्षेत्र से तय किए गए रास्ते के विकल्प के तौर पर उभरा है।
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अमेरिकी नौसेना ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हमला किया। यह जानकारी अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके बताई। CENTCOM के मुताबिक ये हमले होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी ठिकानों पर किए गए। यह कार्रवाई ‘एम/टी किकु’ नाम के तेल टैंकर पर हुए ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में की गई है। रॉयटर्स के मुताबिक होर्मुज से गुजर रहे एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया। जहाज को नुकसान पहुंचा, लेकिन वह आगे बढ़ रहा है। अमेरिका ने ईरान पर हमला करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। यह कार्रवाई अमेरिका की ईरान के मिसाइल-ड्रोन ठिकानों पर हालिया सैन्य कार्रवाई के जवाब में की गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हमले का यह वीडियो जारी किया… पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स… 1. अमेरिका ने ईरान पर फिर किए हवाई हमले: अमेरिका ने शुक्रवार को करीब एक घंटे तक ईरान के मिसाइल, ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार साइट्स पर हवाई हमले किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने युद्धविराम तोड़ा था, इसलिए यह कार्रवाई की गई।
2. ईरान का अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला: ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि, किन ठिकानों पर हमला हुआ, इसकी जानकारी नहीं दी गई।
3. होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकर पर हमला: ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर हमला हुआ। जहाज के कंट्रोल रूम को नुकसान पहुंचा है, लेकिन सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और तेल रिसाव की सूचना नहीं है।
4. खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां: ईरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां जारी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए उनके पार्थिव शरीर को सड़क के बजाय हेलिकॉप्टर या सैन्य विमान से ले जाने पर विचार किया जा रहा है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
US Attack on Iran: अमेरिका और ईरान के बीच हुआ शांति समझौता (Peace Deal) दो सप्ताह भी नहीं टिक सका। शनिवार को अमेरिका ने 24 घंटे के भीतर दूसरी बार ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Hormuz Strait) के पास स्थित ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर एयर स्ट्राइक

