15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

15 अगस्त केवल एक तिथि नहीं, बल्कि देश के गौरवशाली इतिहास, अमर बलिदानों और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। हर साल जब लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा लहराता है, तो वह केवल स्वतंत्रता का उत्सव मनाने का क्षण नहीं होता, बल्कि एक राष्ट्र के रूप में आत्ममंथन करने का अवसर भी होता है। अमर शहीदों के सपनों का भारत केवल नारों से नहीं, बल्कि नागरिकों के चरित्र, कर्तव्यनिष्ठा और आचरण से निर्मित होता है। आइए जानते हैं कि इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें अधिकार मांगने के साथ-साथ किन नागरिक कर्तव्यों का संकल्प लेने की आवश्यकता है।

 

1. आत्ममंथन और अतीत का स्मरण:

15 अगस्त केवल तिरंगा फहराने, राष्ट्रगान गाने और देशभक्ति के नारों का दिन नहीं है। यह वह अवसर है जब राष्ट्र को अपने अतीत के बलिदानों को स्मरण करते हुए वर्तमान का आत्ममंथन और भविष्य का संकल्प करना चाहिए। स्वतंत्रता हमें संघर्ष, त्याग और असंख्य बलिदानों के बाद मिली है। इसलिए यह सवाल आज भी प्रासंगिक है कि जिस भारत का सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था, क्या हम उसके निर्माण की दिशा में उतनी ही ईमानदारी से आगे बढ़ रहे हैं?

 

2. अमर सेनानियों का आदर्श और राष्ट्रीय चरित्र

भगत सिंह का साहस, चंद्रशेखर आजाद का आत्मविश्वास, नेताजी सुभाष चंद्र बोस का राष्ट्र-समर्पण, महात्मा गांधी का सत्य-अहिंसा का मार्ग और सरदार पटेल की राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता- केवल इतिहास के अध्याय नहीं हैं। वे स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय चरित्र की आधारशिलाएँ हैं। उनका सपना एक ऐसा भारत था जो:- 

  • राजनीतिक रूप से स्वतंत्र हो।
  • सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण हो।
  • आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो।
  • नैतिक रूप से मजबूत और नागरिक चेतना से संपन्न हो।

 

3. अधिकार, कर्तव्य और नागरिक आचरण

आजादी का अर्थ केवल अधिकार प्राप्त करना नहीं है; लोकतंत्र अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की भी मांग करता है।

सरकारें नीतियाँ बना सकती हैं, योजनाएँ लागू कर सकती हैं और संस्थाएँ खड़ी कर सकती हैं, लेकिन राष्ट्र का वास्तविक चरित्र उसके नागरिकों के आचरण से तय होता है।

  • कानून का सम्मान
  • सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा
  • करों का ईमानदार भुगतान
  • स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव
  • ये केवल मामूली बातें नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण की बुनियादी शर्तें हैं।

 

4. युवा शक्ति और आधुनिक चुनौतियाँ

आज भारत परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में देश की युवा शक्ति निर्णायक भूमिका

A young person saluting the Indian flag in the picture.

निभा सकती है। तकनीक, शिक्षा, कौशल, विज्ञान, अनुसंधान, उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में युवाओं के लिए अभूतपूर्व अवसर हैं। हालाँकि, डिजिटल दुनिया के साथ कुछ चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं:-

  • भ्रामक सूचनाएँ (Misinformation)
  • नशा और निराशा
  • सामाजिक विभाजन
  • इसलिए युवा ऊर्जा को केवल रोजगार की तलाश तक सीमित रखने के बजाय, उसे राष्ट्र-निर्माण की सकारात्मक शक्ति बनाना होगा।

5. स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और विविधता में एकता

स्वच्छता और आत्मनिर्भरता को केवल सरकारी अभियानों के रूप में देखना उचित नहीं है। सड़क पर कचरा न डालना, जल-स्रोतों को प्रदूषण से बचाना, स्थानीय उत्पादों एवं उद्यमियों को प्रोत्साहित करना तथा संसाधनों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाना प्रत्येक नागरिक की भूमिका है। आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा, श्रम और क्षमता पर विश्वास करना है।

 

भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता और एकता है। भाषा, धर्म, जाति और क्षेत्र की भिन्नताओं के बावजूद एक राष्ट्र के रूप में साथ खड़े रहना हमारी असाधारण उपलब्धि है। मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन वैमनस्य लोकतंत्र को कमजोर करता है। इसलिए संवाद, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान को राष्ट्रीय जीवन का आधार बनाना होगा।

 

6. हर नागरिक की देशभक्ति

सीमा पर सैनिक देश की रक्षा करता है, लेकिन राष्ट्र-निर्माण की जिम्मेदारी सीमा के भीतर रहने वाले हर नागरिक की है। किसान, शिक्षक, वैज्ञानिक, श्रमिक, उद्यमी और कर्मचारी- हर व्यक्ति अपने कर्म से देश को मजबूत करता है। देशभक्ति केवल सीमा पर दिखाई देने वाली वीरता नहीं है, बल्कि अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाना भी देशभक्ति ही है।

 

7. निष्कर्ष और नागरिक संकल्प

इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें यह पूछने की जरूरत है कि “देश ने हमें क्या दिया?” से अधिक महत्वपूर्ण यह प्रश्न है कि “हमने देश को क्या दिया?”

स्वतंत्रता की सबसे बड़ी सार्थकता यही है कि हम अपने अधिकारों का उपयोग जिम्मेदारी के साथ करें। शहीदों के बलिदान का सच्चा सम्मान केवल स्मारकों पर पुष्प अर्पित करने से आगे बढ़कर उनके आदर्शों को जीवन में उतारने में है।

 

आइए, इस 15 अगस्त को केवल उत्सव न मनाएँ, बल्कि एक नागरिक संकल्प लें:

  • ईमानदार बनें और जिम्मेदार बनें।
  • स्वच्छ और संवेदनशील समाज बनाएँ।
  • भारत की एकता और गरिमा को सर्वोपरि रखें।

 

क्योंकि शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र, परिश्रम और कर्तव्यनिष्ठा से बनेगा। यही स्वतंत्रता का सम्मान है, यही सच्ची देशभक्ति है और यही नए भारत की ओर हमारा वास्तविक कदम है।

जय हिंद!

14 लाख सैनिक, 6000 टैंक, 3400 विमान… पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की का ये ‘इस्लामिक नाटो’ कितना मजबूत है?

अल जजीरा के एक विश्लेषण के अनुसार, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ के तहत अपने सैन्य सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस समझौते के तहत तीनों देश मिलकर लगभग 14 लाख सक्रिय सैन्य कर्मियों, 3,400 से ज्यादा विमानों और 6,000 से अधिक टैंकों को एक साथ ला रहे हैं।

7 अगस्त को हुआ यह समझौता अब केवल एक राजनीतिक घोषणा से कहीं आगे बढ़ चुका है। तीनों देश एक ऐसी संयुक्त व्यवस्था बनाने की योजना बना रहे हैं जिसमें उनके रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और सैन्य प्रमुख शामिल होंगे। इसके अलावा, तीनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास भी किए जाएंगे। आने वाले समय में यह सहयोग रक्षा उपकरण बनाने और सैन्य तकनीक साझा करने तक भी बढ़ सकता है।

वहीं, इस समझौते को उभरते हुए “इस्लामिक NATO” के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें सामूहिक सुरक्षा का प्रावधान है, जिसके तहत किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमले को सभी पर हमला माना जाएगा। लेकिन यह व्यवस्था अभी NATO-जैसी एकीकृत सैन्य गठबंधन बनने से काफी दूर है, क्योंकि किसी भी सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में बाकी देश किस तरह सैन्य मदद करेंगे, इसे लेकर अभी कोई निश्चित नियम तय नहीं किया गया है।

तीनों देशों का मिलिट्री ग्रुप कितना ताकतवर है?

अल जजीरा की ओर से 2026 ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के हवाले से बताए गए आंकड़े इनकी मिली-जुली मिलिट्री ताकत का पैमाना दिखाते हैं। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के पास कुल मिलाकर लगभग 14 लाख एक्टिव सैनिक, 3,415 मिलिट्री एयरक्राफ्ट, 6,046 टैंक और 344 नेवल एसेट्स (नौसेना के संसाधन) हैं।

एक्टिव मिलिट्री मैनपावर में पाकिस्तान का हिस्सा सबसे ज्यादा है, जिसके पास लगभग 6,60,000 सैनिक हैं। जबकि तुर्की के पास लगभग 4,81,000 और सऊदी अरब के पास लगभग 2,47,000 सैनिक हैं।

वहीं, इन तीनों देशों में टैंकों का सबसे बड़ा बेड़ा भी पाकिस्तान के पास है, जिसके पास लगभग 2,677 टैंक हैं। इसके बाद तुर्की (2,284 टैंक) और सऊदी अरब (1,085 टैंक) का नंबर आता है।

एयरक्राफ्ट के मामले में भी पाकिस्तान सबसे आगे है, जिसके पास लगभग 1,397 मिलिट्री एयरक्राफ्ट हैं। जबकि तुर्की के पास लगभग 1,101 और सऊदी अरब के पास 917 एयरक्राफ्ट हैं।

नौसेना के ताकत की बात करें तो, इसका हिसाब-किताब अलग है। तुर्की के पास 192 नेवल एसेट्स हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 120 और सऊदी अरब के पास 32 हैं। वहीं, तीनों देशों के पास कुल मिलाकर 33 फ्रिगेट, 24 कार्वेट और 22 सबमरीन हैं।

सऊदी अरब के पास सबसे ज्यादा पैसा है

हालांकि, सिर्फ मिलिट्री के आंकड़ों से पूरी बात समझ नहीं आती।

हालांकि, सिर्फ सैन्य संख्या से तीनों देशों की पूरी ताकत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए रक्षा बजट बजट भी बहुत भी जरूरी है, जिसमें सऊदी अरब इन तीनों देशों से काफी आगे है।

अल जजीरा के आंकड़ों के मुताबिक, इन तीनों देशों में सऊदी अरब का डिफेंस बजट सबसे ज्यादा है। 2026 में उसका अनुमानित डिफेंस खर्च लगभग 63.9 अरब डॉलर है, जबकि तुर्की का खर्च 51.4 अरब डॉलर और पाकिस्तान का सिर्फ 9.1 अरब डॉलर है।

यह अंतर इस्लामाबाद के लिए अहम है, क्योंकि उसे लगातार आर्थिक दबावों का सामना करना पड़ रहा है और वह बाहरी आर्थिक मदद पर बहुत ज्यादा निर्भर है।

फिर भी, इस समझौते से पाकिस्तान को सऊदी अरब के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने और साथ ही अपने रक्षा उद्योग के लिए नए बाजार तलाशने का मौका मिलता है।

एकेडमिक और सिक्योरिटी एनालिस्ट एंड्रियास क्रीग ने अल जजीरा को बताया कि सऊदी अरब “पूंजी, भौगोलिक स्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक रूप से लोगों को साथ लाने की क्षमता” का योगदान देता है, जबकि तुर्की “लगातार बेहतर होते रक्षा-औद्योगिक आधार, ड्रोन, मिसाइल, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, नौसैनिक सिस्टम और NATO-आधारित सैन्य विशेषज्ञता” लाता है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का योगदान “मैनपावर, एक बड़ी पेशेवर सैन्य व्यवस्था, ऑपरेशनल अनुभव, रक्षा उत्पादन और परमाणु क्षमता” है।

सऊदी अरब को पाकिस्तान और तुर्की से क्या मिलता है?

रियाद के लिए, यह समझौता अमेरिका पर उसकी लंबे समय से चली आ रही निर्भरता के अलावा सुरक्षा का एक और जरिया देता है।

ईरान और उसके सहयोगियों से जुड़े बार-बार होने वाले क्षेत्रीय संघर्षों और हमलों के बीच, सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा साझेदारियों में विविधता लाने की कोशिश की है। तुर्की का रक्षा उद्योग रियाद को ड्रोन, मिसाइल और अन्य सैन्य तकनीकें उपलब्ध कराता है, जबकि पाकिस्तान एक बड़ा सैन्य ढांचा और परमाणु प्रतिरोध क्षमता प्रदान करता है।

अमेरिकी रक्षा विभाग में अरब प्रायद्वीप मामलों के पूर्व निदेशक डेविड डेस रोशेस ने अल जजीरा को बताया कि इस समझौते से सऊदी अरब को पश्चिमी देशों से हथियारों के निर्यात को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच अपने रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने में मदद मिल सकती है।

क्या पाकिस्तान सच में सऊदी अरब के लिए लड़ेगा?

यहीं पर ‘सामूहिक सुरक्षा’ वाली शर्त की सबसे बड़ी परीक्षा हो सकती है।

समझौते के मुताबिक, अगर किसी एक सदस्य पर हमला होता है, तो उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। लेकिन इसमें NATO के आर्टिकल 5 की तरह तुरंत सैन्य कार्रवाई करने की कोई बात नहीं कही गई है।

यह फर्क पाकिस्तान के लिए इसलिए अहम है क्योंकि इस्लामाबाद के ईरान के साथ संबंध हैं और वह बड़े मिडिल ईस्ट संघर्ष में खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश करता रहा है।

इसलिए सवाल यह है कि अगर सऊदी अरब पर सीधे हमला होता है, तो क्या पाकिस्तान सच में ईरान के खिलाफ सेना भेजेगा?

अगर हम पहले की घटनाओं को देखें तो, पता चलता है कि इस्लामाबाद किसी आक्रामक संघर्ष में सीधे शामिल होने के बजाय कूटनीतिक या रक्षात्मक भूमिका निभाना पसंद कर सकता है।

क्या यह अमेरिका के नेतृत्व वाले सुरक्षा ढांचे के लिए चुनौती है?

इस समझौते का असर सिर्फ इन तीन देशों तक ही सीमित नहीं रहेगा।

पाकिस्तान अमेरिका का सहयोगी है और उसे अमेरिकी सुरक्षा सहायता मिलती है। सऊदी अरब अमेरिकी सैन्य उपकरणों के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है, जबकि तुर्की के पास अमेरिका के बाद NATO की दूसरी सबसे बड़ी सेना है।

हार्डकैसल एडवाइजरी के जैद एम. बेलबागी ने अल जजीरा को बताया कि “पाकिस्तान को अमेरिकी मदद मिलती है, सऊदी अरब अमेरिकी सैन्य उपकरणों का सबसे बड़ा विदेशी खरीदार है, और तुर्की के पास अमेरिका के बाद NATO की दूसरी सबसे बड़ी सेना है।”

ऐसे में अमेरिका के तीन प्रमुख साझेदारों को शामिल करते हुए एक अलग सुरक्षा व्यवस्था का उभरना, क्षेत्र में तेजी से बदलते रणनीतिक समीकरणों में एक नई परत जोड़ सकता है।

क्या मिस्र इस समझौते में शामिल हो सकता है?

यह सुरक्षा समझौता आगे चलकर और देशों तक फैल सकता है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने खुले तौर पर मिस्र के इस समझौते में शामिल होने का समर्थन किया है। उन्होंने मिस्र को इसका “स्वाभाविक साझेदार” बताया है।

मिस्र की मजबूत सैन्य ताकत और उसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, खासकर स्वेज नहर पर उसका नियंत्रण, उसे इस गठबंधन के लिए एक अहम सदस्य बना सकता है।

हालांकि, मिस्र को इस तरह के सामूहिक रक्षा समझौते में शामिल होने से पहले कई बातों पर विचार करना होगा। इनमें अमेरिका के साथ उसके संबंध, मौजूदा सैन्य गठबंधन और क्षेत्र में उसकी दूसरी जिम्मेदारियां शामिल हैं।

फिलहाल, अभी मुख्य ध्यान इस बात पर है कि क्या सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की अपनी बड़ी संयुक्त सैन्य क्षमताओं को एक कारगर सुरक्षा तंत्र में बदल सकते हैं।

पाकिस्तान के लिए यह बात खास तौर पर अहम हो सकती है। क्योंकि यह देश इस समूह में सबसे ज्यादा सैनिक बल और परमाणु क्षमता का योगदान देता है, लेकिन इसका रक्षा बजट अपेक्षाकृत कम है और आर्थिक रूप से इसकी निर्भरता बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि सैन्य कर्मियों और रणनीतिक प्रतिरोध के अलावा यह कितना योगदान दे सकता है।

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में अनोखा प्रदर्शन, दान पात्र में मिले 2.15 लाख रुपए हनुमान मंदिर में चढ़ाए

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में अनोखा प्रदर्शन, दान पात्र में मिले 2.15 लाख रुपए हनुमान मंदिर में चढ़ाए

opposition chadawa chori drama in parliament

संसद भवन के मकर द्वार पर विपक्ष के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने काफी दान किया। देखते ही देखते कुछ ही दिनों में दान पात्र में 2 लाख 14 हजार रुपए का चंदा हासिल हुआ। सपा सांसदों ने गुरुवार को इस रकम को कनाट पैलेस स्थित हनुमान मंदिर में जमा करा दिया। ALSO READ: नांदेड़ में पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल पर कृपाण से हमला, अस्पताल में भर्ती, जानें कौन हैं सुखबीर बादल

 

राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, मनोज झा समेत सभी विपक्षी सांसदों ने इस दान पात्र में पैसा डाला था। अब सपा सांसदों ने इस रकम को हनुमान मंदिर में जमा कराया है। उनका कहना है कि हम हनुमान मंदिर में यह दान इसलिए जमा करा रहे हैं क्योंकि वह धर्म के रक्षक माने जाते हैं।

 

चढ़ावा चोरी मामले में प्रदर्शन के दौरान जब सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में संसद पहुंचे तो बवाल मच गया। भाजपा ने पप्पू यादव की इस हरकत की जमकर आलोचना की तो कई स्थानों पर साधु संतों ने भी उनका विरोध किया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन पर हमला भी हुआ। ALSO READ: कंगना रनौत का राहुल गांधी पर हमला- सवाल पूछते हैं, जवाब नहीं सुनते

 

मॉनसून सत्र के आखिरी दिन जब समाजवादी पार्टी के सांसद रुचि वीरा और अक्षय यादव ने दान पात्र खोला तो मकर द्वार के बाहर रोज एक घंटे के लिए रखे जाने वाले दानपात्र में 2 लाख 15 हजार 3 सौ 90 रुपए से ज्यादा का चंदा इकट्ठा हुआ।

 

सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि बीजेपी ने राम मंदिर तक में चढ़ावा चोरी कर दी और संसद में चर्चा तक नहीं करा रहे हैं। इसी के चलते हमने दान पात्र रखकर विरोध किया है।

Ram Mandir Chadhawa Chori: यूनिफॉर्म में जेब ही नहीं होगी तो कैसे करेंगे चोरी! राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती के नए नियम सामने आए

Ram Mandir Chadhawa Chori: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था को और ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कई बड़े बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था में दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों की यूनिफॉर्म से लेकर CCTV निगरानी, सुरक्षा जांच और मंदिर परिसर से बैंक तक कैश पहुंचाने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इन बदलावों का मकसद गिनती के दौरान सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही को मज़बूत करना है। राम मंदिर में कथित दान और चढ़ावा चोरी के बाद यह एक्शन लिया गया है।

अब कर्मचारियों की यूनिफॉर्म में नहीं होंगी जेबें

राम मंदिर में दान की गिनती में शामिल कर्मचारियों के लिए नई यूनिफॉर्म पहले ही लागू की जा चुकी है। खास बात यह है कि इन वर्दियों में जेब नहीं होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गिनती के दौरान कर्मचारी नकदी या कोई अन्य सामग्री अपने साथ बाहर न ले जा सकें। इसके अलावा गिनती केंद्र में कर्मचारियों की एंट्री और एग्जिट दोनों जगह सख्त तलाशी शुरू कर दी गई है। इससे दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों की आवाजाही पर निगरानी और मजबूत होगी।

45 दिन नहीं, अब 180 दिन तक सुरक्षित रहेगा CCTV फुटेज

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने CCTV रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने की अवधि भी काफी बढ़ा दी है। पहले गिनती वाले कमरे की CCTV फुटेज 45 दिनों तक रखी जाती थी। अब इसे बढ़ाकर 180 दिन कर दिया गया है। यानी किसी भी घटना या गड़बड़ी की स्थिति में करीब छह महीने तक संबंधित CCTV रिकॉर्डिंग को जांच के लिए देखा जा सकेगा।

साधारण कैमरों की जगह लगेंगे PTZ कैमरे

चढ़ावे की गिनती केंद्र की निगरानी व्यवस्था को भी अपग्रेड किया जा रहा है। वहां लगे फिक्स्ड CCTV कैमरों को PTZ (Pan-Tilt-Zoom) कैमरों से बदला जाएगा। इन कैमरों की मदद से किसी खास जगह या गतिविधि पर कैमरे को घुमाकर नजर रखी जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर किसी व्यक्ति या गतिविधि को जूम करके देखा जा सकेगा।

दान की गिनती के लिए SBI के कर्मचारियों पर जोर

ट्रस्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से यह भी विचार करने को कहा है कि दान की गिनती जैसे संवेदनशील काम के लिए कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के बजाय बैंक के अपने कर्मचारियों को लगाया जाए। ट्रस्ट ने यह सुझाव भी दिया है कि इस काम में लगाए जाने वाले कर्मचारियों को बेहतर पारिश्रमिक दिया जाए। इसके साथ ही गिनती की पूरी प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में ट्रस्ट की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।

मंदिर से बैंक तक नकदी ले जाने का तरीका भी बदलेगा

दान की रकम को मंदिर परिसर से SBI की ब्रांच तक ले जाने की प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत नोटों के बंडलों को एक साथ पैक और सुरक्षित किया जाएगा। सके बाद उन्हें मंदिर परिसर के अंदर ही SBI के वाहन में लोड किया जाएगा। इसका उद्देश्य नकदी को मंदिर से बैंक तक ले जाने के दौरान किसी भी तरह की पिलफरेज यानी रकम में सेंधमारी की संभावना को कम करना है।

राम मंदिर ट्रस्ट को जल्द मिलेगा नया CEO

दान की गिनती की व्यवस्था में बदलाव के साथ ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट नए और पहले चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के चयन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रहा है। CEO के चयन के लिए बनाई गई सर्च कमेटी ने इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी कर ली है। 11 और 12 अगस्त को अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर में अंतिम दौर के इंटरव्यू हुए। सर्च कमेटी में रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) वीके चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे शामिल हैं।

5,585 आवेदन से 16 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट

CEO पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 3,877 आवेदनों में विस्तृत CV शामिल थे। जांच के बाद 1,580 उम्मीदवारों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। इनमें से करीब 111 उम्मीदवारों को ऑनलाइन बातचीत के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। आगे की प्रक्रिया के बाद 16 उम्मीदवारों को अयोध्या में आमने-सामने इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। इनमें रक्षा, प्रशासन, कॉरपोरेट, उद्योग, शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी पेशेवर शामिल हैं। अब सर्च कमेटी अंतिम उम्मीदवारों का मूल्यांकन करके ट्रस्ट को तीन नामों का पैनल सौंपेगी। इसके बाद नए CEO की अंतिम नियुक्ति ट्रस्ट द्वारा की जाएगी।

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क्यों जरूरी किए गए ये बदलाव?

राम मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दौरान बड़ी मात्रा में चढ़ावा आता है। ऐसे में दान की गिनती से लेकर उसकी पैकिंग, निगरानी और बैंक तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया बेहद संवेदनशील है। ट्रस्ट के नए कदमों का उद्देश्य दान की गिनती से लेकर बैंक तक पहुंचने तक पूरी प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। यानी अब राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान कर्मचारियों की यूनिफॉर्म में जेब नहीं होगा। एंट्री गेट पर तलाशी ली जाएगी। साथ ही 180 दिन की CCTV रिकॉर्डिंग और PTZ कैमरों की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं।

Balochistan Independence Day: 11 अगस्त को ही आजादी सेलिब्रेट करने वाला था बलूचिस्तान, जानिए आज ही के दिन वहां क्या क्या हुआ

Balochistan Independence Day: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में आज यानी 11 अगस्त को ‘आजादी दिवस’ मनाए जाने को लेकर एक बार फिर अलग देश की मांग तेज हो गई है। बलूचिस्तान में आज यानी 11 अगस्त को ‘स्वतंत्रता दिवस’ मनाया जा रहा है। इस मौके पर ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के तौर पर कानूनी, राजनीतिक और कूटनीतिक मान्यता दी जाए।

बलोच नेता मीर यार बलोच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी जाए। इस मौके पर बलूच नेता ने पाकिस्तान पर दमन और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान के छह करोड़ लोग हर साल 11 अगस्त को अपना राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। आज हम उस मुकाम पर पहंच गए हैं जहां हम सिर्फ अपनी आजादी का जश्न ही नहीं मनाते। बल्कि दुनिया से यह मांग भी करते हैं कि बलूचिस्तान की आजादी को कानूनी, राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक रूप से मान्यता दी जाए। आजादी के इस पवित्र अवसर पर बलूचिस्तान में रहने वाले बलोच, पश्तून, हिंदू, सिख, ईसाई और सभी धर्मों के भाइयों और बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।”

भारत का किया जिक्र

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान गणराज्य दुनिया के और खासकर भारत के बहादुर मुख्यधारा के मीडिया, थिंक टैंक, शोधकर्ताओं, कवियों, लेखकों, छात्रों, वकीलों, नागरिक समाज, व्यापारिक समुदाय, धार्मिक नेताओं, सांसदों और उन सभी भाइयों और बहनों का दिल से आभार व्यक्त करता है जिन्होंने बलोचिस्तान की आवाज को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया और हमारे लोगों की आवाज बने। बलूचिस्तान के लोगों को नैतिक समर्थन मिलना जारी रहना चाहिए ताकि हम अपनी जमीन, बलूचिस्तान से पाकिस्तान रूपी कैंसर को हटा सकें।”

50 हजार बलोच पाकिस्तान में कैद

बलूचिस्तान में आजादी को दबाने के पाकिस्तान के प्रयासों की कड़ी निंदा करते हुए मीर यार बलोच ने दावा किया कि 50 हजार से ज्यादा बलोच अभी भी पाकिस्तान की यातना कोठरियों में अमानवीय अत्याचार सह रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे। आज की आजादी की सफलता हमारे महान शहीदों, हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और कैदियों के अमर बलिदानों की वजह से मिली है।”

बलूचिस्तान में कुर्बानियों के मजबूत इतिहास को याद करते हुए उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान के लोगों ने हमेशा विदेशी हमलावरों को रोका है। उन्हें बलूचिस्तान से पीछे हटने पर मजबूर किया है। पाकिस्तान के पास भले ही हजारों टैंक, सैकड़ों लड़ाकू विमान, तोपखाने और एक बड़ी सेना हो, फिर भी शारीरिक, मानसिक और लड़ने की क्षमता के मामले में बलूचिस्तान की सेना पाकिस्तान की सेना से 10 गुना ज्यादा ताकतवर और सफल है।

बलूचिस्तान की सेना एक मजबूत फोर्स है जो हर स्थिति का सामना करने में सक्षम है। दुनिया की पेशेवर सेनाओं से मुकाबला करने के लिए तैयार है। बलूचिस्तान के इलाके को देखते हुए एक बड़ी सेना की जरूरत है। इसलिए बलूचिस्तान गणराज्य ने पांच लाख सैनिकों की सेना तैयार की है।”

11 अगस्त को ही क्यों चुना अपनी ‘आजादी’ का दिन?

जब बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस घोषित किया, तो ‘वर्ल्ड पीस यूनाइटेड’ के एम्बेसडर डॉ. परविंदर सिंह ने कहा, “1947 में जब अंग्रेज भारत से गए, तो पाकिस्तान और बांग्लादेश अपने मौजूदा रूप में मौजूद नहीं थे। लेकिन बलूचिस्तान मौजूद था। उसने 11 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से अपनी आजादी का ऐलान किया था। अगर बलूचिस्तान के लोग अपनी आजादी का जश्न मनाना चाहते हैं, तो उन्हें इसकी इजाजत मिलनी चाहिए। इसे विश्व शांति की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जाना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान की ज़मीन खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों, जैसे सोना और कीमती पत्थरों से बहुत समृद्ध है। अगर बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग हो जाता है, तो पाकिस्तान को अपने आर्थिक आधार का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा गंवाना पड़ सकता है, क्योंकि यह इलाका चीन और दूसरे देशों को खनिजों के निर्यात का मुख्य स्रोत है।”

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान का हाथ से निकलना पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा। यही वजह है कि पाकिस्तान उस पर से अपना नियंत्रण नहीं छोड़ना चाहता। आज 56 से ज्यादा देश बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन करते हैं। हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। एक ऐसा दौर जिसमें टकराव और जबरदस्ती से अब कोई नतीजा नहीं निकलता।”

दुनिया भर में मनाया गया आजादी का जश्न

मंगलवार को बलूचिस्तान ने अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। यह एक वार्षिक परंपरा का हिस्सा है, जिसे कई बलूच मानवाधिकार संगठन पाकिस्तान की ओर से क्षेत्र के ‘अवैध कब्जे’ के विरोध के रूप में देखते हैं। बलूच स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक जड़ें 1947 तक जाती हैं, जब ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद कलात रियासत ने कुछ समय के लिए खुद को स्वतंत्र घोषित किया था। हालांकि, 1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र का विलय कर लिया, जिसका बलूच राष्ट्रवादी समूह लगातार विरोध करते रहे हैं।

सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म X पर मीर यार बलूच ने आरोप लगाया कि ‘कब्जा करने वाली’ पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं। उनके अनुसार, राष्ट्रीय आयोजनों को रोकने के लिए 7 अगस्त से 30 अगस्त तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती, सैन्य संसाधनों या हवाई शक्ति के इस्तेमाल के बावजूद पाकिस्तान बलूचिस्तान में अपनी मौजूदगी को अनिश्चित समय तक बनाए नहीं रख सकता, क्योंकि बलूच जनता का संकल्प मजबूत है।

मीर ने कहा, “बलूचिस्तान गणराज्य बलूच लोगों को उग्रवादी या अलगाववादी बताने की कोशिशों को खारिज करता है। बलूच स्वतंत्रता सेनानी बलूचिस्तान की रक्षा, सुरक्षा और सैन्य ताकत का हिस्सा हैं और उन्हें छह करोड़ बलूच लोगों का समर्थन प्राप्त है। लोग उन पर भरोसा करते हैं क्योंकि वे इसी मिट्टी के बेटे-बेटियां हैं और अपने राष्ट्र के हित में काम करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ये बल किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं लड़ रहे हैं और न ही अशांति या हिंसा फैलाने के लिए काम कर रहे हैं। वे अपना राष्ट्रीय कर्तव्य निभा रहे हैं, जिसमें शांति और सुरक्षा बनाए रखना, लोगों की रक्षा करना और एक शांतिपूर्ण, समृद्ध तथा विकसित बलूचिस्तान की नींव रखना शामिल है।”

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मीर ने दावा किया कि बलूच सशस्त्र समूहों की कार्रवाइयों का उद्देश्य उन नेटवर्कों को खत्म करना और बाहर निकालना है, जिन्हें वे पाकिस्तान से जुड़ा मानते हैं और जो उनके अनुसार बलूचिस्तान में अस्थिरता, असुरक्षा और हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं।

18 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट… आज से इंटरव्यू शुरू, राम मंदिर के पहले CEO की तलाश तेज

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। चयन प्रक्रिया से जुड़े लोगों के अनुसार, करीब 5,200 लोगों ने इस पद के लिए आवेदन किया था, जिनमें से 18 उम्मीदवारों को अगले दौर के लिए चुना गया है। ट्रस्ट ने यह कदम अपनी प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी को मजबूत करने के लिए उठाया है। यह फैसला दान में मिले पैसे के गलत इस्तेमाल के आरोप सामने आने के बाद लिया गया। पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति से ट्रस्ट के कामकाज और आर्थिक मामलों की निगरानी को बेहतर बनाने की उम्मीद है।

18 उम्मीदवार किए गए शॉर्टलिस्ट

शॉर्टलिस्ट किए गए 18 उम्मीदवार 10 अगस्त को अयोध्या पहुंच गए। ट्रस्ट ने उनके ठहरने के लिए पहले से व्यवस्था की थी। इन उम्मीदवारों में कुछ पूर्व सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा दक्षिण भारत के बड़े मंदिरों में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर काम कर चुके लोगों को भी शॉर्टलिस्ट किया गया है। इन सभी उम्मीदवारों का इंटरव्यू आज से राम मंदिर में शुरू होगा। इंटरव्यू के जरिए ट्रस्ट इस पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार का चयन करेगा।

इंटरव्यू की तैयारी

चयन समिति के एक सदस्य ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि समिति ने तय किए गए नियमों और योग्यता के आधार पर 5,000 से ज्यादा आवेदनों की जांच की थी। उन्होंने बताया कि आवेदन की जांच के दौरान कुछ उम्मीदवारों से ऑनलाइन बातचीत भी की गई। इसका मकसद उनकी योग्यता से जुड़ी कुछ बातों को स्पष्ट करना और उनके विचारों को समझना था। समिति के सदस्य के मुताबिक, करीब 20 दिनों तक चली चयन प्रक्रिया के बाद अंतिम इंटरव्यू के लिए करीब 18 उम्मीदवारों को चुना गया है।

चयम समिति में शामिल हैं ये लोग

चयन समिति में पूर्व जज प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और वैज्ञानिक व शिरडी साईं बाबा ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हवारे शामिल हैं। उम्मीदवारों के इंटरव्यू सुबह 10 बजे से शुरू होने हैं। मामले की जानकारी रखने वाले ट्रस्ट के एक अधिकारी के हवाले से ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने बताया कि इंटरव्यू राम मंदिर में ही होंगे। सभी उम्मीदवारों को मीडिया से बात न करने के निर्देश दिए गए हैं।

दो दिन तक चलने वाली इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन समिति ट्रस्ट को तीन उम्मीदवारों के नाम सुझाएगी। इसके बाद ट्रस्ट इनमें से किसी एक को पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करेगा। नए सीईओ की जिम्मेदारी राम मंदिर के प्रशासन की निगरानी करने के साथ-साथ मंदिर से जुड़े अलग-अलग कामों और व्यवस्थाओं को संभालना होगा। इस पद के लिए चुने जाने वाले व्यक्ति के लिए हिंदू धर्म को मानने वाला होना जरूरी है। इसके अलावा उसे हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं का भी सख्ती से पालन करना होगा।

खुदीराम बोस: 18 साल की उम्र में अमर शहीद | Khudiram Bose | Martyred at Just 18

18 साल की उम्र में फांसी के फंदे तक पहुंचे, लेकिन चेहरे पर डर नहीं था…
11 अगस्त 1908 को खुदीराम बोस ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
जिस उम्र में एक युवा अपनी ज़िंदगी के सपने बुनता है, उस उम्र में खुदीराम ने आज़ाद भारत का सपना देखा और उसके लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया।
एक माँ ने अपना बेटा खोया, लेकिन भारत ने एक ऐसा वीर पाया, जिसकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को साहस, देशभक्ति और बलिदान की सीख देती रहेगी।
खुदीराम बोस सिर्फ़ इतिहास का एक नाम नहीं—वो उस जज़्बे का नाम हैं, जो देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करना सिखाता है।
आज उनकी शहादत को नमन करें और याद रखें—
आज़ादी हमें विरासत में नहीं, बल्कि ऐसे अनगिनत वीरों के बलिदान से मिली है।
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Second Mangla Gauri Vrat 2026: सुखी दांपत्य के लिए दूसरे मंगला गौरी व्रत पर करें ये 5 उपाय, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

Second Mangla Gauri Vrat 2026: सावन के महीने में सोमवार व्रत के साथ ही मंगलवार को मंगला गौरी व्रत भी किया जाता है। कल यानी 11 अगस्त को इस साल का दूसरा मंगला गौरी व्रत किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना शिव भक्ति के साथ मां पार्वती की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए भी जाना जाता है। इसमें आने वाले हर मंगलवार को महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दांपत्य जीवन में खुशहाली और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत करती हैं। इस दिन सुखी दांपत्य और जीवन में खुशहाली के लिए 5 खास उपाय विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।

पूजन के शुभ मुहूर्त (11 अगस्त 2026)

पूजा के लिए सावन के इस पावन दिन पर निम्नलिखित शुभ मुहूर्त रहेंगे:

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः साधना): सुबह 04:49 बजे से 05:34 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 12:18 बजे से 01:09 बजे तक

विजय मुहूर्त (शुभ कार्य हेतु): दोपहर 02:52 बजे से 03:43 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:09 से 07:31 तक

संध्या पूजा: शाम 07:09 से 08:16 तक

पूजन विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ व लाल/पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर निम्न मंत्र से व्रत का संकल्प लें।

एक साफ चौकी पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाकर मां मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। मां के समक्ष आटे से बना 16 बत्तियों वाला घी का दीपक प्रज्वलित करें।

माँ का ध्यान करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें: “कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम्। नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्॥”

इसके बाद मां का विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन करें।

मां मंगला गौरी की पूजा में 16 की संख्या का विशेष महत्व है। मां को 16 मालाएं, 16 लौंग, 16 सुपारियां, 16 इलायची, 16 चूड़ियां, सुहाग की 16 सामग्रियां, फल, पान, लड्डू और मिठाई अर्पित करें। साथ ही 5 प्रकार के सूखे मेवे और 7 प्रकार के अनाज (गेहूँ, उड़द, मूँग, चना, जौ, चावल और मसूर) अर्पित करें।

व्रत कथा का पाठ करें या श्रद्धापूर्वक सुनें। अंत में आरती करें। इस व्रत में एक ही समय शुद्ध सात्विक अन्न ग्रहण करने का विधान है।

भाग्य बदलने वाले 5 अचूक उपाय

16 श्रृंगार का दान : विवाह में रही बाधाएं दूर करने के लिए अविवाहित कन्याएं इस दिन मां मंगला गौरी को सुहाग की 16 वस्तुएं अर्पित करें और पूजा के बाद इन्हें किसी सुहागिन स्त्री को दान कर दें।

लाल पुष्प और शहद : यदि दांपत्य जीवन में तनाव या अनबन रहती है, तो मां मंगला गौरी को 16 लाल गुड़हल के फूल और शहद अर्पित करें। इसके बाद “ॐ ह्रीं मंगला गौर्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।

16 बत्तियों का दीपक : इस दिन संध्या समय घर के मंदिर में आटे का 16 बत्तियों वाला दीपक जलाएं और उसमें थोड़ा-सा कपूर डाल दें। इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और धन वृद्धि के योग बनते हैं।

अन्न व वस्त्र दान : पूजा के पश्चात 7 प्रकार के अनाज का मिश्रण बनाकर किसी जरूरतमंद को दान करें। साथ ही किसी वृद्ध सुहागिन स्त्री के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें।

मंगल दोष शांत करने का उपाय : यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष के कारण जीवन में परेशानियां आ रही हैं, तो मंगला गौरी पूजा के समय मां को 16 छोटी इलायची और 16 बताशे चढ़ाएं और बाद में इसे प्रसाद स्वरूप परिवार में बांट दें।

Som Pradosh Vrat 2026: दूसरे सोमवार के साथ बना सोम प्रदोष व्रत का संयोग, आज के एक व्रत से पाएं 24 प्रदोष व्रत का फल

भोपाल में CM मोहन यादव ने निकाली तिरंगा यात्रा, बारिश में भी सैकड़ों युवाओं ने दिखाया देशभक्ति का जज्बा

cm mohan yadav

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल 9 अगस्त की सुबह पूरी तरह देशभक्ति के रंग में रंगी रही। सैकड़ों युवाओं ने टीटी नगर स्टेडियम से तिरंगा यात्रा निकाली और राष्ट्र सर्वोपरि का संदेश दिया। इस दौरान आलम यह था कि बारिश के बीच भी युवाओं का जोश कम नहीं हुआ। उन्होंने जोर-शोर से यह यात्रा निकाली और लोगों को प्रेरित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस 'तिरंगा यात्रा' का शुभारंभ किया।

उन्होंने मंच पर तिरंगा लहराया और युवाओं के अंदर जोश भर दिया। उन्होंने युवाओं को आजीवन देशभक्ति का संकल्प लेने के लिए प्रेरित भी किया। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास पर तिरंगा लहराकर हर घर तिरंगा अभियान का भी शुभारंभ किया।

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में अभियान छेड़ा गया है। महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन की तरह आज एक साथ सभी राज्यों में देशभक्त नागरिक तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं। आज इंद्र देवता भी सारे देशभक्तों-वीरों का स्वागत कर रहे हैं। भारत माता की जय।  

 

क्रांतिकारियों के लंबे संघर्ष का परिणाम है आजादी

तिरंगा यात्रा का शुभारंभ करने से पहले सीएम डॉ. यादव ने कहा कि महात्मा गांधी द्वारा अंग्रेजों भारत छोड़ो अभियान की शुरुआत की गई थी। इस अभियान ने अंग्रेजों की चूलें हिला दी थीं। देश की आजादी के लिए क्रांतिकारियों द्वारा दिए गए बलिदान-संघर्ष और अहिंसक आंदोलन से देश में जो ज्वार उठा, उसकी वजह से 5 साल बाद अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए और देश को स्वतंत्रता मिली। लंबे संघर्ष के बाद मिली इस आजादी को आज हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 15 अगस्त को 80 साल होंगे।

 

उत्तरदायित्व का पालन करें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हम सभी परमात्मा से कामना करें, सभी शहीदों-स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण करें। क्योंकि, इन सभी के योगदान से भारत को आजादी मिली। हम अपने सर्वहारा वर्ग और देश के नागरिकों के साथ आजादी का पर्व मनाएं, अपने उत्तरदायित्व का पालन करें। हम वसुधैव कुटुम्बकम के मार्ग पर चलें। हम कामना करें कि हमारा भारत चिर युवा और चिर स्वतंत्र रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज हम पूरे देश में तिरंगा यात्रा निकाल कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसका आह्वान किया है। मैं खुद भी उसमें शामिल होने जा रहा हूं। मैं उम्मीद करता हूं कि पूरे देश में इस तिरंगा यात्रा के माध्यम से युवा-बच्चे-बुजुर्ग-महिलाएं मिलकर संकल्प करेंगे कि वे आजीवन देश की सेवा करते रहेंगे। 

Surya Ketu Yuti: इस दिन अपनी राशि में पहुंचेंगे सूर्य और केतु के साथ बनाएंगे संयोग, 3 राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन

Surya Ketu Yuti: 17 अगस्त 2026 को सूर्य देव अपनी स्वराशि सिंह राशि में गोचर करने जा रहे हैं, जहां वे लगभग 30 दिनों तक विराजमान रहेंगे। सिंह राशि में पहले से ही केतु ग्रह विराजमान हैं। ऐसे में 17 अगस्त से सिंह राशि में सूर्य और केतु की युति बनेगी, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूर्य स्वराशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे आत्मबल, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक मामलों में प्रभाव बढ़ता है। हालांकि केतु के साथ उपस्थिति के कारण कुछ राशियों को सतर्क रहने और कुछ को विशेष लाभ मिलने की संभावना रहती है। ऐसे में केतु के साथ बनने वाली यह युति कुछ राशियों के लिए भाग्योदय, सफलता, मान-सम्मान और मनचाहे परिणामों के मौके लेकर आ सकती है। इसके अलावा जातकों की बंद किस्मत का ताला इस अवधि में खुलने के योग हैं। आइए इन लकी राशियों को जानते हैं।

तीन राशियों के जीवन में आएंगी खुशियां

सिंह राशि : सिंह राशि वालों के लिए यह युति बेहद शुभ साबित हो सकती है। सूर्य आपकी ही राशि में विराजमान रहेंगे, जिससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। घर, परिवार और समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा। सूर्य के प्रभाव से आपकी निर्णय क्षमता बेहतर होगी और आकर्षण भी बढ़ेगा।

कन्या राशि : कन्या राशि वालों के लिए यह समय लाभदायक रहेगा। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। किसी शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है। कार्यक्षेत्र में मेहनत का पूरा फल मिलेगा, जिससे आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। धन लाभ होने से आप किसी वस्तु की खरीदारी करेंगे।

मकर राशि : मकर राशि वालों के लिए यह युति सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकती है। करियर और कारोबार में तरक्की के योग बनेंगे। रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं और आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी। धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। परिवार का सहयोग मिलेगा।

सूर्य-केतु युति का प्रभाव बढ़ाएं

सूर्य और केतु की युति का प्रभाव एक महीने तक रहेगा। शुभ फलों की प्राप्ति के लिए आप ये उपाय अपना सकते हैं:

  • प्रतिदिन सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, रोली और अक्षत डालकर ‘ॐ सूर्याय नमः’ का जाप करें।
  • केतु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने और सकारात्मकता बढ़ाने के लिए काला और सफेद तिल या कंबल का दान करें।
  • सूर्य का प्रभाव अनुशासन मांगता है, इसलिए इस दौरान आलस का त्याग करें। अपने कार्यस्थल पर पूरी ईमानदारी से काम करें।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Navpancham Yog: राहु और मंगल के बीच बना नवपंचम योग 4 राशियों को बनाएगा मालामाल, जानें कौन सी हैं ये राशियां