Market Trend : पश्चिम एशिया में टेंशन बढ़ने से दबाव में बाजार, कमजोर मार्केट में भी इन दो शेयरों में होगी बंपर कमाई

Market Trend : पश्चिम एशिया में टेंशन फिर बढ़ गया है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज में ईरान की ओर से तीन टैंकरों पर हमले के बाद अमेरिका ने भी जवाबी हवाई हमले किए हैं। US ने ईरान के ग्लोबल मार्केट में तेल बेचने पर दी गई छूट भी वापस ले ली है। कच्चा तेल 4% उछलकर 76 डॉलर के करीब पहुंच गया है। पश्चिम एशिया के तनाव और कच्चे तेल में उछाल से ग्लोबल बाजारों का मूड खराब हो गया है। गिफ्ट निफ्टी में 200 प्वाइंट से ज्यादा की गिरावट है। वहीं FIIs की कैश में लगातार तीसरे दिन खरीदारी हुई है। FIIs ने थोड़े शॉर्ट्स भी कवर किए हैं।

एशिया में मिला-जुला कारोबार हो रहा है। कल की भारी गिरावट के बाद KOSPI में हल्की रिकवरी है। US इंडेक्सों में भी ऊपरी स्तरों से मुनाफावसूली दिखी है। डॉलर इंडेक्स 101 के पार निकल गया है। US बॉन्ड यील्ड में भी तेज उछाल दिखा है। इधर FOMC मिनट्स से पहले सोने और चांदी में भी गिरावट है। चांदी 3 फीसदी फिसली है।

निफ्टी पर रणनीति

ऐसे में आज क्या हो ट्रेडिंग रणनीति, इस पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार ने कहा कि निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24424-24477/531 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24571-24589/623 पर है। इसके लिए पहला बेस 24261-24193 पर और बड़ा बेस 24139-24088/24011 पर है। एक्सपायरी पर आखिरी घंटे में हल्की बिकवाली दिखी। निफ्टी 200 DMA के अहम लेवल से लौटा। FIIs की कैश खरीदारी हुई। निफ्टी में खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग भी हुई। जियोपॉलिटिकल टेशंन से कच्चा तेल 76 डॉलर के पार चला गया है। AI थीम में अब भी दबाव जारी है। 24,400-24,600 जोन में भारी कॉल राइटिंग हुई। सपोर्ट पर नजर बनाए रखें। फिलहाल निफ्टी की चाल को समझने में समय लगेगा।

बेस-1 टूटने पर पोजिशनल लॉन्ग से निकलने की सलाह होगी। बेस-1 के नीचे टिकने पर बेस-2 की संभावना बढ़ेगी। गिरावट पर खरीदारी के लिए बेस-1 का होल्ड होना जरूरी है। AI थीम में कमजोरी के बीच निफ्टी IT सबसे अहम है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी के लिए के लिए पहला रजिस्टेंस 58512-58640 पर और बड़ा रजिस्टेंस 58891-59067/59273 पर है। इसके लिए पहला बेस 58010-57810 पर और बड़ा बेस 57531-57410/338 पर है। 58,500 जोन पर कॉल राइटिंग से रेजिस्टेंस मजबूत है। PSU बैंकों के दबाव से बैंक निफ्टी पर असर है। पिछले 10-12 सत्रों से 10 DMA मजबूत सपोर्ट बना है। 58,000 जोन में पुट राइटर्स का मजबूत सपोर्ट है। बेस -1 के ऊपर बैंक निफ्टी में मजबूती बरकरार है। 57,810 के नीचे टिकने पर बेस-2 की संभावना बढ़ेगी।

Market cues : निफ्टी के 24500 के नीचे बने रहने तक बाजार में कंसोलीडेशन जारी रहने की उम्मीद

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं Prakashgaba.com के प्रकाश गाबा। इनकी आज HDFC Life में 567 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ 580 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं, Jubliant food में 450 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ 470 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच 8 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में’गैप-डाउन’ओपनिंग होने की संभावना है। GIFT निफ्टी भी सुस्त शुरुआत का संकेत दे रहा है। शुरुआती कारोबार में यह इंडेक्स 24,251.50 के आसपास ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू बाजार के लिए निगेटिव शुरुआत का संकेत है।यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

7 जुलाई को उतार-चढ़ाव भरे ट्रेडिंग सेशन में बेंचमार्क इंडेक्स अपनी शुरुआती बढ़त को बनाए नहीं रख पाए और लगातार चार सेशन से चली आ रही तेजी का सिलसिला टूट गया। कारोबार के अंत में ये मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों के बीच कल बाजार मजबूत शुरुआत के साथ खुला और सेशन के पहले हिस्से में बढ़त बनाए रखी। हालांकि,सेशन के दूसरे हिस्से में प्रॉफिट बुकिंग के कारण दिन भर की सारी बढ़त खत्म हो गई और बाजार बंद होने तक बेंचमार्क इंडेक्स नेगेटिव दायरे में आ गए। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 104.35 अंक या 0.13 प्रतिशत गिरकर 78,180.72 पर और निफ्टी 31.65 अंक या 0.13 प्रतिशत गिरकर 24,398.70 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी लगभग 24,251.50 के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू इक्विटी बाजार में कमजोर शुरुआत का संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजार मिले-जुले रुख के साथ कारोबार कर रहे हैं। जापान के निक्केई में 0.43 फीसदी की कमजोरी देखने को मिल रही है। वहीं,स्ट्रेट टाइम्स 0.65 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंगसेंग भी 1.44 फीसदी की बढ़त दिखा रहा है। ताइवान के बाजार में 0.35 फीसदी की गिरावट नजर आ रही है। कोस्पी 2 फीसदी नीचे दिख रहा है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.09 फीसदी की गिरावट नजर आ रही है।

Asian Market today: टेक स्टॉक्स में बिकवाली और US-ईरान युद्ध बढ़ने से निक्केई, कोस्पी गिरे

अमेरिकी बाजार

मंगलवार को वॉल स्ट्रीट की AI के दम पर आई तेजी के बने रहने को लेकर बढ़ते शक के कारण माइक्रोन टेक्नोलॉजी और दूसरी चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई,जिससे नैस्डैक में भारी गिरावट दर्ज की गई। S&P 500 में 0.45% की गिरावट आई और यह 7,503.85 अंक पर बंद हुआ। नैस्डैक 1.16% गिरकर 25,818.69 अंक पर आ गया,जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.25% गिरकर 52,925.15 अंक पर बंद हुआ। गिरावट से पहले,डॉव ने सेशन के दौरान कुछ समय के लिए रिकॉर्ड ऊंचाई भी छुई थी।

डॉलर इंडेक्स

बुधवार को एशिया में ट्रेडिंग की शुरुआत में डॉलर अधिकांश दूसरी करेंसी के मुकाबले इस हफ्ते के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर बना रहा। अमेरिका ने ईरान पर फिर से हमले किए,जिससे जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ गया और तेल की कीमतें ऊपर चली गईं हैं। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 101.13 के स्तर पर नजर आ रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

10-साल और 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड में बहुत कम बदलाव हुआ है। ये क्रमशः 4.55% और 4.18% पर हैं।

एशियन करेंसी

US डॉलर के मुकाबले ज्यादातर एशियाई करेंसी कमजोर हुईं हैं। डॉलर की नई मांग का असर क्षेत्र की दूसरी करेंसी पर पड़ा हैं। मलेशियन रिंगित सबसे कमजोर दिख रही है और इसमें 0.27 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके बाद फिलीपीन पेसो,जापानी येन और थाई बहत का नंबर है। वहीं,इंडोनेशियाई रुपिया ने डॉलर के मुकाबले 0.08 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है।

कच्चे तेल में तेजी

अमेरिका द्वारा ईरान में नए हवाई हमले करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों के बाद ईरान को वैश्विक स्तर पर तेल बेचने की अनुमति देने वाली छूट को रद्द करने के बाद,ब्रेंट क्रूड 2% बढ़कर $76 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

गोल्ड

सोने की कीमतों में गिरावट बनी हुई है। ईरान पर अमेरिका के नए हवाई हमलों ने उस अंतरिम समझौते को खतरे में डाल दिया है जिसका मकसद युद्ध खत्म करना था। इस युद्ध ने महंगाई बढ़ाई है और ब्याज दरें बढ़ने की संभावना पैदा की है। कोमेक्स पर गोल्ड में 0.08 फीसदी की मामूली तेजी आई है। वहीं,चांदी में 0.16 फीसदी की हल्की बढ़त है।

विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर एक नजर

7 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और 393 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इसके उलट,घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) नेट सेलर बन गए और उन्होंने 383 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

Crude Oil Price: US-ईरान युद्ध बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें 2% बढ़ीं, ब्रेंट क्रूड $75 प्रति बैरल से ऊपर

Crude Oil Price:  होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर तेहरान के हमलों के जवाब में अमेरिका के ईरान पर नए हमले करने के बाद बुधवार को तेल की कीमतें बढ़ गई। अगस्त डिलीवरी के लिए US बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2.1% बढ़कर $71.87 प्रति बैरल हो गया, जबकि सितंबर डिलीवरी के लिए ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.9% बढ़कर $75.53 प्रति बैरल हो गया।

आज कच्चे तेल की कीमतों में क्या तेज़ी है?

US सेंट्रल कमांड के अनुसार, US ने कमर्शियल शिपिंग पर हमलों के लिए बड़ी कीमत लगाने के मकसद से “ताकतवर हमले” किए। ईरान की मेहर न्यूज़ एजेंसी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक द्वीप पर धमाकों की खबर है, जबकि डिप्टी विदेश मंत्री काज़म ग़रीबाबादी ने चेतावनी दी कि तेहरान जवाबी कार्रवाई करेगा।

एक अलग कदम में, US ट्रेजरी ने ईरान को तेल एक्सपोर्ट करने की इजाज़त देने वाले सेंक्शन में मिली छूट को रद्द कर दिया, जिससे तेहरान के साथ अंतरिम शांति समझौते का एक अहम नियम पलट गया। यह बढ़ोतरी स्ट्रेटेजिक वॉटरवे में तीन जहाजों पर हमलों के बाद हुई, जिसमें एक गैस कैरियर और एक सऊदी ऑयल टैंकर शामिल थे, जिससे पिछले महीने डील लागू होने के बाद से मंगलवार ऐसी घटनाओं के लिए सबसे बिज़ी दिन बन गया।

बढ़े हुए तनाव ने यूरोपियन नेचुरल गैस की कीमतों को भी बढ़ा दिया, फ्यूचर्स 4.9% तक बढ़ गए।

दूसरी तिमाही में गिरावट के बाद तेल की कीमतों में उछाल आया, जब क्षेत्रीय तनाव कम होने से क्रूड पर असर पड़ा था। कमर्शियल जहाजों पर हुए नए हमलों और US मिलिट्री एक्शन से उम्मीद है कि शिपिंग कंपनियां और क्षेत्रीय तेल प्रोड्यूसर होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल करने से डिसकरेज होंगे, जो फारस की खाड़ी के एक्सपोर्टर्स को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने वाला एक ज़रूरी रास्ता है।

नए डेवलपमेंट से पहले, गोल्डमैन सैक्स जैसे बैंकों ने चेतावनी दी थी कि क्रूड मार्केट सरप्लस में वापस आ सकता है क्योंकि क्षेत्रीय प्रोड्यूसर प्रोडक्शन बढ़ा रहे हैं और स्ट्रेट के ज़रिए शिपिंग एक्टिविटी ठीक हो रही है। उसी समय, OPEC+ ने प्रोडक्शन में कटौती को वापस लेने की अपनी योजना जारी रखी।

होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल वॉशिंगटन और तेहरान के बीच झगड़े का एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मंगलवार को, ईरान ने यूनाइटेड नेशंस की शिपिंग एजेंसी को बताया कि वह वॉटरवे के कुछ हिस्सों पर अधिकार रखता है, जो शांति के समय में दुनिया के रोज़ाना के तेल ट्रेड का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता था।

इस बीच, ब्रेंट क्रूड का प्रॉम्प्ट स्प्रेड वापस बैकवर्डेशन में चला गया—एक बुलिश मार्केट स्ट्रक्चर जहां कम समय के कॉन्ट्रैक्ट बाद के कॉन्ट्रैक्ट के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेड होते हैं। बुधवार को स्प्रेड 23 सेंट प्रति बैरल था, जो हफ्ते की शुरुआत में देखे गए 25-सेंट के कॉन्टैंगो, जो कि उल्टा प्राइसिंग स्ट्रक्चर था, से उलटा था।

Crude Oil Price: 60 डॉलर से नीचे जा सकता है कच्चा तेल! एक्सपर्ट बोले- चीन बदलेगा पूरा खेल

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

अमेरिका ने ईरान पर एयरस्ट्राइक की:सीरिक, केश्म और बंदर अब्बास को निशाना बनाया; होर्मुज में जहाजों पर हमले के बाद कार्रवाई

अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के दक्षिणी हिस्से में बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। अमेरिका का आरोप है कि इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ था। ईरानी मीडिया के मुताबिक, सीरिक, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हमलों के बाद कई इलाकों में आग लग गई, हालांकि नुकसान और हताहतों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, एयरस्ट्राइक में ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी रडार, मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन ठिकानों और कुछ बंदरगाह सुविधाओं को निशाना बनाया गया। CENTCOM ने कहा कि ईरान ने सीजफायर का उल्लंघन करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को निशाना बनाया, इसलिए यह जवाबी कार्रवाई की गई। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

24 घंटे में तीन टैंकरों पर अटैक…होर्मुज में फिर टेंशन, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आई बड़ी खबर

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव का माहौल गहराता जा रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तीसरे कॉमर्शियल जहाज पर हमला किया गया है। इस घटना के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखने और सीजफायर पर सहमति बनी हुई है।

बीते 24 घंटे में तीसरे जहाज पर हमला 

ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ के मुताबिक, ताजा घटना में एक तेल टैंकर पर किसी अज्ञात वस्तु से हमला किया गया। राहत की बात यह है कि इस हमले में किसी के घायल होने या जहाज को बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है। फिर भी इस घटना ने इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले मंगलवार को भी दो अलग-अलग हमले हुए थे। इनमें कतर के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) ले जाने वाले जहाज पर हमला और सऊदी अरब के झंडे वाले कच्चा तेल ले जा रहे टैंकर को नुकसान पहुंचने की घटना शामिल है।

होर्मुज में तीसरे टैंकर पर हमला

ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक और तेल टैंकर पर हमला हुआ है। एजेंसी के अनुसार, किसी अज्ञात वस्तु के टकराने से जहाज को नुकसान पहुंचा है। यूकेएमटीओ ने बताया कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक टैंकर की संरचना को नुकसान हुआ है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है और न ही फिलहाल तेल रिसाव या समुद्री प्रदूषण के कोई संकेत मिले हैं। एजेंसी ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। साथ ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की सलाह दी गई है।

बता दें कि, इससे पहले होर्मुज की ताजा घटना से कुछ घंटे पहले कतर ने ईरान पर अपने एलएनजी ले जा रहे जहाज अल रेकय्यात पर हमला करने का आरोप लगाया था। यह जहाज रात के समय होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, जहाज की ओर से बताया गया कि उस पर ड्रोन से हमला किया गया, जिससे इंजन वाले हिस्से में आग लग गई। हालांकि सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित रहे और उन्हें बाहर निकालने का काम तुरंत शुरू कर दिया गया।

दिल्ली में सोना 1400 रुपये गिरा, चांदी में भी कमजोरी

दिल्ली सर्राफा बाजार में 7 जुलाई को सोने में गिरावट आई। यह 1,400 रुपये गिरकर 1.49 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी में भी 200 रुपये की गिरावट आई। विदेश में सोने और चांदी में कमजोरी का असर घरेलू बाजार पर पड़ा। 6 जुलाई को दिल्ली में सोने का भाव 1,50,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था।

लगातार दूसरे दिन सोने में नरमी

चांदी 7 जुलाई को दिल्ली सर्राफा बाजार में 200 रुपये गिरकर 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रही। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में कमोडिटी के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “गोल्ड की कीमतों में मंगलवार को कमजोरी जारी रही। इनवेस्टर्स फेडरल रिजर्व की जून की मीटिंग के मिनट्स जारी होने से पहले सावधानी बरत रहे हैं।”

फेड के मिनट्स पर लगी निगाहें

उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर के नतीजों से गोल्ड की कीमतों को दिशा मिल सकती है। एनालिस्ट्स का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती का भी असर सोने की कीमतों पर पड़ा।

विदेश में भी सोने और चांदी में गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.59 फीसदी गिरकर 4,140.59 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। सिल्वर 2 फीसदी गिरकर 60.89 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज के हेड प्रवीण सिंह ने कहा कि क्रूड की कीमतों में हल्की तेजी से विदेश में स्पॉट गोल्ड में नरमी है।

शॉर्ट टर्म में सीमित दायरे में रह सकती हैं कीमतें

उन्होंने कहा कि सोने और चांदी की कीमतें शॉर्ट टर्म में सीमित दायरे में बनी रह सकती हैं। हालांकि, अगर पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होता है तो बुलियन की कीमतों पर पॉजिटिव असर दिख सकता है। इस साल 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दवाब दिखा था।

यह भी पढ़ें: कच्चे तेल में आएगी गिरावट, सोना और चांदी खरीदने के लिए करें इंतजार : Citi

2025 में सोने ने दिया था 70 फीसदी रिटर्न 

इस साल जनवरी के आखिर में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद उनमें तेज गिरावट आई। अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई ने बुलियन की कीमतों पर दबाव और बढ़ा दिया। 2025 में सोने ने निवेशकों को बहुत अच्छा रिटर्न दिया था। इससे पहले के कुछ सालों में भी सोने का रिटर्न पॉजिटिव रहा था। लेकिन, इस साल सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव दिख रहा है।

कच्चे तेल में आएगी गिरावट, सोना और चांदी खरीदने के लिए करें इंतजार : Citi

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Citi के ग्लोबल हेड ऑफ कमोडिटीज मैक्स लेटन का मानना है कि अगले 6 से 12 महीनों तक कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इसकी वजह पश्चिम एशिया में तनाव कम होना और वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई बढ़ना है। वहीं, बैंक का कहना है कि निवेशकों को फिलहाल सोने और चांदी में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दोनों की कीमतों में अभी और कमजोरी आ सकती है।

कच्चे तेल पर क्यों है दबाव?

मैक्स लेटन का कहना है कि पश्चिम एशिया में हालात पहले से बेहतर हो रहे हैं। अगर ईरान से जुड़ा कोई समझौता होता है, तो बाजार में तेल की सप्लाई और बढ़ सकती है। दूसरी तरफ चीन से मांग कमजोर बनी हुई है। दूसरे देशों का उत्पादन भी बढ़ रहा है। ऐसे में बाजार में जरूरत से ज्यादा कच्चा तेल उपलब्ध हो सकता है।

Citi का अनुमान है कि अगर मौजूदा बातचीत सफल रही, तो साल के आखिर तक Brent Crude की कीमत 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है। लेटन ने निवेशकों को सलाह दी है कि अगर तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो उसे मुनाफावसूली का मौका मानना चाहिए।

गोल्ड और सिल्वर पर क्या राय?

मैक्स लेटन का कहना है कि पिछले 18 से 24 महीनों में सोने की तेज रैली की सबसे बड़ी वजह निवेशकों की मजबूत खरीदारी थी। अब यह रफ्तार धीमी पड़ रही है। ऐसे में अगले कुछ हफ्तों तक सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

उनके मुताबिक, ऊंची रियल इंटरेस्ट रेट और मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से फिलहाल सोने में कमजोरी रह सकती है। हालांकि, उनका मानना है कि अगले दो महीनों में अगर कीमतें गिरती हैं, तो वही खरीदारी का बेहतर मौका हो सकता है। Citi को उम्मीद है कि चौथी तिमाही में ब्याज दरों और महंगाई के नरम पड़ने से सोने को फिर सहारा मिल सकता है।

मैक्स लेटन का कहना है कि चांदी भी फिलहाल सोने की दिशा में ही चल सकती है। उनके मुताबिक, हालिया तेजी की बड़ी वजह निवेशकों की खरीदारी थी, न कि औद्योगिक मांग। हालांकि, सोलर जैसे सेक्टरों से लंबी अवधि की मांग मजबूत बनी हुई है। लेकिन मौजूदा ऊंची कीमतों की वजह से दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे शॉर्ट टर्म में चांदी की तेजी सीमित रह सकती है।

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Gold Silver Rates Today: देश और विदेश में गोल्ड और सिल्वर में गिरावट, एक दिन में चांदी 5000 रुपये फिसली

Gold Silver Rates Today: देश और विदेश में 7 जुलाई को सोने और चांदी में गिरावट आई। सोना लगातार दूसरे दिन फिसला। विदेश में स्पॉट गोल्ड 0.8 फीसदी गिरकर 4,129.90 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। स्पॉट सिल्वर 1.9 फीसदी गिरकर 60.93 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। पिछले हफ्ते सोने में अच्छी तेजी दिखी थी। यह 2 फीसदी से ज्यादा चढ़ा था। लेकिन, यह हफ्ता सोने के लिए अब तक कमजोर रहा है।

गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट 

भारत में भी गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में कमजोरी दिखी। कमोडिटी एक्सचेंज MCX में गोल्ड फ्यूचर्स 1.07 फीसदी यानी 1,567 रुपये गिरकर 1,45,350 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। सिल्वर फ्यूचर्स 2.16 फीसदी यानी 5,096 रुपये गिरकर 2,30,979 रुपये प्रति किलो पर आ गया। सोने ने 2025 में 70 फीसदी रिटर्न दिया था।

डॉलर इंडेक्स में मजबूती का सोने पर असर

सोने में गिरावट की वजह डॉलर में मजबूती है। डॉलर इंडेक्स 0.10 फीसदी चढ़ा। डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिसका असर सोने पर पड़ता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि 7 जुलाई को आई गिरावट की वजह पिछले हफ्ते की तेजी के बाद कंसॉलिडेशन है।

इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर घटेगी गोल्ड की चमक

ट्रेडर्स को अमेरिकी केंद्रीय बैंक की बैठक के मिनट्स का इंतजार है। यह 8 जुलाई को आएगा। इससे पता चलेगा कि इनफ्लेशन के बारे में फेडरल रिजर्व की क्या सोच है। निवेशकों को अब सितंबर में इंटरेस्ट रेट बढ़ने का 56 फीसदी अनुमान है। अगर फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट में कमी आने पर सोने की चमक बढ़ती है। इसके उलट इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक घटती है।

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सोना रिकॉर्ड ऊंचाई से 30 फीसदी फिसला

इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। उसके बाद उनमें तेज गिरावट देखने को मिली। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी पर दबाव बढ़ गया। सोना अपने पीस से करीब 30 फीसदी गिर चुका है। जून में सोने में करीब 14 फीसदी की गिरावट आई थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में तेजी टिक नहीं पा रही है। यही हाल चांदी का है। कुछ समय तक बुलियन कंसॉलिडेशन फेज में रह सकते हैं।

Stock Market Crash: डे-हाई से Sensex में 350 अंकों की गिरावट, 4 वजहों से Nifty आया 24450 के नीचे

Stock Market Crash: निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन आज मार्केट में शुरुआती कारोबार में अच्छी रौनक दिखी। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज उछल पड़े। सेंसेक्स 350 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा था तो निफ्टी भी 24500 के पार चला गया लेकिन फिर इंट्रा-डे हाई से सेंसेक्स 350 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24450 के नीचे तक आ गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर मार्केट में आज शुरुआती कारोबार से ही दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में आधे फीसदी के करीब गिरावट है तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक गिरावट है। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो 01:39 PM पर सेंसेक्स 31.33 यानी 0.04% की गिरावट के साथ 78,253.74 और निफ्टी 8.70 यानी 0.04% की फिसलन के साथ 24,421.65 पर है।

Stock Market Crash: ये है वजह

मुनाफावसूली

निवेशकों ने लगातार पांचवे दिन मार्केट में रौनक का फायदा उठाया और ऊपरी स्तर पर मुनाफावसूली की जिससे मार्केट नीचे आया। चार दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी 2.4% मजबूत हुआ और यह करीब 10 हफ्ते के हाई लेवल पर बंद हुआ था।

Nifty की वीकली एक्सपायरी

आज निफ्टी के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी है तो इसका भी असर आज मार्केट पर दिखा।

मेटल और रियल्टी शेयरों में गिरावट

मार्केट पर आज मेटल और रियल्टी शेयरों ने काफी दबाव बनाया। मेटल शेयरों के निफ्टी इंडेक्स निफ्टी में 1% से अधिक तो निफ्टी रियल्टी में डेढ़ फीसदी से अधिक की गिरावट आई। इसके अलावा हल्की ही सही लेकिन सरकारी और प्राइवेट बैंकों के शेयरों ने भी मार्केट पर दबाव बनाया है जिनके निफ्टी इंडेक्स लाल हैं। हालांकि आईटी सेक्टर मार्केट को ऊपर लाने की पूरी कोशिश कर रहा जिससे मार्केट की गिरावट सीमित हो जा रही है। निफ्टी आईटी में ढाई फीसदी से अधिक तेजी है।

अमेरिका-ईरान तनाव

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ओमान के तट पर एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ। इसे लेकर ईरानी स्टेट मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यह टैंकर अमेरिकी नौसेना के सपोर्ट से ओमान के समुद्री रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा था, जिसने ईरानी अधिकारियों की बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया था जिसके बाद इसे निशाना बनाया गया।

टेक्निकल आउटलुक

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स का कहना है कि एक कारोबारी दिन पहले 24400 के ऊपर निफ्टी के क्लोज होने से 24800-25250 की तरफ इसके बढ़ने का माहौल और सुधरा। हालांकि उन्होंने इस बात को लेकर भी सतर्क किया है कि 24600 के लेवल पर मार्केट को कुछ रिजेक्शन भी झेलना पड़ सकता है। आनंद के मुताबिक 24360 के सपोर्ट पर मार्केट 24600 की तरफ बढ़ सकता है।

Iran-US Tension: ‘बात नहीं मानी तो भुगतना होगा अंजाम’, ईरान ने बताया ओमान तट के पास तेल टैंकर पर क्यों दागी मिसाइल!

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होर्मुज में तेल टैंकर पर भीषण मिसाइल हमला, सीजफायर खत्म होते ही तबाही की आहट; कच्चे तेल की कीमतों में लग सकती है आग!

Iran US Conflict Near Strait of Hormuz: वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के पास सोमवार को एक बड़े तेल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के मुताबिक, ओमान के तट से करीब 8 समुद्री मील दूर एक अज्ञात मिसाइल या ड्रोन टकराने के बाद तेल टैंकर में भीषण आग लग गई।

इस घटना के तुरंत बाद अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने जानबूझकर दो कमर्शियल जहाजों पर मिसाइलें दागी हैं। इस हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ एक हफ्ते का संघर्ष विराम समझौता खत्म हो गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने का खतरा फिर से बढ़ गया है।

UKMTO और अमेरिका का क्या है दावा?

ब्रिटिश नौसेना की विंग UKMTO के अनुसार, यह तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए दक्षिण की तरफ बढ़ रहा था, तभी इसके पोर्ट साइड पर एक मिसाइल आकर लगी। राहत की बात यह है कि इस हमले में किसी भी क्रू मेंबर के हताहत होने या किसी तरह के बड़े पर्यावरणीय नुकसान की खबर नहीं है।

अमेरिका की जवाबी कार्रवाई की तैयारी

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ से बात करते हुए दो यूएस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ईरान ने दो व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है, जिससे जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके जवाब में अमेरिका अब ईरानी ठिकानों पर जवाबी सैन्य हमले करने की तैयारी कर रहा है।

क्यों टूटा अमेरिका-ईरान का शांति समझौता?

यह हमला ठीक उस समय हुआ है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों को रोकने के लिए हुआ एक हफ्ते का समझौता समाप्त हो गया। केवल तीन हफ्ते पहले ही दोनों देशों ने एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जो अब पूरी तरह टूटता नजर आ रहा है। पिछले हफ्ते कतर की राजधानी दोहा में दोनों पक्षों के बीच हुई अप्रत्यक्ष बातचीत भी इस रणनीतिक समुद्री रास्ते के भविष्य को लेकर बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी।

इससे पहले भी ईरान ने इस रास्ते की घेराबंदी कर दी थी और कई कमर्शियल जहाजों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी की थी। पिछले महीने हुए समझौते के बाद जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हुई थी, जो अब दोबारा खतरे में है।

ईरान अब जहाजों से वसूलेगा ‘टोल’

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं जाएगा, जहां जहाजों को इस रास्ते से मुफ्त में गुजरने की आजादी थी। ईरान ने चेतावनी दी है कि कोई भी जहाज उसके तय किए गए समुद्री कॉरिडोर से बाहर नहीं जाएगा।

बीजिंग में वर्ल्ड पीस फोरम के दौरान ईरानी राजदूत अब्दोलरेज़ा रहमानी फजली ने बड़ा बयान देते हुए कहा, ‘चूंकि होर्मुज का एक बड़ा हिस्सा ईरान के प्रादेशिक जल क्षेत्र में आता है, इसलिए ईरान अब यहां से गुजरने वाले जहाजों से ‘सर्विस फीस’ वसूलेगा। हालांकि उन्होंने इसे टैक्स या टोल टैक्स कहने से इनकार किया’।

ईरानी राजदूत ने यह भी साफ किया कि जो देश मुश्किल वक्त में ईरान के साथ खड़े रहे जैसे- भारत और अन्य मित्र देश, उन्हें इस सर्विस फीस में ‘विशेष छूट’ दी जाएगी।

दुनिया के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण है ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’?

होर्मुज जलडमरूमध्य खाड़ी देशों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों, विशेष रूप से एशिया तक कच्चे तेल के निर्यात का सबसे बड़ा लाइफलाइन रूट है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक, इस समुद्री रास्ते से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है। यह मात्रा पूरी दुनिया की कुल कच्चे तेल की सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) है। यही कारण है कि यहां होने वाली मामूली हलचल भी दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा देती है।