US-Iran War Update: अमेरिका ने ईरान में फिर शुरू किए घातक हमले! कई ठिकानों पर की एयरस्ट्राइक, सऊदी अरब ने भी बरपाया कहर

US-Iran War Update: जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरानी मिसाइल हमले के एक दिन बाद अमेरिका ने गुरुवार (30 जुलाई) तड़के ईरान के कई ठिकानों पर एयरस्ट्राइक शुरू कर दिए। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद की गई। उन्होंने कहा था कि ईरान को बहुत कड़ा जवाब दिया जाएगा। अमेरिका की न्यूज वेबसाइट Axios ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिकी सेना ने गुरुवार सुबह ईरान में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए।

इसके कुछ ही देर बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन हमलों की पुष्टि की। CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई मंगलवार को जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए ईरानी मिसाइल हमलों के जवाब में की गई है। अमेरिकी सेना ने इसे मध्य-पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों के खिलाफ सशक्त और निर्णायक प्रतिक्रिया बताया।

ट्रंप ने ईरान को दी घमकी

इससे पहले बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘व्हाइट हाउस’ के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था कि अब जवाब देने की बारी अमेरिका की है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने मिसाइल लॉन्च को गलती बताया है। अमेरिका से जवाबी कार्रवाई नहीं करने का अनुरोध किया है।

ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “अब हमारी बारी है। हम उन पर बहुत जोरदार हमला करेंगे। उन्हें पता है कि यह आने वाला है।” पिछले शुक्रवार से अमेरिका ने ईरान पर हमलों में पांच दिन का विराम लिया था। इससे पहले लगातार 13 रातों तक ईरानी ठिकानों पर अमेरिकी हमले किए गए थे।

ईरान में कई जगह धमाकों की खबर

अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने देश के कई हिस्सों में विस्फोट होने की जानकारी दी। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, बुशेहर प्रांत में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। यह वही इलाका है जहां ईरान का एकमात्र परमाणु प्लांट स्थित है। इसके अलावा दक्षिणी क्षेत्रों से भी विस्फोटों की खबरें सामने आईं। ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी ने भी अमेरिकी हमलों के बाद देश के कई हिस्सों में विस्फोट होने की जानकारी दी।

बाद में IRIB ने बताया कि खुजेस्तान प्रांत के अबादान क्षेत्र में भी अमेरिकी बलों ने हमला किया। इसके अलावा होर्मोज़गान प्रांत के बंदर अब्बास और अबू मूसा, किश तथा क़ेश्म द्वीपों पर भी विस्फोटों की सूचना मिली। वहीं, ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सीरिक शहर पर किसी हमले की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से हालात पर करीबी नजर रखी जा रही है।

इराक में अमेरिका एवं सऊदी के हमले में 20 लोगों की मौत, 32 घायल

इस बीच, इराक में अमेरिका और सऊदी अरब के जॉइंट हवाई हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और 32 अन्य घायल हो गए। इन हमलों में ईरान से जुड़े लॉजिस्टिक्स और हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस घटना के बाद बगदाद में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई गई है। दूसरी ओर, तेहरान ने जॉर्डन में मौजूद अमरीकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमले करने का दावा किया है।

इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस (PMF) ने टेलीग्राम पर एक बयान जारी कर पुष्टि की कि अमेरिका और सऊदी अरब के हमलों में कम से कम 20 जवान शहीद हुए हैं और 32 घायल हैं। समूह के अनुसार, ये हमले बगदाद, वासित, निनवे, बसरा, किरकुक, कर्बला और दियाला समेत सात प्रांतों में स्थित उनके सैन्य ठिकानों पर हुए। इससे उनके मुख्यालयों, वाहनों और हथियारों को भारी नुकसान पहुंचा है।

पीएमएफ का कहना है कि राहत कार्य जारी होने के कारण मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है। इससे पहले पीएमएफ की 30वीं ब्रिगेड ने बताया कि स्थानीय समयानुसार तड़के करीब 3:20 बजे उत्तरी इराक के निनवे प्रांत में सात हमले किए गए, जिनमें 10 लोगों की मौत हुई और छह अन्य घायल हो गए।

इराक में हड़कंप

इराक के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, हमलों की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री अली फलीह अल-जैदी ने बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी मंत्रिस्तरीय परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई। अमेरिकी और सऊदी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान समर्थित लड़ाकों द्वारा अमेरिकी सैनिकों और सऊदी ऑयल प्लांटों पर किए गए लगातार हमलों के जवाब में की गई है।

एक बयान में यह भी बताया गया कि इस साल फरवरी से अप्रैल के बीच ईरान समर्थित गुटों ने अमरीकी ठिकानों पर 600 से अधिक बार हमला करने की कोशिश की थी। बयान में आगाह किया गया कि आगे की सैन्य कार्रवाई से बचने के लिए आईआरजीसी और उसके सहयोगी समूह तुरंत हमले रोक दें। पीएमएफ के कई बड़े गुटों के रिश्ते ईरान की आईआरजीसी के साथ बेहद मजबूत हैं और वे उसके क्षेत्रीय नेटवर्क का हिस्सा हैं।

ये समूह मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना और उसके सहयोगियों पर लगातार हमले करते रहे हैं। इन हवाई हमलों के कुछ ही घंटे बाद ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की घोषणा कर दी गई। आईआरजीसी की एयरोस्पेस फ़ोर्स ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी एयर बेस और सेंटकॉम मुख्यालय पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है।

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बुधवार तड़के जारी बयान में आईआरजीसी ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सेना के आक्रामक रुख का करारा जवाब है। आईआरजीसी ने कहा कि उसके जांबाज सैनिकों ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को मिसाइलों से निशाना बनाया है। जब तक ईरान के खिलाफ अमेरिका की धमकियां और गैर-कानूनी गतिविधियां बंद नहीं होंगी, तब तक उनका यह प्रतिरोध जारी रहेगा।

संसद में आर-पार, सपा सांसदों का दानपेटी प्रदर्शन, प्रियंका बोलीं मैंने कुछ गलत नहीं कहा

Parliament

लोकसभा में बुधवार सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा शुरू हो गया। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की, जिसके बाद स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। राज्यसभा में 20 मिनट कार्यवाही चली। 12 बजे से सदन दोबारा शुरू होगा। संसद के बाहर समाजवादी पार्टी के सांसदों ने दानपेटी लेकर प्रदर्शन किया और राम मंदिर में चंदा चोरी को लेकर भाजपा पर हमला बोला।

प्रदर्शन में शामिल सपा चीफ अखिलेश यादव ने कहा- जो सरकार दानपेटी की रक्षा नहीं कर सकी, वह युवाओं का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रख सकती। वहीं संसद परिसर में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी पर दिए अपने बयान का बचाव किया। उन्होंने कहा- मैंने सिर्फ सच कहा है और अगर सच बोलने की सजा मिलेगी तो सच बोलूंगी। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- राहुल गांधी सदन में अपमानजनक और गाली-गलौज वाली भाषा इस्तेमाल करते हैं। यह लोकतंत्र और देश, दोनों के लिए ठीक नहीं है।


राज्यसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बाद कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस बीच एनएसए अजीत डोभाल संसद भवन पहुंचे हैं

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, 'परीक्षा पर चर्चा हो रही है और प्रधानमंत्री या गृह मंत्री सदन में नहीं हैं। ये किस प्रकार की चर्चा है जिसमें प्रधानमंत्री गायब हैं और गृह मंत्री अनुपस्थित हैं? इसलिए विरोधी दलों ने प्रश्नकाल में ये मांग उठाई। केंद्रीय गृह मंत्री और प्रधानमंत्री शिक्षा को लेकर जवाब नहीं देना चाहते, जो अन्याय हुआ, उसके खिलाफ आज विरोध दलों ने प्रश्नकाल में आवाज उठाई'

कांग्रेस बोली, ये कैसी चर्चा है : कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “परीक्षा पर चर्चा हो रही है और प्रधानमंत्री या गृह मंत्री सदन में नहीं हैं। ये किस प्रकार की चर्चा है, जिसमें प्रधानमंत्री गायब हैं और गृह मंत्री अनुपस्थित हैं? इसलिए विरोधी दलों ने प्रश्नकाल में ये मांग उठाई। हमारी मूल मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री जवाब दें, लेकिन वे तो उपस्थित ही नहीं हैं तो जवाब कहां से देंगे? मुझे लगता है कि केंद्रीय गृह मंत्री और प्रधानमंत्री शिक्षा को लेकर जवाब नहीं देना चाहते। जो अन्याय हुआ, उसके खिलाफ आज विरोध दलों ने प्रश्नकाल में आवाज उठाई।

राज्यसभा 12 बजे तक के लिए स्थगित : राज्यसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बाद कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस बीच एनएसए अजीत डोभाल संसद भवन पहुंचे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्य सभा में आइशी घोष की गिरफ्तारी के मामले पर कहा कि शर्मनाक है। जो लोग गए थे, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

Guru Purnima Satya Narayan Vrat Katha: आज गुरु पूर्णिमा के मौके पर पढ़ें सत्यनारायण भगवान की ये कथा, जीवन से मिट जाएगी दुख-दरिद्रता

Guru Purnima Satya Narayan Vrat Katha: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष स्थान है। पूरे हिंदू कैलेंडर में हर माह एक पूर्णिमा तिथि आती है। इस तरह पूरे साल में 12 पूर्णिमाएं आती हैं। इनमें से ही एक है आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि। आषाढ़ पूर्णिमा की तिथि गुरु को समर्पित है और इस दिन लोग अपने गुरु का सम्मान करते हैं और उनके प्रति आभार प्रकट करते हैं। पूर्णिमा तिथि पर गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान, दान, और सत्यनारायण भगवान का व्रत और कथा भी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से सत्यनारायण व्रत कथा सुनने से जीवन के सभी दुख-दरिद्रता दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है। माना जाता है कि चतुर्मास के दौरान सत्यनारायण कथा करवाने से विशेष फल मिलता है और श्रीहरि की कृपा बनी रहती है। आइए जानें सत्यनारायण व्रत कथा के बारे में

सत्यनारायण की कथा

कथा के अनुसार, एक बार नारद जी पृथ्वी लोक पर घूमते हुए लोगों की स्थिति देखकर दुखी हो गए। उन्होंने देखा कि मनुष्य अपने कर्मों के कारण तरह-तरह के कष्ट झेल रहे हैं। यह देखकर उनका मन करुणा से भर गया और वे भगवान विष्णु के पास क्षीरसागर पहुंच गए। वहां उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि कोई ऐसा सरल उपाय बताएं, जिससे लोगों के दुख दूर हो सकें। भगवान विष्णु ने नारद जी से कहा कि उन्होंने बहुत ही अच्छा प्रश्न किया है।

इसके बाद उन्होंने श्री सत्यनारायण व्रत के बारे में बताया, जो बहुत पुण्य देने वाला और मोक्ष दिलाने वाला माना जाता है। भगवान ने कहा कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि से करने पर मनुष्य के जीवन के दुख दूर होते हैं और उसे सुख-समृद्धि मिलती है। इसके बाद यह व्रत एक ब्राह्मण, लकड़हारे, राजा और व्यापारी जैसे कई लोगों ने किया और उन्हें इसका लाभ मिला। इससे यह संदेश मिलता है कि यह व्रत कोई भी व्यक्ति कर सकता है, चाहे वह अमीर हो या गरीब, पुरुष हो या महिला।

कथा में एक व्यापारी का भी उल्लेख मिलता है, जिसने पहले इस व्रत को गंभीरता से नहीं लिया। उसने संतान होने के बाद व्रत करने का वादा किया, लेकिन बाद में भी टालता रहा। परिणामस्वरूप उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बाद में जब उसकी पत्नी और बेटी ने श्रद्धा से व्रत किया, तो भगवान की कृपा से उसके सभी कष्ट दूर हो गए।

इसी तरह एक राजा ने भी भगवान का अनादर किया और प्रसाद तक नहीं लिया, जिसके कारण उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। बाद में जब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सच्चे मन से पूजा की, तो उसकी सारी परेशानियां खत्म हो गईं। मुख्य संदेश यह है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति आती है। सत्य को अपनाना और भक्ति के मार्ग पर चलना ही इस व्रत का असली महत्व है।

http://Guru Purnima 2026: आज गुरु पूर्णिमा के साथ मनाया जाएगा व्यास जयंति और शिव शयनोत्सव का पर्व, जानें आज मनाए जा रहे त्योहारों का महासंगम

Guru Purnima 2026: आज गुरु पूर्णिमा के साथ मनाया जाएगा व्यास जयंति और शिव शयनोत्सव का पर्व, जानें आज मनाए जा रहे त्योहारों का महासंगम

Guru Purnima 2026: आज आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि है। धार्मिक मान्यतओं के अनुसार, आज के दिन गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है, जो जीवन में मार्ग दर्शन करने वाले सभी गुरुओं को समर्पित है। साथ ही, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत के रचयिता महर्षि वेद वयास का जन्म भी आषाढ़ पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसलिए आज व्यास जयंति भी मनाते हैं। इसके अलावा, आज के दिन भागवान शिव का शयनोत्सव भी मनाया जाता है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन आषाढ़ी पूर्णिमा, सत्यनारायण व्रत और बुधवार व्रत का पावन संयोग भी बन रहा है। ज्योतिष और धर्मशास्त्र के अनुसार एक ही दिन इन सभी पर्वों का संगम साधना, ज्ञान, भक्ति और पुण्य प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं को इस दिन गुरु पूजन, भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना के साथ व्रत एवं दान-पुण्य करने का अवसर मिल रहा है। आइए जानें आज कौन-कौन से पर्व मनाए जाएंगे

गुरु पूर्णिमा : गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। इस दिन अपने गुरु का पूजन, आशीर्वाद प्राप्त करना तथा शिक्षा और आध्यात्मिक उन्नति का संकल्प लेना विशेष फलदायी माना जाता है।

आषाढ़ी पूर्णिमा : आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह दिन स्नान, जप, तप, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही पितरों के नाम का भोजन और दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।

व्यास पूजा : गुरु पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने वेदों का विभाजन, महाभारत और अनेक पुराणों की रचना कर सनातन ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाया। इसलिए इस दिन व्यास पूजा कर उन्हें आदिगुरु के रूप में स्मरण किया जाता है।

सत्यनारायण व्रत : पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इस दिन सत्यनारायण व्रत और कथा का सुनने के बाद श्रद्धालु पंचामृत, फल और प्रसाद अर्पित करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से श्रीहरि और माता लक्ष्मी की कृपा रहती है।

शिव शयनोत्सव : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा पर भगवान शिव का शयनोत्सव भी मनाया जाता है। जैसे देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु योग निद्रा में जाते हैं, उसी तरह भगवान शिव भी शयन के लिए चले जाते हैं और सृष्टि का कार्यभार रूद्र संभालते हैं। इस दिन शिव मंदिरों में विशेष श्रृंगार, रुद्राभिषेक और शयन आरती की जाती है।

बुधवार व्रत : इस बार पूर्णिमा तिथि बुधवार के दिन पड़ रही है। बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान गणेश और ग्रहों के राजकुमार बुधदेव को समर्पित है। मान्यत है कि इस दिन गणपति की पूजा करने से बुद्धि, विवेक, व्यापार, शिक्षा और वाणी से जुड़े कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है।

Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू हो रहा है सावन का महीना, जानें कब किया जाएगा सावन के पहले सोमवार का व्रत और इसके नियम

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को चीन से मिला ‌₹6,000 ‌करोड़ का फंड:अमेरिका विदेशी फंडिंग पर उठा सवाल, जांच शुरू करने की मांग

अमेरिका में यूनिवर्सिटीज को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर सवालों के बीच नया खुलासा हुआ है। इससे यूनिवर्सिटीज और ट्रम्प प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। शिक्षा विभाग के पोर्टल के मुताबिक, हार्वर्ड को विदेशी स्रोतों से रिकॉर्ड 43,100 करोड़ रु. मिले हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें से छह हजार करोड़ चीन से आए हैं। ट्रम्प प्रशासन की वीसा नीतियों और प्रवासियों पर सख्ती के बीच अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर विदेशी नागरिकों और पैसे पर अत्यधिक निर्भरता का आरोप लग रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौते की बात कही जा रही है। ट्रम्प प्रशासन से जांच शुरू करने की मांग उठी है। अन्य अमेरिकी यूनिवर्सिटीज भी राडार पर यह विवाद सिर्फ हार्वर्ड तक सीमित नहीं है। अमेरिका के वॉच-लिस्ट में शामिल शीर्ष पांच चीनी कंपनियों (जैसे हुआवेई और एयर चाइना) ने देश के अलग-अलग कॉलेजों को करीब 1,140 करोड़ रु. दिए हैं। इन्हें भी राडार पर लेकर जांच हो सकती है। लैब की जासूसी और सैन्य तकनीक चोरी का खतरा अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आ रहा विदेशी पैसा सिर्फ दान नहीं, बल्कि रणनीतिक घुसपैठ का जरिया बन चुका है। फंड के इस खेल से अमेरिका के सामने कई बड़े खतरे खड़े हो गए हैं। यूनिवर्सिटी लैब्स में विदेशी फंड के जरिए गोपनीय रिसर्च और डेटा चुराए जाने की आशंका जताई जा रही है। आरोप हैं कि चीनी सेना से जुड़ी संस्थाएं फंडिंग देकर अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल अपने हथियारों को तैयार करने में कर सकती हैं। हार्वर्ड और विदेशी संस्थाओं में 7,089 वित्तीय सौदे हुए हार्वर्ड ने विदेशी संस्थाओं के साथ 7,089 अलग-अलग वित्तीय सौदे किए हैं। इस रिकॉर्ड वित्तीय सौदे के कारण हार्वर्ड अमेरिका में विदेशी फंडिंग हासिल करने वाला शीर्ष संस्थान बना है। हार्वर्ड को चीनी सैन्य विकास से जुड़ी संस्थाओं से करीब 4 करोड़ रुपए और विदेशी टैलेंट प्रोग्राम से 4 करोड़ रु. मिले हैं। ट्रम्प ने कहा था- यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निशाने पर रहती है। पिछले साल (16 अप्रैल, 205) उन्होंने एक बयान में कहा था कि यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है और यह सिर्फ वोक कर्मचारियों की भर्ती कर रहा है। अब हार्वर्ड को दुनिया की सबसे बेहतर यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की किसी भी लिस्ट में नहीं गिना जाना चाहिए। हार्वर्ड एक मजाक है जो नफरत और मूर्खता सिखाता है। इसे अब सरकारी पैसा नहीं मिलना चाहिए। ट्रम्प ने इस बयान के एक दिन पहले ही हार्वर्ड की 18 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग रोकी थी और उसका टैक्स फ्री दर्जा खत्म करने की बात कही थी। ————-
ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की टैक्स छूट खत्म कर सकते हैं:₹18 हजार करोड़ की फंडिंग भी रोकी; ट्रम्प यूनिवर्सिटी पर कंट्रोल चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्स छूट खत्म करने की बात कही। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्ट छूट पर फिर से विचार किया जा सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को चीन से मिला ‌₹6,000 ‌करोड़ का फंड:अमेरिका विदेशी फंडिंग पर उठा सवाल, जांच शुरू करने की मांग

अमेरिका में यूनिवर्सिटीज को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर सवालों के बीच नया खुलासा हुआ है। इससे यूनिवर्सिटीज और ट्रम्प प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। शिक्षा विभाग के पोर्टल के मुताबिक, हार्वर्ड को विदेशी स्रोतों से रिकॉर्ड 43,100 करोड़ रु. मिले हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें से छह हजार करोड़ चीन से आए हैं। ट्रम्प प्रशासन की वीसा नीतियों और प्रवासियों पर सख्ती के बीच अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर विदेशी नागरिकों और पैसे पर अत्यधिक निर्भरता का आरोप लग रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौते की बात कही जा रही है। ट्रम्प प्रशासन से जांच शुरू करने की मांग उठी है। अन्य अमेरिकी यूनिवर्सिटीज भी राडार पर यह विवाद सिर्फ हार्वर्ड तक सीमित नहीं है। अमेरिका के वॉच-लिस्ट में शामिल शीर्ष पांच चीनी कंपनियों (जैसे हुआवेई और एयर चाइना) ने देश के अलग-अलग कॉलेजों को करीब 1,140 करोड़ रु. दिए हैं। इन्हें भी राडार पर लेकर जांच हो सकती है। लैब की जासूसी और सैन्य तकनीक चोरी का खतरा अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आ रहा विदेशी पैसा सिर्फ दान नहीं, बल्कि रणनीतिक घुसपैठ का जरिया बन चुका है। फंड के इस खेल से अमेरिका के सामने कई बड़े खतरे खड़े हो गए हैं। यूनिवर्सिटी लैब्स में विदेशी फंड के जरिए गोपनीय रिसर्च और डेटा चुराए जाने की आशंका जताई जा रही है। आरोप हैं कि चीनी सेना से जुड़ी संस्थाएं फंडिंग देकर अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल अपने हथियारों को तैयार करने में कर सकती हैं। हार्वर्ड और विदेशी संस्थाओं में 7,089 वित्तीय सौदे हुए हार्वर्ड ने विदेशी संस्थाओं के साथ 7,089 अलग-अलग वित्तीय सौदे किए हैं। इस रिकॉर्ड वित्तीय सौदे के कारण हार्वर्ड अमेरिका में विदेशी फंडिंग हासिल करने वाला शीर्ष संस्थान बना है। हार्वर्ड को चीनी सैन्य विकास से जुड़ी संस्थाओं से करीब 4 करोड़ रुपए और विदेशी टैलेंट प्रोग्राम से 4 करोड़ रु. मिले हैं। ट्रम्प ने कहा था- यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निशाने पर रहती है। पिछले साल (16 अप्रैल, 205) उन्होंने एक बयान में कहा था कि यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है और यह सिर्फ वोक कर्मचारियों की भर्ती कर रहा है। अब हार्वर्ड को दुनिया की सबसे बेहतर यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की किसी भी लिस्ट में नहीं गिना जाना चाहिए। हार्वर्ड एक मजाक है जो नफरत और मूर्खता सिखाता है। इसे अब सरकारी पैसा नहीं मिलना चाहिए। ट्रम्प ने इस बयान के एक दिन पहले ही हार्वर्ड की 18 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग रोकी थी और उसका टैक्स फ्री दर्जा खत्म करने की बात कही थी। ————-
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Guru Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा है बृहस्पति का साथ पाने का सबसे अच्छा दिन, जानें इस दिन का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व

Guru Purnima 2026: हिंदू धर्म में गुरु को माता-पिता ही नहीं भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया जाता है। यही वजह है कि गुरु पूर्णिमा का हिंदू धर्म के प्रमुख पर्व और उत्सवों में विशेष स्थान है। गुरु पूर्णिमा आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन वेदों के संकलनकर्ता और महाभारत के लेखक महर्षि वेद व्यास की जयंती है। गुरु पूर्णिमा का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से जितना अहम है, उतना ही ज्योतिषीय रूप से भी है।

ज्योतिष में गुरु पूर्णिमा का महत्व

ज्योतिषशास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा, भाग्य, संतान, धर्म, विवेक और उच्च पद-प्रतिष्ठा का कारक माना गया है। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु ग्रह का आशीर्वाद प्राप्त करना बहुत सुलभ होता है। जिनकी कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर, नीच या पीड़ित स्थिति में होता है, उनके लिए इस दिन किए जाने वाले उपाय और मंत्र-जाप विशेष लाभ प्रदान करते हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि इस दिन प्रार्थना, ध्यान और आभार व्यक्त करने से, कोई भी अपनी कुंडली में बृहस्पति को मजबूत कर सकता है। ज्ञान, करियर, रिश्तों और आध्यात्मिक विकास के रास्ते में आने वाली रुकावटों को दूर कर सकता है।

पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

गुरु पूर्णिमा में पूर्णिमा तिथि का स्वामी स्वयं चंद्रमा है, जो व्यक्ति के मन, भावनाओं और मानसिक ऊर्जा को नियंत्रित करता है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है। इस दिन गुरु (ज्ञान) और चंद्रमा (मन) की ऊर्जा मिलकर साधक को आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि, एकाग्रता और मानसिक शांति प्रदान करती है। इसलिए, गुरु पूर्णिमा को साल की सबसे आध्यात्मिक रूप से चार्ज पूर्णिमा में से एक माना जाता है, क्योंकि यह बताती है:

  • जीवन के अर्थ के बारे में सोचें और समझने की कोशिश करें।
  • नकारात्मक भावनाओं को छोड़ें, अपनी समझ को विकसित करें।
  • आभार जताएं और विनम्रता रखें।
  • भगवान की चेतना से जुड़ें।

कुंडली में गुरु की स्थिति का परिणाम

ज्योतिष के हिसाब से, बृहस्पति विस्तार, उम्मीद, अच्छाई और खुशहाली का ग्रह है। जन्म कुंडली में बृहस्पति मजबूत होने पर जातक को पढ़ाई में सफलता, रुपये-पैसे में स्थिरता, समाज में सम्मान, परिवार के रिश्ते अच्छे रहते हैं, आध्यात्मिक रुझान, समझदारी पूर्ण और सही फैसला लेते हैं। इसके उलट, कमजोर बृहस्पति अनिश्चितता, देर से सफलता, गाइडेंस की कमी, पढ़ाई में दिक्कतें या गलत फैसला लेने का कारण बन सकता है।

इसलिए जताएं अपने गुरु का आभार

हर इंसान का जीवन सिर्फ़ ग्रहों की चाल से ही नहीं, बल्कि कर्म से भी प्रभावित होती है। बृहस्पति इंसान को समझदारी और अनुशासन से उस कर्म को समझने और बदलने में मदद करता है। गुरु पूर्णिमा पर माता-पिता, टीचर, आध्यात्मिक गुरु या गुरुओं को सम्मान देना, बृहस्पति का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु का आशीर्वाद कर्म की रुकावटों को दूर करने और तरक्की और कामयाबी की संभावनाओं को आकर्षित करने में मदद करता है।

गुरु पूर्णिमा 2026 के उपाय

1. गुरु पूजा : अपने गुरु या गुरुओं को पीली मिठाई या फूल, फल या एक छोटी सी प्रार्थना दें। अगर आपके गुरु शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, तो उनकी शिक्षाओं के प्रति आभार जताएं।

2. बृहस्पति के मंत्रों का जाप करें : गुरु मंत्रों का जाप करने से बृहस्पति की एनर्जी बढ़ती है। इन मंत्रों का जाप करें :

ॐ गुरवे नमः, ॐ बृं बृहस्पतये नमः। इन मंत्रों का 108 बार श्रद्धा से जाप करना बहुत शुभ माना जाता है।

3. ध्यान करें : गुरु पूर्णिमा के दिन, ध्यान मन को शांत करने और ध्यान लगाने में मदद करता है। कुछ पल का मौन और सोच-विचार खुद के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए काफी है।

4. दान करें : बृहस्पति उदारता का ग्रह है। खाना, किताबें, पढ़ाई के सामान, हल्दी, या पीले कपड़े दान करने या स्टूडेंट्स और टीचरों की मदद करने से भगवान का आशीर्वाद और अच्छे कर्म मिलते हैं।

5. कुछ नया सीखें : गुरु पूर्णिमा को कुछ नया सीखने के लिए या नई शुरुआत के लिए बहुत शुभ दिन माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा 2026 की लकी राशियां

गुरु पूर्णिमा का सभी राशियों पर अच्छा असर पड़ता है, लेकिन बृहस्पति की प्रिय राशियों पर इसका शुभ प्रभाव पड़ता है। इनमें शामिल हैं

मेष : करियर गाइडेंस और पढ़ाई के ज्यादा मौके।

कर्क : भावनाओं और पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आएगी।

सिंह : लीडरशिप स्किल्स और कॉन्फिडेंस बढ़ेगा।

धनु : बृहस्पति की राशि होने के कारण, धनु राशि वालों को नई उम्मीद, आध्यात्मिक तरक्की और पढ़ाई में सफलता की उम्मीद करनी चाहिए।

मीन : आपके लिए ध्यान करने या कुछ क्रिएटिव करने का बहुत अच्छा समय है।

गुरु पूर्णिमा 2026: अपने कर्मों से अपना भाग्य बदलने का मौका

गुरु पूर्णिमा का दिन बड़े बदलावों का दिन होता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ज्ञान में किस्मत बदलने की ताकत होती है। यह पूर्णिमा लोगों को अहंकार छोड़ने, विनम्रता अपनाने, जरूरत पड़ने पर मार्गदर्शन लेने और धैर्य, दया, ईमानदारी और उदारता जैसे गुण अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। ये गुण बृहस्पति की ऊर्जा के साथ गहराई से जुड़ते हैं और माना जाता है कि ये हमेशा रहने वाला आशीर्वाद देते हैं। गुरु पूर्णिमा 2026 सिर्फ एक पारंपरिक त्योहार ही नहीं है, बल्कि ज्ञान और आभार की ताकत की एक कॉस्मिक याद भी है जो बदलाव ला सकती है।

Guru Purnima 2026 Date: 28 या 29, कब है गुरु पूर्णिमा? जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और सही तारीख

Guru Purnima 2026 Date: 28 या 29, कब है गुरु पूर्णिमा? जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और सही तारीख

Guru Purnima 2026 Date: गुरु पूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं, हिंदू धर्म के अत्यंत प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। यह पर्व अपने शिक्षक या गुरु के प्रति आभार और सम्मान प्रकट करने का अवसर प्रदान करता है। हिंदू धर्म में गुरु का स्थान माता-पिता और भगवान से भी ऊपर माना जाता है। “गुरु” शब्द संस्कृत से आया है, जहां ‘गु’ का मतलब है ‘अंधेरा’ या ‘अज्ञान’ और ‘रु’ का मतलब है ‘अंधेरे को दूर करने वाला’। गुरु पूर्णिमा न सिर्फ हिंदू धर्म में मनाई जाती है, बल्कि जैन और बौद्ध धर्म में भी इसका बहुत महत्व है।

हिंदू धर्म में, गुरु पूर्णिमा महर्षि वेद व्यास के सम्मान में मनाई जाती है। वहीं, बौद्ध धर्म में, यह सारनाथ में भगवान बुद्ध के पहले उपदेश का प्रतीक है। जबकि, जैन धर्म में, यह भगवान महावीर के पहले शिष्य, गौतम स्वामी के सम्मान में मनाई जाती है। कुल मिलाकर, यह त्योहार आभार, सीखने और आध्यात्मिक विकास का प्रतीक है। गुरु पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, इस दिन व्यक्ति का अन्न दान भी किया जाता है, मान्यता है कि अन्न दान करने से लोगों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं, मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्यक्ति को स्नान-ध्यान करने के बाद गुरु के पास जाकर उनकी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।

गुरु पूर्णिमा 2026: तारीख, समय और तिथि

द्रिक पंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा 2026 बुधवार, 29 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। यह त्योहार हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ महीने की पूर्णिमा (पूर्णिमा) को पड़ता है।

गुरु पूर्णिमा समय

पूर्णिमा तिथि शुरू : 28 जुलाई, 2026 को शाम 06:18 बजे

पूर्णिमा तिथि खत्म : 29 जुलाई, 2026 को रात 08:05 बजे

गुरु पूर्णिमा 2026 : मतलब और महत्व

सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन गुरुओं को समर्पित होता है, जिन्होंने हमें ज्ञान, संस्कार और सही दिशा दिखाई है। इसी पावन तिथि पर महर्षि वेद व्यास जी का जन्म भी हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गुरुजनों का पूजन कर उनका आशीर्वाद लेने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और ज्ञान का प्रकाश फैलता है।

गुरु पूर्णिमा स्नान दान मुहूर्त

गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान और दान ब्रह्म मुहूर्त में करना चाहिए। इसका मुहूर्त सुबह 4 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा?

धार्मिक पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही महाभारत, 18 पुराणों और ब्रह्मसूत्रों के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। महर्षि व्यास को ही सनातन परंपरा में प्रथम गुरु का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि उन्होंने ही चारों वेदों का वर्गीकरण किया था। इसी कारण गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं की पूजा करते हैं, उन्हें उपहार भेंट करते हैं और उनके बताए सन्मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

Sawan 2026 Special: शुरू होने वाला है महादेव का प्रिय माह, जानें त्रिशूल से लेकर चांद और गंगा नदी तक शिव के हर चिह्न के हैं गहरे आध्यात्मिक अर्थ

 

Sawan 2026 Special: शुरू होने वाला है महादेव का प्रिय माह, जानें त्रिशूल से लेकर चांद और गंगा नदी तक शिव के हर चिह्न के हैं गहरे आध्यात्मिक अर्थ

Sawan 2026 Special: हिंदू कैलेंडर का पांचवां महीना सावन अब कुछ ही दिन दूर है। इस माह को देवाधिदेव महादेव का प्रिय मास माना जाता है। दुनियाभर के लाखों-करोड़ों शिवभक्त इस पूरे माह में शिवभक्ति में लीन रहते हैं। शिव की पूजा, उपवास के साथ-साथ भजन-कीर्तन भी करते हैं। शिव के प्रति अपनी अनन्य आस्था प्रकट करने के लिए बहुत से श्रद्धालु उनके प्रतीक चिह्न भी अपने साथ रखते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि महादेव से जुड़े हर चिह्न सिर्फ उनके रूप का हिस्सा नहीं हैं, ये ज्ञान, संतुलन, साहस और भक्ति जैसे जरूरी जीवन के सबक दिखाते हैं। त्रिशूल और डमरू से लेकर चांद और गंगा नदी तक, हर प्रतीक के गहरे आध्यात्मिक अर्थ है।

त्रिशूल: त्रिशूल भगवान शिव का दिव्य अस्त्र है। माना जाता है कि इसके तीन कांटे बनाने, बचाने और नष्ट करने को दिखाते हैं। ये भूत, वर्तमान और भविष्य को भी दिखाते हैं। यह भक्तों को याद दिलाते हैं कि शिव समय से परे हैं।

डमरू : डमरू उस आवाज को दिखाता है जिससे माना जाता है कि सृष्टि की शुरुआत हुई है। यह बनाने, लय और जीवन के लगातार चलने वाले चक्र को दिखाता है, जो हमें याद दिलाता है कि बदलाव जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है।

तीसरा नेत्र : भगवान शिव की तीसरी आंख ज्ञान, समझ और ऊंची चेतना का प्रतीक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब शिव अपनी तीसरी आंख खोलते हैं, तो यह बुराई, अज्ञानता और नेगेटिविटी को खत्म कर देता है।

आधा चांद : शिव के सिर पर आधा चांद समय, शांति और भावनात्मक संतुलन का प्रतीक है। यह भक्तों को याद दिलाता है कि जैसे चांद अलग-अलग चरणों से गुजरता है, वैसे ही जिंदगी भी लगातार बदलती रहती है।

गंगा नदी : शिव की जटाओं से बहने वाली पवित्र गंगा नदी पवित्रता, जीवन और दया को दिखाती है। कहानी के अनुसार, शिव ने धरती पर पहुंचने से पहले इस शक्तिशाली नदी का ज़ोर कम करने के लिए इसे अपनी जटाओं में पकड़ लिया था।

गले में सांप : भगवान शिव के गले में कोबरा निडरता और डर और इच्छा पर काबू पाने का प्रतीक है। यह मुश्किल हालात में सजगता और शांत रहने की क्षमता को भी दिखाता है।

नीलकंठ : भगवान शिव का नीला कंठ समुद्र मंथन की कहानी से आया है, जब उन्होंने दुनिया को बचाने के लिए हलाहल विष पिया था। यह आत्म-बलिदान, हिम्मत और दूसरों की रक्षा करने का प्रतीक है।

विभूति : शिव के शरीर पर लगाई गई पवित्र राख भक्तों को याद दिलाती है कि दुनिया की हर चीज कुछ समय के लिए है। यह विनम्रता, वैराग्य और आध्यात्मिक विकास पर ध्यान देने के लिए बढ़ावा देती है।

बाघ की खाल : भगवान शिव को अक्सर बाघ की खाल पर बैठे हुए दिखाया जाता है, जो घमंड और बेकाबू इच्छाओं पर जीत का प्रतीक है। यह आत्म संतुलन से मिलने वाली ताकत को भी दिखाता है।

रुद्राक्ष की माला : माना जाता है कि रुद्राक्ष की माला भगवान शिव के आंसुओं से निकली है। ये शांति, भक्ति, सुरक्षा और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक हैं और भक्त इन्हें पूजा के दौरान बड़े पैमाने पर पहनते हैं।

नंदी : नंदी, भगवान शिव का वाहन, विश्वास, वफादारी, धैर्य और नेकी का प्रतीक है। यह ज्यादातर शिव मंदिरों में, नंदी शिवलिंग की ओर मुंह करके खड़े होते हैं, जो महादेव के प्रति अटूट भक्ति का प्रतीक है।

शिवलिंग : शिवलिंग भगवान शिव का सबसे पवित्र प्रतीक है। यह भगवान के अनंत और निराकार स्वरूप के साथ-साथ सृष्टि के अनंत चक्र और कॉस्मिक एनर्जी के मिलन को भी दिखाता है।

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अयोध्या राम मंदिर में बड़ा बदलाव, ऑनलाइन दान करते ही तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद

ayodhya ram mandir trust meeting

Ram Mandir online donation: ​अयोध्या में श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के हालिया मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राम भक्तों के लिए ऑनलाइन दान करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और हाई-टेक बना दिया गया है।

 

​ऑनलाइन दान करने वाले श्रद्धालुओं को अब दान की पुष्टि के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ट्रस्ट ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट के 'डोनेशन सेक्शन' को अपडेट कर यह नई सुविधा शुरू की है। ​दान प्रक्रिया पूरी होते ही रसीद तुरंत स्क्रीन पर आ जाएगी, जिसे डाउनलोड करके सुरक्षित रखा जा सकता है। रसीद पाने के लिए श्रद्धालु को नाम, दान का उद्देश्य, पैन (PAN) नंबर, तिथि, दान राशि, पूरा पता, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। किसी भी सहायता या पूछताछ के लिए ट्रस्ट ने अपनी वेबसाइट पर हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी भी जारी कर दिए हैं। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में 5 बड़े फैसले, संतों को बड़ी जिम्मेदारी

ऑफलाइन दान के लिए भी सख्त नियम लागू

​चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद कई श्रद्धालुओं ने रसीद में देरी की शिकायत की थी। इसी को देखते हुए अब मंदिर परिसर में ऑफलाइन (नकद) दान करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को भी मौके पर ही अनिवार्य रूप से रसीद देने की व्यवस्था लागू कर दी गई है। नई डिजिटल व्यवस्था से श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा और भविष्य में दान के रिकॉर्ड का सत्यापन बेहद आसान रहेगा। ALSO READ: अयोध्या आहत है… रामलला के घर 'लूट' ने आस्था को घायल किया, सरयू किनारे गूंज रहा एक ही सवाल— 'अब न्याय कब?'

रोज आ रहा है 8 से 10 लाख रुपये का चढ़ावा

​चढ़ावा चोरी की घटना के बाद शुरुआत में दान की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर हुई थी, लेकिन राम भक्तों की अटूट आस्था को कोई रोक नहीं सका। श्रद्धालुओं का भरोसा एक बार फिर पूरी तरह लौट आया है। ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों को मिलाकर राम लला के चरणों में प्रतिदिन 8 से 10 लाख रुपए का चढ़ावा आ रहा है। मंदिर परिसर में रखे दान पात्रों में भक्त दिल खोलकर चढ़ावा अर्पित कर रहे हैं, वहीं ऑनलाइन दान में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।