Guru Purnima 2026 Date: 28 या 29, कब है गुरु पूर्णिमा? जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और सही तारीख

Guru Purnima 2026 Date: गुरु पूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं, हिंदू धर्म के अत्यंत प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। यह पर्व अपने शिक्षक या गुरु के प्रति आभार और सम्मान प्रकट करने का अवसर प्रदान करता है। हिंदू धर्म में गुरु का स्थान माता-पिता और भगवान से भी ऊपर माना जाता है। “गुरु” शब्द संस्कृत से आया है, जहां ‘गु’ का मतलब है ‘अंधेरा’ या ‘अज्ञान’ और ‘रु’ का मतलब है ‘अंधेरे को दूर करने वाला’। गुरु पूर्णिमा न सिर्फ हिंदू धर्म में मनाई जाती है, बल्कि जैन और बौद्ध धर्म में भी इसका बहुत महत्व है।

हिंदू धर्म में, गुरु पूर्णिमा महर्षि वेद व्यास के सम्मान में मनाई जाती है। वहीं, बौद्ध धर्म में, यह सारनाथ में भगवान बुद्ध के पहले उपदेश का प्रतीक है। जबकि, जैन धर्म में, यह भगवान महावीर के पहले शिष्य, गौतम स्वामी के सम्मान में मनाई जाती है। कुल मिलाकर, यह त्योहार आभार, सीखने और आध्यात्मिक विकास का प्रतीक है। गुरु पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, इस दिन व्यक्ति का अन्न दान भी किया जाता है, मान्यता है कि अन्न दान करने से लोगों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं, मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्यक्ति को स्नान-ध्यान करने के बाद गुरु के पास जाकर उनकी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।

गुरु पूर्णिमा 2026: तारीख, समय और तिथि

द्रिक पंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा 2026 बुधवार, 29 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। यह त्योहार हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ महीने की पूर्णिमा (पूर्णिमा) को पड़ता है।

गुरु पूर्णिमा समय

पूर्णिमा तिथि शुरू : 28 जुलाई, 2026 को शाम 06:18 बजे

पूर्णिमा तिथि खत्म : 29 जुलाई, 2026 को रात 08:05 बजे

गुरु पूर्णिमा 2026 : मतलब और महत्व

सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन गुरुओं को समर्पित होता है, जिन्होंने हमें ज्ञान, संस्कार और सही दिशा दिखाई है। इसी पावन तिथि पर महर्षि वेद व्यास जी का जन्म भी हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गुरुजनों का पूजन कर उनका आशीर्वाद लेने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और ज्ञान का प्रकाश फैलता है।

गुरु पूर्णिमा स्नान दान मुहूर्त

गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान और दान ब्रह्म मुहूर्त में करना चाहिए। इसका मुहूर्त सुबह 4 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा?

धार्मिक पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही महाभारत, 18 पुराणों और ब्रह्मसूत्रों के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। महर्षि व्यास को ही सनातन परंपरा में प्रथम गुरु का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि उन्होंने ही चारों वेदों का वर्गीकरण किया था। इसी कारण गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं की पूजा करते हैं, उन्हें उपहार भेंट करते हैं और उनके बताए सन्मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

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Jyeshtha Purnima 2026: क्या है ज्येष्ठ पूर्णिमा की सही तारीख? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और स्नान-दान का समय

Jyeshtha Purnima 2026: पूर्णिमा तिथि का हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और प्रमुख स्थान है। इस दिन माता लक्ष्मी के साथ ही भगवान सत्यनारायण और चंद्र देव की पूजा का विधान है। बहुत से लोग पूर्णिमा तिथि के शुभ अवसर पर सत्यनारायण की कथा कहते या सुनते हैं। पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं, जिनमें से ज्येष्ठ पूर्णिमा भी एक है। इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। सुहागिन महिलाएं इस दिन पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री पूर्णिमा (वट पूर्णिमा) का व्रत भी रखती हैं।

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार है :

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : 29 जून 2026 को प्रातः 03:06 बजे से

पूर्णिमा तिथि समाप्त : 30 जून 2026 को प्रातः 05:26 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार : पूर्णिमा का व्रत, पूजा और स्नान-दान 29 जून 2026 (सोमवार) को ही किया जाएगा।

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:06 बजे से 04:46 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक

चंद्रोदय का समय : शाम 07:11 से 07:16 बजे

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 पर भद्र का साया

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन 29 जून को प्रात:काल 03:06 बजे से लेकर दोपहर 04:16 बजे तक भद्रा का साया रहेगा। हालांकि, शास्त्रों के अनुसार भद्रा पाताल लोक में होने के कारण पृथ्वी पर इसका प्रभाव नहीं होगा, इसलिए जप, तप, स्नान और पूजा-पाठ बिना किसी बाधा के किए जा सकते हैं। फिर भी शुभ कार्यों की शुरुआत या गृह प्रवेश जैसे काम भद्रा के बाद करना बेहतर माना जाता है।

स्नान-दान का सही समय

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 04:06 बजे) से लेकर पूरे दिन स्नान और दान किया जा सकता है। सूर्योदय के समय का स्नान सबसे उत्तम माना जाता है।

स्नान विधि : इस दिन पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना) में स्नान करने का महत्व है। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

दान का महत्व : ज्येष्ठ का महीना अत्यधिक गर्मी का होता है, इसलिए इस दिन जल (जल दान), मिट्टी के घड़े, छाता, हाथ का पंखा, खरबूजा या आम जैसी ठंडी चीजों का दान सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। इसके अलावा सफेद वस्तुएं जैसे चावल, चीनी, दूध, दही और सफेद कपड़ों का दान करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजा विधि

  • सुबह स्नान करने के बाद साफ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • घर के मंदिर में दीपक जलाएं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, चंदन, अक्षत, तुलसी दल (विष्णु जी को) और भोग अर्पित करें। इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ना या सुनना अत्यंत फलदायी होता है।
  • सुहागिन महिलाएं इस दिन बरगद (वट) के पेड़ की पूजा करती हैं, सूत लपेटती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं।
  • पूर्णिमा की रात को चंद्रदेव अपने पूर्ण स्वरूप में होते हैं। चंद्रोदय (शाम लगभग 07:16 बजे) के बाद एक लोटे में जल, थोड़ा सा कच्चा दूध, अक्षत और सफेद फूल डालकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इससे मानसिक तनाव दूर होता है और सुख-शांति आती है।
  • रात के समय माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए मिश्री वाली सफेद खीर का भोग लगाएं और उसे प्रसाद के रूप में परिवार में बांटें। इससे घर की दरिद्रता दूर होती है।

Guru Purnima 2026: गुरु को समर्पित होती है साल की ये पूर्णिमा तिथि, जानें गुरु पूर्णिमा की सही तारीख, मुहूर्त और महत्व