Kamika Ekadashi 2026: सावन की पहली एकादशी का व्रत इस दिन होगा, नोट करें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Kamika Ekadashi 2026: सावन माह में आने वाले पहले एकादशी व्रत को कामिका एकदशी व्रत के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु का स्मरण करने वाले भक्तों के सारे पाप मिट जाते हैं। पुराणों अनुसार कामिका एकादशी का व्रत हजार गौ दान के बराबर पुण्य देता है। कहते हैं इस दिन तीर्थ स्थानों पर स्नान करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है।

हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। इस तरह पूरे साल में 24 एकादशी व्रत का सौभाग्य मिलता है। सावन माह की पहली एकादशी तिथि को लेकर लोगों को भ्रम हो रहा है कि ये 8 अगस्त को किया जाएगा या 9 अगस्त को किया जाएगा। असल में एकादशी तिथि 8 अगस्त को दोपहर से शुरू हो रही है और हिंदू धर्म में अधिकांश व्रत और त्योहार उदयातिथि को देखते हुए मनाए जाते हैं। इसलिए सावन माह की पहली एकादशी तिथि का व्रत 9 अगस्त को किया जाएगा। आइए जानें इसके बारे में

कामिका एकादशी 2026 सही तारीख

पंचांग अनुसार कामिका एकादशी तिथि 8 अगस्त की दोपहर 01:59 से शुरू होकर 9 अगस्त की सुबह 11:04 तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार कामिका एकादशी व्रत 9 अगस्त को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 10 अगस्त को किया जाएगा और पारण का समय सुबह 05:47 से 08 बजे तक रहेगा।

कामिका एकादशी शुभ मुहूर्त 2026

ब्रह्म मुहूर्त – 04:22 AM से 05:04 AM

प्रातः सन्ध्या – 04:43 AM से 05:47 AM

अभिजित मुहूर्त – 12:00 PM से 12:53 PM

विजय मुहूर्त – 02:40 PM से 03:33 PM

गोधूलि मुहूर्त – 07:06 PM से 07:27 PM

सायाह्न सन्ध्या – 07:06 PM से 08:10 PM

अमृत काल – 06:42 AM से 08:09 AM

द्विपुष्कर योग – 11:04 AM से 02:43 PM

इस दिन बन रहे हैं शुभ योग

कामिका एकादशी पर इस बार दो शुभ योगों का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन सुबह 11 बजकर 4 मिनट से दोपहर 2 बजकर 43 मिनट तक द्विपुष्कर योग रहेगा। वहीं, पूरे दिन हर्षण योग प्रभावी रहेगा और इसका समापन 10 अगस्त को रात 2 बजकर 4 मिनट पर होगा। धार्मिक मान्यता है कि इन शुभ योगों में भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के हर दुख को हर लेते हैं।

कामिका एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं अनुसार कामिका एकादशी का व्रत रखने से सभी बिगड़े काम बनने लगते हैं। साथ ही पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। इस दिन तुलसी का पूजन भी जरूर करें। साथ ही भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते भी अवश्य चढ़ाएं, इससे आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। साथ ही मां लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होगी।

कामिका एकादशी व्रत पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान से निवृत्त होकर पहले व्रत का संकल्प लें और फिर भगवान विष्णु की विधि विधान पूजा करें। भगवान को फल-फूल, तिल, दूध, पंचामृत, तुलसी आदि जरूर अर्पित करें। विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करें। साथ ही कामिका एकादशी की कथा पढ़ें। दिन भर फलाहारी व्रत रहें और एकादशी के अगले दिन किसी ब्राह्मण को भोजन कराकर अपना व्रत खोलें।

Sawan Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र में होगा स्नान-दान, जानें तारीख और पितरों को तर्पण देने का समय

Sawan Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र में होगा स्नान-दान, जानें तारीख और पितरों को तर्पण देने का समय

Sawan Amavasya 2026 Date: सावन के महीने का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह भगवान विष्णु के चार माह की योगनिद्रा में जानें के बाद पहला हिंदू माह होता है। इस अवधि में भगवान शिव सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं। सावन भगवान शिव का प्रिय माह है। इस माह में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहते हैं, क्योंकि इस समय चारों तरफ हरियाली छायी रहती है और मानसून की फुहारों से वातावरण सराबोर रहता है।

हरियाली अमावस्या के दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान और उसके बाद दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इसलिए हरियाली अमावस्या पर तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। इस दिन पितृ दोष से मुक्ति के लिए विशेष उपाय भी किए जाते हैं। शाम के समय में पितरों के लिए दीपक जलाते हैं, ताकि पितृ लोक लौटते समय उनका मार्ग अंधकार में न रहे। इस साल की सावन अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र रहेगा। आइए जानते हैं कि हरियाली अमावस्या कब है और पितृ तर्पण कब कर सकते हैं?

सावन अमावस्या 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के आधार पर देखा जाए तो इस बार श्रावण कृष्ण अमावस्या तिथि 12 अगस्त को 01:52 बजे से शुरू हो रही है और यह 12 अगस्त को रात 11:06 बजे तक रहेगी। उदयातिथि को देखते हुए सावन अमावस्या 12 अगस्त बुधवार का है।

सावन अमावस्या 2026 स्नान-दान मुहूर्त

सावन अमावस्या पर स्नान और दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04 बजकर 23 ए एम से लेकर प्रात: 05 बजकर 06 मिनट तक है। जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान न कर पाएं, वे लोग सूर्योदय के बाद स्नान, दान कर सकते हैं। उस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त 05:49 ए एम से 07:28 ए एम तक और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 07:28 ए एम से 09:07 ए एम तक रहेगा। इन दोनों समयों में भी स्नान और दान किया जा सकता है। सावन अमावस्या पर साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है।

सावन अमावस्या पर तर्पण कब करें?

सावन अमावस्या के दिन स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण कर सकते हैं। हाथ में जल, सफेद फूल और काले तिल लेकर कुशा की मदद से पितरों को तर्पण दे सकते हैं। तर्पण देने से पितर प्रसन्न होते हैं।

व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र में सावन अमावस्या

इस साल की सावन अमावस्या पर व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र का योग है। व्यतीपात योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, उसके बाद वरीयान् योग बनेगा। व्यतीपात योग में किसी नए या शुभ कार्य की शुरूआत नहीं करते हैं।

पुष्य नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 7 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, उसके बाद अश्लेषा नक्षत्र है। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। यह एक शुभ नक्षत्र है, इसमें आप शुभ कार्य कर सकते हैं, जिसमें सफलता प्राप्त होती है। स्थिर कार्य भी इस नक्षत्र में कर सकते हैं।

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नामीबिया में T20I त्रिकोणीय श्रृंखला खेलेंगें दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे

नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे टी-20 त्रिकोणीय सीरीज की मेजबानी करेगा और उसके बाद वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की एकदिवसीय सीरीज खेलेगा। सभी मैच विंडहोक के नामीबिया क्रिकेट ग्राउंड में खेले जाएंगे।

टी-20 त्रिकोणीय 28 अगस्त को शुरू होगी, जिसका फ़ाइनल छह सितंबर को होगा और वनडे सीरीज नौ सितंबर से शुरू होगी। यह त्रिकोणीय सीरीज 2027 में होने वाले अफ्रीका कप की शुरुआत के लिए आधार तैयार करेगी। इस प्रतियोगिता का मक़सद ज़्यादा अफ्रीकी देशों को सबसे उच्च स्तर पर खेलने का मौका देना है।

त्रिकोणीय सीरीज से होने वाला सारा मुनाफ़ा अफ्रीका क्रिकेट एसोसिएशन को दान किया जाएगा ताकि पूरे महाद्वीप में खेल को बढ़ावा दिया जा सके। क्रिकेट नामीबिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोहान मुलर ने कहा, “हम इस सीरीज़ के लिए क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका और ज़िम्बाब्वे क्रिकेट के कमिटमेंट के लिए बहुत आभारी हैं। यह अफ्रीकी महाद्वीप में क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत पार्टनरशिप और साझा सोच को दिखाता है।”

दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और जिम्बाब्वे 2027 में होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप के संयुक्त मेजबान हैं। क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फोलेट्सी मोसेकी कहा, “हम इस व्हाइट-बॉल टूर का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित हैं। यह न सिर्फ़ हमारे पड़ोसी देशों में खेल को मज़बूत करने के हमारे कमिटमेंट को दिखाता है, बल्कि अगले साल होने वाले आईसीसी पुरुष क्रिकेट वर्ल्ड कप से पहले उत्साह भी बढ़ाता है, जिसकी मेजबानी ये तीनों देश मिलकर करेंगे।”

Sawan Bel Patra Ke Upay: सावन के महीने में बेल पत्र के ये उपाय करने से मिल जाएगा सभी तीर्थों का पुण्य फल, जानें इनके बारे में

Sawan Bel Patra Ke Upay: जिस तरह सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, उसी तरह उन्हें बिल्प पत्र यानी बेलपत्र भी प्रिय हैं। भगवान शिव की पूजा में बेल पत्र का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की पूजा बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेल पत्र की जड़ में दुनिया में जितने सभी प्रसिद्ध तीर्थ निवास करते हैं। इसलिए इसकी जड़ के पास दीपक जलाने, दीपमाला दान करने से कई गुना फल मिलता है।

कहा जाता है कि जो व्यक्ति धूप-दीप, फूलों से बिल्ववृक्ष के मूल का पूजन करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है और उसके सन्तान और सुख दोनों में वृद्धि होती है। ऐसे व्यक्ति को संतान से सुख मिलता है। शिवपुराण सावन के अनुसार, सावन के पवित्र महीने में बिल्व पत्र के पेड़ के नीचे दीपक जलाने का विशेष महत्व और अनेक लाभ बताए गए हैं। इसे प्रदोष काल या रात में जलाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। सावन में बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीया जलाने के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

भगवान शिव का आशीर्वाद : शिवपुराण के अनुसार, बेलपत्र के वृक्ष की जड़ में स्वयं महादेव का वास होता है। सावन में इसके नीचे दीपक जलाने से भगवान भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और साधक को सुख-शांति तथा आरोग्य का वरदान देते हैं।

मां लक्ष्मी का वास और धन-धान्य की प्राप्ति : धार्मिक कथाओं के अनुसार, बेलपत्र के वृक्ष में माता लक्ष्मी का भी निवास माना गया है। मान्यता है कि शाम या रात के समय बेलपत्र के नीचे घी का दीपक जलाने से घर से दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है।

पापों का नाश : माना जाता है कि बेलपत्र की जड़ में समस्त तीर्थों का वास होता है। इसके नीचे दीपदान करने से व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात पाप मिट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष से मुक्ति : घर में या आसपास लगे बेलपत्र के नीचे दीया जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और वातावरण शुद्ध एवं सकारात्मक बनता है।

पितृ दोष और कष्टों से राहत : बेलपत्र के पेड़ के पास शाम को दिया जलाने से ग्रह-दोष दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

दीपक जलाने का सही तरीका

दीपक के लिए गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का उपयोग करें।

दीपक मुख्य रूप से प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास का समय) में बेलपत्र की जड़ के पास जलाएं।

दीपक जलाते समय भगवान शिव के मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का मन में जाप करें।

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भारत का होकर भी ये अनोखा शहर, जो 16 अगस्त को मनाता है स्वतंत्रता दिवस!

भारत में हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। लेकिन एक ऐसा शहर भी है, जहां आज़ादी का जश्न 16 अगस्त को मनाने की परंपरा है। इसके पीछे चार वीर स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान जुड़ा है, जिन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी थी।

 

अनोखी परंपरा

जहां पूरा देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है, वहीं बिहार के बक्सर जिले का डुमरांव 16 अगस्त को भी उतने ही उत्साह के साथ यह दिन मनाता है। यहां लोग झंडा फहराते हैं, शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं और उनके बलिदान को याद करते हैं। यह परंपरा कई दशकों से लगातार निभाई जा रही है और आज भी पूरे सम्मान के साथ जारी है। उन वीर स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हैं जिनके साहस और बलिदान ने आजादी की लड़ाई को नई ताकत दी।

 

ब्रिटिश शासन के कब्जा

साल 1942 में महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया था, जिसके बाद पूरे देश में भारत छोड़ो आंदोलन तेज हो गया। इसी आंदोलन के दौरान डुमरांव के हजारों लोग तिरंगा लेकर पुलिस थाने की ओर बढ़े। उनका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के कब्जे वाली इमारत पर तिरंगा फहराकर आजादी की लड़ाई में अपना योगदान देना था। इस आंदोलन में महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

 

वीरों का बलिदान

जब प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए, तो अंग्रेज पुलिस ने उन पर गोलियां चला दीं। इस गोलीबारी में कपिल मुनि, गोपाल कहार, रामदास सोनार और रामदास लोहार शहीद हो गए। कई अन्य लोग भी घायल हुए, लेकिन लोगों का हौसला नहीं टूटा। अपने साथियों के बलिदान के बावजूद आंदोलन जारी रहा और आखिरकार प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा फहराकर अपने संकल्प को पूरा किया।

 

शहीद स्मारक

देश आजाद होने के बाद जिस पुलिस थाने में यह घटना हुई थी, उसे चारों शहीदों की याद में स्मारक में बदल दिया गया। यह स्मारक आज भी लोगों को आजादी की लड़ाई और उन वीरों के बलिदान की याद दिलाता है। हर साल 16 अगस्त को यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके योगदान को नमन करते हैं। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि भारत की आजादी लाखों लोगों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

 

सरकारी सम्मान

डुमरांव की इस ऐतिहासिक परंपरा को समय के साथ सरकारी मान्यता भी मिली। बिहार सरकार ने वर्ष 2015 में 16 अगस्त को होने वाले इस आयोजन को आधिकारिक पहचान दी। इसके बाद इस दिन होने वाले कार्यक्रमों को और अधिक महत्व मिला। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शहीद स्मारक पर चारों वीरों की प्रतिमाओं का अनावरण किया, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी उनके बलिदान को याद रख सकें।

Hariyali Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर गौरी और गजकेसरी योग का दुर्लभ संयोग, जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

Hariyali Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या श्रावण मास में मनाई जाती है। यह पर्व भगवान शिव की भक्ति और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का विशेष अवसर है। सावन का महीना शिव जी को अति प्रिय है। ऐसे में हरियाली अमावस्या के दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है। बारिश के इस मौसम में धरती पर चारों ओर हरियाली छा जाती है। इस दिन पौधे (जैसे नीम, पीपल, बरगद, तुलसी, आंवला आदि) लगाना बेहद शुभ माना जाता है और इसे पुण्य कर्म माना गया है। हरियाली अमावस्या को पितरों की शांति के लिए स्नान, दान और तर्पण करना बहुत फलदायी होता है।

हरियाली अमावस्या कब है ?

पंचांग के अनुसार, सावन मास की अमावस्या तिथि का आरंभ 11 अगस्त, मंगलवार के दिन रात में 1 बजकर 54 मिनट से होगा। वहीं, अगले दिन यानी 12 अगस्त, बुधवार को रात में 11 बजकर 7 मिनट तक अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, 12 अगस्त के दिन हरियाली अमावस्या का व्रत व पितृकर्म करना शास्त्र सम्मत होगा। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद दोपहर के समय पितरों की पूजा आदि कार्य किए जाते हैं।

हरियाली अमावस्या पर गौरी और गजकेसरी योग का संयोग

हरियाली अमावस्या के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है और साथ ही, इसी दिन चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में रहेंगे। इसके चलते गौरी योग और गजकेसरी योग का शुभ संयोग भी बनेगा। इस शुभ संयोग में व्रत और पितृकर्म करने वाले श्रद्धालुओं के लिए हरियाली अमावस्या विशेष रूप से फलदायी रहने वाली है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन फल देने वाले वृक्ष लगाने से उत्तम फल प्राप्त होता है।

हरियाली अमावस्या शुभ मुहूर्त

सूर्योदय : सुबह 5 बजकर 48 मिनट पर

लाभ चौघड़िया : सुबह 5 बजकर 48 मिनट से लेकर 7 बजकर 27 मिनट तक

अमृत चौघड़िया : सुबह 7 बजकर 27 मिनट से लेकर 9 बजकर 7 मिनट तक

शुभ चौघड़िया : सुबह 10 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर के 12 बजकर 26 मिनट तक

लाभ चौघड़िया : शाम को 5 बजकर 24 मिनट से लेकर 7 बजकर 3 मिनट तक

हरियाली अमावस्या 2026 पूजा विधि

स्नान व संकल्प : सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

शिव पूजन : शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

वृक्षारोपण : घर के आंगन या किसी सार्वजनिक स्थान/बगीचे में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं।

पीपल पूजा : पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाकर परिक्रमा करें।

दान-पुण्य : गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करें।

ना भिगोने की झंझट, ना चिपकने का डर! सिर्फ 15 मिनट में बनाए उपवास वाली परफेक्ट साबूदाना खिचड़ी

सावन के व्रत में साबूदाना खिचड़ी हर घर में पसंद की जाने वाली खास डिश है। लेकिन कई बार जल्दबाजी में साबूदाना भिगोना भूल जाते है। लेकिन कुकर ट्रिक से बिना लंबे समय तक भिगोए भी साबूदाना खिचड़ी को बिल्कुल खिली-खिली और स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करके आप कम समय में व्रत के लिए परफेक्ट और टेस्टी साबूदाना खिचड़ी तैयार कर सकते हैं।

 सबसे पहले साबूदाना को 2–3 बार साफ पानी से अच्छी तरह धो लें, ताकि उसका स्टार्च निकल जाए। इसके बाद पानी पूरी तरह निकालकर साबूदाना को एक स्टील के डिब्बे में रखें। इसमें थोड़ा सा देसी घी, स्वादानुसार सेंधा नमक, चुटकी भर चीनी और थोड़ा सा पानी डालकर हल्के हाथ से मिला दें। इससे स्टीम होने के बाद साबूदाना का स्वाद और टेक्सचर अच्छा बनता है।

This may contain: a bowl filled with corn and garnished with cilantro on a table

कुकर में स्टीम

अब प्रेशर कुकर में थोड़ा पानी डालें और उसके अंदर साबूदाने वाला डिब्बा रख दें। चाहें तो साथ में दो आलू भी रख सकते हैं, ताकि वे भी एक साथ उबल जाएं। कुकर का ढक्कन बंद करें और मध्यम आंच पर 3 सीटी आने तक पकाएं। इसके बाद गैस बंद कर दें और कुकर का प्रेशर अपने आप निकलने दें। इस तरीके से साबूदाना बिना भिगोए भी अच्छी तरह पक जाता है।

ठंडे पानी की ट्रिक

स्टीम होने के बाद साबूदाना थोड़ा चिपचिपा लग सकता है। इसे छलनी में निकालकर ऊपर से ठंडा पानी डालें और बहुत हल्के हाथ से धो लें। यह आसान ट्रिक साबूदाने के दानों को अलग-अलग कर देती है, जिससे खिचड़ी बनाते समय वह चिपकती नहीं और बिल्कुल खिली-खिली बनती है।

 

तड़का लगाएं

अब एक कड़ाही में देसी घी गर्म करें और उसमें जीरा डालें। इसके बाद बारीक कटी हरी मिर्च, कद्दूकस किया हुआ अदरक और व्रत में खाते हैं तो थोड़ा बारीक कटा टमाटर डालकर हल्का भून लें। फिर उबले हुए आलू के टुकड़े डालें। अब तैयार किया हुआ साबूदाना, सेंधा नमक, दरदरी काली मिर्च, चुटकी भर चीनी और भुनी हुई मूंगफली डालकर हल्के हाथ से मिलाएं, ताकि दाने टूटें नहीं। खिचड़ी तैयार होने के बाद ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया, थोड़ा नींबू का रस और चाहें तो भुना जीरा पाउडर छिड़क दें। इससे खिचड़ी का स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। ध्यान रखें कि खिचड़ी को ज्यादा देर तक न चलाएं, वरना साबूदाना टूट सकता है और चिपचिपा हो सकता है।

 

पौष्टिक आहार

साबूदाना शरीर को जल्दी एनर्जी देने वाला सोर्स है। जब इसमें मूंगफली, आलू और देसी घी मिलाया जाता है, तो यह ज्यादा पौष्टिक और पेट भरने वाला भोजन बन जाता है। इसलिए सावन, एकादशी या अन्य व्रत के दौरान यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में भी मदद करता है।

Kamika Ekadashi 2026: सावन की पहली एकादशी होती है कामिका एकादशी, सुख-समृद्धि और भाग्य को मजबूत बनाने के लिए जरूर करें ये 5 उपाय

Kamika Ekadashi 2026: सावन में आने वाले एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। सावन हिंदू कैलेंडर का पांचवां महीना है। यह माह भगवान शिव को अति प्रिय है, लेकिन इसके कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु का व्रत किया जाता है।

सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी का व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। इसलिए इस तिथि का महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि, इस व्रत को रखने से कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है और जाने-अनजाने में किए गए पापों से भी मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं कि इस साल सावन माह की पहली एकादशी कब है, शुभ मुहूर्त क्या है और इस दिन कौन-से सरल उपाय करने चाहिए।

कब है कामिका एकादशी 2026?

इस साल कामिका एकादशी की तिथि 8 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 9 अगस्त 2026 को सुबह 7 बजकर 34 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026, रविवार को रखा जाएगा। इस व्रत कर पारण 10 अगस्त 2026 को किया जाएगा। इस दिन शुभ समय सुबह 6 बजकर 36 मिनट से सुबह 9 बजकर 32 मिनट तक रहेगा।

कामिका एकादशी पर करें ये उपाय

  • घर के मुख्य द्वार पर शाम के समय घी का दीपक जलाकर माता लक्ष्मी की पूजा करें। इससे आर्थिक सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
  • सावन में पड़ने वाली एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पंचामृत का भोग अर्पित करें। इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
  • शिवलिंग पर जल में थोड़ा-सा कच्चा दूध मिलाकर अभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। यह सरल उपाय कई गुना पुण्य फल प्रदान करता है।
  • इस दिन आप तुलसी के पौधे के सामने भी घी का दीपक जलाकर रखें। इस दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • भगवान शिव को शमी के फूल और भगवान विष्णु को पीले रंग के फूल अर्पित करें। इससे भाग्य मजबूत बनता है।
  • इस दिन सफेद और पीले रंग की वस्तुओं का दान करें। मान्यता है कि इससे पुण्य फल बढ़ता है और अटके कार्यों को भी गति मिलती हैं।

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15 अगस्त 2026: स्कूल या कॉलेज में भाषण देना है? चुनें ये 5 दमदार टॉपिक्स

The image shows a school student delivering a speech from a podium, with the Tricolour in the background and the Red Fort, India Gate, and Qutub Minar visible on the other side.

15 अगस्त आने वाला है। इस बार भारत अपना 80वां स्वतं‍त्रता दिवस मनाने जा रहा है। स्कूल और कॉलेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो गई है। यदि आप भी अपने स्कूल या कॉलेज में भाषण प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं तो यहाँ 15 अगस्त को स्कूल या कॉलेज में भाषण देने के लिए 5 प्रासंगिक और प्रभावशाली टॉपिक्स दिए गए हैं।

 

1. “विकसित भारत @2047: हमारी सोच, हमारी ज़िम्मेदारी”

विषय: 2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा।

प्रमुख बातें: स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के भारत को साकार करने में आज की युवा पीढ़ी का योगदान, शिक्षा, तकनीक और स्वच्छता में हमारी व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी।

किसके लिए उपयुक्त: कॉलेज छात्र या सीनियर स्कूल छात्र।

 

2.”आज़ादी का वास्तविक अर्थ: अधिकार या कर्तव्य?”

विषय: सिर्फ़ मौलिक अधिकार माँगना ही आज़ादी नहीं है, बल्कि नागरिक कर्तव्यों का पालन करना भी स्वतंत्रता को बनाए रखने का आधार है।

प्रमुख बातें: यातायात नियमों का पालन, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनना।

किसके लिए उपयुक्त: स्कूल और कॉलेज दोनों के विद्यार्थियों के लिए।

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3.”डिजिटल क्रांति से आत्मनिर्भर भारत: युवाओं की भूमिका”

विषय: आधुनिक दौर में भारत का तकनीकी और आर्थिक रूप से सशक्त होना।

प्रमुख बातें: यूपीआई (UPI), लोकल फ़ॉर वोकल, स्टार्ट-अप कल्चर और साइंस/तकनीक के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान।

किसके लिए उपयुक्त: कॉलेज या टेक-ओरिएंटेड छात्रों के लिए।

 

4.”गुमनाम नायकों को नमन: स्वतंत्रता संग्राम के अनदेखे पन्ने”

विषय: भगत सिंह, गांधीजी या नेहरू जी के अलावा उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों की गाथा जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया।

प्रमुख बातें: जनजातीय नायक (जैसे बिरसा मुंडा), महिला क्रांतिकारी और स्थानीय वीरों के योगदान को याद करना।

किसके लिए उपयुक्त: स्कूल के छात्रों (मिडिल और हाई स्कूल) के लिए।

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5.”विविधता में एकता: भारत की सबसे बड़ी ताक़त”

विषय: विभिन्न भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों के बावजूद देश का एक सूत्र में बँधे रहना।

प्रमुख बातें: समाज में भाईचारा, सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने वाला पारंपरिक और सदाबहार विषय।

किसके लिए उपयुक्त: किसी भी वर्ग/कक्षा के छात्रों के लिए।

 

भाषण की शुरुआत और अंत के लिए सुझाव:

शुरुआत: किसी देशभक्ति शायरी या जोशीले नारे से करें (जैसे: “कुछ नशा तिरंगे की आन का है, कुछ नशा मातृभूमि की शान का है…”)।

अंत: हमेशा भविष्य के सकारात्मक दृष्टिकोण और “जय हिंद, जय भारत!” के नारे के साथ करें।

Surya Grahan 2026: साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण होगा इस दिन, जानें सूतक काल का समय और प्रभाव

Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण एक सामान्य लेकिन दिलचस्प खगोलीय घटना है। निश्चित अंतराल पर जब भी धरती, चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में आते हैं, तब सूर्य और चंद्र ग्रहण लगते हैं। ग्रहण विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों का आधार भी बनते हैं, तो तीनों खगोलीय पिंडों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने का मौका भी देते हैं। विज्ञान के साथ-साथ इसके गहरे धार्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव माने जाते हैं।

हिंदू धर्म में ग्रहण को अशुभ समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियां प्रभावी रहती हैं, इसलिए इस समय कोई शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। हर साल की तरह इस साल भी दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण लगेंगे। इनमें से पहला सूर्य और चंद्र ग्रहण फरवरी-मार्च में हो चुका है। इसके अब दूसरा और अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण अगस्त के महीने में लगेगा। इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण हरियाली अमावस्या के दिन कर्क राशि में लगेगा।

अगस्त 2026 में दूसरा सूर्य ग्रहण

साल 2026 का दूसरा और आखिरी सू्र्य ग्रहण 12 अगस्त हरियाली अमावस्या के मौके पर लगेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में इसका सूतक काल नहीं माना जाएगा। भारतीय समयानुसार, ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा।

कर्क राशि वाले रहें सतर्क

यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में लगने जा रहा है। इसलिए इस राशि पर इसका सबसे ज्यादा फर्क पड़ेगा। इस राशि के जातकों को सेहत, मानसिक तनाव और धन से जुड़ी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव कर्क राशि पर 12 अगस्त से 15 दिन पहले और 15 दिन बाद तक बना रहेगा। सभी 12 राशियों पर इसका कुछ न कुछ प्रभाव जरूर पड़ेगा।

किन-किन देशों में दिखाई देगा ग्रहण?

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर, आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी स्पेन में देखा जाएगा। साथ ही फ्रांस, ब्रिटेन, इटली सहित यूरोप के कई देशों में भी यह आंशिक रूप से नजर आने वाला है।

ग्रहण काल में अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय?

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

ग्रहण काल के बाद पूजा-पाठ और इच्छा के अनुसार दान करना चाहिए।

ग्रहण काल के बाद नहाना चाहिए और शिवलिंग पर जला अर्पित करना चाहिए।

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