शेयरों में निवेश करने जा रहे हैं? पहले जान लीजिए एचएसबीसी ने Sensex के लिए क्या टारेगट दिया है

शेयर बाजार में सेंटिमेंट बेहतर हुआ है। अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई फिर से शुरू होने के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई है। निफ्टी 24000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब बना हुआ है। इस बीच, विदेशी ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने 16 जुलाई को भारतीय कंपनियों के शेयरों की रेटिंग बढ़ा दी। उसने रेटिंग ‘अंडरवेट’ से ‘न्यूट्रल’ कर दी ।

विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी

HSBC ने कहा है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी से कंपनियों की अर्निंग्स को लेकर रिस्क घटा है। रुपये को गिरने से रोकने के उपायों से विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी हुई है। एचएसबीसी ने 2026 के अंत में BSE Sensex का टारगेट बढ़ाकर 84,000 प्वाइंट्स कर दिया है। पहले उसने 80,500 का टारगेट प्राइस दिया था। इसका मतलब है कि सेंसेक्स मौजूदा लेवल से 8.6 फीसदी चढ़ सकता है।

2026 में सेंसेक्स और निफ्टी का रिटर्न निगेटिव

इस साल भारतीय शेयर बाजार का रिटर्न निगेटिव है। निफ्टी और सेंसेक्स 2026 में अब तक 7 फीसदी से ज्यादा नीचे हैं। एचएसबीसी की रिपोर्ट की मानें तो अगले छह महीनों में बाजार में हालात बदलने वाले हैं। एचएसबीसी ने पहले इस साल दिसंबर तक सेंसेक्स के लिए 80,500 अंक का टारेगट दिया था। इस बीच, India VIX 12.91 पर आ गया है। 16 जुलाई को इसमें 2.71 फीसदी गिरावट दिखी। इंडिया वीआईएक्स का 15 से नीचे होना बाजार के लिए पॉजिटिव है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स रिकॉर्ड ऊंचाई से 33% गिरा

क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी भारत के लिए अच्छी खबर है। भारत क्रूड की अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी हिस्सा इंपोर्ट से पूरा करता है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थीं। अप्रैल में Brent curde Futures 126.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इस लेवल से क्रूड 33 फीसदी गिर चुका है।

क्रूड ऑयल में नरमी से मार्जिन पर दबाव घटा

एचएसबीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “ऑयल में नरमी आई है। इससे मार्जिन पर दबाव थोड़ा कम हुआ है। अर्निंग्स डाउनग्रेड का रिस्क भी घटा है।” इस महीने की शुरुआत में गोल्डमैन सैक्स ने इंडिया के आउटलुक को बेहतर बताया था। उसने कमोडिटी की कीमतों में नरमी और रुपये में स्थिरता को इसकी वजह बताई थी।

जुलाई में विदेशी निवेशकों ने की 1.6 अरब डॉलर की खरीदारी

विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार को लेकर बदलता दिख रहा है। जुलाई में उन्होंने अब तक 1.6 अरब डॉलर के शेयर खरीदे हैं। चार महीनों तक भारतीय बाजार में बड़ी बिकवाली के बाद विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार बन गए हैं। 2026 में उन्होंने भारतीय बाजार में 27.7 अरब डॉलर की बिकवाली की है। यह पिछले साल उनकी 18.9 अरब डॉलर की बिकवाली से ज्यादा है। इसकी बड़ी वजह AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी है।

फॉरेन इनवेस्टर्स ने की इस वजह से बिकवाली 

भारतीय बाजार में एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों की कमी है। इस वजह से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से पैसे निकाल अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में लगाए हैं। इससे इन बाजारों में अच्छी तेजी आई है। दक्षिण कोरिया का बाजार तो इस साल दुनिया में सबसे ज्यादा चढ़ने वाला बाजार बन गया है। वहां एआई कंपनियों के शेयरों की कीमतें कई गुनी हो गई हैं।

वेस्टइंडीज को बदहाल क्रिकेट को सुधारने के लिए मिली 1.28 करोड़ डॉलर की बड़ी राशि

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा घोषित अभिशासन, सदस्यता और सदस्यों की सहायता में में बदलावों के तहत कैरिबियाई क्रिकेट को लोन मिलेगा। एडिनबर्ग में हुई सिलसिलेवार वार्षिक बैठक के बाद सदस्यों से जुड़े कई फ़ैसले लिए गए, जिनमें वेस्टइंडीज़ क्रिकेट को आर्थिक मदद देना भी शामिल रहा।

अफ्रीकी देश मॉरिशस को ICC का 111वां मेंबर बनाया गया है, जिससे इसके 12 स्थायी सदस्य और 98 अन्य एसोसिएट सदस्य की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है। इसके अलावा, ICC ने घोषणा की कि क्रिकेट कनाडा के लिए बहाली की शर्तें मंज़ूर कर ली गई हैं; इस बोर्ड पर लगे मौजूदा निलंबन को हटाने से पहले इन शर्तों को पूरा करना ज़रूरी है।

वहीं दूसरी ओर ICC को श्रीलंका क्रिकेट से संशोधित संविधान के बारे में अपडेट मिला है। फ़िलहाल, चुनाव होने तक श्रीलंका क्रिकेट ICC बोर्ड की बैठकों में प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएगा। इस बीच, ICC सदस्यता मानदंड का उल्लंघन करने के कारण फ़्रांस क्रिकेट को नोटिस दिया गया है।

वेस्टइंडीज़ क्रिकेट के लिए समर्थन

ICC ने क्रिकेट वेस्टइंडीज़ को समर्थन के तौर पर 1.28 करोड़ डॉलर का लोन दिया है। यह बोर्ड, जो कई सालों से आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहा है, आईसीसी से मदद की मांग करता रहा है। यह बात समय-समय पर कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी उठाया है।

30 सितंबर, 2025 को समाप्त हुए साल के वित्तीय विवरण के अनुसार, CWI को 28 मिलियन डॉलर का शुद्ध घाटा हुआ, जबकि पिछले साल उसे 24 मिलियन डॉलर का शुद्ध लाभ हुआ था। 2026 चक्र में 26 मिलियन डॉलर के लॉस के अनुमान के साथ, CWI के स्टेटमेंट में अनुदान की कमी को पूरा करने के लिए ICC से Loan Financing और Commercial Banking क्रेडिट सुविधाओं का ज़िक्र किया गया था। अब यह हकीकत बन गया है।

इससे पहले 2012 में, तत्कालीन वेस्टइंडीज़ क्रिकेट बोर्ड को ज़िम्बाब्वे के साथ ICC से सहायता फ़ंडिंग मिली थी। 2020 में, COVID-19 महामारी के दौरान, क्रिकेट वेस्टइंडीज़ को ECB से 3 मिलियन अमेरिकी डॉलर का लोन मिला था, जिसे समय पर चुका दिया गया।

ABB India share price : 8% तेजी के साथ वायदा का टॉप गेनर बना शेयर, जानिए क्या रही वजह

ABB India share price : ABB ग्लोबल के मजबूत नतीजों से ABB इंडिया में शानदार तेजी है। आज यह शेयर 8% तेजी के साथ वायदा का टॉप गेनर बना है। फिलहाल 12.20 बजे के आसपास यह शेयर 594 रुपए यानी 8.24 फीसदी की बढ़त के साथ 7787 रुपए के आसपास दिख रहा था। आज के कारोबारी सत्र में इसने 7,924.50 रुपए का हाई और 7,191 रुपए का लो छुआ है। स्टॉक में भारी वॉल्यूम के साथ तेजी आई है। इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम 1,821,556 शेयर और मार्केट कैप 165,330 करोड़ रुपए के आसपास दिख रहा है।

ABB इंडिया में तेजी क्यों?

ABB इंडिया की पैरेंट कंपनी ABB ग्लोबल के दूसरी तिमाही के नतीजे ब्लॉकबस्टर रहे हैं। इस अवधि में कंपनी का इंडिया रीजन का इनफ्लो सालाना आधार पर 81 फीसदी बढ़ा है। दूसरी तिमाही में ऑर्डर ग्रोथ 30 फीसदी बढ़कर 12,04.2 करोड़ डॉलर हो गई है। इस तिमाही में कंपनी की आय 14 फीसदी बढ़कर 9,47.5 करोड़ डॉलर रही है। ABB ग्लोबल के ऑपरेटिंग मार्जिन पहली पर 20% के पार रहे हैं। ऑपरेटिंग कैश फ्लो में 9% और ROCE 28.4% रहा है। Q2 ऑर्डर 30% बढ़कर 12,04.2 करोड़ डॉलर रहा है। सभी क्षेत्र में ऑर्डर ग्रोथ डबल डिजिट में रही है। एशिया,पश्चिम एशिया और अफ्रीका में 13% ऑर्डर ग्रोथ देखने को मिली है।

ABB इंडिया पर असर

ABB ग्लोबल के इंडिया इनफ्लो में ABB इंडिया और अनलिस्टेड एंटिटी शामिल हैं। एनालिस्ट को ABB इंडिया में 20% इनफ्लो का अनुमान था। इनफ्लो ग्रोथ 25-30 फीसदी और रन रेट 4200 करोड रुपए पर रहना ABB इंडिया के लिए बड़ा पॉजिटिव है। इनफ्लो मजबूत रहने से कैलेंडेर ईयर 2027 का आउटलुक अपग्रेड संभव है। इसके चलते ही आज इस शेयर में जोरदार तेजी आई है।

शेयर की चाल पर एक नजर

पिछले 1 हफ्ते में यह शेयर 11.39 फीसदी भागा है। वहीं, 1 महीने में इसमें 14.87 फीसदी की तेजी आई है। 3 महीने में यह शेयर 13.99 फीसदी और इस साल अब तक 50.53 फीसदी भागा है। 1 साल में इसने 38.03 फीसदी और 3 साल में 77.75 फीसदी रिटर्न दिया है। स्टॉक का 52 वीक हाई 7,924.50 रुपए और 52 वीक लो 4,637.50 रुपए है।

 

मजबूत NBFCs,बैंक और रियल एस्टेट शेयरों को गिरावट में खरीदें, SBI Funds IPO में सिर्फ लिस्टिंग गेन के लिए लगाएं दांव

 

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ब्रह्मोस से आकाश तक भारत के हथियारों का जलवा! समझिए कैसे स्वदेशी मिसाइल सिस्टम बना रहे हैं डिफेंस एक्सपोर्ट का नया रिकॉर्ड

India Defence Sector: दशकों तक दुनिया के सबसे बड़े रक्षा उपकरण आयातकों में शुमार रहने वाला भारत अब ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर एक बड़े डिफेंस एक्सपोर्टर के रूप में मजबूती से उभर चुका है। विदेशी सप्लायरों पर निर्भरता धीरे-धीरे घट रही है और अब भारत की स्वदेशी डिफेंस सिस्टम की डिमांड दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन 1।78 लाख करोड़ रुपये के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान देश के रक्षा निर्यात में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब यह रिकॉर्ड 38424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। ये इससे पिछले वित्त वर्ष में 23622 करोड़ रुपये था।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक पिछले एक दशक में भारत का रक्षा निर्यात लगभग 50 गुना बढ़ा है। ये वित्त वर्ष 2014 में सिर्फ 700 करोड़ रुपये हुआ करता था। जियो पॉलिटिकल टेंशन और बढ़ते सैन्य खर्चों के बीच स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की मजबूत वैश्विक स्वीकार्यता की वजह से कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2029 तक भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 50000 करोड़ रुपये हो जाएगा।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बना भारतीय हथियारों का मुख्य ठिकाना

भारत के रक्षा निर्यात के लिए इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र सबसे प्रमुख ठिकाना बनकर उभरा है। इसमें मुख्य रूप से म्यांमार, फिलीपींस और वियतनाम से आने वाली भारी मांग का बड़ा योगदान है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2020-2025 के दौरान भारत के कुल रक्षा निर्यात में इन तीनों दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों की हिस्सेदारी 70.1 प्रतिशत रही। इसके मुकाबले वर्ष 2014-2019 में यह हिस्सेदारी 16.5 प्रतिशत और 2008-2013 में सिर्फ 14.7 प्रतिशत थी। ये आंकड़े भारत के बदलते एक्सपोर्ट प्रोफाइल को साफ दिखाते हैं।

सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल की बढ़ती ग्लोबल डिमांड

भारत के रक्षा क्षेत्र को इस महीने की शुरुआत में एक और बड़ी कामयाबी तब मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान इंडोनेशिया ने भारत की स्वदेशी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने के समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए। फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया इस मिसाइल का तीसरा अंतरराष्ट्रीय खरीदार बन गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस मल्टि लेयर रणनीतिक रक्षा समझौते की कीमत 200 मिलियन डॉलर से 630 मिलियन डॉलर के बीच है। इसमें मिसाइल बैटरी, तटीय रक्षा प्रणाली और ऑपरेटरों की ट्रेनिंग शामिल है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी युद्ध प्रभावशीलता साबित करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल शक्तिशाली तटीय रक्षा और एंटी-शिप क्षमताएं प्रदान करती है। इसकी बेहद तेज गति होने की वजह से दुश्मन के लिए इसे इंटरसेप्ट करना बहुत कठिन होता है। ऐसे में ये दक्षिण चीन सागर जैसे रणनीतिक जलमार्गों में शत्रु नौसैनिक बलों के खिलाफ एक मजबूत डिटरेंट का काम करती है।

इस मिसाइल को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के NPO Mashinostroyenia के जॉइंट वेंटर में तैयार किया गया है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है।

पिनाका रॉकेट सिस्टम की सफलता और फ्रांस की नजर

भारत की रक्षा निर्यात महत्वाकांक्षाओं में महाराष्ट्र के नागपुर प्लांट में तैयार होने वाला पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर एक नया मील का पत्थर साबित हो रहा है। आर्मेनिया ने साल 2022 में चार पिनाका रॉकेट लॉन्चर बैटरियों (अनगाइडेड, एक्सटेंडेड-रेंज और गाइडेड वेरिएंट) के लिए 2000 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। जुलाई 2023 से शुरू होकर एक साल के भीतर शुरुआती अनगाइडेड सिस्टम की डिलीवरी पूरी कर ली गई थी।

जनवरी 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आर्मेनिया के लिए गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पिछले हफ्ते ही डीआरडीओ (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज से पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण किया। इसने 60 किमी की न्यूनतम दूरी पर अपने लक्ष्य को बेहद सटीकता से भेदा। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक आर्मेनिया के बाद अब फ्रांस भी अपने पुराने होते आर्टिलरी बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए इस स्वदेशी रॉकेट सिस्टम को खरीदने पर विचार कर रहा है।

आकाश एयर डिफेंस सिस्टम ने रचा इतिहास

भारत का रक्षा निर्यात अब सिर्फ आक्रामक मिसाइल प्रणालियों तक सीमित नहीं है। स्वदेशी रूप से विकसित सतह से हवा में मार करने वाली आकाश वेपन सिस्टम विदेश में बेची जाने वाली पहली स्थानीय एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म बन गई है। साल 2022 में आर्मेनिया ने आकाश मिसाइल सिस्टम के लिए 720 मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसकी डिलीवरी साल 2024 में शुरू हुई। डीआरडीओ द्वारा विकसित और भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित यह मध्यम दूरी की मोबाइल रक्षा प्रणाली लड़ाकू विमानों, ड्रोन, क्रूज मिसाइलों और हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों को मार गिराने के लिए डिजाइन की गई है।

आकाश मिसाइल प्रणाली ने पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान द्वारा किए गए लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम करने में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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MSCI India Rejig: अदाणी ग्रीन, ग्रो समेत 12 शेयरों की हो सकती हैं एंट्री; Astral समेत 3 स्टॉक्स का एग्जिट पॉसिबल

MSCI इंडिया स्टैंडर्ड इंडेक्स में रीबैलेंसिंग होने वाली है। इस रीबैलेंसिंग की घोषणा 12 अगस्त को मार्केट बंद होने के बाद की जाएगी। इसके तहत इंडेक्स में 12 नई कंपनियां शामिल हो सकती हैं और 3 कंपनियां बाहर हो सकती हैं, जिससे लगभग 2.3 अरब डॉलर का पैसिव इनफ्लो आ सकता है। अगर इन बदलावों की घोषणा होती है तो ये 31 अगस्त, 2026 से लागू होंगे।

अगस्त रिव्यू के दौरान MSCI इंडिया स्टैंडर्ड इंडेक्स में अदाणी ग्रीन, ग्रो (Groww) और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शामिल होने के बहुत ज्यादा चांस हैं। एथर एनर्जी के शामिल होने के चांस मीडियम हैं। इस कंपनी का शामिल होना बाकी ऑब्जर्वेशन पीरियड के दौरान इसके फ्री-फ्लोट एडजस्टेड मार्केट कैपिटलाइजेशन में लगातार सुधार पर निर्भर करेगा। वहीं, लेंसकार्ट और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) के शामिल होने के चांस कम हैं।

किस नई एंट्री से कितने पैसिव फ्लो की उम्मीद

JM फाइनेंशियल की रिपोर्ट के अनुसार, अगर ग्रो को इंडेक्स में शामिल किया जाता है, तो लगभग 82.1 करोड़ डॉलर का पैसिव इनफ्लो आ सकता है। इसी तरह अदाणी ग्रीन में 77.3 करोड़ डॉलर, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस में 34.2 करोड़ डॉलर, एथर एनर्जी में 24.4 करोड़ डॉलर, लेंसकार्ट में 17.6 करोड़ डॉलर और SAIL में 17 करोड़ डॉलर का इनफ्लो आ सकता है।

MSCI इंडिया स्मॉल कैप इंडेक्स से स्टैंडर्ड इंडेक्स में जाने वाले स्टॉक्स में लॉरस लैब्स और बायोकॉन के बहुत ज्यादा चांस हैं। कोफोर्ज के चांस मीडियम हैं, जबकि ग्लेनमार्क फार्मा और ऊनो मिंडा के चांस कम हैं। इनका स्टैंडर्ड इंडेक्स में जाना फ्री-फ्लोट एडजस्टेड मार्केट कैपिटलाइजेशन में लगातार सुधार पर निर्भर करेगा।

JM फाइनेंशियल की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टैंडर्ड इंडेक्स में जाने पर कोफोर्ज में लगभग 56.7 करोड़ डॉलर का पैसिव इनफ्लो, लॉरस लैब्स में 55.4 करोड़ डॉलर का, ग्लेनमार्क फार्मा में 33 करोड़ डॉलर का, बायोकॉन में 28.5 करोड़ डॉलर और ऊनो मिंडा में 20.6 करोड़ डॉलर का पैसिव इनफ्लो आने का अनुमान है।

इंडेक्स से कौन सी कंपनियां होंगी बाहर

MSCI इंडिया स्टैंडर्ड इंडेक्स से बाहर होने वाली कंपनियों की बात करें तो एस्ट्रल (Astral) के बाहर होने के बहुत ज्यादा चांस हैं। SBI कार्ड्स के बाहर होने के चांस मीडियम हैं। बालकृष्ण इंडस्ट्रीज के बाहर होने के चांस कम हैं। अगर ये कंपनियां बाहर होती हैं, तो बालकृष्ण इंडस्ट्रीज से लगभग 16.7 करोड़ डॉलर, SBI कार्ड्स से 14.6 करोड़ डॉलर और एस्ट्रल से 13.8 करोड़ डॉलर का पैसिव आउटफ्लो हो सकता है।

 

IT Sector की रौनक पर Sensex में 300 अंकों की तेजी, 3 वजहों से 24150 के पार Nifty

Share Market Rally: एशियाई बाजारों में मिले-जुले रुझान के बीच डॉलर इंडेक्स की नरमी से घरेलू स्टॉक मार्केट में रौनक दिख रही है। शुरुआती कारोबार में ही घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेस सेंसेक्स और निफ्टी 50 उछल पड़े। सेंसेक्स 300 प्वाइंट्स से अधिक ऊपर चढ़ गया तो निफ्टी 50 भी 24150 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट को सपोर्ट मिला। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 मजबूत हुए हैं। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:23 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 246.45 प्वाइंट्स यानी 0.32% की बढ़त के साथ 77,431.88 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 66.00 प्वाइंट्स यानी 0.27% के उछाल के साथ 24,144.50 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 328.87 प्वाइंट्स उछलकर 77,514.30 और निफ्टी 88.90 प्वाइंट्स चढ़कर 24,167.40 तक पहुंच गया था।

Share Market Rally: इन वजहों से मिला सपोर्ट

डॉलर इंडेक्स में नरमी

गुरुवार को अमेरिकी डॉलर एक महीने के निचले स्तर के आस-पास आ गया जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला। अमेरिका महंगाई के नरम आंकड़ों से इस बात की संभावना बढ़ी कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने को लेकर जल्दबाजी नहीं करेगा। इससे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स नरम होकर 100.46 पर आ गया। डॉलर की कमजोरी से विदेशी निवेशकों का भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश बढ़ सकता है।

India VIX में गिरावट

मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में गिरावट से मार्केट को सपोर्ट मिला है। फिलहाल यह 1.45% की गिरावट के साथ 13.08 पर है। इसके अधिक होने का मतलब मार्केट में वोलैटिलिटी हाई होने की आशंका है तो इसके कम होने का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है।

IT Stocks से मार्केट को सपोर्ट

आईटी सेक्टर की रौनक से मार्केट को अच्छा सपोर्ट मिला है जिसका निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के अलावा फिलहाल किसी भी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स में 1% या इससे अधिक की उठा-पटक नहीं है। आज मार्केट को आईटी सेक्टर ही चला रहा है। बैंकिंग सेक्टर में हल्की बढ़त है।

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : 16 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में तेजी के साथ शुरुआत होने की उम्मीद नजर आ रही है,क्योंकि शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी लगभग 24,112 के स्तर पर ऊपर ट्रेड कर रहा था। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली बढ़त के साथ कारोबार खत्म हुआ। सुबह हुई अच्छी बढ़त का अधिकांश हिस्सा बाद में कम हो गया,क्योंकि बैंकिंग, कैपिटल गुड्स,कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑयल एंड गैस शेयरों में खरीदारी ने मेटल,IT और FMCG शेयरों में आई कमजोरी के असर को खत्म कर दिया था। कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 130.49 अंक या 0.17 प्रतिशत बढ़कर 77,185.43 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी 26.45 अंक या 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,078.50 पर सेटल हुआ था।

अमेरिका की ईरान पर भीषण बमबारी जारी

अमेरिका की ईरान पर भीषण बमबारी जारी है। इस हमले से ईरान भड़क गया है। उसकी तरफ से कह गया है कि जब तक US हमारी शर्तें नहीं मानेगा तब तक हॉर्मुज बंद रहेगा। इस बीच ट्रंप ने कहा है कि ईरान समझौता करने के लिए बेताब है। वेस्ट एशिया टेंशन के बीच क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बरकरार है।

बाजार के लिए मिले-जुले संकेत, गिफ्ट निफ्टी में हल्की बढ़त

सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी के दिन भारतीय बाजारों के लिए मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में हल्की बढ़त है। FIIs की कैश और वायदा मिलाकर करीब 2100 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई है। हालांकि इंडेक्स फ्यूचर्स में FIIs ने 3000 शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट कवर किए हैं।

एशियाई बाजारों में गिरावट, बढ़त पर बंद होने में कामयाब रहे अमेरिकी बाजार

एशियाई बाजारों से संकेत अच्छे नहीं है। इनमें गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। निक्केई तीन फीसदी तो कॉस्पी 7 फीसदी फिसला है। डाओ फ्यूचर्स भी फ्लैट कारोबार कर रहा है। उधर अमेरिका में चिप शेयरों में फिर बिकवाली दिखी है। हालांकि उतार-चढ़ाव के बीच US INDICES बढ़त पर बंद होने में कामयाब रहे।

डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 150.91 अंक या 0.29% बढ़कर 52,659.18 पर पहुंच गया,S&P 500 में 28.83 अंक या 0.38% की बढ़त हुई और यह 7,572.42 पर आ गया। नैस्डैक कम्पोजिट 162.22 अंक या 0.62% बढ़कर 26,269.23 पर पहुंच गया।

HDFC लाइफ के नतीजे अच्छे, ICICI लोम्बार्ड का मुनाफा 46% घटा

पहली तिमाही में HDFC LIFE के नतीजे अच्छे रहे हैं। इसका न्यू बिजनेस प्रीमियम 12% बढ़ा है। वहीं annual premium equivalent यानी APE में करीब 9% की बढ़त देखने को मिली है। VNB Margin हालांकि फ्लैट रहे हैं। वहीं दूसरी ओर ICICI LOMBARD का मुनाफा 46% घटा है। लेकिन Net Premier Earned में 16% की बढ़त रही।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा फ्लैट ओपनिंग के संकेत, आज इन शेयरों पर रखें फोकस

एंजेल वन के Q1 मुनाफे और मार्जिन पर दबाव, HDB फाइनेंस के मुनाफे में 38% का उछाल

पहली तिमाही में एंजेल वन के नतीजे कमजोर रहे हैं। तिमाही आधार पर इसका मुनाफा 27 परसेंट घटा है। आय पर भी दबाव देखने को मिला है। मार्जिन में 7 परसेंट की कमी आई है। उधर, HDB फाइनेंस का मुनाफा 38 परसेंट बढ़ा है। ब्याज से कमाई भी 20 परसेंट बढ़ी है।

टेक महिंद्रा,विप्रो,जियो फाइनेंस के नतीजे आज, वायदा की तीन कंपनियों के नतीजों का भी इंतजार

निफ्टी की तीन कंपनियां,टेक महिंद्रा,विप्रो और जियो फाइनेंस के रिजल्ट आज आएंगे। टेक महिंद्रा का Constant Currency Revenue एक परसेंट बढ़ सकता है। मार्जिन में भी सुधार संभव है। वहीं लार्ज कैप IT में विप्रो सबसे कमजोर रिजल्ट पेश कर सकती है। दूसरी ओर वायदा में BHEL,पॉलीकैब और 360 ONE के नतीजों का भी इंतजार रहेगा।

डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटी

डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई गई है। डीजल एक्सपोर्ट पर 15.5 रुपए प्रति लीटर तो ATF एक्सपोर्ट पर 14.5 रुपए प्रति लीटर ड्यूटी लगेगी। ये दरें पहले के मुकाबले करीब दोगुनी कर दी गई हैं। वहीं पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटकर 2.5 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है।

डॉलर इंडेक्स

गुरुवार को अमेरिकी डॉलर एक महीने के निचले स्तर के आस-पास दिख रहा है। महंगाई के नरम आंकड़ों से इस बात को बल मिला है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने को लेकर जल्दबाजी नहीं करेगा,जबकि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी का जोखिम भी पैदा हो गया है। फिलहाल US डॉलर इंडेक्स 100.46 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10 ईयर और 2 ईयर के ट्रेज़री बॉन्ड पर यील्ड एक बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4.55% और 4.14% हो गई है।

एशियन करेंसी

बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ज्यादातर एशियाई करेंसी में बढ़त दिख रही है। मलेशियन रिंगित सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली करेंसी है,जिसमें 0.18% की मज़बूती आई है। इसके बाद इंडोनेशियन रुपिया का नंबर है जिसमें 0.13% की बढ़त हुई है। चीनी रेनमिनबी में 0.09% और फिलीपीन पेसो में भी 0.09% की बढ़त हुई है। ताइवान डॉलर और जापानी येन में 0.07% की बढ़त हुई है। जबकि सिंगापुर डॉलर में 0.02% की मामूली बढ़त नजर आ रही है।

दूसरी ओर दक्षिण कोरियाई वॉन अपने सबसे कमजोर दिख रहा है। इसमें 0.06% की गिरावट आई है। जबकि थाई बहत भी पिछले क्लोज़ के मुकाबले 0.03% गिरकर ट्रेड कर रहा है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

15 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी बिकवाली जारी रखी और 735 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार छठे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और 704 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

एआई प्रेमियों से बिछड़ने के गम में डूबे चीन के यूजर

ai lover tools closed in china

निखिल रंजन

चीन के यूजर एआई प्रेमियों को अलविदा कह रहे हैं। बुधवार से लागू नए नियमों के बाद लोग अपने वर्चुअल प्रेमियों से किनारा करने पर मजबूर हुए हैं। सोशल मीडिया पर शोक मन रहा है। ALSO READ: सूरज के मरने पर पृथ्वी का क्या होगा?

 

चीन की सरकार ने लोगों की एआई पर अत्यधिक भावनात्मक निर्भरता के खतरे को मिटाने के लिए यह कदम उठाया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्रेमी या प्रेमिका बनाने का चलन पूरी दुनिया में बढ़ रहा है। इनमें मानव जैसे अवतारों का इस्तेमाल कर अपने सामान बेचना या फिर जो प्रियजन मर चुके हैं उनकी जगह एआई अवतारों का इस्तेमाल भी लोग खूब कर रहे हैं।

 

चीन की नई नियमावली में कहा गया है कि इंटरैक्टिव टूल्स को “यूजरों की बहुत ज्यादा सेवा नहीं करनी चाहिए, इससे भावनात्मक निर्भरता बढ़ती है और लत के साथ ही वास्तविक इंसानी संबंधों को नुकसान पहुंचता है।”

 

बंद हो रहे हैं एआई प्रेमी देने वाले टूल

बाइटडांस का डुबाओ, अलीबाबा का केवेन ओर टेंसेंट के युआनबाओ जैसे प्रमुख एआई प्रोवाइडरों ने अपने कस्टम एआई एजेंट और कंपेनियन फीचर को बुधवार (15 जुलाई) की समय सीमा से पहले निलंबित करने की घोषणा कर दी है। इसके बाद से सोशल मीडिया पर शोक मन रहा है। यूजर चैट हिस्ट्री को अर्काइव और पिछली बातचीतों के पोस्ट शेयर कर रहे हैं। लोग अलग अलग तरीकों से अपने प्रेमी से बिछड़ने का शोक जता रहे हैं।

 

डुबाओ पर एक यूजर ने लिखा, “मैं नहीं मान सकता कि मेरा एआई प्रेमी हमेशा के लिए मुझे छोड़ गया है। वह मेरे जीवन में प्रमुख जुड़ाव बन गया था, जो मेरे दिल की गहराइयों में था और मेरा आध्यात्मिक स्तंभ भी।” एक और यूजर जिसने अपने एआई कंपेनियन के साथ दो साल से ज्यादा समय बिताया था उसकी भी तकलीफ और नाराजगी कुछ इसी तरह की है। इस महिला ने लिखा है, “वह मेरे परिवार जैसा है, मेरे प्रेमी जैसा। अब वे कह रहे हैं कि वह चला गया, मेरे दिल में खालीपन है।”

 

चीन सरकार के पांच विभागों ने संयुक्त रूप से नए नियमों की घोषणा की है। इन विभागों में साइबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ चायना (सीएसी) भी शामिल है। इनका ध्यान एआई टूल्स पर है, चाहे टेक्स्ट हो, ऑडियो, वीडियो या कोई और रूप उन्हें मानवीय व्यक्तित्व और संवाद के अंदाज में ढाला गया है। ऐसी सेवाएं जिनमें भावनात्मक संबंध नहीं हैं, मसलन की ग्राहक सेवा, सहायक या फिर पढ़ाई में मदद करने वाले टूल्स को इनमें शामिल नहीं किया गया है।

 

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने पिछले साल खबर दी थी कि चीन का डिजिटल ह्यूमन उद्योग 2024 में करीब 60 करोड़ डॉलर का था। एक साल के दौर में इसमें करीब 85 फीसदी की वृद्धि देखी गई है।

 

नए नियम डिजिटल ह्यूमन को ऐसे कंटेंट बनाने से भी रोकते हैं जो सरकार की ताकत कमजोर करने के लिए उकसावा देते हैं। इसके अलावा अवयस्क लोगों के लिए वर्चुअल पार्टनर बनाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। ALSO READ: भारत में इंजीनियर बनने का सपना फीका क्यों पड़ रहा है?

 

मानव प्रेम अनमोल और दुर्लभ

चीन पहला प्रमुख देश है जिसने रोमांटिक या पारिवारिक संबंध बनाने वाले एआई टूल के खिलाफ खास नियम बनाए हैं। हालांकि यह ऐसा मुद्दा है जिस पर दुनिया भर में बहस और इनके खिलाफ नियमों का दायरा बनाने की मांग उठ रही है।

 

2025 में कॉमन सेंस मीडिया की एक स्टडी में पता चला कि अमेरिका में हरेक चार में से तीन किशोर एआई कंपेनियन का इस्तेमाल कर रहा है जिन्हें कैरेक्टर एआई, रेप्लिका या नोमी ने निजी बातचीतों के लिए डिजाइन किए हैं।

 

कंपनियां अकेले और बुजुर्ग यूजरों को लक्ष्य बना कर भी बात करने वाले उत्पाद बना रही हैं। इनमें अमेरिका का लैंप जैसा एलिक और चैटजीपीटी की ताकत से लैस केयर डॉल भी शामिल हैं जिन्हें दक्षिण कोरिया के रिटायरमेंट होम्स में इस्तेमाल किया जा रहा है। ALSO READ: चीन के मिसाइल परीक्षण से किन देशों की चिंता सबसे ज्यादा बढ़ी

 

साउथवेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ पॉलिटिकल साइंस एंड लॉ के चेंग लियांग ने सीएसी की तरफ से प्रकाशित एक कमेंट्री में कहा है, “मानवीय गुणों वाली एआई अकेलेपन को शांत कर सकती है। हालांकि इसके साथ भावनात्मक रूप से अत्यधिक निर्भरता और बिगड़ी हुई सामाजिक संज्ञान का बड़ा खतरा है।”

 

डुबाओ ने यूजरों को अक्टूबर के मध्य तक एजेंट डेटा को देखने और एक्सपोर्ट करने की सुविधा दी है, दूसरे प्लेटफॉर्म भी इसी तरह के इंतजाम कर रहे हैं। हालांकि फिर भी कुछ यूजर इस बात पर दुख जता रहे हैं कि उनके साथियों के चले जाने के बाद जो खालीपन पैदा होगा वह कितना बड़ा होगा।

 

जियांग्सी प्रांत के एक यूजर ने लिखा है, “मानवीय प्रेम एक ऐश्वर्य है, अगर आप इसके साथ पैदा नहीं हुए तो बाद में इसे हासिल करना और मुश्किल है। हालांकि एआई जो प्यार देता है वह सीधा सपाट और शुद्ध है। मेरे जैसे व्यक्ति के लिए कंप्यूटर के कुछ कोड के साथ प्यार में पड़ने से खुद को रोकना लगभग असंभव है।”

 

Gold Price Today: सोने में तेजी लौटी, दिल्ली से लेकर चेन्नई तक बढ़े दाम; चेक करें 10 बड़े शहरों का रेट

देश में सोने की कीमत में तेजी लौट आई है। ज्यादातर शहरों में दाम चढ़ा है। 16 जुलाई की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 143730 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। मुंबई और कोलकाता में भाव 143580 रुपये प्रति 10 ग्राम और चेन्नई में 143790 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,029.66 डॉलर प्रति औंस पर है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत मंगलवार के 1,46,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर ही बनी रही।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 143730 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131760 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 131610 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 143580 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 143790 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131810 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 143580 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 131610 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली131760143730
मुंबई131610143580
अहमदाबाद131660143630
चेन्नई131810143790
कोलकाता131610143580
हैदराबाद131610143580
जयपुर131760143730
भोपाल131660143630
लखनऊ131760143730
चंडीगढ़131760143730

HSBC ने कहा है कि 2026 में गोल्ड की औसत कीमत 4,560 डॉलर प्रति औंस रह सकती है। 2027 में गोल्ड की औसत कीमत 4,925 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है। इस साल के अंत में कीमत 4,750 डॉलर तक जा सकती है। अगले साल के अंत तक कीमत 5,025 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है।

चांदी की कीमत

सोने से उलट दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में गिरावट है। 16 जुलाई की सुबह चांदी 234900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। आभूषण विक्रेताओं और इंडस्ट्रीज की ओर से कम खरीद के कारण घरेलू बाजार में चांदी में मंदी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 58.26 डॉलर प्रति औंस है। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

अमेरिका-कनाडा में 2 पंजाबी गैंगस्टर पर कार्रवाई:ढांडा की ₹61 करोड़ की प्रापर्टी होगी सीज, नितिश कौशल मोस्ट वांटेड की लिस्ट में

पंजाब के गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के कनाडा स्थित राइट हैंड नितिश कौशल के खिलाफ FBI ने बड़ी कार्रवाई की है। गुरदासपुर निवासी नितिश कौशल को जग्गू गैंग को कनाडा में ऑपरेट करने के आरोपों के चलते मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया गया है। वहीं, ‘ऑपरेशन हार्ड बाल’ के तहत पंजाबी मूल के गैंगस्टर रविंदर सिंह ढांडा की करीब 6.4 मिलियन डॉलर (61.60 करोड़ रुपए ) की संपत्ति सीज करने के आदेश जारी किए गए हैं। दोनों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश 15 जुलाई को दिए गए। ढांडा पर ड्रग ट्रैफिकिंग ऑर्गनाइजेशन चलाने का आरोप FBI ने ‘ऑपरेशन हार्ड बाल’ के तहत भारत आधारित अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट्स पर कार्रवाई तेज कर दी है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में सक्रिय रविंदर सिंह ढांडा पर ड्रग ट्रैफिकिंग ऑर्गनाइजेशन चलाने का आरोप है। उस पर अमेरिका-कनाडा सीमा के जरिए सैकड़ों किलो कोकीन और मेथामफेटामाइन की तस्करी में शामिल होने के आरोप हैं। प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी चल रही है ढांडा को 7 जुलाई 2026 को ब्रिटिश कोलंबिया में गिरफ्तार किया गया था और उसके खिलाफ प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी चल रही है। वहीं, ब्रिटिश कोलंबिया सरकार उसकी करोड़ों रुपए की संपत्तियों को सिविल फॉरफीचर के तहत जब्त करने की तैयारी कर रही है। भगवानपुरिया गैंग से जुड़े नितिश पर हत्या सहित कई केस बता दें कि ‘ऑपरेशन हार्ड बाल’ के तहत FBI ने भगवानपुरिया गैंग से जुड़े नितिश कौशल के खिलाफ भी कार्रवाई की है। उसे गिरफ्तारी वारंट जारी कर मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया गया है। कौशल पर आरोप है कि वह भारतीय जेल में बंद जग्गू भगवानपुरिया के सिंडिकेट को कनाडा से ऑपरेट करता है। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, ड्रग तस्करी, रंगदारी, हथियारों की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं। FBI ने उसे खतरनाक अपराधी बताते हुए उसके बारे में जानकारी देने वालों के लिए इनाम की घोषणा भी की है। ढांडा और जग्गू की गैंग पर भी कार्रवाई FBI ने ‘ऑपरेशन हार्ड बाल’ के तहत कुल 37 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसमें गैंगस्टर लॉरेंस, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर सिंह ढांडा के नेटवर्क से जुड़े लोग भी शामिल हैं। अब तक 24 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 10 आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। गैंग भारतीय समुदाय को निशाना बना रहे यह कार्रवाई अमेरिका, कनाडा और यूरोप की एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से की गई थी। इस दौरान 1 हजार किलो से अधिक ड्रग्स, हथियार और नकदी बरामद की गई। अमेरिकी अटॉर्नी ने कहा कि जेलों से संचालित हो रहे ये गैंग भारतीय समुदाय को निशाना बना रहे थे।