Market Outlook: जुलाई में शेयर बाजार में आएगी तेजी? पिछले 25 साल का रिकॉर्ड दे रहा बड़ा संकेत

Market Outlook: पिछले करीब तीन महीने से भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में घूम रहा है। कभी हल्की तेजी तो कभी हल्की गिरावट, लेकिन कोई बड़ा मूव देखने को नहीं मिला। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या जुलाई का महीना बाजार के लिए कुछ नया लेकर आएगा?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इतिहास पर नजर डालें तो जुलाई का महीना शेयर बाजार के लिए अक्सर अच्छा साबित हुआ है। वहीं, मौजूदा आर्थिक हालात भी बाजार के पक्ष में नजर आ रहे हैं।

जुलाई का रिकॉर्ड क्या कहता है?

SAMCO Securities के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट जहोल प्रजापति का कहना है कि ऐतिहासिक आंकड़े जुलाई के पक्ष में इशारा करते हैं। उन्होंने कहा, ‘साल 2001 से 2025 के बीच 25 साल में निफ्टी 50 ने जुलाई में 18 बार बढ़त दर्ज की है। यानी करीब 72% बार बाजार हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान औसत रिटर्न 2.19% रहा। दिसंबर और नवंबर के बाद जुलाई निफ्टी के लिए तीसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला महीना रहा है।’

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ पुराने ट्रेंड देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। लेकिन जुलाई में हर साल कुछ ऐसे फैक्टर देखने को मिलते हैं, जो बाजार को सपोर्ट देते हैं। इनमें सामान्य मानसून की शुरुआत, पहली तिमाही (Q1) के नतीजों से जुड़ी उम्मीदें और घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी शामिल हैं।

मौजूदा हालात भी बाजार के लिए अच्छे

जहोल प्रजापति का कहना है कि इस समय कई ऐसे फैक्टर हैं, जो बाजार के लिए राहत की खबर हो सकते हैं।

  • भू-राजनीतिक तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की उम्मीद है।
  • कच्चे तेल की कीमतें घटकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।
  • इससे कंपनियों की लागत कम हो सकती है और महंगाई पर भी दबाव घट सकता है।
  • साल की शुरुआत में कमजोर पड़ा रुपया अब संभलता दिख रहा है।
  • विदेशी निवेशकों (FPI) की बिकवाली भी पहले के मुकाबले कम हुई है, जिससे बाजार में भरोसा बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि अगर दुनिया में कोई बड़ा नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होता है, तो ये सभी बातें भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बना सकती हैं।

चार्ट क्या बता रहे हैं?

SAMCO Securities के डेरिवेटिव्स रिसर्च एनालिस्ट धूपेश धामेजा का कहना है कि 1 जुलाई को निफ्टी ने अच्छी मजबूती दिखाई और बुलिश कैंडल बनाई। इंडेक्स ने 23,850-23,900 के सपोर्ट जोन को बचाए रखा। यही इलाका हालिया ब्रेकआउट एरिया और 50-DEMA के आसपास भी है। हालांकि, 24,000 के ऊपर पहुंचने के बावजूद निफ्टी को 100-DEMA के पास मजबूत रुकावट मिल रही है। यही वजह है कि बाजार अभी भी एक छोटी रेंज में फंसा हुआ है।

उन्होंने बताया कि RSI अब धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है और फिलहाल 55.13 पर है। जब तक RSI 50 से ऊपर रहेगा, तब तक बाजार का रुख पॉजिटिव माना जाएगा। हालांकि, असली तेजी का संकेत तभी मिलेगा, जब निफ्टी मौजूदा रेजिस्टेंस के ऊपर निकल जाएगा। धामेजा ने यह भी कहा कि India VIX 2.63% गिरकर 13.24 पर आ गया है। इसका मतलब है कि बाजार में घबराहट कम हो रही है और निवेशक फिलहाल ज्यादा सहज नजर आ रहे हैं।

क्या 24,200 तक जा सकता है निफ्टी?

LKP Securities के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि 1 जुलाई को भी निफ्टी अपनी हालिया ट्रेडिंग रेंज से बाहर नहीं निकल पाया। पिछले कुछ सत्रों से इंडेक्स 24,000 के आसपास ही घूम रहा है, जिससे साफ है कि बाजार को अभी नई दिशा नहीं मिली है।

हालांकि, उनका मानना है कि शॉर्ट टर्म ट्रेंड अभी भी सकारात्मक है। जब तक निफ्टी 23,800 के ऊपर बना रहता है, तब तक तेजी की उम्मीद कायम रहेगी। उन्होंने कहा कि अगर यह सपोर्ट नहीं टूटता है, तो आने वाले दिनों में निफ्टी धीरे-धीरे 24,200 और उससे ऊपर के स्तर की ओर बढ़ सकता है। 1 जुलाई को निफ्टी 50 में 0.59% की तेजी आई और यह 24,005.85 पर बंद हुआ। वहीं, BSE Sensex 0.58% चढ़कर 76,922.64 के स्तर पर पहुंच गया।

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Gold Silver Price Today: सोना फिसला, चांदी ने लगाई 5000 रुपये की छलांग

Gold Silver Price Today: राष्ट्रीय राजधानी में 1 जुलाई को सोने में गिरावट आई। डॉलर में मजबूती और विदेशी बाजारों के ट्रेंड का असर भारत में सोने की कीमतों पर पड़ा। यह 1,300 रुपये गिरकर 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। उधर, चांदी की चमक बढ़ी। यह 5000 रुपये चढ़कर 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।

विदेश में लगातार तीसरे दिन सोना गिरा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.54 फीसदी गिरकर 3,986.07 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी 1 फीसदी गिरकर 58 डॉलर प्रति औंस पर रही। लेमन मार्केट्स डेस्क में रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग ने कहा, “बुधवार को भारत में सोने पर दबाव दिखा। इसकी वजह डॉलर में मजबूती और बढ़ती बॉन्ड यील्ड है। इसका असर कीमती मेटल की डिमांड पर पड़ा। “

डॉलर इंडेक्स में मजबूती ने सोने पर बनाया दबाव

मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज हेड प्रवीण सिंह ने कहा, “विदेशी बाजारों में सोने में लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। इसकी वजह डॉलर इंडेक्स में मजबूती है। यह 0.15 फीसदी चढ़कर 101.34 पर पहुंच गया।” डॉलर में मजबूती से विदेशी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है।

भारत में एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स में तेजी दिखी

इधर, कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स में तेजी दिखी, जबकि सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट दिखी। शाम के कारोबार में गोल्ड फ्यूचर्स 0.46 फीसदी यानी 659 रुपये चढ़कर 1,43,190 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 0.64 फीसदी यानी 1,461 रुपये की कमजोरी के साथ 2,25,582 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा था।

रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 30 फीसदी गिर चुका है सोना

इस साल गोल्ड की कीमतें जनवरी के आखिर में करीब 5600 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी। इस लेवल से गोल्ड करीब 30 फीसदी गिर चुका है। जून तिमाही में गोल्ड में करीब 14 फीसदी की गिरावट आई। सिर्फ जून में यह 11 फीसदी गिरा। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान की लड़ाई ने बुलियन पर दबाव बढ़ा दिया।

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अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद से भी गिरा सोना

एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल में गोल्ड में गिरावट की वजह डॉलर में मजबूती और अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इस साल इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। बढ़ते इंटरेस्ट रेट के माहौल में गोल्ड की चमक घट जाती है। इंटरेस्ट रेट घटने पर गोल्ड की चमक बढ़ जाती है।

Gold Silver Outlook: सात महीने के निचले स्तर पर आए सोने-चांदी के दाम, जानें आगे कैसी रहेगी चाल

Gold Silver Price Analysis: भारतीय घरेलू वायदा बाजार में बुधवार, 1 जुलाई को सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई कमजोरी, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और ब्याज दरों के ऊंचे स्तर पर बने रहने की आशंकाओं के चलते घरेलू सर्राफा बाजार में बिकवाली का तगड़ा दबाव देखा गया। आइए समझते हैं सोने-चांदी में आई इस बड़ी गिरावट की प्रमुख वजहें।

MCX पर कितना गिरे सोने और चांदी के दाम?

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखी गई:

सोना: अगस्त डिलीवरी वाला सोना ₹1701 (1.19%) की भारी गिरावट के साथ ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

चांदी: सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में और भी बड़ी गिरावट रही। यह ₹5380 (2.35%) टूटकर ₹2.23 लाख प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) की बात करें तो वहां भी सोना करीब सात महीने के निचले स्तर पर $3993 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था, जबकि चांदी करीब 3% लुढ़ककर $57.73 प्रति औंस पर आ गई।

गिरावट की 3 सबसे बड़ी वजहें

1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और बढ़ती ब्याज दरें

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी सेंट्रल बैंक की नीतियां हैं। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों से संकेत मिले हैं कि अगर महंगाई काबू में नहीं आती है, तो इस साल के अंत में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की जा सकती है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो लोग सोने-चांदी जैसे बिना ब्याज वाले एसेट्स से पैसा निकालकर अन्य वित्तीय विकल्पों में लगाने लगते हैं, जिससे सोने के दाम गिरते हैं।

2. मिडिल ईस्ट का तनाव और कच्चे तेल की आंच

मिडिल ईस्ट में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। क्षेत्रीय विवादों के दोबारा बढ़ने के बाद ईरान ने अमेरिकी दूतों के साथ तत्काल बातचीत करने से इनकार कर दिया है, जिससे अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिसने वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंता को और बढ़ा दिया है।

3. अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकी नजरें

निवेशक और ट्रेडर्स इस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इनमें जून का ADP एम्प्लॉयमेंट डेटा और आगामी नॉन-फार्म पेरोल आंकड़े शामिल हैं। इन आंकड़ों से साफ होगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाने वाला है।

आगे क्या होगी सोने-चांदी की चाल?

रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक, सोना और चांदी दोनों सात महीने के निचले स्तर के करीब आ जाने से दबाव में बने हुए हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4000 प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बना रहता है, तो तकनीकी रूप से यह नीचे $3600 प्रति औंस के सपोर्ट जोन तक जा सकता है।

वहीं चांदी का $60 प्रति औंस से नीचे जाना यह इशारा करता है कि इसमें $50 प्रति औंस के स्तर तक और कमजोरी आ सकती है। हालांकि, बाजार के ओवरसोल्ड जोन में होने के कारण शॉर्ट-टर्म में एक रिकवरी रैली भी देखने को मिल सकती है।

PF, क्रेडिट कार्ड, पासपोर्ट फीस, Aadhaar अपडेट, LPG रेट, ITR डेडलाइन… 1 जुलाई से बदल गईं ये चीजें

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ईरान युद्ध से अमेरिका का सुपर पॉवर तमगा डगमगाया

Iran US War: अहंकार की लड़ाई जब दो व्यक्तियों में हो तो दो परिवार प्रभावित या बरबाद होते हैं, लेकिन जब ये दो देशों के बीच हो तो समूचा विश्व प्रभावित होता है और टकराने वाले दोनों ही देश बरबाद हो सकते हैं। रूस-यूक्रैन में टकराव तो 2014 से ही प्रारंभ हो गया था, किंतु पूर्णकालिक युद्ध 24 फरवरी 2022 से शुरू हुआ, जिसमें सीधे दोनों ने मैदान पकड़ लिया है, जिसमें अभी तक कोई कमजोर पड़ता नहीं दिखाई देता। इसी तरह से अमेरिका-वियतनाम के बीच 1955 में शुरू हुआ युद्ध 1975 में समाप्त हो सका था, वह भी अमेरिका सेना के पीछे हट जाने से। पीछे तो उसे अफगानिस्तान से भी हटना पड़ा, लेकिन फटे में टांग अड़ाने का अब भी कोई मौका वह नहीं छोड़ता। ऐसा ही है ईरान के साथ अमेरिका व इजराइल का हालिया पंगा, जो गले की हड्‌डी बन अटका है।

 

इस समय पूरी दुनिया में एक ही चर्चा है कि मध्य पूर्व एशिया में हाल-फिलहाल शांति हो पायेगी या अमेरिका-इजराइल का ईरान के साथ युद्ध चलता रहेगा? इस लाख टके के सवाल का अभी तो एक भी सही जवाब देने का माद्दा किसी में नहीं है। इन युद्धरत देशों में भी। फिर भी अभी तक के हालात के परिप्रेक्ष्य में यह तो कहा ही जा सकता है कि ईरान ने ऐंठ दिखाकर और अमेरिका ने युद्ध छेड़कर अक्लमंदी तो नहीं की। इजराइल तो आजीवन युद्धरत रहा है तो उसकी तो दिनचर्या ही ऐसी हो चुकी है। फिर भी, वह भी तीसमारखां तो नहीं बन पाया। इतिहास इस कालखंड का जब निर्मम, बेबाक और वास्तविक तथ्यों पर आधारित विश्लेषण करेगा, तब समूची दुनिया के लिए वे ऐसे सबक होंगे, जो आगामी काल के लिए निर्णायक और विषम परिस्थितियों में सटीक फैसले लेने में सहायक होंगे।

 

कोई माने या न माने, यह अटल सत्य है कि सुपर पॉवर का तमगा लिए दुनिया के सामने इतराने वाले अमेरिका की बुरी गत हुई है। यह न तो उसके लिए न शेष विश्व के लिए अच्छा संकेत है। जिस आतंकवाद से समूची दुनिया थर्राती आई है, उसे नकेल डालने में जो भूमिका अमेरिका निभा सकता था, यह उस पर संशय खड़े करता है। हालांकि यह भी उतना ही बड़ा सच है कि विश्व में आतंकवाद को पल्लवित करने में अमेरिका का प्रमुख हाथ रहा है। भले ही वह अपनी हथियार लॉबी की ब्लैकमेलिंग या ताकत के आगे झुककर फैसले लेते रहा हो। इक्कीसवीं सदी में अब जो आगे होगा, वह अमेरिका के एकाधिकार के खात्मे का इतिहास बनेगा। इसके लिए निर्विवाद रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ही दोषी करार दिए जाएंगे। 

 

बीसवीं और इक्कीसवीं सदी में अभी तक इतना भ्रमित, विचलित, विवादास्पद, सनकी और तानाशाही के मिश्रित चरित्र वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प पर ठप्पा लगेगा कि उन्होंने अमेरिका के सुपर पॉवर की छवि वाली बंद मुट्‌ठी को अंगुलियां मरोड़कर खोल दिया। यह कोई मामूली बात नहीं है कि उनके अपने देश में 60 लाख लोग उनकी युद्ध नीति के खिलाफ सड़क पर उतर आए थे। वे भले ही कार्यकाल पूरा करें, लेकिन इतना तय जान लीजिए कि वे जितने समय व्हाइट हाउस में काबिज रहेंगे, उतना अधिक अमेरिका गर्त की ओर लुढ़केगा।

 

अब, जबकि कुछ दिन शांति के मिले हैं, तब दुनिया यह विश्लेषित करने में जुटी है कि आखिरकार इस युद्ध के भड़कने के कारण क्या थे? हम यह तो नहीं कह सकते कि ईरान निर्दोष है या ट्रम्प एकतरफा गलत हैं, लेकिन विभीषिका के इस स्वरूप की जरूरत तो बिल्कुल नहीं थी। जिन मुद्दों पर सीधे मिसाइलें दाग दी गईं, वे हलवे की तरह चट कर जाने वाले नहीं हैं। ईरान के पास परमाणु हथियारों के होने का अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिला है और न उसने किसी ऐसी वैश्विक आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली घटना को अंजाम दिया था, जो उसके खिलाफ जंग का एलान करवा दे। जो गलती अमेरिका ने अतीत में इराक के पास रासायनिक हथियार होने का कारण बताकर वहां अमेरिकी फौजें उतार कर की थी, वही उन्होंने ईरान के साथ करना चाहा। यह पासा इसलिए उलटा पड़ा कि ईरान के पास अस्त्र-शस्त्र का ऐसा विरल भंडार भरा था, जिसकी कल्पना अमेरिका समेत दुनिया में शायद ही किसी को रही होगी। यह तो अब पता चला कि उसने ऑइल मनी को चीन, रूस से हथियारों का जखीरा जमा करने के लिए उपयोग किया था। चूंकि दोनों ही देश अमेरिका के खिलाफ हैं तो स्वाभाविक रूप से ईरान से दोस्ती का हाथ बढ़ाना फायदेमंद ही रहना था। हो सकता है, होर्मुज के सामरिक व आर्थिक महत्व से भी वे परिचित रहे हों।

 

अमेरिका-ईरान के बीच पहली शांति वार्ता असफल होने के बाद दूसरी, तीसरी, चौथी होती रही, जो बेनतीजा ही कही जाएगी। ईरान-अमेरिका दोनों ही अब भी मोल-तौल करने की स्थिति में है। युद्ध विराम करने के बदले भी ईरान ने 10 सूत्री मांग पत्र थमाया था, जिस पर अमेरिका सहमत नहीं है। इसमें चार मांगें बेहद खास हैं, जिन पर ईरान अड़ा है और अमेरिका कतई तैयार नहीं है। ईरान खाड़ी देशों (सउदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन व जॉर्डन) से 25 लाख करोड़ रुपए का मुआवजा चाहता है, जिस पर अभी तो कोई सहमत नहीं।

 

दूसरा, वह होर्मुज से गुजरने वाले तेल जहाजों से प्रति बैरल एक डॉलर टोल चाहता है तो दूसरी तरफ अमेरिका होर्मुज पर खुद कब्जा चाहता है। अमेरिका ने सैन्य नाकाबंदी भी की, लेकिन चीन समेत अन्य जहाज वहां से सुरिक्षत निकल चुके हैं। तीसरा, ईरान परमाणु कार्यक्रम 5 साल तक रोकेगा, जबकि अमेरिका 20 साल तक इसे रोकना चाहता है। चौथा, युद्ध विराम में लेबनान भी शामिल रहेगा, जिस पर इजराइल को आपत्ति है। अब देखना दिलचस्प है कि बाजुओं का जोर दिखाने में किसकी रुचि है और कौन हाथ मिलाने को तैयार है।

 

इस युद्ध ने दुनिया के सामने एक और पहलू पर ध्यान दिलाया है। अब लड़ाई के लिए तोप-मिसाइलें, जल-थल-नभ सेना की मजबूती ज्यादा मायने नहीं रखती। यह दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (एआई) का है, जिससे ड्रोन संचालित होते हैं। ये युद्ध की समूची दिशा बदलने में सक्षम है, जो ईरान ने कर दिखाया। यूक्रेन भी इसी बूते रूस को पानी पिला रहा है। अमेरिका-इजराइल की सबसे बड़ी चूक यही हुई कि वे मिसाइल हमले रोकने की व्यूह रचना करते रहे और ईरान ने छोटा बम, बड़ा धमाका की तर्ज पर ड्रोन हमले कर बड़े लक्ष्य भेद डाले। खाड़ी देशों में ईरानी ड्रोन ने जो कहर बरपाया है, उस नुकसान से उबरने में इन्हें 3 से 5 साल तक लगेंगे और अरबों डॉलर का खर्च होगा, वह अलग। ड्रोन हमलों की मार यूक्रैन दिखा चुका है, जिसने महाशक्ति रूस को नाको चने चबवा रखे हैं।

 

इस युद्ध से एक और तस्वीर साफ हुई कि अब अमेरिका अकेला सब कुछ नहीं कर सकता। जिस तरह से नाटो देशों ने उसका साथ देने से स्पष्ट इनकार किया, वह दुनिया के सामने बड़ी चेतावनी है। इसका संदेश साफ है कि प्रत्येक देश अब अपने हित-अहित पहले देखेगा, फिर पंचायत में उलझेगा। ट्रम्प की खीज ने यह बताया है कि वे मुगालते में थे कि मित्र देश ईरान पर टूट पड़ेंगे। यदि वाकई ऐसा होता तो रूस-यूक्रेन (5 वर्ष हो चुके हैं) की तरह यह भी अनिश्चित काल चलता रहता और रूस व चीन को भी हस्तक्षेप का मौका मिल जाता, जो पूरी दुनिया की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक व्यवस्था को तहस-नहस करने की ओर ले जाता। इसकी विभीषिका तीसरे विश्व युद्ध के समान होती, जिसमें क्या-क्या गुल खिलते, कोई नहीं कह पाता।

 

सबसे प्रमुख बात-इसमें भारत की क्या स्थिति रही? उसने निष्पक्ष रहकर स्वयं को सुरक्षित रखा। जिसका नतीजा यह हुआ कि चलते युद्ध में गैस व तेल से भरे टैंकर आते रहे, वह ईरान से ही सात साल के लिए तेल खरीदने का समझौता कर सका और चीन के साथ उसके मालवाहक जहाज निकलते रहे। यह लड़ाई हमारी किसी भी तरह से नहीं थी, बावजूद इसके कि ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने पाकिस्तान को ड्रोन व हथियार दिए थे। इसके उलट हमारा तंत्र ईरान के समानांतर लोगों से बात करता रहा, जिसे ईरान ने सकारात्मक माना। भविष्य में इसके वास्तविक संदेश नजर आएंगे और काफी हद तक वे भारत के पक्ष में रहेंगे।

 

एक जो सबसे चिंताजनक बात उभरी है, वह यह कि ट्रम्प इसे गली-मोहल्ले के दादा-पहलवानों की तरह लड़ रहे हैं और पल-पल में उनकी बदलती रीति-नीति ने उलझनों को बढ़ाया ही है। वे कभी अपने हित साधने वाले व्यापारी हो जाते हैं तो कभी तानाशाह। कभी दुनिया को कदमों तले मानकर पेश आते हैं तो कभी जादूगर की तरह डमरू बजाकर मसले हल करने का दावा करते हैं। उनके विरोधाभासी चरित्र को यूं तो दुनिया ने टैरिफ लागू करते हुए बखूबी देख ही लिया है, लेकिन युद्ध जैसे संवेदनशील व दूरगामी मसलों में उनका रवैया बचकाना रहा, जो विश्व के लिये बड़े खतरे का आगाज है। उन्हें रोका नहीं गया तो इस दुनिया को ज्वालामुखी के लावे की तरह बहते देखना भी नसीब हो जाएगा।

Silver Rates Today: एक जुलाई को चांदी की नई कीमतें जारी! जानिए दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में क्या है रिटेल रेट

Silver Rates Today: जुलाई के पहले दिन घरेलू सर्राफा बाजार और वायदा बाजार में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कमजोर वैश्विक संकेतों और मुनाफावसूली के चलते चांदी के भाव दबाव में रहे, जिससे खरीदारों को राहत मिली। बुधवार, 1 जुलाई को भारत के रिटेल मार्केट में सोने की कीमत में भी गिरावट आई। प्रमुख शहरों में 24-कैरेट और 22-कैरेट सोने के रेट में थोड़ी कमी देखी गई। वहीं, घरेलू बुलियन मार्केट में चांदी की कीमतों में भी गिरावट आई है।

1 जुलाई को अगस्त फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड रेट 0.94% गिरकर ₹141,600 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, MCX सिल्वर फ्यूचर्स सुबह करीब 9:13 बजे 1.86% गिरकर ₹224,520 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था। मंगलवार को तेल की कीमतों में भारी गिरावट के साथ महीने का समापन हुआ। एनर्जी मार्केट के ट्रेडर्स कतर में अमेरिका और ईरान के बीच नई बातचीत की संभावना पर बारीकी से नजर रखे हुए थे।

चांदी की कीमतों में भारी गिरावट

अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (जो इंटरनेशनल बेंचमार्क है) गिरकर $72.92 प्रति बैरल पर आ गया। जून में इस कॉन्ट्रैक्ट में लगभग 21% की गिरावट आई, जो मार्च 2020 के बाद से इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी। सुबह के कारोबार में Comex पर इंटरनेशनल स्पॉट गोल्ड 1.09% गिरकर $3,994.40 प्रति औंस हो गया। जबकि चांदी 2.93% गिरकर $57.73 प्रति औंस पर आ गई।

घरेलू बाजार में अगस्त कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.84% ​​गिरकर ₹1,41,337 प्रति 10 ग्राम हो गया। वहीं, सितंबर कॉन्ट्रैक्ट के लिए सिल्वर फ्यूचर्स 1.8% गिरकर ₹2,24,268 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था। बाजार की नजर US ADP एम्प्लॉयमेंट चेंज, नॉन-फार्म पेरोल्स और बेरोजगारी के आंकड़ों पर है। इनसे बुलियन की कीमतों में अगली बड़ी हलचल आने की उम्मीद है।

LKP सिक्योरिटीज के VP रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा, “फेड की सख्त पॉलिसी के बाद, Comex गोल्ड में जून में पहले ही लगभग 12% की गिरावट आ चुकी है। यह $4,500 से गिरकर $3,950 पर आ गया है, जिससे बाजार ‘ओवरसोल्ड’ स्थिति में पहुंच गया है। $4,000 के स्तर के आसपास सोने में खरीदारी की अच्छी दिलचस्पी दिख रही है। इस स्तर से नीचे जाने पर नई मांग आ रही है।”

एमसीएक्स पर चांदी का भाव

MCX पर चांदी के जुलाई/सितंबर वायदा में सुबह कारोबार के दौरान करीब 1.86% की गिरावट देखी गई। चांदी का वायदा भाव लगभग ₹2,24,520 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया।

गिरावट की वजह क्या है?

एक्सपर्ट के अनुसार चांदी की कीमतों पर कई कारणों का असर पड़ा है:-

  • अमेरिकी डॉलर में मजबूती।
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने की उम्मीद।
  • वैश्विक बाजार में निवेशकों की सतर्कता।
  • अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग में कमी।

खरीदारों के लिए क्या मतलब है?

चांदी के दाम में आई गिरावट से आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं को राहत मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

आज के प्रमुख रेट (999 सिल्वर)

दिल्ली: लगभग ₹2,22,400 से ₹2,24,500 प्रति किलोग्राम तक रेट है।

मुंबई: लगभग ₹2,23,800 प्रति किलोग्राम।

कोलकाता: लगभग ₹2,24,000 प्रति किलोग्राम।

MCX पर भी चांदी में कमजोरी देखने को मिली। सुबह के कारोबार में सिल्वर फ्यूचर्स करीब 1.86% टूटकर ₹2,24,520 प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रहे थे। वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती, मुनाफावसूली और निवेशकों की सतर्कता के कारण चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों के आधार पर आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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Gold price today: सोने-चांदी में गिरावट जारी, एमसीएक्स पर सोना 1% टूटा, चांदी में भी 2% फिसली

Gold Silver Price: बुधवार, 1 जुलाई को MCX पर शुरुआती डील में सोने और चांदी की कीमतों में काफी गिरावट आई। US डॉलर के मजबूत होने, ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और US फेडरल रिजर्व के रेट बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों से कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। MCX पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 0.86% गिरकर ₹1,41,300 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जबकि MCX चांदी का सितंबर फ्यूचर सुबह 9:10 बजे के आसपास 2.06% गिरकर ₹2,23,850 प्रति किलोग्राम पर था।

जून में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी से गिरावट आई, क्योंकि महंगाई और उसके चलते US फेडरल रिजर्व के रेट बढ़ाने की चिंता थी, जबकि US और ईरान के बीच अपने झगड़े को सुलझाने के लिए बातचीत करने पर सहमति के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई।

MCX के अनुसार, जून में घरेलू स्पॉट गोल्ड की कीमतें ₹15,100 या लगभग 10% गिरकर ₹1,40,864 प्रति 10 ग्राम पर आ गई, जबकि सिल्वर की कीमतें जून में ₹38,250 या लगभग 15% गिरकर 30 जून को ₹2,25,125 प्रति किलोग्राम पर आ गईं। US गोल्ड की कीमतों में जून में 2013 के बाद से सबसे बड़ी तिमाही गिरावट देखी गई, जो लगातार चौथे महीने गिर रही है, इस चिंता के बीच कि महंगाई फेड को रेट बढ़ाने के लिए मजबूर करेगी।

US फेडरल रिजर्व इस साल रेट 3 गुना बढ़ा सकता है, इस अंदाज़े के बीच डॉलर में लगातार बढ़ोतरी ने गोल्ड की कीमतों पर असर डाला है।

लगातार दूसरे महीने बढ़ते हुए, डॉलर इंडेक्स जून में 2% से ज़्यादा उछला, और अब 101.35 के करीब है, जिससे दूसरी करेंसी में खरीदारों के लिए बुलियन महंगा हो गया है और डिमांड में कमी आई है।

ज़्यादातर ट्रेडर्स को उम्मीद है कि फेड इस साल सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर में रेट बढ़ाएगा। US फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की अगली मीटिंग 28-29 जुलाई को होनी है।

मार्केट अब नई पॉलिसी गाइडेंस के लिए फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श के कमेंट्स का इंतजार कर रहे हैं। फोकस जून के ADP एम्प्लॉयमेंट डेटा पर भी है, जो आज बाद में आएगा, और नॉन-फार्म पेरोल प्रिंट्स पर भी है, जो गुरुवार को आने वाले हैं, ताकि फेड के इंटरेस्ट रेट ट्रैजेक्टरी पर नए सुराग मिल सकें।

जियोपॉलिटिकल फ्रंट पर, US और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुश्मनी शुरू होने के बाद ईरानी रिप्रेजेंटेटिव अपने US काउंटरपार्ट्स से नहीं मिलेंगे।

अब किन लेवल्स पर रखें नजर

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन के अनुसार, सोने को $3,994 और $3,955 पर सपोर्ट है, जबकि रेजिस्टेंस $4,074 और $4,110 प्रति ट्रॉय औंस पर है। आज के सेशन में चांदी को $57.70 और $56 पर सपोर्ट है, जबकि रेजिस्टेंस $61.20 और $62.80 प्रति ट्रॉय औंस पर है।

जैन ने कहा कि MCX गोल्ड को ₹1,41,100 और ₹1,40,000 पर सपोर्ट है, और रेजिस्टेंस ₹1,43,350 और ₹1,44,200 पर है, जबकि चांदी को ₹2,25,500 और ₹2,22,000 पर सपोर्ट है और रेजिस्टेंस ₹2,31,000 और ₹2,34,400 पर है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत में अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ब्रेंट क्रूड $73 के पास

US-ईरान युद्ध: बुधवार, 1 जुलाई को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में तेजी आई, जब ईरान ने कहा कि वह US अधिकारियों के साथ सीधी बातचीत नहीं करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच चार महीने से चल रहे संघर्ष को कुछ समय के लिए रोकने वाले नाज़ुक सीज़फ़ायर को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 50 सेंट, या 0.69% बढ़कर $73.45 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 63 सेंट, या 0.91% बढ़कर $70.13 प्रति बैरल हो गया।

आज कच्चे तेल की कीमतों में क्या तेजी है?

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के दामाद, जेरेड कुशनर, और स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ मंगलवार को दोहा पहुँचे, जिसे व्हाइट हाउस ने हाई-लेवल बातचीत बताया। हालाँकि, ईरान और मेज़बान देश कतर ने साफ़ किया कि US डेलीगेशन सीधे ईरानी प्रतिनिधियों के बजाय मीडिएटर्स से बात करेगा। कतर ने कहा कि प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी उन अधिकारियों में शामिल थे जो विटकॉफ और कुशनेर से मिले थे।

बुधवार की बढ़त के बावजूद, तिमाही आधार पर भारी गिरावट के बाद तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड साल की पहली और दूसरी तिमाही के बीच लगभग $45 प्रति बैरल गिरा, जो 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल संकट के बाद सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है। इसी दौरान US क्रूड फ्यूचर्स लगभग $31 प्रति बैरल गिरा, जो 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है, जब COVID-19 महामारी ने ग्लोबल फ्यूल डिमांड को बुरी तरह प्रभावित किया था।

यह तेज गिरावट तब आई जब मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की दिशा में हुई प्रगति ने उस रिस्क प्रीमियम को उलट दिया जिसने संघर्ष के दौरान कीमतों को बढ़ा दिया था।

मंगलवार को जारी रॉयटर्स के एक पोल से पता चला कि एनालिस्ट्स ने ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार 2026 के लिए अपने तेल कीमतों के अनुमान को कम किया, जिससे लगातार पांच महीनों से ऊपर की ओर बदलाव का सिलसिला खत्म हो गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से ग्लोबल तेल सप्लाई में लंबे समय से रुकावटों की चिंता कम हो गई है। इस बीच, US के वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने फिर कहा कि वॉशिंगटन ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाजों पर ट्रांज़िट फीस लगाने की इजाज़त नहीं देगा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति ईरान के स्ट्रेटेजिक रूप से ज़रूरी इस पानी के रास्ते का इस्तेमाल करने वाले “जहाजों पर टोल वसूलने” से खत्म नहीं होगी।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत की संभावना से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट $72 प्रति बैरल के करीब

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Petrol-Diesel Price Cut: आम आदमी को बड़ी राहत! नायरा एनर्जी का पेट्रोल 5 रुपये और डीजल ₹3 प्रति लीटर हुआ सस्ता

Petrol-Diesel Rates: भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट फ्यूल रिटेलर कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में ₹3 प्रति लीटर की कटौती की है। नई दरें बुधवार (1 जुलाई) से कंपनी के देशभर में मौजूद 7,000 से अधिक पेट्रोल पंपों पर लागू हो गई हैं। यह पिछले दो सालों में किसी भी तेल कंपनी द्वारा की गई पहली बड़ी खुदरा ईंधन की कीमतों में कटौती है। कंपनी ने यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद लिया है।

यह कीमत कटौती वेस्ट एशिया में तनाव कम होने और एक अहम समुद्री रास्ते के फिर से खुलने के बाद ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट के बाद हुई है। समुद्री रास्ते के खुलने से क्रूड ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस की सप्लाई फिर से शुरू हो गई। इससे सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हो गई है।

इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, देश भर में नायरा के 7,000 से ज़्यादा फ्यूल स्टेशनों पर नई कीमतें लागू हो गई हैं। राज्यों में लोकल टैक्स, जैसे वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) के आधार पर पंप पर असल कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं।

क्यों सस्ते हुए पेट्रोल-डीजल?

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और एक महत्वपूर्ण समुद्री रूट्स के दोबारा खुलने से कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति सामान्य हुई है। इससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई। इसका लाभ Nayara Energy ने अपने ग्राहकों को दिया है।

हालांकि, सरकारी तेल कंपनियां Indian Oil (IOC), Bharat Petroleum (BPCL) और Hindustan Petroleum (HPCL) ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया है। दिल्ली में IOC के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पर ही मिल रहा है।

मार्च में बढ़ाए थे दाम

ईरान संघर्ष के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी आने पर Nayara Energy ने 26 मार्च को पेट्रोल के दाम ₹5 प्रति लीटर और डीजल के दाम ₹3 प्रति लीटर बढ़ाए थे। अब कंपनी ने वही बढ़ोतरी वापस ले ली है।

उपभोक्ताओं को कितना फायदा होगा?

यदि आप 50 लीटर पेट्रोल भरवाते हैं, तो लगभग ₹250 की बचत होगी।

यदि आप 50 लीटर डीजल भरवाते हैं, तो लगभग ₹150 की बचत होगी।

देशभर में आपूर्ति के लिए तैयार

सूत्रों के अनुसार, रिफाइनरी का रखरखाव कार्य पूरा होने के बाद Nayara Energy की गुजरात के वाडिनार स्थित 20 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाली रिफाइनरी पूरी क्षमता से काम कर रही है। यह कंपनी देशभर में ईंधन की मांग पूरी करने के लिए तैयार है। ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण इंटरनेशनल ऑयल की कीमतों में उछाल आने के बाद फ्यूल की कीमतें बढ़ाने वाली पहली रिटेलर्स में नायरा शामिल थी। 26 मार्च को उसने पेट्रोल की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।

बाद में सरकारी फ्यूल रिटेलर्स ने भी कीमतें बढ़ाईं। मई के दूसरे हिस्से में कई बार कीमतों में बदलाव करते हुए उन्होंने पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कुल ₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। यह बढ़ोतरी इंटरनेशनल क्रूड की ज़्यादा कीमतों और प्रोडक्ट की ज्यादा लागत को दिखाती है। बुधवार को नायरा द्वारा की गई कटौती असल में मार्च में की गई बढ़ोतरी को वापस लेती है।

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यह हाल के हफ़्तों में ग्लोबल ऑयल मार्केट के स्थिर होने के बाद भारतीय ग्राहकों तक कम फ्यूल कीमतें पहुंचने का पहला संकेत है। सूत्रों के मुताबिक, रिफाइनरी में मेंटेनेंस का काम पूरा होने के बाद नयारा मांग को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। देश की खपत की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने पूरे नेटवर्क का इस्तेमाल कर रही है।

Asian Markets Today: एशिया बाजारों में मिला-जुला कारोबार, निक्केई 1% से ज्यादा चढ़ा, कोस्पी 2% गिरा, 40 साल के नए निचले स्तर पर येन

 Asian Market Today: बुधवार को एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला कारोबार हुआ। जापान में बढ़त सबसे ज़्यादा रही, जिसमें निक्केई 225 1.79% और टॉपिक्स 1.07% चढ़ा। दक्षिण कोरिया में, कोस्पी 2.29% गिरा जबकि स्मॉल-कैप कोस्डैक 0.42% गिरा।

ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 ज़्यादातर फ्लैट रहा, जो 0.05% नीचे था। इस बीच, हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स 22,990 पर था, जो 22,881.02 के पिछले क्लोज की तुलना में मज़बूत शुरुआत दिखाता है।

गिफ्ट निफ्टी 23,994 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 16 पॉइंट्स का डिस्काउंट था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए नेगेटिव शुरुआत दिखाता है।

वॉल स्ट्रीट

मंगलवार को वॉल स्ट्रीट का जून महीना मज़बूती के साथ खत्म हुआ, जिसमें S&P 500 और नैस्डैक ने 2020 के बाद अपनी सबसे बड़ी तिमाही बढ़त दर्ज की, क्योंकि आर्थिक मज़बूती और कॉर्पोरेट कमाई को लेकर निवेशकों की उम्मीद मिडिल ईस्ट संघर्ष से जुड़ी चिंताओं से ज़्यादा थी। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज ने भी 2022 के बाद अपना सबसे मज़बूत तिमाही प्रदर्शन दर्ज किया।

बड़े इंडेक्स भी दिन में ऊपर बंद हुए, जिसमें डॉव लगातार दूसरे सेशन में रिकॉxर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ। S&P 500 सेक्टर में टेक्नोलॉजी स्टॉक्स ने रैली को लीड किया, जबकि फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.9% बढ़ा।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 136.46 पॉइंट्स या 0.26% बढ़कर 52,319.20 पर बंद हुआ। S&P 500 58.93 पॉइंट्स या 0.79% बढ़कर 7,499.36 पर पहुंच गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 393.58 पॉइंट्स या 1.52% बढ़कर 26,213.72 पर बंद हुआ।

US-ईरान बातचीत

हाल ही में इन्वेस्टर सेंटिमेंट को इस बढ़ती उम्मीद से सपोर्ट मिला है कि ईरान विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने की कोशिशें चल रही हैं, भले ही मिलिट्री टेंशन चल रही हो।

17 जून को, ईरान और U.S. ने चार महीने से चल रहे विवाद को खत्म करने के मकसद से एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग पर साइन किए। हालांकि, वीकेंड में फिर से हुई गोलीबारी ने इस समझौते पर शक पैदा कर दिया है। अनिश्चितता को और बढ़ाते हुए, रॉयटर्स ने एक कतरी अधिकारी के हवाले से कहा कि अभी दोहा में मौजूद US के सीनियर दूतों के ईरानी अधिकारियों के साथ हाई-लेवल मीटिंग करने की उम्मीद नहीं है।

जापानी येन में गिरावट

बुधवार को जापानी येन US डॉलर के मुकाबले 40 साल के नए निचले स्तर पर आ गया, जबकि मंगलवार रात को 30-स्टॉक इंडेक्स के पांच साल में पहली छमाही का सबसे अच्छा परफॉर्मेंस देने के बाद डॉव फ्यूचर्स में गिरावट आई।

LSEG डेटा के मुताबिक, येन कमजोर होकर 162.28 प्रति डॉलर पर आ गया, जिससे पिछले सेशन से हो रही गिरावट और बढ़ गई क्योंकि ट्रेडर्स जापानी अधिकारियों के किसी भी संभावित दखल पर नज़र रखे हुए थे।

आज सोने का रेट

नए इकोनॉमिक डेटा के बाद इन्वेस्टर्स ने US मॉनेटरी पॉलिसी के आउटलुक का अंदाज़ा लगाया, जिससे सोना $4,000 प्रति औंस के लेवल से ऊपर ट्रेड कर रहा था। फरवरी के आखिर में ईरान में लड़ाई शुरू होने के बाद से यह कीमती मेटल लगभग 24% गिर गया है, और 200-दिन के मूविंग एवरेज सहित ज़रूरी टेक्निकल सपोर्ट लेवल से नीचे चला गया है, जिसे आमतौर पर लॉन्ग-टर्म मोमेंटम का गेज माना जाता है।

स्पॉट सोना $4,013.75 प्रति औंस पर लगभग बिना बदले रहा, जबकि चांदी 1.2% बढ़कर $58.98 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।

कच्चे तेल की कीमतें

बुधवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में तेज़ी आई, जब ऐसी खबरें आईं कि ईरान अमेरिकी दूतों के साथ बातचीत नहीं करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच चार महीने से चल रहे संघर्ष के बाद नाजुक अंतरिम सीज़फ़ायर को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 50 सेंट, या 0.69% बढ़कर $73.45 प्रति बैरल हो गया, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 63 सेंट, या 0.91% बढ़कर $70.13 प्रति बैरल हो गया।

डॉलर

मंगलवार को अमेरिकी डॉलर मज़बूत हुआ, जिससे जापानी येन 1986 के बाद अपने सबसे कमज़ोर लेवल पर पहुँच गया और इस बात की अटकलें तेज़ हो गईं कि जापानी अधिकारी सीधे बाज़ार में दखल देने वाले हैं।

सेशन के दौरान ग्रीनबैक 162.66 येन के हाई लेवल पर पहुंच गया और आखिरी बार 0.4% बढ़कर 162.59 येन पर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज़ दर में एक और बढ़ोतरी की बढ़ती बाज़ार उम्मीदों से डॉलर को सपोर्ट मिला है। फेड के टारगेट से ऊपर लगातार महंगाई, लगातार आर्थिक मजबूती, और सेंट्रल बैंक के नए तिमाही अनुमान—जिसमें दिखाया गया कि 19 पॉलिसीमेकर्स में से नौ को साल के आखिर से पहले रेट में एक और बढ़ोतरी की उम्मीद है—ने करेंसी की मजबूती को और मजबूत किया है।

 

Gold Price Today: गोल्ड की चमक में हल्का इजाफा, चांदी सस्ती, चेक करें लेटेस्ट भाव

Gold Rate Today In India: अमेरिका और ईरान के सुलह की तेज कोशिशों ने जियोपॉलिटिल टेंशन में नरमी के संकेत दिए तो सोने की चमक बढ़ी लेकिन दूसरी तरफ इंडस्ट्रियल डिमांड की सुस्ती ने चांदी पर दबाव बनाया हुआ है। पहले गोल्ड की बात करें तो एक दिन की गिरावट के बाद लगातार दूसरे दिन आज यह महंगा हुआ है। 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड दो दिनों में ₹120 और 22 कैरट वाला ₹110 महंगा हुआ है। इससे पहले 29 जून को 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹2020 और 22 कैरट वाला ₹1850 सस्ता हुआ था। आज की बात करें तो फिलहाल 24 और 22 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹10 नीचे आया है।

चांदी की बात करें तो इंडस्ट्रीज की तरफ से डिमांड में सुस्ती ने इस पर दबाव डाला है और चमक फीकी की है। लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज लगातार दूसरे दिन इसके भाव नीचे आए हैं और इन दो दिनों में एक किलो चांदी ₹5100 सस्ती हुई है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर 24 कैरट22 कैरट18 कैरट
दिल्ली₹1,42,200₹1,30,360₹1,06,690
मुंबई₹1,42,050₹1,30,210₹1,06,540
कोलकाता₹1,42,050₹1,30,210₹1,06,540
चेन्नई₹1,43,990₹1,31,990₹1,10,490
बेंगलुरू₹1,42,050₹1,30,210₹1,06,540
हैदराबाद₹1,42,050₹1,30,210₹1,06,540
लखनऊ₹1,42,200₹1,30,360₹1,06,690
पटना₹1,42,100₹1,30,260₹1,06,590
जयपुर₹1,42,200₹1,30,360₹1,06,690
अहमदाबाद₹1,42,100₹1,30,260₹1,06,590

तीन दिनों की स्थिरता के बाद लगातार दूसरे दिन फिसली चांदी

चांदी की बात करें तो तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज लगातार दूसरे दिन इसके भाव नीचे आए हैं। इससे पहले लगातार तीन दिनों की स्थिरता से पहले 26 जून को एक किलो चांदी ₹5 हजार महंगी हुई थी और 25 जून को ₹10 हजार सस्ती हुई थी। अब आज की बात करें तो दिल्ली में यह प्रति किग्रा ₹100 ऊपर सस्ती होकर ₹2,34,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई और कोलकाता में भी यह इसी भाव पर बिक रही है। हालांकि चेन्नई में एक किलो चांदी का भाव ₹2,44,900 है यानी चारों महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में ही है।