वेनेजुएला में मलबे के नीचे लगातार आठ दिन तक फंसे रहने के बाद एक कुत्ते को जीवित बाहर निकाल लिया गया। लंबे समय तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद उसके सुरक्षित मिलने की घटना को लोग किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कुत्ता किसी आपदा के बाद मलबे में दब गया था। समय बीतने के साथ उसके जीवित मिलने की उम्मीद बेहद कम होती गई, लेकिन बचाव दल ने तलाश अभियान बंद नहीं किया। आखिरकार लगातार प्रयासों के बाद रेस्क्यू टीम उसे सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रही। कुत्ते के जीवित मिलने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि आपदा के बाद शुरुआती दिनों के बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी रखना कितना महत्वपूर्ण होता है। रेस्क्यू के बाद कुत्ते की स्वास्थ्य जांच की गई और उसे आवश्यक देखभाल के लिए सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। आठ दिन बाद उसके जीवित मिलने की यह घटना पूरे अभियान की सबसे भावुक और प्रेरक तस्वीर बनकर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ब्रिटेन के हर पांचवें विश्वविद्यालय में श्वेत छात्र अल्पसंख्यक: 27 संस्थानों में 50% से कम दाखिला
ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में छात्र आबादी का जातीय स्वरूप तेजी से बदल रहा है। 2024-25 के आधिकारिक उच्च शिक्षा आंकड़ों के द टेलीग्राफ द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार, देश के 147 विश्वविद्यालयों में से 27 में गोरे ब्रिटिश छात्रों की हिस्सेदारी 50% से कम रह गई है। दस साल पहले ऐसे विश्वविद्यालयों की संख्या केवल 13 थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ विश्वविद्यालयों में गोरे ब्रिटिश छात्रों की हिस्सेदारी 25% से भी कम है। एस्टन यूनिवर्सिटी में यह 23%, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रैडफोर्ड में 26% और ब्रुनेल यूनिवर्सिटी लंदन व SOAS यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में 27% दर्ज की गई। विश्लेषण में यह भी सामने आया कि 80 ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में गोरे ब्रिटिश छात्रों का प्रतिनिधित्व देश की कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी की तुलना में कम है। वहीं प्रतिष्ठित रसल ग्रुप के 24 विश्वविद्यालयों में से 15 में भी यही स्थिति देखने को मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कम-से-कम 10 ऐसे विश्वविद्यालय जहां गोरे ब्रिटिश छात्र अब अल्पसंख्यक हैं, वहां आज भी केवल ब्लैक एशियन एंड माइनॉरिटी एथनिक (BAME) समुदाय के छात्रों के लिए आरक्षित छात्रवृत्तियां और आर्थिक सहायता योजनाएं संचालित की जा रही हैं। कुछ योजनाओं में सालाना 18 हजार पाउंड तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। यूनिवर्सिटी ऑफ बकिंघम के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर एरिक कॉफमैन ने इन छात्रवृत्तियों का विरोध करते हुए कहा कि नस्ल आधारित सहायता योजनाएं समाप्त होनी चाहिए क्योंकि वे नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा देती हैं। हंटर बाइडेन का ट्रम्प पर तंज: बोले- एक ही युद्ध 38 बार खत्म करने के लिए नोबेल पीस प्राइज मिलना चाहिए
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के बेटे हंटर बाइडेन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर तीखा व्यंग्य किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की बात कही। हंटर ने कटाक्ष करते हुए लिखा कि इतिहास में किसी राष्ट्रपति ने एक ही युद्ध को इतनी बार खत्म नहीं किया। हंटर बाइडेन ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैं आधिकारिक तौर पर डोनाल्ड जे. ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करता हूं। इतिहास में किसी भी राष्ट्रपति ने एक ही युद्ध को इतनी बार खत्म नहीं किया।” इसके बाद उन्होंने दावा किया कि CNN की गिनती के अनुसार ट्रम्प ईरान के साथ युद्ध खत्म होने की घोषणा कम से कम 38 बार कर चुके हैं। उन्होंने लिखा कि यह उपलब्धि नोबेल पुरस्कार समिति के संज्ञान में लाई जानी चाहिए। हंटर का यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रम्प लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त कराया है। कुछ महीने पहले ट्रम्प ने कहा था कि उन्होंने आठ बड़े युद्ध रुकवाए हैं और सिद्धांत रूप से हर युद्ध रोकने पर उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। बाद में उन्होंने ट्रुथ सोशलl पर यह दावा भी किया कि कुछ लोगों के मुताबिक उन्होंने 100 से अधिक युद्ध रुकवाए हैं। हंटर बाइडेन की पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ यूजर्स ने इसे ट्रम्प के दावों पर तीखा व्यंग्य बताया, जबकि कई लोगों ने हंटर के पुराने विवादों का हवाला देते हुए उनकी आलोचना की। वहीं कुछ यूजर्स ने कहा कि व्यक्तिगत विवादों से अलग इस मुद्दे पर उनका तंज काफी सटीक और मजेदार है।
Ayatollah Khamenei Funeral Schedule: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ईरानी सरकारी मीडिया इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) के मुताबिक एक अघोषित और औचक कार्यक्रम के तहत शहीद नेता अयातुल्ला खामेनेई के पार्थिव शरीर वाले ताबूत को उसी स्थान पर ले जाया गया जहां 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों के दौरान वे शहीद हुए थे। इस बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ फोन पर बात कर ग्रैंड अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की शहादत पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक यह देश के इतिहास में सबसे बड़ी जनसभाओं में से एक होने जा रही है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का अनुमान है कि इस अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 2 करोड़ तक पहुंच सकती है।
क्या है अंतिम संस्कार का पूरा शेड्यूल?
खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार शनिवार 4 जुलाई से तेहरान में शुरू होकर मंगलवार 9 जुलाई को उनके गृहनगर मशहद में दफनाने के साथ संपन्न होगा। इस पूरे 6 दिन का शेड्यूल कुछ ऐसा है-
शनिवार (4 जुलाई): तेहरान के इमाम खमेनी ग्रैंड प्रेयर ग्राउंड्स में सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक आम जनता के अंतिम दर्शन के लिए खामेनेई का पार्थिव शरीर रखा जाएगा।
रविवार (5 जुलाई): सुबह के समय अंतिम संस्कार की विशेष नमाज अदा की जाएगी। इसके बाद जनाजे का जुलूस निकाला जाएगा।
सोमवार (6 जुलाई): तेहरान की सड़कों से होते हुए एक बड़ा जनाजा जुलूस गुजरेगा।
मंगलवार (7 जुलाई): पवित्र शहर कौम में अंतिम संस्कार के कार्यक्रम आयोजित होंगे।
बुधवार (8 जुलाई): जनाजे के जुलूस और कार्यक्रमों का सिलसिला पड़ोसी देश इराक के पवित्र शहरों नजफ और कर्बला तक पहुंचेगा।
गुरुवार (9 जुलाई): खामेनेई के पार्थिव शरीर को वापस ईरान लाया जाएगा और मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के साथ ही इस 6 दिवसीय राजकीय शोक और विदाई समारोह का समापन होगा।
भारत से कौन-कौन पहुंचेगा ईरान?
अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत से कई आधिकारिक प्रतिनिधि, राजनेता और आध्यात्मिक गुरु ईरान जा रहे हैं। भारत सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा प्रतिनिधित्व करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों नेता 3 जुलाई को ईरान के लिए रवाना हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विंग के प्रमुख पवन खेड़ा को भी यक्रमों में शामिल होने का न्यौता भेजा है।
ईरान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इनवाइट किया है। न्यूज एजेंसियों के मुताबिक आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर इस राजकीय अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए तेहरान पहुंच चुके हैं।
लेबनान के अमल मूवमेंट के एक प्रतिनिधिमंडल सहित कई देशों के वीआईपी तेहरान पहुंचने लगे हैं। अमल मूवमेंट ने अंतिम संस्कार से पहले ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालबाफ से मुलाकात की है।
सुरक्षा कारणों से शामिल नहीं होंगे नए सुप्रीम लीडर मोजतबा
ईरान के वर्तमान सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। भारत में उनके प्रतिनिधि अयातुल्ला हाकिम इलाही ने बताया कि इजरायली धमकियों और सर्विलांस (निगरानी) के खतरों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने मोजतबा को सार्वजनिक रूप से कार्यक्रम में शामिल न होने की सलाह दी है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया है।
तेहरान में महाजुटान के लिए प्रशासन की भारी तैयारी
आईआरजीसी की तेहरान कमान के कमांडर और अंतिम संस्कार आयोजन समिति के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल हसन हसनजादेह ने बताया कि तेहरान में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष रणनीतियां तैयार की गई हैं। तेहरान की कोई भी एक सड़क इतनी भारी भीड़ को सुरक्षित तरीके से संभालने में सक्षम नहीं है। इसलिए अधिकारियों ने एक सिंगल रूट की जगह पूरी राजधानी में एक विस्तृत कॉरिडोर बनाने का फैसला किया है। समारोह क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।
जहां खामेनेई का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा वहां परिवार के लिए अलग से बैठने की जगह बनाई गई है। मुख्य मंच को ऊंचाई पर बनाया गया है ताकि भीड़ को स्पष्ट रूप से दर्शन हो सकें। कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कुरान पाठकों, धार्मिक कवियों और सांस्कृतिक समूहों की प्रस्तुतियां होंगी। तेहरान की मेट्रो और बस सेवाएं पूरी क्षमता के साथ चलाई जाएंगी। शहर के चारों तरफ ट्रैफिक कंट्रोल जोन और पांच समर्पित सर्विस सेंटर बनाए गए हैं। ये सेंटर लोगों को पीने का पानी, भोजन, चिकित्सा सहायता, स्वच्छता सुविधाएं और प्रार्थना स्थल उपलब्ध कराएंगे।
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LPG Cylinder Price: देश में आज घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, 1 जुलाई से अलग-अलग शहरों में ₹173 से ₹183.50 तक कमर्शियल सिलेंडर के दाम घटा दिए गए हैं। जिससे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और हलवाई जैसे कारोबारियों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, जो पिछले समय में बढ़ी हुई कीमतों से दबाव में थे। दूसरी ओर, घरेलू सिलेंडर की कीमतों में जून में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद से अब तक कोई संशोधन नहीं किया गया है।
जानें अपने शहर का रेट
| शहर | घरेलू सिलेंडर की कीमत | कमर्शियल सिलेंडर की कीमत |
| दिल्ली | 942.0 रुपये | 2930.0 रुपये |
| मुंबई | 941.5 रुपये | 2885.5 रुपये |
| कोलकाता | 968.0 रुपये | 3082.0 रुपये |
| चेन्नई | 957.5 रुपये | 3106.0 रुपये |
| नोएडा | 939.50 रुपये | 2917.0 रुपये |
| देहरादून | 961.0 रुपये | 2983.5 रुपये |
| हैदराबाद | 934.0 रुपये | 2052.5 रुपये |
| जयपुर | 945.5 रुपये | 2957.5 रुपये |
| तिरुवनंतपुरम | 951.0 रुपये | 2970.5 रुपये |
कीमतों में कटौती की मुख्य वजह
बाजार विशेषज्ञों और पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट और ईरान युद्ध के चलते पिछले कुछ महीनों में गैस की आपूर्ति बाधित हुई थी। इसके कारण कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। हालांकि, अब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में आई स्थिरता और भारत में एलपीजी के घरेलू उत्पादन में सुधार के चलते सरकार ने व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर लगे आपूर्ति प्रतिबंध हटा दिए हैं। इसका सीधा फायदा इस कटौती के रूप में सामने आया है।
कब-कब बढ़े कमर्शियल सिलेंडर के दाम?
2026 की शुरुआत से ही कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला देखने को मिला। 1 जनवरी को इसमें 111 रुपये का इजाफा हुआ और कीमत बढ़कर 1691.50 रुपये तक पहुंच गई। इसके बाद फरवरी में एक बार फिर 49 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे रेट 1740.50 रुपये हो गए।
मार्च की शुरुआत भी महंगाई के साथ हुई। 1 मार्च को 28 रुपये बढ़कर सिलेंडर 1768.50 रुपये पर पहुंच गया, जबकि 7 मार्च को फिर 114.50 रुपये की तेज बढ़ोतरी हुई और कीमत 1883 रुपये के स्तर तक पहुंच गई। इसके बाद 1 अप्रैल को भी 195.50 रुपये का बड़ा इजाफा देखने को मिला।
सबसे बड़ा झटका मई महीने में लगा, जब 1 मई को 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी के साथ कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3071.50 रुपये के हाई लेवल पर पहुंच गई। इसके बाद 1 जून को भी राहत नहीं मिली और 42 रुपये और जोड़कर इसका दाम 3113.50 रुपये तक पहुंच गया।
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GIFT Nifty Trend : शुक्रवार सुबह GIFT निफ्टी में 150 अंकों से ज्यादा की बढ़त हुई,जिससे भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के मज़बूत शुरुआत करने के संकेत मिल रहे है। इस बढ़त के पीछे कई वजहें हैं। निकट भविष्य में US में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों में कमी,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट में सुधार से बाजार की सेंटीमेंट अच्छा हुआ है। इसके अलावा सेमीकंडक्टर शेयरों में कमजोरी की वजह से ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेक्टर के कुछ हिस्सों पर दबाव बना हुआ है। इसका फायदा हमारे बाजारों को मिल सकता है।
फिलहाल GIFT निफ्टी 24,411 के आसापास ट्रेड कर रहा है, जो पिछले क्लोजिंग लेवल से 153 अंक या 0.63 प्रतिशत ऊपर है। इससे संकेत मिलता है कि गुरुवार के सेशन में अच्छी बढ़त के साथ बंद होने के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में और तेजी आ सकती है। 2 जुलाई को ज़्यादातर सेक्टर में व्यापक खरीदारी के कारण भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगातार दूसरे सेशन में बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 579.48 पॉइंट या 0.75 प्रतिशत बढ़कर 77,502.12 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 169.85 पॉइंट या 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,175.70 पर बंद हुआ।
US में नौकरियों के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने से ब्याज दरों को लेकर चिंता कम हुई,लेकिन चिप शेयरों में गिरावट का असर दिखा। US में नौकरियों के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने के बाद वॉल स्ट्रीट में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। इन आंकड़ों से फेडरल रिज़र्व द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की चिंता कम हुई है। कल के कारोबार में डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.14 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड क्लोजिंग ऊंचाई पर पहुंच गया और लगातार चौथे सेशन में बढ़त बनाए रखी। S&P 500 में कोई खास बदलाव नहीं हुआ,जबकि नैस्डैक कंपोजिट 0.80 प्रतिशत गिर गया क्योंकि सेमीकंडक्टर शेयरों में भारी गिरावट ने दूसरे सेक्टर की बढ़त को बेअसर कर दिया।
ऐपल के शेयर में 4.8 प्रतिशत की बढ़त हुई। ऐसी खबरें हैं कि कंपनी पांच नए iPhone मॉडल लॉन्च करने की योजना बना रही है। हालांकि,सेमीकंडक्टर शेयरों पर दबाव बना रहा और फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स लगातार दूसरे सेशन में 5.4 प्रतिशत गिर गया। Nvidia के शेयर में 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई,जबकि SanDisk के शेयर 14 प्रतिशत से ज्यादा गिर गए।
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि US-ईरान बातचीत में लगातार हो रही प्रगति से एनर्जी सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हुई है,जबकि US में उम्मीद से कमजोर जॉब्स डेटा ने फेडरल रिज़र्व द्वारा जल्द ही मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त करने की उम्मीदों को कम कर दिया है। हालांकि,उन्होंने चेतावनी के लहजे में कहा कि बाजार सतर्क बने रह सकते हैं क्योंकि मैक्रो-इकोनॉमिक हालात में सुधार के बावजूद विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स सावधानी भरा रुख अपनाए हुए हैं।
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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Top News 3 July : कड़ी सुरक्षा के बीच अमरनाथ यात्रा शुरू। उत्तर भारत को गर्मी से राहत। हार्मुज पर ईरान की सख्त चेतावनी। वेनेजुएला में भूंकप के 8 दिन बाद मलबे से जिंदा निकला गार्ड। पुर्तगाल और स्पेन फीफा विश्व कप के अगले दौर में। 3 जुलाई की बड़ी खबरें :
अमरनाथ यात्रा शुरू
पहलगाम और बालटाल के लिए अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था पवित्र गुफा के लिए निकला। हर हर महादेव और बम बम भोले के जयकारों के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालु। यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
उत्तर भारत को गर्मी से राहत
जम्मू-कश्मीर में लगातार दूसरे दिन बादल फटने से कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति। उत्तराखंड में खराब मौसम के कारण बदरीनाथ हाईवे साढ़े 11 घंटे बंद रहा। बारिश से पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों को भीषण गर्मी से राहत मिली।
हार्मुज पर ईरान की सख्त चेतावनी
ईरान के सैन्य कमान ने तेल टैंकरों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि हार्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी जहाजों को उसके बताए रास्तों का ही इस्तेमाल करना होगा। अगर कोई जहाज इन नियमों को नहीं मानता है, तो उसे कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
8 दिन बाद मलबे से जिंदा निकला सुरक्षा गार्ड
नेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के 8 दिन बाद 43 वर्षीय सुरक्षा गार्ड हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस को मलबे से जिंदा निकाला गया। भूकंप में अब तक 2,295 लोगों की मौत, 11 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं और राहत-बचाव कार्य जारी है।
पुर्तगाल और स्पेन अगले दौर में
पुर्तगाल ने क्रोएशिया को 2-1 से हराकर फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में प्रवेश किया। क्रिस्टियानो रोनाल्डो और गोंजालो रामोस ने पुर्तगाल के लिए दागे गोल। ऑस्ट्रिया को 3-0 से हराकर स्पेन भी अगले दौर में पहुंचा। आज स्विट्जरलैंड का मुकाबला अल्जिरिया से होगा वहीं अंतिम 16 में पहुंचने के लिए ऑस्ट्रेलिया की भिडंत इजिप्ट होगी।
अमेरिका-ईरान के बीच अप्रैल में शुरू हुई बातचीत के दौरान अमेरिका को डर था कि इजराइल, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ को निशाना बना सकता है। इसी वजह से अमेरिका ने मिडिल-ईस्ट के कुछ सहयोगी देशों के जरिए तेहरान को सतर्क रहने का संदेश भिजवाया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को डर था कि अगर दोनों वार्ताकारों की हत्या हुई तो युद्धविराम और शांति प्रक्रिया टूट जाएगी। उस समय ट्रम्प प्रशासन होर्मुज स्ट्रेट खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की कोशिश कर रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में होने वाली एक बैठक से पहले भी ईरान को हमले का खतरा था। इसी कारण पाकिस्तान ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान को फाइटर जेट की सुरक्षा में इस्लामाबाद तक पहुंचाया। लौटते समय भी सुरक्षा अलर्ट मिलने पर विमान की मशहद में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई और डेलिगेशन सड़क के जरिए तेहरान पहुंचा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. अमेरिका-ईरान में अगली वार्ता खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद: दोहा में हुई बातचीत के बाद कतर ने बताया कि दोनों पक्ष पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के बाद जल्द अगले दौर की वार्ता करेंगे। 2. UN पहुंचा ईरान-इजराइल विवाद: ईरान ने इजराइल पर सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को धमकी देने का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज कराई। 3. ईरान हाई अलर्ट पर, 2 करोड़ लोगों के पहुंचने का दावा: ईरान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले सेना की तैनाती बढ़ी। कार्यक्रम में 30 देशों के प्रतिनिधि और करीब 2 करोड़ लोग शामिल होंगे। 4. होर्मुज पर ईरान की अमेरिका को चेतावनी: ईरान ने कहा है कि होर्मुज हमारा इलाका है, अमेरिकी दखल बर्दाश्त नहीं करेंगे। सभी जहाजों को तय समुद्री मार्ग अपनाने को कहा। 5. ईरान ने IAEA को परमाणु ठिकानों की जांच से रोका: ईरान ने कहा है कि फोर्डो, नतांज और इस्फहान परमाणु साइट्स पर IAEA के निरीक्षकों को एंट्री नहीं मिलेगी। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
Mojtaba Khamenei: ईरान से एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के जनाजे में सार्वजनिक रूप से शामिल होने की संभावना बेहद कम है। इस फैसले के पीछे सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताएं और संभावित हमलों का डर बताया जा रहा है क्योंकि इस समय इजरायल के साथ तनाव काफी बढ़ा हुआ है। इंडिया टुडे की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन के साथ एक विशेष इंटरव्यू में अयातुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि मोजतबा खुद जनता से मिलना चाहते हैं लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उन्हें ऐसा न करने की सख्त सलाह दे रही हैं।
तेहरान के लिए रवाना होने से पहले इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बातचीत करते हुए इलाही ने कहा कि मैं पिछले हफ्ते ईरान में था और मेरे कुछ दोस्तों से मिला जिन्होंने मोजतबा से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया कि मोजतबा बाहर आना चाहते हैं और लोगों से मिलना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उन्हें इसकी इजाजत नहीं दे रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह बेहद खतरनाक है और वे उनके लिए सुरक्षा मुहैया नहीं करा सकते। मुझे लगता है कि वह बाहर नहीं आएंगे।
कड़े सुरक्षा पहरे के बीच होगा अंतिम संस्कार
अली खामेनेई के जनाजे में हजारों शोककुल लोगों और विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के तेहरान पहुंचने की उम्मीद है। यह समारोह इस्लामिक गणराज्य ईरान के लिए एक धार्मिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षण बनने जा रहा है। इस साल की शुरुआत में ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के बीच हुए युद्ध के बाद से सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। संभावित जवाबी कार्रवाई या टारगेटेड अटैक्स की आशंकाओं को देखते हुए अधिकारियों द्वारा अंतिम संस्कार के जुलूस के आसपास व्यापक सुरक्षा बल तैनात किए जाने की उम्मीद है।
इलाही ने बताया कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान में माहौल बेहद भावुक है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक बहुत-बहुत बड़ा नुकसान है। उन्हें लगता है कि उन्होंने अपनी आत्मा, अपने प्राण खो दिए हैं। उनका मानना है कि कोई भी उनकी जगह नहीं ले सकता। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान और विदेशों से समर्थक दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए यात्रा कर रहे हैं। वे एकजुटता दिखाने और यह कहने आ रहे हैं कि हम आपके साथ हैं, हम आपको कभी नहीं भूलेंगे और आपके रास्ते पर चलेंगे।
मोजतबा की पब्लिक अपियरनेंस नहीं होने पर उठ रहे सवाल
मोजतबा खामेनेई की संभावित अनुपस्थिति से उनकी स्थिति और उनके अधिकार को लेकर कयासबाजी और तेज होने की संभावना है। 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजरायल हवाई हमले में अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद मोजतबा को सुप्रीम लीडर बनाया गया था। तब से वह लोगों के बीच से दूर रहे हैं। हालांकि उन्होंने एक दर्जन से अधिक लिखित संदेश जारी किए हैं और आधिकारिक संचार चैनलों के माध्यम से सक्रिय उपस्थिति बनाए रखी है लेकिन अभी तक उनकी कोई भी प्रमाणित सार्वजनिक उपस्थिति सामने नहीं आई है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि जिस हवाई हमले में खामेनेई परिवार के कई सदस्य और मोजतबा की पत्नी जहरा हदाद अदेल मारी गई थीं, उसी हमले में मोजतबा खुद भी घायल हो गए थे। उनकी इस लंबी अनुपस्थिति ने राजनयिक और खुफिया हलकों में उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा स्थिति दोनों को लेकर अटकलों को हवा दी है। अगर वह अपने पिता के जनाजे में शामिल नहीं होते हैं तो उनके नेतृत्व और सार्वजनिक वैधता पर सवाल और गहरे हो सकते हैं।
आपको बता दें कि अपने पिता के विपरीत मोजतबा खामेनेई ने अपने करियर का अधिकांश समय पर्दे के पीछे बिताया है। अली खामेनेई सुप्रीम लीडर बनने से बहुत पहले ही एक प्रमुख राजनीतिक व्यक्ति थे। उन्होंने 1989 में देश का सर्वोच्च पद संभालने से पहले 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया था। इसके उलट मोजतबा ने कभी भी औपचारिक रूप से कोई सरकारी पद नहीं संभाला है। विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने सुप्रीम लीडर के कार्यालय के भीतर एक प्रभावशाली भूमिका निभाई और शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ करीबी संबंध बनाए रखे।
साल 2019 में संयुक्त राज्य अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने मोजतबा पर प्रतिबंध लगा दिया था और उन पर ईरान के कट्टरपंथी क्षेत्रीय एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद करने का आरोप लगाया था। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप था कि उन्होंने ईरान के बाहरी ऑपरेशन्स और आंतरिक सुरक्षा तंत्र का समर्थन करने के लिए कुद्स फोर्स और बासिज मिलिशिया के साथ मिलकर काम किया था। उनका नाम ईरान के राजनीतिक विवादों में भी बार-बार सामने आया है।
क्या मोजतबा कायम कर पाएंगे पिता जैसा दबदबा?
भले ही मोजतबा सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विश्लेषक इस बात को लेकर बंटे हुए हैं कि क्या वह अपने पिता जैसा प्रभाव हासिल कर पाएंगे। खुफिया आकलनों का हवाला देने वाली ब्लूमबर्ग की एक जांच के मुताबिक मोजतबा ने तेल राजस्व और अपतटीय निवेशों से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से पर्याप्त संपत्ति और प्रभाव बनाया है। कई जानकारों का तर्क है कि संस्थागत शक्ति सीधे तौर पर व्यक्तिगत अधिकार में नहीं बदल जाती। यूनिवर्सिटी ऑफ ओटावा के प्रोफेसर थॉमस जूनो ने कहा कि मोजतबा के पास अभी भी उस कद की कमी है जो उनके पिता ने दशकों में बनाया था। जूनो ने कहा कि मोजतबा खामेनेई की भूमिका अभी अस्पष्ट है। इस मोड़ पर इसकी संभावना बहुत कम है कि उनके पास उतना प्रभाव हो जितना उनके पिता का हुआ करता था।
तनाव के बावजूद ईरान जता रहा है भरोसा
जब इलाही से इजरायल की ओर से मिल रही नई धमकियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हालिया सैन्य तनाव के बावजूद ईरान मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कई देश ईरान की तारीफ कर रहे थे और कह रहे थे कि ईरान युद्ध जीत गया। ईरान अब भी बहुत मजबूत है और डटने के लिए तैयार है। फिलहाल सभी की निगाहें तेहरान पर टिकी हैं कि क्या मोजतबा खामेनेई ईरान के आधुनिक राजनीतिक इतिहास के इस सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर आखिरकार सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं या नहीं।
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क्रूड ऑयल की कीमतों में बीते कुछ हफ्तों में तेज गिरावट आई है। यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव गिरकर 68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इसकी वजह अमेरिका-ईरान में डील है। इस डील की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल गया है, जिससे ऑयल टैंकर्स की आवाजाही शुरू हो गई है। इससे क्रू़ड की सप्लाई बढ़ी है और कीमतें गिरी हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड में गिरावट सीमित रह सकती है। इसकी वजह यह है कि दुनिया के कई देशों का स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व काफी घट गया है। अब फोकस इस रिजर्व को फिर से पहले के लेवल पर पहुंचाने पर होगा। इससे क्रूड की कीमतों में ज्यादा गिरावट का अनुमान नहीं है।
चॉइस ब्रोकिंग में टेक्निकल रिसर्च के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर माकदा के मुताबिक, तकनीकी रूप से क्रूड की कीमतों के बॉटम यानी सबसे निचले स्तर के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, “चार्ट अभी पॉजिटिव रिवर्सल या शॉर्ट कवरिंग का संकेत नहीं दे रहा है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि मार्केट को क्रूड का बॉटम मिल गया है।”
उन्होंने कहा कि क्रू़ड ऑयल में बीते महीनों में उछाल की मुख्य वजह इसकी सप्लाई में कमी थी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल टैंकर्स की आवाजाही नहीं होने की वजह से क्रूड ऑयल की कमी हो गई थी। अब स्थिति बदल गई है। उन्होंने कहा कि WTI Crude के लिए अगला सपोर्ट 65 डॉलर प्रति बैरल पर है। इस लेवल के टूटने पर बेयरिश मोमेंटम दिख सकता है।
क्रूड की कीमतों की दिशा को लेकर एक्सपर्ट्स की एक राय नहीं है। ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के भाविक पटेल ने कहा कि अभी क्रूड की कीमतों के बॉटम के बारे में कुछ कहना मुश्किल है। हालांकि, कीमत गिरकर अमेरिका-ईरान की लड़ाई के पहले के स्तर पर आ गई है। लेकिन, क्रूड की सप्लाई सामान्य होने को लेकर बाजार की उम्मीद ज्यादा आशावादी लगती है।
माकदा का कहना है कि अमेरिका-ईरान में लड़ाई की वजह से क्रूड की ग्लोबल इनवेंट्री में काफी कमी आई है। OECD कमर्शियल फ्यूल इनवेंट्रीज गिरकर 2003 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। यूएस स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) भी 1983 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है।
Petrol Diesel Price Cut: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद देश भर में पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की अटकलें तेज हो गई हैं। कच्चा तेल अब पश्चिम एशिया विवाद के शुरू होने से पहले के स्तर पर वापस आ चुका है।
इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश में तेल की कीमतें घटने की संभावनाओं पर सरकार का रुख साफ किया है। उन्होंने बताया कि अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम इसी तरह स्थिर बने रहते हैं, तो सरकार स्थिति की समीक्षा करेगी। आइए समझते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कितना सस्ता हुआ है और आपकी जेब को इसका फायदा कब से मिलेगा।
कच्चा तेल $120 से गिरकर $70 पर आया, फिर भी क्यों नहीं घटे दाम?
पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान जब होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया था, तब ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं। लेकिन हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खत्म करने के लिए हुए एक समझौते के बाद कच्चे तेल के दाम वापस 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए हैं।
इसके बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें तुरंत न घटने के पीछे पेट्रोलियम मंत्री ने दो मुख्य कारण बताए हैं:
पुराने महंगे स्टॉक की प्रोसेसिंग: तेल विपणन कंपनियां अभी भी उस कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया संकट के चरम पर महंगे दामों में खरीदा गया था।
पहले का भारी नुकसान: इस विवाद के दौरान आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए कंपनियों ने लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचा, जिससे 30 जून तक कंपनियों को ₹74781 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
प्राइवेट कंपनी ने घटाईं कीमतें: राहत की शुरुआत?
सरकारी तेल कंपनियों द्वारा समीक्षा किए जाने से पहले ही निजी क्षेत्र की दिग्गज तेल कंपनी नायरा एनर्जी ने आम जनता को राहत देने की शुरुआत कर दी है। नायरा एनर्जी ने अपने 7000 से अधिक फ्यूल स्टेशनों के नेटवर्क पर पेट्रोल की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतें $70 के आसपास स्थिर रहीं, तो जल्द ही सरकारी तेल कंपनियां भी बड़ी राहत दे सकती हैं।
शेयर बाजारों के सेंटीमेंट में पॉजिटिव बदलाव दिख रहा है। बीते करीब दो सालों में शेयर बाजार का रिटर्न अच्छा नहीं रहा है। पहले हाई वैल्यूएशन बड़ा चैलेंज था। इससे विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में बड़ी बिकवाली की। वैल्यूएशन अब घटा है। उधर, मध्यपूर्व में तनाव कम हुआ है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। इसका पाॉजिटिव असर शेयर बाजारों पर दिख रहा है। सीएनबीसी-टीवी18 ने निवेश और शेयर बाजार के आउटुलक के बारे में जानने के लिए इंडियाचार्ट्स के फाउंडर रोहित श्रीवास्तव के साथ बातचीत की।
बाजार नई तेजी के शुरुआती चरण में
श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार कई वैश्विक और भू-राजनीतिक झटकों के बाद अब एक नए अपट्रेंड के शुरुआती चरण में है। बाजार पर अमेरिका-ईरान की लड़ाई, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का असर पहले ही पड़ चुका है। उन्होंने कहा कि टेक्निकल चार्ट्स पर ‘हायर लो’ (Higher Lows) का बनना यह दर्शाता है कि बाजार का सेंटिमेंट बेहतर हो रहा है। बाजारों में इस तेजी के जारी रहने की संभावना है। निफ्टी 24,300 के लेवल को तोड़ने के बाद ऊंचाई का नया रिकॉर्ड बनाएगा। बैंक निफ्टी के भी 63,000 पर पहुंच जाने की उम्मीद है।
बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक्स की तेजी में बड़ी भूमिका
उन्होंने कहा कि मार्केट में अगले चरण की रैली में बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक्स का बड़ा योगदान होगा। यह सेक्टर आने वाले समय में स्टार परफॉर्मर बन सकता है। अगर आगे इंटरेस्ट रेट में कमी देखने को मिलती है तो इससे बैंकिंग सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा। रुपये में स्थिरता भी बैंकिंग सेक्टर के लिए पॉजिटिव है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी पर लगाम लगी है। उधर,
रियल एस्टेट, एनर्जी, मेटल्स और पावर सेक्टर्स का आउटलुक पॉजिटिव दिख रहा है। इन सेक्टर्स में लॉन्ग टर्म के लिए अच्छा मोमेंटम दिख रहा है और निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी के मौके ढूंढने चाहिए।
सोने की जगह यह शेयरों में निवेश बढ़ाने का समय
श्रीवास्तव ने कहा कि सोने और चांदी में शॉर्ट-टर्म मोमेंटम इंडिकेटर्स ओवरबॉट (overbought) की स्थिति का संकेत दे रहे हैं। इससे निकट अवधि में मुनाफावसूली दिख सकती है। उन्होंने कहा कि यह समय कीमती धातुओं (precious metals) पर फोकस थोड़ा कम कर शेयरों पर बढ़ाने का है। इसकी वजह यह है कि इक्विटी अब एक नए ‘गोल्ड’ के रूप में उभर रहा है। उन्होंने आईटी सेक्टर में कमजोरी जारी रहने का अनुमान जताया। इसका मतलब है कि निवेशकों को लार्जकैप आईटी शेयरों से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर को लेकर भी सतर्क रुख अपनाने की जरूरत है।
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शेयर बाजारों में लगातार दूसरे दिन शानदार तेजी
शेयर बाजार में 2 अप्रैल को लगातार दूसरे दिन अच्छी तेजी दिखी। निफ्टी 0.71 फीसदी यानी 169 अंक चढ़कर 24,175 पर बंद हुआ। सेंसेक्स भी 0.75 फीसदी यानी 579 अंक के उछाल के साथ 77,502 पर क्लोज हुआ। हालांकि, बैंक निफ्टी नाममात्र की कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुआ।
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