खामेनेई के पार्थिव शरीर को आज कोम ले जाया जाएगा:यहीं से खामेनेई ने धार्मिक शिक्षा हासिल की थी; शिया धर्मगुरु और छात्र शामिल होंगे

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर धार्मिक रस्मों के लिए मंगलवार को तेहरान से करीब 120 किमी दूर कोम शहर ले जाया जाएगा। कोम ईरान में शिया इस्लामिक शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र और देश के सबसे पवित्र शहरों में से एक माना जाता है। यहां ईरान के सबसे बड़े धार्मिक मदरसे हैं, जहां हजारों छात्र और धर्मगुरु इस्लामी शिक्षा हासिल करते हैं और पढ़ाते हैं। खामेनेई ने भी यहीं से धार्मिक शिक्षा हासिल की थी। इसी वजह से कोम को शिया समुदाय का सबसे जरूरी धार्मिक और वैचारिक केंद्र माना जाता है। आज कोम में खामेनेई के जनाजे का जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें शिया धर्मगुरू और छात्र भी शामिल होंगे। खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी 5 तस्वीरें… खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

खामेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान के बाद कोम पहुंचा:यहां से पूर्व सुप्रीम लीडर ने धार्मिक शिक्षा हासिल की; अंतिम यात्रा निकाली जाएगी

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर सोमवार शाम तेहरान से कोम पहुंच गया। ईरान के सरकारी टीवी के मुताबिक, हेलिकॉप्टर के जरिए पार्थिव शरीर को कोम लाया गया, जहां मंगलवार को अंतिम यात्रा और धार्मिक रस्में होंगी। कोम वही शहर है, जहां उन्होंने धार्मिक शिक्षा हासिल की थी। बाद में ईरान के सबसे प्रभावशाली धार्मिक नेताओं में शामिल हुए। कोम को शिया मुसलमानों का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है। इससे पहले तेहरान में तीसरे दिन भी लाखों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। लोगों ने खामेनेई और उनके परिवार के दिवंगत सदस्यों के ताबूतों पर फूल बरसाकर श्रद्धांजलि दी। कोम में अंतिम यात्रा के बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को उनके गृह नगर मशहद ले जाया जाएगा। गुरुवार को उन्हें इमाम रजा दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। तेहरान में खामेनेई की अंतिम यात्रा से जुड़ी 5 तस्वीरें… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. तेहरान में खामेनेई की अंतिम यात्रा में जनसैलाब: तेहरान में निकली अंतिम यात्रा में लाखों लोग जुटे। भारी भीड़ के कारण ताबूत लेकर चल रहा वाहन कई जगह धीमा पड़ा और आजादी स्ट्रीट पर कुछ देर के लिए रुकना भी पड़ा। 2. खामेनेई का पार्थिव शरीर कोम पहुंचा: तेहरान में अंतिम यात्रा के बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक रस्मों के लिए कोम ले जाया गया। गुरुवार को उनके गृह नगर मशहद में दफन किया जाएगा। 3. ईरान में खामेनेई के बदले की मांग तेज: अंतिम यात्रा में लाल झंडे और ‘या लथारत अल-खामेनेई’ के नारे गूंजे। समर्थकों ने खामेनेई की हत्या का बदला लेने की मांग दोहराई। 4. ईरानी नेताओं की दो टूक चेतावनी: राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अंतिम यात्रा को खामेनेई के रास्ते पर चलने का संकल्प बताया। सेना प्रमुख अमीर हातमी ने कहा कि हत्या करने वालों का पीछा नहीं छोड़ा जाएगा। 5. इजराइल-ईरान के बीच बयानबाजी तेज: नेतन्याहू ने कहा कि अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ पूरे ईरान की आवाज नहीं है। वहीं इराक के शिया नेता अम्मार अल-हकीम ने लोगों से अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

सऊदी अरब ने सस्ता किया तेल, 26 साल में सबसे बड़ी कटौती; जानिए क्या है वजह

सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए बड़ा दांव खेला है। सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco ने अगस्त के लिए अपने सबसे ज्यादा बिकने वाले Arab Light Crude की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कटौती कर दी है। यह कम से कम 26 साल में सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है।

अब कंपनी एशिया के ग्राहकों को Arab Light क्षेत्रीय बेंचमार्क के मुकाबले 1.50 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बेचेगी। दिलचस्प बात यह है कि Bloomberg के सर्वे में एनालिस्टों ने औसतन 8 डॉलर प्रति बैरल की कटौती का अनुमान लगाया था। लेकिन Saudi Aramco ने उससे भी बड़ी कटौती कर दी।

आखिर कीमत घटाने की जरूरत क्यों पड़ी?

इसकी सबसे बड़ी वजह है कच्चे तेल की बढ़ती सप्लाई। जून के बीच से ही तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम हुआ। इसके बाद Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही फिर सामान्य होने लगी।

जब तेल की सप्लाई आसान हुई, तो बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया। इसी का असर Brent Crude पर भी दिखा। इसकी कीमत गिरकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। यानी लगभग वहीं, जहां यह फरवरी के आखिर में थी।

मिडिल ईस्ट से तेजी से बढ़ रही है सप्लाई

मध्य पूर्व से अब पहले के मुकाबले ज्यादा तेल बाजार में आ रहा है। युद्ध के दौरान Saudi Aramco ने फारस की खाड़ी के Ras Tanura बंदरगाह से निर्यात कम कर दिया था। उस समय कंपनी ने ज्यादातर तेल Yanbu बंदरगाह के जरिए भेजा था, क्योंकि Strait of Hormuz में आवाजाही बुरी तरह प्रभावित थी।

अब हालात बदल चुके हैं। समुद्री यातायात फिर सामान्य हो रहा है। ऐसे में Aramco ने Ras Tanura से भी निर्यात बढ़ा दिया है। एक समय यह युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर के करीब 90% तक पहुंच गया।

OPEC+ ने भी बढ़ाया उत्पादन

तेल बाजार पर दबाव बढ़ने की एक और वजह OPEC+ का फैसला है। इस समूह की अगुवाई सऊदी अरब और रूस कर रहे हैं। OPEC+ ने अगस्त के लिए एक बार फिर उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है।

युद्ध के दौरान कई खाड़ी देशों के लिए उत्पादन बढ़ाना आसान नहीं था, क्योंकि Hormuz के रास्ते तेल भेजने में दिक्कत थी। अब समुद्री रास्ता सामान्य हो रहा है। ऐसे में सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश अपने बढ़े हुए उत्पादन कोटे का पूरा फायदा उठा सकेंगे।

एनालिस्टों का मानना है कि OPEC+ के इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल संगठन अपने सदस्य देशों को ज्यादा तेल निकालने से नहीं रोकना चाहता। अगर सप्लाई इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

Crude Oil Price: 60 डॉलर से नीचे जा सकता है कच्चा तेल! एक्सपर्ट बोले- चीन बदलेगा पूरा खेल

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil Price: 60 डॉलर से नीचे जा सकता है कच्चा तेल! एक्सपर्ट बोले- चीन बदलेगा पूरा खेल

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में इस साल बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। Crystol Energy के ग्लोबल एडवाइजर Christof Ruehl का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो कच्चे तेल का भाव 60 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे जा सकता है। फिलहाल, कच्चा तेल 72 डॉलर के आसपास बना हुआ है।

हालांकि, इसमें सबसे बड़ा रोल चीन का होगा। अगर चीन अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) को भरने में देरी करता है, तो कीमतों पर और दबाव आ सकता है।

सप्लाई ज्यादा होगी, मांग घटेगी

Christof Ruehl का कहना है कि आने वाले महीनों में तेल का उत्पादन खपत से ज्यादा रह सकता है। उनके मुताबिक, Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। हाल के भू-राजनीतिक तनाव भी कम हुए हैं। इसका मतलब है कि बाजार में तेल की सप्लाई पहले के मुकाबले आसान होगी।

उनका मानना है कि साल की दूसरी छमाही में तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक चीन तय करेगा। सवाल सिर्फ इतना है कि चीन तेल कब खरीदता है और कितनी मात्रा में खरीदता है।

60 डॉलर से नीचे क्यों जा सकता है तेल?

Christof Ruehl का कहना है कि अगर चीन सस्ती कीमत का इंतजार करता है और खरीदारी टाल देता है, तो कच्चे तेल का भाव कुछ समय के लिए 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे भी जा सकता है।

हालांकि, उन्हें यह भी लगता है कि 60 डॉलर के नीचे जाते ही चीन अपने रणनीतिक भंडार को भरने के लिए बड़ी खरीदारी शुरू कर सकता है। ऐसा हुआ, तो कीमतों को सहारा मिल सकता है।

OPEC+ भी बढ़ा रहा है उत्पादन

तेल की सप्लाई बढ़ने की एक और वजह OPEC+ है। Ruehl का कहना है कि OPEC+ देशों ने हाल ही में उत्पादन बढ़ाया है। इसके अलावा UAE, रूस, इराक और ईरान जैसे देश भी ज्यादा तेल निकाल रहे हैं।

यानी बाजार में तेल की कमी नहीं दिख रही। सप्लाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

OPEC के सामने भी मुश्किल

Christof Ruehl का मानना है कि आने वाले वर्षों में OPEC के सामने बड़ी चुनौती आ सकती है। अगर दुनिया में तेल की मांग अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचकर घटने लगती है, तो तेल उत्पादक देशों के बीच बाजार हिस्सेदारी की लड़ाई और तेज हो जाएगी।

उनका कहना है कि अगर भविष्य में 2025 को ‘पीक ऑयल डिमांड’ का साल माना गया, तो यह पूरी ऑयल इंडस्ट्री के लिए गेम चेंजर साबित होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में और देश UAE की तरह OPEC छोड़ने का फैसला करते हैं, तो बाकी सदस्य देशों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव और बढ़ जाएगा।

अभी सबसे बड़ा फैक्टर क्या है?

Christof Ruehl का मानना है कि फिलहाल तेल की कीमतों के लिए सबसे बड़ा जोखिम गिरावट का है। बशर्ते कोई नया बड़ा भू-राजनीतिक संकट न खड़ा हो।

हालांकि, उनके मुताबिक 60 डॉलर प्रति बैरल का स्तर काफी अहम है। अगर कीमतें इससे नीचे जाती हैं, तो चीन बड़ी खरीदारी करके बाजार को सहारा दे सकता है। यही वजह है कि आने वाले महीनों में पूरी दुनिया की नजर चीन की खरीदारी पर रहेगी।

Tata Motors PV Q1 Update: तीन गुना बढ़ी Curvv, Sierra की बिक्री; पंच, नेक्सॉन ने भी दिखाया दम

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil Price: क्रूड को लेकर आई बड़ी खबर, उत्पादन बढ़ाएगा OPEC+, $71 के पास आया ब्रेंट का भाव

Crude Oil Price:  OPEC+ के अगस्त से अपने प्रोडक्शन टारगेट को और बढ़ाने पर सहमत होने के बाद सोमवार को तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए बड़े प्रोड्यूसर्स से क्रूड एक्सपोर्ट में रिकवरी से भी ग्लोबल सप्लाई में बढ़ोतरी का इशारा मिला, जिससे कीमतों पर असर पड़ा।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स शुक्रवार को 0.45% बढ़कर बंद होने के बाद 24 सेंट या 0.33% गिरकर $71.88 प्रति बैरल पर आ गया। इस बीच, US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 11 सेंट या 0.16% गिरकर $68.58 प्रति बैरल पर आ गया। WTI शुक्रवार को सेटल नहीं हुआ क्योंकि शनिवार को इंडिपेंडेंस डे की छुट्टी से पहले US मार्केट बंद रहे।

क्रूड ऑयल की कीमतों पर क्या असर पड़ रहा है?

पिछले कुछ हफ़्तों में गिरावट देखने के बाद पिछले हफ़्ते दोनों बेंचमार्क क्रूड कॉन्ट्रैक्ट में ज़्यादा बदलाव नहीं हुआ, क्योंकि इन्वेस्टर्स होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग के भविष्य पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पर करीब से नज़र रख रहे थे, साथ ही गल्फ़ ऑयल एक्सपोर्ट में रिकवरी पर भी नज़र रख रहे थे।

इस बीच, पेट्रोलियम एक्सपोर्ट करने वाले देशों के संगठन (OPEC) और रूस समेत उसके सहयोगी, रविवार को अगस्त से प्रोडक्शन टारगेट को और 188,000 बैरल प्रति दिन बढ़ाने पर सहमत हुए, जून और जुलाई के लिए इसी तरह की बढ़ोतरी की घोषणा के बाद।

हालांकि, प्लान की गई प्रोडक्शन बढ़ोतरी का ज़्यादातर हिस्सा कागज़ों पर ही रहा है। ईरान से जुड़े US-इज़राइली झगड़े ने होर्मुज स्ट्रेट से टैंकर ट्रैफिक में रुकावट डाली, जिससे सऊदी अरब, कुवैत और इराक जैसे OPEC के मुख्य प्रोड्यूसर प्रभावित हुए, और उनकी प्रोडक्शन बढ़ाने की क्षमता सीमित हो गई।

रॉयटर्स के एक सर्वे के मुताबिक, जून में OPEC का तेल प्रोडक्शन पिछले महीने की तुलना में 3.3 मिलियन बैरल प्रति दिन बढ़कर 19.43 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया, जो दो दशकों से ज़्यादा समय में अपने सबसे निचले लेवल से उबर रहा है।

इस बीच, डेटा से पता चला कि गल्फ़ ऑयल एक्सपोर्ट मई से 3 मिलियन बैरल से ज़्यादा बढ़कर जून में 10 मिलियन bpd से ज़्यादा हो गया, हालांकि वॉल्यूम युद्ध से पहले के लेवल से लगभग 40% कम रहा।

अलग से, रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि रूस के पश्चिमी पोर्ट से क्रूड शिपमेंट जून में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया और जुलाई में भी इसी लेवल पर रहने की उम्मीद है। यह बढ़ोतरी यूक्रेन के ड्रोन हमलों के बाद हुई है, जिसमें रूसी रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचा था, जिससे मॉस्को को क्रूड एक्सपोर्ट बढ़ाना पड़ा।

Commodity Cornor: इंटरनेशनल मार्केट में चढ़े चीनी के दाम, सोने-चांदी की कीमतों में रिकवरी, क्रूड फिसला

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

GIFT Nifty दे रहा सेंसेक्स-निफ्टी के फ्लैट शुरुआत के संकेत, एशिया बाजार में मिलाजुला कारोबार

GIFT Nifty ने सोमवार को इंडियन बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के लिए धीमी शुरुआत का संकेत दिया, भले ही ग्लोबल संकेत काफी पॉजिटिव थे, क्योंकि इन्वेस्टर्स ने घरेलू इक्विटी में हालिया रैली के मुकाबले क्रूड ऑयल की घटती कीमतों, रिस्क सेंटिमेंट में सुधार और ग्लोबल अर्निंग्स सीजन की उम्मीद के बीच बैलेंस बनाया। OPEC+ के प्रोडक्शन बढ़ाने के फैसले और मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने के बाद ऑयल की कम कीमतों ने मार्केट के लिए सपोर्टिव बैकग्राउंड बनाए रखा।

GIFT Nifty सुबह करीब 8.30 बजे 24,327.50 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले निफ्टी क्लोज से 27.00 पॉइंट या 0.11 परसेंट नीचे था, जिससे पता चलता है कि शुक्रवार को लगातार तीसरे सेशन में बढ़त के बाद सेंसेक्स और निफ्टी थोड़ी कम खुल सकते हैं।

IT, फार्मा, मेटल और रियल्टी स्टॉक्स में बड़े पैमाने पर खरीदारी से सपोर्टेड, इंडियन बेंचमार्क इंडेक्स ने शुक्रवार को अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। सेंसेक्स 261.79 पॉइंट्स या 0.34 परसेंट बढ़कर 77,763.91 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 95.15 पॉइंट्स या 0.39 परसेंट बढ़कर 24,270.85 पर बंद हुआ।

एशियाई मार्केट में मजबूती, कमाई की उम्मीद से माहौल बेहतर हुआ

सोमवार को एशियाई इक्विटीज़ में ज़्यादातर बढ़त रही क्योंकि इन्वेस्टर्स ग्लोबल कमाई के सीज़न की शुरुआत पर ध्यान दे रहे थे, जबकि US लेबर मार्केट के नरम डेटा ने जल्द ही फेडरल रिजर्व रेट में बढ़ोतरी को लेकर चिंताओं को कम किया।

जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.4 परसेंट बढ़ा। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स की तिमाही कमाई से पहले साउथ कोरिया के कोस्पी में 2 परसेंट से ज़्यादा की बढ़त हुई, एनालिस्ट्स को AI से जुड़ी मेमोरी चिप की मज़बूत डिमांड से मुनाफ़े में तेज़ उछाल की उम्मीद थी। पिछले हफ़्ते की मज़बूत बढ़त के बाद जापान का निक्केई थोड़ा गिरा।

स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी के कारण शुक्रवार को US मार्केट बंद रहे। हालांकि, एशियाई घंटों में US फ्यूचर्स में बढ़त हुई, जिसमें S&P 500 फ्यूचर्स 0.5 परसेंट और नैस्डैक फ्यूचर्स 1.4 परसेंट बढ़े, जो कॉर्पोरेट अर्निंग्स और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स को लेकर उम्मीद दिखाता है।

OPEC+ के आउटपुट में बढ़ोतरी से क्रूड पर दबाव बना हुआ है

OPEC+ के अगस्त से प्रोडक्शन टारगेट फिर से बढ़ाने पर सहमत होने के बाद तेल की कीमतें कम हुईं, जिससे ग्लोबल सप्लाई में सुधार की उम्मीदें बढ़ गईं। ब्रेंट क्रूड लगभग 0.6 परसेंट गिरकर $71.7 प्रति बैरल के करीब आ गया, जो चार महीने के सबसे निचले स्तर के करीब है, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड लगभग $68.4 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था। होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए शिपमेंट में रिकवरी और जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने से भी एनर्जी की कीमतों को कम रखने में मदद मिली है।

इस बीच, उम्मीद से कम US पेरोल डेटा ने US फेडरल रिजर्व द्वारा रेट में बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम कर दिया, जिसके बाद सोना दो हफ़्ते के हाई के पास बना रहा।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US-ईरान के सुधरते हालात और होर्मुज स्ट्रेट से बिना रुकावट शिपिंग से एनर्जी सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हुई है, जबकि OPEC+ के प्रोडक्शन बढ़ाने के फैसले से तेल की कम कीमतों को और सपोर्ट मिला है। निवेशक AI से चलने वाले सेमीकंडक्टर की मांग पर नए संकेतों के लिए सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स की कमाई पर भी करीब से नज़र रखेंगे, जो ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेंटिमेंट पर असर डाल सकता है।

टेक्निकल नज़रिए से, पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी एक कंस्ट्रक्टिव स्ट्रक्चर बनाए हुए है, जिसमें 24,400 का लेवल तुरंत रेजिस्टेंस का काम कर रहा है। इस ज़ोन से ऊपर लगातार मूव करने से 24,500-24,600 की ओर बढ़ने का रास्ता बन सकता है। नीचे की तरफ, 24,200 पहला ज़रूरी सपोर्ट बना हुआ है, इसके बाद 24,000 का साइकोलॉजिकल लेवल है।

पिछले सेशन में इंस्टीट्यूशनल फ्लो मिला-जुला रहा। विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर 3 जुलाई को चार सेशन की बिकवाली के बाद नेट बायर बन गए, और उन्होंने 1,355 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी। इस बीच, घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने आठ सेशन की खरीदारी का सिलसिला तोड़ा और नेट सेलर बन गए, और 1,953 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Share Market Live Update: मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच बेंचमार्क Nifty50 इंडेक्स के लिए GIFT Nifty ने धीमी शुरुआत दिखाई, जबकि निवेशक US फेडरल रिजर्व की जून मीटिंग के मिनट्स का इंतज़ार कर रहे थे, जो इस हफ़्ते के आखिर में पब्लिश होने वाले हैं। फ्यूचर्स 24,354 पर फ्लैट कोट किए गए।

सोमवार को शुरुआती कारोबार में ज़्यादातर एशियाई बाज़ारों में बढ़त हुई क्योंकि तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही और टेक्नोलॉजी शेयरों में उछाल आया। कोस्पी और CSI 300 क्रमशः 0.62 प्रतिशत और 0.26 प्रतिशत ऊपर थे।

हालांकि US-ईरान बातचीत में कोई और प्रोग्रेस नहीं हुई, लेकिन जहाज़ होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रते रहे। इसके अलावा, पेट्रोलियम एक्सपोर्ट करने वाले देशों के संगठन और उसके सहयोगी (OPEC+) जून और जुलाई में इसी तरह के आउटपुट बढ़ोतरी के बाद अगस्त से आउटपुट बढ़ाने पर सहमत हुए।

जुलाई फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर $71.78 प्रति बैरल पर कोट किया गया, जो 0.47 प्रतिशत नीचे था।

सोने और चांदी के फ्यूचर्स क्रमशः 2.11 प्रतिशत और 3.56 प्रतिशत ऊपर ट्रेड कर रहे थे।

खामेनेई के जनाजे में 3 बेटे शामिल, मुजतबा दूर रहे:लोगों ने ‘किल ट्रम्प’ के नारे लगाए; आज तेहरान में अंतिम यात्रा

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में रविवार को उनके तीन बेटे मसूद, मेयसम और मुस्तफा शामिल हुए। हालांकि खामेनेई के बेटे और उत्तराधिकारी मुजतबा खामेनेई समारोह से दूर रहे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल से जान का खतरा होने के कारण उन्होंने सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार में हिस्सा नहीं लिया। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतिम संस्कार के दौरान लोगों ने ‘किल ट्रम्प’ और ‘किल बीबी’ (इजराइल के प्रधानमंत्री) के नारे लगाए। साथ ही, पूर्व सुप्रीम लीडर का बदला लेने की मांग की। आज सोमवार को तेहरान की सड़कों से खामेनेई की भव्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसमें लाखों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। खामेनेई के ताबूत को शहर के प्रमुख मार्गों से ले जाया जाएगा। धार्मिक नेता, सरकारी अधिकारी और सेना के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहेंगे। खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी 4 तस्वीरें… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडे्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Stock Market News: कच्चा तेल, मानसून और तिमाही नतीजे; इन बातों से तय होगी Sensex-Nifty की चाल

Stock Market Trend This Week: 6 जुलाई से शुरू हो रहे इस कारोबारी हफ्ते शेयर मार्केट में मार्केट सेंटिमेंट कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक रुझानों और कॉरपोरेट आय सीजन की शुरुआत पर निर्भर करेगी। एनालिस्ट्स के मुताबिक आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी टीसीएस 9 जुलाई को जून तिमाही के कारोबारी नतीजे पेश करेगी, जिस पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति और विदेशी निवेशकों की खरीदारी-बिकवाली से भी बाजार की दिशा तय होगी। पिछले कारोबारी हफ्ते सेंसेक्स 663.44 प्वाइंट्स यानी 0.86% की बढ़त के साथ 77,763.91 तो निफ्टी 214.85 प्वाइंट्स यानी 0.89% के उछाल के साथ 24270.85 पर बंद हुआ।

मार्केट की चाल पर क्या है एक्सपर्ट्स का रुझान

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि निवेशकों की नजर 9 जुलाई को टीसीएस के कारोबारी नतीजे पर रहेगी। अजीत के मुताबिक निवेशकों का ध्यान खास तौर पर डिमांड ट्रेंड, डिस्क्रेशनरी स्पेंडिंग और एआई से जुड़े बिजनेस मौकों को लेकर मैनेजमेंट की बातों पर रहेगा।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट प्रवेश गौड़ का भी कहना है कि घरेलू स्तर पर निवेशकों का ध्यान 9 जुलाई से शुरू होने रहे वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अर्निंग्स सीजन पर रहेगा। उनका मानना है कि कॉरपोरेट अर्निंग्स और मैनेजमेंट की कमेंट्री से डिमांड के माहौल, मार्जिन के रुझानों और अर्निंग्स विलिबिलिटी को लेकर अहम संकेत मिलेगा। प्रवेश के मुताबिक दक्षिण पश्चिम मानसून और खरीफ की बुवाई भी गांवों में मांग, महंगाई की रफ्तार और ओवरऑल इकनॉमिक ग्रोथ को लेकर अहम संकेत देगा।

इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच टेक्निकल बातचीत का अगला दौर 11 जुलाई को होने की उम्मीद है, हालांकि बैठक की जगह के बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से सप्लाई को लेकर चिंता कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें प्रति बैरल $68-$69 के आसपास स्थिर हो गए हैं और अब इन पर निवेशकों की नजर रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के लेबर मार्केट के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे फेडरल रिजर्व के रुख में नरमी की उम्मीदें बढ़ी हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर फेड की जून पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स यानी बैठक के ब्यौरे पर रहेगी ताकि अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों को लेकर स्पष्ट रुझान मिल सकें।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के मिनट्स, घरेलू अर्निंग्स सीजन की शुरुआत और मानसून की दिशा से तय होगी।

Elon Musk अब नहीं रहे ट्रिलेनियर, Tesla-SpaceX की बिकवाली से लगा करंट, एक्सपर्ट ने किया सतर्क

EPF Scheme 2026: सैलरी अधिक लें या पीएफ खाते में ज्यादा पैसे, फैसले से पहले करें ये कैलकुलेशन, नहीं तो लगेगा तगड़ा शॉक

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

संडे प्रोफाइल : टकर कार्लसन:कभी ट्रम्प के समर्थक थे, अब रखा तीसरी पार्टी का विचार

अमेरिका की दक्षिणपंथी राजनीति की प्रभावशाली आवाज टकर कार्लसन फिर चर्चा में हैं। कभी उनकी लोकप्रियता फिल्मी सितारों जैसी थी। अब वे राष्ट्रपति ट्रम्प से मतभेद और नई राजनीतिक पार्टी के विचार को लेकर सुर्खियों में हैं। कार्लसन लंबे समय से अमेरिकी राजनीति और मीडिया की सबसे प्रभावशाली दक्षिणपंथी आवाजों में गिने जाते हैं। इमिग्रेशन विरोध, श्वेत पहचान और राष्ट्रवादी मुद्दों पर उनके आक्रामक विचारों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है। वे वर्षों तक रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रबल समर्थक रहे, लेकिन हाल के महीनों में दोनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कार्लसन ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध किया और कहा कि ट्रम्प ने अपने चुनावी वादों के विपरीत कदम उठाया है। उन्होंने अपने पॉडकास्ट पर यह स्वीकार भी किया कि ट्रम्प को लेकर उन्होंने लोगों को गुमराह किया था। इसी दौरान उन्होंने अमेरिका में तीसरी राजनीतिक पार्टी बनाने का विचार सामने रखकर हलचल पैदा कर दी। वे वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के प्रयासों पर भी सवाल उठा चुके हैं। ट्रम्प द्वारा अल्लाह शब्द के इस्तेमाल और सोशल मीडिया पर खुद को ईसा मसीह जैसी छवि में प्रस्तुत करने की भी उन्होंने आलोचना की। गौरतलब है कि अमेरिका में मुख्य रूप से दो-दलीय राजनीतिक व्यवस्था (टू-पार्टी सिस्टम) है, जिसमें डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहता है।
58 वर्षीय कार्लसन को पत्रकारिता विरासत में मिली। उनके पिता रिचर्ड वार्नर कार्लसन मीडिया जगत से जुड़े रहे। इतिहास में स्नातक करने के बाद टकर ने पत्रिकाओं और अखबारों में काम किया तथा 1995 में पीबीएस से टीवी करियर की शुरुआत की। उन्हें सबसे ज्यादा पहचान 2016 से 2023 के बीच फॉक्स न्यूज के शो ‘टकर कार्लसन टुनाइट’ से मिली। यह शो औसतन करीब 30 लाख दर्शकों तक पहुंचता था और कार्लसन अमेरिकी कंजरवेटिव राजनीति की सबसे प्रभावशाली आवाजों में शामिल हो गए थे। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उनके नाम वाली टी-शर्ट और मग की बिक्री कई बार ट्रम्प से जुड़े उत्पादों से भी अधिक बताई गई। रिपब्लिकन रणनीतिकार जेफ रो के मुताबिक 2020-21 के दौरान कंजरवेटिव राजनीति में कार्लसन जैसा प्रभाव रखने वाला शायद ही कोई दूसरा व्यक्ति था।
हालांकि उनकी पहचान विवादों से भी जुड़ी रही। उन्होंने इमिग्रेशन, नस्ल और पहचान की राजनीति पर कई तीखी टिप्पणियां कीं। वे बार-बार यह दावा करते रहे कि अमेरिका का अभिजात वर्ग श्वेत ईसाई मतदाताओं की जगह नए प्रवासी मतदाताओं को स्थापित करना चाहता है। इन विवादों के चलते डिज्नी और लेक्सस जैसी कंपनियों ने उनके शो से विज्ञापन हटा लिए थे। 2023 में फॉक्स न्यूज से अलग होने के बाद उन्होंने अपना स्ट्रीमिंग मंच ‘टकर कार्लसन नेटवर्क’ शुरू किया। आज भी वे अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीति की सबसे चर्चित और विवादास्पद आवाजों में शामिल हैं।